US-Iran Peace Deal: कई हफ्तों की अटकलों के बाद अमेरिका और ईरान ने आखिरकार बहुप्रतीक्षित शांति समझौता ज्ञापन (MoU) पर आखिरकार साइन कर दिए हैं। फ्रांस में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में हुए इस समझौते का 14 सूत्रीय मसौदा सार्वजनिक किया गया है। हालांकि यह अंतिम शांति संधि नहीं है। लेकिन यह दोनों देशों के बीच स्थायी समझौते की दिशा में एक महत्वपूर्ण रोडमैप माना जा रहा है। समझौते की पहली शर्त के तहत अमेरिका और ईरान के बीच तत्काल प्रभाव से युद्धविराम लागू हो गया है।
यह युद्धविराम लेबनान समेत सभी संघर्ष क्षेत्रों पर लागू होगा। दोनों देशों ने भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई या बल प्रयोग की धमकी नहीं देने का भी वादा किया है। इसके साथ ही अमेरिका ने संघर्ष के दौरान लगाए गए नौसैनिक को हटाने और युद्ध से संबंधित सैन्य तैनाती को वापस लेने पर सहमति जताई है।
समझौते का सबसे महत्वपूर्ण पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलना है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक इस समुद्री रास्ते पर कमर्शियल जहाजों की आवाजाही बहाल करने का वादा किया है। दोनों देश समुद्री सुरक्षा और सुरक्षित नौवहन सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में स्थिरता लौट सकती है और तेल की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
300 अरब डॉलर का फंड
आर्थिक मोर्चे पर अमेरिका ने ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए लगभग 300 अरब डॉलर के फंड का समर्थन करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, यह राशि सीधे नहीं दी जाएगी। बल्कि ईरान द्वारा समझौते की शर्तों का पालन करने पर चरणबद्ध तरीके से उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा अमेरिका ने ईरान पर लगाए गए कई प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने, तेल निर्यात की अनुमति देने और विदेशों में जमे ईरानी धन को चरणबद्ध तरीके से जारी करने पर भी सहमति व्यक्त की है।
परमाणु कार्यक्रम
परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी समझौते में महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किए गए हैं। ईरान ने दोहराया है कि वह कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा। साथ ही उसने अपने समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम भंडार को अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में डाउन-ब्लेंड करने पर सहमति जताई है। इसका मतलब है कि उच्च स्तर पर समृद्ध यूरेनियम को ऐसे स्तर तक कम किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में नहीं किया जा सकेगा, लेकिन वह शांतिपूर्ण नागरिक उद्देश्यों के लिए उपयोगी रहेगा।
जानें- डील की 14 मुख्य बातें
तत्काल सीजफायर
अमेरिका और ईरान के बीच सभी सैन्य कार्रवाई तुरंत बंद होगी। यह सीजफायर लेबनान समेत सभी संघर्ष क्षेत्रों पर लागू होगा।
संप्रभुता का सम्मान
दोनों देश एक-दूसरे की क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता का सम्मान करेंगे।
अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त
अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान के खिलाफ लागू नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा और संघर्ष के लिए तैनात सैन्य संसाधनों को वापस बुलाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खुलेगा
ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य में निर्बाध आवाजाही बहाल करेगा।
300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण फंड
अमेरिका ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए लगभग 300 अरब डॉलर के फंड का समर्थन करेगा।
प्रतिबंधों में चरणबद्ध राहत
अमेरिका ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
परमाणु हथियार नहीं बनाएगा ईरान
डील में ईरान ने दोहराया है कि वह कभी परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।
एनरिच्ड यूरेनियम का डाउन-ब्लेंडिंग
ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम भंडार को IAEA की निगरानी में डाउन-ब्लेंड करेगा। यानी उसे हथियार-ग्रेड स्तर से नीचे लाया जाएगा।
60 दिनों तक कोई तनाव नहीं बढ़ेगा
वार्ता पूरी होने तक ईरान परमाणु गतिविधियां नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा।
तेल निर्यात फिर शुरू होगा
अमेरिका प्रतिबंधों में छूट देकर ईरान को तेल निर्यात और उससे जुड़े बैंकिंग लेनदेन की अनुमति देगा।
जमी हुई ईरानी संपत्तियों की रिहाई
विदेशों में फंसी ईरान की संपत्तियों तक उसकी पहुंच बहाल की जाएगी।
संयुक्त निगरानी तंत्र बनेगा
समझौते के पालन की निगरानी और विवादों के समाधान के लिए एक संयुक्त तंत्र स्थापित किया जाएगा।
कुछ मुद्दे अभी लंबित रहेंगे
सभी विवादित विषयों का समाधान इस MoU में नहीं किया गया है। बाकी मुद्दों पर आगे बातचीत होगी।
फाइनल डील को UN की मंजूरी
स्थायी शांति समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के जरिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता दी जाएगी।
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