AI Impact Summit 2026 : चीनी रोबोडॉग के बाद अब कोरियन ड्रोन सॉकर, गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर फिर उठे सवाल

AI Impact Summit 2026  : इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में चीनी ‘रोबोडॉग’ विवाद के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। समिट से बाहर किए जाने के बाद अब विश्वविद्यालय एक नए विवाद में घिर गया है। इस बार मामला ‘ड्रोन सॉकर’ से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर दक्षिण कोरिया में निर्मित बताया जा रहा है, लेकिन इसे यूनिवर्सिटी का खुद का उत्पाद बताकर पेश किया गया।

 

जानकारी के मुताबिक, नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर आरोप है कि उसने कोरियाई सॉकर ड्रोन को अपना इन-हाउस प्रोजेक्ट बताकर प्रदर्शित किया। यूथ कांग्रेस ने इसके वीडियो को अपने एक्स पर शेयर किया है। यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने दावा किया कि यह ड्रोन पूरी तरह कैंपस में ही तैयार किया गया है।  इस पूरे विवाद के बीच कम्युनिकेशन प्रोफेसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इससे पहले भी वह रोबोडॉग विवाद में चर्चा में रही थीं और अब एक बार फिर सुर्खियों में हैं।

वीडियो में वे एक रिपोर्टर को ‘इन-हाउस सॉकर ड्रोन’ के बारे में जानकारी देती नजर आ रही हैं। उन्होंने दावा किया, 'यह एक दिलचस्प डिवाइस है। इसकी एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग से लेकर एप्लिकेशन तक सब कुछ यूनिवर्सिटी में ही विकसित किया गया है।' 

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उन्होंने यह भी कहा कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपने कैंपस में भारत का पहला ‘ड्रोन सॉकर एरीना’ तैयार किया है। उन्होंने कहा कि यहां सिमुलेशन लैब और एप्लिकेशन एरीना मौजूद है… यह भारत का पहला सॉकर एरीना ऑन कैंपस है। यहां इस प्रोडक्ट को और उन्नत फीचर्स के साथ विकसित किया जा रहा है। 

हालांकि, अब इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि क्या यह तकनीक वास्तव में यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है या नहीं। लगातार सामने आ रहे विवादों के चलते गलगोटिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर जांच और आलोचना के घेरे में है। Edited by : Sudhir Sharma

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में Jio ने रखा ‘नेशन-फर्स्ट AI स्टैक’ का खाका

Jio AI Stack

– 'जियो AI स्टैक' को 'सॉवरेन' AI इकोसिस्टम के रूप में किया प्रस्तुत

– ग्रीन डेटा सेंटर से भारतीय भाषाओं तक पूरी AI वैल्यू चेन पर फोकस

– स्वदेशी और सॉवरेन AI इकोसिस्टम पर जोर

Jio AI Stack : इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में जियो ने अपने 'नेशन-फर्स्ट AI स्टैक' की रूपरेखा पेश की। कंपनी तकनीकी रूप से इसे 'जियो AI स्टैक' नाम देती है और दावा करती है कि इसे भारत की जरूरतों और बड़े पैमाने की मांग को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। जियो इंटेलिजेंस के तहत विकसित किया जा रहा यह स्टैक केवल डेटा सेंटर तक सीमित नहीं है, बल्कि एक फुल-स्टैक AI इकोसिस्टम के रूप में तैयार किया जा रहा है। 

 

'जियो AI स्टैक' में गीगावॉट स्तर के ग्रीन डेटा सेंटर, उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग व्यवस्था, प्लेटफॉर्म और फ्रेमवर्क, भारतीय भाषाओं पर आधारित डेटा फाउंडेशन, बहुभाषी इंटेलिजेंस लेयर और विभिन्न क्षेत्रों के लिए एप्लिकेशन शामिल हैं। देश में मल्टी-गीगावॉट AI डेटा सेंटर विकसित किए जा रहे हैं, जो 100 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी से संचालित होंगे, ताकि राष्ट्रीय स्तर की टिकाऊ AI क्षमता तैयार की जा सके।

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'जियो AI स्टैक'  को एक 'सॉवरेन' AI इकोसिस्टम के रूप में प्रस्तुत किया गया है यानी ऐसा ढांचा जो देश में विकसित हो और राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित हो। कंपनी का कहना है कि इसके जरिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, छोटे व्यवसायों और रोजमर्रा की सेवाओं में AI आधारित समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

 

कंपनी के मुताबिक जियो AI स्टैक का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को हर भारतीय, साथ ही एंटरप्राइज और सरकारी संगठनों के लिए सुलभ और किफायती बनाना है। इसके तहत भारतीय भाषाओं को समझने और स्थानीय चुनौतियों का समाधान करने वाली AI क्षमताओं पर विशेष जोर दिया गया है।

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स्थानीय संदर्भ में विकसित इंटेलिजेंस के लिए व्यापक भारतीय भाषाओं के डेटा सेट तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही सुरक्षित, बहुभाषी वॉयस AI और एजेंटिक प्लेटफॉर्म पर काम किया जा रहा है, जिससे उपयोगकर्ता अपनी भाषा में सहज AI इंटरैक्शन कर सकें।

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विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में AI की दौड़ अब केवल तकनीकी क्षमता तक सीमित नहीं है, बल्कि डेटा संप्रभुता, ऊर्जा दक्षता, भाषाई विविधता और बड़े पैमाने पर पहुंच जैसे पहलुओं से भी जुड़ गई है। ऐसे में जियो AI स्टैक जैसे मॉडल देश के दीर्घकालिक डिजिटल और आर्थिक विकास में किस हद तक योगदान देते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
Edited By : Chetan Gour

दुनियाभर में YouTube सर्वर डाउन, 1 घंटे बाद सेवाएं बहाल, करोड़ों यूजर्स प्रभावित

youtube outage

Youtube Down : भारत समेत कई देशों में यूट्यूब सर्वर डाउन हो गया। इस वजह से भारत, अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों के करोड़ों यूजर्स परेशान हो गए। लोग यूट्यूब वीडियो नहीं देख पा रहे थे। हालांकि 1 घंटे बाद यूट्यूब की सेवाएं बहाल हो गई।

 

बताया जा रहा है कि यह दिग्गत सबसे पहले अमेरिका से शुरू हुई। यहां 3 लाख से ज्यादा लोगों ने यूट्यूब वीडियो नहीं चलने की शिकायत की। वीडियो पर क्लिक करने पर Something went Wrong लिखा आ रहा है। यूट्यूब टीवी भी इससे प्रभावित हुआ। डाउन डिटेक्टर पर करीब 10,000 लोगों ने इस संबंध में शिकायत की।

 

यूट्यूब ने बयान जारी कर कहा, तकनीकी दिक्कतों पर हमारी नजर हैं। कंपनी ने यह नहीं बताया कि इस आउटेज का कारण क्या था?

 

बहरहाल अब यूट्यूब की सभी सेवाएं शुरू हो गई है। लोग एक बार फिर अपने कंप्यूटर और मोबाइल पर यूट्यूब वीडियो देख पा रहे हैं। 

edited by : Nrapendra Gupta

क्या Epstein row के बीच AI Impact Summit में शामिल होंगे Bill Gates, क्यों बना हुआ है सस्पेंस

माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स के ‘एआई इम्पैक्ट समिट’ AI (Impact Summit) में शामिल होने को लेकर मंगलवार को उस समय असमंजस की स्थिति पैदा हो गई, जब सरकारी सूत्रों ने उनके सम्मेलन में भाग नहीं लेने की जानकारी दी। हालांकि, गेट्स फाउंडेशन का कहना है कि वह इस शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। 16 फरवरी से दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हुई समिट 20 फरवरी तक चलेगी। समिट के साथ-साथ 'इंडिया AI इम्पैक्ट एक्सपो 2026' का भी आयोजन किया गया है। यहां दुनियाभर की कंपनियों ने अपने लेटेस्ट AI सॉल्यूशंस दुनिया के सामने पेश किए हैं।

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क्या समिट से कट गया बिल गेट्स का पत्ता?

Impact.IndiaAI.Gov.In वेबसाइट पर 'विजनरीज ऑन द ग्लोबल स्टेज' (Visionaries on the Global Stage) सेक्शन के तहत 16 से 20 फरवरी, 2026 तक दिल्ली में आयोजित इस सम्मेलन में शामिल होने वाले मुख्य वक्ताओं की सूची दी गई है। 

 

हालांकि, मंगलवार 15 फरवरी को बिल गेट्स का नाम सर्च करने पर 'No speakers found matching your criteria' (आपके मानदंडों के अनुसार कोई वक्ता नहीं मिला) का मैसेज दिखाई दिया जबकि इससे पहले उनका प्रोफाइल वहां मौजूद था।

गेट्स का नाम वेबसाइट से गायब होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। एनडीटीवी एक खबर के मुताबिक सरकारी सूत्रों ने संकेत दिया है कि सरकार ने एपस्टीन फाइल्स में नाम आने के मद्देनजर माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक को दिए गए निमंत्रण की 'समीक्षा'  (Review) की है। फिलहाल इस बात पर सस्पेंस बना हुआ है कि वह समिट का हिस्सा होंगे या नहीं।

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एपस्टीन फाइल्स और इंटरनेट पर भारी विरोध

अमेरिकी न्याय विभाग की 'एपस्टीन लाइब्रेरी' में प्रकाशित वर्षों पुराने ईमेल्स में बिल गेट्स के बार-बार संदर्भ आने पर इंटरनेट पर उनकी भारी आलोचना हो रही है। विशेष रूप से 30 जनवरी को डीओजे (DOJ) के अपडेट के बाद यह आक्रोश और बढ़ गया, जिसमें पहले से मौजूद दस्तावेजों के अलावा 30 लाख से अधिक नए पन्ने सार्वजनिक किए गए थे। Edited by : Sudhir Sharma

Google Chrome यूजर्स सावधान! सरकार का हाई-रिस्क अलर्ट, तुरंत करें ये जरूरी काम

google chrome security warning

भारत में करोड़ों लोग इंटरनेट चलाने के लिए गूगल क्रोम नामक ब्राउजर का इस्तेमाल करते हैं। सरकारी एजेंसी इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) ने गूगल क्रोम के यूजर्स को चेतावनी देते हुए कहा कि इस ब्राउजर में कई सिक्योरिटी खामियां मिली हैं। इसका फायदा उठाकर हैकर्स आपके सिस्टम की एक्सेस ले सकते हैं। इससे पर्सनल इंफोर्मेशन के साथ-साथ डेटा चोरी का भी डर बना हुआ है। 

गूगल क्रोम के इन वर्जन पर ज्यादा खतरा

CERT-In के अनुसारल अगर आप विंडोज या मैक पर गूगल क्रोम के 145.0.7632.75/76 से पुराने और Linux पर 144.0.7559.75 से पुराने वर्जन का इस्तेमाल कर रहे हैं तो आपको सावधान रहने की आवश्यकता है। एजेंसी को क्रोम के इन वर्जनों में खामियां मिली हैं।

 

एजेंसी का दावा है कि क्रोम के CSS रेंडरिंग कंपोनेंट में ये खामियां पाई गई हैं। इनका फायदा उठाकर अटैकर्स ब्राउजर के अंदर मेमोरी हैंडलिंग को मैनिपुलेट कर सकते हैं। इससे पूरे सिस्टम की एक्सेस अपने हाथों में लेकर डेटा चोरी और सर्विस डिसरप्शन कर सकते हैं।

यूजर्स क्या करें?

एजेंसी ने इस वार्निंग को हाई रिस्क कैटेगरी में रखा है। इससे निपटने के लिए यूजर्स को तुरंत क्रोम ब्राउजर अपडेट करने की सलाह दी गई है। यूजर्स गूगल स्टेबल चैनल के जरिए रिलीज हुई अपडेट को इंस्टॉल कर सकते हैं। इसमें इन खामियों को ठीक करने के लिए सिक्योरिटी पैचेज जारी किए गए हैं।

 

अगर यूजर्स समय समय पर अपने डिवाइस और सॉफ्टवेयर को अपडेटेड करते हैं तो उन्हें साइबर अटैक से भी सुरक्षा मिलती है साथ ही नए फीचर्स भी मिलते हैं।

क्रोम यूजर्स कैसे डिलिट करें हिस्ट्री

नियमित रूप से हिस्ट्री डिलिट करना न सिर्फ प्राइवेसी के लिए अच्छा है। बल्कि इससे डिवाइस को तेज और सुरक्षित भी बनाए रखा जा सकता है। क्रोम यूजर्स अपनी ब्राउजिंग और डाउनलोड हिस्ट्री कुछ आसान स्टेप्स में डिलिट कर सकते हैं। जानिए कैसे डिलिट करें हिस्ट्री :

 

-ऊपर दाईं ओर तीन डॉट्स पर क्लिक करें

– History पर क्लिक करें और Delete browsing data पर जाएं

-समय सीमा चुनें- जैसे पिछला एक घंटा, 24 घंटे या पूरा डेटा।

-Delete Data पर क्लिक करें।

क्या है CERT-In

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत भारत की राष्ट्रीय नोडल एजेंसी है, जो 2004 से साइबर सुरक्षा खतरों, हैकिंग और फिशिंग से निपटने के लिए जिम्मेदार है। यह सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत साइबर हमलों की रोकथाम, चेतावनी और आपातकालीन प्रतिक्रिया का कार्य करती है। 

edited by : Nrapendra Gupta 

India AI Impact Summit : PM मोदी ने किया Jio Pavilion का दौरा, आकाश अंबानी ने दिखाया AI इकोसिस्टम

India AI Impact Summit PM Narendra Modi Jio Pavilion visit

इंडिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इम्पैक्ट समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जियो के AI पवेलियन का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जियो द्वारा विकसित विभिन्न AI आधारित मॉडलों और समाधानों की जानकारी ली। प्रधानमंत्री ने जियो इंटेलिजेंस, जियो संस्कृति AI, जियो आरोग्य AI, जियो शिक्षा और जियो AI होम जैसे मॉडलों को देखा। इन मॉडलों का उद्देश्य क्रमशः एंटरप्राइज इंटेलिजेंस, भारतीय भाषाओं और सांस्कृतिक सामग्री, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा समाधान और स्मार्ट होम आधारित AI सुविधाओं को सुलभ बनाना है।

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इस मौके पर रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड के चेयरमैन आकाश अंबानी ने कंपनी द्वारा विकसित किए जा रहे AI इकोसिस्टम और उसके विभिन्न आयामों की जानकारी प्रधानमंत्री को दी। 

 

जियो लंबे समय से “AI for All” की अवधारणा पर जोर देता रहा है। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी पहले भी कह चुके हैं कि तकनीक का वास्तविक लाभ तब मिलता है, जब वह बड़े पैमाने पर आम लोगों तक पहुंचे। इसी सोच के तहत जियो “AI for All” के विज़न पर काम कर रही है। 

 

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में देश-विदेश की कई टेक कंपनियां और नीति विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री के जियो पवेलियन के दौरा ने AI क्षेत्र में निजी क्षेत्र की पहलों पर ध्यान खींचा है।  Edited by : Sudhir Sharma

X का सर्वर हुआ डाउन, APP और वेबसाइट पर यूजर्स को परेशानी

twitter X

माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X (पहले Twitter) आज अचानक डाउन हो गया है। इससे दुनियाभर के लाखों यूजर्स ऐप और वेबसाइट दोनों पर लॉग इन या फीड लोड नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि इसे लेकर अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया।  Downdetector के अनुसार, इस दौरान सैकड़ों यूजर्स अलग-अलग क्षेत्रों में ऐप एक्सेस नहीं कर पाए और उनकी फीड लोड नहीं हो सकी। 

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सबसे ज्यादा असर अमेरिका और भारत के कई हिस्सों में देखा गया, जहां बड़ी संख्या में यूजर्स ने प्लेटफॉर्म तक पहुंचने में समस्या की शिकायत की। लोगों को लॉग-इन करने, पोस्ट करने और टाइमलाइन रिफ्रेश करने में दिक्कतें आईं। आउटेज ट्रैक करने वाले प्लेटफॉर्म्स पर शिकायतों में अचानक उछाल दर्ज किया गया।

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 Downdetector के मुताबिक, सुबह 8:24 बजे (ईटी) यानी 1324 GMT तक अमेरिका में X से जुड़ी 23,210 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। Downdetector विभिन्न स्रोतों से स्टेटस रिपोर्ट इकट्ठा कर तकनीकी बाधाओं को ट्रैक करता है। Edited by : Sudhir Sharma

AI Impact Summit 2026 : 19-20 फरवरी को भारत में होगा मेगा इवेंट, 65 से ज्यादा देश होंगे शामिल, 600 से ज्यादा स्टार्टअप्स का जमावड़ा

भारत 19-20 फरवरी 2026 को राजधानी के भारत मंडपम में वैश्विक स्तर का इंडिया–AI इम्पैक्ट समिट 2026 आयोजित करने जा रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), भारत सरकार इस शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। समिट करीब 65 देश शामिल होंगे।  यह पहली बार है जब यह अंतरराष्ट्रीय मंच किसी विकासशील देश में आयोजित किया जा रहा है।

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600 से ज्‍यादा स्‍टार्टअप्‍स की मौजूदगी रहेगी। इस समिट की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस AI एक्शन समिट के दौरान की थी। भारत ने खुद को AI विस्तार के एक प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करना शुरू कर दिया है। Alphabet की Google, Microsoft और Amazon ने मिलकर 2030 तक भारत में AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगभग 68 अरब डॉलर निवेश करने का वादा किया है। 

 

शिखर सम्मेलन को संबोधित करने वाले प्रमुख वक्ताओं में Alphabet के CEO सुंदर पिचाई, OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन, Anthropic के CEO डारियो अमोदेई, रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और Google DeepMind के CEO डेमिस हसाबिस शामिल हैं। इंडिया–AI इम्पैक्ट समिट 2026 को भारत की AI कूटनीति और वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है। यह ‘ग्लोबल साउथ’ में आयोजित होने वाला पहला वैश्विक AI शिखर सम्मेलन होगा।

 

प्रधानमंत्री इस सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इसे वर्ष का प्रमुख वैश्विक AI मंच माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य वैश्विक सहयोग के जरिए समावेशी, प्रभावशाली और कार्रवाई-उन्मुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को बढ़ावा देना है।

 

वैश्विक सहयोग की नई दिशा

यूके AI सेफ्टी समिट, AI सियोल समिट, फ्रांस AI एक्शन समिट और ग्लोबल AI समिट ऑन अफ्रीका जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों की निरंतरता में यह सम्मेलन एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। इसका लक्ष्य केवल राजनीतिक घोषणाओं तक सीमित न रहकर, ठोस परिणाम और वास्तविक प्रगति सुनिश्चित करना है। यह समिट वैश्विक AI सहयोग के लिए नई प्राथमिकताओं, ठोस पहल और बहुपक्षीय ढांचे को मजबूत करेगा।

 

मानवता और सतत विकास पर फोकस

समिट का उद्देश्य AI की परिवर्तनकारी शक्ति को मानवता की सेवा, समावेशी विकास, सामाजिक उन्नति और पर्यावरण संरक्षण के लिए उपयोग करना है। साथ ही, यह ग्लोबल साउथ की आवाज को वैश्विक AI गवर्नेंस में मजबूत करने का प्रयास करेगा, ताकि तकनीकी प्रगति कुछ देशों तक सीमित न रह जाए।

 

तीन ‘सूत्र’ होंगे आधार

इंडिया–AI इम्पैक्ट समिट तीन मूल स्तंभों या ‘सूत्रों’ पर आधारित होगा—

People (लोग), Planet (पृथ्वी) और Progress (प्रगति)।

ये तीनों सूत्र यह तय करेंगे कि बहुपक्षीय सहयोग के जरिए AI का उपयोग सामूहिक लाभ के लिए कैसे किया जाए।

 

सात ‘चक्र’ में होगी चर्चा

 

इन तीन सूत्रों के आधार पर चर्चा सात प्रमुख क्षेत्रों (चक्रों) में संगठित की जाएगी- 

  • मानव पूंजी (Human Capital)
  • सामाजिक सशक्तिकरण के लिए समावेशन
  • सुरक्षित और भरोसेमंद AI
  • लचीलापन, नवाचार और दक्षता
  • विज्ञान
  • AI संसाधनों का लोकतंत्रीकरण
  • आर्थिक विकास और सामाजिक हित के लिए AI
  • प्री-समिट कार्यक्रम भी शुरू

 

समिट से पहले MeitY कई प्रमुख पहलें आयोजित कर रहा है, जिनका मकसद समावेशी विकास और नवाचार के लिए AI के उपयोग को बढ़ावा देना है।

 

इनमें शामिल हैं:

 

AI for ALL: विभिन्न क्षेत्रों में प्रभावी AI समाधान खोजने की वैश्विक चुनौती।

AI by HER: महिला नेतृत्व वाले AI समाधानों को बढ़ावा देने की पहल।

YUVAi: 13-21 वर्ष के युवाओं के लिए वैश्विक नवाचार प्रतियोगिता।

 

आवेदन और पंजीकरण खुले

इन कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इच्छुक संगठन और प्रतिभागी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।  आयोजकों को ऐसे सत्र डिजाइन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया है, जो People, Planet और Progress की थीम के अनुरूप हों और वैश्विक AI संवाद को ठोस दिशा दें।

 Edited by : Sudhir Sharma

Android 16 QPR3 Beta 2.1 Rollout : Pixel यूजर्स के लिए बैटरी और स्टेबिलिटी फिक्स के साथ नया अपडेट जारी, जानिए कैसे मिलेगा

Android 16 QPR3 Beta 2.1 Rollout

गूगल ने Pixel डिवाइसों के लिए Android 16 QPR3 Beta 2.1 अपडेट रोलआउट करना शुरू कर दिया है। यह अपडेट जनवरी में जारी QPR3 Beta 2 के बाद का फॉलोअप वर्जन है, जिसका मुख्य उद्देश्य सिस्टम की स्थिरता, बैटरी परफॉर्मेंस और ओवरऑल विश्वसनीयता को बेहतर बनाना है।
 

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रिलीज नोट्स के मुताबिक, यह अपडेट उन यूजर्स के लिए उपलब्ध है जो Android Beta for Pixel प्रोग्राम में पहले से एनरोल हैं। Pixel 6 और Pixel 7 सीरीज को बिल्ड नंबर CP11.251209.009 मिल रहा है, जबकि अन्य समर्थित डिवाइसों को CP11.251209.009.A1 वर्जन जारी किया गया है।

 

किन समस्याओं को किया गया ठीक?

इस अपडेट में कई अहम बग फिक्स शामिल किए गए हैं- ऐप ड्रॉअर स्क्रॉल करते समय फ्रीज होने की समस्या ठीक की गई। Android Auto द्वारा गलत तरीके से अधिक स्क्रीन टाइम लॉग करने की समस्या सुधारी गई, जिससे बैटरी लाइफ बेहतर होगी। फुल-स्क्रीन और PiP मोड में नोटिफिकेशन शेड इस्तेमाल करते समय आने वाली ग्राफिकल गड़बड़ियों को दूर किया गया।

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रात के समय अत्यधिक बैटरी ड्रेन की समस्या को ठीक किया गया। बैटरी चार्ज लिमिट सेट होने के बावजूद 100% तक चार्ज होने की दिक्कत दूर की गई। Wi-Fi कनेक्शन बग के कारण स्लो इंटरनेट स्पीड की समस्या सुलझाई गई। रेडियो इंफॉर्मेशन सेटिंग्स एक्सेस करते समय होने वाले क्रैश को ठीक किया गया।

कॉल के दौरान स्पीकरफोन पर स्विच करने में देरी और ऑडियो फीडबैक की कमी को बेहतर ऑडियो रूटिंग से सुधारा गया। Always-On Display से डिवाइस जगाते समय स्क्रीन फ्लिकर की समस्या दूर की गई। Microsoft Intune से मैनेज ऐप्स समेत कुछ ऐप्स के स्टार्टअप क्रैश को ठीक किया गया।

 

वायरलेस चार्जिंग में गड़बड़ी और स्लो वायर्ड चार्जिंग की समस्या पावर मैनेजमेंट सिस्टम में सुधार कर ठीक की गई। फोल्डेबल डिवाइस को फोल्ड करते समय आने वाले सिस्टम क्रैश को एक्टिविटी लाइफसाइकिल मैनेजमेंट में सुधार कर सुलझाया गया।

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अपडेट कैसे मिलेगा 

अन्य Android QPR बीटा वर्जनों की तरह यह बिल्ड सामान्य उपयोग के लिए पर्याप्त रूप से स्थिर मानी जा रही है। यदि आप Android Beta for Pixel प्रोग्राम में शामिल हैं और ऑप्ट-आउट नहीं किया है, तो यह अपडेट ओवर-द-एयर (OTA) के जरिए स्वतः उपलब्ध हो जाएगा।

 

Android Beta समुदाय में शुरुआती यूजर्स के मुताबिक, यह लगभग 90MB से 110MB के बीच का छोटा अपडेट है और इसमें बड़े विजुअल बदलाव नजर नहीं आते। हालांकि यह ‘अंडर-द-हूड’ सुधारों पर केंद्रित है, जो डिवाइस की परफॉर्मेंस और बैटरी लाइफ को बेहतर बनाने के लिए जरूरी हैं। Edited by : Sudhir Sharma

रूस में Telegram पर डिजिटल स्ट्राइक, पुतिन ने लगाई पाबंदियां, फाउंडर बोले- हम झुकेंगे नहीं

रूसी अधिकारियों ने देश के सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया ऐप में से एक, 'टेलीग्राम' पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। सरकार का यह कदम रूसी नागरिकों को विदेशी तकनीकी प्लेटफार्मों के बजाय खुद के नियंत्रित विकल्पों की ओर धकेलने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। टेलीग्राम के रूसी मूल के संस्थापक पावेल डुरोव ने एक कड़ा बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि रूस की यह कोशिश नाकाम होगी। रूस ने फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब, इंस्टाग्राम पर बैन लगा दिया है।

इनके अलावा स्नैपचैट (Snapchat), फेसटाइम (FaceTime), ट्विटर/X और गेमिंग प्लेटफॉर्म रोब्लॉक्स (Roblox) पर भी रूस ने प्रतिबंध लगा रखा है। रूसी नियामक संस्था 'रोसकोमनाडजोर'  का कहना है कि इन विदेशी प्लेटफार्मों का उपयोग स्थानीय कानूनों के उल्लंघन और सुरक्षा जोखिमों के लिए किया जा रहा था।

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टेलीग्राम को निशाना बनाना रूसी प्रशासन के लिए भी एक चुनौती है, क्योंकि इसका उपयोग रूस में लाखों आम लोगों के अलावा खुद रूसी सेना, शीर्ष सरकारी अधिकारी, सरकारी मीडिया और यहां तक कि क्रेमलिन द्वारा भी किया जाता है।  

 

डुरोव ने कहा कि रूस अपने नागरिकों को निगरानी और राजनीतिक सेंसरशिप के लिए बनाए गए एक सरकारी ऐप का उपयोग करने के लिए मजबूर करने की कोशिश में टेलीग्राम पर पाबंदियां लगा रहा है। आठ साल पहले, ईरान ने भी यही रणनीति अपनाई थी- और वह विफल रहा। उसने झूठे बहानों के आधार पर टेलीग्राम को प्रतिबंधित किया और लोगों को सरकार द्वारा संचालित विकल्प पर स्विच करने के लिए मजबूर करने की कोशिश की।

 

मंगलवार को रूसी सरकार ने टेलीग्राम तक पहुंच को सीमित करने का आदेश जारी किया। सरकार का तर्क है कि यह कदम 'रूसी नागरिकों की सुरक्षा' के लिए उठाया गया है। अधिकारियों ने ऐप पर उन सामग्रियों को ब्लॉक करने से इनकार करने का आरोप लगाया है जिन्हें प्रशासन 'आपराधिक और आतंकवादी' मानता है।

 

 डिजिटल सर्विस ट्रैकिंग साइट Downdetector के अनुसार पिछले 24 घंटों में 11,000 से अधिक यूजर्स ने ऐप के काम न करने या धीमा चलने की शिकायत की है।

 

 

 

रूस के दूरसंचार नियामक रोसकोम्नाडज़ोर (Roskomnadzor) ने एक बयान में कहा कि जब तक रूसी कानूनों के उल्लंघन को समाप्त नहीं किया जाता, तब तक टेलीग्राम मैसेंजर के संचालन पर प्रतिबंध जारी रहेगा। इस प्लेटफॉर्म पर व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित नहीं है और धोखाधड़ी या आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए कोई प्रभावी उपाय नहीं हैं।

 

रूसी समाचार एजेंसी TASS के अनुसार, प्रतिबंधित सामग्री को न हटाने और खुद को विनियमित करने में विफल रहने के लिए टेलीग्राम पर 64 मिलियन रूबल (लगभग 8.28 लाख डॉलर) का जुर्माना भी लगाया गया है।

 

पाबंदियां लागू होते ही पूरे रूस में इसके असर देखे गए।  Edited by : Sudhir Sharma