WhatsApp Username फीचर पर फंसा पेंच, सरकार फर्जीवाड़े और धोखाधड़ी के खतरे को लेकर Meta से करेगी चर्चा

केंद्र सरकार का इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) WhatsApp के आगामी Username फीचर को लेकर Meta के साथ जल्द ही बैठक कर सकता है। कानून प्रवर्तन एजेंसियों (LEAs) ने इस फीचर के जरिए फर्जी पहचान बनाकर धोखाधड़ी और प्रतिरूपण (Impersonation) की आशंका जताई है। सूत्रों के अनुसार, दूरसंचार विभाग (DoT) और दिल्ली पुलिस ने इस फीचर को लेकर गंभीर चिंताएं सरकार के सामने रखी हैं।

 

फर्जी प्रोफाइल बनाकर हो सकती है धोखाधड़ी

 

दूरसंचार विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, WhatsApp का नया Username फीचर साइबर अपराधियों को नकली प्रोफाइल बनाकर लोगों को ठगने का मौका दे सकता है। अधिकारी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे देश के नंबर या किसी प्रतिष्ठित अधिकारी की फोटो और उससे मिलता-जुलता यूजरनेम इस्तेमाल कर लोगों को धोखाधड़ी वाले कॉल या मैसेज भेज सकता है।

 

अधिकारी ने बताया कि यदि फोन नंबर सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं देगा तो जांच एजेंसियों के लिए यह पता लगाना बेहद मुश्किल हो जाएगा कि आरोपी भारत में है या विदेश में। पहले यदि किसी WhatsApp नंबर की शुरुआत +91 से होती थी तो जांच शुरू करना अपेक्षाकृत आसान होता था, लेकिन Username आधारित सिस्टम में यह प्रक्रिया और जटिल हो सकती है।

 

जांच एजेंसियों ने डेटा मिलने में देरी पर भी जताई चिंता

 

दूरसंचार विभाग के अधिकारी ने यह भी कहा कि कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने में WhatsApp कई बार पांच दिन या उससे भी अधिक समय लेता है। इससे साइबर अपराधों की जांच प्रभावित होती है और समय पर कार्रवाई करना कठिन हो जाता है।

 

दिल्ली पुलिस ने भी जताई चिंता

 

दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी कहा कि Username फीचर लागू होने के बाद संदिग्धों की पहचान करना और मुश्किल हो जाएगा, क्योंकि उपयोगकर्ता अपनी वास्तविक पहचान और फोन नंबर छिपाकर बातचीत कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि WhatsApp का यह कदम काफी हद तक Telegram और Signal की तर्ज पर है, जहां पहले से Username के जरिए बातचीत की सुविधा उपलब्ध है।

 

Meta और WhatsApp से करेगी सरकार चर्चा

 

सूत्रों के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय जल्द ही Meta और WhatsApp के अधिकारियों के साथ इस फीचर पर विस्तृत चर्चा करेगा। सरकार यह आकलन करेगी कि Username फीचर का दुरुपयोग सरकारी संस्थाओं, अधिकारियों या प्रतिष्ठित संगठनों की नकली पहचान बनाकर लोगों को ठगने के लिए तो नहीं किया जा सकता।

 

सरकारी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक सुरक्षा के मुद्दे पर किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। यदि फीचर से सुरक्षा संबंधी जोखिम सामने आते हैं तो सरकार आवश्यक कदम उठा सकती है।

 

क्या है WhatsApp का नया Username फीचर?

 

Meta के स्वामित्व वाला WhatsApp इस साल अपने प्लेटफॉर्म पर Username फीचर लॉन्च करने जा रहा है। इस फीचर के जरिए यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से संपर्क कर सकेंगे। कंपनी ने Username रिजर्व करने की शुरुआती सुविधा शुरू कर दी है और आधिकारिक रोलआउट इस वर्ष के अंत तक किया जाएगा।

 

WhatsApp का कहना है कि इस फीचर का उद्देश्य यूजर्स की गोपनीयता (Privacy) को और मजबूत बनाना है। खासकर ग्रुप चैट या नए लोगों से बातचीत के दौरान अब मोबाइल नंबर साझा करने की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे व्यक्तिगत जानकारी अधिक सुरक्षित रहेगी। Edited by : Sudhir Sharma

WhatsApp के नए प्रमुख बने CRED के संस्थापक कुणाल शाह, Meta ने किया बड़ा नेतृत्व परिवर्तन

दुनिया के सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta ने नेतृत्व स्तर पर बड़ा बदलाव करते हुए भारतीय फिनटेक कंपनी CRED के संस्थापक और सीईओ कुणाल शाह को WhatsApp का नया प्रमुख (Head of WhatsApp) नियुक्त किया है। वह वर्ष 2019 से इस पद पर कार्यरत विल कैथकार्ट की जगह लेंगे।

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Meta ने बताया कि विल कैथकार्ट फिलहाल कंपनी में बने रहेंगे और नेतृत्व परिवर्तन के दौरान कुणाल शाह को नई जिम्मेदारियों के लिए तैयार करेंगे। इसके बाद वह Meta में अगली पीढ़ी के उत्पादों (Next-Generation Products) के विकास से जुड़ी नई भूमिका संभालेंगे। कंपनी के अनुसार, Meta के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर क्रिस कॉक्स ने स्वयं कुणाल शाह से इस पद को संभालने के लिए संपर्क किया था।

 

नई जिम्मेदारी मिलने पर कुणाल शाह ने कहा कि वह Meta के संस्थापक एवं सीईओ मार्क जुकरबर्ग, क्रिस कॉक्स और Meta की नेतृत्व टीम के साथ काम करने को लेकर उत्साहित हैं। उन्होंने कहा कि WhatsApp ने अब तक लंबा सफर तय किया है, लेकिन इसकी पूरी क्षमता तक पहुंचने की अभी काफी संभावनाएं बाकी हैं। वह WhatsApp के अगले विकास चरण में योगदान देने के लिए उत्सुक हैं।

मार्क जुकरबर्ग ने क्या कहा?

Meta के संस्थापक और सीईओ Mark Zuckerberg ने कुणाल शाह की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने CRED को भारत की सबसे महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी कंपनियों में से एक बनाया है। जुकरबर्ग के मुताबिक, कुणाल की निर्माणात्मक सोच (Builder Mentality) और वैश्विक दृष्टिकोण उन्हें दुनिया के सबसे बड़े मैसेजिंग ऐप का नेतृत्व करने में मदद करेगा।

क्रिस कॉक्स का बयान

Meta के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर Chris Cox ने कहा कि कुणाल शाह भारत के सबसे सम्मानित उद्यमियों में से एक हैं। उन्होंने कहा कि लोगों के जीवन में तकनीक और ऐप्स के सकारात्मक प्रभाव को लेकर कुणाल की समझ उन्हें WhatsApp के अगले दौर का नेतृत्व करने के लिए उपयुक्त बनाती है। बताया जा रहा है कि क्रिस कॉक्स ने इस नेतृत्व परिवर्तन की जानकारी कंपनी के आंतरिक संदेश (Internal Message) के माध्यम से कर्मचारियों को दी। Edited by : Sudhir Sharma

WhatsApp ला रहा 2 बड़े फीचर्स, ऑनलाइन यूजर्स को पहचानना और बैकअप मैनेज करना होगा आसान, जानिए कैसे करेंगे काम

whatsapp

इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म WhatsApp एंड्रॉयड यूजर्स के लिए 2  नए फीचर्स पर काम कर रहा है। इन अपडेट्स का उद्देश्य यूजर्स के लिए ऑनलाइन स्टेटस देखना और चैट बैकअप को मैनेज करना पहले से अधिक आसान बनाना है।

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ऑनलाइन स्टेटस दिखाने के लिए आएगा ग्रीन डॉट

WhatsApp फिलहाल एक नए ग्रीन ऑनलाइन इंडिकेटर की टेस्टिंग कर रहा है। यह फीचर यूजर की प्रोफाइल फोटो पर एक छोटा हरा बिंदु (Green Dot) दिखाएगा, जिससे तुरंत पता चल जाएगा कि संबंधित व्यक्ति उस समय WhatsApp पर एक्टिव है।

 

यह फीचर फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मिलने वाले ऑनलाइन इंडिकेटर की तरह काम करेगा। फिलहाल यह सुविधा एंड्रॉयड बीटा वर्जन 2.26.24.5 में देखी गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस ग्रीन डॉट की विजिबिलिटी मौजूदा प्राइवेसी सेटिंग्स से जुड़ी रहेगी, यानी यूजर्स अपने ऑनलाइन स्टेटस पर पूरा नियंत्रण बनाए रख सकेंगे।

 

भविष्य में यह ग्रीन डॉट मौजूदा 'Online' टेक्स्ट लेबल की जगह भी ले सकता है।

 

WhatsApp में मिलेगा नया बैकअप मैनेजमेंट सेक्शन

दूसरा फीचर बैकअप मैनेजमेंट से जुड़ा है, जिस पर अभी काम चल रहा है। WhatsApp ऐप में एक विशेष सेक्शन जोड़ने की तैयारी कर रहा है, जहां यूजर्स अपने बैकअप देख सकेंगे, अनावश्यक फाइलों को डिलीट कर सकेंगे और जरूरत पड़ने पर डुप्लीकेट बैकअप भी बना सकेंगे। इससे स्टोरेज मैनेजमेंट आसान होगा और पुराने चैट डेटा की वजह से होने वाली अव्यवस्था कम होगी।

 

Google भी करेगा मदद

 

WhatsApp के आगामी फीचर्स को बेहतर बनाने के लिए Google भी सहयोग कर रहा है। Google Play Services के वर्जन 26.23 के साथ एंड्रॉयड यूजर्स को जल्द ही फोन की सेटिंग्स में ही WhatsApp बैकअप विकल्प दिखाई दे सकते हैं। इसके जरिए Google Drive बैकअप और स्टोरेज कंट्रोल को मैनेज करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगा। यूजर्स को शॉर्टकट और डायरेक्ट एक्सेस जैसी सुविधाएं भी मिल सकती हैं।

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कब मिलेंगे ये फीचर्स?

फिलहाल दोनों फीचर्स टेस्टिंग और डेवलपमेंट चरण में हैं और आम यूजर्स के लिए उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, रोलआउट के बाद ऑनलाइन यूजर्स की पहचान करना और पुराने बैकअप को व्यवस्थित करना काफी आसान हो जाएगा। Edited by : Sudhir Sharma

Telegram vs WhatsApp : कौन-सा मैसेजिंग ऐप है बेहतर और दोनों में क्या है अंतर?

Telegram vs WhatsApp

आज के डिजिटल दौर में इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस के काम से लेकर परिवार और दोस्तों से जुड़े रहने तक, WhatsApp और Telegram सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले प्लेटफॉर्म हैं। दोनों ऐप चैटिंग, फोटो शेयरिंग, फाइल ट्रांसफर और कॉलिंग जैसी सुविधाएं देते हैं, लेकिन इनके बीच कुछ ऐसे बड़े अंतर भी हैं जो इन्हें एक-दूसरे से अलग बनाते हैं।

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क्लाउड स्टोरेज बनाता है Telegram को अलग

 

Telegram की सबसे बड़ी खासियत इसका क्लाउड-आधारित सिस्टम है। यूजर्स के मैसेज, फोटो और दस्तावेज Telegram के सर्वर पर सुरक्षित रहते हैं। इसका फायदा यह है कि आप किसी भी डिवाइस—स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप—से लॉग इन करके अपनी पूरी चैट हिस्ट्री एक्सेस कर सकते हैं। इसके लिए अलग से बैकअप लेने की जरूरत नहीं पड़ती। वहीं WhatsApp में चैट्स मुख्य रूप से डिवाइस पर स्टोर होती हैं। फोन बदलने पर चैट्स को Google Drive या iCloud बैकअप के जरिए ट्रांसफर करना पड़ता है।

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प्राइवेसी और सिक्योरिटी: दोनों का अलग तरीका

 

WhatsApp अपने सभी निजी चैट और कॉल में डिफॉल्ट रूप से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन प्रदान करता है। इसका मतलब है कि भेजे गए संदेश केवल भेजने वाले और प्राप्त करने वाले ही पढ़ सकते हैं। दूसरी ओर Telegram की सामान्य चैट्स एन्क्रिप्टेड तो होती हैं, लेकिन वे क्लाउड पर स्टोर रहती हैं। यदि यूजर पूरी तरह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन चाहता है, तो उसे 'Secret Chat' फीचर का उपयोग करना पड़ता है। इसमें अतिरिक्त प्राइवेसी फीचर्स मिलते हैं और मैसेज फॉरवर्डिंग भी ब्लॉक की जा सकती है।

 

बड़ी फाइलें भेजने में Telegram आगे

 

फाइल शेयरिंग के मामले में Telegram कई यूजर्स के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। WhatsApp पर अधिकतम 2GB तक की फाइल भेजी जा सकती है। Telegram भी 2GB तक की फाइल शेयरिंग की सुविधा देता है, जबकि Telegram Premium यूजर्स 4GB तक की फाइल भेज सकते हैं। यह फीचर लंबे वीडियो, सॉफ्टवेयर, प्रेजेंटेशन और बड़े दस्तावेज भेजने वालों के लिए काफी उपयोगी है।

 

बड़े ग्रुप्स और कम्युनिटी के लिए Telegram बेहतर

WhatsApp पर एक ग्रुप में अधिकतम 1,024 सदस्य जोड़े जा सकते हैं। वहीं Telegram के Supergroup फीचर में 2 लाख (200,000) तक सदस्य शामिल किए जा सकते हैं। इसके अलावा Telegram एडमिन्स को स्पैम कंट्रोल, नए सदस्यों के लिए मैसेज हिस्ट्री और बेहतर मॉडरेशन टूल्स जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी देता है। यही वजह है कि बड़ी कम्युनिटी और संगठनों के लिए Telegram अधिक उपयुक्त माना जाता है।

 

Telegram Channels से लाखों लोगों तक पहुंच

 

यदि किसी को बड़ी संख्या में लोगों तक संदेश पहुंचाना है, तो Telegram Channels एक प्रभावी विकल्प हैं। इनमें सब्सक्राइबर की कोई सीमा नहीं होती। यही कारण है कि कंटेंट क्रिएटर्स, ब्रांड्स और शिक्षण संस्थान अपने अपडेट, घोषणाएं और जानकारी साझा करने के लिए Telegram Channels का उपयोग करते हैं।

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फोन नंबर साझा किए बिना भी हो सकता है संपर्क

Telegram में यूजर्स @username बना सकते हैं, जिससे लोग बिना फोन नंबर देखे उनसे संपर्क कर सकते हैं। इसके विपरीत WhatsApp पूरी तरह मोबाइल नंबर पर आधारित है, जिससे प्राइवेसी के विकल्प सीमित हो जाते हैं।

 

Bots और Mini Apps से बढ़ती है उपयोगिता

 

Telegram केवल मैसेजिंग ऐप नहीं है। इसमें Bots और Mini Apps का व्यापक इकोसिस्टम मौजूद है। इनके जरिए ऑटोमैटिक रिप्लाई, पोल और क्विज, रिमाइंडर सेट करना, गेम खेलना और कई अन्य कार्य ऑटोमेट किए जा सकते हैं।

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आखिर किसे चुनें?

यदि आप केवल निजी बातचीत और रोजमर्रा की चैटिंग के लिए एक आसान और सुरक्षित ऐप चाहते हैं, तो WhatsApp एक बेहतरीन विकल्प है। लेकिन यदि आपको क्लाउड स्टोरेज, बड़े ग्रुप्स, पब्लिक चैनल्स, बड़े आकार की फाइल शेयरिंग, अतिरिक्त प्राइवेसी फीचर्स और ऑटोमेशन जैसी सुविधाएं चाहिए, तो Telegram ज्यादा बेहतर साबित हो सकता है।  एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक दोनों प्लेटफॉर्म लगातार नए फीचर्स जोड़ रहे हैं। ऐसे में सही विकल्प इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी डिजिटल जरूरतें क्या हैं और आप मैसेजिंग ऐप से किस तरह की सुविधाएं चाहते हैं। Edited by : Sudhir Sharma

Telegram vs WhatsApp : कौन-सा मैसेजिंग ऐप है बेहतर और दोनों में क्या है अंतर?

Telegram vs WhatsApp

आज के डिजिटल दौर में इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप्स हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। ऑफिस के काम से लेकर परिवार और दोस्तों से जुड़े रहने तक, WhatsApp और Telegram सबसे ज्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले प्लेटफॉर्म हैं। दोनों ऐप चैटिंग, फोटो शेयरिंग, फाइल ट्रांसफर और कॉलिंग जैसी सुविधाएं देते हैं, लेकिन इनके बीच कुछ ऐसे बड़े अंतर भी हैं जो इन्हें एक-दूसरे से अलग बनाते हैं।

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क्लाउड स्टोरेज बनाता है Telegram को अलग

 

Telegram की सबसे बड़ी खासियत इसका क्लाउड-आधारित सिस्टम है। यूजर्स के मैसेज, फोटो और दस्तावेज Telegram के सर्वर पर सुरक्षित रहते हैं। इसका फायदा यह है कि आप किसी भी डिवाइस—स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप—से लॉग इन करके अपनी पूरी चैट हिस्ट्री एक्सेस कर सकते हैं। इसके लिए अलग से बैकअप लेने की जरूरत नहीं पड़ती। वहीं WhatsApp में चैट्स मुख्य रूप से डिवाइस पर स्टोर होती हैं। फोन बदलने पर चैट्स को Google Drive या iCloud बैकअप के जरिए ट्रांसफर करना पड़ता है।

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प्राइवेसी और सिक्योरिटी: दोनों का अलग तरीका

 

WhatsApp अपने सभी निजी चैट और कॉल में डिफॉल्ट रूप से एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन प्रदान करता है। इसका मतलब है कि भेजे गए संदेश केवल भेजने वाले और प्राप्त करने वाले ही पढ़ सकते हैं। दूसरी ओर Telegram की सामान्य चैट्स एन्क्रिप्टेड तो होती हैं, लेकिन वे क्लाउड पर स्टोर रहती हैं। यदि यूजर पूरी तरह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन चाहता है, तो उसे 'Secret Chat' फीचर का उपयोग करना पड़ता है। इसमें अतिरिक्त प्राइवेसी फीचर्स मिलते हैं और मैसेज फॉरवर्डिंग भी ब्लॉक की जा सकती है।

 

बड़ी फाइलें भेजने में Telegram आगे

 

फाइल शेयरिंग के मामले में Telegram कई यूजर्स के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। WhatsApp पर अधिकतम 2GB तक की फाइल भेजी जा सकती है। Telegram भी 2GB तक की फाइल शेयरिंग की सुविधा देता है, जबकि Telegram Premium यूजर्स 4GB तक की फाइल भेज सकते हैं। यह फीचर लंबे वीडियो, सॉफ्टवेयर, प्रेजेंटेशन और बड़े दस्तावेज भेजने वालों के लिए काफी उपयोगी है।

 

बड़े ग्रुप्स और कम्युनिटी के लिए Telegram बेहतर

WhatsApp पर एक ग्रुप में अधिकतम 1,024 सदस्य जोड़े जा सकते हैं। वहीं Telegram के Supergroup फीचर में 2 लाख (200,000) तक सदस्य शामिल किए जा सकते हैं। इसके अलावा Telegram एडमिन्स को स्पैम कंट्रोल, नए सदस्यों के लिए मैसेज हिस्ट्री और बेहतर मॉडरेशन टूल्स जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी देता है। यही वजह है कि बड़ी कम्युनिटी और संगठनों के लिए Telegram अधिक उपयुक्त माना जाता है।

 

Telegram Channels से लाखों लोगों तक पहुंच

 

यदि किसी को बड़ी संख्या में लोगों तक संदेश पहुंचाना है, तो Telegram Channels एक प्रभावी विकल्प हैं। इनमें सब्सक्राइबर की कोई सीमा नहीं होती। यही कारण है कि कंटेंट क्रिएटर्स, ब्रांड्स और शिक्षण संस्थान अपने अपडेट, घोषणाएं और जानकारी साझा करने के लिए Telegram Channels का उपयोग करते हैं।

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फोन नंबर साझा किए बिना भी हो सकता है संपर्क

Telegram में यूजर्स @username बना सकते हैं, जिससे लोग बिना फोन नंबर देखे उनसे संपर्क कर सकते हैं। इसके विपरीत WhatsApp पूरी तरह मोबाइल नंबर पर आधारित है, जिससे प्राइवेसी के विकल्प सीमित हो जाते हैं।

 

Bots और Mini Apps से बढ़ती है उपयोगिता

 

Telegram केवल मैसेजिंग ऐप नहीं है। इसमें Bots और Mini Apps का व्यापक इकोसिस्टम मौजूद है। इनके जरिए ऑटोमैटिक रिप्लाई, पोल और क्विज, रिमाइंडर सेट करना, गेम खेलना और कई अन्य कार्य ऑटोमेट किए जा सकते हैं।

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आखिर किसे चुनें?

यदि आप केवल निजी बातचीत और रोजमर्रा की चैटिंग के लिए एक आसान और सुरक्षित ऐप चाहते हैं, तो WhatsApp एक बेहतरीन विकल्प है। लेकिन यदि आपको क्लाउड स्टोरेज, बड़े ग्रुप्स, पब्लिक चैनल्स, बड़े आकार की फाइल शेयरिंग, अतिरिक्त प्राइवेसी फीचर्स और ऑटोमेशन जैसी सुविधाएं चाहिए, तो Telegram ज्यादा बेहतर साबित हो सकता है।  एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक दोनों प्लेटफॉर्म लगातार नए फीचर्स जोड़ रहे हैं। ऐसे में सही विकल्प इस बात पर निर्भर करता है कि आपकी डिजिटल जरूरतें क्या हैं और आप मैसेजिंग ऐप से किस तरह की सुविधाएं चाहते हैं। Edited by : Sudhir Sharma

Pixel यूजर्स को मिलेगा नया Bubbles फीचर, फोल्डेबल गेमिंग मोड और दमदार सुरक्षा अपग्रेड, Android 17 अपडेट जारी

Google ने अपने लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम Android 17 का रोलआउट योग्य Pixel डिवाइसेज के लिए शुरू कर दिया है। यह अपडेट अब Google Pixel 6 सीरीज और उसके बाद के मॉडल्स, Pixel Fold तथा Pixel Tablet के लिए उपलब्ध है। नए Android 17 में मल्टीटास्किंग, गेमिंग, सुरक्षा और प्राइवेसी से जुड़े कई नए फीचर्स जोड़े गए हैं।

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Android 17 का सबसे बड़ा आकर्षण Bubbles फीचर है। इसकी सहायता से यूजर्स किसी भी ऐप के आइकॉन को लॉन्ग-प्रेस करके उसे एक छोटे फ्लोटिंग विंडो में बदल सकते हैं। Pixel Fold जैसे डिवाइस में ये फ्लोटिंग ऐप्स स्क्रीन के निचले-दाएं हिस्से में मौजूद Bubble Bar में दिखाई देंगे। यूजर्स सीधे Bubble Bar से ऐप्स के बीच स्विच कर सकते हैं, विंडो का आकार बदल सकते हैं या उसे फुल-स्क्रीन मोड में खोल सकते हैं।

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Google ने Screen Reactions नाम का नया फीचर भी पेश किया है। इसके जरिए यूजर स्क्रीन रिकॉर्डिंग करते समय फ्रंट कैमरे से अपना रिएक्शन भी रिकॉर्ड कर सकते हैं। कैमरा वीडियो स्क्रीन रिकॉर्डिंग के ऊपर ओवरले के रूप में दिखाई देगा, जिससे एक ही वीडियो में स्क्रीन पर हो रही गतिविधि और यूजर की प्रतिक्रिया दोनों रिकॉर्ड हो जाएंगी। कंपनी ने स्क्रीन रिकॉर्डिंग और एनोटेशन टूल्स को भी नए टूलबार के साथ अपडेट किया है।

 

फोल्डेबल फोन के लिए खास गेमिंग मोड

 

Android 17 में फोल्डेबल स्मार्टफोन्स के लिए एक समर्पित Gaming Mode भी जोड़ा गया है। इस मोड में स्क्रीन के निचले हिस्से पर गेमिंग कंट्रोल दिखाई देंगे, जो एक वर्चुअल गेमपैड की तरह काम करेंगे। Google का दावा है कि नया अपडेट मेमोरी मैनेजमेंट को बेहतर बनाता है, जिससे गेमिंग के दौरान फ्रेम ड्रॉप और लैग की समस्या कम होगी।

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सुरक्षा और प्राइवेसी को मिली अतिरिक्त मजबूती

Android 17 में यूजर्स को Temporary Precise Location Sharing फीचर मिलेगा, जिसके तहत वे किसी ऐप को सीमित समय के लिए ही अपनी सटीक लोकेशन एक्सेस करने की अनुमति दे सकेंगे। इसके अलावा, नए Granular Contact Sharing Controls की मदद से यूजर पूरे कॉन्टैक्ट लिस्ट की बजाय केवल चुनिंदा संपर्कों को ही किसी ऐप के साथ साझा कर सकेंगे।

 

Google ने Find Hub में 'Mark as Lost' विकल्प भी जोड़ा है, जिससे खोए हुए डिवाइस को रिमोटली लॉक किया जा सकेगा। वहीं Live Threat Detection को और बेहतर बनाया गया है ताकि संदिग्ध ऐप्स और ऑनलाइन स्कैम्स की पहचान कर उन्हें ब्लॉक किया जा सके। साथ ही Advanced Protection फीचर को भी मजबूत किया गया है, जिससे जटिल साइबर खतरों के खिलाफ अतिरिक्त सुरक्षा मिलेगी।

 

PIN सुरक्षा को भी पहले से मजबूत बनाया गया है। अब गलत PIN अनुमान लगाने के प्रयासों की संख्या कम कर दी गई है और हर असफल प्रयास के बाद दोबारा कोशिश करने के लिए अधिक समय तक इंतजार करना होगा। Edited by : Sudhir Sharma

What is the TRAI DND app : स्पैम कॉल और फालतू प्रमोशनल मैसेज से मिलेगा छुटकारा, मोबाइल यूजर्स के लिए बड़ा फायदा

अगर आप भी हर दिन आने वाली स्पैम कॉल्स और प्रमोशनल SMS से परेशान हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। भारत के दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने अपने आधिकारिक Do Not Disturb (DND) ऐप के जरिए मोबाइल यूजर्स को अनचाहे कॉल और मैसेज पर बेहतर नियंत्रण देने की सुविधा उपलब्ध कराई है।

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TRAI DND ऐप की मदद से यूजर्स अपने स्मार्टफोन से ही DND सेवा को सक्रिय कर सकते हैं, अपनी कम्युनिकेशन प्राथमिकताओं को अपडेट कर सकते हैं और यह तय कर सकते हैं कि वे किस तरह के प्रमोशनल कॉल और संदेश प्राप्त करना चाहते हैं। इससे अनावश्यक स्पैम को रोका जा सकता है, जबकि जरूरी अलर्ट और सेवा संबंधी संदेश पहले की तरह मिलते रहेंगे।

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क्यों इंस्टॉल करें TRAI DND ऐप?

 

TRAI का कहना है कि यह ऐप मोबाइल यूजर्स को अपने फोन पर आने वाले प्रमोशनल संचार पर अधिक नियंत्रण देता है। इसके फायदे हैं:

  • स्पैम कॉल और मैसेज में कमी
  • बेहतर और पारदर्शी टेलीकॉम अनुभव
  • TRAI के नियमों के अनुरूप संचार प्रबंधन
  • सभी मोबाइल नेटवर्क पर समान अनुभव

 TRAI DND ऐप की प्रमुख विशेषताएं

TRAI DND ऐप यूजर्स को कई उपयोगी सुविधाएं प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं:

 

  • फुल DND या आंशिक DND (Partial DND) का विकल्प
  • प्रमोशनल कॉल और मैसेज की विभिन्न श्रेणियों को अनुमति देने या ब्लॉक करने की सुविधा
  • OTP सत्यापन के जरिए कुछ ही मिनटों में DND सक्रिय करना
  • कभी भी DND स्टेटस की जांच और अपडेट
  • आसान, सुरक्षित और यूजर-फ्रेंडली इंटरफेस

इस ऐप के जरिए यूजर्स को अपने टेलीकॉम ऑपरेटर को कॉल करने या जटिल मेन्यू में जाने की जरूरत नहीं पड़ती। वे सीधे ऐप से अपनी पसंद के अनुसार सेटिंग्स बदल सकते हैं।

 

कौन कर सकता है इस्तेमाल?

 

यह ऐप खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है जो:

 

  • टेलीमार्केटिंग कॉल्स को कम करना चाहते हैं
  • प्रमोशनल मैसेज पर अधिक नियंत्रण चाहते हैं
  • DND प्राथमिकताओं को आसानी से अपडेट करना चाहते हैं
  • सुरक्षित और पारदर्शी कम्युनिकेशन अनुभव की तलाश में हैं

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बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड और स्पैम के दौर में TRAI DND ऐप मोबाइल यूजर्स के लिए एक उपयोगी टूल साबित हो सकता है। यह न केवल अनचाहे कॉल और संदेशों से राहत दिलाता है, बल्कि भारत में अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद टेलीकॉम इकोसिस्टम बनाने में भी मदद करता है।  Edited by : Sudhir Sharma

ग्लोबल पेटेंट रैंकिंग के टॉप-20 में पहुंची Jio, ऐसा करने वाली अकेली भारतीय टेक कंपनी बनी

Jio Platforms enters top 20 of global patent ranking

– WIPO की PCT रैंकिंग में जियो प्लेटफॉर्म्स ने 320 पायदान की छलांग लगाई

– आकाश अंबानी ने कहा, आत्मनिर्भर भारत के विजन को समर्पित है यह उपलब्धि

– 31 मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स ने 6,817 पेटेंट फाइल किए

Jio Platforms : जियो प्लेटफॉर्म्स ने वैश्विक पेटेंट रैंकिंग में बड़ी छलांग लगाई है। वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन यानी WIPO की ताजा पेटेंट कोऑपरेशन ट्रीटी यानी PCT रैंकिंग में जियो प्लेटफॉर्म्स ग्लोबल टॉप-20 में पहुंच गई है। कंपनी 2025 की सूची में 320 पायदान चढ़कर 20वें स्थान पर पहुंची है।

 

जियो प्लेटफॉर्म्स, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड की टेक्नोलॉजी इकाई है। नई रैंकिंग के साथ जियो ग्लोबल टॉप-20 में जगह बनाने वाली अकेली भारतीय टेक इनोवेटर बन गई है। कंपनी अब हुआवेई, सैमसंग, क्वालकॉम, एलजी, पैनासोनिक, नोकिया, गूगल, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी वैश्विक टेक कंपनियों के समूह में शामिल हो गई है।

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जियो की पेटेंट फाइलिंग अगली पीढ़ी की डिजिटल तकनीकों पर केंद्रित है। इनमें 5G, 5G एडवांस्ड, 6G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, AI-नेटिव नेटवर्क, क्लाउड-नेटिव प्लेटफॉर्म, इंटेलिजेंट ऑटोमेशन, रेडियो एक्सेस, कोर नेटवर्क सॉफ्टवेयर, एज इंटेलिजेंस, फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस, नेटवर्क स्लाइसिंग और डिजिटल सर्विसेज इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

 

इस उपलब्धि पर जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश एम. अंबानी ने कहा, WIPO PCT रैंकिंग में जियो प्लेटफॉर्म्स का ग्लोबल टॉप-20 में आना हमारी डीप-टेक कंपनी बनने की दिशा में कई वर्षों की मेहनत को दिखाता है। यह जियो में कई उन्नत तकनीकों पर हो रहे शानदार इनोवेशन का सबूत है, जो आने वाले वर्षों में और बढ़ेगा।

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आकाश अंबानी ने आगे कहा कि वे इस उपलब्धि को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के विजन को समर्पित करते हैं। उनके अनुसार यह विजन भारत को दुनिया के लिए तकनीक का निर्माता, मालिक और निर्यातक बनाने की दिशा में आगे बढ़ाता है। उन्होंने कहा कि जियो भारत को ग्लोबल डीप-टेक पावरहाउस बनाने की यात्रा में योगदान देकर गर्व महसूस करता है।

 

खास बात यह है कि जियो की 320 पायदान की छलांग ऐसे समय आई है, जब वैश्विक स्तर पर PCT फाइलिंग की वृद्धि 1 प्रतिशत से भी कम रही। WIPO की यह रैंकिंग जियो प्लेटफॉर्म्स की R&D क्षमता और उसके बौद्धिक संपदा पोर्टफोलियो की मजबूती को वैश्विक स्तर पर मान्यता देती है।

 

31 मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स ने कुल 6,817 पेटेंट फाइल किए हैं। इनमें 2,393 पेटेंट भारत में और 4,424 पेटेंट विदेशी बाजारों में फाइल किए गए हैं। कंपनी के 1,009 पेटेंट अब तक वैश्विक स्तर पर मंजूर हो चुके हैं, जिनमें 538 भारत में और 471 अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मिले हैं।

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जियो ने कहा है कि उसका इनोवेशन उन तकनीकों और प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिन्हें कंपनी ने बड़े पैमाने पर विकसित और कमर्शियलाइज किया है। कंपनी 5G/6G रेडियो, 5G/6G कोर, सैटेलाइट कम्युनिकेशन और Agentic AI की अगली दिशा JioBrain जैसी उभरती तकनीकों पर भी काम कर रही है।

 

जियो की यह उपलब्धि भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है। यह बदलाव केवल बड़े पैमाने पर तकनीक इस्तेमाल करने से आगे बढ़कर, भारत में मूल तकनीक तैयार करने और उसे दुनिया तक ले जाने की दिशा में है।
Edited By : Chetan Gour

Meta Global Outage : फेसबुक और इंस्टाग्राम ठप, दुनियाभर के यूजर्स परेशान

instagram-Facebook

सोशल मीडिया दिग्गज मेटा (Meta) के प्लेटफॉर्म फेसबुक और इंस्टाग्राम शुक्रवार को वैश्विक स्तर पर तकनीकी खराबी का शिकार हो गए। दुनियाभर के कई यूजर्स ने इन प्लेटफॉर्म्स को एक्सेस करने में दिक्कत आने की शिकायत की। हालांकि थोड़ी देर में यह परेशानी हल हो गई। 

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेसबुक यूजर्स को लॉगिन या प्लेटफॉर्म खोलने पर एक एरर मैसेज दिखाई दे रहा था, जिसमें लिखा था, “Something went wrong. This may be because of a technical error that we're working to fix” यानी “कुछ गलत हो गया है। यह किसी तकनीकी समस्या के कारण हो सकता है, जिसे ठीक करने पर काम किया जा रहा है।”

 

वहीं, इंस्टाग्राम यूजर्स को भी इसी तरह का एरर मैसेज दिखाई दिया। मेटा के वैश्विक आउटेज के कारण लाखों यूजर्स कुछ समय तक अपने अकाउंट्स और सेवाओं का उपयोग नहीं कर सके।

 

तकनीकी समस्या सामने आते ही सोशल मीडिया पर #FacebookDown और #InstagramDown जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे। यूजर्स ने विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर स्क्रीनशॉट साझा कर अपनी परेशानी जाहिर की। हालांकि, मेटा की ओर से शुरुआती चरण में आउटेज के सटीक कारणों को लेकर कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई। कंपनी ने केवल इतना कहा कि तकनीकी समस्या को दूर करने के लिए काम किया जा रहा है।

 

यह आउटेज ऐसे समय में आया है जब फेसबुक और इंस्टाग्राम दुनियाभर में अरबों लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स में शामिल हैं। Edited by : Sudhir Sharma

 

क्या है Google Search Profiles, क्रिएटर्स और पब्लिशर्स को Search और Discover में कैसे मिलेगा फायदा, किस तरह करेगा काम

Google ने कंटेंट क्रिएटर्स और पब्लिशर्स के लिए एक नया फीचर Search Profiles लॉन्च किया है। इस फीचर की मदद से यूजर्स Google Search और Google Discover पर अपनी डिजिटल पहचान को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकेंगे। Search Profile एक समर्पित प्रोफाइल पेज होगा। इसमें किसी क्रिएटर या पब्लिशर के आर्टिकल्स, वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट, वेबसाइट और अन्य महत्वपूर्ण कंटेंट एक ही जगह पर दिखाई देंगे। 

 

Google का कहना है कि यह फीचर पसंदीदा क्रिएटर्स के कंटेंट को खोजने में यूजर्स की मदद करेगा, वहीं पब्लिशर्स और कंटेंट क्रिएटर्स को बड़े ऑडियंस तक पहुंचने का मौका देगा।

 

Search Profiles को Google का एक तरह का डिजिटल बिजनेस कार्ड माना जा सकता है। इसके जरिए क्रिएटर्स यह तय कर सकते हैं कि Google के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर उनकी प्रोफाइल कैसी दिखाई देगी।

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कैसे काम करेगा यह फीचर?

Search Profile बनाने के बाद यूजर्स अपनी प्रोफाइल को अपनी पसंद के अनुसार कस्टमाइज कर सकते हैं। इसमें शामिल हैं:

 

  • प्रोफाइल फोटो (अवतार)
  • बायो और परिचय
  • वेबसाइट लिंक
  • सोशल मीडिया हैंडल
  • वीडियो प्लेटफॉर्म्स के लिंक
  • फीचर्ड कंटेंट

इस प्रोफाइल में क्या-क्या जोड़ा जा सकता है

  • लेटेस्ट आर्टिकल्स और ब्लॉग पोस्ट
  • YouTube वीडियो
  • सोशल मीडिया अपडेट्स
  • पर्सनल वेबसाइट
  • क्रिएटर बायो और प्रोफाइल फोटो
  • सपोर्टेड प्लेटफॉर्म्स के लिंक

 

यह प्रोफाइल कई जगहों पर दिखाई दे सकती है, जैसे- 

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  • Google Search Results
  • Google Discover Feed
  • Google Knowledge Panel
  • डायरेक्ट प्रोफाइल URL

कौन बना सकता है Search Profile?

फिलहाल यह सुविधा केवल उन क्रिएटर्स के लिए उपलब्ध है जो Google की पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। इसके लिए आवश्यक है कि यूजर की उम्र कम से कम 18 वर्ष हो।

 

फॉलोअर्स की न्यूनतम संख्या:

 

  • YouTube पर 1 लाख फॉलोअर्स
  • Instagram पर 1 लाख फॉलोअर्स
  • X (पूर्व में Twitter) पर 1 लाख फॉलोअर्स
  • TikTok पर 3 लाख फॉलोअर्स
  • Knowledge Panel को भी मिलेगा फायदा

 

यदि किसी क्रिएटर के पास पहले से Google Knowledge Panel मौजूद है, तो Search Profile उससे जुड़ जाएगा। इससे Knowledge Panel में नई प्रोफाइल फोटो, ताजा कंटेंट और डायरेक्ट प्रोफाइल लिंक दिखाई देंगे, जिससे ऑनलाइन विजिबिलिटी और बेहतर हो सकती है।

 

कैसे बनाएं  Google Search Profile 

 

  क्रिएटर्स  आसान स्टेप्स को फॉलो करके अपना Search Profile बना सकते हैं- 

 

 profile.google.com/claim पर जाएं।

 

  • अपने Google अकाउंट से साइन इन करें।
  • कम से कम एक सपोर्टेड सोशल मीडिया अकाउंट लिंक करें।
  • Create Profile” बटन पर क्लिक करें।

 

यूजर्स यह भी जांच सकते हैं कि Google ने उनके लिए पहले से कोई प्रोफाइल ऑटो-जनरेट की है या नहीं। इसके लिए वे profile.google.com पर जा सकते हैं या Google Search में अपना नाम सर्च कर सकते हैं।

 

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अभी सिर्फ अमेरिका के लिए किया गया है लॉन्च

 Google ने फिलहाल Search Profiles फीचर को केवल अमेरिका के यूजर्स के लिए लॉन्च किया है। हालांकि कंपनी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में इसे अन्य देशों में भी उपलब्ध कराया जाएगा। डिजिटल दुनिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच Search Profiles को कंटेंट क्रिएटर्स और पब्लिशर्स के लिए एक अहम टूल माना जा रहा है, जो उन्हें Google के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर अपनी पहुंच और पहचान बढ़ाने में सहायता करेगा। Edited by : Sudhir Sharma