कनाडा के अल्बर्टा के सैन्य अड्डे पर शनिवार को जोरदार धमाके के बाद आग लग गई। इसमें कई सैनिक और कर्मचारी मारे गए। रक्षा मंत्री डेविड मैकगिन्टी ने हादसे की जानकारी दी। उन्होंने कहा, ‘मैंने ऐसा दर्दनाक दृश्य पहले कभी नहीं देखा।’ मृतकों और घायलों की संख्या फिलहाल नहीं बताई गई है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोशल मीडिया पर इसे गंभीर घटना बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन साथ मिलकर राहत और बचाव के काम में जुटी है। इस सैन्य अड्डे पर 1300 से ज्यादा सैनिक और कर्मचारी काम करते है। घटना के बाद की 3 तस्वीरें डॉक्टर बोले- स्वास्थ्य केंद्र मरीजों से भरे स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, विस्फोट के बाद तेज हवाओ के कारण आग सैन्य अड्डे के आसपास तेजी से फैल गई। कई इलाकों से दमकलकर्मी आग बुझाने के लिए पहुंचे। रॉयल एलेक्जेंड्रा अस्पताल के इमरजेंसी डॉक्टर वॉरेन थिर्स्क ने इसे 15 से 25 साल में एक बार होने वाली बड़ी आपदा बताया। उन्होंने कहा कि मरीजों की संख्या इतनी ज्यादा थी कि शहर के स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह भर गए। अधिकारियों ने अभी तक यह नहीं बताया है कि धमाका कैसे हुआ और आग लगने की वजह क्या थी। रक्षा मंत्री मैकगिन्टी ने कहा कि कनाडा की रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) घटना की जांच कर रही है। यह कनाडा का सबसे व्यस्त सैन्य अड्डा है अल्बर्टा में यह सैन्य अड्डा कनाडा के अहम आर्मी ट्रेनिंग कैंप्स में से एक है। यहां सैनिकों को युद्ध के लिए तैयार किया जाता है। यहां कनाडियन मैनूवर ट्रेनिंग सेंटर भी है, जहां जवान युद्ध के मैदान जैसी परिस्थितियों में ट्रेनिंग लेते हैं। इसके अलावा, यहां तीसरे कनाडाई डिवीजन के सैनिकों को भी सैन्य प्रशिक्षण दिया जाता है। ———————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका में चुनावी प्रचार में AI का इस्तेमाल बढ़ा:न्यूयॉर्क के मेयर को महंगाई की दवा बेचते, डेमोक्रेट उम्मीदवार को 9/11 पर हंसते दिखाया अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राजनीतिक प्रचार में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। उम्मीदवारों और राजनीतिक संगठनों ने AI से बने विज्ञापनों के प्रचार पर करीब 1300 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
Stocks to Watch on Monday: शेयर बाजारों में 19 अक्तूबर यानी सोमवार को कई स्टॉक्स में बड़ी हलचल दिख सकती है। कई बड़े बैंकों ने हफ्ते के अंत में सितंबर तिमाही के नतीजों का एलान किया है। उनके शेयरों पर सोमवार को नतीजों का असर दिखेगा। कई बैंकों का प्रदर्शन सितंबर तिमाही में अच्छा रहा है। कुछ कंपनियों को बड़े ऑर्डर्स मिले हैं। इस वजह से उनके शेयरों में तेजी दिख सकती है। आइए इन शेयरों के बारे में जानते हैं।
एचडीएफसी बैंक की NII में 10% उछाल
HDFC Bank ने सितंबर तिमाही के नतीजों का ऐलान किया है। इस दौरान बैंक का नेट प्रॉफिट 4.7 फीसदी बढ़कर 19,510 करोड़ रुपये पहुंच गया। नेट इंटरेस्ट इनकम में 9.7 का इजाफा दिखा। हालांकि, नेट इंटरेस्ट मार्जिन 3.16 फीसदी से अब तक के सबसे निचले स्तर पर आ गया। साल दर साल आधार पर बैंक की ट्रेजरी ट्रेडिंग इनकम भी 67.4 फीसदी गिर गई। बैंक के शेयरों पर दूसरी तिमाही के नतीजों का असर 19 अक्तूबर को दिखेगा।
Axis Bank का प्रॉफिट 37 फीसदी उछला
Axis Bank का प्रदर्शन सितंबर तिमाही में शानदार रहा है। इस दौरान बैंक का प्रॉफिट साल दर साल आधार पर 37.6 फीसदी बढ़कर 7,003 करोड़ रुपये रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम 11.8 फीसदी बढ़कर 15,372 करोड़ रुपये हो गई। यह बाजार के अनुमान से ज्यादा है। एसेट क्वालिटी में भी इम्प्रूवमेंट दिखा। इससे 19 अक्तूबर को बैंक के शेयर में तेजी दिख सकती है।
ICICI Bank का प्रॉफिट 20 फीसदी बढ़ा
ICICI Bank देश का दूसरा सबसे बड़ा प्राइवेट बैंक है। सितंबर तिमाही में बैंक का प्रदर्शन अच्छा रहा है। साल दर साल आधार पर इस दौरान नेट प्रॉफिट 20.1 फीसदी बढ़कर 14,843 करोड़ रुपये रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम 17.7 फीसदी बढ़कर 25,339 करोड़ रुपये रही। सोमवार को बैंक के शेयरों में उछाल दिख सकता है।
पीएनबी का मुनाफा 11 फीसदी बढ़ा
पंजाब नेशनल बैंक का प्रदर्शन भी सितंबर तिमाही में अच्छा रहा। इस दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम 10.8 फीसदी बढ़कर 11,601 करोड़ रुपये रही। नेट प्रॉफिट 12.8 फीसदी बढ़कर 5,532.2 करोड़ रुपये रहा। ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स गिरकर 2.55 फीसदी पर आ गया। पीएनबी सरकारी बैंक है। इसके शेयरों पर नतीजों का असर 19 अक्तूबर को दिखेगा।
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यस बैंक का प्रदर्शन भी सितंबर तिमाही में अच्छा
प्राइवेट सेक्टर के यस बैंक का प्रदर्शन भी सितंबर तिमाही में अच्छा रहा है। बैंक का नेट प्रॉफिट इस दौरान 65.14 फीसदी बढ़कर 1,080 करोड़ रुपये रहा। नेट इंटरेस्ट इनकम 22.7 फीसदी बढ़कर 2,822 करोड़ रुपये रही। एनपीए भी 1.3 फीसदी से घटकर 1.2 फीसदी पर आ गया। बैंक ने सितंबर तिमाही में 317.3 करोड़ रुपये का प्रोविजन किया, जबकि पहली तिमाही में उसे 394.4 करोड़ रुपये का प्रोविजनिंग करना पड़ा था।
अमेरिका में टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में आई बड़ी गिरावट ने कई एशियाई शेयर बाजारों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। अमेरिका में सेमीकंडक्टर्स शेयरों में लगातार 8 सत्रों में बिकवाली देखने को मिली। यह 2008 के बाद बिकवाली का सबसे लंबा सिलसिला था। इसका असर नैस्डेक 100 पर भी पड़ा। अप्रैल 2005 के बाद इसमें सबसे बड़ी गिरावट आई।
आईआई शेयरों की बदौलत अमेरिकी शेयर बाजारों में तेजी
पिछले 1.5-2 सालों में अमेरिका में एआई और सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयरों में जबर्दस्त तेजी आई है। इस सेक्टर को चिप और दूसरे हार्डवेयर सप्लाई करने वाली एशियाई कंपनियों के शेयरों में भी खूब तेजी आई है। इनमें दक्षिण कोरिया और ताइवान की कई कंपनियां शामिल हैं। अमेरिका में एआई बूम जारी रखने के लिए नए निवेश की जरूरत है। पहले ही इस सेक्टर में काफी ज्यादा निवेश हो चुका है।
एआई में निवेश घटा तो एशियाई शेयर बाजारों में मच सकता है कोहराम
अगर अमेरिका में एआई में निवेश की रफ्तार सुस्त पड़ती है तो इसका असर इस सेक्टर से जुड़ी एशियाई कंपनियों पर भी पड़ेगा। इसका संकेत दिखने लगा है। नियोक्लाउड ऑफर करने वाली कंपनी CoreWeave के बॉन्ड्स की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है। इससे इस सेक्टर पर बढ़ते दबाव का संकेत मिलता है। इनवेस्टर्स सवाल पूछ रहे है कि एआई और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों ने जो निवेश किया है, क्या उसका रिटर्न मिलने जा रहा है? क्या AI की डिमांड इतनी है, जिससे इन कंपनियों के रेवेन्यू को सपोर्ट मिलेगा?
इंटरेस्ट रेट बढ़ने से एआई कंपनियों के लिए बढ़ रही इनवेस्टमेंट कॉस्ट
CoreWeave के शेयरों में 16 अक्तूबर को 12 फीसदी गिरावट आई। क्रूड की बढ़ती कीमतों ने एआई और सेमीकंडक्टर्स कंपनियों के लिए चिंता और बढ़ा दी है। क्रूड में उछाल से महंगाई बढ़ रही है, जिससे काबू में करने के लिए केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट्स बढ़ा रहे हैं। इससे इससे एआई कंपनियों के लिए नए निवेश की लागत भी बढ़ रही है। पिछले महीने अमेरिकी केंद्रीय बैंक इंटरेस्ट रेट 25 बेसिस प्वाइंट बढ़ा चुका है। अब नजरें इस महीने की फेड की पॉलिसी पर लगी हैं।
ताइवान और दक्षिण कोरिया की चिप कंपनियों को हो सकती है दिक्कत
ताइवान की TSMC, दक्षिण कोरिया की SK Hynix और Samsung Electronics जैसी कंपनियां AI कंप्यूटिंग के लिए जरूरी चिप और मेमोरी की सप्लाई करती हैं। इन कंपनियों की कमाई एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में होने वाले इनवेस्टमेंटम पर निर्भर है। अगर एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश घटता है तो इन कंपनियों की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। Gartner ने चेतावनी दी है कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में 3.5 ट्रिलियन डॉलर के इनवेस्टमेंट को 2030 तक बड़ा खतरा पैदा हो सकता है। इसकी वजह यह है कि इनवेस्टमेंट के अनुपात में रेवेन्यू नहीं दिख रहा।
कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में 236% तक उछाल
Union Bancaire Privee में मैनेजिंग डायरेक्टर वी-सेर्न लिंग ने कहा, “अगर हायरपरस्केलर्स और नियोक्लाउड्स को निवेश जारी रखने के लिए फंड नहीं मिलता है तो इसका असर टीएसएमसी, सैमसंग और SK Hynix जैसी एशियाई कंपनियों पर पड़ेगा। उन्हें मिलने वाले ऑर्डर्स घट जाएंगे।” इस साल MSCI Asia-Pacific Index की सबसे ज्यादा चढ़ने वाली 10 कंपनियों से 8 कंपोनेंट्स बनाने वाली कंपनियां हैं। इनमें से हर कंपनी का शेयर कम से कम 236 फीसदी चढ़ा है।
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भारतीय बाजार पर इस वजह से नहीं पड़ेगा असर
जहां तक भारत की बात है तो इसका असर भारतीय शेयर बाजारों पर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि भारत में एआई और सेमीकंडक्टर्स बनाने वाली कंपनियां नहीं हैं। यहीं वजह है कि पिछले 1-2 सालों में जब अमेरिका, दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों में तेजी आई तब भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली है। यहां तक की एआई बूम का निगेटिव असर भारतीय आईटी कंपनियों पर पड़ा है। अब जब एआई और चिप शेयर गिर रहे हैं तो भारतीय आईटी शेयरों में तेजी दिख रही है।
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राजनीतिक प्रचार में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। उम्मीदवारों और राजनीतिक संगठनों ने AI से बने विज्ञापनों के प्रचार पर करीब 1300 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। एक विज्ञापन में न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी और गवर्नर कैथी होकुल को महंगाई और अपराध का डर दूर करने वाली दवा बेचते दिखाया गया। एक दूसरे विज्ञापन में मिशिगन के डेमोक्रेटिक सीनेट उम्मीदवार डॉ. अब्दुल एल-सय्यद का AI से बना वीडियो दिखाया गया। इसमें वे ‘डेथ टू अमेरिका’ और ‘9/11 हमले का जश्न मनाओ’ लिखे कार्ड देखकर हंसते नजर आए। 80% AI विज्ञापन ट्रम्प की पार्टी ही बना रही अमेरिका की वेस्लेयन यूनिवर्सिटी की जांच में 220 से ज्यादा ऐसे वीडियो की पहचान हुई है जिनमें AI का इस्तेमाल किया गया था। वेस्लेयन मीडिया प्रोजेक्ट की प्रोफेसर एरिका फ्रैंकलिन फाउलर ने कहा, कई विज्ञापनों में AI का इस्तेमाल इतनी सफाई से किया गया कि बिना किसी जानकारी के यह पहचानना मुश्किल हो सकता है कि वीडियो में AI का इस्तेमाल हुआ है। इसका मकसद- विरोधियों को बदनाम करना AI से बनाए गए कुछ विज्ञापनों में राजनीतिक विरोधियों को ऐसे नेताओं के साथ दिखाया गया, जिनसे जुड़ने पर मतदाताओं के बीच विवाद हो सकता है। इनमें डेमोक्रेटिक पार्टी की हिलेरी क्लिंटन और अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज जैसे नेता शामिल हैं। ओक्लाहोमा में ‘मेक ओक्लाहोमा ग्रेट अगेन’ नाम के एक समूह ने डेमोक्रेटिक गवर्नर उम्मीदवार को हिलेरी क्लिंटन के साथ गले मिलते दिखाया। वीडियो में दोनों को हाथ पकड़े हुए दिखाया गया, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प किनारे उदास खड़े नजर आए। स्क्रीन पर लिखा था, ‘क्लिंटन का समर्थक, ट्रम्प का विरोधी।’ चुनवी रैलियों में भीड़ के लिए भी AI का इस्तेमाल AI का इस्तेमाल चुनावी रैलियों में ज्यादा भीड़ दिखाने के लिए भी किया जा रहा है। वहीं, फ्लोरिडा के गवर्नर पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार जेम्स फिशबैक के एक विज्ञापन में उन्हें डेमोक्रेटिक सांसद इल्हान उमर और ईरान के नेताओं के साथ पार्टी करते दिखाया गया। वीडियो में ईरानी नेताओं को तलवारों से यहूदी धर्म के प्रतीक ‘स्टार ऑफ डेविड’ पर हमला करते दिखाया गया। राजनीतिक विज्ञापनों में AI का इस्तेमाल केवल नकली घटनाएं बनाने तक सीमित नहीं है। ओक्लाहोमा के रिपब्लिकन उम्मीदवार चिप कीटन के एक विज्ञापन की शुरुआत में उनकी पुरानी असली तस्वीर दिखाई गई। यह तस्वीर उस समय की थी, जब वे ओक्लाहोमा में पुलिस अधिकारी थे। AI की मदद से तस्वीर में उनका सिर ऊपर उठता और चेहरे पर बड़ी मुस्कान आती दिखाई गई। AI से 19 करोड़ में बनने वाले विज्ञापन 1 करोड़ में बन रहे हॉलीवुड की विज्ञापन कंपनी स्ट्रैटेजिक परसेप्शन के संस्थापक फ्रेड एन. डेविसे मुताबिक, AI विज्ञापन बनाने की लागत काफी कम कर रहा है। उन्होंने एक विज्ञापन का उदाहरण देते हुए बताया कि इसे पारंपरिक तरीके से बनाने पर करीब लगभग 19 करोड़ रुपए खर्च होते। इसमें कलाकारों, कपड़ों की व्यवस्था, खाने-पीने और कैमरा-लाइटिंग के साथ पूरे दिन की शूटिंग की जरूरत पड़ती। लेकिन AI की मदद से वही दृश्य तैयार करने पर खर्च करीब 1.8 करोड़ रुपए रह गया है। अब AI कम समय और कम खर्च में ऐसे विज्ञापन बना सकता है। कई बार दर्शकों को पता भी नहीं चलता कि वीडियो में दिखाई गई घटना असली नहीं है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार AI के इस्तेमाल में ज्यादा सतर्क डेमोक्रेटिक उम्मीदवार AI के इस्तेमाल को लेकर रिपब्लिकन उम्मीदवारों से ज्यादा सतर्क हैं। इसकी एक वजह यह है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थक इस तकनीक की ज्यादा आलोचना करते हैं और इस पर नियम बनाने की मांग करते हैं। वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर और प्रोजेक्ट के सह-निदेशक ट्रैविस एन. रिडआउट ने कहा कि AI का इस्तेमाल करने से डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों और संगठनों की छवि को नुकसान पहुंचने का खतरा ज्यादा है, क्योंकि वे खुद इस तकनीक पर नियंत्रण के लिए नियम बनाने की मांग कर रहे हैं। —————————– यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका ने मदद रोकी तो यूक्रेन का क्या होगा:जेलेंस्की का साथ छोड़ पुतिन के साथ दिख रहे ट्रम्प; 1 सप्ताह में 4 झटके दिए रूस से करीब 5 साल से युद्ध लड़ रहे यूक्रेन के सामने अब नई मुसीबत खड़ी हो गई है। जिस अमेरिका के हथियारों और खुफिया जानकारी के दम पर यूक्रेनी सेना रूसी हमलों का मुकाबला कर रही है, उसी के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अक्टूबर में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 52,100 करोड़ रुपये निकाले हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिका में बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड और डॉलर की मजबूती के कारण निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ है। इससे भारतीय शेयर बाजार पर दबाव बढ़ा है। सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड (CDSL) के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने सितंबर में भारतीय शेयरों से 35,861 करोड़ रुपये निकाले थे।
इससे पहले जुलाई में उन्होंने 20,200 करोड़ रुपये और अगस्त में 29,631 करोड़ रुपये का निवेश किया था। अक्टूबर की ताजा सेलिंग के साथ विदेशी निवेशक साल 2026 में अब तक भारतीय शेयर बाजार से 3.12 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। साल 2025 में उन्होंने 1.66 लाख करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, चॉइस वेल्थ के चीफ इनवेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ऑफिसर धीरज गौड़ का कहना है कि अमेरिका में सरकारी बॉन्ड पर हाई यील्ड, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों में लगातार बिकवाली कर रहे हैं। अमेरिका में महंगाई का ऊंचे स्तर पर बने रहना भी ब्याज दर में बढ़ोतरी की आशंकाओं को बढ़ा रहा है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी एसेट्स अधिक आकर्षक हो गए हैं।
यह भी कहा कि महंगा कच्चा तेल भारतीय अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है। इसके अलावा, उत्तर एशियाई बाजारों में आर्टिफीशियल इंटेलीजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेजी के कारण विदेशी पूंजी भारत के बजाय उन बाजारों की ओर जा रही है।
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16 अक्टूबर को की थी खरीद
16 अक्टूबर को विदेशी निवेशकों ने कुछ बाइंग की थी। अमेरिकी सरकारी बॉन्ड पर यील्ड के कुछ नीचे आने और रुपये में मजबूती के कारण ऐसा हुआ था। बजाज ब्रोकिंग के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्व पबित्रो मुखर्जी का कहना है कि विदेशी निवेशकों की बिकवाली में कमी और शुक्रवार को बाइंग इस बात का संकेत है कि बाजार में निवेशकों की धारणा स्थिर हो सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार में रिकवरी की राह में अब भी जोखिम बनी हुई हैं।
Hormuz Strait Viral Video: ईरान के पास रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) में एक कंटेनर जहाज के डूबने के बाद सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में कथित तौर पर ईरानी मछुआरों और स्थानीय लोगों को समुद्र में तैरते iPhone, महंगे फ्रेंच परफ्यूम और दूसरे कीमती सामान को लूटने ने की कोशिश करते हुए दिखाया गया है। कुछ वीडियो में छोटी नावों को समुद्र में तैरते बड़े शिपिंग कंटेनरों को खींचने की कोशिश करते हुए भी देखा जा सकता है। हालांकि, इन वायरल वीडियो की सच्चाई पर सवाल उठने लगे हैं। कुछ फैक्ट-चेकिंग टीमों का कहना है कि ऑनलाइन वायरल हो रहे कुछ फुटेज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से बनाए गए हैं।
‘अल जजीरा’ की 17 अक्टूबर को जारी ओपन-सोर्स जांच के मुताबिक, स्मार्टफोन और लग्जरी परफ्यूम को समुद्र से निकालने का दावा करने वाले कई वीडियो फर्जी पाए गए। जांच में इन क्लिप्स को AI से तैयार किया गया बताया गया है। ऐसे में जहाज के डूबने की वास्तविक घटना और उससे जोड़कर शेयर किए जा रहे वीडियो के दावों को अलग-अलग समझना जरूरी है।
समुद्र में तैरते iPhone और परफ्यूम के वीडियो वायरल
सोशल मीडिया पर वायरल कुछ क्लिप्स में समुद्र की लहरों के बीच कंटेनर और पैकेट तैरते दिखाई देते हैं। दावा किया जा रहा है कि जहाज के डूबने के बाद उसका कीमती सामान पानी में बह गया। इसे देखते ही स्थानीय लोग उसे निकालने के लिए नावों से समुद्र में पहुंच गए। कुछ पोस्ट में इन पैकेटों को iPhone और फ्रांस के महंगे परफ्यूम की खेप बताया गया। हालांकि, इन सामानों की वास्तविक पहचान और वीडियो में दिखाई जा रही घटनाओं की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
लेबनान के अखबार अन-नहार की फैक्ट-चेकिंग टीम ने भी एक वायरल वीडियो की जांच की, जिसमें कथित तौर पर जहाज दुर्घटना के बाद iPhone के डिब्बे समुद्र तट पर पहुंचे दिखाई देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक विशेष डिटेक्शन टूल ने इस वीडियो के AI से बनाए जाने की बहुत अधिक संभावना जताई। इसलिए वायरल वीडियो को वास्तविक घटना का प्रमाण मानना सही नहीं होगा।
क्या है GFS Pride जहाज के डूबने की पूरी घटना?
यह मामला सिंगापुर के झंडे वाले कंटेनर जहाज GFS Pride के होर्मुज जलडमरूमध्य के पास डूबने के बाद सामने आया है। जहाज के डूबने की घटना की पुष्टि समुद्री अधिकारियों ने की है। सिंगापुर की मैरीटाइम एंड पोर्ट अथॉरिटी (MPA) के अनुसार, जहाज को नुकसान पहुंचा था और उसमें आग लग गई थी। इसके बाद जहाज समुद्र में डूब गया। राहत की बात यह रही कि जहाज पर मौजूद सभी 21 चालक दल के सदस्यों को सुरक्षित निकाल लिया गया। अधिकारियों ने किसी के घायल होने की सूचना नहीं दी।
न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, MPA ने अपने बयान में बताया कि जहाज क्षतिग्रस्त होने और उसमें आग लगने के बाद डूब गया। इस हादसे में सभी 21 क्रू सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया।
GFS Pride की कंटेनर क्षमता 2,824 TEU थी। TEU का अर्थ ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट है, जिसका इस्तेमाल कंटेनर जहाजों की क्षमता मापने के लिए किया जाता है।
जहाज कैसे डूबा? ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने खुद बताया
जहाज के डूबने की वजह को लेकर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की नौसेना ने अलग दावा किया। उसके मुताबिक, जहाज एक अवैध और खतरनाक समुद्री रूट्स में दाखिल हुआ था। समुद्री बारूदी सुरंग से टकरा गया, जिससे उसमें आग लग गई। हालांकि, जहाज के डूबने की परिस्थितियों, आग लगने के सटीक कारण और उसमें मौजूद सामान के बारे में किए जा रहे अलग-अलग दावों को सावधानी से देखना जरूरी है। खास तौर पर वायरल वीडियो में दिखाए गए iPhone और महंगे परफ्यूम की खेप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
WATCH: Viral Footage Shows iPhones Floating in Strait of Hormuz After Iran Sinks Singaporean Cargo Ship https://t.co/ilMIhLCgRs
— Ishaq Samaila (@ishaqsamaila5) October 16, 2026
होर्मुज में बढ़ा समुद्री जहाजों पर खतरा
GFS Pride के डूबने की घटना ऐसे समय हुई है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है। ‘रॉयटर्स’ ने 14 अक्टूबर की रिपोर्ट में इस क्षेत्र में जहाजों पर हमलों में बढ़ोतरी की जानकारी दी थी। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के अधिकारियों ने जलडमरूमध्य पर अपना कंट्रोल मजबूत करने की कोशिशों के बीच रणनीति में बदलाव की बात कही थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री रूट है। युद्ध से पहले दुनिया के कुल तेल और लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रूट से गुजरता था। फिलहाल, सबसे अहम बात यह है कि जहाज का डूबना वास्तविक घटना है। लेकिन समुद्र से iPhone और महंगे परफ्यूम निकालते लोगों के नाम पर वायरल हो रहे कई वीडियो की प्रामाणिकता पर सवाल उठ रहे हैं। इसलिए इन सभी वीडियो को वास्तविक घटना बताकर शेयर करने से पहले उनकी पुष्टि करना जरूरी है।
Video shows containers and debris scattered around the Strait of Hormuz due to the recent attacks on vessels. https://t.co/zeNz9QzEn3
— Al Jazeera English (@AJEnglish) October 15, 2026

Mercedes has taken the wraps off the AMG GT SUV which, according to the German marque, is the first full-size SUV it has developed completely in-house. The five-seat performance EV shares its underpinnings with the fully electric GT 4-Door Coupe, and will be available in GT 53, GT 55 and GT 63 guises, the last of which makes up to 1,169hp. The GT 53 will be the first to go on sale, with the more powerful variants joining the line-up in spring 2027.
- Star-shaped DRLs, illuminated badging, active aero and more.
- Personalisation options from the Manufaktur programme.
- Three digital displays, built-in AI assistants, AMG-specific apps and more.
- Claimed WLTP range of up to 700km, with DC fast charging of up to 710kW.
Mercedes-AMG GT SUV exterior
Illuminated badging, sloping roofline, active aerodynamics, Manufaktur paint options and more

The Mercedes-AMG GT SUV comes in at 5,084mm long, 2,001mm wide and 1,656mm tall, and it has a wheelbase of 3,040mm. The front fascia sports AMG’s vertical-slat grille and Mercedes star, both of which can be optionally illuminated, flanking which are LED headlamps with star-shaped DRLs (daytime running lights). The front bumper features active slats, which only open when components need extra cooling.

The profile showcases a low-slung roofline that slopes towards the rear along with pronounced wheel arches. Other details here include frameless side windows and compact wing mirrors. Moving to the rear of the AMG GT SUV reveals six circular tail-lamps as seen on the GT 4-Door Coupe, and customers can also opt for a full-width light strip.

Stepping up to the GT 55 and GT 63 means an active rear spoiler that remains flush with the roof until 150kph, changing its angle depending on the driving scenario. Mercedes-AMG also claims a drag coefficient of 0.28 for the GT 53, while the other two are rated at 0.27. The main boot has a claimed capacity of 607 litres, with the frunk capable of accommodating 78 litres worth of luggage.

Buyers can personalise the GT SUV through the brand’s Manufaktur programme, which presents over 60 paint options. Customers can also opt for AMG’s forged wheels in colour accents, which includes Matt Vanadium Silver and Matt Copper, Matt Black with a rim flange in Angel Blue, Sunny Lime, or Orange Flame.
Mercedes-AMG GT SUV interior and features
Stand-out tech includes dual 14-inch screens, AI assistants and AMG-specific apps

Just like the exterior, the interior of the Mercedes-AMG GT SUV can be personalised using the Manufaktur catalogue. Some of the options that will be offered to customers include accent colours and seatbelts trimmed in Fjord Blue, Green Hell or Orange Flame. The automaker claims that the seating position here is akin to that of a sports car rather than an SUV. Providing comfort up front are multi-way power-adjustable seats, while the three-seat rear bench gets power-folding headrests.

The dashboard pairs a 10.2-inch digital instrument cluster with a 14-inch touchscreen that’s angled towards the driver, while a 14-inch screen is optional for the front occupant. The AMG Performance steering wheel is equipped with paddles to adjust brake-regen levels, while adding to the design are door panels with floating armrests and diamond-pattern stitching. There’s also multi-colour ambient lighting whose colours can be matched to the bevy of displays and controls.
The infotainment system features the German brand’s latest MBUX software, which is based on the MB.OS (Mercedes-Benz Operating System). It integrates AI agents such as ChatGPT, Microsoft Bing and Google Gemini. This luxury SUV also comes with three AMG-specific apps. Firstly, there’s ‘AMG Performance Menu’, which displays real-time data on power, tyre temperatures and active aero status.

Second is ‘AMG Set-up’ – this lets the driver customise the buttons on the steering wheel as well as aero settings. Finally, there’s ‘AMG Track Pace’, which records lap times and telemetry. Drivers can also use it to show optimal braking points and the ideal racing line in the head-up display. Meanwhile, the optional dashcam allows laps to be recorded with data overlays. The AMG GT SUV is also available with an electrically dimming panoramic glass roof, AMG lighting effects, AMG Performance seats and a Burmester 4D audio system, among many optional features.
Mercedes-AMG GT SUV powertrain and performance
The EV gets up to three electric motors and a WLTP range of up to 700km
The entry-level GT 53 variant of the Mercedes-AMG GT SUV uses two synchronous motors – one on each axle – with a two-speed gearbox located at the rear. Its output is rated at 544hp and 800Nm, with Mercedes-AMG claiming a 0-100kph time of 4.2 seconds and a top speed of 250kph. Then there are the mid-spec GT 55 and the top-spec GT 63. These come with two axial flux motors at the rear and one at the front, the latter disengaging when not needed to save energy.

The tri-motor setup of the GT 55 outputs 816hp and 1,860Nm, allowing for a claimed 0-100kph time of 3.1 seconds. Sitting at the top of the Mercedes-AMG GT SUV line-up is the GT 63, which is rated at 1,169hp and 2,000Nm and does 0-100kph in 2.7 seconds. Regardless, the all-wheel-drive GT 55 and GT 63 have a claimed top speed of 270kph with the optional Driver’s Package.
The GT 53’s 106kWh battery pack offers a claimed WLTP range of up to 668km, while the 128kWh battery of the GT 55 and GT 63 is rated at up to 700km. These 800V packs offer DC fast charging of 600kW and 710kW, respectively. Mercedes-AMG claims that charging these batteries from 10-80 percent takes 11-12 minutes, though it also says that these figures are preliminary.

The GT SUV gets rear-wheel steering as standard while also debuting AMG’s new ‘Active Ride Control+’ suspension. The latter, which is standard on the top-spec GT 63, replaces traditional anti-roll bars with hydraulic units that, according to the automaker, curb body roll and pitch. The top-spec variant also gets carbon-ceramic brakes as standard.

In the tri-motor variants, drivers can adjust the throttle response, cornering behaviour and traction control using dials on the centre console. Mercedes-AMG also said that the ‘AMGForce Sport+’ mode recreates the sound of an AMG V8 (or a six-cylinder in the GT 53) along with simulated gearshifts. As for India, the German marque is yet to reveal its plans for the AMG GT SUV.
Q2 Results: दिग्गज सीमेंट कंपनी UltraTech Cement की सब्सिडियरी India Cements का सितंबर तिमाही में मुनाफा करीब 340% यानी चार गुना से ज्यादा बढ़ गया। कंपनी ने ₹38.8 करोड़ का नेट प्रॉफिट कमाया। पिछले साल इसी तिमाही में मुनाफा ₹8.8 करोड़ था।
कंपनी की कमाई यानी रेवेन्यू भी बढ़ी है। सितंबर तिमाही में यह 2.2% बढ़कर ₹1,142 करोड़ रहा। पिछले साल इसी दौरान रेवेन्यू ₹1,117 करोड़ था।
India Cements की कमाई में कैसे आया उछाल?
इंडिया सीमेंट्स का EBITDA सालाना आधार पर 78% बढ़कर ₹145 करोड़ हो गया। पिछले साल यह ₹81 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन भी 7.3% से बढ़कर 12.7% हो गया।
कंपनी के मुताबिक, प्लांट में कामकाज बेहतर होने और मशीनों का ज्यादा इस्तेमाल होने से मुनाफा बढ़ा है। आसान भाषा में कहें तो कंपनी पहले के मुकाबले अपने संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल कर रही है।
₹2,000 करोड़ खर्च करने की तैयारी
इंडिया सीमेंट्स ने कारोबार बढ़ाने के लिए ₹2,000 करोड़ के निवेश को मंजूरी दी है। सितंबर 2026 तक इसमें से करीब ₹1,728 करोड़ खर्च करने की प्रतिबद्धता जताई जा चुकी थी।
कंपनी हर साल सीमेंट बनाने की क्षमता 28 लाख टन बढ़ाना चाहती है। इसके अलावा, बिजली का खर्च घटाने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। कंपनी 24 मेगावाट का ऐसा सिस्टम लगाने की योजना पर काम कर रही है, जो सीमेंट बनाने के दौरान निकलने वाली गर्मी से बिजली बनाने में मदद करेगा। साथ ही, 263 मेगावाट की रिन्यूएबल एनर्जी क्षमता भी डेवलपम की जाएगी।
इंडिया सीमेंट्स के शेयरों का हाल
नतीजों की घोषणा से पहले शुक्रवार को BSE पर इंडिया सीमेंट्स का शेयर 1.78% चढ़कर ₹302.50 पर बंद हुआ। पिछले 1 साल में स्टॉक 23% गिरा है।
India Cements सीमेंट और इससे जुड़े प्रोडक्ट बनाती है। इसका इस्तेमाल निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में होता है। कंपनी UltraTech Cement की सब्सिडियरी है, जो आदित्य बिड़ला ग्रुप का हिस्सा है।
AI Stocks: एआई शेयरों में कमाई की रफ्तार घटने का अनुमान, Jefferies ने निवेशकों को दी बड़ी सलाह
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
AI Stocks: दुनिया भर के शेयर बाजारों में इस हफ्ते भारी बिकवाली देखने को मिली। AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी कंपनियों के कारोबार पर सवाल उठने और बढ़ते कर्ज की चिंता ने निवेशकों का भरोसा कमजोर किया। इसका असर खास तौर पर चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। अब ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने निवेशकों को AI से आगे दूसरे क्षेत्रों में भी अवसर तलाशने की सलाह दी है।
Jefferies की ताजा Greed and Fear रिपोर्ट के मुताबिक, अगले दो साल में AI कंपनियों की कमाई बढ़ने की रफ्तार काफी धीमी हो सकती है। रिपोर्ट का शीर्षक Diversifying Beyond AI है। इसका मतलब है कि पोर्टफोलियो में AI के परे जाकर विविधता लाना।
AI कंपनियों की कमाई में कितनी बढ़ोतरी का अनुमान?
जेफरीज की रिपोर्ट के मुताबिक, MSCI AC World Index में शामिल AI से जुड़ी कंपनियों की कमाई में बढ़ोतरी का अनुमान 2026 में करीब 100% है। हालांकि, 2027 में यह घटकर 30% और 2028 में 22% रह सकता है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या इन कंपनियों की कमाई उनके महंगे शेयरों की कीमत को सही ठहरा पाएगी।
Jefferies के ग्लोबल हेड ऑफ क्वांटिटेटिव स्ट्रैटेजी देश पेरामुनेतिलके (Desh Peramunetilleke) ने कहा कि अब निवेशकों के लिए AI से आगे दूसरे क्षेत्रों में निवेश फैलाने का समय है।
AI शेयरों का वैल्यूएशन दूसरी कंपनियों से ज्यादा
Jefferies के मुताबिक, वैश्विक AI शेयरों का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग (PE) रेशियो 23 गुना है। वहीं, AI से बाहर की कंपनियों का यह रेशियो करीब 13 गुना है। यानी निवेशक AI कंपनियों के शेयरों के लिए ज्यादा कीमत चुका रहे हैं, जबकि उनकी कमाई बढ़ने की रफ्तार धीमी पड़ने का अनुमान है।
उभरते बाजारों में भी AI शेयरों की तेजी कमजोर हुई है। जून 2026 तक के एक साल में इन शेयरों में 81% की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन साल की दूसरी छमाही में इनसे मिलने वाले रिटर्न की रफ्तार घटी। इस दौरान AI से बाहर के कई क्षेत्रों ने भी अच्छा प्रदर्शन किया।
सेमीकंडक्टर शेयरों पर नजर
Jefferies के पोर्टफोलियो में TSMC, Samsung Electronics और SK Hynix जैसी कंपनियां शामिल हैं। हालांकि, इनका जॉइंट वेटेज पोर्टफोलियो में 16% है, जबकि MSCI AC Asia ex-Japan Index में यह 32.1% है।
Jefferies का मानना है कि AI पर खर्च जारी रहा तो Samsung Electronics और SK Hynix के शेयर जून के उच्च स्तर को दोबारा छू सकते हैं। फिर भी रिपोर्ट ने चेताया है कि सेमीकंडक्टर शेयरों में आसान कमाई का दौर काफी हद तक पीछे छूट सकता है। इसलिए निवेशकों के लिए AI के अलावा दूसरे क्षेत्रों में भी निवेश के अवसर तलाशना जरूरी हो गया है।
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Neha Sharma: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के गलत इस्तेमाल ने दुनिया भर के लोगों, खासकर मशहूर हस्तियों के बीच चिंता पैदा कर दी है। इस तकनीक के जरिए डीपफेक, छेड़छाड़ किए गए वीडियो और पहचान के गलत इस्तेमाल के कई मामले सामने आ रहे हैं। अपनी पहचान के इस तरह के दुरुपयोग को लेकर कई कलाकार कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। इस सूची में अब अभिनेत्री नेहा शर्मा का नाम भी जुड़ गया है। उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई है और उन लोगों को चेतावनी दी है जो उनके चेहरे और रूप का इस्तेमाल करके AI-जनरेटेड कंटेंट बना रहे हैं।
नेहा का बयान
शनिवार को ‘X’ (ट्विटर) पर नेहा ने लिखा- “जो कोई भी मेरी सहमति के बिना, AI-जनरेटेड वीडियो या तस्वीरें बनाने के लिए मेरे चेहरे का इस्तेमाल कर रहा है उसे चेतावनी दी जाती है कि वह तुरंत ऐसा करना बंद कर दे।”
‘मैं कानूनी कार्रवाई करूंगी’
उन्होंने आगे कहा- “जो कंटेंट पहले ही पोस्ट किया जा चुका है, उसे तुरंत हटा दें। साथ ही मेरी पहचान का इस्तेमाल करके AI-जनरेटेड वीडियो या तस्वीरें बनाना, एडिट करना या उन्हें फैलाना बंद करें। मुझे गलत तरीके से पेश करने या मेरी छवि खराब करने के लिए मेरे चेहरे का इस तरह इस्तेमाल करना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। मैं अपने चेहरे या बॉडी के इस तरह के अनधिकृत इस्तेमाल की अनुमति नहीं देती हूं।”
कानूनी रास्ता अपनाने की बात कहते हुए नेहा ने अपनी बात खत्म की औक कहा कि इसे एक औपचारिक चेतावनी समझें। जो कोई भी ऐसा कंटेंट बनाने, पोस्ट करने या फैलाने के लिए जिम्मेदार है, उसके खिलाफ मैं कानूनी कार्रवाई करूंगी। किसी को भी यह नहीं सोचना चाहिए कि फर्जी अकाउंट के पीछे छिपने या AI का इस्तेमाल करने से वे जवाबदेही से बच जाएंगे।
Anyone using my face or likeness to create AI-generated videos or images without my consent is hereby warned to STOP IMMEDIATELY.
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Consider this a formal warning: I WILL TAKE LEGAL ACTION AGAINST EVERY INDIVIDUAL RESPONSIBLE FOR CREATING, POSTING, OR CIRCULATING SUCH CONTENT. No one should assume that hiding behind a fake account or the use of AI will protect them from accountability.
TAKE IT DOWN NOW. YOU HAVE BEEN WARNED.
— Neha Sharma (@Officialneha) October 17, 2026
अपनी पहचान की सुरक्षा करती मशहूर हस्तियां
नेहा उन कई भारतीय मशहूर हस्तियों में से एक हैं जिन्होंने डीपफेक के मुद्दे पर बात की है। हाल के दिनों में कई कलाकारों ने AI के जरिए अपनी पहचान, छवि और व्यक्तित्व अधिकारों के दुरुपयोग को रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अक्षय कुमार, वरुण धवन, अनिल कपूर, शिल्पा शेट्टी, प्रीति जिंटा, कार्तिक आर्यन, मृणाल ठाकुर, सुनील शेट्टी और कई अन्य सितारों ने अपनी तस्वीरों और आवाज के अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर कोर्ट का रुख किया है। यह सब AI के जरिए पहचान की चोरी (identity theft) को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच हो रहा है।


