Sugar Stocks: शुगर स्टॉक्स में भारी गिरावट, गन्ने-चीनी से एथेनॉल बनाने पर सरकारी रोक का दिखा असर

Sugar Stocks: चीनी कंपनियों के शेयरों में 19 अक्टूबर को भारी बिकवाली दिखी। कई शेयर 7% तक टूट गए। इसकी वजह एथेनॉल की खरीद से जुड़ा सरकार का फैसला है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने नए टेंडर से चीनी से बनने वाले एथेनॉल की खरीद को बाहर कर दिया है। इससे चीनी कंपनियों की कमाई पर असर पड़ सकता है।

इन शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट

Bajaj Hindusthan Sugar का शेयर 5.59% गिरकर ₹20.08 पर आ गया। Shree Renuka Sugars में 7% की गिरावट रही। वहीं, Balrampur Chini Mills का शेयर 3.33% और EID Parry का शेयर 3.22% टूट गया। Triveni Engineering and Industries में 1.54% की गिरावट रही। Dhampur Sugar का शेयर भी 4% से ज्यादा गिरा।

सरकार ने क्या फैसला लिया?

सरकारी तेल कंपनियों ने नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक के लिए एथेनॉल खरीद का नया टेंडर जारी किया है। BPCL ने 16 अक्टूबर को यह टेंडर निकाला था। इसमें गन्ने के रस, चीनी के सिरप और बी-हैवी मोलासेस से बने एथेनॉल की खरीद शामिल नहीं है।

इसके अलावा, मक्का से बनने वाले एथेनॉल की खरीद कीमत भी घटा दी गई है। इसे ₹71.86 से कम करके ₹68.86 प्रति लीटर कर दिया गया है। टेंडर में करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने के लिए बोलियां मांगी गई हैं।

चीनी कंपनियों को क्यों होगा नुकसान?

चीनी कंपनियां गन्ने से चीनी के साथ एथेनॉल भी बनाती हैं। इससे उन्हें कमाई का एक और रास्ता मिलता है। कई कंपनियों ने एथेनॉल बनाने की क्षमता बढ़ाने में पैसा भी लगाया है।

अब चीनी से बनने वाले एथेनॉल की सरकारी खरीद टेंडर में शामिल नहीं होने से कंपनियों की मुश्किल बढ़ सकती है। उनकी उत्पादन क्षमता का पूरा इस्तेमाल करना चुनौती बन सकता है। इससे मुनाफे पर भी दबाव पड़ने की आशंका है।

सरकार ने यह फैसला क्यों लिया?

सरकार चाहती है कि घरेलू बाजार में चीनी की कमी न हो और कीमतें काबू में रहें। त्योहारी सीजन में चीनी की कीमतें 10% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं। वहीं, प्रमुख चीनी उत्पादक राज्यों में कमजोर बारिश से उत्पादन घटने की आशंका है।

भारत पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखता है। अब इस जरूरत को पूरा करने के लिए मक्का और दूसरे अनाज से बनने वाले एथेनॉल की भूमिका बढ़ सकती है।

एथेनॉल ब्लेंडिंग पर क्या असर होगा?

ऑल इंडिया शुगर ट्रेड एसोसिएशन (AISTA) के चेयरमैन प्रफुल्ल विठलानी का कहना है कि सरकार ने पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा है। लेकिन इस सीजन इसे पूरा करना मुश्किल हो सकता है। चीनी से बनने वाले एथेनॉल का उत्पादन घटने के साथ मक्के की कमी भी इसकी बड़ी वजह है।

प्रफुल्ल विठलानी के मुताबिक, पिछले सीजन में एथेनॉल सप्लाई में चीनी की हिस्सेदारी 25% थी। अब यह घटकर सिर्फ 2% के आसपास रह सकती है।

क्या चीनी की कीमतें बढ़ेंगी?

उत्पादन को लेकर चिंता के बावजूद फिलहाल चीनी की कीमतों में बड़ी हलचल की उम्मीद नहीं है। विठलानी के मुताबिक, सरकार ने कोटा जारी करके बाजार में सप्लाई को संभाला है। त्योहारों की मांग पूरी करने के लिए भी पर्याप्त स्टॉक मौजूद है।

ज्यादातर चीनी मिलों में नवंबर की शुरुआत तक पेराई शुरू होने की उम्मीद है। सरकार के सप्लाई प्रबंधन से अगले दो महीने तक कीमतें स्थिर रह सकती हैं। इसके बाद बाजार की चाल इस बात पर निर्भर करेगी कि चीनी का असल उत्पादन कितना रहता है और फसल की स्थिति कैसी रहती है।

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सरकार का बड़ा फैसला: गन्ने के रस और चीनी से एथेनॉल बनाने पर रोक, समझिए वजह

Sugarcane Ethanol Ban: केंद्र सरकार ने एथेनॉल खरीदने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब सरकारी तेल कंपनियां गन्ने के रस, चीनी, शुगर सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल की खरीद नहीं कर सकेंगी। सरकार ने एथेनॉल बनाने के लिए चीनी के इस्तेमाल को शून्य करने का निर्देश दिया है। यह नियम 1 नवंबर 2026 से शुरू होने वाले नए सप्लाई वर्ष में लागू होगा।

सरकार का मकसद देश में चीनी की उपलब्धता बनाए रखना है। साथ ही, चीनी की कीमतों पर दबाव कम करना भी इस फैसले की वजह है। इसके लिए सरकारी तेल कंपनियों ने करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने का टेंडर जारी किया है।

1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदेंगी तेल कंपनियां

इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, मैंगलोर रिफाइनरी और नुमालीगढ़ रिफाइनरी ने मिलकर यह टेंडर जारी किया है। इसके तहत 1 नवंबर 2026 से 31 अक्टूबर 2027 तक एथेनॉल की सप्लाई होनी है।

नए नियमों के मुताबिक, कंपनियां गन्ने के रस, चीनी, शुगर सिरप और बी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल के लिए बोली नहीं मांगेंगी। हालांकि, दूसरे कच्चे माल से बने एथेनॉल की खरीद जारी रहेगी।

मक्का और चावल से बने एथेनॉल की कीमत कितनी?

सरकार ने अलग-अलग कच्चे माल से बने एथेनॉल की बेस कीमत भी तय की है। मक्का से बने एथेनॉल की कीमत ₹66.07 प्रति लीटर रखी गई है। इसके अलावा ₹2.79 प्रति लीटर का अतिरिक्त प्रोत्साहन भी मिलेगा।

खराब खाद्यान्न से बने एथेनॉल की बेस कीमत ₹64 प्रति लीटर तय की गई है। भारतीय खाद्य निगम (FCI) से मिलने वाले अतिरिक्त चावल से बने एथेनॉल के लिए ₹60.32 प्रति लीटर की दर रखी गई है। वहीं, सी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल की कीमत ₹57.97 प्रति लीटर होगी।

इन दरों में GST और परिवहन का खर्च शामिल नहीं है। ये खर्च अलग से देना होगा। राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत मंजूर दूसरे कच्चे माल से बने एथेनॉल की खरीद टेंडर में लागू सबसे कम दर पर होगी।

चार चरणों में होगी एथेनॉल की सप्लाई

एथेनॉल की सप्लाई को चार हिस्सों में बांटा गया है। पहला चरण नवंबर 2026 से जनवरी 2027 तक होगा। दूसरा फरवरी से अप्रैल 2027, तीसरा मई से जुलाई 2027 और चौथा अगस्त से अक्टूबर 2027 तक चलेगा।

हालांकि, चौथे चरण में FCI से मिलने वाले अतिरिक्त चावल से बने एथेनॉल की सप्लाई के लिए दिए गए प्रस्ताव स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

कोर्ट के फैसले के हिसाब से बदल सकता है आवंटन

टेंडर में एथेनॉल के आवंटन को लेकर एक शर्त भी रखी गई है। पहली तिमाही में होने वाला आवंटन कुछ लंबित कानूनी मामलों के फैसले पर निर्भर करेगा। ये मामले तेल कंपनियों के बीच एथेनॉल बांटने के तरीके से जुड़े हैं।

कंपनियों ने कहा है कि कोर्ट के आदेश के मुताबिक आवंटन में बदलाव किया जा सकता है। जरूरत पड़ने पर आवंटन घटाया जा सकता है या पूरी तरह रद्द भी किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में कंपनियां सप्लायर को मुआवजा देने के लिए जिम्मेदार नहीं होंगी।

दूसरी कंपनी से खरीदकर एथेनॉल नहीं बेच सकेंगे सप्लायर

टेंडर में सप्लायर के लिए भी नियम तय किए गए हैं। उन्हें मंजूर कच्चे माल से एथेनॉल अपनी ही रजिस्टर्ड या स्वीकृत डिस्टिलरी में बनाना होगा।

कोई सप्लायर किसी तीसरे पक्ष से एथेनॉल खरीदकर सरकारी तेल कंपनियों को नहीं बेच सकेगा। ये सभी नियम 2026-27 के सप्लाई वर्ष के लिए जारी टेंडर पर लागू होंगे। नया सप्लाई वर्ष 1 नवंबर 2026 से शुरू होगा।

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