Market Outlook : लाल निशान में बंद हुए सेंसेक्स- निफ्टी जानिए 22 जून को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : शुक्रवार,19 जून को बेंचमार्क इक्विटी इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी में लगातार पांच दिनों की बढ़त का सिलसिला थम गया। इसकी सबसे बड़ी वजह एक्सेंचर (Accenture) द्वारा अपने रेवेन्यू ग्रोथ आउटलुक में कटौती करने के फैसले के बाद आईटी शेयरों में आई भारी बिकवाली रही। कमजोर ग्लोबल संकेतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की फिर से शुरू हुई बिकवाली और जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों का सेंटीमेंट खराब किया। कारोबारी सत्र के अंत में सेंसेक्स 607 अंक या 0.78% गिरकर 76,802.90 पर और निफ्टी 154.90 अंक या 0.64% गिरकर 24,013.10 पर बंद हुआ।

हालांकि,छोटे-मझोले शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 0.22% और 0.42% की बढ़त देखने को मिली। सेक्टोरल इंडेक्सों पर नजर डालें तो Nifty IT सबसे ज्यादा गिरा और इसमें 3.6% से ज्यादा की गिरावट आई। निफ्टी ऑटो, निफ्टी बैंक और निफ्टी ऑयल एंड गैस भी आज गिरावट के साथ बंद हुए। इसके विपरीत निफ्टी मीडिया, निफ्टी फार्मा, निफ्टी हेल्थकेयर और निफ्टी केमिकल्स बढ़त के साथ ट्रेड करते दिखे।

मार्केट व्यू

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी.के.विजयकुमार ने कहा कि मौजूदा मार्केट स्ट्रक्चर से पता चलता है कि गिरावट पर खरीदारी करना एक असरदार रणनीति हो सकती है। उन्होंने आगे कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट और बेहतर होते मैक्रो-इकोनॉमिक हालात मार्केट की अंदरूनी मजबूती को सहारा दे रहे हैं।

Reliance AGM 2026 : भारत को AI के क्षेत्र में क्रिएटर और ग्लोबल लीडर बनाने पर होना चाहिए फोकस -मुकेश अंबानी

एक्सिस डायरेक्ट में रिसर्च हेड राजेश पालवीय ने कहा कि जब तक निफ्टी 24,000 के अहम लेवल से ऊपर बना हुआ है तब तक मार्केट का ओवरऑल ट्रेंड पॉजिटिव रहेगा। उनके मुताबिक,24,000 का लेवल तत्काल सपोर्ट का काम करेगा,जबकि 24,250-24,400 का जोन एक अहम रेजिस्टेंस एरिया बना रहेगा। 24,400 के ऊपर एक मज़बूत ब्रेकआउट से नई तेजी और शॉर्ट कवरिंग आ सकती है। जिससे और ऊंचे लेवल तक जाने का रास्ता खुल सकता है। दूसरी ओर,अगर यह लगातार 24,050 के नीचे बना रहता है तो 23,950 की तरफ प्रॉफिट बुकिंग हो सकती है और अगला सपोर्ट 23,850 के आसपास होगा। कुल मिलाकर,जब तक इंडेक्स 24,000 से ऊपर है,तब तक गिरावट पर खरीदारी (buy on dips)की रणनीति अपनानी चाहिए,क्योंकि मीडियम-टर्म में तेजी का ट्रेंड बना हुआ है।

बाजार जानकारों का कहना है कि तेजी का दौर (bullish momentum)वापस लाने के लिए निफ्टी का 23,900 के लेवल पर बने रहना जरूरी होगा। बजाज ब्रोकिंग में टेक्निकल रिसर्च के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पवित्रो मुखर्जी ने कहा,”निफ्टी के लिए 23,900-23,800 का लेवल तत्काल सपोर्ट का काम करेगा, क्योंकि यहीं पर 50-दिन का EMA और पिछले सोमवार के बुलिश गैप एरिया का ऊपरी बैंड मिल रहे हैं।

कोटक सिक्योरिटीज में इक्विटी रिसर्च के हेड श्रीकांत चौहान की राय है कि निफ्टी में 24,100 और 24,000 के बीच गिरावट आने पर खरीदारी करें और 23,900 पर स्टॉप लॉस रखें।

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RIL AGM 2026: फाइनल डिविडेंड पर मोहर और Jio-Reliance Retail के IPO पर अपडेट का इंतजार होने वाला है खत्म

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) की 49वीं सालाना आम बैठक आज, 19 जून को हो रही है। शेयरहोल्डर्स समेत पूरे बाजार की इस पर नजर है। मीटिंग खत्म होने के बाद ऐलानों का बेसब्री से इंतजार है। इस मीटिंग में कंपनी की ओर से घोषित फाइनल डिविडेंड पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी भी ली जाने वाली है। ऐलानों की घोषणा शुक्रवार दोपहर 2 बजे से होने वाली है।

RIL वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 6 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने वाली है। इसके लिए 5 जून रिकॉर्ड डेट थी। इस तारीख तक जिन लोगों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में रहे होंगे, वे डिविडेंड के हकदार होंगे।

फाइनल डिविडेंड पर शेयरहोल्डर्स की मंजूरी मिलने के बाद डिविडेंड का पेमेंट 7 दिनों के अंदर शेयरहोल्डर्स को कर दिया जाएगा। वित्त वर्ष 2025 के लिए रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 5.50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दिया था।

Jio और Reliance Retail के IPO को लेकर ऐलान पर खास नजर

इस साल की AGM में सबसे ज्यादा ध्यान Reliance Jio के IPO की टाइमलाइन पर अपडेट पर होगा। रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने पहले ही 2026 की पहली छमाही तक लिस्टिंग का संकेत दिया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन्वेस्टर्स एक पक्का रोडमैप देखना चाहेंगे, क्योंकि IPO पर स्पष्टता Reliance की वैल्यूएशन के लिए एक बड़ा री-रेटिंग ट्रिगर हो सकती है।

इसी तरह Reliance Retail IPO पर भी अपडेट का इंतजार है। रिटेल बिजेनेस, कंपनी की ग्रोथ का एक अहम इंजन बनकर उभरा है। लिस्टिंग की योजनाओं पर कोई भी टिप्पणी एक बड़ा बूस्ट साबित हो सकती है।

HDFC Bank Share Price: दिखी 3% तक की गिरावट, ₹13 के अमाउंट के लिए शेयर कर रहा है एक्स-डिविडेंड ट्रेड

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

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International Yoga Day : 3 लाख करोड़ रुपए की हुई वेलनेस इंडस्ट्री, जानिए योग से जुड़े किन शेयरों से हो सकती है कमाई

International Yoga Day : योग अब सिर्फ सेहत का मंत्र नहीं,बल्कि 3 लाख करोड़ की वेलनेस इंडस्ट्री बन चुका है। लोग अब बीमारी के इलाज से ज्यादा प्रिवेंटिव हेल्थकेयर पर ध्यान दे रहे हैं। यही वजह है कि आयुर्वेद,हेल्थ फूड्स और न्यूट्रास्यूटिकल्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। आखिर कितनी बड़ी है ये इंडस्ट्री और कहां हैं कमाई मौके, आइए जानते हैं।

वेलनेस इंडस्ट्री की हेल्दी हेल्थ पर नजर डाले तो योग और वेलनेस इंडस्ट्री 3 लाख करोड़ रुपए की हो गई है। अगले 5-10 साल तक इसमें 15-20% सालाना ग्रोथ की उम्मीद है। आयुर्वेद और नेचुरल हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स के सेक्टर में कई लिस्टेड कंपनियां काम कर रही है। इनमें डाबर इंडिया (Dabur India), पतंजलि फूड्स (Patanjali Foods), इमामी( Emami), जीना सीखो लाइफ केयर (Jeena Sikho Lifecare) और केआरएम आयुर्वेद (KRM Ayurveda) जैसी कंपनियां शामिल हैं।

न्यूट्रिशन और वेलनेस प्रोडक्ट्स की लिस्टेड कंपनियों के बात करें तो इनमें जायडस वेलनेस (Zydus Wellness), टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (Tata Consumer Products), मैरिको (Marico), नेस्ले इंडिया (Nestle India), आईटीसी (ITC)और हिंदुस्तान यूनीलीवर (Hindustan Unilever) के नाम शुमार हैं।

प्रिवेंटिव हेल्थकेयर

प्रिवेंटिव हेल्थकेयर का लिस्टेड कंपनियों पर नजर डालें तो इसमें पीएंडजी हेल्थकेयर (P&G Health), सनोफी कंज्यूमर हेल्थकेयर (Sanofi Consumer Healthcare), अमृतांजन हेल्थ केयर ( Amrutanjan Health Care) और हेक्सागॉन न्युट्रिशन (Hexagon Nutrition) के नाम शामिल हैं।

योगा डे से योगा डे: पिछले 1 साल के रिटर्न

पिछले योगा डे से इस योगा डे तक जिन कंपनियों की सेहत अच्छी रही उनमें केआरएम आयुर्वेदा ने 40 फीसदी, जीना सीखो ने 28 फीसदी, जाइडस वेलनेस ने 27 फीसदी, मैरिको ने 21 फीसदी, नेस्ले इंडिया ने 19 फीसदी, टाटा कंज्यूमर ने 5 फीसदी और पीएंडजी हेल्थ ने 5 फीसदी रिटर्न दिया है।

योगा डे से योगा डे: खराब रही सेहत

योगा डे से योगा डे तक जिन कंपनियों की सेहत खराब रही है उनमें पतंजलि फूड्स में 23 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। वहीं, इमामी का शेयर इस अवधि में 30 फीसदी टूटा है। आईटीसी में भी 28 फीसदी की गिरावट देखने को मिली है। जबकि, अमृतांजन हेल्थ 22 फीसदी और डाबर 9 फीसदी टूटा है।

 

Accenture Q3 Results: एक्सेंचर के कमजोर नतीजों ने तोड़ी आईटी शेयरों की कमर, अब इस सेक्टर में क्या हो निवेश रणनीति?

इंफोसिस, टीसीएस, एचसीएल टेक में बड़ी गिरावट से Nifty IT Index 5 फीसदी क्रैश, निवेशकों को क्या करना चाहिए?

आईटी शेयरों में 19 जून को बड़ी गिरावट आई। इसकी वजह रेवेन्यू ग्रोथ को लेकर एक्सेंचर का नया अनुमान है। उसने पूरे साल के लिए रेवेन्यू ग्रोथ के अपने अनुमान को घटा दिया है। इससे आईटी सर्विसेज की डिमांड कमजोर रहने का संकेत मिलता है। इसका असर 19 जून को आईटी कंपनियों के शेयरों पर दिखा। टीसीएस, इंफोसिस और एचसीएल टेक जैसी दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट आई।

आईटी शेयरों पर बीते कुछ महीनों में बड़ा दबाव दिखा है। इसका असर म्यूचुअल फंडों की आईटी फोकस वाली स्कीमों पर भी पड़ा है। बीते एक साल में इन स्कीमों का रिटर्न निगेटिव रहा है। हालांकि, लंबी अवधि में प्रदर्शन अभी पॉजिटिव बना हुआ है। फ्रैंकलिन इंडिया टेक्नोलॉजी फंड का 3 सालों में सालाना रिटर्न 12.62 फीसदी रहा है।

एसबीआई टेक्नोलॉजी अपॉर्चुनिटीज फंड ने 5 सालों में सालाना 9.67 फीसदी रिटर्न दिया है। अगर आईटी फोकस वाले म्यूचुअल फंड्स की कैटेगरी की बात की जाए तो बीते तीन सालों में इनका औसत रिटर्न करीब 5.4 फीसदी रहा है। इनमें क्वांट टेक फंड, मोतीलाल ओसवला डिजिटल इंडिया फंड, इनवेस्को इंडिया टेक्नोलॉजी फंड और एडलावाइज टेक्नोलॉजी फंड के अच्छे प्रदर्शन का हाथ है।

हालांकि, बीते छह महीनों में एवरेज रिटर्न करीब 15.4 फीसदी निगेटिव रहा है। इसकी वजह बीते महीनों में टेक्नोलॉजी शेयरों में आई बड़ी गिरावट है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि मीडियम और लॉन्ग टर्म के लिहाज से आईटी म्यूचुअल फंडों में निवेश का बड़ा मौका दिख रहा है।

वेल्थमिल्स सिक्योरिटीज में डायरेक्टर (रिसर्च) क्रांति बाथिनी ने कहा का कि म्यूचुअल फंड की कोई स्कीम कितनी अट्रैक्टिव है, यह इस बात पर निर्भर करता है कि इनवेस्टर कितना रिस्क ले सकता है और वह कितने समय के लिए निवेश करना चाहता है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए आईटी-फोकस वाले म्यूचुअल फंड्स को कंट्रेरियन अपॉर्चुनिटीज माना जा सकता है।

उन्होंने कहा कि आईटी शेयरों की वैल्यूएशंस हिस्टोरिकल एवरेज के करीब आ गई हैं। इससे ये मध्यम और लंबी अवधि के निवेश के लिहाज से अट्रैक्टिव हो गए है। उन्होंने कहा, “हालांकि, साइक्लिकल नेचर को देखते हुए निवेश एकमुश्त की जगह धीरे-धीरे सिस्टमैटिक ऐलोकेशन के जरिए होना चाहिए।”

इक्विरियल सिक्योरिटीज में डायरेक्टर (रिसर्च एनालिस्ट) संदीप शाह ने कहा कि आईटी शेयरों में बड़े करेक्शन के बावजूद ऐसे शेयरों में निवेश किया जा सकता है, जिनकी ग्रोथ विजिबिलिटी अच्छी है। लार्जकैप आईटी शेयरों में इंफोसिस और टेक महिंद्रा का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। मिडकैप शेयरों में Mphasis, eClerx और KPIT Technologies के शेयर अपेक्षाकृत बेहतर दिखते हैं।

सीएम वी.डी. सतीशन ने पेश किया केरल बजट 2026

सीएम वी.डी. सतीशन ने पेश किया केरल बजट 2026

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने शुक्रवार को राज्य का अपना पहला बजट पेश किया, जो उनके ढाई दशक से अधिक लंबे विधायी करियर में एक अहम पड़ाव है। 

वित्त विभाग का कामकाज भी संभाल रहे सीएम सतीशन ने विधानसभा में 2026-27 के लिए संशोधित बजट पेश किया। इसके साथ ही सतीशन उन चुनिंदा मुख्यमंत्रियों की सूची में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान बजट पेश किया है। उनसे पहले केरल में केवल आर. शंकर और ओमन चांडी ने ही मुख्यमंत्री के तौर पर बजट पेश किया था।

केरल की वित्तीय स्थिति पर ‘श्वेत पत्र’ के आंकड़ों का हवाला देते हुए अपना भाषण शुरू करते हुए सतीशन ने कहा कि स्पष्ट जनादेश के साथ सत्ता में आई सरकार ‘नए दौर का केरल’ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह बजट ‘सुशासन और संवेदना’ की थीम पर आधारित है, जिसमें बुनियादी ढांचे के विकास और कल्याणकारी उपायों पर समान रूप से जोर दिया गया है।

मुख्यमंत्री सतीशन ने चेतावनी दी कि केरल को गंभीर आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। दूसरे राज्यों की तुलना में केरल का अपना राजस्व कम था, जबकि सरकार पर केआईआईबीएफ प्रोजेक्ट्स के लिए संसाधन जुटाने की भी जिम्मेदारी थी। उन्होंने कहा कि केआईआईबीएफ ने वित्तीय असंतुलन पैदा किया है और इसके कामकाज की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाने की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि सरकार को भविष्य में बड़ी वित्तीय देनदारियों का सामना करना पड़ेगा, जिसमें वेतन संशोधन का असर भी शामिल है।

सतीशन ने बताया कि पिछले बजट में केंद्र के हिस्से का गलत अनुमान लगाया गया था और राज्य को 20,500 करोड़ रुपये की कमी का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि 35,000 करोड़ रुपये की सालाना योजना राशि में भी उसी अनुपात में कटौती की जाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्थिक तंगी के बावजूद सरकार कल्याणकारी योजनाएं जारी रखेगी। उन्होंने केएसआरटीसी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में बढ़ोतरी का जिक्र किया।

सरकार ने यह भी संकेत दिया कि कल्याणकारी पेंशन को 2,000 रुपये से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने का चुनावी वादा चरणों में पूरा किया जाएगा।

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निवेश को बढ़ावा देने के लिए, बजट में 10,000 एमएसएमई स्थापित करने के लिए 100 करोड़ रुपये की सहायता की घोषणा की गई। निवेशकों को आने वाली बाधाओं, जैसे जमीन अधिग्रहण और मंजूरी में देरी को दूर करने के लिए एक ‘इन्वेस्ट केरल सेल’ बनाया जाएगा। कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास एक ग्लोबल कन्वेंशन सेंटर बनाया जाएगा।

एयरपोर्ट के विकास के लिए 200 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिसमें राज्य के चार एयरपोर्ट के विकास को एक साथ जोड़ने की योजना है।

बजट में ‘मिशन समुद्र’ की भी घोषणा की गई, जो एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। इसका मकसद समुद्र तट, बंदरगाहों और जलमार्गों को जोड़कर केरल की समुद्री अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।

इस प्रोजेक्ट के लिए 400 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिसका मकसद सड़क, समुद्री और आंतरिक जलमार्ग नेटवर्क को आपस में जोड़ना है।

सतीशन ने कहा कि सरकार का मकसद केरल को ‘पोर्ट सिटी’ में बदलना और विझिनजम में जहाज निर्माण केंद्र स्थापित करना है। कोल्लम, बेपोर और अझिक्कल बंदरगाहों के विकास और केरल समुद्री नीति बनाने की भी घोषणा की गई। समुद्री संग्रहालय के लिए 50 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।

बजट में रोजगार और कौशल के इस्तेमाल के मौके बनाकर राज्य में ही युवा टैलेंट को बनाए रखने पर भी जोर दिया गया।

उन्होंने ओमन चांडी के नाम पर एक व्यापक स्वास्थ्य योजना की भी घोषणा की, जिसके तहत सभी परिवारों को 25 लाख रुपये का हेल्थ कवर मिलेगा।

एक इंटरनेशनल फुटबॉल स्टेडियम की भी घोषणा की गई है। साथ ही, ‘केरल स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग एंड डिजाइन’ की भी शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि केरल के प्रवासी लोग राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ रहे हैं, लेकिन अब सिर्फ रेमिटेंस (विदेश से भेजी जाने वाली कमाई) पर आधारित अर्थव्यवस्था से काम नहीं चलेगा।

उन्होंने आगे कहा अब हम अपने राज्य को इन्वेस्टमेंट-बेस्ड इकॉनमी (निवेश पर आधारित अर्थव्यवस्था) में बदलने के लिए उनका समर्थन चाहते हैं।

केरल की सत्ता में आई कांग्रेस सरकार का पहला बजट जिसे वित्तीय दबाव के बीच सीएम सतीशन द्वारा पेश किया गया है। बजट कल्याणकारी वादों और निवेश आधारित विकास के बीच संतुलन बनाने और केरल के लिए एक नया आर्थिक रोडमैप तैयार करने की कोशिश करता है।

Pic Credit : ANI

बारिश की कमी चीनी प्रोडक्शन पर डाल सकती है असर, लेकिन यह एक कारण सेक्टर पर आगे बनाए रखेगा फोकस

एलारा सिक्योरिटीज के वाइस प्रेसिडेंट-इंस्टीट्यूशनल इक्विटी, प्रशांत बियानी के अनुसार, अगर बारिश को मौजूदा हालात ऐसे ही बने रहे तो जून में देरी और कम बारिश भारत के शुगर सेक्टर पर भारी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि कमजोर मॉनसून और एल नीनो की स्थिति वाले वर्षों में से महाराष्ट्र और कर्नाटक सबसे कमजोर राज्य रहा है, क्योंकि दोनों क्षेत्र गन्ने की खेती के लिए बारिश पर बहुत अधिक निर्भर हैं। हालांकि उत्तर प्रदेश अपने नहर सिंचाई नेटवर्क के कारण तुलनात्मक रूप से बेहतर स्थिति में है, हालांकि अगर बारिश सामान्य से कम रहती है तो इसे भी कुछ असर का सामना करना पड़ सकता है।

गन्ने को मॉनसून के खास महीनों में पर्याप्त पानी की उपलब्धता की आवश्यकता होती है। “महाराष्ट्र और कर्नाटक के लिए, बारिश अच्छी होनी चाहिए।  इसलिए जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर के सभी चार महीने महत्वपूर्ण होंगे।”

स्काईमेट वेदर सर्विसेज के अनुसार, पश्चिमी तट पर शुरुआती प्रगति के बाद 8 जून से दक्षिण-पश्चिम मॉनसून रुका हुआ है, जिससे प्रमुख कृषि क्षेत्रों में बारिश को लेकर चिंता बढ़ गई है। पूरे भारत में बारिश की कमी पहले से ही 32% है, मौसम एजेंसी को उम्मीद है कि अगर हालात में सुधार नहीं हुआ तो यह आने वाले हफ्ते में 40% तक बढ़ सकती है।

महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और झारखंड उन राज्यों में से हैं जिन्हें सबसे ज़्यादा रिस्क है, हालांकि जुलाई और अगस्त के मॉनसून को फिर से शुरू करने में अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है।

इथेनॉल की वजह से यह सेक्टर बना हुआ है आकर्षक 

बारिश और कच्चे तेल की कम कीमतों को लेकर चिंताओं के बावजूद, चीनी इंडस्ट्री के लिए बड़ा आउटलुक अच्छा बना हुआ है। इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा देने के सरकारी उपाय और 100% इथेनॉल इस्तेमाल को सपोर्ट करने वाले फ्लेक्स-फ्यूल इंजन की मंजूरी इस सेक्टर के लिए लंबे समय तक ग्रोथ के मौके देती रहेगी।

बियानी को उम्मीद है कि इस साल कम प्रोडक्शन के कारण चीनी की कीमतें मजबूत रहेंगी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि शेयर की कीमतों पर कुछ दबाव पड़ सकता है क्योंकि कच्चे तेल की बढ़ी हुई कीमतों से जुड़ी हालिया रैली कम हो रही है।

उनके अनुसार चीनी सेक्टर के एक रेंज में रहने की संभावना है क्योंकि सरकारी दखल से तेज़ उछाल या गिरावट सीमित हो जाती है। कम गन्ने के प्रोडक्शन वाले सालों में, अधिकारी चीनी प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए इथेनॉल डायवर्जन पर रोक लगा सकते हैं, जिससे मार्केट को बैलेंस करने में मदद मिलेगी।

इस सेक्टर में, एलारा सिक्योरिटीज बलरामपुर चीनी को अपनी टॉप पिक के तौर पर पसंद करती है।

Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी, होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग धीरे-धीरे हो रही सामान्य

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Varun Beverages का शेयर 23% चढ़ सकता है, सीएलएसए ने दिया 654 रुपये का टारगेट प्राइस

वरुण बेवरेजेज का शेयर 23 फीसदी चढ़ सकता है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने अपनी रिपोर्ट में यह कहा है। कंपनी के शेयर में 19 जून को तेजी दिखी। 12 बजे यह 0.22 फीसदी उछाल के साथ 532.70 रुपये पर चल रहा था।

654 रुपये तक जा सकता है शेयर

CLSA का कहना है कि वरुण बेवरेजेज के शेयरों का प्रदर्शन अच्छा रह सकता है। उसने शेयर के लिए 654 रुपये का प्राइस टारगेट दिया है। ब्रोकरेज फर्म ने कहा है कि वरुण बेवरेजेज ने कैलपिस ब्रांड के लिए जापान के असाही ग्रुप होल्डिंग्स के साथ समझौता किया है। इससे वरुण बेवरेजेज के पोर्टफोलियो को मजबूती मिलेगी।

असाही ग्रुप से समझौते का होगा फायदा

वरुण बेवरेजेज ने 18 जून को बताया था कि उसने कैलपिस ब्रांड की मैन्युफैक्चरिंग, डिस्ट्रिब्यूशन और बिक्री के लिए असाही ग्रुप के साथ समझौता किया है। कैलपिस फर्मेंटेड मिल्क-बेस्ड बेवरेजेज है, जो जापान में 100 साल से ज्यादा समय से मौजूद है। असाही पर प्रोडक्ट डेवलपमेंट की जिम्मेदारी होगी। वह वरुण को टेक्निकल सपोर्ट भी उपलब्ध कराएगी। वरुण पर मार्केटिंग और ब्रांड मैनेजमेंट की जिम्मेदारी होगी।

मार्च तिमाही में अच्छा प्रदर्शन

सीएलएसए ने कहा है कि इस पार्टनरशिप से वरुण बेवरेजेज को अपना मैन्युफैक्चरिंग बेस और डिस्ट्रिब्यूशन नेटवर्क बढ़ाने में मदद मिलेगी। कंपनी अपने कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर का भी विस्तार करेगी। कंपनी का प्रदर्शन मार्च तिमाही में बेहतर रहा है। इस दौरान इसका नेट प्रॉफिट 20 फीसदी बढ़कर 872 करोड़ रुपये रहा। रेवेन्यू में भी 18.3 फीसदी इजाफा हुआ।

24 एनालिस्ट्स ने दी खरीदने की सलाह

वरुण बेवरेजेज को कवर करने वाले 28 एनालिस्ट्स में से 24 ने इसके शेयरों को खरीदने की सलाह दी है। 4 एनालिस्ट्स ने शेयरों को होल्ड करने की सलाह दी है। बीते एक महीने में यह शेयर 8.7 फीसदी चढ़ा है। इधर, 19 जून को शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई। बीते पांच दिनों से जारी तेजी पर ब्रेक लग गया।

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शेयर बाजार में तेजी पर लगा ब्रेक

19 जून को 12 बजे निफ्टी 0.89 फीसदी यानी 216 अंक गिरकर 23,951 पर चल रहा था। सेंसेक्स 1.03 फीसदी यानी 792 अंक की कमजोरी के साथ 76,626 पर चल रहा था। बैंक निफ्टी में भी 0.68 फीसदी की कमजोरी देखने को मिली। इससे पहले अमेरिका-ईरान में डील की खबर से लगातार पांच सत्रों में बाजार में तेजी दिखी थी।

डिसक्लेमर: मनीकंट्रोल पर एक्सपर्ट्स की तरफ से व्यक्त विचार उनके अपने विचार होते हैं। ये वेबसाइट या इसके मैनेजमेंट के विचार नहीं होते। मनीकंट्रोल की यूजर्स को सलाह है कि उन्हें निवेश का फैसला लेने से पहले सर्टिफायड एक्सपर्ट्स की राय लेनी चाहिए।

Accenture Q3 Results: एक्सेंचर के कमजोर नतीजों ने तोड़ी आईटी शेयरों की कमर, अब इस सेक्टर में क्या हो निवेश रणनीति?

Accenture Q3 Results: एक्सेंचर(Accenture) के कमजोर नतीजे और गाइडेंस ने आज आईटी सेक्टर की कमर तोड़ दी है। निफ्टी का आईटी इंडेक्स करीब 6 फीसदी फिसला है। आज निफ्टी और वायदा के सभी टॉप लूजर्स IT शेयर हैं। टेक महिंद्रा,इंफोसिस,TCS और एम्फैसिस 5-8 फीसदी तक लुढ़के हैं। कंपनी के तीसरी तिमाही के नतीजे काफी खराब रहे हैं। इसने अपना आगे का अनुमान भी घटा दिया है।

Accenture Q3 नतीजे (YoY)

तीसरी तिमाही में EPS 3.49 डॉलर से बढ़कर 3.80 डॉलर रहा है। रेवेन्यू 5.6% बढ़कर 18.76 अरब डॉलर रही है। Q3 में आय अनुमान से कम रही है। नई बुकिंग्स 1.9% घटकर 19.32 अरब डॉलर रही हैं। कंसल्टिंग बुकिंग्स 13% बढ़ी हैं। ऑपरेटिंग कैश फ्लो 3.79 अरब डॉलर रहा है। वहीं, मैनेज्ड सर्विसेज बुकिंग्स 15% घटी है। बड़े AI ट्रांसफॉर्मेशन प्रोग्राम्स बढ़ने की उम्मीद है।

Accenture Q4 गाइडेंस

रेवेन्यू 17.75-18.4 अरब डॉलर रहने का अनुमान है। रेवेन्यू ग्रोथ 1 से 5% रहने का अनुमान है। रेवेन्यू गाइडेंस 18.47 अरब डॉलर के अनुमान से कम रहा है। Accenture के FY26 आउटलुक की बात करें तो FY26 के लिए आय ग्रोथ अनुमान घटाकर 3-4% कर दिया गया है, जो पहले 3-5% था। फेडरल असर को छोड़कर रेवेन्यू ग्रोथ 4-5% रहने का अनुमान (पहले 4-6% था)हैं। वहीं, Adj EPS आउटलुक बढ़ाकर 13.78-13.90 डॉलर किया गया है। ऑपरेटिंग और फ्री कैश फ्लो आउटलुक बकररार रखा गया है। वेस्ट एशिया युद्ध से रेवेन्यू पर 10 करोड़ डॉलर और सेल्स पर 40 करोड़ डॉलर का असर पड़ा है।

Accenture के नतीजों का असर

गुरुवार को Accenture का शेयर 18 फीसदी गिरा। यह इतिहास की सबसे बड़ी गिरावट है। Accenture के नतीजों के बाद Cognizant में 10.5 फीसदी, Capgemini में 9 फीसदी, Infosys ADR में 10 फीसदी और Wipro ADR में 4 फीसदी की गिरावट हुई।

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IT शेयरों में अब क्या हो रणनीति?

सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल में कहा है कि निफ्टी IT मार्च में 28,500 तक गिरा था। वहां से 31,800 की रैली हुई जिसमें हमने फंसने से बचाया। कई लोग उस रैली में बुरी तरह फंस गए थे। उसके बाद वहां से फिर वन-वे गिरावट आई और 14 मई का क्लोज 27,360 था। फिर वहां से 31,116 तक की एक बड़ी रैली हुई जिसमें फिर हमने फंसने से बचाया, फिर भी कुछ लोग उस रैली में बुरे फंस गए। इसके बाद 16 जून तक वाली गिरावट में 27,800 की क्लोजिंग मिली। इस बार ये नजरिया लिया गया कि शायद एक डबल बॉटम बना है। अब जब तक 27,500 के ऊपर हैं,बहुत बड़ी गिरावट शायद ना हो। मगर लार्ज कैप IT से CNBC-आवाज ने हमेशा सतर्क ही किया है।

Accenture के नतीजे से एक बात साफ है कि ट्रेडिशनल IT बिजनेस पर दबाव है। अब IT कंपनियों को कुछ बोल्ड कदम उठाने होंगे। जैसे HCLTech ने Sarvam में निवेश किया और Coforge ने कुछ बड़े अधिग्रहण किए। मगर अब आज की गिरावट के बाद शॉर्ट करना थोड़ा रिस्की होगा। आज की क्लोजिंग साफ कर देगी कि IT में डबल बॉटम बना या नहीं।

 

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Share Market Crash: शेयर बाजार इन 5 कारणों से लाल; सेंसेक्स 833 अंक लुढ़का, निफ्टी 23950 से नीचे

भारतीय शेयर बाजार में 19 जून को बिकवाली का जबरदस्त दबाव है। सेंसेक्स की ओपनिंग लाल निशान में हुई और फिर यह पिछली क्लोजिंग से 833 अंक तक फिसलकर 76,576.89 के लो तक गया। इसी तरह निफ्टी 229 अंकों से ज्यादा टूटकर 23,938.75 के लो तक गया। एक दिन पहले गुरुवार को शेयर बाजारों में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी रही थी। सेंसेक्स 254.36 अंक चढ़कर 77,409.98 पर बंद हुआ था। निफ्टी 82.30 अंक चढ़कर 24,168 पर बंद हुआ था। शुक्रवार को बाजार किन कारणों से फिसला, आइए जानते हैं…

IT शेयरों में जबरदस्त बिकवाली

IT शेयरों में बिकवाली का भारी दबाव है। Nifty IT इंडेक्स सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला सेक्टोरल इंडेक्स रहा और इसमें 6 प्रतिशत की गिरावट आई। दरअसल दिग्गज आईटी कंपनी Accenture ने रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस को कम कर दिया है और डिमांड कमजोर रहने का संकेत दिया है। इससे ग्लोबल टेक्नोलॉजी खर्च में रिकवरी की रफ्तार को लेकर चिंता बढ़ गई। भारतीय आईटी शेयर भी दबाव में आ गए। इंफोसिस में 7.6 प्रतिशत, टेक महिंद्रा में 6.3 प्रतिशत और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में 6 प्रतिशत तक की गिरावट आई। HCLTech 5.3 प्रतिशत और Wipro 3.6 प्रतिशत तक टूटा।

FII की बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) कैश मार्केट में फिर से नेट सेलर बन गए हैं। गुरुवार को उन्होंने 1,025.20 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इससे पहले बुधवार को उन्होंने 101.59 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे।

प्रॉफिट बुकिंग

तेल की कीमतें कम होने की वजह से पिछले 5 सेशंस में सेंसेक्स में कुल 3,577.43 अंकों और निफ्टी में 1,006.4 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। इस बढ़त को देखते हुए निवेशकों की ओर से उच्च स्तरों पर मुनाफावसूली का भी गिरावट में हाथ है।

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दूसरे एशियाई बाजारों की कमजोरी

अन्य एशियाई बाजारों में हेंग सेंग और कॉस्पी 1.6-1.6 प्रतिशत गिरे हैं। सेट कंपोजिट और जकार्ता कंपोजिट में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट है। शंघाई कंपोजिट भी नीचे आया है। हालांकि अमेरिकी बाजार हरे निशान में बंद हुए हैं। यूरोपीय बाजारों में भी तेजी है।

India VIX में बढ़ोतरी

शेयर बाजार में ​अस्थिरता को मापने वाला India VIX लगभग 6 प्रतिशत बढ़कर 13.37 हो गया। इस वोलैटिलिटी इंडेक्स में बढ़ोतरी आम तौर पर निवेशकों के बीच बढ़ती अनिश्चितता और निकट भविष्य में मार्केट में तेज उतार-चढ़ाव का संकेत देती है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Silver Price: MCX पर सोने का भाव ₹1.47 लाख के नीचे, अब आगे क्या होनी चाहिए निवेश रणनीति

Gold Silver Price: ग्लोबल बुलियन कीमतों में कमज़ोर ट्रेंड के बाद, शुक्रवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर भारत में सोने और चांदी की कीमतें तेज़ी से गिरकर खुलीं। ज़्यादा ब्याज़ दरों और मज़बूत डॉलर की उम्मीदों से कीमती धातुओं की कीमतों पर असर पड़ा।

MCX पर अगस्त फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट के लिए सोने का रेट ₹2,134, या 1.43% कम होकर ₹1,47,175 प्रति 10 ग्राम पर खुला, जबकि पिछला बंद भाव ₹1,49,309 था। MCX पर जुलाई फ्यूचर कॉन्ट्रैक्ट के लिए चांदी का रेट ₹5,201, या 3.17% कम होकर ₹2,32,371 प्रति किलोग्राम पर खुला, जबकि पिछला बंद भाव ₹2,37,572 था।

सुबह 10.30 बजे, MCX पर सोने का भाव 1.98% की गिरावट के साथ ₹1,46,346 प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। MCX पर चांदी का भाव ₹6,798 या 2.86% गिरकर ₹2,30,037 प्रति किलोग्राम पर आ गया।

इंटरनेशनल मार्केट में, सोने के भाव गिरे और लगातार तीसरे हफ़्ते गिरावट की ओर बढ़ रहे थे, जिसकी वजह मजबूत डॉलर और US फ़ेडरल रिज़र्व के कड़े संकेत थे।

स्पॉट गोल्ड का भाव 0.6% गिरकर $4,184.33 प्रति औंस पर आ गया। इस हफ़्ते अब तक कॉन्ट्रैक्ट 0.9% नीचे था। अगस्त डिलीवरी के लिए US गोल्ड फ़्यूचर्स 1% गिरकर $4,202.10 पर आ गया। स्पॉट सिल्वर 1.5% गिरकर $64.83 प्रति औंस पर आ गया।

डॉलर एक साल के हाई के आस-पास रहा, जिससे डॉलर की कीमत वाला बुलियन दूसरे करेंसी होल्डर्स के लिए ज़्यादा महंगा हो गया।

US फेड ने बुधवार को अपनी इंटरेस्ट रेट में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन US सेंट्रल बैंक के 19 पॉलिसीमेकर्स में से नौ का अब मानना ​​है कि उन्हें इस साल पॉलिसी रेट बढ़ाने की ज़रूरत होगी।

CME फेडवॉच टूल के अनुसार, ट्रेडर्स को अब दिसंबर में US फेड द्वारा रेट बढ़ाने की 87% संभावना दिख रही है, जो फेड के फैसले से पहले 61% थी। जब रेट ज़्यादा होते हैं तो सोने की अपील कम हो जाती है, क्योंकि इस पर इंटरेस्ट नहीं मिलता है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।