टनल में फंसे लोगों का रेस्क्यू करने पहुंची स्पेशल टीम, जानिए नेपाल की मदद में भारत ने कैसे झोंकी ताकत

Nepal Flood: चीन-नेपाल बॉर्डर के पास ग्लेशियर टूटने से आई भयानक बाढ़ के बाद भारत ने नेपाल में बड़े पैमाने पर मानवीय और तकनीकी बचाव अभियान शुरू कर दिया है। इस ऑपरेशन में सुरंग से बचाव करने वाली खास टीमें, मेडिकल टीमें और फोरेंसिक एक्सपर्ट शामिल हैं, जो पीड़ितों की DNA-आधारित पहचान करने का काम कर रहे हैं। बता दें कि बाढ़ में 903 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं।

हिमालय में अचानक ग्लेशियर टूटने से आई बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रसुवा-नुवाकोट-लांगटांग इलाके में पड़ा। बाढ़ की चपेट में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी, तीर्थयात्री और पर्यटक भी आ गए। कई लोग सुरंगों के अंदर फंस गए, जबकि सड़कें और पुल बह जाने से कई इलाकों का संपर्क भी टूट गया।

भारत ने रेस्क्यू और फोरेंसिक टीमें भेजीं

भारत ने हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों (खासकर त्रिशूली, चिलिमे और लांगटांग के पास) में फंसे कर्मचारियों को खोजने और बचाने में मदद के लिए डॉक्टरों, पैरामेडिक्स और सुरंग-बचाव विशेषज्ञों की 11 सदस्यों वाली एक खास टीम भेजी है।

नेपाल में कई फोरेंसिक टीमें भी भेजी गई हैं। शुरुआत में छह टीमें भेजी गई थीं, लेकिन बाद में 19 सदस्यों वाले एक खास फोरेंसिक ग्रुप के बारे में जानकारी मिली, जिसमें गांधीनगर की नेशनल फोरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) की 10 सदस्यों वाली DNA प्रोफाइलिंग यूनिट भी शामिल थी।

फोरेंसिक टीम ने रविवार को काठमांडू में अपना काम शुरू दिया। नेपाल में भारत के राजदूत ने टीम से मुलाकात की और उन्हें जानकारी दी। इसके बाद टीम ने नेपाल पुलिस की सेंट्रल फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी और त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल के फोरेंसिक विभाग के अधिकारियों के साथ तकनीकी बातचीत की।

भारत ने लगभग 68.5 टन राहत सामग्री भी हवाई मार्ग से पहुंचाई है, जिसमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं।

हाइड्रोपावर साइट्स पर तलाशी जारी

भारत की टनल-रेस्क्यू टीम, चिलिमे और लांगटांग में क्षतिग्रस्त हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट साइट्स पर नेपाली सेना के साथ मिलकर काम कर रही है।

खराब मौसम के बावजूद, टीम लांगटांग हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास एक स्ट्रक्चर में दाखिल हुई और एक व्यक्ति के शव को बाहर निकाला। हालांकि तलाशी और बचाव अभियान जारी हैं।

नुवाकोट के त्रिशूली-चिलिमे हाइड्रोपावर बेल्ट में, भारतीय टेक्निकल कर्मचारियों ने उन सुरंगों का जायजा लिया है जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। रसुवा का लांगटांग और चीन से सटा सीमा क्षेत्र भी बचाव अभियान के लिए प्राथमिकता वाले इलाकों में शामिल है।

हालांकि, खराब मौसम, अस्थिर जमीन और झील के पानी से अचानक दोबारा बाढ़ आने के खतरे के कारण हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू और जमीन के रास्ते प्रभावित इलाकों तक पहुंचना काफी मुश्किल हो रहा है।

पीड़ितों की DNA से पहचान

नेपाल के जिला प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे पहचान न हो पाने वाले पीड़ितों को सामूहिक रूप से दफनाने से पहले उनके DNA सैंपल सुरक्षित रखें। हर शव पर एक खास पहचान नंबर और जगह की जानकारी के साथ टैग किया जाएगा।

भारतीय फोरेंसिक टीमें बरामद शवों/अवशेषों से DNA और रिश्तेदारों से रेफरेंस सैंपल लेकर ‘डिजास्टर विक्टिम आइडेंटिफिकेशन’ (आपदा पीड़ितों की पहचान) का काम कर रही हैं। पहचान पक्की करने और परिवारों को शव सौंपने में मदद के लिए इन प्रोफाइलों का मिलान किया जाएगा।

वहीं, लापता नेपाली और विदेशी नागरिकों के बरामद शवों या शरीर के अंगों की पहचान के लिए DNA टेस्ट की सुविधा दी जा रही है।

नेपाल में मौजूद लापता व्यक्ति के करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध किया गया है कि वे DNA प्रोफाइलिंग के लिए ताजा ब्लड सैंपल और पासपोर्ट साइज की दो फोटो पैथोलॉजी लैब, नेपाल पुलिस हॉस्पिटल, महाराजगंज, काठमांडू या नजदीकी जिला पुलिस ऑफिस में जमा करें।

इसके अलावा, विदेश में रहने वाले करीबी रिश्तेदारों (पिता, माता, बेटा या बेटी) से अनुरोध है कि वे अपने देश की किसी अधिकृत लैब में DNA प्रोफाइलिंग करवाएं और तुलना के लिए DNA प्रोफाइल की सॉफ्ट कॉपी नेपाल पुलिस के आधिकारिक ईमेल पते dnacodis@nepalpolice.gov.np पर भेजें।

रिश्तेदार तय अस्पतालों में DNA सैंपल जमा कर सकते हैं।

वहीं, त्रिभुवन यूनिवर्सिटी टीचिंग हॉस्पिटल में, लापता रिश्तेदारों के बारे में जानकारी पाने के लिए परेशान परिवारों का आना जारी है। अस्पताल के एक डॉक्टर ने बताया कि 56 घायल मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें से तीन इंटेंसिव केयर में हैं और एक मरीज की मौत हो गई है। अस्पताल में 59 शव भी लाए गए थे, जिनमें से आठ की पहचान कर ली गई और अंतिम संस्कार के लिए सौंप दिया गया।

भारतीय नागरिकों का रेस्क्यू जारी, और लोग मदद के इंतजार में

भारत ने 160-170 से ज्यादा भारतीय नागरिकों को बचाने की जानकारी दी है, जबकि 29-30 अगस्त तक लगभग 287-290 लोगों से संपर्क नहीं हो पा रहा था।

विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि 149 भारतीयों को बचाया गया है। बाद में पुष्टि की गई कि 403 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से चीन से नेपाल पहुंच गए हैं, जबकि चीनी तरफ मौजूद 500 और भारतीयों के सुरक्षित होने की पुष्टि हुई है।

काठमांडू में भारतीय दूतावास ने इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबर – +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 – और ईमेल eoikathmandufloodsupport@gmail.com शुरू किए हैं।

सीमा के दोनों तरफ फंसे भारतीयों को निकालने के लिए नेपाली अधिकारियों और जरूरत पड़ने पर चीनी अधिकारियों के साथ तालमेल बिठाने का काम जारी है।

बचाव कार्यों में बड़ी रुकावटें

नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के मुताबिक, लापता 933 लोग आसपास के हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले कर्मचारी थे। वहीं, 592 विदेशी नागरिक और 127 नेपाली नागरिक भी लापता लोगों में शामिल हैं, जो विदेशी समूहों के साथ यात्रा कर रहे थे।

बचाव अभियान के लिए करीब 20,000 सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। अब तक जमीन के रास्ते 8,730 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। वहीं, हेलीकॉप्टरों ने 363 उड़ानें भरी हैं और 3,081 लोगों को एयरलिफ्ट किया है। इनमें 236 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इसके अलावा, बाढ़ में फंसे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों से 279 लोगों को सीधे बचाया गया है।

रविवार को धादिंग के कृष्णभीर इलाके में भूस्खलन और सड़क का बड़ा हिस्सा धंसने के बाद पृथ्वी हाईवे का संपर्क टूट गया। तेज बहाव वाली त्रिशूली नदी ने सड़क की सुरक्षा दीवार और उसकी नींव को भी नुकसान पहुंचाया। इसके बाद प्रशासन ने इस रास्ते पर वाहनों और पैदल लोगों की आवाजाही रोक दी।

वहीं, काठमांडू से राहत सामग्री प्रभावित और संपर्क से कटे इलाकों तक भेजी जा रही है। 50 ट्रांसपोर्ट वाहनों और 8 हेलीकॉप्टर उड़ानों के जरिए खाने-पीने की चीजें, संचार उपकरण और जरूरी राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। राहत और बचाव अभियान लंबे समय तक जारी रखने के लिए ईंधन का भंडार भी सुरक्षित रखा जा रहा है।

इस बीच, नेपाल पुलिस ने बताया कि कृषि विकास बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा से करीब 1.5 करोड़ नेपाली रुपये नकद, अनुमानित 50 करोड़ रुपये का सोना और जरूरी दस्तावेजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया गया है।

वहीं, नेपाल सरकार ने राहत और बचाव कार्यों के लिए आपातकालीन फंड भी जारी किया है। इसके तहत रसुवा और नुवाकोट को 1-1 करोड़ नेपाली रुपये, धादिंग को 50 लाख नेपाली रुपये और 15 स्थानीय निकायों को कुल 6.75 करोड़ नेपाली रुपये दिए गए हैं।

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Market Outlook : लाल निशान में बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 1 सितंबर को कैसी रह सकती है इनकी चाल

Market Outlook : नीचे से सुधार आने के बावजूद भारतीय बाजार आज सोमवार 31 अगस्त को गिरावट लेकर बंद हुए। निफ्टी 95 अंक गिरकर 24080.40 पर और सेंसेक्स 307 अंक गिरकर 76957.27 पर आ गया,जिससे सेशन की क्लोजिंग गिरावट के साथ हुई। सर्विसेज सेक्टर सबसे आगे रहा और इसमें 8.88% की बढ़त देखी गई,जबकि इंजीनियरिंग सर्विसेज सेक्टर को सबसे ज़्यादा नुकसान हुआ और इसमें 3.12% की गिरावट आई। यूटिलिटीज़ और कैपिटल गुड्स और इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट सेक्टर में भी बिकवाली का दबाव रहा,जिससे इंडस्ट्रियल सेक्टर को लेकर सेंटीमेंट कमज़ोर रहा।

ईरान के साथ अमेरिका के बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ गईं,जबकि निवेशक MSCI इंडेक्स में बदलाव और CAS से संभावित उतार-चढ़ाव को लेकर सतर्क नजर आए। इसका असर बाजार पर दिखा। अलग-अलग सेक्टरों का मूड काफी कमजोर रहा और बाजार के ज्यादातर हिस्सों में बिकवाली का दबाव दिखा। मेटल और मीडिया सेक्टर में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। जबकि टेक्नोलॉजी,रियल्टी और फाइनेंशियल सर्विस सेक्टर पर भी काफी दबाव रहा। फार्मा और हेल्थकेयर जैसे डिफेंसिव सेक्टर में भी गिरावट आई। सिर्फ प्राइवेट बैंकों ने ही कुछ हद तक मजबूती दिखाई।

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन के बाद बैंक निफ्टी में बड़ा बदलाव देखा गया और यह दोपहर 3:15 बजे के प्री-CAS लेवल से 600 अंक से ज्यादा ऊपर बंद हुआ। इंडेक्स दोपहर 3:15 बजे के करीब 57,397 से बढ़कर CAS के बाद 58,025 पर पहुंच गया। भारतीय शेयर बाज़ार पर दबाव के बावजूद निफ्टी 24,000 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर बने रहने में कामयाब रहा और 24,080.40 पर बंद हुआ।

MSCI में बदलाव के चलते अदाणी ग्रुप के शेयरों में जबरदस्त बिकवाली देखी गई, जिसमें अदाणी एंटरप्राइजेज और अदाणी पोर्ट्स निफ्टी में सबसे ज़्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे। अदाणी एंटरप्राइजेज़ के शेयरों में भारी गिरावट आई, जबकि अदाणी पोर्ट्स के शेयर करीब 7 प्रतिशत गिरे। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में ट्रेडिंग के आखिरी घंटे में जबरदस्त तेज़ी देखी गई और यह लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ,जिससे बेंचमार्क इंडेक्स को सहारा मिला।

आनंद राठी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स में इक्विटी टेक्निकल रिसर्च के सीनियर मैनेजर जिगर एस पटेल का कहना है कि 24,000 का स्तर निफ्टी के लिए मज़बूत सपोर्ट बना हुआ है। इसे डेली गैप एरिया,बढ़ती ट्रेंडलाइन और 61.8% फाइबोनैचि रिट्रेसमेंट का सपोर्ट मिल रहा है।

जिगर एस पटेल गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि 24,100–24,000 का जोन निफ्टी के लिए अहम सपोर्ट जोन है। उनका मानना ​​है कि जब तक क्लोजिंग बेसिस पर 23,600 का स्तर बना रहता है,तब तक बाजार का ओवरऑल स्ट्रक्चर पॉजिटिव रहेगा।

ऊपर की तरफ,24,400 का स्तर तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है। पटेल ने कहा कि अगर इस स्तर के ऊपर ब्रेकआउट होता है तो निफ्टी के लिएृ 24,600–24,750 और उसके बाद 25,000 के सबसे नजदीकी टारेगट की ओर बढ़ने का रास्ता खुल सकता है।

निफ्टी बैंक के लिए, 58,200 के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट से नई तेज़ी आ सकती है,जबकि 57,000 का स्तर अहम सपोर्ट बना हुआ है। पटेल ने कहा कि हमारा उनका नजरिया तेजी का है। ऐसे में 57,000 के ऊपर टिके रहने तक गिरावट पर खरीदारी करने की सलाह होगी।

 

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ओरछा में रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का CM डॉ. मोहन यादव ने लिया जायजा, स्थानीय दुकानदारों से किया संवाद

ओरछा में रामराजा लोक के निर्माण कार्यों का CM डॉ. मोहन यादव ने लिया जायजा, स्थानीय दुकानदारों से किया संवाद

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि ओरछा को पर्यटन के अद्भुत केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। ओरछा का राम राजा मंदिर हमारे गौरवशाली अतीत की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संपदा है। यहां के मंदिर एवं महल तत्कालीन समृद्ध स्थापत्य के प्रत्यक्ष उदाहरण हैं, जो हमें हमारी प्राचीन धरोहर और संस्कृति से जोड़े रखते हैं। ये तत्कालीन उन्नत तकनीक और स्थापत्य के भी अद्भुत उदाहरण हैं, पहले एअर कंडीशनर नहीं होते थे, लेकिन यहां के भवन वातानुकूलित बने है, जो गर्मी में ठंडे और ठंड में गर्मी का एहसास कराते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने आज ओरछा स्थित ऐतिहासिक एवं आस्था के प्रमुख केन्द्र श्री रामराजा लोक में जारी निर्माण कार्यों का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने  निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी लेते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्यों को गुणवत्ता के साथ निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण के बाद मीडिया से चर्चा में यह विचार-व्यक्त किए।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्माणाधीन रामराजा लोक परिसर में विभिन्न प्रतिष्ठानों का निरीक्षण करते हुए प्रतिष्ठान संचालकों से संवाद किया तथा उनकी समस्याओं और सुझावों को सुना। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को प्राप्त समस्याओं के निराकरण के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने जुझार सिंह महल में चल रहे निर्माण तथा जीर्णोद्धार कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने जहांगीर महल का भ्रमण कर यहां की ऐतिहासिक एवं समृद्ध स्थापत्य कला का अवलोकन भी किया।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव को निरीक्षण के दौरान आर्किटेक्ट द्वारा मंदिर परिसर स्थित प्राचीन एवं ऐतिहासिक ‘सावन-भादो’ स्तंभों के संरक्षण एवं उनके स्थापत्य महत्व के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। बताया कि रामराजा लोक की संरचना एवं विकास कार्यों को आकार देते समय मंदिर परिसर की प्राचीन धरोहरों, विशेषकर ‘सावन-भादो’ स्तंभों के मूल स्वरूप एवं ऐतिहासिक महत्व का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। बुंदेलखंड की विशिष्ट स्थापत्य कला के प्रतीक इन प्राचीन स्तंभों की संरचना एवं निर्माण शैली अपने समय की उन्नत तकनीक को दर्शाती है। नए निर्माण कार्यों के दौरान इन प्राचीन संरचनाओं को किसी प्रकार की क्षति नही पहुंचे, इसका विशेष ध्यान रखते हुए उनके आसपास के क्षेत्र को व्यवस्थित, सुंदर एवं श्रद्धालुओं के लिए सुगम बनाया जा रहा है।

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारे गौरवशाली बुन्देला राजाओं का ओरछा बुंदेलखंड की राजधानी के रूप पहचाना जाता था। यहां के प्राचीन महल और भवन, हमारी समृद्ध विरासत हैं, उसे जीवंत करने के लिए सरकार काम कर रही है। तत्कालीन समय में निर्माण कार्यों में जिस प्रकार की सामग्री लगाई जाती थी, उसी सामग्री से भवनों का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह है कि हमारे गौरवशाली अतीत के प्रतीक ये भवन उसी स्वरूप में दिखें जिस स्वरूप में वह वर्षों पहले थे। इसके लिए हमारे अधिकारियों के नेतृत्व और मार्गदर्शन में कुशल कारीगर काम कर रहे हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि श्री महाकाल महालोक के निर्माण के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, उज्जैन की अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। इसी तर्ज पर मध्यप्रदेश के प्रमुख तीर्थस्थलों जैसे ओरछा, चित्रकूट, दतिया, नलखेड़ा, पशुपतिनाथ मंदसौर आदि का भी समग्र विकास किया जा रहा है। इससे धार्मिक पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

भगवान श्रीराम ने अपने 14 वर्ष के वनवास में, लम्बी अवधि चित्रकूट में व्यतीत की। भगवान श्रीकृष्ण की जहां शिक्षा भी हुई, उज्जैन के सांदीपनि आश्रम सहित भगवान श्रीकृष्ण की जहां-जहां लीलाएं हुईं, उन सब स्थानों को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा। हमारी गौरवशाली विरासत को धार्मिक सांस्कृतिक भावनाओं के अनुरूप आने वाली पीढ़ियों से जोड़ने और उन्हें इस अतीत से परिचित कराने के लिए विभिन्न गतिविधियां संचालित हैं, इन्हें संरक्षित करना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। ओरछा में भव्य श्री रामराजा लोक का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाले समय में देश-दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख तीर्थस्थल बनेगा।

PM मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर ओवैसी का तंज, बोले- ‘बाबर के नाम पर गालियां देते थे, उसी देश ने दिया अवार्ड’

PM मोदी को उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान मिलने पर ओवैसी का तंज, बोले- ‘बाबर के नाम पर गालियां देते थे, उसी देश ने दिया अवार्ड’

owaisi attacks PM Modi on dostlik award

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान में मिले सर्वोच्च नागरिक सम्मान को लेकर भाजपा और आरएसएस पर जोरदार तंज कसा है। उन्होंने कहा है कि बीजेपी को मुबारकबाद कि जिस बाबर के नाम पर हमें गालियां देते थे, उसी बाबर के देश ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अवार्ड दिया है। ALSO READ: PM मोदी को मिला उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान, द्विपक्षीय बैठक में हुए कई अहम समझौते

 

ताशकंद में रविवार को उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सर्वोच्च मित्रता सम्मान 'ओली दाराजाली दोस्तलिक' से सम्मानित किया। इस पर हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस को सोचने को कहा है कि जो भाजपा बाबर के नाम पर हमें गाली देती थी, उम्मीद करते हैं कि अब ऐसा नहीं करेगी।

 

पीएम मोदी को विदेश में मिलने वाले सम्मान पर कटाक्ष करते हुए ओवैसी ने कहा कि प्रधानमंत्री जहां भी जाते हैं अवार्ड लेकर आते हैं। मुबारकबाद आपको..बाबर के नाम पे इतनी गाली जो देते थे…उसी देश वाले अवार्ड दे रहे हैं आपको। संघ वालों को इस बारे में सोचना पड़ेगा। ALSO READ: अमेरिका से तनाव, चीन-रूस से नजदीकियां, SCO समिट में पीएम मोदी पर क्यों टिकी हैं दुनिया की निगाहें?

 

दिन में 100 बार 'दोस्तलिक' बोलता है हर भारतीय परिवार

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लटेफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा कि ओली दराजाली दोस्तलिक' सम्मान प्राप्त कर मैं गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। उन्होंने कहा, मैं यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच स्थाई संबंधों को समर्पित करता हूं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित होना मेरे लिए बहुत गर्व की बात है।

उन्होंने कहा कि भारत के लोग इस सम्मान के नाम में प्रयुक्त शब्द 'दोस्तलिक' से भलीभांति परिचित हैं। भारत में शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा, जहां 'दोस्तलिक' शब्द दिन में 100 बार न बोला जाता हो। आज आपने वास्तव में इस शब्द के सार को सामने ला दिया है। 'दोस्तलिक' का अर्थ मित्रता है। यह शब्द अपने आप में भारत और उज्बेकिस्तान के संबंधों के केंद्र में मौजूद भावना को खूबसूरती से व्यक्त करता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह सम्मान प्राप्त करना उनका व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि 1.4 अरब भारतीयों का सम्मान है।

पहली बार चक दे गर्ल्स Girls हॉकी विश्वकप में Boys से निकली आगे

हॉकी विश्वकप में हमेशा भारतीय पुरुष टीम से महिला टीम कोसो पीछे रहती थी। ना जाने कितनी बार तो महिला टीम क्वालिफाय ही नहीं कर पाती थी। लेकिन इस बार महिला टीम ने ना केवल क्वालिफाय किया बल्कि अपने पुरुष साथियों से बेहतर प्रदर्शन किया। इस बार उम्मीद की पुरुष टीम कम से कम सेमीफाइनल खेलेगी और महिला टीम से कोई उम्मीद ही नहीं थी। लेकिन भारतीय महिला टीम ने पांचवा पायदान पाया और पुरुष टीम को आठवां पायदान मिला।

अगले महीने जापान में होने वाले एशियाई खेलों से पहले मनोबल बढ़ाने वाली जीत के साथ, भारतीय महिला हॉकी टीम ने हॉकी वर्ल्ड कप में शानदार समापन किया। टीम ने 5वें-छठे स्थान के लिए खेले गए मैच में दुनिया की नंबर 5 टीम जर्मनी को 3-1 से हराया। यह मैच गुरुवार शाम को खेला गया।

इस नतीजे से भारतीय महिला टीम को पांचवां स्थान मिला, जो 1974 में हुए पहले महिला वर्ल्ड कप (जिसमें वे चौथे स्थान पर रही थीं) के बाद से उनका वर्ल्ड कप में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन है।टीम ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ़ एक हार का सामना किया। उन्होंने चीन, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी बेहतर रैंकिंग वाली टीमों के साथ मैच ड्रॉ कराए और दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया। आखिर में, मुख्य कोच शुअर्ड मरिने के मार्गदर्शन में जर्मनी के खिलाफ जीत के साथ उन्होंने अपना अभियान पूरा किया।पहले मैच में चीन के खिलाफ 2-2 की बराबरी और फिर ऑस्ट्रेलिया से 0-0 की बराबरी। टीम नीदरलैंड्स से भी सिर्फ 2 गोल से हारी।यह सब भारत ने तब किया जब दल में 11 युवा खिलाड़ी थे और अपना पहला विश्वकप खेल रहे थे।

वहीं पुरुष टीम ने खासा निराश किया। पुरुष टीम की आलोचना पूर्व भारतीय गोलकीपर श्रीजेश ने भी की। हरमनप्रीत सिंह ने ने अंतिम मैच में गोल दागकर खुद को शीर्ष 5 गोल स्कोरर में स्थापित कर दिया लेकिन कुल मिलाकर टीम का अभियान निराशाजनक रहा।पूर्व खिलाड़ियों का मानना है कि धीमी शुरूआत, मौके गंवाने और डिफेंस में चूक से आगे यह समस्या और बड़ी है और इसका हल काफी पहले निकाला जाना चाहिये था।

पुरुष टीम ने पूल डी के मुकाबले में इंग्लैंड जैसी टीम से 4-2 से मैच गंवाया।वह भी मैच में बढ़त बनाने के बाद। इसके बाद टीम का पाकिस्तान के खिलाफ प्रदर्शन अच्छा था लेकिन 5-3 की स्कोरलाइन संतोषजनक नहीं थी।

अगले दौर में टीम को नीदरलैंड्स और अर्जेंटीना मिली। नीदरलैंड्स ने भारतीय टीम को 3-1 से हराया। नीदरलैंड से हारने के बाद भारत पूल ई से अंतिम चार की दौड़ से लगभग बाहर ही हो गया था लेकिन अर्जेंटीना की इंग्लैंड पर जीत के बाद तकनीकी तौर पर उसके रास्ते खुले थे । इसके लिये उसे कम से कम तीन गोल के अंतर से जीत दर्ज करनी थी।  लेकिन भारत ने पहले छह मिनट में ही दो गोल गंवा दिये और इस दबाव से टीम निकल ही नहीं सकी। अर्जेंटीना के खिलाफ भारत 3-5 से हारकर सेमीफाइनल की दौड़ से बाहर हो गया।

लेकिन निराशाजनक अभियान और ज्यादा निराशाजनक तब हो जब सातवें और आठवें पायदान के लिए भारत बेल्जियम से भिड़ा।भारतीय पुरुष हॉकी टीम को एफआईएच विश्व कप सह-मेजबान बेल्जियम के खिलाफ सातवें / आठवें स्थान के क्लासीफिकेशन के रोमांचक मुकाबले में शूटआउट में 3-4 से हार का सामना करना पड़ा।निर्धारित समय में दोनों टीमें 3-3 से बराबरी पर रहीं, लेकिन शूटआउट में बेल्जियम ने बाजी मारकर भारत को एफआईएच विश्व कप में आठवें स्थान पर रहने के लिए मजबूर कर दिया।

LAC के पास भारत को मिलेगा दूसरा रणनीतिक रूट; जानिए हूरी-टाक्सिंग रोड प्रोजेक्ट कैसे काउंटर करेगा चीन को

अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने हुरी से ताक्सिंग तक करीब 95 किलोमीटर लंबी नई सड़क के लिए विस्तृत योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। चीन सीमा के करीब स्थित ताक्सिंग तक पहुंचने के लिए ये सड़क बेहद अहम मानी जा रही है। इसके बनने से दूरदराज के इलाकों में आवाजाही आसान होने के साथ सीमावर्ती क्षेत्र में जरूरी सामान और सेवाएं पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है।

सीमावर्ती इलाके में होगा बेहतर संपर्क

CNN-News18 के मुताबिक, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO) ने हुरी से ताक्सिंग तक प्रस्तावित सड़क को लेकर आगे की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए सड़क की व्यवहारिकता जांचने के साथ डिटेल्ड परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की योजना है। करीब 95.35 किलोमीटर लंबी ये नई सड़क पूरी तरह नए रास्ते पर बनाई जाएगी और इसे ‘प्रोजेक्ट अरुणांक’ के तहत विकसित किया जाना है। अधिकारियों के डाक्युमेंट्स के मुताबिक, सड़क का निर्माण एनएचडीएल के तय मानकों के अनुसार किया जाएगा, जिससे सीमावर्ती इलाके में बेहतर सड़क संपर्क तैयार हो सके।

ताक्सिंग तक पहुंचना काफी मुश्किल

हुरी-ताक्सिंग सड़क सिर्फ दो इलाकों को जोड़ने वाली सड़क नहीं है। इससे अरुणाचल प्रदेश के दूर-दराज के क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और सीमा के करीब पहुंच को आसान बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। साथ ही, जरूरी सामान और लोगों की आवाजाही भी सुगम होने की उम्मीद है। ताक्सिंग अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिले में स्थित एक दूरदराज का इलाका है। ये जिला मुख्यालय दापोरिजो से 200 किलोमीटर से भी ज्यादा दूरी पर है और चीन की सीमा के नजदीक पड़ता है। पहाड़ी और कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण यहां लंबे समय तक पहुंचना काफी मुश्किल रहा है।

नई सड़क बनने से होगा फायदा

हाल के वर्षों में ताक्सिंग तक सड़क पहुंची है, लेकिन वहां जाने का रास्ता आज भी काफी मुश्किल है। नाचो से ताक्सिंग की मौजूदा सड़क कई जगह संकरी और खराब है। कुछ हिस्सों में दो गाड़ियों का एक साथ निकलना भी मुश्किल होता है। इससे आम लोगों और सेना के वाहनों को परेशानी होती है। ऐसे में हुरी से ताक्सिंग तक नई सड़क बनने से इस समस्या को कम किया जा सकता है। नई सड़क बनने से सेना के लिए सीमा वाले इलाके में आना-जाना और जरूरी सामान पहुंचाना आसान हो सकता है। इससे वाहन, ईंधन और दूसरी जरूरी चीजें जल्दी पहुंचाई जा सकेंगी। अधिकारियों के मुताबिक, किसी आपात स्थिति में एक से ज्यादा रास्ते होना जरूरी होता है। ऐसे में नया रास्ता सेना के लिए काफी मददगार साबित हो सकता है।

चीन के काफी करीब है ताक्सिंग

ताक्सिंग ऊपरी सुबनसिरी जिले में चीन के तिब्बत क्षेत्र के पास स्थित एक अहम सीमावर्ती बस्ती है। यह इलाका वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के करीब होने की वजह से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां बेहतर सड़क होने से सैनिकों की आवाजाही आसान हो सकती है और जरूरत के समय जरूरी सामान और दूसरी सुविधाएं जल्दी पहुंचाई जा सकती हैं। मजबूत सड़क संपर्क से सीमावर्ती इलाकों में सप्लाई, मेडिकल मदद और इंजीनियरिंग टीमों की पहुंच को भी बेहतर बनाया जा सकता है।

मजबूत की जा रही कनेक्टिविटी

हुरी-ताक्सिंग सड़क की योजना ऐसे समय में सामने आई है, जब सीमावर्ती क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं और कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। ताक्सिंग की रणनीतिक स्थिति को देखते हुए इस इलाके में विकास कार्यों पर भी लगातार ध्यान दिया जा रहा है। इसी साल फरवरी में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने ताक्सिंग का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने ताक्सिंग-नाचो-कोडुखा-लाइमकिंग क्षेत्र में कई विकास परियोजनाओं की शुरुआत की और कुछ योजनाओं का उद्घाटन भी किया।

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RBI Plastic Notes: कैसा होगा RBI का नया प्लास्टिक नोट? टेंडर रेस में उतरीं दुनिया की दिग्गज कंपनियां

RBI Polymer Banknotes Plan: भारत में कागजी नोटों की जगह जल्द ही टिकाऊ और मजबूत प्लास्टिक के नोट ले सकते हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) द्वारा जारी किए गए टेंडर के लिए दो विदेशी कंपनियों और एक भारतीय कंपनी ने अपनी बोलियां जमा कर दी हैं।

शुरुआती चरण में रिजर्व बैंक ₹10 और ₹20 के नोटों को पॉलीमर में छापने की योजना पर विचार कर रहा है। आइए जानते हैं कि इस प्रोजेक्ट की मुख्य शर्तें क्या हैं और कौन सी कंपनियां इसकी रेस में आगे चल रही हैं।

RBI की 2 सबसे सख्त शर्तें: चीन-पाकिस्तान से दूरी और नो-एनिमल फैट

BRBNMPL ने टेंडर में हिस्सा लेने वाली कंपनियों के सामने दो बेहद अहम और सख्त शर्तें रखी हैं:

चीन और पाकिस्तान से पूर्ण फायरवॉल: भारतीय मुद्रा की सुरक्षा और संवेदनशीलता को देखते हुए सभी बोलीदाताओं को हलफनामा देना होगा कि वे भारत में अपने ऑपरेशन्स को चीन और पाकिस्तान में मौजूद अपनी किसी भी गतिविधि से पूरी तरह अलग रखेंगे।

जानवरों की चर्बी पर बैन: कंपनियों को प्रमाणित करना होगा कि सप्लाई की जाने वाली पॉलीमर शीट में जानवरों की चर्बी या उसका DNA शामिल नहीं होगा। ब्रिटेन जैसे देशों में पॉलीमर नोटों में एनिमल फैट का इस्तेमाल विवाद का कारण बना था, जिसके चलते RBI अब भारत के लिए इसे लेकर बेहद सतर्क है।

तुरंत चाहिए 68,000 रीम पॉलीमर शीट

रिपोर्ट के अनुसार, BRBNMPL को भारतीय बैंक नोटों की छपाई के लिए ‘तत्काल’ 68,000 रीम पॉलीमर सबस्ट्रेट की आवश्यकता है। एक रीम में पॉलीमर फिल्म की 500 शीट्स होंगी। सभी कंपनियों को सैंपल्स जमा करने होंगे। इन सैंपल्स को भारत के विभिन्न जलवायु क्षेत्रों में टेस्ट किया जाएगा। इसके बाद सफल कंपनियों को ही अंतिम टेंडर में हिस्सा लेने दिया जाएगा।

रेस में कौन-कौन सी दिग्गज कंपनियां शामिल?

पॉलीमर नोटों के सबस्ट्रेट सप्लाई के लिए दुनिया की जानी-मानी कंपनियों ने दिलचस्पी दिखाई है:

कॉस्मो फर्स्ट और डी ला रू: भारत की सबसे बड़ी BOPP एक्सपोर्टर कॉस्मो फर्स्ट ने यूके (UK) स्थित दुनिया की सबसे बड़ी बैंक नोट सप्लायर कंपनी De La Rue को अपना तकनीकी पार्टनर बनाया है। डी ला रू सुरक्षा फीचर्स और पॉलीमर सबस्ट्रेट तकनीक मुहैया कराएगी।

CCL सिक्योर: ऑस्ट्रेलिया स्थित यह कंपनी दुनिया के 40 से अधिक केंद्रीय बैंकों को पॉलीमर नोट सोल्यूशन्स दे रही है। कंपनी का दावा है कि उसके पॉलीमर नोट पारंपरिक कॉटन (सूती) के नोटों की तुलना में 6 गुना ज्यादा टिकाऊ होते हैं।

Q&T हाई-टेक पॉलीमर: वियतनाम की इस कंपनी ने अपने देश में कॉटन करेंसी के मुकाबले 78% लागत की बचत का दावा किया है और अब इसने भी भारतीय टेंडर के लिए बोली लगाई है।

कागजी नोटों से कितने अलग होंगे प्लास्टिक के नोट?

लंबी उम्र और मजबूती: पॉलीमर नोट पानी, नमी और धूल-मिट्टी से खराब नहीं होते। इनकी लाइफ सामान्य कागजी नोटों के मुकाबले 6 गुना तक ज्यादा होती है।

नकली नोटों पर लगाम: इन नोटों में आधुनिक सिक्योरिटी फीचर्स और विंडो ट्रांसपेरेंसी जोड़ी जाती है, जिससे इनकी नकल बनाना लगभग नामुमकिन हो जाता है।

हाइजीनिक और साफ-सुथरे: कागजी नोटों की तुलना में पॉलीमर नोट साफ रहते हैं और इनसे कीटाणु फैलने का खतरा कम रहता है।

नेपाल आपदा के बाद भारत ने हिमालय पर निगरानी बढ़ाई

नेपाल आपदा के बाद भारत ने हिमालय पर निगरानी बढ़ाई

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विवेक कुमार

नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में भीषण बाढ़ और ग्लेशियर धंसने की घटना के बाद भारत ने चीन और नेपाल से लगते अपने हिमालयी क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। अधिकारियों ने शनिवार को कहा कि सीमावर्ती पर्वतीय इलाकों में मौजूद सभी ग्लेशियरों और हिमनदीय झीलों पर विशेष नजर रखी जाएगी। ALSO READ: भारत के विमानन क्षेत्र पर संकट के बादल

 

अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) के अनुसार 26 अगस्त को तिब्बत-नेपाल सीमा पर आई विनाशकारी आपदा एक ग्लेशियर के ध्वस्त होने से पैदा हुई थी। इस घटना के बाद मलबे और पानी का विशाल प्रवाह नीचे की ओर आया, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार इस आपदा में 633 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि करीब 3,000 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

 

उत्तराखंड में बढ़ेगी निगरानी

भारत के हिमालयी राज्य उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने समाचार एजेंसी एएफपी से कहा कि नेपाल के साथ साझा सीमा और समान भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है।

 

उन्होंने कहा, “चूंकि हमारी सीमा, नेपाल से लगती है और हमारी भौगोलिक स्थिति भी काफी हद तक समान है, इसलिए हमने अपने विभाग को क्षेत्र के सभी ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी करने के निर्देश दिए हैं।”

 

मदन कौशिक ने कहा कि राज्य की टीमों को सतर्क रहने और संभावित खतरों पर लगातार नजर रखने को कहा गया है ताकि किसी भी उभरती हुई स्थिति की समय रहते पहचान की जा सके।

 

उत्तराखंड भारत के सबसे संवेदनशील पारिस्थितिक क्षेत्रों में गिना जाता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 1,266 हिमनदीय झीलें मौजूद हैं। विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति बेहद संवेदनशील है।

 

वैज्ञानिकों का कहना है कि हिमालय के ग्लेशियर, जो लगभग दो अरब लोगों को पानी उपलब्ध कराने वाली प्रमुख प्रणालियों का हिस्सा हैं, जलवायु परिवर्तन के कारण पहले से कहीं अधिक तेजी से पिघल रहे हैं। इसके चलते पर्वतीय समुदायों के सामने अप्रत्याशित और विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ता जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार ग्लेशियरों के पिघलने और स्थायी रूप से जमी बर्फ यानी पर्माफ्रॉस्ट के पिघलने से पर्वत ढलानों की स्थिरता कमजोर हो सकती है, जिससे भूस्खलन का जोखिम बढ़ जाता है। ALSO READ: नेपाल में तबाही के बीच फरक्का बैराज फिर क्यों है चर्चा में

 

क्यों आई नेपाल में बाढ़

इसी बीच वैज्ञानिक नेपाल-तिब्बत आपदा के संभावित कारणों का अध्ययन कर रहे हैं। एएफपी से बातचीत में कई विशेषज्ञों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में फिर हो सकती हैं। न्यूजीलैंड के जीएनएस साइंस शोध संस्थान के प्रमुख वैज्ञानिक साइमन कॉक्स ने कहा कि जब पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा गिर जाता है तो उसके आसपास के हिस्से भी अस्थिर हो सकते हैं। उनके अनुसार इससे उसी क्षेत्र में दोबारा ध्वंस की आशंका बनी रहती है।

 

यूएसजीएस का कहना है कि नेपाल तिब्बित सीमा पर ग्लेशियर ध्वंस इतना शक्तिशाली था कि उससे निकली ऊर्जा 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर थी और इसके कारण कई भूस्खलन भी हुए।

 

फ्रांस के राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान केंद्र (सीएनआरएस) के ग्लेशियर विशेषज्ञ एतियां बेर्तिये ने कहा कि दुनिया के अन्य हिस्सों में भी ऐसी घटनाओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि उन्होंने कहा कि हिमालय में भूगर्भीय हालात इस तरह की घटनाओं को अधिक व्यापक बना देते हैं।

 

कार्डिफ विश्वविद्यालय के पर्यावरणीय जोखिम विशेषज्ञ ट्रिस्ट्रम हेल्स ने कहा कि पिछले एक दशक में दुनियाभर में ऐसी घटनाओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। उन्होंने हिमालय और स्विट्जरलैंड जैसे क्षेत्रों का उदाहरण दिया। ALSO READ: टैक्सियों को लेकर क्यों लड़ते रहते हैं भारत के दो राज्य

 

हालांकि वैज्ञानिकों ने इस विशेष आपदा को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ने में सावधानी बरतने की सलाह भी दी है। एकीकृत पर्वतीय विकास के लिए अंतरराष्ट्रीय केंद्र (आईसीआईएमओडी) ने कहा कि जलवायु परिवर्तन हिमालयी ग्लेशियरों, बर्फ, पर्माफ्रॉस्ट और पर्वतीय ढलानों को प्रभावित कर रहा है, लेकिन यह निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी कि इस विशेष घटना में उसकी क्या भूमिका रही।

 

विशेषज्ञों के अनुसार इसके लिए विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन और तथाकथित “एट्रिब्यूशन स्टडी” की जरूरत होगी, जिसके बाद ही जलवायु परिवर्तन और इस आपदा के बीच प्रत्यक्ष संबंध के बारे में ठोस निष्कर्ष निकाला जा सकेगा।

उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी ने छात्रों से बात की:स्टूडेंट्स ने हिंदी में सुनाया कविताएं; मोदी बोले- ये मेरे दिल की भावनाएं जैसी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान के दो दिवसीय दौरे के दौरान ताशकंद स्थित महात्मा गांधी सेंटर का दौरा किया। यहां उज्बेक छात्रों ने हिंदी में उनकी लिखी कविताओं की कुछ पंक्तियां सुनाईं। अपनी कविताएं छात्रों की आवाज में सुनकर मोदी भावुक हो गए और कहा कि हिंदी उनकी मातृभाषा नहीं होने के बावजूद छात्रों ने कविताओं की भावनाओं को बिल्कुल उसी तरह व्यक्त किया, जैसी भावनाएं उनके दिल में थीं। इस दौरान मोदी ने उज्बेकिस्तान में भारत, महात्मा गांधी और तमिल संस्कृति को लेकर बढ़ती रुचि का जिक्र किया और तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद करने का सुझाव दिया। वहीं, उनकी यात्रा के दौरान दोनों देशों के रिश्ते कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक पहुंचे और 11 समझौतों का आदान-प्रदान हुआ। उज्बेकिस्तान में भारतीय संस्कृति का बढ़ा प्रभाव कार्यक्रम में एक उज्बेक इंडोलॉजिस्ट ने कहा कि शायद दुनिया में बहुत कम ऐसे देश होंगे जहां लोगों में भारत को लेकर इतना प्यार है। उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान में लगभग हर नागरिक ‘नमस्ते’ शब्द से परिचित है। यह भी बताया कि उज्बेकिस्तान में भारतीय कला, नृत्य, संगीत, दर्शन और योग को लेकर भी लोगों की रुचि बढ़ रही है। तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में हो अनुवाद PM मोदी ने तमिल साहित्य और ‘तिरुक्कुरल’ का भी जिक्र किया। उन्होंने संस्थान की 80वीं वर्षगांठ का उल्लेख करते हुए पूछा कि क्या तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद करने की दिशा में काम किया जा सकता है। कार्यक्रम में मौजूद वक्ता ने जवाब दिया कि इसके लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा। मोदी ने कहा कि तिरुक्कुरल का उज्बेक भाषा में अनुवाद होने से भारतीय दर्शन और विचारों को समझने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि दुनिया की प्राचीन भाषाओं में मौजूद दार्शनिक विचार यह बताते हैं कि सभ्यता की शुरुआत से ही मानव सोच कितनी गहरी रही है। खबर अपडे़ट हो रही है…