हॉलीवुड सिंगर बोलीं- CJP को अमेरिका से फंडिंग मिल रही:भारत में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे; मोदी समर्थकों से एकजुट होने की अपील

हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन ने कहा कि कॉकरोच जनता पार्टी को अमेरिका से फंडिंग मिल रही है। उन्होंने कहा कि PM नरेंद्र मोदी के विरोधी अमेरिकी डोनर्स अभिजीत दीपके को पैसा भेज रहे हैं। उनके मुताबिक इस पैसे का इस्तेमाल भारत में अशांति फैलाने और सरकार के काम में रुकावट डालने के लिए किया जा रहा है। मिलबेन ने X पर पोस्ट कर भारत के युवाओं से आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने लिखा, “यह चुप रहने का समय नहीं है।” मिलबेन बोलीं- PM मोदी बाहरी ताकतों के आगे नहीं झुकेंगे मिलबेन ने दावा किया कि कुछ US डोनर्स दुनियाभर के रूढ़िवादी नेताओं को निशाना बनाने का एक तय तरीका अपनाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘वे उस देश से अमेरिका में पढ़े किसी व्यक्ति को ढूंढते हैं, उसे कट्टर बनाते हैं, वापस देश भेजते हैं और अराजकता व तबाही फैलाने के लिए फंड करते हैं।’ मिलबेन ने प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक सफर का बचाव करते हुए कहा कि वह 25 साल से सरकार में रहकर लोगों की सेवा कर रहे हैं और 12 साल से प्रधानमंत्री हैं। वह अमेरिका से आने वाली उन ताकतों के आगे नहीं झुकेंगे। मिलबेन ने 2023 में मोदी के दौरे पर राष्ट्रगान गाया था मैरी मिलबेन अमेरिकी सिंगर और एक्ट्रेस हैं। भारत में उन्हें 2022 में देश की आजादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर पहचान मिली थी। जून 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान उन्होंने भारत का राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ गाया था। इस दौरान उन्होंने मोदी के पैर भी छुए थे, जिसके बाद भारत में उनकी काफी चर्चा हुई। अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी का समर्थन किया था। इसके बाद उन्होंने दिसंबर 2023 में मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की जीत को मोदी की लोकप्रियता से जोड़ा। मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने पर भी मिलबेन ने मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी।

हॉलीवुड सिंगर बोलीं- CJP को अमेरिका से फंडिंग मिल रही:भारत में अशांति फैलाने की कोशिश कर रहे; मोदी समर्थकों से एकजुट होने की अपील

हॉलीवुड सिंगर मैरी मिलबेन ने कॉकरोच जनता पार्टी पर अमेरिका से फंडिंग मिलने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि PM नरेंद्र मोदी के विरोधी अमेरिकी डोनर्स अभिजीत दीपके को पैसा भेज रहे हैं। उनके मुताबिक इस पैसे का इस्तेमाल भारत में अशांति फैलाने और सरकार के काम में रुकावट डालने के लिए किया जा रहा है। मिलबेन ने X पर पोस्ट कर भारत के युवाओं से आवाज उठाने की अपील की। उन्होंने लिखा, ‘यह चुप रहने का समय नहीं है।’ मिलबेन बोलीं- PM मोदी बाहरी ताकतों के आगे नहीं झुकेंगे मिलबेन ने दावा किया कि फंडिंग करने वाले कुछ अमेरिकी दुनियाभर के दक्षिणपंथी नेताओं को निशाना बनाने का एक तय तरीका अपनाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया, ‘ऐसे लोग किसी देश में अमेरिका से पढ़े व्यक्ति को ढूंढते हैं, उसे कट्टर बनाते हैं, वापस उसके देश भेजते हैं और अराजकता व तबाही फैलाने के लिए फंड करते हैं।’ मिलबेन ने प्रधानमंत्री मोदी के राजनीतिक सफर का बचाव करते हुए कहा कि वह 25 साल से सरकार में रहकर लोगों की सेवा कर रहे हैं और 12 साल से प्रधानमंत्री हैं। वह अमेरिका से आने वाली ऐसी ताकतों के आगे नहीं झुकेंगे। 4 मौकों पर मिलबेन ने मोदी को सपोर्ट किया 1. किसान आंदोलन पर: मिलबेन ने फरवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान मोदी सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्हें किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के मोदी के विजन पर भरोसा है। 2. मणिपुर हिंसा पर: अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी का समर्थन किया था। उन्होंने उस समय कहा था कि भारत को अपने नेता पर भरोसा है और मोदी मणिपुर के लोगों की आजादी के लिए लड़ेंगे। 3. BBC की गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर: मिलबेन ने BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की आलोचना करते हुए मोदी सरकार का समर्थन किया था। 2023 में आई इस डॉक्यूमेंट्री में 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। 4. CAA कानून पर: मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने पर भी मिलबेन ने मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी। भारत में भी CJP फंडिंग पर उठे थे सवाल दीपके ने कहा था- CJP का खर्च दोस्त मिलकर उठाते हैं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। CJP के आंदोलनों के खर्च पर दीपके ने कहा था कि वह और उनके दोस्त मिलकर पैसा जुटाते हैं। उनके मुताबिक, संगठन को किसी बाहरी डोनर या बड़े उद्योगपति से आर्थिक मदद नहीं मिली है। आगे उन्होंने क्राउडफंडिंग से पैसा जुटाने की योजना भी बताई थी। विदेशी फंडिंग के आरोपों पर दीपके ने गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया था। उनका कहना था कि अगर आंदोलन में विदेशी पैसा आया है, तो इसकी जांच और रोकथाम की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है। 10 अक्टूबर को हुए दिल्ली प्रदर्शन पर हार्वर्ड के दो बयान दिल्ली में 10 अक्टूबर को हुए प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई पर हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्रों के दो समूहों ने अलग-अलग बयान जारी किए। पहले समूह ने पुलिस पर प्रदर्शनकारियों के साथ बर्बरता, गैरकानूनी हिरासत और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाया। 12 अक्टूबर को जारी इस बयान पर 100 पूर्व छात्रों ने हस्ताक्षर किए थे। वहीं, बुधवार को जारी दूसरे बयान पर 44 लोगों के हस्ताक्षर हैं। खुद को ‘हार्वर्ड कम्युनिटी’ बताने वाले इस समूह ने भारत की संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ कथित अभियान पर चिंता जताई। इसमें चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, मुख्य न्यायाधीश के कार्यालय और संसद के खिलाफ नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिशों का जिक्र किया गया। ———————— यह खबर भी पढ़ें… दिल्ली में प्रदर्शन पर वर्ल्ड मीडिया: अल-जजीरा ने लिखा- सरकार के लिए सबसे गंभीर चुनौती, NYT बोला- विरोध को दबाना मुश्किल भारत में SIR को लेकर विरोध-प्रदर्शन जारी हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

Kawasaki Versys 900 revealed

Kawasaki Versys 900 revealed
Kawasaki Versys 900 SE in Red/Grey colour.

Last week, we reported that Kawasaki UK (and later USA) had teased the arrival of a new Versys, the brand’s adventure tourer series. We had also postulated that it’s likely to be based on the sport-naked, the Z900. Kawasaki has just revealed the Versys 900 and 900 SE and it is based on the Z900, with a few touring-centric additions.

  1. Shares the Z900’s 948cc in-line four, but with slightly lower 123hp and 97.3Nm
  2. Major distinguishing feature is the ADAS – termed ARAS – functionality
  3. Versys 900 SE gets accessories like heated grips and radiator guard as standard

Kawasaki Versys 900: What you need to know

The most feature-loaded Versys yet

The Kawsaki Versys 900 currently has two variants in the UK, Standard and the SE. They share their 948cc, in-line four, liquid-cooled engine with the Z900, but with slightly lower output figures, 122hp and 97.3Nm compared to 124hp and 97.4Nm. The engine is housed within an all-new trellis frame which is said to enable a high-level of front end feel and achieve a near 50:50 weight distribution to the front and back. Suspension comprises a USD fork and a linkage monoshock, and standard seat height is 825mm, with the option to increase it to 845mm.

What sets the Versys 900 apart is the addition of Kawasaki’s Advanced Rider Assistance Systems (ARAS) – the front and rear radar system that enables adaptive cruise control, blind spot detection, forward collision warning, and emergency stop signal as standard. While Kawasaki hasn’t revealed full specifications, we do know the Versys 900 will run on 17-inch wheels at both ends, like the Z900. It also borrows the latter’s electronics suite with ride-by-wire, power modes, traction control, a slip-and-assist clutch, a bi-directional quickshifter. The 6-axis IMU and 5-inch TFT display with smartphone connectivity are also shared.

Kawasaki Versys 900 SE performing a left turn on a sweeping corner.

The Versys 900 SE variant adds LED fog lamps, hand guards, heated grips, a radiator guard, frame protection sliders, a lower cowl and centre stand as standard fitment. Kawasaki also teases edition models like Tourer and Grand Tourer in the future. The Standard Versys 900 gets two colours, Black and White for GBP 10,899 (Rs 13.74 lakh). The Versys 900 SE gets two entirely different colour options, Lime Green/Black – a Kawasaki special – and Red/Grey for GBP 11,799 (Rs 14.87 lakh). Both will be available from April 2027.

India currently gets the other three Versys motorcycles, X 300, 650, and the 1100 so it’s reasonable to expect the 900 to also get here, likely in the first half of 2027. For context, the Versys 650 costs Rs 8.63 lakh and the 1100 takes that up to Rs 13.89 lakh, so we’d expect the 900 to slot between the two; just like the other Kawasaki SE models, the Versys 900 SE will likely be skipped for India.

All prices mentioned are ex-showroom. GBP-to-INR conversions are based on exchange rates at the time of writing.

सैम अल्टमैन की कंपनी OpenAI में बड़ी सेंधमारी! सऊदी का इंजीनियर अब्दुलरहमान टॉयलेट पेपर में रिकॉर्डिंग डिवाइस छिपा क्या कर रहा था?

OpenAI Saudi Engineer Spy Case: दुनिया की सबसे प्रमुख आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कंपनी OpenAI में एक सनसनीखेज सुरक्षा सेंधमारी का मामला सामने आया है। अमेरिका के न्याय विभाग (DOJ) और FBI ने कंपनी में कार्यरत 35 वर्षीय सऊदी मूल के इंजीनियर अब्दुलरहमान अल्फोजान को गिरफ्तार किया है। अल्फोजान पर आरोप है कि उसने कंपनी के एग्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूम में सीक्रेट रूप से ऑडियो रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाया था, ताकि ‘सुपरइंटेलिजेंस’ टेक्नोलॉजी से जुड़ी संवेदनशील मीटिंग्स को रिकॉर्ड किया जा सके।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब वैश्विक स्तर पर AI और अत्याधुनिक तकनीक को लेकर टेक कंपनियों और सरकारों के बीच कड़ा मुकाबला चल रहा है।

टॉयलेट पेपर में छिपाया अंगूठे के आकार का जासूसी डिवाइस

FBI की शिकायत के मुताबिक, जासूसी का यह मामला 30 सितंबर को सामने आया, जब सैन फ्रांसिस्को स्थित OpenAI की इमारत के एग्जीक्यूटिव कॉन्फ्रेंस रूम में टीवी के पीछे यूएसबी पोर्ट में लगा एक छोटा रिकॉर्डिंग डिवाइस मिला। यह अंगूठे के आकार का एक कस्टमाइज्ड डिवाइस था, जिसमें माइक्रोफोन लगा हुआ था और जिसे कैमरे से भी जोड़ा जा सकता था।

इस डिवाइस को टॉयलेट पेपर में लपेटकर टीवी के पीछे यूएसबी पोर्ट में छिपाया गया था। जांच के अनुसार, इसे 28 सितंबर के आसपास लगाया गया था। हालांकि, इसमें स्टोर डेटा एन्क्रिप्टेड था। एफबीआई जांच अधिकारियों को बाद में अल्फोजान के व्यक्तिगत बैग से भी इसी तरह का एक और कस्टमाइज्ड जासूसी डिवाइस बरामद हुआ।

OpenAI ने खुद के AI मॉडल से पकड़ा आरोपी

OpenAI ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी कि उसने जासूसी करने वाले व्यक्ति की पहचान करने और डिवाइस के स्रोत का पता लगाने के लिए अपने ही इंटरनल AI मॉडल्स का इस्तेमाल किया।

कंपनी ने स्पष्ट किया कि आरोपी कर्मचारी के पास ऑफिस के अन्य संवेदनशील क्षेत्रों में भी और रिकॉर्डिंग डिवाइस लगाने की योजना के सबूत मिले हैं। वैसे कंपनी ने राहत की बात यह बताई कि आरोपी कर्मचारी सोर्स कोड, मॉडल वेट्स या कस्टमर डेटा तक पहुंचने या उन्हें लीक करने में कामयाब नहीं हो पाया था। OpenAI ने आरोपी इंजीनियर को तुरंत नौकरी से बर्खास्त कर एफबीआई को मामला सौंप दिया।

कौन है आरोपी इंजीनियर अब्दुलरहमान अल्फोजान?

प्रोफेशनल बैकग्राउंड: अब्दुलरहमान अल्फोजान जुलाई 2025 से OpenAI में बतौर इंजीनियर कार्यरत था। उसकी लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उसने प्रसिद्ध संस्थान एमआईटी (MIT) और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले से पढ़ाई की है। इससे पहले वह मेटा और माइक्रोसॉफ्ट जैसी दिग्गज टेक कंपनियों में भी काम कर चुका है।वह सितंबर 2020 से अमेरिका का लीगल परमानेंट रेजिडेंट है।

एफबीआई निदेशक काश पटेल ने बयान जारी कर बताया कि आरोपी ने कमरे के कैलेंडर और मीटिंग डिटेल्स हासिल करने के लिए करीब एक महीने तक AI प्रॉडक्टिविटी एजेंट का भी इस्तेमाल किया था। अगर आरोप सिद्ध होते हैं, तो अल्फोजान को 5 साल तक की जेल, $250,000 (लगभग ₹2.1 करोड़) का जुर्माना और 3 साल की निगरानी की सजा हो सकती है।

ओपनएआई के अंदर बढ़ते सुरक्षा खतरे और विवाद

यह घटना केवल एक जासूसी तक सीमित नहीं है, बल्कि OpenAI में हाल के दिनों में सुरक्षा नियमों को लेकर आंतरिक हलचल भी तेज हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, OpenAI ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर में सुरक्षा कमियों को ढूंढने वाली स्टार्टअप कंपनी ‘Trail of Bits’ को खरीदने के लिए शुरुआती बातचीत कर रही है, ताकि अपने सिक्योरिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत कर सके।

हाल ही में OpenAI ने संवेदनशील जानकारी के रख-रखाव से जुड़े नियमों का उल्लंघन करने पर अपने तीन शोधकर्ताओं- जैस्मीन वांग, तोमेक कोरबैक और मिकिता बालेस्नी को बर्खास्त कर दिया। निष्कासित शोधकर्ताओं ने एक खुला पत्र लिखकर कहा है कि इस तरह की अचानक कार्रवाई से सुरक्षा चिंताओं को उठाने वाले कर्मचारियों में डर का माहौल बन सकता है।

Zoho में इस साल सैलरी हाइक नहीं करने का ऐलान कर इसके फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने मांगी माफी, खस्ता हालत की वजह भी बताई

नौकरी करने वाले लोगों के लिए सालाना सैलरी हाइक का इंतजार काफी अहम होता है। बढ़ती महंगाई के बीच वेतन में होने वाली बढ़ोतरी से घर का बजट संभालने में मदद मिलती है। लेकिन सॉफ्टवेयर कंपनी Zoho के कर्मचारियों को इस साल निराशा का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने बताया है कि इस साल कर्मचारियों की सैलरी में सामान्य सालाना बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बढ़ते खर्च, सर्वर की महंगी कीमतें और वैश्विक कारोबारी अनिश्चितता जैसे कारण हैं। हालांकि, उन्होंने कर्मचारियों को यह भरोसा भी दिया है कि कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की पूरी कोशिश करेगी।

Zoho कर्मचारियों को इस साल नहीं मिलेगा सालाना इंक्रीमेंट

श्रीधर वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए कंपनी की मौजूदा स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री का भविष्य फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है और AI के बढ़ते इस्तेमाल से कंपनियों का खर्च काफी बढ़ गया है। इसी दबाव के चलते Zoho ने इस साल कर्मचारियों की सामान्य वेतन वृद्धि रोकने का फैसला किया है। वेम्बू ने स्वीकार किया कि यह फैसला लेना आसान नहीं था। उन्होंने कर्मचारियों से माफी भी मांगी कि वह इस साल सैलरी हाइक को जारी नहीं रख सके।

AI के कारण चार गुना बढ़ी सर्वर की कीमतें

कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक डेटा सेंटर के लिए जरूरी सर्वर की बढ़ती लागत है। वेम्बू के मुताबिक, सर्वर की कीमतें चार गुना तक बढ़ गई हैं। इसके अलावा, AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने के कारण कंपनी के परिचालन खर्च में भी इजाफा हुआ है। इन बढ़ते खर्चों को नियंत्रित करने के लिए Zoho ने अपने मार्केटिंग बजट में कटौती की है। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने भी कारोबारी माहौल को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की कोशिश

सैलरी हाइक रोकने के फैसले के बीच कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि कंपनी फिलहाल बड़े पैमाने पर छंटनी से बचना चाहती है। वेम्बू ने कहा कि कंपनी कर्मचारियों की बड़े स्तर पर नौकरी जाने की स्थिति से बचने के लिए पूरी मेहनत करेगी।

हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सॉफ्टवेयर क्षेत्र में नौकरियों का भविष्य चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, Zoho ने पिछले 18 महीनों से अपने कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं की है। इससे कंपनी में भर्ती की रफ्तार धीमी रहने का संकेत मिलता है।

अगले 3 से 5 साल Zoho के लिए अहम

वेम्बू ने बताया कि कंपनी इस समय खुद को नए कारोबारी माहौल के अनुरूप ढालने की प्रक्रिया में है। अगले तीन से पांच साल यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि कंपनी का बदलाव कितना सफल रहता है।

उन्होंने कर्मचारियों के सहयोग के लिए आभार भी जताया। उनके मुताबिक, ज्यादातर कर्मचारी कंपनी की स्थिति को समझ रहे हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब तकनीकी कंपनियां AI में निवेश बढ़ाने के साथ अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने की चुनौती का सामना कर रही हैं।

भूकंप के मलबे में फोटोशूट करवाने वाली ये मॉडल इंटरनेट पर हो गईं वायरल, कौन हैं ग्रेसी बोन?

CJI के खिलाफ विवादित पोस्ट को लेकर घिरी केरल कांग्रेस, आलोचना के बाद कर्मचारी को पद से हटाया, बीजेपी ने बताया शर्मनाक

Kerala Congress: कांग्रेस की केरल इकाई के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X अकाउंट से भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत के खिलाफ की गई एक विवादित पोस्ट सोमवार को व्यापक रूप से वायरल हुई। लेकिन सोशल मीडिया पर कड़ी आलोचना होने के बाद इसे हटा दिया गया। पार्टी ने पोस्ट करने के लिए जिम्मेदार व्यक्ति को भी पद से हटा दिया। केरलम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने एक बयान में कहा कि पार्टी के आधिकारिक X अकाउंट पर प्रधान न्यायाधीश के खिलाफ विवादित पोस्ट करने वाले जिम्मेदार व्यक्ति को पद से हटा दिया गया है।

जोसेफ ने कहा कि यह पोस्ट केपीसीसी नेतृत्व की जानकारी, सहमति या परामर्श के बिना की गई थी। उन्होंने कहा, “केपीसीसी इस बात की जांच करेगी कि ऐसी पोस्ट किन परिस्थितियों में की गई।” उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की निष्पक्षता को लेकर कांग्रेस पार्टी को कोई असहमति नहीं है। जोसेफ ने कहा कि सोशल मीडिया पर इस रुख के विपरीत व्यक्त किए गए विचार केपीसीसी नेतृत्व का आधिकारिक रुख नहीं है।

इससे पहले, केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने हटाई जा चुकी पोस्ट का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही चेतावनी दी थी कि न्यायपालिका पार्टी का अगला निशाना होगी। रीजीजू ने X पर एक पोस्ट में कहा, “कांग्रेस भारत के सभी संवैधानिक और लोकतांत्रिक संस्थानों को नष्ट करना चाहती है। सभी भारत-विरोधी गिरोह एकजुट हो रहे हैं। सभी देशभक्त भारतीय भी एकजुट होंगे।”

BJP ने बताया शर्मनाक

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने CJI के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला। बीजेपी ने आरोप लगाया कि पार्टी अब हर संवैधानिक संस्था को ध्वस्त करके भारत में अराजकता पैदा करने की कोशिश में जुट गई है जो बेहद शर्मनाक है। BJP के प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने भी इस मुद्दे पर विपक्षी दल पर हमला बोला। उन्होंने कहा, “मुस्लिम लीग की माओवादी कांग्रेस में पूरी तरह बदल चुकी और चरम ‘दिमागी नक्सल’ मानसिकता अपना चुकी कांग्रेस अब हर संवैधानिक संस्था को ध्वस्त करके भारत में अराजकता पैदा करने की कोशिश में जुट गई है, जो शर्मनाक है।”

BJP प्रवक्ता सिद्धार्थ यादव ने भी कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उसकी मानसिकता पूरी तरह अराजकतावादी हो गई है। यादव ने X पर एक पोस्ट में कहा, “अब कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक हैंडल से CJI के इस्तीफे की मांग की जा रही है।” उन्होंने सवाल किया, “संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करने और साथ ही संविधान की दुहाई देने से बड़ी राजनीतिक पाखंड की मिसाल क्या हो सकती है?”

उन्होंने कहा, “अगर चुनाव हारते हैं, तो निर्वाचन आयोग पर सवाल उठाते हैं। अगर फैसला उनके खिलाफ आता है, तो न्यायपालिका को निशाना बनाते हैं।” BJP सांसद निशिकांत दुबे ने भी केरल कांग्रेस की ओर से प्रधान न्यायाधीश के इस्तीफे की मांग को लेकर राहुल गांधी पर हमला बोला।

दुबे ने X पर कहा, “राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे की मांग करने के बाद ‘महाराजा’ राहुल गांधी ने अब उच्चतम न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश के इस्तीफे की भी मांग कर दी है।” BJP सांसद ने तंज कसते हुए कहा, “सूत्रों के अनुसार, इन इस्तीफों के बाद राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे, शरजील इमाम राष्ट्रपति बनेंगे, अभिजीत दीपके उपराष्ट्रपति बनेंगे, प्रियंका गांधी सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस बनेंगी और खालिस्तानी पन्नून को मुख्य निर्वाचन आयुक्त नियुक्त किया जाएगा।”

उन्होंने कहा, “इस बीच, (जॉर्ज) सोरोस भारत के अमेरिका में राजदूत होंगे।” BJP के एक अन्य प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कहा कि CJI द्वारा गांधी और विपक्षी नेताओं से मिलने से इनकार किए जाने से यह महत्वपूर्ण संदेश गया है कि न्यायपालिका को रोजमर्रा की राजनीतिक लड़ाइयों से ऊपर रहना चाहिए।

कब शुरू हुआ विवाद?

पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी प्रदर्शनों और उनसे जुड़ी पाबंदियों के मद्देनजर स्थिति के बारे में पूछे जाने पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था, “ये कानून-व्यवस्था का मुद्दा है। ये मेरा विषय नहीं है।” CJI राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) की स्थापना की 33वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर किसी के लिए खुले हैं, चाहे वह आम नागरिक हो या कानून बनाने वाला कोई व्यक्ति। उनसे पूछा गया था कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करने से इनकार किए जाने के बाद विपक्षी नेता अपनी शिकायतें उनके सामने कैसे रख सकते हैं।

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CJI की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस की केरल इकाई ने C पर एक पोस्ट में कहा, “प्रिय सूर्यकांत, अगर कानून-व्यवस्था आपका विषय नहीं है, तो अभी इस्तीफा दे दीजिए। हम आपका स्थान लेने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति को ढूंढ लेंगे जो इसे संभाल सके।” हालांकि, बाद में इस पोस्ट को हटा दिया गया।

Ducati Desmo450 MX models updated for 2027

Ducati Desmo450 MX models updated for 2027
2027 Desmo450 MX Factory and 2027 Desmo450 MX from left to right.

Closely following the reveal of the Desmo450 SM, Ducati has now unveiled the 2027 version of its first off-roader, the Desmo450 MX. Like earlier, there’s also a Desmo450 MX Factory version that gets a slightly different look with additional equipment over the standard model. The Borgo-Panigale manufacturer has also dropped the prices for both models, by up to GBP 2,400.

  1. Desmo450 MX gets bigger rear sprocket with reliability focused improvements elsewhere
  2. Desmo450 MX Factory gets additional accessories such as a sump guard and disc guard as standard
  3. Both models have become cheaper compared to their 2026 versions

2027 Ducati Desmo450 MX and Factory: What’s new?

Changes aimed at better performance and durability

Starting with the standard model, Ducati has made changes throughout the motorcycle in order to improve functionality, performance and ergonomics. The rear sprocket has been changed to a larger 51-tooth version compared to the earlier 49-tooth one, in order to improve the rear wheel torque while exiting corners. Both the gear and the brake lever tips have also been changed to offer better ergonomics and allow for more ergonomic foot movement during gear shifts and braking. The company has also upgraded numerous other components for improved reliability. These are all nuanced changes and the most identifiable way to differentiate the 2027 model from the 2026 version is with a new livery that features black logos instead of white.

On the Desmo450 MX Factory version, Ducati has increased the equipment on offer, while trimming off 800gm from its kerb weight. Considering the Desmo450 MX weighs 104.8kg on an empty fuel tank, that number becomes all the more important for the Factory version. In addition to receiving all the standard model’s improvements, the factory model gets extra dark Kashima coating on its 49mm fork and monoshock, plus a titanium oxide (TiO) treatment for superior wear resistance. The factory model exclusively gets a full Akrapovic exhaust system, which is said to reduce the overall weight by 1.7kg. The triple clamp unit is also machined from a single billet, to reduce weight even further. Ducati has given the factory version a sump guard, a disc rotor guard, and an RK MXU chain with O-rings. In addition to these existing pieces of equipment, a holeshot device is also standard, allowing the rider to manage acceleration and stability better during starts.

Ducati has also brought the WiFi module to the Factory version, last seen on the Desmo450 SM, that enables predictive maintenance and customisation of the motorcycle’s two ride modes via the company’s X-Link mobile app. For 2027, the factory version also gets a new Ducati Corse livery, featuring the red and black Ducati logo.

The prices for both Desmo450 MX models have dropped significantly in Europe. The 2027 Desmo450 MX is priced at GBP 9,495 (Rs 12.02 lakh) and the 450 MX Factory at GBP 10,795 (Rs 13.67 lakh). That’s a GBP 1,750 (Rs 2.22 lakh) drop on the regular MX, and a GBP 2,400 (Rs 3.04 lakh) drop on the MX Factory compared to their respective 2026 versions. Both are already arriving at various European dealerships, with the rest of the world to follow. However, the USA won’t be one of them where the limited edition MY26 model will be available exclusively instead. In India, the 2026 Desmo450 MX is available for Rs 17.23 lakh (ex-showroom). Neither the 2027 Desmo450 MX nor the 2027 Desmo450 SM are available here yet, and it remains to be seen if our market also sees similar price revisions at launch.

MP News: ‘मेरे क्षेत्र में अन्याय की पराकाष्ठा हुई है’; अपनी ही सरकार पर क्यों बरसे शिवराज सिंह चौहान?

MP News: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार (11 अक्टूबर) को वन विभाग और जिला प्रशासन पर अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के आदिवासी बहुल कोसमी गांव में गरीब परिवारों के आशियाने उजाड़ने, फसलें नष्ट करने और कुएं को मिट्टी से भरने का आरोप लगाया। बुधनी विधानसभा क्षेत्र के इस गांव में हुई इस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान ने कोसमी पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और पूरे मामले पर कड़ा आक्रोश जताया। चौहान ने कोसमी गांव में वन विभाग और प्रशासन की तोड़फोड़ कार्रवाई के दौरान प्रभावित परिवारों से मुलाकात की। सीहोर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री अपनी ही सरकार पर हमलावर नजर आए।

‘अन्याय की पराकाष्ठा हुई है’

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “मेरे क्षेत्र में अन्याय की पराकाष्ठा हुई है। सवेरे तक जो घर आबाद थे, जहां बच्चों की किलकारियां गूंजती थी, वहां बच्चों की चीखें गूंज रही हैं। उनके घर गिरा दिए गए। उनके घर के नीचे उनकी फसल दबा दी गई। उनकी मेहनत कुचल दी गई। उनके वर्षों पुराने घर थे, आज तबाह कर दिए गए। जिन्होंने ऐसा किया वे हृदयहीन हैं, संवेदनशून्य हैं… ये अन्याय की अति है। उन्हें भगवान भी माफ नहीं करेगा। हम पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की हर संभव प्रयास करेंगे। मैं मुख्यमंत्री के सामने भी ये सारी स्थिति रखूंगा।”

शिवराज सिंह चौहान ने आगे कहा, “आदिवासियों की मेहनत तबाह कर दी गई, उन्हें बेघर कर दिया गया। इनके पास कुछ नहीं बचा। जमीन के टुकड़े के अलावा इनके पास कुछ नहीं था। वन विभाग के लोगों ने भी ये किया है, ये जुल्म की पराकाष्ठा है। अगर उनके अपने बच्चे, मां और पत्नी को इस तरह रोना पड़े, तो क्या उन्हें अच्छा लगेगा?” उन्होंने कहा कि हम ये सभी बातें मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने रखेंगे। इनके हितों के लिए, इन्हें न्याय दिलाने के लिए हम हर संभव कदम उठाएंगे।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, कोसमी चौहान के संसदीय क्षेत्र विदिशा और विधानसभा क्षेत्र बुधनी के अंतर्गत आता है। शिवराज जब मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री थे तब वह विधानसभा में बुधनी का प्रतिनिधित्व करते थे। वन विभाग और जिला प्रशासन ने कुछ महीने पहले भी इस प्रकार की कार्रवाई की कोशिश की थी तब चौहान ने अधिकारियों से चर्चा कर आदिवासी परिवारों के घर नहीं गिराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद रविवार को यह कार्रवाई की गई। शिवराज के कार्यालय से जारी एक बयान में कहा गया कि पूर्व मुख्यमंत्री ने घटनास्थल से ही मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी और अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी दी जानकारी

उन्होंने प्रदेश BJP अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को भी फोन कर गरीब परिवारों के घर तोड़े जाने की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह शीघ्र ही इस मामले में मुख्यमंत्री मोहन यादव से भी चर्चा करेंगे। बयान के मुताबिक, शिवराज सिंह चौहान ने साफ शब्दों में कहा कि गरीब परिवारों को बेघर करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, “जिन परिवारों के घर तोड़े गए हैं, उनके लिए नए घर बनवाए जाएंगे। साथ ही, जब तक उनके रहने की स्थायी व्यवस्था नहीं हो जाती, तब तक उनके रहने और खाने-पीने की अस्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।” शिवराज ने गरीब परिवारों के आशियाने उजड़ने, उनकी फसलें नष्ट होने और पानी के लिए इस्तेमाल होने वाले कुएं को मिट्टी से भर दिए जाने का आरोप लगाते हुए प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।

अधिकारियों पर भड़के

चौहान ने मौके पर वन विभाग और प्रशासन के किसी भी बड़े अधिकारी के मौजूद नहीं होने पर भी नाराजगी जताई। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस कार्रवाई में केवल घर ही नहीं टूटे, बल्कि पीड़ित परिवारों की आजीविका पर भी चोट पहुंची है। मध्यप्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने इस प्रकरण को शिवराज और मोहन यादव की आपसी खींचतान बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस चक्कर में गांव के गरीब पिस रहे हैं।

कांग्रेस का रिएक्शन

कांग्रेस नेता सिंघार ने कोसमी में की गई कार्रवाई का एक वीडियो शेयर करते हुए X पर एक पोस्ट में कहा, “मोहन-मामा की आपसी खींचतान में उजड़ रहे आदिवासी परिवार।” उन्होंने कहा कि केंद्रीय कृषि मंत्री के गृह क्षेत्र सीहोर के ग्राम कोसमी में बरेला आदिवासी समुदाय के परिवारों की फसलें नष्ट की जा रही हैं और उनके मकान तोड़े जा रहे हैं। सिंघार ने आरोप लगाया, “BJP सरकार की आपसी खींचतान के कारण गरीब आदिवासी परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है।”

वहीं, मध्य प्रदेश के कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने X पर लिखा, “श्री शिवराज जी! आपके शब्द ‘शपथ-पत्र’ हैं! सबूत हैं कि मप्र ‘बेलगाम’ हो गया है! लेकिन, बयान ही काफी नहीं है! जनता के सामने आना चाहिए कि आदिवासी परिवारों को उजाड़ने वाला ‘नरपिशाच’ कौन है? ये सरकारी अत्याचारी कहां से नियंत्रित एवं संचालित हो रहे हैं?”

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कांग्रेस नेता ने आगे लिखा, “मप्र यह भी जानना चाहता है, क्या भाजपा की आंतरिक सियासत में इतनी अदावत हो चुकी है कि पूर्व मुख्यमंत्री की हर बात को नजरअंदाज करना, मौजूदा मुख्यमंत्री का धर्म बन गया है? बहरहाल, पीड़ित परिवारों को BJP नेताओं की बात, बयान, बवाल से कोई लेना देना नहीं! उन्हें पुनर्वास मिले, मुआवजा मिले! यह विश्वास भी मिले, दोषी को दंड जरूर मिलेगा!”

Ranvir Shorey: ‘सड़कों पर कब्जा करना असल में लोकतंत्र की हत्या है’, रणवीर शौरी ने CJP प्रोटेस्ट की आलोचना की

Ranvir Shorey: एक्टर रणवीर शौरी ने दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेताओं के प्रस्तावित विरोध-प्रदर्शन से पहले उनकी हिरासत को लेकर हो रहे विवाद पर अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को सड़कों पर उतरने के बजाय अदालतों और लोकतांत्रिक संस्थाओं का रुख करना चाहिए। उनके ये बयान हुमा कुरैशी, सोनाक्षी सिन्हा और विजय वर्मा समेत कई बॉलीवुड एक्टर्स द्वारा अधिकारियों के प्रदर्शन को संभालने के तरीके की आलोचना के बीच आए हैं।

उन्होंने आगे कहा- लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन आखिरी रास्ता होना चाहिए। यह न्यायपालिका या विधायिका के अधिकार क्षेत्र को दरकिनार करने का तरीका नहीं है! आपके ‘असहमति के अधिकार’ का मतलब यह नहीं हो सकता कि आप हफ्ते के सातों दिन ‘विरोध-प्रदर्शन’ करें, जिससे देश ठप हो जाए और हम बाकी लोगों की जिंदगी नरक बन जाए! सिर्फ अराजकतावादी, पब्लिसिटी चाहने वाले या बेवकूफ ही पहले से मौजूद कानूनी उपायों का इस्तेमाल किए बिना विरोध-प्रदर्शन करेंगे।”

जब एक X यूजर ने जवाब दिया कि रणवीर को यह नहीं पता कि ‘CJI (मुख्य न्यायाधीश) भी समझौता कर चुके हैं’ तो एक्टर ने इस दावे का मजाक उड़ाते हुए लिखा, “लंबी होती लिस्ट। मैं समझौता कर चुका हूं, दूसरे वोटर समझौता कर चुके हैं, मीडिया समझौता कर चुका है, संसद समझौता कर चुकी है, PMO समझौता कर चुका है, CEC समझौता कर चुका है, SC समझौता कर चुका है… सिर्फ सड़कों पर डफली बजाने वाली, संदिग्ध फंडिंग वाली उन पार्टियों की भीड़ ही भरोसेमंद है, जो चुनाव नहीं जीत पाईं।”

विरोध-प्रदर्शन के बारे में सब कुछ

संस्थापक अभिजीत दिपके के नेतृत्व वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने 10 अक्टूबर 2026 को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन की योजना बनाई थी। वे मतदाता सूची के ‘विशेष गहन संशोधन’ (SIR) में कथित अनियमितताओं को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। यह प्रदर्शन जंतर-मंतर पर होना था। लेकिन विरोध-प्रदर्शन से पहले ही दिल्ली पुलिस ने मुंबई से आने के कुछ ही देर बाद दिल्ली एयरपोर्ट पर दीपके और CJP के दो अन्य नेताओं, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया। बाद में तीनों को रिहा कर दिया गया। रविवार को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन जारी रहा।

सोमवार को आशुतोष रांका ने दिल्ली पुलिस को जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन की तारीख तय करने के लिए 24 घंटे का समय दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तय समय के अंदर कोई जवाब नहीं मिला तो CJP आगे की कार्रवाई के बारे में फैसला करेगा।

ओमान के सोहर में टैंकर पर ड्रोन हमले में लापता दो भारतीय नाविकों की तलाश जारी, 9 सदस्य बचाए गए

ओमान के तट पर सोहर एंकरेज में निकारागुआ के झंडे वाले टैंकर पर ड्रोन हमला हुआ था। इस टैंकर पर 11 भारतीय क्रू मेंबर सवार थे। इनमें से 9 नाविकों को बचा लिया गया, जबकि 2 नाविक लापता बताए जा रहे हैं। इनके लिए खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। केंद्रीय शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह हमला MT पेट्रो डॉल्फिन पर 11 अक्टूबर को हुआ था।

रविवार को X पर एक पोस्ट में, सोनोवाल ने कहा कि टैंकर पर सोहर एंकरेज में हमला हुआ था। उन्होंने पुष्टि की कि स्थानीय कोस्ट गार्ड सक्रिय रूप से सर्च-एंड-रेस्क्यू ऑपरेशन चला रहा था। सोनोवाल ने अपने X पोस्ट में कहा, “11 अक्टूबर को, 11 भारतीय नाविकों को ले जा रहे टैंकर MT पेट्रो डॉल्फिन पर सोहर एंकरेज में ड्रोन हमला हुआ था।” “हालांकि हमारे नौ भारतीय क्रू मेंबर को सफलतापूर्वक बचा लिया गया है और वे सुरक्षित हैं, दो भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं।”

सोनोवाल ने कहा, “लोकल कोस्ट गार्ड सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन एक्टिव रूप से कर रहा है। हम सभी संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार कोऑर्डिनेट कर रहे हैं ताकि चल रहे रेस्क्यू कामों में पूरी तरह से मदद मिल सके और यह पक्का किया जा सके कि हमारे लापता लोगों को सुरक्षित रूप से ढूंढने के लिए हर मुमकिन कदम उठाया जाए।” मस्कट में भारतीय दूतावास ने भी कन्फर्म किया कि जहाज पर सवार 11 भारतीय नाविकों में से दो लापता बताए गए हैं। दूतावास ने कहा कि वह स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है और संबंधित अधिकारियों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं।

X पर एक पोस्ट में, दूतावास ने कहा, “एम्बेसी निकारागुआ के झंडे वाले टैंकर MT PETRO DOLPHIN से जुड़ी स्थिति पर करीब से नजर रख रहा है।” अधिकारी ने बताया, “जहाज पर सवार 11 भारतीय नाविकों में से दो लापता बताए गए हैं। एम्बेसी संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है।” यह घटनाक्रम खाड़ी क्षेत्र में कमर्शियल शिपिंग पर हमलों और इंटरनेशनल जहाजों पर काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच हुआ है।

11 अक्टूबर को एक अलग घटना में, मार्शल आइलैंड्स के झंडे वाला टैंकर M/T वल्थेरा, जिसमें 11 भारतीय नाविक सवार थे, होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते समय एक अनजान चीज से टकरा गया, जिससे उसमें आग लग गई।

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