Video: बिस्किट में गड़बड़ी पर दुकानदार से भिड़ा शख्स, ऑनलाइन शिकायत की बात सुनकर मिला ऐसा जवाब

कई बार रोजमर्रा की खरीदारी के दौरान लोग छोटी-मोटी कमियों को नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कुछ लोग सवाल उठाने से पीछे नहीं हटते। ऐसा ही एक मामला बिस्किट के पैकेट को लेकर सामने आया है, जहां एक कंटेंट क्रिएटर ने दुकानदार से ऑनलाइन शिकायत करने की बात कही। दुकानदार के जवाब और दोनों के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसे देखने के बाद लोग उपभोक्ता जागरूकता और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर चर्चा करने लगे। कई यूजर्स ने शिकायत करने के कदम की तारीफ की, तो कुछ ने खाद्य सुरक्षा विभाग की भूमिका पर ध्यान दिलाया।

इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि अगर किसी पैकेटबंद खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो उपभोक्ता को क्या करना चाहिए और अपनी शिकायत कहां दर्ज करानी चाहिए।

दुकानदार से पूछा- ऑनलाइन शिकायत कर दूं?

राघव दुबे नाम के कंटेंट क्रिएटर ने यह वीडियो शेयर किया है। इसमें वह बिस्किट के पैकेट की गुणवत्ता को लेकर सवाल करते हैं और दुकानदार से पूछते हैं, “Complaint online daalu chalega” यानी क्या वह ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं?

इस पर दुकानदार जवाब देता है, “हां, डाल दो।” वीडियो में हुई इस छोटी-सी बातचीत ने लोगों का ध्यान खींचा। रिपोर्ट के मुताबिक, वीडियो को 1.4 करोड़ से ज्यादा बार देखा गया। कई यूजर्स ने कहा कि किसी उत्पाद की गुणवत्ता पर संदेह होने पर ग्राहक को आवाज उठानी चाहिए, न कि मामले को अनदेखा करना चाहिए।

सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा?

वीडियो पर कई लोगों ने कंटेंट क्रिएटर के कदम की तारीफ की। कुछ यूजर्स ने इसे उपभोक्ता जागरूकता से जोड़कर देखा, तो कुछ ने खाद्य सुरक्षा विभाग के काम की सराहना की। एक यूजर ने लिखा, “Good Job”, जबकि दूसरे ने खाद्य सुरक्षा विभाग की तारीफ की। कुछ लोगों ने यह भी पूछा कि शिकायत कहां दर्ज की गई और कार्रवाई होने में कितना समय लगा। यूजर्स का कहना था कि खाने-पीने की चीजों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

महाराष्ट्र FDA में ऑनलाइन शिकायत की सुविधा

महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के पास खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता से जुड़ी शिकायतें दर्ज कराने की ऑनलाइन सुविधा है। इसके माध्यम से मिलावट, असुरक्षित खाद्य उत्पादों और पैकेट पर गलत जानकारी जैसी समस्याओं की शिकायत की जा सकती है। जुलाई 2026 में विभाग ने आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में AI की मदद से शिकायतों को संभालने वाला प्लेटफॉर्म शुरू किया था। इसका उद्देश्य शिकायत दर्ज कराने और उनकी स्थिति जानने की प्रक्रिया को आसान बनाना है।

खाद्य पदार्थ में गड़बड़ी दिखे तो क्या करें?

अगर किसी बिस्किट या पैकेटबंद खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता पर संदेह हो, तो उसका पैकेट संभालकर रखें। उत्पाद, बैच नंबर और एक्सपायरी तारीख की तस्वीरें लें। खरीदारी का बिल भी सुरक्षित रखें और संदिग्ध उत्पाद का सेवन न करें। इसके बाद निर्माता या संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत दर्ज कराएं।

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TomTom Layoffs: नीदरलैंड की कंपनी फिर करेगी छंटनी, इस बार 200 लोगों की जा सकती है नौकरी

नीदरलैंड्स की लोकेशन डेटा कंपनी टॉमटॉम एनवी (TomTom NV) एक बार फिर रीस्ट्रक्चरिंग कर रही है। इसके तहत वैश्विक स्तर पर 200 नौकरियां कम की जाएंगी। इससे सालाना लगभग 2.1 करोड़ यूरो (2.36 करोड़ डॉलर) की बचत होने की उम्मीद है। यह बात रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कही गई है। कंपनी AI को अपनाने के लिए पहले ही साल 2025 में 300 नौकरियां कम कर चुकी है। टॉमटॉम अब नए ड्राइविंग समाधान विकसित करने के लिए धीरे-धीरे अपना फोकस पार्टनरशिप्स पर शिफ्ट कर रही है।

इसके तहत कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के साथ जेनरेटिव AI पर और मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक के साथ ऑटोमेटेड ड्राइविंग पर काम कर रही है। टॉमटॉम अपने नए मैपिंग प्लेटफॉर्म ‘टॉमटॉम ऑर्बिस’ (TomTom Orbis) में निवेश भी कर रही है। TomTom का शेयर इस साल अब तक लगभग 30 प्रतिशत नीचे आया है।

ऑपरेटिंग मार्जिन गाइडेंस बढ़ाया

रॉयटर्स के मुताबिक, कंपनी ने 2026 के लिए अपने ऑपरेटिंग मार्जिन गाइडेंस को 3 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 4 प्रतिशत कर दिया है। इसमें चौथी तिमाही में होने वाले 1.5 करोड़ यूरो के रीस्ट्रक्चरिंग खर्च का प्रभाव भी शामिल है। टॉमटॉम ने पूरे साल के लिए अपने रेवेन्यू के अनुमान को भी रिवाइज किया है। अब रेवेन्यू 50.5 करोड़ से 53 करोड़ यूरो के बीच रहने की उम्मीद है। पहले यह अनुमान 49.5 करोड़ से 55.5 करोड़ यूरो के बीच था। तीसरी तिमाही यानि कि जुलाई-सितंबर 2026 में टॉमटॉम का रेवेन्यू गिरकर लगभग 13 करोड़ यूरो रह गया। यह कंपनी के अनुमान से कम है।

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नेटफ्लिक्स में 1000 लोगों की छंटनी

नेटफ्लिक्स अपने 6% कर्मचारियों की छंटनी कर रही है। लगभग 1,000 लोगों की नौकरी जाने वाली है। यह साल 2022 के बाद से कंपनी की अब तक की सबसे बड़ी छंटनी है। रॉयटर्स के मुताबिक, यह जानकारी को-CEO ग्रेग पीटर्स और टेड सारंडोस की ओर से कर्मचारियों को भेजे गए ईमेल से सामने आई है। छंटनी मुख्य रूप से नेटफ्लिक्स की प्रोडक्ट, टेक, लीगल और ह्यूमन रिसोर्सेज टीमों में होगी। पिछले साल के अंत में कंपनी के पास लगभग 16,000 कर्मचारी थे।

क्या बाजार मनाएगा आज गुड फ्राइडे का जश्न या मिलेगी निराशा, जानें गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहा संकेत

Gift Nifty Indicator: शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ खुलने की संभावना है। गुरुवार की जोरदार तेजी के बाद, GIFT निफ्टी एक सकारात्मक शुरुआत का संकेत दे रहा है। हाल ही में टेक्नोलॉजी शेयरों में हुई बिकवाली के बाद एशियाई बाजारों में सुधार, वॉल स्ट्रीट में तेजी और कच्चे तेल की कीमतों में मामूली गिरावट बाजार के सेंटिमेंट को सहारा दे सकती है। हालांकि, ऊर्जा की ऊंची कीमतें, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली बाजार में सुधार के लिए मुख्य जोखिम बने हुए हैं।

सुबह करीब 8 बजे GIFT निफ्टी 84 अंक या 0.37 फीसदी की बढ़त के साथ 23,072 पर कारोबार कर रहा था। यह गुरुवार को निफ्टी के 23,000 के स्तर के करीब बंद होने के बाद एक सकारात्मक शुरुआत का संकेत है। पिछले सत्र में भारतीय बाजारों में जोरदार तेजी देखी गई थी। सेंसेक्स 1,533.72 अंक (2.11 प्रतिशत) उछलकर 74,315.61 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 374.65 अंक (1.66 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 22,997.35 पर बंद हुआ। विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगभग 5,285 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने 3,319 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

शुक्रवार को एशियाई बाजारों में तेजी रही

सप्ताह की शुरुआत में सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई थी, जिसके बाद निवेशकों ने फिर से खरीदारी की। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स में 1.1 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिसमें गिरने वाले शेयरों की तुलना में बढ़ने वाले शेयरों की संख्या लगभग तीन गुना अधिक रही। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) सूचकांक 2.5 प्रतिशत चढ़ा। इसने गुरुवार की उस गिरावट से उबरने में मदद की, जिसने सूचकांक को अप्रैल के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंचा दिया था।

जापान का टॉपिक्स (Topix) 1.7 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग 0.9 प्रतिशत और शंघाई कंपोजिट 0.4 ​​प्रतिशत ऊपर रहे। इसके विपरीत, इंडोनेशिया के बाजार में 8 प्रतिशत की भारी गिरावट आई। इसका कारण यह चिंता है कि इंडोनेशिया को वैश्विक स्टॉक सूचकांकों से बाहर किया जा सकता है। अमेरिकी इक्विटी फ्यूचर्स में कोई खास बदलाव नहीं दिखा; S&P 500 फ्यूचर्स लगभग स्थिर स्तर पर कारोबार कर रहे थे।

निवेशकों के AI शेयरों से हटने के बीच वॉल स्ट्रीट में तेजी

गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजार बढ़त के साथ बंद हुए। शुरुआती नुकसान से उबरते हुए, निवेशकों ने अपना ध्यान हेल्थकेयर और कंज्यूमर शेयरों की ओर मोड़ा। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों के वैल्यूएशन और कर्ज के स्तर को लेकर चिंताएं बनी हुई थीं। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 1.08 प्रतिशत बढ़कर 52,177.69 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 में 0.33 प्रतिशत की तेजी आई और यह 7,744.06 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 0.08 प्रतिशत बढ़कर 26,713.03 पर पहुंच गया।

हेल्थकेयर शेयरों (जैसे एली लिली और यूनाइटेडहेल्थ) में खरीदारी देखने को मिली, जबकि कई टेक्नोलॉजी शेयरों पर दबाव बना रहा, क्योंकि निवेशक बढ़ती उधारी लागत (borrowing costs) के बीच अपने निवेश पर पड़ने वाले असर का आकलन कर रहे थे।

ब्रेंट क्रूड की कीमतों में नरमी, लेकिन अभी भी $105 के ऊपर

शुक्रवार को कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में थोड़ी गिरावट आई। निवेशक एक तरफ मध्य पूर्व से होने वाली सप्लाई के जोखिमों पर विचार कर रहे थे, तो दूसरी तरफ इस बात पर भी नजर रखे हुए थे कि क्या अमेरिका वैश्विक ‘शैडो फ्लीट’ (अघोषित टैंकर बेड़े) पर लगी पाबंदियों को कम करने के लिए कोई कदम उठा सकता है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 0.39 प्रतिशत गिरकर $105.51 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ $97.43 प्रति बैरल पर आ गया।

इंडेक्स पर क्या हो रणनीति

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि भारतीय शेयर बाजारों के लिए निकट भविष्य का नजरिया ‘सावधानी के साथ सकारात्मक’ (cautiously positive) बना हुआ है। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें बाजार में लगातार तेजी की गुंजाइश को सीमित कर सकती हैं। उन्होंने भू-राजनीतिक अनिश्चितता, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और विदेशी संस्थागत निवेश (FII) प्रवाह को ऐसे महत्वपूर्ण कारक बताया, जो बाजार की दिशा तय कर सकते हैं।

पोनमुडी के अनुसार, निवेशक विदेशी निवेश प्रवाह पर बारीकी से नजर रखेंगे, ताकि यह पता चल सके कि जोखिम लेने की क्षमता (risk appetite) में कोई टिकाऊ सुधार हो रहा है या नहीं। वहीं, बाजार में आई यह रिकवरी कितनी टिकाऊ होगी, यह काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगा।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

IIFL Finance Q2 Results: NBFC कंपनी का मुनाफा 103% बढ़ा, फोकस में रहेगा स्टॉक

IIFL Finance Q2 Results: NBFC कंपनी IIFL Finance ने वित्त वर्ष 2027 की सितंबर तिमाही में शानदार नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 103.7% बढ़कर 766.4 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल इसी तिमाही में कंपनी ने 376.3 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था।

कंपनी की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी 50.2% बढ़कर 2,161 करोड़ रुपये पहुंच गई। ये वो कमाई है, जो कर्ज पर मिलने वाले ब्याज और उधार पर चुकाए जाने वाले ब्याज के अंतर से होती है। कंपनी का कुल एसेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) सालाना आधार पर 38% बढ़कर 1.24 लाख करोड़ रुपये हो गया।

गोल्ड लोन कारोबार में 90% की ग्रोथ

IIFL Finance की ग्रोथ में गोल्ड लोन कारोबार की बड़ी भूमिका रही। इस सेगमेंट का AUM सालाना आधार पर 90% बढ़कर 65,729 करोड़ रुपये हो गया। पिछली तिमाही के मुकाबले इसमें 13% की बढ़ोतरी हुई। गोल्ड लोन में ग्रॉस NPA 0.90% रहा।

होम लोन का AUM पिछली तिमाही के मुकाबले 4% बढ़कर 43,070 करोड़ रुपये पहुंच गया। इस सेगमेंट में ग्रॉस NPA घटकर 1.38% रह गया। वहीं, छोटे कारोबारियों को दिए जाने वाले सिक्योर्ड MSME लोन का AUM 11% बढ़कर 11,948 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी बिना गारंटी वाले लोन में अपना जोखिम घटा रही है।

बैड लोन की स्थिति में सुधार

सितंबर तिमाही में IIFL Finance का ग्रॉस NPA 1.5% रहा। यह पिछली तिमाही से 0.07 प्रतिशत अंक कम है। हालांकि, नेट NPA 0.05 प्रतिशत अंक बढ़कर 0.9% हो गया। कंपनी का प्रोविजन कवरेज रेशियो 91% रहा। मतलब कंपनी ने खराब कर्ज से होने वाले संभावित नुकसान के लिए पर्याप्त रकम अलग रखी है।

कंपनी की वित्तीय स्थिति भी मजबूत बनी हुई है। इसका कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो 23.5% और लिक्विडिटी 13,805 करोड़ रुपये रही। वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में कंपनी का रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) 20.1% रहा।

AI के इस्तेमाल पर जोर

IIFL Finance लोन की जांच, कलेक्शन और ग्राहकों से बातचीत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल बढ़ा रही है। कंपनी के मुताबिक, प्रॉपर्टी के बदले छोटे और मझोले कारोबारियों को दिए जाने वाले लोन के 85% से ज्यादा आवेदनों के क्रेडिट असेसमेंट में AI का इस्तेमाल हो रहा है।

कंपनी ने गोल्ड लोन ब्रांचों में भी AI बेस्ड फ्रॉड डिटेक्शन सिस्टम लगाया है। यह सिस्टम अब तक सोने के गहनों की 11 लाख से ज्यादा तस्वीरों का एनालिसिस कर चुका है। कंपनी बैंकिंग पार्टनरशिप बढ़ाकर भी अपना कारोबार मजबूत करना चाहती है।

शेयर में हल्की तेजी

IIFL Finance का शेयर 15 अक्टूबर को NSE पर 0.53% बढ़कर 598 रुपये पर बंद हुआ। आगे कंपनी का फोकस सिक्योर्ड लोन बढ़ाने, खराब कर्ज पर नियंत्रण रखने और बैंकों के साथ साझेदारी मजबूत करने पर रहेगा।

कंपनी इक्विटी के जरिए नया फंड जुटाने की योजना पर भी काम कर रही है। इसके लिए जुलाई 2026 में शेयरधारकों से जरूरी मंजूरी मिल चुकी है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Q2 Results: आईटी कंपनी को ₹1586 करोड़ का मुनाफा, डिविडेंड और बोनस शेयर का ऐलान

Q2 Results: आईटी कंपनी Tech Mahindra ने सितंबर तिमाही में 1,586 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया। यह जून तिमाही के 1,465 करोड़ रुपये से 8.2% ज्यादा है। CNBC-TV18 के पोल में मुनाफा 1,576 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया गया था। यानी कंपनी के नतीजे अनुमान से बेहतर रहे।

डॉलर में रेवेन्यू भी बढ़ा

टेक महिंद्रा का डॉलर में रेवेन्यू भी 2% बढ़कर 1,693 मिलियन डॉलर हो गया। जून तिमाही में यह 1,660 मिलियन डॉलर था। वहीं, EBIT यानी ऑपरेटिंग मुनाफा सालाना आधार पर 40.5% बढ़कर 2,387 करोड़ रुपये पहुंच गया।

कंपनी का EBIT मार्जिन भी सुधरा है। यह जून तिमाही के 14.4% से बढ़कर 14.8% हो गया। Tech Mahindra का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 के अंत तक इसे 15% तक पहुंचाना है।

डिविडेंड और बोनस शेयर को मंजूरी

टेक महिंद्रा ने शेयरधारकों को 15 रुपये प्रति शेयर अंतरिम डिविडेंड देने का ऐलान किया है। इसके अलावा, बोर्ड ने 1:1 बोनस शेयर जारी करने को भी मंजूरी दी है। इसके तहत पात्र निवेशकों को हर एक शेयर के बदले एक अतिरिक्त शेयर मिल सकता है। हालांकि, इसके लिए जरूरी मंजूरियां मिलना बाकी है।

नए ऑर्डर और AI से ग्रोथ की उम्मीद

टेक महिंद्रा के CEO मोहित जोशी ने तिमाही प्रदर्शन को बेहद मजबूत बताया। सितंबर तिमाही में कंपनी को 1.023 अरब डॉलर के नए सौदे मिले। बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस कारोबार में 4.6% की बढ़ोतरी हुई। वहीं, हेल्थकेयर कारोबार 6.6% बढ़ा।

कंपनी को Orange के बड़े टेलीकॉम प्रोजेक्ट से भी मदद मिली। Avant Techno Solutions के अधिग्रहण से भी तिमाही के रेवेन्यू में योगदान हुआ। इसके अलावा, Tech Mahindra AI कारोबार को बढ़ाने पर जोर दे रही है। कंपनी के मुताबिक, उसका AI कलेक्शन सॉल्यूशन बकाया रकम की वसूली में करीब 40% तक एफिशिएंसी बढ़ा रहा है। कंपनी ने Cisco और SpaceX AI के साथ भी साझेदारी की घोषणा की है।

H-1B वीजा पर क्या बोले CEO?

अमेरिका के वीजा नियमों से जुड़े सवाल पर मोहित जोशी ने कहा कि अमेरिकी सरकार ने जिन कंपनियों का नाम लिया था, उनमें Tech Mahindra शामिल नहीं थी। उन्होंने कहा कि कंपनी दुनियाभर में वीजा नियमों और उनके अनुपालन को लेकर सतर्क रहती है।

जोशी के मुताबिक, H-1B वीजाधारक कंपनी के कुल कर्मचारियों का करीब 1% हैं। कंपनी का अमेरिका और वैश्विक स्तर पर स्थानीय कर्मचारियों की भर्ती पर जोर है।

शेयर में 4.75% की तेजी

नतीजों की घोषणा से पहले गुरुवार को Tech Mahindra का शेयर 4.75% बढ़कर 1,650 रुपये पर बंद हुआ। इस तेजी से शेयर सालभर के हिसाब से भी बढ़त में आ गया। पिछले 12 महीनों में इसमें 13% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

अगले साल कितनी होगी सैलरी हाइक? Aon सर्वे में आया ये आंकड़ा, जानिए किन सेक्टरों में होगी बंपर बढ़ोतरी

Salary Hike Projection: वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और ट्रेड रिस्क के बावजूद भारत में कर्मचारियों के लिए अच्छी खबर सामने आई है। ग्लोबल प्रोफेशनल सर्विसेज फर्म Aon plc के ‘Annual Salary Increase and Turnover Survey for India 2026-27’ के मुताबिक, अगले वित्त वर्ष में देश में औसत सैलरी हाइक 9.1% रहने का अनुमान है, जो कि पिछले साल के 9% से मामूली रूप से ज्यादा है। मजबूत घरेलू खपत और निरंतर निवेश के कारण देश में बिजनेस कॉन्फिडेंस बना हुआ है।

किन सेक्टरों में मिलेगी सबसे ज्यादा सैलरी हाइक?

सर्वे के अनुसार, सभी सेक्टरों में एक जैसी बढ़ोतरी नहीं होगी। कुछ खास सेक्टर्स टैलेंट की मांग और ग्रोथ के चलते सबसे आगे रहने वाले हैं:

NBFC: नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियां 10.1% की सबसे ऊंची सैलरी ग्रोथ के साथ सूची में सबसे आगे रहेंगी।

एनर्जी: ऊर्जा सेक्टर में वेतन वृद्धि औसतन 9.9% तक रहने की उम्मीद है।

रियल एस्टेट और इंफ्रास्ट्रक्चर: इस क्षेत्र में कर्मचारियों को 9.8% तक की सैलरी हाइक मिल सकती है।

एट्रिशन रेट और टैलेंट की जंग

कंपनियों के बजट स्थिर होने के बावजूद कर्मचारियों के नौकरी छोड़ने का सिलसिला बढ़ा है। ओवरऑल एट्रिशन रेट बढ़कर 2026 में 18% पर पहुंच गया है, जो कि 2025 में 16.2% और 2024 में 17.1% था। इससे यह साफ होता है कि कुशल और अनुभवी टैलेंट को अपने पास रोके रखने के लिए कंपनियों के बीच मुकाबला काफी कड़ा बना हुआ है।

AI स्किल्स और अपस्किलिंग का दौर: मिल रहा है तगड़ा प्रीमियम

डे-टू-डे वर्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की गहरी पैठ और तेजी से बदलते ट्रेंड्स का असर सैलरी और रिक्रूटमेंट पर साफ दिख रहा है। रूटीन कामकाज में एआई प्रोडक्टिविटी टूल्स का इस्तेमाल करने वाली कंपनियां 2025 के 46.1% से बढ़कर 56% हो गई हैं। करीब 60% एंप्लॉयर अपने कर्मचारियों के अपस्किलिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं। AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस के प्रोफेशनल्स के लिए कंपनियां सामान्य से लगभग 10% अधिक पे-प्रीमियम दे रही हैं।

वेज कोड और पेरोल कॉस्ट का असर

सर्वे के मुताबिक, 65.4% एंप्लॉयर पूरी तरह से नए वेज कोड का पालन कर रहे हैं, जबकि 20.9% कंपनियां अगले छह महीनों में इसके अनुपालन की उम्मीद कर रही हैं। वैसे लगभग 42.8% कंपनियों को अंदेशा है कि इससे उनकी पेरोल लागत कम से कम 1% तक बढ़ सकती है, जिसके लिए उन्हें अपने रिवॉर्ड स्ट्रक्चर को समझदारी से री-अलाइन करना होगा।

भारत पर 100% टैरिफ का फैसला 10 दिन में संभव:अमेरिकी राजदूत बोले- रूस से तेल खरीदने पर प्रतिबंध लगाएं या नहीं, ट्रम्प तय करेंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प भारत पर 100% टैरिफ लगाने को लेकर करीब 10 दिन में फैसला ले सकते हैं। यह बात अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कही। गोर ने कहा कि भारत को प्रतिबंधों से छूट मिलेगी या नहीं, यह भी ट्रम्प ही तय करेंगे। अमेरिकी संसद ने 18 सितंबर को रूस से तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर 100% टैरिफ लगाने का बिल पास किया था। ट्रम्प ने भी इस कानून को मंजूरी दे दी है, लेकिन किसी देश पर प्रतिबंध नहीं लगाया है। हालांकि कानून पारित होने के 30 दिनों के भीतर फैसला लेना जरूरी है। गोर ने कहा कि इस कानून का मकसद किसी देश को सजा देना नहीं, बल्कि रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म कराने के लिए रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है। अमेरिका दूसरे देशों के साथ मिलकर रूस को युद्ध के लिए मिलने वाले पैसे को धीरे-धीरे कम करना चाहता है। कानून में प्रतिबंध लगाने के तीन आधार सर्जियो गोर ने कहा कि संसद ने प्रतिबंधों के तीन विकल्प दिए हैं। इनमें तेल, गैस और प्रतिबंधों से बचने में मदद करना शामिल है। उन्होंने कहा, “इन प्रतिबंधों का निशाना किसी एक देश पर नहीं है। कांग्रेस ने तीन अलग-अलग श्रेणियां तय की हैं। पहली तेल, दूसरी गैस और तीसरी प्रतिबंधों से बचने में मदद करना है।” गोर ने कहा कि इन श्रेणियों में शामिल लोगों की पहचान आंकड़ों के आधार पर की जाती है। उन्होंने कहा कि भारत भी कई अन्य देशों के साथ इनमें से एक श्रेणी में आता है। ट्रम्प अब खुद रूस से डीजल खरीद रहे ट्रम्प अब खुद रूस से डीजल खरीदने जा रहे हैं। उन्होंने रूस से डीजल खरीदने पर लगी रोक 7 अप्रैल 2027 तक हटा दी है। अमेरिका में ईरान जंग के बाद डीजल की कीमतें बढ़कर 6.28 डॉलर प्रति गैलन हो गई हैं। माना जा रहा है कि कीमतें कम करने के लिए ट्रम्प ने यह फैसला लिया है। अमेरिका में जंग से पहले डीजल करीब 3.70 डॉलर प्रति गैलन बिक रहा था। अब इसकी कीमत 6.28 डॉलर हो गई है। 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव से पहले ईंधन की बढ़ती कीमतें ट्रम्प प्रशासन के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ट्रम्प के मुताबिक, रूस तुरंत 3 लाख टन से ज्यादा डीजल भेजेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन डीजल की आपूर्ति की जाएगी। आगे चलकर यह मात्रा 30 लाख टन तक पहुंच सकती है। भारत से ट्रेड डील पर भी बातचीत जारी गोर ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर कहा कि बातचीत में काफी प्रगति हुई है और बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। अब कुछ छोटे मुद्दों पर चर्चा बाकी है। दोनों देशों के बीच करीब डेढ़ साल से बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ डिफेंस, आईटी, डेटा सेंटर और चिप मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना चाहता है। गोर ने भारत को AI डेवलपमेंट का बड़ा केंद्र बनने के लिए उपयुक्त बताया। उनके मुताबिक, भारतीय और अमेरिकी टेक कंपनियों की साझेदारी से दोनों देशों को फायदा होगा।

दक्षिण कोरिया के Kospi में लगा सर्किट, चिप शेयरों की बिकवाली पर टूट गया 8%, इस कारण मचा हाहाकार

चिप शेयरों की ताबड़तोड़ बिकवाली ने आज दक्षिण कोरियाई बाजार में ऐसा हाहाकार मचाया कि सर्किट लग गया। दक्षिण कोरिया का कोस्पी (Kospi) इंडेक्स आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सेक्टर में निवेश का एक अहम इंडिकेटर है और चिप शेयरों की बिकवाली में यह 8% टूट गया। चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनियों सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) के शेयरों में 8% से अधिक की गिरावट आई। सिर्फ दक्षिण कोरियाई बाजार ही नहीं बल्कि अधिकतर एशियाई बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है। एशियाई बाजारों में यह कमजोरी वॉल स्ट्रीट यानी अमेरिकी बाजार में आई भारी गिरावट के बाद देखने को मिली।

एशियाई मार्केट में कैसी है हालत

दक्षिण कोरिया के बेंचमार्क इंडेक्स कोस्पी में 8% की गिरावट आई है तो जापान के बेंचमार्क इंडेक्स निक्केई 225 (Nikkei 225) में इंट्रा-डे में 4% और टॉपिक्स (TOPIX) में 2% की फिसलन आई। साथ ही MSCI एशिया पैसेफिक इक्विटी इंडेक्स में 2.2% की गिरावट आई, जिससे इसके जुलाई के बाद के सबसे निचले बंद स्तर की ओर बढ़ने की आशंका बन गई। हालांकि भारतीय मार्केट में बात करें तो आईटी सेक्टर में ताबड़तोड़ खरीदारी के दम पर शानदार रौनक दिखी और घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty 50) डेढ़-डेढ़ फीसदी से अधिक उछल पड़े।

इस हाहाकार की क्या है वजह

अमेरिका में सितंबर में महंगाई के अनुमान से अधिक आंकड़ों ने बाजार में इस आशंका को मजबूत कर दिया कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ने से अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड में तेजी आई। अमेरिका में पांच महीने में सबसे तेज रफ्तार से महंगाई बढ़ने से इस बात के आसार बढ़ गए हैं कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकता है। अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई ने तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता के चलते कच्चे तेल के भाव ऊंचे बने हुए हैं। तेल की ऊंची कीमतों के कारण अमेरिका में महंगाई का दबाव बना हुआ है।

भारतीय मार्केट में इस कारण छाई रौनक

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

YouTube AI Music Label: अब AI से बने गानों पर लगेगा लेबल, YouTube Music ने शुरू की पहल

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से गाने बनाने का चलन बढ़ रहा है। ऐसे में असली और AI से तैयार किए गए गानों के बीच अंतर पहचानना मुश्किल होता जा रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए YouTube ने अपने प्लेटफॉर्म पर AI से बनाए गए गानों की पहचान के लिए लेबल लगाने का फैसला किया है। कंपनी का कहना है कि इस कदम का मकसद संगीत सुनने वालों के असली संगीत की पहचान करना है।

ANI के मुताबिक, YouTube ने अपने ब्लॉग में कहा कि जनरेटिव AI की मदद से कलाकार अब नए तरीके से गाने बना सकते हैं, नए प्रयोग कर सकते हैं और अपना संगीत लोगों तक पहुंचा सकते हैं। हालांकि, श्रोता यह भी जानना चाहते हैं कि वे जो गाना सुन रहे हैं, वह AI से बनाया गया है या किसी कलाकार ने खुद तैयार किया है।

YouTube Music पर शुरू हुई लेबलिंग

Variety की रिपोर्ट के अनुसार, AI से तैयार गानों पर लेबल लगाने की शुरुआत बुधवार से YouTube Music पर हो गई है। जल्द ही इस सुविधा का विस्तार मुख्य YouTube प्लेटफॉर्म पर भी दिखाई देगा|ये लेबल उन गानों पर लगाए जाएंगे, जिन्हें YouTube अपने डिटेक्शन टूल्स या म्यूजिक पार्टनर्स के जरिए पहचानता है और जो मुख्य रूप से जनरेटिव AI की मदद से बनाए गए हैं।

Apple Music और Spotify भी उठा रहे कदम

AI से तैयार संगीत की पहचान के लिए दूसरे म्यूजिक स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भी पहल कर रहे हैं।

Apple Music: कंपनी ने अगस्त में घोषणा की थी कि वह इस साल के अंत तक गानों पर ‘Made by AI’ लेबल पेश करेगी।

Spotify: प्लेटफॉर्म AI से तैयार किए गए प्रतीत होने वाले कलाकारों की प्रोफाइल को ‘AI Personas’ के रूप में लेबल करने की योजना पर काम कर रहा है।

Tidal: कंपनी ने AI से बनाए गए गानों की पहचान के लिए लेबल लगाने और ऐसे गानों को रॉयल्टी कमाने से रोकने का संकल्प जताया है।

म्यूजिक इंडस्ट्री भी कर रही लेबलिंग की मांग

संगीतकारों और म्यूजिक इंडस्ट्री से जुड़े कई संगठनों ने भी AI से तैयार संगीत की पहचान के लिए एक समान लेबलिंग व्यवस्था की मांग की है। इनमें RIAA, IFPI, Grammy Awards से जुड़ा संगठन और SAG-AFTRA शामिल हैं। इन संगठनों ने इस साल गर्मियों में एक ऐसे कार्यक्रम की वकालत की, जिसके तहत गानों पर ‘AI-Generated’ या ‘AI-Assisted’ जैसे संकेत लगाए जा सकें। इससे श्रोताओं को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी गाने को पूरी तरह AI से बनाया गया है या उसे तैयार करने में AI की सहायता ली गई है।

AI से तैयार संगीत की बढ़ती लोकप्रियता के बीच YouTube का यह कदम श्रोताओं को गानों के निर्माण के तरीके के बारे में जानकारी देने की दिशा में अहम पहल है। दूसरे म्यूजिक प्लेटफॉर्म भी ऐसी व्यवस्था पर काम कर रहे हैं, जिससे आने वाले समय में AI से बने संगीत की पहचान करना पहले से आसान हो सकता है।