मुझे आज रात या कल हिरासत में लिया जा सकता है : दीपके

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा है कि पुलिस उन्हें आज रात या सुबह हिरासत में ले सकती है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पुलिस और जासूस उनके घर पर नजर रख रहे हैं।

नयी दिल्ली नगरपालिका परिषद (एनडीएमसी) ने दिन में पहले घोषणा की कि कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क 16 और 17 अक्टूबर को बंद रहेगा। दीपके ने अधिकारियों से पूछा आप कितनी जगहें बंद करेंगे?”

कॉजपा ने आम जनता और अपने समर्थकों से शुक्रवार को कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में इकट्ठा होने और राष्ट्रीय ध्वज लहराने की अपील की है। यह मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उनके विरोध प्रदर्शन का हिस्सा है, जो मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में हुई अनियमितताओं को लेकर किया जा रहा है।

Also Read : सुधा यादव ने कर्नाटक की राज्यपाल के रूप में ली शपथ

दीपके ने आरोप लगाया कि बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां उनका पीछा कर रही थीं और आसूचना ब्यूरो के कर्मियों ने उनके घर के बाहर तैनात चौकीदार से जानकारी ली।

उन्होंने कहा दिल्ली पुलिस मुझे आज रात या कल सुबह हिरासत में ले सकती है, लेकिन मैं नरेन्द्र मोदी से कहना चाहता हूं कि हम इससे डरने वाले नहीं हैं।

उन्होंने कहा हम बस इतना कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार को हटा दें और किसी और को नियुक्त करें। हम यह नहीं कह रहे कि हम सत्ता बदलना चाहते हैं।

दीपके ने कहा हम बस इतना कह रहे हैं कि ज्ञानेश कुमार को हटा दें – जो अपने साथी चुनाव आयुक्तों की बात तक नहीं सुन रहे हैं – और एक स्वतंत्र व निष्पक्ष तरीके से नए चुनाव आयुक्त की नियुक्ति करें। क्या यह कोई अपराध है?

Pic Credit : UNI

ये मोदी की पुलिस है!

जी हां, ये मोदी और अमित शाह की पुलिस है, जो प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाती है और उसके बाद खुद को विक्टिम बताती है, रोते-कलपते वीडियो बनाती है, अपने परिजनों से अपील करवाती है और अगर उसके ऊपर महिलाओं से बदसलूकी का आरोप लगे तो आरोप लगाने वालों पर एससी, एसटी एक्ट में केस कर देती है। इससे पहले कभी और कहीं की पुलिस ने ऐसा काम नहीं किया होगा। दिल्ली के एक एसीपी स्तर के वरिष्ठ अधिकारी विवेक भगत ने तीन पत्रकारों के ऊपर एससी, एसटी एक्ट में केस दर्ज करा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने उनके लिए जातिसूचक शब्द कहे और उनको अपमानित किया है। गौरतलब है कि डीसीपी विवेक भगत तीन अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान एक दूसरे विवाद में फंसे थे। एक महिला पत्रकार ने उनके ऊपर आरोप लगाया था कि भगत ने उनके ऊपर यौन हमला किया। महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि भगत ने उनके सीने पर हाथ मारा। इस विवाद के बाद विवेक भगत ने डीसीपी का अतिरिक्त चार्ज लेने से मना कर दिया था।

अब उस घटना के 11 दिन के बाद विवेक भगत ने तीन महिला पत्रकारों के ऊपर एससी, एसटी कानून के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया है। यानी जिन महिला पत्रकारों ने अपने ऊपर यौन हमले का आरोप लगाया उनके ऊपर दिल्ली पुलिस के एसीपी ने एससी, एसटी एक्ट में केस कर दिया है। इस तरह के मामले पहले भारत के दूरदराज के गांवों से आते थे। जहां महिलाओं के यौन उत्पीड़न या एससी, एसटी एक्ट के तहत लोगों को फंसाने या इन कानूनों के दुरुपयोग के मुकदमे होते थे। अब दिल्ली में पुलिस के बड़े अधिकारी पत्रकारों के खिलाफ एससी, एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करा रहे हैं!

मामला इतना भर नहीं है। जंतर मंतर के प्रोटेस्ट के बाद दिल्ली पुलिस की महिला अधिकारियों का वीडियो बनवाया गया और एक बेहद मार्किक गीत लगा कर उसे जारी किया गया, जिसमें दिल्ली पुलिस को पीड़ित दिखाया जा रहा है। 20 जुलाई के प्रोटेस्ट के बाद भी पुलिस वालों के परिजनों से प्रेस कॉन्फ्रेंस करा कर पुलिस को पीड़ित दिखाया गया था। हालांकि इसकी एक व्याख्या यह भी है कि पुलिस की बर्बरता को जस्टिफाई करने के लिए यह सब हो रहा है।

CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका भेजे गए तिहाड़ जेल

कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को शांति बनाए रखने के लिए भरे गए बॉण्ड का कथित तौर पर उल्लंघन करने और जंतर-मंतर पहुंचने के लिए एक निजी परिसर में अनधिकृत प्रवेश करने के आरोप में बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि दास और रांका को तिहाड़ जेल में रखा गया है। उनके सहयोगी अजिंक्य शिंदे को छह महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने की शर्त पर एक निजी मुचलके और 5,000 रुपये की जमानत राशि पर रिहा कर दिया गया।

पुलिस ने बताया कि विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट की अदालत ने निवारक पुलिस रिपोर्ट, कार्यकर्ताओं द्वारा बार-बार कानून का उल्लंघन किए जाने और जमानत पर रिहा होने पर फिर से कानून तोड़ने तथा अन्य लोगों को उकसाने की गंभीर आशंका को ध्यान में रखते हुए दास और रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इन तीनों को बुधवार सुबह विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया था।

कॉजपा नेताओं को मंगलवार तड़के हिरासत में लिया गया था। वे कथित रूप से बैरिकेड तोड़कर जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश गए, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए और वहां राष्ट्रीय ध्वज फहराया।

पुलिस ने कहा कि दास और रांका को शनिवार को भी हिरासत में लिया गया था और उन्होंने एक साल तक शांति बनाए रखने के लिए बॉण्ड पर हस्ताक्षर किए थे।

कॉजपा नेताओं के खिलाफ यह कार्रवाई विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं को लेकर सीईसी कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए कॉजपा और अन्य संगठनों के कई प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा बढ़ाए जाने के बीच हुई है।

इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉजपा के संस्थापक अभिजीत दीपके ने असहमति की आवाज दबाने के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की।

उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, “आशु और सौरव को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। उनका दोष क्या है? जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराना।

Also Read : रूस के प्रति ट्रंप की नरमी से रिपब्लिकन पर बढ़ा दबाव

उन्होंने कहा कुछ हिम्मत दिखाइए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी। यदि आप असहमति की आवाज दबाने के लिए इतने दृढ़ हैं, तो इन कायरतापूर्ण तरीकों के पीछे छिपने के बजाय आधिकारिक तौर पर आपातकाल घोषित करने का साहस दिखाइए।”

दिल्ली पुलिस ने एक बयान में कहा कि 13 अक्टूबर की सुबह सौरव दास, आशुतोष रांका, अजिंक्य शिंदे और कॉजपा के 11 अन्य सदस्य एक निजी परिसर से होते हुए जंतर-मंतर पहुंच गए, जबकि इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया है।

पुलिस के अनुसार, मौके पर तैनात सुरक्षा कर्मियों ने हस्तक्षेप कर उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर उन्हें उनके आधिकारिक कर्तव्य निर्वहन में बाधा डाली।

पुलिस के बयान के अनुसार, सभी 14 लोगों को हिरासत में ले लिया गया। उनके खिलाफ 13 अक्टूबर को कनॉट प्लेस थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 223(ए) (लोक सेवक के आदेश का उल्लंघन), 332 (अपराध करने के इरादे से घर में अनधिकृत प्रवेश) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

इसके अलावा, संसद मार्ग थाने में धारा 221 (लोक सेवक के कर्तव्य निर्वहन में बाधा डालना), 115(2) (जानबूझकर चोट पहुंचाना), 132 (ड्यूटी करने से रोकने के लिए लोक सेवक पर हमला या बल प्रयोग), 121(1) (लोक सेवक को ड्यूटी से रोकने के लिए जानबूझकर चोट या गंभीर चोट पहुंचाना) और 3(5) (साझा मंशा) के तहत एक अन्य प्राथमिकी दर्ज की गई। भारतीय न्याय संहिता की धारा 332, 132 और 121(1) गैर-जमानती धाराएं हैं।

पुलिस ने कहा कि सार्वजनिक शांति भंग करने और कानून का उल्लंघन करने के कथित प्रयासों के मद्देनजर दास, रांका और शिंदे को एहतियातन गिरफ्तार किया गया। सोशल मीडिया के जरिए अन्य लोगों को भी ऐसी गैरकानूनी गतिविधियों के लिए उकसाने के उनके कथित प्रयासों पर भी गौर किया गया।

बयान के अनुसार, तीनों को विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया, जहां भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धाराओं 126 और 170 के तहत कार्यवाही शुरू की गई।

Pic Credit : UNI

कोलकाता में पुलिस और केंद्रीय बलों ने ममता-टीएमसी के विरोध मार्च को रोका

कोलकाता में मंगलवार को ममता तृणमूल कांग्रेस (ममता टीएमसी) द्वारा आयोजित विरोध मार्च को अनधिकृत करार देते हुए पुलिस और केंद्रीय बलों ने रोक दिया।

प्रदर्शनकारियों ने हालांकि उसी जगह पर एक बैठक कर अपना विरोध जारी रखा। यह मार्च राजाबाजार से पार्क सर्कस तक निकाला जाना था, ताकि राष्ट्रीय राजधानी में दिल्ली पुलिस द्वारा पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को हिरासत में लिए जाने के खिलाफ विरोध दर्ज कराया जा सके।

प्रदर्शनकारियों ने चुनावी अनियमितताओं के आरोपों और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर चिंताओं के चलते मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की भी मांग की। पुलिस की यह कार्रवाई पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की उस चेतावनी के बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि दुर्गा पूजा के दौरान राज्य में कोई अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जरूरत पड़ने पर केंद्रीय बलों को तैनात किया जा सकता है।

मंगलवार दोपहर जब मार्च शुरू हुआ, तो पुलिसकर्मियों और केंद्रीय बलों की एक बड़ी टुकड़ी ने राजाबाजार इलाके में बैरिकेड्स लगा दिए, जिससे प्रदर्शनकारी तय रास्ते पर आगे नहीं बढ़ पाए। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे श्री कुणाल घोष, सुश्री डोला सेन और श्री शोवनदेव चट्टोपाध्याय ने मार्च रोके जाने के बाद समर्थकों को संबोधित किया। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रैली में शामिल नहीं हुईं।

Also Read : ‘समुक’ में बनिता संधू की एंट्री!

श्री घोष ने राज्य सरकार और केंद्र पर सुरक्षाकर्मियों को तैनात करके और रैली के खिलाफ चेतावनी जारी करके डर का माहौल बनाने का आरोप लगाया। श्री घोष ने कहा प्रतिबंधों से प्रदर्शनकारी उकसावे में नहीं आए। हमें एक राजनीतिक संदेश भेजना था और वह अपने लक्षित लोगों तक पहुंच गया।

उन्होंने सीईसी को निशाना बनाने वाले प्रदर्शनकारियों के नारों पर जताई गई आपत्तियों पर भी सवाल उठाए और अधिकारियों पर राजनीतिक विरोध को दबाने के लिए पुलिस और केंद्रीय बलों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। सुश्री डोला सेन ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी व्यवस्था ने पिछले पांच महीनों में उनकी पार्टी द्वारा आयोजित बैठकों और रैलियों के लिए बार-बार अनुमति देने से इनकार किया है, जिससे उन्हें अदालतों का दरवाजा खटखटाने पर मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने छात्रों और युवाओं से जुड़े विरोध-प्रदर्शन को रोकने के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती की आलोचना की। सुश्री सेन ने कहा राज्य सरकार की योजना प्रदर्शनकारियों को उकसाने और फिर उन्हें गिरफ्तार करने या घायल करने की थी। हम उनके जाल में नहीं फंसे।

गौरतलब है कि यह प्रदर्शन एसआईआर प्रक्रिया के खिलाफ जारी विरोध और श्री कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच हो रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में हुए विरोध-प्रदर्शन में सुश्री बनर्जी के शामिल होने और पुलिस द्वारा उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबरों के बाद राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। पार्क सर्कस की ओर बढ़ने से रोके जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने राजाबाज़ार में अपना कार्यक्रम जारी रखा और रोके गए मार्च को वहीं एक सभा में बदल दिया।

Pic Credit : UNI

सीजेपी नेताओं का अच्छा है!

कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के नेताओं का बहुत अच्छा है। उनके नाम से प्रदर्शन हो रहे हैं, दिल्ली और पूरे देश में हंगामा मच रहा है, सरकार परेशान है और नौजवान सड़कों पर है, लेकिन इन नेताओं को कुछ नहीं करना होता है। ऐसा लग रहा है कि अभिजीत दीपके ने मौके को लपका और चीफ जस्टिस की कॉकरोच वाली टिप्पणी के बाद कॉकरोच जनता पार्टी नाम से एक सोशल मीडिया हैंडल बना दिया और उसके बाद से उसकी रॉयल्टी ले रहे हैं। उस सोशल मीडिया हैंडल से किसी भी मसले पर आंदोलन का ऐलान कर दिया जा रहा है और देश के लाखों युवा, जो पेपर लीक से लेकर एसआईआर या किसी अन्य मामलों में आक्रोशित हैं वे सड़क पर उतर जा रहे हैं।

सोचें, पारंपरिक रूप से किसी प्रदर्शन की तैयारी में कितनी मेहनत, कितने संसाधान, कितने नेता और कितनी ऊर्जा लगती है। कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों को कितना प्रयास करना पड़ रहा है। दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब के नेताओं को इस तैयारी में लगाया गया है। वे रात दिन मेहनत करके लोगों को जुटा रहे हैं। सरकार की इतनी सख्ती है कि दिल्ली और पड़ोसी राज्यों के कांग्रेस नेताओं को भी अपने घरों से निकल कर सेंट्रल दिल्ली पहुंचने के लिए गुरिल्ला अंदाज में कुछ उपाय करने पड़ रहे हैं। लेकिन अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को कुछ नहीं करना है। वे सिर्फ सोशल मीडिया में अपील कर रहे हैं या प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं। पहले भी ये नेता सड़कों पर नहीं उतरे। आज भी नहीं उतर रहे हैं।

पहली बार जब अभिजीत दीपके छह जून को अमेरिका से दिल्ली पहुंचे थे तो उनको बिना मांगे जंतर मंतर पर प्रदर्शन करने की इजाजत दी गई थी। हवाईअड्डे पर ही पुलिस ने उनको मंजूरी दे दी। लेकिन उन्होंने क्या किया? तीन घंटे के प्रदर्शन में वे बेहोश हो गए और उनको एसी गाड़ी में बैठाना पड़ा और उसके बाद आंदोलन खत्म हो गया। जब 20 जून को फिर से आंदोलन शुरू हुआ तो सोनम वांगचुक और सीपीआई माले के छात्र संगठन आइसा की तीन छात्राओं ने भूख हड़ताल किया। दिल्ली पुलिस ने जब वांगचुक को उठाया तो दीपके ने कहा कि वे भूख हड़ताल जारी रखेंगे लेकिन दो घंटे भी भूख हड़ताल नहीं कर सके। उसके बाद भीड़ जुटाने की बारी आई तो लोग खुद ब खुद पहुंचे या भीम आर्मी के चंद्रशेखर भीड़ लेकर पहुंचे, जिसने आक्रामक तरीके से संसद की ओर मार्च किया।

इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। दीपके एंड कंपनी ने आठ अक्टूबर को बेंगलुरू में प्रदर्शन का ऐलान किया और प्रदर्शन से एक दिन पहले शाम को बेंगलुरू पहुंचे। फिल्म अभिनेता प्रकाश राज और जर्मनी में रहने वाले इन्फ्लूएंसर ध्रुव राठी के नाम पर दो चार हजार लोग जुटे। इसके बाद 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन होना था। पर दीपके, दास और रांका बेंगलुरू में ही रहे। वही से ऐलान किया कि 10 अक्टूबर की सुबह साढ़े 10 बजे की फ्लाइट से दिल्ली लैंड करेंगे।

सोचें, प्रदर्शन 10 बजे से होना था और नेता साढ़े 10 बजे लैंड करने वाले थे। कोर टीम के तीन लोग जहाज में थे औऱ चौथी सदस्य रत्ना सिंह उनको लेने के लिए एयरपोर्ट पहुंची थीं। सो, चारों लोग अपनी सुविधा के हिसाब से वही एयरपोर्ट पर ही हिरासत में ले लिए गए। बाकी जनता जंतर मंतर के इलाके में लाठियां खा रही थी और दिल्ली पुलिस व अर्धसैनिक बलों से गुरिल्ला वार कर रही थी। दूसरे दिन यानी 11 अक्टूबर का प्रदर्शन भी दूसरे लोगों ने किया। दीपके की दो दादी गुजर गईं इसलिए वे महाराष्ट्र चले गए और बाकी लोगों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके अपनी जिम्मेदारी पूरी की।

सीजेपी ने 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने सोमवार को भी जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी थी। सीजेपी ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के खिलाफ और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी थी। लेकिन दिल्ली पुलिस ने अनुमति देने से इनकार कर दिया। इससे पहले सीजेपी ने 20 जून से 25 जुलाई तक जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया था, जिसके बाद केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ था।

अब सीजेपी ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उसने कहा कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन की तारीख नहीं मिली तो फिर आंदोलन करेंगे। सीजेपी के सह संयोजक आशुतोष रांका और सौरव दास सोमवार को प्रदर्शन की अनुमति मांगने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। रांका ने कहा कि संगठन ने पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में पुलिस को चिट्ठी देकर जंतर मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी है। उन्होंने पुलिस को प्रदर्शन की तारीख तय करने का ऑप्शन भी दिया है।

रांका ने कहा कि किसी वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात नहीं हुई क्योंकि कोई वहां नहीं था। उन्होंने तंज करने के अंदाज में कहा, ‘ऐसा लग रहा था कि सीजेपी के पहुंचने के बाद पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन को खाली करा दिया गया है’। इसी बीच, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने हिरासत का वीडियो एडिट करके जारी किया है। उन्होंने कहा कि पुलिस हिरासत में वकील से संपर्क करना कानूनी अधिकार है, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई। दीपके ने कहा कि उन्हें और उनके परिवार के सदस्यों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया।

Ranvir Shorey: ‘सड़कों पर कब्जा करना असल में लोकतंत्र की हत्या है’, रणवीर शौरी ने CJP प्रोटेस्ट की आलोचना की

Ranvir Shorey: एक्टर रणवीर शौरी ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेताओं के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले उनकी हिरासत को लेकर हो रहे विवाद पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर उतरने के बजाय अदालतों और लोकतांत्रिक संस्थाओं का रुख करना चाहिए। उनके ये बयान हुमा कुरैशी, सोनाक्षी सिन्हा और विजय वर्मा समेत कई बॉलीवुड एक्टर्स द्वारा अधिकारियों के प्रदर्शन को संभालने के तरीके की आलोचना के बीच आए हैं।

उन्होंने आगे कहा- लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन आखिरी रास्ता होना चाहिए। यह न्यायपालिका या विधायिका के अधिकार क्षेत्र को दरकिनार करने का तरीका नहीं है! आपके ‘असहमति के अधिकार’ का मतलब यह नहीं हो सकता कि आप हफ्ते के सातों दिन ‘विरोध-प्रदर्शन’ करें, जिससे देश ठप हो जाए और हम बाकी लोगों की जिंदगी नरक बन जाए! सिर्फ अराजकतावादी, पब्लिसिटी चाहने वाले या बेवकूफ ही पहले से मौजूद कानूनी उपायों का इस्तेमाल किए बिना विरोध-प्रदर्शन करेंगे।”

जब एक X यूजर ने जवाब दिया कि रणवीर को यह नहीं पता कि ‘CJI (मुख्य न्यायाधीश) भी समझौता कर चुके हैं’ तो एक्टर ने इस दावे का मजाक उड़ाते हुए लिखा, “लंबी होती लिस्ट। मैं समझौता कर चुका हूं, दूसरे वोटर समझौता कर चुके हैं, मीडिया समझौता कर चुका है, संसद समझौता कर चुकी है, PMO समझौता कर चुका है, CEC समझौता कर चुका है, SC समझौता कर चुका है… सिर्फ सड़कों पर डफली बजाने वाली, संदिग्ध फंडिंग वाली उन पार्टियों की भीड़ ही भरोसेमंद है, जो चुनाव नहीं जीत पाईं।”

विरोध-प्रदर्शन के बारे में सब कुछ

संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की योजना बनाई थी। वे मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। यह प्रदर्शन जंतर-मंतर पर होना था। लेकिन विरोध-प्रदर्शन से पहले ही दिल्ली पुलिस ने मुंबई से आने के कुछ ही देर बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर दीपके और CJP के दो अन्य नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया। बाद में तीनों को रिहा कर दिया गया। रविवार को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन जारी रहा।

सोमवार को आशुतोष रांका ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की तारीख तय करने के लिए 24 घंटे का समय दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तय समय के अंदर कोई जवाब नहीं मिला तो CJP आगे की कार्रवाई के बारे में फैसला करेगा।

दिल्ली में प्रदर्शन पर वर्ल्ड मीडिया:NYT बोला- राजधानी किले में तब्दील, विरोध को दबाना मुश्किल, अल-जजीरा ने लिखा- सरकार के लिए सबसे गंभीर चुनौती

भारत में SIR को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस मामले को दुनियाभर के मीडिया संस्थानों को प्रमुखता से कवर किया गया है।

NYT – सरकार के लिए सत्ता बनाए रखने के तरीके कमजोर पड़े अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स लिखता है कि भारत में एक समय कमजोर पड़ चुका विपक्ष अब फिर सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। विपक्षी दल युवाओं के आंदोलन से बनी राजनीतिक जगह का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। शनिवार को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी एक किले में तब्दील हो गई। भारतीय अधिकारियों ने जरूरत से ज्यादा ताकत का इस्तेमाल किया, तो देश के युवाओं ने भी उतने ताकतवर तरीके से इसका विरोध किया। मोदी समर्थक पहले विरोधियों के प्रदर्शन को कमजोर बताकर या ‘देशद्रोही’ कहकर उनका विरोध कम करने की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन इस आंदोलन में समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल हैं। इससे प्रदर्शनकारियों को उसी तरीके से निशाना बनाना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा है। वॉशिंगटन पोस्ट – मोदी और चुनाव आयोग के खिलाफ गुस्सा बढ़ा अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि भारत में युवाओं के विरोध-प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। वोटर लिस्ट में बदलाव के विरोध में आंदोलन कर रहे युवाओं ने दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान किया था, लेकिन पुलिस ने जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही कई नेताओं, विपक्षी सांसदों और छात्र कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई, जगह-जगह बैरिकेडिंग की और वाहनों की जांच की। यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है, जब इससे पहले पेपर लीक के मुद्दे पर हुए युवा प्रदर्शनों के बाद जुलाई में शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। CNN- सरकार ही नहीं CJP के लिए भी बड़ी परीक्षा अमेरिकी अखबार CNN लिखता है कि कई हफ्तों तक धरने और मार्च चलने के बाद जुलाई में धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था। यह मोदी सरकार के लिए एक राजनीतिक झटका था। विपक्षी दल भी सरकार को इस तरह का झटका नहीं दे पाए थे।अब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन CJP के लिए एक परीक्षा है। पार्टी यह देखना चाहती है कि क्या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के लिए अपनाई गई उसकी सफल रणनीति को देश की चुनाव व्यवस्था जैसे बड़े मुद्दे पर भी दोहराया जा सकता है। साउथ चाइना पोस्ट- भारत में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल हॉन्गकॉन्ग के अखबार साउथ चाइना पोस्ट ने लिखा वोटर लिस्ट में करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने की खबर के बाद विरोध तेज हुआ है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वोटर लिस्ट में बदलाव से भाजपा को फायदा पहुंच सकता है। शनिवार को दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए हजारों पुलिस और पैरामिलिट्री जवान तैनात किए गए, कई मेट्रो स्टेशन और बाजार बंद रहे और 2,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट ने इस विरोध को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अब तक की गंभीर राजनीतिक चुनौतियों में से एक बताया है। अल जजीरा – PM मोदी के लिए अब तक की सबसे गंभीर चुनौती अल जजीरा ने विरोध प्रदर्शन को लेकर लिखा है कि ये PM मोदी और उनकी सरकार के लिए अब तक की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक हैं। पिछले हफ्ते इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद विरोध और तेज हो गया। रिपोर्ट में बताया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के वोटर लिस्ट में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए थे। इन बदलावों के चलते वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ नाम हटा दिए गए थे। भाजपा का कहना है कि चुनावों में उसकी सफलता मोदी की लोकप्रियता और भारत की आर्थिक तरक्की को दिखाती है। पार्टी ने विपक्ष पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है। —————————- यह खबर भी पढ़ें… CJP का दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम: कहा- प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिली तो फिर आंदोलन करेंगे कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उसने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तारीख नहीं मिली तो फिर आंदोलन करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

Jantar Mantar: अब दिल्ली में जंतर-मंतर पर नहीं होगा धरना-प्रदर्शन, रामलीला मैदान समेत इन 3 जगहों पर कर सकेंगे प्रोटेस्ट

Jantar Mantar News: राजधानी दिल्ली में धरना-प्रदर्शन करने की जगहों को लेकर बड़ा बदलाव किया गया है। दिल्ली पुलिस ने विरोध प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर को निर्धारित स्थलों की लिस्ट से हटा दिया है। अब उसकी जगह दिल्ली में प्रोटेस्ट के लिए तीन नए स्थान निर्धारित किए हैं। पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने इस संबंध में सोमवार (12 अक्टूबर) को एक स्थायी आदेश जारी किया है। इसके मुताबिक विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित करने के लिए तीन नए स्थान निर्धारित किए हैं। इनमें रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली का सीबीडी मैदान शामिल हैं।

आदेश के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने मौजूदा निर्धारित स्थल के विकल्प के तौर पर विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित करने के लिए उपयुक्त स्थानों की समीक्षा करने के वास्ते एक समिति गठित की थी। आदेश में कहा गया है कि समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थल के रूप में गैर अधिसूचित किया गया है।

अब यहां कर सकेंगे प्रदर्शन

जंतर-मंतर को लिस्ट से निकालकर रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन नए स्थानों के तौर पर तय किया गया है। पुलिस के अनुसार, इन तीनों स्थानों पर विरोध प्रदर्शन और धरने आयोजित करने के लिए विस्तृत एवं संशोधित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) अलग से जारी की जाएगी। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाने की अपीलों के बीच राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की जा रही है।

जंतर-मंतर पर हमेशा होता रहता है प्रदर्शन

जंतर-मंतर लंबे समय से दिल्ली में राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न समूहों के विरोध प्रदर्शनों के लिए प्रमुख स्थान रहा है। यहां अलग-अलग मुद्दों को लेकर धरने और प्रदर्शन आयोजित किए जाते रहे हैं। हालांकि, दिल्ली पुलिस के ताजा आदेश के बाद जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं रहेगा। अइस बदलाव के बाद विरोध प्रदर्शन करने वाले संगठनों को नए निर्धारित स्थलों के अनुसार अपनी गतिविधियों की योजना बनानी होगी।

दिल्ली में यह बदलाव ऐसे समय किया गया है, जब जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन के लिए लोगों को जुटाने की अपीलों के बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जा रही है। राजधानी के संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए अहम है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में आदेश के पीछे किसी एक विशिष्ट कारण का विस्तृत उल्लेख नहीं है। इसलिए इस फैसले को किसी खास राजनीतिक दल या प्रदर्शन से सीधे जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।

प्रदर्शन करने वालों के लिए क्या बदलेगा?

जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों को अब नए निर्धारित स्थानों पर प्रदर्शन की योजना बनानी होगी। इससे विरोध प्रदर्शन के आयोजन, स्थान के चयन और सुरक्षा प्रबंधन की व्यवस्था में बदलाव आएगा। हालांकि, नए स्थलों पर प्रदर्शन आयोजित करने के लिए अनुमति, समय, भीड़ की संख्या और अन्य शर्तों से जुड़े नियम क्या होंगे, इसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध आदेश के आधार पर अलग से सत्यापित की जानी चाहिए।

दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार द्वारा जारी आदेश में कहा गया है, “भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने नागरिकों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार के लिए मौजूदा तय जगह के अलावा अन्य उपयुक्त जगहों की जांच करने के लिए एक समिति बनाई थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन की जगह के तौर पर हटा दिया गया है। विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए तीन नई जगहों रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और CBD ग्राउंड (पूर्वी दिल्ली) को तय किया गया है। इन तीन जगहों पर विरोध-प्रदर्शन आयोजित करने के लिए विस्तृत और संशोधित SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) अलग से जारी की जाएगी।”

तीन नए धरना-प्रदर्शन केंद्रों की डिटेल्स

दिल्ली पुलिस के आदेश के अनुसार, राजधानी में विरोध प्रदर्शन के लिए तीन नए निर्धारित स्थल होंगे:-

1. रामलीला मैदान: दिल्ली का रामलीला मैदान लंबे समय से बड़े राजनीतिक कार्यक्रमों, रैलियों और जन आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है। अब इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थलों में शामिल किया गया है।

2. बुराड़ी मैदान: बुराड़ी क्षेत्र में स्थित मैदान को भी धरना-प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया गया है। यहां प्रदर्शन आयोजित करने की प्रक्रिया संशोधित SOP के तहत तय की जाएगी।

3. सीबीडी मैदान, पूर्वी दिल्ली: पूर्वी दिल्ली के सीबीडी मैदान को तीसरे निर्धारित स्थल के रूप में चुना गया है। इसके जरिए राजधानी में प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

ये भी पढ़ें- ‘ये शिव की बारात है कोई भी आ सकता है’; सुप्रीम कोर्ट मार्च को लेकर बोले राहुल गांधी, आज SC में याचिका दायर करेगा ‘इंडिया’ गठबंधन

2022 के पुराने आदेश में किया गया संशोधन

दिल्ली पुलिस ने बताया कि नया आदेश 28 अप्रैल 2022 को जारी किए गए पुराने स्थायी आदेश में आंशिक संशोधन करता है। नए स्थलों पर धरना-प्रदर्शन की व्यवस्था को लेकर आगे अलग से गाइडलाइंस जारी किए जाएंगे। इस बदलाव के बाद प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थानों और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। हालांकि, उपलब्ध आदेश में नई SOP के सभी डिटेल्स नियमों का उल्लेख नहीं किया गया है।

CJI Video: कांग्रेस नेताओं से मिलने से इनकार के बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत का पहला रिएक्शन, बोले- सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले

Delhi Protest Update: चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार (12 अक्टूबर) को कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर किसी के लिए खुले हैं। कोई भी आम नागरिक या निर्वाचित जनप्रतिनिधि अपनी शिकायत लेकर अदालत आ सकता है। उन्होंने विपक्षी गठबंधन ‘INDIA’ ब्लॉक के नेताओं से मुलाकात नहीं करने के फैसले पर पहला बयान दिया है। CJI ने बताया कि उन्हें रविवार 11 अक्टूबर को मुलाकात के अनुरोध से जुड़ा पत्र मिला था। इसके बाद उन्होंने उसी रात जवाब देकर मुलाकात नहीं कर पाने की वजह बता दी थी।

न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा, “मुझे कल बैठक के अनुरोध के संबंध में एक पत्र मिला था। और मैंने कल रात ही उसका जवाब दे दिया था, जिसमें उन कारणों का उल्लेख किया गया था कि मैं क्यों नहीं मिल पाऊंगा।” उन्होंने यह भी कहा, “सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। किसी भी आम नागरिक या निर्वाचित निकाय के सदस्य की किसी भी याचिका का स्वागत है। हर भारतीय नागरिक को अदालत का दरवाजा खटखटाने का अधिकार है, और हम उनकी चिंताओं को सुनेंगे और कानून के तहत जो भी उचित होगा, वह करेंगे।”

CJI सूर्यकांत ने यह बयान राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के 33वें स्थापना दिवस समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के नेता चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी शिकायतों को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च निकालने की तैयारी कर रहे हैं। चीफ जस्टिस के इस बयान को विपक्षी नेताओं के उस अनुरोध के संदर्भ में देखा जा रहा है, जिसमें उन्होंने कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे पर CJI से मुलाकात कर अपना पक्ष रखने और ज्ञापन सौंपने की मांग की थी।

विपक्षी नेताओं से मुलाकात क्यों नहीं करेंगे CJI?

इससे पहले CJI जस्टिस सूर्यकांत ने INDIA ब्लॉक के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात करने से इनकार कर दिया था। पीटीआई के मुताबिक, सीजेआई सूर्यकांत ने ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी से यह कहते हुए मुलाकात से इनकार कर दिया कि इस तरह के मुद्दे पहले ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष विचाराधीन हैं। सूत्रों ने बताया कि राहुल गांधी के मुलाकात के अनुरोध पर CJI सूर्यकांत ने कहा कि प्रशासनिक स्तर पर कोई आदेश पारित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कांग्रेस नेता से याचिका दायर करने को कहा, जिस पर मंगलवार को सुनवाई हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, सीजेआई ने कहा कि यदि किसी नागरिक के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होता है, तो सुप्रीम कोर्ट उसके लिए 24 घंटे उपलब्ध है। सूत्रों ने बताया कि जस्टिस सूर्यकांत ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक स्तर पर कार्यपालिका के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इससे पहले, अपनी मांगों को लेकर विपक्षी दलों ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय तक विरोध मार्च निकालने की घोषणा की थी। कांग्रेस ने इसे ‘चलो दिल्ली- लोकतंत्र के लिए मार्च’ का नाम दिया है। विपक्षी दलों की मांग है कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़े उनके आरोपों पर उचित कार्रवाई हो।

ये भी पढ़ें- Noida Investment News: जेवर एयरपोर्ट के पास लगेंगी 25 नई कंपनियां; ₹3,155 करोड़ का निवेश और 9,000 को मिलेगी नौकरी

दिल्ली में सुरक्षा कड़ी, कई जगह बैरिकेडिंग

विपक्षी नेताओं के प्रस्तावित मार्च को देखते हुए मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। बाराखंभा रोड और मंडी हाउस के आसपास सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। दिल्ली पुलिस के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवान भी तैनात हैं। सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के 6 स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट गेट बंद कर दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 12 अक्टूबर को शाम 4 बजे तक कुछ स्टेशनों के गेट बंद रहेंगे।