Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद डरावनी तस्वीर, मौतों के बाद शव रखने की जगह का संकट

Nepal Flash Flood : नेपाल में बाढ़ की तबाही के बाद डरावनी तस्वीर, मौतों के बाद शव रखने की जगह का संकट

बुधवार को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड के बाद नेपाल में मृतकों की संख्या 700 के पार पहुंच गई है। अब हिमालयी देश के सामने एक और गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मुर्दाघरों और अस्पतालों में शव रखने की जगह कम पड़ने लगी है। बड़ी संख्या में बरामद शवों को सुरक्षित रखने के लिए अस्पतालों को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

 

हालात को देखते हुए नेपाल सरकार ने फैसला किया है कि जिन शवों की पहचान नहीं हो सकी है और जिन पर कोई दावा करने वाला नहीं है, उन्हें एयरटाइट बैग में दफनाया जाएगा। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

 

उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल उन्हीं शवों का सरकारी स्तर पर प्रबंधन किया जाएगा, जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। दफनाने से पहले उनकी DNA और अन्य जरूरी साक्ष्य सुरक्षित किए जाएंगे, ताकि भविष्य में उनकी पहचान स्थापित की जा सके।

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दफनाने से पहले लिए जाएंगे DNA सैंपल

 

अज्ञात और लावारिस शवों को दफनाने से पहले अधिकारियों द्वारा उनके DNA सैंपल लिए जाएंगे। इसके अलावा प्रत्येक शव को एक अलग पहचान या रेफरेंस नंबर दिया जाएगा और उस स्थान का टैग भी लगाया जाएगा।

 

अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रक्रिया से भविष्य में परिवारों को अपने लापता परिजनों के शवों की पहचान करने और उन्हें वापस हासिल करने में मदद मिल सकेगी। शनिवार दोपहर तक 100 से अधिक शवों की DNA प्रोफाइलिंग पूरी की जा चुकी थी।

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1.5 मीटर गहराई में दफनाए जाएंगे शव

 

नेपाल सरकार के अनुसार, अज्ञात शवों को जमीन के करीब 1.5 मीटर नीचे दफनाया जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें बाद में निकाला जा सके। शवों के बीच करीब 40 सेंटीमीटर का अंतर रखा जाएगा, जिससे DNA मैच होने पर संबंधित शव को आसानी से निकाला जा सके।

 

दफन स्थल पर कंक्रीट प्लेटफॉर्म पर एक साइन बोर्ड भी लगाया जाएगा। पूरी प्रक्रिया की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्डिंग की जाएगी, ताकि शवों से संबंधित जानकारी सुरक्षित रखी जा सके।

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चितवन में सबसे ज्यादा शव बरामद

 

बाढ़ और भूस्खलन के बाद सबसे ज्यादा शव चितवन जिले में बरामद किए गए हैं। द हिमालयन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, यहां अब तक 233 शव मिले हैं, लेकिन इनमें से केवल छह की पहचान हो सकी है और उन्हें उनके परिवारों को सौंपा गया है।

 

अधिकारी पहचान प्रक्रिया को तेज करने में जुटे हैं। अब तक 135 शवों के DNA सैंपल लिए जा चुके हैं। इसके लिए चितवन के कॉलेज ऑफ मेडिकल साइंसेज, चितवन मेडिकल कॉलेज, भरतपुर अस्पताल और काठमांडू तथा पाल्पा के मेडिकल कॉलेजों के साथ समन्वय किया जा रहा है।

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शवों को सड़ने से बचाने के लिए बनाए गए कूलिंग सेंटर

 

गर्मी और लंबे समय तक शव रखे जाने के कारण उनके खराब होने का खतरा भी बढ़ रहा है। इसे देखते हुए अधिकारियों ने कुछ घरों को कूलिंग सेंटर में बदल दिया है, ताकि शवों को सुरक्षित रखा जा सके और उनकी पहचान के लिए पर्याप्त समय मिल सके।

 

734 लोगों की मौत, 2498 अब भी लापता

 

नेपाल सरकार के मुताबिक रविवार को बाढ़ और आपदा में मरने वालों की संख्या बढ़कर 734 हो गई। वहीं 2,498 लोग अब भी लापता हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 4,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

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इस बीच भोटेकोशी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ने से प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित जिलों में रहने वाले लोगों और बचाव दलों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने लोगों से एहतियाती कदम उठाने की अपील की है।

Asian Games में मेडल जीते बिना घर नहीं जाएंगी मीराबाई चानू, खा ली कसम

भारत की मीराबाई चानू का मानना है कि जापान के आइची, नागोया में होने वाले एशियाई खेल 2026 उनके इंटरनेशनल वेटलिफ्टिंग करियर की “सबसे मुश्किल प्रतियोगिताओं” में से एक होंगे।

मीराबाई चानू एशियाई खेलों में पांच सदस्यों वाली भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम की अगुवाई करेंगी। तीन बार ओलंपिक में हिस्सा ले चुकीं मीराबाई टीम की चार महिला खिलाड़ियों में से एक होंगी। एशियाई खेलों में वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता 22 से 28 सितंबर तक आइची के टोकाई सिटिज़न जिम्नेजियम में होगी।

कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना तीसरा गोल्ड मेडल जीतने के बाद, टोक्यो 2020 की सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई को लगता है कि एशियाई खेलों में मुकाबला “ओलंपिक स्तर” का होगा। मीराबाई ने कहा, “मेरी वेट कैटेगरी (49 किग्रा) में सबसे मजबूत लिफ्टर एशिया से ही आते हैं और आपको जापान में ओलंपिक जैसी झलक देखने को मिलेगी।”

इससे पहले चोटों की वजह से मीराबाई चानू एशियाई खेलों में मेडल नहीं जीत पाई थीं। हांगझोऊ में हुए पिछले खेलों में, हिप और जांघ की चोट के कारण स्नैच राउंड में ही उनका अभियान खराब हो गया था और वह 49 किग्रा कैटेगरी में चौथे स्थान पर रही थीं। जकार्ता में हुए 2018 के खेलों में, पीठ की गंभीर चोट के कारण मीराबाई चानू बाहर हो गई थीं।

आगामी एशियाई खेलों से पहले चोट से दूर रहना मीराबाई की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।उत्तर प्रदेश के मोदीनगर में एक सेंटर पर उनकी ट्रेनिंग की देखरेख करने वाले दो लोग कोच विजय शर्मा और अमेरिकी स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच डॉ. एरन हॉर्शिग हैं। डॉ. हॉर्शिग के साथ उनका जुड़ाव नवंबर 2020 में शुरू हुआ था और आज भी जारी है।

मीराबाई ने कहा, “हम हर गुरुवार उनसे वीडियो कॉल पर बात करते हैं और ट्रेनिंग, रिकवरी और आगे के कदमों के बारे में चर्चा करते हैं।” “हर चीज़ की बारीकी से समीक्षा की जाती है और चूंकि डॉ. हॉर्शिंग खुद एक वेटलिफ्टर थे, इसलिए उन्हें शरीर की हर मांसपेशी के बारे में जानकारी है। इस लगातार समीक्षा ने मुझे फिट रखा है।”

एशियाई खेलों की तैयारी ज़ोर-शोर से चल रही है। ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद मीराबाई और उनकी टीम ने एक भी दिन बर्बाद नहीं किया। कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजकों ने वेटलिफ्टिंग हॉल हटा दिया था, लेकिन मीराबाई, विजय शर्मा और फिजियो रोहित छाबड़िया ने ग्लासगो में एक जिम ढूंढा और ट्रेनिंग सेशन के लिए पैसे दिए।

मीराबाई ने कहा, “मैं सीधे मोदीनगर में ट्रेनिंग के लिए लौट आई। असल में, मैं घर नहीं गई और मैंने खुद को एक चुनौती दी है कि ‘जब तक मैं एशियाई खेलों में मेडल नहीं जीत लेती, तब तक घर नहीं जाऊंगी’।”

कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीन गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद, यह भारतीय वेटलिफ्टर ग्लासगो में मुकाबले के स्तर को बहुत ज़्यादा अहमियत नहीं दे रही हैं। मीराबाई ने कहा, “सच कहूं तो, कॉमनवेल्थ गेम्स में मुकाबला मेरे लिए मुश्किल नहीं था। मुझे ग्लासगो में बहुत ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। असली परीक्षा एशियाई खेलों में होगी।”

ग्लासगो में, मीराबाई ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में कुल 190 किग्रा (स्नैच – 85 किग्रा; क्लीन एंड जर्क – 105 किग्रा) वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता और स्नैच, क्लीन एंड जर्क और कुल वज़न में नए कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाए।

नाइजीरिया की रूथ असुकुओ न्योंग ने कुल 168 किग्रा (75 किग्रा 93 किग्रा) वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता, जबकि मलेशिया की आइरीन जेन हेनरी ने 167 किग्रा (77 किग्रा 90 किग्रा) वजन उठाकर ब्रॉन्ज़ मेडल जीता।

मीराबाई का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन 205 किग्रा (89 किग्रा 116 किग्रा) है, जो उन्होंने 2021 एशियाई चैंपियनशिप और हाल ही में फरवरी 2026 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में किया था। “मैं देखना चाहती हूं कि मैं जापान में कितना आगे जा सकती हूं। एशियाई खेल मेरे लिए सबसे मुश्किल रहे हैं।”

मीराबाई का कहना है कि उन्हें चीन, उत्तर कोरिया, जापान और थाईलैंड के वेटलिफ्टरों से सबसे कड़े मुकाबले की उम्मीद है। पेरिस 2024 में, थाईलैंड की सुरोदचाना खाम्बाओ ने मीराबाई को सिर्फ़ एक किलो के अंतर से चौथे स्थान पर धकेल दिया। थाई एथलीट ने कुल 200 किलो वज़न उठाया था।

मीराबाई ने कहा, “हम फ़िटनेस को लेकर सावधान रहे हैं और अब तक मुझे अपने शरीर में अच्छा महसूस हुआ है।” उन्होंने आगे कहा कि एशियाई खेल ही उनका एकमात्र लक्ष्य है। “मैं देखूँगी कि एशियाई खेलों में कैसा प्रदर्शन रहता है। लॉस एंजेलिस में वेट क्लास 53 किलो होगी और मुझे अपना वज़न बढ़ाना होगा। “यह कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, लेकिन सब कुछ एशियाई खेलों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा और उसके बाद हम दिसंबर में होने वाले ओलंपिक क्वालीफ़ायर के लिए योजना बना सकते हैं। मुझे लगता है कि जो भी जापान में मुक़ाबला करेंगे, वे लॉस एंजेलिस 2028 को लक्ष्य बनाएँगे, लेकिन अभी मेरे लिए मिशन एशियाई खेल ही है।”

नेपाल बाढ़ में मौत को मात देने की 3 कहानियां:टी-ब्रेक ने भारतीयों को बचाया, शिक्षक की समझदारी से बची 1600 बच्चों की जान

नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ ने करीब 750 लोगों की जान ले ली, जबकि 2,500 लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई और कई परिवार बिछड़ गए। इस दर्दनाक मंजर के बीच कुछ लोगों के बचने की कहानियां भी सामने आई हैं। किसी की जान चाय के लिए रुके रहने से बची, तो किसी ने सैकड़ों बच्चों को सुरक्षित निकाला। पढ़िए, नेपाल बाढ़ में मौत को मात देने वाली ऐसी ही 3 कहानियां… ‘चाय के लिए नहीं रुकते तो जान जा सकती थी’ तीर्थयात्री गडा एलावेनी ने ANI को बताया कि उनका ग्रुप तीन बसों में काठमांडू से सफर कर रहा था। रास्ते में सभी लोग चाय पीने के लिए कुछ देर के लिए रुक गए। यह रुकना बाद में उनकी जिंदगी का सबसे अहम फैसला साबित हुआ। एलावेनी को बाद में पता चला कि उनसे करीब आधे घंटे पहले निकली दो बसें बाढ़ में बह गईं और उनका पता नहीं चला है। उन्होंने कहा, हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे साथ ऐसा होगा। हम दर्शन नहीं कर पाए, लेकिन भगवान हमें सुरक्षित घर ले आए। एलावेनी ने बताया कि उन्होंने काठमांडू से करीब 80 किलोमीटर का सफर तय किया था और तीनों बसों में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं। आंखों के सामने पूरा स्कूल बह गया, लेकिन बच्चे बचा लिए गए त्रिभुवन सेकेंडरी को-एजुकेशनल स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी एक कक्षा में पढ़ा रहे थे। तभी उनका साथी दौड़ता हुआ आया। उसने बताया कि नदी के ऊपरी क्षेत्र में रहने वाले किसी व्यक्ति ने फोन करके बाढ़ आने की जानकारी दी है। दवाड़ी ने भास्कर को बताया, ‘मैंने तत्काल स्कूल की घंटी लगातार बजाने का निर्देश दिया, ताकि खतरे का अलार्म दिया जा सके। स्कूल में 1,600 स्टूडेंट पढ़ते हैं। बाढ़ वाले दिन कितने थे, पता नहीं। सभी बच्चों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया। हालांकि, मेरी आंखों के सामने स्कूल बाढ़ में बह गया।’ दवाड़ी ने कहा, ‘गनीमत रही कि बच्चे बच गए। बाद में मुझे हेलिकॉप्टर से बचाया गया। स्कूल में बाढ़ प्रभावित इलाकों के बच्चे पढ़ते थे। कई बच्चों ने पूरे परिवार खो दिए हैं।’ 6 साल की बच्ची 3 दिन मलबे में दबी रही, रेस्क्यू टीम ने बचाया रसुवा के तिमुरे इलाके में रेस्क्यू टीम ने 6 साल की बच्ची को बाढ़ के तीन दिन बाद मलबे के नीचे से जिंदा निकाला। टीम जब लापता लोगों की तलाश कर रही थी, तब उन्हें मलबे के नीचे से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद जवानों ने मिट्टी और मलबा हटाकर बच्ची को बाहर निकाला। इसके बाद बच्ची को तिमुरे की पुलिस चौकी ले जाया गया। जहां से उसे इलाज के लिए काठमांडू भेजने की तैयारी की गई। खराब मौसम और अंधेरा होने के चलते उसे एयरलिफ्ट नहीं किया जा सका। अगले दिन हेलिकॉप्टर से उसे काठमांडू पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। ————————– यह भी पढ़ें….. नेपाल बाढ़, लोगों को 7:30 बजे खतरे का पता चला: अलर्ट डेढ़ घंटे बाद आया; आरोप- चीन ने नहीं चेताया, वरना सैकड़ों जानें बच जातीं नेपाल में 26 अगस्त की सुबह आई बाढ़ के बाद अलर्ट जारी करने की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

नेपाल बाढ़ में 24 गुजराती लापता, पीड़ितों की पहचान के लिए गांधीनगर NFSU की टीम रवाना

नेपाल बाढ़ में 24 गुजराती लापता, पीड़ितों की पहचान के लिए गांधीनगर NFSU की टीम रवाना

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा में करीब 24 गुजराती पर्यटकों के लापता होने की खबर है। इस आपदा का शिकार हुए लोगों की पहचान करने के लिए गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) से 10 सदस्यों की एक विशेष टीम नेपाल के लिए रवाना हो गई है। डॉ. भार्गव पटेल के नेतृत्व में यह टीम नेपाल पहुंचकर पीड़ितों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करेगी। गौरतलब है कि NFSU के इन विशेषज्ञों को अमेरिकी रक्षा विभाग (US Department of Defense) के साथ भी फॉरेंसिक मामलों में काम करने का अनुभव है।

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बाढ़ के कारण 24 गुजराती संपर्क से बाहर, अमरेली के पर्यटक से हुआ संपर्क 

 

नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति में कई गुजराती फंस गए हैं, जिनमें से 24 लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है और उनके परिजनों से संपर्क टूट गया है। प्रशासन द्वारा उनकी तलाश के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि इस बीच अमरेली के एक पर्यटक से संपर्क हो पाया है। स्थानीय प्रशासन को जानकारी दी गई है कि अमरेली के पर्यटक सुरक्षित हैं और उनकी अपने परिवार से बातचीत हो चुकी है।

 

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान आनंद का दंपत्ति लापता 

 

नेपाल में आए इस प्रलय में गुजरात के आनंद जिले के विमल पटेल और उनकी पत्नी जैमीना पटेल भी लापता हो गए हैं। यह दंपत्ति बीते 16 अगस्त को 'नमस्ते नेपाल टूर एंड ट्रेवल्स' के माध्यम से नेपाल घूमने गया था। इसके बाद वे नेपाल से कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले थे और चीन का वीजा प्राप्त करने की प्रक्रिया में थे। परिजनों के साथ उनका आखिरी बार टेलीफोन पर संपर्क पिछले रविवार को हुआ था, लेकिन उसके बाद से उनका कोई संपर्क नहीं हो सका है।

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खोज और राहत कार्य के प्रयास तेज 

 

लापता सभी गुजराती पर्यटकों का पता लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में रहकर राहत कार्य कर रहे हैं। गांधीनगर से गई विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों और उनके परिजनों की मदद के लिए कार्य शुरू करेगी। सभी लापता लोगों से सुरक्षित संपर्क हो सके, इसके लिए उनके परिजन उम्मीद लगाए बैठे हैं।

Women’s Asia Cup 2026: एशिया कप में कैसा है भारत का शेड्यूल, इस दिन पाकिस्तान से भिड़ेगी टीम इंडिया

IND vs PAK: विमेंस एशिया कप 2026 का 10वां सीजन दुबई में खेला जा रहा है। विमेंस एशिया कप 2026 के ग्रुप स्टेज में भारतीय टीम अपने पहले मैच के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत का सामना आज थाईलैंड से दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में होगा। वहीं दोनों टीमों के बीच ये मुकाबला रात 8 बजे शुरू होगा। हरमनप्रीत कौर की अगुआई में भारतीय टीम जीत के इरादे से मैदान पर उतरेगी। वहीं फैंस को भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले का इंतजार है। भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में डाला गया है। आइए जानते हैं किस दिन होगा भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला

कब होगा भारत का मुकाबला

विमेंस एशिया कप टूर्नामेंट के सभी मुकाबले दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित किए जाएंगे। इस बार कुल आठ टीमें खिताब के लिए मैदान में हैं, जिन्हें दो ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप स्टेज के बाद दोनों ग्रुप की शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी। इस बार भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रखा गया है, ऐसे में 5 सितंबर को होने वाला दोनों टीमों का मुकाबला टूर्नामेंट के सबसे चर्चित मैचों में शामिल रहेगा। वहीं मेजबान यूएई की कोशिश अपने घरेलू मैदान और परिस्थितियों का फायदा उठाकर बेहतर प्रदर्शन करने की होगी। टीम श्रीलंका और बांग्लादेश जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ कड़ी चुनौती पेश करना चाहेगी।

भारत के मुकाबले

  • भारत बनाम थाईलैंड- 30 अगस्त, दुबई
  • हांगकांग, चीन बनाम भारत- सितंबर 3, दुबई
  • भारत बनाम पाकिस्तान- 5 सितंबर, दुबई
  • पहला सेमी-फाइनल- 10 सितंबर, दुबई
  • दूसरा सेमी-फाइनल- 11 सितंबर, दुबई
  • फाइनल- 13 सितंबर, दुबई

एशिया कप में रहा है भारत का दबदबा

श्रीलंका इस बार विमेंस एशिया कप में अपने खिताब का बचाव करने उतरी है। टीम ने 2024 में पहली बार यह ट्रॉफी अपने नाम की थी। हालांकि, टूर्नामेंट के रिकॉर्ड को देखें तो भारत का दबदबा सबसे ज्यादा रहा है। भारतीय टीम ने अब तक खेले गए नौ एशिया कप में से सात बार खिताब जीता है, जबकि बाकी दो मौकों पर उसे उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा। बांग्लादेश भी विमेंस एशिया कप का खिताब जीत चुकी है और उसने 2018 में ट्रॉफी अपने नाम की थी। थाईलैंड, इंडोनेशिया और हांगकांग, चीन ने ACC विमेंस प्रीमियर कप 2026 में शानदार खेल दिखाकर विमेंस एशिया कप में जगह बनाई है।

Nepal Flood: ‘शायद इस बार फोन उठ जाए…’ नेपाल बाढ़ में लापता स्वाति के परिवार ने नहीं छोड़ी उम्मीद

नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी है। इस तबाही में से अबतक कुल 691 लोगों को मौत हो चुकी है। वहीं 3000 हजार से ज्यादा लोग लापता है। इनके परिवार के लोगों इनकी तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बाद टोरंटो में रहने वाली 50 वर्षीय इंजीनियर स्वाति बागरेचा भी लापता हैं। स्वाति बागरेचा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गई थी। 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से उनका परिवार उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। मोबाइल फोन की घंटी बजने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिल रहा है। स्वाति के परिवार ने उनकी तलाश के लिए भारतीय और कनाडाई दूतावास से मदद मांगी है।

फोन पर रिंग जा रहा है

PTI के मुताबिक, टोरंटो में रहने वाली 50 वर्षीय इंजीनियर स्वाति बागरेचा के परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ के बाद से स्वाति का कोई पता नहीं चल पाया है। परिवार उनके फोन की हर घंटी का इंतजार कर रहा है, इस उम्मीद में कि शायद उनकी कोई खबर मिल जाए। लेकिन फोन का जवाब न मिलने से चिंता और बढ़ती जा रही है। PTI ने स्वाति के भाई डॉ. प्रशांत बागरेचा ने बताया, “उनका मोबाइल फोन अभी भी बज रहा है, लेकिन वह हमारी कॉल रिसीव नहीं कर रही हैं। हम उनकी सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं।”

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं

दिल्ली की रहने वाली स्वाति 8 अगस्त को ईशा फाउंडेशन के 77 लोगों के एक समूह के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं। परिवार के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे उनसे आखिरी बार संपर्क हुआ था। इसी दिन नेपाल में अचानक भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति बन गई थी। इसके बाद से स्वाति से संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार के मुताबिक, स्वाति 26 अगस्त को इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए नेपाल-तिब्बत सीमा पर पहुंची थीं। इसके बाद उनसे परिवार की कोई बात नहीं हो सकी। वहीं, उनकी 14 साल की बेटी अनुष्का फिलहाल अपनी बड़ी बहन के साथ मुंबई में रह रही है।

परिवार ने मदद की अपील की

26 अगस्त को नेपाल के रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे बाढ़ आ गई। बाढ़ का पानी आगे चलकर त्रिशूली और गंडक नदी तंत्र तक पहुंच गया और कई निचले इलाकों में हालात बिगड़ गए। प्रशांत के मुताबिक, मोबाइल की लोकेशन से जानकारी मिली कि स्वाति का फोन चीन की सीमा के पास किसी इलाके में सक्रिय था। हालांकि, फोन को ट्रैक करने में परेशानी आ रही है क्योंकि उसका मोबाइल नंबर टोरंटो में रजिस्टर्ड है। स्वाति के परिवार ने उनकी तलाश में मदद के लिए नेपाल में भारतीय और कनाडाई दूतावास से संपर्क किया है। परिवार ने दोनों देशों के अधिकारियों से स्वाति को सुरक्षित ढूंढने और उन्हें वापस लाने में मदद करने की अपील की है।

शिवराज सिंह चौहान ने परिवार से की बात

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय विधायक मुकेश टंडन के प्रयासों के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी स्वाति के परिवार से बातचीत की। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि स्वाति की तलाश के लिए जरूरी राजनयिक और प्रशासनिक स्तर पर हर संभव कोशिश की जाएगी। साथ ही, उनकी सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर मदद पहुंचाने का आश्वासन भी दिया गया।

Nepal Flood Update: नेपाल में फिर विनाशकारी त्रासदी का खतरा! भोटे कोशी नदी में बाढ़ का बहाव बढ़ा, रसुवा में हाई अलर्ट

Nepal-Tibet Flood Update: पड़ोसी देश नेपाल में हालिया भीषण बाढ़ की त्रासदी के बीच एक बार फिर भोटे कोशी नदी को लेकर चिंता बढ़ गई है। नेपाल के नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने रविवार (20 अगस्त) सुबह बताया कि रसुवा में भोटेकोशी नदी में बाढ़ का बहाव फिर बढ़ गया है। ऐसे में नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की अपील की गई है। NDRRMA के अनुसार, रसुवा जिला प्रशासन कार्यालय को सूचना मिली है कि भोटे कोशी नदी में बढ़े हुए बाढ़ प्रवाह की आवाज सुनाई दे रही है। इसके बाद नदी के आसपास के इलाकों में विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है।

रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग में हाई अलर्ट

NDRRMA ने खास तौर पर रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। लोगों से नदी के किनारे जाने से बचने और किसी भी संभावित खतरे की स्थिति में सुरक्षित स्थान की ओर जाने के लिए तैयार रहने को कहा गया है।

नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी ने रविवार सुबह सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में लिखा, “रसुवा के जिला प्रशासन कार्यालय को जानकारी मिली है कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का बहाव तेज होने की आवाज सुनी गई है। इसलिए, हम रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग तक नदी के आस-पास के इलाकों में सावधानी बरतने का अनुरोध करते हैं। जैसे ही और जानकारी मिलेगी, हम आगे की अपडेट देंगे।”

यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब नेपाल में कुछ दिन पहले आई विनाशकारी बाढ़ में बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है। फिलहाल, राहत एवं बचाव अभियान अभी भी जारी है। रविवार को बचाव अभियान का पांचवां दिन है। नेपाल-चीन सीमा के इलाकों में भयानक अचानक आई बाढ़ और मलबे के बहाव से हुई तबाही के बाद टीमें बचे हुए लोगों और लापता लोगों की तलाश कर रही हैं।

आगे की जानकारी का इंतजार

NDRRMA ने कहा है कि जैसे-जैसे अतिरिक्त जानकारी प्राप्त होगी, लोगों को आगे अपडेट किया जाएगा। हालांकि, नेपाल के बाढ़ पूर्वानुमान विभाग ने बाद में कहा कि भोटे कोशी क्षेत्र में बड़े स्तर की बाढ़ का तत्काल खतरा नहीं है, लेकिन नदी के आसपास सावधानी बरतना जरूरी है। फिलहाल प्रशासन की अपील है कि नदी किनारे रहने वाले लोग किसी भी अफवाह पर भरोसा न करें और आधिकारिक चेतावनियों पर नजर बनाए रखें।

मरने वालों की संख्या 691 हुई

अधिकारियों से मिली ताजा जानकारी के मुताबिक, नेपाल और चीन के तिब्बत इलाके में मरने वालों की कुल संख्या 691 हो गई है। जबकि 3,000 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं। अधिकारियों ने 675 मौतों और 2,498 लोगों के लापता होने की सूचना दी है। जबकि चीनी अधिकारियों ने तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में 16 मौतों और 546 लोगों के लापता होने की जानकारी दी है। अब तक नेपाल में 3,700 से ज्यादा लोगों को बचाया जा चुका है। यह भयानक आपदा 26 अगस्त को आई थी। पहाड़ी सीमावर्ती इलाके में मलबे का भारी बहाव और अचानक आई बाढ़ ने घरों, सड़कों, पुलों और अन्य चीजों को नष्ट कर दिया था।

बचाव अभियान जारी

खराब मौसम के कारण कुछ समय के लिए रोके जाने के बाद नेपाली अधिकारियों ने खोज और बचाव अभियान फिर से शुरू किया। बचे हुए लोगों को निकालने और अलग-थलग पड़े समुदायों तक राहत सामग्री पहुंचाने के लिए हेलीकॉप्टर तैनात किए गए हैं। बचाव दल कई अहम जगहों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिनमें रसुवा में अपर त्रिशूली-1 पनबिजली परियोजना भी शामिल है, जहां अधिकारियों का मानना ​​है कि 100 से ज्यादा लोग कीचड़ से भरी सुरंग के अंदर फंसे हो सकते हैं।

चीनी तरफ बुरी तरह क्षतिग्रस्त ग्यिरोंग सीमा क्रॉसिंग के आसपास भी खोज अभियान जारी है। इस बीच, भारत ने भोजन, दवाइयों और कंबल जैसी राहत सामग्री भेजी है। उन इलाकों में संपर्क बहाल करने में मदद के लिए तकनीकी टीमें और पहले से तैयार पुल (प्री-फैब्रिकेटेड ब्रिज) देने की भी पेशकश की है, जहां इंफ्रास्ट्रक्चर बह गया है।

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Mohan Bhagwat New York Visit: ‘अगर कोई हिंदू नहीं चाहता कि भारत में मुस्लिम रहें, तो…’; न्यूयॉर्क में क्या बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत?

Mohan Bhagwat New York Visit: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार (29 अगस्त) को न्यूयॉर्क में ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ (एक दुनिया: एक मानवता) नाम के धर्म गुरुओं के एक सम्मेलन को संबोधित किया, जिसमें उन्होंने अलग-अलग धर्मों के बीच एकता और सद्भाव की अपील की। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारत में कोई मुस्लिम न रहे, ऐसा सोचने वाला हिंदू नहीं हो सकता। भागवत ने कहा कि आज धर्मों की पहचान मुख्य रूप से रीति-रिवाजों से होती है। उन्होंने कहा, “धार्मिक अनुशासन का पालन करने और दिव्यता की राह पर चलने के लिए रीति-रिवाजों का अनुशासन भी जरूरी है। लेकिन धर्म का मकसद क्या है? यह हमें सच्चाई की ओर ले जाता है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं ऐसे समाज में काम कर रहा हूं जो पारंपरिक रूप से कहता है कि धर्म भले ही अलग-अलग हों, लेकिन मानवता एक है। सच्चाई एक है और मानवता उसी सच्चाई का नतीजा है।” भागवत ने कहा, “हिंदुत्व का मतलब मुस्लिम को बाहर (देश से) करना नहीं है। मुस्लिम नहीं होने चाहिए ऐसा सोचना हिंदुत्व नहीं हो सकता। धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन मानवता एक है।” भागवत ने कहा कि अगर आप खुद को हिंदू कहते हैं, तो आपको यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही लक्ष्य की ओर ले जाते हैं।

भागवत ने अपने संबोधन में समाज को प्राचीन परंपराओं के बारे में शिक्षित करने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत की परंपराएं विदेशी आक्रमणों के बावजूद बची हुई हैं। इन परंपराओं ने लोगों को ‘एक दुनिया, एक मानवता’ का पाठ पढ़ाया है।

‘इंसानों के बीच कोई फर्क नहीं होता’

मोहन भागवत ने कहा, “असल में मैंने 2018 में दिल्ली में एक लेक्चर सीरीज के दौरान यह बात कही थी। वहां मुस्लिम भाई भी मौजूद थे। उन्होंने मुझसे सवाल पूछा, “आप एक हिंदू संगठन हैं, आप हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं, तो हम मुसलमानों का क्या होगा? क्या आप हमें बाहर निकाल देंगे?” मैंने उनसे कहा, “नहीं…, हिंदुत्व यह नहीं है। अगर कोई हिंदू यह सोचता है कि भारत में कोई मुसलमान नहीं होना चाहिए, तो वह हिंदू नहीं रह जाएगा।” अगर आप खुद को हिंदू कहलाना चाहते हैं, तो आपको यह मानना ​​होगा कि सभी रास्ते एक ही मंजिल तक ले जाते हैं। और हर इंसान की अपनी गरिमा होती है। इंसानों के बीच कोई फर्क नहीं होता।”

RSS चीफ ने आगे कहा, “मैं कोई धार्मिक विद्वान नहीं हूं, न ही आपकी तरह कोई धार्मिक अथॉरिटी हूं। लेकिन मैं एक ऐसे समाज में काम कर रहा हूं जो ट्रेडिशनली कहता है कि धर्म अलग हो सकते हैं, लेकिन इंसानियत एक है। सच एक है, और इंसानियत उस सच का उत्पाद है। इसलिए इंसानियत एक है। वह सच एक सच है, लेकिन उसे बताने वाले के हिसाब से कई तरीकों से बताया गया है। क्योंकि इंसान होने के नाते, हम उस सॉफ्टवेयर के कैदी हैं जो हमारे दिमाग में बनाया गया है।”

हिंदू धर्म पर मोहन भागवत का संदेश

अपने संबोधन के दौरान RSS प्रमुख ने कहा कि यह समझना जरूरी है कि हिंदू जीवन शैली का पालन करने के कई रास्ते हैं। लेकिन वे सभी एक ही परम सत्य की ओर ले जाते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इंसानों के बीच कोई बुनियादी अंतर नहीं है। हर किसी को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है।

भागवत ने यह भी कहा कि संगठन ने भारत में रहने वाले मुस्लिम और ईसाई समुदायों के साथ बातचीत शुरू की है। उन्होंने कहा, “बातचीत पहला कदम है। सेवा एक और कदम है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह बातचीत के बाद ही हो। ये दोनों काम साथ-साथ होने चाहिए। हम सेवा कर रहे हैं। और जब हम सेवा करते हैं, तो कोई भेदभाव नहीं करते।”

उन्होंने आगे कहा, “यही वजह है कि प्रचार-प्रसार के मामले में हम काफी पीछे हैं। गलत नैरेटिव (धारणाओं) की वजह से एक गलत सोच बन गई है। लेकिन जब लोग असल में आकर और समझदारी के साथ हमारे काम को देखते हैं, तो वे गलत धारणाएं बहुत तेज़ी से खत्म हो सकती हैं।”

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आधुनिक राजनीति पर भागवत के विचार!

RSS प्रमुख ने आधुनिक राजनीति के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि राजनीति काफी हद तक जनमत पर निर्भर करती है। खासकर लोकतंत्र में कोई भी राजनेता आसानी से इसके खिलाफ नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि घटनाओं के होने से पहले ही राजनीति को बदलें और उसे सही दिशा में प्रभावित करें। हम युद्ध रोकना चाहते हैं। हम ये सभी काम करना चाहते हैं। इसलिए किसी न किसी समय हमें राजनीति को प्रभावित करना ही होगा।” हालांकि, भागवत ने संकेत दिया कि राजनीति के कारण धार्मिक सद्भाव नहीं बन पा रहा है।

नेपाल बाढ़, लोगों को 7:30 बजे खतरे का पता चला:9:35 पर सरकारी SMS आया; अलर्ट में 2 घंटे देरी, वरना सैकड़ों जानें बच जातीं

नेपाल में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद अब अलर्ट जारी करने की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, रसुवा जिला प्रशासन को चीन की तरफ से बाढ़ की सूचना सुबह 9 बजे मिली थी। इसके बाद सुबह 9.15 बजे नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले करीब छह लाख लोगों को SMS अलर्ट भेजा गया। वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि उसे जिला प्रशासन से सुबह 8.40 बजे ही बाढ़ की सूचना मिल गई थी। लोगों को SMS अलर्ट सुबह 9.35 बजे भेजा गया था। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्हें दोस्तों और रिश्तेदारों से सुबह 7.30 बजे ही बाढ़ की चेतावनी मिल गई थी। अलर्ट की टाइमिंग को लेकर इन अलग-अलग दावों के बीच सिस्टम की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।शनिवार तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 682 पहुंच गई, जबकि 3 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। इनमें 275 भारतीय शामिल हैं। अब तक 7,514 लोगों को रेस्क्यू किया गया है, जिनमें 163 विदेशी भी हैं। प्रत्यक्षदर्शी बोले- सुबह 7.30 बजे ही मिल गई थी जानकारी त्रिशूली निवासी 36 साल के रमेश रिजाल के मुताबिक, चीन बॉर्डर के पास रहने वाले उनके एक दोस्त ने सुबह 7.30 बजे फोन कर भयानक बाढ़ आने की जानकारी दी थी। रिजाल ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी करते रहे। सुबह 9.20 बजे उन्होंने अपने नए घर के निर्माण का वीडियो भी बनाया। इसके बाद अफरा-तफरी मचने पर वे परिवार के साथ सुरक्षित जगह चले गए। त्रिभुवन सेकेंडरी को-एजुकेशनल स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बताया कि एक सहकर्मी को नदी के ऊपरी इलाके से बाढ़ की सूचना मिली थी। इसके बाद उन्होंने स्कूल की घंटी लगातार बजाने का निर्देश दिया। स्कूल में करीब 1,600 स्टूडेंट्स हैं। दवाड़ी के मुताबिक, उनकी आंखों के सामने स्कूल बाढ़ में बह गया, हालांकि बच्चे सुरक्षित बचा लिए गए। बाद में उन्हें हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया। भूकंप के 13 मिनट बाद नदी का डेटा सिस्टम बंद मौसम विभाग के मुताबिक, 26 अगस्त को सुबह 8.37 बजे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 4.4 तीव्रता का भूकंप आया था। इसके 13 मिनट बाद सुबह 8.50 बजे भोटे कोशी नदी का जलस्तर मापने वाला डेटा रिसीविंग सिस्टम काम करना बंद कर गया। भूकंप के बाद तिब्बत के ल्हेंदे खोला नदी में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ गिरा था। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है। 9.36 बजे पानी बाजार की ओर बढ़ा, 2 मिनट में सब बह गया त्रिशूली बाजार में कबाड़ का कारोबार करने वाले बिहार मूल के जलेश्वर साहनी ने बाढ़ की तबाही की तस्वीरें खींचीं। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 9.15 बजे रासुवागढ़ी में मौजूद उनके भाई ने फोन कर विशाल बाढ़ के आने की सूचना दी। इसके बाद साहनी परिवार के साथ पहाड़ी पर चले गए। साहनी ने सुबह 9.36 बजे एक तस्वीर ली, जिसमें बाढ़ का पानी त्रिशूली बाजार की ओर बढ़ता दिख रहा था। इसके महज दो मिनट बाद 9.38 बजे ली गई दूसरी तस्वीर में पूरा त्रिशूली बाजार बाढ़ में बह चुका था। यानी तबाही की रफ्तार इतनी तेज थी कि दो मिनट में पूरा मंजर बदल गया। विपक्ष ने चीन के सैटेलाइट सिस्टम पर उठाए सवाल नेपाली कांग्रेस के उपनेता अभिषेक प्रताप शाह ने कहा कि चीन का सैटेलाइट सिस्टम ग्लेशियरों की निगरानी करता है। इसलिए चीन को खतरे की सूचना समय रहते देनी चाहिए थी। इसी को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि बाढ़ की चेतावनी स्थानीय प्रशासन और लोगों तक सही समय पर क्यों नहीं पहुंची। ———————————- यह खबर भी पढ़ें… नेपाल- भोटेकोशी नदी में पानी बढ़ा, फिर बाढ़ का खतरा:रसुवा सहित 3 जिलों में अलर्ट नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नेपाल डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट अथॉरिटी ने रविवार सुबह बताया कि भोटेकोशी नदी में पानी का बहाव तेज होने की जानकारी मिली है। इसके बाद जिला प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में अलर्ट जारी किया गया है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…

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नेपाल में 26 अगस्त की सुबह आई बाढ़ के बाद अलर्ट जारी करने की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, चीन की ओर से रसुवा जिला प्रशासन को बाढ़ की सूचना सुबह 9 बजे मिली थी। इसके बाद सुबह 9.15 बजे नदी के दोनों किनारों पर रहने वाले छह लाख लोगों को SMS अलर्ट भेजा गया। प्रधानमंत्री कार्यालय का कहना है कि उसे जिला प्रशासन से सुबह 8.40 बजे ही बाढ़ की सूचना मिल गई थी। लोगों को SMS अलर्ट सुबह 9.35 बजे भेजा गया था। दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का दावा है कि उन्हें दोस्तों और रिश्तेदारों से सुबह 7.30 बजे ही बाढ़ की चेतावनी मिल गई थी। शनिवार तक बाढ़ से मरने वालों की संख्या 691 पहुंच गई है। तीन हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। इनमें 275 भारतीय शामिल हैं। अब तक 7,514 लोगों को रेस्क्यू किया गया है, जिनमें 163 विदेशी भी हैं। प्रत्यक्षदर्शी बोले- सुबह 7.30 बजे जानकारी मिल गई थी त्रिशूली निवासी 36 साल के रमेश रिजाल के मुताबिक, चीन बॉर्डर के पास रहने वाले उनके एक दोस्त ने सुबह 7.30 बजे फोन कर भयानक बाढ़ आने की जानकारी दी थी। रिजाल ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। वे बच्चों को स्कूल भेजने की तैयारी करते रहे। सुबह 9.20 बजे उन्होंने अपने नए घर के निर्माण का वीडियो भी बनाया। इसके बाद अफरातफरी मचने पर परिवार के साथ सुरक्षित जगह चले गए। त्रिभुवन सेकेंडरी को-एजुकेशनल स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी ने बताया कि एक सहकर्मी को नदी के ऊपरी इलाके से बाढ़ की सूचना मिली थी। इसके बाद उन्होंने स्कूल की घंटी लगातार बजाने का निर्देश दिया। स्कूल में करीब 1,600 स्टूडेंट्स हैं। दवाड़ी के मुताबिक, उनकी आंखों के सामने स्कूल बाढ़ में बह गया, हालांकि बच्चे सुरक्षित बचा लिए गए। बाद में उन्हें हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया। भूकंप जैसे झटकों के 13 मिनट बाद नदी का डेटा सिस्टम बंद मौसम विभाग के मुताबिक, 26 अगस्त को सुबह 8.37 बजे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास 4.4 तीव्रता के भूकंप जैसे झटके आए थे। इसके 13 मिनट बाद सुबह 8.50 बजे भोटे कोशी नदी का जलस्तर मापने वाले डेटा रिसीविंग सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया। इसके बाद तिब्बत के ल्हेंदे खोला नदी में पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ गिरा था। ल्हेंदे खोला, भोटेकोशी नदी की सहायक नदी है। भोटेकोशी चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है। 9.36 बजे पानी बाजार की ओर बढ़ा, 2 मिनट में सब बह गया त्रिशूली बाजार में कबाड़ का कारोबार करने वाले बिहार मूल के जलेश्वर साहनी ने बाढ़ की तबाही की तस्वीरें खींचीं। उन्होंने बताया कि सुबह करीब 9.15 बजे रासुवागढ़ी में मौजूद उनके भाई ने फोन कर विशाल बाढ़ के आने की सूचना दी। इसके बाद साहनी परिवार के साथ पहाड़ी पर चले गए। साहनी ने सुबह 9.36 बजे एक तस्वीर ली, जिसमें बाढ़ का पानी त्रिशूली बाजार की ओर बढ़ता दिख रहा था। इसके महज दो मिनट बाद 9.38 बजे ली गई दूसरी तस्वीर में पूरा त्रिशूली बाजार बाढ़ में बह चुका था। यानी तबाही की रफ्तार इतनी तेज थी कि दो मिनट में पूरा मंजर बदल गया। विपक्ष ने चीन के सैटेलाइट सिस्टम पर उठाए सवाल नेपाली कांग्रेस के उपनेता अभिषेक प्रताप शाह ने कहा कि चीन का सैटेलाइट सिस्टम ग्लेशियरों की निगरानी करता है। इसलिए चीन को खतरे की सूचना समय रहते देनी चाहिए थी। इसी को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि बाढ़ की चेतावनी स्थानीय प्रशासन और लोगों तक सही समय पर क्यों नहीं पहुंची। ———————————- यह खबर भी पढ़ें… नेपाल- भोटेकोशी नदी में पानी बढ़ा, फिर बाढ़ का खतरा:रसुवा सहित 3 जिलों में अलर्ट नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नेपाल डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट अथॉरिटी ने रविवार सुबह बताया कि भोटेकोशी नदी में पानी का बहाव तेज होने की जानकारी मिली है। इसके बाद जिला प्रशासन ने रसुवा, नुवाकोट और धादिंग में अलर्ट जारी किया गया है। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। पूरी खबर पढ़ें…