Horizon Reclaim India Listing: 46% से ज्यादा बढ़त में लिस्टिंग के बाद 5% टूटा शेयर, लगा लोअर सर्किट

19 जून को SME सेक्टर की कंपनी होराइजन रीक्लेम (इंडिया) की शेयर बाजार में लिस्टिंग शानदार रही। लेकिन तुरंत ही थोड़ी मायूसी भी हाथ लगी। शेयर BSE SME पर 46.6 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 151 रुपये पर लिस्ट हुआ। लेकिन फिर तुरंत ही 5 प्रतिशत लुढ़का और 143.45 रुपये पर लोअर सर्किट लग गया। IPO प्राइस 103 रुपये प्रति शेयर था। कंपनी रीक्लेम्ड रबर बनाती है। यह रबर पुराने टायरों, रबर ट्यूब्स, ट्रेड पीलिंग और इंडस्ट्रियल स्क्रैप जैसे इस्तेमाल किए गए रबर मैटेरियल्स से रीसाइकिल करके बनाया जाता है।

54.27 करोड़ रुपये का IPO 12 जून को खुला था ओर 16 जून को बंद हुआ। इसमें 53 लाख नए शेयर जारी हुए। पब्लिक इश्यू कुल 304.11 गुना भरा था। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 186.72 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 450.74 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 308.30 गुना सब्सक्राइब हुआ था।

Horizon Reclaim (India) का मार्केट कैप लगभग 280 करोड़ रुपये है। शेयर की फेस वैल्यू 10 रुपये है। कंपनी ने IPO की ओपनिंग से पहले एंकर इनवेस्टर्स से 15.46 करोड़ रुपये जुटाए थे। कंपनी के प्रमोटर मोहित बजाज और ​मल्लिका बजाज हैं।

Share Market Crash: 5 दिन बाद लुढ़का बाजार, सेंसेक्स 832 अंक तक टूटा; निवेशकों ने गंवाए ₹1.35 लाख करोड़

कंपनी की वित्तीय सेहत

Horizon Reclaim (India) का वित्त वर्ष 2026 के दौरान शुद्ध मुनाफा 10.50 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 7 करोड़ रुपये था। कुल इनकम 50 करोड़ रुपये दर्ज की गई, जो वित्त वर्ष 2025 में 36.39 करोड़ रुपये थी। EBITDA 16.32 करोड़ रुपये रहा, जो वित्त वर्ष 2025 में 10.46 करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2026 में कंपनी पर 35.76 करोड़ रुपये की उधारी थी।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

INR vs USD: डॉलर के मुकाबले रुपया 94.35 पर खुला, क्रूड में नरमी से मिल रहा सपोर्ट, आगे कैसा रहेगा आउटलुक

INR vs USD:  शुक्रवार, 19 जून को रुपया US डॉलर के मुकाबले 2 पैसे की मामूली गिरावट के साथ 94.35 पर खुला, क्योंकि US फेडरल रिजर्व के सख्त रुख के बाद घरेलू फ्लो और सेंटिमेंट में सुधार से मजबूत डॉलर के असर को कम करने में मदद मिली।

मार्केट पार्टिसिपेंट्स ने बताया कि हाल के सेशंस में कैपिटल फ्लो भारतीय करेंसी के लिए तेजी से सपोर्टिव हो गया है। घरेलू डेट मार्केट में मजबूत इनफ्लो, इक्विटी से विदेशी पोर्टफोलियो आउटफ्लो में कमी और इंपोर्टर्स और एक्सपोर्टर्स की बैलेंस्ड भागीदारी ने फॉरेक्स मार्केट में डिमांड-सप्लाई डायनामिक्स को बेहतर बनाने में मदद की है।

बैंकर्स ने बताया कि इंपोर्टर हेजिंग एक्टिविटी अभी भी ऊंची बनी हुई है, लेकिन मार्केट में एकतरफा डॉलर डिमांड से एक साफ बदलाव देखा गया है, जिसने हाल के हफ्तों में रुपये पर दबाव डाला था। इससे पहले, इंपोर्टर्स की तेज खरीदारी और लगातार विदेशी फंड आउटफ्लो ने लोकल करेंसी पर दबाव बनाए रखा था।

रुपये को विदेशी कैपिटल को आकर्षित करने और डॉलर इनफ्लो को बढ़ाने के मकसद से पॉलिसी उपायों से भी फायदा हुआ है। इसके अलावा, US-ईरान शांति समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट से भारत के इंपोर्ट बिल को लेकर चिंता कम हुई है, जिससे करेंसी को लेकर ओवरऑल सेंटिमेंट बेहतर हुआ है।

मज़बूत इनफ्लो, तेल की कम कीमतों और मार्केट में बढ़ते भरोसे के मेल से US डॉलर में नई मज़बूती के बावजूद रुपया मज़बूत बना हुआ है।

क्रूड में नरमी से मिला रुपये को मजबूत सपोर्ट

मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कच्चा तेल अभी भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये के लिए सबसे बड़ा पॉज़िटिव फ़ैक्टर बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड अभी $75–78 प्रति बैरल की रेंज में ट्रेड कर रहा है, जो इस साल की शुरुआत में ईरान संघर्ष से पहले के लेवल पर वापस आ गया है। हालांकि हाल ही में हुए US-ईरान शांति समझौते ने तुरंत सप्लाई की चिंताओं को कम किया है, लेकिन एनालिस्ट एक बड़े स्ट्रक्चरल ट्रेंड की ओर इशारा करते हैं जो तेल की कीमतों को कम रख सकता है।

इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) को उम्मीद है कि 2027 तक ग्लोबल तेल सप्लाई लगभग 8 मिलियन बैरल प्रति दिन बढ़ जाएगी, जबकि डिमांड ग्रोथ केवल लगभग 2 मिलियन बैरल प्रति दिन रहने का अनुमान है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सप्लाई-डिमांड के इस बढ़ते अंतर से तेल की कीमतों पर एक नैचुरल लिमिट लग सकती है, जिससे भारत जैसी तेल इंपोर्ट करने वाली इकॉनमी को सपोर्ट मिल सकता है।

पॉजिटिव सेंटिमेंट में यह भी शामिल है कि गल्फ के रास्ते तेल शिपमेंट नॉर्मल हो गए हैं, सऊदी अरब और UAE के टैंकर महीनों की रुकावटों के बाद रेगुलर ऑपरेशन फिर से शुरू कर रहे हैं, जिससे सप्लाई में रुकावटों को लेकर चिंता और कम हो गई है।

बेहतर फंडामेंटल्स के बीच रुपये में रिकवरी जारी

करेंसी स्ट्रैटेजिस्ट्स का कहना है कि तेल की कीमतों में गिरावट पर रुपये ने पॉजिटिव रिस्पॉन्स दिया है, लगातार पांच सेशन तक मजबूत हुआ है और 94.30–94.60 प्रति डॉलर की रेंज में आराम से ट्रेड कर रहा है। यह कुछ हफ्ते पहले देखे गए दबाव से एक बड़ी रिकवरी है, जब क्रूड ऑयल की ऊंची कीमतों और विदेशी आउटफ्लो ने करेंसी पर दबाव डाला था।

एक्सपर्ट्स का मानना ​​है कि कैपिटल फ्लो में सुधार, इंपोर्ट से जुड़ी डॉलर की कम डिमांड और जियोपॉलिटिकल रिस्क में कमी, इन सभी ने रुपये की हालिया मजबूती में योगदान दिया है।

फेड के सख्त रवैये से डॉलर को मिला सपोर्ट

हालांकि रुपया मजबूत हुआ है, लेकिन एनालिस्ट चेतावनी दे रहे हैं कि फेडरल रिजर्व के पॉलिसी रुख से US डॉलर को सपोर्ट मिलता रहेगा।

US सेंट्रल बैंक ने इंटरेस्ट रेट को 3.50%-3.75% पर बिना किसी बदलाव के रखा, लेकिन पॉलिसी बनाने वालों ने तुलनात्मक रूप से सख्त रुख बनाए रखा, जिसमें कमिटी के लगभग आधे सदस्य अभी भी इस साल कम से कम एक और रेट बढ़ने की उम्मीद कर रहे हैं।

हाल के US इकोनॉमिक डेटा ने भी डॉलर की मजबूती को और मजबूत किया है। शुरुआती बेरोजगारी के दावे कम होकर 226,000 हो गए, जबकि छंटनी अब भी ऐतिहासिक रूप से कम है। हालांकि लगातार दावे बढ़े हैं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि लेबर मार्केट तेजी से कमजोर होने के बजाय धीरे-धीरे ठंडा होता दिख रहा है।

इस वजह से, डॉलर को जल्द ही सपोर्ट मिल सकता है, हालांकि मार्केट यह देखना जारी रखेंगे कि क्या महंगाई कम होने और एनर्जी की कीमतों में नरमी से फेड आखिरकार ज्यादा न्यूट्रल रुख अपना पाएगा।

एक्सपर्ट्स का यह भी मानना ​​है कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया अपने बाहरी बफ़र्स को मज़बूत करने के लिए अच्छे मार्केट हालात का फ़ायदा उठा रहा है। कच्चे तेल की कम कीमतों और बेहतर विदेशी करेंसी इनफ़्लो से रुपये को सपोर्ट मिलने के साथ, RBI से उम्मीद है कि वह फ़ॉरेक्स रिज़र्व को फिर से भरने के लिए एक्टिव रूप से डॉलर खरीदेगा और धीरे-धीरे अपनी बड़ी फ़ॉरवर्ड डॉलर पोज़िशन को कम करेगा, जिसका अनुमान लगभग $110 बिलियन है।

मार्केट पार्टिसिपेंट्स का अनुमान है कि सेंट्रल बैंक ने पिछले कुछ सेशन में मार्केट से $3-5 बिलियन एब्ज़ॉर्ब किए होंगे। एनालिस्ट्स ज़ोर देते हैं कि इस तरह का दखल करेंसी के ट्रैजेक्टरी को लेकर किसी चिंता के बजाय समझदारी भरे रिज़र्व मैनेजमेंट को दिखाता है।

हालांकि ये खरीदारी रुपये की बढ़त की रफ़्तार को कम कर सकती हैं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इनसे करेंसी की रिकवरी ज़्यादा टिकाऊ होगी और भविष्य के बाहरी झटकों से कम कमज़ोर होगी।

रुपये का आउटलुक

CR फ़ॉरेक्स एडवाइज़र्स के MD, अमित पाबारी के अनुसार, तेल की कीमतें सपोर्टिव बनी हुई हैं, विदेशी इनफ़्लो बेहतर हो रहे हैं, और डॉलर की मज़बूती नए सवालों का सामना कर रही है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Share Market Crash: 5 दिन बाद लुढ़का बाजार, सेंसेक्स 832 अंक तक टूटा; निवेशकों ने गंवाए ₹1.35 लाख करोड़

5 दिन तेजी देखने के बाद शेयर बाजार में शुक्रवार, 19 जून को गिरावट है। सेंसेक्स खुलने के चंद पलों के अंदर ही लगभग 832 अंक तक लुढ़क गया। इस बीच BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 1.35 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा घट गया। सेंसेक्स की ओपनिंग लाल निशान में हुई और फिर यह पिछली क्लोजिंग से लगभग 832 अंक तक फिसलकर 76,578.08 के लो तक गया। इसी तरह निफ्टी 229 अंकों से ज्यादा टूटकर 23,938.75 के लो तक गया।

गुरुवार, 18 जून को शेयर मार्केट बंद होने पर BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 4,77,04,016.033 करोड़ रुपये रहा था। शुक्रवार को मार्केट खुलने के कुछ ही पलों के अंदर यह घटकर 4,75,69,044.59 करोड़ रुपये हो गया। यानि कि 1,34,971.443 करोड़ रुपये की कमी।

कच्चे तेल और रुपये की चाल

पश्चिम एशिया में तनाव थमने से कच्चे तेल की कीमत में गिरावट जारी है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स का भाव और 0.58 प्रतिशत कम होकर 79.39 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है। रुपया 19 जून को शुरुआती कारोबार में 10 पैसे की बढ़त के साथ अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.30 पर है। एक दिन पहले अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी मुद्रा के मुकाबले रुपया 10 पैसे की मजबूती के साथ 94.40 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

एक दिन पहले क्या रहा था हाल

भू-राजनीतिक मोर्चे पर सकारात्मक घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों में जारी नरमी से गुरुवार को शेयर बाजारों में लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में तेजी रही थी। सेंसेक्स 254.36 अंक चढ़कर 77,409.98 पर बंद हुआ था। निफ्टी 82.30 अंक चढ़कर 24,168 पर बंद हुआ था। 5 कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में कुल 3,577.43 अंकों और निफ्टी में 1,006.4 अंकों की बढ़त दर्ज की गई।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Market cues : कुल मिलाकर बाजार का ट्रेंड पॉजिटिव, लेकिन प्रॉफिट बुकिंग की वजह से हल्का कंसोलिडेशन मुमकिन

Trade setup for today : 18 जून को निफ्टी पिछले स्विंग-हाई लेवल और शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज से ऊपर बना रहा। यह 0.34 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। लगातार पांचवें सेशन में भी तेजी का ट्रेंड बना रहा। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और VIX के निचले स्तर पर रहने से मार्केट सेंटीमेंट को सपोर्ट मिला,जबकि मोमेंटम इंडिकेटर्स में मजबूती रही। इन सभी बातों से लगता है कि कुल मिलाकर ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है,हालांकि प्रॉफिट बुकिंग की वजह से कुछ कंसोलिडेशन और रिट्रेसमेंट की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। 24,200 का लेवल तत्काल रेजिस्टेंस का काम कर सकता है, इसके बाद 24,500 एक अहम रेजिस्टेंस हो सकता है। हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स का यह भी कहना है कि अगर प्रॉफ़िट बुकिंग होती है, तो 24,000 का स्तर तत्काल सपोर्ट का काम कर सकता है और इसके बाद 23,800 का स्तर अहम सपोर्ट लेवल हो सकता है।

यहां आपको कुछ ऐसे आंकड़े दे रहे हैं जिनके आधार पर आपको मुनाफे वाले सौदे पकड़ने में आसानी होगी।

Nifty के लिए की सपोर्ट और रजिस्टेंस लेवल

पिवट प्वांइट पर आधारित सपोर्ट : 24,073, 24,037 और 23,979

पिवट प्वांइट पर आधारित रजिस्टेंस : 24,190, 24,225 और 24,284

निफ्टी ने डेली टाइमफ्रेम पर ‘हायर हाई-हायर लो’पैटर्न के साथ एक बुलिश कैंडल बनाई,जो पॉजिटिव ट्रेंड का संकेत है। शॉर्ट और मीडियम-टर्म मूविंग एवरेज ऊपर की ओर बढ़ते रहे,जबकि इंडेक्स 23 फरवरी के बाद पहली बार 100-दिन के EMA के ऊपर बंद हुआ। RSI लगातार दूसरे सेशन में 60 के लेवल से ऊपर बना रहा और बढ़कर 62.43 पर पहुंच गया। MACD ने जीरो लाइन के ऊपर बुलिश क्रॉसओवर बनाए रखा और ग्रीन हिस्टोग्राम बार में और बढ़ोतरी देखी गई। ये सभी इंडिकेटर बुलिश मोमेंटम के मज़बूत होने का संकेत देते हैं और मौजूदा ट्रेंड के जारी रहने का समर्थन करते हैं।

बैंक निफ्टी

पिवट पॉइंट्स के आधार पर रेजिस्टेंस: 58,023, 58,127 और 58,294

पिवट पॉइंट्स के आधार पर सपोर्ट: 57,689, 57,585 और 57,418

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर रेजिस्टेंस: 59,195, 61,678

फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट के आधार पर सपोर्ट: 56,772, 56,012

बैंक निफ्टी ने डेली चार्ट पर एक ग्रीन कैंडल बनाई और फरवरी के हाई से अप्रैल के लो तक के करेक्शन के 61.8 प्रतिशत फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट लेवल के ऊपर बना रहा,जो एक अच्छे ट्रेंड का संकेत है। 10-दिन का EMA दूसरे अमह मूविंग एवरेज (20-, 50-, 100- और 200-दिन के EMA) से काफी ऊपर ट्रेड कर रहा था,जबकि वे सभी ऊपर की ओर बढ़ रहे थे। बैंक निफ्टी ने 9 मार्च के ‘बेयरिश गैप’को भी भर दिया और लगातार दूसरे सेशन में पिछले’स्विंग हाई’से ऊपर बना रहा। RSI बढ़कर 70.97 पर पहुंच गया,जबकि MACD ने लगातार बढ़ते हरे हिस्टोग्राम बार के साथ मज़बूत’बुलिश क्रॉसओवर’बनाए रखा। ये सभी बातें लगातार खरीदारी की दिलचस्पी दिखाती हैं और संकेत देती हैं कि बैंकिंग इंडेक्स से निकट भविष्य में अपनी तेजी को बनाए रखने की संभावना है।

एफआईआई और डीआईआई फंड फ्लो

18 जून को विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) नेट सेलर बने रहे और उन्होंने ₹1,000 करोड़ से ज्यादा के शेयर बेचे। इसके उलट,घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को सहारा दिया और सेशन के दौरान ₹3,516 करोड़ के शेयर खरीदे।

इंडिया VIX

मार्केट में उतार-चढ़ाव की उम्मीद को मापने वाला इंडिया VIX कल 3.91 प्रतिशत गिरकर 12.67 पर आ गया। यह 18 फरवरी के बाद का सबसे निचला क्लोजिंग लेवल है। इसने लगातार छठे सेशन में अपनी गिरावट जारी रखी,जो बताता है कि बुल अब ज्यादा सहज महसूस कर रहे हैं। मार्केट में तेजी के सेंटीमेंट को बनाए रखने के लिए VIX का निचले लेवल पर बने रहना जरूरी है।

पुट कॉल रेशियो

बाजार के मूड को दर्शाने वाला निफ्टी पुट-कॉल रेशियो 18 जून को बढ़कर 1.12 हो गया, पिछले सेशन में यह 1.1 था। गौरतलब है कि 0.7 से ऊपर या 1 को पार पीसीआर का जाना आम तौर पर तेजी की भावना का संकेत माना जाता है। जबकि 0.7 से नीचे या 0.5 की ओर गिरने वाला अनुपात मंदी की भावना का संकेत होता है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

F&O बैन के अंतर्गत आने वाले स्टॉक

F&O सेगमेंट के अंतर्गत प्रतिबंधित प्रतिभूतियों में वे कंपनियां शामिल होती हैं, जिनके डेरिवेटिव अनुबंध मार्केट वाइड पोजीशन लिमिट के 95 फीसदी से ज्यादा हो जाती हैं।

एफएंडओ प्रतिबंध में नए शामिल स्टॉक:कोई नहीं

एफएंडओ प्रतिबंध में पहले से शामिल स्टॉक:केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया

एफएंडओ प्रतिबंध से हटाए गए स्टॉक:कोई नहीं

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

गिफ्ट निफ्टी दे रहा भारतीय बाजार के कमजोर खुलने के संकेत, 24000 पर कर रहा ट्रेड, जानें आज बाजार पर किन खबरों का दिखेगा असर

ग्लोबल मार्केट के पॉजिटिव संकेतों के बावजूद, शुक्रवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के तेजी से नीचे खुलने की संभावना है, क्योंकि निवेशक पांच सेशन की मजबूत रैली के बाद प्रॉफिट लॉक करने के लिए तैयार दिख रहे हैं, जिसने निफ्टी को 24,150 से ऊपर और सेंसेक्स को 77,400 के पार पहुंचा दिया है। विदेशी फंड की लगातार बिकवाली और ज़रूरी टेक्निकल लेवल के पास रुकावट से भी सेंटिमेंट सतर्क रह सकता है।

GIFT निफ्टी सुबह करीब 8 बजे 24,000 पर ट्रेड कर रहा था, जो 192 पॉइंट यानी 0.8 प्रतिशत नीचे था, जो घरेलू इक्विटी के लिए गैप-डाउन शुरुआत का संकेत देता है। यह संकेत एशियाई मार्केट और वॉल स्ट्रीट में मोटे तौर पर पॉजिटिव ट्रेंड के उलट है, जिससे पता चलता है कि घरेलू ट्रेडर हालिया रैली के बाद प्रॉफिट बुक कर सकते हैं।

सतर्क शुरुआत का संकेत गुरुवार को भारतीय इक्विटी के लगातार पांचवें सेशन में ऊपर बंद होने के बाद आया है। सेंसेक्स 254.36 पॉइंट्स या 0.33 परसेंट बढ़कर 77,409.98 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 82.30 पॉइंट्स या 0.34 परसेंट बढ़कर 24,168 पर बंद हुआ।

ग्लोबल संकेत सपोर्टिव बने हुए हैं। होर्मुज स्ट्रेट के फिर से खुलने और महंगाई की चिंताओं में कमी से रिस्क लेने की क्षमता बढ़ने से शुक्रवार को एशियाई इक्विटीज नए रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गए। MSCI एशिया पैसिफिक इंडेक्स लगातार छठे दिन 0.1 परसेंट बढ़ा, जबकि साउथ कोरिया का कोस्पी 2.5 परसेंट से ज़्यादा चढ़ा। जापान का निक्केई फ्यूचर्स भी ऊपर गया।

टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर स्टॉक्स में रैली की वजह से वॉल स्ट्रीट रात भर मजबूती के साथ ऊपर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 1.91 परसेंट, S&P 500 1.08 परसेंट और डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 0.14 परसेंट बढ़ा। US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद कि Apple, Intel के साथ मिलकर यूनाइटेड स्टेट्स में चिप्स डिज़ाइन और मैन्युफैक्चर करेगा, सेमीकंडक्टर स्टॉक्स ने तेज़ी से अच्छा परफॉर्म किया, जिससे फिलाडेल्फिया सेमीकंडक्टर इंडेक्स 6.4 परसेंट बढ़ गया।

इस बीच, US-ईरान अंतरिम शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग एक्टिविटी धीरे-धीरे फिर से शुरू होने पर क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट जारी रही। ब्रेंट क्रूड $79 प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि US क्रूड $76 प्रति बैरल के करीब ट्रेड कर रहा था। एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि तेल का फ्लो ठीक होने से महंगाई और एनर्जी सप्लाई में रुकावटों की चिंता कम होगी। क्रूड की कीमतों में तेज़ गिरावट दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल इंपोर्टर भारत के लिए एक बड़ी पॉजिटिव बात बनी हुई है।

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर के मुताबिक, शॉर्ट-टर्म प्रॉफिट बुकिंग की संभावना के बावजूद, बड़ा बैकग्राउंड कंस्ट्रक्टिव बना हुआ है। उन्होंने कहा, “अमेरिका के होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की घोषणा के बाद निवेशकों का रुझान मजबूत हुआ है। इन घटनाओं ने अमेरिका-ईरान शांति प्रक्रिया को लेकर उम्मीद को और मजबूत किया है, जिससे ग्लोबल एनर्जी सप्लाई में रुकावटों की चिंता कम हुई है और अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में ज़्यादा स्थिरता की उम्मीदों को सहारा मिला है।”

संस्थागत निवेश मिला-जुला रहा। 18 जून को विदेशी संस्थागत निवेशक नेट सेलर थे, उन्होंने 1,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा के शेयर बेचे। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बिकवाली के दबाव को झेलते हुए 3,516 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

तकनीकी मोर्चे पर, पोनमुडी ने कहा कि निफ्टी की तुरंत की रुकावट 24,200 का स्तर बनी हुई है। उस ज़ोन से ऊपर लगातार ब्रेकआउट 24,400 की ओर बढ़ने का रास्ता खोल सकता है। नीचे की ओर, 24,000 का निशान एक ज़रूरी सपोर्ट एरिया बना हुआ है, जिसके टूटने पर 23,900-23,800 ज़ोन की ओर प्रॉफ़िट बुकिंग शुरू हो सकती है।

बैंक निफ्टी के लिए 58,000 का लेवल मुख्य रेजिस्टेंस बना हुआ है, जबकि तुरंत सपोर्ट 57,800 पर है। सपोर्ट लेवल से ऊपर लगातार मजबूती से बड़े पैमाने पर रिकवरी का ट्रेंड बना रहने की उम्मीद है।

Share Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Crude Oil Price: कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी, होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग धीरे-धीरे हो रही सामान्य

Crude Oil Price Today: अंतरिम US-ईरान शांति समझौते के बाद होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग सामान्य होने लगी, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई और इसमें हफ़्ते में बड़ी गिरावट आने की उम्मीद थी। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 0.84% ​​गिरकर $79.18 प्रति बैरल हो गई, जबकि US वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चे तेल की कीमत 0.67% गिरकर $76.09 प्रति बैरल हो गई।

फंसे हुए तेल ले जा रहे जहाज़ गुरुवार को पानी के रास्ते से निकलने लगे, जबकि कुवैत ने कहा कि वह प्रोडक्शन बढ़ाना शुरू कर देगा। US सेंट्रल कमांड ने कहा कि उसने ईरानी पोर्ट और तटीय इलाकों से आने-जाने वाले ट्रैफिक पर लगी रोक हटा ली है, जबकि जॉइंट मैरीटाइम इन्फॉर्मेशन सेंटर, जो एक अहम नेवल इन्फॉर्मेशन बॉडी है, ने पानी के रास्ते से गुज़रने की कोशिश कर रहे जहाजों को सलाह दी कि वे ओमान के समुद्र तट के पास वाले रास्ते का इस्तेमाल करें ताकि माइन से बचा जा सके।

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने इन डेवलपमेंट की तारीफ़ की, और ईरान के कट्टर समर्थकों, जिनमें कुछ साथी देश भी शामिल हैं, की इस आलोचना का जवाब दिया कि इस डील में तेहरान को बहुत ज़्यादा छूट दी गई है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, “मार्केट को यह पसंद आ रहा है कि तेल की कीमतें बहुत नीचे हैं और स्टॉक्स बहुत ऊपर हैं।”

क्रूड की बिकवाली का मतलब है कि फ्यूचर्स ने युद्ध से हुई लगभग सारी बढ़त गंवा दी है, जो फरवरी में तब शुरू हुई थी जब US और इज़राइल ने ईरान पर उसके न्यूक्लियर प्रोग्राम को लेकर हमला किया था। यह स्ट्रेट — जो फारस की खाड़ी को ग्लोबल मार्केट से जोड़ता है और आम तौर पर ग्लोबल तेल सप्लाई का लगभग पांचवां हिस्सा ले जाता है — तेहरान और US दोनों की तरफ से डबल ब्लॉकेड का सामना कर रहा था।

वाइस प्रेसिडेंट जेडी वेंस ने इस चिंता को कम करके आंका कि ईरान आखिरकार स्ट्रेट से होने वाले ट्रैफिक पर टोल लगा सकता है, यह एक ऐसा कदम है जो तेहरान के लिए पैसे कमाने का ज़रिया बन सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग में विवादित डिटेल्स पर काम करने के लिए 60 दिन का समय शुरू हो गया है।

हालांकि क्रूड की कीमतें गिर गई हैं, होर्मुज को पूरी तरह से फिर से खोलना एक मुश्किल और लंबा चलने वाला ऑपरेशन साबित हो सकता है। इस प्रोसेस को ठीक से चलाने के लिए, जहाज़ों को सही जगह पर रखना, कुओं को फिर से चालू करना, इंफ्रास्ट्रक्चर की मरम्मत और डी-माइनिंग ऑपरेशन पर सहमति बनाना ज़रूरी है। कुछ जहाज़ मालिक पानी के रास्ते और फ़ारस की खाड़ी के हालात को लेकर सावधान हैं।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Guru Pushya Yoga: गुरु ने किया पुष्य नक्षत्र में प्रवेश, सेहत, पैसा और करियर को लेकर सावधान रहें ये 3 राशियां

Guru Pushya Yoga: ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति का अहम स्थान है। बृहस्पति को संतान, संपन्नता और सम्मान का कारक माना जाता है। इनकी शुभ स्थिति का विचार सभी मांगलिक कार्यों के लिए किया जाता है। यह ग्रह इस समय कर्क राशि में गोचर कर रहा है, जिसके स्वामी चंद्रमा हैं। कर्क राशि में गुरु का गोचर 12 सालों के बाद हुआ है और इस राशि में गुरु उच्च के होते हैं, यानी वह काफी शक्तिशाली होते हैं। वहीं, पुष्य नक्षत्र के स्वामी शनि हैं। शनि को ज्योतिष शास्त्र में न्यायप्रिय ग्रह और कर्मों के आधार पर फल देने वाला ग्रह माना जाता है।

गुरु के पुष्य नक्षत्र में प्रवेश को ज्योतिष शास्त्र में बहुत अहम माना जाता है, क्योंकि इसे नक्षत्रों का राजा माना जाता है। देवगुरु बृहस्पति ने आज, 18 जून को पुष्य नक्षत्र में प्रवेश किया है और 18 अगस्त तक यहीं रहेंगे। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार बृहस्पति का यह गोचर तीन राशियों के लिए अच्छा नहीं माना जा रहा है। इन राशियों को इस अवधि में पैसा, करियर और सेहत के मामले में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

इन 3 राशियों के लिए अच्छा नहीं गोचर

सिंह राशि : गुरु आपकी राशि से 12वें घर में जा रहे हैं। इसके प्रभाव से आपके खर्चों में अचानक उछाल आ सकता है। हालांकि, यह पैसा किसी अच्छे या धार्मिक काम में लग सकता है, फिर भी अपना बजट बनाकर चलना ठीक रहेगा। कहीं भी बड़ा निवेश करने से पहले दो बार सोचें।

कुंभ राशि : गुरु का गोचर आपके छठे भाव में हो रहा है। इस दौरान आपको अपनी सेहत को सबसे ऊपर रखें। आपको पेट की दिक्कतें या वजन बढ़ने की समस्या परेशान कर सकती है। कोर्ट-कचहरी के मामलों में तो जीत मिलेगी, लेकिन पीठ पीछे दुश्मनों से सावधान रहें। फिलहाल किसी को बड़ा उधार देने की गलती न करें।

तुला राशि : आपके 10वें घर में गुरु का आना ऑफिस में आपकी जिम्मेदारियां और वर्कलोड दोनों बढ़ा देगा, जिससे थोड़ा मेंटल स्ट्रेस हो सकता है। बॉस या सीनियर्स से बात करते समय अपने ईगो को साइड में रखें, नहीं तो बेवजह की बहसबाजी में फंस सकते हैं।

गोचर के अशुभ असर से बचने के लिए उपाय

गुरु के पुष्य नक्षत्र में गोचर के अशुभ प्रभावों को कम करने और नकारात्मकता को दूर करने के लिए नियमित रूप से “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” मंत्र का जाप करें। गुरुवार के दिन केले के वृक्ष में जल अर्पित करना भी अच्छा रहेगा। माथे पर प्रतिदिन केसर का तिलक लगाएं। गुरुवार के दिन मंदिर में पीली वस्तुओं का करें दान।

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RIL AGM 2026: रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं AGM आज, जानिए किन ऐलानों पर रहेगी बाजार की नजर

Reliance Industries AGM 2026 : रिलायंस इंडस्ट्रीज की आज होने वाली 49वीं AGM पर पूरे बाजार की नजर है। बाजार की नजर टेलीकॉम यूनिट की लिस्टिंग और नई एनर्जी कंपनी की प्रोग्रेस के बारे में नई जानकारियों पर लगीम रहेंगी। साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के क्षेत्र में कंपनी की योजनाओं से जुड़े किसी भी अपडेट पर भी नजर रहेगी। बता दें कि रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं AGM आज शुक्रवार,19 जून को 2 बजे दोपहर को होगी।

कंपनी को पिछले प्रदर्शन पर नजर डालें तो वित्त वर्ष 2024 में कंपनी की आय 10,00,122 करोड़ रुपए रही थी। वहीं,वित्त वर्ष 2025 में कंपनी की आय 10,71,174 करोड़ रुपए रही थी। जबकि, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी की आय 11,75,919 करोड़ रुपए पर रही है।

वित्त वर्ष 2024 में कंपनी का एबिटडा 178,290 करोड़ रुपए रहा था। वहीं,वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का एबिटडा 183,422 करोड़ रुपए रहा था। जबकि, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का एबिटडा 207,911 करोड़ रुपए पर रहा था।

वित्त वर्ष 2024 में कंपनी का मुनाफा 79,020 करोड़ रुपए रहा था। वहीं,वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का मुनाफा 81,309 करोड़ रुपए पर आ गया। जबकि, वित्त वर्ष 2026 में कंपनी का मुनाफा 95,754 करोड़ रुपए पर रहा।

एजीएम में कहां रहेगी नजर?

जियो प्लेटफॉर्म्स

आज होने वाली एजीएम में बाजार की नजर जियो प्लेटफॉर्म्स का बारे में होने वाले ऐलानों पर रहेगी। सबसे बड़ा इकलौता ट्रिगर है। कंपनी मैनेजमेंट ने 2026 की पहली छमाही में इसकी लिस्टिंग का संकेत दिया था। बाजार को लिस्टिंग की पक्की टाइमलाइन का इंतजार है।

न्यू एनर्जी बिजनेस

इसके अलावा बाजार की नजर न्यू एनर्जी बिजनेस से जुड़े ऐलानों पर रहेगी। पिछले कुछ सालों में न्यू एनर्जी में भारी निवेश किया गया है। जामनगर गीगा कॉम्प्लेक्स में बड़ा इन्वेस्टमेंट हुआ है। यहां अब कमर्शियल कामकाज शुरू होने के करीब है। मार्केट को कमीशनिंग शेड्यूल का इंतजार है।

रिलायंस रिटेल पर नजर

पिछली AGM में अगले 5 साल में रिलायंस रिटेल का साइज दो गुना करने का लक्ष्य रखा गया था। पिछले 1 साल में ग्लोबल और मैक्रो स्तर पर कई चुनौतियां रहीं हैं। अब रिटेल सेगमेंट के फ्यूचर आउटलुक पर नजर रहेगी।

AI/डेटा सेंटर

निवेशकों की रिलायंस की AI स्ट्रैटेजी पर नजर रहेगी। AI,डाटा सेंटर में कंपनी का बड़ा फोकस है। 10 जून 2026 को जामनगर में 168 मेगावाट के AI डेटा सेंटर के लिए मेटा से करार भी हुआ है। इस बात पर नजर होगी कि क्या मेटा डील के बाद दूसरे बड़े ग्लोबल प्लेयर भी जुड़ेंगे?

पारंपरिक बिजनेस 

O2C और पेट्रोकेमिकल बिजनेस आउटलुक पर भी बाजार की नजर रहेगी। हालांकि, इस एजीएम में कंपनी का प्राइमरी फोकस जियो,रिटेल और न्यू एनर्जी सेगमेंट पर शिफ्ट होने की उम्मीद है।

 

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(डिस्क्लेमर: नेटवर्क 18 मीडिया एंड इनवेस्टमेंट लिमिटेड पर इंडिपेंडेंट मीडिया ट्रस्ट का मालिकाना हक है। इसकी बेनफिशियरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।)

वर्ल्ड अपडेट्स:चीन ने पाकिस्तान के साथ 8 पनडुब्बी सौदा किया था , 11 साल बाद मिली पहली पनडुब्बी

पाकिस्तान ने चीन में निर्मित अपनी नई हैंगोर क्लास पनडुब्बी को शामिल किया है। 1971 के युद्ध और बांग्लादेश के बनने के बाद से यह पहली बार है जब पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में अपनी नौसैनिक उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास कर रहा है। चीन के साथ पनडुब्बी सौदे पर हस्ताक्षर करने के एक दशक से ज्यादा समय बाद पाकिस्तान को पहली पनडुब्बी मिली है। यह सौदा पाकिस्तान के इतिहास का सबसे बड़ा रक्षा अधिग्रहण माना जाता है। अप्रैल 2015 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की इस्लामाबाद यात्रा के दौरान पाकिस्तान और चीन के बीच 8 हैंगोर-क्लास पनडुब्बियों की खरीद का समझौता हुआ था। समझौते के अनुसार, इनमें से 4 पनडुब्बियां चीन में बननी थीं और 2022-23 तक पाकिस्तान को सौंप दी जानी थीं। बाकी 4 पनडुब्बियों को कराची शिपयार्ड एंड इंजीनियरिंग वर्क्स (KSEW) में 2028 तक असेंबल किया जाना था। हालांकि, 2026 तक पाकिस्तान नौसेना में सिर्फ एक पनडुब्बी ही शामिल हो पाई है। चीन में बनने वाली बाकी तीन पनडुब्बियां- पीएनएस गाजी (PNS Ghazi), पीएनएस शुशुक (PNS Shushuk) और पीएनएस मंग्रो (PNS Mangro) लॉन्च हो चुकी हैं और फिलहाल समुद्री परीक्षण (सी ट्रायल) से गुजर रही हैं। यानी चीन में बनी पहली चार पनडुब्बियों को तय समय सीमा तक पाकिस्तान को सौंपने का लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। अब अनुमान लगाया जा रहा है कि सभी 8 पनडुब्बियां 2028 से 2030 के बीच पाकिस्तान को मिलेंगी। पनडुब्बी निर्माण के लिए कराची शिपयार्ड में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया है। इसके तहत नया शिप लिफ्ट और ट्रांसफर सिस्टम भी लगाया गया है। इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि किसी नई पनडुब्बी श्रेणी का निर्माण बेहद जटिल और समय लेने वाली प्रक्रिया होती है। पाकिस्तान इससे पहले अगोस्ता 90बी (Agosta 90B) श्रेणी की पनडुब्बी PNS Hamza का निर्माण कर चुका है, जिसे 2008 में नौसेना में शामिल किया गया था। लेकिन हैंगोर-क्लास परियोजना आकार, लागत और तकनीक तीनों मामलों में उससे कहीं बड़ी है। हैंगोर-क्लास पनडुब्बी कार्यक्रम की अनुमानित लागत 4 से 5 अरब डॉलर (करीब 34 से 43 हजार करोड़ रुपए) है। यही वजह है कि इसे पाकिस्तान के इतिहास का सबसे महंगा नौसैनिक कार्यक्रम माना जाता है।