पीएम मोदी शनिवार सुबह दो देशों के लिए दिल्ली से रवाना हुए। उनका यह चार दिन का दौरा होगा। पहले वे उज्बेकिस्तान जाएंगे फिर किर्गिस्तान का दौरा करेंगे। पीएम चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर जा रहे हैं। वे किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं समिट में भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई नेताओं के साथ मुलाकात कर सकते हैं। उज्बेकिस्तान दौरा: पीएम की द्विपक्षीय बातचीत, लाल बहादुर स्मारक भी जाएंगे मोदी 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में रहेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। मोदी ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा कर सकते हैं। किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। उज्बेकिस्तान से जुड़ी 5 खास बातें 1. डबल-लैंडलॉक्ड देश
उज्बेकिस्तान समुद्र से पूरी तरह कटा हुआ है। इसके सभी पड़ोसी देश भी लैंडलॉक्ड हैं। दुनिया में ऐसे देशों की संख्या बहुत कम है। 2. समरकंद का गौरवशाली इतिहास
करीब 2700 साल पुराना समरकंद कभी सिल्क रूट का प्रमुख शहर था। एशिया और यूरोप के बीच व्यापार करने वाले यहां से गुजरते थे। 3. सोने का बड़ा उत्पादक
उज्बेकिस्तान दुनिया का 10वां सबसे बड़ा सोने का उत्पादक देश है। यहां स्थित मुरुंतौ (Muruntau) दुनिया की सबसे बड़ी ओपन-पिट सोने की खदानों में से एक है। 4. बाबर की जन्मभूमि
मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का जन्म 1483 में अंदीजान शहर में हुआ था। बाबर बाद में काबुल होते हुए भारत आया और 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई जीतकर मुगल साम्राज्य की नींव रखी। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। ———————————-
पीएम मोदी शनिवार सुबह दो देशों के लिए दिल्ली से रवाना हुए। उनका यह चार दिन का दौरा होगा। पहले वे उज्बेकिस्तान जाएंगे फिर किर्गीजस्तान का दौरा करेंगे। पीएम चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर जा रहे हैं। वे किर्गीजस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाली शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की 26वीं समिट में भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई नेताओं के साथ मुलाकात कर सकते हैं। उज्बेकिस्तान दौरा: पीएम की द्विपक्षीय बातचीत, लाल बहादुर स्मारक भी जाएंगे मोदी 29-30 अगस्त को उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में रहेंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। मोदी ताशकंद में लाल बहादुर शास्त्री स्मारक और महात्मा गांधी सेंटर का भी दौरा कर सकते हैं। किर्गीजस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गीजस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। ———————————-
Jio Platforms IPO: देश के अब तक के सबसे बड़े आईपीओ के लिए रास्ता साफ हो गया है। 37,000 करोड़ रुपये के इस मेगा आईपीओ के लिए आपको तैयार रहने की जरूरत है। सेबी से मंजूरी मिलने के बाद अब ह्यूंडई मोटर इंडिया के सबसे बड़े आईपीओ का रिकॉर्ड टूटने जा रहा है। ह्यूंडई मोटर इंडिया का आईपीओ पिछले साल आया था। यह आईपीओ 27,870 करोड़ रुपये का था।
Jio Platforms देश की सबसे बड़ी कंपनी Reliance Industries की डिजिटल इकाई है। Jio Platforms की सब्सिडियरी Reliance Jio Infocomm आज देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है। इसके 50 करोड़ से ज्यादा मोबाइल फोन के सब्सक्राइबर्स हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में कंपनी इनवेस्टर्स को सिर्फ नए शेयर इश्यू करेगी। इसका मतलब है कि इस इश्यू में कोई ऑफर फॉर सेल शामिल नहीं होगा।
SEBI से मंजूरी मिलने के बाद कंपनी अब आईपीओ में शेयर का प्राइस-बैंड तय करेगी। इनवेस्टर्स के लिए यह समझना जरूरी है कि Jio Platforms रिलायंस इंडस्ट्रीज के टेलीकॉम और डिजिटेल बिजनेसेज की होल्डिंग कंपनी है। रिलायंस इंडस्ट्रीज की Jio Platforms में 66.43 फीसदी हिस्सेदारी है। इस कंपनी में दुनिया की दिग्गज टेक्नोलॉजी कंपनियों की भी ब़ड़ी हिस्सेदारी है। इनमें Meta Platforms और Google शामिल हैं, जिनकी हिस्सेदारी क्रमश: 9.98 फीसदी और 7.73 फीसदी शामिल हैं।
शेयर बाजार में हाल में लिस्ट होने वाली रिलायंस इडस्ट्रीज की यह दूसरी कंपनी होगी। इससे पहले RIL ने अपनी फाइनेंशियल बिजनेसेज की सब्सिडियरी Jio Financial Services को लिस्ट कराया था। यह आईपीओ अगस्त 2023 में आया था, जिसे इनवेस्टर्स का स्ट्रॉन्ग रिस्पॉन्स मिला था। कंपनी का शेयर 28 अगस्त को मामूली गिरावट के साथ 238 रुपये पर बंद हुआ। बीते एक साल में यह शेयर 23 फीसदी गिरा है।
निवेशकों को यह भी ध्यान में रखने की जरूरत है कि Reliance Jio Infocomm दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल सर्विसेज कंपनी है। चीन की China Mobile पहले पायदान पर है। Jio Platforms का आईपीओ ऐसे वक्त आ रहा है, जब प्राइमरी मार्केट में काफी हलचल है। इसके अलावा ओएफएस, बल्क डील, ब्लॉक डील से भी कंपनियां काफी पैसे जुटा रही हैं। उधर, देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज का IPO भी जल्द आने वाला है। रिटेल इनवेस्टर्स जियो प्लेटफॉर्म्स और एनएसई के आईपीओ का काफी समय से इंतजार कर रहे हैं।
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नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। बाढ़ के बाद नेपाल-तिब्बत सीमा से जुड़े इलाकों में राहत और बचाव का काम लगातार जारी है। इस आपदा में अबतक मरने वालों की संख्या बढ़कर 616 पहुंच गई है। वहीं 2,500 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। इसमें 320 भारतीय भी शामिल है। हालात को देखते हुए बचाव और राहत दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, कुछ जगहों पर बनी अस्थिर बैरियर झीलों की वजह से दुबारा बाढ़ आने का खतरा बना हुआ है, जिससे राहत और बचाव कार्य में परेशानी हो रही है।
नेपाल में बाढ़ का खतरा
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, इस भयानक आपदा की शुरुआत ग्लेशियर के अचानक टूटने और ढहने से हुई। इसके बाद हिमालय से निकलने वाली नदियों में बड़ी मात्रा में बर्फ, चट्टान, कीचड़ और मलबा बहने लगा, जिसने निचले इलाकों में तबाही मचा दी। इस तेज बहाव ने बाढ़ की स्थिति को और गंभीर बना दिया।
रोकना पड़ा बचाव काम
शुक्रवार को पानी बढ़ने के खतरे को देखते हुए राहत और बचाव का काम कुछ समय के लिए रोक दिया गया। मलबे से बनी एक झील का पानी लहेंडे खोला और त्रिशूली नदी की ओर बढ़ रहा था। वहीं, तिब्बत की तरफ बांध टूटने की खबर मिलने के बाद नेपाल पुलिस ने बचाव दलों को तुरंत सुरक्षित जगह पर जाने की सलाह दी। खतरा कम होने और हालात सुधरने के बाद नेपाल में बचाव अभियान फिर शुरू कर दिया गया। चीन ने भी ग्यिरोंग इलाके में कुछ समय के लिए राहत कार्य रोका था। बाद में चीन के सरकारी चैनल CCTV ने हालात सामान्य होने की जानकारी दी, जिसके बाद बचाव कार्य दोबारा शुरू किया गया।
नेपाल में अभी भी बाढ़ का खतरा
नेपाल में बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है। अधिकारियों की नजर पहाड़ी इलाके में बनी दो बैरियर झीलों पर बनी हुई है, क्योंकि इनमें जमा पानी किसी भी समय नीचे की ओर बह सकता है। सैटेलाइट तस्वीरों में एक झील का आकार लगातार बढ़ता दिखाई दे रहा है और पानी बाहर निकलने का कोई स्पष्ट रास्ता नहीं दिख रहा है। इससे दबाव बढ़ने और दोबारा बाढ़ आने की आशंका बनी हुई है। वहीं, चीनी एक्सपर्ट ने भी आगाह किया है कि क्षेत्र में मौजूद 100 से अधिक ग्लेशियल झीलें आने वाले समय में खतरा पैदा कर सकती हैं।
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा
भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 84 भारतीयों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। इनमें तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं, जो भारत लौट चुके हैं। इसके अलावा त्रिशूली-I हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 कर्मचारियों को भी सुरक्षित बचा लिया गया है। वहीं, चीन की ओर से 149 भारतीय सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। दूसरी तरफ करीब 400 चीनी नागरिक चीन में सुरक्षित जगहों पर हैं और उन्हें वहां से निकालने में भारतीय दूतावास मदद कर रहा है।
अब तक कितने भारतीय लापता
बाढ़ के कारण संचार व्यवस्था खराब होने से करीब 320 भारतीयों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। वहीं, इस आपदा में हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारियों के अलावा कई ट्रेकर्स और तीर्थयात्री भी लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने अपनी लापता लोगों की सूची में 933 हाइड्रोपावर कर्मचारियों को शामिल किया है, जिससे स्थिति की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बीच एक हरे रंग का घर पानी के तेज बहाव के बावजूद खड़ा रहा। आसपास का इलाका उफनते पानी में डूब गया और कई इमारतें व मलबा बहते दिखे। इस घर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि वीडियो नेपाल में कहां का है, अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। घर की बालकनी में 3 लोग खड़े नजर आ रहे हैं। वे शांत दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कीचड़ भरा बाढ़ का पानी डरावनी रफ्तार से इलाके में बहता दिख रहा है। पानी अपने साथ इमारतों के ढांचे और मलबा बहा ले जा रहा है। हालांकि, चारों तरफ तेज पानी से घिरे रहने के बावजूद हरे रंग का यह घर काफी हद तक सुरक्षित नजर आया। बाढ़ और मलबे के बीच घर, तस्वीरें… नेपाल में अब तक 579 मौतें नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ में 579 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं करीब 2500 लोग लापता या संपर्क से बाहर हैं। इनमें 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। शुक्रवार को पता चला कि इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लक्ष गोपिसेट्टी भी नेपाल गए थे। उनसे भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, चीन की ओर करीब 400 भारतीय फंसे हैं, लेकिन सभी सुरक्षित हैं। भारत उनके सुरक्षित स्वदेश लौटने के लिए चीनी अधिकारियों के संपर्क में है। इसके अलावा 153 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। ————————————— ये खबर भी पढ़ें… नेपाल विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद लेने को राजी:बाढ़ में 579 मौतें; 320 भारतीयों समेत करीब 2500 लापता नेपाल सरकार ने विदेशी रेस्क्यू टीमों और विशेषज्ञों की मदद लेने को मंजूरी दे दी है। सरकार ने पहले विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों को अनुमति नहीं देने की बात कही थी, लेकिन अब भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के एक्सपर्ट्स की सीमित मदद ली जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…
नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बीच एक घर पानी के तेज बहाव के बावजूद खड़ा रहा। आसपास का इलाका उफनते पानी में डूब गया और कई इमारतें व मलबा बहते दिखे। इस घर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। हालांकि वीडियो नेपाल में कहां का है, यह पता नहीं लगा। घर की बालकनी में 3 लोग खड़े नजर आ रहे हैं। चारों तरफ तबाही के मंजर के बीच भी वे शांत दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में कीचड़ भरा बाढ़ का पानी डरावनी रफ्तार से इलाके में बहता दिख रहा है। पानी अपने साथ इमारतों के ढांचे और मलबा बहा ले जा रहा है। हालांकि, चारों तरफ तेज पानी से घिरे रहने के बावजूद यह घर काफी हद तक सुरक्षित नजर आया। बाढ़ और मलबे के बीच घर, 4 तस्वीरें… नेपाल में अब तक 579 मौतें नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ में 579 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं करीब 2500 लोग लापता या संपर्क से बाहर हैं। इनमें 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। शुक्रवार को पता चला कि इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लक्ष गोपिसेट्टी भी नेपाल गए थे। उनसे भी संपर्क नहीं हो पा रहा है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, चीन की ओर करीब 400 भारतीय फंसे हैं, लेकिन सभी सुरक्षित हैं। भारत उनके सुरक्षित स्वदेश लौटने के लिए चीनी अधिकारियों के संपर्क में है। इसके अलावा 153 भारतीय चीन से सुरक्षित नेपाल पहुंच चुके हैं। ————————————— ये खबर भी पढ़ें… नेपाल विदेशी रेस्क्यू टीमों की मदद लेने को राजी:बाढ़ में 579 मौतें; 320 भारतीयों समेत करीब 2500 लापता नेपाल सरकार ने विदेशी रेस्क्यू टीमों और विशेषज्ञों की मदद लेने को मंजूरी दे दी है। सरकार ने पहले विदेशी सर्च एंड रेस्क्यू टीमों को अनुमति नहीं देने की बात कही थी, लेकिन अब भारत, चीन, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के एक्सपर्ट्स की सीमित मदद ली जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…
नेपाल में बुधवार को आई भीषण बाढ़ के बाद लापता लोगों की संख्या लगातार बढ़ते जा रही है। शुक्रवार रात तक आंकड़ा 2400 के करीब पहुंच गया। जबकि अब तक 586 लोगों के शव मिले हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के मुताबिक, राहत और बचाव अभियान में 15,431 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं। अब तक 4,451 लोगों को बचाया जा चुका है। सेना और निजी प्राइवेट कंपनियों के 16 हेलिकॉप्टरों से लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बाढ़ के बाद 320 भारतीयों से संपर्क नहीं हो पाया है। करीब 400 भारतीय चीन में फंसे हैं और भारतीय दूतावास उनके संपर्क में है। इसके अलावा 149 भारतीय चीन से नेपाल पहुंच चुके हैं। इस बीच इंफोसिस पब्लिक सर्विसेज के CEO लैक्स गोपिसेट्टी भी लापता बताए जा रहे हैं। कंपनी ने शुक्रवार रात बताया कि गोपिसेट्टी निजी काम से नेपाल गए थे। लेकिन बाढ़ के बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। इधर, नेपाल दूसरे देशों के रेस्क्यू टीमों से मदद लेने के लिए तैयार हो गया है। नेपाल ने प्रभावित इलाकों में यातायात बहाल करने के लिए भारत और चीन से 70 मीटर लंबे 10 बेली ब्रिज की मदद भी मांगी है। PM बालेन ने बताया कि अब तक प्रधानमंत्री आपदा राहत कोष में 190 करोड़ नेपाली रुपए से ज्यादा जमा हुए हैं। प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्यों ने अपनी एक महीने की सैलरी भी राहत कोष में देने का फैसला किया है। खबर से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…
नेपाल-तिब्बत में 26 अगस्त को आई भीषण बाढ़ के बाद लापता लोगों की संख्या करीब 2,500 पहुंच गई है। अब तक 584 शव बरामद हो चुके हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को बताया कि नेपाल में अभी भी 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पाया है। इसके अलावा करीब 400 भारतीय तिब्बत में फंसे हुए हैं। MEA ने बताया कि चीन की तरफ फंसे 153 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से नेपाल पहुंच चुके हैं। इस बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सीनियर अफसरों के साथ हाईलेवल मीटिंग की और नेपाल में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। जयशंकर ने कहा कि एक जलविद्युत परियोजना वाली जगह पर लोगों के सुरंग में फंसे होने की आशंका है। इसलिए भारत मदद के लिए एक टीम भेज रहा है। सैटेलाइट तस्वीरों में बाढ़ से पहले और बाद का मंजर … नेपाल में तबाही के बाद की 3 तस्वीरें… खबर से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…
Mumbai milk Price: देश में अभी चीनी की महंगाई से जहां लोग उबरे नहीं हैं, वहीं अब 1 सितंबर, 2026 से दूध की कीमतें भी बढ़ने वाली हैं। जी हां, दरअसल मुंबई के स्थानीय दूध उत्पादकों ने 9 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस बढ़ोतरी के बाद से आम आदमी की जेब पर भारी असर पड़ सकता है।
फिलहाल, तबेले के दूध की कीमत अभी 93 रुपये प्रति लीटर है, जो बढ़कर 102 रुपये प्रति लीटर हो जाएगी। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, यह बढ़ोतरी त्योहारों के मौसम से ठीक पहले हो रही है और इससे उन ग्राहकों के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ने की संभावना है जो नियमित रूप से ताजा डेयरी दूध खरीदते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, दूध की नई कीमतें 1 सितंबर, 2026 से 28 फरवरी, 2027 तक लागू रहेंगी।
तबेले के दूध की कीमतें क्यों बढ़ रही हैं?
दूध उत्पादकों ने इस बढ़ोतरी की वजह डेयरी पशुओं के रखरखाव में आने वाले ज्यादा खर्च और पशुओं के चारे व दाने की कीमतों में भारी वृद्धि को बताया है।
उत्पादकों का कहना है कि बढ़ते ऑपरेशनल खर्चों के कारण डेयरी फार्मों के लिए 93 रुपये प्रति लीटर की मौजूदा दर बनाए रखना मुश्किल होता जा रहा है। अनाज समेत पशुओं के दाने की कई चीजों की कीमतें 25% तक बढ़ गई हैं, जबकि महंगे चारे और खली (oil cakes) ने दूध उत्पादन की लागत को और बढ़ा दिया है।
लागत लगातार बढ़ने के कारण, दूध उत्पादकों का कहना है कि डेयरी का कामकाज जारी रखने के लिए कीमतों में बदलाव जरूरी हो गया था।
मुंबई के परिवारों पर असर
दूध के दाम में प्रति लीटर 9 रुपये की बढ़ोतरी से उन परिवारों के बजट पर असर पड़ने की उम्मीद है जो नियमित रूप से तबेले का दूध खरीदते हैं। यह बढ़ोतरी त्योहारों के मौसम से ठीक पहले हुई है, जब आमतौर पर घरों में खर्च बढ़ जाता है।
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Nepal Flood Update: नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई बाढ़ के बाद कम से कम 320 भारतीय अब भी लापता हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार (28 अगस्त) को बताया कि करीब 400 अन्य भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं। मंत्रालय ने कहा कि भारत काठमांडू को राहत एवं बचाव प्रयासों में हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि चीन की तरफ फंसे 96 भारतीय नागरिक सुरक्षित रूप से सड़क मार्ग से नेपाल पहुंच गए हैं। उन्होंने कहा कि 21 भारतीय शुक्रवार दोपहर नई दिल्ली पहुंचे। ये लोग एक दिन पहले नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से काठमांडू पहुंचे थे।
तमिलनाडु के इन निवासियों का राष्ट्रीय राजधानी के हवाई अड्डे पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्वागत किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार (28 अगस्त) को बताया कि नेपाल-चीन सीमा के चीनी हिस्से में फंसे 400 से ज्यादा भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित सैकड़ों अन्य लोगों से संपर्क करने की कोशिशें जारी हैं। नेपाल के अधिकारियों द्वारा शेयर की गई ताजा जानकारी के अनुसार, बुधवार को अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 547 हो गई है।
320 भारतीयों की तलाश जारी
जायसवाल ने कहा, “जहां तक उन भारतीयों की संख्या का सवाल है, जिनसे हम संपर्क नहीं कर पा रहे हैं या जो लापता हैं, इस समय यह संख्या 320 है।” उन्होंने कहा, “भारतीय मूल के करीब 100 लोग ऐसे भी हैं, जिनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। ये भारतीय मूल के लोग हैं, जो कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गए हो सकते हैं, लेकिन उनके पास अन्य देशों की नागरिकता है।” जायसवाल ने कहा कि करीब 400 भारतीय चीन की तरफ फंसे हुए हैं, लेकिन वे सुरक्षित हैं।
उन्होंने कहा, “वे अपने परिवारों के संपर्क में हैं। हमारे दूतावास ने भी उनमें से कई लोगों से संपर्क किया है। उनके परिवार के कई सदस्यों ने भी बीजिंग स्थित हमारे दूतावास द्वारा संचालित हेल्पलाइन नंबरों के जरिए हमसे संपर्क किया है।” जायसवाल ने कहा, “हमारा दूतावास चीन में स्थानीय अधिकारियों के संपर्क में है। इस बात पर काम कर रहा है कि वहां फंसे इन लोगों को किस तरह निकाला जा सकता है।”
जयशंकर ने की हाईलेवल मीटिंग
इस बीच, जयशंकर ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की और नेपाल की स्थिति की समीक्षा की। बैठक के दौरान लापता भारतीयों की स्थिति का पता लगाने पर विशेष ध्यान दिया गया। काठमांडू और बीजिंग में भारत के राजदूत भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से बैठक में शामिल हुए। जयशंकर ने सोशल मीडिया पर कहा, “नेपाल में जारी राहत और बचाव प्रयासों पर चर्चा की। काठमांडू और बीजिंग स्थित हमारे दूतावासों ने भारतीय नागरिकों की स्थिति और उनके सुरक्षित होने के संबंध में ताजा जानकारी दी।”
मौत का आंकड़ा 547 पहुंचा
नेपाल में कई और शव बरामद किए जाने के साथ ही भीषण बाढ़ से मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 547 हो गई। इस बीच, तलाश और बचाव अभियान सतर्कता के साथ जारी है, क्योंकि भोटेकोशी नदी इलाके में जलस्तर बढ़ने से दोबारा इस आपदा का खतरा मंडरा रहा है। नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने कहा कि इस सप्ताह की शुरुआत में जिस स्थान पर भीषण बाढ़ आई थी वहां जलस्तर बढ़ने से क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
एनडीआरआरएमए ने अपने ताजा नोटिस में कहा, “बुधवार को जिस स्थान पर अचानक बाढ़ आई थी, उसी जगह पर अब कीचड़-युक्त पानी का स्तर बढ़ जाने से उस क्षेत्र में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।” मध्य नेपाल के रसुवा और अन्य इलाकों में बुधवार को आई जबरदस्त बाढ़ के बाद यह चेतावनी जारी की गई है। बुधवार को आई बाढ़ में सैकड़ों लोगों की मौत हुई है। बस्तियों, सड़कों, पुलों और पनबिजली के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा।
लोगों को सतर्क रहने की अपील
NDRRMA ने तलाश और बचाव कार्यों में शामिल लोगों के साथ-साथ अलग-अलग वजहों से भोटेकोशी और त्रिशूली इलाकों में रह रहे लोगों से अपील की है कि वे अत्यधिक सतर्क रहें। साथ ही किसी भी तरह का खतरा महसूस होने पर तुरंत सुरक्षित जगहों पर चले जाएं।
नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को बताया कि इस हिमालयी देश के आठ जिलों से 547 शव बरामद किए गए हैं। जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। पुलिस के अनुसार, नवलपरासी पूर्व से 134, चितवन से 221, गोरखा से 44 और नुवाकोट से 38 शव बरामद किए गए।
इसी तरह, धादिंग से 40, तनाहू से 29, नवलपरासी पश्चिम से 28 और रसुवा से 13 शव बरामद किए गए हैं। चीनी अधिकारियों के अनुसार, तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में पांच लोगों की मौत हो गई है। नेपाल के रसुवा और आसपास के जिलों में बुधवार सुबह अचानक बाढ़ आने के बाद से कम से कम 977 लोग लापता हैं। इनमें 86 सुरक्षाकर्मी, 517 विदेशी पर्यटक और 127 नेपाली यात्री शामिल हैं।
अब तक प्रभावित इलाकों से 1,545 घायल व्यक्तियों और फंसे हुए लोगों को बचाया जा चुका है। इनमें से 84 लोगों का काठमांडू के अलग-अलग अस्पतालों में इलाज हो रहा है, जहां परिजन बड़ी बेसब्री से अपनों की तलाश कर रहे हैं। नेपाल पुलिस ने तिब्बत की तरफ एक बांध के फिर से टूटने की सूचना मिलने के बाद अलर्ट जारी किया है।
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नेपाल पर्यटन बोर्ड ने शुक्रवार को बताया कि इस त्रासदी के बाद बाढ़-प्रभावित अलग-अलग इलाकों से कम से कम 121 विदेशी पर्यटकों को बचाया गया है, जिनमें 85 भारतीय शामिल हैं। पर्यटन बोर्ड के मुताबिक, बचाए गए पर्यटकों में दक्षिण कोरिया के 9 और चीन के 16 नागरिक शामिल हैं। पुलिस बयान के अनुसार, इस त्रासदी के बाद तीसरे दिन भी तलाश और बचाव अभियान जारी रहा। अभियान में 7,451 सुरक्षाकर्मी जुटे हुए हैं जिनमें नेपाल सेना के 2,391 जवान शामिल हैं।

