Neha Sharma: नेहा शर्मा ने दी सोशल मीडिया चलाने वालों को चेतावनी, बोलीं- उनकी सहमति के बिना चेहरा यूज कर AI-जनरेटेड वीडियो या तस्वीरें न बनाएं

Neha Sharma: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के गलत इस्तेमाल ने दुनिया भर के लोगों, खासकर मशहूर हस्तियों के बीच चिंता पैदा कर दी है। इस तकनीक के जरिए डीपफेक, छेड़छाड़ किए गए वीडियो और पहचान के गलत इस्तेमाल के कई मामले सामने आ रहे हैं। अपनी पहचान के इस तरह के दुरुपयोग को लेकर कई कलाकार कानूनी कार्रवाई कर रहे हैं। इस सूची में अब अभिनेत्री नेहा शर्मा का नाम भी जुड़ गया है। उन्होंने इसके खिलाफ आवाज उठाई है और उन लोगों को चेतावनी दी है जो उनके चेहरे और रूप का इस्तेमाल करके AI-जनरेटेड कंटेंट बना रहे हैं।

नेहा का बयान

शनिवार को ‘X’ (ट्विटर) पर नेहा ने लिखा- “जो कोई भी मेरी सहमति के बिना, AI-जनरेटेड वीडियो या तस्वीरें बनाने के लिए मेरे चेहरे का इस्तेमाल कर रहा है उसे चेतावनी दी जाती है कि वह तुरंत ऐसा करना बंद कर दे।”

‘मैं कानूनी कार्रवाई करूंगी’

उन्होंने आगे कहा- “जो कंटेंट पहले ही पोस्ट किया जा चुका है, उसे तुरंत हटा दें। साथ ही मेरी पहचान का इस्तेमाल करके AI-जनरेटेड वीडियो या तस्वीरें बनाना, एडिट करना या उन्हें फैलाना बंद करें। मुझे गलत तरीके से पेश करने या मेरी छवि खराब करने के लिए मेरे चेहरे का इस तरह इस्तेमाल करना बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। मैं अपने चेहरे या बॉडी के इस तरह के अनधिकृत इस्तेमाल की अनुमति नहीं देती हूं।”

कानूनी रास्ता अपनाने की बात कहते हुए नेहा ने अपनी बात खत्म की औक कहा कि इसे एक औपचारिक चेतावनी समझें। जो कोई भी ऐसा कंटेंट बनाने, पोस्ट करने या फैलाने के लिए जिम्मेदार है, उसके खिलाफ मैं कानूनी कार्रवाई करूंगी। किसी को भी यह नहीं सोचना चाहिए कि फर्जी अकाउंट के पीछे छिपने या AI का इस्तेमाल करने से वे जवाबदेही से बच जाएंगे।

अपनी पहचान की सुरक्षा करती मशहूर हस्तियां

नेहा उन कई भारतीय मशहूर हस्तियों में से एक हैं जिन्होंने डीपफेक के मुद्दे पर बात की है। हाल के दिनों में कई कलाकारों ने AI के जरिए अपनी पहचान, छवि और व्यक्तित्व अधिकारों के दुरुपयोग को रोकने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। अक्षय कुमार, वरुण धवन, अनिल कपूर, शिल्पा शेट्टी, प्रीति जिंटा, कार्तिक आर्यन, मृणाल ठाकुर, सुनील शेट्टी और कई अन्य सितारों ने अपनी तस्वीरों और आवाज के अनधिकृत इस्तेमाल को लेकर कोर्ट का रुख किया है। यह सब AI के जरिए पहचान की चोरी (identity theft) को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच हो रहा है।

Ranbir Kapoor watch: ‘रामायणम्’ के ट्रेलर लॉन्च पर रणबीर कपूर ने पहनी 78 लाख रुपये घड़ी, ‘राम जन्मभूमि’ से खास कनेक्शन

Ranbir Kapoor Watch: रणबीर कपूर बेंगलुरु में ‘रामायणम्’ के इंटरनेशनल ट्रेलर लॉन्च इवेंट में शामिल हुए, जहां वे अपने सह-कलाकारों के साथ नजर आए। इस इवेंट में जहां अभिनेता के शानदार लुक ने सबका ध्यान खींचा, वहीं उनकी कलाई पर बंधी एक लग्जरी घड़ी भी चर्चा का विषय बन गई।

रणबीर ने ‘जैकब एंड कंपनी’ (Jacob & Co.) की ‘एपिक एक्स राम जन्मभूमि रोज गोल्ड स्पेशल एडिशन’ (Epic X Ram Janmabhoomi Rose Gold Special Edition) घड़ी पहनी थी, जिसकी कीमत 78 लाख रुपये है।

अपनी भारी-भरकम कीमत के अलावा यह घड़ी अपने अनोखे डिजाइन के लिए भी जानी जाती है। इसमें राम जन्मभूमि से जुड़ी कई बारीक आकृतियां बनी हैं, जिनमें अयोध्या का राम मंदिर, भगवान राम (हाथ में धनुष लिए हुए) और भगवान हनुमान शामिल हैं।

‘राम जन्मभूमि’ घड़ी की खासियत

‘जैकब एंड कंपनी’ के ‘एपिक एक्स’ (Epic X) कलेक्शन का हिस्सा यह ‘राम जन्मभूमि रोज गोल्ड स्पेशल एडिशन’ घड़ी आधुनिक घड़ी-निर्माण कला और धार्मिक प्रतीकों का एक बेहतरीन मिक्चर है।

‘एपिक एक्स’ सीरीज अपने खास डिजाइन और जालीदार काम (lattice-work) के लिए मशहूर है, लेकिन इस विशेष घड़ी में कुछ ऐसा है जो इसे कलेक्शन की बाकी घड़ियों से अलग बनाता है-इसमें राम मंदिर, भगवान राम और भगवान हनुमान की छोटी-छोटी प्रतिकृतियां (miniature replicas) बनी हुई हैं।

इस घड़ी में रोज गोल्ड का केस और नारंगी रंग का स्ट्रैप है, जिसमें एक पिन बकल लगा है। घड़ी का रोज गोल्ड क्लैस्प (clasp) बकल के रंग से मेल खाता है, जबकि नारंगी स्ट्रैप इसे एक आकर्षक लुक देता है। कुल मिलाकर इसका जटिल डिजाइन और चमकीले रंगों का इस्तेमाल इसे बेहद खास बनाता है।

‘जैकब एंड कंपनी’ ने 2015 में ‘एपिक एक्स’ कलेक्शन पेश किया था। इसके बाद 2022 में इसे बड़े स्तर पर री-डिजाइन किया गया, जिसमें कई सुधार किए गए और नई चीजों का इस्तेमाल किया गया। ‘राम जन्मभूमि’ एडिशन उसी डिजाइन शैली पर आधारित है, जिसमें इस पवित्र हिंदू स्थल से प्रेरित तत्वों को शामिल किया गया है।

‘जैकब एंड कंपनी’ की ‘एपिक एक्स राम जन्मभूमि’ घड़ी की कीमत

रणबीर कपूर द्वारा पहनी गई इस ‘रोज गोल्ड स्पेशल एडिशन’ घड़ी की कीमत 78 लाख रुपये है। इस घड़ी के अन्य वर्जन भी अलग-अलग कीमतों पर उपलब्ध हैं, जिनमें ‘टाइटेनियम एडिशन’ (Titanium Edition) शामिल है, जिसकी कीमत 35.88 लाख रुपये है। दूसरी ओर गोल्ड एडिशन वेरिएंट्स की कीमत 83 लाख रुपये से शुरू होकर 1.08 करोड़ रुपये तक जाती है।

रामायणम् फिल्म के बारे में

बेंगलुरु में हुए इंटरनेशनल ट्रेलर लॉन्च में फिल्म की कास्ट के कई सदस्य शामिल हुए, जिनमें साई पल्लवी, रवि दुबे, यश और रकुल प्रीत सिंह मौजूद थे। इस इवेंट में डायरेक्टर नितेश तिवारी, प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ​​और कंपोजर ए.आर. रहमान भी शामिल हुए। नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित और नमित मल्होत्रा ​​व यश द्वारा प्रोड्यूस की गई फिल्म ‘रामायण राइज ऑफ ए लीजेंड’ 5 नवंबर 2026 को रिलीज होने वाली है।

कौन हैं केटी जकारिया, जिन्हें ट्रंप ने 5 दिन में ही प्रेस सेक्रेटरी के पद से हटाया?

Katie Zacharia: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में एक बार फिर बड़ा फेरबदल देखने को मिला है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी बनीं केटी जकारिया का कार्यकाल कुछ ही दिनों में खत्म हो गया। ट्रंप ने हाल ही में अचानक उनकी नियुक्ति का ऐलान किया था, लेकिन अब उन्हें इस पद से हटा दिया गया है। इस घटनाक्रम ने ट्रंप के पहले कार्यकाल की यादें ताजा कर दी हैं, जब व्हाइट हाउस में अधिकारियों को बार-बार बदला जाता था।

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, शुक्रवार को व्हाइट हाउस के दो अधिकारियों ने जकारिया के पद छोड़ने की पुष्टि की। इनमें से एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें पद से हटा दिया गया है, जबकि दूसरे ने बताया कि वह अब इस जिम्मेदारी से अलग हो रही हैं।

केटी जकारिया को पद से हटाने से पहले के पांच दिन काफी उतार-चढ़ाव भरे रहे। इस दौरान उन्हें कई असहज सवालों का सामना करना पड़ा। सवाल पूछने वालों में डोनाल्ड ट्रंप के कुछ प्रमुख मीडिया समर्थक भी शामिल थे। दिलचस्प बात यह है कि जकारिया को पद से हटाए जाने की पुष्टि होने से कुछ घंटे पहले ही ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से उन्हें इस नौकरी पर दोबारा विचार करने की सलाह दी थी।

व्हाइट हाउस में केटी जकारिया का कार्यकाल कैसे लड़खड़ा गया

ट्रम्प ने 9 अक्टूबर को जकारिया की नियुक्ति की घोषणा की थी। उन्हें कैरोलीन लेविट की जगह नियुक्त किया गया था, जो अब तक की सबसे कम उम्र की व्हाइट हाउस प्रेस सचिव थीं और कई सालों से ट्रम्प के करीबी लोगों में शामिल रही थीं।

केटी जकारिया रूढ़िवादी विचारों वाली राजनीतिक टिप्पणीकार हैं। ‘ट्रुथ सोशल’ (Truth Social) की मूल कंपनी ‘ट्रम्प मीडिया’ के संचार विभाग में काम कर चुकी थीं। इसके अलावा, ट्रम्प के दूसरे प्रशासन के दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए ‘डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी’ में भी काम किया था।

हालांकि, मंगलवार को जब वह पहली बार व्हाइट हाउस प्रेस कोर के सामने आईं, तो तुरंत ही उन पर सवाल उठने लगे।

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, ब्रीफिंग के दौरान जकारिया असहज दिखीं। वे रुक-रुक कर बोल रही थीं और ट्रम्प की उपलब्धियों का जिक्र कर रही थीं। उन्होंने केवल तीन पत्रकारों के सवालों के जवाब दिए-ये सभी पत्रकार ऐसे मीडिया संस्थानों से थे जिनका झुकाव रूढ़िवादी विचारधारा की ओर था या जो ट्रम्प के समर्थक थे। लगभग 14 मिनट बाद उन्होंने बातचीत खत्म कर दी।

बाद में जकारिया ने बताया कि उन्होंने जानबूझकर इस सेशन को छोटा रखा था, क्योंकि उसी दिन सुबह ट्रम्प को पत्रकारों के सवालों के जवाब देने थे। उन्होंने यह भी कहा कि व्हाइट हाउस के कर्मचारियों ने उन्हें पहले से पूरी जानकारी (ब्रीफिंग) नहीं दी थी।

इसके बाद, बुधवार और गुरुवार को वे अलास्का, एरिजोना और मोंटाना में ट्रम्प की रैलियों में उनके साथ गईं, लेकिन उन्होंने कोई और प्रेस ब्रीफिंग नहीं की।

हालांकि, पत्रकारों के सामने उनका यह प्रदर्शन उन कई मुद्दों में से सिर्फ एक था, जो उनके छोटे कार्यकाल के दौरान चर्चा का मुख्य विषय बने रहे।

केटी जकारिया की कानूनी योग्यताओं को लेकर विवाद

जकारिया की प्रोफेशनल बैकग्राउंड पर भी सवाल उठे, खासकर तब जब उन्होंने कुछ रूढ़िवादी टीवी नेटवर्कों पर खुद को वकील बताया।

जकारिया ने पेपरडाइन यूनिवर्सिटी के लॉ स्कूल से पढ़ाई की है, लेकिन वह कैलिफोर्निया की बार परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं। इसके अलावा, उनके पास अमेरिका में वकालत करने के लिए जरूरी कोई अन्य योग्यता भी नहीं थी।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला जिससे पता चले कि वह अमेरिका के किसी भी राज्य या डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया में वकील के तौर पर पंजीकृत थीं या उन्हें बार में शामिल किया गया था।

हालांकि, जकारिया ने खुद को ‘वकील’ कहने का बचाव करते हुए कहा कि जब वह कानूनी विश्लेषण देती थीं, तो यह शब्द इस्तेमाल करना सही था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने चीन में वकील के तौर पर काम किया था।

रॉयटर्स को दिए एक बयान में उन्होंने कहा, “मैंने सभी जरूरी योग्यताओं के साथ इंटरनेशनल ट्रांजैक्शन लॉ (अंतरराष्ट्रीय लेन-देन कानून) की प्रैक्टिस की है।”

इस विवाद ने उन रूढ़िवादी मीडिया हस्तियों का भी ध्यान खींचा, जो आमतौर पर ट्रम्प प्रशासन का समर्थन करते हैं।

वहीं, फॉक्स न्यूज के होस्ट शॉन हैनिटी, जो लंबे समय से ट्रम्प के सहयोगी रहे हैं, ने सवाल उठाया कि जकारिया ने अपनी योग्यताओं के बारे में खुलकर बात क्यों नहीं की। जब उन्होंने यह स्वीकार कर लिया कि वह कैलिफोर्निया बार परीक्षा पास नहीं कर पाई थीं, तो हैनिटी ने पूछा, “सीधे यह क्यों नहीं कह दिया कि ‘मैंने पेपरडाइन लॉ स्कूल से पढ़ाई की, फिर करियर का एक अलग रास्ता चुन लिया, और मैंने एक बार बार परीक्षा दी थी, लेकिन पास नहीं हो पाई’?”

उन्होंने ‘लॉयर’ (वकील) और ‘अटॉर्नी’ (कानूनी प्रतिनिधि) शब्दों के बीच उनके द्वारा किए गए अंतर को भी चुनौती दी और सवाल किया कि उन्होंने सीधे तौर पर यह क्यों नहीं कहा कि उन्होंने कभी वकालत नहीं की है।

जकारिया ने फिर दोहराया कि वह वकील के तौर पर काम नहीं कर रही थीं और न ही कोई कानूनी सलाह दे रही थीं। शुक्रवार को फॉक्स न्यूज के एक अलग इंटरव्यू में, उन्होंने कहा कि उनसे यह कभी नहीं पूछा गया था कि प्रेस सेक्रेटरी बनने से पहले उन्होंने बार परीक्षा पास की है या नहीं।

जकारिया और ट्रम्प, दोनों का यही कहना था कि उन्हें प्रशासन में वकील के तौर पर नहीं, बल्कि कम्युनिकेशंस (संचार) विभाग में काम करने के लिए रखा गया था।

‘मैं फिर से विचार करने को कहूंगा’: ट्रम्प ने उनके भविष्य पर सवाल उठाए

शुक्रवार तक, जकारिया के भविष्य को लेकर उठ रहे सवालों को नजरअंदाज करना मुश्किल हो गया था। उसी दिन फॉक्स न्यूज चैनल पर एक कार्यक्रम के दौरान, उनसे पूछा गया कि क्या राष्ट्रपति का उन पर अभी भी भरोसा है।

उन्होंने जवाब दिया, “मुझे उम्मीद है कि मैं अपने आस-पास के सभी लोगों का भरोसा और विश्वास जीत सकूंगी।” उन्होंने यह बताने से भी इनकार कर दिया कि वह व्हाइट हाउस में अपनी अगली प्रेस ब्रीफिंग कब करेंगी।

कुछ घंटों बाद, ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि उन्होंने उन्हें अपने पद पर फिर से विचार करने की सलाह दी थी। जॉर्जिया में एक रैली के लिए रवाना होने से पहले व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में पत्रकारों से बात करते हुए, राष्ट्रपति ने कहा कि उनका मानना ​​है कि मीडिया ने जकारिया के साथ अनुचित व्यवहार किया है।

ट्रंप ने कहा, “मैंने उससे कहा, ‘मुझे लगता है कि खुश रहना तुम्हारे लिए बेहतर होगा।'”

“मैंने कहा, ‘सच कहूं तो, अगर मैं तुम्हारी जगह होता, तो मैं फिर से सोचता।’ मैंने कहा, ‘तुम इस बारे में सोच लो, लेकिन मैं तो फिर से विचार करता।'”

ट्रंप ने यह भी बताया कि उन्होंने उससे पूछा था, “‘केटी, क्या तुम्हें इसकी जरूरत है? मुझे नहीं लगता कि तुम्हें इसकी जरूरत है।'” उन्होंने कहा कि वह चाहते थे कि “उसका जीवन अच्छा रहे,” न कि वह “मीडिया के हाथों बुरी तरह परेशान” हो।

उस समय, राष्ट्रपति ने उन्हें पद से हटाने की घोषणा तो नहीं की, लेकिन संकेत दिया कि अपनी यात्राओं से लौटने के बाद वे उनके भविष्य पर चर्चा करेंगे। ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, “जब मैं वापस आऊंगा, तो हम बात करेंगे।”

जब उनसे किसी संभावित विकल्प (रिप्लेसमेंट) के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा कि इस पद के लिए कई लोग इच्छुक हैं।

व्हाइट हाउस में एक जाना-पहचाना फेरबदल, लेकिन जकारिया के लिए आगे क्या?

जकारिया को हटाना उसी तरह के अचानक किए गए बदलावों की वापसी है, जो अक्सर ट्रम्प के पहले कार्यकाल में देखने को मिलते थे, लेकिन उनके दूसरे कार्यकाल में ऐसे बदलाव कम ही हुए थे।

उनका कार्यकाल एंथनी स्कारामुची से भी छोटा रहा, जो 2017 में व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशंस डायरेक्टर के तौर पर सिर्फ 10 दिन तक इस पद पर रहे थे।

उनके जाने पर प्रतिक्रिया देते हुए, स्कारामुची ने ‘X’ पर लिखा, “रिकॉर्ड तो टूटने के लिए ही बनते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “लेकिन मुझे दूसरों के दुख में कोई खुशी नहीं मिलती।”

प्रेस सेक्रेटरी के पद से हटाए जाने के बावजूद, हो सकता है कि जकारिया ट्रम्प प्रशासन को पूरी तरह से न छोड़ें। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें प्रशासन में कोई दूसरी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

ABC न्यूज ने दो सूत्रों के हवाले से बताया कि केटी जकारिया को ट्रंप प्रशासन में ही किसी दूसरी जिम्मेदारी में भेजे जाने की संभावना है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बारे में जल्द ही आधिकारिक ऐलान किया जा सकता है।

हालांकि, व्हाइट हाउस ने अभी तक यह नहीं बताया है कि प्रेस सेक्रेटरी के पद पर जकारिया की जगह कौन लेगा।

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दिल्ली में तिरंगा मार्च से पहले CJP संस्थापक अभिजीत दिपके हिरासत में, नेहा बोरा ने सरकार पर उठाए सवाल

Abhijeet Dipke: दिल्ली में तिरंगा फहराने को लेकर प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से पहले कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके को हिरासत में लिया गया था। अब उन्हें एहतियातन हिरासत में रखा गया है। पार्टी ने कनॉट प्लेस में ‘लहरा दो तिरंगा’ नाम से प्रदर्शन करने की योजना बनाई थी।

वहीं, ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की प्रमुख नेहा बोरा को रविवार को रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस एक्ट की धारा 65 के तहत जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद उन्हें छोड़ा गया।

पुलिस के अनुसार, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 170 के तहत दिपके के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है। उन्हें आज, 17 अक्टूबर को एक विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट (SEM) के सामने पेश किया जाएगा।

पुलिस ने बताया कि CJP के संस्थापक को दो नोटिस भेजे गए थे, जिनमें उन्हें प्रस्तावित आंदोलन के लिए कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में न जाने का निर्देश दिया गया था, लेकिन कथित तौर पर उन्होंने इन निर्देशों का पालन नहीं किया।

पुलिस के मुताबिक, उन्होंने 50,000 रुपये का एक बॉन्ड भी भरा था और उन्हें एक साल तक सार्वजनिक शांति भंग न करने का निर्देश दिया गया था।

‘कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं’

अपनी रिहाई के बाद ANI से बात करते हुए, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा।

बोरा ने सवाल किया, “कानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। आम नागरिकों के साथ ऐसा बर्ताव किया जाता है जैसे वे कोई खूंखार अपराधी हों; हमारे देश में लंबे समय से यही चलन चला आ रहा है। मौजूदा आंदोलन ने साफ कर दिया है कि लोगों को किस तरह हिरासत में लिया जा रहा है—चाहे दिन हो या शाम, उन्हें पूरी रात हिरासत में रखा जाता है और अगले दिन सुबह या शाम को ही छोड़ा जाता है। आखिर किस अधिकार के तहत इसे सही ठहराया जा सकता है? किस कानून या आदेश के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को पूरी रात कैद में रखना जायज है?”

उन्होंने विवादित ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) प्रक्रिया को लेकर, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाने की CJP की मांग को फिर से दोहराया।

बोरा ने कहा, “कानूनी तौर पर, लोगों को-खासकर महिलाओं को सूर्यास्त के बाद रिहा कर दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। इसके अलावा, एक नया नैरेटिव (विमर्श) फैलाया जा रहा है-अराजकता और अव्यवस्था का। कैसी अराजकता और अव्यवस्था? वैसी ही, जैसी आपने सेंट्रल दिल्ली में फैलाई थी? दिल्ली के लोग चैन की सांस भी नहीं ले पा रहे हैं; वे काम पर जाने के लिए जो भी रास्ता चुनते हैं, वह बंद मिलता है। आप पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था फैला रहे हैं। कृपया, भारत के लोगों को बख्श दें। ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग (impeachment) चलाएं और SIR को रोकें, ताकि इस देश के आम नागरिक चैन की सांस ले सकें, सुकून महसूस कर सकें और उनके मतदान के अधिकार सुरक्षित रह सकें।”

बोरा ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस उन्हें अपने वकीलों से बात नहीं करने दे रही थी।

उन्होंने कहा, “उन्होंने (पुलिस ने) मेरा नाम, पता और अन्य विवरण मांगे। काफी देर तक, उन्होंने मुझे किसी कानूनी सलाहकार (वकील) से बात करने या सलाह लेने भी नहीं दिया। हमारे वकील 5-6 घंटे तक मुझसे संपर्क करने की कोशिश करते रहे; जब हमने किसी तरह उन्हें फोन किया, तब जाकर उन्हें मुझसे मिलने की अनुमति मिली। ये लोग लंबे समय से इसी तरह की हरकतें करते आ रहे हैं।”

CJP ने दिपके के ठिकाने के बारे में जानकारी मांगी

CJP ने आरोप लगाया है कि दिपके को किसी अज्ञात जगह पर ले जाया गया है और उनके वकीलों को उनसे बात नहीं करने दी जा रही है।

X पर एक पोस्ट में, CJP ने लिखा, “अभिजीत दिपके को दिल्ली पुलिस ने अगवा कर लिया है। उन्हें उठाए हुए 10 घंटे से ज्यादा हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उनके माता-पिता, वकीलों या CJP की टीम को उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है।”

यह घटनाक्रम CJP के अन्य सदस्यों, जिनमें सौरव दास और आशुतोष रांका शामिल हैं, को हिरासत में लिए जाने के बाद हुआ है। इन दोनों नेताओं को जंतर-मंतर में घुसने के आरोप में हिरासत में लिया गया था, जिसे अब विरोध-प्रदर्शन की जगह के रूप में मान्यता नहीं दी गई है।

बता दें कि CJP, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को वापस लेने और CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रही है।

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रैपिडो ड्राइवर ने पकड़ लिया हाथ और देने लगा क्रीपी इस्माइल! इस लड़की ने सुनाई पूरी दास्तां तो आया ये रिएक्शन

बेंगलुरु की एक महिला ने रैपिडो बाइक टैक्सी के एक राइडर पर गलत तरीके से छूने का आरोप लगाया है। महिला का कहना है कि उसे उसकी रिहायशी सोसाइटी के बाहर छोड़ने के बाद भी राइडर वहीं रुका रहा, जिससे वह असुरक्षित महसूस करने लगी। महिला ने इस घटना के बारे में ‘X’ (ट्विटर) पर पोस्ट किया, जिस पर बेंगलुरु सिटी पुलिस और राइड-हेलिंग प्लेटफॉर्म का ध्यान गया।

अपनी पोस्ट में महिला ने बाइक-टैक्सी यात्रियों की सुरक्षा के लिए किए गए इंतजामों पर सवाल उठाए। उसने बताया कि बारिश की वजह से वह पहले राइड लेने में हिचकिचा रही थी, लेकिन राइडर ने बार-बार उससे बुकिंग कैंसिल न करने के लिए कहा। उसने लिखा- “मुझे समझ नहीं आता कि ऐसे राइडर्स के लिए रैपिडो की कोई जवाबदेही कैसे नहीं है।”

“उसने मुझे अजीब सी मुस्कान के साथ मेरा हाथ पकड़ लिया”

महिला ने बताया कि ड्राइवर बहुत ज्यादा घुल-मिलकर बात कर रहा था और उसने उसे रेनकोट देने की भी कोशिश की। महिला ने आगे बताया कि ड्राइवर बार-बार पूछ रहा था कि क्या वह सहज (कंफर्टेबल) है। उसने कहा, “उसने मुझे मेरी सोसाइटी के पास छोड़ा और जब मैं उसे उसका हेलमेट वापस दे रही थी, तो उसने कुछ सेकंड के लिए मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे देखकर अजीब सी मुस्कान दी।”

उन्होंने आगे बताया कि जब उन्होंने पेमेंट करने के लिए QR कोड मांगा तो राइडर ने कहा कि बारिश की वजह से उसका फोन काम नहीं कर रहा है और उसने उनका फोन नंबर मांग लिया। फिर पेमेंट के लिए अपना नंबर देने को कहा। मैंने QR कोड पर ही जोर दिया और पेमेंट कर दिया।”

“मैं बहुत असुरक्षित और सदमे में महसूस कर रही थी”

अपने घर पर पहुंचने के बाद उन्होंने बताया कि वह तुरंत अपनी रेजिडेंशियल सोसाइटी के अंदर नहीं गईं क्योंकि उन्हें असुरक्षित महसूस हो रहा था। उन्हें तब और भी बड़ा झटका लगा, जब एक सिक्योरिटी गार्ड के जाने के लिए कहने के बावजूद राइडर वहीं एंट्री गेट के पास खड़ा रहा। गार्ड के दूसरी बार कहने पर वह वहां से गया।

महिला ने लिखा- “मैं बहुत असुरक्षित महसूस कर रही थी और सदमे में थी। हकीकत यह है कि खराब सुरक्षा इंतजामों की वजह से पीक आवर्स के दौरान भी आप बाइक, ऑटो या कैब में सुरक्षित महसूस नहीं कर सकते।”

बेंगलुरु सिटी पुलिस और रैपिडो ने उनकी शिकायत पर प्रतिक्रिया दी

महिला की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए बेंगलुरु सिटी पुलिस ने उनसे लोकेशन की जानकारी और संपर्क विवरण डायरेक्ट मैसेज (DM) के जरिए साझा करने को कहा। वहीं रैपिडो ने भी जवाब दिया, इस अनुभव के लिए माफी मांगी और आरोपों की गंभीरता को स्वीकार किया। उन्होंने लिखा, “इस परेशान करने वाले अनुभव के लिए हमें सचमुच खेद है। बिना सहमति के शारीरिक संपर्क और ऐसा व्यवहार जिससे आप असुरक्षित महसूस करें, बहुत गंभीर मामला हैं। उस कैप्टन को रैपिडो प्लेटफॉर्म से हमेशा के लिए सस्पेंड कर दिया गया है।”

रैपिडो ने आगे कहा-अगर कभी भी राइड के दौरान आप असहज या असुरक्षित महसूस करें तो तुरंत मदद पाने के लिए रैपिडो ऐप में दिए गए SOS विकल्प का इस्तेमाल करें। आपकी सुरक्षा और सम्मान हमारे लिए बहुत मायने रखते हैं।”

“यह बहुत भयानक है”

इस घटना ने इंटरनेट पर लोगों को गुस्से से भर दिया है और कई लोग रैपिडो से महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल पूछ रहे हैं। एक व्यक्ति ने कमेंट किया- “हे भगवान यह बहुत भयानक है। बिल्कुल भी बर्दाश्त करने लायक नहीं। उम्मीद है कि आप ठीक होंगी।”

एक यूजर ने कहा, “रैपिडो (Rapido) का इस्तेमाल करने से बचें। यहां डेटा प्राइवेसी नहीं है… राइड कैंसिल करने के बाद भी ड्राइवर आपको कॉल कर सकते हैं। हो सकता है कि इस बदतमीज इंसान ने आपका नंबर भी सेव कर लिया हो और वह आपसे संपर्क करने की कोशिश करे। भले ही थोड़ा महंगा पड़े, लेकिन उबर (Uber) या ओला (Ola) का इस्तेमाल करें। आप अपनी सुरक्षा के लिए पैसे दे रहे हैं।”

एक और व्यक्ति ने लिखा- “अरे बाप रे, यह तो बहुत ही डरावना है। उम्मीद है कि रैपिडो कोई ठोस कदम उठाएगा। नियमों को लागू करने के मामले में तो यह ऐप एकदम बेकार है।”

ये कार उड़ती भी है और हवा में पलटी भी मारती है! Elon Musk की Tesla ने दिखाया नया Roadster

Tesla : Tesla ने नई Roadster से पर्दा उठा दिया है। कंपनी का दावा है कि यह कार हवा में भी उछल सकती कंपनी का दावा है कि यह सुपरकार सिर्फ सड़क पर दौड़ेगी ही नहीं, बल्कि हवा में भी उछल सकती है। Yahoo Finance की रिपोर्ट के मुताबिक, कार में लगे एयर थ्रस्टर्स की मदद से यह कुछ देर के लिए हवा में उठ सकती है।टेक्सास के वाको में SpaceX फैसिलिटी में हुए डेमो में Tesla Roadster को रैंप से छलांग लगाते, हवा में 360 डिग्री घूमते और फिर सुरक्षित जमीन पर उतरते दिखाया गया। इस दौरान CEO एलन मस्क ने कहा, “खैर, यह काम कर गया।”

रैंप से छलांग लगाकर हवा में पहुंची Tesla Roadster

टेक्सास के वाको में SpaceX की फैसिलिटी में Tesla ने नई Roadster का डेमो किया। इसमें कार को रैंप से उछलते और हवा में घूमते हुए दिखाया गया। वैक्यूम फैन सिस्टम की मदद से कार रैंप पर टिकी रही, जबकि एयर थ्रस्टर्स ने हवा में उसका संतुलन बनाए रखने में मदद की। इसके बाद कार सुरक्षित जमीन पर उतर गई।कार्यक्रम में Roadster को कई Tesla गाड़ियों, यहां तक कि एक सेमी ट्रक के ऊपर से गुजरते हुए भी दिखाया गया। कंपनी ने इस डेमो के जरिए कार के खास फीचर्स और नई तकनीक को दिखाने की कोशिश की।

तीन वेरिएंट में आएगी कार

Tesla ने नई Roadster को तीन वेरिएंट में पेश किया है। हर मॉडल में सीटों की संख्या और परफॉर्मेंस के हिसाब से अलग-अलग फीचर्स मिलेंगे।

पहला वेरिएंट : यह सड़क पर चलाने के लिए तैयार दो सीटों वाला मॉडल है। इसमें मल्टी-मोड सक्शन सिस्टम दिया गया है, जो सड़क पर प्रदर्शन को बेहतर बनाता है।

दूसरा वेरिएंट : यह भी दो सीटों वाला मॉडल है। इसमें सक्शन सिस्टम के साथ पीछे की ओर कोल्ड-गैस थ्रस्टर्स दिए गए हैं। कंपनी के मुताबिक, यह 0 से 60 मील प्रति घंटे की रफ्तार 0.9 सेकंड से कम में पकड़ सकता है।

तीसरा वेरिएंट : यह एक सीट वाला मॉडल है। इसमें कार के चारों ओर कोल्ड-गैस थ्रस्टर्स लगे हैं, जो आगे और ऊपर की ओर गति देने के साथ हवा में घूमने में मदद करते हैं। इसी वेरिएंट को सीमित दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम बताया गया है।

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Braj Mohan Ram: ‘ओडिशा में भी BJP को मजबूत करूंगा’; शपथ ग्रहण से पहले नए राज्यपाल के बयान पर बवाल, जानिए कौन हैं बृज मोहन राम

Braj Mohan Ram: ओडिशा के नवनियुक्त राज्यपाल और झारखंड से तीन बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद रह चुके ब्रज मोहन राम पदभार संभालने से पहले ही विवादों में घिर गए हैं। ओडिशा की विपक्षी पार्टी बीजू जनता दल (BJD) नेराम के इस कथित बयान पर निराशा जताई है कि ‘पद संभालने के बाद वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) को मजबूत करने के लिए काम करेंगे।’ एक और विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने आरोप लगाया कि इससे BJP का असली चेहरा सामने आ गया है। विपक्षी पार्टियों ने मांग की है कि राम को वापस बुलाया जाए।

BJD ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें राम राज्यपाल का पद संभालने के बाद अपनी आगे की कार्ययोजना के बारे में बात करते हुए नजर आ रहे हैं। BJD ने एक बयान में कहा, “पीटीआई के वीडियो में उनकी बातें सुनकर हमें हैरानी हुई, जिसमें वह फिर से कहते हैं कि वह BJP को मजबूत करने के लिए काम करेंगे। हम इस टिप्पणी की निंदा करते हैं क्योंकि यह टिप्पणी इस तथ्य को दरकिनार करती है कि राज्यपाल पार्टी की राजनीति से ऊपर होते हैं।”

पूर्व सीएम नवीन पटनायक भड़के

ओडिशा के पूर्व सीएम और BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक ने उम्मीद जताई कि वे संवैधानिक गरिमा बनाए रखेंगे। ओडिशा विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, “ओडिशा के लोग पार्टी का काम करने के लिए मनोनीत राज्यपाल के उत्साह को देख रहे हैं। उम्मीद है कि महाप्रभु श्री जगन्नाथ उन्हें ओडिशा के लोगों की सेवा करने का जोश और शक्ति देंगे, जिससे वे संवैधानिक गरिमा बनाए रखते हुए निष्पक्ष रूप से अपने कर्तव्यों का पालन कर सकें।” उन्होंने पोस्ट में राष्ट्रपति भवन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग किया।

कांग्रेस का भी बीजेपी पर हमला

इस बीच, ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने X पर एक पोस्ट में कहा, “राज्यपाल की संवैधानिक जिम्मेदारी निष्पक्ष रूप से संविधान का पालन करना है, न कि किसी राजनीतिक पार्टी के चुनावी हितों को आगे बढ़ाना।” उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों को दलीय राजनीति से ऊपर रहना चाहिए। BJP नेता और तीन बार सांसद रह चुके राम को सोमवार को ओडिशा का राज्यपाल नियुक्त किया गया। राम के बयान पर ओडिशा BJP की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

बृज मोहन राम ने क्या कहा?

नवनियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम ने कहा कि वह गरीबों के लिए काम करेंगे। साथ ही बुनियादी मुद्दों के समाधान पर ध्यान देंगे और लोगों की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने का प्रयास करेंगे। राम ने कहा कि वह सुनिश्चित करेंगे कि ओडिशा तरक्की करे और लोगों को कोई परेशानी न हो। इस दौरान रिपोर्टर ने उनसे काम करने के तरीके को लेकर एक सवाल किया जिसके जवाब में उन्होंने कहा, “नहीं नहीं देखेंगे… वहां (ओडिशा) भी क्या स्थिति है तो वहां भी हम जोड़ेंगे। वहां भी मोर्चा का अपना संगठन है। उसको एक्टिव करके आप अपने बीजेपी के पास में वोट कैसे आए इस पर चिंता करेंगे।” उनके इसी बयान पर सियासी बवाल मच गया है।

बाद में दी सफाई

ओडिशा में ‘बीजेपी संगठन को मजबूत करने के लिए काम करूंगा’ वाले कथित बयान पर गुरुवार (15अक्टूबर ) को सफाई देते हुए नवनियुक्त राज्यपाल ब्रज मोहन राम ने न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “नहीं, मैंने ऐसा नहीं कहा। मैंने कहा था कि मैं सबके साथ मिलकर काम करूंगा। अब मैं दलीय राजनीति से ऊपर उठ चुका हूं। लेकिन जिस पार्टी से मैं जुड़ा रहा हूं, वह मेरी पूंजी है। उस पार्टी के लिए मेरे मन में हमेशा लगाव और प्रेम रहेगा। लेकिन मैं किसी खास पार्टी के लिए काम नहीं करूंगा। हम सबके हैं, सब हमारे हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मुझे एक जिम्मेदारी सौंपी गई है। मैं सबके साथ मिलकर इसे निभाऊंगा। शुरुआत में थोड़ा तालमेल बिठाने में समय लगेगा। लेकिन मैं ऐसा कर लूंगा… मैं संवैधानिक पद की मर्यादा के दायरे में रहकर काम करूंगा। एक राजनेता और संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के बीच फर्क होता है। इसलिए, मुझे इस बात का ध्यान रखते हुए काम करना होगा।”

कौन हैं बृज मोहन राम?

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झारखंड के पलामू जिला निवासी बृज मोहन राम को 12 अक्टूबर 2026 को ओडिशा का नया राज्यपाल नियुक्त किया। वह हरि बाबू कंभमपति की जगह लेंगे, जिन्होंने तीन जनवरी 2025 को पदभार संभाला था। राम ने अविभाजित बिहार में 1996, 1998 और 1999 में तीन बार पलामू लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया है। उन्होंने 1991 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य के तौर पर सेवाएं दीं। ब्रज मोहन राम का जन्म 1 जनवरी 1958 को तत्कालीन बिहार के पलामू जिले के चंदवा में हुआ था।

लातेहार से राज्यपाल का सफर

यह क्षेत्र अब झारखंड के लातेहार जिले में आता है। उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से संबंधित बीएस कॉलेज, लोहरदगा से ग्रेजुएट की पढ़ाई की। मीडिया रिपोर्ट्स में उनका पेशा कृषि बताया जाता है। उनके राजनीतिक जीवन की खास बात यह है कि उन्होंने ऐसे दौर में राजनीति में अपनी पहचान बनाई, जब झारखंड अलग राज्य नहीं बना था। उस समय पलामू और लातेहार जैसे क्षेत्र अविभाजित बिहार का हिस्सा थे।

विधायक से सांसद बनने और फिर लंबे समय तक चुनावी राजनीति से दूर रहने के बाद राज्यपाल पद तक पहुंचना उनके सार्वजनिक जीवन का नया अध्याय है। उनका शुरुआती राजनीतिक जीवन स्थानीय क्षेत्र से जुड़ा रहा। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक पारी शुरू की। उस समय बिहार की राजनीति में सामाजिक प्रतिनिधित्व, आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों और BJP के विस्तार का दौर चल रहा था।

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ब्रज मोहन राम ने वर्ष 1991 में अविभाजित बिहार की राजनीति में चुनावी सफलता हासिल की। वह भगवा पार्टी के टिकट पर लातेहार विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। फिर 1991 से 1995 तक बिहार विधानसभा के सदस्य रहे। राम की राजनीतिक पहचान में सामाजिक प्रतिनिधित्व की भूमिका भी महत्वपूर्ण रही।

रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने 1996 से 1998 के बीच रांची में वनांचल प्रदेश अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई। बाद के वर्षों में भी वह BJP के अनुसूचित जाति मोर्चे को सक्रिय करने में अपनी भूमिका का उल्लेख करते रहे। हाल ही में राज्यपाल नियुक्त होने के बाद उन्होंने कहा कि झारखंड में पार्टी के अनुसूचित जाति मोर्चे को सक्रिय बनाने में उनका योगदान रहा है।

CJP फंडिंग पर मैरी मिलबेन और अभिजीत दिपके आमने-सामने:मिलबेन बोलीं- फेल हुए तो अमेरिकी डोनर्स छोड़ देंगे, बेहतर है पीएम के साथ बैठो, भारत को आगे बढ़ाओ

अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के बीच तीखी बहस हुई। दोनों ने भारत में प्रदर्शन कर रहे संगठन की विदेशी फंडिंग को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधा। यह विवाद नई दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच हुआ। मिलबेन ने X पर दावा किया कि CJP को अमेरिका में रहने वाले डोनर्स से फंडिंग मिल रही है। उन्होंने भारत के युवाओं से इस संगठन की “विघटनकारी सोच” के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की थी। मिलबेन पर पलटवार करते हुए दीपके ने पूछा कि पीएम मोदी अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों ले रहे हैं। नई दिल्ली में प्रदर्शन के बीच विवाद विपक्षी दल और CJP नई दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इन दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में अनियमितताएं हुई हैं। इसी बीच मिलबेन और दिपके के बीच विदेशी फंडिंग को लेकर बयानबाजी शुरू हुई। दिपके ने मिलबेन को जवाब देते हुए कहा, “विदेशी नागरिकों को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार किसने दिया? हम अपने मुद्दों से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमें अपने देश के मामलों में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।” मैरी का जवाब- पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने में मदद करो अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अभिजीत दीपके के आरोप के जवाब में एक पोस्ट की है। मैरी मिलबेन ने पोस्ट में लिखा… “ओह डियर अभिजीत दिपके, सच सभी को आजाद करता है। आपको भी। और यह सच है: जब आप कामयाब नहीं होंगे, तो ये अमेरिकी डोनर्स आपको ऐसे छोड़ देंगे, जैसे कोई गर्म केक छोड़ देता है। और तुम सफल नहीं होगे, क्योंकि गैर-कानूनी काम कभी नहीं जीतते। इसके बजाय, अपनी अमेरिकी शिक्षा और टैलेंट का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए करो। पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने के लिए एक सकारात्मक आवाज़ बनो। सही काम करने की तुम्हारी हिम्मत का सच तुम्हारे अगले कदमों में दिखेगा।” प्रधानमंत्री मोदी जून 2023 में अपने अमेरिकी यात्रा के दौरान सिंगर मैरी मिलबेन से मिले थे। 4 मौकों पर मिलबेन ने मोदी को सपोर्ट किया 1. किसान आंदोलन पर: मिलबेन ने फरवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान मोदी सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्हें किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के मोदी के विजन पर भरोसा है। 2. मणिपुर हिंसा पर: अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी का समर्थन किया था। उन्होंने उस समय कहा था कि भारत को अपने नेता पर भरोसा है और मोदी मणिपुर के लोगों की आजादी के लिए लड़ेंगे। 3. BBC की गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर: मिलबेन ने BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की आलोचना करते हुए मोदी सरकार का समर्थन किया था। 2023 में आई इस डॉक्यूमेंट्री में 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। 4. CAA कानून पर: मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने पर भी मिलबेन ने मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी। भारत में भी CJP फंडिंग पर उठे थे सवाल बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दीपके की अमेरिका में पढ़ाई के खर्च पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या इसके पीछे अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस से जुड़ा कोई फाउंडेशन था। वहीं, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्ष और CJP पर विदेशी मदद से देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया था। इसके अलावा, अगस्त 2026 में RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने दीपके की पढ़ाई के खर्च और CJP के कानूनी सहायता फंड की जांच की मांग की थी। दीपके ने कहा था- CJP का खर्च दोस्त मिलकर उठाते हैं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। CJP के आंदोलनों के खर्च पर दीपके ने कहा था कि वह और उनके दोस्त मिलकर पैसा जुटाते हैं। उनके मुताबिक, संगठन को किसी बाहरी डोनर या बड़े उद्योगपति से आर्थिक मदद नहीं मिली है। आगे उन्होंने क्राउडफंडिंग से पैसा जुटाने की योजना भी बताई थी। विदेशी फंडिंग के आरोपों पर दीपके ने गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया था। उनका कहना था कि अगर आंदोलन में विदेशी पैसा आया है, तो इसकी जांच और रोकथाम की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है।

CJP फंडिंग पर मैरी मिलबेन और अभिजीत दिपके आमने-सामने:मिलबेन बोलीं- फेल हुए तो अमेरिकी डोनर्स छोड़ देंगे, बेहतर है पीएम के साथ बैठो, भारत को आगे बढ़ाओ

अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके के बीच तीखी बहस हुई। दोनों ने भारत में प्रदर्शन कर रहे संगठन की विदेशी फंडिंग को लेकर एक-दूसरे पर निशाना साधा। यह विवाद नई दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच हुआ। मिलबेन ने X पर दावा किया कि CJP को अमेरिका में रहने वाले डोनर्स से फंडिंग मिल रही है। उन्होंने भारत के युवाओं से इस संगठन की “विघटनकारी सोच” के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने की अपील की थी। मिलबेन पर पलटवार करते हुए दीपके ने पूछा कि पीएम मोदी अपने ही देशवासियों को बदनाम करने के लिए अमेरिकियों का समर्थन क्यों ले रहे हैं। नई दिल्ली में प्रदर्शन के बीच विवाद विपक्षी दल और CJP नई दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे हैं। वे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इन दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) में अनियमितताएं हुई हैं। इसी बीच मिलबेन और दिपके के बीच विदेशी फंडिंग को लेकर बयानबाजी शुरू हुई। दिपके ने मिलबेन को जवाब देते हुए कहा, “विदेशी नागरिकों को भारत के आंतरिक मामलों में दखल देने का अधिकार किसने दिया? हम अपने मुद्दों से निपटने में पूरी तरह सक्षम हैं। हमें अपने देश के मामलों में बाहरी लोगों के हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।” मैरी का जवाब- पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने में मदद करो अमेरिकी सिंगर मैरी मिलबेन ने अभिजीत दीपके के आरोप के जवाब में एक पोस्ट की है। मैरी मिलबेन ने पोस्ट में लिखा… “ओह डियर अभिजीत दिपके, सच सभी को आजाद करता है। आपको भी। और यह सच है: जब आप कामयाब नहीं होंगे, तो ये अमेरिकी डोनर्स आपको ऐसे छोड़ देंगे, जैसे कोई गर्म केक छोड़ देता है। और तुम सफल नहीं होगे, क्योंकि गैर-कानूनी काम कभी नहीं जीतते। इसके बजाय, अपनी अमेरिकी शिक्षा और टैलेंट का इस्तेमाल अच्छे कामों के लिए करो। पीएम के साथ बैठो और भारत को आगे बढ़ाने के लिए एक सकारात्मक आवाज़ बनो। सही काम करने की तुम्हारी हिम्मत का सच तुम्हारे अगले कदमों में दिखेगा।” प्रधानमंत्री मोदी जून 2023 में अपने अमेरिकी यात्रा के दौरान सिंगर मैरी मिलबेन से मिले थे। 4 मौकों पर मिलबेन ने मोदी को सपोर्ट किया 1. किसान आंदोलन पर: मिलबेन ने फरवरी 2021 में किसान आंदोलन के दौरान मोदी सरकार के कृषि कानूनों का समर्थन करते हुए कहा था कि उन्हें किसानों की जिंदगी बेहतर बनाने के मोदी के विजन पर भरोसा है। 2. मणिपुर हिंसा पर: अगस्त 2023 में मणिपुर हिंसा के मुद्दे पर भी उन्होंने मोदी का समर्थन किया था। उन्होंने उस समय कहा था कि भारत को अपने नेता पर भरोसा है और मोदी मणिपुर के लोगों की आजादी के लिए लड़ेंगे। 3. BBC की गुजरात दंगों पर बनी डॉक्यूमेंट्री पर: मिलबेन ने BBC की डॉक्यूमेंट्री ‘India: The Modi Question’ की आलोचना करते हुए मोदी सरकार का समर्थन किया था। 2023 में आई इस डॉक्यूमेंट्री में 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका पर सवाल उठाए गए थे। 4. CAA कानून पर: मार्च 2024 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) लागू होने पर भी मिलबेन ने मोदी सरकार के फैसले की तारीफ की थी। लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भारतीय मतदाताओं से मोदी को वोट देने की अपील भी की थी। भारत में भी CJP फंडिंग पर उठे थे सवाल बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने दीपके की अमेरिका में पढ़ाई के खर्च पर सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या इसके पीछे अमेरिकी कारोबारी जॉर्ज सोरोस से जुड़ा कोई फाउंडेशन था। वहीं, बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विपक्ष और CJP पर विदेशी मदद से देश में अस्थिरता फैलाने की कोशिश का आरोप लगाया था। इसके अलावा, अगस्त 2026 में RTI कार्यकर्ता अमित तिवारी ने दीपके की पढ़ाई के खर्च और CJP के कानूनी सहायता फंड की जांच की मांग की थी। दीपके ने कहा था- CJP का खर्च दोस्त मिलकर उठाते हैं कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर अभिजीत दीपके विदेशी फंडिंग के आरोपों को खारिज कर चुके हैं। CJP के आंदोलनों के खर्च पर दीपके ने कहा था कि वह और उनके दोस्त मिलकर पैसा जुटाते हैं। उनके मुताबिक, संगठन को किसी बाहरी डोनर या बड़े उद्योगपति से आर्थिक मदद नहीं मिली है। आगे उन्होंने क्राउडफंडिंग से पैसा जुटाने की योजना भी बताई थी। विदेशी फंडिंग के आरोपों पर दीपके ने गृह मंत्री अमित शाह से भी सवाल किया था। उनका कहना था कि अगर आंदोलन में विदेशी पैसा आया है, तो इसकी जांच और रोकथाम की जिम्मेदारी गृह मंत्रालय की है।

UP News: ‘जो भगवान श्री राम का विरोध करें…’; यूपी चुनाव से पहले अखिलेश यादव को बड़ा झटका, अभय सिंह समेत सपा के 3 विधायक BJP में शामिल

UP News: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी (SP) के प्रमुख अखिलेश यादव को बड़ा झटका लगा है। बुधवार (14 अक्टूबर) को SP के तीन बागी विधायक भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। समाजवादी पार्टी के ये तीन बागी विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुर्वेदी हैं। राकेश प्रताप सिंह अमेठी की गौरीगंज विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। जबकि अभय सिंह अयोध्या की गोसाईंगंज सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं। वहीं, विनोद चतुर्वेदी जालौन की कालपी विधानसभा सीट से विधायक हैं।

इन विधायकों ने 2022 का चुनाव SP के टिकट पर जीता था। लेकिन 2024 के राज्यसभा चुनाव में BJP उम्मीदवार के पक्ष में वोट कर दिया था। यूपी के अमेठी में बुधवार (14 अक्टूबर) को BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मौजूदगी में तीनों बागी सपा विधायक राकेश प्रताप सिंह, अभय सिंह और विनोद चतुवेर्दी BJP में शामिल हुए।

कौन हैं MLA अभय सिंह?

अभय सिंह भगवान राम की नगरी अयोध्या की गोसाईगंज विधानसभा सीट से विधायक हैं। सिंह भी समाजवादी पार्टी के एक प्रमुख नेता हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग के बाद अभय सिंह पर कार्रवाई हुई थी। बीजेपी के पक्ष में क्रॉस वोटिंग के बाद समाजवादी पार्टी ने अभय सिंह को पार्टी से निष्कासित कर दिया था। पार्टी नेतृत्व के साथ मतभेदों और राजनीतिक बयानों के कारण उनका नाम पहले भी सुर्खियों में रहा है। औपचारिक सदस्यता से पहले भी अभय सिंह कई मौकों पर भगवा पार्टी के मंच पर दिखाई दिए थे। 2027 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सियासत का प्रमुख केंद्र बन चुकी अयोध्या का सियासी तापमान अब और बढ़ने की उम्मीद है।

बुधवार को गोसाईंगंज के विधायक अभय सिंह आधिकारिक तौर पर भगवा पार्टी का दामन थाम लिया। इसके बाद अब वह BJP के लिए निर्भय होकर मैदान में उतर सकेंगे। अभय सिंह ने SP के टिकट पर 2012 और 2022 में गोसाईंगंज विधानसभा सीट जीती। 2017 के विधानसभा चुनाव में वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार इंद्र प्रताप उर्फ खब्बू तिवारी से हार गए थे। जबकि 2022 में सिंह ने BJP उम्मीदवार आरती तिवारी को 13,079 वोटों से हराया।

‘जो श्री राम का विरोध करेगा, हम लोग उसके विरोधी हो जाएंगे’

समाजवादी पार्टी के विधायक अभय सिंह ने BJP में शामिल होने पर न्यूज एजेंसी ANI से कहा, “जो मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम का विरोध करें, जो राष्ट्र का विरोध करेंगे, हम लोग उसके विरोधी हो जाएंगे। मर्यादा पुरुषोत्तम राम के बारे में जन-जन तक हिंदी और अवधि में पहुंचाने वाले, तुलसीदास ने राम चरित मानस को लिखा। उस रामचरित मानस को जलाया जाए, फाड़ा जाए। उसके बाद इस घटना पर कोई टिप्पणी न की जाए। उसके बाद दर्शन से रोका जाए। ये सब चीजें ऐसी हैं जो उचित नहीं हैं।”

कौन हैं राकेश प्रताप सिंह?

राकेश प्रताप सिंह अमेठी के गौरीगंज से विधायक हैं। सिंह हाईस्कूल तक की पढ़ाई की हुई है। वह साल 2012, 2017 और 2022 में तीन बार विधायक चुने गए हैं। 2022 में राकेश प्रताप सिंह सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे। उन्होंने शानदार जीत भी दर्ज की थी। लेकिन 2024 के राज्यसभा चुनाव के बाद से राकेश प्रताप सिंह सपा को धोखा देकर अपनी पार्टी के अन्य बागी विधायकों के साथ चले गए। इसके बाद अखिलेश यादव ने साल 2025 के जून महीने में राकेश सिंह को सपा से निकाल दिया था।

विनोद चतुर्वेदी के बारे में जानें

जालौन जिले की कालपी विधानसभा सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी भी  BJP में शामिल हो गए हैं। उन्होंने 2022 में समाजवादी पार्टी (SP) के टिकट पर निषाद पार्टी के उम्मीदवार छोटे सिंह को 2,816 वोटों से हराकर कालपी विधानसभा सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। कालपी निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने से पहले चतुर्वेदी ने यूपी के जालौन जिले में उरई विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था। वे 2007 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस (INC) के उम्मीदवार के तौर पर उरई सीट से चुने गए थे।

अखिलेश पर बोला हमला

राकेश प्रताप सिंह ने उनके BJP में शामिल होने पर ANI से कहा, “मैं अपने क्षेत्रवासियों का धन्यवाद देता हूं जिन्होंने हमारा समर्थन किया और मुझसे अनुरोध किया कि भाजपा की सदस्यता लीजिए। उन लोगों ने मुझसे कहा कि वे मेरे साथ हैं… 98% लोग जो अपना बूथ जिताते या हराते थे, वे समाजवादी पार्टी का परित्याग करेंगे और BJP की सदस्यता लेंगे।” उन्होंने आगे कहा, “विधायक विनोद चतुर्वेदी, अभय सिंह और मैं स्वयं भाजपा में शामिल हो रहा हूं। हमारे साथ ऐसे करीब 1000 लोग जो जनप्रतिनिधि या पूर्व जनप्रतिनिधि हैं वो शामिल होंगे…लगभग 1 दर्जन विधायक मंच पर मौजूद रहेंगे।”

इसके अलावा राकेश प्रताप सिंह ने एक X पोस्ट में लिखा, “14 अक्टूबर 2026 का दिन मेरे राजनीतिक जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और भावनात्मक दिन है। यह मेरे लिए केवल भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने का अवसर नहीं, बल्कि सनातन की रक्षा, अपनी आस्था, अपने संस्कारों और अपने सिद्धांतों के साथ एक नई राजनीतिक यात्रा प्रारंभ करने का बहुमूल्य दिन है।”

उन्होंने आगे कहा, “मैंने अपने राजनीतिक जीवन में सदैव अपनी सनातन संस्कृति, धार्मिक आस्था और सामाजिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा है। बीते समय में समाजवादी पार्टी के भीतर सनातन धर्म, हमारी धार्मिक परंपराओं और पवित्र ग्रंथों को लेकर जिस प्रकार की टिप्पणियां और घटनाएं सामने आईं, उनसे मेरी भावनाएँ बार-बार आहत हुईं। विशेष रूप से जब मुझ जैसे सैकड़ों विधायकों एवं राजनैतिक व्यक्तियों को आराध्य मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम जी के दर्शन करने ना जाने देना, तो वह क्षण मेरे लिए अत्यंत पीड़ादायक था। उसी दिन मेरे मन में यह विचार दृढ़ हो गया था कि जिस राजनीतिक विचारधारा के साथ मेरी आस्था और मेरा अंतर्मन सहमत नहीं है, उसके साथ आगे बढ़ना मेरे लिए संभव नहीं होगा।”

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