असल जिंदगी में बिल्कुल नॉन-ड्रामैटिक हैं आदित्य धर: यामी गौतम

बॉलीवुड अभिनेत्री यामी गौतम ने अपने पति और फिल्मकार आदित्य धर को असल जिंदगी में बेहद शांत और सहज स्वभाव का बताया है। सोनी मराठी के कार्यक्रम ‘कोण होणार करोडपति’ के आगामी एपिसोड में यामी अपनी फिल्म ‘नयी नवेली’ के प्रचार के दौरान अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के साथ बातचीत में अपनी प्रेम कहानी से जुड़े दिलचस्प किस्से साझा करेंगी।

इस एपिसोड में यामी गौतम और अभिनेता आदिनाथ कोठारे माधुरी दीक्षित के सामने हॉट सीट पर नजर आएंगे। इस दौरान यामी बताएंगी कि माधुरी की फिल्मों में दिखाई गई प्रेम कहानियों ने उनके प्यार को लेकर नजरिये को किस तरह प्रभावित किया।

माधुरी की फिल्मों की प्रेम कहानियों को याद करते हुए यामी कहती हैं आपकी फिल्में देखकर हमें लगता था कि प्रेम कहानी हो तो ऐसी हो। हर लड़की ऐसे ही किसी लम्हे का सपना देखती है, जिसमें मन ही मन लगे-‘पलट, पलट!’ लेकिन असल जिंदगी में आदित्य और मुझमें एक बात एक जैसी है। हम दोनों ही बहुत कम खुलने वाले और बिल्कुल नॉन-ड्रामैटिक लोग हैं।

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यामी ने बताया कि उनकी पहली मुलाकात फिल्म ‘उरी’ के सेट पर हुई थी। उस समय आदित्य फिल्म का निर्देशन कर रहे थे और यामी अभिनय कर रही थीं। शूटिंग के दौरान दोनों के बीच ज्यादा बातचीत नहीं हुई, लेकिन फिल्म के प्रचार के दौरान साथ में इंटरव्यू देते हुए उन्हें एक-दूसरे को बेहतर ढंग से जानने का मौका मिला।

यामी के अनुसार, बातचीत के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि जिंदगी, परिवार और संस्कारों को लेकर दोनों की सोच काफी मिलती है। आदित्य का शांत स्वभाव, सभी के प्रति सम्मान और काम के प्रति जुनून उन्हें बेहद पसंद आया।

यामी ने कहा हमारी पहली मुलाकात ‘उरी’ के सेट पर हुई थी। शूटिंग के दौरान हमारी ज्यादा बातचीत नहीं हुई। लेकिन प्रमोशन के समय जब हम साथ इंटरव्यू देते थे, तो एक-दूसरे के जवाब भी सुनते थे। तभी मुझे लगा कि इनके उसूल और पारिवारिक संस्कार मेरे जैसे हैं। आदित्य की यही बात मुझे बहुत अच्छी लगी। सेट पर मैं पहले ही देख चुकी थी कि वह कैसे इंसान हैं। ऐसे लोग बहुत कम मिलते हैं। वह कभी किसी पर गुस्सा नहीं करते थे, सबकी इज्जत करते थे और अपने काम को लेकर बेहद जुनूनी थे। साथ ही, बहुत शांत और सुलझे हुए भी थे।

इस पर माधुरी दीक्षित ने मुस्कुराते हुए कहा बिल्कुल आपकी तरह। यामी ने अपने जीवनसाथी के बारे में कहा ऐसा साथी मिलना बहुत बड़ी बात होती है। मैं बहुत खुशकिस्मत हूं कि आदित्य मेरे पति हैं। ‘कोण होणार करोडपति’ का यह विशेष एपिसोड सोनी मराठी पर सोमवार से शनिवार रात नौ बजे प्रसारित होता है। दर्शक इसे सोनी लिव पर भी देख सकते हैं।

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India exam reforms 2026: देश में बदलेगा प्रवेश परीक्षाओं का पैटर्न, पेपर लीक के बाद कंप्यूटर आधारित परीक्षा ढांचा तैयार करने पर जोर

India exam reforms 2026: केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रलहाद जोशी ने कहा कि भारत प्रौद्योगिकी और बड़े क्वेश्चन बैंक का इस्तेमाल करके अपनी परीक्षा व्यवस्था में महत्वपूर्ण बदलाव करेगा। सरकार पेपर लीक और नकल के आरोपों से सामने आई कमियों को दूर कर रही है, जिनकी वजह से हाल के समय में बड़े पैमाने पर छात्रों ने प्रदर्शन किया था। बुधवार को नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के मौके पर अपने विचार व्यक्त किए।

जोशी ने एक इंटरव्यू में जोशी ने कहा, “हम इसे और ज्यादा टेक्नोलॉजी पर आधारित बना रहे हैं, इसे अधिक निष्पक्ष बना रहे हैं, उन सभी कमियों को हम अभी दूर कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि सरकार जल्द से जल्द कंप्यूटर-बेस्ड एग्जाम सहित “सिस्टम में पूरा बदलाव” चाहती है। जोशी ने कहा कि भारत के सबसे जाने-माने टेक फाउंडर, इंफोसिस लिमिटेड के सह संस्थापक और अध्यक्ष नंदन नीलेकणी की अगुवाई वाला एक पैनल सिस्टम में सुधारों की जांच कर रहा है और उसने सरकार के साथ अपने प्लान पर चर्चा की है।

उन्होंने कहा कि पैनल को अभी अपनी रिपोर्ट देनी है, लेकिन उसकी सिफारिशों पर “बहुत, बहुत सकारात्मक और गंभीरता से” विचार किया जाएगा। हाल के वर्षों में भारत में परीक्षा पेपर लीक और दूसरी गड़बड़ियों की बाढ़ आ गई है, जिसमें मेडिकल स्कूलों के लिए अत्यंत प्रतियोगी प्रवेश परीक्षा से जुड़ी दिक्कतें भी शामिल हैं। इन नाकामियों की वजह से जुलाई में बड़े पैमाने पर छात्रों के प्रदर्शन हुए और दुनिया की कुछ सबसे बड़ी परीक्षाएं कराने वाली व्यवस्था की कमियां सामने आईं। इस अशांति के बीच पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा।

जोशी ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 को कुशल कर्मियों के कौशल और नियोक्ताओं की जरूरत के बीच के अंतर को कम करने के लिए जरूरी बताया। साथ ही कहा कि स्कूल वोकेशनल ट्रेनिंग, इनोवेशन, क्रिटिकल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत को अपनी बड़ी युवा आबादी को एक स्किल्ड वर्कफोर्स में बदलने की जरूरत है जो उसके मैन्युफैक्चरिंग के लक्ष्यों को पूरा कर सके।

Tripura Civic Polls: स्थानीय निकाय चुनाव के लिए त्रिपुरा SEC ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, नवंबर में होंगे अगरतला सहित 21 नगरपालिकाओं में चुनाव

शेख हसीना बोलीं- BRICS समिट छोड़ने से बांग्लादेश को नुकसान:रिश्ते सुधारने का मौका गंवाया; भारत ने न्यौता दिया था लेकिन PM रहमान नहीं आए

बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना ने कहा कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के BRICS समिट में शामिल न होने से बांग्लादेश को नुकसान हुआ। हसीना ने PTI को दिए इंटरव्यू में बुधवार को कहा कि रहमान के फैसले के चलते बांग्लादेश ने भारत के साथ रिश्ते सुधारने का मौका भी गंवा दिया। 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS समिट हुई थी। भारत ने रहमान को समिट में आने का न्योता दिया था, लेकिन वे नहीं पहुंचे थे। हसीना ने कहा कि अगर उनके भारत में रहने की वजह से तारिक रहमान भारत नहीं आए, तो यह दुख की बात है। दो देशों के रिश्ते किसी एक व्यक्ति या राजनीतिक मतभेदों के आधार पर तय नहीं होने चाहिए। हसीना बोलीं- बातचीत के रास्ते खोलना सरकार की जिम्मेदारी हसीना ने कहा कि BRICS सिर्फ नेताओं की बैठक नहीं है। इसमें दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएं शामिल होती हैं। समिट में शामिल होकर बांग्लादेश दूसरे देशों से सीख सकता था। लेकिन सरकार ने यह मौका गंवा दिया। उन्होंने कहा कि एक जिम्मेदार सरकार को देश के लिए दूसरे देशों से बातचीत और आगे बढ़ने के नए रास्ते खोलने चाहिए, न कि उन्हें बंद करना चाहिए। रहमान के पिता के भारत दौरे का जिक्र किया हसीना ने 1979 में बांग्लादेश के तत्कालीन राष्ट्रपति और तारिक रहमान के पिता जियाउर रहमान के भारत दौरे का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस समय वह दिल्ली में रह रही थीं। हसीना के मुताबिक, 1980 में जब जियाउर रहमान लंदन गए, तब भी वह वहीं थीं। इसके बावजूद उनकी मौजूदगी ने जियाउर रहमान के दौरे में कोई रुकावट नहीं डाली। हसीना ने कहा कि 15 अगस्त 1975 को उनके पिता और बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान समेत परिवार के कई सदस्यों की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद 3 नवंबर को ढाका की सेंट्रल जेल में चार बड़े नेताओं की भी हत्या हुई। हसीना ने जियाउर रहमान पर गलत तरीके से सत्ता में आने का आरोप लगाया। हसीना बोलीं- बांग्लादेश गंभीर संकट से गुजर रहा हसीना ने दावा किया कि बांग्लादेश इस समय बड़े संकट से गुजर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतंत्र कमजोर हुआ है और विरोधी दलों को अपनी बात रखने के मौके नहीं मिल रहे हैं। बांग्लादेश लौटकर लोकतंत्र बहाल करना चाहती हैं हसीना हसीना ने बांग्लादेश लौटने की कोई तारीख नहीं बताई। लेकिन उन्होंने कहा कि वह देश लौटकर लोकतंत्र बहाल करने की लड़ाई में शामिल होना चाहती हैं। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के लोगों को स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव में अपनी पसंद की सरकार चुनने का मौका मिलना चाहिए। हसीना के मुताबिक, उनकी वापसी इस दिशा में एक अहम कदम होगी। मौत की सजा के बावजूद बांग्लादेश लौटने से डर नहीं इंटरव्यू के दौरान हसीना ने माना कि बांग्लादेश लौटना उनके लिए जोखिम भरा हो सकता है। वहां की अदालत ने उन्हें मौत की सजा सुनाई है। इसके बावजूद उन्होंने कहा कि वह डरकर पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने 1975 में अपने पिता शेख मुजीबुर रहमान, मां, भाइयों और परिवार के कई सदस्यों की हत्या का जिक्र किया। हसीना ने कहा कि 1981 में सैन्य शासन और धमकियों के बावजूद वह बांग्लादेश लौटी थीं। उन्होंने 21 अगस्त 2004 को हुए ग्रेनेड हमले और खुद पर हुए दूसरे हमलों का भी जिक्र किया। हसीना ने कहा कि उन्हें जेल और राजनीतिक उत्पीड़न भी झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि आज उनकी सबसे बड़ी चिंता अपनी सुरक्षा नहीं, बल्कि बांग्लादेश में न्याय व्यवस्था की स्थिति है। उन्होंने मौत की सजा को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना सजा सुनाना न्याय नहीं है। 78 साल की शेख हसीना अगस्त 2024 में सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन के बाद सत्ता से हट गई थीं। इसके बाद वह बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गईं। तब से वह यहीं रह रही हैं। ————————- ये खबर भी पढ़ें… पूर्व बांग्लादेशी एडवाइजर यूनुस को लोगों ने आतंकवादी कहा: न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर घेरा बांग्लादेश के पूर्व चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को अमेरिका के न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विरोध का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और ‘आतंकवादी’ कहा। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Gaon Chalo Andolan: गुजरात से यूपी-बिहार में वापस अपने घर लौट रहे हैं लाखों माइग्रेंट वर्कर, जानें सूरत के ‘गांव चलो आंदोलन’ का सच

गुजरात के बड़े टेक्सटाइल और डायमंड हब सूरत में काम कर रहे लाखों की संख्या में प्रवासी मजदूर में हाल के समय में बड़ा और अहम ट्रेंड देखने को मिल रहा है। उत्तर प्रदेश और बिहार के यह प्रवासी कामगार अपने गृह नगर वापस लौट रहे हैं। स्थानीय खबरों में इसे ‘गांव चलो आंदोलन’ कहा जा रहा है। रेलवे प्लेटफॉर्म पर माइग्रेंट वर्कर्स की भीड़ और एम्ब्रॉयडरी और टेक्सटाइल यूनिट्स से वर्कर्स के जाने की खबरों में बड़े पैमाने पर पलायन का दावा किया जा रहा है। कुछ खबरों का कहना है कि इसमें 10 लाख तक वर्कर्स शामिल हो सकते हैं।

बताया जा रहा है कि ‘गांव चलो आंदोलन’ है एक कैंपेन है जो वर्कर्स को लंबे समय तक काम करने, साप्ताहिक अवकाश न मिलने, सैलरी में कटौती और नौकरी से निकाले जाने के आरोपों के बीच अपने गांवों में लौटने को बढ़ावा दे रही है। सीएनएन न्यूज 18 की खबर के मुताबिक मजदूर प्रतिनिधियों का कहना है कि वर्कर्स उन काम करने के हालात को मानने को तैयार नहीं हैं जिन्हें वे सही नहीं मानते हैं। हालांकि, सूरत से मिली दूसरी रिपोर्ट्स बताती हैं कि कई वर्कर्स दिवाली और छठ पूजा से पहले बस घर जा रहे हैं, जैसा कि वे हर साल करते हैं। तो, सूरत में असल में क्या हो रहा है? क्या माइग्रेंट वर्कर्स को गुजरात से बाहर जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है, या यह रेगुलर सीजनल माइग्रेशन बढ़ते लेबर विवाद के साथ हुआ है?

क्या है ‘गांव चलो आंदोलन’?

‘गांव चलो आंदोलन’, सूरत की टेक्सटाइल और एम्ब्रॉयडरी इंडस्ट्री में काम करने वाले प्रवासी मजदूरों से जुड़ा एक अभियान है। काम के घंटे, हर हफ्ते की छुट्टियां, सैलरी और मजदूर सुरक्षा लागू करने को लेकर कामगारों और फैक्ट्री मालिकों के बीच लंबे समय से चल रहे मतभेद के बीच इसने ध्यान खींचा है। अक्टूबर की शुरुआत में इस कैंपेन ने फिर से जोर पकड़ा, जब लेबर कोड के पालन से जुड़े भरोसे और श्रम विभाग के निर्देश के बाद पहले के विरोध प्रदर्शन बंद कर दिए गए थे। इसके बाद वर्कर के प्रतिनिधि अजय दुबे ने वर्कर्स से कहा कि अगर उनकी चिंताओं का समाधान नहीं होता है तो वे कम से कम दो महीने के लिए अपने गांव लौटने पर विचार करें।

द टाइम्स ऑफ इंडिया की 3 अक्टूबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुबे ने वर्कर्स से कहा कि वे मालिकों से साफ जवाब की मांग करें, जहां जरूरी हो वहां लेबर अधिकारियों को अलग-अलग शिकायतें दें, और उन जगहों पर जाने पर विचार करें जो लेबर की जरूरतों का पालन करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर हर हफ्ते की छुट्टियां देने से मना किया जाता रहा तो वर्कर्स रविवार को मशीनरी बंद कर दें।

इसलिए यह आंदोलन सिर्फ वर्कर्स के शहर छोड़ने के बारे में नहीं है। यह लेबर की कमी की संभावना का इस्तेमाल करके नियोक्ताओं पर लंबे समय से चली आ रही काम की जगह की शिकायतों को दूर करने का दबाव बनाने की भी एक कोशिश है।

वर्कर्स सूरत क्यों छोड़ रहे हैं? फैक्ट्री मालिकों पर आरोप

सूरत से मिली खबरों में इंटरव्यू किए गए कामगारों का कहना है कि उन्हें आराम करने के लिए बहुत कम समय मिलता है और उनके काम की अवधि पर उनका नियंत्रण कम होता है। कई वर्कर्स का आरोप है कि उनसे दिन में लगभग 12 घंटे और कुछ जगहों पर तो महीने में 30 दिन तक काम करने की उम्मीद की जाती है। उनका कहना है कि हफ्ते में एक दिन की छुट्टी मांगने पर मैनेजमेंट के साथ झगड़े हो सकते हैं, जबकि छुट्टी मांगने पर सैलरी कट सकती है, पेमेंट रोका जा सकता है या नौकरी से निकाला जा सकता है।

मुख्य मांगों में से एक है काम के घंटे घटाकर दिन में आठ घंटे करना, साथ ही पेड वीकली छुट्टी, बेहतर होगा कि रविवार को दी जाए। मजदूरों ने समय पर वेतन देने और मज़दूरों की सुरक्षा को बेहतर तरीके से लागू करने की भी मांग की है, जिसमें प्रोविडेंट फंड, एम्प्लॉई स्टेट इंश्योरेंस (ESI) और जहां लागू हो, वहां ग्रेच्युटी बेनिफिट शामिल हैं।

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Parag Parikh MF: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने कैश होल्डिंग घटाई, इन दो कंपनियों पर लगाया बड़ा दांव

Parag Parikh MF: पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फंड ने अपने पास रखी नकदी में बड़ी कटौती की है। एक साल पहले फंड की कैश होल्डिंग करीब 24% थी। अब यह घटकर 9.7% रह गई है। शेयरों की कीमतों में गिरावट के बाद फंड को निवेश के नए मौके दिख रहे हैं। इसलिए उसने बाजार में पैसा लगाना बढ़ा दिया है।

PPFAS Mutual Fund के को-फंड मैनेजर (इक्विटी) और हेड ऑफ रिसर्च रौनक ओंकार ने CNBC-TV18 को एक इंटरव्यू में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शेयरों की वैल्यूएशन अब पहले के मुकाबले आकर्षक हो रही है। फंड को कुछ कंपनियों के शेयर कम कीमत पर मिल रहे हैं। इसलिए उसने इन कंपनियों में अच्छी-खासी रकम लगाई है।

ओंकार ने बताया कि फंड ऐसी कंपनियों पर भी नजर रख रहा है, जिनके कारोबार से लगातार कैश आता है। फिलहाल बाजार का ज्यादा ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों पर है। इस वजह से कई दूसरी कंपनियों पर निवेशकों का ध्यान कम गया है।

उनके मुताबिक, ऐसी कुछ कंपनियों के शेयर उनकी कमाई और कैश फ्लो के मुकाबले कम वैल्यूएशन पर मिल रहे हैं। इससे मजबूत कारोबार वाली कंपनियों में निवेश का मौका बन रहा है।

DLF में PPFAS क्यों लगा रहा है पैसा?

PPFAS Mutual Fund ने अपने पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट कंपनी DLF के शेयर भी शामिल किए हैं। ओंकार ने बताया कि DLF के पास काफी बड़ी जमीन है। कंपनी के पास प्रोजेक्ट पूरे करने की अच्छी क्षमता भी है। इसके अलावा, उसने अपना कर्ज कम किया है। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है।

ओंकार के मुताबिक, अब DLF में निवेश का मौका इस बात में है कि कंपनी अपनी जमीन का इस्तेमाल किस तरह करती है। वह नए प्रोजेक्ट बनाकर कारोबार बढ़ा सकती है। साथ ही, उसके कमर्शियल प्रॉपर्टी से किराये के रूप में लगातार कैश भी आता है।

उन्होंने यह भी कहा कि DLF की बैलेंस शीट पहले से मजबूत है। कर्ज कम होने के कारण कंपनी के पास विस्तार के लिए ज्यादा गुंजाइश है। इससे वह उत्तर भारत के अपने पारंपरिक बाजार से आगे दूसरे क्षेत्रों में भी कारोबार बढ़ा सकती है।

CMS Info Systems पर क्यों है PPFAS की नजर?

PPFAS Mutual Fund ने CMS Info Systems में भी निवेश किया है। इस कंपनी के कारोबार का एक बड़ा हिस्सा कैश से जुड़ा है। ओंकार के मुताबिक, देश की अर्थव्यवस्था में आज भी नकदी का इस्तेमाल हो रहा है। इसलिए बैंकों और दूसरे कैश एक्सेस पॉइंट्स के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत बनी हुई है।

उन्होंने कहा कि देश में चलन में मौजूद नकदी का स्तर नोटबंदी के समय के मुकाबले ज्यादा है। अर्थव्यवस्था में कई तरह के लेनदेन अब भी कैश से होते हैं। ऐसे में बैंकों और दूसरी जगहों पर नकदी पहुंचाने और उसे संभालने के लिए भरोसेमंद ऑपरेटर जरूरी हैं।

CMS Info Systems इसी तरह के काम से जुड़ी कंपनी है। वह कैश लेनदेन के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर संभालती है। हालांकि, ओंकार ने यह भी माना कि कंपनी के मुख्य कारोबार में ऑर्गेनिक ग्रोथ बहुत मजबूत नहीं है। इसी वजह से उसके शेयर की वैल्यूएशन भी ज्यादा ऊंची नहीं है।

इसके बावजूद कंपनी का कैश फ्लो मजबूत है। यानी कारोबार से उसके पास लगातार पैसा आता है। कंपनी अपने मौजूदा कारोबार से जुड़े दूसरे क्षेत्रों में भी विस्तार के मौके तलाश रही है।

प्राइवेट बैंकों में 20% निवेश से संतुष्ट है PPFAS

PPFAS Mutual Fund के पोर्टफोलियो का करीब 20% हिस्सा प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में लगा है। इसमें HDFC Bank, ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank जैसे शेयर शामिल हैं।

ओंकार ने कहा कि फंड बैंकिंग शेयरों में अपने मौजूदा निवेश से संतुष्ट है। उसे इस सेक्टर में लगातार अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की जरूरत नहीं दिखती। उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि इसमें इससे आगे निवेश बढ़ाते रहना सही होगा। आखिर यह बैंकिंग फंड नहीं है। हमने अपने पोर्टफोलियो में बैंकिंग सेक्टर को एक तय हिस्सेदारी दी है।’

ओंकार ने फंड की मौजूदा पसंद के हिसाब से बैंकों की रैंकिंग भी बताई। इसमें HDFC Bank पहले नंबर पर है। इसके बाद ICICI Bank, Axis Bank और Kotak Mahindra Bank का स्थान है।

हालांकि, यह रैंकिंग हमेशा एक जैसी रहेगी, ऐसा नहीं है। ओंकार के मुताबिक, समय के साथ इन बैंकों में निवेश का अनुपात बदल सकता है। यह बाजार की चाल, शेयरों के प्रदर्शन और संबंधित बैंकों के कारोबार की स्थिति पर निर्भर करेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IND vs WI: ‘तूफान होकर भी वैभव सूर्यवंशी पिला रहा पानी’ खिलाड़ी को बेंच पर बैठाने को लेकर भड़के कोच

Vaibhav Sooryavanshi: भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज जारी है। पांच मैचों की T20I सीरीज में युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को भी जगह दी गई है। वहीं उन्हें अभी प्लेइंग 11 में शामिल नहीं किया गया है। फैंस को वैभव को मैदान पर देखने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। 15 साल के वैभव ने जुलाई 2026 में इंग्लैंड दौरे पर भारत के लिए अपना अंतरराष्ट्रीय डेब्यू किया था। लेकिन भारत लौटने के बाद उन्हें लगातार खेलने का मौका नहीं मिल पाया। टीम में ओपनिंग के लिए अभिषेक शर्मा और संजू सैमसन को प्राथमिकता मिलने के कारण वैभव को फिलहाल बेंच पर रहना पड़ रहा है।

वहीं हाल ही में एक इंटरव्यू में वैभव सूर्यवंशी के बचपन के कोच मनीष ओझा ने गौतम गंभीर की अगुवाई वाली टीम मैनेजमेंट पर युवा खिलाड़ी को संभालने के तरीके को लेकर सवाल उठाए। आइए जानते हैं कोच ने क्या कहा

बेंच पर बैठकर नहीं तैयार होते खिलाड़ी

सूर्यवंशी के बचपन के कोच मनीष ओझा ने स्पोर्ट्स नाउ से कहा, “मेरे हिसाब से, वैभव एक तूफान की तरह है। जो कोई भी उसे रोकने की कोशिश करेगा, वह आखिरकार टूट जाएगा, आज नहीं तो कल।” कोच ने आगे कहा, “मौजूदा भारतीय टीम मैनेजमेंट का मानना है कि खिलाड़ियों को बेंच पर बैठाकर तैयार किया जा सकता है। लेकिन क्रिकेट के कई दिग्गजों से बात करेंगे तो वे भी यही कहेंगे कि अगली पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने के लिए उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में उतारना जरूरी है। उन्हें खेलने का मौका देना होगा। बेंच पर बैठकर कोई खिलाड़ी न पहले कभी बना है और न आगे बनेगा। खासकर तब, जब आपके पास वैभव जैसा टैलेंट मौजूद हो।”

मैनेजमेंट के रवैये को “तानाशाही” बताया

ओझा ने टीम मैनेजमेंट के फैसलों पर सवाल उठाते हुए उनके रवैये को “तानाशाही” जैसा बताया। उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि उन्होंने तय कर लिया है कि इस बच्चे को मौका नहीं देना है। उसे बाहर रखेंगे और परेशान करेंगे। वह अभी बेंच पर बैठकर पानी पिला रहा है। मुझे लगता है कि मौजूदा मैनेजमेंट का रवैया एक तरह की तानाशाही जैसा है, जहां वे वही कर रहे हैं जो उन्हें सही लग रहा है।”

एशियन गेम्स में मिला था मौका

2026 के एशियन गेम्स के दौरान टीम इंडिया के T20I की जिम्मेदारी वीवीएस लक्ष्मण के पास थी। उस समय गौतम गंभीर वेस्टइंडीज के खिलाफ घरेलू वनडे सीरीज में व्यस्त थे। इसी दौरान टीम ने संजू सैमसन को बल्लेबाजी क्रम में नीचे भेजा और वैभव सूर्यवंशी को अभिषेक शर्मा के साथ पारी की शुरुआत करने का मौका मिला। इसके बाद वेस्टइंडीज के खिलाफ T20I सीरीज में टीम इंडिया ने बल्लेबाजी क्रम में फिर बदलाव किया। संजू सैमसन को दोबारा ओपनिंग की जिम्मेदारी दी गई और उन्होंने शुरुआती तीन मुकाबलों में पारी की शुरुआत की। वहीं, वैभव सूर्यवंशी को इन मैचों में प्लेइंग XI में जगह नहीं मिली और उन्हें बेंच पर बैठकर ही इंतजार करना पड़ा।

Rahul Dravid: राहुल द्रविड़ के 17 साल के बेटे अन्वय ने मचाया तहलका, 41 गेंदों में खेली 85 रन की विस्फोटक पारी

OTT Crime Thrillers: अगर आप भी हैं डिजिटल क्राइम थ्रिलर्स के दीवाने, ओटीटी पर इन फिल्मों और सीरीज का उठा सकते हैं लुत्फ

OTT Crime Thrillers: इन्फ्लुएंसर अंकुश बहुगुणा के 40 घंटे के ‘डिजिटल-अरेस्ट’ के बुरे अनुभव से लेकर हाल ही में जाह्नवी कपूर के AI-जनरेटेड डीपफेक वीडियो तक, भारत में डिजिटल धोखाधड़ी एक गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। जहां एक घटना साइबर फ्रॉड और आर्थिक शोषण के खतरे को उजागर करती है, वहीं दूसरी यह दिखाती है कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का गलत इस्तेमाल करके तस्वीरों में हेरफेर की जा सकती है और लोगों की प्राइवेसी का उल्लंघन किया जा सकता है।

ऐसी घटनाएं टेक्नोलॉजी के बुरे पहलुओं को सामने लाती हैं। इसलिए भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री भी दिलचस्प ड्रामा, थ्रिलर और डॉक्युसीरीज के जरिए इन विषयों को दिखा रही है। फिशिंग नेटवर्क से लेकर फाइनेंशियल स्कैम और AI-आधारित हेरफेर तक, यहा कुछ ऐसे भारतीय शो और फिल्में हैं, जो डिजिटल धोखाधड़ी के कई रूपों पर रोशनी डालते हैं।

1. स्कैम 1992 द हर्षद मेहता स्टोरी-Sony LIV

1992 के सिक्योरिटीज स्कैम पर आधारित, ‘स्कैम 1992’ स्टॉकब्रोकर हर्षद मेहता के उत्थान और पतन की कहानी है। हर्षद मेहता मुंबई के स्टॉक मार्केट में मशहूर हुए थे, लेकिन बाद में भारत के सबसे कुख्यात फाइनेंशियल स्कैम में फंस गए। प्रतीक गांधी अभिनीत और हंसल मेहता द्वारा निर्देशित यह सीरीज बैंकिंग की कमियों, फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन और उन मीडिया इन्वेस्टिगेशन को दिखाती है, जिनकी वजह से यह स्कैम सबके सामने आया। पत्रकार सुचेता दलाल और देबाशीष बसु की किताब ‘द स्कैम हू वॉन, हू लॉस्ट, हू गॉट अवे’ पर आधारित यह सीरीज फाइनेंशियल मार्केट की जटिलताओं और सिस्टम की कमियों का फायदा उठाने के नतीजों की झलक दिखाती है। यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि स्कैम तब पनपते हैं जब लोग और संस्थाएँ उन सिस्टम पर सवाल नहीं उठाते जिन पर वे भरोसा करते हैं।

2. CTRL- Netflix

अनन्या पांडे और विहान सामत अभिनीत, ‘CTRL’ एक इन्फ्लुएंसर की कहानी है, जो अपनी डिजिटल जिंदगी से अपने एक्स-बॉयफ्रेंड की यादें मिटाने के लिए एक AI ऐप का सहारा लेती है। लेकिन बाद में उसे पता चलता है कि उस टेक्नोलॉजी का मकसद बहुत खतरनाक है। विक्रमादित्य मोटवाने द्वारा निर्देशित यह नेटफ्लिक्स थ्रिलर दिखाती है कि कैसे पर्सनल डेटा, AI टूल्स और टेक्नोलॉजी पर बढ़ती निर्भरता का इस्तेमाल लोगों को मैनिपुलेट करने के लिए किया जा सकता है।

3. स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी- Sony LIV

स्टॉक मार्केट से नकली कागजात के मामले की ओर बढ़ते हुए, ‘स्कैम 2003 द तेलगी स्टोरी’ अब्दुल करीम तेलगी के स्टाम्प पेपर के नकली कारोबार की कहानी दिखाती है। गगन देव रियार की मुख्य भूमिका वाली यह सीरीज दिखाती है कि कैसे स्टाम्प पेपर सिस्टम की कमियों का फायदा उठाकर यह रैकेट एक बड़े नेटवर्क में बदल गया। पत्रकार संजय सिंह की किताब ‘तेलगी स्कैम: रिपोर्टर्स डायरी’ पर आधारित यह शो इस कारोबार के दायरे और उस नेटवर्क के बारे में बताता है जिसने इसे एक बड़े फाइनेंशियल स्कैम में बदल दिया।

4. जामताड़ा सबका नंबर आएगा-Netflix

बड़े फाइनेंशियल संस्थानों से हटकर आम फोन यूजर्स पर फोकस करते हुए, ‘जामताड़ा सबका नंबर आएगा’ झारखंड के जामताड़ा शहर से जुड़े फिशिंग स्कैम की कहानी दिखाती है, जो ऑनलाइन धोखाधड़ी के लिए बदनाम है। यह क्राइम ड्रामा उन युवा लड़कों की कहानी है जो फोन कॉल के जरिए अनजान लोगों को धोखा देकर उनकी जरूरी बैंकिंग जानकारी हासिल कर लेते हैं।

5. बैड बॉय बिलियनेयर्स इंडिया-Netflix

यह डॉक्यूमेंट्री सीरीज विजय माल्या, नीरव मोदी और सुब्रत रॉय जैसे मशहूर भारतीय बिजनेस दिग्गजों से जुड़े विवादों और आरोपों की पड़ताल करती है। आर्काइवल फ़ुटेज, इंटरव्यू और इन्वेस्टिगेटिव स्टोरीटेलिंग के जरिए, यह ताकतवर बिजनेस एम्पायर के बनने और उसके बाद हुए कानूनी और फाइनेंशियल विवादों को दिखाती है।

पाकिस्तान में फिजिक्स गोल्ड मेडलिस्ट युवती ने खुदकुशी की:हार्वर्ड में एडमिशन दिलाने के नाम पर 93 लाख की ठगी, जमीन बेचकर रुपए जुटाए थे

पाकिस्तान में एक 20 साल की युवती ने पढ़ाई के नाम पर हुई 93 लाख रुपए की ठगी के बाद खुदकुशी कर ली। फिजिक्स गोल्ड मेडलिस्ट रही युवती का नाम लैबा इजाज है। वह अमेरिका की हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में पढ़ना चाहती थीं। परिवार का आरोप है कि एडमिशन, स्कॉलरशिप और अमेरिकी वीजा दिलाने का वादा करने वाले एक व्यक्ति ने उनसे पैसे लिए और फर्जी दस्तावेज दे दिए। 9 अक्टूबर को इस्लामाबाद के जी-10 सेक्टर के एक बाजार में लैबा का शव मिला। मामले में पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। हार्वर्ड में पढ़ने के लिए परिवार ने जमीन बेची, गहने गिरवी रखे लैबा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के सरगोधा की रहने वाली थीं। उन्होंने इंटरनेशनल इस्लामिक यूनिवर्सिटी इस्लामाबाद से फिजिक्स में ग्रेजुएशन किया था और गोल्ड मेडल हासिल किया था। उनका सपना अमेरिका में आगे की पढ़ाई करके वैज्ञानिक बनने का था। उनके पिता 1994 से इस्लामाबाद की सड़कों पर दूध और दही बेचकर परिवार चलाते हैं। बेटी की पढ़ाई के लिए उन्होंने घर बनाने के मकसद से खरीदी जमीन बेच दी। उनकी मां ने भी अपने गहने गिरवी रख दिए। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, लैबा को सऊदी अरब में पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप मिली थी, लेकिन उन्होंने अमेरिका में पढ़ने के अपने सपने को प्राथमिकता दी। एडमिशन और वीजा दिलाने का वादा करके लिए 93 लाख रुपए परिवार ने मोहम्मद नौमान नाम के व्यक्ति से संपर्क किया था। उसने खुद को विदेशी शिक्षा से जुड़ा कंसल्टेंट बताया और हार्वर्ड में एडमिशन, स्कॉलरशिप और अमेरिकी वीजा दिलाने का भरोसा दिया। परिवार का आरोप है कि नौमान ने इसके बदले 93 लाख पाकिस्तानी रुपए लिए। उसने यूनिवर्सिटी में एडमिशन और फीस जमा होने से जुड़े दस्तावेज भी दिए, लेकिन बाद में उनकी पुष्टि नहीं हो सकी। पाकिस्तान की FIA के मुताबिक, इस रकम में से 29 लाख रुपए लैबा के बैंक खाते के जरिए ट्रांसफर किए गए थे, जबकि बाकी पैसे नकद दिए गए थे। अमेरिकी दूतावास में फर्जी दस्तावेज का खुलासा हुआ लैबा जब इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास में वीजा इंटरव्यू के लिए पहुंचीं, तो उनके दस्तावेजों की पुष्टि नहीं हो सकी। परिवार ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और अमेरिकी दूतावास से भी संपर्क किया, लेकिन दस्तावेजों को सही नहीं पाया गया। लैबा के बहनोई जैद बिन अफजल के मुताबिक, आरोपी कई बार वीजा इंटरव्यू की तारीख आगे बढ़ाता रहा। वह कथित तौर पर तय तारीख से एक रात पहले फोन करके इंटरव्यू रद्द होने की बात कह देता था। आरोप है कि बाद में उसने 12 अक्टूबर को इंटरव्यू होने की बात कही और उससे पहले 22 लाख पाकिस्तानी रुपए और मांगे। तब तक लैबा को कथित धोखाधड़ी का पता चल चुका था और वह काफी परेशान थीं। एक आरोपी गिरफ्तार, दूसरे के खिलाफ भी मामला दर्ज पाकिस्तान की FIA ने 11 अक्टूबर को मुहम्मद नौमान की गिरफ्तारी की पुष्टि की। एजेंसी ने फातिमा सरवर नाम की एक अन्य व्यक्ति के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। FIA के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर फर्जी स्कॉलरशिप लेटर, यूनिवर्सिटी में एडमिशन के प्रस्ताव और फीस जमा करने की रसीदें तैयार की थीं। एजेंसी मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मामले का संज्ञान लेते हुए पुलिस अधिकारियों को जल्द कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने भी लैबा के परिवार से मुलाकात की और मामले की निगरानी करने का भरोसा दिया। विदेश में पढ़ाई के नाम पर ठगी कैसे होती है? विदेश की नामी यूनिवर्सिटी में एडमिशन, स्कॉलरशिप और वीजा दिलाने का सपना दिखाकर ठग छात्रों से लाखों रुपए वसूलते हैं। वे फर्जी एडमिशन लेटर, स्कॉलरशिप के दस्तावेज और फीस की रसीदें दिखाकर परिवारों का भरोसा जीतते हैं। ठगी के 5 तरीके… 1. नामी यूनिवर्सिटी में एडमिशन का वादा: ठग दावा करते हैं कि उनके यूनिवर्सिटी में सीधे संपर्क हैं और वे आसानी से एडमिशन दिला सकते हैं। 2. स्कॉलरशिप का झांसा: वे पूरी या बड़ी स्कॉलरशिप दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन या प्रोसेसिंग फीस मांगते हैं। कई बार फर्जी स्कॉलरशिप लेटर भी देते हैं। 3. फर्जी दस्तावेज: यूनिवर्सिटी के नाम और लोगो का इस्तेमाल करके नकली एडमिशन लेटर, फीस की रसीदें और स्कॉलरशिप के कागज तैयार किए जाते हैं। 4. वीजा की गारंटी:कुछ एजेंट वीजा लगवाने का दावा करके अतिरिक्त पैसे मांगते हैं। जबकि वीजा देने का फैसला संबंधित देश के अधिकारी करते हैं। 5. देरी का डर दिखाकर रकम मांगना: ठग एडमिशन, फीस या वीजा प्रक्रिया का हवाला देकर हर बार नए पैसे मांगते हैं। वे यह दबाव भी बनाते हैं कि देर होने पर मौका हाथ से निकल जाएगा। ठगी होने पर क्या करें? पैसे गंवाने पर तुरंत बैंक से संपर्क करें और पुलिस या संबंधित साइबर अपराध एजेंसी में शिकायत दर्ज कराएं। फर्जी दस्तावेजों की जानकारी यूनिवर्सिटी को भी दें। ————————– ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान के खैबर-पख्तूनख्वा में इमरान की पार्टी की सरकार बर्खास्त:इमरजेंसी लगी; पूर्व पीएम की रिहाई के लिए राज्य के CM मार्च निकाल रहे थे पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने रविवार को खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में इमरजेंसी लगा दी और सरकार बर्खास्त कर दी। राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने इसकी घोषणा की। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Saif Ali Khan: सालों तक सीक्रेट अकाउंट रखने के बाद सैफ अली खान ने इंस्टाग्राम पर मारी ऑफिशियली एंट्री, शेयर की पहली फोटो

Saif Ali Khan: सैफ अली खान आखिरकार ‘सैफ अली खान पटौदी’ के नाम से इंस्टाग्राम पर आ गए हैं। अभी उनके ऑफिशियल अकाउंट पर एक पोस्ट और एक फॉलोअर है। यह अकाउंट करीना कपूर खान को फॉलो कर रहा है। हालांकि अभी उन्होंने अपने बच्चों सारा अली खान, इब्राहिम और बहनों सबा और सोहा को फोलो नहीं किया है।

एक शेयर करते हुए सैफ अली खान ने कैप्शन में लिखा- “पटौदी लाइब्रेरी… किताबों को उनके कवर से परखना…” कैरोसेल तस्वीरों में से एक में सैफ किताब पढ़ते हुए दिख रहे हैं, जो उनका पसंदीदा शगल है।

दो साल पहले हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में सैफ अली खान ने बताया था कि उन्हें इंस्टाग्राम ब्राउज करना पसंद नहीं है। उन्होंने कहा, “मेरे पास इंस्टाग्राम ऐप है और एक सीक्रेट अकाउंट भी है। मैं कभी-कभी इसे ब्राउज करता हूं, लेकिन मुझे इसमें ज्यादा मजा नहीं आता। जब भी मैं इसे थोड़ी देर के लिए ब्राउज करता हूं तो मैं इसे डिलीट करने का वादा तो करता हूं, लेकिन आखिर में इसे डिलीट नहीं करता।”

सैफ अली खान ने यह भी बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया की लाइमलाइट से दूर रहने का फैसला क्यों किया। एक्टर ने कहा था कि वह अपनी कोई खास इमेज नहीं बनाना चाहते थे और न ही अपने बारे में पोस्ट शेयर करना चाहते थे। उन्होंने कहा, “मैं ऐसी स्थिति में नहीं फंसना चाहता जहां मुझे दूसरों की चीजें पोस्ट करनी पड़ें। मुझे इस बात से बहुत सुकून मिलता है कि कोई भी मुझसे किसी चीज को प्रमोट करने के लिए नहीं कहता, क्योंकि उन्हें पता है कि मैं सोशल मीडिया पर नहीं हूं। इसलिए मुझे काफी शांति और सुकून मिलता है।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कभी इंस्टाग्राम पर पब्लिक अकाउंट खोलेंगे तो सैफ अली खान ने अपने फैंस को सस्पेंस में रखा। “कभी ‘कभी नहीं’ मत कहो। हो सकता है मैं सोशल मीडिया जॉइन कर लूं। कौन जानता है!” उन्होंने आगे कहा था, “मुझे तस्वीरें लेना पसंद है, मुझे कभी-कभी चीजें रिकॉर्ड करना भी अच्छा लगता है। इसलिए अगर उन्हें शेयर करने की बात हो तो मैं खुद को ऐसा करते हुए देख सकता हूं।”

सैफ अली खान और करीना कपूर के बेटे तैमूर और जेह हैं। काम की बात करें तो करीना कपूर आखिरी बार ‘दायरा’ में और सैफ ‘हैवान’ में नजर आए थे।

ट्रम्प बोले- रूस और यूक्रेन में एनर्जी सीजफायर हुआ:एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमला नहीं करेंगे; समझौता न तोड़ने की चेतावनी दी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया है कि रूस और यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने के लिए सहमत हो गए हैं। उन्होंने रविवार को ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर कहा कि सीजफायर तत्काल प्रभाव से लागू होगा और दोनों देशों को इसका पालन करना चाहिए। हालांकि, ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि सीजफायर कितने समय तक लागू रहेगा। रूस और यूक्रेन की ओर से इस समझौते की आधिकारिक पुष्टि और इसकी शर्तों की जानकारी भी सामने नहीं आई है। रूस की तेल रिफाइनरियों पर हमलों से ट्रम्प नाराज ट्रम्प रूस की तेल रिफानरियों पर यूक्रेन के हमलों को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। उन्होंने शनिवार को इन हमलों की आलोचना करते हुए कहा कि इन हमलों से दुनिया में ईंधन की समस्या बढ़ सकती है। दरअसल, यूक्रेन रूस की तेल से जुड़ी सुविधाओं को निशाना बना रहा है। इससे रूस की तेल से होने वाली कमाई और उसकी सेना तक ईंधन पहुंचाने की व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है। रूस ने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू किया था। तब से दोनों देशों के बीच युद्ध जारी है। जेलेंस्की बोले थे- रूस हमले रोके तो हम भी हमला बंद करेंगे यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा था कि अगर रूस यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोक देता है, तो यूक्रेन भी रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमले बंद करने को तैयार होगा। उन्होंने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा था कि तनाव कम करने के लिए दोनों देशों को एक साथ कदम उठाने होंगे और इसके लिए पक्की सुरक्षा गारंटी भी जरूरी है। जेलेंस्की ने चुनाव कराने के लिए 2 महीने के सीजफायर की मांग रखी जेलेंस्की ने कहा है कि अगर ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति पुतिन यूक्रेन में चुनाव चाहते हैं, तो रूस को 60 दिन के लिए युद्ध रोकना होगा। जेलेंस्की ने कहा कि इस दौरान पूरी तरह सीजफायर लागू होने पर यूक्रेन चुनाव कराने के लिए तैयार है। 11 अक्टूबर को ABC न्यूज को दिए इंटरव्यू में जेलेंस्की ने कहा कि देश का अगला नेता कौन होगा, यह फैसला यूक्रेन की जनता करेगी। उन्होंने कहा कि यूक्रेन में मार्शल लॉ लागू होने के कारण फिलहाल चुनाव नहीं कराए जा सकते। रूस के हमले के बाद देश में मार्शल लॉ लगाया गया था। जेलेंस्की बोले- पुतिन को रोकना ज्यादा मुश्किल जेलेंस्की ने कहा कि कुछ नेता युद्ध जारी रहने के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, क्योंकि वे पुतिन को रोकने का तरीका नहीं खोज पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दूसरों पर दबाव डालने के मुकाबले पुतिन को रोकना ज्यादा मुश्किल है। अमेरिका में ईंधन की बढ़ती कीमतों के लिए यूक्रेन के हमलों को जिम्मेदार ठहराने वाले ट्रम्प के दावे को भी जेलेंस्की ने खारिज किया। उन्होंने कहा कि कीमतें बढ़ने की वजह मध्य पूर्व में युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी है। जेलेंस्की ने उम्मीद जताई कि अमेरिका, यूरोप और यूक्रेन मिलकर रूस को रोकने की कोशिश जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि यूक्रेन को अमेरिकी मदद की उम्मीद है, लेकिन वह अपनी आजादी और स्वतंत्रता की रक्षा भी करता रहेगा। खबर अपडेट हो रही है…