Paramount Syntex IPO: टेक्सटाइल कंपनी का इश्यू दूसरे दिन पूरा सब्सक्राइब, ₹81.79 करोड़ का है आईपीओ

Paramount Syntex IPO: टेक्सटाइल कंपनी Paramount Syntex Ltd के SME IPO को निवेशकों का जोरदार रिस्पॉन्स मिला है। IPO बोली के दूसरे दिन ही पूरी तरह सब्सक्राइब हो गया। 1 अक्टूबर तक इश्यू को कुल 1.35 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था।

नेट इश्यू में उपलब्ध 61.17 लाख शेयरों के मुकाबले करीब 80.56 लाख शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। सबसे ज्यादा दिलचस्पी QIB कैटेगरी में दिखी। एंकर के बाद QIB हिस्से को 119.29 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।

81.79 करोड़ रुपये का है IPO

Paramount Syntex का IPO कुल ₹81.79 करोड़ का है। कंपनी सिंथेटिक फाइबर, ऐक्रेलिक यार्न और ब्लेंडेड व डाइड यार्न जैसे प्रोडक्ट बनाती है। IPO का प्राइस बैंड ₹119 से ₹127 प्रति शेयर तय किया गया है।

6 अक्टूबर तक लगा सकते हैं दांव

IPO 30 सितंबर को खुला था और 6 अक्टूबर 2026 को बंद होगा। इसमें ₹10 फेस वैल्यू वाले अधिकतम 64.40 लाख इक्विटी शेयर शामिल हैं।

IPO का न्यूनतम लॉट साइज 2,000 शेयर है। यानी ऊपरी प्राइस बैंड पर रिटेल निवेशक को कम से कम ₹2.54 लाख लगाने होंगे। शेयरों की लिस्टिंग BSE SME प्लेटफॉर्म पर प्रस्तावित है। सौभाग्य कैपिटल ऑप्शंस लिमिटेड इस इश्यू का बुक रनिंग लीड मैनेजर है। वहीं, Bigshare Services Pvt Ltd रजिस्ट्रार है।

मशीनरी खरीदने में खर्च होगी रकम

कंपनी IPO से मिलने वाली रकम का बड़ा हिस्सा मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने में लगाएगी। करीब ₹61.68 करोड़ मौजूदा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स में नई मशीनरी खरीदने पर खर्च किए जाएंगे।

यह IPO पूरी तरह फ्रेश इश्यू है। इसमें कोई Offer for Sale यानी OFS नहीं है। इसलिए IPO से जुटाई गई रकम सीधे कंपनी को मिलेगी और इसका इस्तेमाल तय कारोबारी जरूरतों के लिए किया जाएगा।

कंपनी ने क्या कहा

Paramount Syntex के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पुनीत अरोड़ा ने कहा कि कंपनी ने पिछले कुछ सालों में ऐक्रेलिक, ऊन-मिश्रित और दूसरे खास तरह के धागों का पोर्टफोलियो तैयार किया है।

उन्होंने कहा कि कंपनी का फोकस प्रोडक्ट क्वालिटी, ग्राहकों के साथ मजबूत रिश्ते और टेक्सटाइल इंडस्ट्री की बदलती जरूरतों को पूरा करने पर है। कंपनी को आगे अपने बाजार और कारोबार को बढ़ाने की भी गुंजाइश दिख रही है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Jio Platforms का आईपीओ इस महीने आ रहा है, जानिए इश्यू ओपनिंग और लिस्टिंग की तारीख क्या होगी

जियो प्लेटफॉर्म्स इस महीने आईपीओ पेश कर सकती है। कंपनी ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ हो सकता है। सूत्रों ने बताया कि फॉरेन इनवेस्टर्स से इस आईपीओ को लेकर पॉजिटिव फीडबैक मिले हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल होल्डिंग कंपनी है। देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी रिलायंस जियो इसके तहत आती है।

Jio Platforms का आईपीओ 21 अक्तूबर को खुल सकता है। इनवेस्टर्स आईपीओ में 23 अक्तूबर तक बोली लगा सकते हैं। एंकर इनवेस्टर्स के लिए आईपीओ 19 अक्तूबर को खुल सकता है। जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्तूबर को हो सकती है। सितंबर में एनएसई का आईपीओ आया था। यह देश का अब तक का दूसरा सबसे पड़ा आईपीओ था।

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के बारे में जानकारी रखने वाले सूत्र ने बताया, “जियो आईपीओ लॉन्च करने के काफी करीब है। हालांकि, बाजार की स्थितियों और ग्लोबल डेवलपमेंट्स का असर आईपीओ की टाइमिंग पर पड़ सकता है।” सूत्र ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आईपीओ से जुड़ा रेगुलेटरी प्रोसेस पूरा हो गया है। सभी जरूरी एप्रूवल मिल चुके हैं।

मामले से जुड़े लोगों ने बताया कि जियो ने फॉरेन इनवेस्टर्स से आईपीओ के बारे में बातचीत की है। उनका रिस्पॉन्स पॉजिटिव रहा। घरेलू निवेशकों की दिलचस्पी भी इस आईपीओ में उम्मीद से ज्यादा दिख रही है। दूसरे सूत्र ने बताया कि मार्केट की स्थितियों पर करीबी नजर रखी जा रही है। लेकिन, इनवेस्टर्स ने संकेत दिए हैं कि आईपीओ में बोली लगाने के उनके उत्साह पर किसी तरह का असर पड़ने वाला नहीं है।

जियो प्लेटफॉर्म्स ने इस साल जून में सेबी के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस फाइल किया था। सेबी ने 28 अगस्त को इस आईपीओ पर अपना ऑब्जर्वेशन दे दिया था। इससे आईपीओ के लिए रास्ता साफ हो गया था। इस आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल नहीं होगा। इसका मतलब है कि कंपनी आईपीओ में इनवेस्टर्स को सिर्फ नए शेयर इश्यू करेगी। पुराने इनवेस्टर्स अपने शेयर नहीं बेचेंगे।

कंपनी आईपीओ से मिले पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। रिलायंस जियो इंफोकॉम पर करीब 27,500 करोड़ रुपये का कर्ज है। अभी आईपीओ के प्राइस बैंड और वैल्यूएशन के बारे में फैसला होना बाकी है। अगले हफ्ते प्राइस बैंड के बारे में फैसला हो सकता है। सूत्र ने कहा, “कंपनी का मानना है कि कंपनी के आईपीओ में निवेश करने वाले इनवेस्टर्स के लिए वैल्यू क्रिएशन होनी चाहिए।”

रिलायंस जियो इंफोकॉम जियो प्लेटफॉर्म्स की टेलीकॉम यूनिट है। इस साल मार्च के अंत में कंपनी के 52.4 करोड़ सब्सक्राइबर्स थे। इस लिहाज से यह देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। इसके 5जी ग्राहकों की संख्या 26.8 करोड़ है। यह कंपनी चीन को छोड़ दें तो फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस ऑफर करने वाली सबसे बड़ी कंपनी है।

Dove Soft IPO: दूसरे दिन इश्यू 0.87 गुना सब्सक्राइब, कारोबारी सेहत के साथ जानिए क्या करती है कंपनी

Dove Soft Limited के ₹73.26 करोड़ के SME IPO को दूसरे दिन के अंत तक 0.87 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। 5 अक्टूबर 2026 को इश्यू बंद होगा। अब तक नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर यानी NII कैटेगरी 1.19 गुना सब्सक्राइब हुई है।

QIB और मार्केट मेकर हिस्से को भी 1.00 गुना सब्सक्रिप्शन मिल चुका है। 1 अक्टूबर तक IPO में करीब ₹63.86 करोड़ की बोलियां आ चुकी थीं।

SMS से CPaaS की तरफ बढ़ रही कंपनी

Dove Soft का मुख्य कारोबार कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी से जुड़ा है। कंपनी पहले मुख्य रूप से SMS आधारित बिजनेस पर फोकस करती थी। अब वह AI आधारित और ओमनीचैनल CPaaS यानी Communication Platform as a Service मॉडल की तरफ बढ़ रही है।

इसके प्लेटफॉर्म पर RCS, WhatsApp, वॉइस, ईमेल और दूसरे डिजिटल कम्युनिकेशन चैनल शामिल हैं। कंपनी का लक्ष्य कारोबारों को एक ही प्लेटफॉर्म से अलग-अलग चैनलों पर ग्राहकों से जुड़ने की सुविधा देना है।

Dove Soft की कारोबारी सेहत

FY2025 से FY2026 के बीच कंपनी का रेवेन्यू 46% बढ़ा। इसी दौरान टैक्स के बाद मुनाफा यानी PAT 42% बढ़ा। कंपनी की शुरुआत 2011 में हुई थी।

आज इसकी मौजूदगी मुंबई, अहमदाबाद, गुरुग्राम और दुबई में है। कंपनी बड़े कॉर्पोरेट्स और OTT प्लेटफॉर्म्स को कम्युनिकेशन सॉल्यूशंस देती है।

IPO में क्या ऑफर है?

Dove Soft के IPO में कुल 53.28 लाख नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। इसके अलावा 12.72 लाख शेयरों का OFS यानी Offer for Sale है।

IPO का प्राइस बैंड ₹104 से ₹111 प्रति शेयर है। कंपनी के शेयरों को BSE SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट करने का प्रस्ताव है। IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल कंपनी अपनी आगे की कारोबारी जरूरतों के लिए करेगी।

बिजनेस कम्युनिकेशन बदल रहा है

Dove Soft के मुताबिक, अब कंपनियों का ग्राहक से संपर्क सिर्फ SMS तक सीमित नहीं है। WhatsApp, RCS, वॉइस और ईमेल जैसे चैनल भी कस्टमर कम्युनिकेशन का हिस्सा बन चुके हैं।

एक ही ग्राहक के साथ अलग-अलग चरणों में अलग चैनल इस्तेमाल किए जा सकते हैं। मसलन, ऑर्डर अपडेट के लिए SMS या WhatsApp और प्रमोशनल कम्युनिकेशन के लिए दूसरे डिजिटल चैनल का इस्तेमाल हो सकता है। Dove Soft इसी बदलाव को अपने कारोबार के लिए ग्रोथ का अगला मौका मान रही है।

AI और ऑटोमेशन पर भी फोकस

कंपनी ने अपने प्लेटफॉर्म में AI आधारित ऑटोमेशन को भी शामिल किया है। इसमें इंटेलिजेंट चैनल सिलेक्शन और रियल-टाइम एनालिटिक्स जैसी सुविधाएं हैं।

इसके अलावा वर्कफ्लो बेस्ड कम्युनिकेशन भी प्लेटफॉर्म का हिस्सा है। इसका मकसद कंपनियों के कम्युनिकेशन को ज्यादा ऑटोमेटेड और डेटा आधारित बनाना है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Acevector IPO: स्नैपडील की पेरेंट का इश्यू 5 गुना भरकर बंद, 5 अक्टूबर को लिस्टिंग; क्या कह रहा है ग्रे मार्केट

ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस स्नैपडील की पेरेंट कंपनी ऐसवेक्टर का ₹420 करोड़ का IPO 29 सितंबर को बंद हो चुका है। यह 5.07 गुना भरा। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 3.42 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 8.53 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 4.83 गुना सब्सक्राइब हुआ। अब कंपनी के शेयर NSE और BSE पर 5 अक्टूबर को लिस्ट हो सकते हैं। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर महज 2.19 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ऐसे में लिस्टिंग बहुत अच्छी रहने की उम्मीद नहीं है। हालांकि ग्रे मार्केट के संकेत लिस्टिंग के दिन सच ही हो जाएं, ऐसा जरूरी नहीं है।

Acevector IPO के लिए प्राइस बैंड ₹30-₹32 प्रति शेयर था। IPO में ₹287 करोड़ के 8.97 करोड़ नए शेयर जारी हुए। साथ ही ₹133 करोड़ के 4.16 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहा। IPO के लिए रजिस्ट्रार MUFG Intime India थी। IPO से पहले ऐसवेक्टर ने एंकर इनवेस्टर्स से ₹189 करोड़ जुटाए। IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल मार्केटप्लेस बिजनेस की मार्केटिंग और बिजनेस प्रमोशन के लिए, मार्केटप्लेस बिजनेस के टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए, अधिग्रहणों के जरिए इनऑर्गेनिक ग्रोथ के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

ऐसवेक्टर को कुणाल बहल और रोहित बंसल ने शुरू किया था। ऐसवेक्टर, स्नैपडील के साथ-साथ सॉफ्टवेयर-एज-ए-सर्विस (SaaS) प्लेटफॉर्म ‘यूनिकॉमर्स’ और कंज्यूमर ब्रांड बिल्डिंग फर्म Stellaro Brands को भी ऑपरेट करती है। यूनिकॉमर्स अगस्त 2024 में शेयर बाजार में लिस्ट हो चुकी है। इसका IPO ₹276.57 करोड़ का था।

Acevector IPO का अलॉटमेंट कैसे करें चेक

BSE पर

  • https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं।
  • इश्यू का टाइप ‘इक्विटी’ चुनें।
  • ड्रॉपडाउन मेन्यू से Acevector IPO चुनें।
  • एप्लीकेशन नंबर या PAN डिटेल एंटर करें।
  • ‘कैप्चा’ डालें।
  • ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।

MUFG Intime की वेबसाइट से

  • https://in.mpms.mufg.com/Initial_Offer/public-issues.html पर जाएं।
  • कंपनी नेम में Acevector सिलेक्ट करें।
  • PAN या एप्लीकेशन नंबर या DP/क्लाइंट ID या अकाउंट नंबर/IFSC में से एक को सिलेक्ट कर डिटेल डालें।
  • Submit पर क्लिक करें।

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Anmol Industries IPO: बिस्किट कंपनी ने फिर बनाया लिस्ट होने का मन, ₹1800 करोड़ के इश्यू का ड्राफ्ट किया जमा

बिस्किट बनाने वाली कंपनी अनमोल इंडस्ट्रीज ने एक बार फिर IPO के लिए कैपिटल मार्केट रेगुलेटर सेबी के पास ड्राफ्ट जमा किया है। इस बार कंपनी 1800 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है। इससे पहले कंपनी ने साल 2018 में लिस्ट होने का प्लान बनाया था और ड्राफ्ट जमा किया था। उस वक्त IPO का साइज 750 करोड़ रुपये रखा था। कंपनी को सेबी से IPO के​ लिए मंजूरी भी मिल गई थी। लेकिन फिर कंपनी ने प्लान को आगे नहीं बढ़ाया।

नए ड्राफ्ट पेपर्स के मुताबिक, अनमोल इंडस्ट्रीज का IPO पूरी तरह से ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। कोई नया शेयर जारी नहीं होगा। लिहाजा कंपनी को कोई रकम नहीं मिलेगा। शेयर बिक्री से मिला पैसा शेयर बेचने वाले के पास जाएगा। OFS में बैजनाथ चौधरी एंड फैमिली ट्रस्ट शेयरों को बिक्री के लिए रखेगी। यह ट्रस्ट कंपनी में सबसे बड़ी इनवेस्टर है। इसके पास लगभग 84 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

एक्सपोर्ट भी करती है Anmol Industries

रॉयटर्स के मुताबिक, कोलकाता की अनमोल इंडस्ट्रीज की शुरुआत 1994 में हुई थी। इसके प्रोडक्ट्स में बिस्किट, कुकीज, केक, रस्क, वेफर, क्रीम रोल शामिल हैं। कंपनी 70 ब्रांड्स के जरिए बिक्री करती है। यह 31 देशों में एक्सपोर्ट भी करती है। कंपनी का दावा है कि यह देश का चौथा सबसे बड़ा बिस्किट ब्रांड है। वहीं केक के मामले में छठा सबसे बड़ा ब्रांड है। अनमोल के लिस्टेड कॉम्पिटीटर्स में ब्रिटानिया, ITC, मिसेज बेक्टर्स फूड स्पेशिएलिटीज जैसे नाम शामिल हैं।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अनमोल इंडस्ट्रीज का शुद्ध मुनाफा 5 गुना बढ़कर 1.91 अरब रुपये हो गया। रेवेन्यू 28 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ लगभग 21 अरब रुपये रहा। कंपनी के IPO को इंटेंसिव फिस्कल सर्विसेज, ICICI सिक्योरिटीज और IIFL कैपिटल सर्विसेज मैनेज कर रहे हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Orient Cables IPO का GMP 25%, क्या दांव लगाने से होगी मोटी कमाई?

ओरिएंट केबल्स के आईपीओ को शानदार रिस्पॉन्स मिला है। 25 सितंबर को पहले दिन ही 1 बजे तक इश्यू 87 फीसदी सब्सक्राइब हो चुका था। यह इश्यू 552 करोड़ रुपये का है। कंपनी ने 258-272 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। इस इश्यू में 29 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है।

24 सितंबर को जीएमपी 41 फीसदी था

इनवेस्टरगेन के मुताबिक, इस शेयर पर ग्रे मार्केट प्रीमियम 25 फीसदी चल रहा है। 24 सितंबर को जीएमपी 41 फीसदी से ज्यादा था। अगर शेयर की लिस्टिंग जीएमपी के मुताबिक होती है तो इनवेस्टर्स को अच्छा मुनाफा हो सकता है। हालांकि, जीएमपी से शेयरों की लिस्टिंग का सिर्फ एक संकेत मिलता है। यह शेयर की लिस्टिंग प्राइस की गांरटी नहीं है।

आईपीओ में ऑफर फॉर सेल भी शामिल 

ओरिएंट केबल्स गुरुग्राम की कंपनी है। कंपनी के आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (OFS) भी शामिल है। इसका मतलब है कि आईपीओ में नए शेयर एलॉट होने के साथ ही प्रमोटर फैमिली अपने कुछ शेयर बेचेगी। इस आईपीओ में कम से कम शेयरों के एक लाट के लिए बोली लगानी होगी। एक लॉट 55 शेयरों का है। इसका मतलब है कि प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर बोली लगाने के लिए कम से कम 14,960 रुपये की जरूरत पड़ेगी।

एंकर इनवेस्टर्स से 165 करोड़ जुटा चुकी है कंपनी

कंपनी ने आईपीओ खुलने से पहले एंकर इनवेस्टर्स से 165.6 करोड़ रुपये जुटाए हैं। उसने 272 रुपये प्रति शेयर के भाव पर कुल 60.88 लाख शेयर एलॉट किए हैं। एंकर इनवेस्टर्स में कई बड़े म्यूचुअल फंड हाउस शामिल हैं।

कंपनी आईपीओ के पैसे से नई मशीन खरीदेगी

कंपनी इश्यू से जुटाए गए पैसे में से 91.5 करोड़ रुपये का इस्तेमाल नई मशीन और इक्विपमेंट खरीदने के लिए करेगी। साथ ही अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में कुछ सिविल वर्क कराएगी। वह 155.5 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। बाकी पैसे का इस्तेमाल सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए होगा।

कंपनी नेटवर्किंग सहित कई तरह के केबल्स बनाती है

ओरिएंट केबल्स नेटवर्किंग केबल्स और पैसिव नेटवर्किंग इक्विपमेंट बनाती है। साथ ही स्पेशियलिटी और ऑप्टिकल फाइबर केबल्स बनाती है। इसके ग्राहकों में ब्रॉडबैंड, टेलीकॉम, डेटा सेंटर्स, रिन्यूएबल एनर्जी और स्मार्ट बिल्डिंग ऑटोमेशन सेंगमेंट शामिल हैं। यह आईपीओ ऐसे वक्त आया है, जब प्राइमरी मार्केट में काफी हलचल है। एनएसई का आईपीओ 24 सितंबर को लिस्ट हुआ। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ था। सबसे बड़ा आईपीओ ह्युंडई का था।

Hero Motors Share Price: कमजोर लिस्टिंग के बाद रॉकेट बने शेयर, खरीदें, बेचें या होल्ड करें?

 Hero Motors Share Price: हीरो मोटर्स के शेयर 23 सितंबर को कमजोरी के साथ लिस्ट हुए। उसके बाद शेयर में जबर्दस्त तेजी दिखी। 11:45 बजे शेयर का प्राइस एनएसई पर 17.14 फीसदी चढ़कर 98.40 रुपये पर चल रहा था। कंपनी ने आईपीओ में इनवेस्टर्स को प्रति शेयर 84 रुपये की कीमत पर शेयर इश्यू किए थे। लेकिन, शेयर की लिस्टिंग 2.38 फीसदी डिस्काउंट के साथ 82 रुपये पर हुई।

लिस्टिंग जीएमपी के संकेतों के मुताबिक

23 सितंबर को Hero Motors के शेयर की लिस्टिंग जीएमपी के संकेतों के मुताबिक रही। जीएमपी से इस शेयर के इश्यू प्राइस से कम कीमत पर लिस्टिंग के संकेत मिल रहे थे। कंपनी के आईपीओ में इनवेस्टर्स ने अच्छी दिलचस्पी दिखाई थी। कंपनी ने 79-84 रुपये प्राइस बैंड तय किया था। 1000 करोड़ रुपये के आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (OFS) भी शामिल था।

शेयर में रॉकेट जैसी तेजी से इनवेस्टर्स दुविधा में

लिस्टिंग के बाद हीरो मोटर्स के शेयरों में आई तेजी ने इनवेस्टर्स को दुविधा में डाल दिया है। सवाल है कि क्या नए निवेशकों को यह शेयर सेकेंडरी मार्केट से खरीदना चाहिए, जिन निवेशकों को शेयर एलॉट हुए हैं, उन्हें इसे रखना चाहिए या प्रॉफिट बुक कर लेना चाहिए?

कंपनी का पावरट्रेन पोर्टफोलियो काफी डायवर्सिफायड

कांतिलाल छगनलाल सिक्योरिटीज के महेश एम ओझा का कहना है कि हीरो मोटर्स का पावरट्रेन पोर्टफोलियो काफी डायवर्सिफायड है। कंपनी टेक्नोलॉजी के मामले में भी स्ट्रॉन्ग है। इस वजह से ऑटोमोटिव सेक्टर में इसकी स्थिति काफी मजबूत है। उन्होंने कहा कि इन-हाउस इंजीनियरिंग कपैसिटी अच्छी है। दुनिया की कई बड़ी कंपनियां इसकी क्लाइंट्स हैं।

ज्यादा वैल्यूएशन चिंता की बड़ी वजह 

उन्होंने कहा कि कंपनी की मौजूदगी सीवीटी हब, ईवी ट्रांसमिशंस, इलेक्ट्रिक मोटर्स जैसे सेगमेंट्स में है। इस वजह से कंपनी की स्थिति काफी स्ट्रॉन्ग है। खासकर प्रीमियम आईसीई और ई-बाइक पावरट्रेन मार्केट्स में यह काफी मजबूत स्थिति में है। लेकिन, वैल्यूएशन चिंता की वजह है। आईपीओ से पहले शेयर की वैल्यूएशन FY26 की अर्निंग्स की करीब 74 गुना थी। इस सेगमेंट की दूसरी कंपनियों का औसत पीई करीब 50.2 गुना है। इससे कंपनी के शेयर में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं दिखती।

इनवेस्टर्स शेयर में प्रॉफिट बुक सकते हैं

ओझा का मानना है कि क्लाइंट्स के मामले में कंसंट्रेशन रिस्क दिख रहा है। कंपनी की कुल रेवेन्यू में टॉप 10 क्लाइंट्स की करीब 73-78 फीसदी हिस्सेदारी है। उन्होंने कहा कि जिन इनवेस्टर्स को आईपीओ में शेयर इश्यू हुए हैं, वे प्रॉफिट बुक कर सकते हैं। नए निवेशकों को इस शेयर में निवेश करने के लिए प्राइस कसे मामले में सही एंट्री लेवल का इंतजार करना चाहिए।

नए निवेशकों को सही एंट्री प्वाइंट का इंतजार करना चाहिए

स्वस्तिका इनवेस्टमार्ट में हेड ऑफ वेल्थ शिवानी नयाती का भी मानना है कि शेयर की वैल्यूएशन अर्निंग्स की करीब 69-74 गुनी है, जो इस सेक्टर की दूसरी कंपनियों की वैल्यूएशन के मुकाबले काफी ज्यादा है। हालांकि, RoNW बढ़कर 8.53 फीसदी हो गया है लेकिन EBITDA मार्जिन करीब 10.2 फीसदी है, जो प्रतिद्वंद्वी कंपनियों से कम है।

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शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक हरे निशान में 

उन्होंने कहा कि नए इनवेस्टर्स इस शेयर में निवेश के लिए बेहतर प्राइस प्वाइंट का इंतजार कर सकते हैं। जिन निवेशकों को आईपीओ में Hero Motors के शेयर एलॉट हुए हैं, वे 75-77 रुपये पर स्टॉपलॉस के साथ इस शेयर को होल्ड यानी अपने पास बनाए रख सकते हैं। 23 सितंबर को शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में रिकवरी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में थे।

Market Insight : कच्चा तेल $100 के नीचे आने पर भी बाजार नहीं चला तो बढ़ेगी दिक्कत, इन चुनिंदा शेयरों में दिख रहे खरीदारी के मौके

Market Insight : भारतीय बाजार आज बढ़त के साथ कारोबार कर रहें है। 11 बजे के आसपास सेंसेक्स 279.35 अंक या 0.37 प्रतिशत बढ़कर 74,808.43 पर और निफ्टी 87.45 अंक या 0.37 प्रतिशत बढ़कर 23,416.45 पर दिख रहा था। लगभग 2391 शेयरों में बढ़त हुई, 1256 शेयरों में गिरावट आई और 179 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ था। ऐसे में बाजार पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि 23,900 तक ये रैली काउंटर ट्रेंड रैली रहेगी। आज की क्लोजिंग पक्का करेगी कि क्या वापस गिरावट शुरू हुई है। कल निफ्टी ने हायर हाई बनाया लेकिन फिर सोमवार का निचला स्तर भी तोड़ा। टेक्निकल तौर पर इसे आउटसाइड डे कहते हैं। ऐसे में आज अगर लोअर हाई और लोअर लो बना तो बड़ा निगेटिव होगा और अगर 23,116 टूटा तो फिर गिरावट वाला बड़ा ट्रेंड फिर शुरू हो सकता है। तेजी के लिए अब 23,500 के ऊपर बंद होना जरूरी है।

आज का दांव

बंधन बैंक और आयनॉक्स विंड F&O बैन से बाहर हैं। केयन्स टेक F&O बैन में शामिल हैं। कल चांदी में अच्छी तेजी रही, हिंद जिंक फोकस में रह सकता है। कॉपर में रात में 2% की तेजी आई। इसकी कीमतें ऑल टाइम हाई पर हैं। 2026 में कॉपर 20% चढ़ा है। हिंदुस्तान कॉपर अच्छा कर सकता है। OFS के बाद की सप्लाई भी अब खत्म होती दिख रही है। कच्चा तेल $100 डॉलर के नीचे कायम है। इससे पिडिलाइट, एशियन पेंट्स और इंडिगो में तेजी आ सकती है।

मैक्वायरी ने Clean Max पर Outperform रेटिंग के साथ कवरेज की शुरुआत की है और टारगेट 1700 रुपए सेट किया है। क्षमता के हिसाब से CleanMax सबसे बड़ा Pure-Play C&I रिन्यूएबल प्लेटफॉर्म है। उधर जेफरीज ने पतंजलि फूड्स में खरीदारी की सलाह देते हुए 560 रुपए का टारगेट दिया है। मैनेजमेंट ने छोटी अवधि में ग्रामीण मांग कम रहने की बात कही है। मजबूत शहरी मांग के दम पर त्योहारी सीजन में रिकवरी की उम्मीद है।

बाजार: आखिर क्यों नहीं टिकी रैली?

कल बाजार के पास चलने के लिए सब कुछ था। लेकिन उसके बाद भी रैली का फेल होना काफी निगेटिव है। हमारा बाजार हर टाइम फ्रेम में अंडरपरफॉर्म कर रहा है। कल की FIIs की बिकवाली डराने वाली है। कल कैश में 15 दिनों की सबसे बड़ी बिकवाली (3810 करोड़) देखने को मिली। कल कैश और फ्यूचर्स मिलाकर 5,373 करोड़ की बड़ी बिकवाली हुई। कल FIIs ने इंडेक्स में करीब 16,000 नेट शॉर्ट जोड़े और नेट शॉर्ट अब जनवरी 2025 के बाद के सबसे ऊंचे स्तर पर हैं। कल IT कमजोर था लेकिन बाजार की कमर बैंक निफ्टी ने तोड़ी। बैंक निफ्टी ने ठीक रिवर्सल जोन से रिजेक्शन दिया। कल एक्सपायरी थी तो संदेह का लाभ दिया जा सकता है। लेकिन आज कोई एक्सपायरी फैक्टर भी नहीं है। अगर कच्चा तेल $100 के नीचे आने पर भी बाजार नहीं चला तो दिक्कत है। बस एक अच्छी बात है कि चुनिंदा शेयरों में मूव अच्छे मिल रहे हैं। कल भी मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में अच्छे मौके मिले।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Abakkus AMC IPO: सुनील सिंघानिया की कंपनी आईपीओ लाने को तैयार, OFS में 1.5 करोड़ शेयर बिकेंगे

Abakkus AMC IPO: दिग्गज निवेशक सुनील सिंघानिया की अगुवाई वाली Abakkus Asset Manager Limited ने IPO की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी ने IPO के लिए SEBI के पास ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस यानी DRHP दाखिल किया है।

कंपनी का IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा। इसमें प्रमोटर Abakkus Expert Professional करीब 1.5 करोड़ शेयर बेचेंगे। यानी इस इश्यू से मिलने वाली रकम कंपनी के पास नहीं जाएगी। शेयर बेचने वाले प्रमोटर को इसका फायदा मिलेगा।

IPO के लिए Axis Capital, ICICI Securities, IIFL Capital और JM Financial को लीड मैनेजर बनाया गया है।

FY26 में ₹796 करोड़ रहा रेवेन्यू

वित्त वर्ष 2025-26 में Abakkus Asset Manager का रेवेन्यू ₹796 करोड़ रहा। इस दौरान कंपनी का PAT यानी नेट प्रॉफिट बढ़कर ₹327 करोड़ पहुंच गया।

कंपनी का कारोबार मुख्य रूप से इक्विटी इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी का है। Abakkus चार प्रमुख वर्टिकल में काम करती है। कंपनी का कारोबार चार प्रमुख सेगमेंट में फैला है। इनमें अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट, ऑफशोर इन्वेस्टमेंट, प्राइवेट इक्विटी और म्यूचुअल फंड शामिल हैं।

PMS में ₹18,538 करोड़ का AUM

DRHP में दी गई ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक Abakkus भारत के डिस्क्रिशनरी PMS सेगमेंट में AUM के लिहाज से चौथे नंबर पर थी। कंपनी का AUM ₹18,538 करोड़ था। इस सेगमेंट में उसकी बाजार हिस्सेदारी 5.3% थी।

कंपनी ने बताया कि ₹12,500 करोड़ से ज्यादा AUM वाले टॉप सात ऑपरेशनल प्रतिद्वंद्वी कंपनियों में वह सबसे तेजी से बढ़ने वाली कंपनी थी। डिस्क्रिशनरी PMS का QAAUM छह साल में बढ़कर करीब ₹20,000 करोड़ हो गया।

दो इक्विटी स्ट्रैटेजी में ₹5,000 करोड़ से ज्यादा

Abakkus के पास दो डिस्क्रिशनरी इक्विटी स्ट्रैटेजी हैं। दोनों में QAAUM ₹5,000 करोड़ से ज्यादा है।

ICRA की रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक डिस्क्रिशनरी PMS प्रोवाइडर्स के बीच Abakkus का क्लाइंट बेस देश में दूसरा सबसे बड़ा था।

म्यूचुअल फंड कारोबार में भी तेज ग्रोथ

Abakkus ने म्यूचुअल फंड कारोबार में भी तेजी से विस्तार किया है। कंपनी के मुताबिक, 1 अप्रैल 2002 के बाद शुरू हुए AMCs में वह इक्विटी कैटेगरी की म्यूचुअल फंड स्कीम्स में ₹10,000 करोड़ AUM तक पहुंचने वाली सबसे तेज कंपनियों में शामिल है।

कंपनी ने यह आंकड़ा म्यूचुअल फंड कारोबार शुरू करने के सिर्फ आठ महीने में हासिल किया।

2018 में हुई थी कंपनी की शुरुआत

Abakkus की शुरुआत 2018 में सुनील बनवारीलाल सिंघानिया ने की थी। उनके पास एसेट मैनेजमेंट और इक्विटी निवेश का तीन दशक से ज्यादा का अनुभव है।

सिंघानिया 2003 से 2017 तक Nippon Life India Asset Management में Investment – Equity फंक्शन के इक्विटीज के ग्लोबल हेड रह चुके हैं।

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NSE IPO: 5.67 गुना सब्सक्राइब, हर 4 में से 3 रिटेल इनवेस्टर को शेयर अलॉटमेंट मिल सकता है

NSE IPO: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का ₹22,569 करोड़ का IPO सोमवार, 21 सितंबर को बंद हो गया। आखिरी दिन इश्यू को 5.67 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। निवेशकों ने 8.86 करोड़ शेयरों के मुकाबले 50.28 करोड़ शेयरों के लिए बोली लगाई।

QIB यानी बड़े संस्थागत निवेशकों ने सबसे ज्यादा दिलचस्पी दिखाई। उनका हिस्सा 12.68 गुना सब्सक्राइब हुआ। NII कैटेगरी 6.54 गुना और रिटेल हिस्सा 1.35 गुना सब्सक्राइब हुआ।

रिटेल निवेशकों को कितना मिल सकता है?

रिटेल हिस्सा 1.35 गुना भरा है। इस आधार पर शुरुआती अनुमान करीब 75% का है। अगर आसान भाषा में कहें तो हर चार में से करीब तीन रिटेल आवेदकों को शेयर मिल सकते हैं।

इसे पक्का अलॉटमेंट रेशियो नहीं मानना चाहिए। क्योंकि असल अलॉटमेंट वैध आवेदनों और IPO के नियमों के हिसाब से होगा।

NSE IPO के GMP में भारी गिरावट

NSE IPO का प्राइस बैंड ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर था। एक लॉट में 8 शेयर रखे गए थे। अपर प्राइस बैंड पर एक लॉट के लिए ₹14,280 लगाने पड़े।

ग्रे मार्केट में NSE शेयर का GMP IPO के दौरान काफी नीचे आया है। लेटेस्ट GMP करीब 3% संभावित लिस्टिंग गेन का संकेत दे रहा है। शुरुआत में ये 18% के करीब था। GMP अनऑफिशियल होता है। इसे लिस्टिंग प्राइस या मुनाफे की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

एंकर निवेशकों से जुटाए ₹6,746 करोड़

IPO से पहले NSE ने 189 एंकर निवेशकों से ₹6,746.18 करोड़ जुटाए थे। इन्हें ₹1,785 प्रति शेयर के भाव पर शेयर दिए गए। एंकर निवेशकों को 16 सितंबर को 3.78 करोड़ शेयर अलॉट किए गए।

LIC सबसे बड़ा व्यक्तिगत एंकर निवेशक रहा। उसे करीब ₹400.3 करोड़ के शेयर मिले। Norway का Government Pension Fund Global, Monetary Authority of Singapore और Abu Dhabi Investment Authority भी एंकर निवेशकों में शामिल रहे।

NSE को नहीं मिलेगा IPO का पैसा

NSE का पूरा IPO ऑफर फॉर सेल यानी OFS है। इसमें मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेच रहे हैं। इसलिए IPO से मिलने वाला पैसा NSE के पास नहीं जाएगा।

इश्यू से जुड़े खर्च निकालने के बाद रकम शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलेगी। अपर प्राइस बैंड पर NSE की वैल्यू करीब ₹4.42 लाख करोड़ है। IPO में कर्मचारियों के लिए ₹70 करोड़ तक का हिस्सा भी रखा गया था। पात्र कर्मचारियों को अंतिम इश्यू प्राइस पर ₹170 प्रति शेयर की छूट मिली है।

22 सितंबर को अलॉटमेंट, 24 को लिस्टिंग

NSE IPO का अलॉटमेंट 22 सितंबर को फाइनल होने की उम्मीद है। शेयरों की BSE पर लिस्टिंग 24 सितंबर को प्रस्तावित है।

अलॉटमेंट फाइनल होने के बाद निवेशक रजिस्ट्रार और स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट पर अपना स्टेटस चेक कर सकेंगे।

शेयर बाजार में NSE की कितनी हिस्सेदारी?

NSE भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है। जून 2026 को खत्म तीन महीने में कैश मार्केट के टर्नओवर में NSE की हिस्सेदारी 93.05% रही।

इक्विटी फ्यूचर्स में इसकी हिस्सेदारी 99.72% और इक्विटी ऑप्शंस में 68.48% थी। वहीं, एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी फ्यूचर्स और करेंसी ऑप्शंस में कुल प्रीमियम टर्नओवर के आधार पर NSE की हिस्सेदारी 100% रही।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।