चीन में 5.1 तीव्रता के भूकंप के बाद नेपाल में फिर हाई अलर्ट, तिब्बत में टूटा डैम, त्रिशूली से फिर भाग रहे लोग

Nepal Flood: नेपाल पुलिस ने शुक्रवार को देश में बाढ़ को लेकर एक नया अलर्ट जारी किया है। साथ ही त्रिशूली से लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है। ‘द काठमांडू पोस्ट’ की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने बताया कि बुधवार को आई भयानक भोटेकोशी बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 475 हो गई है।

पुलिस के एक अधिकारी ने ANI को बताया कि इलाके में सड़कों के पुनर्निर्माण समेत सभी तरह के काम रोक दिए गए हैं।

नेपाल पुलिस के अधिकारी पी. चौधरी ने कहा, “पानी का स्तर बढ़ने वाला है, इसलिए सभी को रोका जा रहा है। ऑपरेशन में लगी सभी गाड़ियां वापस लौट रही हैं। वे सभी वापस आ रहे हैं। वहां से सभी लोगों को निकालकर सुरक्षित जगह पर ले जाया जा रहा है। सारा काम रोक दिया गया है। अभी और भी भयानक बाढ़ आने की आशंका है। इसीलिए सभी को अलर्ट पर रखा जा रहा है।”

चीन के सिचुआन में आया भूकंप

वहीं, आज चीन के सिचुआन में 5.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके बाद नेपाल में बाढ़ का अलर्ट जारी किया गया। नेपाल पुलिस ने बताया कि नेपाल के त्रिशूली इलाके से लोगों को फिर से सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया, क्योंकि ऊपर से पानी के तेज बहाव के कारण नदी का जलस्तर बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

CGTN की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर ने बताया कि भूकंप के झटके दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत के लॉन्गचांग शहर में महसूस किए गए।

अलर्ट जारी करते हुए नेपाल पुलिस ने कहा कि तिब्बत की तरफ एक बांध फिर से टूट गया है।

नेपाल पुलिस ने सोशल मीडिया के जरिए दी जानकारी

नेपाल पुलिस ने X पर पोस्ट कर बताया, “सूचना मिली है कि तिब्बत की तरफ पानी का बांध फिर से टूट गया है। इसलिए सभी सुरक्षा कर्मियों, राहत और बचाव कार्य में लगे लोगों और आम जनता से तुरंत सतर्क रहने और सुरक्षित जगह पर जाने की अपील की जाती है। साथ ही, आसपास के लोगों को भी इसकी जानकारी दें।”

नेपाल के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में विपक्ष के नेता भीष्म राज आंगदेम्बे ने कहा कि भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद नेपाल की सेना बचाव कार्य जारी रखे हुए है।

उन्होंने त्रिशूली में पत्रकारों से कहा, “यहां की भौगोलिक बनावट के कारण मौसम की स्थिति बचाव कार्यों के लिए अनुकूल नहीं है, फिर भी हमारी सेना और हमारी सभी हेलीकॉप्टर टीमें इस काम में पूरी तरह से जुटी हुई हैं। ऊपरी इलाकों की स्थिति को देखते हुए हम तुरंत कार्रवाई कर रहे हैं – संघीय, प्रांतीय और स्थानीय सरकारें सभी मिलकर काम कर रही हैं।”

उन्होंने आगे कहा, इस ऑपरेशन में सेना के दो हेलीकॉप्टरों के साथ-साथ निजी क्षेत्र के हेलीकॉप्टर भी तैनात किए गए हैं। हम अपने पास मौजूद हर संसाधन का इस्तेमाल कर रहे हैं। हम सभी को जानकारी दे रहे हैं और हमारी सुरक्षा एजेंसियां ​​लोगों से सुरक्षित रहने की अपील करते हुए एडवाइजरी जारी कर रही हैं।

बता दें कि त्रिशूली से रासुका तक बन रही सड़क का काम कुछ समय के लिए रोक दिया गया है। सभी JCB मशीनों को वापस बुला लिया गया है और सड़क बनाने का सारा काम बंद कर दिया गया है।

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भारत ने जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम के लिए किया करार,खुलेगा डिफेंस सेक्टर में को-प्रोडक्शन का रास्ता

अमेरिकी दूतावास ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय सेना ने अमेरिका की फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) प्रक्रिया के जरिए अमेरिका में बनी जैवलिन एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम खरीदने के लिए लेटर ऑफ़ ऑफर एंड एक्सेप्टेंस (LOA) पर साइन किया है। इस बात की जानकारी अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने की। उन्होंने भारत के इस फैसले को दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को मजबूत करने वाला एक बड़ा कदम बताया है।

X पर लिखें अपने एक पोस्ट में गोर ने कहा “बड़ी खबर! भारत युद्ध में परखा हुआ जैवलिन एंटी-टैंक सिस्टम खरीदने की योजना बना रहा है।” उन्होंने इसे “अमेरिका-भारत रक्षा संबंधों में एक बड़ा कदम” बताया और कहा कि इस घटना से “संयुक्त उत्पादन (को-प्रोडक्शन)की संभावनाओं के रास्ते खुलते हैं।” गोर ने आगे कहा,”दोनों देशों के बीच सहयोग का स्तर रिकॉर्ड ऊंचाई पर है!”

अमेरिकी दूतावास ने LOA पर हस्ताक्षर किए जाने की पुष्टि करते हुए कहा कि यह अहम कदम “अमेरिका और भारतीय सशस्त्र बलों के बीच मजबूत साझेदारी को दिखाता है और अमेरिका तथा भारत के रक्षा उद्योगों के बीच भविष्य में सहयोग के रास्ते खोलता है।”

अमेरिकी दूतावास ने कहा कि LOA पर हस्ताक्षर होने से आपसी फायदे वाले को-प्रोडक्शन और भारत तथा अमेरिका के रक्षा औद्योगिक आधार को मजबूत करने के मकसद से अन्य मौकों पर बातचीत का रास्ता भी खुलेगा।

LOA पर यह हस्ताक्षर नवंबर 2025 में अमेरिका द्वारा भारत को जैवलिन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम और एक्सकैलिबर गाइडेड आर्टिलरी म्यूनिशन की प्रस्तावित बिक्री को मंजूरी दिए जाने के बाद हुआ है।

क्या है जैवलिन सिस्टम ?

जैवलिन सिस्टम को ‘जैवलिन जॉइंट वेंचर’ने बनाया है,जो RTX और लॉकहीड मार्टिन के बीच एक पार्टनरशिप है। यह एक एडवांस्ड,मीडियम-रेंज फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल सिस्टम है। इसे बख्तरबंद गाड़ियों और मज़बूत ठिकानों समेत कई तरह के टारगेट को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। फायर-एंड-फॉरगेट खूबी की वजह से मिसाइल लॉन्च होने के बाद खुद ही अपने टारगेट की ओर बढ़ सकती है। इससे ऑपरेटर को मिसाइल को लगातार गाइड करने के बजाय अपनी जगह बदलने या सुरक्षित कवर लेने का मौका मिल जाता है।

जैवलिन की एक बड़ी विशेषता इसकी टॉप-अटैक’क्षमता है,जिससे मिसाइल बख्तरबंद गाड़ी पर ऊपर से हमला कर सकती है। जहां आमतौर पर आर्मर प्रोटेक्शन कमजोर होता है। इस सिस्टम का इस्तेमाल कुछ खास लक्ष्यों के खिलाफ सीधे हमले में भी किया जा सकता है। इस हथियार का इस्तेमाल अमेरिकी सेना,अमेरिकी मरीन कॉर्प्स और कई दूसरे देशों की सेनाएं भी करती हैं।

 

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Samsung Galaxy S26 FE की धांसू एंट्री, 3X जूम और 4,900mAh बैटरी जैसे मिलेंगे फीचर्स

Samsung Galaxy S26 FE को गुरुवार को चुनिंदा ग्लोबल मार्केट में Galaxy S26 लाइनअप में कंपनी के नए ‘Fan Edition’ के तौर पर लॉन्च कर दिया गया है। यह फोन अगले महीने की शुरुआत में कंपनी की वेबसाइट के जरिए दुनिया भर में बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। Samsung Galaxy S26 FE में Exynos 2000 सीरीज का चिपसेट है, जो 3nm प्रोसेस पर बना है। इस फोन में 4,900mAh की बैटरी है जो वायर्ड फास्ट चार्जिंग और वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करती है। इसके अलावा, इसमें ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप है, जिसमें 50MP का मेन कैमरा है। अब चलिए फोन के स्पेसिफिकेशन्स और कीमत के बारे में जानते हैं।

Samsung Galaxy S26 FE की कीमत और उपलब्धता

Samsung Galaxy S26 FE की कीमत 8GB RAM और 128GB स्टोरेज वाले बेस वेरिएंट के लिए EUR 799 (लगभग ₹89,000) से शुरू होती है। वहीं, 8GB RAM और 256GB स्टोरेज वाले वेरिएंट की कीमत EUR 899 (लगभग ₹1,00,000) है।

इसके अलावा, फोन का टॉप वेरिएंट 8GB RAM और 512GB स्टोरेज के साथ आता है, जिसकी कीमत EUR 1,099 (लगभग ₹1,22,000) रखी गई है। हालांकि, भारत में Samsung Galaxy S26 FE की कीमत का अभी ऐलान नहीं किया गया है।

फिलहाल, यह नया स्मार्टफोन चुनिंदा ग्लोबल मार्केट्स में 4 सितंबर से Samsung के ऑनलाइन स्टोर के जरिए बिक्री के लिए उपलब्ध होगा। बता दें कि फोन को Blueberry, Graphite और Pistachio जैसे तीन कलर ऑप्शन में पेश किया गया है।

Samsung Galaxy S26 FE के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

Samsung Galaxy S26 FE एक डुअल-सिम स्मार्टफोन है जो Samsung के लेटेस्ट OneUI 9 पर चलता है, जो Android 17 पर आधारित है। इस हैंडसेट में 6.7-इंच का Full-HD+ Dynamic AMOLED 2X डिस्प्ले है, जो 120Hz तक का रिफ्रेश रेट और 1,900 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस देता है। साउथ कोरिया की टेक कंपनी का कहना है कि यह फोन धूल और पानी से बचाव के लिए IP68 रेटिंग के साथ आता है। Samsung Galaxy S26 FE में Exynos 2500 SoC का इस्तेमाल किया गया है, जिसे 3nm प्रोसेस पर बनाया गया है।

इसके अलावा, इसमें 8GB RAM और 512GB तक का ऑनबोर्ड स्टोरेज मिलता है। कैमरे की बात करें तो Samsung Galaxy S26 FE में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप है, जिसमें ऑप्टिकल इमेज स्टेबिलाइजेशन (OIS) के साथ 50MP (f/1.8) का प्राइमरी कैमरा, 123-डिग्री फील्ड ऑफ व्यू वाला 12MP (f/2.2) का अल्ट्रावाइड कैमरा और 8MP (f/2.4) का टेलीफोटो कैमरा शामिल है। टेलीफोटो कैमरा 3x ऑप्टिकल जूम, 30x तक डिजिटल जूम और OIS की सुविधा देता है। सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए फोन में 85-डिग्री फील्ड ऑफ व्यू वाला 12MP (f/2.2) का फ्रंट कैमरा भी दिया गया है।

बैटरी और कनेक्टिविटी

Samsung Galaxy S26 FE में 4,900mAh की बैटरी दी गई है। यह 45W वायर्ड फास्ट चार्जिंग और 15W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करती है।

कनेक्टिविटी के लिए फोन में 5G, 4G LTE, Wi-Fi 6E और Bluetooth 5.4 का सपोर्ट मिलता है। इसमें USB Type-C पोर्ट भी दिया गया है। सिक्योरिटी के लिए फोन में इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर मिलता है।

फोन का डायमेंशन 161.6 x 76.9 x 7.4mm है और इसका वजन करीब 193 ग्राम है।

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TCS से ₹1537 करोड़ के ऑर्डर पर बनी बात, 13% उछल पड़े Tejas Networks के शेयर

Tejas Networks Share Price: तेजस नेटवर्क्स को टीसीएस (TCS) से एक LoI (लेटर ऑफ इंटेंट) मिला तो शेयर रॉकेट बन गए। तूफानी स्पीड से इसके शेयर करीब 13% उछल पड़े। टीसीएस ने इसे BSNL के 4जी मोबाइल नेटवर्क के लिए इक्विपमेंट्स की सप्लाई का इतना बड़ा ऑर्डर दिया है कि अकेले यह तेजस नेटवर्क के मौजूदा ऑर्डर बुक से अधिक है। इसने तेजस नेटवर्क्स के शेयरों में जोश भर दिया। इस तेजी का कुछ निवेशकों ने फायदा उठाया, जिससे भाव थोड़े नरम पड़े लेकिन निचले स्तर पर खरीदारी के चलते अब भी यह काफी मजबूत स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 8.58% की बढ़त के साथ ₹554.70 पर है। इंट्रा-डे में यह 12.91% उछलकर ₹576.80 तक पहुंच गया था।

BSNL के लिए Tejas Networks को TCS से मिला तगड़ा LoI

तेजस नेटवर्क्स को 18,685 साइट्स पर बीएसएनएल (BSNL) के 4जी नेटवर्क के लिए RAN (रेडियो एक्सेस नेटवर्क) इक्विपमेंट, एक्सेसरीज और इंस्टॉलेशन मैटेरियल्स की सप्लाई को लेकर टीसीएस से लेटर ऑफ इंटेंट मिला है। यह ऑर्डर 1,537 करोड़ का है जोकि तेजस नेटवर्क्स के पूरे मौजूदा ऑर्डर बुक से अधिक है। जून 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी का ऑर्डर बुक ₹1529 करोड़ का था। तेजस नेटवर्क्स का कहना है कि टीसीएस की तरफ से जल्द ही एक डिटेल्ड परचेज ऑर्डर जारी किया जाएगा।

यह नया ऑर्डर बीएसएनएल के 4G नेटवर्क के विस्तार से जुड़ा है, जिस पर एक साल से अधिक समय से काम चल रहा है। मई 2025 में टीसीएस को बीएसएनएल से 18,685 साइट्स पर 4G नेटवर्क की प्लानिंग, इंजीनियरिंग, सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग, कमीशनिंग और सालाना मेंटेनेंस के लिए ₹2,903 करोड़ का एक एड-ऑन एडवांस पर्चेज ऑर्डर मिला था। इस प्रोजेक्ट के लिए RAN इक्विपमेंट सप्लाई करने वाली तेजस नेटवर्क्स ने बाद में इससे जुड़ा करीब ₹1526 करोड़ का पर्चेज ऑर्डर मिलने की उम्मीद जताई थी।

तेजस नेटवर्क्स ने बीएसएनएल के स्वदेशी 4G रोलआउट के लिए बेस स्टेशन और रेडियो इंफ्रास्ट्रक्चर सप्लाई किए हैं तो टीसीएस ने उस कंसोर्टियम में ओवरऑल डिप्लॉयमेंट की कमान संभाली जिसमें सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) भी शामिल है। शुरुआत में इसमें 1 लाख से अधिक साइट्स थीं और तेजस नेटवर्क्स को 4G RAN इक्विपमेंट सप्लाई के लिए करीब ₹7492 करोड़ का ऑर्डर मिला था।

कैसी है सेहत

कंपनी के कारोबारी सेहत की बात करें तो जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर तेजस नेटवर्क्स का रेवेन्यू सालाना आधार पर लगभग दोगुना होकर ₹202 करोड़ से ₹404 करोड़ पर पहुंच गया लेकिन नेट लॉस भी इस दौरान ₹194 करोड़ से ₹202 करोड़ पर पहुंच गया। जून तिमाही में 5G रेडियो के इंटरनेशनल शिपमेंट और 100G/400G ऑप्टिकल और फाइबर-टू-द-x प्रोडक्ट्स के घरेलू शिपमेंट से इसके रेवेन्यू को सपोर्ट मिला। जून तिमाही के आखिर में कंपनी पर कुल कर्ज ₹4,866 करोड़, कैश ₹589 करोड़ और नेट कर्ज ₹4,277 करोड़ था।

अब इसके शेयरों की बात करें तो 27 जनवरी 2026 को बीएसई पर यह एक साल के निचले स्तर ₹294.10 पर था। इस निचले स्तर से 5 ही महीने में यह 119.23% उछलकर 19 जून 2026 को एक साल के हाई ₹644.75 पर पहुंच गया।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

आज का एक्सप्लेनर:‘चीन ने जानबूझकर नेपाल को तबाही का अलर्ट नहीं दिया’, इस दावे में कितनी सच्चाई; क्या वाकई बच सकती थीं सैकड़ों जिंदगियां

26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर आई बाढ़ में 200 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो गई है। करीब 1,500 लोग अब भी लापता हैं। दावा किया जा रहा कि काफी जानें बचाई जा सकती थीं, अगर चीन ने समय पर चेता दिया होता। तो क्या वाकई नेपाल में हुई भीषण तबाही के पीछे चीन जिम्मेदार है; दोनों देशों के बीच आपदाओं की वार्निंग देने का क्या सिस्टम है, इसी पर आज का एक्सप्लेनर… सवाल-1: नेपाल में आई बाढ़ के पीछे चीन पर क्या आरोप लग रहे? जवाब: नेपाली पत्रकार परशुराम काफ्ले ने X पर लिखा, ‘चीन ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। अगर बीजिंग के डिजास्टर डिटेक्शन सिस्टम से अर्ली वार्निंग मिल जाती, तो नेपाल में ज्यादा जानें बचाई जा सकती थीं। नेपाल हमेशा चीन की चिंताओं का ध्यान रखता है। इस एकतरफा प्यार की कीमत चुकानी पड़ रही है।’ नेपाल के मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, नेपाल और चीन के बीच मौसम से जुड़ी जानकारियां शेयर करने की व्यवस्था है, लेकिन इस घटना के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई। नेपाल के मौसम विभाग की सीनियर साइंटिस्ट विभूति पोखरेल कहती हैं, ‘हम चीनी अधिकारियों के संपर्क में हैं, लेकिन अभी तक वे नहीं बता पाए हैं कि बाढ़ की वजह क्या है।’ 2016 में भी नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर रसुवागढ़ी इलाके में भीषण बाढ़ आई थी। तब भी एक्सपर्ट्स ने कहा था कि दोनों देशों के बीच समय रहते इन्फॉर्मेशन शेयर की गई होती, तो नुकसान कम किया जा सकता था। सवाल-2: दोनों देशों के बीच ऐसे हादसों की जानकारी देने का नियम है या नहीं? जवाब: नेपाल और चीन के बीच मौसम और आपदा से जुड़ी जानकारियां साझा करने की बात तय हुई थी, लेकिन इस पर कोई औपचारिक समझौता नहीं हो पाया है। दरअसल, 8 जुलाई 2025 को रसुवागढ़ी बॉर्डर पॉइंट से 35 किलोमीटर ऊपर चीन के इलाके में तिब्बत के पहाड़ों पर ‘पुरेपु’ नाम की ग्लेशियर झील फटी। इससे भोटेकोशी नदी के आसपास करीब 100 किमी तक के इलाके में बाढ़ का मलबा पहुंचा। एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद नेपाल और चीन ने तीन बातें तय की थीं… नेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सिटी में एनवायरनमेंट स्टडीज के प्रोफेसर सुदीप ठाकुर बताते हैं, ‘तिब्बत में मौसम से जुड़ी इन्फॉर्मेशन इकठ्ठा करने की व्यवस्था है, लेकिन उसे नेपाल के साथ साझा नहीं किया जाता है। चीन को वैज्ञानिक जानकारी देने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन शायद नेपाल सरकार ही मजबूती से अपनी मांग उनके सामने रख ही नहीं पाई है।’ नेपाल की डिजास्टर स्टडी सेंटर के डायरेक्टर वसंत अधिकारी भी कहते हैं कि अब तक जानकारी शेयर करने की कोई व्यवस्था नहीं है। सवाल-3: जानकारी शेयर न करने के आरोप पर चीन ने क्या कहा है? जवाब: चीन ने सीधे तौर पर इसका कोई जवाब नहीं दिया है, हालांकि चीनी दूतावास ने अपने बयान में कहा है कि भूकंप के चलते बाढ़ आई है और ये भूकंप नेपाल की तरफ आया था। बयान में कहा गया, ‘रसुवा-ग्यिरोंग बॉर्डर इलाके में आई बाढ़ से चीन बेहद दुखी है। नेपाल की तरफ आए भूकंप के चलते हिमस्खलन हुआ और फिर मलबा बहा। इससे सीमा के दोनों तरफ लोगों की मौत हुई।’ दरअसल, पहले कहा गया था कि रिक्टर स्केल पर करीब 5 की तीव्रता के भूकंप के चलते बर्फ का ग्लेशियर टूटा, हालांकि बाद में अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने साफ किया कि भूकंप जैसा झटका बर्फ और चट्टान के टूटने से पैदा हुआ था। हालांकि चीनी दूतावास ने ये जरूर कहा है, ‘भविष्य में सीमा पार मौसम और आपदाओं से जुड़ी जानकारियां साझा करने के लिए बेहतर तरीके से काम करेंगे।’ सवाल-4: बर्फ का पहाड़ चीन में गिरा या नेपाल में? जवाब: नेपाल की डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, NDRRMA के मुताबिक, ग्लेशियर टूटने की जगह नेपाल-चीन सीमा चौकी से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। अथॉरिटी के वैज्ञानिक प्रकाश पोखरेल के मुताबिक, ‘ये इलाका नेपाली हिस्से में आता है, न कि चीन की तरफ।’ हालांकि, नेपाली मौसम वैज्ञानिक विभूति पोखरेल कहती हैं, ‘हम चीनी अधिकारियों के संपर्क में हैं, लेकिन अब तक ये पता नहीं है कि घटना नेपाल में हुई या चीन की तरफ हुई है।’ दरअसल, मानसून सीजन के चलते उस इलाके में काफी बादल हैं। इसलिए सेटेलाइट तस्वीरों से ये साफ नहीं हो पा रहा है कि ग्लेशियर टूटने की सटीक लोकेशन क्या है। मोटे तौर पर जहां ग्लेशियर टूटा, वो इलाका सेंट्रल हिमालयन रेंज की क्रेस्टलाइन पर है। यानी अगर पहाड़ की एक तरफ की ढलान नेपाल में है, तो उसी पहाड़ की दूसरी तरफ की ढलान तिब्बत में है, जिस पर चीन का कंट्रोल है। करीब 8000 मीटर की ऊंचाई पर बर्फ और ग्लेशियर जमा रहते हैं, जो पिघलकर दोनों तरफ की नदियों के लिए पानी का सोर्स बनते हैं। तकनीकी तौर पर अगर ऊंचाई पर कोई ग्लेशियर टूटे, तो उसका असर नीचे दोनों देशों के तरफ की नदियों पर पड़ सकता है। पोइकू नदी तिब्बत के ग्लेशियर से निकलती है। फिर सीमा पार करके नेपाल में दाखिल होती है और वहां भोटेकोशी कही जाती है, इसी की सहायक नदी ल्हेंदे में बाढ़ आई। एक बात और है- चीन के मुताबिक, पहले भूकंप आया और फिर ग्लेशियर टूटा। जबकि नेपाल सहित दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि पहले ग्लेशियर टूटा, जिससे भूकंप जैसा झटका महसूस हुआ। सवाल-5: ग्लेशियर टूटने से नेपाल में इतनी भीषण तबाही कैसे आई?
जवाबः पूरी घटना 3 स्टेप में समझिए…. 1. ग्लेशियर टूटा: 26 अगस्त की सुबह करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर करीब 2000 फीट का ग्लेशियर टूटा और 4 हजार फीट नीचे गिर गया। 2: नदी में पानी जमा हुआ: सुबह करीब 8:37 बजे पिघला ग्लेशियर अपने साथ चट्टानों और मलबे को लेकर ल्हेंदे नदी से टकराया। इससे ल्हेंदे नदी पर एक अस्थायी बांध बन गया और पीछे पानी जमा होने लगा। 3. नदी का बांध टूटने से सैलाब बह चला: सुबह करीब 9 बजे बढ़ते पानी के दबाव से नदी का बांध टूटा, तो एक विशाल सैलाब बनकर निचले इलाकों की तरफ बह चला। आगे भोटे कोशी और त्रिशुली नदी में मलबे वाली बाढ़ आ गई। नेपाल के रसुवा से नुवाकोट, धादिंग होते हुए चितवन तक भयावह बाढ़ का असर हुआ। रसुवा में करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुईं। बाढ़ धादिंग जिले के गल्छी तक पहुंची और आगे मुग्लिन की ओर बढ़ने की चेतावनी दी गई। खतरा अभी टला नहीं है। वैज्ञानिकों का कहना है कि नेपाल-चीन बॉर्डर के पास नदी में अब भी एक मलबे का अवरोध जमा है, जो किसी भी वक्त टूटकर सैलाब की एक दूसरी लहर छोड़ सकता है। जिस त्रिशुली नदी में यह बाढ़ आई है वह आगे नारायणी नदी से मिलती है। यह भारत के बिहार तक आती है, जहां इसे गंडक नदी कहते हैं। इसे बिहार और यूपी के इलाके भी हाई अलर्ट पर रखे गए हैं। ——— ये वीडियो भी देखिए… 2000 फीट चौड़ा ग्लेशियर टूटा, बिना भूकंप कांपने लगी धरती:देखिए नेपाल की तबाही का शुरू से आखिर तक एक-एक सीन 26 अगस्त, सुबह 8:30 बजे। नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर मौसम साफ था। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले 30 मिनट में क्या होने वाला है। शुरुआत से आखिर तक नेपाल की तबाही का एक-एक सीन, वीडियो देखिए…

₹15000 से कम में Realme का नया फोन लॉन्च, 6500mAh बैटरी और 120Hz डिस्प्ले समेत मिलेंगे ये फीचर्स

Realme C100i को गुरुवार को भारत में टेक कंपनी के लेटेस्ट बजट C-सीरीज स्मार्टफोन के तौर पर लॉन्च किया गया है। यह हैंडसेट अब देश में एक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सिंगल RAM और स्टोरेज कॉन्फिगरेशन और दो कलर ऑप्शन में बिक्री के लिए उपलब्ध है। इस फोन में ऑक्टा-कोर Unisoc T7000 सीरीज चिपसेट, 6,500mAh की बैटरी और 5MP का फ्रंट कैमरा दिया गया है। इसके अलावा, Realme C100i में 6.75-इंच का LCD टचस्क्रीन है, जो 120Hz तक के रिफ्रेश को सपोर्ट करता है। इसमें सिक्योरिटी के लिए साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट स्कैनर भी दिया गया है। अब चलिए फोन के स्पेसिफिकेशन्स और कीमत के बारे में जानते हैं।

भारत में Realme C100i की कीमत और उपलब्धता

भारत में Realme C100i के 4GB RAM और 64GB स्टोरेज वाले एकमात्र कॉन्फिगरेशन की कीमत ₹14,999 तय की गई है। कंपनी की ओर से पात्र छात्रों को 250 रुपये का कूपन डिस्काउंट भी दिया जा रहा है।

यह हैंडसेट अभी भारत में Flipkart और Realme India के ऑनलाइन स्टोर पर बिक्री के लिए उपलब्ध है। Realme C100i दो कलर Midnight Black और Skyline Silver ऑप्शन में पेश किया गया है।

Realme C100i के स्पेसिफिकेशन्स और फीचर्स

Realme C100i एक डुअल-सिम स्मार्टफोन है, जो Android 16 पर आधारित Realme UI के साथ आता है। इस फोन में 6.75-इंच का HD+ (720 x 1,570 पिक्सल) LCD टचस्क्रीन है, जिसमें 120Hz तक का रिफ्रेश रेट, 240Hz तक का टच सैंपलिंग रेट, 100% sRGB, 16.7 मिलियन कलर्स, 254 ppi पिक्सल डेंसिटी, 900 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस, 83% DCI-P3 कलर गैमट और Panda MN228 कवर ग्लास जैसे फीचर्स हैं। कंपनी का दावा है कि यह फोन धूल और पानी के छींटों से बचाव के लिए IP64 रेटिंग के साथ आता है।

परफॉर्मेंस के लिए Realme C100i में ऑक्टा-कोर Unisoc T7250 चिपसेट दिया गया है, जो 1.8GHz की पीक क्लॉक स्पीड देता है। फोन में ARM Mali-G57 GPU, 4GB LPDDR4x RAM और 64GB UFS 2.2 ऑनबोर्ड स्टोरेज भी है, जिसे माइक्रो-SD कार्ड के जरिए बढ़ाया जा सकता है।

कैमरे की बात करें तो, Realme C100i के पिछले हिस्से में ऑटोफोकस और 78-डिग्री फील्ड ऑफ व्यू वाला 8MP (f/2.0) का सिंगल कैमरा है। इसमें सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 5MP (f/2.2) का फ्रंट कैमरा भी दिया गया है। यह हैंडसेट 1080p/30 fps तक वीडियो रिकॉर्ड करने में सक्षम है।

Realme C100i में 6,500mAh की बैटरी दी गई है, जो 15W वायर्ड चार्जिंग को सपोर्ट करती है। कनेक्टिविटी के लिए इस फोन में 4G LTE, Wi-Fi 5, Bluetooth 5.2, USB Type-C पोर्ट, 3.5mm ऑडियो जैक, GPS, GLONASS, BDS, Galileo और QZSS का सपोर्ट भी मिलता है। इसमें प्रॉक्सिमिटी सेंसर, एम्बिएंट लाइट सेंसर, ई-कंपास, एक्सेलेरोमीटर और सिक्योरिटी के लिए साइड-माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर जैसे ऑनबोर्ड सेंसर दिए गए हैं। इस हैंडसेट का साइज 166.5×78.2×8.7mm है और वजन लगभग 210 ग्राम है।

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Video: तिब्बत में ईशा फाउंडेशन के 80 श्रद्धालु भी लापता, इनके बारे में बात करते हुए भावुक हुए सद्गुरु! बोले- हमें भी जाने दो

Nepal flood videos: तिब्बत और नेपाल की सीमा पर आई भीषण बाढ़ पर आध्यात्मिक गुरु एवं ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने गहरा दुख जताते हुए स्थिति को बेहद गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि जिस स्तर पर तबाही हुई है, उसे देखते हुए अभी नुकसान का सही आंकड़ा सामने आना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि उनके संगठन से जुड़ा कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया एक समूह बाढ़ की चपेट में आया, जिसमें 80 लोग शामिल थे। नेपाल में हुई त्रासदी पर बोलते हुए सद्गुरु भावुक हो गए। तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित गैर-लाभकारी संगठन ईशा फाउंडेशन ने दावा किया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं जो आव्रजन केंद्र पर थे।

सद्गुरु ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक वीडियो पोस्ट कर बताया कि वह खुद घटनास्थल तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन सभी फोन और टेलीकम्युनिकेशन सेवाएं बंद हैं। भूस्खलन की वजह से रास्ते भी बाधित हैं। ऐसे में प्रभावित इलाके में संपर्क करना बेहद मुश्किल हो गया है। वह भारतीय, चीनी और अमेरिकी दूतावासों के जरिए वहां पहुंचने की अनुमति लेने की कोशिश कर रहे हैं ताकि राहत और बचाव के काम में मदद की जा सके।

सद्गुरु ने क्या बताया?

सद्गुरु ने कहा, “हमारे ग्रुप में से एक एस3 ग्रुप जिससे हम सागर में मिले थे। फिर दोबारा तब मिले जब हम ऊपर ट्रेकिंग कर रहे थे। वे नीचे आ रहे थे। इस ग्रुप में 80 लोग शामिल थे जिनमें 34 पुरुष और 46 महिलाएं थीं। इनमें से 22 लोग अमेरिका, 12 कनाडा, 11 ऑस्ट्रेलिया, 9 यूनाइटेड किंगडम, 4 जर्मनी, 3 फ्रांस, 3 नेपाल, 2 नीदरलैंड, 2 न्यूजीलैंड, 2 सिंगापुर और 2 स्पेन से थे। फिनलैंड, हंगरी, इजरायल, लिथुआनिया, फिलीपींस, पुर्तगाल, रूस और दक्षिण अफ्रीका से एक-एक व्यक्ति ग्रुप में शामिल था।”

सद्गुरु ने आगे बताया कि समूह जब वापसी के दौरान इमिग्रेशन सेंटर पहुंचा, तब तक सब कुछ सामान्य था। बुधवार सुबह करीब 9:05 बजे समूह के लीडर ने संदेश भेजकर बताया था कि वे इमिग्रेशन सेंटर पहुंच चुके हैं। इसके कुछ ही मिनट बाद करीब 9:14 बजे अचानक यह भयावह आपदा आई। इसके बाद समूह के सदस्यों से संपर्क टूट गया। सद्गुरु ने कहा कि उनके नेपाल के फोन नंबर भी सक्रिय नहीं हुए, जिससे चिंता और बढ़ गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईशा फाउंडेशन से जुड़े 77 तीर्थयात्री और तीन स्वयंसेवक लापता बताए जा रहे हैं।

शहर का एक हिस्सा पानी और मलबे में बह गया

उन्होंने कहा कि जिस जगह यह घटना हुई, वहां इमारतें और शहर का एक हिस्सा तक पानी और मलबे में बह गया। इसलिए फिलहाल यह कहना मुश्किल है कि कितने लोग सुरक्षित हैं और कितने लापता हैं। उन्होंने बताया कि उनके समूह के साथ वॉलंटियर और एक डॉक्टर भी मौजूद थे। कई नेपाली गाइड भी यात्रा दल के साथ थे और उनके परिवार प्रभावित इलाके में रहते हैं। ऐसे में सिर्फ तीर्थयात्रियों की ही नहीं, बल्कि स्थानीय परिवारों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी हुई है।समाचार

सद्गुरु ने कहा कि अलग-अलग रिपोर्टों में नेपाल की तरफ सैकड़ों लोगों के लापता होने की बात सामने आ रही है। जबकि तिब्बत की तरफ भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। ताजा अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों के मुताबिक, नेपाल और चीन के तिब्बत क्षेत्र में मिलाकर सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। मृतकों की संख्या 160 से अधिक हो चुकी है।

बाढ़ से पहले भूकंप आया था?

शुरुआत में कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि बाढ़ से पहले भूकंप आया था। न्यूज एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, हालांकि बाद में वैज्ञानिक विश्लेषण में संकेत मिले कि आपदा की वजह हिमालयी क्षेत्र में बर्फ और चट्टान के बड़े हिस्से का खिसकना या ग्लेशियर से जुड़ी घटना हो सकती है। इसके बाद नदी में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा पहुंचा। फिर देखते ही देखते तेज फ्लैश फ्लड ने तबाही मचा दी।

पानी की रफ्तार इतनी तेज थी कि रास्ते, पुल, मकान और दूसरी प्रॉपर्टी इसकी चपेट में आ गईं। राहत एवं बचाव दल के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। कई जगहों पर सड़कें टूटने और पानी का स्तर बढ़ने के कारण पहुंचना मुश्किल है।

लापता लोगों के परिजन परेशान

सद्गुरु ने कहा कि इस मुश्किल समय में सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों के परिवारों की है। उन्होंने बताया कि संबंधित देशों के दूतावासों को घटना की जानकारी दी गई है। प्रभावित परिवारों तक भी संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि वह और उनकी टीम हरसंभव तरीके से मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।

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उनका कहना है कि इस समय सबसे जरूरी काम है कि किसी भी तरह प्रभावित क्षेत्र तक पहुंच बनाई जाए और वहां मौजूद लोगों की स्थिति का पता लगाया जाए। न्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय जल्द ही राज्य सचिवालय में मंत्रियों और अधिकारियों के साथ नेपाल में फंसे तमिल लोगों को बचाने के लिए एक इमरजेंसी बैठक करेंगे।

Ankit Balyan Shot Dead: मशहूर हरियाणवी गायक को जिम के बाहर मार दी गईं 15 गोलियां, कौन थे अंकित बालियान?

Ankit Balyan Shot Dead: मशहूर यूट्यूबर और हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान की बुधवार (26 अगस्त) शाम उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक जिम के बाहर कुछ अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि शामली के शहर कोतवाली इलाके में शाम को अंकित बालियान जब जिम से बाहर निकले, तभी कुछ अज्ञात हमलावरों ने उन्हें गोली मार दी। इससे उनकी मौत हो गई। बताया जा रहा है कि सिंगर पर करीब 15 से 18 राउंड फायरिंग की गई।

पुलिस अधीक्षक (SP) नरेंद्र प्रताप सिंह ने पत्रकारों को बताया कि सूचना मिलने पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। फिर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस की टीमें बनाई गई हैं। हत्या के पीछे की वजह का अभी तक पता नहीं चल पाया है। पुलिस के मुताबिक, हमलावर दो मोटरसाइकिलों पर आए और बालियान पर कई राउंड गोलियां चलाईं। इस दौरान उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

अंकित बालियान की हत्या कैसे हुई?

मौके पर मौजूद एक शख्स ने घटनाक्रम के बारे में बताया कि बालियान जिम में कसरत करने के बाद जैसे ही बाहर निकले उनपर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू हो गई। चश्मदीद ने कहा, “अंकित एक्सरसाइज के बाद जिम से बाहर आए थे। फायरिंग शुरू होते ही हम बाहर भागे और उन्हें गोली लगने से घायल पाया।

अंकित पिछले एक साल से रोज इस जिम में आ रहे थे। वह शाम करीब 4 से 4:15 बजे के बीच जिम पहुंचे थे। कम से कम 10 से 15 राउंड फायरिंग हुई। हमने चार लोगों को भागते हुए देखा। आरोपी पैदल थे और उनके हाथों में पिस्तौल थी।” इस बयान से पता चलता है कि हमलावर हथियारों से लैस थे। गोलीबारी के तुरंत बाद वे मौके से भाग गए।

हत्या के पीछे की असल वजह अभी साफ नहीं है। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की जांच कर रही है। उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर हत्या से जुड़ी परिस्थितियों का पता चल जाएगा। जांचकर्ता हमलावरों की पहचान करने और घटनाक्रम को समझने के लिए CCTV फुटेज की जांच कर रहे हैं। वे यह पता लगाने की भी कोशिश कर रहे हैं कि हमलावर कहां से आए थे। वे मौके तक कैसे पहुंचे और भागने के लिए उन्होंने किस रास्ते का इस्तेमाल किया।

अखिलेश का बीजेपी पर हमला

समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस वारदात को लेकर राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) की अगुवाई वाली सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रदेश का पूरा जाट समुदाय इसे खुद पर प्रहार मानकर आक्रोशित है। सपा प्रमुख ने बालियान की हत्या को बेहद निंदनीय बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति शून्य पर पहुंच गई है। उन्होंने हत्या की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के पहलू से भी जांच किए जाने की मांग की।

उन्होंने देर रात X पर कहा, “उप्र की कानून-व्यवस्था को शून्य करते हुए जिस प्रकार शामली में लोकप्रिय गायक अंकित बालियान की 18 राउंड गोलियां चलाकर बेरहमी से हत्या की गई है उससे पूरे क्षेत्र में भय व्याप्त हो गया है।”

यादव ने इसी पोस्ट में आगे कहा, ”मृतक की दुखी मां के द्वारा अपने बेटे के शव को गोद में रखकर सड़क पर ही शोकाकुल होने का समाचार हृदयविदारक है। जाट समाज ने हमलावारों की गिरफ्तारी को लेकर सड़क पर ही अपनी मांग बुलंद की है। उत्तर प्रदेश का समस्त जाट समुदाय इसे अपने ऊपर प्रहार मानकर आक्रोशित है।” उन्होंने कहा, ”इस हत्याकांड की जांच राजनीतिक प्रतिद्वंदिता के दृष्टिकोण से भी किये जाने की मांग उठ रही है। बेहद निंदनीय!”

पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे बालियान?

यह अटकलें भी लगाई जा रही थीं कि अंकित बालियान आगामी पंचायत चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे। हालांकि, अधिकारियों या उनके सहयोगियों की ओर से तत्काल इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, और न ही यह स्पष्ट हो सका कि क्या यह उनकी हत्या की वजह हो सकती है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि गोलीबारी की सूचना मिलने के बाद पुलिस तुरंत घटनास्थल पर पहुंची। उन्होंने कहा, “शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच की जा रही है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें गठित की गई हैं।”

पुलिस के अनुसार, हमलावर दो मोटरसाइकिलों पर आए और बालियान पर कई गोलियां चलाईं जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। अधिकारियों ने बताया कि हमलावरों की पहचान के लिए इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच की जा रही है।

कौन थे अंकित बालियान?

हरियाणवी सिंगर अंकित बालियान के यूट्यूब चैनल के 3.66 लाख से अधिक सब्सक्राइबर थे। वह अपने वीडियो में विभिन्न सहयोगियों के साथ गायक और कलाकार के रूप में नजर आते थे। उनके कई वीडियो में बंदूक, हथियार और SUV का इस्तेमाल दिखाया गया था। संगीत के अलावा बालियान ने हरियाणवी पॉप वीडियो, पॉडकास्ट और जमीनी स्तर के व्लॉग के जरिए अपनी मजबूत डिजिटल मौजूदगी बनाई थी।

उनका कंटेंट अक्सर क्षेत्रीय गर्व, देसी पहचान, ग्रामीण जीवन और युवा संस्कृति पर केंद्रित होता था। उनके कई गानों में बंदूक संस्कृति, स्थानीय राजनीति और बहादुरी जैसे विषय शामिल थे। एक गायक और क्रिएटर के तौर पर बालियान ने मासूम शर्मा, राजू पंजाबी और आशु ट्विंकल जैसे हरियाणवी कलाकारों के साथ भी काम किया।

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बालियान ने राजनीतिक पॉडकास्ट और स्थानीय व्लॉगिंग में भी हाथ आजमाया। उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा के राजनेताओं और समुदाय के प्रमुख लोगों के इंटरव्यू लिए। उनके लोकप्रिय गानों में ‘भारी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान’, ‘112 NE’, ‘गोली के बारूद’, ‘जाट जाटनी’, ‘अगला जनम जाट’, ‘संविधान’, ‘मोदी बरगा रुतबा’, ‘जाट धर्मेंद्र की तरिया’, ‘एक खटोला जेल के भीतर’, ‘वेट’, ‘सिस्टम’ और ‘राइफलें’ शामिल थे।

Nepal-China Border Floods: नेपाल-चीन बॉर्डर पर अचानक आई बाढ़ में अब तक 160 लोगों की मौत, 133 भारतीय समेत 750 से अधिक लापता

Nepal-China Border Floods Update: तिब्बत की सीमा के पास मध्य नेपाल के जिलों में बुधवार (27 अगस्त) सुबह अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई। अचानक आई बाढ़ में करीब 160 लोगों की मौत हो गई तथा 133 भारतीय नागरिक समेत 750 से अधिक लोग लापता हैं। बाढ़ से शहरों और गांवों में तबाही हुई। कई महत्वपूर्ण पुल बह गए। कम से कम एक दर्जन हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट तबाह हो गईं। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने संसद को बताया कि स्थानीय समयानुसार सुबह 8:37 बजे तिब्बत इलाके में भूकंप आया। उसके तीन मिनट बाद अचानक बाढ़ आने की खबर मिली, जिससे पता चलता है कि भूकंप के झटकों की वजह से हिमनद फटा होगा और उसी से बाढ़ आई होगी।

अधिकारियों ने बताया कि भोटे कोशी नदी में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ा, जिससे तिब्बत से लगे रसुवा और धादिंग जिले प्रभावित हुए। नेपाल-तिब्बत सीमा पर स्थित लेंडे नदी में पानी बढ़ने और चट्टानें खिसकने के कारण रसुवा जिले के सीमावर्ती शहर तिमुरे में भोटे कोशी के जरिए त्रिशूली नदी में भीषण बाढ़ आ गई। इसके बाद बाढ़ का पानी नदी के रास्ते नुवाकोट, चितवन, गोरखा, तनहुं और नवलपरासी पूर्व जैसे अन्य जिलों में फैल गया तथा राजधानी काठमांडू से लगभग 70 से 200 किलोमीटर दूर तक के इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया।

500 लोग लापता

नेपाल सरकार ने कहा कि करीब 500 लोग लापता हैं। जबकि चीन के सरकारी सीजीटीएन न्यूज चैनल ने बताया कि सीमा के चीनी हिस्से में तीन लोगों की मौत हुई और 265 लोग लापता हैं। प्रभावित इलाकों के वीडियो में कीचड़, चट्टानों और मलबे से भरा पानी तेज रफ्तार से सीमावर्ती क्षेत्र में बहता दिखाई दिया। तेज बहाव को इमारतों और वाहनों की ओर बढ़ते देख लोग भागते नजर आए।

सामने आए खौफनाक वीडियो

एक वीडियो में चार मंजिला इमारत को तेज बहाव में बहते देखा गया। जबकि एक अन्य वीडियो में रसुवा में एक कार बाढ़ के तेज पानी में बहती नजर आई। एक और वीडियो में पानी के जबरदस्त दबाव से एक लंबा पुल दो हिस्सों में टूटता दिखाई दिया। एक अन्य वीडियो में तेज बहाव के कारण पुल ढहते और बहते नजर आए। धादिंग जिले के एक वीडियो में बाढ़ का पानी एक पुल से टकराया, जिसके बाद वह ढहकर बह गया। एक अन्य वीडियो में कीचड़ भरा पानी तेजी से एक पुल को अपनी चपेट में लेता और करीब 30 सेकंड में उसे बहाकर ले जाता नजर आया।

133 भारतीय लापता

अधिकारियों ने बताया कि प्रभावित इलाकों के अलग-अलग हिस्सों से लगभग 100 लोगों को बचाया गया है। इनमें से 30 लोगों का इलाज काठमांडू के त्रिभुवन विश्वविद्यालय शिक्षण अस्पताल में चल रहा है। अधिकारियों ने बताया कि लापता हुए करीब 500 लोगों में कम से कम 133 भारतीय और 37 अप्रवासी भारतीय (NRI) शामिल हैं। इनमें से कम से कम 50 भारतीय कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए तीर्थयात्री हैं। गैर-लाभकारी संस्था ईशा फाउंडेशन ने बताया कि उसके 77 सदस्य लापता हैं, जो एक आव्रजन केंद्र पर मौजूद थे। उन्होंने बताया कि 495 लोग सुरक्षित लौट आए हैं। बाद में नेपाल सरकार ने कहा कि इस आव्रजन केंद्र के कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है।

तमिलनाडु के अधिकारियों ने बताया कि लापता 37 पर्यटक तंजावुर के रहने वाले हैं। भारतीयों और अप्रवासी भारतीयों के अलावा लापता हुए बाकी पर्यटक दो दर्जन से ज्यादा देशों से हैं, जिनमें अमेरिका, मलेशिया, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड शामिल हैं। इसके अलावा, विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने प्रतिनिधि सभा को बताया कि अलग-अलग जगहों पर 80 सुरक्षाकर्मी लापता हो गए हैं, जिनमें नेपाल सेना के 44 जवान भी शामिल हैं।

भारत ने मदद के लिए बढ़ाया हाथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के अपने समकक्ष बालेंद्र शाह से फोन पर बात की। उन्हें हालात से निपटने के लिए हरसंभव मानवीय मदद का भरोसा दिलाया। नई दिल्ली ने पड़ोसी देश को राहत सामग्री की पहली खेप भेज दी है। काठमांडू में भारतीय दूतावास ने अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों की मदद और जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए।

X पर एक पोस्ट में कहा गया है कि लोग +977 985 131 6807 या +977 970 910 7500 पर संपर्क कर सकते हैं। भारतीय दूतावास ने X पर एक और पोस्ट में कहा कि नेपाल में अचानक आई बाढ़ से प्रभावित भारतीय नागरिकों के शीघ्र बचाव और उन्हें राहत पहुंचाने के लिए वह नेपाल सरकार के संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। साथ ही, नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बचाव और राहत कार्यों को और मजबूत किया जा रहा है।

टोल-फ्री नंबर जारी

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने भी मदद के लिए टोल-फ्री आपातकालीन नंबर 1234, हॉटलाइन 1144 और पर्यटक पुलिस का नंबर 9851289445 जारी किया है। बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने भी हेल्पलाइन नंबर 0086 185 1428 4905 जारी किया है, जिस पर व्हाट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया जा सकता है। उत्तर प्रदेश और केरलम समेत कई अन्य भारतीय राज्यों ने भी हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि नेपाल में फंसे लोगों में उनके राज्य के निवासी भी हो सकते हैं।

19 पुल बह गए

‘काठमांडू पोस्ट’ के अनुसार, भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ से नुवाकोट के बेत्रावती को रसुवा के रसुवागढ़ी सीमा चौकी से जोड़ने वाली 42 किलोमीटर लंबी सड़क बह गई। सरकार ने बाद में बताया कि बुधवार को अचानक आई बाढ़ में 19 पुल बह गए। हालात का जायजा लेने के लिए नेपाल के प्रधानमंत्री शाह की अध्यक्षता में हुई एक आपात बैठक के बाद प्रभावित इलाकों में बचाव और राहत कार्य के लिए नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया।

खोज और बचाव अभियान जारी

सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, शाह ने जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना और उनके परिवारों के प्रति सहानुभूति जताई। साथ ही इन दुखद घटनाओं में घायल हुए लोगों के जल्द ठीक होने की कामना की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित लोगों को हर जरूरी मदद देने का निर्देश दिया। नेपाल सेना ने अचानक आई बाढ़ के बाद खोज और बचाव अभियान चलाने के लिए 12 हेलीकॉप्टर तैनात किए।

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नेपाल सेना के एक बयान के अनुसार, रसुवा जिले के स्याफ्रुबेसी से छह, मैलुंग से दो और धुंचे से चार लोगों को बचाया गया। बयान में कहा गया कि आपात चिकित्सा बचाव दल से लैस सेना का एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर भी त्रिशूली के जिला अस्पताल की ओर भेजा गया है। प्रधानमंत्री शाह ने बाढ़ प्रभावित देश में बचाव एवं राहत कार्यों के लिए हरसंभव मानवीय सहायता की पेशकश करने और एकजुटता व्यक्त करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का देर शाम आभार व्यक्त किया।

हर 1,000 व्यूज पर ₹60! इस चीनी प्लेटफॉर्म ने क्रिएटर्स का खींचा ध्यान, YouTube को देगा कड़ी टक्कर

चीनी वीडियो-शेयरिंग प्लेटफॉर्म Bilibili अपने घरेलू बाजार से बाहर तेजी से विस्तार कर रहा है। ऐसे में एक खास कमाई के आंकड़े ने दुनिया भर के क्रिएटर्स का ध्यान अपनी ओर खींचा है। X पर RT की एक पोस्ट के अनुसार, Bilibili क्रिएटर्स को हर 1,000 व्यूज के लिए लगभग $0.70 (करीब 60 रुपये) का भुगतान कर रहा है। अगर यह दावा सही है, तो यह कदम प्लेटफॉर्म को कंटेंट क्रिएटर्स को आकर्षित करने में मदद कर सकता है क्योंकि यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर YouTube को टक्कर दे रहा है। हालांकि, कंपनी ने खुद इस पेमेंट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

Bilibili की रिपोर्टेड पेमेंट

यह जानकारी RT के जरिए सामने आई, जिसने Bilibili के क्रिएटर प्रोग्राम पर चर्चा करते हुए यह आंकड़ा बताया। अगर यह सही है, तो एक मिलियन व्यूज पाने वाले क्रिएटर्स टैक्स और प्लेटफॉर्म के किसी भी एडजस्टमेंट से पहले लगभग $700 कमा सकते हैं। हालांकि, Bilibili के ऑफिशियल क्रिएटर प्रोग्राम डॉक्यूमेंटेशन में किसी तय CPM या RPM का जिक्र नहीं है।

इसके बजाय, प्लेटफॉर्म का कहना है कि कमाई ऑडियंस की लोकेशन, एडवर्टाइजर की डिमांड, कंटेंट कैटेगरी और मॉनेटाइजेशन प्रोडक्ट्स जैसी चीजों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। इसमें यह भी बताया गया है कि अनुमानित रेवेन्यू को इनवैलिड ट्रैफिक, रिफंड, फ्रॉड का पता लगाने, टैक्स और पॉलिसी लागू करने के आधार पर एडजस्ट किया जा सकता है।

मॉनेटाइजेशन के लिए जरूरी शर्तें

Bilibili के क्रिएटर प्रोग्राम की पॉलिसी के अनुसार, मॉनेटाइजेशन के लिए अप्लाई करने से पहले क्रिएटर्स के पास कम से कम 100 सब्सक्राइबर और 2,000 वैलिड पब्लिक व्यूज होने चाहिए। हालांकि, इन शर्तों को पूरा करने के बाद भी मोनेटाइजेशन मिलना तय नहीं है। क्योंकि प्लेटफॉर्म हर चैनल की जांच करता है। इसमें कंटेंट ओरिजिनल है या नहीं, कॉपीराइट नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, कम्युनिटी गाइडलाइंस का उल्लंघन तो नहीं हुआ और अकाउंट की स्थिति जैसी चीजें देखी जाती हैं।

यह प्लेटफॉर्म खरीदे गए व्यूज, फेक सब्सक्राइबर, ऑटोमेटेड एंगेजमेंट और दूसरे तरह के बनावटी ट्रैफिक पर भी रोक लगाता है। इसके अलावा, क्रिएटर्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके द्वारा अपलोड किए गए सभी कंटेंट के मालिकाना हक उनके पास हों या उन्हें उस कंटेंट से कमाई करने की अनुमति मिली हो।

Bilibili का ग्लोबल विस्तार जारी है

यह पेमेंट की जानकारी तब सामने आई है जब Bilibili अपने इंटरनेशनल प्लान को तेजी से आगे बढ़ा रही है। सेमाफोर (Semafor) की एक पुरानी रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी ने अपना इंटरनेशनल ऐप फिर से लॉन्च किया है। इसके अलावा, वह इंग्लिश भाषा की वेबसाइट बना रही है और अमेरिका, यूरोप, जापान और लैटिन अमेरिका जैसे मार्केट में कम्युनिटी मैनेजर की भर्ती शुरू कर दी है।

बता दें कि Bilibili खुद को ऐसे क्रिएटर्स के लिए एक डेस्टिनेशन के तौर पर भी पेश कर रही है, जो नए ऑडियंस तक पहुंचना चाहते हैं और साथ ही कमाई का नए जरिया बनाना चाहते हैं। विज्ञापन के अलावा, कंपनी एक मार्केटप्लेस भी बना रही है जो स्पॉन्सरशिप के मौकों के लिए क्रिएटर्स को ब्रांड्स से जोड़ेगा।

हालांकि, प्रति 1,000 व्यूज पर $0.70 के पेमेंट की जानकारी ने काफी दिलचस्पी पैदा की है, लेकिन क्रिएटर्स को यह ध्यान रखना चाहिए कि Bilibili ने अभी तक आधिकारिक तौर पर स्टैंडर्ड पेमेंट रेट की पुष्टि नहीं की है। फिलहाल, प्लेटफॉर्म की पब्लिश्ड पॉलिसी में सिर्फ यह बताया गया है कि कमाई कई बातों पर निर्भर करेगी और जैसे-जैसे इसका ग्लोबल क्रिएटर इकोसिस्टम विकसित होगा, इसमें बदलाव हो सकता है।

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