MP-CG में Jio का धमाका! जनवरी 2026 में सबसे ज्यादा मोबाइल और ब्रॉडबैंड यूजर्स जुड़े, TRAI रिपोर्ट में खुलासा

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) की जनवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार जियो ने एक बार फिर मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सर्किल में सबसे अधिक मोबाइल और ब्रॉडबैंड ग्राहक जोड़े हैं। जनवरी 2026 में जियो से 6.2 लाख नए मोबाइल ग्राहक जुड़े जबकि JioFiber और Jio AirFiber ब्रॉडबैंड सेवाओं को 66 हजार से अधिक नए ग्राहकों ने अपनाया। 

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TRAI के आंकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ में कुल मोबाइल ग्राहकों की संख्या 8.49 करोड़ से अधिक हो चुकी है जबकि फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) और वायरलाइन ब्रॉडबैंड उपभोक्ताओं की संख्या 31.6 लाख से ज्यादा है। इनमें जियो के 4.9 करोड़ मोबाइल ग्राहक और 19.1 लाख से अधिक ब्रॉडबैंड ग्राहक शामिल हैं, जो इसकी मजबूत उपस्थिति को दर्शाते हैं। 

 

मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में डिजिटल क्रांति को नई गति देते हुए रिलायंस जियो की JioFiber और AirFiber सेवाएं तेजी से लोगों की पहली पसंद बन रही हैं। इन सेवाओं के माध्यम से अब तक दोनों राज्यों में 19 लाख से अधिक घर हाई-स्पीड इंटरनेट से जुड़ चुके हैं, जिससे शिक्षा, रोजगार, व्यापार और घरेलू जीवन में व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है। 

 

शिक्षा, रोजगार और जीवनशैली में बदलाव

JioFiber की उपलब्धता ने छात्रों के लिए ऑनलाइन शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और नई डिजिटल स्किल्स सीखने के अवसर बढ़ाए हैं। वहीं, कामकाजी लोगों के लिए वर्क फ्रॉम होम, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल कार्यप्रणाली पहले की तुलना में अधिक सरल और प्रभावी हो गई है।

गृहिणियां भी अब डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए अपने हुनर को पहचान दिलाते हुए घर बैठे छोटे व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। 

 

बेहतर एंटरटेनमेंट और डिजिटल अनुभव

JioFiber और Jio AirFiber कनेक्शन के साथ उपभोक्ताओं को 4K में क्रिकेट देखने का शानदार अनुभव, 1000+ टीवी चैनल,लाइव टीवी फीचर्स (जिसमें 350+ HD चैनल शामिल हैं), 13+ OTT ऐप्स और अनलिमिटेड वाई-फाई जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। ये सेवाएं घर को एक स्मार्ट डिजिटल हब में बदल रही हैं। 

 

हर गांव तक पहुंच रही 5G ताकत

मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ सर्किल में जियो के पास कुल 5G स्पेक्ट्रम क्षमता का 70% से अधिक हिस्सा है, जो दोनों राज्यों के सभी  जिलों के 10 हजार से अधिक गांवों तक उपलब्ध है। जियो की स्टैंडअलोन ट्रू 5G सेवा अब शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी पहुंच चुकी है। Edited by : Sudhir Sharma

Sora वीडियो ऐप को क्यों बंद कर रहा है OpenAI, ये वीडियो एआई टूल्स बन सकते हैं बेस्ट ऑप्शन्स

सैम ऑल्टमैन की कंपनी OpenAI ने एक चौंकाने वाला फैसला लेते हुए Sora को बंद करने की घोषणा कर दी। यह ऐलान उसी समय हुआ जब Disney ने भी OpenAI के साथ अपनी बड़ी पार्टनरशिप खत्म कर दी।  घोषणा के तरीके से ऐसा लगा कि OpenAI के भीतर चीजें तेजी से बदल रही हैं। हालांकि Sora को पूरी तरह कब बंद किया जाएगा और इससे यूजर्स के बनाए गए वीडियो पर क्या असर पड़ेगा- इस बारे में अभी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

X पर Sora अकाउंट ने कहा कि हम जल्द ही और जानकारी साझा करेंगे, जिसमें ऐप और API की टाइमलाइन और आपके काम को सुरक्षित रखने से जुड़ी डिटेल्स शामिल होंगी। ये वीडियो एआई टूल्स आपके लिए बेस्ट ऑप्शन बन सकते हैं।

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पहले क्या खास था Sora में?

यह बहुत ही आसान था। इसमें टेक्स्ट लिखते ही वीडियो बना जाते, जो सिनेमेटिक और रियलिस्टिक क्लिप्स

 की तरह होते थे। यह बिलकुल सोशल मीडिया जैसा वीडियो प्लेटफॉर्म था। लेकिन महंगा, रिस्की और विवादों में भी यह आया। लॉन्च होने के  बाद यह काफी वायरल हुआ, लेकिन  इसके बंद होने के पीछे कॉपीराइट विवाद, डीपफेक और गलत कंटेंट और बहुत ज्यादा खर्च बताया जा रहा है। 

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 Google Veo 3

 

Google का Veo 3 मॉडल सबसे लोकप्रिय ऑप्शन्स में से एक माना जा रहा है। लॉन्च के समय इसे 'बेहद रियलिस्टिक' बताया गया था।  इस टूल से हाई-क्वालिटी वीडियो बनाए जा सकते हैं , लेकिन इसके लिए Google का पेड AI प्लान लेना होगा। इसकी कीमत लगभग 7.99 डॉलर प्रति माह से शुरू होती है।  इन प्लान्स के साथ Gemini जैसे एडवांस AI फीचर्स भी मिलते हैं।

Luma Ray3

Ray3  भी एक पावरफुल AI वीडियो जनरेशन टूल है। 1080p वीडियो आउटपुट के साथ एडवांस एडिटिंग फीचर्स मिलते हैं। साथ ही प्रोफेशनल क्वालिटी वीडियो भी बनाए जा सकते हैं, लेकिन इसकी कीमत ज्यादा होने के कारण यह हर यूज़र के लिए किफायती नहीं है। Edited by : Sudhir Sharma

AI Technology : दुनिया में AI की रेस तेज, नई टेक्नोलॉजी से बदलेगा भविष्य, क्या हैं चुनौतियां

नई-नई AI तकनीकों के आने से न सिर्फ टेक्नोलॉजी सेक्टर बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोज़मर्रा की जिंदगी में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले कुछ वर्षों में AI दुनिया की सबसे प्रभावशाली तकनीक बन सकती है। टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI इंसानों के जीवन का अहम हिस्सा बन जाएगा। ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और स्मार्ट टेक्नोलॉजी के जरिए काम करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। दुनिया तेजी से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दिशा में आगे बढ़ रही है। 

 

AI की दौड़ में बड़ी कंपनियां

 

दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां AI को लेकर भारी निवेश कर रही हैं। कई कंपनियां ऐसे AI मॉडल विकसित कर रही हैं जो इंसानों की तरह सोचने, समझने और निर्णय लेने में सक्षम होंगे।

 

कई क्षेत्रों में बदल रही तस्वीर

AI की मदद से अब ऑटोमेशन तेजी से बढ़ रहा है। डेटा एनालिसिस आसान हो रहा है। रोबोटिक्स और मशीन लर्निंग का उपयोग बढ़ रहा है। इससे उद्योगों की कार्यक्षमता भी काफी बढ़ रही है। AI तकनीक का असर अब कई क्षेत्रों में साफ दिखाई देने लगा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में AI की मदद से बीमारियों का जल्दी पता लगाया जा रहा है।

शिक्षा क्षेत्र में AI आधारित लर्निंग टूल छात्रों की पढ़ाई को आसान बना रहे हैं। व्यापार और उद्योग में कंपनियां AI के जरिए बड़े डेटा का विश्लेषण कर बेहतर निर्णय ले रही हैं।

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 चुनौतियां भी कम नहीं

AI तकनीक के कारण स्मार्ट सिटी, स्मार्ट ट्रांसपोर्ट और ऑटोमेटेड सिस्टम का विकास भी तेजी से हो रहा है। कई देशों में AI आधारित ट्रैफिक मैनेजमेंट और सुरक्षा सिस्टम लागू किए जा रहे हैं। हालांकि AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि कई पारंपरिक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी का खतरा बढ़ सकता है। AI के गलत इस्तेमाल को रोकना भी बड़ी चुनौती होगी।

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भविष्य में क्या होगा?

तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI इंसानों के जीवन का अहम हिस्सा बन जाएगा। ऑटोमेशन, रोबोटिक्स और स्मार्ट टेक्नोलॉजी के जरिए काम करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है। कुल मिलाकर, AI तकनीक आने वाले समय में दुनिया की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और जीवनशैली को नई दिशा देने वाली है।

क्या होंगी चुनौतियां

हालांकि AI के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। एक्सपर्ट्‍स का कहना है कि कई पारंपरिक नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।  डेटा सुरक्षा और प्राइवेसी का खतरा बढ़ सकता है । AI के गलत इस्तेमाल को रोकना भी बड़ी चुनौती होगी।  Edited by : Sudhir Sharma

WhatsApp Data Privacy Case: सुप्रीम कोर्ट में Meta का हलफनामा, जानिए अब यूजर्स के डेटा और विज्ञापन शेयरिंग पर क्या बदलेंगे नियम

WhatsApp Meta

Meta और WhatsApp ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (NCLAT) के आदेश का पालन करने का भरोसा दिया। यह आदेश भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा तय की गई प्राइवेसी और यूज़र कंसेंट से जुड़ी सुरक्षा शर्तों के विस्तार से संबंधित है।

 

इसका सीधा अर्थ है कि अब यूजर्स को अपने डेटा शेयरिंग को लेकर अधिक नियंत्रण और स्पष्ट विकल्प (Opt-in/Opt-out) मिलेंगे। सुप्रीम कोर्ट में Meta की अपील और CCI की क्रॉस-अपील अभी लंबित है। कंपनियों ने कहा कि वे 16 मार्च तक NCLAT के निर्देशों का पालन करेंगी।

 

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि एक शपथपत्र दाखिल किया गया है, जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि कौन-सा डेटा साझा किया जाता है और कौन-सा नहीं।

 

 कोर्ट ने कंपनियों के बयान को रिकॉर्ड पर लिया और अनुपालन हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया।

 

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क्या है पूरा मामला?

 

नवंबर 2025 में NCLAT ने CCI द्वारा व्हाट्सऐप की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर लगाए गए 213.14 करोड़ रुपये के जुर्माने को बरकरार रखा था। ट्रिब्यूनल ने माना था कि व्हाट्सऐप ने यूजर्स पर अनुचित शर्तें थोपीं और क्रॉस-प्लेटफॉर्म डेटा शेयरिंग से Meta को ऑनलाइन विज्ञापन में अनुचित लाभ मिला।

 

हालांकि, NCLAT ने पांच साल तक विज्ञापन के लिए डेटा शेयरिंग पर रोक लगाने के आदेश को रद्द कर दिया। उसने कहा कि यदि यूजर्स को स्पष्ट और वापस लेने योग्य सहमति (Revocable Consent) दी जाती है तो पूर्ण प्रतिबंध उचित नहीं है।

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बाद में CCI ने स्पष्टता की मांग की, जिस पर 15 दिसंबर को NCLAT ने कहा कि सभी गैर-व्हाट्सऐप उद्देश्यों, जिनमें विज्ञापन भी शामिल है, के लिए डेटा संग्रह और साझा करने पर यह सुरक्षा निर्देश लागू होंगे।  Edited by : Sudhir Sharma

India AI Impact Summit 2026 का चौथा दिन: जब मंच पर आमने-सामने आए धुर विरोधी; Prime Minister Narendra Modi के कहने पर भी नहीं मिलाए सैम ऑल्टमैन और डारियो अमोदेई ने हाथ

 'AI इम्पैक्ट समिट' के चौथे दिन एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला, जिसने तकनीक की दुनिया में जारी खींचतान को कैमरे के सामने ला दिया। समिट के दौरान जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एकजुटता दिखाने के लिए मंच पर मौजूद सभी वक्ताओं से एक-दूसरे का हाथ थामकर ऊपर उठाने का आग्रह किया, तो लगभग सभी दिग्गज अधिकारियों ने इसे सहर्ष स्वीकार किया।

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लेकिन इस दौरान सिलिकॉन वैली की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विता भी साफ झलक उठी। OpenAI के सैम ऑल्टमैन और Anthropic के डारियो अमोदेई एक-दूसरे के बगल में तो खड़े थे, लेकिन उन्होंने हाथ नहीं मिलाए।

दिखी प्रतिद्वंद्विता की लकीर

AI की रेस में एक-दूसरे को पछाड़ने में जुटे ये दोनों दिग्गज प्रधानमंत्री के इशारे के बावजूद अपनी मुट्ठियाँ अलग-अलग रखे नजर आए। जहाँ बाकी लोग एक-दूसरे का हाथ थामकर एकजुटता का संदेश दे रहे थे, वहीं ऑल्टमैन और अमोदेई ने दूरी बनाए रखना ही बेहतर समझा।

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ऑल्टमैन के चेहरे पर दिखी असहजता

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, इस दौरान सैम ऑल्टमैन काफी असहज नजर आ रहे थे। जब प्रधानमंत्री मोदी सभी को हाथ जोड़ने का संकेत दे रहे थे, तब ऑल्टमैन ने अन्य लोगों का अनुसरण करने के बजाय अपनी नजरें दूसरी ओर फेर लीं। तकनीक की दुनिया के दो सबसे बड़े प्रतिस्पर्धियों के बीच का यह 'कोल्ड वॉर' अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है। Edited by : Sudhir Sharma 

Who is Neha Singh : नेहा सिंह कौन हैं, AI इम्पैक्ट समिट में ‘रोबोडॉग’ से चर्चाओं में, Galgotias University ने झाड़ा पल्ला

galgoti uni

देश की राजधानी में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट के दौरान प्रदर्शित एक रोबोटिक डॉग को लेकर गलगोटिया यूनिवर्सिटी (Galgotias University) हाल ही में विवादों में आ गई। मीडिया रिपोर्ट्‍स के मुताबिक समिट में यूनिवर्सिटी के स्टॉल पर दिखाए गए ‘रोबोडॉग’ को चीनी निर्मित बताया गया। इसके बाद यूनिवर्सिटी से एक्सपो स्पेस खाली करने के लिए कहा गया।

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इवेंट से जुड़ा एक वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इसमें प्रोफेसर नेहा सिंह रोबोट को 'ओरायन' नाम से पेश करती नजर आईं। इसके बाद ऑनलाइन अटकलें लगने लगीं कि क्या इस मशीन को यूनिवर्सिटी की इन-हाउस इनोवेशन के तौर पर प्रस्तुत किया गया था। इस वीडियो के बाद नेहा सिंह भी चर्चाओं में आ गई। 

कौन हैं नेहा सिंह, यूनिवर्सिटी ने झाला पल्ला 

गलगोटिया यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ बिजनेस में कम्युनिकेशंस विभाग की प्रमुख (हेड ऑफ डिपार्टमेंट) हैं। वह कोर टेक्निकल फैकल्टी का हिस्सा नहीं हैं। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने इस बात को स्पष्ट किया।  विवाद के बाद मीडिया बातचीत में नेहा सिंह ने कहा कि उन्हें रोबोट के विकास से जुड़ी तकनीकी जानकारियों की पूरी जानकारी नहीं थी।

उन्होंने जोर देकर कहा कि यूनिवर्सिटी ने यह दावा नहीं किया था कि रोबोट का निर्माण उसी ने किया है। मीडिया के सामने उन्होंने स्वीकार किया कि समिट में प्रस्तुति के तरीके के कारण स्थिति बिगड़ सकती है। उन्होंने बताया कि उन्होंने रोबोट का परिचय उत्साह और तेज़ रफ्तार माहौल में दिया, जिससे गलतफहमी पैदा हो सकती है। उनके मुताबिक, रोबोटिक डॉग को यूनिवर्सिटी द्वारा निर्मित बताने का कोई इरादा नहीं था। बल्कि इसे छात्रों को प्रेरित करने और उन्हें इससे भी उन्नत तकनीक विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदर्शन के तौर पर लाया गया था।

 

यूनिवर्सिटी ने कहा- बयान देने का अधिकार नहीं था 

मीडिया खबरों के मुताबिक चाइनीज रोबोडॉग विवाद पर गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने माफीनामा जारी किया है। यूनिवर्सिटी ने कहा कि AI समिट में उनके स्टॉल पर मौजूद प्रतिनिधि जानकारी के अभाव में कैमरे के सामने गलत बयान दे बैठीं जबकि उन्हें मीडिया से बात करने का अधिकार नहीं था। Edited by : Sudhir Sharma

AI Impact Summit में रोबोटिक डॉग विवाद : Galgotiyas University ने मांगी माफी, सरकार की कड़ी चेतावनी

robot dog galgotias controversy

गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने 'इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट' (India AI Impact Summit) के दौरान चीन में निर्मित ‘रोबोटिक डॉग’ के प्रदर्शन को लेकर ‘असमंजस’ की स्थिति पैदा होने के लिए बुधवार को माफी मांगी। ने कहा कि उसके पवेलियन में मौजूद उसके एक प्रतिनिधि को इस रोबोटिक उत्पाद के बारे में ‘सही जानकारी’ नहीं थी और उसने चीन में बने रोबोटिक डॉग को विश्वविद्यालय का नवोन्मेष बताया, जो सही नहीं था।

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इस बीच गलगोटिया यूनिवर्सिटी से जुड़े 'रोबो-डॉग' विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बुधवार को सख्त चेतावनी जारी की है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदर्शनी में शामिल होने वाले संस्थान ऐसी किसी भी वस्तु का प्रदर्शन न करें जो उनकी अपनी नहीं है।

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 आईटी सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि प्रदर्शनी लगाने वालों को ऐसी चीजें प्रदर्शित नहीं करनी चाहिए जो उनकी अपनी (मौलिक) नहीं हैं। मीडिया खबरों के मुताबिक गलगोटिया यूनिवर्सिटी का पैवेलियन बंद कर दिया गया है और बिजली भी काट दी गई है। 

यह था पूरा मामला 

यह विवाद तब शुरू हुआ जब गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर आरोप लगा कि उन्होंने 'एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में चीन की 'यूनिट्री' (Unitree) कंपनी द्वारा निर्मित एक रोबो-डॉग को अपना खुद का आविष्कार बताकर पेश किया। सोशल मीडिया पर समिट के वीडियो वायरल होने के बाद कई यूजर्स और विशेषज्ञों ने इस विसंगति को पकड़ लिया।  Edited by : Sudhir Sharma

AI Impact Summit 2026 : चीनी रोबोडॉग के बाद अब कोरियन ड्रोन सॉकर, गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर फिर उठे सवाल

AI Impact Summit 2026  : इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट में चीनी ‘रोबोडॉग’ विवाद के बाद गलगोटिया यूनिवर्सिटी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। समिट से बाहर किए जाने के बाद अब विश्वविद्यालय एक नए विवाद में घिर गया है। इस बार मामला ‘ड्रोन सॉकर’ से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर दक्षिण कोरिया में निर्मित बताया जा रहा है, लेकिन इसे यूनिवर्सिटी का खुद का उत्पाद बताकर पेश किया गया।

 

जानकारी के मुताबिक, नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर आरोप है कि उसने कोरियाई सॉकर ड्रोन को अपना इन-हाउस प्रोजेक्ट बताकर प्रदर्शित किया। यूथ कांग्रेस ने इसके वीडियो को अपने एक्स पर शेयर किया है। यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने दावा किया कि यह ड्रोन पूरी तरह कैंपस में ही तैयार किया गया है।  इस पूरे विवाद के बीच कम्युनिकेशन प्रोफेसर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। इससे पहले भी वह रोबोडॉग विवाद में चर्चा में रही थीं और अब एक बार फिर सुर्खियों में हैं।

वीडियो में वे एक रिपोर्टर को ‘इन-हाउस सॉकर ड्रोन’ के बारे में जानकारी देती नजर आ रही हैं। उन्होंने दावा किया, 'यह एक दिलचस्प डिवाइस है। इसकी एंड-टू-एंड इंजीनियरिंग से लेकर एप्लिकेशन तक सब कुछ यूनिवर्सिटी में ही विकसित किया गया है।' 

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उन्होंने यह भी कहा कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने अपने कैंपस में भारत का पहला ‘ड्रोन सॉकर एरीना’ तैयार किया है। उन्होंने कहा कि यहां सिमुलेशन लैब और एप्लिकेशन एरीना मौजूद है… यह भारत का पहला सॉकर एरीना ऑन कैंपस है। यहां इस प्रोडक्ट को और उन्नत फीचर्स के साथ विकसित किया जा रहा है। 

हालांकि, अब इस दावे पर सवाल उठ रहे हैं और सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है कि क्या यह तकनीक वास्तव में यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित की गई है या नहीं। लगातार सामने आ रहे विवादों के चलते गलगोटिया यूनिवर्सिटी एक बार फिर जांच और आलोचना के घेरे में है। Edited by : Sudhir Sharma

इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में Jio ने रखा ‘नेशन-फर्स्ट AI स्टैक’ का खाका

Jio AI Stack

– 'जियो AI स्टैक' को 'सॉवरेन' AI इकोसिस्टम के रूप में किया प्रस्तुत

– ग्रीन डेटा सेंटर से भारतीय भाषाओं तक पूरी AI वैल्यू चेन पर फोकस

– स्वदेशी और सॉवरेन AI इकोसिस्टम पर जोर

Jio AI Stack : इंडिया AI इम्पैक्ट समिट में जियो ने अपने 'नेशन-फर्स्ट AI स्टैक' की रूपरेखा पेश की। कंपनी तकनीकी रूप से इसे 'जियो AI स्टैक' नाम देती है और दावा करती है कि इसे भारत की जरूरतों और बड़े पैमाने की मांग को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। जियो इंटेलिजेंस के तहत विकसित किया जा रहा यह स्टैक केवल डेटा सेंटर तक सीमित नहीं है, बल्कि एक फुल-स्टैक AI इकोसिस्टम के रूप में तैयार किया जा रहा है। 

 

'जियो AI स्टैक' में गीगावॉट स्तर के ग्रीन डेटा सेंटर, उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग व्यवस्था, प्लेटफॉर्म और फ्रेमवर्क, भारतीय भाषाओं पर आधारित डेटा फाउंडेशन, बहुभाषी इंटेलिजेंस लेयर और विभिन्न क्षेत्रों के लिए एप्लिकेशन शामिल हैं। देश में मल्टी-गीगावॉट AI डेटा सेंटर विकसित किए जा रहे हैं, जो 100 प्रतिशत ग्रीन एनर्जी से संचालित होंगे, ताकि राष्ट्रीय स्तर की टिकाऊ AI क्षमता तैयार की जा सके।

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'जियो AI स्टैक'  को एक 'सॉवरेन' AI इकोसिस्टम के रूप में प्रस्तुत किया गया है यानी ऐसा ढांचा जो देश में विकसित हो और राष्ट्रीय आवश्यकताओं के अनुरूप संचालित हो। कंपनी का कहना है कि इसके जरिए स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, छोटे व्यवसायों और रोजमर्रा की सेवाओं में AI आधारित समाधान विकसित किए जा सकते हैं।

 

कंपनी के मुताबिक जियो AI स्टैक का फोकस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को हर भारतीय, साथ ही एंटरप्राइज और सरकारी संगठनों के लिए सुलभ और किफायती बनाना है। इसके तहत भारतीय भाषाओं को समझने और स्थानीय चुनौतियों का समाधान करने वाली AI क्षमताओं पर विशेष जोर दिया गया है।

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स्थानीय संदर्भ में विकसित इंटेलिजेंस के लिए व्यापक भारतीय भाषाओं के डेटा सेट तैयार किए जा रहे हैं। साथ ही सुरक्षित, बहुभाषी वॉयस AI और एजेंटिक प्लेटफॉर्म पर काम किया जा रहा है, जिससे उपयोगकर्ता अपनी भाषा में सहज AI इंटरैक्शन कर सकें।

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विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में AI की दौड़ अब केवल तकनीकी क्षमता तक सीमित नहीं है, बल्कि डेटा संप्रभुता, ऊर्जा दक्षता, भाषाई विविधता और बड़े पैमाने पर पहुंच जैसे पहलुओं से भी जुड़ गई है। ऐसे में जियो AI स्टैक जैसे मॉडल देश के दीर्घकालिक डिजिटल और आर्थिक विकास में किस हद तक योगदान देते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा।
Edited By : Chetan Gour

दुनियाभर में YouTube सर्वर डाउन, 1 घंटे बाद सेवाएं बहाल, करोड़ों यूजर्स प्रभावित

youtube outage

Youtube Down : भारत समेत कई देशों में यूट्यूब सर्वर डाउन हो गया। इस वजह से भारत, अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देशों के करोड़ों यूजर्स परेशान हो गए। लोग यूट्यूब वीडियो नहीं देख पा रहे थे। हालांकि 1 घंटे बाद यूट्यूब की सेवाएं बहाल हो गई।

 

बताया जा रहा है कि यह दिग्गत सबसे पहले अमेरिका से शुरू हुई। यहां 3 लाख से ज्यादा लोगों ने यूट्यूब वीडियो नहीं चलने की शिकायत की। वीडियो पर क्लिक करने पर Something went Wrong लिखा आ रहा है। यूट्यूब टीवी भी इससे प्रभावित हुआ। डाउन डिटेक्टर पर करीब 10,000 लोगों ने इस संबंध में शिकायत की।

 

यूट्यूब ने बयान जारी कर कहा, तकनीकी दिक्कतों पर हमारी नजर हैं। कंपनी ने यह नहीं बताया कि इस आउटेज का कारण क्या था?

 

बहरहाल अब यूट्यूब की सभी सेवाएं शुरू हो गई है। लोग एक बार फिर अपने कंप्यूटर और मोबाइल पर यूट्यूब वीडियो देख पा रहे हैं। 

edited by : Nrapendra Gupta