Skoda India to bring EVs as limited imports next year

Skoda India to bring EVs as limited imports next year
Skoda Peaq front quarter static

Skoda Auto India plans to bring electric vehicles from its global portfolio to India in limited volumes next year as the Czech automaker looks to establish its presence in the EV market. According to Ashish Gupta, Brand Director, Skoda Auto India, the company needs an electric vehicle in its portfolio not only to meet future regulatory requirements but also to remain relevant as EV adoption gathers pace in India.

Skoda India to bring EVs: Additional details 

“A lot of things are under discussion. So, for meeting the CAFÉ norms, there are a lot of opportunities available along with electrification, which has to be the cornerstone of meeting all compliance regulations. So that is something which we are aggressively working on,” Gupta told our sister publication, Autocar Professional.

Gupta added that the company needs an electric car in its portfolio since adoption has grown in the last 3 months owing to increasing fuel prices. While Skoda has yet to announce a specific locally manufactured EV for India, Gupta confirmed that the company plans to introduce EVs from its global line-up next year.

“It may not be a local EV, but yes, we just had two blockbuster launches globally of the Epiq and the Peaq. The Elroq is the best-selling EV in Europe. So these are opportunities available to us in limited batches,” he said. He added that in the current duty structure, it will not be possible to bring them at price points that will get volumes. “But definitely we need to urgently showcase our EV credentials and the proof point to India,” he added. 

This will allow Skoda to establish a presence in the EV market without immediately committing to the significant investment required to localise an electric model. With imported EVs still facing a challenging cost structure, Gupta said the initial objective would be to demonstrate the brand’s technology and capabilities rather than chase mass-market volumes. 

Skoda India’s hybrid ambitions take a slow gear 

Skoda’s approach to hybrids, meanwhile, appears less certain. Gupta said the company had previously viewed hybrids as a potentially stronger opportunity than EVs in India, but market data over the past two years has changed his assessment.

“Two years ago, I would have said I would take a bet on hybrid more than EV. But the tax structure has not helped anybody. In the last year, pure hybrids have stayed at 2% of the market. They have not gone beyond that. So, I am not sure whether hybrid is the right way to go. And what the last 6 months have also shown us is that people are more than willing to go for EVs now,” he said. 

The current trade and taxation structure also influences the company’s hesitation. Gupta said the India-EU Free Trade Agreement, while potentially creating opportunities for imported petrol and diesel models, does not provide similar benefits for EVs and hybrid electric vehicles. “I think from a global portfolio point of view, and if I want to bring the cars from the global portfolio with the contours of the FTA as they are, petrol and diesel will definitely be an opportunity. The diesel opportunity opens up; HEVs and electrics do not have any benefit, unfortunately,” he said. 

Gupta said the brand’s positioning in India is a bit above mass and below luxury. “That’s our natural positioning; that’s why customers buy us as well, and if we try to sell to cheap customers, they don’t buy us. If we try to sell to expensive customers, they don’t buy from us. So we have to stay true to our positioning and how customers see us,” he said. The immediate priority, Gupta adds, is to get EVs into the country as the company continues to assess which powertrains can deliver the right combination of regulatory compliance, customer demand and commercial viability.

With inputs from Ketan Thakkar

EPF Retirement Investment: रिटायरमेंट के बाद नियमित कमाई के लिए EPF का पैसा कहां लगाएं? एक्सपर्ट्स से जानिए

EPF Retirement Investment: कई सैलरीड कर्मचारी रिटायरमेंट के समय Employees’ Provident Fund (EPF) में काफी अच्छा खासा पासा जमा कर लेते हैं। लेकिन जैसे ही सैलरी बंद होती है, असली चुनौती शुरू होती है। सवाल यह होता है कि इस पैसे को लंबे समय तक कैसे चलाया जाए। क्या पूरा पैसा EPF में ही रखा जाए या महंगाई से बचने के लिए कुछ हिस्सा बाजार से जुड़े निवेश में लगाया जाए? कितना जोखिम लेना सही होगा? और एकमुश्त रकम से नियमित आय कैसे बनाई जाए?

अगर आपके पास EPF में बड़ा कॉर्पस है, तो रिटायरमेंट के बाद लक्ष्य सिर्फ पैसे को सुरक्षित रखना नहीं होता। जरूरी यह भी है कि यह पैसा आने वाले वर्षों में आपके खर्चों को पूरा करने के लिए काम करता रहे।

रिटायरमेंट के बाद EPF पर ब्याज कैसे मिलता है

रिटायरमेंट के बाद EPF पर मिलने वाले ब्याज को लेकर अक्सर उलझन रहती है। Kustodian Life के फाउंडर कुणाल काबरा बताते हैं कि EPF नियमों के मुताबिक- 58 साल को आधिकारिक रिटायरमेंट उम्र माना जाता है। रिटायरमेंट के बाद EPF में योगदान बंद हो जाता है, लेकिन बैलेंस पर कुछ समय तक ब्याज मिलता रहता है।

नियम दो तरह से लागू होते हैं। अगर कोई व्यक्ति 58 साल की उम्र में रिटायर होता है, तो उसके EPF बैलेंस पर तीन साल तक यानी 61 साल की उम्र तक ब्याज मिलता है। लेकिन अगर कोई 58 साल से पहले रिटायर होता है, तो उसे ब्याज सिर्फ 58 साल की उम्र तक ही मिलेगा। इसका मतलब है कि 58 साल एक तरह से कट-ऑफ उम्र है। तीन साल तक ब्याज मिलने का फायदा तभी मिलता है, जब रिटायरमेंट आधिकारिक उम्र यानी 58 साल पर हो।

इसे उदाहरण से समझिए

अब मान लीजिए कि अगर कोई 57 साल में रिटायर होता है, तो उसे ब्याज 60 साल तक मिलेगा। अगर कोई 55 साल में रिटायर होता है, तो ब्याज 58 साल तक मिलेगा। यहां तक कि अगर कोई 45 साल में रिटायर होता है, तब भी ब्याज केवल 58 साल तक ही मिलेगा।

आमतौर पर EPF पर मिलने वाली ब्याज दर करीब 8 प्रतिशत के आसपास रहती है, लेकिन यह ब्याज इन्हीं तय सीमाओं के भीतर मिलता है। यहां तक कि अगर कोई व्यक्ति 58 के बाद भी काम करता रहे, तब भी नए EPF योगदान आम तौर पर बंद हो जाते हैं। ब्याज 61 साल की उम्र तक ही सीमित रहता है। इसी वजह से एक्सपर्ट मानते हैं कि रिटायरमेंट के बाद केवल EPF पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता।

फिक्स्ड इनकम का इंतजाम जरूरी

रिटायरमेंट के बाद सुरक्षित निवेश वाले हिस्से में भी केवल एक साधन पर निर्भर रहना सही नहीं माना जाता। Master Capital Services में वेल्थ मैनेजमेंट की AVP आकांक्षा शुक्ला कहती हैं कि EPF मुख्य रूप से बचत जमा करने का साधन है, न कि रिटायरमेंट में नियमित आय देने वाला साधन।

इसलिए रिटायरमेंट के बाद बचत को इस तरह व्यवस्थित करना जरूरी होता है कि उससे नियमित आय मिलती रहे। उदाहरण के तौर पर Senior Citizens’ Savings Scheme (SCSS) अपेक्षाकृत ज्यादा और स्थिर आय दे सकती है। वहीं बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट भी अपनी सादगी और तय रिटर्न की वजह से कई लोगों की पसंद बने रहते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो मासिक आय चाहते हैं।

इसके अलावा डेट म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में लचीलापन और लिक्विडिटी जोड़ सकते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनके जरिए जरूरत के मुताबिक समय-समय पर पैसे निकालना आसान हो सकता है।

रिटायरमेंट में भी इक्विटी की भूमिका

कई रिटायर्ड लोगों को लगता है कि इक्विटी से पूरी तरह दूर रहना सुरक्षित रहेगा। लेकिन ऐसा करने से एक और जोखिम पैदा हो सकता है। समय के साथ महंगाई आपकी खरीद क्षमता को कम कर सकती है।

आकांक्षा शुक्ला के मुताबिक, बढ़ती औसत उम्र और महंगाई को देखते हुए रिटायरमेंट पोर्टफोलियो में इक्विटी की भूमिका अब धीरे धीरे जरूरी होती जा रही है।

आमतौर पर 15 से 20 प्रतिशत तक इक्विटी निवेश, खासकर लार्ज-कैप, इंडेक्स या हाइब्रिड फंड के जरिए, पोर्टफोलियो को लंबे समय में बढ़ने में मदद कर सकता है। यहां मकसद बहुत ज्यादा रिटर्न कमाना नहीं होता, बल्कि यह सुनिश्चित करना होता है कि आपका कॉर्पस समय के साथ खत्म न हो।

सही एसेट एलोकेशन क्यों जरूरी है

रिटायरमेंट के बाद पोर्टफोलियो का संतुलन बहुत महत्वपूर्ण होता है। इससे एक तरफ नियमित आय मिलती रहती है और दूसरी तरफ महंगाई से भी बचाव होता है।

आकांक्षा शुक्ला के अनुसार अगर किसी के पास करीब 3 करोड़ रुपये का कॉर्पस है, तो निवेश को चार हिस्सों में बांटना एक सामान्य रणनीति हो सकती है। इसमें EPF और अन्य फिक्स्ड इनकम साधन, डेट निवेश, इक्विटी और एक छोटा इमरजेंसी फंड शामिल हो सकता है। असल में यह डिस्ट्रीब्यूशन कुछ इस तरह हो सकता है:

  • 40 से 50 प्रतिशत फिक्स्ड इनकम
  • 30 से 35 प्रतिशत डेट निवेश
  • 15 से 20 प्रतिशत इक्विटी
  • और एक छोटा इमरजेंसी फंड

एकमुश्त रकम से नियमित आय कैसे बनाएं

रिटायरमेंट के समय मिलने वाली बड़ी रकम को सही तरीके से निवेश करना जरूरी होता है। Arihant Capital Markets की CEO Wealth स्वाति जैन के अनुसार, पूरी रकम एक साथ निवेश करने की बजाय Systematic Transfer Plan (STP) का इस्तेमाल किया जा सकता है।

इसमें पैसा पहले कम जोखिम वाले डेट या लिक्विड फंड में रखा जाता है और फिर 6 से 12 महीनों के दौरान धीरे धीरे इक्विटी या हाइब्रिड फंड में ट्रांसफर किया जाता है। इससे बाजार के उतार चढ़ाव का जोखिम कम हो जाता है।

नियमित आय के लिए Systematic Withdrawal Plan (SWP) भी बेहतर तरीका हो सकता है। इसमें निवेश से तय अंतराल पर एक निश्चित रकम निकाली जाती है, जिससे नियमित कैश फ्लो बना रहता है।

एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि एक से दो साल के खर्च के बराबर रकम सुरक्षित निवेश में रखी जाए, ताकि बाजार गिरने के समय मजबूरी में पैसे निकालने की जरूरत न पड़े। इसके बाद SWP के जरिए नियमित आय बनाई जा सकती है।

रिटायरमेंट में सुरक्षित निकासी कितनी हो

स्वाति जैन के मुताबिक, इसके लिए बकेट रणनीति अपनाना इस्तेमाल हो सकता है। इसमें छोटे समय की जरूरतों के लिए डेट निवेश से SWP किया जाता है और लंबी अवधि की ग्रोथ के लिए इक्विटी में निवेश रखा जाता है।

एक्सपर्ट्स आम तौर पर 4 से 5 प्रतिशत सालाना निकासी को सुरक्षित मानते हैं। यानी अगर किसी के पास 3 करोड़ रुपये का कॉर्पस है, तो वह सालाना लगभग 12 से 15 लाख रुपये निकाल सकता है। यह दर आम तौर पर 20 से 25 साल तक टिकाऊ मानी जाती है, बशर्ते पोर्टफोलियो संतुलित बना रहे। अगर शुरुआती वर्षों में इससे ज्यादा पैसा निकाला जाए, तो भविष्य में कॉर्पस जल्दी खत्म होने का खतरा बढ़ सकता है।

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Electronics Manufacturing: सरकार ने ₹7877 करोड़ के 31 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी, Wipro समेत कई कंपनियों के शेयर फोकस में

Electronics Manufacturing: केंद्र सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) के तहत ₹7,877 करोड़ के 31 नए निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इन प्रोजेक्ट्स से ₹82,243 करोड़ का प्रोडक्शन होने की उम्मीद है। इस मंजूरी के बाद Wipro, PCBL Chemical, Centum Electronics और Syrma SGS जैसे शेयर फोकस में रह सकते हैं।

निवेश लक्ष्य से आगे निकली योजना

नए प्रोजेक्ट्स के बाद ECMS के तहत मंजूर कुल निवेश ₹69,548 करोड़ पहुंच गया है। यह स्कीम के शुरुआती ₹59,350 करोड़ के लक्ष्य से ज्यादा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अब तक 106 कंपनियों को मंजूरी मिल चुकी है। इनमें 38 प्रोजेक्ट्स में उत्पादन शुरू हो चुका है। वहीं, 16 प्रोजेक्ट्स पर निर्माण का काम चल रहा है।

इन कंपनियों को मिली मंजूरी

कंपनीमंजूर निवेश
Wipro Global Engineering₹1,401 करोड़
Micromax Precision Moulding₹565 करोड़
PCBL Chemical₹329 करोड़
Minda Instrument₹270 करोड़
Centum Electronics (दो प्रोजेक्ट)₹106 करोड़
VVDN Technologies₹100 करोड़
Mitsubishi Electric₹99 करोड़
Syrma SGS₹60 करोड़

10 राज्यों में लगेंगे नए प्रोजेक्ट

MeitY सचिव एस. कृष्णन ने बताया कि ये प्रोजेक्ट 10 राज्यों में लगाए जाएंगे। इनमें कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट शामिल हैं।

कैमरा और डिस्प्ले मॉड्यूल को भी मंजूरी मिली है। कैपिटल गुड्स और एनोड मटेरियल भी इसमें शामिल हैं। कनेक्टर्स, स्पीकर्स और माइक्रोफोन को भी मंजूरी दी गई है। एंटेना, कैपेसिटर, फिल्टर और रेयर अर्थ मैग्नेट भी इस सूची का हिस्सा हैं। कॉपर-क्लैड लैमिनेट जैसे प्रोडक्ट्स को भी मंजूरी मिली है।

हर हफ्ते हो रही हैं मंजूरियां

एस. कृष्णन ने कहा कि उद्योग से अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। इसी वजह से सरकार अब लगभग हर हफ्ते या 10 दिन में मंजूरी बैठकें कर रही है। जिन कैटेगरी में आवेदन खुले हैं, उनमें जुलाई 2027 तक आवेदन किए जा सकेंगे।

कई प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू

कई मंजूर प्रोजेक्ट्स में काम शुरू हो चुका है। कुछ जल्द कमर्शियल प्रोडक्शन तक पहुंच सकते हैं।

इनमें Tata Electronics का होसुर प्लांट शामिल है। Dixon Technologies का नोएडा प्रोजेक्ट भी आगे बढ़ रहा है। Kaynes का चेन्नई के पास PCB प्लांट तैयार हो रहा है। Motherson का कांचीपुरम प्लांट और Wipro का लैमिनेट प्लांट भी प्रगति पर हैं।

सरकार ने क्या कहा?

अश्विनी वैष्णव ने कहा कि निवेश का लक्ष्य पार हो गया है। लेकिन घरेलू डिजाइन क्षमता और स्वदेशी सप्लाई चेन पर अभी और काम करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग में Six Sigma जैसे उच्च गुणवत्ता मानक अपनाना भी जरूरी है। Six Sigma एक मैन्युफैक्चरिंग और क्वालिटी कंट्रोल का तरीका है। इसका मकसद प्रोडक्शन में गलती को लगभग शून्य तक लाना होता है।

केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में ECMS का आवंटन ₹22,919 करोड़ से बढ़ाकर ₹40,000 करोड़ कर दिया था। इस स्कीम को मार्च 2025 में मंजूरी मिली थी। सरकार का लक्ष्य 2030 तक भारत में 500 अरब डॉलर का इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्शन हासिल करना है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Shiprocket IPO Allotment Date: करीब 100 गुना सब्सक्राइब हुआ, जानिए लेटेस्ट GMP और अलॉटमेंट चेक करने का पूरा प्रोसेस

Shiprocket IPO: ई-कॉमर्स एनएबलमेंट प्लेटफॉर्म Shiprocket के IPO को करीब 100 गुना का जोरदार सब्सक्रिप्शन मिला। यह आईपीओ 12 से 14 अगस्त तक खुला था। शिपरॉकेट ने अपने 92-97 रुपये का प्राइस बैंड फिक्स किया था। Shiprocket IPO का अलॉटमेंट 17 अगस्त को फाइनल होने की संभावना है। इसके बाद कंपनी के शेयर 19 अगस्त को NSE और BSE पर लिस्ट हो सकते हैं।

IPO का आकार कितना है?

Shiprocket का IPO ₹1,617.48 करोड़ का है। इसमें ₹885.50 करोड़ के नए शेयर जारी किए गए। वहीं ₹731.98 करोड़ के शेयर ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए बेचे गए।

OFS में Tribe Capital, Moore Strategic Ventures, Lightrock, गौतम कपूर, साहिल गोयल, विशेष खुराना और Agility International Investment जैसे मौजूदा निवेशकों ने हिस्सेदारी बेची।

शिपरॉकेट पैसे का इस्तेमाल कहां करेगी?

कंपनी IPO से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल मार्केटिंग बढ़ाने, टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने, कुछ कर्ज चुकाने और संभावित अधिग्रहण जैसे कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी।

Temasek और Zomato के निवेश वाली Shiprocket अब सिर्फ शिपिंग कंपनी नहीं रह गई है। यह D2C ब्रांड्स और MSMEs को घरेलू शिपिंग, क्रॉस-बॉर्डर शिपिंग, फुलफिलमेंट, विज्ञापन, कैपिटल सॉल्यूशंस और हाइपरलोकल डिलीवरी जैसी सेवाएं देती है।

ग्रे मार्केट में कैसा है माहौल?

Investorgain के मुताबिक, रविवार को Shiprocket का GMP ₹32 रहा। यह इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 33% प्रीमियम दिखाता है। हालांकि, 13 अगस्त को यह ₹36.50 था, यानी इसमें हल्की नरमी आई है। लिस्टिंग तक GMP में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

NSE अलॉटमेंट स्टेटस कैसे चेक करें?

  • NSE की IPO Bid Details वेबसाइट खोलें।
  • Equity & SME IPO बिड डिटेल्स चुनें।
  • Symbol में SHIPROCKET चुनें।
  • PAN या एप्लिकेश नंबर दर्ज करें।
  • सबमिट पर क्लिक करें।

KFin Technologies पर अलॉटमेंट स्टेटस कैसे चेक करें?

  • KFin Technologies का IPO स्टेटस पोर्टल खोलें।
  • Shiprocket Ltd चुनें।
  • डीमैट नंबर, एप्लिकेशन नंबर या PAN में से कोई एक दर्ज करें।
  • सबमिट पर क्लिक करें।

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Investment Mantra : एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड दे रहा एनर्जी कंपनियों में निवेश का सीधा मौका, जानिए क्या है खासियत

Investment Mantra : एनर्जी और सोना-चांदी दोनों इस वक्त बाजार के फोकस में हैं। एक तरफ जहां क्रूड में तेज उतार-चढ़ाव से एनर्जी सेक्टर सीधे रडार पर है और सोने-चांदी करेक्शन के बाद बुलियन सभी को लुभा रहा है। लेकिन क्या अभी एनर्जी और सोने-चांदी में निवेश का मौका है? यहां हम आपकी यही मुश्किल दूर करने की कोशिश करेंगे। लेकिन पहले हम आपको बता दें कि बाजार में इन दिनों Axis Nifty Energy Index Fund का NFO खुला हुआ है। क्या इसमें निवेश करके एनर्जी सेक्टर में एक्सपोजर बनाना चाहिए? इन्हीं सब बातों पर चर्चा करने के लिए हमारे साथ हैं मनीफ्रंट (Moneyfront) के CEO और को-फाउंडर मोहित गर्ग।

आइए पहले जान लेते हैं निफ्टी एनर्जी इंडेक्स के बारे में

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स में एक्सपोजर की बात करें तो इसमें ऑयल एंड गैस, पावर जेनरेशन, ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन, रिन्यूएबल एनर्जी, एनर्जी इक्विपमेंट और एनर्जी से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर शामिल है।

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स की खासियत यह है कि इसमें 500 में से अधिकतम 40 शेयरों पर फोकस है। किसी भी एक शेयर का वेटेज 10% से ज्यादा नहीं है। वहीं, किसी एक सेक्टर का वेटेज 25% से ज्यादा नहीं है। साल में दो बार मार्च और सितंबर में रीकंस्ट्रक्शन होता है।

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स:टॉप 10 होल्डिंग्स

इसकी कोल इंडिया में 10%, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 9.9%, ONGC में 9.5%, NTPC में 5.9%, GAIL में 4.9%, पावर ग्रिड में 4.6%, सुजलॉन एनर्जी में 4.2%, CG पावर में 3.9%, GE वर्नोवा में 3.6% और BHEL में 3.6% होल्डिंग है।

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स: इन सेक्टर्स में निवेश

हेवी इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट में 25.5%, रिफाइनिंग में 15%, ऑयल एक्सप्लोरेशन में 11.8%, पावर जेनरेशन में 11.8% और कोल में 10% निवेश है।

निफ्टी एनर्जी इंडेक्स: निवेश कटेगरी

इसका लार्जकैप 72%, मिडकैप में 23% और स्मॉलकैप में 6% निवेश है।

निफ्टी एनर्जी में रिटर्न जोरदार

निफ्टी एनर्जी ने 1 साल में 10.1% रिटर्न दिया है। जबकि, निफ्टी ने इसी अवधि में 1.7 फीसदी रिटर्न दिया है। इसने तीन साल में 18.8% रिटर्न दिया है। इसी अवधि में निफ्टी ने 12.9 फीसदी रिटर्न दिया है। 5 साल में इसने 16.7% और निफ्टी ने 12.4% रिटर्न दिया है। 5 साल में इसने 18.7% और निफ्टी ने 13.9% रिटर्न दिया है। 25 साल में इसने 17.8% और निफ्टी ने 16.5% रिटर्न दिया है।

एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड को जाने

एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड एक इक्विटी इंडेक्स फंड है। इसका बेंचमार्क निफ्टी एनर्जी TRI है। इसका NFO खुला 7 अगस्त को खुला है जो 21 अगस्त को बंद होगा। इसमें न्यूनतम 100 रुपए का निवेश किया जा सकता है। इसका NFO NAV 10 रुपए है। इसमें रिस्क काफी हाई है। इस फंड मैनेजर्स नंदिक मलिक और रोहित गौतम हैं। एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड का एक्जिट लोड 15 दिन के भीतर 0.25% और 15 दिन के बाद निल है।

एक्सिस निफ्टी एनर्जी इंडेक्स फंड: एनर्जी में बड़ा मौका

अगले दशक में भारत में 580+ GW पावर जेनरेशन का अनुमान है। इसमें रिन्यूएबल एनर्जी की बड़ी हिस्सेदारी होगी। अगले दशक में ट्रांसमिशन,स्टोरेज,नेचुरल गैस इंफ्रा में निवेश बढ़ेगा। अगले दशक में ग्रिड मॉडर्नाइजेशन में भी निवेश बढ़ेगा।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

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10 लाख रुपये की FD पर कहां होगी सबसे ज्यादा कमाई? जानें कौन-कौन से बैंक दे रहे 8% से ज्यादा ब्याज

Best return on FDs: अपनी गाढ़ी कमाई को सुरक्षित रखते हुए उस पर बेहतर रिटर्न पाने के लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) हमेशा से भारतीय निवेशकों की पहली पसंद रहा है। अगस्त 2026 के आंकड़ों के मुताबिक अगर आप 10 लाख रुपये की बड़ी रकम एफडी में निवेश करने की योजना बना रहे हैं तो स्मॉल फाइनेंस बैंक आपको सबसे ज्यादा ब्याज दे रहे हैं। एफडी इंट्रेस्ट रेट में एक छोटा सा अंतर भी लंबे समय में आपकी कुल कमाई को काफी बढ़ा सकता है। खासकर ज्यादा अमाउंट इन्वेस्ट करने वाले सीनियर सिटिजंस के लिए ये काफी फायदेमंद साबित होता है। बिना कोई एक्स्ट्रा जोखिम लिए अपनी इंट्रेस्ट इनकम को मैक्सिमाइज करने के लिए जरूरी है कि आपको अलग अलग बैंकों की ओर से ऑफर किए जा रहे इंट्रेस्ट रेट की पूरी जानकारी हो।

स्मॉल फाइनेंस बैंक दे रहे 8.10% तक का सबसे ज्यादा ब्याज

10 लाख रुपये के निवेश पर सबसे अधिक रिटर्न देने के मामले में स्मॉल फाइनेंस बैंक सबसे आगे हैं। अगस्त 2026 तक स्मॉल फाइनेंस बैंकों में 8.10 फीसदी तक के इंट्रेस्ट रेट ऑफर किए जा रहे हैं। इसकी पूरी लिस्ट यहां नीचे देखी जा सकती है-

सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक (Suryoday Small Finance Bank): 8,10 फीसदी तक की ब्याज दर।

उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक (Utkarsh Small Finance Bank): 8.10 फीसदी तक की ब्याज दर।

शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक (Shivalik Small Finance Bank): 8 फीसदी तक की ब्याज दर।

जन स्मॉल फाइनेंस बैंक (Jana Small Finance Bank): 8 फीसदी तक की ब्याज दर।

इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक (Equitas Small Finance Bank): 8 फीसदी तक की ब्याज दर।

उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक (Ujjivan Small Finance Bank): 7.80 फीसदी तक की ब्याज दर।

स्लाइस स्मॉल फाइनेंस बैंक (Slice Small Finance Bank): 7.75 फीसदी तक की ब्याज दर।

प्राइवेट बैंक ऑफर कर रहे 7.50% तक इंट्रेस्ट

निजी क्षेत्र के बैंक भी अलग अलग टेन्योर के लिए आकर्षक एफडी इंट्रेस्ट रेट ऑफर कर रहे हैं।

डीसीबी बैंक (DCB Bank): 7.50 फीसदी तक की ब्याज दर।

बंधन बैंक (Bandhan Bank): 7.45 फीसदी तक की ब्याज दर।

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC FIRST Bank): 7.25 फीसदी तक की ब्याज दर।

कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank): 6.80 फीसदी तक की ब्याज दर।

एक्सिस बैंक (Axis Bank): 6.50 फीसदी तक की ब्याज दर।

एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank): 6.50 फीसदी तक की ब्याज दर।

आईसीआईसीआई बैंक (ICICI Bank): 6.50 फीसदी तक की ब्याज दर।

सरकारी बैंक ऑफर कर रहे स्टेबल और सेफ रिटर्न

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पंजाब एंड सिंध बैंक और बैंक ऑफ इंडिया अपने ग्राहकों को एफडी पर सबसे अधिक ब्याज दे रहे हैं:

पंजाब एंड सिंध बैंक (Punjab & Sind Bank): 6.85 फीसदी तक की ब्याज दर।

बैंक ऑफ इंडिया (Bank of India): 6.85 फीसदी तक की ब्याज दर।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (Central Bank of India): 6.75 फीसदी तक की ब्याज दर।

बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda): 6.75 फीसदी तक की ब्याज दर।

इंडियन बैंक (Indian Bank): 6.65 फीसदी तक की ब्याज दर।

पंजाब नेशनल बैंक (Punjab National Bank): 6.60 फीसदी तक की ब्याज दर।

भारतीय स्टेट बैंक (State Bank of India): 6.45 फीसदी तक की ब्याज दर।

विदेशी बैंक कितना इंट्रेस्ट दे रहे?

भारत में काम कर रहे विदेशी बैंकों में डॉयचे बैंक सबसे बेहतर इंट्रेस्ट रेट ऑफर कर रहा है-

डॉयचे बैंक (Deutsche Bank): 7 फीसदी तक की ब्याज दर।

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक (Standard Chartered Bank): 6.60 फीसदी तक की ब्याज दर।

एचएसबीसी बैंक (HSBC Bank): 5.50 फीसदी तक की ब्याज दर।

एक्सपर्ट्स की सलाह: कैसे करें 10 लाख रुपये का सुरक्षित निवेश?

मार्केट एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि अगर आप 10 लाख रुपये का निवेश कर रहे हैं तो पूरी रकम एक ही बैंक में रखने के बजाय इसे कई बैंकों में बांटकर जमा करें। ऐसा करने से आप हर बैंक में मिलने वाले 5 लाख रुपये के जमा बीमा कवर के दायरे में सुरक्षित रहते हैं। हाई रिटर्न पाने के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंकों का चयन समझदारी से करें और एफडी की समयावधि का चुनाव अपनी लिक्विडिटी यानी पैसे की जरूरत के हिसाब से करें। जमा बीमा सुरक्षा और स्थिर रिटर्न के चलते रिटायर लोगों के लिए एफडी आज भी एक बेहद भरोसेमंद निवेश माध्यम बनी हुई है।

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डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Tata Motors plans UK, Europe export push by FY28

Tata Motors plans UK, Europe export push by FY28
Shailesh Chandra

Tata Motors is preparing to expand into new overseas markets as part of its broader international growth strategy. Speaking during the company’s Q1 FY27 earnings call, Managing Director and CEO Shailesh Chandra said, “There will be either at the end of this financial year or maybe early next financial year we will open another big market.”

While the company has not officially named the market, Tata Motors has previously indicated that it is evaluating opportunities in the UK and Europe as part of its next phase of export expansion.

  1. UK, Europe among Tata Motors’ identified focus regions
  2. Exports to Australia and Malaysia also being explored
  3. South Africa continues to drive current export growth

Tata Motors preparing next overseas expansion

Chandra said Tata Motors has identified several priority overseas markets over the next two to three years, covering both internal combustion engine and electric vehicle portfolios. “We have in the next two to three years some key focus markets identified… which would be ICE-focused markets as well as EV-focused markets,” Chandra said.

The comments build on Tata Motors’ earlier confirmation that it had begun preparations for a UK market entry. The company has already started work on vehicle certification and is preparing its sales and aftersales network, although it has not announced a launch timeline. Tata Motors has also not disclosed sales targets or investment plans for either the UK or Europe.

Tata Group Chairman N. Chandrasekaran had earlier said the company would deepen its presence in South Africa while exploring opportunities in Australia and Malaysia, adding that Tata Motors also plans to look more closely at the UK and Europe.

South Africa continues to drive export growth

While Tata Motors prepares for its next phase of international expansion, South Africa continues to drive the company’s current export growth. Tata Motors returned to the country’s passenger vehicle market in 2025 and currently sells the Punch, Curvv, Harrier and Tiago through its partnership with Motus Holdings.

Explaining the recent growth in exports, Chandra said, “This quarter will be equally strong because, as you know, we opened South Africa last year… Since then we have been expanding our product range as well as the number of outlets and dealerships.”

Tata Motors sold 2,408 passenger vehicles in international markets during the first quarter of FY27, up from 970 units in the corresponding period last year. Although exports have more than doubled, they still account for a small share of the company’s overall passenger vehicle volumes.

Charlie Munger Investment Tips: निवेश करने में चार्ली मुंगेर के ये 4 सिद्धांत रखें याद, कभी नहीं डूबेगा पैसा

Charlie Munger Investment Tips: चार्ली मुंगेर को निवेश की गजब की समझ थी। वह वॉरेन बफे के करीबी दोस्त और बर्कशायर हैथवे के को-फाउंडर थे। नवंबर 2023 में मुंगेर का निधन हो गया। बफे भी निवेश की उनकी समझ के कायल थे। बफे खुद एक दिग्गज इनवेस्टर्स हैं। उन्होंने शेयरों में निवेश से अकूत दौलत कमाई है। बफे ने बताया था कि उन्होंने मुंगेर से कई चीजें सीखी हैं।

शेयरों में निवेश के चार बुनियादी सिद्धांत

मुंगेर निवेश में चार बुनियादी बातों पर काफी जोर देते थे। उनका मानना था कि हर व्यक्ति को निवेश में इन चार बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। कुछ साल पहले बीबीसी को दिए इंटरव्यू में इन चार सिद्धांतों के बारे में विस्तार से बताया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये चारों निवेश के बुनियादी सिद्धांत है, जिनके बारे में शेयरों में निवेश करने वाले हर व्यक्ति को जानना चाहिए।

उसी कंपनी में निवेश जिसके बिजनेस को आप समझते हैं

मुंगेर ने कहा था कि निवेश का पहला सिद्धांत यह है कि आप जिस कंपनी में निवेश कर रहे हैं, उसके बिजनेस की समझ आपको होनी चाहिए। यह सिद्धांत आज भी प्रासंगिक है। कई लोग किसी दोस्त और रिश्तेदार के कहने पर शेयरों में निवेश करते हैं। उन्हें इस बात की पूरी समझ नहीं होती कि वे जिस कंपनी के शेयर में निवेश कर रहे हैं, उसका बिजनेस क्या है। फिर निवेश में नुकसान होने पर वे दोस्त और रिश्तेदार को जिम्मेदार मानते हैं।

निवेश से पहले कंपनी की इंट्रिन्सिक वैल्यू जान लें

दूसरे सिद्धांत के बारे में बताते हुए मुंगेर ने कहा था कि निवेश से पहले कंपनी की इंट्रिन्सिक वैल्यू के बारे में जानना बहुत जरूरी है। Intrinsic Value का मतलब कंपनी के असल वर्थ से है। यह वैल्यू कंपनी की फाइनेंशियल ताकत, अर्निंग्स और फ्यूचर कैश फ्लो पर आधारित होती है। यह कंपनी के शेयर के प्राइस से अलग है।

अच्छी मैनेजमेंट वाली कंपनियों की ग्रोथ तेज होती है

तीसरे सिद्धांत में मुंगेर ने कंपनी के मैनेजमेंट पर फोकस करने को कहा था। उनका कहना था कि आप जिस कंपनी के शेयर में निवेश करने जा रहे हैं, उसके मैनेजमेंट के बारे में आपको जरूर पहले पता कर लेना चाहिए। अच्छे मैनेजमेंट वाली कंपनियों की ग्रोथ ज्यादा होती है। ऐसी कंपनियों में मार्केट लीडर बनने की क्षमता होती है।

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शेयर को कम कीमत पर खरीदने से ज्यादा मुनाफा कमाने की गुंजाइश 

मुंगेर का चौथा सिद्धांत यह था कि आपको किसी शेयर में सही कीमत पर निवेश करना चाहिए। कई लोग किसी कंपनी के शेयर को तब खरीद लेते हैं, जब उसका प्राइस 52 हफ्ते के हाई पर होता है या शेयर पहले ही काफी चढ़ चुका होता है। मुंगेर ने कहा था कि किसी शेयर की खरीद कीमत जितनी कम होगी, उससे मुनाफा कमाने की संभावना उतनी ज्यादा होगी। इसलिए किसी शेयर को खरीदने से पहले यह देख लेना जरूरी है कि कही आप उसे ज्यादा कीमत पर तो नहीं खरीद रहे हैं।

Mercedes-Benz India unveils AI-powered car scanner for servicing

Mercedes-Benz India unveils AI-powered car scanner for servicing
Mercedes-Benz India unveils AI-powered car scanner for servicing

Mercedes-Benz India has revealed an AI-powered device that enables quicker vehicle inspection upon entry to its service centre. Dubbed the XENTRY Scanner, the service debuted at the brand’s newly established centre by Landmark Cars in Jogeshwari, Mumbai.

  1. Mercedes’ first AI-powered car scanning system arrives at its largest workshop in Mumbai.
  2. Uses a 360-degree camera system to identify damage on a car’s exterior.
  3. Service Select debuts as a new scheme for older Mercedes vehicles.

Currently, the scanner is the only one of its kind in India at this service centre, which spans around 58,000 sq. ft., making it the brand’s largest in Mumbai. This facility consists of 16 preventive maintenance and general repair bays, 9 body and paint bays and 9 supporting bays, supported by a dedicated 6,000 sq. ft. spare-parts area.

How does Mercedes’ XENTRY Car Scanner work?

The brand calls it an MRI scanner for its cars

Mercedes-Benz’s XENTRY car scanner.

As the car enters the workshop, it is made to pass through the XENTRY scanner. The scanner utilises a 360-degree high-resolution camera system comprising 13 cameras and a LiDAR sensor. Images of the car are captured and analysed across four categories: body, underbody, windshield and tyres. The system captures 150 images within 3 to 5 seconds and then transmits the data to the Mercedes-Benz cloud.

Artificial intelligence then comes into play, identifying every kind of damage on the car’s exterior, even the ones that aren’t visible to the naked eye. It also provides in-depth tyre information, including their health, tread depth and braking performance. To maintain privacy, the system does not capture images of the driver. The findings are added directly to the job card of the particular car without manual entry, enabling better co-ordinated workshop processes. Mercedes says the process is entirely paperless, reducing walking distances, waiting times and paperwork that traditionally accompanied service reception.

Speaking about the thinking behind such initiatives, Mr Santosh Iyer, MD and CEO, Mercedes-Benz India said, “Productivity has to be the core. Reason being, from a real estate perspective, you need to turn cars around faster, while initiatives like the car scanner are more of a productivity enhancement. But on the customer side too, they expect the car to be turned around quickly, which is a pure mobility requirement for the customer.”

Through AI, external wear and tear is automatically detected by the XENTRY car scanner.

Next, a service advisor receives all the information on a tablet and informs the customer of a detailed list of vehicle wear and tear. It is then up to the customer to approve servicing of the concerned parts on the spot. The brand claims that a digital record of service status eliminates the need for manual inspections by the customer.

Interestingly, Landmark’s own internal research points to a shift in service revenue coming from EV adoption growth. “Landmark did a study of the service cost of EV versus ICE. Over the last six months, they’ve seen that the cost is the same in terms of maintenance. But this isn’t coming from maintenance; it’s coming from the body shop. More of the latter is done on EVs compared to ICE cars, said Mr Iyer.

At around 58,000 sq ft, the Landmark Cars workshop in Jogeshwari is the brand’s largest in Mumbai.

India now adds to the list of countries to offer Mercedes’ XENTRY scanner. Previously, the tech was available in international markets like Germany, Italy, Korea, the Netherlands, Switzerland, and Turkey. Furthermore, Mercedes-Benz plans to expand to more than 20 ‘world-class’ luxury outlets in 2026 in India, supported by an investment of more than Rs 450 crore by franchise partners over the next two years.

Mercedes Service Select: A service plan for older Mercedes vehicles

While Mercedes-Benz provides a standard 3-year warranty on new cars, it has also introduced a new service scheme for older vehicles. Called ‘Service Select’, Mercedes cars 7 years or older are eligible for this service. The scheme enables up to 25 percent savings for periodic service and brake care, a 2-year warranty on spare parts, benefits of its ‘Mobilio Lite’ service facility, and residual value protection of the vehicle.

With inputs from Hormazd Sorabjee