ग्वालियर में ट्रक ने श्रद्धालुओं को कुचला, 15 की मौत

भोपाल। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शनिवार की देर रात को एक बड़ा हादसा हो गया। एक तेज रफ्तार ट्रक ने 41 श्रद्धालुओं को कुचल दिया। इसस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई और दो पुलिसकर्मी सहित 26 लोग घायल हैं। हादसा देर रात करीब डेढ़ बजे चीनौर रोड पर ढलान के पास हुआ, जहां श्रद्धालु शीतला माता मंदिर में दर्शन के लिए सड़क किनारे लाइन में लगे थे।

बताया गया है कि चीनौर की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक ढलान पर बेकाबू हो गया। यह भी बताया गया है कि ड्राइवर गूगल मैप की मदद से ट्रक चला रहा था। ढलान पर ट्रक पुलिस चेकपोस्ट तोड़ते हुए लोगों को कुचलकर मंदिर की बाहरी दीवार और गेट से जा टकराया। इससे मंदिर की दीवार ढह गई। कई लोग मलबे में दब गए।

हादसे में मारे गए और घायल हुए लोगों के परिजनों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। हालांकि पुलिस ने ट्रक ड्राइवर और ट्रक मालिक दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। ड्राइवर ने पुलिस को बताया कि ट्रक का ब्रेक फेल हो गया था। इस बीच हादसे के बाद सरकार ने सिटी एसपी को हटा दिया है। साथ ही आठ अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को भी निलंबित स्पेंड किया गया है। इनमें चार टीआई हैं।

पटना तारामंडल में बनेगा बिहार का पहला एस्ट्रो पार्क! सूर्य घड़ी से चलेगा समय का पता, टेलीस्कोप से दिखेंगे ग्रह

सूर्य की चाल से समय का अंदाजा लगाना हो या धरती के घूमने की स्पीड को करीब से समझना, अब इन वैज्ञानिक सिद्धांतों को जानने के लिए सिर्फ किताबों के पन्ने पलटने की जरूरत नहीं होगी। बिहार की राजधानी पटना के इंदिरा गांधी विज्ञान परिसर यानी तारामंडल में कुछ ऐसा ही खास इंतजाम होने जा रहा है। यहां विज्ञान को देखकर, समझकर और अनुभव करके सीखा जा सकेगा। यहां एस्ट्रो पार्क और मॉडर्न ऑब्जर्वेटरी डोम बनाया जा रहा है। यह पहल खास तौर पर स्टूडेंट्स, खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों और विज्ञान को करीब से जानने की इच्छा रखने वाले लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

क्या क्या होगा एस्ट्रो पार्क के खास

इनकम टैक्स गोलंबर के पास स्थित तारामंडल परिसर में बन रहे एस्ट्रो पार्क सूर्य घड़ी की थीम पर आधारित होगा। यहां11 इंटरैक्टिव साइंस मॉडल लगाए जाने हैं। इनके माध्यम से दर्शक सूर्यघड़ी, पृथ्वी की घूर्णन गति और समय की गणना जैसे वैज्ञानिक सिद्धांतों को सरल और रोचक तरीके से समझ सकेंगे। यानी विज्ञान की पढ़ाई केवल किताबों और क्लास तक सीमित नहीं रहेगी बल्कि दर्शकों को उसे अपनी आंखों से देखने और अनुभव करने का मौका भी मिलेगा।

सूर्य घड़ी से समझेंगे समय का विज्ञान

एस्ट्रो पार्क में अब तक दो साइंस मॉडल लगाए जा चुके हैं। इनमें इंटरैक्टिव सन डायल और वर्टिकल सन डायल शामिल हैं। ये मॉडल सूर्य की स्थिति और छाया के आधार पर समय की गणना जैसे सिद्धांतों को समझने में मदद करेंगे। सन डायल यानी सूर्य घड़ी समय मापने की प्राचीन वैज्ञानिक विधियों में से एक है। सूर्य की स्थिति बदलने के साथ छाया की दिशा और लंबाई में होने वाले बदलाव से समय का अनुमान लगाया जाता है। एस्ट्रो पार्क में ऐसे मॉडलों के जरिये स्टूडेंट्स यह समझ सकेंगे कि आधुनिक घड़ियों के प्रचलन से पहले समय की गणना किस तरह की जाती थी और सूर्य-पृथ्वी की गति का इससे क्या संबंध है। पार्क में बाकी नौ साइंस मॉडल लगाए जाने हैं। इनके पूरा होने के बाद परिसर में विज्ञान और खगोल विज्ञान से जुड़े सिद्धांतों को समझने के लिए एक नया शैक्षणिक आकर्षण तैयार होगा।

छत पर बनेगा ऑब्जर्वेटरी डोम, टेलीस्कोप से दिखेंगे ग्रह

एस्ट्रो पार्क के साथ तारामंडल की छत पर अत्याधुनिक ऑब्जर्वेटरी डोम बनाने की भी प्लानिंग है। इस परियोजना का सबसे खास आकर्षण यहां स्थापित होने वाला जाइंट टेलीस्कोप होगा। इसके लिए नेशनल काउंसिल ऑफ साइंस म्यूजियम (एनसीएसएम) की ओर से करीब एक करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।

उच्च क्षमता वाले लेंस और ट्रैकिंग सिस्टम से लैस इस टेलीस्कोप की मदद से सूर्य, चंद्रमा और मंगल, बृहस्पति और शनि जैसे खगोलीय पिंडों को प्रत्यक्ष देखने की सुविधा भी देने की योजना है। इससे लोगों को अंतरिक्ष और ग्रहों के बारे में पढ़ने के साथ उन्हें दूरबीन के माध्यम से देखने का अवसर भी मिल सकेगा।

1.32 करोड़ रुपये से आकार ले रहा प्रोजेक्ट

तारामंडल परिसर में एस्ट्रो पार्क और ऑब्जर्वेटरी डोम के निर्माण पर कुल 1.32 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने हैं। इसमें एस्ट्रो पार्क के लिए 32.56 लाख रुपये और ऑब्जर्वेटरी डोम के लिए 99.71 लाख रुपये निर्धारित किए गए हैं। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी भवन निर्माण विभाग को सौंपी गई है। सिविल वर्क चल रहा है। इस परियोजना पर जनवरी 2026 से काम शुरू हुआ था। परियोजना के पूरा होने पर तारामंडल परिसर में खगोल विज्ञान से जुड़ी गतिविधियों और शैक्षणिक अनुभवों का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।

रोजाना 1500 से अधिक दर्शक पहुंचते हैं तारामंडल

पटना का इंदिरा गांधी विज्ञान परिसर पहले से ही विज्ञान और अंतरिक्ष में दिलचस्पी रखने वाले लोगों के बीच लोकप्रिय है। यहां हर दिन करीब 1500 से अधिक दर्शकों के पहुंचने की जानकारी मिली है। तारामंडल में प्रतिदिन संचालित होने वाले आठों शो में भी दर्शकों की अच्छी भीड़ रहती है। इसके अलावा वीआर और दूसरे शो को लेकर भी लोगों में खासा उत्साह देखने को मिलता है।

पटना से सच्चिदानंद की रिपोर्ट

सरकार का बड़ा फैसला: गन्ने के रस और चीनी से एथेनॉल बनाने पर रोक, समझिए वजह

Sugarcane Ethanol Ban: केंद्र सरकार ने एथेनॉल खरीदने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सरकारी तेल कंपनियां गन्ने के रस, चीनी, शुगर सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल की खरीद नहीं कर सकेंगी। सरकार ने एथेनॉल बनाने के लिए चीनी के इस्तेमाल को शून्य करने का निर्देश दिया है। यह नियम 1 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले नए सप्लाई वर्ष में लागू होगा।

सरकार का मकसद देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है। साथ ही, चीनी की कीमतों पर दबाव कम करना भी इस फैसले की वजह है। इसके लिए सरकारी तेल कंपनियों ने करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने का टेंडर जारी किया है।

1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदेंगी तेल कंपनियां

इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, मैंगलोर रिफाइनरी और नुमालीगढ़ रिफाइनरी ने मिलकर यह टेंडर जारी किया है। इसके तहत 1 नवंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2027 तक एथेनॉल की सप्लाई होनी है।

नए नियमों के मुताबिक, कंपनियां गन्ने के रस, चीनी, शुगर सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल के लिए बोली नहीं मांगेंगी। हालांकि, दूसरे कच्चे माल से बने एथेनॉल की खरीद जारी रहेगी।

मक्का और चावल से बने एथेनॉल की कीमत कितनी?

सरकार ने अलग-अलग कच्चे माल से बने एथेनॉल की बेस कीमत भी तय की है। मक्का से बने एथेनॉल की कीमत ₹66.07 प्रति लीटर रखी गई है। इसके अलावा ₹2.79 प्रति लीटर का अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा।

खराब खाद्यान्न से बने एथेनॉल की बेस कीमत ₹64 प्रति लीटर तय की गई है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) से मिलने वाले अतिरिक्त चावल से बने एथेनॉल के लिए ₹60.32 प्रति लीटर की दर रखी गई है। वहीं, सी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल की कीमत ₹57.97 प्रति लीटर होगी।

इन दरों में GST और परिवहन का खर्च शामिल नहीं है। ये खर्च अलग से देना होगा। राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत मंजूर दूसरे कच्चे माल से बने एथेनॉल की खरीद टेंडर में लागू सबसे कम दर पर होगी।

चार चरणों में होगी एथेनॉल की सप्लाई

एथेनॉल की सप्लाई को चार हिस्सों में बांटा गया है। पहला चरण नवंबर 2026 से जनवरी 2027 तक होगा। दूसरा फरवरी से अप्रैल 2027, तीसरा मई से जुलाई 2027 और चौथा अगस्त से अक्टूबर 2027 तक चलेगा।

हालांकि, चौथे चरण में FCI से मिलने वाले अतिरिक्त चावल से बने एथेनॉल की सप्लाई के लिए दिए गए प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

कोर्ट के फैसले के हिसाब से बदल सकता है आवंटन

टेंडर में एथेनॉल के आवंटन को लेकर एक शर्त भी रखी गई है। पहली तिमाही में होने वाला आवंटन कुछ लंबित कानूनी मामलों के फैसले पर निर्भर करेगा। ये मामले तेल कंपनियों के बीच एथेनॉल बांटने के तरीके से जुड़े हैं।

कंपनियों ने कहा है कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक आवंटन में बदलाव किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर आवंटन घटाया जा सकता है या पूरी तरह रद्द भी किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में कंपनियां सप्लायर को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार नहीं होंगी।

दूसरी कंपनी से खरीदकर एथेनॉल नहीं बेच सकेंगे सप्लायर

टेंडर में सप्लायर के लिए भी नियम तय किए गए हैं। उन्हें मंजूर कच्चे माल से एथेनॉल अपनी ही रजिस्टर्ड या स्वीकृत डिस्टिलरी में बनाना होगा।

कोई सप्लायर किसी तीसरे पक्ष से एथेनॉल खरीदकर सरकारी तेल कंपनियों को नहीं बेच सकेगा। ये सभी नियम 2026-27 के सप्लाई वर्ष के लिए जारी टेंडर पर लागू होंगे। नया सप्लाई वर्ष 1 नवंबर 2026 से शुरू होगा।

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iPhone Duo की बुकिंग शुरू होते ही आउट ऑफ स्टॉक, अब अगले साल मिलेगा 299000 में!

iPhone Duo की बुकिंग शुरू होते ही आउट ऑफ स्टॉक, अब अगले साल मिलेगा 299000 में!

apple duo

iphone Duo : Apple का पहला फोल्डेबल iPhone Duo वैसे तो लॉन्च हो चुका है, लेकिन इसकी बिक्री स्टार्ट नहीं हुई है। कंपनी ने 16 अक्टूबर को इस फोन की प्री-बुकिंग शुरू की और कुछ ही समय में यह आउट ऑफ स्टॉक हो गया। ग्राहकों को अब अगले साल तक इंतजार करना होगा। ALSO READ: Apple iPhone Duo की प्री-बुकिंग शुरू, Samsung Galaxy Z Fold 8 को मिला फायदा, कीमत 2.99 लाख रुपए

मतलब कुछ ही खुशकिस्मत ग्राहकों को यह 23 अक्टूबर को मिलेगा, जिन्होंने समय रहते प्री-ऑर्डर दे दिया था। भारत में अब इस फोन की शिपिंग डेट अब बढ़ाकर 23 जनवरी 2027 कर दी गई है। 

 

iPhone Duo की प्री-बुकिंग Apple की आधिकारिक वेबसाइट और Apple Store ऐप के जरिए की गई। इसकी शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपए रखी गई है। भारतीय समय के अनुसार, शुक्रवार शाम साढ़े 5 बजे से फोन के प्री-ऑर्डर शुरू हुए और कुछ समय में ही शिपिंग डेट 23 जनवरी तक पहुंच गई।

 

iPhone Duo ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, जापान, मलेशिया, मैक्सिको, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात समेत 70 से अधिक देशों और क्षेत्रों में उपलब्ध होगा। शेष देशों में लोगों को इंतजार करना होगा।

 

Apple ने पिछले महीने iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के साथ iPhone Duo पेश किया था। जहां iPhone 18 Pro सीरीज की प्री-बुकिंग उसी सप्ताह शुरू हो गई थी।

रूसी तेल और गैस की खरीद पर ट्रंप ने प्रतिबंधों से दी छूट, भारत से हटी 100% तक टैरिफ की तलवार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय हितों का हवाला देते हुए रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी कानून के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और ड्यूटीज यानि शुल्कों से छूट दी है। ट्रंप ने शुक्रवार रात जारी एक कार्यकारी आदेश में कहा कि कुछ प्रतिबंधों को लागू नहीं करना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। ट्रंप ने कहा, ‘‘मैं ग्राहम कानून के तहत ऐसे प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों को लागू करने से छूट दे रहा हूं।’’ उन्होंने अमेरिकी संसद को एक सर्टिफिकेशन सौंपा है, जिसमें कहा गया है कि इस समय ऐसी छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है।

‘लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम’ ट्रंप को रूस पर व्यापक प्रतिबंध लगाने और रूस से सबसे अधिक तेल व गैस खरीदने वाले देशों पर भारी टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इस कानून को ग्राहम कानून के नाम से जाना जाता है। इसे अमेरिकी कांग्रेस ने 16 सितंबर को पास किया था और ट्रंप ने दो दिन बाद इसे साइन किया था।

इस कानून के तहत ट्रंप को इसे लागू किए जाने के 30 दिन के अंदर रूस से कच्चा तेल या गैस आयात करने वाले 5 सबसे बड़े देशों से अमेरिका में आने वाले सभी सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार दिया गया था। ग्राहम कानून की धारा 115 में यह प्रावधान भी है कि अगर प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों को लागू करने से छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में हो, तो राष्ट्रपति ऐसी छूट दे सकते हैं।

भारत से फिलहाल हटी 100 प्रतिशत टैरिफ की तलवार

रूस से सबसे अधिक तेल व गैस खरीदने वाले देशों में चीन और भारत शामिल हैं। ग्राहम कानून के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और ड्यूटीज से छूट के नए फैसले से अमेरिका जाने वाले भारतीय सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ की तलवार फिलहाल के लिए हट गई है। ट्रंप ने कहा, ‘‘ग्राहम कानून की धारा 115(ए) के तहत, मैं ग्राहम कानून की धारा 112 और 113 या इस आदेश में निर्धारित किसी भी शुल्क को लागू करने से छूट देता हूं।’’ धारा 113 में रूस से कच्चा तेल या प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों या उसे प्रतिबंधों से बचने में मदद करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान है।

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ग्राहम कानून पर विदेश मंत्री एस जयशंकर और मार्को रुबियो की हुई थी मीटिंग

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पिछले महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा से इतर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बैठक के दौरान ग्राहम कानून को लेकर चिंता जताई थी। समझा जाता है कि जयशंकर ने रुबियो को बताया था कि भारत की तेल रिफाइनरियां मुख्य रूप से मध्यम श्रेणी के सल्फरयुक्त कच्चे तेल की प्रोसेसिंग के लिए तैयार की गई हैं, जिसकी आपूर्ति पश्चिम एशिया के देशों और रूस से होती है।उन्होंने रुबियो को यह भी बताया था कि वेनेजुएला से हैवी ग्रेड का कच्चा तेल मिलता है, जबकि अमेरिका से हल्के ग्रेड का कच्चा तेल आता है। भारत की रिफाइनरियों में इस्तेमाल से पहले इन्हें दूसरे तेल के साथ मिलाना होगा।

ईरान युद्ध के चलते पश्चिम एशिया के देशों से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण भारत अपनी अर्थव्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए रूसी कच्चे तेल पर निर्भर है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो कुछ दिन बाद भारत आने वाले हैं।

कौन हैं केटी जकारिया, जिन्हें ट्रंप ने 5 दिन में ही प्रेस सेक्रेटरी के पद से हटाया?

Katie Zacharia: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी बनीं केटी जकारिया का कार्यकाल कुछ ही दिनों में खत्म हो गया। ट्रंप ने हाल ही में अचानक उनकी नियुक्ति का ऐलान किया था, लेकिन अब उन्हें इस पद से हटा दिया गया है। इस घटनाक्रम ने ट्रंप के पहले कार्यकाल की यादें ताजा कर दी हैं, जब व्हाइट हाउस में अधिकारियों को बार-बार बदला जाता था।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, शुक्रवार को व्हाइट हाउस के दो अधिकारियों ने जकारिया के पद छोड़ने की पुष्टि की। इनमें से एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें पद से हटा दिया गया है, जबकि दूसरे ने बताया कि वह अब इस जिम्मेदारी से अलग हो रही हैं।

केटी जकारिया को पद से हटाने से पहले के पांच दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। इस दौरान उन्हें कई असहज सवालों का सामना करना पड़ा। सवाल पूछने वालों में डोनाल्ड ट्रंप के कुछ प्रमुख मीडिया समर्थक भी शामिल थे। दिलचस्प बात यह है कि जकारिया को पद से हटाए जाने की पुष्टि होने से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से उन्हें इस नौकरी पर दोबारा विचार करने की सलाह दी थी।

व्हाइट हाउस में केटी जकारिया का कार्यकाल कैसे लड़खड़ा गया

ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को जकारिया की नियुक्ति की घोषणा की थी। उन्हें कैरोलीन लेविट की जगह नियुक्त किया गया था, जो अब तक की सबसे कम उम्र की व्हाइट हाउस प्रेस सचिव थीं और कई सालों से ट्रम्प के करीबी लोगों में शामिल रही थीं।

केटी जकारिया रूढ़िवादी विचारों वाली राजनीतिक टिप्पणीकार हैं। ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) की मूल कंपनी ‘ट्रम्प मीडिया’ के संचार विभाग में काम कर चुकी थीं। इसके अलावा, ट्रम्प के दूसरे प्रशासन के दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए ‘डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी’ में भी काम किया था।

हालांकि, मंगलवार को जब वह पहली बार व्हाइट हाउस प्रेस कोर के सामने आईं, तो तुरंत ही उन पर सवाल उठने लगे।

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ब्रीफिंग के दौरान जकारिया असहज दिखीं। वे रुक-रुक कर बोल रही थीं और ट्रम्प की उपलब्धियों का जिक्र कर रही थीं। उन्होंने केवल तीन पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए-ये सभी पत्रकार ऐसे मीडिया संस्थानों से थे जिनका झुकाव रूढ़िवादी विचारधारा की ओर था या जो ट्रम्प के समर्थक थे। लगभग 14 मिनट बाद उन्होंने बातचीत खत्म कर दी।

बाद में जकारिया ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर इस सेशन को छोटा रखा था, क्योंकि उसी दिन सुबह ट्रम्प को पत्रकारों के सवालों के जवाब देने थे। उन्होंने यह भी कहा कि व्हाइट हाउस के कर्मचारियों ने उन्हें पहले से पूरी जानकारी (ब्रीफिंग) नहीं दी थी।

इसके बाद, बुधवार और गुरुवार को वे अलास्का, एरिजोना और मोंटाना में ट्रम्प की रैलियों में उनके साथ गईं, लेकिन उन्होंने कोई और प्रेस ब्रीफिंग नहीं की।

हालांकि, पत्रकारों के सामने उनका यह प्रदर्शन उन कई मुद्दों में से सिर्फ एक था, जो उनके छोटे कार्यकाल के दौरान चर्चा का मुख्य विषय बने रहे।

केटी जकारिया की कानूनी योग्यताओं को लेकर विवाद

जकारिया की प्रोफेशनल बैकग्राउंड पर भी सवाल उठे, खासकर तब जब उन्होंने कुछ रूढ़िवादी टीवी नेटवर्कों पर खुद को वकील बताया।

जकारिया ने पेपरडाइन यूनिवर्सिटी के लॉ स्कूल से पढ़ाई की है, लेकिन वह कैलिफोर्निया की बार परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं। इसके अलावा, उनके पास अमेरिका में वकालत करने के लिए जरूरी कोई अन्य योग्यता भी नहीं थी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला जिससे पता चले कि वह अमेरिका के किसी भी राज्य या डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया में वकील के तौर पर पंजीकृत थीं या उन्हें बार में शामिल किया गया था।

हालांकि, जकारिया ने खुद को ‘वकील’ कहने का बचाव करते हुए कहा कि जब वह कानूनी विश्लेषण देती थीं, तो यह शब्द इस्तेमाल करना सही था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने चीन में वकील के तौर पर काम किया था।

रॉयटर्स को दिए एक बयान में उन्होंने कहा, “मैंने सभी जरूरी योग्यताओं के साथ इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन लॉ (अंतरराष्ट्रीय लेन-देन कानून) की प्रैक्टिस की है।”

इस विवाद ने उन रूढ़िवादी मीडिया हस्तियों का भी ध्यान खींचा, जो आमतौर पर ट्रम्प प्रशासन का समर्थन करते हैं।

वहीं, फॉक्स न्यूज के होस्ट शॉन हैनिटी, जो लंबे समय से ट्रम्प के सहयोगी रहे हैं, ने सवाल उठाया कि जकारिया ने अपनी योग्यताओं के बारे में खुलकर बात क्यों नहीं की। जब उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि वह कैलिफोर्निया बार परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं, तो हैनिटी ने पूछा, “सीधे यह क्यों नहीं कह दिया कि ‘मैंने पेपरडाइन लॉ स्कूल से पढ़ाई की, फिर करियर का एक अलग रास्ता चुन लिया, और मैंने एक बार बार परीक्षा दी थी, लेकिन पास नहीं हो पाई’?”

उन्होंने ‘लॉयर’ (वकील) और ‘अटॉर्नी’ (कानूनी प्रतिनिधि) शब्दों के बीच उनके द्वारा किए गए अंतर को भी चुनौती दी और सवाल किया कि उन्होंने सीधे तौर पर यह क्यों नहीं कहा कि उन्होंने कभी वकालत नहीं की है।

जकारिया ने फिर दोहराया कि वह वकील के तौर पर काम नहीं कर रही थीं और न ही कोई कानूनी सलाह दे रही थीं। शुक्रवार को फॉक्स न्यूज के एक अलग इंटरव्यू में, उन्होंने कहा कि उनसे यह कभी नहीं पूछा गया था कि प्रेस सेक्रेटरी बनने से पहले उन्होंने बार परीक्षा पास की है या नहीं।

जकारिया और ट्रम्प, दोनों का यही कहना था कि उन्हें प्रशासन में वकील के तौर पर नहीं, बल्कि कम्युनिकेशंस (संचार) विभाग में काम करने के लिए रखा गया था।

‘मैं फिर से विचार करने को कहूंगा’: ट्रम्प ने उनके भविष्य पर सवाल उठाए

शुक्रवार तक, जकारिया के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया था। उसी दिन फॉक्स न्यूज चैनल पर एक कार्यक्रम के दौरान, उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति का उन पर अभी भी भरोसा है।

उन्होंने जवाब दिया, “मुझे उम्मीद है कि मैं अपने आस-पास के सभी लोगों का भरोसा और विश्वास जीत सकूंगी।” उन्होंने यह बताने से भी इनकार कर दिया कि वह व्हाइट हाउस में अपनी अगली प्रेस ब्रीफिंग कब करेंगी।

कुछ घंटों बाद, ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने उन्हें अपने पद पर फिर से विचार करने की सलाह दी थी। जॉर्जिया में एक रैली के लिए रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में पत्रकारों से बात करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि उनका मानना ​​है कि मीडिया ने जकारिया के साथ अनुचित व्यवहार किया है।

ट्रंप ने कहा, “मैंने उससे कहा, ‘मुझे लगता है कि खुश रहना तुम्हारे लिए बेहतर होगा।'”

“मैंने कहा, ‘सच कहूं तो, अगर मैं तुम्हारी जगह होता, तो मैं फिर से सोचता।’ मैंने कहा, ‘तुम इस बारे में सोच लो, लेकिन मैं तो फिर से विचार करता।'”

ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने उससे पूछा था, “‘केटी, क्या तुम्हें इसकी जरूरत है? मुझे नहीं लगता कि तुम्हें इसकी जरूरत है।'” उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि “उसका जीवन अच्छा रहे,” न कि वह “मीडिया के हाथों बुरी तरह परेशान” हो।

उस समय, राष्ट्रपति ने उन्हें पद से हटाने की घोषणा तो नहीं की, लेकिन संकेत दिया कि अपनी यात्राओं से लौटने के बाद वे उनके भविष्य पर चर्चा करेंगे। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “जब मैं वापस आऊंगा, तो हम बात करेंगे।”

जब उनसे किसी संभावित विकल्प (रिप्लेसमेंट) के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा कि इस पद के लिए कई लोग इच्छुक हैं।

व्हाइट हाउस में एक जाना-पहचाना फेरबदल, लेकिन जकारिया के लिए आगे क्या?

जकारिया को हटाना उसी तरह के अचानक किए गए बदलावों की वापसी है, जो अक्सर ट्रम्प के पहले कार्यकाल में देखने को मिलते थे, लेकिन उनके दूसरे कार्यकाल में ऐसे बदलाव कम ही हुए थे।

उनका कार्यकाल एंथनी स्कारामुची से भी छोटा रहा, जो 2017 में व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर के तौर पर सिर्फ 10 दिन तक इस पद पर रहे थे।

उनके जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए, स्कारामुची ने ‘X’ पर लिखा, “रिकॉर्ड तो टूटने के लिए ही बनते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन मुझे दूसरों के दुख में कोई खुशी नहीं मिलती।”

प्रेस सेक्रेटरी के पद से हटाए जाने के बावजूद, हो सकता है कि जकारिया ट्रम्प प्रशासन को पूरी तरह से न छोड़ें। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें प्रशासन में कोई दूसरी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

ABC न्यूज ने दो सूत्रों के हवाले से बताया कि केटी जकारिया को ट्रंप प्रशासन में ही किसी दूसरी जिम्मेदारी में भेजे जाने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बारे में जल्द ही आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है।

हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक यह नहीं बताया है कि प्रेस सेक्रेटरी के पद पर जकारिया की जगह कौन लेगा।

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ट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोका:बोले-इसमें अमेरिका का फायदा; 8 दिन पहले रूस से डीजल खरीदने की डील की थी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस कानून के तहत रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाया जा सकता था। इन देशों में चीन, भारत, स्लोवाकिया समेत हंगरी और अजरबैजान शामिल थे। प्रतिबंध से जुड़े कानून का मकसद रूस की कमाई के रास्ते बंद करना था, ताकि यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए उसे पैसा जुटाने में मुश्किल हो। खास बात ये है कि ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को ही रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ डीजल खरीदने की डील की थी। ट्रम्प को 30 दिन के अंदर फैसला लेना था ट्रम्प ने रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले बिल (लिंडसे ग्राहम एक्ट) पर 18 सितंबर 2026 को साइन किए थे। 16 सितंबर को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने इसे 262-159 वोटों से मंजूरी दी थी। कानून पर साइन करने के बाद ट्रम्प को प्रतिबंध लगाने का फैसला 30 दिन के अंदर करना था। हालांकि, ट्रम्प ने इससे पहले ही प्रतिबंधों और टैरिफ पर छूट दे दी। भारत के तेल आयात में रूस का 45% हिस्सा भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है। अगस्त 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी करीब 45% थी। भारत ने अगस्त में रूस से रोजाना औसतन 20.8 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा था। ऐसे में रूस से तेल खरीदने पर 100% तक टैरिफ लगने का खतरा भारत के लिए चिंता की वजह था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को कहा था कि भारत तेल की उपलब्धता और दुनिया के हालात को देखकर अपनी ऊर्जा जरूरतें पूरी करने का फैसला करता है। भारत पहले भी अमेरिकी अधिकारियों के सामने यह मुद्दा उठा चुका है। जानकारों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी संकट और होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही पर असर के बीच रूस से तेल की सप्लाई कम करना दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ा सकता है।
इसलिए अमेरिका के लिए रूस पर और सख्त प्रतिबंध लगाना आसान फैसला नहीं है। मिडटर्म चुनाव से पहले तेल की कीमतों की चिंता ट्रम्प ने यह फैसला ऐसे समय लिया है, जब अमेरिका में तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। यूक्रेन के रूसी तेल रिफाइनरियों पर हमलों से तेल की सप्लाई प्रभावित हो रही है। इससे दुनिया में तेल महंगा हो रहा है। ट्रम्प चाहते हैं कि तेल की कीमतें कम हों, ताकि अमेरिका में पेट्रोल सस्ता हो सके। नवंबर में अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं। इन चुनावों में मतदाता महंगाई और पेट्रोल की कीमतों जैसे मुद्दों पर सरकार का काम देखेंगे। इस फैसले से यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की नाराज हैं। यूरोपीय अधिकारियों ने भी इसका विरोध किया। इसी हफ्ते अमेरिकी संसद के दोनों दलों के कुछ सदस्यों ने ट्रम्प से डीजल की बिक्री पर दी गई छूट वापस लेने की मांग की। अमेरिकी सांसदों ने ट्रम्प के फैसले का विरोध किया कानून को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों पार्टियों का समर्थन मिला था। हालांकि रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले नए कानून को फिलहाल रोकने के ट्रम्प के फैसले की अमेरिकी सांसदों ने आलोचना की। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक कुछ सांसदों को पहले से आशंका थी कि ट्रम्प कानून के तहत रूस पर सख्ती नहीं करेंगे। ————————- ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका में 30 हजार भारतीय मजदूरों ने काम छोड़ा:इनके पास पूरे कागजात नहीं, पकड़े जाने का डर अमेरिका के कैलिफोनिया में करीब 30 हजार भारतीय मजदूरों को खेती का काम छोड़ना पड़ा है। इनमें से कई मजदूरों के पास अमेरिका में रहने और काम करने के पूरे कागजात नहीं हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Apple iPhone Duo की प्री-बुकिंग शुरू, Samsung Galaxy Z Fold 8 को मिला फायदा, कीमत 2.99 लाख रुपए

Apple iPhone Duo की प्री-बुकिंग शुरू, Samsung Galaxy Z Fold 8 को मिला फायदा,  कीमत 2.99 लाख रुपए

iPhone Duo

Apple के नए iPhone Duo को लेकर बाजार में दिलचस्पी बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस डिवाइस के लॉन्च के बाद Samsung के अपकमिंग फोल्डेबल स्मार्टफोन Galaxy Z Fold 8 को लेकर ऑनलाइन सर्च में भी बड़ा उछाल देखने को मिला है। हालांकि, सर्च में बढ़ोतरी से बिक्री या ग्राहकों की पसंद पर पड़ने वाले वास्तविक असर का पता नहीं चलता।

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Apple ने पिछले महीने iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के साथ iPhone Duo पेश किया था। जहां iPhone 18 Pro सीरीज की प्री-बुकिंग उसी सप्ताह शुरू हो गई थी और ये फोन बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, वहीं iPhone Duo की प्री-बुकिंग आज दोपहर 12 बजे UTC से शुरू होने की जानकारी दी गई है।

 

70 से ज्यादा देशों में प्री-बुकिंग

 

iPhone Duo की प्री-बुकिंग Apple की आधिकारिक वेबसाइट और Apple Store ऐप के जरिए की जा सकेगी। यह ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, जापान, मलेशिया, मैक्सिको, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात समेत 70 से अधिक देशों और क्षेत्रों में उपलब्ध होगा। रिपोर्ट के अनुसार, इन बाजारों में फोन की बिक्री और डिलीवरी 23 अक्टूबर से शुरू होगी। इसके बाद 30 अक्टूबर से इसे 28 अन्य देशों में भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा।

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भारत में iPhone Duo की कीमत 2,99,900 रुपए

 

Apple के नए फोन की कीमत प्रीमियम सेगमेंट में रखी गई है। भारत में iPhone Duo की शुरुआती कीमत 2,99,900 रुपए बताई गई है। इसकी तुलना में iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max की शुरुआती कीमत क्रमशः 1,64,900 रुपए और 1,79,900 रुपए है। Samsung Galaxy Z Fold 8 को कैसे मिला फायदा?

 

iPhone Duo के चर्चा में आने के साथ Samsung Galaxy Z Fold 8 को लेकर ऑनलाइन सर्च बढ़ने की खबर सामने आई है। इसकी एक संभावित वजह फोल्डेबल स्मार्टफोन सेगमेंट में बढ़ती प्रतिस्पर्धा हो सकती है। Apple और Samsung के प्रीमियम डिवाइसों की तुलना करने वाले ग्राहक डिजाइन, डिस्प्ले, मल्टीटास्किंग और कीमत जैसे पहलुओं पर ध्यान दे सकते हैं। हालांकि, Galaxy Z Fold 8 की सर्च में बढ़ोतरी के पीछे iPhone Duo ही एकमात्र कारण है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।

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क्या भारत में अभी खरीद पाएंगे iPhone Duo?

 

भारत उन बाजारों में शामिल है जहां iPhone Duo की प्री-बुकिंग उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है। इच्छुक ग्राहक Apple की आधिकारिक वेबसाइट और Apple Store ऐप पर उपलब्धता और कीमत की पुष्टि कर सकते हैं। iPhone 18 Pro या iPhone 18 Pro Max खरीदने की योजना बना रहे ग्राहक इन दोनों मॉडल की कीमत और फीचर्स की तुलना करके फैसला कर सकते हैं। वहीं, iPhone Duo खरीदने से पहले इसकी कीमत, उपलब्ध कॉन्फिगरेशन और अपनी जरूरत के अनुसार फीचर्स का मूल्यांकन करना उपयोगी रहेगा।

iQOO Pad Pro 8.8 Launch : 9,020mAh बैटरी, एक्टिव कूलिंग फैन और 165Hz OLED डिस्प्ले से होगा लैस

iQOO Pad Pro 8.8 Launch : 9,020mAh बैटरी, एक्टिव कूलिंग फैन और 165Hz OLED डिस्प्ले से होगा लैस

iQOO Pad Pro 8.8

स्मार्टफोन और टैबलेट निर्माता iQOO अपने नए टैबलेट iQOO Pad Pro 8.8 को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है। कंपनी ने इस टैबलेट के कई प्रमुख फीचर्स का खुलासा किया है। इसे खास तौर पर गेमिंग पसंद करने वाले यूजर्स को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। इसमें 9,020mAh की बड़ी बैटरी, 165Hz रिफ्रेश रेट वाला OLED डिस्प्ले और हीट कम करने के लिए एक्टिव कूलिंग फैन दिया जाएगा।
 

रिपोर्ट के मुताबिक, यह टैबलेट चीन में इसी महीने लॉन्च हो सकता है। इसके साथ iQOO Neo 12 स्मार्टफोन भी पेश किए जाने की चर्चा है। हालांकि, कंपनी ने अभी तक टैबलेट की कीमत और सभी स्पेसिफिकेशन्स की आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।
 

iQOO Pad Pro 8.8 में मिलेगा 165Hz OLED डिस्प्ले

iQOO Pad Pro 8.8 में 8.8 इंच का OLED डिस्प्ले दिया जाएगा। यह 165Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा। हाई रिफ्रेश रेट के कारण गेमिंग के दौरान स्क्रीन पर मूवमेंट ज्यादा स्मूद दिखाई देने की उम्मीद है। खासकर फर्स्ट-पर्सन शूटर (FPS) गेम खेलने वाले यूजर्स को इससे फायदा मिल सकता है। हालांकि, कंपनी ने अभी डिस्प्ले के रिजॉल्यूशन और कुछ अन्य फीचर्स का खुलासा नहीं किया है।
 

9,020mAh की बैटरी और एक्टिव कूलिंग फैन

इस टैबलेट की सबसे बड़ी खूबियों में से एक इसकी 9,020mAh की बैटरी है। इतनी बड़ी बैटरी से लंबे समय तक गेम खेलने और दूसरे काम करने में मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि, बैटरी बैकअप वास्तविक इस्तेमाल और सॉफ्टवेयर ऑप्टिमाइजेशन पर भी निर्भर करेगा।
 

लंबे गेमिंग सेशन के दौरान डिवाइस को गर्म होने से बचाने के लिए इसमें iQOO का Ice Dome क्वाड-कूलिंग सिस्टम दिया जाएगा। इसमें 30 × 30 × 3.5mm का एक्टिव कूलिंग फैन शामिल है। कंपनी के मुताबिक, इसका हीट डिसिपेशन एरिया 23,253 वर्ग मिलीमीटर है।
 

यूजर्स अपनी जरूरत के हिसाब से फैन की तीन अलग-अलग स्पीड चुन सकेंगे। इससे ज्यादा प्रोसेसिंग की जरूरत वाले गेम और अन्य कामों के दौरान गर्मी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

पतला और हल्का होगा टैबलेट

दमदार बैटरी और कूलिंग सिस्टम के बावजूद iQOO Pad Pro 8.8 का डिजाइन काफी पतला रखा गया है। इसकी मोटाई सिर्फ 5.74mm और वजन 298 ग्राम बताया गया है। ऐसे में इसे इस्तेमाल करने और साथ ले जाने में आसानी हो सकती है।
 

Snapdragon प्रोसेसर मिलने की चर्चा

लीक्स के मुताबिक, iQOO Pad Pro 8.8 में Qualcomm का Snapdragon 8 Elite Gen 5 प्रोसेसर मिल सकता है। हालांकि, कंपनी ने अभी इस प्रोसेसर की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। टैबलेट के RAM, स्टोरेज और चार्जिंग स्पीड की जानकारी भी सामने आनी बाकी है।
 

कीमत और भारत में लॉन्च पर क्या है अपडेट?

iQOO Pad Pro 8.8 की कीमत का अभी खुलासा नहीं हुआ है। फिलहाल इसके चीन में लॉन्च होने की चर्चा है। भारत समेत दूसरे बाजारों में इसे पेश किया जाएगा या नहीं, इस बारे में कंपनी ने कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

iQOO Pad Ultra भी चीन में पेश

इसी बीच कंपनी चीन में iQOO Pad Ultra भी पेश कर चुकी है। इसमें 8.8 इंच का OLED डिस्प्ले, 165Hz रिफ्रेश रेट, 9,020mAh बैटरी और 66W फास्ट चार्जिंग दी गई है। यह टैबलेट Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 प्रोसेसर से लैस बताया गया है।
 

इसके 12GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले मॉडल की कीमत 6,499 चीनी युआन है, जो लगभग 92,900 रुपये के बराबर है। हालांकि, यह कीमत भारतीय बाजार की संभावित कीमत नहीं मानी जानी चाहिए।

iQOO Pad Pro 8.8 में भी इनमें से कुछ फीचर्स मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसकी पूरी जानकारी आधिकारिक लॉन्च के समय ही स्पष्ट होगी।