Senior Citizen FD: 8.5% ब्याज देने वाले बैंक कौन से हैं? रिटायरमेंट के बाद 20 लाख फिक्स करने पर समझिए इंट्रेस्ट इनकम का पूरा कैलकुलेशन

Senior Citizen FD Calculator: अपनी गाढ़ी कमाई को बिना किसी जोखिम के सुरक्षित रखने और रिटायरमेंट के बाद रेग्युलर इनकम के लिए वरिष्ठ नागरिकों के बीच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) हमेशा से सबसे भरोसेमंद विकल्प रहा है। इस समय सीनियर सिटीजंस के लिए बैंकों में एफडी पर काफी आकर्षक ब्याज दरें मिल रही हैं। खासकर स्मॉल फाइनेंस बैंक वरिष्ठ नागरिकों को एफडी पर 8.50 फीसदी प्रति वर्ष तक का अधिकतम ब्याज ऑफर कर रहे हैं।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दर में जरा सा भी अंतर कुल रिटर्न पर बड़ा असर डालता है। खासकर तब जब आप अपनी रिटायरमेंट की एक बड़ी राशि निवेश कर रहे हों। सही बैंक और सही मैच्योरिटी का चुनाव कर आप बिना बड़ा जोखिम उठाए अपनी इंट्रेस्ट इनकम को मैक्सिमाइज कर सकते हैं। आइए जानते हैं कौन सा बैंक सीनियर सिटिजंस को FD पर कितना इंट्रेस्ट ऑफर कर रहा है।

स्मॉल फाइनेंस बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सबसे ज्यादा ब्याज दरें ऑफर कर रहे हैं:

इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50 प्रतिशत तक ब्याज।

ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50 प्रतिशत तक ब्याज।

सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50 प्रतिशत तक ब्याज।

जना स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.30 प्रतिशत तक ब्याज।

उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.30 प्रतिशत तक ब्याज।

शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.25 प्रतिशत तक ब्याज।

उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.25 प्रतिशत तक ब्याज।

जानिए प्राइवेट सेक्टर बैंक में क्या हैं दरें?

निजी क्षेत्र के बैंक वरिष्ठ नागरिकों को नीचे दी गईं ब्याज दरें ऑफर कर रहे हैं:

डीसीबी बैंक: 8.00 प्रतिशत तक ब्याज।

बंधन बैंक: 7.95 प्रतिशत तक ब्याज।

एसबीएम बैंक इंडिया: 7.80 प्रतिशत तक ब्याज।

इंडसइंड बैंक: 7.75 प्रतिशत तक ब्याज।

एक्सिस बैंक: 7.25 प्रतिशत तक ब्याज।

एचडीएफसी बैंक: 7.10 प्रतिशत तक ब्याज।

आईसीआईसीआई बैंक: 7.10 प्रतिशत तक ब्याज।

आईडीबीआई बैंक: 7.00 प्रतिशत तक ब्याज।

पब्लिक सेक्टर बैंक: सरकारी बैंकों में कितना ब्याज?

देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली ब्याज दरों की जानकारी यहां नीचे दी गई है-

बैंक ऑफ इंडिया: 7.45 प्रतिशत तक ब्याज।

पंजाब एंड सिंध बैंक: 7.35 प्रतिशत तक ब्याज।

बैंक ऑफ बड़ौदा: 7.25 प्रतिशत तक ब्याज।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: 7.25 प्रतिशत तक ब्याज।

बैंक ऑफ महाराष्ट्र: 7.15 प्रतिशत तक ब्याज।

इंडियन बैंक: 7.15 प्रतिशत तक ब्याज।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया: 7.05 प्रतिशत तक ब्याज।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया: 7.05 प्रतिशत तक ब्याज।

विदेशी बैंक दे रहे इतना ब्याज

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक: 7.10 प्रतिशत तक ब्याज।

ड्यूश बैंक: 7.00 प्रतिशत तक ब्याज।

एचएसबीसी बैंक: 6.00 प्रतिशत तक ब्याज।

8.5% ब्याज पर 20 लाख की FD से कितनी होगी कमाई?

अगर कोई वरिष्ठ नागरिक अपने रिटायरमेंट फंड से 20 लाख रुपये की राशि 8.50% इंट्रेस्ट रेट पर FD में फिक्स करता है तो उसकी इंट्रेस्ट इनकम एक साल में 1 लाख 70 हजार रुपये होगी। यानी इसे मंथली देखें तो ये करीब 14 हजार रुपये के आसपास होगी। इसी कैलकुलेशन से 3 साल की कुल ब्याज आय 5 लाख 10 हजार और 5 साल की कुल ब्याज आए 8 लाख 50 हजार बैठती है। (नोट: अगर बैंक में ब्याज का रीइन्वेस्टमेंट या तिमाही आधार पर कम्पाउंडिंग होती है तो इंट्रेस्ट से कुल इनकम इससे भी अधिक हो सकती है।)

एक्सपर्ट्स की सलाह: कैसे बनाएं सही रणनीति?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सीनियर सिटिजंस को अपना पूरा डिपॉजिट एक ही बैंक में रखने के बजाय कई बैंकों में बांटकर रखना चाहिए ताकि 5 लाख रुपये तक के बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस कवर के दायरे में सुरक्षित रहा जा सके। इसके साथ ही, ज्यादा रिटर्न के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंकों का इस्तेमाल समझदारी से करना चाहिए और एफडी की अवधि का चुनाव अपनी लिक्विडिटी जरूरतों को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Vinfast plans India-specific EVs, gets approval for plant expansion

Vinfast plans India-specific EVs, gets approval for plant expansion
Vinfast

Vinfast plans to design, develop and manufacture electric vehicles specifically for India as it expands its operations in the country. The Vietnamese EV maker has also received investment approval for Phase 2 of its Thoothukudi plant in Tamil Nadu, although it has not disclosed the investment amount, additional production capacity or timeline for the expansion.

  1. Phase 2 of Vinfast’s Thoothukudi plant gets investment approval
  2. Vinfast to increase sourcing from Indian suppliers

India-specific EVs won’t be existing cars adapted for the market

Vinfast says its upcoming models will not simply be existing products adapted for India. The company plans to develop them specifically for local requirements and with a higher level of localisation.

“For upcoming models, Vinfast’s approach is not simply to bring existing products from our global portfolio into the market, but to design, develop and manufacture products specifically for India, tailored to the needs of local customers, while also targeting a much higher level of localisation,” a Vinfast spokesperson told our sister publication, Autocar Professional.

The company said it has conducted market studies and customer clinics to understand Indian customer requirements. Feedback from these exercises has already been used to make changes to products such as the VF6 and VF7 for the Indian market.

VF6, VF7 CKD assembly to continue

VinFast currently assembles the VF6 and VF7 from completely knocked down (CKD) kits at its Thoothukudi facility. The company has clarified that it has neither changed nor suspended production plans for the two SUVs and will continue CKD assembly for India. The clarification follows a Reuters report that had raised questions over the carmaker’s production plans for the two models.

Vinfast said India remains an important part of its long-term business and manufacturing strategy, adding that the initial response to its products has helped it consistently rank among the five largest electric passenger vehicle brands in India.

Vinfast to expand local supplier base

The carmaker is also working to increase sourcing from Indian suppliers. It has held supplier conferences in India and Vietnam involving more than 300 Indian suppliers to explore sourcing opportunities and increase localisation.

“Building a sustainable and resilient supply chain is the foundation of Vinfast’s long-term strategy in India. Accordingly, we are accelerating our operations in line with the ‘Make in India’ direction,” the spokesperson said.

Vinfast is also engaging with government agencies on policy measures aimed at supporting further production and investment by global EV manufacturers in India. The company described the approval for Phase 2 of the Thoothukudi plant as an important step towards expanding its manufacturing capacity.

नवी एएमसी ने लॉन्च किया नया इंडेक्स फंड, REITs और रियल्टी शेयरों में करेगा इनवेस्ट

नवी एसेट मैनेजमेंट कंपनी (नवी एएमसी) ने एक नया इंडेक्स फंड लॉन्च किया है। इसका नाम नवी निफ्टी रीट्स एंड रियल्टी इंडेक्स फंड है। यह एक ओपन-एंडेड स्टॉक्स है, जो निफ्टी रीट्स एंड रियल्टी टोटल रिटर्न इंडेक्स को ट्रैक करेगा। यह फंड निवेश के लिए 1 सितंबर को खुल गया है।

कम से कम 100 रुपये से निवेश किया जा सकता है

Navi Nifty REITs & Realty Index Fund में कम से कम 100 रुपये से निवेश किया जा सकता है। यह फंड उन सिक्योरिटीज में निवेश करेगा, जो Nifty REITs & Realty Index में शामिल हैं। जो इनवेस्टर्स लिस्टेड रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITs) और रियल एस्टेट कंपनियों के शेयरों में निवेश करना चाहते हैं, वे इस फंड में निवेश कर सकते हैं।

Nifty REITs & Realty Index में 15 तक सिक्योरिटीज शामिल

Nifty REITs & Realty Index एक फ्री-फ्लोच मार्केट-कैपिटलाइजेशन वेटेड इंडेक्स है, जिसमें 15 तक सिक्योरिटीज शामिल हैं। इस इंडेक्स में REITs का कम से कम 60 फीसदी वेट होना जरूरी है, जबकि एक इंडिविजुअल सिक्योरिटी का वेट 15 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए। NSE Indices की तरफ से हर तिमाही इस इंडेक्स का रिव्यू किया जाता है।

रियल एस्टेट्स में निवेश से कमाई करने का मौका 

नवी एएमसी के मुताबिक, इस फंड का मकसद निफ्टी रीट्स एंड रियल्टी इंडेक्स के जितना रिटर्न जेनरेट करना है। इस फंड के पोर्टफोलियो में लिस्टेड रीट्स होंगे। इससे इनवेस्टर्स को इनकम देने वाले रियल एस्टेट्स में निवेश करने का मौका मिलेगा। साथ ही पोर्टफोलियो में रियल एस्टेट कंपनियों के शेयर भी शामिल होंगे।

क्या होता है रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट?

REITs का मतलब रियल एस्टेट इनवेस्टमेंट ट्रस्ट है। यह ट्रस्ट इनकम के लिए रियल एस्टेट खरीदता है और ऑपरेट करता है। इसमें हाई-वैल्यू रियल एस्टेट प्रॉपर्टीज और मॉर्टगेजेज शामिल होते हैं। यह प्रॉपर्टीज लीज पर देते हैं और उससे किराया लेते हैं। इस तरह वसूला गया पूरा रेंट पहले इकट्ठा किया जाता है। फिर उसे शेयरहोल्डर्स के बीच बतौर इनकम या डिविडेंड बांट दिया जाता है।

यह भी पढ़ें: ETF में निवेश की टाइमिंग वाकई मायने रखती है? जानें लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए सही रणनीति

आर्थिक गतिविधियां बढ़ने से रियल एस्टेट में बढ़ रहा किराया

नवी एएमसी का यह नया इंडेक्स फंड उन इनवेस्टर्स के लिए अच्छा है, जो रीट्स में निवेश करना चाहते हैं और रियल एस्टेट्स के तेजी से बढ़ते किराए का फायदा उठाना चाहते हैं। भारत जैसे देश में रीट्स के अच्छे रिटर्न कमाने की काफी गुंजाइश है, क्योंकि इकोनॉमी में आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। हालांकि, इनवेस्टर्स को किसी फंड में निवेश करने से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह लेनी चाहिए।

Smaller EVs will arrive as soon as charging network is ready: Maruti MD Takeuchi

Smaller EVs will arrive as soon as charging network is ready: Maruti MD Takeuchi
Suzuki

Maruti Suzuki plans to add smaller EVs to its India line-up once it has developed the charging infrastructure needed to support them. At the company’s annual general meeting, Managing director and CEO Hisashi Takeuchi said, “As soon as our EV charging will be ready in India, we will add smaller EVs in our portfolio.”

  1. More than 2,000 exclusive chargers installed across 1,100-plus cities
  2. Claims around 90 percent share of India’s EV exports
  3. Plans to build EVs, hybrids, CNG and ICE cars on the same line

Maruti Suzuki’s charging network plans

Maruti Suzuki has partnered with 13 charge-point operators and has already installed more than 2,000 exclusive charging points across over 1,100 cities. The company is also working to improve charging coverage on highways and expressways, while its plan for the top 100 cities calls for chargers at key locations around 5-10km apart.

The carmaker has set a larger target of more than 1,00,000 charging points across India by the end of this decade. The company has linked the introduction of smaller EVs to the expansion of this charging network.

Maruti currently sells the e Vitara as its only EV in India, while competitors Tata Motors and JSW MG Motor India already have smaller electric models on sale.

Maruti Suzuki expands EV exports

Maruti Suzuki is also expanding its electric vehicle exports. “We have started our EV exports to Europe first. Now, we are the largest exporter of EVs from India, with about 90 percent share in total EV exports from India,” he said. Takeuchi said the company exports vehicles to nearly 120 countries and shipped more than 4.4 lakh vehicles last year, a 34 percent increase overall. 

Japan has become Maruti’s second-largest market, according to Takeuchi, while the company expects trade agreements to create further export opportunities in markets including the UK, Germany and France.

ICE, hybrid and CNG investments to continue

Maruti Suzuki will continue investing in internal-combustion engine, hybrid and CNG vehicles alongside EVs. Takeuchi said ICE vehicles would remain an important part of the company’s business, with compressed biogas also expected to support their continued demand.

“Investment in ICE facilities will continue to be an integral part of our manufacturing process,” he said. The company is designing its new manufacturing facilities to build different types of vehicles on the same production line, allowing production to be adjusted as demand changes. “In our new plants, we can make EVs, hybrid vehicles, CNG and ICE vehicles on the same line,” Takeuchi said.

ETF में निवेश की टाइमिंग वाकई मायने रखती है? जानें लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए सही रणनीति

ETF Investment Strategy: शेयर बाजार में निवेश करते समय हर निवेशक के मन में यह सवाल जरूर आता है कि क्या फंड लगाने के लिए सही समय का इंतजार करना चाहिए? क्या गिरावट आने पर पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद होता है?

म्यूचुअल फंड के विपरीत, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) शेयर बाजार में दिनभर रियल-टाइम पर ट्रेड होते हैं। यही वजह है कि इनकी कीमतों में हर सेकंड होने वाला बदलाव निवेशकों को आकर्षित करता है। आइए समझते हैं कि ETF में टाइमिंग कितनी मायने रखती है और बिना जोखिम बढ़ाए बेहतर रिटर्न कैसे हासिल किया जाए।

टाइमिंग बनाम अवधि

लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए बाजार को टाइम करने की कोशिश करने से ज्यादा जरूरी बाजार में बने रहना है।

म्यूचुअल फंड बनाम ETF: म्यूचुअल फंड का NAV दिन में केवल एक बार तय होता है, जबकि ETF बाजार के घंटों के दौरान लगातार खरीदे और बेचे जाते हैं।

इंट्राडे वोलैटिलिटी का सच: दिन के दौरान कीमतों में उतार-चढ़ाव ट्रेडर्स के लिए अवसर हो सकता है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों को ‘परफेक्ट एंट्री पॉइंट’ के चक्कर में अपना निवेश नहीं रोकना चाहिए।

रिटर्न का पैच: बाजार के विभिन्न सूचकांकों (जैसे- निफ्टी 50, स्मॉलकैप, हाइब्रिड) का डेटा बताता है कि आउटपरफॉर्मेंस हमेशा टुकड़ों में आता है। अगर आप सही समय के इंतजार में बाहर बैठे रहे और वह तेजी का दौर निकल गया, तो आपका लॉन्ग टर्म रिटर्न काफी घट जाएगा।

मार्केट टाइमिंग के जोखिम से कैसे बचें?

बाजार में सही समय चुनने के बजाय जोखिम को कम करने के दो सबसे प्रभावी तरीके हैं:

ETF में SIP: निश्चित अंतराल पर थोड़ी-थोड़ी राशि ETF में लगाएं। इससे आपको Rupee-Cost Averaging का फायदा मिलेगा और अलग-अलग कीमतों पर खरीदारी होने से एवरेज कॉस्ट बेहतर होगी।

एसेट एलोकेशन और डाइवर्सिफिकेशन: अलग-अलग सेगमेंट के ETF में पैसा लगाएं या हाइब्रिड इंडेक्स ETF चुनें। डेटा दर्शाता है कि हाइब्रिड इंडेक्स की वोलैटिलिटी प्योर इक्विटी इंडेक्स की तुलना में लगभग 40% कम होती है।

ETF खरीदते और बेचते समय ध्यान रखने योग्य 3 जरूरी रूल्स

अगर आप खुद ETF में ट्रेड कर रहे हैं, तो इन तकनीकी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है:

1- शुरुआती और आखिरी मिनटों से बचें: बाजार खुलने के पहले 5-10 मिनट और बंद होने के आखिरी 5-10 मिनट में ट्रेडिंग न करें। इस दौरान लिक्विडिटी कम होती है और प्राइस वोलैटिलिटी अधिक रहती है।

2- घड़ी नहीं, Bid-Ask Spread और iNAV देखें: खरीदने से पहले यह जांचें कि ETF का ट्रेडेड प्राइस उसके इंडिकेटिव NAV के आसपास ही हो। जब ETF iNAV की तुलना में भारी प्रीमियम पर मिल रहा हो, तो खरीदारी से बचना चाहिए।

3- सिस्टमैटिक एंट्री लें: एक साथ पूरा पैसा लगाने के बजाय किस्तों में खरीदारी करें ताकि एक ही दिन के गलत एंट्री पॉइंट का नुकसान न हो।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Radhika Gupta: कभी 0% बचत, आज सैलरी का 90% SIP! एडलवाइस CEO राधिका गुप्ता ने बताए वेल्थ क्रिएशन के ये 4 सीक्रेट्स

Radhika Gupta SIP Investment Strategy: एडलवाइस म्यूचुअल फंड की एमडी और सीईओ राधिका गुप्ता अपनी फाइनेंशियल डिसिप्लिन के लिए जानी जाती हैं। उन्होंने हाल ही में एक पॉडकास्ट में अपनी पर्सनल फाइनेंस जर्नी को लेकर बड़ा खुलासा किया है। राधिका गुप्ता ने बताया कि आज वह अपनी टैक्स कटने के बाद मिलने वाली सैलरी का 90% हिस्सा म्यूचुअल फंड SIP में निवेश करती हैं।

हालांकि, उनकी शुरुआत ऐसी बिल्कुल नहीं थी। एक समय ऐसा भी था जब वह अपनी सैलरी से एक रुपया भी नहीं बचा पाती थीं। आइए जानते हैं उनकी जर्नी और पहली जॉब वाले युवाओं के लिए उनके दिए गए गोल्डन रूल्स के बारे में।

₹45000 की सैलरी में से कम से कम ₹5000 बचाएं

‘Konversation with Kushal’ पॉडकास्ट में बात करते हुए राधिका गुप्ता ने युवाओं को सलाह दी कि अपनी पहली सैलरी से ही निवेश करने की आदत डालनी चाहिए, भले ही शुरुआत छोटी राशि से हो। आपकी कमाई की शुरुआत में बड़ी रकम से ज्यादा महत्वपूर्ण आपकी निवेश करने की आदत है।

उन्होंने कहा, ‘अगर आपकी सैलरी ₹45000 है, तो उसमें से ₹9000 से ₹10000 बचाने की कोशिश करें। अगर आप इतना नहीं बचा पा रहे हैं, तो कम से कम ₹5000 हर महीने बचाने का लक्ष्य जरूर रखें।’

SIP क्यों है बेस्ट?

राधिका गुप्ता के अनुसार, SIP की सफलता का सबसे बड़ा कारण यह है कि यह ऑटोमेशन के जरिए अनुशासन बनाती है। उन्होंने समझाया, ‘जब आपकी सैलरी ₹50000 होती है, तो आप टैक्स से नहीं बच पाते क्योंकि वह सैलरी क्रेडिट होने से पहले ही TDS के रूप में कट जाता है।

ठीक इसी तरह SIP भी Investment Deducted at Source की तरह होनी चाहिए।’ ऑटोमैटिक डेबिट सेट करने से पैसा पहले ही इन्वेस्ट हो जाता है, जिससे ‘पहले खर्च करो और बाद में बचाओ’ वाली आदत पर रोक लगती है।

‘जीरो बचत’ से 90% तक का सफर

अपनी पर्सनल फाइनेंस जर्नी को याद करते हुए एडलवाइस की सीईओ ने बताया कि उन्होंने रातों-रात 90% सेविंग्स रेट हासिल नहीं किया। उन्होंने अपनी पोस्ट-टैक्स सैलरी से बिल्कुल कुछ न बचाने की स्थिति से 10%, फिर 20% और धीरे-धीरे आय बढ़ने के साथ इसे बढ़ाकर 90% तक पहुंचाया।

बेटे के 6 महीने के होते ही शुरू किया पोर्टफोलियो

राधिका गुप्ता बच्चों के नाम पर शुरुआती उम्र में निवेश की पुरजोर समर्थक हैं। उन्होंने 2023 में खुलासा किया था कि उन्होंने अपने बेटे के 6 महीने का होते ही उसके नाम पर इक्विटी में निवेश शुरू कर दिया था ताकि उसे लंबे समय तक कंपाउंडिंग का फायदा मिल सके। बच्चों के नाम पर SIP खोलने से माता-पिता ज्यादा गोल-ओरिएंटेड हो जाते हैं और वे लंबे समय के वित्तीय लक्ष्यों पर फोकस रहते हैं।

‘जिंदगी सिर्फ सबसे बड़े NAV या बैंक बैलेंस की रेस नहीं है’

हालांकि वह एक अग्रेसिव सेविंग्स रेट बनाए रखती हैं, लेकिन उन्होंने केवल पैसे जोड़ने की सनक से बचने की सलाह भी दी है। उन्होंने अपनी एक पोस्ट में लिखा था, ‘मेरा काम SIP बेचना है, लेकिन मैं हमेशा सभी से कहती हूं कि अपनी कड़ी मेहनत के फलों का आनंद लेने के लिए भी समय निकालें।’

उन्होंने आगे लिखा कि ‘जिंदगी इस बात की रेस नहीं है कि किसके पास सबसे ज्यादा NAV या सबसे ज्यादा रुपये हैं, बल्कि इस बात की है कि किसने सबसे ज्यादा खुशी से अपनी जिंदगी जी है।’

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Nissan, Honda team up to standardise ECUs, software for next-gen vehicles

Nissan, Honda team up to standardise ECUs, software for next-gen vehicles
Honda and Nissan logo

Nissan Motor and Honda Motor have announced a joint development agreement to standardise multiple electronic control units (ECUs) and software for their next-generation software-defined vehicles (SDVs), aiming to reduce development costs and improve R&D efficiency. Under the agreement, the two companies will jointly establish common specifications for multiple core ECUs within the electrical/electronic (E/E) architecture of next-generation SDVs, along with the in-vehicle operating system, key parts of the middleware, and vehicle control software that runs on these ECUs.

  1. Software-defined vehicles (SDVs) identified as a priority for collaboration.
  2. Collaboration aims to mitigate development costs and enhance R&D efficiency.

Common E/E architecture to underpin upcoming Honda and Nissan cars 

The ECUs covered include high-performance main ECUs (High Performance Computers) that use system-on-chips (SoCs), as well as zone ECUs that oversee individual areas of the vehicle. The resulting E/E architecture is planned for application in both companies’ next-generation SDVs starting in fiscal year 2029.

The agreement follows extensive joint studies by Nissan and Honda into potential collaboration in the software domain, conducted as part of their broader strategic partnership. The companies identified the SDV software domain as a priority area for collaboration, citing the pace of technological change and the need to strengthen competitiveness through faster R&D and more efficient investment.

By standardising these foundational technologies, Nissan and Honda said they aim to combine their engineering expertise and development resources to accelerate innovation and achieve economies of scale. The two automakers said they will continue to build on their respective strengths and explore further collaboration opportunities, including efforts related to carbon neutrality and vehicle safety.

With inputs from Shruti Shiraguppi

PPF Investment: क्या आप भी PPF में डालते हैं पैसा और लमसम या मंथली में है कंफ्यूज? जान लें 5 तारीख वाला ये ‘गोल्डन रूल’

PPF Investment Timing: अगर आप हर साल पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में अधिकतम ₹1.5 लाख का निवेश करते हैं, तो क्या आपने कभी सोचा है कि पैसा साल की शुरुआत यानी अप्रैल में एक साथ जमा करना सही है या हर महीने किश्तों में?

अक्सर लोग अपनी सुविधा के हिसाब से निवेश करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ निवेश के सही समय का चुनाव करने से आपके फाइनल मैच्योरिटी फंड में ₹1.1 लाख से ₹1.2 लाख तक का अंतर आ सकता है? आइए समझते हैं PPF में ब्याज की गणना कैसे होती है और 15 साल बाद दोनों तरीकों में से कौन सा विकल्प ज्यादा रिटर्न देगा।

PPF में ब्याज की गणना का नियम

PPF में ज्यादा से ज्यादा रिटर्न पाने के लिए इसके ब्याज की गणना का गणित समझना बेहद जरूरी है। वर्तमान में सरकार PPF पर 7.1% सालाना ब्याज दे रही है, जो हर साल कंपाउंड होता है। PPF नियम के अनुसार, ब्याज की गणना हर महीने की 5 तारीख से लेकर महीने के आखिरी दिन के बीच मौजूद सबसे न्यूनतम बैलेंस पर की जाती है।

अगर आप 5 अप्रैल से पहले पूरा ₹1.5 लाख जमा कर देते हैं, तो आपको पूरे 12 महीनों के लिए उस ₹1.5 लाख पर ब्याज मिलता है। इसके विपरीत, हर महीने ₹12,500 जमा करने पर ब्याज केवल उसी हिस्से पर मिलेगा जो महीने-दर-महीने खाते में जुड़ता जाएगा।

5 अप्रैल से पहले लमसम vs हर महीने ₹12,500

अगर आप PPF खाते में हर साल अधिकतम ₹1.5 लाख का निवेश करते हैं, तो 15 साल की मैच्योरिटी अवधि (7.1% सालाना चक्रवृद्धि ब्याज पर) में कुल ₹22.5 लाख जमा करने के बाद, साल की शुरुआत में यानी 5 अप्रैल से पहले एकमुश्त पैसा जमा करने पर आपको ₹40,68,209 का कुल फंड मिलता है। जबकि हर महीने ₹12,500 की किश्त में निवेश करने पर यही फंड घट कर ₹39,47,848 रह जाता है।

पैसे कम बढ़ने के पीछे की वजह है PPF का 5 तारीख का ब्याज वाला नियम है, जिसके तहत 5 अप्रैल से पहले एक साथ पैसा जमा करने पर आपकी पूरी रकम पर पूरे 12 महीनों तक लगातार चक्रवृद्धि ब्याज बनता है, जिससे बिना कोई अतिरिक्त पैसा लगाए आपको ₹1,20,361 (लगभग ₹1.2 लाख) का ज्यादा ब्याज प्राप्त होता है।

किस निवेशक के लिए कौन सा विकल्प सही है?

लमसम (5 अप्रैल से पहले): ये उन लोगों के सही है जिन लोगों के पास साल की शुरुआत में बोनस, मैच्योरिटी फंड या पर्याप्त सरप्लस पैसा उपलब्ध है। इससे आपके पैसे को 12 महीनों तक लगातार ब्याज और कंपाउंडिंग की ताकत मिलती है।

मंथली SIP (हर महीने की 5 तारीख से पहले): नौकरीपेशा और वे लोग जो अपनी मासिक सैलरी से बजट बनाकर थोड़ा-थोड़ा निवेश करते हैं। एकमुश्त बड़ी रकम का वित्तीय दबाव नहीं पड़ता और बचत का अनुशासन बना रहता है। इस बात का ध्यान दें कि अगर आप हर महीने निवेश कर रहे हैं, तो हमेशा महीने की 5 तारीख से पहले पैसा ट्रांसफर करें ताकि उस महीने का ब्याज न छूटे।

अगर आपके पास पैसा पहले से मौजूद है, तो उसे बैंक खाते में रखकर साल भर में थोड़ा-थोड़ा निवेश करने का कोई फायदा नहीं है। 5 अप्रैल से पहले एकमुश्त ₹1.5 लाख जमा करना ही सबसे समझदारी भरा कदम है। समय की ताकत और चक्रवृद्धि ब्याज का सही इस्तेमाल करके आप आसानी से ₹1.2 लाख की एक्स्ट्रा कमाई कर सकते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

न नौकरी छोड़ने की जरूरत, न ऑफिस का झंझट! इस साइड बिजनेस से 5 लाख महीने कमाने का दावा

आज के दौर में नौकरी के साथ एक्सट्रा कमाई का रास्ता तलाशने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कोई ऑनलाइन काम शुरू करता है तो कोई कंटेंट क्रिएशन या छोटे कारोबार में हाथ आजमाता है। इसी बीच एक्स पर एक यूजर की पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिसमें एक ऐसे साइड बिजनेस का जिक्र किया गया है, जिसे शुरू करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत नहीं बताई गई है। पोस्ट के मुताबिक, कुछ लोग इसी काम को पार्ट-टाइम करते हुए हर महीने करीब 5 लाख रुपये तक कमा रहे हैं।

खास बात यह है कि इसके लिए न अपना ऑफिस खोलने की जरूरत बताई गई है और न ही कर्मचारियों या सामान के स्टॉक का झंझट है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इस कमाई के मॉडल को लेकर दिलचस्पी बढ़ गई है। हालांकि, असल कमाई कितनी होगी, यह कई बातों पर निर्भर कर सकता है।

न दुकान, न स्टाफ… फिर कमाई कैसे?

एक्स यूजर अंकित पांडे ने बताया कि उनके कुछ दोस्त रियल एस्टेट में फ्रीलांसिंग के जरिए अच्छी कमाई कर रहे हैं। उन्होंने इसे ‘रियल एस्टेट फ्रीलांसिंग’ नाम दिया और दावा किया कि इसे बेहद कम शुरुआती खर्च के साथ शुरू किया जा सकता है।

उनके मुताबिक, सबसे पहले अपने शहर के कई बिल्डरों से संपर्क करना होगा और उनके चैनल पार्टनर प्रोग्राम से जुड़ना होगा। इसके बाद उनके प्रोजेक्ट, कीमत, भुगतान योजना और कब्जे की तारीख जैसी जानकारी समझनी होगी।

असली काम है खरीदार ढूंढना

बिल्डरों से जुड़ने के बाद अगला कदम संभावित ग्राहकों तक पहुंचना है। पांडे के अनुसार, खरीदार सोशल मीडिया, दोस्तों, रिश्तेदारों, सहकर्मियों और अपने निजी नेटवर्क के जरिए खोजे जा सकते हैं। यानी इस काम में दुकान खोलने या कोई सामान खरीदकर रखने की जरूरत नहीं है। मुख्य भूमिका खरीदार और बिल्डर के बीच संपर्क बनाने, भरोसा कायम करने और सौदा पूरा कराने की होती है।

50 लाख के फ्लैट पर कितना बन सकता है कमीशन?

पांडे ने अपनी पोस्ट में एक उदाहरण के जरिए कमाई का गणित समझाया। उनके मुताबिक, अगर 50 लाख रुपये के फ्लैट पर 3 प्रतिशत कमीशन मिले, तो एक सौदे से 1.5 लाख रुपये बन सकते हैं। इसी हिसाब से तीन फ्लैट बिकने पर करीब 4.5 लाख रुपये और चार सौदों पर 6 लाख रुपये तक कमीशन बन सकता है। हालांकि, रियल एस्टेट में कमीशन की दर हर जगह एक जैसी नहीं होती। यह बिल्डर, प्रोजेक्ट और समझौते के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

सुनने में आसान, लेकिन सौदा पक्का करना मुश्किल

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस मॉडल को आकर्षक जरूर माना, लेकिन कई यूजर्स ने इसकी असली चुनौती भी बताई। उनका कहना था कि खरीदार ढूंढना और आखिर में डील बंद करना उतना आसान नहीं है, जितना पोस्ट में दिखाई देता है।

एक यूजर ने कहा कि इस काम में ग्राहकों की तलाश के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है। वहीं, दूसरे ने बताया कि कमीशन आकर्षक लग सकता है, लेकिन ग्राहक को मनाकर सौदा पूरा करना काफी मुश्किल होता है।

30 साल से यही काम कर रहे अंकल

एक यूजर ने अपने परिवार का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उसके अंकल करीब तीन दशक से रियल एस्टेट का काम कर रहे हैं। कभी उनके महीने में 5-7 घर तक बिक जाते हैं, तो कभी लगातार 4-6 महीने तक एक भी सौदा नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इसलिए संभल जाती है क्योंकि उनकी पत्नी सरकारी नौकरी में हैं। उनके मुताबिक, रियल एस्टेट का यह काम ऐसे व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है जो अपने परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य हो।

‘साइड इनकम’ का मौका या पूरी तरह बिक्री पर निर्भर काम?

इस पूरी चर्चा ने रियल एस्टेट फ्रीलांसिंग की एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखी है। इसमें शुरुआती निवेश कम हो सकता है, लेकिन कमाई पूरी तरह ग्राहकों, बिक्री और सौदे पूरे होने पर निर्भर करती है। यानी कागज पर यह मॉडल जितना आसान दिखता है, असल जिंदगी में उतना ही नेटवर्क, भरोसे और बिक्री की क्षमता का खेल है। सोशल मीडिया पर 5 लाख रुपये महीने की कमाई का दावा भले आकर्षक हो, लेकिन हर व्यक्ति के लिए इतनी आय की गारंटी नहीं मानी जा सकती।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

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Jio Platforms IPO: सेबी ने जियो के आईपीओ को मंजूरी दी, 27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे

Jio Platforms IPO: रिलायंस ग्रुप की टेलीकॉम कंपनी Jio Platforms की शेयर बाजार में एंट्री अब और करीब आ गई है। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने कंपनी के IPO प्लान को मंजूरी दे दी है। Jio Platforms ने 19 जून को DRHP दाखिल किया था। अब IPO की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

यह IPO भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल हो सकता है। कंपनी इस इश्यू में 27 करोड़ नए शेयर जारी करेगी। इससे करीब 2.93% हिस्सेदारी कम होगी। IPO से मिलने वाली रकम में से करीब ₹27,500 करोड़ लोन चुकाने में लगाए जाएंगे।

Jio Platforms में किसकी कितनी हिस्सेदारी?

Jio Platforms में Reliance Industries यानी RIL सबसे बड़ी शेयरधारक है। उसके पास 66.43% हिस्सेदारी है। Meta Platforms के पास 9.98% और Google के पास 7.73% हिस्सेदारी है।

सऊदी अरब के पब्लिक इनवेस्टमेंट फंड के पास 2.31% हिस्सेदारी है। KKR के पास भी 2.31% और Vista Equity Partners के पास 2.31% हिस्सेदारी है। Silver Lake के पास 1.88% हिस्सेदारी है।

इसके अलावा Mubadala के पास 1.85%, General Atlantic Singapore के पास 1.34%, Abu Dhabi Investment Authority के पास 1.16% और TPG Capital के पास 0.93% हिस्सेदारी है।

जून तिमाही में रेवेन्यू 12% बढ़ा

Jio Platforms का कारोबार भी अच्छी रफ्तार से बढ़ रहा है। जून तिमाही में कंपनी का रेवेन्यू सालाना आधार पर 12% बढ़कर ₹45,961 करोड़ रहा।

ऑपरेशंस से रेवेन्यू ₹39,173 करोड़ रहा। EBITDA 15% बढ़कर ₹20,865 करोड़ पहुंच गया। EBITDA मार्जिन भी 52% से बढ़कर 53% हो गया। कंपनी का मुनाफा 9.2% बढ़कर ₹7,764 करोड़ रहा।

53.33 करोड़ पहुंचा सब्सक्राइबर बेस

जून तिमाही के अंत में Jio Platforms का सब्सक्राइबर बेस 53.33 करोड़ हो गया। पिछली तिमाही में यह 52.44 करोड़ था। एक साल पहले यह 49.81 करोड़ था।

कंपनी के 5G सब्सक्राइबर की संख्या 28.5 करोड़ पहुंच गई। डेटा इस्तेमाल भी बढ़ा है। जून तिमाही में कुल डेटा ट्रैफिक सालाना आधार पर 26.9% बढ़कर 69.4 अरब GB रहा। प्रति व्यक्ति औसत मासिक डेटा इस्तेमाल 43.7 GB रहा।

इन कंपनियों के IPO को भी मंजूरी

SEBI ने Bharat PET, Sadbhav Futuretech, MK Sons Fine Jewels, Pushp Brand India और Paras Healthcare के IPO को भी मंजूरी दी है।

इसके अलावा Paramotor Digital Technology के प्री फाइलिंग प्रस्ताव को भी मंजूरी मिली है।

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