Ranbir Kapoor watch: ‘रामायणम्’ के ट्रेलर लॉन्च पर रणबीर कपूर ने पहनी 78 लाख रुपये घड़ी, ‘राम जन्मभूमि’ से खास कनेक्शन

Ranbir Kapoor Watch: रणबीर कपूर बेंगलुरु में ‘रामायणम्’ के इंटरनेशनल ट्रेलर लॉन्च इवेंट में शामिल हुए, जहां वे अपने सह-कलाकारों के साथ नजर आए। इस इवेंट में जहां अभिनेता के शानदार लुक ने सबका ध्यान खींचा, वहीं उनकी कलाई पर बंधी एक लग्जरी घड़ी भी चर्चा का विषय बन गई।

रणबीर ने ‘जैकब एंड कंपनी’ (Jacob & Co.) की ‘एपिक एक्स राम जन्मभूमि रोज गोल्ड स्पेशल एडिशन’ (Epic X Ram Janmabhoomi Rose Gold Special Edition) घड़ी पहनी थी, जिसकी कीमत 78 लाख रुपये है।

अपनी भारी-भरकम कीमत के अलावा यह घड़ी अपने अनोखे डिजाइन के लिए भी जानी जाती है। इसमें राम जन्मभूमि से जुड़ी कई बारीक आकृतियां बनी हैं, जिनमें अयोध्या का राम मंदिर, भगवान राम (हाथ में धनुष लिए हुए) और भगवान हनुमान शामिल हैं।

‘राम जन्मभूमि’ घड़ी की खासियत

‘जैकब एंड कंपनी’ के ‘एपिक एक्स’ (Epic X) कलेक्शन का हिस्सा यह ‘राम जन्मभूमि रोज गोल्ड स्पेशल एडिशन’ घड़ी आधुनिक घड़ी-निर्माण कला और धार्मिक प्रतीकों का एक बेहतरीन मिक्चर है।

‘एपिक एक्स’ सीरीज अपने खास डिजाइन और जालीदार काम (lattice-work) के लिए मशहूर है, लेकिन इस विशेष घड़ी में कुछ ऐसा है जो इसे कलेक्शन की बाकी घड़ियों से अलग बनाता है-इसमें राम मंदिर, भगवान राम और भगवान हनुमान की छोटी-छोटी प्रतिकृतियां (miniature replicas) बनी हुई हैं।

इस घड़ी में रोज गोल्ड का केस और नारंगी रंग का स्ट्रैप है, जिसमें एक पिन बकल लगा है। घड़ी का रोज गोल्ड क्लैस्प (clasp) बकल के रंग से मेल खाता है, जबकि नारंगी स्ट्रैप इसे एक आकर्षक लुक देता है। कुल मिलाकर इसका जटिल डिजाइन और चमकीले रंगों का इस्तेमाल इसे बेहद खास बनाता है।

‘जैकब एंड कंपनी’ ने 2015 में ‘एपिक एक्स’ कलेक्शन पेश किया था। इसके बाद 2022 में इसे बड़े स्तर पर री-डिजाइन किया गया, जिसमें कई सुधार किए गए और नई चीजों का इस्तेमाल किया गया। ‘राम जन्मभूमि’ एडिशन उसी डिजाइन शैली पर आधारित है, जिसमें इस पवित्र हिंदू स्थल से प्रेरित तत्वों को शामिल किया गया है।

‘जैकब एंड कंपनी’ की ‘एपिक एक्स राम जन्मभूमि’ घड़ी की कीमत

रणबीर कपूर द्वारा पहनी गई इस ‘रोज गोल्ड स्पेशल एडिशन’ घड़ी की कीमत 78 लाख रुपये है। इस घड़ी के अन्य वर्जन भी अलग-अलग कीमतों पर उपलब्ध हैं, जिनमें ‘टाइटेनियम एडिशन’ (Titanium Edition) शामिल है, जिसकी कीमत 35.88 लाख रुपये है। दूसरी ओर गोल्ड एडिशन वेरिएंट्स की कीमत 83 लाख रुपये से शुरू होकर 1.08 करोड़ रुपये तक जाती है।

रामायणम् फिल्म के बारे में

बेंगलुरु में हुए इंटरनेशनल ट्रेलर लॉन्च में फिल्म की कास्ट के कई सदस्य शामिल हुए, जिनमें साई पल्लवी, रवि दुबे, यश और रकुल प्रीत सिंह मौजूद थे। इस इवेंट में डायरेक्टर नितेश तिवारी, प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा ​​और कंपोजर ए.आर. रहमान भी शामिल हुए। नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित और नमित मल्होत्रा ​​व यश द्वारा प्रोड्यूस की गई फिल्म ‘रामायण राइज ऑफ ए लीजेंड’ 5 नवंबर 2026 को रिलीज होने वाली है।

रावण का यहां भगवान जैसा सम्मान! भारत के इन मंदिरों में होती है पूजा…अलग है यहां की कहानी

नितेश तिवारी के निर्देशक में बनी फिल्म ‘रामायण: पार्ट 1’ का पहला ट्रेलर रिलीज हो गया है। फैंस को फिल्म का ट्रेलर काफी पसंद आ रहा है। ये फिल्म दो पॉर्ट में रिलीज होने वाली है। पहला पॉर्ट दिवाली 2026 और दूसरा पॉर्ट दिवाली 2027 पर सिनेमाघरों में आएगा। राम और सीता की कहानी में रावण का नाम हमेशा विलेन के तौर पर रहा है। वहीं आपको ये जानकर हैरानी होगी की भारत में कई हिस्सों में ऐसे मंदिर मौजूद हैं, जहां रावण की पूजा होती है।

मान्यता है कि रावण ने शिव तांडव स्तोत्र की रचना की थी और वह वीणा वादन में भी निपुण थे। इसी वजह से देश के कुछ हिस्सों में रावण के मंदिर बने हुए हैं, जहां लोग उनकी श्रद्धा के साथ पूजा करते हैं। आइए जानते हैं उन मंदिरों के बारे में

बिसरख, उत्तर प्रदेश: बिसरख (उत्तर प्रदेश) को कई लोग रावण का जन्मस्थान मानते हैं। इसी वजह से यहां दशहरे पर रावण के पुतले नहीं जलाए जाते। नवरात्रि के दौरान गांव के लोग विशेष पूजा-पाठ और यज्ञ कर रावण की आत्मा की शांति की कामना करते हैं। यहां स्थित प्राचीन विश्रवेश्वर महादेव मंदिर भी काफी प्रसिद्ध है। मान्यता है कि इस मंदिर में मौजूद दुर्लभ अष्टकोणीय शिवलिंग की स्थापना रावण के पिता महर्षि विश्रवा ने की थी, इसलिए यह स्थान रावण से जुड़ी आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।

मंदसौर, मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश का मंदसौर रावण से जुड़ी मान्यताओं के कारण खास महत्व रखता है। ऐसा कहा जाता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी का मायका इसी क्षेत्र से था, इसलिए यहां रावण को दामाद के रूप में सम्मान दिया जाता है। स्थानीय लोग रावण को भगवान शिव का परम भक्त और महान विद्वान मानते हैं। शहर में रावण की करीब 35 फुट ऊंची प्रतिमा भी स्थापित है। दशहरे के दिन यहां कई लोग रावण के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हैं और उसकी स्मृति में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

बैजनाथ मंदिर, हिमाचल प्रदेश: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित बैजनाथ मंदिर का संबंध भी रावण से जुड़ी प्राचीन मान्यताओं से जोड़ा जाता है। लोककथाओं के अनुसार, रावण ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यहां कठोर तपस्या की थी और अपनी भक्ति का अद्भुत प्रमाण दिया था। इसी कारण बैजनाथ में दशहरे पर रावण का पुतला नहीं जलाया जाता। एक अन्य मान्यता के मुताबिक, भगवान शिव ने रावण को शिवलिंग लंका ले जाने की अनुमति दी थी, लेकिन शर्त थी कि उसे रास्ते में कहीं जमीन पर नहीं रखना होगा। बैजनाथ पहुंचने पर परिस्थितिवश शिवलिंग जमीन पर रख दिया गया और वह वहीं स्थापित हो गया। तभी से यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखता है।

गढ़चिरौली, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले में रहने वाले कुछ गोंड आदिवासी समुदाय रावण और उसके पुत्र मेघनाद को पूजनीय मानते हैं। फाल्गुन महीने में मनाए जाने वाले अपने पारंपरिक त्योहार के दौरान वे दोनों की विशेष पूजा करते हैं। समुदाय की अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रावण को महान शासक और सम्मानित व्यक्तित्व माना जाता है। इसी वजह से यहां उसकी याद में धार्मिक आयोजन किए जाते हैं और उसे श्रद्धा के साथ सम्मान दिया जाता है।

काकीनाडा, आंध्र प्रदेश: आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में एक ऐसा अनोखा मंदिर है, जो रावण की भगवान शिव के प्रति अटूट श्रद्धा से जुड़ा माना जाता है। यहां विशाल शिवलिंग के पास बना ये मंदिर स्थानीय मान्यताओं के कारण खास महत्व रखता है। कहा जाता है कि रावण ने स्वयं इस स्थान को भगवान शिव की आराधना के लिए चुना था। यही वजह है कि आंध्र प्रदेश में यह स्थान उन चुनिंदा जगहों में शामिल है, जहां रावण को श्रद्धा और सम्मान के साथ याद किया जाता है।

डिस्केलमर- यहां पर दी गई जानकारी पौराणिक कथाओं और मान्याताओं पर निर्धारित है।