SML का भी आएगा IPO! अगले 2 से 3 साल में लिस्ट होने पर कर रही विचार

एग्री इनपुट्स बनाने वाली SML Ltd अगले 2 से 3 साल में शेयर बाजार में लिस्ट होने पर विचार कर रही है। कंपनी का उद्देश्य नई केमिकल एंटिटीज (NCE) के विकास के लिए आवश्यक पूंजी जुटाना है। कंपनी का पुराना नाम सल्फर इंडिया लिमिटेड था। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एक इंटरव्यू में SML के मैनेजिंग डायरेक्टर बिमल शाह ने कहा कि लिस्टिंग को लेकर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अभी इसका आकलन किया जा रहा है। कंपनी को अगले एक-दो साल में इस दिशा में स्थिति और स्पष्ट होने की उम्मीद है।

SML उन चुनिंदा भारतीय कंपनियों में शामिल है, जो नई केमिकल एंटिटीज के विकास पर काम कर रही हैं। शाह ने कहा कि कंपनी पिछले करीब 3 वर्षों से NCEs पर काम कर रही है और यह उसके कारोबार का एक महत्वपूर्ण फोकस एरिया बन चुका है। कंपनी का एक नया मॉलिक्यूल जल्द आने वाला है। हालांकि, ऐसे उत्पादों के विकास में बड़े निवेश की जरूरत होती है। SML का अनुमान है कि एक NCE को बाजार में लाने में करीब 7-8 करोड़ डॉलर तक खर्च हो सकते हैं। अभी तक कंपनी ने अपने रिसर्च एंड डेवलपमेंट वर्क का खर्च खुद उठाया है।

SML के पास करीब 450-470 करोड़ रुपये की नकदी

SML के पास करीब 450-470 करोड़ रुपये की नकदी है और कंपनी लगभग कर्ज-मुक्त स्थिति में है। मैनेजमेंट इस रकम का इस्तेमाल भविष्य में अधिग्रहण, रेगुलेटरी एसेट्स या रणनीतिक साझेदारियों के साथ NCE प्रोग्राम में कर सकता है। शाह ने कहा कि कंपनी ने सालों से अपने बही-खाते को मजबूत रखा है और जमा पूंजी का इस्तेमाल सही अवसर मिलने पर किया जाएगा।

कंपनी अपने पारंपरिक सल्फर फर्टिलाइजर कारोबार से आगे बढ़ते हुए फसल पोषण, फसल संरक्षण और जैविक उत्पादों पर भी ध्यान दे रही है। शाह के अनुसार, अगले 3 सालों में इन 3 क्षेत्रों में से फसल पोषण (Crop Nutrition) भारत में और वैश्विक स्तर पर कंपनी का सबसे तेजी से बढ़ने वाला कारोबार हो सकता है। कंपनी भारत के साथ-साथ वैश्विक बाजार में भी संतुलित और पोषक तत्वों के अधिक प्रभावी इस्तेमाल वाले उत्पादों को बढ़ावा दे रही है।

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कंपनी ने घटाया रेवेन्यू टारगेट

SML ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना रेवेन्यू टारगेट घटाकर करीब 1,600 करोड़ रुपये कर दिया है। इसके पीछे कमजोर मानसून, अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ और भू-राजनीतिक तनाव के कारण परिवहन में आ रही बाधाएं हैं। इससे पहले कंपनी ने 1,800 करोड़ रुपये के रेवेन्यू का लक्ष्य रखा था। हालांकि, नया रेवेन्यू टारगेट पिछले वित्त वर्ष के करीब 1,200-1,300 करोड़ रुपये के कारोबार से अधिक है। कंपनी ने अपने उत्पादों की कीमतों में करीब 15-20 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, जिससे रेवेन्यू बढ़ने की उम्मीद है।

कंपनी का अंतरराष्ट्रीय कारोबार 80 से अधिक देशों में फैला हुआ है। पिछले वित्त वर्ष में इससे करीब 600-700 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला था। इस वित्त वर्ष कंपनी को अंतरराष्ट्रीय कारोबार से 700-800 करोड़ रुपये और अगले 2 वर्षों में करीब 1,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल होने की उम्मीद है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

OpenAI IPO: पहले सेफ्टी, फिर आईपीओ; इस साल नहीं लिस्ट होगी ChatGPT, खुद Sam Altman ने किया ऐलान

OpenAI IPO: चैटजीपीटी (ChatGPT) की पैरेंट कंपनी ओपनएआई का आईपीओ इस साल 2026 में भी नहीं आने वाला है। ये बातें खुद कंपनी के सीईओ सैम आल्टमैन (Sam Altman) ने कही है। फॉर्च्यून के साथ एक इंटरव्यू में सैम आल्टमैन ने कहा कि फिलहाल कंपनी का ध्यान एआई तकनीक से जुड़ी सुरक्षा से मसलों को सुलझाने पर है और ऐसे में इस साल कंपनी की शेयर मार्केट में लिस्ट होने की कोई योजना नहीं है। शनिवार को सामने आए इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि आईपीओ लाने के लिए यह गलत समय होगा और अगले साल से पहले यह होने वाला नहीं हैं।

OpenAI के सीईओ Sam Altman किस खतरे से कर रहे सेफ्टी की बात?

ओपनएआई के सीईओ सैम आल्टमैन का कहना है कि इस दशक के आखिरी तक सभी के मारे जाने का लगभग 10% रिस्क उठाना स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इस समय दुनिया एक नए दौर में एंट्री कर रही है और जैसा कि अब तक होता आया है, उसी तरह से इस दौर में भी अलग तरह से काम करना होगा ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पूरी मानवता को फायदा पहुंचाने वाला ऐसा काम किया जाए, लेकिन यह भी सुनिश्चित हो कि कोई भी इसके करीब का भी रिस्क न उठाए।

बता दें कि एआई से इंसानों के अस्तित्व के खत्म होने की चर्चा अब चर्चा का मुख्य विषय बन चुकी है। अभी हाल ही में एंथ्रॉपिक के एक रिसर्चर ने इससे जुड़ी चिंता जताते हुए इस्तीफा दिया तो और खलबली मच गई। रिसर्चर ने चिंता जताई कि एंथ्रॉपिक एआई को लेकर गैर-जिम्मेदाराना तरीके से काम कर रही थी और यह दशक के आखिरी तक सभी इंसानों को खत्म कर सकता है। एंथ्रॉपिक के एक मौजूदा एंप्लॉयी ने भी X (पूर्व नाम Twitter) पर एक पोस्ट में कहा कि अगले दशक तक इस तरह की स्थिति बनने की आशंका 10% से अधिक हो सकती है। ऐसे में इसे लेकर सैम आल्टमैन का कहना है कि इस बात को लेकर सभी को एक राय होना चाहिए कि ऐसा कोई भी कदम नहीं उठाना है जिससे एआई के हाथों इंसानों को अपना कंट्रोल देने का रिस्क हो जाए।

जून में दाखिल किया था का IPO का एप्लीकेशन

ओपएनएआई ने जून महीने में आईपीओ के लिए गोपनीय तरीके से एप्लीकेशन फाइल किया था। अब सामने आ रहा है कि कंपनी इस साल आईपीओ नहीं लाने वाली है लेकिन यह नहीं बताया कि यह शेयर मार्केट में कब लिस्ट होगी। वैसे एआई सेक्टर की एक और कंपनी एंथ्रॉपिक भी आईपीओ की तैयारी कर रही है और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह स्पेसएक्स (SpaceX) के रिकॉर्ड आईपीओ से भी बड़ा हो सकता है। स्पेसएक्स का $86 अरब का आईपीओ इस साल आया था।

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Haiwaan box office collection day 2: रिलीज के दूसरे दिन सिर्फ 5 करोड़ का आंकड़ा छू पाई अक्षय कुमार-सैफ अली खान की फिल्म

Haiwaan box office collection day 2: अक्षय कुमार और सैफ अली खान ‘टशन’ के बाद ‘हैवान’ में एक साथ स्क्रीन पर नजर आए। प्रियदर्शन की डायरेक्ट की गई यह फिल्म मलयालम फिल्म ‘ओप्पम’ का हिंदी रीमेक है। यह फिल्म अक्षय और सैफ को 17 साल बाद एक साथ लाती है। इससे पहले वे ‘मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी’, ‘आरजू’, ‘तू चोर मैं सिपाही’ और ‘कीमत’ जैसी फिल्मों में साथ काम कर चुके हैं।

‘हैवान’ बॉक्स ऑफिस अपडेट

‘हैवान’ ने ओपनिंग डे पर ₹3 करोड़ कमाए। सुबह के शो में ऑक्यूपेंसी लगभग 5% थी, दोपहर और शाम के शो में 12% से ज्यादा और रात में 18% से ज्यादा रही। फिल्म को ‘मिर्जापुर द मूवी’ से टक्कर मिली, जो पिछले हफ्ते ही थिएटर में रिलीज हुई थी।

Sacnilk के अपडेट के अनुसार, ‘हैवान’ ने दूसरे दिन ₹2.50 करोड़ कमाए, जो पिछले दिन की कमाई से ज्यादा नहीं थी। शनिवार को ‘हैवान’ की कुल ऑक्यूपेंसी 12.77% रही, जिसमें शाम के समय सबसे ज्यादा 16% ऑक्यूपेंसी देखी गई। ‘मिर्जापुर: द मूवी’, जो अब अपने दूसरे हफ्ते में है, ‘हैवान’ से बेहतर प्रदर्शन करने में कामयाब रही है। दो दिनों के बाद ‘हैवान’ का कुल इंडिया कलेक्शन ₹5.50 करोड़ हो गया है।

‘हैवान’ के बारे में

‘हैवान’ में सैफ अली खान एक अंधे व्यक्ति और अक्षय कुमार एक कातिल के रोल में हैं। इस साइकोलॉजिकल थ्रिलर में बोमन ईरानी, ​​श्रिया पिलगांवकर और सैयामी खेर भी अहम भूमिकाओं में हैं। बोमन पहले भी इस फिल्ममेकर के साथ काम कर चुके हैं, लेकिन उनका कहना है कि थ्रिलर फिल्म में उनके निर्देशन में काम करने से उनकी कला के बारे में उनकी समझ बदल गई।

एक्टर ने HT को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “मैंने उनके साथ दो फिल्मों में काम किया है। अब जब मैं उनकी फिल्में देखता हूं तो कैमरा वर्क और कट्स पर ध्यान देता हूं और मुझे एहसास होता है कि उन्हें यह पसंद नहीं है कि कैमरा या दर्शक एक जगह टिके रहें। वे खुद बोर हो जाते हैं, इसलिए दर्शकों को भी बोर नहीं होने देते। अब मुझे उनके काम करने का तरीका समझ में आने लगा है। उनकी फिल्ममेकिंग, ब्लॉकिंग और स्टेजिंग अनोखी और बहुत काइनेटिक (गतिशील) है।”

फिल्म में राजपाल यादव, शारिब हाशमी, राजेश शर्मा, मनोज जोशी और जिस्शु सेनगुप्ता भी हैं, जबकि मोहनलाल ने कैमियो किया है। यह दिवंगत असरानी की आखिरी स्क्रीन अपीयरेंस भी है।

BRICS डिनर- मलेशियाई पीएम ने किशोर कुमार का गाना गया:’ख्वाब हो तुम या…’ का VIDEO शेयर किया, गाने के पहले पूछा- गुरु, इजाजत है

मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने शनिवार को नई दिल्ली में BRICS समिट के डिनर के दौरान किशोर कुमार का मशहूर गाना ‘ख्वाब हो तुम या कोई हकीकत…’ और मुकेश का गीत दोस्त दोस्त ना रहा… गाना गाकर सबका ध्यान खींचा। अनवर ने किशोर कुमार के जिस गाने को अपनी आवाज दी, वह 1965 की फिल्म ‘तीन देवियां’ का है। इसे किशोर कुमार ने गाया था। संगीत एसडी बर्मन ने दिया था। गीत के बोल मजरूह सुल्तानपुरी ने लिखे थे। मुकेश का गाया दोस्त दोस्त न रहा गाना ‘संगम’ मूवी का है। इसका संगीत शंकर-जयकिशन ने दिया था। गीत के बोल शैलेंद्र ने लिखे थे। अनवर ने इस वीडियो को अपने X सोशल मीडिया अकाउंट पर शेयर भी किया। वीडियो करीब डेढ़ मिनट का है। इसमें वे पियानो की धुन पर एक दो स्टेंजा गाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो शेयर करते हुए उन्होंने लिखा- गुरु, थोड़ा सा गाने की इजाजत है? उनके गाने के 2 फोटो अनवर किशोर कुमार के फैन हैं, पहले भी यह गाना गुनगुना चुके मलेशिया के पीएम पहले भी किशोर कुमार के फैन होने की बात कह चुके हैं। उन्होंने 2024 में भारत में एक इंटरव्यू के दौरान भी यही गीत गुनगुनाया था। इसके अलावा, फरवरी 2026 में पीएम मोदी की मलेशिया यात्रा के दौरान उन्होंने एक आधिकारिक वीडियो मोंटाज साझा किया था। इसमें ‘कभी खुशी कभी गम’ का लोकप्रिय गाना ‘बोले चूड़ियां’ इस्तेमाल किया गया था। मलेशिया में 27 लाख लोग भारतीय मूल के, बॉलीवुड और तमिल मूवी लोकप्रिय डिप्टी पीएम भी रह चुके हैं अनवर अनवर इब्राहिम मलेशिया के 10वें प्रधानमंत्री हैं। उन्होंने 24 नवंबर 2022 को पदभार ग्रहण किया था। इससे पहले वे 1993 में मलेशिया के 7वें डिप्टी पीएम बने थे। 1998 में, अनवर को तत्कालीन प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद ने सभी सरकारी पदों से हटा दिया गया था। उन्हें अप्रैल 1999 में भ्रष्टाचार और समलैंगिकता के आरोपों में जेल भेज दिया गया था और 2004 में उनकी सजा पलटने के बाद रिहा कर दिया गया था। इसके बाद अनवर 2008 से 2015 तक विपक्ष के नेता रहे। 2022 के आम चुनावों में जीत के बाद प्रधानमंत्री बने। ————— ये खबरें भी पढ़ें… BRICS समिट- दिल्ली में मोदी की डिनर पार्टी:पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता; मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी पीएम मोदी ने शनिवार को भारत मंडपम में BRICS सदस्य देशों के नेताओं के लिए डिनर पार्टी को होस्ट किया। मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता और मिलेट्स का पुलाव रखा गया है। मिठाई में फ्रूट क्रीम विद जलेबी मिलेगी। पूरी खबर पढ़ें… मोदी–जिनपिंग बोले- मतभेद विवाद में न बदलें:आपसी संबंध लंबे चले; गलवान झड़प के बाद चीन से इम्पोर्ट दोगुना हुआ
पीएम मोदी ने दिल्ली में BRICS समिट से अलग चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से द्विपक्षीय बैठक की। यह मीटिंग करीब 50 मिनट चली। मोदी और जिनपिंग ने इस बात पर भी सहमति जताई कि मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए और संबंध लंबे चलने चाहिए। पूरी खबर पढ़ें…

Video: ‘कभी भी कूल बॉस मत बनो’, उद्यमी की सलाह वायरल; बताया कर्मचारियों को ज्यादा छूट देने का नुकसान

ऑफिस में हर कर्मचारी चाहता है कि उसका बॉस समझदार, सहज और दोस्ताना हो। लेकिन क्या बहुत ज्यादा ‘कूल’ बनना कभी बॉस के लिए ही परेशानी खड़ी कर सकता है? उद्यमी हेमंत वाधवानी के एक वायरल वीडियो ने इसी सवाल पर बहस छेड़ दी है। उन्होंने अपनी पुरानी नौकरी का अनुभव साझा करते हुए बताया कि कर्मचारियों के साथ जरूरत से ज्यादा दोस्ताना व्यवहार करने का उन्हें नुकसान उठाना पड़ा।

‘मैं बॉस बनकर रौब नहीं दिखाना चाहता था’

वाधवानी ने बताया कि वह अपने जूनियर कर्मचारियों को हमेशा अपने बराबर मानने की कोशिश करते थे। उन्हें यह पसंद नहीं था कि टीम के सदस्यों को बार-बार यह एहसास कराया जाए कि वह उनके सीनियर या बॉस हैं। उनका मानना था कि अगर ऑफिस का माहौल सहज रहेगा, तो कर्मचारी खुलकर बात करेंगे और काम भी बेहतर तरीके से होगा। इसलिए उन्होंने टीम के साथ दोस्ताना रिश्ता बनाए रखा और उन्हें काफी आजादी भी दी। लेकिन वक्त के साथ उन्हें लगा कि उनकी यही सोच उलटी पड़ने लगी।

जब भरोसा ही बनने लगा परेशानी की वजह

वाधवानी के मुताबिक, उन्होंने टीम के सदस्यों को जो भरोसा और आजादी दी, कुछ लोगों ने उसका फायदा उठाना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि कई मौकों पर कर्मचारियों ने उनके साथ मिली छूट का गलत इस्तेमाल किया और आखिरकार कुछ लोगों ने उन्हें ‘बैकस्टैब’ भी किया। यहीं से उन्हें महसूस हुआ कि बॉस और कर्मचारी के बीच दोस्ताना व्यवहार के साथ प्रोफेशनल सीमाएं होना भी बेहद जरूरी है।

‘Never, ever be a cool boss’

अपने वीडियो में वाधवानी ने काफी सीधे शब्दों में कहा, “Never, ever be a cool boss.” उनका कहना है कि मैनेजर को टीम के साथ अच्छा व्यवहार जरूर करना चाहिए, लेकिन उसे यह भी स्पष्ट रखना चाहिए कि किस हद तक व्यक्तिगत और पेशेवर रिश्ता आगे बढ़ सकता है। उनके अनुसार, बहुत ज्यादा लचीलापन देने से कभी-कभी कर्मचारी उस छूट को अपनी सुविधा के लिए इस्तेमाल करने लगते हैं। इसलिए शुरुआत से ही सीमाएं तय करना जरूरी है।

क्या अच्छा बॉस दोस्ताना नहीं हो सकता?

वाधवानी की बात सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंट गई। कुछ यूजर्स ने उनकी बात से सहमति जताई, जबकि कुछ का मानना था कि अच्छा लीडर बनने के लिए सख्त दूरी बनाना जरूरी नहीं है। एक यूजर ने कहा कि सही तरीका यह हो सकता है कि बॉस कर्मचारियों के साथ अच्छा और सहज व्यवहार करे, लेकिन जरूरत पड़ने पर उन्हें यह भी पता हो कि मैनेजर अपना रुख सख्त कर सकता है।

असली सवाल- डर या सम्मान?

वायरल वीडियो ने आधुनिक ऑफिस कल्चर को लेकर एक दिलचस्प सवाल खड़ा कर दिया है। क्या कर्मचारियों से काम करवाने के लिए बॉस का सख्त होना जरूरी है, या फिर भरोसे और सम्मान पर आधारित माहौल ज्यादा बेहतर होता है?

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

‘भारत में इंटरव्यू अमेरिका से ज्यादा कठिन, लेकिन सैलरी आधी’ टेक प्रोफेशनल का दावा, Reddit पोस्ट वायरल

‘भारत में इंटरव्यू अमेरिका से ज्यादा कठिन, लेकिन सैलरी आधी’ टेक प्रोफेशनल का दावा, Reddit पोस्ट वायरल

भारत में टेक सेक्टर की नौकरी हासिल करना कई युवाओं के लिए किसी परीक्षा से कम नहीं होता। खासकर बड़ी टेक कंपनियों के इंटरव्यू में मुश्किल coding questions और कई दौर की technical screening उम्मीदवारों की अच्छी-खासी तैयारी करवा देती है। अब Reddit पर एक टेक प्रोफेशनल की पोस्ट ने इसी मुद्दे पर नई बहस छेड़ दी है।

पोस्ट करने वाले यूजर का कहना है कि भारत में टेक जॉब इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में कहीं ज्यादा कठिन होते हैं, जबकि कई मामलों में मिलने वाली सैलरी काफी कम होती है। इस दावे के बाद Reddit पर टेक इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने अपने अनुभव साझा करने शुरू कर दिए।

‘भारत में इंटरव्यू ज्यादा मुश्किल

टेक प्रोफेशनल ने अपनी पोस्ट में लिखा कि भारत में होने वाले इंटरव्यू अमेरिका की तुलना में काफी कठिन हैं और इसके बदले मिलने वाला मुआवजा भी कम है। उसके मुताबिक अमेरिकी कंपनियां उम्मीदवार को परखते समय केवल coding skills पर निर्भर नहीं रहतीं। वहां practical experience, system design और behavioural skills को भी काफी महत्व दिया जाता है। इसके उलट भारत में कई कंपनियों के इंटरव्यू में कठिन algorithm और coding problems पर ज्यादा जोर दिया जाता है।

45 मिनट में दो Hard सवाल?

Reddit यूजर ने दावा किया कि भारत में कई कंपनियों के hiring process में उम्मीदवारों को कई coding rounds से गुजरना पड़ता है। उसने खास तौर पर दावा किया कि कुछ जगहों पर staff-level पदों के उम्मीदवारों से 45 मिनट में दो कठिन coding problems हल करने की उम्मीद की जाती है। यूजर के अनुसार, अमेरिका में senior candidates के लिए professional experience और system-design skills ज्यादा अहम हो सकती हैं, जबकि भारत में coding rounds का दबाव काफी ज्यादा दिखाई देता है।

क्या असली नौकरी और इंटरव्यू की तैयारी अलग-अलग चीजें हैं?

यही सवाल इस पूरी बहस के केंद्र में है। कई Reddit यूजर्स ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मुश्किल coding problems हल करने में माहिर होना और असल दुनिया में किसी product या system को बनाने की क्षमता दो अलग चीजें हैं। एक यूजर ने दावा किया कि उसने ऐसे भारतीय उम्मीदवारों को देखा है जो coding questions में शानदार प्रदर्शन करते थे, लेकिन अपने वास्तविक काम को समझाने या system design पर चर्चा करने में संघर्ष करते थे। वहीं कुछ विदेशी उम्मीदवार experience-based सवालों में ज्यादा सहज नजर आए।

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‘इंटरव्यू कभी-कभी इंटरव्यूअर का शो बन जाता है’

एक अन्य यूजर ने भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया की आलोचना करते हुए कहा कि कई बार इंटरव्यू उम्मीदवार की क्षमता परखने से ज्यादा इंटरव्यू लेने वाले की अपनी समझ और ‘स्मार्टनेस’ दिखाने का मंच बन जाता है। उसका कहना था कि भारत में कुछ इंटरव्यू जरूरत से ज्यादा कठिन और वास्तविक नौकरी की जिम्मेदारियों से दूर होते हैं। खासकर तब, जब इंटरव्यू में उम्मीदवार को सीमित समय में ऐसे सवाल दिए जाएं जिनका रोजमर्रा के काम से सीधा संबंध न हो।

कुछ लोगों ने कहा- ‘मुश्किल है तो खुद को अपस्किल करो’

हालांकि Reddit पर हर कोई भारतीय इंटरव्यू प्रक्रिया के खिलाफ नहीं था। कुछ यूजर्स ने तर्क दिया कि अगर कंपनियां कठिन सवाल पूछने के बावजूद पर्याप्त उम्मीदवार खोज पा रही हैं, तो इसका मतलब है कि बाजार उस मॉडल को स्वीकार कर रहा है। एक यूजर ने कहा कि उम्मीदवारों को शिकायत करने के बजाय अपनी skills बेहतर करने पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि आने वाले समय में hiring bar कम होने की संभावना नहीं है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

Grok से भारत के नियम पूछ रहा था आयरिश शख्स, वायरल हुई बातचीत तो Elon Musk ने भी दे दिया जवाब

UPSC EPFO APFC 2026: ईपीएफओ में एपीएफसी भर्ती के लिए अब इस तारीख तक कर सकते हैं आवेदन, आयोग ने बढ़ाई लास्ट डेट

UPSC EPFO APFC 2026: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने एम्प्लॉयी प्रॉविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) में असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC) भर्ती 2026 के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख बढ़ा दी है। इस भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवार अब 14 सितंबर 2026, शाम 6:00 बजे तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इससे कैंडिडेट्स को भर्ती प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कुछ और दिन मिल जाएंगे। इस भर्ती प्रक्रिया के जरिए ईपीएफओ में 80 एपीएफसी की भर्ती की जाएगी।

इससे पहले यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती 2026 के लिए आवेदन की आखिरी तारीख 11 सितंबर 2026 थी। पिछली डेडलाइन से चूक गए उम्मीदवारों के पास अब आवेदन करने का एक और मौका है। इस कदम से देश भर के उन हजारों कैंडिडेट्स को फायदा होने की उम्मीद है जो समय पर अपने फॉर्म नहीं भर पाए थे। आवेदकों को आखिरी समय तक इंतजार नहीं करना चाहिए और यूपीएससी वेबसाइट पर तकनीकी दिक्कतों से बचने के लिए जल्द से जल्द अप्लाई करना चाहिए। इच्छुक आवेदक आधिकारिक वेबसाइट upsconline.nic.in के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी 2026 हाइलाइट्स

जानकारी डिटेल्स

कंडक्टिंग बॉडी यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC)

पोस्ट का नाम असिस्टेंट प्रोविडेंट फंड कमिश्नर (APFC)

टोटल वैकेंसी 80

एप्लीकेशन शुरू होने की तारीख 22 अगस्त 2026

पहले की आखिरी तारीख 11 सितंबर 2026, शाम 6:00 बजे

बढ़ी हुई आखिरी तारीख 14 सितंबर 2026, शाम 6:00 बजे

आवेदन का तरीका ऑनलाइन (UPSC ORA पोर्टल)

ऑफिशियल वेबसाइट upsc.gov.in

आवेदन शुल्क ₹25 (UR/OBC/EWS पुरुष कैंडिडेट); SC/ST/PwBD/महिला कैंडिडेट्स के लिए छूट

चयन प्रक्रिया रिक्रूटमेंट टेस्ट (RT) जिसके बाद इंटरव्यू होगा

भर्ती परीक्षा की तारीख 20 दिसंबर 2026

यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी 2026 योग्ता मानदंड

शैक्षणिक योग्यता : यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी 2026 भर्ती प्रक्रियर में शामिल होने के इच्छुक आवेदक के पास किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी या इंस्टीट्यूशन से बैचलर डिग्री होनी चाहिए। डिग्री किसी भी विषय में हो सकती है।

उम्र सीमा : एपीएफसी पद के लिए ऊपरी उम्र सीमा UR/EWS कैंडिडेट्स के लिए 35 साल, OBC कैंडिडेट्स के लिए 38 साल और SC/ST कैंडिडेट्स के लिए 40 साल है। उम्र की गणना आवेदन जमा करने की आखिरी तारीख के हिसाब से की जाती है। सरकारी नियमों के अनुसार PwBD और दूसरी एलिजिबल कैटेगरी के लिए भी छूट लागू है।

राष्ट्रीयता : इन पदों पर भर्ती के इच्छुक उम्मीदवार का भारतीय नागरिक होना जरूरी है।

यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी भर्ती 2026 एप्लीकेशन फीस

एप्लीकेशन फीस कैटेगरी के हिसाब से अलग-अलग है। आवेदकों को फॉर्म शुरू करने से पहले पेमेंट डिटेल्स तैयार रखनी चाहिए।

UR/OBC/EWS पुरुष कैंडिडेट: ₹25

SC/ST/PwBD और सभी महिला कैंडिडेट: फीस से छूट

यूपीएससी ईपीएफओ एपीएफसी भी 2026 के लिए कैसे करें आवेदन

  • यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट upsconline.nic.in पर जाएं।
  • अगर पहले से नहीं किया है, तो वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) सिस्टम का इस्तेमाल करके रजिस्टर करें।
  • लॉग इन करें और UPSC EPFO APFC 2026 अप्लाई ऑनलाइन लिंक ढूंढें।
  • पर्सनल, एजुकेशनल और कैटेगरी की जानकारी ध्यान से भरें।
  • तय फॉर्मेट में फोटो, सिग्नेचर और ज़रूरी डॉक्यूमेंट अपलोड करें।
  • एप्लीकेशन फीस (अगर लागू हो) भरें और पेमेंट स्टेटस वेरिफाई करें।
  • फाइनल सबमिशन से पहले फॉर्म को अच्छी तरह से रिव्यू करें।
  • फॉर्म सबमिट करें और भविष्य के लिए एक कॉपी डाउनलोड/सेव करें।

UPSSSC Livestock Extension Officer: यूपी में पशुधन प्रसार अधिकारी के 1251 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन शुरू, 12वीं पास भी कर सकते हैं आवेदन

इजराइली PM के मेकअप पर ₹4 करोड़ खर्च:2023 जंग के दौरान 3 महीने में बालों पर ₹22 लाख लगे; हेयर स्टाइलिस्ट का नाम छिपाया

इजराइल में प्रधानमंत्री के बालों की स्टाइलिंग और मेकअप पर 2019 से अगस्त 2026 तक करीब 4.7 लाख डॉलर यानी लगभग 4 करोड़ रुपए खर्च हुए। इसका खुलासा सूचना के अधिकार के तहत मिले सरकारी रिकॉर्ड से हुआ है। दिसंबर 2025 में वकील यारा शलित ने PM ऑफिस से इस खर्च की जानकारी मांगी थी। इसके बाद अलग-अलग साल और महीनों में हुए खर्च का ब्योरा जारी किया गया। इस दौरान पिछले 7 साल में तीन प्रधानमंत्री रहे- बेंजामिन नेतन्याहू, नफ्ताली बेनेट और याइर लैपिड। रिकॉर्ड के मुताबिक, बाल और मेकअप पर हुए कुल खर्च का करीब 90% हिस्सा प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा पर हुआ। हालांकि, कई दस्तावेजों में उनके हेयर स्टाइलिस्ट और मेकअप आर्टिस्ट के नाम भी छिपा दिए गए। प्रधानमंत्री कार्यालय ने इसके लिए राज्य की सुरक्षा का हवाला दिया। 2023 में युद्ध शुरू होने के दौरान भी बाल-मेकअप पर खर्च 2025 में सबसे ज्यादा खर्च, विदेश यात्राओं में भी बिल बढ़ा 2025 में प्रधानमंत्री के बालों और मेकअप पर सबसे ज्यादा रकम खर्च हुई। इस साल कुल खर्च करीब 1.11 लाख डॉलर यानी लगभग 93 लाख रुपए रहा। विदेश यात्राओं के दौरान भी बालों और मेकअप पर बड़ी रकम खर्च हुई। फरवरी 2025 में नेतन्याहू की 4 दिन की वॉशिंगटन यात्रा के दौरान मेकअप आर्टिस्ट और हेयर स्टाइलिस्ट की सेवाओं पर करीब 13,500 डॉलर यानी 11 लाख रुपए खर्च हुए। यह विदेश यात्रा के दौरान इस मद में सबसे बड़ा खर्च था। यह यात्रा ट्रम्प से मुलाकात के लिए हुई थी। उस समय नेतन्याहू ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में व्हाइट हाउस जाने वाले पहले विदेशी नेता थे। जुलाई 2024 में नेतन्याहू की एक और वॉशिंगटन यात्रा के दौरान भी इन सेवाओं पर करीब 11,500 डॉलर यानी 9.6 लाख रुपए खर्च हुए थे। मेहमानों और कपड़ों पर भी नेतन्याहू का खर्च ज्यादा बाल और मेकअप के अलावा प्रधानमंत्री के आधिकारिक प्रतिनिधित्व से जुड़े खर्च की अलग मद भी है। इसमें कपड़ों और मेहमानों की मेजबानी जैसे खर्च शामिल हैं। इस मद में नेतन्याहू से जुड़े खर्च करीब 1.34 लाख डॉलर यानी 1.12 करोड़ रुपए रहे। नफ्ताली बेनेट के लिए यह रकम करीब 19,000 डॉलर यानी 16 लाख रुपए और याइर लैपिड के लिए करीब 2,600 डॉलर यानी 2.2 लाख रुपए थी। हालांकि, सरकार ने गहनों, कपड़ों और इमेज कंसल्टिंग से जुड़े खर्च का पूरा ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया। सूचना की स्वतंत्रता के लिए काम करने वाले संगठन की ओर से इन जानकारियों की भी मांग की गई थी। इस मामले में सबसे ज्यादा ध्यान इसलिए जा रहा है क्योंकि सरकारी रिकॉर्ड में प्रधानमंत्री के बालों की स्टाइलिंग और मेकअप पर अलग से हजारों डॉलर खर्च होने की जानकारी सामने आई है। खास तौर पर 2025 में यह खर्च 1 लाख डॉलर से ज्यादा रहा। खर्च का हिसाब-किताब 2019-अगस्त 2026: हेयर स्टाइलिंग और मेकअप पर करीब 4.7 लाख डॉलर नेतन्याहू और सारा: कुल हेयर-मेकअप खर्च का करीब 90% 2023: करीब 1.03 लाख डॉलर 2022: करीब 27,600 डॉलर 2025: करीब 1.11 लाख डॉलर, सबसे ज्यादा फरवरी 2025 वॉशिंगटन यात्रा: करीब 13,500 डॉलर जुलाई 2024 वॉशिंगटन यात्रा: करीब 11,500 डॉलर सितंबर-नवंबर 2023: बालों पर करीब 2,600 डॉलर, मेकअप पर 1,580 डॉलर अक्टूबर 2023: बालों की स्टाइलिंग पर करीब 810 डॉलर बालों पर खूब एक्सपेरिमेंट करते हैं नेतन्याहू नेतन्याहू के बालों का रंग बदलना कोई नई बात नहीं है। पिछले कई सालों से इजराइली मीडिया उनके बालों के अलग-अलग रंगों पर रिपोर्ट करता रहा है। कभी उनके बाल गहरे भूरे दिखे, तो कभी ग्रे, सफेद, हरे या बैंगनी रंग के शेड में नजर आए। 2017 में उनके बदलते हेयर कलर पर इतनी चर्चा हुई कि उन्होंने खुद इस पर मजाक किया था। उन्होंने कहा था कि ‘ब्राउन नया ग्रे है’। फिर कुछ हफ्तों में उनका पुराना ग्रे रंग वापस आ जाएगा। इसके कुछ साल बाद, 2021 में नेतन्याहू ने खुद अपने बालों के रंग का राज बताया। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वे ऐसा शैंपू इस्तेमाल करते हैं, जिससे बालों का रंग बदला जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि रंग को लेकर किए गए प्रयोगों के दौरान उनके बाल कभी हरे, कभी भूरे और कभी बैंगनी हो गए थे।

Hanuman Ansh: ‘हनुमान अंश’ के बाद स्टार सिंगर बने सुनील लोधी, फ्लाइट में फैंस की फरमाइश पर गाया भजन, वायरल हुआ वीडियो

Sunil Lodhi: फिल्म ‘हनुमान अंश’ की कहानी, कास्ट, भजन से लेकर हर छोटी चीज की दर्शक जमकर तारीफ कर रहे हैं। 2 करोड़ के बजट में तैयार हुई ये फिल्म 2026 की ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर बन गई है। इंडियन बॉक्स ऑफिस पर इसने 5 हफ्ते में 90 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया है। रिलीज के महीनेभर बाद भी सिनेमाघरों में इसके शो हाउसफुल चल रहे हैं। फिल्म की पॉपुलैरिटी के साथ-साथ इससे जुड़े कलाकार भी स्टार बन गए हैं। सोशल मीडिया पर ‘हनुमान अंश’ के सिंगर का एक लेटेस्ट वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह फ्लाइट में ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ भजन गाते नजर आ रहे हैं।

सुनील लोधी ने फ्लाइट में गाया भजन

वायरल हुए इस लेटेस्ट वीडियो में आप सुनील लोधी को एक फ्लाइट के अंदर देख सकते हैं। यात्रियों ने फिल्म के हिट भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ के गायक सुनील लोधी को जैसे ही देखा घेर लिया। फ्लाइट में अलग ही नजारा देखने को मिला। लोगों के उनसे रिक्वेस्ट की और उन्होंने जैसे ही गाना शुरू किया तो पूरी फ्लाइट का माहौल भक्तिमय नजर आया।

फ्लाइट में गूंजी ‘हनुमान अंश’ की धुन

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे वीडियो में सिंगर सुनील लोधी भोपाल से मुंबई की फ्लाइट में सवार हैं। जैसे ही वहां मौजूद यात्रियों ने उन्हें देखा तो उनसे भजन गाने के लिए कहने लगे। सुनील की आवाज सुनाते ही वहां लोगों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया। हर कोई हिट भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’ सुनकर खुश हो गया। ऐसे में सिंगर सुनील ने भी किसी को निराश नहीं किया और बिना आनाकानी किए गाना शुरू कर दिया। अब सोशल मीडिया पर यह खूबसूरत पल लोगों का दिल जीत रहा है।

लता मंगेशकर के गाने सुन सुनील लोधी ने सिखा संगीत

हाल ही में दूरदर्शन को सुनील ने इंटरव्यू दिया था। इसमें उन्होंने बताया कि उन्हें कभी कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं मिली है। न ही उनका कोई म्यूजिक टीचर रहा है। सुनील ने कहा कि लता मंगेशकर के गाने सुनने और फिर अपने गांव के कार्यक्रमों में भजन गानकर उन्होंने थोड़ा बहुत सीख लिया। संगीत उन्हें क्लासरूम में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में मिला है। बता दें कि हनुमान अंश फिल्म 11 सितंबर को विदेश में भी रिलीज हो चुकी है।

BRICS Summit 2026: ‘कमजोर कड़ी’ से ग्रोथ इंजन तक: 14 साल में कैसे बदली भारत की BRICS कहानी

BRICS Summit 2026: जब भारत ने 2012 में नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, तब देश की अर्थव्यवस्था आज के मुकाबले काफी अलग स्थिति में थी। उस समय BRICS समूह भी काफी नया था। इसकी शुरुआत BRIC के रूप में हुई थी, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे। साल 2010 में दक्षिण अफ्रीका के जुड़ने के बाद इसका नाम BRICS हो गया।

गौरतलब है कि भारत पहले से ही इस ऐसे समूह का हिस्सा था, जिसे 21वीं सदी की उभरती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधि माना जाता था। लेकिन उस समय यह सवाल भी उठ रहे थे कि क्या भारत वास्तव में इस उम्मीद पर खरा उतर पाएगा?

14 साल बाद, जब भारत 2026 में एक बार फिर BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, तो स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।

अब भारत ऐसा देश नहीं है, जो BRICS में अपनी जगह साबित करने की कोशिश कर रहा हो। बल्कि अब भारत को इस समूह की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक और BRICS की आर्थिक और रणनीतिक ताकत का एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।

2012 और 2026 के इन दोनों मौकों के बीच का अंतर यह समझने का अच्छा तरीका है कि इन 14 सालों में भारत कितना बदल गया है।

जब भारत BRICS की ‘कमजोर कड़ी’ था

2012 में सवाल यह नहीं था कि क्या भारत BRICS को आकार दे सकता है, बल्कि यह था कि क्या वह इस समूह का सबसे कमजोर सदस्य बनता जा रहा है।

क्या भारत सच में BRICS में अपनी जगह का हकदार था? क्या BRIC में “I” (इंडिया) की जगह इंडोनेशिया को ले लेना चाहिए था? क्या भारत इस समूह की सबसे कमजोर कड़ी था? ये सवाल उस समय के आर्थिक माहौल को दिखाते थे।

भारत की विकास दर तेजी से धीमी हो गई थी, महंगाई ज्यादा थी, रुपया दबाव में था और आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाने की सरकार की क्षमता को लेकर चिंताएं बढ़ रही थीं।

जून 2012 में, Standard & Poor’s (S&P) ने चेतावनी दी थी कि भारत अपनी इन्वेस्टमेंट-ग्रेड सॉवरेन रेटिंग खोने वाला पहला BRIC देश बन सकता है। इसके पीछे धीमी विकास दर और पॉलिसी बनाने में आ रही राजनीतिक रुकावटों का हवाला दिया गया था। उस समय भारत की रेटिंग BBB- थी, जो स्पेक्युलेटिव ग्रेड से बस एक पायदान ऊपर थी।

यह चेतावनी उस समय भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर फैली निराशा का एक अहम संकेत बन गई थी।

Goldman Sachs के अर्थशास्त्री Jim O’Neill, जिन्होंने BRIC (ब्रिक) शब्द गढ़ा था, भारत के वैल्यूएशन को लेकर भी बहुत उत्साहित नहीं थे। अगस्त 2012 के एक इंटरव्यू में, उन्होंने वैल्यूएशन के मामले में भारत को चार BRIC अर्थव्यवस्थाओं में सबसे कम आकर्षक बताया था; उन्होंने चीन को पहले स्थान पर रखा, जिसके बाद ब्राज़ील, रूस और फिर भारत का नंबर था।

उस समय भारत की व्यापक आर्थिक स्थिति भी उतनी ही मुश्किल थी। 2012-13 में विकास दर 5 प्रतिशत से नीचे गिर गई थी, जबकि महंगाई का स्तर ऊंचा बना रहा। भारत के बारे में धारणा बदलने लगी थी; अब उसे एक उभरती हुई आर्थिक महाशक्ति के बजाय ऐसी अर्थव्यवस्था के तौर पर देखा जाने लगा था जो पॉलिसी पैरालिसिस (नीतिगत गतिरोध), महंगाई और धीमी होती विकास दर से जूझ रही थी।

दूसरे शब्दों में कहें तो, भारत BRICS का हिस्सा तो था, लेकिन इस बात पर संदेह था कि क्या वह दूसरी उभरती हुई ताकतों के साथ कदम मिलाकर चल पाएगा।

2026 की ओर आगे बढ़ते हुए

आज स्थिति काफी अलग है।

भारत 2026 के ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में एक ऐसी अर्थव्यवस्था के साथ शामिल हो रहा है जिसने प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेज विकास दर बनाए रखी है।

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी (GDP) में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई। सरकार ने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था ने अपनी विकास की गति बनाए रखी है।

यह 2010 के दशक की शुरुआत में मंदी के दौरान भारत की 5 प्रतिशत से कम विकास दर के मुकाबले एक बड़ा अंतर है।

बता दें कि यह बदलाव सिर्फ एक तिमाही के जीडीपी आंकड़ों तक सीमित नहीं है। भारत के आर्थिक आधार और वैश्विक संस्थानों द्वारा उनके मूल्यांकन के तरीके में भी बदलाव आया है।

‘फॉलन एंजेल’ (Fallen Angel) के डर से ‘A-‘ रेटिंग तक का सफर

शायद इस बदलाव को समझने का एक सबसे साफ उदाहरण भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग है।

2012 में S&P की चेतावनी ने चिंता बढ़ा दी थी कि भारत इन्वेस्टमेंट ग्रेड रेटिंग खोने वाला पहला BRIC देश बन सकता है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था की कमजोरियों को लेकर सवाल उठने लगे थे।

लेकिन सितंबर 2026 में Japan Credit Rating Agency (JCR) ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को एक पायदान बढ़ाकर BBB+ से A- कर दिया। रेटिंग के साथ Stable Outlook भी दिया गया। JCR ने इसकी वजह भारत की मजबूत और मुश्किल परिस्थितियों में भी टिके रहने वाली आर्थिक विकास दर, वित्तीय स्थिति में सुधार, मजबूत बैंकिंग सिस्टम और बेहतर बाहरी आर्थिक स्थिति को बताया।

JCR ने भारत की लगातार तेज आर्थिक विकास दर, मजबूत निजी खपत और सरकारी निवेश को भी अहम कारण माना। इसके अलावा GST और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे नीतिगत कदमों का भी उल्लेख किया गया।

एजेंसी ने सरकारी खर्च की गुणवत्ता में सुधार की भी तारीफ की। खास तौर पर पूंजीगत खर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ते निवेश को भारत की आर्थिक मजबूती का अहम हिस्सा बताया गया।

इस रेटिंग में बढ़ोतरी की अहमियत सिर्फ रेटिंग बढ़ने तक सीमित नहीं है। असली बदलाव यह है कि 2012 के मुकाबले आज भारत की अर्थव्यवस्था और उसके जोखिम को लेकर चर्चा पूरी तरह बदल गई है।

2012 में चिंता इस बात की थी कि क्या भारत अपनी इन्वेस्टमेंट ग्रेड रेटिंग बचा पाएगा? वहीं आज चर्चा इस बात पर हो रही है कि क्या भारत की तेज आर्थिक विकास दर उसे आने वाले समय में दुनिया की एक बहुत बड़ी आर्थिक ताकत बनने में मदद कर सकती है।

BRICS में बदलाव आया है और इसमें भारत की जगह भी बदली है

जिस ग्रुप में भारत BRIC के तौर पर शामिल हुआ था, उसमें भी जबरदस्त बदलाव आया है।

BRICS का दायरा इसके शुरुआती चार सदस्यों से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। 2010 में दक्षिण अफ्रीका इसमें शामिल हुआ और बाद में हुए विस्तार में मिस्र, इथियोपिया, ईरान, UAE और इंडोनेशिया जैसे देश भी इसमें जुड़ गए।

अब यह ग्रुप दुनिया की आबादी और अर्थव्यवस्था के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है। साथ ही, यह सिर्फ एक आर्थिक नाम से बदलकर उभरते और विकासशील देशों के लिए एक व्यापक राजनीतिक और कूटनीतिक मंच बन गया है।

इस विस्तार ने BRICS में भारत की स्थिति को और भी अहम बना दिया है।

ध्यान दें कि भारत BRICS की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं है। चीन की अर्थव्यवस्था भारत से काफी बड़ी है, लेकिन आर्थिक विकास, बड़ी आबादी, विशाल बाजार, तकनीकी क्षमता और दूसरे देशों के साथ मजबूत कूटनीतिक संबंधों का मेल भारत को BRICS में काफी महत्वपूर्ण बनाता है।

वहीं, 2012 के BRICS की तुलना में आज स्थिति अलग है। तब भारत को मुख्य रूप से BRICS के दूसरे देशों से तुलना करके देखा जाता था। लेकिन अब भारत सिर्फ समूह के दूसरे सदस्यों के साथ अपनी स्थिति की तुलना नहीं कर रहा है, बल्कि यह भी कोशिश कर रहा है कि बदला हुआ BRICS आगे किस दिशा में जाए और उसका स्वरूप कैसा हो।

आर्थिक कहानी से रणनीतिक अहमियत तक

BRICS में भारत का उभार सिर्फ GDP तक सीमित नहीं है। यह भू-राजनीतिक मतभेदों के बावजूद दूसरे देशों से संबंध बनाए रखने की भारत की क्षमता के बारे में भी है।

जानकारी के मुताबिक, 2026 का यह शिखर सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका-चीन की प्रतिद्वंद्विता, रूस-यूक्रेन संघर्ष, पश्चिम एशिया का संकट और व्यापक भू-राजनीतिक बंटवारा अंतरराष्ट्रीय संबंधों को नए सिरे से आकार दे रहे हैं।

रणनीतिक स्वायत्तता (strategic autonomy) के प्रति भारत की लंबे समय से चली आ रही प्राथमिकता और उन देशों के साथ एक ही समय में जुड़ने की उसकी क्षमता—जिनके हित हमेशा एक जैसे नहीं होते—इस माहौल में और भी अहम हो गई है।

चैथम हाउस ने रणनीतिक स्वायत्तता को भारत की विदेश नीति की एक पुरानी विशेषता बताया है। साथ ही, यह भी कहा है कि भारत का यह नजरिया नई दिल्ली को उन देशों के साथ संबंध बनाए रखने में मदद करता है जिनके साथ पश्चिम के संबंध मुश्किल भरे रहे हैं। संस्थान ने अमेरिका-चीन प्रतिस्पर्धा से तेजी से बदलती दुनिया में ‘मध्यम शक्तियों’ (middle powers) के लिए ‘रणनीतिक हेजिंग’ (strategic hedging) के बढ़ते महत्व पर भी जोर दिया है।

बता दें कि भारत के लिए, इसका मतलब है कि ब्रिक्स सिर्फ एक आर्थिक ग्रुप नहीं है। यह उन कई मंचों में से एक है जिनके जरिए नई दिल्ली किसी एक बड़े पावर ब्लॉक के साथ औपचारिक रूप से जुड़े बिना अपने हितों को आगे बढ़ा सकती है।

2026 के समिट का महत्व भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और अन्य बड़े नेता नई दिल्ली में इकट्ठा हो रहे हैं क्योंकि भारत इस ग्रुप की मेजबानी कर रहा है। भू-राजनीतिक बंटवारे के दौर में इन नेताओं का भारत आना ही नई दिल्ली की बढ़ती ‘इकट्ठा करने की क्षमता’ (convening power) को दिखाता है।

इन देशों के साथ भारत के रिश्ते जटिल हैं और अक्सर उनमें काफी मतभेद भी रहे हैं। चीन भारत का रणनीतिक प्रतिद्वंद्वी बना हुआ है; रूस भारत के रक्षा और ऊर्जा हितों से गहराई से जुड़ा है; ईरान भारत की कनेक्टिविटी और पश्चिम एशिया से जुड़ी रणनीतियों के लिए अहम है। फिर भी, भारत इन सभी के साथ एक ही कूटनीतिक ढांचे के भीतर काम करने में सक्षम है।

भारत की आर्थिक कहानी में गुणात्मक बदलाव भी आया है।

पहले भारत की BRIC वाली छवि मुख्य रूप से उसके सर्विस सेक्टर, IT इंडस्ट्री, बढ़ते कंज्यूमर मार्केट और डेमोग्राफिक क्षमता से जुड़ी थी। आज, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और उभरती हुई टेक्नोलॉजी देश की आर्थिक कहानी का बहुत बड़ा हिस्सा बन गई हैं।

UPI और आधार जैसे प्लेटफॉर्म के विकास ने भारत को डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर का एक खास मॉडल दिया है, जबकि घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने वाली पहलों का मकसद आयात पर निर्भरता कम करना और भारत को मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक वैकल्पिक जगह के तौर पर स्थापित करना रहा है।

JCR ने खास तौर पर भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और GST का जिक्र उन नीतियों के तौर पर किया है जिन्होंने देश की आर्थिक नींव को मजबूत किया है।

आसान शब्दों में कहें तो, 2012 में जब भारत BRICS समिट में शामिल हुआ, तो सवाल यह था कि क्या वह दूसरी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के साथ कदम से कदम मिलाकर चल पाएगा। 2026 में, भारत एक बड़े हो चुके BRICS की मेजबानी कर रहा है। ऐसे समय में जब वह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, उसे JCR से ‘A-‘ सॉवरेन रेटिंग मिली है, और वह उस ग्रुप के एजेंडे को आकार देने की कोशिश कर रहा है जिसका आर्थिक और भू-राजनीतिक महत्व काफी बढ़ गया है।

इस अंतर ने सवाल को ही बदल दिया है। 2012 में बहस यह थी कि—क्या भारत BRICS में शामिल होने के लायक है? 2026 में, ज्यादा अहम सवाल यह है कि: भारत BRICS के भविष्य को किस हद तक आकार दे सकता है?

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