पीएम मोदी आज ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल जाएंगे:राष्ट्रपति मिर्जियोयेव से द्विपक्षीय बैठक, व्यापार और निवेश पर होगी बात

पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के उज्बेकिस्तान दौरे पर है। आज पीएम ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर जाएंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। इसके बाद किर्गिस्तान के बिश्केक रवाना होंगे। मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा, 4 तस्वीरें किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। =========== ये खबर भी पढ़ें उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी को महिलाओं ने राखी बांधी, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में रवाना हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। दोनों नेता एक ही कार में एयरपोर्ट से होटल पहुंचे। पीएम मोदी ने यहां भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी उज्बेकिस्तान में दो दिन रहेंगे। वे राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। पढ़ें पूरी खबर

‘बेहद उदार’: नेपाल के राष्ट्रपति पौडेल ने की PM मोदी की तारीफ, बाढ़ में मदद के लिए भारत का जताया आभार

Nepal flood: नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शनिवार को भारत का धन्यवाद किया। उन्होंने 26 अगस्त को हिमालयी देश में आई भयानक अचानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और समर्थन के लिए आभार जताया। इस बाढ़ में 626 लोगों की मौत हुई है। नेपाल ने संकट के इस मुश्किल समय में मदद करने के लिए भारत के प्रयासों की भी तारीफ की। इस दौरान राष्ट्रपति पौडेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “बेहद उदार” बताया।

पौडेल ने मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया

X पर एक पोस्ट में, पौडेल ने आपदा के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की चिंता और भारत सरकार की मदद के लिए उनका आभार जताया।

उन्होंने लिखा, “नेपाल सरकार और यहां के लोगों की ओर से मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उनकी चिंता और संवेदना के लिए दिल से धन्यवाद करता हूं। साथ ही, नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत सरकार की ओर से दिए गए उदार समर्थन और सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त करता हूं।””

नेपाल के राष्ट्रपति ने आपदा में मारे गए भारतीय नागरिकों के प्रति भी शोक व्यक्त किया।

पौडेल ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “हम 26 अगस्त, 2026 की आपदा में भारतीयों की दुखद मौत पर भारत सरकार और वहां के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति भी व्यक्त करते हैं।”

नेपाल का कहना है कि भारत पुनर्निर्माण में मदद के लिए तैयार है

नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने बताया कि भारत ने बाढ़ से हुई तबाही के बाद पुनर्निर्माण के लिए उदार मदद देने की बात कही है।

नेपाल ने इस भयानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और उसके तुरंत दिए गए समर्थन की भी तारीफ की है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में घरों और जरूरी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। अब नेपाल के सामने इन इलाकों को दोबारा बसाने और बुनियादी सुविधाओं को ठीक करने की बड़ी चुनौती है।

इस आपदा से भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं और पौडेल ने उनकी मौत पर शोक व्यक्त किया है।

बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई बाढ़

यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से बर्फ और चट्टानों के खिसकने (एवलांच) के कारण आई। इसके बाद पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव बुधवार को मध्य नेपाल से होते हुए नीचे की ओर बढ़ा, जिससे कस्बों और गांवों में भारी तबाही हुई।

यह भी पढ़ें: 626 शव, 2,400 लापता… नेपाल में बाढ़ से हाहाकार, भारत-चीन समेत कई देश मदद को आगे आए

626 शव, 2,400 लापता… नेपाल में बाढ़ से हाहाकार, भारत-चीन समेत कई देश मदद को आगे आए

Nepal Flood: नेपाल की भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ के बाद बड़े पैमाने पर खोज, बचाव और राहत अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे में अब तक 626 शव बरामद किए जा चुके हैं और करीब 2,400 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, 187 से ज्यादा विदेशी नागरिकों समेत 4,450 से ज्यादा लोगों को बचाया गया है। इसके अलावा, रसुवा, नुवाकोट, धाडिंग और चितवन में आपातकालीन अभियान जारी हैं, और नेपाल ने बचाव और राहत कार्यों के लिए खास अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है।

626 शव बरामद, 2,400 लापता

भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है और बड़े पैमाने पर आपातकालीन राहत कार्य शुरू करने पड़े हैं।

ताजा आंकड़ों के अनुसार, 626 शव बरामद किए गए हैं, जबकि लगभग 2,400 लोग अभी भी लापता हैं। वहीं, अब तक 4,450 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है, जिनमें 187 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल हैं।

सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जिलों में तलाशी, बचाव और इमरजेंसी मेडिकल ऑपरेशन जारी हैं। अधिकारी अभी भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं और प्रभावित इलाकों में लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाई जा रही है।

नेपाल ने खास अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है

नेपाल ने बचाव और राहत कार्यों के बीच खास अंतरराष्ट्रीय मदद की अपील की है।

सुरंग से बचाव कार्यों के लिए भारत से 11 सदस्यों वाली एक तकनीकी टीम भेजी गई है। चीन से भी सुरंग से बचाव के लिए एक और खास टीम के आने की उम्मीद है।

भारत ने नेपाल की मदद के लिए 57 टन से ज्यादा राहत सामग्री भी भेजी है। चीन, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों से भी जरूरी सामान आ रहा है।

इस मदद से तुरंत बचाव और राहत कार्यों में सहायता मिलने की उम्मीद है, क्योंकि अधिकारी आपदा के बड़े पैमाने से निपट रहे हैं।

विदेशी नागरिकों के लिए इमरजेंसी कंट्रोल रूम

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बाढ़ से प्रभावित विदेशी नागरिकों की मदद के लिए एक खास इमरजेंसी कंट्रोल रूम बनाया है। यह कंट्रोल रूम परिवारों के साथ तालमेल बिठाएगा, पहचान की प्रक्रियाओं में मदद करेगा और स्वदेश वापसी से जुड़ी प्रक्रियाओं को संभालेगा।

बता दें कि बाढ़ से बड़ी संख्या में विदेशी नागरिक बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। ऐसे में उनके परिवारों और संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क और तालमेल बनाना राहत और बचाव अभियान का एक अहम हिस्सा बन गया है।

नुकसान का आकलन जारी

नेपाल सरकार ने बाढ़ से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन शुरू कर दिया है। यह आकलन मुख्य बुनियादी ढांचे पर केंद्रित है, जिसमें पुल, सड़कें और पनबिजली परियोजनाएं शामिल हैं।

वहीं, बाढ़ से हुई भारी तबाही को देखते हुए, नेपाल को उम्मीद है कि लंबी अवधि में पुनर्निर्माण की प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय मदद भी अहम भूमिका निभाएगी। इसलिए नेपाल सरकार न केवल तत्काल बचाव और राहत कार्यों के लिए, बल्कि क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए भी मदद मांग रही है।

नेपाल ने विदेशी मदद ठुकराने की खबरों को गलत बताया

नेपाल सरकार ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि उसने अंतरराष्ट्रीय मदद लेने से इनकार कर दिया था। सरकार ने फिर से कहा है कि आपदा के बाद बचाव, राहत और पुनर्निर्माण के कामों के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद की बहुत जरूरत है।

अधिकारियों ने आम लोगों और अंतरराष्ट्रीय मीडिया से यह भी अपील की है कि वे सिर्फ आधिकारिक तौर पर पुष्टि की गई जानकारी पर ही भरोसा करें और बिना पुष्टि किए गए आंकड़ों को न तो छापें और न ही प्रसारित करें।

ध्यान दें कि राहत और पुनर्निर्माण के कामों में मदद के लिए सीधे प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में QR कोड या ऑनलाइन लिंक के जरिए योगदान दिया जा सकता है।

नेपाल पर्यटकों के लिए खुला है

बाढ़ से हुई तबाही के बीच, अधिकारियों ने साफ किया है कि नेपाल विदेशी यात्रियों और पर्यटकों के लिए खुला है और वहां कामकाज जारी है, खासकर उन इलाकों में जो बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं।

यह जानकारी ऐसे समय में दी गई है जब भोटे कोशी नदी की बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य जारी हैं।

वहीं, अधिकारी लापता लोगों की तलाश, आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और प्रभावित समुदायों तक राहत पहुंचाने पर ध्यान दे रहे हैं, साथ ही बुनियादी ढांचे को हुए बड़े नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें: कल का मौसम: IMD ने इस इलाके में भारी बारिश की रेड कलर वॉर्निंग दी, यूपी-बिहार संग कई राज्यों में 30 अगस्त को बारिश का तांडव

रूसी ड्रोन हमले से कीव के पास एक गोदाम में जोरदार ब्लास्ट, 27 की मौत, दर्जनों घायल

Russia-Ukraine War: यूक्रेन की राजधानी कीव के पास एक गोदाम में रूसी ड्रोन हमलों के कारण हुए धमाके में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस धमाके से आसपास के इलाके में काफी नुकसान हुआ है। वहीं, यूक्रेन के अधिकारियों ने बताया कि इस घटना के बाद रिहायशी इलाकों के पास गोला-बारूद रखने को लेकर भी काफी सवाल उठ रहे हैं।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि धमाके से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की जाएगी। वहीं, रूस ने कहा कि उसकी सेना ने हथियारों के एक ऐसे गोदाम को निशाना बनाया था, जहां ड्रोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण रखे गए थे।

27 लोगों की मौत, बढ़ सकता है आंकड़ा

कीव क्षेत्र के सैन्य प्रशासन के प्रमुख, तिमुर तकाचेंको ने बताया कि इस घटना में कम से कम 27 लोगों की मौत हुई है। तकाचेंको ने कहा, “दुर्भाग्य से, अभी तक 27 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। और यह संख्या अंतिम नहीं हो सकती है।” उन्होंने मारे गए लोगों के परिवारों और प्रियजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

रिपोर्ट के मुताबिक, धमाके के बाद दर्जनों लोग घायल भी हुए। बता दें कि यह घटना तब हुई जब रूसी ड्रोन ने कीव के पास एक गोदाम पर हमला किया, जिससे हुए धमाके से उस जगह के आसपास भारी नुकसान हुआ।

जेलेंस्की ने दिए जांच के आदेश

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि रूसी ड्रोन ने गोदाम पर हमला किया, जिससे धमाका हुआ। हालांकि, उन्होंने गोदाम की जगह के बारे में कोई खास जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा कि इस घटना की जांच की जाएगी।

उन्होंने रिहायशी इलाकों के पास गोला-बारूद रखने पर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक, जेलेंस्की ने कहा, “गोला-बारूद को घरों या दूसरे रिहायशी इलाकों के पास नहीं रखा जा सकता।”

उम्मीद है कि जांच में धमाके से जुड़ी परिस्थितियों और उस जगह पर सामान रखने के तरीके की पड़ताल की जाएगी।

यह भी पढ़ें: कभी भी टूट सकती है झील: नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, चीन ने दी चेतावनी

कभी भी टूट सकती है झील: नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, चीन ने दी चेतावनी

Nepal Flood Alert: नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। यह खतरा उस भीषण फ्लैश फ्लड के सिर्फ चार दिन बाद सामने आया है, जिसमें देश के कई इलाकों में भारी तबाही हुई थी। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने चेतावनी दी है कि ऊपर की ओर बनी एक अस्थायी झील किसी भी समय टूट सकती है।

चीन के अधिकारियों ने नेपाल के विदेश मंत्रालय को इस बारे में जानकारी दी है। अधिकारियों ने बताया कि झील में कुछ बदलाव देखे गए हैं, जिसमें पानी का रंग लगातार गहरा होना शामिल है। बीजिंग ने यह भी कहा है कि उसके मॉडल के मुताबिक, अगर झील को रोकने वाले प्राकृतिक बांध का कुछ हिस्सा टूटता है, तो नदी में अधिकतम करीब 500 घन मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पानी आ सकता है। इससे नेपाल के कई इलाकों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

नई चेतावनी किस वजह से जारी की गई?

चीनी अधिकारियों ने झील के बदलते रूप को संभावित चेतावनी का संकेत बताया है।

नेपाल को भेजे गए संदेश में कहा गया, “परसों बननी शुरू हुई झील का रंग लगातार गहरा होता जा रहा है। इसका मतलब है कि यह फट सकती है।”

चीन ने कहा कि झील में अभी पानी की मात्रा बहुत ज्यादा नहीं है। उसने यह भी कहा कि अगर रुकावट टूटती है, तो नदी के निचले बहाव में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना कम है।

फिलहाल, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

कितना पानी जमा हुआ है?

ग्लेशियर के ढहने से मलबे की एक प्राकृतिक रुकावट बन गई, जिससे ल्हेन्डे नदी सिस्टम के ऊपरी हिस्से में एक अस्थायी झील बन गई है। कहा जा रहा है कि इसी घटना के कारण इस हफ्ते की शुरुआत में नेपाल और तिब्बत में अचानक बाढ़ आई थी।

यह झील चीन की तरफ चोचेन नदी और नेपाल की तरफ पुरेपु नदी के संगम के पास स्थित है।

चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, झील का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। शुक्रवार तक लगभग 25 लाख (2.5 मिलियन) क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया था।

चीनी अधिकारियों ने पहले अनुमान लगाया था कि अगले तीन दिनों में झील में और 30 लाख (3 मिलियन) क्यूबिक मीटर पानी जमा हो सकता है।

अगर प्राकृतिक रुकावट टूट जाए तो क्या होगा?

चीन ने इस बात का अंदाजा लगाने के लिए बाढ़ की मॉडलिंग की है कि अगर अस्थायी रुकावट का कोई हिस्सा टूटता है, तो कितना पानी नीचे की ओर बह सकता है। चीनी संदेश में कहा गया, “अगर बांध का कोई हिस्सा टूटता है, तो पानी का अधिकतम बहाव 500 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड हो सकता है। यह नदी के किनारों के भीतर ही रहेगा।”

अधिकारी ड्रोन और सैटेलाइट का इस्तेमाल करके भी इलाके पर नजर रख रहे हैं।

झील से पानी पहले ही बहने लगा है

शुक्रवार को झील का पानी ल्हेंडे खोला और त्रिशूली नदियों में बहने लगा। चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के अनुसार, दोपहर तक इस बहाव से होने वाले तुरंत खतरे को काबू में माना जा रहा था।

हालांकि, इस आकलन के बावजूद, झील के टूटने की आशंका को लेकर चिंता बनी हुई है, क्योंकि नेपाल अभी भी बुधवार को आई अचानक बाढ़ के असर से उबरने की कोशिश कर रहा है।

बाढ़ की तबाही से अब भी जूझ रहा नेपाल

नेपाल में बचाव और राहत कार्य जारी हैं और अधिकारी नदी के ऊपरी हिस्से में भी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। नेपाल में कम से कम 579 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तिब्बत में कम से कम सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

ताजा चेतावनी के बाद निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई है। अधिकारी अब अस्थायी झील में पानी के स्तर के साथ-साथ उसे रोकने वाले प्राकृतिक बांध की मजबूती पर भी लगातार नजर रख रहे हैं।

यह भी पढ़ें: मां मान चुकी थी कि बेटा नहीं रहा फिर नेपाल बाढ़ के बीच हुआ चमत्कार! 8 साल के मासूम ने पेड़ पर चढ़ यूं बचा ली थी अपनी जान

विश्वकप में 5वें स्थान रहने परे चक दे गर्ल्स को मिले 50 लाख रुपए

हॉकी इंडिया ने शुक्रवार को भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए 50 लाख रुपये के नकद इनाम की घोषणा की। टीम ने पांच दशकों के बाद वर्ल्ड कप में ऐतिहासिक पांचवां स्थान हासिल किया है।

सलीमा टेटे की टीम ने गुरुवार को एमस्टेलवीन में 5वें/6वें स्थान के लिए हुए क्लासिफिकेशन मैच में दुनिया की नंबर 5 टीम जर्मनी को 3-1 से हराकर यह उपलब्धि हासिल की। यह टूर्नामेंट में भारत का अब तक का दूसरा सबसे अच्छा प्रदर्शन है; इससे पहले 1974 में हुए पहले टूर्नामेंट में टीम चौथे स्थान पर रही थी।

टीम ने पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ़ एक हार का सामना किया। उन्होंने चीन, इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया जैसी बेहतर रैंकिंग वाली टीमों के साथ मैच ड्रॉ कराए और दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया। आखिर में, मुख्य कोच शुअर्ड मरिने के मार्गदर्शन में जर्मनी के खिलाफ जीत के साथ उन्होंने अपना अभियान पूरा किया।

इस उपलब्धि पर टीम को बधाई देते हुए हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप टिर्की ने कहा, “यह भारतीय महिला हॉकी के लिए एक ऐतिहासिक नतीजा है। 52 साल बाद वर्ल्ड कप में पांचवां स्थान हासिल करना इस टीम की कड़ी मेहनत, हिम्मत और लड़ने के जज्बे का सबूत है, जो उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के दौरान दिखाया। हॉकी इंडिया की ओर से, मैं टीम के लिए 50 लाख रुपये के नकद इनाम की घोषणा करते हुए खुशी महसूस कर रहा हूं। यह हमारी तरफ से उनकी सराहना का एक छोटा सा तोहफा है, और मुझे उम्मीद है कि इससे खिलाड़ियों को और बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलेगी।”

इसी भावना को दोहराते हुए हॉकी इंडिया के महासचिव भोला नाथ सिंह ने कहा, “सलीमा और उनकी टीम ने देश का मान बढ़ाया है। उन्होंने दुनिया की कुछ बेहतरीन टीमों का मुकाबला किया और उनके सामने डटकर खेलीं। यह घोषणा उनके समर्पण और कड़ी मेहनत को सम्मान देने का हमारा तरीका है। हमें उम्मीद है कि इससे टीम को और प्रेरणा मिलेगी क्योंकि अब वे एशियाई खेलों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।”

क्यों खास है उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मंदिर? दक्षिण की ओर झुका है 56 सेमी ऊंचा स्वयंभू शिवलिंग

क्यों खास है उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मंदिर? दक्षिण की ओर झुका है 56 सेमी ऊंचा स्वयंभू शिवलिंग

kashi vishwanth mandir

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तरकाशी आने वाले श्रद्धालुओं से ऐतिहासिक काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन करने की अपील की। परशुराम द्वारा स्थापित इस प्राचीन शिव मंदिर का इतिहास, महत्व और खासियतों के बारे में जानें।

 

सीएम धामी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, जनपद उत्तरकाशी में स्थित श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव की आराधना का पावन एवं प्रमुख केंद्र है। यहां श्रद्धालु महादेव की पूजा-अर्चना कर आत्मिक शांति एवं आध्यात्मिक ऊर्जा की अनुभूति करते हैं। आप भी उत्तरकाशी आगमन पर श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के दर्शन अवश्य करें।
 

क्या है मान्यता?

उत्तरकाशी का काशी विश्वनाथ मंदिर भागीरथी नदी के तट पर स्थित है। यह उत्तराखंड के सबसे प्राचीन और पवित्र शिव मंदिरों में से एक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस प्राचीन मंदिर की स्थापना भगवान परशुराम ने की थी। वर्ष 1857 में टिहरी रियासत के राजा सुदर्शन शाह की पत्नी, महारानी खनेती ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार कराया था।

 

उत्तरकाशी को भगवान शिव का कलियुग का दूसरा निवास माना जाता है और इसी कारण यहां भी काशी विश्वनाथ मंदिर मौजूद है। ऐसा कहते हैं कि जब काशी पानी में डूब जाएगी तब भगवान काशी विश्वनाथ को उत्तरकाशी के इस मंदिर में स्थानांतरित कर दिया जाएगा।

 

क्या है मंदिर की विशेषता?

गर्भ गृह में स्थापित शिवलिंग लगभग 56 सेंटीमीटर ऊंचा और स्वयंभू माना जाता है। यह शिवलिंग दक्षिण दिशा की ओर थोड़ा सा झुका हुआ है। मंदिर के सामने शक्ति मंदिर में एक विशाल त्रिशूल है। कहा जाता है कि इसका संबंध पौराणिक काल और देवताओं द्वारा अस्त्र-शस्त्र के प्रयोग से है।

नेपाल बाढ़ में जिंदगी बचाने का खतरनाक मिशन, घने कीचड़ और अंधेरी सुरंग के बीच फंसे लोगों तक ऐसे पहुंचे नेपाली सैनिक, वायरल हुआ Video

नेपाल इस समय एक बड़ी प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। भोटे कोशी नदी में आई अचानक बाढ़ ने नेपाल-तिब्बत सीमा के आसपास कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी है। बाढ़ के पानी के साथ आया मलबा और कीचड़ गांवों और इमारतों में फैल गया, जिससे बड़ी संख्या में लोग अलग-अलग जगहों पर फंस गए। हालात इतने मुश्किल हैं कि कई लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना चुनौती बन गया है। ऐसे समय में नेपाली सेना ने मोर्चा संभालते हुए बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया है। हेलिकॉप्टर की मदद से ऊंची इमारतों और छतों पर फंसे लोगों को निकाला जा रहा है, जबकि जवान मुश्किल रास्तों से अंदर जाकर भी लोगों की तलाश कर रहे हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन के सामने खराब मौसम, मलबा और दुर्गम इलाका बड़ी चुनौती बने हुए हैं। इस बीच सामने आए कुछ वीडियो बचाव अभियान की गंभीरता और जवानों की कोशिशों की तस्वीर दिखा रहे हैं।

छतों पर फंसे लोगों के लिए देवदूत बना हेलिकॉप्टर

रेस्क्यू ऑपरेशन के कई वीडियो सामने आए हैं, जिनमें सेना के हेलिकॉप्टर बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते नजर आ रहे हैं। एक वीडियो में हेलिकॉप्टर क्षतिग्रस्त इमारतों के ठीक ऊपर मंडराता दिखाई देता है, जबकि नीचे बाढ़ का मलबा फैला हुआ है। एक अन्य वीडियो में छत पर फंसा एक व्यक्ति लगातार हेलिकॉप्टर की ओर हाथ हिलाकर मदद मांगता दिखाई देता है। इसके बाद जवानों ने उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। मुश्किल हालात में सेना का यह ऑपरेशन लोगों की जान बचाने की जद्दोजहद को दिखाता है।

हाइड्रोपावर टनल में फंसे लोगों तक पहुंचे जवान

बाढ़ के बाद रसुवा जिले में अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर की सुरंग के अंदर भी कई लोग फंस गए थे। इनमें मजदूरों के अलावा कुछ पर्यटक भी शामिल थे। सामने आए वीडियो में नेपाली सेना के दो जवान कीचड़ से भरे रास्ते से आगे बढ़ते हुए सुरंग के अंदर जाते दिखाई देते हैं। बाहर मलबे और कीचड़ की मोटी परत के बावजूद जवानों ने अंदर फंसे लोगों तक पहुंचकर उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की।

नेपाल में मौत का आंकड़ा लगातार बढ़ा

इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल में बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में 579 लोगों की मौत हुई है, जबकि तिब्बत में सात लोगों की जान गई है। दोनों तरफ 2,400 से ज्यादा लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल में करीब 1,924 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जबकि तिब्बत में यह संख्या 558 बताई गई है। इनमें 540 से ज्यादा विदेशी नागरिक भी शामिल हैं।

हजारों जवान राहत और बचाव में जुटे

नेपाल की आपदा प्रबंधन अथॉरिटी के अनुसार, राहत और बचाव अभियान में करीब 14,829 सुरक्षाकर्मियों को लगाया गया है। अब तक 3,742 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। बाढ़ और मलबे से प्रभावित इलाकों में सेना की टीमें लगातार तलाशी अभियान चला रही हैं। मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के बीच हेलिकॉप्टर और जमीनी टीमें उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं, जो अब भी कहीं मलबे, सुरंगों या ऊंची इमारतों में फंसे हो सकते हैं।

भारतीय नागरिकों को भी सुरक्षित निकालने की कोशिश

इस आपदा का असर भारत के नागरिकों पर भी पड़ा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि 149 लोग चीन से नेपाल पहुंच चुके हैं। करीब 400 भारतीय चीन में सुरक्षित बताए गए हैं। वहीं लगभग 320 भारतीयों के अभी भी लापता या संपर्क से बाहर होने की जानकारी है। नेपाल में जारी यह राहत अभियान सिर्फ एक प्राकृतिक आपदा से लड़ाई नहीं, बल्कि मलबे के बीच जिंदगी की तलाश की लगातार कोशिश है। हर रेस्क्यू के साथ सेना और बचाव दल उन परिवारों के लिए उम्मीद जगा रहे हैं, जो अब भी अपने अपनों के लौटने का इंतजार कर रहे हैं।

Zomato की रक्षाबंधन पोस्ट देखकर Blinkit भी नहीं रहा चुप, दिया ऐसा जवाब कि कमेंट्स में शुरू हो गई मजेदार बहस

मोदी 4 साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर रवाना:पहले उज्बेकिस्तान जाएंगे, फिर किर्गिस्तान में SCO समिट में हिस्सा लेंगे; जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात संभव

पीएम मोदी शनिवार सुबह दो देशों के लिए दिल्ली से रवाना हुए। उनका यह चार दिन का दौरा होगा। पहले वे उज्बेकिस्तान जाएंगे फिर किर्गिस्तान का दौरा करेंगे। पीएम चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर जा रहे हैं। वे किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं समिट में भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई नेताओं के साथ मुलाकात कर सकते हैं। उज्बेकिस्तान दौरा: पीएम की द्विपक्षीय बातचीत, लाल बहादुर स्मारक भी जाएंगे मोदी 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में रहेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। मोदी ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा कर सकते हैं। किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। उज्बेकिस्तान से जुड़ी 5 खास बातें 1. डबल-लैंडलॉक्ड देश
उज्बेकिस्तान समुद्र से पूरी तरह कटा हुआ है। इसके सभी पड़ोसी देश भी लैंडलॉक्ड हैं। दुनिया में ऐसे देशों की संख्या बहुत कम है। 2. समरकंद का गौरवशाली इतिहास
करीब 2700 साल पुराना समरकंद कभी सिल्क रूट का प्रमुख शहर था। एशिया और यूरोप के बीच व्यापार करने वाले यहां से गुजरते थे। 3. सोने का बड़ा उत्पादक
उज्बेकिस्तान दुनिया का 10वां सबसे बड़ा सोने का उत्पादक देश है। यहां स्थित मुरुंतौ (Muruntau) दुनिया की सबसे बड़ी ओपन-पिट सोने की खदानों में से एक है। 4. बाबर की जन्मभूमि
मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का जन्म 1483 में अंदीजान शहर में हुआ था। बाबर बाद में काबुल होते हुए भारत आया और 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई जीतकर मुगल साम्राज्य की नींव रखी। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। ———————————-

मोदी 4 साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर रवाना:पहले उज्बेकिस्तान जाएंगे, फिर किर्गीजस्तानमें SCO समिट में हिस्सा लेंगे; जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात संभव

पीएम मोदी शनिवार सुबह दो देशों के लिए दिल्ली से रवाना हुए। उनका यह चार दिन का दौरा होगा। पहले वे उज्बेकिस्तान जाएंगे फिर किर्गीजस्तान का दौरा करेंगे। पीएम चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर जा रहे हैं। वे किर्गीजस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं समिट में भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई नेताओं के साथ मुलाकात कर सकते हैं। उज्बेकिस्तान दौरा: पीएम की द्विपक्षीय बातचीत, लाल बहादुर स्मारक भी जाएंगे मोदी 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में रहेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। मोदी ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा कर सकते हैं। किर्गीजस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गीजस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। ———————————-