आईटी कंपनियों में लिवाली से बाजार में तेजी

आईटी कंपनियों में लिवाली के दम पर घरेलू शेयर बाजारों में शुक्रवार को एक बार फिर अच्छी तेजी देखी गई और टेक महिंद्रा का शेयर करीब साढ़े आठ प्रतिशत ऊपर बंद हुआ।

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 413.66 अंक (0.56 प्रतिशत) की बढ़त के साथ 74,729.27 अंक पर पहुंच गया। हल्की बढ़त में खुलने के बाद कुछ देर के लिए यह लाल निशान में जरूर गया था, लेकिन एक बार वापसी करने के पूरे दिन तेजी बनी रही।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) का निफ्टी-50 सूचकांक भी 148.80 अंक चढ़कर 23,146.15 अंक पर बंद हुआ। यह दोनों का 23 सितंबर के बाद का उच्चतम स्तर है।

अच्छे तिमाही परिणाम और बोनस शेयर की घोषणा के बाद टेक महिंद्रा के शेयर में आज उछाल देखा गया। कंपनी के गुरुवार को जारी वित्तीय परिणामों के अनुसार, जुलाई-सितंबर 2026 की तिमाही में उसका मुनाफा सालाना आधार पर 32.7 प्रतिशत बढ़कर 1,586 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। राजस्व में 15.6 फीसदी की वृद्धि हुई और यह 16,180 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने प्रत्येक शेयर पर एक बोनस शेयर जारी करने की घोषणा की है। साथ ही प्रत्येक इक्विटी शेयर पर 15 रुपये के अंतरिम लाभांश की भी घोषणा की है।

वृहत बाजार में मझौली और छोटी कंपनियों के सूचकांक गिरावट में रहे। निफ्टी मिडकैप-50 सूचकांक 0.06 प्रतिशत और स्मॉलकैप-100 सूचकांक 0.01 प्रतिशत नीचे रहा।

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सेक्टर आधारित सूचकांकों में निफ्टी आईटी सूचकांक में 3.92 प्रतिशत का उछाल रहा। मीडिया समूह का सूचकांक 1.92 फीसदी, धातु का 0.95 प्रतिशत और ऑटो का 0.75 प्रतिशत मजबूत हुआ। एफएमसीजी, रियल्टी, फार्मा, स्वास्थ्य, टिकाऊ उपभोक्ता उत्पाद और तेल एवं गैस समूहों में गिरावट रही।

एनएसई में जिन 3,669 कंपनियों के शेयरों में कारोबार हुआ उनमें से 2,131 के शेयर ऊपर और 1,422 के नीचे बंद हुए। अन्य 116 कंपनियों के शेयर अंततः अपरिवर्तित बंद हुए।

सेंसेक्स की 30 कंपनियों में से 18 के शेयरों मजबूती में रहे। टेक महिंद्रा की 8.45 प्रतिशत क तेजी के बाद टीसीएस का शेयर 4.61 फीसदी और इंफोसिस का 4.55 फीसदी ऊपर रह। भारती एयरटेल में 2.86 प्रतिशत और महिंद्रा एंड महिंद्रा में 2.38 फीसदी की बढ़त रही।

बजाज फाइनेंस का शेयर 1.38 प्रतिशत और एचसीएल टेक्नोलॉजीज का 1.08 प्रतिशत ऊपर रहा। एनटीपीसी, अल्ट्राटेक सीमेंट, मारुति सुजुकी, पावरग्रिड, बजाज फिनसर्व और ट्रेंट के शेयर भी हरे निशान में रहे।

विमान सेवा कंपनी इंडिगो में 2.23 फीसदी की गिरावट रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर 1.09 प्रतिशत और एशियन पेंट्स का एक प्रतिशत टूट गया। बीईएल, आईटीसी, एलएंडटी, कोटक महिंद्रा बैंक, टाटा स्टील और अडानी पोर्ट्स भी नुकसान में रहे।

वैश्विक स्तर पर एशिया में जापान का निक्केई 1.39 प्रतिशत, हांगकांग का हैंग सेंग 0.52 प्रतिशत और चीन का शंघाई कंपोजिट 0.24 प्रतिशत की बढ़त में बंद हुआ। यूरोपीय बाजारों में शुरुआती कारोबार में जर्मनी का डैक्स 0.95 फीसदी और ब्रिटेन का एफटीएसई 0.04 प्रतिशत ऊपर था।

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Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : भारतीय बाजार के लिए अच्छे संकेत दिख रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी में 80 प्वाइंट से ज्यादा की तेजी है। FIIs की कैश में बिकवाली हुई है, लेकिन वायदा में बड़ी कवरिंग नजर आई है। अमेरिकी बाजार में भी कल जोरदार रिकवरी दिखी। डाओ में 550 प्वाइंट से ज्यादा का उछाल दिखा। नैस्डैक और S&P में भी बढ़त रही। एशियाई बाजारों में भी रौनक दिख रही है। क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब दिख रहा है। US बॉन्ड यील्ड में भी नरमी आई है।

यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

गुरुवार को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क में तेजी आई। जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO की घोषणा के बाद ऑटो, IT, प्राइवेट बैंकों और रिलायंस इंडस्ट्रीज में जोरदार खरीदारी के चलते निफ्टी और सेंसेक्स, दोनों में 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 1,533.72 अंक यानी 2.11 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,315.61 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 374.65 अंक यानी 1.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,997.35 पर बंद हुआ।

SEBI ने CAS में किए बड़े बदलाव, एक्सपायरी पर VWAP से होगा सेटलमेंट

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में बड़े बदलाव किए है। एक्सपायरी के दिन CAS के बजाए पुराने VWAP सिस्टम से सेटलमेंट होगा। CAS की टाइमिंग बदली गई है। अब CAS 3.30 बजे से 10 मिनट का होगा। यह फैसला 7 दिसंबर से लागू होगा।

टेक महिंद्रा के नतीजे अनुमान के मुताबिक, Q2 में 0.9% रही विप्रो की IT सर्विसेज रेवेन्यू ग्रोथ

टेक महिंद्रा के दूसरी तिमाही के नतीजे अनुमान के मुताबिक रहे है। इसके मुनाफे में 7 परसेंट तो रेवेन्यू में 3 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। विप्रो के Q2 रिजल्ट भी उम्मीद के करीब रहे हैं। इसकी CC रेवेन्यू ग्रोथ फ्लैट रही है। IT सर्विसेज रेवेन्यू ग्रोथ 0.9% रही है। हालांकि Q3 में इसके माइनस 1.5% से 0.5% की रेंज में रहने का अनुमान किया गया है। वहीं, परसिस्टेंट सिस्टम का मुनाफा 27 परसेंट गिरा है। लेकिन CC रेवेन्यू ग्रोथ 7.8% रही है।

एंजेव वन का Q2 मुनाफा 44.7% बढ़ा, रेवेन्यू फ्लैट

दूसरी तिमाही में एंजेव वन के मुनाफे में तिमाही आधार पर 45 परसेंट का उछाल आया है। लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ फ्लैट रही है। मार्जिन में 1060 Bps का तगड़ा उछाल देखने को मिला है। वहीं L&T FINANCE का Q2 मुनाफा 33 परसेंट बढ़ा है। इसे मजबूत रिटले ग्रोथ और NII में उछाल से बूस्ट मिला है।

JIO के IPO पर बोले आकाश अंबानी

JIO के IPO पर आकाश अंबानी ने कहा कि देश को डिजिटल सर्विस से कनेक्ट करना Jio का मिशन है। भारत में विकसित टेक्नोलॉजी का दूसरे देशों में इस्तेमाल होगा। IPO पर ईशा अंबानी ने कहा कि लॉन्ग टर्म प्लानिंग, स्केल और एग्जीक्यूशन पर फोकस है। यह आईपीओ 21 अक्टूबर से खुलेगा। इसकी प्राइस बैंड 1065 से 1119 रुपए प्रति शेयर है।

चीनी 21 सेंट के पार

सप्लाई की चिंता से इंटरनेशनल मार्केट में चीनी की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। इसका भाव 21 सेंट प्रति पाउंड के साथ करीब 2 सालों की ऊंचाई पर पहुंच गया है। ब्राजील में क्रशिंग में देरी और भारत में कमजोर मॉनसून से उत्पादन गिरने की आशंका से इसके भाव में तेजी आई है।

एशियन करेंसी

शुक्रवार, 16 अक्टूबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अधिकांश एशियाई मुद्राओं में कमजोरी आई है, जिसमें दक्षिण कोरियाई वॉन और फिलीपीन पेसो सबसे ज्यादा गिरे हैं। इंडोनेशियाई रुपिया में 0.20 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन 0.36 प्रतिशत और फिलीपीन पेसो 0.23 प्रतिशत कमजोर हुए हैं। जापानी येन में 0.08 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं थाई बाह्ट और सिंगापुर डॉलर में 0.05-0.05 प्रतिशत की कमी आई है। मलेशियाई रिंगित और चीनी रेनमिनबी में भी मामूली गिरावट देखी गई है। ये 0.02 प्रतिशत और 0.018 प्रतिशत नीचे आए हैं। इसके विपरीत, ताइवान डॉलर में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.05 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। यह 9 लिस्टेड एशियाई मुद्राओं में एकमात्र ऐसी मुद्रा है जिसमें तेजी आई है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बिकवाली का सिलसिला जारी रखा और 15 अक्टूबर को लगभग 5,285 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को कुछ सहारा दिया और इस दौरान 3,319 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

 

Market cues : 22850 के ऊपर टिकने पर ही निफ्टी के लिए खुलेगा 23000 की ओर बढ़ने का रास्ता

हूती विद्रोहियों ने यमन के राष्ट्रपति भवन पर हमला किया:5 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, 4 की मौत; प्रधानमंत्री मौजूद थे, बाल-बाल बचे

यमन के अदन शहर में हूती विद्रोहियों ने राष्ट्रपति भवन पर 5 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हमले के समय प्रधानमंत्री शाया मोहसेन अल-जिंदानी और सरकार के कई मंत्री परिसर में मौजूद थे, सभी सुरक्षित हैं। सूचना मंत्रालय के मुताबिक, हमले में 4 लोगों की मौत हुई है, जिनमें 2 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। हूती विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने अदन में सऊदी अरब के सैन्य अभियान मुख्यालय पर हमला किया। हूती मीडिया ने हथियारों के भंडार को निशाना बनाने का दावा भी किया। हालांकि, इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है। अदन यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार की अंतरिम राजधानी है। देश में सरकार और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है। सऊदी अरब के समर्थन से लड़ रही यमन की सरकार यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच लंबे समय से संघर्ष चल रहा है। सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है और हूतियों के खिलाफ लड़ रहे सरकारी सेनाओं को हवाई मदद देता है। वहीं, ईरान पर हूती विद्रोहियों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं। राष्ट्रपति भवन परिसर पर हमले से यमन में संघर्ष और बढ़ने की आशंका है। हूतियों ने कहा है कि उनका निशाना सऊदी सैन्य अभियान से जुड़े ठिकाने थे। रिपोर्ट- चीन की मदद से मिसाइल बना रहे हूती विद्रोही यमन के हूती विद्रोही चीन से मंगाए गए पुर्जों की मदद से नई बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिटेन की संस्था कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (CAR) की बुधवार को जारी रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, विद्रोही ईरान में डिजाइन हुई खैबर शिकन मिसाइल जैसी मिसाइल तैयार करना चाहते हैं, जिसकी मारक क्षमता करीब 1500 किलोमीटर है। अगर हूती ऐसा हथियार बनाने में सफल होते हैं, तो वे सऊदी अरब के अलावा इजराइल को भी ज्यादा सटीक तरीके से निशाना बना सकते हैं। 2015 से जारी है सऊदी और हूतियों की लड़ाई ———————- ये खबर भी पढ़ें… इजराइल हूती विद्रोहियों के खिलाफ क्यों लड़ना चाहता है:अमेरिका के जरिए नेतन्याहू ने मदद का मैसेज भेजा, सऊदी ने इनकार किया इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सऊदी अरब से हूतियों के खिलाफ लड़ाई में इजराइल को शामिल करने की इजाजत मांगी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Jio IPO: ‘जियो ने फाइल किए 7220 पेटेंट एप्लिकेशन’, आकाश अंबानी ने कहा- ग्लोबल टॉप 20 में शामिल इकलौती भारतीय कंपनी

Jio IPO: जियो प्लेटफॉर्म्स के चेयरमैन आकाश अंबानी का कहना है कि ने 7,220 पेटेंट आवेदन दाखिल किए हैं। ये दुनिया की उन टॉप 20 कंपनियों में शामिल इकलौती भारतीय कंपनी है, जिन्होंने वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन (WIPO) की पेटेंट कोऑपरेशन ट्रीटी रैंकिंग में जगह बनाई है।

Jio Platforms की ओर से IPO के लिए रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल करने के एक दिन बाद आकाश अंबानी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह बात कही। उन्होंने बताया कि कंपनी की टेक्नोलॉजी को डेवलप करने में 12,000 से ज्यादा इंजीनियरों की टीम लगी हुई है।

अपनी टेक्नोलॉजी पर जोर दे रही है Jio

आकाश अंबानी ने कहा कि Jio ने अपनी टेक्नोलॉजी खुद डेवलप करने पर जोर दिया है। इससे कंपनी को बाहरी टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर्स पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता।

उन्होंने कहा, ;हमने अपने ग्राहकों को बेहतर सेवाएं देने के लिए अपना टेक्नोलॉजी स्टैक बनाया है।’ टेक्नोलॉजी स्टैक का मतलब उन तकनीकों, सॉफ्टवेयर और सिस्टम से है, जिनकी मदद से कंपनी अपनी सेवाएं चलाती है।

इन कारोबारों पर रहेगा कंपनी का फोकस

आकाश अंबानी के मुताबिक, आने वाले समय में कंपनी का जोर मोबाइल सेवाओं, होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज सर्विसेज और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में विस्तार पर रहेगा।

उन्होंने बताया कि Jio फिलहाल भारत के कुल डेटा ट्रैफिक का करीब 60% हिस्सा संभालती है। इससे देश में कंपनी के टेलीकॉम कारोबार के बड़े पैमाने का अंदाजा लगाया जा सकता है।

दुनिया में सबसे बड़ा 5G सब्सक्राइबर बेस

आकाश अंबानी ने कहा कि Jio ने करीब तीन साल पहले 5G नेटवर्क का विस्तार शुरू किया था। अब चीन को छोड़कर दुनिया में उसके पास सबसे बड़ा 5G सब्सक्राइबर बेस है।

कंपनी के ग्राहकों में डेटा की खपत भी तेजी से बढ़ी है। आकाश अंबानी के मुताबिक, Jio का हर ग्राहक औसतन हर महीने 43.7 GB डेटा इस्तेमाल कर रहा है।

उन्होंने बताया कि डेटा की कीमत भी काफी कम हुई है। पहले एक GB डेटा के लिए करीब 228 रुपये खर्च करने पड़ते थे। वित्त वर्ष 2026 तक यह कीमत घटकर 7.5 रुपये प्रति GB रह गई।

21 अक्टूबर को खुलेगा Jio Platforms IPO

यह जानकारी ऐसे समय आई है, जब रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल और टेलीकॉम कंपनी Jio Platforms शेयर बाजार में लिस्ट होने की तैयारी कर रही है।

कंपनी ने 14 अक्टूबर को IPO के लिए RHP दाखिल किया था। इसके तहत शेयर का प्राइस बैंड 1,065 रुपये से 1,119 रुपये तय किया गया है। IPO 21 अक्टूबर को खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद होगा।

इस इश्यू में 27 करोड़ तक नए इक्विटी शेयर जारी किए जाएंगे। ऊपरी प्राइस बैंड के हिसाब से कंपनी इस IPO के जरिए अधिकतम 30,213 करोड़ रुपये जुटाना चाहती है।

Reliance Jio Origin Story: ईशा अंबानी ने सुनाया जियो की शुरुआत का दिलचस्प किस्सा, वो घटना जिसने भारत में ला दी डिजिटल क्रांति

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

जियो प्लेटफॉर्म्स दूसरे देशों में अपनी टेलीकॉम टेक्नोलॉजी मॉडल का इस्तेमाल करेगी, आकाश अंबानी ने बताय पूरा प्लान

जियो प्लेटफॉर्म्स अपने एसेट-लाइट मॉडल के जरिए विदेश में अपनी सेवाओं का विस्तार करना चाहती है। इससे कंपनी को अपनी टेलीकॉम टेक्नोलॉजी का फायदा उठाने का मौका मिलेगा। इसके लिए कंपनी दुनियाभर के बाजारों में ऑपरेटर्स से पार्टनरशिप करेगी। कंपनी के चेयरमैन आकाश अंबानी ने गुरुवार को इस बारे में बताया।

जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुड़े प्रेस कॉन्फ्रेंस में अंबानी ने कहा कि जियो खुद को नेटवर्क बिल्डर या कनवेंशनल सॉफ्टेवयर सर्विसेज प्रोवाइडर के बजाय मैनेज्ड सर्विसेज पार्टनर के रूप में स्थापित करना चाहती है। इसके लिए कंपनी भारत में विकिसत और इस्तेमाल किए जा रहे टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल दूसरे देशों में करेगी।

उन्होंने कहा कि जियो का प्रॉपरायटरी एंड-टू-एंड टेक्नोलॉजी स्टैक दुनिया के सबसे जटिल टेलीकॉम मार्केट्स में तैयार किया गया है। इसका भारत में इस्तेमाल हो रहा है। हमारे लिए इसका इस्तेमाल दूसरे देशों में करने का मौका है। इसके लिए विकसित और विकासशील दोनों तरह के देशों में ऑपरेटर्स से पार्टनरशिप के मौके हैं।

उन्होंने कहा कि कंपनी विदेश में अपनी सेवाओं के विस्तार के लिए खुद को मैनेज्ड सर्विसेज पार्टनर के रूप में पेश करेगी। इससे टेलीकॉम ऑपरेटर्स को अपनी ग्रोथ के लिए सिर्फ नेटवर्क बिल्डर या सॉफ्टवेयर सर्विस प्रोवाइडर बनने की जगह हमारी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकेंगे।

अंबानी ने कहा कि जियो इंटरनेशनल पार्टनर्स के चुनाव में सावधानी बरतेगी। इसके लिए वह बाजार के आकार और अपनी बैलेंसशीट में संभावित योगदान के आधार फैसले लेगी। उन्होंने कहा कि इस स्ट्रेटेजी से आने वाले सालों में कंपनी को टेक्नोलॉजी में अपने निवेश का फायदा उठाने का रास्ता मिलेगा।

जियो प्लेटफॉर्म्स के चेयरमैन ने कहा कि जियो ने अपना टेलीकॉम टेक्नोलॉजी स्टैक विकसित करने के लिए बड़ा निवेश किया है। कंपनी ने 7,220 से ज्यादा पेटेंट्स फाइल किए हैं। इन्हें कंपनी के 12,000 से ज्यादा इंजीनियर्स ने तैयार किए हैं। कंपनी ने भारत में 5जी का व्यापक नेटवर्क बनाया है। उन्होंने इसे चीन के बाहर सबसे बड़ा 5जी सब्सक्राइबर बेस बताया।

लॉन्च से पहले Samsung Galaxy S27 Ultra के फीचर्स लीक, मिलेगा नया Privacy Display, देखें स्पेसिफिकेशंस

Samsung Galaxy S27 Ultra Leaks: अगर आप Samsung के प्रीमियम स्मार्टफोन का इंतजार कर रहे हैं, तो आने वाला Galaxy S27 Ultra आपके लिए खास हो सकता है। इस फोन को लेकर नई लीक सामने आई हैं, जिनमें कैमरा क्वालिटी से लेकर हार्डवेयर तक में बड़े बदलाव होने की उम्मीद जताई गई है। माना जा रहा है कि नया फोन मौजूदा Galaxy S26 Ultra से बेहतर हो सकता है। हालांकि, Samsung ने अभी तक इस स्मार्टफोन को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। आइए जानते हैं कि Galaxy S27 Ultra को लेकर अब तक क्या-क्या सामने आया है।

Samsung Galaxy S27 Ultra लीक: क्या उम्मीद करें

एक जाने-माने टिपस्टर सॉयर गैलोक्स (@Sawyergalox) के अनुसार, Samsung अपनी ‘प्राइवेसी डिस्प्ले’ तकनीक की दूसरी पीढ़ी पर काम कर रहा है। इस अपडेटेड फीचर में स्क्रीन के कई पहलुओं में सुधार देखने को मिल सकता है।

माना जा रहा है कि Galaxy S27 Ultra में ‘Privacy Display’ इनेबल होने पर भी हाई रिजॉल्यूशन मिलेगा। उम्मीद है कि यह कोरियाई टेक कंपनी व्यूइंग एंगल, स्क्रीन रिजॉल्यूशन और ओवरऑल डिस्प्ले क्लैरिटी को बेहतर बनाने पर भी काम कर रही है। बता दैं कि Samsung Galaxy S27 Ultra के 2027 की शुरुआत में लॉन्च होने की उम्मीद है, हालांकि कंपनी ने अभी तक इसकी आधिकारिक लॉन्च टाइमलाइन का खुलासा नहीं किया है।

Samsung Galaxy S27 Ultra (अनुमानित कीमतें)

टिप्स्टर के मुताबिक, Galaxy S27 Ultra में बेहतर डिस्प्ले हार्डवेयर मिलने से इसकी कीमत बढ़ सकती है। लीक के अनुसार, इस प्रीमियम स्मार्टफोन की शुरुआती कीमत 1,400 डॉलर (करीब 1,33,000 रुपये) से 1,500 डॉलर (लगभग 1,43,000 रुपये) के बीच हो सकती है।

हालांकि, इससे पहले सामने आई लीक में फोन की कीमत को लेकर अलग-अलग दावे किए गए थे। पिछली रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में इसकी शुरुआती कीमत 1,399 डॉलर (करीब 1,35,000 रुपये) हो सकती है। वहीं, दक्षिण कोरिया में इसकी कीमत 1,499 डॉलर (लगभग 1,45,000 रुपये) होने की संभावना जताई गई थी।

ध्यान देने वाली बात यह है कि ये सभी कीमतें फिलहाल अनुमान पर आधारित हैं। Samsung ने Galaxy S27 Ultra की कीमत का आधिकारिक ऐलान नहीं किया है। अलग-अलग देशों में इसकी कीमत भी अलग हो सकती है।

कैमरे की बात करें तो Samsung Galaxy S27 Ultra में पीछे की तरफ चार कैमरे मिल सकते हैं। इसमें 200MP का मेन कैमरा, 50MP का टेलीफोटो कैमरा, 50MP का अल्ट्रावाइड कैमरा और 10MP का एक अन्य टेलीफोटो कैमरा शामिल हो सकता है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 12MP का फ्रंट कैमरा मिलने की उम्मीद है।

Samsung Galaxy S27 Ultra में 6.9 इंच की AMOLED 2X डिस्प्ले दी जा सकती है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगी। परफॉर्मेंस के लिए इसमें Qualcomm का अपकमिंग Snapdragon 8 Elite Gen 6 प्रोसेसर मिल सकता है। इसके साथ 12GB रैम और 256GB स्टोरेज दिए जाने की उम्मीद है।

चीन के मशहूर टिप्स्टर Digital Chat Station के मुताबिक, यह प्रोसेसर 2nm टेक्नोलॉजी पर तैयार किया जा सकता है। लीक में यह भी दावा किया गया है कि फोन की मोटाई 7.9mm हो सकती है और इसमें Galaxy S Pen का सपोर्ट मिलेगा।

बैटरी देखें तो Galaxy S27 Ultra में 7,000mAh की बैटरी दी जा सकती है, जो 65W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट कर सकती है। हालांकि, इन सभी फीचर्स की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

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यूरोप ने रूस से 30 लाख करोड़ का तेल-गैस खरीदा:इस साल भी इम्पोर्ट जारी, 2025 में भारत की रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगाए थे

रूस से तेल खरीदने पर भारत पर दबाव बनाने वाला यूरोप खुद भी उससे बड़े पैमाने पर तेल-गैस खरीद रहा है। 2022 से अब तक यूरोपीय देशों ने रूस से करीब 30 लाख करोड़ रुपए का ईंधन खरीदा है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ ने जुलाई 2025 में गुजरात स्थित नायरा एनर्जी की रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगाए थे, जिसमें रूस की तेल कंपनी रोसनेफ्ट की हिस्सेदारी रही है। 2026 के शुरुआती नौ महीनों में भी करीब 2.03 लाख करोड़ रुपए की खरीद हुई। रूस के मुताबिक, जिन रास्तों से रूसी ऊर्जा खरीदने की छूट है, उनके जरिए यूरोप को तेल और गैस की सप्लाई जारी है। रूस से ईंधन छूट के नियम अलग-अलग यूरोप के सभी देशों की स्थिति एक जैसी नहीं है। वहीं, भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी प्रशासन अतिरिक्त आयात शुल्क लगा चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि भारत पर दबाव और यूरोपीय देशों को मिली छूट के नियम अलग-अलग क्यों हैं। भास्कर एनालिसिस: खरीद रोकने से यूरोप को मंहगाई का डर तेल-गैस महंगी हो सकती है यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोप में गैस और बिजली की कीमतें बढ़ी थीं। रिपोर्ट में गैस की कीमतों में 46% और बिजली की कीमतों में 21% तक बढ़ोतरी का दावा किया गया है। रूस से सप्लाई पूरी तरह बंद होने पर कीमतें फिर बढ़ सकती हैं। इससे आम लोगों के बिल और कंपनियों की लागत बढ़ने का डर है। 2026 में भी रूस से गैस खरीद बढ़ी यूरोपीय संघ की ऊर्जा नियामक एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से मई 2026 के बीच यूरोप में रूस से पाइपलाइन के जरिए आने वाली गैस की खरीद पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 7% बढ़ी। रूस से तरल प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी की खरीद भी 11% बढ़ी। इससे पता चलता है कि प्रतिबंधों के बावजूद यूरोप की रूस पर ऊर्जा निर्भरता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। दूसरे देशों से गैस खरीदना भी आसान नहीं यूरोप अमेरिका और दूसरे देशों से भी गैस खरीदता है। लेकिन दूसरे देशों से गैस मंगाने के लिए अलग इंतजाम और खर्च की जरूरत होती है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से भी ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे में रूस से खरीद तुरंत बंद करना यूरोप के लिए आसान नहीं है। पहले से हुए समझौते भी बड़ी वजह यूरोपीय कंपनियों ने रूस के साथ लंबे समय के लिए गैस खरीदने के समझौते कर रखे हैं। यूरोप की ऊर्जा नियामक एजेंसी के मुताबिक, रूसी एलएनजी खरीदने के लिए कुछ कंपनियों के सालाना 20 से 32 अरब घनमीटर तक के अनुबंध हैं। इन समझौतों और दूसरी जगह से गैस लाने के इंतजाम में समय लगने के कारण आयात बंद करना मुश्किल है। रूस की एलएनजी का सबसे बड़ा खरीदार EU है ऊर्जा पर नजर रखने वाली संस्था सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के मुताबिक, दिसंबर 2022 से अगस्त 2026 के बीच रूस से होने वाले एलएनजी निर्यात में यूरोपीय संघ (EU) की हिस्सेदारी 49% थी। चीन की हिस्सेदारी 24% रही। पाइपलाइन के जरिए भेजी जाने वाली रूसी गैस में भी यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी 32% थी। चीन की हिस्सेदारी 31% और तुर्किये की 29% रही। यानी रूस से गैस खरीदने में यूरोप अब भी अहम भूमिका निभा रहा है। रूस से एलएनजी खरीदने वाले प्रमुख यूरोपीय देशों में फ्रांस, बेल्जियम, स्पेन समेत नीदरलैंड्स भी शामिल है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड घटाई: रूस के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर असर अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

यूरोप ने रूस से 30 लाख करोड़ का तेल-गैस खरीदा:इस साल भी इम्पोर्ट जारी, 2025 में भारत की रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगाए थे

रूस से तेल खरीदने पर भारत पर दबाव बनाने वाला यूरोप खुद भी उससे बड़े पैमाने पर तेल-गैस खरीद रहा है। 2022 से अब तक यूरोपीय देशों ने रूस से करीब 30 लाख करोड़ रुपए का ईंधन खरीदा है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ ने जुलाई 2025 में गुजरात स्थित नायरा एनर्जी की रिफाइनरी पर प्रतिबंध लगाए थे, जिसमें रूस की तेल कंपनी रोसनेफ्ट की हिस्सेदारी रही है। 2026 के शुरुआती नौ महीनों में भी करीब 2.03 लाख करोड़ रुपए की खरीद हुई। रूस के मुताबिक, जिन रास्तों से रूसी ऊर्जा खरीदने की छूट है, उनके जरिए यूरोप को तेल और गैस की सप्लाई जारी है। रूस से ईंधन छूट के नियम अलग-अलग यूरोप के सभी देशों की स्थिति एक जैसी नहीं है। वहीं, भारत की रूस से तेल खरीद को लेकर अमेरिकी प्रशासन अतिरिक्त आयात शुल्क लगा चुका है। ऐसे में सवाल उठता है कि भारत पर दबाव और यूरोपीय देशों को मिली छूट के नियम अलग-अलग क्यों हैं। भास्कर एनालिसिस: खरीद रोकने से यूरोप को मंहगाई का डर तेल-गैस महंगी हो सकती है यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूरोप में गैस और बिजली की कीमतें बढ़ी थीं। रिपोर्ट में गैस की कीमतों में 46% और बिजली की कीमतों में 21% तक बढ़ोतरी का दावा किया गया है। रूस से सप्लाई पूरी तरह बंद होने पर कीमतें फिर बढ़ सकती हैं। इससे आम लोगों के बिल और कंपनियों की लागत बढ़ने का डर है। 2026 में भी रूस से गैस खरीद बढ़ी यूरोपीय संघ की ऊर्जा नियामक एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से मई 2026 के बीच यूरोप में रूस से पाइपलाइन के जरिए आने वाली गैस की खरीद पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 7% बढ़ी। रूस से तरल प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी की खरीद भी 11% बढ़ी। इससे पता चलता है कि प्रतिबंधों के बावजूद यूरोप की रूस पर ऊर्जा निर्भरता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। दूसरे देशों से गैस खरीदना भी आसान नहीं यूरोप अमेरिका और दूसरे देशों से भी गैस खरीदता है। लेकिन दूसरे देशों से गैस मंगाने के लिए अलग इंतजाम और खर्च की जरूरत होती है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से भी ऊर्जा सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे में रूस से खरीद तुरंत बंद करना यूरोप के लिए आसान नहीं है। पहले से हुए समझौते भी बड़ी वजह यूरोपीय कंपनियों ने रूस के साथ लंबे समय के लिए गैस खरीदने के समझौते कर रखे हैं। यूरोप की ऊर्जा नियामक एजेंसी के मुताबिक, रूसी एलएनजी खरीदने के लिए कुछ कंपनियों के सालाना 20 से 32 अरब घनमीटर तक के अनुबंध हैं। इन समझौतों और दूसरी जगह से गैस लाने के इंतजाम में समय लगने के कारण आयात बंद करना मुश्किल है। रूस की एलएनजी का सबसे बड़ा खरीदार EU है ऊर्जा पर नजर रखने वाली संस्था सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के मुताबिक, दिसंबर 2022 से अगस्त 2026 के बीच रूस से होने वाले एलएनजी निर्यात में यूरोपीय संघ (EU) की हिस्सेदारी 49% थी। चीन की हिस्सेदारी 24% रही। पाइपलाइन के जरिए भेजी जाने वाली रूसी गैस में भी यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी 32% थी। चीन की हिस्सेदारी 31% और तुर्किये की 29% रही। यानी रूस से गैस खरीदने में यूरोप अब भी अहम भूमिका निभा रहा है। रूस से एलएनजी खरीदने वाले प्रमुख यूरोपीय देशों में फ्रांस, बेल्जियम, स्पेन समेत नीदरलैंड्स भी शामिल है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… मस्क ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड घटाई: रूस के खिलाफ सेना के ऑपरेशन पर असर अमेरिकी अरबपति इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स ने यूक्रेन में स्टारलिंक इंटरनेट की स्पीड पर लिमिट लगा दी है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के सलाहकार सेरही बेस्क्रेस्टनोव ने बुधवार को बताया कि इस फैसले से रूस के खिलाफ लड़ रही यूक्रेनी सेना के कई ऑपरेशन पर असर पड़ा है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

रिपोर्ट- चीन की मदद से मिसाइल बना रहे हूती विद्रोही:डिजाइन ईरान में तैयार हुआ; सऊदी के अलावा इजराइल को भी निशाना बना सकते हैं

यमन के हूती विद्रोही चीन से मंगाए गए पुर्जों की मदद से नई बैलिस्टिक मिसाइल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। ब्रिटेन की संस्था कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च (CAR) की बुधवार को जारी रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, विद्रोही ईरान में डिजाइन हुई खैबर शिकन मिसाइल जैसी मिसाइल तैयार करना चाहते हैं, जिसकी मारक क्षमता करीब 1500 किलोमीटर है। अगर हूती ऐसा हथियार बनाने में सफल होते हैं, तो वे सऊदी अरब के अलावा इजराइल को भी ज्यादा सटीक तरीके से निशाना बना सकते हैं। हथियार बनाने के लिए जरूरी सामान जुटा रहे हूती रिपोर्ट के मुताबिक, यमन के अधिकारियों ने जुलाई में चीन से भेजे गए दो संदिग्ध सामानों की खेप पकड़ी थी। इनमें मिसाइल बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई अहम पुर्जे मिले। पकड़ी गई खेप चीन से भेजी गई थी। इसे यमन के होदेइदा बंदरगाह पहुंचाया जाना था। इजराइली अधिकारियों का कहना है कि इस बंदरगाह का इस्तेमाल ईरान हथियारों की सप्लाई के लिए करता रहा है। पकड़ी गई खेप में क्या-क्या मिला? रिपोर्ट तैयार करने वाली संस्था के वरिष्ठ विश्लेषक फैबियन हिंज के मुताबिक, हूती ईरान में डिजाइन की गई खास तरह की मिसाइल बनाने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इन पुर्जों का इस्तेमाल आम नागरिक कामों में करना मुश्किल है। हूतियों की हथियार बनाने की क्षमता पहले से ज्यादा हूती करीब दो दशक पहले यमन में एक विद्रोही संगठन के तौर पर उभरे थे। शुरुआत में उनके पास यमन की सेना से हासिल सोवियत दौर के और उत्तर कोरिया में बने हथियार थे। समय के साथ उन्हें ज्यादा आधुनिक हथियार और तकनीक मिलने लगी। ईरान पर निर्भरता घटाने की कोशिश क्यों? ईरान लंबे समय से हूतियों को हथियार बनाने की तकनीक, डिजाइन और जरूरी पुर्जे देता रहा है। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, अब हूती चीन समेत दूसरे देशों से भी हथियार बनाने का सामान जुटाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी थिंक टैंक फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के ईरान कार्यक्रम के वरिष्ठ निदेशक बेहनाम बेन तालेब्लू ने कहा कि हथियार बनाने के लिए कई जगहों से सामान मिलना किसी संगठन के लिए फायदेमंद होता है। उनके मुताबिक, ईरान पर रोक के बीच हूती सामान जुटाने के दूसरे रास्ते तलाश रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हूती अभी मिसाइल के लिए जरूरी जटिल सिस्टम के लिए ईरान पर निर्भर हैं। वे दूसरे देशों से मिले पुर्जों को जोड़कर कुछ हथियार बना सकते हैं, लेकिन आधुनिक हथियारों की पूरी तकनीक खुद विकसित नहीं कर सकते। चीन के लिए कूटनीतिक चुनौती बढ़ सकती है चीन ईरान और सऊदी अरब, दोनों से बड़ी मात्रा में तेल खरीदता है। 2023 में चीन ने दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने में भी भूमिका निभाई थी। चीन ने सऊदी अरब के एयरपोर्ट पर हूतियों के हमलों की निंदा की है और संघर्ष कम करने की अपील की है। अब अगर चीन से आए पुर्जों का इस्तेमाल हूती मिसाइल बनाने में होने के दावे की पुष्टि होती है, तो सऊदी अरब और चीन के रिश्तों पर दबाव बढ़ सकता है। चीन सऊदी अरब का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार भी है। मध्य पूर्व के विशेषज्ञ क्रिस्टियन उलरिचसन के मुताबिक, सऊदी अरब के बुनियादी ढांचे और एयरपोर्ट पर हमलों के बाद चीन पर इस मुद्दे को लेकर ज्यादा दबाव पड़ सकता है। फिलहाल यह साफ नहीं होता कि चीन की सरकार ने जानबूझकर हूतियों को मिसाइल बनाने के लिए सामान भेजा था। ————————- यह खबर भी पढ़ें… होर्मुज में बारूदी सुरंग से टकराकर जहाज डूबा: जंग शुरू होने के बाद पहली बार ऐसा हुआ होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री बारूदी सुरंग से टकराकर बुधवार सुबह एक मालवाहक जहाज डूब गया। जहाज में 2500 कंटेनर थे। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने यह जानकारी दी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

डेनमार्क ओपन के पहले दौर में ही बाहर हुए सात्विक-चिराग

Satvik Chirag

डेनमार्क में भारत के बड़े खिलाड़ियों के जल्दी बाहर होने वालों की लिस्ट में सात्विक-चिराग भी शामिल हो गए हैं। उनसे पहले मंगलवार को पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन भी अपने शुरुआती मैच हार गए थे।

बुधवार को डेनमार्क ओपन में भारत की टॉप पुरुष डबल्स जोड़ी सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी को चौंकाने वाली हार का सामना करना पड़ा और वे पहले ही राउंड में बाहर हो गए। पुरुष डबल्स बैडमिंटन रैंकिंग में पांचवें स्थान पर मौजूद सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी को चीन के हे जिटिंग और रेन जियांगयु (वर्ल्ड नंबर 37) से 12-21, 21-15, 21-19 से हार मिली।

मंगलवार को पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन भी सुपर 750 टूर्नामेंट के पहले राउंड में बाहर हो गए थे। सात्विक-चिराग ने आत्मविश्वास के साथ शुरुआत की और पहले गेम में दबदबा बनाए रखा, लेकिन दूसरे गेम में बाजी पलट गई। हे जिटिंग और रेन जियांगयु ने इंटरवल तक 11-4 की बढ़त बना ली और मैच को निर्णायक गेम (डिसाइडर) तक ले गए।

आखिरी गेम में काफी कड़ा मुकाबला रहा। चीनी जोड़ी ने इंटरवल तक 11-10 की मामूली बढ़त बनाई और फिर अपनी बढ़त को बनाए रखते हुए जीत हासिल की, जिससे भारतीय जोड़ी टूर्नामेंट से बाहर हो गई।हे जिटिंग और रेन जियांगयु के खिलाफ चार मुकाबलों में सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की यह पहली हार थी।

वहीं दूसरी ओर, पुरुष सिंगल्स में आयुष शेट्टी भी पहले राउंड में बाहर हो गए। उन्हें इंडोनेशिया के अल्वी फरहान से 21-11, 13-21, 21-10 से हार का सामना करना पड़ा। पहले गेम में आयुष शेट्टी की शुरुआत धीमी रही और जल्द ही वे 11-4 से पिछड़ गए, जबकि अल्वी फरहान ने बिना किसी परेशानी के पहला गेम जीत लिया।

इसके बाद भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने दूसरे गेम में वापसी की; इंटरवल तक वे 11-8 से आगे थे और उसके बाद सिर्फ़ पाँच पॉइंट गंवाकर मैच को निर्णायक गेम तक ले गए।

हालाँकि, निर्णायक गेम भी पहले गेम जैसा ही रहा; आयुष शेट्टी इंटरवल तक 11-3 से पिछड़ गए और कभी वापसी नहीं कर पाए, जिससे अल्वी फरहान ने मैच जीत लिया और अगले दौर में अपनी जगह पक्की कर ली। अल्वी फरहान के हाथों आयुष शेट्टी की यह हार, इस इंडोनेशियाई खिलाड़ी के खिलाफ़ खेले गए छह मैचों में उनकी चौथी हार थी।

उनके बाहर होने का मतलब यह भी है कि पुरुष सिंगल्स में अब किदांबी श्रीकांत ही एकमात्र भारतीय खिलाड़ी बचे हैं।वहीं, आज बाद में महिला सिंगल्स में अश्मिता चालिहा, देविका सिहाग और उन्नति हुड्डा भी खेलती नज़र आएँगी। महिला डबल्स में ट्रेसा जॉली-गायत्री गोपीचंद और रुतपर्णा पांडा-श्वेतपर्णा पांडा की जोड़ियाँ भी मुक़ाबला करेंगी।