CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता ने बेटे की विदेश में पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया? RTI कार्यकर्ता ने जांच की मांग की

CJP protest ends Abhijeet Dipke

कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के पिता की आर्थिक स्थिति और उनके बेटे की विदेश में हुई उच्च शिक्षा के खर्च को लेकर सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने जांच की मांग की है। RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने इस मामले को लेकर निर्वाचन आयोग और कर अधिकारियों से भी वित्तीय पहलुओं की जांच करने का आग्रह किया है।

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अमित तिवारी ने सवाल उठाया है कि महाराष्ट्र सरकार के सेवानिवृत्त कर्मचारी भगवानराव दिपके ने अपने बेटे की विदेश में उच्च शिक्षा का खर्च किस तरह वहन किया। उन्होंने भगवानराव दिपके की वित्तीय स्थिति की जांच की मांग करते हुए उनकी सरकारी सेवा और सेवानिवृत्त कर्मचारी होने की स्थिति का हवाला दिया है।

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कपिल सिब्बल के 1 करोड़ रुपए के कानूनी सहायता फंड पर भी सवाल

 

RTI कार्यकर्ता ने वरिष्ठ अधिवक्ता और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल की ओर से CJP प्रदर्शनकारियों के लिए घोषित 1 करोड़ रुपए के कानूनी रक्षा कोष को लेकर भी निर्वाचन आयोग और कर अधिकारियों से जांच की मांग की है।

 

सिब्बल ने सोमवार को NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हुए आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए CJP की ओर से बनाए गए फंड में 1 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। तिवारी ने इस फंड की प्रकृति और इसके वित्तीय स्रोतों की भी जांच किए जाने की मांग की है।

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CJP के राजनीतिक दल के रूप में संचालन पर भी सवाल

 

अमित तिवारी ने कॉकरोज जनता पार्टी (CJP) की कानूनी और राजनीतिक स्थिति पर भी सवाल उठाया है। उनका कहना है कि CJP एक अपंजीकृत संस्था है, लेकिन राजनीतिक दल के नाम से काम कर रही है। तिवारी के मुताबिक, यदि CJP के लिए 1 करोड़ रुपए का कानूनी रक्षा कोष घोषित किया गया है, तो चुनाव आयोग को यह जांचना चाहिए कि क्या यह संगठन जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29A के तहत पंजीकृत है या नहीं। उन्होंने कहा कि यदि संस्था पंजीकृत नहीं है, तो राजनीतिक दल के नाम से उसका संचालन और धन का संग्रह या प्राप्ति जांच के दायरे में आ सकती है।

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GST को लेकर भी जांच की मांग

RTI कार्यकर्ता ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) का भी रुख किया है। उन्होंने बोर्ड से यह जांचने का अनुरोध किया है कि सिब्बल की प्रस्तावित 1 करोड़ रुपए की राशि पर GST लागू होता है या नहीं। फिलहाल, इन सभी मुद्दों पर RTI कार्यकर्ता की ओर से जांच की मांग की गई है। उनके आरोपों और सवालों के आधार पर संबंधित प्राधिकरणों की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, इस पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

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कौन हैं अमित तिवारी

अमित तिवारी गुजरात के सूरत जिले के रहने वाले हैं। वे एक आरटीआई एक्टिविस्ट हैं। अभिजीत दिपके और उनके पिता के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाने के बाद अमित तिवारी सुर्खियों में हैं। यह पहला मामला है जब अमित तिवारी किसी तरह की सुर्खियों में आए हो। इससे पहले उन्हें कम लोग ही जानते थे।

‘मेरी बेटी को नई जिंदगी मिली’: PM मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए लड़की की मां क्या बोली?

CJP Protest News Update: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के लिए पहले माफी मांग चुकी 15 साल की छात्रा ने अब सार्वजनिक रूप से पहली बार खुलकर बात की है। छात्रा ने कहा कि उसने कभी नहीं सोचा था कि उसे माफ कर दिया जाएगा। उसने PM मोदी के संदेश को दूसरी जिंदगी मिलने जैसा बताया।

उसने यह भी दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान वह अपने आस-पास के लोगों से प्रभावित थी। आरोप लगाया कि उसे धमकियां मिल रही हैं। उसने कहा कि उसके खिलाफ दर्ज पुलिस केस अभी तक वापस नहीं लिया गया है। छात्रा ने कहा कि उसने अनजाने में वे बातें नहीं कही थीं। बल्कि वह विरोध प्रदर्शन वाली जगह के माहौल और दूसरे लोग जो उसे बता रहे थे, उससे प्रभावित थी।

लड़की की मां ने क्या कहा?

वहीं, लड़की की मां ने कहा कि PM मोदी के माफ करने के फैसले की वजह से उनकी बेटी को नई जिंदगी मिली है। न्यूज एजेंसी PTI से बात करते हुए लड़की की मां ने कहा कि वे PM मोदी की शुक्रगुजार हैं कि उन्होंने बदला लेने के बजाय माफ करने का रास्ता चुना। उन्होंने इसे अपनी बेटी के लिए एक दूसरा मौका बताया।

उन्होंने कहा, “PM मोदी ने उस बच्ची को माफ करके अपनी महानता दिखाई है, जिसने इतने गंदे और अश्लील शब्दों का इस्तेमाल किया था। आज उसका जन्मदिन है और PM मोदी ने उसे सबसे बड़ा तोहफा दिया है जीवनदान….। आज इस लड़की का पुनर्जन्म हुआ है।” शुक्रवार को PM मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट करके संयम बरतने की अपील की थी।

यह अपील जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र विरोध-प्रदर्शन के दौरान उनके खिलाफ अपशब्दों वाले नारे लगाए जाने के बाद की गई थी। प्रधानमंत्री ने उन्हें अपशब्द कहने वालों को गुमराह बताया और कहा कि उन्हें नहीं लगता कि इसका समाधान गुस्से या बदले की भावना में है।

‘बहकावे में आ गई थी’

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली लड़की ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर देशवासियों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी है। खुद को 15 साल का बताने वाली लड़की ने कहा कि वीडियो में प्रधानमंत्री को अपशब्द कहने संबंधी उसका वीडियो सोशल मीडिया पर उसने खुद पोस्ट नहीं किया था। उसने कहा कि वह इस पर बहुत शर्मिंदा है।

पीटीआई द्वारा संबंधित वीडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की जा सकी। प्रधानमंत्री मोदी ने भी शुक्रवार को एक वीडियो संदेश में प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अपशब्द कहने वालों को माफ करने की बात कही।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारी बेटियों द्वारा इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जाना चिंता का विषय है। हालांकि, उन्होंने कहा कि इन गुमराह बच्चों को माफ किए जाने की जरूरत है। प्रधानमंत्री ने कहा कि वह समाज में व्याप्त आक्रोश को समझते हैं। लेकिन यह गुमराह बच्चों को अपनाने और उन्हें सही राह दिखाने का समय है।

जंतर-मंतर कैसे पहुंचीं लड़की?

माफी वाले वीडियो में लड़की ने कहा, “मैं अपने दोस्तों के साथ सीपी (कनॉट प्लेस) गई थी, जहां प्रदर्शन हो रहा था।…वहां लोग बहुत चीजें बोल रहे थे। प्रधानमंत्री जी को बहुत गालियां दे रहे थे। उन लोगों के बहकावे में आकर मैंने वे सब चीजें बोलीं।”

लड़की ने कहा, “मैं अभी मात्र 15 साल की हूं। मैंने जो किया वह माफी के लायक नहीं है। मैंने बहुत गंदी चीजें बोलीं। लेकिन यह मेरी पहली और आखिरी गलती होगी। इसके बाद मैं ऐसा कुछ नहीं करूंगी। न ही वो चीज मैंने कभी पोस्ट की थी।…मैं पूरे देश से माफी मांगती हूं। मैं इतनी शर्मिंदा हूं कि अपनी नजरें भी नहीं उठा पा रही हूं।”

गाजियाबाद में शिकायत दर्ज

लड़की का यह वीडियो गाजियाबाद निवासी स्मृति सिंह की ओर से 29 जुलाई को नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद आया है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि जंतर-मंतर पर सेक्टर-168 स्थित लोटस जिंग आवासीय सोसाइटी की निवासी लड़की ने प्रधानमंत्री के खिलाफ अभद्र एवं आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, जिससे संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची।

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पुलिस के अनुसार, शिकायत के आधार पर जीरो FIR दर्ज की गई और उसे जांच के लिए दिल्ली पुलिस को ट्रांसफर कर दिया गया। इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने इस कंटेंट के प्रसार को लेकर साइबर सेल थाने में FIR दर्ज की थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को इसे हटाने का नोटिस जारी कर जांच के तहत संबंधित इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने को कहा था।

Abhijeet Dipke: रिटायर्ड पिता ने विदेश में अभिजीत दिपके की पढ़ाई का खर्च कैसे उठाया? RTI कार्यकर्ता ने CJP के फंड पर उठाए सवाल, जांच की मांग

Abhijeet Dipke: सूरत के एक RTI कार्यकर्ता ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत डिपके के पिता की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया है कि एक रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी अपने बेटे की विदेश में हायर एजुकेशन का खर्च कैसे उठा सकता है? RTI एक्टिविस्ट ने भारतीय चुनाव आयोग (ECI) और सेंट्रल GST अधिकारियों से CJP के कानूनी स्टेटस और फंडिंग की जांच करने का भी आग्रह किया है।

RTI एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने अधिकारियों को पत्र लिखकर महाराष्ट्र सरकार के रिटायर्ड कर्मचारी और अभिजीत डिपके के पिता भगवान राव डिपके की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है। तिवारी ने सवाल किया कि रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी होने के बावजूद भगवानराव डिपके अपने बेटे को हायर एजुकेशन के लिए विदेश कैसे भेज पाए। इसी आधार पर उनकी आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की है।

लीगल डिफेंस फंड भी जांच के दायरे में

डिपके के पिता की आर्थिक जांच की मांग के अलावा, तिवारी ने CJP के उन प्रदर्शनकारियों के लिए घोषित लीगल डिफेंस फंड पर भी आपत्ति जताई है, जिन पर कथित NEET पेपर लीक आंदोलन से जुड़े पुलिस केस चल रहे हैं। तिवारी ने चुनाव आयोग को एक लेटर लिखकर यह पता लगाने को कहा है कि क्या लीगल डिफेंस फंड की घोषणा के बाद कॉकरोच जनता पार्टी को ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 29A के तहत रजिस्टर किया गया है।

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक तिवारी ने कहा, “कॉकरोच जनता पार्टी एक अनरजिस्टर्ड संस्था है। लेकिन एक पॉलिटिकल पार्टी के तौर पर काम कर रही है। अगर इसे लीगल डिफेंस फंड के तौर पर 1 करोड़ रुपये देने का वादा किया गया है, तो चुनाव आयोग को यह जांचना चाहिए कि क्या CJP ‘जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951’ की धारा 29A के तहत उसके पास रजिस्टर्ड है।” उन्होंने आगे कहा कि अगर पार्टी रजिस्टर्ड नहीं है, तो पॉलिटिकल पार्टी के नाम पर उसका काम करना और फंड इकट्ठा करना या लेना जांच का विषय हो सकता है।

कपिल सिब्बल ने दिया 1 करोड़

एक अलग अर्जी में तिवारी ने सेंट्रल GST अधिकारियों से यह जांचने का आग्रह किया कि क्या सुप्रीम कोर्ट के सीनियर वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिबल CJP प्रदर्शनकारियों के कानूनी बचाव के लिए दिए गए 1 करोड़ रुपये के योगदान पर 18 प्रतिशत GST देने के लिए जिम्मेदार होंगे। NEET पेपर लीक के आरोपों को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को कानूनी मदद देने के लिए CJP ने एक लीगल डिफेंस फंड बनाया है। सिब्बल ने इस फंड में 1 करोड़ रुपये का योगदान देने की घोषणा की है।

विवाद के बीच अभिजीत दिपके बीमार पड़े

यह नया विवाद सामने आने के बाद महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में अपने घर पर अभिजीत दिपके बीमार पड़ गए। डॉक्टरों ने उन्हें पूरी तरह आराम करने की सलाह दी है। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार, दिपके शनिवार सुबह करीब 11:45 बजे अपने घर के पार्किंग एरिया में इंतजार कर रहे लोगों के एक समूह से मिलने के लिए नीचे आए। हालांकि, जल्द ही उन्हें बेचैनी महसूस हुई, जिसके बाद वे घर के पिछले हिस्से में गए और उल्टी की। इसके बाद वे मीडिया से बात किए बिना ही वापस ऊपर चले गए। उनके पिता भगवान दिपके ने बताया कि उनकी जांच के लिए तुरंत डॉक्टरों को बुलाया गया।

दिपके का इलाज करने वाले डॉ. विशाल लहाने ने पत्रकारों को बताया कि उनका ब्लड प्रेशर गिरकर 100/60 mmHg हो गया था। उन्होंने उनकी इस हालत का कारण तनाव और चिंता को बताया। डॉक्टर ने कहा, “दिपके का ब्लड प्रेशर 100/60 के स्तर पर थोड़ा कम है। तनाव और चिंता के कारण उन्हें सुबह से ही बेचैनी और जी मिचलाने की समस्या हो रही है। उन्हें कुछ बार उल्टी हुई है और दस्त की भी शिकायत है।”

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डॉक्टर ने बताया कि दिपके को IV (नस के ज़रिए) फ्लूइड दिया गया। उन्हें दिन भर आराम करने की सलाह दी गई है। उन्होंने आगे कहा कि दिपके को बुखार नहीं है। उम्मीद है कि पर्याप्त आराम करने से वे ठीक हो जाएंगे। अगर उनकी हालत में सुधार नहीं होता है, तो डॉक्टर इलाज के अगले कदम पर फैसला लेने से पहले ब्लड टेस्ट करेंगे।

छात्रों को दया नहीं, पीएम मोदी की माफी चाहिए… पेपर लीक मुद्दे पर राहुल गांधी का PM पर तीखा हमला

Rahul Gandhi attacks PM Modi: देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के मुद्दों को लेकर विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म

Rahul Gandhi attacks PM Modi: देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के मुद्दों को लेकर विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक और तीखी पोस्ट साझा करते हुए कहा कि देश के लाखों मेहनती छात्रों को प्रधानमंत्री की किसी 'क्षमा' या दया की जरूरत नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री को खुद देश के छात्रों और उनके परिवारों से माफी मांगनी चाहिए।

 

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल के समय में देश की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक प्रकरणों को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है और कई परिवार इस अव्यवस्था के कारण पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।

क्या कहा राहुल गांधी ने?

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कहा कि अपने बच्चों को खोने वाले माता-पिता के आंसू, उनका बिलखना – इससे बड़ा कोई दुःख नहीं होता। ये एक ग़म उनके साथ हमेशा जिंदा रहेगा और साथ ही रह जाते हैं इस टूटी और भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के बारे में कई सवाल। पेपर लीक, रद्द परीक्षाएं। सालों की तैयारी एक पल में बर्बाद – हमारे छात्रों को उस सिस्टम में ईमानदारी से मेहनत करने के लिए कहा जाता है जो खुद बेईमान है। और उसके बाद भी प्रधानमंत्री की ये हिम्मत है कि वो छात्रों को माफ़ करने की बात करते हैं। ALSO READ: 'Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते': FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

 

क्या वो एक भी शोकाकुल परिवार से मिले जिन्होंने अपने बच्चे को खोया है या उन लोगों से जिनकी जमा पूंजी, ज़िंदगी, वक्त और सपने सब पेपर लीक से छीन लिए गए? जवाब है नहीं! भारत के छात्रों को प्रधानमंत्री की क्षमा की ज़रूरत नहीं – मोदी जी को उनसे माफ़ी मांगनी चाहिए। ALSO READ: अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में उन लाचार माता-पिता के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं, जिन्होंने पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से उपजे मानसिक तनाव के कारण अपने बच्चों को खो दिया है। राहुल ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक नाकामी नहीं है, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और उनके संघर्ष के साथ खिलवाड़ है। इसमे कोई संदेह नहीं कि देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

‘वर्दी खून से लथपथ थी’—जंतर-मंतर हिंसा पर घायल पुलिसकर्मियों के परिवारों का बड़ा दावा

delhi jantar mantar

जंतर-मंतर प्रदर्शन में घायल दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों के परिजनों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि प्रदर्शन में हिंसक और असामाजिक तत्व शामिल थे। परिजनों ने पुलिस पर हुए हमले की आपबीती साझा की, जबकि भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने भी घटना पर सवाल उठाए। ALSO READ: बड़ा धमाका! अब यूपी के भाजपा नेता की बेटी ने किया CJP का समर्थन, जानिए कौन हैं यशस्विनी राजे सिंह?

 

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में घायल दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों के परिजनों ने कहा कि 20 तारीख के बाद यही नेरेटिव चलाया जा रहा है कि छात्रों को पुलिस ने पीटा, लेकिन प्रोटेस्ट का सच कुछ और ही है। हमला पुलिसवालों पर भी हुआ है।

 

खून से लथपथ थी वर्दी 

घायल पुलिसकर्मी की बेटी गुंजन ने दावा किया कि प्रदर्शन में असामाजिक तत्व भी थे। उनके पिता जंतर-मंतर पर बैरिकेड के पास तैनात थे। वे अक्सर कहते थे कि यह अब सिर्फ छात्रों का प्रदर्शन नहीं रहा, इसमें असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए हैं। 20 जुलाई को रात 10 बजे मेरे पिताजी को उनके साथी घर लेकर आए। उनकी वर्दी खून से लथपथ थी। हिंसक भीड़ ने उन्हें घसीटा और जंतर-मंतर मंच के पास पीट-पीटकर मारने की कोशिश की थी। वे करीब चार घंटे तक RML अस्पताल में बेहोश रहे, फिर भी सोशल मीडिया पर उन्हें ही क्रिमिनल बताया गया। ALSO READ: PM मोदी के खिलाफ मॉर्फ्ड पोस्ट पर बड़ा एक्शन! Meta India प्रमुख समेत कई सोशल मीडिया अकाउंट्स पर FIR

 

हेलमेट पूरी तरह टूट चुका था

घायल ASI की पत्नी सीमा ने कहा कि शरारती तत्वों ने पुलिस पर पथराव किया। 20 जुलाई शाम 7 बजे पति को कॉल किया, तो वो हॉस्पिटल में इलाज करा रहे थे। भीड़ में मौजूद शरारती तत्वों ने पत्थर और हथियारों से पुलिस जवानों को घायल कर दिया था। इसके बाद उनका फोन बंद हो गया। रात 11 बजे जब पति घर आए, तो उन्होंने बताया कि संसद की सुरक्षा के लिए लगाई गई बैरिकेडिंग को तोड़ा गया और पुलिस फोर्स पर हमला किया गया। ड्यूटी के दौरान उन्हें मिला हेलमेट पूरी तरह टूट चुका था।

 

सिर में लगे 4 टांके

लक्ष्य सिंह बिष्ट ने कहा कि मेरे पिता ASI हैं। उन्हें बहादुरी के लिए 4 सम्मान मिल चुके हैं। मेरे दादाजी भी BSF में थे। 1971 की जंग लड़ चुके हैं। जंतर-मंतर प्रदर्शन में पिता फ्रंटलाइन पर तैनात थे। उनके साथी से पता चला कि उनके सिर में गंभीर चोट लगी है। जब उनकी तस्वीर देखी तो सिर मुंडा हुआ था और चार टांके लगे थे। मैं डर गया था। पिता ने बताया कि प्रदर्शन में सिर्फ छात्र नहीं थे, बल्कि हिंसक और उपद्रवी लोग भी शामिल थे। ALSO READ: CJP Effect! शिक्षकों की कमी, टूटी बेंचों और खराब शौचालयों को लेकर कई राज्यों में सड़कों पर उतरे स्कूली छात्र

 

भाजपा सांसद ने पूछा सवाल

भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने कहा कि पुलिसकर्मियों पर जो हमला हुआ है, जिनको चोट लगी है, हमें संवेदनशील होना चाहिए, उनके भी परिवार हैं, उनके भी मानवाधिकार हैं, इस बात को समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि हम नौजवानों का सम्मान करते हैं लेकिन अगर उनके आंदोलन के पीछे अपराधी खड़े होते हैं…तो यह गंभीर सवाल है।

 

क्या है सीजेपी का दावा

CJP ने आरोप लगाया था कि 20 जुलाई के 'संसद चलो' मार्च में और उसके बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज, आंसू गैस और पैलेट्स गन का इस्तेमाल किया। पार्टी ने कई छात्रों के घायल होने का दावा करते हुए पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

‘अमित शाह संसद से गायब क्यों?’ प्रियंका गांधी समेत विपक्ष का संसद परिसर में प्रदर्शन, छात्रों पर कार्रवाई को लेकर इस्तीफे की मांग

opposition protest in parliament

प्रियंका गांधी वाड्रा समेत विपक्ष के सांसदों ने 20 जुलाई को CJP प्रदर्शनकारियों के खिलाफ 'पुलिस कार्रवाई' को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ संसद के मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथ में एक बड़ा पोस्टर था जिस पर लिखा था 'अमित शाह संसद से गायब क्यों'? ALSO READ: 'Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते': FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

 

संसद में एंटी पेपर लिक कानून पास होने के बाद भी छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल पर विपक्ष सांसदों की नाराजगी कम नहीं हुई है। उन्होंने अमित शाह से छात्रों पर की गई बर्बरता का जवाब मांगा।

 

कांग्रेस ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, 'अमित शाह संसद से गायब क्यों?' ये सवाल न सिर्फ विपक्ष बल्कि पूरा देश पूछ रहा है। छात्रों पर की गई बर्बरता के बारे में गृह मंत्री अमित शाह को जवाब देना होगा। अगर वे ऐसा नहीं करते तो नरेंद्र मोदी तत्काल उन्हें गृह मंत्री के पद से बर्खास्त करें। इसी मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया।


इससे पहले मल्लिकार्जुन खरगे ने भी एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा कि नरेंद्र मोदी जी 10 दिन पहले, आपकी सरकार ने युवाओं का लाठी-डंडे-Pellet Gun से दमन किया। जब छात्रों ने अपना आंदोलन वापस ले लिया तो अब आप बदले की भावना से उनपर FIR करवा रहें हैं, जबरन हिरासत में ले रहें हैं। ALSO READ: PM Modi के खिलाफ अभद्र टिप्पणी मामले में नोएडा में मुकदमा दर्ज, युवती और परिजन फरार, केस दिल्ली ट्रांसफर

 

उन्होंने कहा कि युवाओं ने आंदोलन इस शर्त पर वापिस लिया कि उन पर कार्रवाई नहीं होगी, अब आपकी सरकारें अपनी ही जुबान से पलट गईं है। युवाओं के सोशल मीडिया अकाउंट्स ब्लॉक करवा रही है, बच्चियों को Dox किया जा रहा है। अहंकार इतना है कि गृह मंत्री अमित शाह ने संसद सदन में कदम तक नहीं रखा, अकाउंटेबिलिटी के स्टेटमेंट से डरते रहे। अब ये सब फेस-सेविंग, इमेज प्रोटेक्शन के हथकंडे नहीं चलेंगे, युवा आपका सच जान चुका है। थोड़ी सी भी शर्म बची है तो अमित शाह का इस्तीफा लीजिए।

PM Modi के खिलाफ अभद्र टिप्पणी मामले में नोएडा में मुकदमा दर्ज, युवती और परिजन फरार, केस दिल्ली ट्रांसफर

cjp jantar mantar protest

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सार्वजनिक प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर अभद्र और आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह टिप्पणी 23 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन के दौरान की गई थी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज करने के बाद केस को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया है। अब मामले की जांच दिल्ली पुलिस करेगी।

 

शिकायतकर्ता स्मृति सिंह ने पुलिस को बताया कि वह गाजियाबाद के वसुंधरा की रहने वाली हैं और सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता हैं। उनके मुताबिक, 23 जुलाई को उनके संज्ञान में आया कि दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के दौरान एक युवती ने देश के प्रधानमंत्री के खिलाफ सार्वजनिक रूप से कथित तौर पर अभद्र और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया।

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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि युवती की टिप्पणी से संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंची और जानबूझकर लोक शांति भंग करने का प्रयास किया गया।

 

नोएडा की सोसाइटी में रहती है युवती

शिकायतकर्ता के मुताबिक, कथित टिप्पणी करने वाली युवती की पहचान नोएडा के सेक्टर-168 स्थित लोट्स जिंग सोसाइटी निवासी रुचिका सिंह के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, वह मूल रूप से फरीदाबाद के ऊंचागांव की रहने वाली बताई गई है। जानकारी के मुताबिक, युवती ब्यूटी पार्लर संचालित करती है और इसी साल जनवरी में उसने नोएडा में फ्लैट खरीदा था।

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घटना के बाद से युवती और परिजन घर पर नहीं मिले

पुलिस के अनुसार, घटना के बाद से युवती और उसके परिजन कथित तौर पर अपने आवास पर नहीं मिले हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है और मामले से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।

BNS की इन धाराओं में दर्ज हुआ मामला

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पुलिस ने बताया कि शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत शून्य अपराध संख्या (Zero FIR) दर्ज की गई है। इसके बाद केस को दिल्ली ट्रांसफर कर दिया गया है, क्योंकि कथित घटना दिल्ली के जंतर-मंतर से संबंधित है। अब मामले की आगे की विवेचना दिल्ली पुलिस द्वारा की जाएगी। फिलहाल पुलिस युवती की तलाश के साथ-साथ वायरल वीडियो और शिकायत में लगाए गए आरोपों से जुड़े तथ्यों की भी जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: प्रदर्शनकारियों के खिलाफ वापस होंगे केस, इन लोगों पर होगा एक्शन

दिल्ली सरकार ने गुरुवार को बड़ा फैसला लेते हुए कहा कि हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी। यह फैसला तब आया है, जब प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा की जांच पुलिस अभी भी कर रही है। सरकार के गृह विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सभी पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि प्रदर्शन में शामिल लोगों के खिलाफ कोई नया कानूनी मामला दर्ज न किया जाए और न ही कोई कार्रवाई की जाए। हालांकि, सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि यह राहत उन लोगों को नहीं मिलेगी, जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं या जिनका आपराधिक रिकॉर्ड है।

सरकार ने यह भी कहा कि जिन मामलों में जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है या हिरासत में लिया गया है, उनकी समीक्षा की जाएगी। जो लोग राहत पाने के पात्र होंगे, उन्हें जल्द से जल्द रिहा करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुई हिंसा के मामले में दिल्ली पुलिस पहले ही 13 एफआईआर दर्ज कर चुकी है।

पुलिस का दावा- 2,900 लोगों की पहचान हुई

दिल्ली सरकार का यह फैसला बिहार, असम और महाराष्ट्र सरकारों के ऐसे ही फैसलों के बाद आया है। इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी), जिसने इन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था, ने चेतावनी दी है कि अगर प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर वापस नहीं ली गईं, तो वह एक बार फिर जंतर-मंतर पर बड़ा विरोध प्रदर्शन करेगी। सरकार की घोषणा से कुछ दिन पहले दिल्ली पुलिस ने दावा किया था कि जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल करीब 2,900 ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस इस मामले की जांच जारी रखे हुए है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, 20 जुलाई से 25 जुलाई के बीच जंतर-मंतर पर 2,873 ऐसे पुरुष मौजूद थे, जिनके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस ने इन लोगों की पहचान फेशियल रिकग्निशन सिस्टम और अन्य आधुनिक तकनीकी उपकरणों की मदद से की। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि इनमें से कोई व्यक्ति जंतर-मंतर और नई दिल्ली के आसपास हुई हिंसा की घटनाओं में शामिल था या नहीं।

कई लोगों पर दर्ज हैं गंभीर मामले

पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिन लोगों की पहचान की गई है, उनमें से कई के खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, हत्या की कोशिश, यौन उत्पीड़न, लूट, डकैती, अपहरण, महिलाओं के खिलाफ अपराध, हथियार कानून के उल्लंघन और नशीले पदार्थों से जुड़े मामले शामिल हैं। पुलिस का दावा है कि जिन 2,873 लोगों की पहचान की गई, उनमें से 989 लोगों का गंभीर अपराधों का रिकॉर्ड मिला। इनमें 101 पर हत्या, 62 पर हत्या की कोशिश, 284 पर लूट और डकैती, 61 पर दुष्कर्म, 6 पर पॉक्सो कानून, 25 पर महिलाओं के खिलाफ अपराध, 229 पर आर्म्स एक्ट, 135 पर झपटमारी, 19 पर अपहरण और 67 पर नशीले पदार्थों से जुड़े मामलों के आरोप दर्ज हैं। पुलिस सूत्रों का यह भी कहना है कि इनमें से कई लोग विरोध प्रदर्शन के दौरान एक से अधिक बार जंतर-मंतर पहुंचे थे। फिलहाल पुलिस उनकी भूमिका की जांच कर रही है।

आधार अपडेट कराने बैंक गया किसान, तभी गार्ड की बंदूक से चली गोली…हुआ दर्दनाक हादसा

राजधानी दिल्ली से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। हरियाणा के झज्जर जिले के एक गांव में रहने वाले 27 वर्षीय किसान मनीष कुमार की जिंदगी एक दर्दनाक हादसे में खत्म हो गई। मनीष अपना आधार कार्ड अपडेट कराने दिल्ली के एक बैंक पहुंचे थे, लेकिन कुछ ही मिनटों में वहां ऐसा हादसा हुआ जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। बैंक में गलती से चली गोली लगने से उनकी मौत हो गई। पुलिस ने मामले में सिक्योरिटी गार्ड को गिरफ्तार कर लिया है।

 सिक्योरिटी गार्ड के बंदूक से चली गोली

यह घटना सुबह करीब 10:30 बजे की है। पुलिस के मुताबिक, 53 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड विनोद कुमार अपनी 12 बोर की डबल बैरल बंदूक में कारतूस भर रहे थे। इसी दौरान गलती से बंदूक से गोली चल गई। गोली मनीष कुमार की पीठ में लगी और वह मौके पर ही जमीन पर गिर पड़े। घटना के बाद बैंक में अफरा-तफरी मच गई। गोली चलने की आवाज सुनते ही बैंक में मौजूद कर्मचारी और ग्राहक बाहर की ओर भागे। बाद में उन्होंने मनीष कुमार को खून से लथपथ हालत में पड़ा देखा। उन्हें तुरंत इलाज के लिए राव तुला राम अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

बंदूक में खराबी के कारण हुआ हादसा!

पुलिस ने बताया कि उन्हें सूचना मिली थी कि बैंक के सिक्योरिटी गार्ड की बंदूक से गलती से गोली चल गई है, जिससे एक व्यक्ति घायल हो गया। जब पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक घायल को अस्पताल भेजा जा चुका था। पूछताछ में सिक्योरिटी गार्ड विनोद कुमार ने बताया कि वह उस दिन ड्यूटी पर देर से पहुंचे थे। बैंक खुल चुका था और कर्मचारी व ग्राहक अंदर मौजूद थे। इसी दौरान वह अपनी बंदूक में कारतूस भर रहे थे, तभी अचानक गोली चल गई। पुलिस का कहना है कि यह हादसा लापरवाही या बंदूक में किसी तकनीकी खराबी की वजह से हुआ हो सकता है। पुलिस के अनुसार, विनोद कुमार हरियाणा के झज्जर जिले के एक गांव के रहने वाले हैं। वह भारतीय सेना में नौकरी कर चुके हैं और वर्ष 2018 में सेवानिवृत्त हुए थे। पिछले दो साल से वह एक निजी सुरक्षा एजेंसी के जरिए बैंक में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी कर रहे थे। उनके परिवार में दो बेटे हैं, जो कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं।

गिरफ्तार हुआ गार्ड

पुलिस ने जांच के दौरान घटना में इस्तेमाल की गई बंदूक को अपने कब्जे में लेकर फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। वहीं, मृतक मनीष कुमार के शव का पोस्टमार्टम भी कराया गया है। अब पुलिस पोस्टमार्टम और फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि गोली किन परिस्थितियों में चली। जांच के तहत पुलिस ने बैंक में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी अपने कब्जे में ले ली है। अधिकारी यह भी जांच कर रहे हैं कि सुरक्षा नियमों का सही तरीके से पालन किया गया था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि बैंक खुलने के बाद बंदूक में कारतूस भरना लापरवाही थी या नहीं। फिलहाल, पुलिस ने आरोपी सिक्योरिटी गार्ड के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 105 के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। अब आगे की कार्रवाई जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली सरकार को निर्देश, पैलेट गन से जख्मी छात्रों का करवाए निशुल्क इलाज

Supreme Court Jantar Mantar Protest

Supreme Court Jantar Mantar Protest: संसद मार्च के दौरान छात्रों पर हुए खौफनाक एक्शन और पैलेट गन के इस्तेमाल पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। सीजेआई सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली सरकार को साफ-साफ निर्देश दिए हैं कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन से घायल छात्रों का इलाज सरकार अपने खर्चे पर कराएगी। 

 

सुप्रीम कोर्ट ने ने केंद्र सरकार को भी इस मामले में नोटिस जारी किया है और पैलेट गन की SOP पर जवाब मांगा है। सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम जल्द ही प्रोटोकॉल भी बनाने वाले हैं। इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के हथियारों के इस्तेमाल के रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने का भी आदेश दिया है। ALSO READ: NEET विवाद, CJP प्रमुख अभिजीत दिपके ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी, छात्रों के उत्पीड़न का लगाया आरोप

क्या है पूरा मामला?

बीती 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले पेपर लीक के खिलाफ निकले 'संसद मार्च' के दौरान पुलिस की कार्रवाई का मामला अब देश की सबसे बड़ी अदालत में गरमा गया है। आरोपों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने हक की आवाज उठा रहे निहत्थे छात्रों पर न केवल बेदर्दी से लाठियां भांजीं, बल्कि पैलेट गन का भी इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई में कई छात्र गंभीर रूप से जख्मी हुए, जबकि एक छात्र की आंखों की रोशनी जाने का दावा जा रहा है। ALSO READ: CJP के प्रोटेस्ट में घुसे थे हत्या, लूट और रेप के आरोपी, 989 क्रिमिनल रिकॉर्ड वाले शातिर, 480 पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल जांच के घेरे में

CJI सूर्यकांत की बेंच का कड़ा रुख

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी मोहाना की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। याचिकाकर्ता और पैलेट गन के शिकार पीड़ितों का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ वकील वृंदा ग्रोवर ने कोर्ट में पुलिसिया कार्रवाई की खौफनाक तस्वीर पेश की। दलीलों को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार को फौरन निर्देश जारी किया कि पैलेट गन से घायल याचिकाकर्ता समेत तमाम लोगों को बिना किसी देरी के सबसे बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए। ALSO READ: विदेशी मीडिया ने CJP की जीत पर क्या कहा, पाकिस्तान से लेकर मिडिल-ईस्ट और अमेरिका में सुर्खियों में 'कॉकरोच'

हथियारों के इस्तेमाल का रिकॉर्ड रखना होगा सुरक्षित

कोर्ट ने सिर्फ इलाज तक ही बात सीमित नहीं रखी, बल्कि पुलिस की कार्रवाई पर शिकंजा कसते हुए बड़ा कदम उठाया है। सुप्रीम कोर्ट ने 20 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान तैनात रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा इस्तेमाल किए गए तमाम हथियारों और कारतूसों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के सख्त निर्देश दिए हैं। 

 

पूर्व आईपीएस अधिकारी यशोवर्धन आजाद और घायल छात्रों द्वारा दायर इस जनहित याचिका में धातु वाली पैलेट गन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो (BPRD) की गाइडलाइंस का हवाला देते हुए टिप्पणी की कि बेहद असाधारण परिस्थितियों में पुलिस को पैलेट गन के इस्तेमाल का अधिकार है। लेकिन, कोर्ट ने यह साफ कर दिया है कि वह 20 जुलाई की घटना में हुए पैलेट गन के इस्तेमाल की जांच और सुनवाई के लिए पूरी तरह तैयार है।