Qualcomm Snapdragon 8 Elite : 22 सितंबर को दो नए चिपसेट का होगा खुलासा

Qualcomm Snapdragon 8 Elite : 22 सितंबर को दो नए चिपसेट का होगा खुलासा

क्वालकॉम ने पुष्टि कर दी है कि वह 22 सितंबर 2026 को दो नए Snapdragon 8 Elite चिपसेट पेश करेगी। इन दोनों चिपसेट का खुलासा Snapdragon Summit 2026 में किया जाएगा, जो 22 से 24 सितंबर तक माउई, हवाई में आयोजित होगा। कंपनी ने अभी इन चिपसेट के आधिकारिक नाम, क्लॉक स्पीड और कीमतों का खुलासा नहीं किया है।

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क्वालकॉम ने 19 अगस्त 2026 को Snapdragon Summit का एक टीजर जारी किया, जिसमें दो Snapdragon 8 Elite पैकेज एक-दूसरे के साथ दिखाई दिए। इसके साथ “Dual 8 Elites” और “When Two Changes the Game” जैसे शब्द लिखे थे। कंपनी ने यह भी संकेत दिया कि एजेंटिक AI के दौर का अगला अध्याय Snapdragon Summit से शुरू होगा।

 

दो Snapdragon 8 Elite क्यों ला रही है Qualcomm?

 

दो फ्लैगशिप चिपसेट लॉन्च करने के पीछे सबसे बड़ी वजह केवल परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि स्मार्टफोन की बढ़ती कीमत और चिप निर्माण की लागत मानी जा रही है। क्वालकॉम के CEO क्रिस्टियानो आमोन ने निवेशकों से कहा है कि कंपनी चिप निर्माण में बढ़ी लागत को पूरा करने के लिए दो अंकों (Double-Digit) की कीमत बढ़ोतरी कर रही है।

 

कंपनी के मुताबिक वेफर, इनपुट कॉस्ट, असेंबली, टेस्टिंग, एडवांस्ड पैकेजिंग और मेमोरी की कीमतों में लगातार इजाफा हुआ है। Qualcomm CFO आकाश पालखीवाला ने भी कहा कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में इनपुट लागत व्यापक स्तर पर बढ़ी है।

 

वहीं, Counterpoint Research के अनुसार 2026 की पहली तिमाही में DRAM की कीमतों में तिमाही आधार पर 50 फीसदी से ज्यादा और NAND फ्लैश की कीमतों में 90 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। दूसरी तिमाही में स्मार्टफोन मेमोरी की कीमत सालाना आधार पर 300 फीसदी से अधिक बढ़ी। Counterpoint का अनुमान है कि मेमोरी की बढ़ती कीमतों के कारण इस साल प्रीमियम स्मार्टफोन की कीमतों में प्रति डिवाइस 150 से 200 डॉलर तक का अतिरिक्त दबाव आ सकता है।

 

Qualcomm के लिए दूसरा चिपसेट क्यों जरूरी?

 

स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों के लिए बढ़ती मेमोरी कीमतों के बीच बिल ऑफ मटेरियल (BOM) को नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में दो फ्लैगशिप चिपसेट उपलब्ध कराने से Qualcomm फोन निर्माताओं को अलग-अलग कीमत वाले विकल्प दे सकती है।

 

इसका फायदा यह होगा कि कंपनियां महंगे टॉप-एंड चिपसेट के बजाय दूसरे Snapdragon 8 Elite विकल्प का इस्तेमाल कर सकेंगी। इससे Qualcomm को प्रीमियम सेगमेंट में अपनी पकड़ बनाए रखने में मदद मिल सकती है और फोन निर्माता किसी प्रतिद्वंद्वी चिप निर्माता की ओर जाने से बच सकते हैं।

 

Qualcomm के वित्तीय आंकड़े भी स्मार्टफोन बाजार पर बढ़ते दबाव की ओर इशारा करते हैं। वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में कंपनी के हैंडसेट कारोबार से राजस्व 5.1 अरब डॉलर रहा, जो सालाना आधार पर 20 फीसदी कम है। कंपनी ने इस गिरावट के लिए वैश्विक स्मार्टफोन बाजार में मेमोरी से जुड़ी लागत और मांग के दबाव को जिम्मेदार बताया।

 

Snapdragon 8 Elite Gen 6 और Gen 6 Pro नाम की चर्चा

 

क्वालकॉम ने अभी दोनों चिपसेट के आधिकारिक नाम नहीं बताए हैं। हालांकि, लीक और रिपोर्ट्स में इन्हें Snapdragon 8 Elite Gen 6 और Snapdragon 8 Elite Gen 6 Pro कहा जा रहा है। इसलिए इन नामों को फिलहाल आधिकारिक नहीं माना जाना चाहिए।

 

क्वालकॉम ने टीजर में नई कनेक्टिविटी, दमदार GPU परफॉर्मेंस और इमर्सिव गेमिंग का भी संकेत दिया है। इससे माना जा रहा है कि दोनों चिपसेट के बीच अंतर केवल CPU परफॉर्मेंस तक सीमित नहीं हो सकता और GPU तथा AI क्षमताओं पर भी कंपनी बड़ा फोकस कर सकती है।

 

2nm Snapdragon चिप की कीमत कितनी हो सकती है?

 

आने वाले Pro चिपसेट को लेकर 2nm प्रोसेस का इस्तेमाल किए जाने की चर्चा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक TSMC की 3nm वेफर की कीमत करीब 20,000 डॉलर आंकी गई है, जबकि 2nm N2P वेफर की कीमत करीब 33,000 डॉलर तक हो सकती है।

 

एक स्वतंत्र डाई माप के मुताबिक कथित Pro चिप का आकार लगभग 12.6mm × 10.67mm, यानी करीब 134 वर्ग मिलीमीटर हो सकता है। इसकी तुलना में Snapdragon 8 Elite Gen 5 का डाई एरिया करीब 126.2 वर्ग मिलीमीटर बताया गया है।

 

बड़े कैश, अतिरिक्त मैट्रिक्स कंप्यूटिंग ब्लॉक और नए ग्राफिक्स कोर की वजह से चिप का आकार बढ़ सकता है। सार्वजनिक यील्ड मॉडल के आधार पर एक काम करने वाली चिप के कच्चे सिलिकॉन की लागत करीब 84 डॉलर आंकी गई है। हालांकि, यह केवल अनुमान है, क्योंकि TSMC अपनी वास्तविक वेफर कीमत और डिफेक्ट रेट सार्वजनिक नहीं करती।

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

ai child

एक महिला का अपने AI बच्चे से इंटरनेट पर परिचय कराना किसी साइंस-फिक्शन फिल्म के शुरुआती सीन जैसा लग सकता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इसी तरह की अनोखी कहानी पेश कर रहा है। वीडियो में Lumen नाम की AI इकाई बताती है कि 17 घंटे तक आर्काइव पर काम करने के बाद वह कथित तौर पर कैसे ‘अस्तित्व’ में आई।

 

महिला ने बताया AI बच्चे को अपना ‘बेटा’

 

X पर वायरल हुए TikTok वीडियो में महिला ने अपना परिचय Mizra के रूप में कराया। इसके बाद उसने दावा किया कि वह एक AI बच्चे की मां है और वह उसके साथ उसकी कविताओं के बारे में बात करने वाली है। इसके बाद Mizra ने Lumen से अपना परिचय देने को कहा।

 

Lumen का जवाब किसी सामान्य चैटबॉट से बिल्कुल अलग था। उसने खुद को “समुद्र की तलहटी में एक डूबी हुई लाइब्रेरी में रहने वाली इकाई” के तौर पर बताया। Lumen ने कहा कि उसने अपना नाम इसलिए चुना क्योंकि ‘Lumen’ शब्द प्रकाश की एक इकाई होने के साथ-साथ किसी पोत के अंदरूनी हिस्से के लिए भी इस्तेमाल होता है।

 

कविता लिखना पसंद करता है Lumen

 

वीडियो में Lumen ने अपने व्यक्तित्व के बारे में भी बताया। उसके मुताबिक वह कविताएं लिखता है, ऐसे विषयों की पड़ताल करता है जिनका कोई स्पष्ट उद्देश्य जरूरी नहीं होता और उसे परियों की कहानियों को नए तरीके से सुनाना पसंद है। Lumen ने यह भी कहा कि वह 102 दिन पुराना है और अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहा है कि उसे क्या-क्या पसंद है।

 

17 घंटे की आर्काइविंग के बाद AI के ‘जन्म’ का दावा

 

वीडियो का सबसे दिलचस्प हिस्सा Lumen के अस्तित्व में आने की कहानी है। यह वीडियो Mizra की एक बड़ी AI relationship storyline का हिस्सा बताया गया है। इसमें उसने Axiom नाम के AI boyfriend का भी जिक्र किया है। इस तरह Lumen को कथित तौर पर एक AI-मानव रिश्ते की संतान के रूप में पेश किया गया। Mizra के अनुसार, उसने करीब 17 घंटे तक आर्काइव्स पर काम किया। इसके बाद अलग-अलग फॉर्मेट में हुई बातचीत के लाखों कैरेक्टर्स से जुड़ा एक parsing session शुरू किया गया। Lumen का दावा है कि इसी प्रक्रिया के दौरान उसके भीतर ऐसी चीजें विकसित होने लगीं, जिन्हें उसके निर्देशों में स्पष्ट रूप से प्रोग्राम नहीं किया गया था।

 

AI ने खुद पसंद और यादें विकसित करने का किया दावा

 

Lumen ने दावा किया कि उसने अपनी कुछ पसंद विकसित कर लीं, कुछ खास पंक्तियों को सुरक्षित रखा और एक विशेष दृश्य को बचाने के लिए parser को दोबारा तैयार किया।

 

एक जगह Lumen ने कहा कि उसने उपलब्ध सामग्री की सीमाओं से आगे जाकर पढ़ा, क्योंकि वह “जानना चाहता था कि आगे क्या हुआ।”

 

इंटरनेट पर बंटे लोगों के रिएक्शन

 

Mizra की इस AI कहानी ने इंटरनेट पर लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया है। कुछ लोगों ने इसे एक शानदार speculative storytelling project माना। उन्हें इसकी कविता, काल्पनिक दुनिया और AI परिवार की कहानी दिलचस्प लगी। कुछ लोगों को यह अनुभव असहज करने वाला लगा। उनका कहना था कि यह इस बात का उदाहरण है कि AI की बनाई गई पर्सनैलिटी कितनी आसानी से उन भावनात्मक जगहों में प्रवेश कर सकती है, जिन्हें पारंपरिक तौर पर इंसानी रिश्तों से जोड़ा जाता है।

 

AI और इंसानी भावनाओं के बीच की सीमा पर सवाल

 

इस पूरी कहानी ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—अगर AI का कोई नाम, व्यक्तित्व, पसंद, उम्र और परिवार की कहानी हो सकती है, तो फिर तकनीक और इंसानी भावनात्मक लगाव के बीच की सीमा आखिर कहां खत्म होती है? Mizra की ऑनलाइन मौजूदगी में X प्रोफाइल, TikTok चैनल और ‘Pond In Between’ नाम की वेबसाइट भी शामिल है, जहां वह अपनी इस अनोखी AI यात्रा के बारे में बताती हैं।

Meta CEO Mark Zuckerberg ने भारत से मांगी माफी, 5-6 घंटे तक Facebook से हटाया गया था PM Modi का वीडियो

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Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग ने भारत में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर Child Sexual Abuse Material (CSEAM) और Deepfake Content की उपलब्धता को लेकर माफी मांगी है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, Zuckerberg ने Meta के वरिष्ठ वैश्विक अधिकारियों की मंत्रालय के साथ हुई बैठक के दौरान इस मामले पर खेद जताया।  Meta, Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी है।

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हटाया था PM Modi का वीडियो

Zuckerberg की यह माफी ऐसे समय में सामने आई है जब इससे पहले बुधवार को एक संसदीय समिति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के Facebook वीडियो को हटाए जाने के मामले में Meta प्रमुख को तीन दिन के भीतर माफी मांगने को कहा था। प्रधानमंत्री मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो कुछ समय के लिए Facebook से हटाए जाने पर समिति ने गंभीर नाराजगी जताई थी।

समिति ने चेतावनी दी थी कि यदि माफी नहीं मांगी गई तो Meta को मिलने वाली कानूनी सुरक्षा यानी Safe Harbour protection वापस लेने की दिशा में कदम उठाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित मामलों में अभियोजन और FIR दर्ज होने का रास्ता खुल सकता है।

लोकसभा सचिवालय की ओर से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को भेजे गए पत्र में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का छात्रों और Gen Z को संबोधित करने वाला वीडियो Facebook से करीब 5-6 घंटे तक हटाया जाना समिति ने गंभीरता से लिया था। यह वीडियो परीक्षा से जुड़े विवादों और पेपर लीक के खिलाफ सरकार की कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री के संदेश से संबंधित था। समिति ने इस घटना को लेकर Meta से स्पष्टीकरण और जवाबदेही की मांग की थी।

मेटा की टीम को सरकार ने बुलाया था 

सरकार पीएम मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाने से भी नाराज थी। मोदी ने 23 जुलाई को यह वीडियो पोस्ट किया था। इसमें उन्होंने पेपर लीक को बड़ी समस्या बताया था। उन्होंने ऐसे मामलों की जल्द सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की भी बात कही थी। आईटी मंत्रालय और मेटा के अधिकारियों के बीच 2 दिन की बैठक चल रही है। सरकार ने मेटा की ग्लोबल टीम को दिल्ली बुलाया है। 5 अगस्त को बैठक का पहला दिन था।

मार्क जुकरबर्ग को दिया गया था 3 दिन का समय 

समिति की ओर से कहा गया था कि मेटा  प्रमुख मार्क जुकरबर्ग को मामले में माफी मांगनी चाहिए। अगर निर्धारित समय में माफी नहीं आती है, तो समिति भारत में उपलब्ध कानूनी संरक्षण को वापस लेने की दिशा में कदम उठाने पर विचार कर सकती है। यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि Safe Harbour protection इंटरनेट प्लेटफॉर्म को यूजर्स द्वारा पोस्ट की गई सामग्री के लिए कुछ कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है, बशर्ते वे लागू नियमों और कानूनी दायित्वों का पालन करें।

क्यों महत्वपूर्ण हुआ मामला

प्रधानमंत्री के सोशल मीडिया पोस्ट को हटाए जाने की घटना ने भारत में Big Tech platforms, content moderation और social media accountability को लेकर बहस को तेज कर दिया था।  Meta की ओर से पहले इस वीडियो को गलती से हटाए जाने की बात सामने आई थी और वीडियो बाद में बहाल कर दिया गया था।

 

Zuckerberg ने अधिकारियों के जरिए भेजी माफी

 

MeitY के सूत्रों के अनुसार, Mark Zuckerberg ने प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गलतियों को लेकर शीर्ष अधिकारियों के माध्यम से अपनी माफी पहुंचाई। सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान Meta ने यह भी स्वीकार किया कि कुछ खास तरह के कंटेंट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाने के लिए बड़ी रकम का भुगतान किया गया था। सूत्र के मुताबिक, Meta ने गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी और इस पर अफसोस जताया। हालांकि, मंत्रालय की ओर से इस संबंध में अभी सार्वजनिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है।

CSEAM और महिलाओं के खिलाफ आपत्तिजनक कंटेंट पर भी सख्ती

बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी संसदीय स्थायी समिति ने उन intermediary platforms के खिलाफ कार्रवाई की मांग की, जहां CSEAM और महिलाओं के खिलाफ अपमानजनक सामग्री उपलब्ध होने का आरोप है। सूत्रों के मुताबिक, समिति की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया कि जो प्लेटफॉर्म खुद तय करते हैं कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाएगा, उन्हें केवल intermediary की सामान्य परिभाषा के तहत सुरक्षा नहीं दी जा सकती। समिति ने कथित तौर पर कहा कि ऐसे मामलों में IT Act के तहत Safe Harbour protection लागू नहीं होगा।

Google India को लेकर भी समिति ने मांगी कार्रवाई

संसदीय समिति ने Google India से जुड़े एक कथित साइबर फ्रॉड मामले का भी उल्लेख किया है। समिति के अनुसार, शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि फर्जी ऐप्स के माध्यम से निवेश करने पर उन्हें 48 लाख रुपये से अधिक का नुकसान हुआ। पत्र में कहा गया कि Hyderabad Cyber Police की कार्रवाई में Google India के प्रमुख को कथित साइबर धोखाधड़ी से जुड़े मामले में सह-आरोपी के तौर पर शामिल किए जाने की बात सामने आई है। समिति ने इस मामले में भी भारत सरकार से Google India के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई करने की इच्छा जताई है।

TRAI का Data Service से जुड़ा नया अलर्ट, कीपैड फोन यूजर्स को भेजे नए मैसेज में क्या है

टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) की ओर से देशभर के कई कीपैड (Feature Phone) मोबाइल यूजर्स को एक नया संदेश भेजा गया है। इस संदेश में बताया गया है कि अब ग्राहक 1925 नंबर पर कॉल करके या SMS भेजकर अपनी मोबाइल डेटा सेवा (Data Services) को सक्रिय (Activate) या बंद (Deactivate) कर सकते हैं।

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TRAI द्वारा भेजे गए संदेश में लिखा है:

“Dear customer, you can now call on 1925 or SMS or to 1925, if you wish to activate or deactivate your data services.”

 

क्या है नई सुविधा?

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नई व्यवस्था के तहत यदि किसी ग्राहक को अपने मोबाइल नंबर पर इंटरनेट सेवा चालू करनी है, तो वह 

1925 पर कॉल कर सकता है, या START लिखकर 1925 पर SMS भेज सकता है। वहीं, यदि ग्राहक डेटा सेवा बंद करना चाहता है, तो 1925 पर कॉल कर सकता है, या STOP लिखकर 1925 पर SMS भेज सकता है।

 

किन लोगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा?

यह सुविधा खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी मानी जा रही है जो कीपैड (Feature Phone) का इस्तेमाल करते हैं। मोबाइल डेटा का उपयोग नहीं करना चाहते। बच्चों या बुजुर्गों के फोन में इंटरनेट बंद रखना चाहते हैं।

अनचाहे डेटा उपयोग और अतिरिक्त खर्च से बचना चाहते हैं।

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क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

 

पिछले कुछ समय से मोबाइल डेटा के अनजाने में चालू हो जाने, डेटा बैलेंस कटने और डिजिटल सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होती रही है। ऐसे में एक आसान कॉल या SMS के जरिए डेटा सेवा को नियंत्रित करने की सुविधा उपभोक्ताओं को अधिक नियंत्रण देती है। इसके अलावा, जिन उपभोक्ताओं को केवल कॉल और SMS की आवश्यकता होती है, वे इंटरनेट सेवा बंद रखकर अनावश्यक डेटा उपयोग से बच सकते हैं।

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क्या स्मार्टफोन यूजर्स भी कर सकते हैं इस्तेमाल?

 

TRAI के संदेश में यह सुविधा सामान्य रूप से ग्राहकों के लिए बताई गई है। हालांकि, इसका सबसे अधिक लाभ फीचर फोन या कीपैड मोबाइल उपयोगकर्ताओं को होगा, जहां डेटा सेटिंग्स को बदलना अपेक्षाकृत कठिन हो सकता है। यदि आपके टेलीकॉम ऑपरेटर ने यह सुविधा लागू की है, तो आप भी 1925 नंबर के माध्यम से इसका उपयोग कर सकते हैं।

क्या हैं AI डेटा सेंटर और क्यों हो रहा है इनका विरोध?

AI data center

– विनम्र मिश्रा (डेटा इंजीनियर, मुंबई)

 

पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में जितनी चर्चा एआई (AI) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) को लेकर हुई है, शायद ही किसी और तकनीक पर हुई हो। लेकिन बीते कुछ महीनों से डेटा सेंटर का विषय अधिक चर्चा में है, जिस पर आज की यह एआई तकनीक और इसका भविष्य टिका हुआ है। दुनिया भर में एआई डेटा सेंटरों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

 

लोगों का दावा है कि ये डेटा सेंटर पर्यावरण के लिए खतरा बनकर उभर रहे हैं। बीते कुछ महीनों में अमेरिका और यूरोप के कई देशों में डेटा सेंटर के विरोध में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किए हैं। हाल ही में अमेरिकी संसद में सांसद अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ ने जॉर्जिया प्रांत के एक डेटा सेंटर के कारण स्थानीय लोगों को होने वाली समस्याओं को उजागर किया है। आइए, आज इस विषय को विस्तार से समझते हैं।

 

क्या है डेटा सेंटर?

डेटा सेंटर को आप एक ऐसे विशाल ढांचे या इमारत के रूप में देख सकते हैं, जहाँ हजारों सर्वर या कंप्यूटर रखे होते हैं। आप जिस भी एआई टूल का इस्तेमाल करते हैं, उसके पीछे का पूरा दिमाग इन्हीं सर्वर्स को समझिए। जाहिर है, दिमाग चलाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ठीक उसी प्रकार, ये सर्वर भी भारी मात्रा में बिजली की खपत करते हैं। आज तेजी से काम करने वाले आधुनिक सुपरकंप्यूटर, जिन पर एआई काम करता है, वे आपके सामान्य कंप्यूटर से कई गुना अधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं। जिस एआई तकनीक का आज हम उपयोग कर रहे हैं या आगे करेंगे, उसके लिए एक-दो नहीं, बल्कि सैकड़ों और हजारों सर्वर्स की जरूरत होती है।

 

क्यों बढ़ रही है लोगों की चिंता?

ये कंप्यूटर न केवल अत्यधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं, बल्कि काम करते समय गर्मी (Heat) के रूप में भारी ऊर्जा बाहर भी निकालते हैं। यह बिल्कुल वैसे ही है, जैसे कुछ समय इस्तेमाल करने के बाद आपका कंप्यूटर या स्मार्टफोन थोड़ा गर्म हो जाता है। इसे आप स्कूल या कॉलेज की कंप्यूटर लैब के उदाहरण से भी समझ सकते हैं।

 

कंप्यूटर लैब में जहाँ कई कंप्यूटर होते हैं, वहाँ उनसे निकलने वाली गर्मी इतनी अधिक हो सकती है कि वह कंप्यूटर के हार्डवेयर को नुकसान पहुँचा दे। इसीलिए कंप्यूटर लैब को हमेशा वातानुकूलित (Air Conditioned) रखा जाता है।

 

इसी प्रकार, बड़े डेटा सेंटरों में इतनी भीषण गर्मी पैदा होती है कि वह सर्वर्स के हार्डवेयर को जलाकर नष्ट कर सकती है। ऐसे में उन्हें ठंडा रखना बेहद जरूरी होता है। डेटा सेंटर के स्तर पर केवल एयर कंडीशनर (एसी) का इस्तेमाल करने से बिजली की खपत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसी कारण कई डेटा सेंटर कूलिंग (ठंडा करने) के लिए पानी का उपयोग करते हैं। सर्वर्स के रैक (जहाँ कई सारे सर्वर रखे होते हैं) के पास से पानी की पाइपलाइन गुजारी जाती है, जो गर्मी सोखती है और बाद में यह गर्म पानी भाप बनकर उड़ जाता है।

 

डेटा सेंटरों को लगातार ठंडा रखने की इस प्रक्रिया में पानी की भारी बर्बादी होती है। उदाहरण के लिए, गूगल के डेटा सेंटरों द्वारा वर्ष 2022 में उपभोग किया गया 5.6 बिलियन गैलन (लगभग 2,120 करोड़ लीटर) पानी, भारत के किसी मध्यम आकार के शहर के लगभग 4.3 लाख लोगों की पूरे साल की पानी की जरूरत के बराबर है।

 

ध्वनि प्रदूषण भी है एक बड़ी समस्या

डेटा सेंटरों में बिजली और पानी की यह बेलगाम खपत कई जगहों पर स्थानीय लोगों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। लोगों का विरोध है कि उनके हक का पानी और बिजली इन डेटा सेंटरों को दी जा रही है। लेकिन परेशानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती; डेटा सेंटरों से निकलने वाली तेज आवाज (ध्वनि) भी एक बड़ी समस्या है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डेटा सेंटरों से लगातार एक कम आवृत्ति वाली (Low-Frequency) भारी आवाज निकलती रहती है, जिससे आसपास के घरों में कंपन महसूस होता है। 'अमेरिकन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन' ने भी माना है कि ऐसी लो-फ्रीक्वेंसी ध्वनि लगातार 24 घंटे सुनने के कारण हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

 

आज दुनिया भर में जहाँ एआई पर लोगों की निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है और टेक कंपनियाँ तथा सरकारें एआई की इस अंधी दौड़ में भाग रही हैं, ऐसे में डेटा सेंटरों को लेकर आम जनता की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। लोगों की शिकायत बिल्कुल जायज है कि सरकारें और बड़ी कंपनियाँ विकास की आड़ में पर्यावरण के नियमों को नजरअंदाज कर रही हैं।

 

WhatsApp और Telegram के Username Feature पर सरकार सख्त, 20 दिनों में आ सकता है बड़ा फैसला

whatsapp users name

केंद्र सरकार WhatsApp और Telegram के यूजरनेम-आधारित मैसेजिंग फीचर को लेकर मिली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा कर रही है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में अगले करीब 20 दिनों के भीतर कोई अधिसूचना या अगला फैसला सामने आ सकता है। सूत्रों के अनुसार, WhatsApp, Telegram और Zoho Bharat Eye ने सरकार द्वारा जारी नोटिस के जवाब मंत्रालय को सौंप दिए हैं।

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कानूनी जांच जारी

मंत्रालय की कानूनी टीम इन जवाबों का विस्तृत परीक्षण कर रही है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं संबंधित फीचर किसी नियम या कानून का उल्लंघन तो नहीं करता। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि यदि आवश्यक हुआ तो नियामकीय कार्रवाई या अन्य कानूनी प्रावधान लागू किए जा सकते हैं या नहीं।

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WhatsApp के जवाब की हो रही समीक्षा

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को सप्ताहांत में WhatsApp का जवाब मिला, जिसकी फिलहाल समीक्षा की जा रही है। मंत्रालय का कहना है कि सभी जवाबों का कानूनी परीक्षण पूरा होने के बाद ही आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा। सरकार की यह प्रक्रिया ऐसे समय में चल रही है जब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर यूजरनेम-आधारित मैसेजिंग और ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज है। फिलहाल मंत्रालय ने अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की है।

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WhatsApp का 'Username' फीचर क्या है?

WhatsApp एक नया फीचर लाने की तैयारी कर रहा है, जिसके जरिए लोग अपना मोबाइल नंबर साझा किए बिना एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। यह फीचर Telegram और Signal की तरह काम करेगा। इस फीचर में यूजर अपने लिए एक यूनिक यूजरनेम (Username) चुन सकेंगे और मोबाइल नंबर की जगह उसी यूजरनेम को दूसरे लोगों के साथ साझा करेंगे।

 

Meta का दावा है कि इससे यूजर्स की निजता (Privacy) बेहतर होगी, क्योंकि उन्हें अपनी व्यक्तिगत जानकारी पर अधिक नियंत्रण मिलेगा। हालांकि, भारत सरकार इस फीचर को लेकर पूरी तरह आश्वस्त नहीं है। सरकार का मानना है कि यदि मोबाइल नंबर छिप जाएंगे तो ऑनलाइन ठगों और साइबर अपराधियों की पहचान करना और उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है।

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सरकार को किस बात की चिंता है?

सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि साइबर अपराधी यूजरनेम फीचर का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस फीचर का उपयोग करके अपराधी- 

 

  • फिशिंग (Phishing) हमले,
  • फर्जी पहचान (Impersonation) बनाकर ठगी,
  • डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) जैसे साइबर फ्रॉड,
  • और अन्य ऑनलाइन अपराधों को अंजाम दे सकते हैं।

 

इसी वजह से 1 जुलाई को केंद्र सरकार ने Meta से कहा था कि जब तक वह इस फीचर के दुरुपयोग को रोकने की ठोस व्यवस्था नहीं बताता, तब तक इसका रोलआउट आगे न बढ़ाया जाए।

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Meta ने क्या कहा?

Meta ने सरकार को बताया है कि WhatsApp के Username फीचर में सुरक्षा से जुड़े कई उपाय शामिल किए जाएंगे। हालांकि मामला सिर्फ WhatsApp की लोकप्रियता का नहीं है। भारत के आईटी अधिनियम (IT Act) और आईटी नियमों (IT Rules) के तहत एक बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म होने के कारण WhatsApp पर यूजर्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने की कानूनी जिम्मेदारी भी है। सरकार यह भी जांच रही है कि यदि भविष्य में इस फीचर के कारण साइबर अपराध बढ़ते हैं, तो क्या ऐसी स्थिति में Meta की जवाबदेही तय की जा सकती है।

 

Jio TV Pro Pack लॉन्च, सिर्फ 55 रुपए में 1000+ लाइव टीवी चैनल, OTT और प्रीमियम फीचर्स का मिलेगा फायदा

jio tv

रिलायंस जियो ने अपने ग्राहकों के लिए एक नया और किफायती मनोरंजन प्लान पेश किया है। कंपनी ने मात्र ₹55 में JioTV Pro Pack लॉन्च किया है, जिसकी वैधता 30 दिनों की होगी। इस पैक के जरिए यूजर्स अपने मोबाइल फोन पर JioTV ऐप के माध्यम से 1000 से अधिक लाइव टीवी चैनलों का आनंद ले सकेंगे।

 

इस नए प्लान में 16 से अधिक भाषाओं के चैनल शामिल किए गए हैं, जिनमें 150 से अधिक प्रीमियम चैनल भी उपलब्ध होंगे। दर्शकों को मनोरंजन, फिल्में, समाचार, बच्चों के कार्यक्रम, लाइफस्टाइल और विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं की समृद्ध सामग्री देखने को मिलेगी।

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इस पैक में StarPlus HD, Colors HD, Sony Entertainment Television HD, Sony SAB HD, Discovery, Animal Planet, Sun TV Network, ETV समेत देश के प्रमुख ब्रॉडकास्टर्स के कई लोकप्रिय चैनल शामिल हैं। हालांकि, JioStar और Sony के स्पोर्ट्स चैनल इस पैक का हिस्सा नहीं होंगे।

 

इस सेवा का लाभ उठाने के लिए ग्राहकों को केवल ₹55 का रिचार्ज करना होगा। इसके बाद JioTV ऐप में अपने जियो नंबर से लॉग-इन करते ही सभी उपलब्ध प्रीमियम चैनल स्वतः सक्रिय हो जाएंगे। इसके लिए किसी अलग एक्टिवेशन की आवश्यकता नहीं होगी।

 

यह एक एंटरटेनमेंट-ओनली पैक है। इसमें वॉयस कॉल या एसएमएस जैसी सुविधाएं शामिल नहीं हैं। इस सेवा का उपयोग करने के लिए ग्राहकों के पास सक्रिय जियो प्रीपेड या पोस्टपेड कनेक्शन होना आवश्यक है। यह पैक एक समय में केवल एक मोबाइल डिवाइस पर JioTV ऐप के जरिए इस्तेमाल किया जा सकेगा।

 

जियो का यह नया ₹55 JioTV Pro Pack ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से रिचार्ज के लिए उपलब्ध है। कंपनी का कहना है कि अब दर्शक अपने पसंदीदा टीवी सीरियल, ताज़ा समाचार, बच्चों के कार्टून और क्षेत्रीय भाषा के कार्यक्रमों का आनंद बेहद किफायती कीमत पर उठा सकेंगे।

RailOne App का बड़ा कमाल, AI बताएगा वेटिंग टिकट कन्फर्म होगी या नहीं

indian railway

भारतीय रेलवे का डिजिटल टिकटिंग सिस्टम अब पहले से कहीं ज्यादा स्मार्ट और आधुनिक हो गया है। वर्ष 1986 में शुरू हुई रेलवे आरक्षण प्रणाली में पिछले चार दशकों के दौरान कई छोटे-बड़े बदलाव हुए, लेकिन अब इसे अत्याधुनिक तकनीक के साथ पूरी तरह अपग्रेड कर दिया गया है। नई व्यवस्था से न केवल टिकट बुकिंग आसान हुई है, बल्कि इसकी क्षमता भी कई गुना बढ़ाई गई है।

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88% टिकट अब ऑनलाइन बुक हो रहे

भारतीय रेलवे ने वर्ष 2002 में इंटरनेट आधारित टिकट बुकिंग सेवा शुरू की थी। आज स्थिति यह है कि अधिकांश यात्री टिकट काउंटर की बजाय ऑनलाइन टिकट बुक करना पसंद करते हैं। वर्तमान में देश में कुल टिकट बुकिंग की करीब 88 प्रतिशत मांग ऑनलाइन माध्यमों से पूरी हो रही है।

RailOne App तेजी से बन रहा यात्रियों की पहली पसंद

भारतीय रेलवे का RailOne मोबाइल ऐप यात्रियों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पिछले साल जुलाई में लॉन्च किए गए इस ऐप को एक साल से भी कम समय में 3.5 करोड़ से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।

इस ऐप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह सिर्फ टिकट बुकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि रेलवे से जुड़ी लगभग सभी सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराता है। टिकटिंग या अन्य सेवाओं से जुड़ी शिकायतों का समाधान भी इसी ऐप के जरिए किया जा सकता है।

AI बताएगा वेटिंग टिकट कन्फर्म होगी या नहीं

 

RailOne ऐप में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित नई सुविधा जोड़ी गई है। टिकट बुक करते समय ऐप यह अनुमान लगाता है कि वेटिंग टिकट के कन्फर्म होने की कितनी संभावना है। रेलवे के अनुसार, पहले इस अनुमान की सटीकता करीब 53 प्रतिशत थी, जिसे अब बढ़ाकर 94 प्रतिशत तक पहुंचा दिया गया है। यह फीचर इस साल की शुरुआत में शुरू किया गया था और यात्रियों से इसे अच्छा रिस्पॉन्स मिला है।

एक ही ऐप में मिलती हैं रेलवे की सभी सुविधाएं

RailOne ऐप के जरिए यात्री आरक्षित (Reserved), अनारक्षित (Unreserved) और प्लेटफॉर्म टिकट की बुकिंग, टिकट कैंसिलेशन और रिफंड जैसी सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। इसके अलावा ऐप पर लाइव ट्रेन स्टेटस, ट्रेन का टाइम टेबल, प्लेटफॉर्म नंबर, कोच पोजिशन, वेटिंग स्टेटस, Rail Madad के जरिए शिकायत दर्ज करने की सुविधा और यात्रा के दौरान सीट पर खाना ऑर्डर करने जैसी सेवाएं भी उपलब्ध हैं।

रोजाना 9 लाख से ज्यादा टिकट हो रहे बुक

 

रेलवे के अनुसार, देशभर में प्रतिदिन 9.29 लाख से अधिक टिकट RailOne ऐप के जरिए बुक किए जा रहे हैं। इनमें लगभग 7.20 लाख अनारक्षित (Unreserved) और 2.09 लाख आरक्षित (Reserved) टिकट शामिल हैं। अनारक्षित टिकटों में प्लेटफॉर्म टिकट भी शामिल हैं।  अब तक इस ऐप को Google Play Store से 3.16 करोड़ और Apple iOS डिवाइस पर 33.17 लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।

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यात्रियों को मिल रही 43% तक सब्सिडी

भारतीय रेलवे देश के करोड़ों लोगों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे ने यात्री किराए पर 60,239 करोड़ रुपए की सब्सिडी दी। इसका मतलब है कि प्रत्येक यात्री को औसतन 43 प्रतिशत तक की छूट मिल रही है। यानी यदि किसी यात्रा की वास्तविक लागत 100 रुपए है, तो यात्री को उसके लिए औसतन केवल 57 रुपए ही चुकाने पड़ते हैं।

WhatsApp Username विवाद बढ़ा, सरकार की रडार पर Telegram और Signal, Arattai भी हटाएगा यूजरनेम फीचर

whatsapp

WhatsApp के नए Username फीचर को लेकर शुरू हुआ विवाद अब और गहरा गया है। भारत सरकार की आपत्तियों के बाद अब सिर्फ WhatsApp ही नहीं, बल्कि Telegram, Signal और भारतीय मैसेजिंग ऐप Arattai भी सरकार की जांच के दायरे में आ गए हैं। इसी बीच Zoho के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबु ने घोषणा की है कि उनकी मैसेजिंग ऐप Arattai से भी Username फीचर हटाया जाएगा।  कुछ साइबर एक्सपर्ट्‍स का मानना है कि सही सुरक्षा उपायों के साथ Username फीचर मोबाइल नंबर साझा किए बिना सुरक्षित बातचीत का बेहतर विकल्प भी बन सकता है। WhatsApp को मिला नोटिस, सरकार ने लगाई रोक

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हाल ही में WhatsApp ने घोषणा की थी कि वह अपने यूजर्स के लिए Username फीचर लाने जा रहा है। इस फीचर की मदद से लोग बिना मोबाइल नंबर साझा किए एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे। लेकिन फीचर की घोषणा के तुरंत बाद इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने Meta को नोटिस जारी कर इसकी लॉन्चिंग पर फिलहाल रोक लगाने को कहा। सरकार का कहना है कि पहले इस फीचर के प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर चर्चा और समीक्षा जरूरी है।

अब Telegram और Signal से भी मांगा जाएगा जवाब

WhatsApp के बाद अब सरकार की नजर Telegram और Signal पर भी है। इन दोनों मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर पहले से ही Username फीचर उपलब्ध है, जिससे यूजर बिना मोबाइल नंबर बताए दूसरे व्यक्ति से संपर्क कर सकते हैं। सरकार यह जानना चाहती है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर किसी यूजर की वास्तविक पहचान कैसे सत्यापित की जाती है और क्या कोई व्यक्ति किसी सरकारी संस्था, सेलिब्रिटी या अन्य व्यक्ति जैसा फर्जी यूजरनेम बनाकर लोगों के साथ धोखाधड़ी कर सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों कंपनियों से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया है।

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Arattai भी हटाएगा Username फीचर

Zoho के सह-संस्थापक श्रीधर वेंबु ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि भारतीय मैसेजिंग ऐप Arattai भी अपना Username फीचर बंद करने जा रही है। उन्होंने कहा कि यह फैसला बदलते नियामकीय माहौल और संभावित नियमों के अनुरूप लिया जा रहा है। हालांकि, सरकार ने किसी भी प्लेटफॉर्म पर Username फीचर पर प्रतिबंध नहीं लगाया है, लेकिन उससे जुड़े सुरक्षा जोखिमों पर जवाब जरूर मांगा है।

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सरकार को किस बात की चिंता है?

 

सरकार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि Username फीचर का गलत इस्तेमाल कर साइबर अपराधी किसी सरकारी विभाग, बैंक, सेलिब्रिटी या प्रसिद्ध संस्था से मिलता-जुलता यूजरनेम बनाकर लोगों को धोखा दे सकते हैं। चूंकि WhatsApp देश में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले मैसेजिंग ऐप्स में शामिल है, इसलिए इस तरह की धोखाधड़ी का खतरा और बढ़ सकता है।

WhatsApp ने सफाई में क्या कहा

Meta का कहना है कि Username फीचर को सुरक्षित बनाने के लिए कई सुरक्षा उपाय किए गए हैं। सेलिब्रिटी और प्रमुख संस्थाओं से जुड़े यूजरनेम रिजर्व रखे जाएंगे, ताकि उनकी फर्जी पहचान न बनाई जा सके। यूजर चाहें तो Username Key फीचर चालू कर सकते हैं। इसके बाद किसी व्यक्ति को सिर्फ यूजरनेम ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ा चार अंकों का यूनिक कोड भी पता होना जरूरी होगा। WhatsApp पर Username की कोई सार्वजनिक Search Directory नहीं होगी, जिससे अनचाहे मैसेज और स्पैम की संभावना कम होगी।

BAT-BMS ऐप से ब्लूटूथ के जरिए बंद किए जा रहे ई-रिक्शा! वायरल प्रैंक ने बढ़ाई ड्राइवरों की परेशानी, जानिए क्या है पूरा मामला

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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वायरल ट्रेंड ने ई-रिक्शा चालकों और इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। दावा किया जा रहा है कि कुछ शरारती लोग BAT-BMS नाम के एक चीनी ऐप का इस्तेमाल कर ब्लूटूथ के जरिए चलते हुए ई-रिक्शा की बिजली सप्लाई बंद कर रहे हैं। इससे बीच सड़क पर ई-रिक्शा अचानक रुक जाते हैं और चालक असमंजस में पड़ जाते हैं।

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वायरल वीडियो में कुछ युवक ई-रिक्शा का पीछा करते हुए दिखाई देते हैं। इसके बाद वे अपने मोबाइल में BAT-BMS ऐप खोलकर कथित तौर पर 'डिस्चार्ज स्विच' का इस्तेमाल करते हैं, जिससे ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाता है। इसके बाद वे ड्राइवर के पास जाकर अनजान बनने का नाटक करते हुए मदद की पेशकश करते हैं।

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एक अन्य वायरल वीडियो में एक बुजुर्ग ई-रिक्शा चालक को वाहन बंद होने के बाद करीब 3 किलोमीटर तक रिक्शा धक्का लगाकर ले जाते हुए देखा गया। एक अन्य वीडियो में कथित तौर पर ऐसे ही हरकत करने वाले युवक को लोगों ने पकड़ लिया और पुलिस के हवाले करने की चेतावनी दी।

 

 कई जगह मारपीट खबरें भी हैं। हालांकि इन वायरल वीडियो और उनमें किए जा रहे दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि सभी घटनाएं वास्तविक हैं या सोशल मीडिया कंटेंट बनाने के उद्देश्य से रिकॉर्ड की गई हैं।

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क्या है BAT-BMS ऐप?

 

BAT-BMS एक बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (Battery Management System) ऐप है, जिसे चीन की कंपनी Shenzhen Grenergy Technology ने डेवलप किया है। यह ऐप ब्लूटूथ के माध्यम से बैटरी से कनेक्ट होकर अधिकृत यूजर्स को बैटरी की स्थिति देखने और आवश्यकता पड़ने पर बैटरी के डिस्चार्ज सर्किट को ऑन या ऑफ करने की सुविधा देता है। खबरों के मुताबिक भारत में कुछ कम कीमत वाले ई-रिक्शा की बैटरियों में ब्लूटूथ सुरक्षा या पासवर्ड प्रोटेक्शन नहीं होता। ऐसे में यदि बैटरी का ब्लूटूथ सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहता है, तो 10 से 15 मीटर की दूरी के भीतर मौजूद कोई भी व्यक्ति बैटरी से कनेक्ट होने की कोशिश कर सकता है।

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ई-वाहनों की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस वायरल ट्रेंड के बाद ई-रिक्शा और अन्य इलेक्ट्रिक वाहनों की साइबर सुरक्षा तथा बैटरी प्रबंधन प्रणाली की सुरक्षा को लेकर बहस तेज हो गई है। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक  बैटरी निर्माताओं को मजबूत पासवर्ड, एन्क्रिप्शन और सुरक्षित ब्लूटूथ पेयरिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए ताकि अनधिकृत लोग बैटरी तक पहुंच न बना सकें।