Nifty छह महीनों के निचले स्तर पर, एनालिस्ट्स से जानिए आगे बाजार चढ़ेगा या गिरेगा

निफ्टी 50 में 29 सितंबर को भी गिरावट देखने को मिली। इससे सूचकांक गिरकर छह महीने के निचले स्तर पर आ गया। 28 सितंबर को भी बाजार में बड़ी गिरावट आई थी। ब्रेंट क्रूड में उछाल, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का हाई लेवल और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया है। सवाल है कि अगले साल की शुरुआत में निफ्टी का लेवल क्या होगा?

एंटिक स्टॉक ब्रोकिंग का कहना है कि बाजार पर कई वजहों से दबाव दिख रहा है। इनमें क्रूड में उछाल, रुपये में कमजोरी और फॉरेन इनवेस्टर्स की बिकवाली शामिल है। BofA ने पिछले महीने भारतीय बाजारों के लिए 8 बड़े रिस्क बताए थे। इनमें क्रूड की ऊंची कीमतें, मानसून की कमजोर बारिश, रुपये में कमजोरी और आईपीओ की ज्यादा संख्या शामिल थी।

जेफरीज के क्रिस वुड ने ऑयल की ऊंची कीमतों को शॉर्ट टर्म के लिए सबसे बड़ा रिस्क बताया है। उनका मानना है कि निफ्टी में ज्यादा तेजी की उम्मीद नहीं है। उनका यह भी कहना है कि आरबीआई के इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाने पर हैरानी होगी। आरबीआई 7 अक्तूबर को मॉनेटरी पॉलिसी पेश करेगा। अनुमान है कि वह रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट्स की वृद्धि कर सकता है।

मॉर्गन स्टेनली ने कहा था कि भारतीय बाजार में शॉर्ट टर्म में कमजोरी दिख सकती है, क्योंकि एआई कंपनियों वाले देशों और भारतीय बाजार के प्रदर्शन के बीच गैप काफी बढ़ गया है। हालांकि, उसने कहा था कि चूंकि भारतीय बाजार कई साल के निचले स्तर पर हैं, जिसका मतलब है कि बाजार पर खराब खबरों का असर पड़ चुका है।

मॉर्गन स्टेनली का कहना है कि आगे कई तिमाहियों तक अच्छी ग्रोथ दिख सकती है। एचएसबीसी की भी भारत को लेकर सोच पॉजिटिव है। BofA का मानना है कि अक्तूबर तक भारतीय बाजारों के लिए रिस्क चरम पर पहुंच जाएगा। उसके बाद नवंबर से बाजार में रिकवरी शुरू होगी। जेपी मॉर्गन ने अक्तूबर के अंत तक सावधानी बरतने की सलाह दी है। उसका मानना है कि साल के अंत से बाजार में तेजी शुरू हो सकती है।

एंबिट एसेट मैनेजमेंट में फंड मैनेजर त्रिलोक अग्रवाल ने कहा कि निफ्टी में एक साल की फॉरवर्ड अर्निंग्स के करीब 19 गुना पर ट्रेडिंग हो रही है। इसका मतलब है कि हालिया करेक्शन के बाद भी भारतीय बाजार की वैल्यूएशन दूसरे उभरते बाजारों के मुकाबले प्रीमियम पर है। उन्होंने कहा कि अमेरिका में हाई बॉन्ड यील्ड को देखते हुए वैल्यूएशन में यह फर्क मायने रखता है।

अग्रवाल का हालांकि मानना है कि भारतीय बाजार में और गिरावट नहीं आएगी। उन्होंने इसकी वजह अर्निंग्स आउटलुक को बताया। उनका मानना है कि FY27 में मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों की अर्निंग्स ग्रोथ 17-20 फीसदी रह सकती है। अर्निंग्स ग्रोथ वैल्यूएशन में आई कमी से भारतीय बाजारों को सपोर्ट मिलेगा।

Orient Cables IPO का GMP 25%, क्या दांव लगाने से होगी मोटी कमाई?

ओरिएंट केबल्स के आईपीओ को शानदार रिस्पॉन्स मिला है। 25 सितंबर को पहले दिन ही 1 बजे तक इश्यू 87 फीसदी सब्सक्राइब हो चुका था। यह इश्यू 552 करोड़ रुपये का है। कंपनी ने 258-272 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। इस इश्यू में 29 सितंबर तक बोली लगाई जा सकती है।

24 सितंबर को जीएमपी 41 फीसदी था

इनवेस्टरगेन के मुताबिक, इस शेयर पर ग्रे मार्केट प्रीमियम 25 फीसदी चल रहा है। 24 सितंबर को जीएमपी 41 फीसदी से ज्यादा था। अगर शेयर की लिस्टिंग जीएमपी के मुताबिक होती है तो इनवेस्टर्स को अच्छा मुनाफा हो सकता है। हालांकि, जीएमपी से शेयरों की लिस्टिंग का सिर्फ एक संकेत मिलता है। यह शेयर की लिस्टिंग प्राइस की गांरटी नहीं है।

आईपीओ में ऑफर फॉर सेल भी शामिल 

ओरिएंट केबल्स गुरुग्राम की कंपनी है। कंपनी के आईपीओ में ऑफर फॉर सेल (OFS) भी शामिल है। इसका मतलब है कि आईपीओ में नए शेयर एलॉट होने के साथ ही प्रमोटर फैमिली अपने कुछ शेयर बेचेगी। इस आईपीओ में कम से कम शेयरों के एक लाट के लिए बोली लगानी होगी। एक लॉट 55 शेयरों का है। इसका मतलब है कि प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर बोली लगाने के लिए कम से कम 14,960 रुपये की जरूरत पड़ेगी।

एंकर इनवेस्टर्स से 165 करोड़ जुटा चुकी है कंपनी

कंपनी ने आईपीओ खुलने से पहले एंकर इनवेस्टर्स से 165.6 करोड़ रुपये जुटाए हैं। उसने 272 रुपये प्रति शेयर के भाव पर कुल 60.88 लाख शेयर एलॉट किए हैं। एंकर इनवेस्टर्स में कई बड़े म्यूचुअल फंड हाउस शामिल हैं।

कंपनी आईपीओ के पैसे से नई मशीन खरीदेगी

कंपनी इश्यू से जुटाए गए पैसे में से 91.5 करोड़ रुपये का इस्तेमाल नई मशीन और इक्विपमेंट खरीदने के लिए करेगी। साथ ही अपने मैन्युफैक्चरिंग प्लांट में कुछ सिविल वर्क कराएगी। वह 155.5 करोड़ रुपये का इस्तेमाल कर्ज चुकाने के लिए करेगी। बाकी पैसे का इस्तेमाल सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए होगा।

कंपनी नेटवर्किंग सहित कई तरह के केबल्स बनाती है

ओरिएंट केबल्स नेटवर्किंग केबल्स और पैसिव नेटवर्किंग इक्विपमेंट बनाती है। साथ ही स्पेशियलिटी और ऑप्टिकल फाइबर केबल्स बनाती है। इसके ग्राहकों में ब्रॉडबैंड, टेलीकॉम, डेटा सेंटर्स, रिन्यूएबल एनर्जी और स्मार्ट बिल्डिंग ऑटोमेशन सेंगमेंट शामिल हैं। यह आईपीओ ऐसे वक्त आया है, जब प्राइमरी मार्केट में काफी हलचल है। एनएसई का आईपीओ 24 सितंबर को लिस्ट हुआ। यह देश का दूसरा सबसे बड़ा आईपीओ था। सबसे बड़ा आईपीओ ह्युंडई का था।

NSE और हीरो मोटर्स IPO के GMP में बड़ी गिरावट, निवेशकों को किस बात का है डर?

IPO बाजार में इस समय NSE और Hero Motors के इश्यू चर्चा में हैं। दोनों IPO को लेकर ग्रे मार्केट में जबरदस्त उत्साह दिखा। लेकिन फिर इनके GMP यानी Grey Market Premium में तेज गिरावट देखने को मिली। बेशक GMP अंतिम लिस्टिंग प्राइस की गारंटी नहीं होती। मगर इससे निवेशकों के उत्साह और आईपीओ की डिमांड का मोटा अंदाजा मिलता है।

NSE IPO का GMP क्यों गिरा?

इनवेस्टरगेन के मुताबिक, NSE IPO का GMP शुरुआत में ₹310 था, जो 17 सितंबर की घटकर करीब ₹145 रह गया। यानी इसमें लगभग 53% की गिरावट आई। ₹1,785 के अपर प्राइस बैंड के मुकाबले ₹145 का GMP करीब 8% के संभावित प्रीमियम का संकेत देता है।

GMP में गिरावट की कई वजहें हैं। पहली बात की NSE का IPO करीब ₹22,562 करोड़ का है और यह पूरी तरह Offer for Sale (OFS) है। यानी इस इश्यू से मिलने वाला पैसा NSE को नहीं मिलेगा, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपने शेयर बेचेंगे। इतना बड़ा इश्यू होने का मतलब है कि ज्यादातर लोगों को अलॉटमेंट मिलने की संभावना रहती है। इसलिए ग्रे मार्केट में अब ज्यादा उत्साह नहीं दिख रहा।

दूसरी बड़ी चिंता NSE की कमाई को लेकर है। कंपनी की आमदनी में ट्रांजैक्शन चार्ज की बड़ी हिस्सेदारी है और खासकर डेरिवेटिव्स कारोबार में रेगुलेटरी बदलावों का असर पड़ा है। FY26 में NSE का रेवेन्यू और मुनाफा दोनों घटा था। इससे ग्रे मार्केट में वैल्यूएशन को लेकर सतर्कता बढ़ी है।

इसके अलावा, बाजार का मौजूदा माहौल भी पूरी तरह मजबूत नहीं है। अमेरिकी फेड की दरों से जुड़ा रुख, कच्चे तेल की कीमत और हाल की बाजार गिरावट ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता पर असर डाला है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने भी इन फैक्टर्स को भारतीय बाजार के मौजूदा सतर्क माहौल की वजहों में शामिल किया है। ऐसे में NSE की कमाई पर आगे भी असर पड़ सकता है।

Hero Motors IPO का GMP भी फिसला

हीरो ग्रुप की कंपनी Hero Motors IPO का GMP भी शुरुआती उछाल के बाद कमजोर हुआ है। 13 सितंबर को इसका GMP करीब ₹24 था, जो 17 सितंबर को घटकर करीब ₹8 रह गया। यानी चार दिनों में प्रीमियम लगभग 66.7% नीचे आया है। ₹84 के अपर प्राइस बैंड पर ₹13 का GMP करीब 9.5% संभावित प्रीमियम का संकेत देता है।

Hero Motors के मामले में एक अहम बात QIB यानी क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स की कमजोर शुरुआती मांग है। 17 सितंबर की सुबह तक IPO कुल 2.20 गुना सब्सक्राइब हुआ था, लेकिन QIB हिस्सा सिर्फ 0.01 गुना भरा था। इसके मुकाबले रिटेल हिस्सा 3.49 गुना और NII हिस्सा 2.10 गुना सब्सक्राइब हुआ।

यानी IPO को रिटेल और NII निवेशकों से अच्छी मांग मिल रही थी, लेकिन संस्थागत निवेशकों की शुरुआती भागीदारी कम रही। ग्रे मार्केट में इस तरह की डिमांड को लेकर धारणा GMP पर असर डाल सकती है। बाद में सब्सक्रिप्शन बढ़ने पर तस्वीर बदल भी सकती है।

GMP गिरने का मतलब IPO कमजोर होना नहीं

GMP को लेकर सबसे जरूरी बात यह है कि यह अनऑफिशियल मार्केट का संकेतक है। इसमें ट्रेडिंग सीमित होती है और सेंटीमेंट तेजी से बदल सकता है। इसलिए GMP में ₹20-30 की गिरावट का मतलब यह नहीं है कि कंपनी के बिजनेस में उसी अनुपात में बदलाव आया है।

NSE के मामले में GMP में गिरावट के साथ बड़ा इश्यू साइज, डेरिवेटिव्स से जुड़ी रेगुलेटरी चिंताएं और वैल्यूएशन जैसे मुद्दे चर्चा में हैं। वहीं Hero Motors में शुरुआती QIB डिमांड और ग्रे मार्केट सेंटीमेंट महत्वपूर्ण फैक्टर हैं। हालांकि, अंतिम लिस्टिंग प्राइस का पता शेयर बाजार में लिस्टिंग के बाद ही चलेगा।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Upcoming IPO: जुलाई के आखिर तक आएंगे 5 बड़े IPO, कंपनियां जुटाएंगी ₹15000 करोड़

Upcoming IPO: पिछले दो महीनों से रफ्तार पकड़ रहा भारत का IPO बाजार अब और गर्म होने वाला है। अगले हफ्ते SBI Funds Management का IPO खुलने के बाद जुलाई के अंत तक 5 और बड़ी कंपनियां शेयर बाजार में दस्तक दे सकती हैं। सूत्रों के मुताबिक, ये कंपनियां मिलकर करीब ₹15,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में हैं।

कौन-कौन से IPO आएंगे?

जुलाई के अंत तक जिन कंपनियों के IPO आने की उम्मीद है, उनमें शामिल हैं…

  • Caliber Mining & Logistics
  • Milky Mist Dairy Foods
  • Juniper Green Energy
  • Lohia Corp
  • Manipal Health Enterprises

जून और जुलाई में बढ़ी रफ्तार

जून में 7 IPO आए थे, जिनके जरिए कंपनियों ने ₹2,718 करोड़ जुटाए। वहीं जुलाई में अब तक Knack Packaging, Kusumgar और Laser Power & Infra के IPO लॉन्च हो चुके हैं।

अगले हफ्ते SBI Funds Management और Alpine Texworld के IPO भी खुलने वाले हैं।

किस कंपनी का IPO कितना बड़ा होगा?

  • Caliber Mining & Logistics करीब ₹500-600 करोड़ जुटा सकती है। यह देश की शीर्ष 10 कोयला खनन सेवा कंपनियों में शामिल है।
  • Milky Mist Dairy Foods का IPO करीब ₹2,000 करोड़ का हो सकता है। यह तमिलनाडु की प्रमुख डेयरी कंपनी है।
  • Juniper Green Energy करीब ₹1,800 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। पहले इसका IPO ₹3,000 करोड़ का प्रस्तावित था, लेकिन अब इसका आकार घटा दिया गया है।
  • Lohia Corp करीब ₹500 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) लाएगी। कंपनी टेक्निकल टेक्सटाइल मशीनरी बनाने वाली दुनिया की प्रमुख कंपनियों में शामिल है।
  • Manipal Health Enterprises का IPO सबसे बड़ा हो सकता है। कंपनी करीब ₹9,500 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। यह Manipal Hospitals चेन का संचालन करती है।

Zepto भी एंट्री कर सकती है

बेंगलुरु की Tonbo Imaging और मध्य प्रदेश की Symbiotec Pharmalab भी जुलाई के आखिरी या अगस्त के पहले हफ्ते में IPO ला सकती हैं। हालांकि, इनके इश्यू का साइज पहले की योजना से छोटा हो सकता है।

इसके अलावा Zepto भी IPO की कतार में शामिल हो सकती है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि कंपनी पहले के मुकाबले कम वैल्यूएशन पर बाजार में आ सकती है।

IPO बाजार में क्यों लौटी रौनक?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Jio Platforms और NSE के ड्राफ्ट पेपर दाखिल होने के बाद प्राइमरी मार्केट में फिर से उत्साह बढ़ा है। इसके अलावा अमेरिका-ईरान तनाव कम होने, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में बढ़ती खरीदारी से भी IPO बाजार को समर्थन मिल रहा है।

आमतौर पर जुलाई और अगस्त को IPO बाजार के लिए सबसे व्यस्त महीनों में गिना जाता है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में निवेशकों को कई बड़े पब्लिक इश्यू देखने को मिल सकते हैं।

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IPO This Week: इस हफ्ते इन 5 आईपीओ में पैसा लगाने का मौका, जानिए इन इश्यू की हर जरूरी बात

IPO This Week:आईपीओ के लिहाज से यह हफ्ता व्यस्तता वाला है। कुल 5 छोटे-बड़े आईपीओ इस हफ्ते खुल रहे हैं। कुछ खुल गए हैं तो कुछ खुलने वाले हैं। अगर आप इनमें निवेश का प्लान बना रहे हैं तो मनीकंट्रोल आपके लिए इन आईपीओ से जुड़ी हर जरूरी जानकारी पेश कर रहा है।

Advit Jewels Ltd

यह आईपीओ 23 जून को खुल गया है। इसमें 25 जून तक निवेश किया जा सकता है। कंपनी ने शेयर के लिए 130-138 रुपये का प्राइस बैंड किया है। इनवेस्टर्स को कम से कम शेयरों के एक लॉट के लिए अप्लाई करना होगा। एक लॉट 100 शेयरों का है। कंपनी इस इश्यू में 1.2 करोड़ नए शेयर इश्यू करेगी। इस इश्यू में अप्लाई करने के लिए कम से कम 13,800 रुपये की जरूरत पड़ेगी।

2. Waterways Leisure Tourism

यह आईपीओ भी 23 जून को खुल चुका है। इसमें 25 जून तक निवश किया जा सकता है। कंपनी ने शेयर के लिए 769-808 रुपये का प्राइस बैंड तय किया है। एक लॉट 18 शेयरों का है। इसका मतलब है कि प्राइस बैंड के ऊपरी लेवल पर अप्लाई करने के लिए कम से कम 14,544 रुपये की जरूरत पड़ेगी।

3. Aastha Spintex

यह इश्यू 24 जून को खुलने जा रहा है। इसमें 1 जुलाई तक अप्लाई किया जा सकता है। कंपनी ने प्रति शेयर 136 रुपये कीमत तय की है। एक लॉट 110 शेयरों का है। इस इश्यू में अप्लाई करने के लिए कम से कम 14,960 रुपये की जरूरत पड़ेगी। कंपनी इस इश्यू में 1.25 करोड़ शेयर इश्यू करेगी। कंपनी के शेयर 6 जुलाई को स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट होंगे।

4. CSM Technologies

सीएसएम टेक्नोलॉजीज का आईपीओ 24 जून यानी बुधवार को खुल रहा है। कंपनी इस इश्यू के तहत 146 करोड़ रुपये जुटाने जा रही है। वह करीब 1.29 करोड़ शेयर जारी करेगी। आईपीओ से मिले पैसे का इस्तेमाल कर्ज चुकाने, कारोबार के विस्तार और सामान्य कारोबारी जरूरतों के लिए करेगी। कंपनी ने शेयर का प्राइस बैंड 107-113 रुपये तय किया है। इस आईपीओ में 29 जून तक निवेश किया जा सकता है।

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5. Crazy Snacks

यह आईपीओ 25 जून को खुलेगा। इसमें 30 जून तक अप्लाई किया जा सकता है। कंपनी ने प्रति शेयर कीमत 42 रुपये तय की है। एक लॉट 3,000 शेयरों का है। लॉट साइज ज्यादा होने से इस आईपीओ में अप्लाई करने के लिए कम से कम 1,26,000 रुपये की जरूरत पड़ेगी। कंपनी के शेयर 3 जुलाई को स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हो सकते हैं।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।