रुबियो ने मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात में ट्रेड डील से किया इनकार, देशों को ईरान पर प्रतिबंधों को लेकर चेताया

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बुधवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान किसी ट्रेड डील पर बातचीत कर रहे हैं। साथ ही, उन्होंने दूसरे देशों को चेतावनी दी कि वे तेहरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद न करें।

रुबियो ने फॉक्स न्यूज रेडियो के ‘द ब्रायन किल्मीड शो’ में एक इंटरव्यू के दौरान ये बातें कहीं। उनसे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) समिट के दौरान बिश्केक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की मुलाकात के बारे में पूछा गया था।

रूबियो ने कहा, “मुझे नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच कोई ट्रेड डील हुई है। जाहिर है, हर देश अपनी विदेश नीति बनाता है और दुनिया भर के कई देश ईरान की सरकार से बातचीत करते हैं।”

इस बात पर प्रतिक्रिया देते हुए कि पीएम मोदी और पेजेशकियन के बीच ट्रेड डील होने की संभावना दिख रही है, रूबियो ने आगे कहा: “मेरा मतलब है कि हमने भी ईरान की सरकार के कुछ लोगों से मुलाकात की है, क्योंकि कुछ बातचीत हुई है और उनसे संपर्क भी रहा है।”

रूबियो ने US प्रतिबंधों को लेकर चेतावनी दी

रूबियो ने कहा कि US राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन का रुख साफ कर दिया है: देशों को ईरान की मदद नहीं करनी चाहिए कि वह US प्रतिबंधों से बच सके।

रूबियो ने कहा, “किसी भी देश को ऐसे तरीके बनाने में उनकी मदद नहीं करनी चाहिए जिनसे वे कमाई कर सकें और उस पैसे का इस्तेमाल आतंकवाद को बढ़ावा देने और परमाणु हथियार बनाने की कोशिश में कर सकें।”

उन्होंने आगे कहा, “और अगर देश ऐसा करने का फैसला करते हैं, तो हमें उन पर भी प्रतिबंध लगाने होंगे।”

रुबियो का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ईरान के साथ अपने कूटनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए हुए है, और साथ ही पश्चिम एशिया में चल रहे व्यापक युद्ध के बीच अमेरिका के साथ भी बातचीत कर रहा है।

मोदी-पेजेशकियन की मुलाकात में क्या हुआ?

फरवरी में ईरान-अमेरिका के बीच तनाव शुरू होने के बाद, प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को बिश्केक में पेजेशकियन से अपनी पहली द्विपक्षीय बातचीत की।

बैठक के दौरान, मोदी ने कहा कि भारत ईरान के साथ अपने व्यापार के दायरे को “बढ़ाना और उसमें विविधता लाना” चाहता है। साथ ही, उन्होंने पश्चिम एशिया में स्थायी शांति के प्रयासों के लिए नई दिल्ली के समर्थन को भी दोहराया।

दोनों नेताओं ने इस टकराव और आम नागरिकों, नागरिक बुनियादी ढांचे और नेविगेशन की आजादी की सुरक्षा की जरूरत पर भी चर्चा की।

पेजेशकियान ने पीएम मोदी से आग्रह किया कि वे बातचीत को बढ़ावा देने और लड़ाई खत्म करने में मदद के लिए, संघर्ष में शामिल देशों के साथ भारत के व्यापक संपर्कों का इस्तेमाल करें।

भारत ने ईरान और अन्य संबंधित पक्षों के साथ चाबहार बंदरगाह के भविष्य पर भी बातचीत जारी रखी है। यह दोनों देशों के बीच एक अहम कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट है, जिस पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अनिश्चितता बनी हुई है।

नई दिल्ली का मानना ​​है कि इस क्षेत्र में विवादों को बातचीत और कूटनीति के जरिए सुलझाया जाना चाहिए, साथ ही उसे अपने व्यापार, कनेक्टिविटी और व्यापक रणनीतिक हितों की भी रक्षा करनी चाहिए।

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रूबियो बोले- भारत-ईरान के बीच ट्रेड डील की जानकारी नहीं:अमेरिकी विदेश मंत्री की चेतावनी- ईरान से ट्रेड करने वाले देशों पर भी प्रतिबंध लगाएंगे

पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की मुलाकात के बाद अमेरिका ने भारत-ईरान व्यापार संबंधों को लेकर अपनी स्थिति साफ की है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि भारत और ईरान के बीच फिलहाल किसी ट्रेड डील पर बातचीत चल रही है। हालांकि, उन्होंने साथ ही चेतावनी दी कि अगर कोई देश ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने में मदद करता है तो उस देश पर भी अमेरिका प्रतिबंध लगा सकता है। रुबियो ने एक इंटरव्यू के दौरान ये बात कही। SCO में मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान पीएम मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन की SCO शिखर सम्मेलन के दौरान हुई मुलाकात के बाद आया है। दोनों नेताओं ने भारत-ईरान संबंध, व्यापार और पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की। मोदी ने कहा था कि भारत ईरान के साथ अपने पुराने संबंधों को और मजबूत करना चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार बढ़ाने और नए क्षेत्रों को इसमें शामिल करने पर भी जोर दिया गया था। मोदी ने कहा था कि भारत BRICS और SCO जैसे मंचों पर ईरान के साथ सहयोग जारी रखेगा। उन्होंने पेजेश्कियन को 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने का न्योता भी दिया। पश्चिम एशिया के तनाव पर बातचीत अमेरिका का ईरान की कमाई के 5 रास्तों पर बैन दरअसल, अमेरिका ने ईरान की अर्थव्यवस्था के 5 अहम क्षेत्रों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। जिनका इस्तेमाल ईरान दूसरे देशों में अपनी आर्थिक गतिविधियों के लिए करता है। इनमें डिजिटल एसेट्स (जैसे क्रिप्टोकरेंसी), टेक्नोलॉजी, सोना, एविएशन और शिपिंग सेक्टर शामिल हैं। अमेरिका इन क्षेत्रों के जरिए ईरान की कमाई और अंतरराष्ट्रीय कारोबार को रोकना चाहता है। यानी अगर कोई देश इन क्षेत्रों में ईरान के साथ ऐसा कारोबार करता है जिससे उसे पैसा या आर्थिक फायदा मिलता है। तो अमेरिका उस देश पर भी प्रतिबंध लगा सकता है या उसे अमेरिकी डॉलर की वित्तीय व्यवस्था से बाहर कर सकता है। अमेरिका बोला- अब ईरान के पास सिर्फ दो रास्ते बचे अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा था कि हमने ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ शुरू किया है। यह ईरान और उसके सहयोगी देशों के खिलाफ एक अभियान है। ईरान के सामने अब सिर्फ दो रास्ते हैं। पहला- पूरी तरह से दुनिया से अलग-थलग पड़ना और गुजारे लायक अर्थव्यवस्था। दूसरा- फिर से सामान्य स्थिति की ओर बढ़ना और वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल होने का मौका पाना। भारत की 4 कंपनियों पर भी प्रतिबंध अमेरिका ने ईरान से तेल और पेट्रोकेमिकल कारोबार के आरोप में भारत की 4 कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के मुताबिक, इन कंपनियों ने ईरान से पेट्रोलियम और पेट्रोकेमिकल उत्पाद खरीदने या भारत लाने में भूमिका निभाई। इनमें पोर्टीज पार्टनर्स, सदाशिवा ओवरसीज, पीपी सॉफ्टटेक और प्रकृति इंफ्रा इम्पेक्स इंडिया शामिल हैं। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की तेल से होने वाली कमाई रोकने और उसके कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर दबाव बढ़ाने के लिए की गई है। भारत पर क्या असर पड़ सकता है, 5 पॉइंट में समझें… तेल: भारत ईरान से कच्चा तेल खरीदता है तो अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भुगतान और खरीद मुश्किल हो सकती है। चाबहार पोर्ट: ईरान के चाबहार बंदरगाह में भारत की रणनीतिक और कारोबारी रुचि है। अमेरिकी प्रतिबंधों का असर इस परियोजना पर पड़ सकता है। डॉलर में भुगतान: अगर ईरान से जुड़े भारतीय कारोबार पर अमेरिकी वित्तीय प्रतिबंध लगते हैं, तो डॉलर में लेन-देन करना मुश्किल हो सकता है। व्यापार: ईरान के साथ कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों को अमेरिकी नियमों का पालन करना पड़ सकता है। कूटनीतिक दबाव: अमेरिका भारत से भी ईरान के साथ आर्थिक संबंध सीमित करने को कह सकता है। हालांकि, भारत अपने राष्ट्रीय हित और ऊर्जा जरूरतों के आधार पर फैसला करेगा। —————————- ये खबर भी पढ़ें… 2 दिन बाद अमेरिका का ईरान पर फिर मिसाइल हमला, 19 की मौत, 68 घायल अमेरिका ने 2 दिन बाद फिर ईरान पर हमला किया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात सिरिक, खुजस्तान, केश्म द्वीप और बंदर अब्बास में मिसाइल और ड्रोन स्ट्राइक की। ईरान के अनुसार इन हमलों में 19 लोगों की मौत हुई है, जबकि 68 लोग घायल हुए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

देवरिया के रहने वाले पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा बने राम मंदिर के पहले CEO, ऑपरेशन सिंदूर के समय की इनकी कहानी जानिए

Ram Mandir CEO: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में अपनी भूमिका के लिए ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ पाने वाले रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को श्री राम जन्मभूमि मंदिर का चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) चुना गया है। यह फैसला तब लिया गया जब श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने बुधवार को अयोध्या में हुई एक बैठक में CEO की नियुक्ति पर विचार विमर्श किया।

इसके अलावा, ट्रस्ट ने तीन नए ट्रस्टी भी नियुक्त किए: दिल्ली के महेश भागचंदका (जो VHP के दिवंगत नेता अशोक सिंघल के रिश्तेदार हैं), अयोध्या के मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की निर्मला यादव।

भारतीय वायु सेना के सम्मानित पूर्व कमांडर अप्रैल 2026 में रिटायर हुए थे और अब वे मंदिर ट्रस्ट के कामकाज के विस्तार के साथ एक अहम प्रशासनिक भूमिका संभालेंगे।

बता दें कि मिश्रा उन सीनियर मिलिट्री कमांडरों में शामिल थे जिन्हें ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनकी लीडरशिप के लिए सम्मानित किया गया था। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी शानदार सेवाओं और महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया था।

यह मेडल युद्ध, संघर्ष या सैन्य कार्रवाई के दौरान सबसे बेहतरीन सेवा के लिए दिया जाता है और यह भारत के सबसे बड़े युद्ध-कालीन मिलिट्री सम्मानों में से एक है।

जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के हवाई हमलों के बारे में बताया

हाल ही में एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में, मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चलाए गए हवाई अभियान के बारे में बात की और बताया कि कैसे भारतीय सेना ने पाकिस्तान के अंदर काफी दूर मौजूद ठिकानों की पहचान की और उन पर हमला किया।

उन्होंने एक ऑपरेशन का जिक्र करते हुए बताया कि करीब 314 किलोमीटर दूर स्थित एक टारगेट को नष्ट किया गया था। मिश्रा के मुताबिक, इस कार्रवाई के दौरान सिर्फ एक छोटा सा ऑपरेशनल निर्देश दिया गया और इसके बाद टारगेट को सफलतापूर्वक तबाह कर दिया गया।

ऑपरेशन के बारे में बात करते हुए, मिश्रा ने प्लानिंग, सटीकता, टेक्नोलॉजी और सशस्त्र बलों की अलग-अलग शाखाओं के बीच तालमेल के महत्व पर जोर दिया। हालांकि, ऑपरेशन से जुड़ी कई बातें अभी भी गोपनीय रखी गई हैं।

उनकी बातों से एयर कैंपेन की प्लानिंग और उसे अंजाम देने के बारे में कुछ खास जानकारी मिली, हालांकि, उन्होंने ऐसी कोई संवेदनशील जानकारी साझा नहीं की, जिसका सार्वजनिक किया जाना सुरक्षा के लिहाज से ठीक न हो।

जितेंद्र मिश्रा का उत्तर प्रदेश से है खास कनेक्शन

मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के भोपतपुरा के रहने वाले हैं, जो अयोध्या से सड़क मार्ग से लगभग तीन घंटे की दूरी पर है। वे एक मध्यम-वर्गीय परिवार से आते हैं और उनके पिता बतौर लेक्चरर काम करते थे।

अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर में एक अहम प्रशासनिक पद संभालने के बाद अब उनका उत्तर प्रदेश से और खास जुड़ाव हो गया है।

राम मंदिर ट्रस्ट के CEO के तौर पर जितेंद्र मिश्रा क्या करेंगे?

CEO के तौर पर, मिश्रा से उम्मीद है कि वे मंदिर ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज को संभालेंगे और इसके बढ़ते हुए ऑपरेशन्स में तालमेल बिठाएंगे।

उनकी जिम्मेदारियों में तीर्थयात्रियों के लिए सुविधाएं, वित्तीय इंतजाम, स्टाफ के बीच तालमेल, सुरक्षा से जुड़ा तालमेल और बड़े धार्मिक आयोजनों का प्रबंधन शामिल हो सकता है।

अपने मिलिट्री करियर के दौरान बड़े संगठनों को संभालने, ऑपरेशनल प्लानिंग और तालमेल बिठाने का उनका अनुभव इस भूमिका के लिए काम का साबित हो सकता है।

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा कौन हैं?

रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (SYSM, AVSM, VSM) भारतीय वायु सेना के पूर्व अधिकारी हैं, जिन्होंने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के तौर पर काम किया है।

रिटायरमेंट से पहले, मिश्रा ने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ के तौर पर काम किया। इससे पहले, उन्होंने इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ में डिप्टी चीफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के तौर पर भी काम किया था।

मिश्रा को 6 दिसंबर, 1986 को एयर फोर्स एकेडमी से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद भारतीय वायु सेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन किया गया था।

जितेंद्र मिश्रा का 38 साल का IAF करियर

मिश्रा का मिलिट्री करियर 38 साल से ज्यादा का रहा, जिसमें उन्होंने 3,000 घंटे से ज्यादा की फ्लाइंग का अनुभव हासिल किया।

उन्होंने 18 से ज्यादा तरह के फाइटर और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलिकॉप्टर उड़ाए और फाइटर पायलट, फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर काम किया। उन्होंने कई इंस्ट्रक्शनल और स्टाफ पद भी संभाले।

स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर, मिश्रा उस टीम का हिस्सा थे जिसने कारगिल युद्ध की शुरुआत में मिराज 2000 एयरक्राफ्ट पर लेजर-गाइडेड बमों को ऑपरेशनल किया था। इन हथियारों का इस्तेमाल बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर हमलों में किया गया था।

कारगिल युद्ध में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका

IAF में अपने करियर के दौरान मिश्रा ने कई अहम ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने ईस्टर्न सेक्टर में एक फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर के तौर पर काम किया और बाद में विंग कमांडर के पद पर रहते हुए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नासिक डिवीन में चीफ टेस्ट पायलट बने।

ग्रुप कैप्टन के तौर पर, उन्होंने एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट में चीफ टेस्ट पायलट और नई दिल्ली में एयर हेडक्वार्टर में ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप के डायरेक्टर के तौर पर काम किया।

जून 2010 में, फ्रांस में होने वाली मल्टीनेशनल एयर एक्सरसाइज ‘गरुड़ IV’ में भारतीय वायु सेना की टुकड़ी का नेतृत्व करने के लिए मिश्रा को चुना गया।

जितेंद्र मिश्रा की सीनियर IAF पोस्टिंग

एयर कमोडोर के तौर पर, मिश्रा ने एयर फोर्स स्टेशन बरेली में 15 विंग और एयर फोर्स स्टेशन पठानकोट में 18 विंग की कमान संभाली।

बाद में उन्होंने एयर हेडक्वार्टर में एयर कमोडोर (एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स) के तौर पर काम किया।

एयर वाइस मार्शल के पद पर प्रमोट होने के बाद, मिश्रा ने एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ (प्रोजेक्ट्स) और एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट के कमांडेंट के तौर पर काम किया।

ऑपरेशन सिंदूर में जितेंद्र मिश्रा की भूमिका

मिश्रा को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी भूमिका के लिए 2025 में स्वतंत्रता दिवस पर ‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ से सम्मानित किया गया था।

उन्हें मिले अन्य सम्मानों में 2024 में मिला ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ (AVSM) और 2013 में मिला ‘विशिष्ट सेवा मेडल’ (VSM) शामिल हैं।

‘सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल’ ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उनकी बेहतरीन सेवा को मान्यता दी और उनके करियर में मिले सैन्य सम्मानों की लंबी सूची में एक और सम्मान जोड़ा।

जितेंद्र मिश्रा वेस्टर्न एयर कमांड के प्रमुख कब बने?

मिश्रा को एयर मार्शल के पद पर प्रमोट किया गया और उन्होंने 9 जनवरी, 2023 को इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (डॉक्ट्रिन, ऑर्गनाइज़ेशन और ट्रेनिंग) के डिप्टी चीफ के तौर पर कार्यभार संभाला।

इसके बाद, 5 दिसंबर, 2023 को वे इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (ऑपरेशन्स) के डिप्टी चीफ बने।

1 जनवरी, 2025 को मिश्रा ने वेस्टर्न एयर कमांड के एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ का पद संभाला। उन्होंने एयर मार्शल पंकज मोहन सिन्हा की जगह ली, जो 31 दिसंबर, 2024 को रिटायर हुए थे।

बता दें कि 38 साल से ज्यादा के करियर के बाद, मिश्रा अप्रैल 2026 में इंडियन एयर फोर्स से रिटायर हुए।

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NSE IPO Update: NSE के आईपीओ से पहले SBI का बड़ा ऐलान! ₹30000 करोड़ के मेगा इश्यू में बेचेगा अपनी हिस्सेदारी

SBI to Dilute Stake in NSE IPO: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और उसकी सब्सिडियरी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स मिलकर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रस्तावित ₹30,000 करोड़ के आईपीओ में अपनी 1% तक हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं।

इस बात की पुष्टि खुद एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने की है। इसके साथ ही उन्होंने बैंक के होम लोन पोर्टफोलियो और हालिया एसबीआई म्यूचुअल फंड आईपीओ को लेकर भी कई अहम जानकारियां साझा की हैं।

NSE IPO में SBI ग्रुप कितना बेचेगा हिस्सा?

एसबीआई चेयरमैन सी एस शेट्टी ने एक इंटरव्यू में बताया कि बैंक और उसकी सहयोगी कंपनी मिलकर एनएसई के आईपीओ (OFS के जरिए) में हिस्सा बेचेंगे। एसबीआई मुख्य रूप से एनएसई में अपनी 0.65% हिस्सेदारी बेचेगा। एसबीआई कैपिटल मार्केट्स अपनी 0.35% हिस्सेदारी बेचेगा। इस तरह एसबीआई ग्रुप मिलकर कुल 1% हिस्सेदारी कैश करेगा। अन्य शेयरधारकों के शामिल होने के आधार पर यह आंकड़ा थोड़ा कम भी हो सकता है।

वर्तमान में कितनी है हिस्सेदारी?

मौजूदा समय में एनएसई में SBI की 3.23% और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की 4.33% हिस्सेदारी है। चेयरमैन ने साफ किया कि फिलहाल बैंक की किसी अन्य सब्सिडियरी कंपनी के मोनेटाइजेशन या आईपीओ की तत्काल कोई योजना नहीं है।

सुपरहिट रहा था SBI Mutual Fund का IPO

हाल ही में एसबीआई ने अपने विदेशी पार्टनर ‘अमुंडी’ के साथ मिलकर एसबीआई म्यूचुअल फंड में लगभग 10% हिस्सेदारी बेची थी। ₹9,800 करोड़ का यह पब्लिक ऑफर निवेशकों के बीच बेहद सुपरहिट रहा और इसे 42 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था।लिस्टिंग के बाद एसबीआई की हिस्सेदारी 61.76% से घटकर 55.46% रह गई, जबकि अमुंडी की हिस्सेदारी 3.7% घटकर 32.56% पर आ गई।

होम लोन पोर्टफोलियो ₹10 लाख करोड़ पार करने की तैयारी में

हाउसिंग फाइनेंस सेगमेंट में एसबीआई की बादशाहत कायम है। बैंक जल्द ही एक बड़ा नया रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। चालू तिमाही में एसबीआई का होम लोन पोर्टफोलियो ₹10 लाख करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर जाएगा। बीते वित्त वर्ष में बैंक ने ₹9 लाख करोड़ का आंकड़ा पार किया था। होम लोन सेगमेंट में एसबीआई की बाजार हिस्सेदारी लगभग 28% है। देशभर में बैंक के 460 से ज्यादा होम लोन प्रोसेसिंग सेंटर्स काम कर रहे हैं, जो ग्राहकों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाते हैं।

देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है होम लोन: CS Setty

सी एस शेट्टी ने कहा कि ग्राहक कागजी कार्रवाई की पारदर्शिता, बिल्डर्स की ड्यू-डिलिजेंस और बैंक के भरोसे के कारण एसबीआई से होम लोन लेना पसंद करते हैं।उन्होंने जोर देकर कहा कि होम लोन को केवल एक बैंकिंग प्रोडक्ट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 200 से अधिक उद्योग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रियल एस्टेट सेक्टर पर निर्भर हैं, इसलिए होम लोन भारत की आर्थिक वृद्धि का एक अभिन्न और महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Experts View : अगले हफ्ते निफ्टी के 24000 के नीचे जाने की संभावना कम, बैंक निफ्टी में एक मजबूत चाल दिखने की उम्मीद

अगले हफ्ते निफ़्टी के 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे टूटने की संभावना कम है। जब तक इंडेक्स 23,950 के अहम सपोर्ट जोन के नीचे नहीं जाता है, इसमें बड़ी गिरावट का डर नहीं है। ये बातें SBI सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कही हैं। उनके मुताबिक बहुत आक्रामक बिकवाली न होने से पता चलता है कि मंदड़ियों का अभी पूरी तरह से दबदबा नहीं बना है। निफ्टी अपने अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है,लेकिन इनमें से ज्यादातर एवरेज अब फ्लैट हो गए हैं,जो बड़ी गिरावट के बजाय कंसोलिडेशन (बाजार के एक दायरे में रहने) का संकेत दे रहे हैं।

उनका मानना ​​है कि हालिया तेजी के बाद बीच-बीच में प्रॉफ़िट बुकिंग की संभावना के बावजूद,निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स से निकट भविष्य में बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन जारी रखने की उम्मीद है।

अगले हफ्ते निफ्टी के 24,000 के स्तर से नीचे जाने की संभावना कम

बाजार की चाल पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि अगले हफ्ते निफ्टी के 24,000 के स्तर से नीचे जाने की संभावना कम है। जब तक इंडेक्स 23,950 के अहम सपोर्ट जोन के नीचे नहीं जाता है,इसमें बड़ी गिरावट का डर नहीं है। पिछले सात ट्रेडिंग सेशन में निफ़्टी 24,379 और 24,077 के दायरे में ही घूमता रहा है,जिससे साफ पता चलता है कि इसमें किसी खास दिशा में बढ़ने का मोमेंटम नहीं है। इंडेक्स अपने 200-दिन के EMA के ऊपर टिक नहीं पाया और हफ्ते के आखिर में 24,200 के आस-पास बंद हुआ,जो लगातार तीसरी वीकली गिरावट है। हालांकि,जबरदस्त बिकवाली न होने से संकेत मिलता है कि मंदड़ियों का अभी पूरी तरह से दबदबा नहीं बना है।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो निफ़्टी अपने अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है,लेकिन इनके ज्यादातर एवरेज अब सपाट हो गए हैं,जो किसी बड़ी गिरावट के बजाय कंसोलिडेशन का संकेत दे रहे हैं। मोमेंटम इंडिकेटर भी इस बात का सपोर्ट कर रहे हैं। डेली RSI पिछले 13 सेशन से एक ही दायरे में बना हुआ है,जबकि स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर भी एक रेंज में ही ऊपर-नीचे हो रहा है,जो बाजार में अनिश्चितता की भावना को दिखाता है।

अब निफ्टी के लिए 24,000-23,950 का जोन काफी अहम हो गया है,जो पिछले स्विंग लो और ऊपर की ओर जाने वाली ट्रेंडलाइन सपोर्ट से मेल खाता है। अगर निफ्टी लगातार 23,950 के नीचे बना रहता है,तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स जल्द ही 23,700 की ओर जा सकता है।

ऊपर की तरफ निफ्टी के लिए 24,250-24,300 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है। इस रेंज के किसी भी तरफ ब्रेकआउट होने से बाजार की अगली चाल तय हो सकती है।

अगले हफ्ते बैंक निफ्टी में एक मजबूत चाल दिखने की उम्मीद

बैंक निफ्टी पर बात करते हुए सुदीप शाह ने कहा कि ऐसा लगता है कि अगले हफ्ते बैंक निफ़्टी में एक मजबूत चाल देखने को मिल सकती है,हालांकि ब्रेकआउट किस दिशा में होगा,यह अभी तय नहीं है। पिछले कुछ सेशन से इंडेक्स लगभग 1,075 अंकों के दायरे में ही घूम रहा है,जिससे पता चलता है कि मार्केट में कोई फैसला नहीं हो पा रहा है और न ही तेजड़िए और न ही मंदड़ियों का साफ दबदबा दिख रहा है।

बैंक निफ्टी के लिए एक अहम घटना डेली चार्ट पर बोलिंगर बैंड स्क्वीज़ का बनना है,जो उतार-चढ़ाव में भारी कमी का संकेत है। ऐसे सेटअप के बाद अक्सर कीमतों में बड़ी हलचल देखने को मिलती है,जिससे संकेत मिलता है कि बैंक निफ्टी में जल्द ही एक बड़ा ब्रेकआउट हो सकता है।

मोमेंटम इंडिकेटर न्यूट्रल बने हुए हैं,जिसमें RSI और स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर दोनों ही साइडवेज (एक ही दायरे में)चल रहे हैं। ADX गिरकर 7.17 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है,जो बहुत कमजोर ट्रेंड का संकेत है। पिछले आंकड़ों की बात करें तो ADX की ऐसी कम रीडिंग के बाद अक्सर कीमतों में किसी एक दिशा में तेज चाल देखने को मिलती है।

टेक्निकल तौर पर बैंक निफ्टी के लिए 58,000-58,200 का स्तर अहम रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है,जबकि 57,200-57,000 एक अहम सपोर्ट एरिया है। इन दोनों में से किसी भी जोन के पार निर्णायक ब्रेकआउट से बैंक निफ्टी के अगले बड़े ट्रेंड का पता चलने की संभावना है।

जारी रहेगी छोटे-मझोले शेयरों का आउटपरफॉर्मेंस

सुदीप शाह का मानना है कि आगे मिड और स्मॉलकैप स्टॉक बेंचमार्क इंडेक्सों से बेहतर प्रदर्शन करते दिख सकते हैं। उनका कहना है कि हाल की तेजी के बाद बीच-बीच में होने वाली प्रॉफ़िट बुकिंग की संभावना के बावजूद,निकट भविष्य में ब्रॉडर मार्केट के बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन जारी रखने की उम्मीद है। निफ़्टी मिडकैप 100 और निफ़्टी स्मॉलकैप 100 दोनों ने नए रिकॉर्ड स्तर छुए हैं,जो मज़बूत मार्केट भागीदारी और बेहतर सेंटीमेंट को दिखाते हैं।

तकनीकी तौर पर ये दोनों इंडेक्स मजबूत अपट्रेंड में बने हुए हैं और अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। साथ ही मोमेंटम इंडिकेटर भी बुलिश जोन में हैं। निफ्टी मिडकैप 100 के लिए, 63,700-63,500 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया है। अगर यह इसके ऊपर बना रहता है,तो यह इंडेक्स 65,000-65,800 के स्तर तक जा सकता है।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 के लिए 19,980-19,950 एक अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है। 20,150 के स्तर को मजबूती से पार करने पर नई खरीदारी का मोमेंटम बन सकता है और इंडेक्स 20,400-20,600 के स्तर तक पहुंच सकता है। कुल मिलाकर,इनका ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है।

 

बाजार का मौजूदा मिजाज किसी भी एक दिशा में साफ नहीं, शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए लेवल बेस्ड ट्रेडिंग रहेगी सबसे अच्छी -अमोल अठावले

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

SBI PO Prelims Result 2026: एसबीआई पीओ प्री परीक्षा का रिजल्ट जारी, 12 सितंबर को मेन्स परीक्षा में शामिल होंगे सफल उम्मीदवार

SBI PO Prelims Result 2026: भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की प्रोबेश्नरी अधिकारी (PO) भर्ती 2026 की प्रीलिम्स परीक्षा में शामिल उम्मीदवारों के लिए अहम अपडेट है। इस परीक्षा का आयोजन चुनिंदा परीक्षा केंद्रों पर 01 और 02 अगस्त 2026 को किया गया था। बैंक ने एसबीआई पीओ प्री परीक्षा का रिजल्ट आधिकारिक वेबसाइट sbi.bank.in पर घोषित कर दिया है।

एसबीआई प्रोबेशनरी ऑफिसर प्रीलिम्स परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब एसबीआई करियर पोर्टल के जरिए अपना क्वालिफाइंग स्टेटस चेक कर सकते हैं। यह रिजल्ट 1,500 प्रोबेशनरी ऑफिसर पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया में पहला बड़ा स्क्रीनिंग स्टेज है। एसबीआई पीओ प्रीलिम्स रिजल्ट बैंक के आधिकारिक भर्ती पोर्टल के जरिए चेक किया जा सकता है। रिजल्ट में उन कैंडिडेट की डिटेल दर्ज है जिन्होंने प्रारंभिक परीक्षा का पहला चरण पास कर लिया है और दूसरे चरण में मुख्य परीक्षा में शामिल होने के लिए योग्य हैं।

यह भर्ती 1,500 प्रोबेशनरी ऑफिसर पदों के लिए की जा रही है। प्रीलिम्स परीक्षा 1 और 2 अगस्त को कई शिफ्ट में हुई थी, जिसमें कैंडिडेट का इंग्लिश लैंग्वेज, क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड और रीज़निंग एबिलिटी का टेस्ट लिया गया था।

एसबीआई पीओ प्रीलिम्स रिजल्ट 2026: डाउनलोड करने के स्टेप्स

एसबीआई पीओ प्री परीक्षा 2026 में शामिल उम्मीदवार आधिकारिक वेबसाइट पर एसबीआई पीओ प्रीलिम्स रिजल्ट 2026 डाउनलोड करने के लिए यहां बताए गए स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं:

  • एसबीआई की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं और करियर सेक्शन, sbi.bank.in खोलें।
  • करंट ओपनिंग्स या रिक्रूटमेंट रिजल्ट्स सेक्शन में जाएं।
  • एडवर्टाइजमेंट नंबर CRPD/PO/2026-27/09 के तहत प्रोबेशनरी ऑफिसर्स के लिए रिक्रूटमेंट नोटिस ढूंढें।
  • प्रीलिमनरी एग्जामिनेशन रिजल्ट लिंक पर क्लिक करें।
  • रिजल्ट डॉक्यूमेंट स्क्रीन पर खुल जाएगा।
  • रोल नंबर सर्च करने के लिए कंप्यूटर पर Ctrl + F फंक्शन का इस्तेमाल करें।
  • जिन कैंडिडेट्स के रोल नंबर लिस्ट में हैं, उन्हें अगले स्टेज के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया है।
  • रिजल्ट को भविष्य के लिए डाउनलोड करके सेव कर लें।

एसबीआई पीओ प्री रिजल्ट 2026 के बाद आगे क्या?

एसबीआई भर्ती प्री परीक्षा 2026 के जरिए 1500 पदों पर भर्ती होनी है। इसमें 1446 सामान्य पद हैं जबकि 54 पद बैकलॉग श्रेणी के हैं। इस चरण को पार करने वाले उम्मीदवार मेन्स परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड डाउनलोड कर पाएंगे। मेन्स परीक्षा 12 सितंबर 2026 को होगी। इसके बाद उम्मीदवारों को साइकोमेट्रिक टेस्ट, ग्रुप एक्सरसाइज और पर्सनल इंटरव्यू जैसे चरणों से भी गुजरना होगा।

मेन्स परीक्षा का वेटेज होगा 75%

एसबीआई पीओ भर्ती 2026 में शामिल सभी उम्मीदवारों को ध्यान रखना चाहिए कि प्री परीक्षा इस भर्ती प्रक्रिया का पहला स्क्रीनिंग चरण था। इसके बाद मुख्य परीक्षा दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण स्क्रीनिंग का चरण होगा। अंतिम चयन सूची तैयार करते वक्त मेन्स परीक्षा का वेटेज सबसे ज्यादा, यानी 75% रहेगा, जबकि इंटरव्यू और ग्रुप एक्सरसाइज को मिलाकर बाकी 25% अंक मिलेंगे। यानी मेन्स परीक्षा असली गेम चेंजर होगी। एसबीआई पीओ भर्ती 2026 की फाइनल मेरिट लिस्ट इसी साल के अंत तक जारी होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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जैक्सन होल की बैठक के बाद शेयर मार्केट में कोहराम, S&P500 आया नीचे, टेक शेयरों पर तेज दबाव

अमेरिका के फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वार्श की स्पीच के बाद अमेरिकी शेयर मार्केट में कोहराम मच गया। उनके बयान से निवेशकों को यह संकेत मिला कि फेड की कोशिश महंगाई से निपटने की है। इसी बीच ट्रेडर्स ने इस साल ब्याज दरों में बढ़ोतरी के आसार पर दांव लगाना शुरू कर दिया। केविन वार्श के स्पीच के चलते अमेरिका के अहम इंडेक्स लगातार बढ़त और गिरावट के बीच झूलते रहे। हालांकि इक्विटी मार्केट में कुछ हद तक स्थिरता दिखाई दी। ऐतिहासिक रूप से फेड चेयर का जैक्सन होल भाषण शेयर बाजार के लिए बहुत बड़ा ट्रिगर नहीं रहा है। वर्ष 2000 से अब तक इस स्पीच के बाद अगले हफ्ते इंडेक्स में औसतन सिर्फ 0.4% का बदलाव हुआ है। हालांकि अगर यह स्पीच मौद्रिक नीति में किसी बड़े बदलाव से पहले आता है, तो इसका असर अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।

क्या है अमेरिकी मार्केट में स्थिति

अमेरिका का अहम इंडेक्स एसएंडपी 500 (S&P500) 0.2% टूट गया। इंडस्ट्रियल और आईटी शेयरों में गिरावट ने इस पर दबाव डाला। सेमीकंडक्टर इंडेक्स में शामिल लगभग सभी कंपनियों के शेयर गिरे, और सबसे अधिक गिरावट एनविडिया (Nvidia) में रही। अमेरिका का टेक-हैवी नास्डाक 100 (Nasdaq 100) भी 0.7% टूट गया और शुरुआती बढ़त गंवाते हुए डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज (Dow Jones Industrial Average) भी थोड़ा नीचे आया। Cboe Volatility Index में गिरावट जारी रही और 14 से थोड़ा ही ऊपर है। साथ ही तेल निकालने वाले देशों के संगठन ओपेक (OPEC) से वेनेजुएला बाहर निकलने पर विचार कर रहा है, जिससे तेल की कीमतें गिर गई।

क्या कहना है केविन वार्श का

अमेरिकी फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वार्श ने आने वाले समय के लिए गाइडेंस यानी अनुमान को लेकर अपनी अनिच्छा दोहराई। उन्होंने कहा कि हमें ऐसी व्यवस्था को बढ़ावा नहीं देना चाहिए जिसमें मार्केट अपने अगले ट्रेड के लिए मुख्य रूप से फेड की तरफ देख रहे हों। उन्होंने कहा कि शांत फेड अपने उद्देश्यों को हासिल करने में अधिक सक्षम होगा और महंगाई को कंट्रोल करने के लिए अभी काफी काम बाकी है। उन्होंने कहा कि महंगाई लंबे समय से जरूरत से ज्यादा ऊंची बनी हुई है।

क्या कहना है एक्सपर्ट का

सिटी वेल्थ की चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर केट मूर ने ब्लूमबर्ग टीवी के एक इंटरव्यू में कहा कि निवेशकों को अर्थव्यवस्था, मुनाफे और 2% महंगाई के लक्ष्य को लेकर अमेरिकी फेड की प्रतिबद्धता के बारे में जानकारी चाहिए थे और उन्हें यह मिल गई, जिसके चलते इक्विटी मार्केट में कुछ स्थिरता दिख रही है।

खत्म हुआ इंतजार, जैक्सन होल की बैठक में फेड ने महंगाई को लेकर जताई यह चिंता

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

पाक टेस्ट टीम ने नहीं प्रसारित होने दिया इमरान खान के बेटों का दुख, टेस्ट मैच बॉयकॉट करने की दी धमकी

imran khan

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने इंग्लैंड के शीर्ष स्पोर्ट्स चैनल और डजीटल स्पोर्ट्स प्रसारणकर्ता के ख़िलाफ़ औपचारिक शिकायत की है। यह शिकायत तब की गई, जब प्रसारणकर्ता ने लॉर्ड्स में पहले दिन लंच के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री और कप्तान इमरान ख़ान के बेटों का इंटरव्यू प्रसारित किया। एक अग्रणी क्रिकेट वेबसाइट को मिली जानकारी के मुताबिक़ PCB ने विरोध के तौर पर ब्रेक के बाद पाकिस्तान की टीम के मैदान पर वापस नहीं उतरने के विकल्प पर भी विचार किया था।

इंग्लैंड के पूर्व कप्तान और मौजूदा स्पोर्ट्स प्रेसेंटर माइक एथर्टन ने यह इंटरव्यू किया था। इसमें इमरान के बेटों सुलेमान और क़ासिम ख़ान ने अपने पिता की सेहत को लेकर चिंता जताई थी। इमरान पिछले तीन साल से जेल में हैं। उनके बेटों ने कहा कि उन्हें अपने पिता की ज़िंदगी को लेकर भी डर है। माना जा रहा है कि PCB ने लंच ब्रेक से पहले ही स्काई स्पोर्ट्स से संपर्क करके इस सेगमेंट को लेकर विरोध दर्ज कराया था। PCB ने कथित तौर पर यह भी चेतावनी दी थी कि अगर इंटरव्यू प्रसारित किया गया, तो पाकिस्तान के खिलाड़ी लंच के बाद मैदान पर वापस नहीं लौटेंगे।

इन बातचीत के दौरान स्काई ने इंटरव्यू को कुछ देर के लिए रोक दिया। लेकिन बाद में उसने 18 मिनट का यह इंटरव्यू प्रसारित कर दिया। जब तक इंटरव्यू ख़त्म हुआ, पाकिस्तान के खिलाड़ी दूसरे सेशन के लिए मैदान पर लौटने की तैयारी कर रहे थे। दूसरा सेशन दोपहर 2:40 बजे शुरू होना था।

एथर्टन ने बुधवार सुबह लॉर्ड्स के राइटर्स रूम में इमरान के बेटों का यह इंटरव्यू किया था। स्काई ने टेस्ट मैच से पहले इस इंटरव्यू की एक छोटी झलक भी दिखाई थी। हालांकि पाकिस्तान में इस सीरीज़ का प्रसारण करने वाले PTV ने इस इंटरव्यू को प्रसारित नहीं किया। पिछले कुछ हफ़्तों से इमरान की सेहत को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। उनके बेटे भी उन्हें सही इलाज और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने की कोशिशें तेज़ कर रहे हैं।

पिछले हफ़्ते पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि इमरान को राजधानी इस्लामाबाद के शिफ़ा अस्पताल में भर्ती कराया जाए। लेकिन इसके बजाय उन्हें सरकारी PIMS अस्पताल ले जाया गया और जांच के कुछ ही समय बाद वापस जेल भेज दिया गया था।

इमरान की बहनों और बेटों ने आरोप लगाया है कि यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन था। उन्होंने यह भी मांग की है कि इमरान को अपने निजी डॉक्टर से मिलने की इजाज़त दी जाए। पिछले हफ़्ते एथर्टन समेत 21 पूर्व कप्तानों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ को एक ख़त लिखा था। इसमें उन्होंने उनसे अपील की थी कि यह सुनिश्चित किया जाए कि इमरान को जेल में सही इलाज और ज़रूरी स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराई जाए।

इस ख़त पर भारत, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, वेस्टइंडीज़ और न्यूज़ीलैंड के पूर्व कप्तानों ने दस्तख़त किए थे। यह फ़रवरी में 14 पूर्व कप्तानों द्वारा लिखे गए एक पिछले ख़त के बाद भेजा गया था। उस पहले ख़त का पाकिस्तान सरकार की तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया था।

एक अग्रणी क्रिकेट वेबसाइट ने इस मामले पर PCB की आधिकारिक प्रतिक्रिया के लिए उससे संपर्क भी किया है। वहीं, पाकिस्तान सरकार ने पिछले हफ़्ते एसोसिएटेड प्रेस को दिए एक बयान में उन आरोपों को ख़ारिज किया था कि इमरान के साथ जेल में बदसलूक़ी की गई या उन्हें अपने परिवार और वकीलों से मिलने नहीं दिया गया। सरकार ने कहा था कि अगस्त 2023 में जेल जाने के बाद से इमरान से उनके परिवार, वकीलों और डॉक्टरों ने 900 से ज़्यादा बार मुलाक़ात की है।

हर बात पर रिएक्ट करने से पहले ऐश्वर्या राय की ये 5 सीख जान लें!

आज के दौर में लोग किसी के कुछ कहने पर तुरंत जवाब देने लगते है, लेकिन हर बात पर रियेक्ट देना जरूरी नहीं होता। कई बार चुप रहना, लोगों की बातों को नजरअंदाज करना और अपनी सोच पर कायम रहना ही सबसे बड़ी ताकत होती है। ऐश्वर्या राय बच्चन का एक पुराना विचार भी इसी बात को सामने रखता है कि शोर मचाना और अपनी बात साबित करने की कोशिश करना आसान है, लेकिन बिना कुछ कहे शांत रहना और खुद पर भरोसा रखना असली हिम्मत है।

उनका यह विचार सिर्फ सेलिब्रिटी की लाइफ में ही नहीं, बल्कि आम जिंदगी में भी काफी काम आ सकता है। हर बहस का जवाब देना, हर अफवाह पर सफाई देना मानसिक रूप से थका सकता है। कई बार समय के साथ सच खुद सामने आ जाता है और ऐसे में शांत रहना उसकी कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी और सेल्फ-कॉन्फिडेंस को दिखाता है।

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1. खुद पर भरोसा रखें

इस विचार की सबसे बड़ी सीख यही है कि हर किसी की राय को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए। यदि आपको अपने डिसीजन और अपनी सच्चाई पर भरोसा है, तो हर व्यक्ति को समझाने की जरूरत नहीं होती। ऐश्वर्या की बात यह संदेश देती है कि छोटी-छोटी बातों में उलझने के बजाय अपने काम पर ध्यान देना अच्छा है।

 

 

 

2. खामोशी को बनाये ताकत

ऐश्वर्या राय बच्चन ने एक पुराने इंटरव्यू में कहा था कि चुप रहने में बहुत ताकत होती है। उनका मानना था कि गुस्से में तुरंत बोल देना या अपनी बात जोर-जोर से रखना आसान है, लेकिन किसी सिचुएशन में शांत रहना ज्यादा मुश्किल होता है। जब कोई दूसरों की बातों के बावजूद खुद पर भरोसा रखता है, तो उसे बार-बार सफाई देने की जरूरत महसूस नहीं होती।

 

 

 

3. हर बात पर रियेक्ट न करें

लोगों की राय, अफवाहों या आलोचना का सामना हर किसी को करना पड़ सकता है। ऐसी सिचुएशन में तुरंत प्रतिक्रिया देने से बात और बढ़ सकती है। ऐश्वर्या की कही बात यह समझाती है कि हर आरोप या चर्चा का जवाब देना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी चुप रहकर समय को अपना काम करने देना बेहतर होता है। इससे बेवजह का स्ट्रेस कम होता है।

 

 

 

4. समय खुद देगा जवाब

हर बात का जवाब शब्दों से देना जरूरी नहीं होता। कई बार शांत रहकर अपने काम पर ध्यान देना ही सबसे बेहतर जवाब बन जाता है।बेवजह की बहस या लोगों को समझाने में अपनी एनर्जी खर्च करने के बजाय धैर्य रखना और अपने काम से खुद को साबित करना ज्यादा बेहतर हो सकता है।

 

 

 

5. पर्सनल लाइफ प्राइवेट रखें

फिल्म इंडस्ट्री में रहने के कारण ऐश्वर्या राय बच्चन लंबे समय से लोगों और मीडिया की नजरों में रही हैं। उनकी प्राइवेट लाइफ और करियर को लेकर भी कई तरह की बातें होती रही हैं। उनकी सोच यह बताती है कि अपनी प्राइवेट लाइफ को हर किसी के सामने साबित करने या समझाने की जरूरत नहीं है। कई बार अपने तक रखना ही सही होता है।

 

 

 

ऐश्वर्या राय बच्चन की इस बात की सीख यही है कि हर सिचुएशन में बोलना या खुद को सही साबित करना जरूरी नहीं होता। कई बार शांत रहना और कम बोलना ज्यादा बेहतर होता है। इसलिए अगली बार जब कोई बात आपको परेशान करे, तो तुरंत रियेक्ट देने के बजाय थोड़ा रुकें, सोचें और जरूरत हो तो चुप रहना चुनें।

Orry: ‘अमृता सिंह की वजह से मैं ट्रॉमा में चला गया था’, सारा अली खान से दोस्ती पर ऑरी ने कही ये बड़ी बात

Orry: ओरहान अवत्रामणि, जिन्हें ‘ओरी’ के नाम से भी जाना जाता है, ने सारा अली खान की मां अमृता सिंह के साथ हुई अनबन के बारे में बात की है। इस अनुभव को अपनी जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर बताया है। उन्होंने कहा कि अमृता ने उन्हें “बहुत परेशान” किया और “सच में बहुत बुरा हाल कर दिया था।” ओरी ने यह भी कहा कि इस अनुभव का असर सारा के साथ उनके रिश्ते पर भी पड़ा और इसने उन्हें और मजबूत बनाया।

पिंकविला से बात करते हुए ओरी ने कहा, “2021 में अमृता अली खान ने मुझे बहुत परेशान किया था। यह बहुत ज़्यादा था। मुझे नहीं लगता कि मैं पहले कभी ऐसी किसी चीज़ से गुजरा हूं। यह मेरी जिंदगी का बहुत मुश्किल और बुरा दौर था, उन्होंने सच में मुझे बहुत बुरी हालत में डाल दिया था।”

ओरी ने आगे कहा, “जब मैं उस स्थिति से बाहर निकला, तो लोग कहते थे कि तुम इससे और मजबूत होकर निकलोगे। मुझे लगता था, ‘मुझे इतनी ज्यादा मजबूती की जरूरत नहीं है।’ भला जिंदगी में इतनी मजबूती की किसे जरूरत होती है? फिर मुझे एहसास हुआ कि अब मुझ पर किसी चीज का कोई असर नहीं होता। मतलब, कोई भी चीज मुझे सच में दुखी नहीं करती।”

अपने अनुभव के बारे में बात करते हुए, ओरी ने कहा कि जिस “ट्रॉमा” (मानसिक सदमे) से वह गुजरे, उसने उन्हें और मजबूत बनाया और लोगों की नजर में रहने के दौरान मिली आलोचनाओं का सामना करने में मदद की। उन्होंने बताया, “मुझे लगता है कि उस समय जिस ट्रॉमा से मैं गुज़रा, उसने मुझे इतना मजबूत बना दिया कि जब मैं एक पब्लिक फिगर बना, तो शुरुआत में मुझे जो नफरत मिली, उसने मुझ पर कोई असर नहीं डाला।”

उन्होंने आगे कहा कि भले ही लोग उनकी “बेइज़्ज़ती” करते थे, लेकिन ऐसी आलोचनाओं का उन पर अब कोई भावनात्मक असर नहीं पड़ता। जब उनसे पूछा गया कि उनके और अमृता के बीच असल में क्या हुआ था, तो ओरी ने कहा, “सच कहूं तो, बुरे लोगों के साथ बुरी चीजें ही होती हैं। मैं बस इतना ही कहूंगा।”

ऑरी ने यह नहीं बताया कि अमृता सिंह के साथ उनके कथित झगड़े की असल वजह क्या थी, लेकिन उन्होंने उस अनुभव को बहुत ज़्यादा तकलीफ़देह बताया है। जनवरी 2026 में हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि सारा अली खान के साथ दोस्ती करने का मतलब होगा उस “ट्रॉमा” को नजरअंदाज करना या उसे ठीक मान लेना, जो उनकी मां ने उन्हें दिया था। ओरी ने यह भी कहा कि अगर अमृता माफी मांग लें, तो वह इस मामले को भूलने के लिए तैयार हैं। ऑरी अभी ‘खतरों के खिलाड़ी’ में नजर आ रहे हैं।