EPF पोर्टल के बाद उमंग ऐप भी लॉक! पीएफ खाताधारकों के लिए जरूरी अपडेट, जानें कब तक नहीं कर पाएंगे क्लेम

EPFO Alerts: अगर आप भी नौकरीपेशा हैं और अपने PF खाते से एडवांस निकालने, क्लेम सेटलमेंट करने या बैलेंस चेक करने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आपके लिए एक बेहद जरूरी खबर है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने अपने पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन क्लेम सर्विसेज को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है।

इतना ही नहीं, ईपीएफओ पोर्टल के साथ-साथ सरकारी उमंग ऐप (Umang App) पर मिलने वाली पीएफ सेवाएं भी अगले कुछ दिनों तक उपलब्ध नहीं रहेंगी। इस शटडाउन के कारण करोड़ों पीएफ सब्सक्राइबर्स प्रभावित हो सकते हैं। जानिए ये सेवाएं कब से कब तक बंद रहेंगी और आप कब से दोबारा काम कर पाएंगे।

EPFO पोर्टल: 3 दिनों तक बंद रहेगी क्लेम सर्विस

EPFO द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक, सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन और डेटाबेस सिस्टम को मजबूत करने के लिए एक तय प्लानिंग के तहत माइग्रेशन का काम किया जा रहा है। ऑनलाइन क्लेम सबमिशन और प्रोसेसिंग की सेवाएं 26 जून की रात 00:00 बजे से लेकर 28 जून की रात 23:59 बजे तक पूरी तरह बंद रहेंगी। पीएफ पोर्टल पर ये सभी डिजिटल सेवाएं 29 जून को सुबह 00:00 बजे से दोबारा सामान्य रूप से काम करना शुरू कर देंगी।

इस मेंटेनेंस पीरियड के दौरान पीएफ मेंबर्स न तो नया ऑनलाइन क्लेम डाल सकेंगे और न ही पुराने क्लेम प्रोसेस होंगे। जो क्लेम इस शटडाउन से पहले सबमिट किए जा चुके हैं, उन पर भी काम सेवाएं बहाल होने के बाद ही शुरू होगा।

उमंग ऐप भी 2 जुलाई तक रहेगा ठप

पोर्टल के अलावा, ईपीएफओ ने एक अन्य नोटिस में बताया है कि शेड्यूल मेंटेनेंस के चलते लोकप्रिय सरकारी ऐप ‘उमंग’ पर भी पीएफ से जुड़ी सेवाएं 2 जुलाई 2026 तक बंद रहेंगी। उमंग ऐप पर यह रुकावट ज्यादा लंबी होने के कारण खाताधारक अगले कुछ दिनों तक इन जरूरी सेवाओं का लाभ नहीं उठा पाएंगे:

  1. पीएफ बैलेंस चेक करना
  2. नया क्लेम फाइल करना और क्लेम स्टेटस ट्रैक करना
  3. UAN से जुड़ी सेवाएं
  4. शिकायत दर्ज कराना
  5. स्कीम सर्टिफिकेट और जीवन प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करना

क्यों लिया गया यह फैसला?

ईपीएफओ का कहना है कि इस तकनीकी अपग्रेडेशन और डेटाबेस कंसॉलिडेशन का मुख्य उद्देश्य अपनी डिजिटल सेवाओं को और अधिक सुरक्षित, तेज और कुशल बनाना है। इस अपग्रेड के बाद क्लेम प्रोसेसिंग सिस्टम पहले से ज्यादा मजबूत हो जाएगा, जिससे भविष्य में सब्सक्राइबर्स को क्लेम सेटलमेंट में कम समय लगेगा और बेहतर यूजर एक्सपीरियंस मिलेगा।

अगर आपका कोई पीएफ से जुड़ा बेहद जरूरी काम है, तो 29 जून तक EPFO पोर्टल के लिए और 2 जुलाई उमंग ऐप के लिए तक का इंतजार करें।

Farmer Pension Scheme: सिर्फ 55 रुपये महीने जमा करें और 60 साल के बाद पाएं ₹3,000 मासिक पेंशन, ये किसान और मजदूर तुरंत करें अप्लाई

Farmer Pension Scheme: देश के करोड़ों श्रमिक असंगठित सेक्टर में काम करते हैं। इनमें रेहड़ी-पटरी विक्रेता, रिक्शा चालक, कामगार मजदूर, घरेलू कामगार, दर्जी, ड्राइवर, कृषि मजदूर और अन्य दैनिक मजदूरी करने वाले श्रमिक शामिल हैं। इन श्रमिकों को आमतौर पर कर्मचारी भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी या अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता। ऐसे में बुढ़ापे में नियमित आय का कोई साधन नहीं होने से उन्हें आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन (PM-SYM) योजना शुरू की है। यह एक स्वैच्छिक पेंशन योजना है। इसका उद्देश्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन दी जाती है।

आवेदक की उम्र कितनी होनी चाहिए?

इस पेंशन योजना का लाभ सड़क किनारे रेहड़ी-पटरी लगाने वाले, रिक्शा चालक, निर्माण मजदूर, घरेलू कामगार, ड्राइवर, प्लंबर, दर्जी, कृषि मजदूर, मोची, धोबी, बीड़ी मजदूर, हैंडलूम कर्मी और अन्य असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को मिलता है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की मासिक आय 15,000 रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही उसकी आयु 18 से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों के लिए एक महत्वपूर्ण सामाजिक सुरक्षा योजना है। बेहद कम मासिक अंशदान के साथ यह योजना वृद्धावस्था में नियमित आय की गारंटी देती है। खासकर ऐसे श्रमिक जिनके पास भविष्य के लिए कोई पेंशन या बचत व्यवस्था नहीं है, उनके लिए यह योजना आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार साबित हो सकती है।

55 से 200 रुपये का करें योगदान

इस योजना की खास बात यह है कि श्रमिक जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके अकाउंट में जमा करती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। जबकि 40 वर्ष की आयु में शामिल होने वालों को 200 रुपये प्रति माह का योगदान देना पड़ता है। योजना के तहत 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद लाभार्थी को हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम पेंशन मिलती है।

यदि किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। वहीं पेंशन शुरू होने के बाद सदस्य के निधन पर जीवनसाथी को 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन का लाभ मिलता है। हालांकि, ईपीएफओ, ईएसआईसी या एनपीएस जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े कर्मचारी और आयकरदाता इस योजना का लाभ नहीं उठा सकते।

कौन उठा सकता है योजना का लाभ?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (Pradhan Mantri Shram Yogi Maandhan Yojana) का लाभ असंगठित क्षेत्र में कार्यरत उन श्रमिकों को मिलता है जिनकी मासिक आय 15,000 रुपये या उससे कम है। योजना में शामिल होने के लिए आवेदक की उम्र 18 वर्ष से कम और 40 साल से अधिक नहीं होनी चाहिए। योजना के पात्र लाभार्थियों में घरेलू कामगार, सड़क विक्रेता, रिक्शा चालक, मजदूर, कृषि मजदूर, बीड़ी श्रमिक, मोची, धोबी, चमड़ा उद्योग से जुड़े श्रमिक, प्लंबर, ड्राइवर, दर्जी, हैंडलूम और पावरलूम श्रमिक, मिड-डे मील कर्मचारी तथा अन्य असंगठित क्षेत्र के कामगार शामिल हैं।

कौन नहीं ले सकता लाभ?

इस योजना का लाभ उन लोगों को नहीं मिलेगा जो पहले से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO), कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC) या राष्ट्रीय पेंशन सिस्टम (NPS) जैसी किसी वैधानिक सामाजिक सुरक्षा योजना से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा आयकर का भुगतान करने वाले लोग भी इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।

सरकार भी करती है बराबर का योगदान

इस पेंशन स्कीम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लाभार्थी जितनी राशि मासिक अंशदान के रूप में जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी उसके बैंक अकाउंट में जमा करती है। यानी यह एक सह-अंशदायी (Co-Contributory) पेंशन योजना है। इससे श्रमिकों को भविष्य के लिए बड़ा लाभ मिलता है।

18 साल की उम्र में सिर्फ 55 रुपये महीना जमा करें

कम उम्र में योजना से जुड़ने पर कम राशि जमा करनी पड़ती है। 18 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को केवल 55 रुपये प्रति माह जमा करने होते हैं। 19 वर्ष की आयु पर 58 रुपये, 20 वर्ष पर 61 रुपये, 21 वर्ष पर 64 रुपये और 22 वर्ष की आयु में 68 रुपये मासिक योगदान देना होता है। इसी तरह 23 साल की उम्र पर 72 रुपये, 24 वर्ष पर 76 रुपये, 25 वर्ष पर 80 रुपये, 26 वर्ष पर 85 रुपये, 27 वर्ष पर 90 रुपये और 28 वर्ष की आयु पर 95 रुपये मासिक जमा करने होते हैं।

29 से 40 वर्ष तक कितना देना होगा योगदान?

29 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने पर 100 रुपये प्रति माह, 30 वर्ष पर 105 रुपये, 31 वर्ष पर 110 रुपये, 32 वर्ष पर 120 रुपये, 33 वर्ष पर 130 रुपये और 34 वर्ष पर 140 रुपये मासिक किस्त देना होगा। वहीं 35 वर्ष के व्यक्ति को 150 रुपये, 36 वर्ष पर 160 रुपये, 37 वर्ष पर 170 रुपये, 38 वर्ष पर 180 रुपये, 39 वर्ष पर 190 रुपये और 40 वर्ष की आयु में योजना से जुड़ने वाले व्यक्ति को 200 रुपये प्रति माह जमा करने होंगे। सरकार भी प्रत्येक मामले में उतनी ही राशि अपने हिस्से से जमा करती है।

60 साल के बाद मिलेगी 3,000 रुपये मासिक पेंशन

योजना के तहत नियमित अंशदान करने वाले लाभार्थी को 60 वर्ष की आयु पूरी होने के बाद हर महीने 3,000 रुपये की न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन मिलेगी। यह राशि सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। इससे वृद्धावस्था में आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी और किसी पर निर्भरता कम होगी।

सदस्य की मृत्यु होने पर क्या होगा?

यदि योजना से जुड़े सदस्य की किसी कारणवश निधन हो जाती है, तो उसका जीवनसाथी योजना को आगे जारी रख सकता है। इसके लिए उसे नियमित रूप से अंशदान जमा करना होगा। यदि सदस्य 60 वर्ष की आयु के बाद पेंशन का लाभ ले रहा हो और उसके बाद उसकी मृत्यु हो जाए, तो उसके जीवनसाथी को पेंशन राशि का 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में दिया जाएगा।

बीच में योजना छोड़ने पर क्या हैं नियम?

यदि कोई सदस्य योजना में शामिल होने के 10 साल के भीतर बाहर निकलना चाहता है, तो उसे उसके द्वारा जमा की गई राशि बचत बैंक अकाउंट की ब्याज दर के अनुसार वापस कर दी जाएगी। यदि सदस्य 10 साल पूरे होने के बाद लेकिन 60 वर्ष की आयु से पहले योजना छोड़ता है, तो उसे उसकी जमा राशि के साथ योजना के अनुसार अर्जित ब्याज भी वापस मिलेगा। अगर किसी कारणवश सदस्य कुछ समय तक किस्त जमा नहीं कर पाता है, तो वह बाद में बकाया राशि और निर्धारित ब्याज का भुगतान करके योजना को दोबारा एक्टिव कर सकता है।

कैसे करें अप्लाई?

प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना में शामिल होने के लिए इच्छुक व्यक्ति को अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाना होगा। वहां आधार कार्ड, बैंक या जनधन खाते की जानकारी और मोबाइल नंबर देना होगा। सभी जानकारियां दर्ज होने के बाद कंप्यूटर सिस्टम खुद मासिक किस्त की राशि बता देगा। पहली किस्त जमा करने के बाद रजिस्ट्रेशन पूरा हो जाएगा और लाभार्थी को श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाएगा। योजना में रजिस्ट्रेशन के लिए लाभार्थी को नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर आधार कार्ड और बैंक या जनधन खाते की जानकारी देनी होगी। पहली किस्त जमा करने के बाद श्रम योगी कार्ड जारी कर दिया जाता है।

कौन कर सकता है अप्लाई?

उम्र: 18 से 40 साल

महीने की कमाई: ₹15,000 तक

जरूरी डॉक्यूमेंट

आधार कार्ड।

सेविंग्स बैंक अकाउंट या जन धन अकाउंट होना चाहिए।

एम्प्लॉईज प्रोविडेंट फंड ऑर्गनाइजेशन, एम्प्लॉईज स्टेट इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन या नेशनल पेंशन सिस्टम का सदस्य नहीं होना चाहिए।

इनकम टैक्स भरने वाले लोग इसके लिए योग्य नहीं हैं।

हेल्पलाइन नंबर

योजना से जुड़ी किसी भी जानकारी या सहायता के लिए श्रमिक टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए श्रमिक सरकार के टोल फ्री नंबर 1800-267-6888 पर संपर्क कर सकते हैं। यह योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए बुढ़ापे में नियमित आय सुनिश्चित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है।

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पीएफ का पैसा अटक गया या क्लेम हुआ रिजेक्ट? जानें EPFO में कंप्लेन फाइल करने से लेकर समाधान पाने का पूरा प्रोसेस

EPFO Grievance Management System: नौकरीपेशा कर्मचारियों के लिए एम्प्लॉइज प्रोविडेंट फंड (EPF) रिटायरमेंट फंड जमा करने का एक बेहद जरूरी जरिया है। अक्सर वर्किंग प्रोफेशनल्स को पीएफ का पैसा निकालने में देरी, ट्रांसफर रिक्वेस्ट अटकने, कंपनी द्वारा पीएफ का योगदान जमा न करने या केवाईसी (KYC) डिटेल्स अपडेट न होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसी स्थिति में पीएफ खाताधारकों को ईपीएफओ के दफ्तर के चक्कर काटने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। EPFO एक ऑनलाइन शिकायत निवारण की सुविधा देता है। इसे EPF i-Grievance Management System (EPFiGMS) कहा जाता है। इसके जरिए पीएफ मेंबर्स, पेंशनभोगी और एम्प्लॉयर्स अपनी शिकायतें ऑनलाइन दर्ज करा सकते हैं और उनके स्टेटस को ट्रैक भी कर सकते हैं।

क्यों जरूरी है ईपीएफओ शिकायत पोर्टल (EPFiGMS)?

अगर पीएफ से जुड़ी समस्याओं को संबंधित ईपीएफओ कार्यालय के संज्ञान में न लाया जाए तो उन्हें सुलझने में लंबा समय लग सकता है। इस ग्रीवांस पोर्टल के जरिए आपकी शिकायतें सीधे आपके UAN, पीएफ अकाउंट या पेंशन रिकॉर्ड से जुड़े सही ईपीएफओ ऑफिस तक ऑटोमैटिकली पहुंच जाती हैं। एक बार शिकायत दर्ज होने के बाद EPFO एक रजिस्ट्रेशन नंबर जेनरेट करता है। इसका इस्तेमाल कर आप अपनी शिकायत का स्टेट्स ट्रैक भी कर सकते हैं।

इस पोर्टल पर उठाई जाने वाली मुख्य समस्याएं:

  • पीएफ निकासी में देरी।
  • पीएफ फंड ट्रांसफर से जुड़ी दिक्कतें।
  • पेंशन से जुड़े मामले।
  • गलत व्यक्तिगत जानकारियां।
  • केवाईसी से जुड़ी गड़बड़ियां।
  • कंपनी के योगदान से जुड़े विवाद और पासबुक से जुड़ी समस्याएं।

EPFO पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने का पूरा प्रोसेस जानिए

इस पोर्टल पर शिकायत दर्ज करने की प्रक्रिया काफी आसान और साफ-सुथरी है। यहां नीचे इसे स्टेप बाई स्टेप समझाया गया है-

  • पोर्टल पर जाएं: सबसे पहले आधिकारिक EPFiGMS पोर्टल पर विजिट करें।
  • कैटेगरी चुनें: होमपेज पर दिए गए Register Grievance विकल्प पर क्लिक करें। इसके बाद आपको खुद को पीएफ मेंबर, पेंशनर, एम्प्लॉयर या ‘अन्य’ कैटेगरी के रूप में चुनना होगा।
  • UAN और वेरिफिकेशन: अगर आप एक पीएफ मेंबर (कर्मचारी) हैं तो अपना यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) दर्ज करें और आवश्यक वेरिफिकेशन स्टेप्स को पूरा करें। इसके बाद आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।
  • अकाउंट का चयन: ओटीपी वेरिफिकेशन पूरा होते ही पोर्टल आपके यूएएन से जुड़े सभी पीएफ खातों की लिस्ट दिखाएगा।
  • शिकायत का ब्योरा दें: अब उस पीएफ खाते को सिलेक्ट करें जिससे जुड़ी समस्या है और सही ग्रीवांस टाइप चुनें। समस्या के बारे में पूरी और सही जानकारी विस्तार से लिखें ताकि ईपीएफओ अधिकारी आपके मामले को ठीक से समझ सकें।
  • दस्तावेज अटैच करें: आप अपनी शिकायत के समर्थन में कोई भी दस्तावेज, स्क्रीनशॉट या ईमेल की इमेज भी अटैच कर सकते हैं।
  • रजिस्ट्रेशन नंबर संभालें: एप्लिकेशन सबमिट करने के बाद आपको एक रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा। इस नंबर को संभाल कर रखें क्योंकि भविष्य में शिकायत को ट्रैक करने के लिए इसकी जरूरत पड़ेगी।

अपनी शिकायत का स्टेटस कैसे ट्रैक करें?

शिकायत दर्ज करने के बाद मेंबर्स जब चाहें इसका स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसके लिए दोबारा EPFiGMS पोर्टल पर जाएं और View Status पर क्लिक करें। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और अन्य आवश्यक जानकारियां दर्ज करें। इसके बाद स्क्रीन पर दिख जाएगा कि आपकी शिकायत केवल दर्ज हुई है, उसकी जांच चल रही है या फिर उस पर कार्रवाई पूरी हो चुकी है। पोर्टल पर संबंधित ईपीएफओ विभाग की टिप्पणियां और प्रतिक्रियाएं भी देखी जा सकती हैं। अगर ईपीएफओ को आगे की जांच के लिए अतिरिक्त दस्तावेजों की आवश्यकता होती है तो यह पोर्टल यूजर्स को और दस्तावेज अपलोड करने की सुविधा भी देता है।

अगर शिकायत के बाद भी समाधान न मिले तो क्या करें?

ज्यादातर मामलों में समस्याओं का समाधान EPFiGMS पोर्टल के माध्यम से ही हो जाता है। इसके बावजूद जो सदस्य अपने मामले के निपटारे के तरीके से संतुष्ट नहीं हैं वे इसी पोर्टल के जरिए रिमाइंडर भेज सकते हैं। इसके अलावा वे सरकार के पब्लिक ग्रीवांस रिड्रेस सिस्टम के तहत उपलब्ध अन्य तरीकों से शिकायत को आगे बढ़ा सकते हैं। इंटरनेट पर शेयर किए गए कुछ हालिया अनुभवों से पता चलता है कि कुछ मामलों को EPFiGMS से आगे उच्च अधिकारियों तक भी ले जाया गया है।

ये काम की बातें भी जान लें

शिकायत दर्ज करने से पहले यह जरूर चेक कर लें कि आपका UAN, आधार, पैन, बैंक डिटेल्स और केवाईसी जानकारी पूरी तरह सही और अपडेटेड है या नहीं। कई बार पीएफ क्लेम में देरी प्रोसेसिंग की गलती से नहीं बल्कि इन रिकॉर्ड्स में मिसमैच (डिटेल्स का आपस में मेल न खाना) होने के कारण होती है।

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1- क्या बिना UAN के भी EPFO में शिकायत दर्ज कराई जा सकती है?

उत्तर: हां। जिन व्यक्तियों के पास UAN, एस्टेब्लिशमेंट नंबर या पीपीओ PPO नंबर नहीं है वे भी Others कैटेगरी को चुनकर संबंधित ईपीएफओ कार्यालय का जरूरी विवरण देकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

Q2- शिकायत दर्ज करते समय कौन से दस्तावेज अपलोड किए जा सकते हैं?

उत्तर: मेंबर्स अपनी समस्या को बेहतर ढंग से समझाने के लिए क्लेम डिटेल्स, बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट, कंपनी के साथ हुए संवाद (ईमेल आदि) और अन्य संबंधित प्रमाणों जैसे सहायक दस्तावेजों को अपलोड कर सकते हैं।

Q3- क्या शिकायत का स्टेटस ऑनलाइन चेक किया जा सकता है?

उत्तर: हां। EPFiGMS पोर्टल पर View Status की सुविधा उपलब्ध है, जहां मेंबर्स शिकायत दर्ज करते समय मिले रजिस्ट्रेशन नंबर का उपयोग करके अपनी शिकायत की प्रगति को ट्रैक कर सकते हैं।

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EPFO: लगातार 10 साल तक सर्विस की है तो आपको मिलेंगी पेंशन, ऐसे कर सकते हैं मंथली पेंशन का कैलकुलेशन

ईपीएफओ अपने सब्सक्राइबर्स के लिए ईपीएफ के साथ ही एक रेगुलर पेंशन स्कीम भी चलाता है। इसका नाम एंप्लॉयीज पेंशन स्कीम (ईपीएस) है। इस स्कीम के तहत सब्सक्राइबर्स को रिटायरमेंट के बाद हर महीने पेंशन मिलती है। इसकी शुरुआत 16 नवंबर, 1995 को हुई थी। इस स्कीम ने फैमिली पेंशन स्कीम, 1971 की जगह ली थी। इसका मकसद सब्सक्राइबर्स को सोशल सिक्योरिटी देना है।

हर महीने ईपीएस में भी होता है कंट्रिब्यूशन

ईपीएफ के सब्सक्राइबर्स अपनी बेसिक मंथली सैलरी का 12 फीसदी ईपीएफ में कंट्रिब्यूट करते हैं। इतना ही कंट्रिब्यूशन एंप्लॉयर भी एंप्लॉयी के ईपीएफ अकाउंट में कंट्रिब्यूट करता है। लेकिन उसका कंट्रिब्यूशन दो हिस्सों में बंटा होता है। 8.33 फीसदी कंट्रिब्यूशन ईपीएफ में जाता है और बाकी 3.67 फीसदी ईपीएस अकाउंट में जाता है।

ईपीएस में हर महीने पेशन का प्रावधान

फैमिली पेंशन स्कीम, 1971 के तहत सब्सक्राइबर की मौत के बाद परिवार को बेनेफिट्स मिलते थे। लेकिन, ईपीएस में सब्सक्राइबर्स को पेंशन की सुविधा भी देने की शुरुआत हुई। इतना ही नहीं, सब्सक्राइबर के परिवार को भी पेंशन का प्रावधान इस स्कीम में है। इससे रिटायरमेंट के बाद सब्सक्राइबर और उसके परिवार को आर्थिक सुरक्षा हासिल होती है।

ईपीएस के बेनेफिट्स के लिए ये हैं शर्तें

ईपीएस का हिस्सा बनने के लिए सब्सक्राइबर्स के लिए कुछ शर्तें तय हैं। पहला, सब्सक्राइबर की नौकरी कम से कम 10 साल पूरी होनी चाहिए। इस दौरान पेंशन स्कीम में उसकी तरफ से रेगुलर कंट्रिब्यूशन किया गया होना चाहिए। सब्सक्राइबर 58 साल की उम्र में रिटायर करने के बाद ईपीएफए की तरफ से मंथली पेंशन का हकदार होगा।

न्यूनतम पेंशन हर महीने 1000 रुपये

केंद्र सरकार के 2014 के नियम के मुताबिक, ईपीएस के तहत न्यूनतम पेंशन 1000 रुपये है। हालांकि, इसे बढ़ाकर हर महीने 7,500 रुपये करने की मांग लंबे समय से की जा रही है। किसी सब्सक्राइबर को रिटायरमेंट पर हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी, इसका कैलकुलेशन उसकी पेंशनएबल सर्विस और रिटायरमेंट से पहले के 60 महीनों की एवरेज सैलरी के आधार पर होता है।

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ऐसे कर सकते हैं पेंशन का कैलकुलेशन 

इसके लिए पहले से एक फॉर्मूला है। इसमें पेंशनएबल सैलरी को पेंशनएबल सर्विस से गुणा किया जाता है। फिर जो संख्या आती है, उसमें 70 से भाग दिया जाता है। पेंशनएबल सैलरी का मतलब अंतिम 60 महीनों की एवरेज सैलरी से है। अगर किसी एंप्लॉयी की पेंशनएबल सैलरी 15,000 रुपये है और उसने 10 साल की सर्विस पूरी की है तो उसकी हर महीने की पेंशन करीब 2,143 रुपये बनेगी।

EPFO Pension Rules: मृत्यु, दिव्यांगता या अर्ली रिटायरमेंट पर EPS पेंशन का क्या होता है? समझिए सभी नियम

EPFO Pension Rules: कर्मचारी पेंशन योजना (EPS) 1995 को सिर्फ रिटायरमेंट पेंशन योजना समझना बड़ी भूल हो सकती है। यह सोशल सिक्योरिटी स्कीम भी है, जो कर्मचारी के साथ-साथ उसके परिवार को भी सुरक्षा देने का काम करती है। कर्मचारी की रिटायरमेंट, दिव्यांगता या मृत्यु जैसे हालात में EPS के नियम भी अलग-अलग लागू होते हैं।

रिटायरमेंट पर कब मिलती है पेंशन?

अगर कोई कर्मचारी कम से कम 10 साल तक EPS में योगदान करता है, तो वह 58 साल की उम्र के बाद मंथली पेंशन पाने का हकदार बन जाता है। हालांकि कर्मचारी चाहे तो 50 साल की उम्र के बाद अर्ली पेंशन भी ले सकता है। लेकिन ऐसी स्थिति में पेंशन की रकम कम हो जाती है, क्योंकि उसे तय उम्र से पहले निकाला जा रहा होता है।

दिव्यांगता की स्थिति में क्या होता है?

अगर कर्मचारी नौकरी के दौरान स्थायी और पूर्ण रूप से दिव्यांग हो जाता है, तो उसे डिसेबिलिटी पेंशन मिल सकती है। इस मामले में सामान्य रिटायरमेंट पेंशन की तरह 10 साल की सेवा शर्त उसी तरह लागू नहीं होती। इसका मकसद ऐसे कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा देना है, जिनकी कमाने की क्षमता खत्म हो गई हो।

कर्मचारी की मौत होने पर किसे मिलते हैं पैसे?

EPS की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यह कर्मचारी की मृत्यु के बाद भी परिवार को सुरक्षा देता है। कर्मचारी की मौत होने पर पात्र परिवार के सदस्यों को फैमिली पेंशन मिल सकती है। इसमें विधवा या विधुर पेंशन, बच्चों की पेंशन और कुछ मामलों में अनाथ पेंशन भी शामिल है।

यही वजह है कि EPS को सिर्फ रिटायरमेंट पेंशन नहीं, बल्कि परिवार की आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी योजना माना जाता है।

क्या नॉमिनी को हमेशा पेंशन मिलती है?

कई लोग मानते हैं कि EPF की तरह EPS में भी नॉमिनी को सीधे फायदा मिल जाएगा। लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। EPS में पेंशन का अधिकार मुख्य रूप से योजना में तय पात्र परिवार के सदस्यों को मिलता है।

उदाहरण के लिए, अगर कोई अविवाहित कर्मचारी किसी बाहरी व्यक्ति को नॉमिनी बना देता है, तो सिर्फ नॉमिनी होने से उस व्यक्ति को पेंशन का अधिकार नहीं मिल जाता। पेंशन का फैसला EPS के नियमों के मुताबिक होता है।

किन गलतियों से हो सकती है परेशानी?

कई परिवारों को कर्मचारी की मौत के बाद पता चलता है कि रिकॉर्ड में गड़बड़ी है। नाम, जन्मतिथि, आधार, बैंक खाते या सर्विस रिकॉर्ड में अंतर होने से पेंशन क्लेम अटक सकता है। कई बार नौकरी बदलने के दौरान पुराने रिकॉर्ड सही तरीके से ट्रांसफर नहीं होते, जिससे सेवा अवधि का पूरा रिकॉर्ड नहीं दिखता।

इसी तरह Form 11 में गलतियां भी बाद में बड़ी समस्या बन सकती हैं। इसलिए कर्मचारियों को अपने EPF पासबुक, ट्रांसफर रिकॉर्ड, सर्विस हिस्ट्री और KYC जानकारी समय-समय पर जांचते रहना चाहिए।

EPS को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियां

कई कर्मचारी मानते हैं कि हर EPF सदस्य अपने आप EPS सदस्य भी बन जाता है। वहीं, 1 सितंबर 2014 के बाद नियम बदल चुके हैं और सभी कर्मचारी EPS के लिए पात्र नहीं होते।

दूसरी बड़ी गलतफहमी यह है कि EPS को लोग बचत खाते की तरह समझते हैं। जबकि यह पेंशन योजना है। इसमें मिलने वाला फायदा सेवा अवधि और पात्रता पर निर्भर करता है, न कि खाते में दिख रही रकम पर।

रिटायरमेंट प्लानिंग में EPS की क्या भूमिका है?

EPS को रिटायरमेंट की पूरी व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए। यह केवल एक बुनियादी सामाजिक सुरक्षा देता है। कर्मचारियों को EPF, NPS, निजी निवेश और पर्याप्त जीवन बीमा के साथ अपनी रिटायरमेंट योजना बनानी चाहिए।

साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि नौकरी के दौरान उनके सभी पेंशन रिकॉर्ड सही और अपडेट रहें। इससे भविष्य में परिवार को पेंशन पाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी।

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