EPFO Pension: 10 साल नौकरी के बाद हर महीने कितनी पेंशन मिलेगी? समझिए पूरा कैलकुलेशन

EPFO Pension:  श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने 29 जून को Employees’ Pension Scheme (EPS) 2026 को नोटिफाई कर दिया है। इसके साथ ही EPS-1995 और 1971 फैमिली पेंशन स्कीम की जगह अब नई EPS-2026 लागू हो गई है। ऐसे में करीब 6 करोड़ EPFO सदस्यों के मन में सवाल है कि क्या अब पेंशन के नियम बदल गए हैं? क्या ज्यादा पेंशन मिलेगी? या रिटायरमेंट प्लानिंग में कुछ बदलाव करना होगा?

राहत की बात यह है कि मंथली पेंशन निकालने का फॉर्मूला और 10 साल की न्यूनतम सर्विस वाला नियम पहले जैसा ही रखा गया है।

10 साल की नौकरी पूरी करना जरूरी

अगर आप EPS के तहत हर महीने पेंशन चाहते हैं, तो आपको कम से कम 10 साल की पेंशन योग्य नौकरी (Pensionable Service) पूरी करनी होगी। इसके बाद 58 साल की उम्र पूरी होने पर आपको मासिक पेंशन मिलनी शुरू होगी। अगर आप चाहें, तो 50 साल की उम्र के बाद कम पेंशन के साथ अर्ली पेंशन भी ले सकते हैं।

लेकिन अगर आपने 10 साल की नौकरी पूरी नहीं की, तो आपको हर महीने पेंशन नहीं मिलेगी। ऐसे में आपके पास दो ही विकल्प होंगे। या तो EPS का पैसा निकाल लें, या स्कीम सर्टिफिकेट लेकर आगे की नौकरी में अपनी सर्विस जोड़ दें।

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कैसे निकलती है पेंशन?

EPFO एक फॉर्मूले के आधार पर पेंशन तय करता है।

मासिक पेंशन = (पेंशन योग्य वेतन × पेंशन योग्य सेवा) ÷ 70

यहां पेंशन योग्य वेतन का मतलब आपके आखिरी 60 महीनों के औसत मूल वेतन और महंगाई भत्ते (DA) से है। हालांकि, ज्यादातर कर्मचारियों के लिए इसकी अधिकतम सीमा 15,000 रुपये मानी जाती है।

15,000 रुपये सैलरी पर कितनी मिलेगी पेंशन?

अगर आपकी पेंशन योग्य सैलरी 15,000 रुपये है, तो 10 साल की नौकरी पर आपको करीब 2,143 रुपये महीने की पेंशन मिलेगी। रकम भले ज्यादा न लगे, लेकिन यह जीवनभर मिलने वाली गारंटीड पेंशन होती है।

वहीं, 20 साल की नौकरी पूरी करने पर यह बढ़कर करीब 4,286 रुपये हो जाएगी। वहीं, 35 साल की अधिकतम पेंशन योग्य सेवा पूरी करने पर आपको 7,500 रुपये प्रति माह पेंशन मिल सकती है। जितनी लंबी आपकी सेवा होगी, उतनी ही ज्यादा पेंशन मिलेगी।

न्यूनतम पेंशन अभी भी 1,000 रुपये

फिलहाल EPS के तहत न्यूनतम पेंशन 1,000 रुपये प्रति माह ही है। इसका मतलब है कि अगर 10 साल की नौकरी के बाद आपकी पेंशन 1000 रुपये से कम बनती है, तो उसकी भरपाई सरकार करेगा। मिसाल के लिए, अगर आपकी पेंशन 500 रुपये बनती है, तो बाकी 500 सरकार देगी।

न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर 5,000 से 7,500 रुपये करने की मांग काफी समय से उठ रही है। पेंशनधारकों का कहना है कि महंगाई काफी बढ़ चुकी है, ऐसे में 1000 रुपये की न्यूनतम पेंशन किसी भी सूरतेहाल में पर्याप्त नहीं। हालांकि, सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया है।

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नौकरी बदलते समय ये गलती न करें

अगर आप नौकरी बदल रहे हैं, तो EPF और EPS को नई नौकरी में ट्रांसफर कराना जरूरी होता है। अगर 10 साल पूरे होने से पहले EPS की राशि निकाल लेते हैं, तो आपकी पेंशन योग्य सेवा (Pensionable Service) टूट सकती है। इससे भविष्य में मिलने वाली मासिक पेंशन पर असर पड़ सकता है।

नई नौकरी में UAN के जरिए EPF अकाउंट ट्रांसफर कराने से आपकी सर्विस लगातार जुड़ी रहती है। इससे 10 साल की पात्रता पूरी करने में आसानी होगी। फिर आपको रिटायरमेंट के बाद मासिक पेंशन का लाभ भी मिल सकेगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

EPFO Big Update: ईपीएफओ ने पोर्टल पर बंद की UAN एक्टिवेशन की सुविधा, अब इस ऐप से होगा काम, जानें पूरा प्रोसेस

EPFO Discontinues UAN Activation on Portal: नौकरीपेशा लोगों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की तरफ से एक बहुत बड़ा अपडेट आया है। ईपीएफओ ने अपने यूनिफाइड मेंबर पोर्टल से यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) को एक्टिवेट करने की सुविधा को पूरी तरह से बंद कर दिया है।

अब ईपीएफओ मेंबर्स को अपना UAN एक्टिवेट करने या नया यूएएन जेनरेट करने के लिए उमंग (UMANG) मोबाइल ऐप का इस्तेमाल करना होगा। इसके साथ ही अब इस प्रक्रिया के लिए आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन को अनिवार्य कर दिया गया है। आइए जानते हैं कि ईपीएफओ ने यह बदलाव क्यों किया है और अब आप उमंग ऐप के जरिए अपना यूएएन कैसे एक्टिवेट कर सकते हैं।

क्यों बंद हुई पोर्टल पर यह सुविधा?

ईपीएफओ ने सुरक्षा, विश्वसनीयता और यूजर्स के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए 3 जुलाई को अपने यूनिफाइड मेंबर पोर्टल को अपग्रेड किया है। इस अपग्रेड के बाद पोर्टल पर एक नोटिस जारी कर साफ कर दिया गया है कि वेबसाइट के जरिए होने वाला यूएएन एक्टिवेशन और डायरेक्ट यूएएन अलॉटमेंट अब बंद कर दिया गया है।

अब सुरक्षा को मजबूत करने और किसी भी तरह के फ्रॉड को रोकने के लिए सरकार ने आधार फेस ऑथेंटिकेशन का रास्ता चुना है, जो सिर्फ उमंग ऐप पर उपलब्ध है।

UMANG App से UAN कैसे एक्टिवेट करें?

ईपीएफओ द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक, अब आपको अपने स्मार्टफोन के जरिए नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करना होगा:

  1. ऐप डाउनलोड और लॉग-इन: सबसे पहले अपने फोन में उमंग ऐप डाउनलोड करें और अपने मोबाइल नंबर के जरिए रजिस्टर या लॉग-इन करें।
  2. EPFO सर्विस चुनें: ऐप के होमपेज पर जाकर ‘EPFO Services’ के विकल्प को खोजें और उस पर क्लिक करें।
  3. फेस ऑथेंटिकेशन विकल्प: इसके बाद आपको ‘UAN Services Through Face Authentication’ का विकल्प चुनना होगा।
  4. यूएएन एक्टिवेशन: अब ‘UAN Activation’ पर टैप करें।
  5. डिटेल्स दर्ज करें: यहां अपना 12-डिजिट का UAN नंबर, अपना आधार नंबर और आधार से लिंक मोबाइल नंबर दर्ज करें।
  6. सहमति दें: आधार ऑथेंटिकेशन के लिए नियम और शर्तों को स्वीकार करें।
  7. फेस स्कैन करें: अब स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करते हुए अपने फोन के फ्रंट कैमरे से अपना चेहरा स्कैन करें।
  8. कन्फर्मेशन: वेरिफिकेशन सफल होते ही आपका UAN एक्टिवेट हो जाएगा और आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर इसका कन्फर्मेशन मैसेज आ जाएगा।

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इन बातों का रखें ध्यान

इस नए तरीके से यूएएन एक्टिवेट करने से पहले कुछ बातों का खास ख्याल रखें:

  • आपका आधार कार्ड एक एक्टिव मोबाइल नंबर से लिंक होना चाहिए।
  • आपके आधार की डिटेल्स जैसे- नाम, जन्मतिथि ईपीएफओ के रिकॉर्ड से पूरी तरह मैच होनी चाहिए।
  • आपके पास एक ऐसा स्मार्टफोन होना चाहिए जिसका कैमरा और इंटरनेट कनेक्शन ठीक से काम कर रहा हो, ताकि फेस स्कैनिंग में कोई दिक्कत न आए।

अपग्रेड पोर्टल पर अब कौन सी सुविधाएं मिलेंगी?

भले ही पोर्टल से यूएएन एक्टिवेशन की सुविधा हटा दी गई हो, लेकिन वेबसाइट पर कई अन्य जरूरी सेवाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। मेंबर्स अभी भी पोर्टल पर जाकर ‘Know Your UAN’ सेवा का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा, डेथ क्लेम फाइल करने की सुविधा भी वेबसाइट पर चालू रहेगी। साथ ही, अगर कोई अपना यूएएन भूल गया है, तो उसे मोबाइल नंबर और पहचान वेरिफिकेशन के जरिए रिकवर करने की प्रक्रिया को और आसान बना दिया गया है।

EPFO 3.0: पीएफ खाताधारकों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब सिर्फ 3 दिन में बैंक खाते में आएगा पैसा, EPFO ने बदला ये नियम

EPFO New Claim Settlement Rule: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन ने करोड़ों पीएफ खाताधारकों को अब तक का सबसे बड़ा तोहफा दिया है। EPFO ने एक नया ऐतिहासिक फ्रेमवर्क पेश किया है, जिसके तहत अब योग्य पीएफ निकासी दावों का निपटारा महज 3 दिनों के भीतर कर दिया जाएगा। हाल के वर्षों में क्लेम सेटलमेंट प्रक्रिया में इसे ईपीएफओ का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव माना जा रहा है।

इस नए नियम से न केवल पीएफ का पैसा निकालने में लगने वाला समय बेहद कम हो जाएगा, बल्कि पूरी प्रक्रिया ग्राहकों के लिए आसान और पारदर्शी हो जाएगी। आइए जानते हैं कि इस नए नियम का फायदा आपको कैसे मिलेगा और इसके लिए क्या शर्तें हैं।

क्या है ईपीएफओ का 3-दिन वाला नया नियम?

अब तक पीएफ का पैसा निकालने के लिए कर्मचारियों को कई दिनों या हफ्तों तक इंतजार करना पड़ता था, क्योंकि मैनुअल वेरिफिकेशन और कागजी प्रक्रियाओं में काफी समय जाया होता था। लेकिन अब नए नियम के तहत सभी पात्र क्लेम सिर्फ 3 दिन में सेटल होंगे।

देरी होने पर अधिकारियों को लगेगा जुर्माना: ईपीएफओ ने इस पूरी व्यवस्था में जवाबदेही तय करने के लिए सख्त रुख अपनाया है। अगर कोई अधिकारी बिना किसी ठोस वजह के पीएफ क्लेम को 20 दिनों से ज्यादा समय तक लटका कर रखता है, तो उस पर 12% दंडात्मक ब्याज लगाया जा सकता है।

ऑटो-सेटलमेंट की लिमिट बढ़कर हुई ₹5 लाख

ईपीएफओ ने अपने डिजिटल रिफॉर्म्स को आगे बढ़ाते हुए बिना किसी इंसानी दखल के क्लेम पास करने वाले ‘ऑटो-सेटलमेंट मैकेनिज्म’ का दायरा बहुत ज्यादा बढ़ा दिया है:

  1. पहले ऑटो-सेटलमेंट के जरिए केवल ₹1 लाख तक के एडवांस क्लेम ही ऑटोमैटिक पास होते थे।
  2. अब सरकार ने इस लिमिट को बढ़ाकर सीधे ₹5 लाख कर दिया है।
  3. इस फैसले से अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा एडवांस क्लेम बिना किसी कागजी झंझट और देरी के तुरंत पास हो रहे हैं, जिससे क्लेम रिजेक्ट होने की गुंजाइश भी काफी कम हो गई है।

EPFO 3.0: भविष्य में UPI और ATM से भी निकलेगा PF का पैसा!

यह नया रिफॉर्म ईपीएफओ के बड़े डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का हिस्सा है, जिसे EPFO 3.0 नाम दिया गया है। इस पहल के तहत संगठन कई और आधुनिक डिजिटल सेवाओं पर काम कर रहा है। आने वाले समय में ईपीएफओ खाताधारकों को UPI के जरिए पीएफ विड्रॉल और ATM से लिंक करके सीधे पैसे निकालने जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं देने की तैयारी में है।

3 दिन में पैसा पाने के लिए कर्मचारियों को क्या करना होगा?

अगर आप भी किसी मेडिकल इमरजेंसी, शादी, पढ़ाई या घर बनाने के लिए पीएफ खाते से एडवांस या पूरा पैसा निकालना चाहते हैं, तो 3 दिन में फंड ट्रांसफर के लिए आपके अकाउंट में ये 5 चीजें अपडेटेड होनी चाहिए:

  • आपका UAN पूरी तरह एक्टिव होना चाहिए।
  • यूएएन के साथ आपकी सरकारी पहचान (ID) लिंक होनी चाहिए।
  • आपका पैन (PAN) कार्ड और चालू बैंक अकाउंट डिटेल्स (IFSC कोड के साथ) अपडेटेड हों।
  • आपकी KYC प्रक्रिया पूरी तरह कंप्लीट हो।
  • ईपीएफओ पोर्टल पर रजिस्टर्ड आपका मोबाइल नंबर चालू हो ताकि ओटीपी (OTP) वेरिफिकेशन आसानी से हो सके।

ध्यान दें कि पीएफ कटौती के मुख्य ढांचे में कोई बदलाव नहीं हुआ है। कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान पहले की तरह बेसिक सैलरी का 12-12% ही रहेगा। पूरा फोकस केवल सर्विस को फास्ट और डिजिटल बनाने पर है।

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EPF Rule Change: ₹15000 से ज्यादा सैलरी पर EPF कटौती अब होगी वैकल्पिक, सरकार ने बदले नियम

EPF Rule Change: श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने Employees’ Provident Funds Scheme, 2026 लागू कर दिया है। नए नियमों के तहत 15,000 रुपये से ज्यादा मंथली बेसिक सैलरी पर EPF का योगदान अब वैकल्पिक (Optional) होगा। यानी अब कर्मचारी और कंपनी चाहें तो सिर्फ तय वेतन सीमा तक EPF जमा करें या फिर उससे ज्यादा सैलरी पर भी योगदान जारी रखें।

पहले क्या था नियम?

पुराने Employees’ Provident Funds Scheme, 1952 के तहत 15,000 रुपये तक मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारियों के लिए EPF में शामिल होना जरूरी था।

अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 15,000 रुपये से ज्यादा होती थी और वह EPF में शामिल हो जाता था, तो कर्मचारी और कंपनी दोनों को उसकी पूरी बेसिक सैलरी पर EPF का योगदान देना पड़ता था। जैसे कि किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है। पुराने नियम के तहत अगर वह ज्यादा वेतन पर EPF में शामिल था, तो EPF की कटौती पूरे 50,000 रुपये के आधार पर होती थी।

अब क्या बदला?

नए नियम के मुताबिक, अगर किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी सरकार की तय वेतन सीमा (फिलहाल 15,000 रुपये) से ज्यादा है, तो EPF का योगदान डिफॉल्ट रूप से सिर्फ 15,000 रुपये तक ही माना जाएगा।

मतलब कि अगर आपकी बेसिक सैलरी 50,000 रुपये है, तो अब कर्मचारी और कंपनी चाहें तो EPF की कटौती सिर्फ 15,000 रुपये के आधार पर कर सकते हैं। पूरी 50,000 रुपये की सैलरी पर EPF जमा करना अब जरूरी नहीं होगा।

ज्यादा सैलरी पर भी जमा कर सकते हैं EPF

इसका मतलब यह नहीं है कि ज्यादा सैलरी पर EPF जमा नहीं होगा। अगर कर्मचारी और कंपनी दोनों चाहें, तो वे पहले की तरह वास्तविक बेसिक सैलरी पर भी EPF का योगदान जारी रख सकते हैं।

अगर आपकी बेसिक सैलरी 35,000 रुपये है और आप ज्यादा PF जमा करके रिटायरमेंट फंड बढ़ाना चाहते हैं, तो कंपनी की सहमति से पूरे 35,000 रुपये पर भी EPF कट सकता है।

पेंशन फंड पर क्या असर होगा?

नए नियम में यह भी कहा गया है कि Employees’ Pension Scheme (EPS), 1995 के तहत जिन कर्मचारियों को ज्यादा वेतन पर योगदान की अनुमति मिली हुई है, उनके मामले में कंपनी वेतन सीमा से ऊपर की सैलरी पर भी पेंशन फंड में योगदान कर सकती है।

कर्मचारियों के लिए क्या बदलेगा?

अब कर्मचारी और कंपनी के पास दो विकल्प होंगे।

  • EPF का योगदान सिर्फ सरकार की तय वेतन सीमा (फिलहाल 15,000 रुपये) तक रखें।
  • या फिर आपसी सहमति से कर्मचारी की पूरी बेसिक सैलरी पर EPF का योगदान जारी रखें।

यानी अब 15,000 रुपये से ज्यादा बेसिक सैलरी पर EPF की कटौती अनिवार्य नहीं होगी। कर्मचारी और कंपनी आपसी सहमति से तय कर सकेंगे कि PF पूरे वेतन पर कटेगा या सिर्फ तय वेतन सीमा तक।

(एजेंसी से इनपुट के साथ)

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EPS 2026 लागू होने के बाद क्या प्राइवेट सेक्टर के एंप्लॉयीज की पेंशन बढ़ जाएगी?

एंप्लॉयीज पेशन स्कीम (ईपीएस), 2026 लागू हो गई है। इसे ईपीएस,1971 और ईपीएस,1995 की जगह लागू किया गया है। ईपीएस, 2026 को सोशल सिक्योरिटी कोड, 2020 के तहत लागू किया गया है। नई स्कीम में पुरानी स्कीम के प्रावधान को बनाए रखा गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नई स्कीम में न्यूनतम पेंशन का अमाउंट बढ़ाया गया है।

न्यूनतम पेंशन का अमाउंट 1000 रुपये बना रहेगा

सरकार ने ईपीएस, 2026 में पेंशन का न्यूनतम अमाउंट नहीं बढ़ाया है। इसका मतलब है कि इसे प्रति माह 1,000 रुपये बनाए रखा गया है। पेंशन कैलकुलेशन के फॉर्मूला, एंप्लॉयी और एंप्लॉयर के कंट्रिब्यूशन में भी बदलाव नहीं किया गया है। प्राइवेट सेक्टर में काम करने वाले लोगों का ईपीएफ में कंट्रिब्यूशन के नियम पहले की तरह बने रहेंगे।

ईपीएस में एंप्लॉयर के कंट्रब्यूशन में कोई फर्क नहीं आया है

सरकार ने ईपीएस,2026 को जो नोटिफिकेशन जारी किया है, उसके ईपीएस के कंट्रिब्यूशन में किसी तरह का फर्क नहीं आया है। एंप्लॉयर पहले की तरह एंप्लॉयी के ईपीएस में कंट्रिब्यूशन करता रहेगा। सरकार का कंट्रिब्यूशन 1.16 फीसदी बना रहेगा।

पेंशन क्लेम का सेटलमेंट अनिवार्य रूप से 20 दिन में करना होगा

एंप्लॉयीज की सुविधा के लिए ईपीएस, 2026 में कुछ खास बदलाव किए गए हैं। जैसे-पेंशन क्लेम का सेटलमेंट 20 दिन में करना अनिवार्य है। अगर ईपीएफओ तय समयसीमा के अंदर क्लेम का सेटलमेंट नहीं करता है तो उसे सालाना 12 फीसदी के रेट से इंटरेस्ट का पेमेंट करना होगा। यह पैसा पीएफ कमिश्नर की सैलरी से कटेगा।

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पेंशन से संबंधित ज्यादातर प्रोसिजर ऑनलाइन उपलब्ध 

ईपीएस, 2026 में डिजिटल कंप्लायंस और ऑनलाइन प्रोसेसिंग पर जोर दिया गया है। इसका मतलब है कि एंप्लॉयर्स और सब्सक्राइबर्स पेंशन से संबंधित ज्यादातर प्रोसिजर ऑनलाइन कर सकेंगे। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईपीएस, 2026 के नोटिफिकेशन को देखने से ऐसा लगता है कि इसमें सिर्फ एडमिनिस्ट्रेटिव बदलाव किए गए हैं। इसका मतलब है कि एंप्लॉयीज से जुड़े ज्यादातर नियम पहले की तरह बने रहेंगे।

PF, क्रेडिट कार्ड, पासपोर्ट फीस, Aadhaar अपडेट, LPG रेट, ITR डेडलाइन… 1 जुलाई से बदल गईं ये चीजें

Rules Changing From July 1 2026:  1 जुलाई से देश में कई जरूरी फाइनेंशियल और और नीतिगत बदलाव लागू हो गए हैं। इन बदलावों का सीधा असर इनकम टैक्स, सैलरीड क्लास, पेंशन पाने वालों, बैंक कस्टमर और विदेश यात्रा करने वाले लोगों पर पड़ने जा रहा है। एलपीजी सिलेंडर की कीमतों और पासपोर्ट फीस से लेकर ईपीएफओ सेवाओं, आधार नियमों और क्रेडिट कार्ड के फायदों में कई बड़े अपडेट किए गए हैं। आइए आपको इन बड़े बदलावों के बारे में विस्तार से जानकारी देते हैं ताकि आप किसी तरह की असुविधा से बचें और बजट को बेहतर तरीके से प्लान कर पाएं।

1- कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर हुआ सस्ता, घरेलू दाम स्थिर

सरकार ने 1 जुलाई से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत में ₹183.50 की कटौती की है। इससे होटलों, रेस्तरां और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को बड़ी राहत मिली है। इस कटौती के बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ₹3113.50 से घटकर ₹2930 हो गई है। हालांकि 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह कटौती 2026 की पहली छमाही के दौरान कमर्शियल एलपीजी की कीमतों में हुई कई तेज वृद्धियों के बाद आई है।

2- FY 2025-26 के लिए ITR फाइलिंग की डेडलाइन

करदाताओं को इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की समय-सीमा का विशेष ध्यान रखना होगा। वित्तीय वर्ष 2025-26 (आकलन वर्ष 2026-27) के लिए ITR-1 और ITR-2 फॉर्म भरने वाले व्यक्तिगत करदाताओं के लिए रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 है। ऐसे करदाता जो ITR-3 और ITR-4 दाखिल करते हैं और जिन पर टैक्स ऑडिट की आवश्यकता लागू नहीं होती है, उनके पास अपना रिटर्न जमा करने के लिए 31 अगस्त 2026 तक का समय है। तय समय-सीमा चूकने पर जुर्माना लग सकता है, टैक्स रिजीम को चुनने पर रोक लग सकती है और नुकसान को आगेल कैरी फॉरवर्ड करने की सर्विस से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

3- EPFO 3.0: UPI आधारित पीएफ विड्रॉल की सुगबुगाहट

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने के उद्देश्य से बहुप्रतीक्षित EPFO 3.0 प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया जा रहा है। इसके तहत ईपीएफ सब्सक्राइबर्स को यूपीआई प्लेटफॉर्म के माध्यम से तुरंत पैसे निकालने की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

4- पासपोर्ट फीस में हुआ भारी इजाफा

सरकार ने पासपोर्ट नियम, 1980 में संशोधन करके पासपोर्ट आवेदन शुल्क में बदलाव किया है। ये बदलाव भी 1 जुलाई से प्रभावी हो गया है। अब 36 पन्नों के नए सामान्य पासपोर्ट की फीस 1500 से बढ़ाकर 2500 रुपये कर दी गई है। इसी कैटेगरी में तत्काल शुल्क को 3500 से बढ़ाकर 5000 रुपये कर दिया गया है। 60 पन्नों के पासपोर्ट और खोए या कटे-फटे पासपोर्ट को बदलने की फीस में भी बढ़ोतरी की गई है। वरिष्ठ नागरिकों और 8 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को नए आवेदनों पर 10 प्रतिशत की छूट मिलती रहेगी।

5- आधार (Aadhaar) में ईमेल अपडेट करना हुआ फ्री

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधिकारिक आधार मोबाइल ऐप के माध्यम से पंजीकृत ईमेल पते को अपडेट करने पर लगने वाले ₹75 के शुल्क को माफ कर दिया है। यह मुफ्त सुविधा 1 जुलाई से 31 दिसंबर 2026 तक उपलब्ध रहेगी।

6- मिस-सेलिंग पर RBI की सख्ती, टेलीमार्केटिंग का समय तय

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों द्वारा वित्तीय उत्पादों की गलत तरीके से बिक्री को रोकने और ग्राहकों की सुरक्षा के लिए कड़े नियम पेश किए हैं। अगर किसी ग्राहक को उचित सहमति के बिना या भ्रामक तरीकों से उत्पाद बेचे जाते हैं तो वे रिफंड और मुआवजे के हकदार होंगे। बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे टेलीमार्केटिंग और प्रमोशनल कॉल्स को सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही सीमित रखें।

7- HDFC बैंक ने क्रेडिट कार्ड रिवॉर्ड और लाउंज नियमों को बदला

एचडीएफसी बैंक ने अपने रेगेलिया गोल्ड और डाइनर्स क्लब प्रिविलेज क्रेडिट कार्ड के लिए रिवॉर्ड पॉइंट स्ट्रक्चर और ट्रैवल बेनिफिट्स में बदलाव किया है। रिवॉर्ड कैलकुलेशन से जुड़े बदलाव पहले ही लागू किए जा चुके हैं जबकि एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस से जुड़ी संशोधित शर्तें 1 जुलाई से प्रभावी हो गई हैं। नए नियमों के मुताबिक रेगेलिया गोल्ड कार्डधारकों को कॉम्प्लीमेंट्री डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस का लाभ उठाने के लिए पिछली तिमाही में कम से कम 60000 रुपये खर्च करने होंगे।

8- SBI कार्ड ने लगाई रिवॉर्ड पॉइंट्स पर कैपिंग

एसबीआई कार्ड ने अपने दो वेरिएंट्स PhonePe SBI Card Purple और PhonePe SBI Card Select Black के नियमों में बदलाव की घोषणा की है। 1 जुलाई से प्रभावी नियमों के तहत कंपनी ग्राहकों द्वारा कमाए जाने वाले रिवॉर्ड पॉइंट्स पर मंथली कैप लगाएगी। इंश्योरेंस से जुड़े खर्चों और अन्य श्रेणियों के खर्चों के लिए अलग-अलग सीमाएं लागू होंगी। ऑनलाइन लेनदेन पर मिलने वाले अधिकतम रिवॉर्ड पॉइंट्स को भी कम कर दिया गया है।

ये 5 सरकारी ऐप आपकी जिंदगी बना देंगे आसान, नो पेपरवर्क सिर्फ घर बैठे निपटाएं गाड़ी, टैक्स और PF के ये सारे काम

सरकारी सेवाओं का लाभ उठाने के लिए अब फॉर्म भरने या लंबी लाइनों में खड़े होने की जरूरत नहीं है। पहले जिन कामों के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे वे अब आपके स्मार्टफोन के जरिए चुटकियों में हो सकते हैं। चाहे आपको पेमेंट करनी हो, जरूरी डॉक्युमेंट्स देखने हों, पीएफ खाते की जांच करनी हो या फिर अपने हेल्थ रिकॉर्ड को संभालना हो, सरकारी सिस्टम में मौजूद कुछ ऐप ऐसे हैं जो समय और मेहनत दोनों की बचत कर सकते हैं। यहां ऐसे ही 5 सरकारी ऐप्स के बारे में जानकारी दी गई है जिन्हें आपको अपने स्मार्टफोन में जरूर रखना चाहिए।

1- DigiLocker: सारे जरूरी डॉक्युमेंट रहेंगे एक जगह सुरक्षित

डिजीलॉकर आपको अपने महत्वपूर्ण दस्तावेजों जैसे कि ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण प्रमाणपत्र (RC), शैक्षणिक प्रमाणपत्र (Academic Certificates) और बीमा के कागजात के डिजिटल वर्जन को स्टोर और एक्सेस करने की सुविधा देता है। डिजीलॉकर के जरिए जारी किए गए दस्तावेज कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य हैं। ऐसे में आपको कई तरह के डॉक्युमेंट्स की फिजिकल कॉपी ले जाने की जरूरत नहीं होती है। ये ऐप खासकर छात्रों, नौकरी की तलाश कर रहे लोगों और अक्सर यात्रा करने वालों के लिए बेहद उपयोगी है।

2- BHIM: UPI भुगतान करने का सबसे आसान तरीका

अगर आप एक बेहद सरल और सीधा UPI ऐप इस्तेमाल करना चाहते हैं तो भीम ऐप आपके लिए ही है। यह ऐप आपको पैसे भेजने और पेमेंट लेने, क्यूआर कोड स्कैन करने, मर्चेंट्स को भुगतान करने और एक साथ कई बैंक खातों को मैनेज करने की सुविधा देता है। यह पूरी तरह से यूपीआई नेटवर्क पर काम करता है इसलिए इसके जरिए किसी भी समय पेमेंट किया जा सकता है।

3- UMANG: सैकड़ों सरकारी सेवाएं एक ऐप पर

अलग-अलग सरकारी विभागों के लिए अलग-अलग ऐप्स डाउनलोड करने के बजाय उमंग ऐप आपको कई सारी सेवाएं एक ही जगह पर उपलब्ध कराता है। इस सिंगल ऐप के जरिए आप ईपीएफओ सेवाओं, पेंशन से जुड़ी जानकारी, यूटिलिटी बिलों के भुगतान, गैस बुकिंग और पासपोर्ट सेवाओं सहित बहुत कुछ एक्सेस कर सकते हैं। अगर आपको नियमित रूप से सरकारी विभागों से जुड़े काम रहते हैं तो यह ऐप आपका काफी समय बचा सकता है।

4- ABHA: आपके हेल्थ रिकॉर्ड्स को मैनेज करना हुआ आसान

आभा ऐप आपको सरकार के डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत एक यूनीक डिजिटल हेल्थ आईडी बनाने की अनुमति देता है। इसके जरिए आपकी स्वास्थ्य संबंधी जानकारियों को एक्सेस करना काफी आसान हो जाएगा क्योंकि इस ऐप से जुड़े अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के बीच आपकी मेडिकल जानकारी डिजिटल रूप से शेयर की जा सकेगी। यह विशेष रूप से उन मरीजों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है जिनका लगातार इलाज चल रहा है और वे कई अस्पतालों में जाते हैं।

5- mAadhaar: आधार सेवाओं तक तुरंत पहुंच

एमआधार ऐप आपको अपने फोन में अपने आधार कार्ड का डिजिटल वर्जन रखने की सुविधा देता है। इस ऐप के माध्यम से आप आधार से जुड़ी विभिन्न सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं, अपनी कुछ जानकारियों को अपडेट कर सकते हैं और एनरोलमेंट सेंटर्स का पता लगा सकते हैं। जहां कहीं भी पहचान सत्यापन की आवश्यकता होती है, आप अपने इस डिजिटल आधार का उपयोग कर सकते हैं।

ये सभी ऐप्स अलग-अलग उद्देश्यों को पूरा करते हैं लेकिन कुल मिलाकर ये उन सभी सेवाओं को कवर करते हैं जिनकी लोगों को सबसे ज्यादा जरूरत होती है। इन्हें डाउनलोड करके आप अपना समय, कागजी कार्रवाई और सरकारी दफ्तरों के अनावश्यक चक्करों से बच सकते हैं।

FAQs: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q1- क्या डिजीलॉकर में स्टोर किए गए दस्तावेज कानूनी रूप से मान्य हैं?

उत्तर: हां, डिजीलॉकर के माध्यम से जारी या सत्यापित किए गए दस्तावेज सरकारी नियमों के तहत कानूनी रूप से पूरी तरह मान्य हैं और कई संगठनों द्वारा स्वीकार किए जाते हैं।

Q2- क्या भीम ऐप अन्य UPI ऐप्स से अलग है?

उत्तर: भीम ऐप भी अन्य पेमेंट ऐप्स की तरह ही UPI नेटवर्क का उपयोग करता है। इसका प्राइम फोकस सिर्फ पैसे भेजने और पेमेंट रिसीव करने पर है।

Q3- क्या उमंग ऐप सरकारी दफ्तरों के चक्करों को पूरी तरह खत्म कर सकता है?

उत्तर: कई सेवाओं के लिए इसका उत्तर हां है। हालांकि, कुछ प्रक्रियाओं में अभी भी भौतिक सत्यापन या मूल दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता हो सकती है।

PF Withdrawal Rules: क्या PF का पूरा पैसा निकाला जा सकता है? जानिए नियम और शर्तें

EPFO Rules: कर्मचारी भविष्य निधि (EPF) को मुख्य रूप से रिटायरमेंट यानी बुढ़ापे की सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य बचत के रूप में तैयार किया गया है। लेकिन अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या वे जब चाहें अपने पीएफ खाते से 100% पैसा निकाल सकते हैं? खासकर ऐसे समय में जब EPFO 3.0 और डिजिटल सेवाओं के अपग्रेडेशन की चर्चाएं जोरों पर हैं, पीएफ विड्रॉल के नियमों को समझना बेहद जरूरी है।

अगर आप भी अपने पीएफ का पूरा पैसा निकालने की सोच रहे हैं, तो इसका सीधा जवाब है- नहीं, आप नौकरी के दौरान जब चाहें तब पूरा पैसा नहीं निकाल सकते। ईपीएफओ के नियमों के मुताबिक, एक्टिव नौकरी के दौरान पूरा फंड निकालने पर रोक है, लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में इसकी इजाजत मिलती है। आइए जानते हैं पीएफ विड्रॉल से जुड़े जरूरी नियम।

कब निकाल सकते हैं अपने पीएफ का 100% पैसा?

EPFO के मौजूदा नियमों के अनुसार, केवल दो मुख्य परिस्थितियों में ही आप अपने खाते से पूरा फंड निकाल सकते हैं:

1. रिटायरमेंट के समय: जब कर्मचारी की उम्र 58 वर्ष हो जाती है, तब वह फाइनल सेटलमेंट के लिए आवेदन कर सकता है और अपने खाते में जमा पूरा पैसा निकाल सकता है।

2. नौकरी छूटने या बेरोजगारी की स्थिति में: अगर आपकी नौकरी चली जाती है, तो आप बेरोजगारी के दौरान वित्तीय मदद के लिए पैसा निकाल सकते हैं।

1 महीना बेरोजगार रहने पर: आप अपने कुल पीएफ बैलेंस का 75% तक हिस्सा निकाल सकते हैं।

2 महीने या उससे अधिक बेरोजगार रहने पर: आप बचे हुए बाकी बचे हुए 25% के लिए भी क्लेम कर सकते हैं और इस तरह पूरा 100% फंड निकाल सकते हैं।

नौकरी बदलने पर क्या पैसा निकालना सही है?

कई कर्मचारियों को यह गलतफहमी होती है कि जब वे कंपनी बदलते हैं, तो उन्हें पुराना पीएफ का पैसा निकाल लेना चाहिए। लेकिन EPFO हमेशा यही सलाह देता है कि नौकरी बदलने पर पैसा निकालने के बजाय अपने यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) का इस्तेमाल करके पीएफ को नई कंपनी में ट्रांसफर कर लें।

ऐसा करना क्यों जरूरी है?

  • ब्याज का नुकसान नहीं: फंड ट्रांसफर करने से आपके पैसे पर सालाना ब्याज मिलना जारी रहता है।
  • सर्विस रिकॉर्ड: आपकी नौकरी का रिकॉर्ड बिना टूटे लगातार चलता रहता है।
  • टैक्स का झंझट: बार-बार नौकरी बदलने पर पैसा निकालने से आपके रिटायरमेंट का फंड तो कम होता ही है, साथ ही कुछ मामलों में इस पर टैक्स भी देना पड़ सकता है।

नौकरी के दौरान केवल आंशिक विड्रॉल की अनुमति

भले ही नौकरी के दौरान पूरा पैसा निकालने पर पाबंदी हो, लेकिन ईपीएफओ अपने सदस्यों को कुछ खास और जरूरी जरूरतों के लिए एडवांस के रूप में आंशिक निकासी की अनुमति देता है। आप इन कामों के लिए नौकरी के दौरान पैसा निकाल सकते हैं:

  • उच्च शिक्षा और बच्चों या खुद की शादी के लिए।
  • घर खरीदने, जमीन खरीदने या मकान बनवाने के लिए।
  • होम लोन का पुनर्भुगतान करने के लिए।
  • खुद के या परिवार के गंभीर इलाज के लिए।

नोट: इन सभी श्रेणियों के लिए आपकी सर्विस की अवधि और विड्रॉल की लिमिट के नियम अलग-अलग होते हैं।

पैसा निकालने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

भले ही पीएफ का पैसा निकालने से आपको तुरंत कैश मिल जाता है, लेकिन ऐसा करने से आपके बुढ़ापे की सुरक्षा को नुकसान पहुंच सकता है। ईपीएफ एक बेहतरीन निवेश माध्यम है जहां आपको अनिवार्य बचत, नियोक्ता का योगदान और टैक्स-फ्री सालाना ब्याज का तगड़ा कॉम्बिनेशन मिलता है। इसलिए, जब तक कोई बेहद गंभीर इमरजेंसी न हो, अपने पीएफ कॉर्पस को हाथ न लगाएं और नौकरी बदलने पर इसे हमेशा ट्रांसफर ही करें।