ONGC Chairman Race: रंजीत रथ समेत 7 नाम शॉर्टलिस्ट, इस हफ्ते हो सकता है इंटरव्यू

ONGC Chairman Race: सरकारी तेल और गैस कंपनी ONGC के नए चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर की तलाश तेज हो गई है। मौजूदा CMD अरुण कुमार सिंह का कार्यकाल 7 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। इससे पहले सरकार ने नए प्रमुख के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी है।

18 अगस्त को 18 उम्मीदवारों की स्क्रीनिंग हुई थी। इसके बाद 7 नाम शॉर्टलिस्ट किए गए हैं। इनका इस हफ्ते सर्च-कम-सेलेक्शन कमेटी के सामने दूसरे दौर का इंटरव्यू हो सकता है।

रंजीत रथ भी दौड़ में

शॉर्टलिस्ट उम्मीदवारों में Oil India के CMD रंजीत रथ भी शामिल हैं। 54 साल के रथ को मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वह दूसरी बार ONGC के शीर्ष पद के लिए कोशिश कर रहे हैं।

पिछले साल भी उनका नाम शॉर्टलिस्ट हुआ था। तब सरकार ने अरुण कुमार सिंह का कार्यकाल एक साल बढ़ा दिया था।

कौन-कौन शॉर्टलिस्ट हुआ?

रंजीत रथ के अलावा ONGC Videsh के MD राजर्षि गुप्ता, ONGC के टेक्नोलॉजी और फील्ड सर्विसेज डायरेक्टर विक्रम सक्सेना और स्ट्रैटेजी एवं कॉरपोरेट अफेयर्स डायरेक्टर सत्यम कुमार दौड़ में हैं।

इनके अलावा OVL के ऑपरेशंस डायरेक्टर दुलाल हलदर, MRPL के डायरेक्टर (फाइनेंस) देवेंद्र कुमार और Indian Oil के डायरेक्टर (मार्केटिंग) एसपी श्रीवास्तव भी शॉर्टलिस्ट हुए हैं।

उम्र सीमा को लेकर सवाल

सरकार ने इस बार ONGC CMD पद के लिए उम्र सीमा में एक बार छूट दी है। 7 दिसंबर 2026 को 59 साल की उम्र पूरी नहीं करने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकते थे।

हालांकि, राजर्षि गुप्ता के शॉर्टलिस्ट होने पर सवाल उठ रहे हैं। 7 दिसंबर को उनकी उम्र करीब 59 साल 5 महीने होगी। अगर उनकी नियुक्ति होती है, तो कुछ उम्मीदवार चयन प्रक्रिया को चुनौती दे सकते हैं।

दिसंबर में खत्म होगा सिंह का कार्यकाल

अरुण कुमार सिंह दिसंबर 2022 में ONGC के CMD बने थे। पिछले साल उन्हें एक साल का एक्सटेंशन मिला था। अब उनका कार्यकाल 7 दिसंबर को खत्म होगा।

नए चेयरमैन के सामने ONGC के तेल और गैस उत्पादन को बढ़ाने की चुनौती होगी। साथ ही नई ऊर्जा, पेट्रोकेमिकल्स और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में भी कंपनी को आगे बढ़ाना होगा।

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Imran Khan: मोहसिन नकवी पर अब इमरान खान के बेटों ने कर दिया बड़ा खुलासा, इंटरव्यू विवाद में आया नया मोड़

इमरान खान के बेटों सुलेमान और कासिम ने मोहसिन नकवी और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) के रवैये पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि इमरान पर दिए गए एक इंटरव्यू को लेकर इंग्लैंड दौरा छोड़ने की धमकी देना PCB का गलत कदम था। बताया जा रहा कि PCB स्काई स्पोर्ट्स के लिए माइकल एथरटन द्वारा सुलेमान और कासिम के साथ किए गए इमरान खान से जुड़े इंटरव्यू से नाराज था। ये इंटरव्यू दूसरे टेस्ट के दौरान एयर हुआ था।

बता दें हाल ही में पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत को लेकर चिंता बढ़ गई है। करीब तीन साल से जेल में बंद इमरान की मेडिकल जांच को लेकर उनके बेटे और कई पूर्व क्रिकेट कप्तानों ने सवाल उठाए हैं।

दौरा रद्द करने की दी थी धमकी

इमरान खान से जुड़ा इंटरव्यू शुरुआत में थोड़ी देर से एयर (प्रसारित) हुआ, लेकिन इसे रद्द नहीं किया गया। इसके बाद पाकिस्तान की टीम ने मैच में हिस्सा लिया।इसके बाद पाकिस्तान और इंग्लैंड की कई रिपोर्ट्स में PCB की ओर से दौरा छोड़ने की धमकी दिए जाने की बात सामने आई। हालांकि, आधिकारिक तौर पर उस समय के कोच सरफराज अहमद और कप्तान बाबर आजम ने ऐसी किसी धमकी या संभावित बहिष्कार की जानकारी होने से इनकार किया था।

इतने बेवकूफ होंगे नकवी

कासिम ने द टेलीग्राफ से कहा, “उन्होंने पूरी तरह बेवकूफी की।” सुलेमान ने कहा, “मुझे किसी तरह के जवाब की उम्मीद थी।लेकिन मुझे नहीं लगा था कि वे इतने बेवकूफ होंगे कि मैदान पर न उतरने की धमकी देंगे। PCB को ये तय करने का अधिकार नहीं होना चाहिए कि इंग्लैंड में 22 साल से रह रहे किसी पुराने पाकिस्तानी खिलाड़ी का इंटरव्यू लिया जाए या नहीं। यह मामला राजनीति से जुड़ा नहीं था, बल्कि इंसानी हालात और उनकी सेहत से जुड़ा था।”

इमरान की सेहत को लेकर हैं चितिंत

इमरान खान करीब तीन साल से जेल में हैं और उनके बेटे लगातार उनकी सेहत को लेकर चिंता जाहिर करते रहे हैं। पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी और इमरान खान के बीच राजनीतिक मतभेद भी हैं। इसी बीच भारत के पूर्व क्रिकेट कप्तान सुनील गावस्कर और कपिल देव समेत 21 पूर्व अंतरराष्ट्रीय कप्तानों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से इमरान को बेहतर इलाज और जरूरी मेडिकल सुविधाएं देने की अपील की है।

कब उठी थी मांग

21 पूर्व अंतरराष्ट्रीय कप्तानों ने ये अपील तक किया जब कोर्ट के आदेश पर इमरान खान को मेडिकल जांच के लिए कुछ समय के लिए सरकारी अस्पताल ले जाया गया था। जांच के बाद उन्हें वापस अदियाला जेल भेज दिया गया। पूर्व क्रिकेट कप्तानों ने मांग की कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाए गए मेडिकल बोर्ड को खान की जांच की पूरी आजादी दी जाए और उनके निजी डॉक्टरों को भी इसमें शामिल किया जाए। यह मांग खास तौर पर उन खबरों के बाद उठी है, जिनमें इमरान खान की दाहिनी आंख की रोशनी जाने की बात कही गई है।

अमेरिकी मंत्री ने कनाडा को ‘छोटा भौंकने वाला कुत्ता’ बताया:बोले- पीएम कार्नी ने बेहतरीन ट्रेड डील ठुकराई; अगस्त में हुई बातचीत नाकाम रही थी

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर कनाडा के रवैये की आलोचना की है। उन्होंने कनाडा की तुलना बड़े कुत्ते को परेशान करने वाले छोटे भौंकने वाले कुत्ते से की। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा कि कनाडा के साथ व्यापार युद्ध का अमेरिका की कीमतों पर असर बहुत मामूली होगा। उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर बेहतरीन व्यापार समझौते को ठुकराने का आरोप भी लगाया। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच 19-21 अगस्त में हुए तीन दिन की ट्रेड बातचीत के बाद डील नहीं हो पाई थी। पीएम मार्क कार्नी का कहना था कि अमेरिका ने आखिरी समय पर डील की शर्तें बदल दी थी। वहीं अमेरिका ने कहा कि उन्होंने अच्छा ऑफर दिया था। खबर लगातर अपडेट हो रही है…

अमेरिकी मंत्री ने कनाडा को ‘छोटा भौंकने वाला कुत्ता’ बताया:बोले- पीएम कार्नी ने बेहतरीन ट्रेड डील ठुकराई; अगस्त में बातचीत नाकाम हुई थी

अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते को लेकर कनाडा के रवैये की आलोचना की है। उन्होंने कनाडा की तुलना बड़े कुत्ते को परेशान करने वाले छोटे भौंकने वाले कुत्ते से की। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बेसेंट ने कहा कि कनाडा के साथ व्यापार युद्ध का अमेरिका की कीमतों पर असर बहुत मामूली होगा। उन्होंने कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी पर बेहतरीन व्यापार समझौते को ठुकराने का आरोप भी लगाया। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच 19-21 अगस्त में हुए तीन दिन की ट्रेड बातचीत के बाद डील नहीं हो पाई थी। पीएम मार्क कार्नी का कहना था कि अमेरिका ने आखिरी समय पर डील की शर्तें बदल दी थी। वहीं अमेरिका ने कहा कि उन्होंने अच्छा ऑफर दिया था। फॉक्स न्यूज ने जब बेसेंट से पूछा कि अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे व्यापार विवाद का आगे क्या होगा, तो बेसेंट ने कहा, बेंसेट बोले- कनाडाई टैरिफ का अमेरिका पर कोई असर नहीं अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी ने ट्रेड वॉर से अमेरिका में कीमतें बढ़ने की आशंका को लेकर भी चिंता नहीं जताई। बेसेंट ने कहा, “मैं चाहता हूं कि कोई मुझे यह दिखाए कि कनाडा के टैरिफ का अमेरिकी कीमतों पर कोई महत्वपूर्ण सांख्यिकीय असर है। मैं इस मुद्दे पर किसी से भी बहस करने के लिए तैयार हूं।” बेसेंट का यह बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले कुछ समय से उनका और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का एक-दूसरे पर बयान देने का सिलसिला जारी है। इससे पहले भी बेसेंट ने कार्नी पर आरोप लगाया था कि वे कनाडा की अर्थव्यवस्था के लिए क्या बेहतर है, इसके बजाय अपनी राजनीतिक छवि की ज्यादा चिंता करते हैं। ट्रम्प ने कनाडा पर 50% टैरिफ लगाया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता न होने के बाद 22 अगस्त से कनाडा के 20 अरब डॉलर (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया था। यह टैरिफ कनाडा के अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान का करीब 5% है। पीएम कार्नी ने इस टैरिफ को कनाडा पर हमला बताया। उन्होंने अमेरिका के साथ बढ़ते ट्रेड विवाद को लेकर कहा, “हम जंग में हैं, क्योंकि हम पर हमला हुआ है।” अमेरिका ने कनाडा पर इतना ज्यादा टैरिफ क्यों लगाया? अमेरिका का कहना है कि कनाडा की कुछ व्यापार नीतियां अमेरिकी कंपनियों के लिए नुकसानदेह हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इनमें ऑटोमोबाइल, डेयरी प्रोडक्ट्स, शराब और लकड़ी का कारोबार प्रमुख हैं। अमेरिका ने पहले नए टैरिफ 20 अगस्त से लगाने का ऐलान किया था। हालांकि, डेडलाइन से ठीक पहले दोनों देशों ने बातचीत शुरू करने का फैसला किया। इसके बाद ट्रम्प ने टैरिफ लागू करने की समयसीमा 3 दिन बढ़ा दी, ताकि समझौते की कोशिश की जा सके। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कई मुद्दों पर सहमति बन गई थी, लेकिन कुछ अहम मामलों में दोनों देश एक-दूसरे की शर्तों पर सहमत नहीं हो सके। 1. अमेरिकी कारों के साथ भेदभाव का आरोप 2. कनाडा का अपने डेयरी मार्केट को प्रोटेक्शन 3. अमेरिकी शराब की बिक्री पर प्रतिबंध कनाडा के अमेरिका पर जवाबी टैरिफ अमेरिका के 50% टैरिफ के बाद कनाडा ने भी जवाबी कार्रवाई का ऐलान कर दिया। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि कनाडा अमेरिका के टैरिफ का डॉलर-फॉर-डॉलर जवाब देगा। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार तनाव और बढ़ गया। अमेरिका और कनाडा एक-दूसरे के सबसे बड़े व्यापारिक साझेदारों में शामिल हैं, इसलिए टैरिफ बढ़ने का असर दोनों देशों के कारोबार और सामान की कीमतों पर पड़ने का अनुमान है। अमेरिका-कनाडा के बीच 3 अन्य बड़े विवाद 1. कनाडा को 51वां राज्य कहना ट्रम्प कई बार कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनाने की बात कह चुके हैं। ट्रम्प का कहना है कि अमेरिका व्यापार के मामले में कनाडा को अरबों डॉलर का फायदा पहुंचाता है। यदि कनाडा अमेरिका का हिस्सा बन जाता है, तो यह व्यापारिक असमानता और टैरिफ से जुड़े विवाद अपने आप खत्म हो जाएंगे। 2. ट्रूडो को कनाडा का गवर्नर कहना ट्रम्प ने कई बार कनाडा के तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को तंजिया लहजे में ‘गवर्नर’ कहकर संबोधित किया था। कनाडाई नेताओं और जनता ने इसे अपनी संप्रभुता का अपमान माना। 3. सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ और फेंटानिल तस्करी अमेरिका और कनाडा के बीच बढ़ती सीमा सुरक्षा चिंताएं भी बड़े विवाद का कारण बनी हैं। ट्रम्प प्रशासन का आरोप रहा है कि कनाडा की उत्तरी सीमा से अवैध प्रवासियों की घुसपैठ और खतरनाक नशीली दवाओं (विशेषकर फेंटानिल) की तस्करी अमेरिका में बढ़ रही है। अमेरिका ने कनाडा से अपनी सीमाओं पर सख्त निगरानी और सख्त आव्रजन नीतियां लागू करने की मांग की है। —————- यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने कनाडा से जुड़ी झील का नाम बदला:’लेक ओंटारियो’ अब ‘लेक अमेरिका’ कहलाएगा; कनाडा बोला- हम पुराना नाम ही बोलेंगे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को लेक ओंटारियो का नाम बदलकर ‘लेक अमेरिका’ करने के आदेश पर साइन किया। पूरी खबर पढ़ें…

Bipasha Basu: जब लोगों ने बिपासा बासु को ‘जिस्म’ न करने की दी थी सलाह, एक्ट्रेस बोलीं- ‘सब कह रहे थे मेरा करियर खत्म हो जाएगा’

Bipasha Basu: जब बिपाशा बसु ने ‘जिस्म’ (2003) फिल्म करने का फैसला किया तो उन्हें पता था कि वह एक रिस्क ले रही हैं। हाल ही में एक इंटरव्यू में एक्ट्रेस ने बताया कि उस समय इंडस्ट्री के कई लोगों ने उन्हें यह फिल्म न करने की सलाह दी थी। उन्हें चिंता थी कि फिल्म के बोल्ड सीन और विषय उनके करियर को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हालांकि, बिपाशा उनकी बात से सहमत नहीं थीं और उन्होंने फिर भी फिल्म में काम करने का फैसला किया। बता दें कि उन्होंने अमित सक्सेना की डायरेक्ट की गई इरोटिक थ्रिलर फिल्म ‘जिस्म’ में जॉन अब्राहम के साथ काम किया था।

बिपाशा बसु से कहा गया था कि अगर उन्होंने ‘जिस्म’ में काम किया तो उनका करियर ‘खत्म’ हो जाएगा। Elle India के साथ बातचीत में, बिपाशा ने उस समय को याद किया जब फ़िल्म इंडस्ट्री के लोगों ने उन्हें ‘जिस्म’ फ़िल्म न करने की सलाह दी थी। उन्होंने कहा, “इंडस्ट्री में हर किसी ने मुझसे कहा, ‘यह फ़िल्म मत करो।’ उन्होंने कहा कि अगर मैंने ऐसी फ़िल्म की जिसमें थोड़ा भी इरोटिका (कामुकता) है, तो मेरा करियर खत्म हो जाएगा।”

हालांकि, बिपाशा के लिए ‘जिस्म’ बस एक एडल्ट लव स्टोरी थी और उन्हें इसमें कोई दिक्कत नहीं थी। उन्होंने कहा, “और मेरा सोचना था कि मैं एक एडल्ट हूं। यह एक एडल्ट लव स्टोरी है। इसे एक एडल्ट फ़िल्म के तौर पर बनाया गया है। यह बच्चों के लिए नहीं है।” उन्होंने बताया कि उन्हें अच्छी तरह पता था कि वह किस तरह की फ़िल्म साइन कर रही हैं।

उन्हें सोनिया का किरदार और उस रोल के ज़रिए अलग-अलग शेड्स (पहलू) को एक्सप्लोर करने का मौका भी पसंद आया। उन्होंने कहा, “मुझे उस फ़िल्म में सोनिया के शेड्स बहुत पसंद आए और मुझे बस इतना पता था कि मुझे यह फ़िल्म करनी ही है।”

2003 में रिलीज़ हुई यह इरोटिक थ्रिलर बिपाशा के शुरुआती करियर के एक अहम मोड़ पर आई थी। वह ‘अजनबी’ और ‘राज़’ जैसी फ़िल्मों से अपनी पहचान बना चुकी थीं। अमित सक्सेना की डायरेक्ट की हुई और महेश भट्ट की लिखी इस फ़िल्म ‘जिस्म’ में बिपाशा ने सोनिया खन्ना का रोल निभाया था। सोनिया कबीर लाल (जॉन अब्राहम, जिनकी यह पहली फ़िल्म थी) के साथ एक खतरनाक रिश्ते में फंसी होती है। गुलशन ग्रोवर ने उसके अमीर पति रोहित खन्ना का रोल निभाया था। इस फ़िल्म को पूजा भट्ट और सुजीत कुमार सिंह ने प्रोड्यूस किया था।

रिस्क का फ़ायदा मिला

तमाम चिंताओं के बावजूद, ‘जिस्म’ ने बिपाशा का करियर खत्म नहीं किया। बल्कि, इसके उलट हुआ। Box Office India के मुताबिक, यह फ़िल्म हिट साबित हुई। भारत में इसकी नेट कमाई 8.14 करोड़ रुपये और दुनिया भर में ग्रॉस कमाई लगभग 13.41 करोड़ रुपये रही।

Shreya Ghoshal: श्रेया घोषाल ने बॉलीवुड की ‘पुरुष-प्रधान’ म्यूजिक इंडस्ट्री पर सवाल उठाए, बोलीं- यह Patriarchal और जेंडर बेस्ड मामला है

Shreya Ghoshal: बॉलीवुड के कुछ सबसे बड़े हिट गानों में ऐसे बोल भी रहे हैं, जिन पर महिलाओं को आपत्ति हो सकती है। श्रेया घोषाल का कहना है कि उन्होंने पहले भी ऐसे गाने करने से मना किया है, भले ही वे बाद में बहुत लोकप्रिय हुए हों। इस मशहूर प्लेबैक सिंगर के लिए, यह मामला कुछ आपत्तिजनक लाइनों से कहीं बड़ा है, क्योंकि यह उस म्यूजिक इंडस्ट्री की ओर इशारा करता है, जिसे वह आज भी “पुरुष-प्रधान” मानती हैं।

‘द मेल फेमिनिस्ट पॉडकास्ट’ के साथ एक इंटरव्यू में, श्रेया घोषाल से उन गानों को मना करने के बारे में पूछा गया जिनके बोल आपत्तिजनक थे। सिंगर ने कहा, “गाने के बोल तो एक बात है। इसके अलावा कंपोज़िशन और गाने का अंदाज़ भी मायने रखता है। कुछ ऐसे लोकप्रिय गाने थे जो बहुत सफल रहे, लेकिन मैंने उन्हें गाने से मना कर दिया।

अच्छी बात यह है कि अब ऐसे गाने काफी कम हो गए हैं। एक समय के बाद, फिल्मों में गाने ऐसे हो गए कि महिला सिंगर्स को सिर्फ़ उसी तरह के गाने दिए जाने लगे। बाकी गाने पुरुषों के होते थे, और कुछ रोमांटिक डुएट होते थे।”

उन्होंने आगे कहा, “तो हमें यह देखना होगा कि यह सब कहां से शुरू हो रहा है। यह समस्या गायिकाओं, अभिनेत्रियों और इस इंडस्ट्री से जुड़े हर व्यक्ति के लिए है। यह थोड़ा पितृसत्तात्मक और जेंडर-आधारित मामला है। लेकिन अच्छी बात यह है कि अब इंडिपेंडेंट म्यूज़िक की वजह से इसमें बदलाव आ रहा है। फिर भी, मुझे लगता है कि यह बहुत ज़्यादा पुरुष-प्रधान है। मैंने पहले भी इस बारे में खुलकर बात की है, और मुझे कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि इसे किस नज़रिए से देखा जाता है – अच्छा या बुरा।”

वहीं, 2025 में लिली सिंह से बातचीत के दौरान, श्रेया ने माना था कि उन्होंने अपने करियर में कुछ बोल्ड गाने गाए हैं, जिनमें ‘चिकनी चमेली’ भी शामिल है। हालांकि, उन्होंने कहा कि आज वह ऐसे गाने नहीं गाएंगी। श्रेया ने कहा था, “सेंसुअल या सेक्सी होने और पूरी तरह से ऑब्जेक्टिफ़ाई होने या आम तौर पर महिलाओं को ऑब्जेक्टिफ़ाई करने के बीच एक बहुत बारीक फ़र्क होता है।

समय के साथ मैं ज़्यादा जागरूक इसलिए हुई हूं क्योंकि मैं छोटी बच्चियों को इन गानों का मतलब समझे बिना गाते हुए देखती हूं। वे बस इन गानों पर डांस करती हैं और मेरे पास आकर कहती हैं, ‘ओह, हमें आपका गाना बहुत पसंद है! क्या हम आपके लिए इसे गा सकते हैं?’ और मुझे बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है। पांच या छह साल की छोटी बच्ची जब ऐसे बोल गाती है तो यह सही नहीं लगता।”

अमेरिकी राजदूत बोले- भारत-अमेरिका रिश्तों से दूसरे देश जलते हैं:PM मोदी उन नेताओं में सबसे ऊपर, जिनसे ट्रम्प मिलना चाहते हैं

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों से कई दूसरे देश ‘जलते’ हैं। गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त मानते हैं और दिसंबर में होने वाले G20 समिट के दौरान जिन नेताओं से वह मिलना चाहते हैं, उनमें मोदी का नाम सबसे ऊपर होगा। G20 में मोदी-ट्रम्प की अलग मुलाकात संभव सर्जियो गोर ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रम्प और मोदी के बीच अच्छे व्यक्तिगत रिश्ते हैं। ऐसे में दिसंबर में G20 समिट के लिए मोदी के फ्लोरिडा पहुंचने पर दोनों नेताओं की अलग से मुलाकात भी हो सकती है। हालांकि, मोदी और ट्रम्प के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गोर ने ट्रम्प के 2027 में भारत दौरे की संभावना के भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि ट्रम्प 2020 में अपनी भारत यात्रा को अब भी याद करते हैं। अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, जब भी ट्रम्प भारत की बात करते हैं तो वह यहां के लोगों से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने रिश्तों को याद करते हैं। गोर ने कहा कि अगला साल आने में ज्यादा समय नहीं है। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के भारत दौरे की कोई तारीख या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बताया। ट्रेड डील पर बोले- समझौते के काफी करीब भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर गोर ने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद डील से जुड़े मुद्दों पर दोबारा काम किया जा रहा है। उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में दोनों देश समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। गोर ने कहा कि इतने बड़े व्यापार समझौते में समय लगना सामान्य है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े व्यापारिक समझौतों में कई साल लग सकते हैं। 240 अरब डॉलर का व्यापार, 500 अरब डॉलर का लक्ष्य गोर के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच अभी करीब 240 अरब डॉलर का व्यापार है। दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है। उन्होंने कहा कि ट्रेड डील से दोनों देशों को आर्थिक फायदा हो सकता है। अमेरिका एक मजबूत और स्थिर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है। गोर के बयान से साफ है कि भारत-अमेरिका के रिश्तों में व्यापार के साथ दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी भी अहम है। ————————– यह भी पढ़ें….. पीएम मोदी ने मेलोनी को बधाई दी: सबसे लंबे समय तक इटली की प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

SBI Scholarship 2026: स्टूडेंट्स को SBI दे रहा ₹15 लाख तक की स्कॉलरशिप! 19 सितंबर तक है मौका, जानें पूरी डिटेल्स

SBI Asha Scholarship 2026-27: अगर आप या आपके घर में कोई स्टूडेंट स्कूल, कॉलेज, IIT, IIM, मेडिकल या विदेश में पढ़ाई कर रहा है और पढ़ाई का खर्च आड़े आ रहा है, तो देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक की यह स्कीम आपके बड़े काम आ सकती है। एसबीआई फाउंडेशन ने ‘एसबीआई प्लेटिनम जुबली आशा स्कॉलरशिप 2026-27’ के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है।

क्या है इस स्कीम में?

एसबीआई की इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि से आने वाले मेधावी छात्रों को ₹15,000 से लेकर ₹15 लाख सालाना तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। इसके लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह से निःशुल्क और ऑनलाइन है। आधिकारिक पोर्टल के अनुसार, 2026-27 सत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन की लास्ट डेट बढ़ाकर 19 सितंबर 2026 कर दी गई है।

किस कैटेगरी में मिलेगी कितनी स्कॉलरशिप?

एसबीआई आशा स्कॉलरशिप अलग-अलग शैक्षणिक स्तर के हिसाब से दी जा रही है:

  • कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्र: ₹15,000 सालाना।
  • अंडरग्रेजुएट (UG) छात्र: ₹75,000 तक।
  • पोस्टग्रेजुएट (PG) छात्र: ₹1.5 लाख तक।
  • MBBS (मेडिकल) छात्र: ₹2 लाख तक।
  • IITs (इंजीनियरिंग) छात्र: ₹2 लाख तक।
  • IIMs (MBA/PGDM) छात्र: ₹5 लाख तक।
  • विदेश में पढ़ाई करने वाले : ₹15 लाख तक।

कौन कर सकता है अप्लाई?

स्कॉलरशिप पाने के लिए एसबीआई फाउंडेशन ने कुछ शैक्षणिक और फैमिली इनकम की शर्तें तय की हैं:

कक्षा 9 से 12वीं के लिए: पिछली कक्षा में कम से कम 75% अंक या 7.5 CGPA होना अनिवार्य है। SC/ST छात्रों के लिए न्यूनतम अंक 65% और दिव्यांग छात्रों (PwBD) के लिए 60% तय किए गए हैं। पारिवारिक आय सीमा ₹3 लाख सालाना से अधिक नहीं होनी चाहिए।

ग्रेजुएशन और पोस्टग्रेजुएशन (UG/PG): UG छात्रों के लिए पारिवारिक आय सीमा ₹6 लाख सालाना है। कॉलेज/संस्थान NIRF ओवरऑल रैंकिंग की टॉप 300 सूची में या NAAC ‘A’ ग्रेड प्राप्त होना चाहिए।

MBBS: AIIMS या NIRF टॉप 50 मेडिकल कॉलेज में एडमिशन होना चाहिए। साथ ही NEET स्कोरकार्ड अनिवार्य है।

IIT: देश के 23 IITs में से किसी एक में पढ़ाई और वैध JEE Advanced स्कोरकार्ड।

IIM: देश के 22 IIMs में अध्ययनरत छात्र और वैध CAT स्कोरकार्ड (आय सीमा व शैक्षणिक नियम लागू)।

विदेश में उच्च शिक्षा: QS टॉप 200 यूनिवर्सिटीज में पढ़ाई कर रहे या एडमिशन ऑफर लेटर पाने वाले भारतीय छात्र पात्र हैं। पारिवारिक आय ₹6 लाख सालाना से कम होनी चाहिए। वैध GRE, GMAT, MCAT, LNAT या LSAT स्कोरकार्ड होना अनिवार्य है।

आवेदन कैसे करें और क्या-क्या डॉक्यूमेंट्स चाहिए?

पोर्टल पर जाएं: आधिकारिक SBI Asha Scholarship पोर्टल पर जाकर अपना अकाउंट बनाएं।

कैटेगरी चुनें: अपनी योग्यता के अनुसार सही स्कॉलरशिप कैटेगरी का चयन करें और फॉर्म भरें।

डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें: पिछली शैक्षणिक मार्कशीट, पहचान पत्र (Aadhaar/Govt ID), आय प्रमाण पत्र, बैंक पासबुक डिटेल्स, एडमिशन/बोनाफाइड सर्टिफिकेट और फीस रसीद, प्रवेश परीक्षा स्कोरकार्ड (JEE/NEET/CAT/GRE/GMAT आदि), कास्ट सर्टिफिकेट या दिव्यांग प्रमाण पत्र (अगर लागू हो)।

ध्यान दें: एक बार फॉर्म सबमिट होने के बाद इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया जा सकेगा। शॉर्टलिस्ट किए गए छात्रों का टेलीफोनिक इंटरव्यू और डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बाद फाइनल सिलेक्शन होगा।

Bank of India Recruitment 2026: बैंक ऑफ इंडिया ने 205 ऑफिसर पदों पर भर्ती के लिए जारी किया नोटिफिकेशन, जानें कब से शुरू होगी आवेदन प्रक्रिया

Bank of India Recruitment 2026: सार्वजनिक क्षेत्र के प्रमुख बैंक ने 205 ऑफिसर पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी की है। यह बैंक ऑफ इंडिया (BOI) है, जो स्केल 4 तक अलग-अलग स्ट्रीम में ऑफिसर पोस्ट के लिए भर्ती प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है। इच्छुक और योग्य उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट bankofindia.bank.in पर अपने एप्लीकेशन जमा कर सकते हैं।

आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 आवेदन प्रक्रिया की शुरुआत 10 सितंबर से होगी और 25 सितंबर, 2026 को खत्म होगा। उम्र, शैक्षिक योग्यता और काम का अनुभव तय करने की कट-ऑफ डेट 1 अगस्त, 2026 है।

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 चयन प्रक्रिया

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 के तहत उम्मीदवार का चयन ऑनलाइन परीक्षा और/या पर्सनल इंटरव्यू के जरिए किया जाएगा, जो आवेदकों और योग्य उम्मीदवारों की संख्या पर निर्भर करेगा।

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026: एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया की स्क्रूटनी

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवारों को अपनी योग्यता का समर्थन करने वाले डॉक्यूमेंट अपलोड करने होंगे, जिसमें संबंधित पेशेवर अनुभव का प्रमाणपत्र, जरूरी सर्टिफिकेशन और शैक्षिक योग्यता शामिल हैं। पंजीकरण के समय अपलोड किए गए डॉक्यूमेंट्स के आधार पर आवेदन को आगे की चयन प्रक्रिया के लिए शॉर्टलिस्ट किया जाएगा, जिसमें शामिल हैं:

संबंधित पेशेवर अनुभव

जरूरी सर्टिफिकेट

शैक्षिक योग्यता

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 नोटिफिकेशन में कहा गया है कि आवेदकों को सिर्फ रजिस्ट्रेशन के समय योग्यता मानक के समर्थन में अपलोड किए गए डॉक्यूमेंट्स के आधार पर शॉर्टलिस्ट या रिजेक्ट किया जाएगा। बाद में डॉक्यूमेंट्स जमा करने के लिए कोई और पूछताछ या अपील पर विचार नहीं किया जाएगा।

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026 ऑनलाइन परीक्षा

ऑनलाइन परीक्षा 100 मिनट की होगी। इसमें 25 अंकों की अंग्रेजी भाषा परीक्षा और 100 अंकों की पद से संबंधित पेशवेर ज्ञान परीक्षा शामिल होगी। इंग्लिश लैंग्वेज के टेस्ट को छोड़कर, सभी टेस्ट इंग्लिश और हिंदी में बाइलिंगुअल होंगे। इंग्लिश लैंग्वेज का टेस्ट क्वालिफाइंग होगा, और मेरिट लिस्ट बनाते समय इस हिस्से में मिले अंकों पर विचार नहीं किया जाएगा।

जनरल और EWS उम्मीदवारों के लिए इंग्लिश लैंग्वेज के टेस्ट और प्रोफेशनल नॉलेज टेस्ट में कम से कम 35% अंक प्राप्त करना जरूरी होगा। SC, ST, OBC और PwBD कैटेगरी के कैंडिडेट, जो अपनी-अपनी कैटेगरी के लिए रिजर्व वैकेंसी के लिए अप्लाई कर रहे हैं, उन्हें क्वालिफ़ाइंग मार्क्स में 5 परसेंट पॉइंट की छूट मिलेगी। कैंडिडेट को हर टेस्ट में न्यूनतम क्वालिफाइंग मार्क्स लाने होंगे।

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026: गलत जवाबों के लिए पेनल्टी

ऑब्जेक्टिव टेस्ट में हर सवाल का गलत जवाब देने पर एक-चौथाई अंक काट लिया जाएगा। बिना जवाब वाले सवालों के लिए कोई मार्क्स नहीं काटे जाएंगे।

बैंक ऑफ इंडिया भर्ती 2026: इंटरव्यू

ऑनलाइन परीक्षा में मिले अंकों के आधार पर एक मेरिट लिस्ट तैयार की जाएगी, जिसमें सिर्फ प्रोफेशनल नॉलेज टेस्ट में मिले मार्क्स ही माने जाएंगे। मेरिट लिस्ट अपनी-अपनी कैटेगरी – SC, ST, OBC, EWS, और जनरल के लिए घटते क्रम में तैयार की जाएगी। ऑनलाइन टेस्ट में मिनिमम क्वालिफाइंग मार्क्स और मेरिट लिस्ट में अच्छी रैंक लाने वाले उम्मीदवारों को पर्सनल इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा।

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Taapsee Pannu: ‘ऐसी फिल्में करने से पहले रिटायर हो जाऊंगी’, तापसी पन्नू ने कसा कियारा आडवाणी की ‘टॉक्सिक’ पर तंज?

Taapsee Pannu: हाल ही में एक इंटरव्यू में तापसी पन्नू ने यश और कियारा आडवाणी की बड़ी फिल्म ‘टॉक्सिक’ पर इशारों-इशारों में तंज कसा। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ महीनों में रिलीज हुई “ऐसी फिल्में” करने के बजाय वह रिटायर होना पसंद करेंगी। हालांकि तापसी ने किसी फ़िल्म या एक्टर का नाम नहीं लिया, लेकिन यूजर्स का मानना ​​है कि उनकी बात ‘टॉक्सिक’ के बारे में थी।

सुचिन मेहरोत्रा ​​के साथ बातचीत में तापसी ने कहा कि वह खुद को “खुशनसीब” मानती हैं कि उन्होंने अपना करियर एक दशक पहले शुरू किया था, जब हिंदी की मेनस्ट्रीम फ़िल्में अलग तरह की होती थीं और “एक ही तरह” की नहीं होती थीं। उन्होंने कहा, “अगर आज के समय में सिर्फ़ इसी तरह की फ़िल्में बन रही होतीं, तो मुझ जैसे इंसान का करियर शायद बन ही नहीं पाता।”

‘गंधारी’ फ़िल्म की एक्ट्रेस ने बताया कि हाल ही में अपने परिवार के साथ पिछले कुछ महीनों में रिलीज़ हुई कुछ फ़िल्में देखते हुए उन्होंने इस बारे में बात की थी। तापसी ने साफ़ किया कि एक एक्टर के तौर पर वह आजकल बन रही इस तरह की फ़िल्मों का हिस्सा नहीं बनना चाहतीं।

एक्ट्रेस ने कहा, “मैंने सोचा कि क्या अब मेरे रिटायर होने का समय आ गया है।”तापसी ने साफ़ किया कि वह समझती हैं कि ऐसी फ़िल्मों के लिए दर्शक होते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह खुद ऐसी फ़िल्में करना चाहेंगी। मुझे अपना काम पसंद है, लेकिन इतना भी नहीं कि मैं आंख बंद करके कुछ भी करूं। मैं अपने काम से इतना अंधा प्यार नहीं करती कि वैसी फ़िल्में करती रहूं।”

अपने फ़िल्मी सफ़र पर बात करते हुए तापसी ने कहा कि वह ऐसी फ़िल्मों की लिस्ट बनाना चाहती हैं जो समय की कसौटी पर खरी उतरें। पन्नू ने कहा, “और मेरा पक्का मानना ​​है कि एक फ़िल्मोग्राफ़ी होती है, है ना? समय बदलेगा, लेकिन फ़िल्मोग्राफ़ी नहीं बदलेगी।” तापसी ने आगे कहा कि वह चाहती हैं कि सालों बाद जब वह अपने काम को देखें, तो उन्हें अपने फैसलों पर शर्मिंदगी महसूस न हो। उन्होंने कहा, “आज से 10 साल बाद, शायद जॉनर बदल जाए, जैसा कि मैंने कहा, लेकिन मेरी फ़िल्मोग्राफ़ी वैसी ही रहेगी।”

इंटरनेट का रिएक्शन

जैसे ही यह क्लिप वायरल हुई, इंटरनेट पर लोगों ने कमेंट करना शुरू कर दिया। लोगों का कहना था कि तापसी ने कियारा आडवाणी की फिल्म ‘Toxic’ पर तंज कसा है। एक यूज़र ने कहा, “असल में तापसी पन्नू ने अपने करियर की शुरुआत में ही वे सभी फिल्में कर ली थीं। इसलिए अब उनके पास देने के लिए कुछ खास नहीं बचा है। अब रोना बंद करो @taapsee, कियारा आडवाणी का करियर बहुत शानदार है।”

एक और कमेंट में लिखा था, “कियारा ने तो कम से कम फिल्म में काम किया… आपकी तो OTT पर ‘हसीन दिलरुबा’ आई थी… जो दिखाना था, आपने दिखा दिया।” एक और कमेंट में कहा गया, “तो उनसे कहिए कि रिटायर हो जाएं और अगर वह ‘अपनी ज़िंदगी, अपने नियम’ वाली बात करती हैं, तो यही बात दूसरी अभिनेत्रियों पर भी लागू होती है।”

‘Toxic: A Fairy Tale for Grown-ups’ को KVN प्रोडक्शंस और मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स के तहत वेंकट के. नारायण और यश ने प्रोड्यूस किया है। कन्नड़ और अंग्रेज़ी में लिखी और शूट की गई इस फिल्म के हिंदी, तेलुगु, तमिल और मलयालम डब वर्जन भी रिलीज हुए हैं। गीतू मोहनदास की डायरेक्ट की गई इस फिल्म में नयनतारा, हुमा कुरैशी, कियारा आडवाणी, तारा सुतारिया और रुक्मिणी वसंत जैसे शानदार कलाकार हैं। फिल्म को मिले-जुले रिव्यू मिले। फिल्म ने अब तक उतनी कमाई नहीं की है जितनी उम्मीद की जा रही थी।