SBI Schemes: जीरो रिस्क के साथ FD से बेहतर रिटर्न! गिरते मार्केट के बीच SBI की ये स्कीम्स कराएंगी बढ़िया मुनाफा

SBI Mutual Fund Schemes: शेयर बाजार में जब गिरावट या मंदी का दौर चल रहा होता है, तब नए और पुराने दोनों तरह के निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि ऐसे समय में क्या करें? इस मौके का फायदा उठाकर आने वाले 1 से 2 सालों में अपना पैसा सुरक्षित तरीके से कैसे बढ़ाया जाए। अक्सर निवेशक गिरावट देखकर पैनिक में आ जाते हैं या फिर जल्दबाजी में बड़े रिटर्न के लालच में स्मॉलकैप जैसे जोखिम भरे फंड्स में एकमुश्त पैसा लगा बैठते हैं।

हालांकि, बाजार के दिग्गज और पोर्टफोलियो मैनेजर्स इस रणनीति से सख्त बचने की सलाह देते हैं। विशेषज्ञों का साफ मानना है कि जब मार्केट में करेक्शन चल रहा हो, तो 3 साल से कम (1-2 साल) की कम अवधि के लिए स्मॉलकैप फंड्स में बड़ा दांव लगाना खतरनाक हो सकता है।

‘दुनिया से मजबूत है भारत की इकोनॉमी!’ वैश्विक अनिश्चितता के बीच पूर्व ECB चीफ ट्रिसेट का बड़ा दावा

पोर्टफोलियो रणनीतिकार बताते हैं कि, ‘बाजार की अनिश्चितता के दौर में कम अवधि जैसे 1-2 साल के लिए केवल ज्यादा रिटर्न तलाशने से कहीं ज्यादा जरूरी ‘कैपिटल प्रोटेक्शन’ होता है। ऐसे समय में डायवर्सिफाइड एसेट एलोकेशन या हाइब्रिड फंड्स के जरिए चरणबद्ध तरीके से निवेश करना ही वेल्थ प्रोटेक्शन और ग्रोथ का सबसे समझदारी भरा फॉर्मूला है।’

1 से 2 साल के नजरिए के लिए SBI Mutual Fund की 3 सबसे मुफीद स्कीम्स

अगर आपका नजरिया केवल अगले 12 से 24 महीनों का है और आप बाजार की रिकवरी का फायदा भी उठाना चाहते हैं, तो SBI की ये स्कीम्स सबसे बढ़िया साबित हो सकती हैं:

1. SBI Multi Asset Allocation Fund (जोखिम: कम से मध्यम)

यह फंड आपकी पूंजी को सिर्फ शेयर बाजार के भरोसे नहीं छोड़ता। यह पैसे को मुख्य रूप से इक्विटी, डेट (बॉन्ड/एफडी) और गोल्ड/सिल्वर में बांटकर निवेश करता है।

1-2 साल के लिए क्यों बेस्ट? इतिहास गवाह है कि जब शेयर बाजार में गिरावट या सुस्ती होती है, तब सोना और डेट एसेट्स पोर्टफोलियो को मजबूती देते हैं। 1-2 साल की अवधि में यह फंड बाजार की गिरावट के झटकों से पूरी सुरक्षा देते हुए आपको 10% से 12% तक का स्थिर और संतुलित रिटर्न देने की क्षमता रखता है।

2. SBI Equity Hybrid Fund (जोखिम: मध्यम)

यह एक कंजर्वेटिव हाइब्रिड मॉडल पर काम करता है, जहां कुल फंड का लगभग 65% से 80% हिस्सा इक्विटी में और बाकी 20% से 35% हिस्सा डेट प्रतिभूतियों (G-Secs, बॉन्ड्स) में लगाया जाता है।

बाजार के निचले स्तर पर होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका इक्विटी पोर्शन सस्ते वैल्युएशन पर मजबूत शेयर खरीद लेता है। जब अगले 1-2 साल में मार्केट रिकवर करेगा, तो इक्विटी हिस्सा तेजी से रिटर्न बढ़ाएगा और डेट हिस्सा गिरावट के समय पोर्टफोलियो को संभाल कर रखेगा।

3. SBI Arbitrage Opportunities Fund (जोखिम: बेहद कम / एफडी जैसा सुरक्षित)

यह फंड शेयर बाजार की तेजी या मंदी पर बिल्कुल निर्भर नहीं रहता। यह कैश मार्केट और डेरिवेटिव्स मार्केट के बीच कीमतों के अंतर का फायदा उठाकर जोखिम-रहित रिटर्न निकालता है।

अगर आपका मुख्य लक्ष्य जीरो-रिस्क है और आप बैंक एफडी (FD) से बेहतर और टैक्स-इफिशिएंट रिटर्न चाहते हैं, तो यह फंड सबसे सुरक्षित जरिया है। 1 से 2 साल की अवधि में इसमें पैसा डूबने का खतरा न के बराबर होता है।

अगर आप थोड़ा रिस्क ले सकते हैं तो ‘STP’ रूट से बनाएं रणनीति

अगर आप बाजार की गिरावट का फायदा उठाकर 1-2 साल में आने वाली तेजी का लाभ उठाना चाहते हैं, तो एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय STP का तरीका अपनाएं। सबसे पहले अपना पूरा पैसा SBI Arbitrage Fund या SBI Liquid Fund में एकमुश्त जमा करें। वहां से हर महीने एक निश्चित राशि (STP के जरिए) SBI Flexicap Fund या SBI Bluechip Fund में ट्रांसफर होने दें। इससे अगले 12 से 18 महीनों में आपको बाजार की हर गिरावट में ‘कॉस्ट एवरेजिंग’ का बड़ा फायदा मिलेगा।

इन स्कीम्स में 1-2 साल के लिए पैसा लगाने से बचें!

SBI Small Cap Fund: स्मॉलकैप कंपनियों में गिरावट के समय बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है। इनमें रिकवरी आने में 3 से 5 साल तक का समय लग सकता है।

SBI Contra Fund & SBI Focused Equity Fund: ये फंड्स खास रणनीतियों पर काम करते हैं और इन्हें अपना प्रदर्शन दिखाने के लिए कम से कम 5 से 7 साल का लंबा समय चाहिए होता है।

कुल मिलाकर 1 से 2 साल के शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म के लिए SBI Multi Asset Allocation Fund या STP के जरिए SBI Flexicap Fund सबसे स्मार्ट और सुरक्षित विकल्प साबित होंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

GST नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी! टैक्स मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार खत्म करने पर विचार, जेल की सजा भी घट सकती है

GST Council: आगामी GST काउंसिल की मीटिंग में GST के तहत होने वाले अपराधों को डीक्रिमिनलाइज करने पर चर्चा होगी। इसमें एक बड़ा मुद्दा गिरफ्तारी का भी है। सूत्रों के मुताबिक, काउंसिल इस बात पर विचार करेगी कि टैक्स अधिकारियों के पास गिरफ्तारी का मौजूदा अधिकार रखा जाए या नहीं।

अभी GST कानून के तहत कमिश्नर को गिरफ्तारी की मंजूरी देने का अधिकार है। यह अधिकार CGST Act की सेक्शन 69 में दिया गया है। इसके तहत कुछ गंभीर मामलों में कार्रवाई हो सकती है।

इनमें फर्जी इनवॉइस बनाना, गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC लेना, फर्जी रिफंड लेना और जानबूझकर टैक्स चोरी करना शामिल है। ऐसे अपराधों का जिक्र सेक्शन 132 में है।

GST में गिरफ्तारी का प्रावधान हट सकता है

सूत्रों के मुताबिक, अब GST कानून में गिरफ्तारी के अलग प्रावधान को ही हटाने पर विचार हो रहा है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो GST जांच के दौरान अधिकारी सेक्शन 69 के तहत किसी टैक्सपेयर को गिरफ्तार नहीं कर सकेंगे।

यह सुझाव GST काउसिंलग की लॉ कमेटी ने दिया है। कमेटी ने GST से जुड़े अपराधों को डीक्रिमिनलाइज करने को लेकर कई सुझाव दिए हैं।

GST काउंसिल की लॉ कमेटी में केंद्र और राज्यों के अधिकारी शामिल हैं। यह कमेटी GST कानूनों के प्रावधानों की समीक्षा करती है। इसके बाद यह GST काउंसिल को कानूनी बदलाव और जरूरी स्पष्टीकरण की सिफारिश करती है।

धोखाधड़ी पर कार्रवाई खत्म नहीं होगी

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि गिरफ्तारी का प्रावधान हटाने का मतलब यह नहीं है कि जानबूझकर की गई धोखाधड़ी पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

Khaitan & Co के पार्टनर ओंकार शर्मा ने कहा कि अगर मामले के तथ्य इसकी जरूरत दिखाते हैं, तो BNS समेत सामान्य आपराधिक कानूनों के तहत क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन किया जा सकता है।

शर्मा के मुताबिक, इस प्रस्ताव का मकसद टैक्स प्रशासन और टैक्स वसूली को किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से अलग करना है।

5 करोड़ से बढ़कर 10 करोड़ हो सकती है सीमा

लॉ कमेटी ने मुकदमा शुरू करने की मौद्रिक सीमा बढ़ाने की भी सिफारिश की है। अभी GST कानून में 5 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की टैक्स चोरी या गलत तरीके से लिए गए ITC पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

अब इस सीमा को बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। यानी अगर किसी मामले में टैक्स चोरी या गलत तरीके से लिए गए ITC की रकम 10 करोड़ रुपये से कम है, तो ऐसे मामलों में मुकदमा शुरू करने के नियम बदले जा सकते हैं।

कुछ अपराधों में जेल की सजा भी घट सकती है

कमेटी ने कुछ GST अपराधों में जेल की सजा कम करने की भी सिफारिश की है। अभी CGST Act की Section 132 के तहत सजा का प्रावधान अपराध की रकम के हिसाब से अलग-अलग है।

5 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा के GST अपराध में अधिकतम 5 साल की जेल हो सकती है। वहीं, 2 करोड़ से 5 करोड़ रुपये के अपराध में अधिकतम 3 साल की जेल का प्रावधान है। इसी तरह 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपये के अपराध में अधिकतम 1 साल की जेल हो सकती है।

लॉ कमेटी ने इन मामलों में जेल की अवधि कम करने की सिफारिश की है। अब GST काउंसिल की बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा होगी।

Stocks to Watch: 5 अक्टूबर को फोकस में रहेंगे ये 20 स्टॉक्स, IREDA, RVNL से लेकर HDFC बैंक तक शामिल

Commodity Market : जानिए आगे हफ्ते कैसी रह सकती है कमोडिटीज की चाल, सोने को कहां मिलेगा सपोर्ट और कहां होगा रेजिस्टेंस

Commodity Market : 2 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। यूएस बॉन्ड की भारी बिकवाली से बाजार पर दबाव बना रहा। हालांकि अमेरिका से लगातार आने वाले कमजोर डेटा के कारण फ़ेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े अनुमानों में काफी बदलाव हुआ है। अप्रैल 2025 के बाद पहली बार डॉलर 102 के स्तर से ऊपर चला गया। इसमें सबसे ज्यादा तेजी गुरुवार को आई। ग्लोबल बॉन्ड की बड़े पैमाने पर बिकवाली के कारण US में 10 ईयर ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड 5.34 प्रतिशत (2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर) तक पहुंच गई और डॉलर भी 102.2 के हाई पर पहुंच गया।

करेंसी की चाल में कोई बड़ा बदलाव नहीं

दो अलग-अलग आंकड़ों ने मार्केट सेंटीमेंट पर असर डाला,लेकिन करेंसी की चाल में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। बुधवार को आए कोर PCE के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। वहीं, शुक्रवार को आए सितंबर के पेरोल आंकड़े सिर्फ़ 29,000 पर रहे, जो लगभग 84,000 से 90,000 के अनुमान से काफी कम थे। साथ ही बेरोज़गारी दर बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई। जुलाई-अगस्त के आंकड़ों में कुल मिलाकर 60,000 नौकरियों की कमी आई।

अमेरिका में वेतन बढ़ोतरी की रफ्तार पड़ी धीमी

वेतन में बढ़ोतरी की रफ्तार भी धीमी पड़ती दिखा। सितंबर में प्रति घंटा औसत कमाई में सिर्फ़ 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई और सालाना बढ़ोतरी धीमी होकर लगभग 3 प्रतिशत रह गई,जो 2021 के बाद से सबसे कम है। इस जॉब्स रिपोर्ट के बाद ब्याज दरों में बदलाव के अनुमान बदल गए। यूएस फेड की अक्टूबर की बैठक में दरों में बढ़ोतरी की संभावना,जो एक हफ्ते पहले 60 प्रतिशत से ज़्यादा थी,घटकर 20 प्रतिशत से भी कम हो गई है।

इन आंकड़ों के बाद शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी आई, हालांकि पिछले पांच हफ्तों में ज्यादातर समय डाओ जोन्स और S&P 500 में गिरावट देखने को मिली। जबकि नैस्डक में बढ़त जारी रही।

हफ्ते के आखिर में स्पॉट गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में 3 प्रतिशत और 6 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई। डॉलर और यील्ड में बढ़ोतरी का असर ब्याज दरों के अनुमानों पर पड़ा। फेड अधिकारी ज़्यादातर सतर्क रुख अपनाते दिखे। न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट विलियम्स ने कहा कि इस साल के आखिर में एक और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है,हालांकि उन्हें इसकी कोई जल्दबाजी नहीं दिखी। जबकि उनके कई सहयोगियों ने महंगाई के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने के जोखिम की ओर इशारा किया।

डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बढ़त होने पर सोने पर बनेगा दबाव

बीते हफ्ते सोने की कीमतों में दो बार तेजी आई। कमजोर जॉब्स और महंगाई के आंकड़ों की वजह से यह कुछ समय के लिए $4,200 प्रति औंस के स्तर को पार कर गया,लेकिन यह अपनी बढ़त बनाए नहीं रख सका और $4,150 से नीचे बंद हुआ। चांदी का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। हफ्ते में दोनों बार यह $62 प्रति औंस के करीब पहुंची, लेकिन हर बार वापस $60 से नीचे आ गई। इनकी आगे की चाल काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि डॉलर और यील्ड काबू में रहते हैं या नहीं। अगर इनमें से किसी में भी दोबारा तेजी आती है,इन मेटल्स पर और दबाव पड़ने की संभावना है।

सोने के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

गोल्ड फ्यूचर्स में कमजोरी का रुख बना हुआ है और ये 20-डे EMA और सुपरट्रेंड (7,3) दोनों के नीचे ट्रेड कर रहा है। जबकि RSI (14) 50 से नीचे है,जो सुस्त मोमेंटम का संकेत है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट ₹1,45,950 प्रति 10 ग्राम पर है। अगर गोल्ड इस लेवल से नीचे बना रहता है,तो यह ₹1,44,500 के आसपास स्थित अगले सपोर्ट लेवल तक गिर सकता है।

ऊपर की तरफ इसके लिए ₹1,51,100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा हैऔर उसके बाद ₹1,53,000 पर अगला बड़ा रेजिस्टेंस है। शॉर्ट-टर्म आउटलुक में सुधार के लिए सोने के लिए लगातार ₹1,53,000 के ऊपर बने रहना जरूरी होगा। कुल मिलाकर इसका टेक्निकल ट्रेंड साइडवेज से लेकर बेयरिश बना हुआ है।

कच्चे तेल पर रहेगी नजर

ईंधन की कीमतों को लेकर वॉशिंगटन के बढ़ते दबाव के जवाब में G7 देशों ने अगले चार महीनों में 10 करोड़ (100 मिलियन) बैरल तक डीजल और कच्चे तेल के भंडार को कम करने की एक मिली-जुली योजना बनाई है। इस योजना के तहत डीजल भंडार का अधिकांश हिस्सा शुरुआती तीन हफ्तों में ही कम किया जाएगा। इस योजना के दबाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें हफ्ते के आखिर में गिरकर बंद हुईं।

इसी जॉइंट स्टेटमेंट में ईरान के अपने पड़ोसियों पर हालिया हमलों की निंदा की गई और रूस पर पहले से लगे प्रतिबंधों को फिर से दोहराया गया। फिर भी,कच्चे तेल के भाव में सिर्फ 2 प्रतिशत की ही कमी आई। इसकी वजह यह है कि खाड़ी क्षेत्र में अभी भी जोखिम बना हुआ है। ऐसी खबरें भी हैं कि अमेरिका का तीसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप इस क्षेत्र में भेजा जा रहा है,जिसके नवंबर के आखिर तक पहुंचने की उम्मीद है।

उधर डोनाल्ड ट्रम्प ने उस पूर्व रिपोर्ट का खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि वाशिंगटन ने ठोस परमाणु रियायतों के बदले ईरान को प्रतिबंधों में राहत की पेशकश की है। हालांकि कतर ने दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की बात कही है। हालांकि इससे अभी कोई बड़ी सफलता नहीं हासिल हुई है।

सप्लाई के नजरिए से देखें तो पिछले महीने ड्रोन हमले से हुए नुकसान के बाद सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन फिर से चालू हो गई है। यह पाइपलाइन अभी अपनी पूरी क्षमता के लगभग आधे यानी रोज़ाना 35 लाख बैरल की रफ़्तार से चल रही है। साथ ही,सितंबर में मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की कुल शिपमेंट बढ़कर रोज़ाना 1.63 करोड़ बैरल हो गई है,जो फरवरी के आखिर में शुरू हुए टकराव के बाद से सबसे तेज रफ़्तार है।

बेस मेटल्स की कीमतों में भी भारी गिरावट

बीते हफ्ते बेस मेटल्स की कीमतों में भी भारी गिरावट आई। कॉपर 2 प्रतिशत से ज़्यादा गिरकर $14,260 प्रति टन के आसपास बंद हुआ। जबकि जिंक और एल्युमीनियम में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। डॉलर के 17 महीने के हाई पर पहुंचने का असर डॉलर में ट्रेड होने वाली कमोडिटीज़ पर पड़ा,जिससे चीन के आंकड़ों में आए अच्छे सुधार का असर भी बेअसर हो गया।

चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI में जून के बाद पहली बार बढ़ोतरी

चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI में जून के बाद पहली बार बढ़ोतरी दिखी है। वहीं, सर्विस और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को कवर करने वाला नॉन-मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स बढ़कर 50.2 पर पहुंच गया है। इन दोनों आंकड़ों में नए स्टिमुलस पैकेज के बाद बढ़त आई है,जिसे 2024 के बाद का सबसे बड़ा पैकेज बताया जा रहा है और जिसका मकसद चीन में 4.5 से 5 प्रतिशत के ग्रोथ टारगेट को हासिल करना है।

हफ़्ते की शुरुआत में सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के कारण कॉपर की कीमत $14,400 से ऊपर बनी हुई थी,लेकिन बाद में दूसरी कमोडिटीज की तरह इसमें भी गिरावट आई। नेशनल डे की छुट्टियों के कारण चीन में कमजोर कारोबारी गतिविधि के कारण मेटल्स की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

FOMC की मीटिंग के मिनट्स और Fed अधिकारियों के भाषणों पर रहेगी नजर

आने वाले हफ्ते में डेटा कम ही आएगा। मुख्य रूप से बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सर्विस PMI और US के शुरुआती कंज्यूमर सेंटीमेंट और महंगाई के अनुमान ही आएंगे। इस हफ्ते के डेटा पर सेंट्रल बैंक की प्रतिक्रिया के बारे में और अंदाजा लगाने के लिए FOMC की मीटिंग के मिनट्स और Fed अधिकारियों के भाषणों पर बाजार का फोकस रहेगा।

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर आया ताजा अपडेट, जानें 04 अक्टूबर के नए रेट और अपने शहर का भाव

कॉपर को लेकर एक खास जोखिम

अगले हफ्ते कॉपर को लेकर एक खास जोखिम बना रहेगा। चिली में BHP की एस्कोन्डिडा और एंटोफ़ागास्टा की सेंटिनेला खदानों के कर्मचारियों ने नए कॉन्ट्रैक्ट ऑफ़र ठुकरा दिए हैं और वे सरकार की अनिवार्य मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल हो गए हैं। अगर बातचीत विफल रहती है तो सेंटिनेला में 13 अक्टूबर के आसपास कानूनी हड़ताल हो सकती है,जिससे तांबे की फिजिकल सप्लाई पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। पनामा की कोब्रे पनामा खदान को फिर से शुरू करने के प्रस्ताव से भी ज़्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

OPEC से प्रोडक्शन कोटा में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं

उम्मीद है कि OPEC प्रोडक्शन कोटा में कोई बदलाव नहीं करेगा। वहीं, मार्केट G7 के डीजल रिलीज़ और अगर कीमतें ज्यादा बनी रहती हैं, तो रिज़र्व से और डीजल निकालने के किसी भी संकेत पर नजर रखेगा। सऊदी अरब और हूथी के बीच तनाव बढ़ने का जोखिम कच्चे तेल की कीमतों के लिए सबसे अहम फैक्टर बना हुआ है। इससे सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को सीधा खतरा है।

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

What to expect from Mercedes-Maybach S-Class ahead of launch tomorrow

What to expect from Mercedes-Maybach S-Class ahead of launch tomorrow
Mercedes Maybach S-Class

Mercedes-Benz will launch the updated Maybach S-Class in India on October 5. The facelift brings styling and technology updates, along with more personalization options and changes to the powertrain range. With the launch just around the corner, here’s everything you need to know about the new Maybach S-Class.

What exterior changes does the new Maybach S-Class get over the S-Class?

The Maybach S-Class gets the larger illuminated grille seen on the updated S-Class, but with Maybach-specific vertical slats and an illuminated ‘Maybach’ wordmark above them. It also gets an illuminated Mercedes star on the bonnet, LED headlights with three-pointed-star DRLs and rose gold embellishments featuring the Maybach logo instead of the techie blue accents on the standard S-Class. There are also tiny Maybach logos in the lower air-dam mesh, an illuminated Maybach logo on the D-pillar and the same three-pointed-star LED signature for the tail-lamps as the standard S-Class.

The Maybach is 180mm longer than the long-wheelbase S-Class. It is also available with new 20- and 21-inch forged alloy wheels, which feature a counterweighted Mercedes logo that stays upright as the wheels turn. The carmaker says every Maybach S-Class gets some options from its Manufaktur personalization range, which now includes more exterior colours and two-tone paint combinations.

What are the key interior and feature highlights of the Maybach S-Class?

The cabin of the Maybach S-Class, like the standard S-Class gets a Superscreen-style layout comprising a 12.3-inch digital instrument cluster, a 14.4-inch central touchscreen and a 12.3-inch passenger display. The car also uses a new E&E architecture with four ‘supercomputers’ that run the entire car, from the screens to the safety features to the driving dynamics.

As on the outside, Mercedes has expanded the choice of extended leather upholstery and added new upholstery colours. For the first time on a Maybach, buyers can also specify leather-free vegan upholstery with its own unique design. 

What changes have been made to the rear-seat experience of the Maybach S-Class?

The rear seats now recline up to 43 degrees, compared with 38 degrees in the standard S-Class. They are also heated, ventilated and equipped with massage functions. The previous tablet controller has been replaced by two individual smartphone-style remotes for operating the car’s functions. There is also a Maybach drive mode that makes the suspension even softer.

What engine options are available internationally on the Maybach S-Class, and which one will India get?

Internationally, the Maybach S-Class is offered with petrol and plug-in hybrid powertrains. The S 580 gets a 4.0-litre V8 with a flat-plane crank, producing 537hp and 750Nm. Some markets also get the S 580e plug-in hybrid, which combines a 3.0-litre inline-six with a 163hp electric motor and a 22kWh battery. Total output is 585hp and 750Nm, with an electric-only range of up to 98km. The top-spec S 680 gets either a V12 or a more powerful V8 depending on the market. 

In India, we are likely to get the 612hp, 850Nm version of the S 580’s 4.0-litre V8.

What is the Maybach S-Class Night Series?

The Night Series is a darker-themed version of the Maybach S-Class. It gets darker exterior and interior colours, while chrome elements are replaced with dark chrome. It also gets a different set of aero-efficient black wheels adorned with dozens of Maybach logos.

How much will the new Maybach S-Class cost in India

The outgoing Maybach S 580 is currently priced at Rs 2.87 crore, ex-showroom, before options. Like the outgoing model, the updated Maybach S-Class is also expected to be locally assembled in India. The updated model is expected to cost more, with the price likely to be north of Rs 3 crore.

Maatrubhumi Release: सलमान खान की वॉर ड्रामा को मिली सरकार की मंजूरी? ये बड़े बदलाव किए गए

Maatrubhumi Release: सलमान खान की वॉर ड्रामा फिल्म ‘मातृभूमि’ का सफर काफ़ी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। फिल्म का नाम बदला गया, टीजर पर लोगों की प्रतिक्रियाएं, रिलीज कई बार टली और हाल ही में तो यह भी पक्का नहीं था कि यह फिल्म कभी रिलीज होगी या नहीं। लेकिन एक नई रिपोर्ट के मुताबिक़ अब ये सब पुरानी बातें हो चुकी हैं। ‘मातृभूमि’ अगले महीने ही सिनेमाघरों में आ सकती है।

‘मातृभूमि’ को सरकार से NOC मिली

खबर थी कि ‘मातृभूमि’ – जो शुरू में गलवान में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच टकराव पर आधारित थी – या तो रोक दी गई थी या उसमें देरी हो रही थी। वजह…. केंद्र सरकार को यह पक्का नहीं था कि इसमें चीन को कैसे दिखाया जाएगा। अब बॉलीवुड हंगामा ने एक सूत्र के हवाले से कहा है कि I&B मंत्रालय फिल्म के नए वर्जन से ‘संतुष्ट’ है और उसने पिछले हफ्ते ही इसे NOC दे दी है।

बताया जाता है कि रक्षा मंत्रालय की ओर से फिल्म के शुरुआती चीन-विरोधी रुख पर आपत्ति जताए जाने के बाद ‘मातृभूमि’ की कई बार दोबारा शूटिंग (रीशूट) की गई। रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है- “‘मातृभूमि’ का नया वर्जन ओरिजिनल वर्जन की तुलना में काफी बदला हुआ है। इसके अलावा अब इसमें भारत और चीन के रिश्तों को भी सकारात्मक नजरिए से दिखाया गया है।”

‘मातृभूमि’ की रिलीज डेट?

हालांकि ‘मातृभूमि’ के मेकर्स ने अभी तक इस बारे में कोई पुष्टि नहीं की है। लेकिन बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सलमान खान ने रिलीज के लिए एक तारीख सोच रखी है। रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है, “सलमान खान अब 13 नवंबर पर नजरें गड़ाए हुए हैं। उनका मानना ​​है कि दिवाली के बाद का समय – जब लोग जश्न के मूड में होंगे – फिल्म की रिलीज के लिए सही रहेगा।

हालांकि सेंसर की प्रक्रिया अभी बाकी है। मेकर्स जल्द ही फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास जमा करेंगे। अगर CBFC फिल्म को मंजूरी दे देता है और यह प्रक्रिया इसी महीने पूरी हो जाती है, तो सलमान और उनकी टीम शायद 13 नवंबर को ‘मातृभूमि’ को सिनेमाघरों में ले आएगी। इस बारे में अगले 10 दिनों में साफ तस्वीर सामने आ जाएगी।” अगर ऐसा होता है, तो ‘मातृभूमि’ फिल्म नितेश तिवारी की बड़े बजट वाली फिल्म ‘रामायण पार्ट वन’ के रिलीज़ होने के एक हफ्ते बाद सिनेमाघरों में आ सकती है।

‘मातृभूमि’ के बारे में

सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले सलमा खान द्वारा प्रोड्यूस की गई फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है और इसमें चित्रांगदा सिंह भी अहम भूमिका में हैं। इस साल की शुरुआत में नाम बदलने से पहले इस फिल्म का टाइटल ‘बैटल ऑफ गलवान’ था। असल में यह फिल्म भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच 2020 में हुई गलवान घाटी की झड़प पर आधारित थी, लेकिन खबरों के मुताबिक दोबारा शूटिंग के बाद फिल्म से चीन से जुड़े सभी संदर्भ हटा दिए गए।

महाराष्ट्र FDA ने Cipla के दवा गोदाम का लाइसेंस किया रद्द, क्या सोमवार को शेयर में मचेगी भगदड़

महाराष्ट्र खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने नियमों के कथित उल्लंघन को लेकर सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड के खिलाफ एक एक्शन लिया है। इसके तहत कंपनी के पुणे के वडकी स्थित कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग (C&F) वेयरहाउस का सेल और डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस रद्द कर दिया गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, FDA ने शुक्रवार को बयान में कहा कि यह कार्रवाई बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में नए सिरे से कार्यवाही पूरी करने के बाद की गई है। सिप्ला फार्मा, सिप्ला लिमिटेड की सब्सिडियरी है।

इससे पहले FDA ने 27 अगस्त 2026 को एक कार्रवाई की थी। उस समय विभाग ने रिएक्टिन प्लस टैबलेट की पैकेजिंग, स्टोरेज, डॉक्युमेंटेशन और बाजार से दवा वापस लेने की प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के चलते गोदाम के खिलाफ एक्शन लिया था। FDA ने तब कहा था कि डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली इस ‘शेड्यूल एच’ दवा ‘रिएक्टिन प्लस’ की पैकेजिंग पर अनऑथराइज्ड दावे किए गए थे। साथ ही गोदाम में कई कमियां पाई गई थीं।

FDA का नया आदेश 1 अक्टूबर को असिस्टेंट कमिश्नर (ड्रग्स), डिवीजन 3, FDA पुणे ने पास किया। विभाग की ओर से बॉम्बे हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में अपनी पिछली कार्यवाही वापस लेने के बाद यह आदेश जारी किया गया।

Cipla का क्या है कहना

FDA के एक्शन पर एक बयान में सिप्ला ने कहा है कि वह दवाओं की क्वालिटी और मरीजों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। कंपनी के मुताबिक, ‘पुणे में हमारे वडकी C&FA को लेकर महाराष्ट्र FDA का फैसला निराशाजनक है। हमारा मानना ​​है कि हमारा पुणे C&FA वेयरहाउस डिस्ट्रीब्यूशन और स्टोरेज प्रोटोकॉल और डिजिटल रिकॉर्ड-कीपिंग स्टैंडर्ड्स के मुताबिक काम करता है।’ कंपनी आदेश की समीक्षा कर रही है और आगे के विकल्पों पर विचार कर रही है।

संशोधित कारण बताओ नोटिस हुआ था जारी

बयान के अनुसार, FDA ने 4 सितंबर को सिप्ला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज को संशोधित कारण बताओ नोटिस जारी किया था। सिप्ला ने 11 सितंबर को अपना लिखित जवाब दिया और उसे 21 सितंबर को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया गया। प्राधिकरण ने नया आदेश जारी करने से पहले कंपनी के जवाब, सुनवाई के दौरान दी गई दलीलों, निरीक्षण के निष्कर्षों, उपलब्ध रिकॉर्ड और लागू कानूनी प्रावधानों पर विचार किया। FDA ने कहा कि इसलिए यह फैसला केवल पिछली कार्रवाई को दोहराना नहीं है, बल्कि अदालत के निर्देशों के अनुरूप पूरी प्रक्रिया नए सिरे से पूरी करने के बाद लिया गया स्वतंत्र नियामकीय निर्णय है।

रात में भी खुले रहेंगे अमेरिकी शेयर बाजार! दिसंबर से शुरू हो सकता है ओवरनाइट सेशन

FDA की त्योरियां चढ़ने की मुख्य वजह

इस मामले में प्रमुख मुद्दों में से एक है- ‘शेड्यूल एच’ दवा रिएक्टिन प्लस। सिप्ला फार्मा के वडकी गोदाम के निरीक्षण के दौरान FDA ने पाया कि दवा की पैकेजिंग पर इसे दर्द निवारक बताया गया था। सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, कमर दर्द, जोड़ों के दर्द, मोच, शरीर में दर्द और दांत दर्द जैसी स्थितियों में इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने वाले दावे किए गए थे। FDA का कहना है कि दवा की पैकेजिंग पर एक मानव आकृति भी थी और दवा को मांसपेशियों के दर्द से राहत देने वाली बताया गया था।

विभाग के अनुसार, पैकेज पर किए गए दावे, शब्द और चित्र लागू कानूनी प्रावधानों के अनुरूप नहीं थे और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत गलत लेबलिंग का मामला बनता था। FDA ने दवा के मार्केटर के रूप में कंपनी की कानूनी जिम्मेदारियों पर भी विचार किया। इसका कहना है कि केवल मैन्युफैक्चरर की भूमिका का हवाला देकर इन जिम्मेदारियों से बचा नहीं जा सकता। FDA ने दवा का स्टॉक जब्त कर उसे बाजार से वापस लेने का निर्देश दिया था।

विभाग ने स्टोरेज और वेयरहाउस मैनेजमेंट में कई कमियां भी गिनाईं। इनमें निर्धारित फॉर्म-35 इंस्पेक्शन बुक का नहीं होना, पर्याप्त पैलेट या रैक नहीं होने के कारण दवाओं के डिब्बों का सीधे फर्श पर रखा जाना, दवाओं के स्टॉक पर धूल जमा होना और साफ-सफाई में कमी शामिल हैं। FDA ने यह भी पाया कि एक्सपायर हो चुकी दवाओं के लिए अलग से ऐसा कोई निर्धारित स्थान नहीं था, जिस पर स्पष्ट रूप से ‘एक्सपायरी-नॉट फॉर सेल’ लिखा हो। एक्सपायर हो चुकी दवाओं के निपटान यानि डिस्पोजल से जुड़े आवश्यक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर और रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं थे। रेगुलेटर ने खरीद और बिक्री के चालानों में भी कमियां पाईं। इनमें बिक्री चालानों की डुप्लीकेट कॉपी पर साइन न होना, कंप्यूटराइज्ड या एसएपी रिकॉर्ड और दवा के फिजिकल स्टॉक में अंतर शामिल था।

Bonus Share: मोल्ड-टेक ग्रुप की दो कंपनियां देंगी बोनस शेयर, 9 अक्टूबर रिकॉर्ड डेट; 6 महीनों में 80% तक रिटर्न

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

IPOs This Week: 5 अक्टूबर से शुरू हफ्ते में केवल एक नया इश्यू, पर लिस्टिंग्स की भरमार; 29 कंपनियों के शेयर करेंगे शुरुआत

5 अक्टूबर से शुरू हो रहा हफ्ता IPO के लिहाज से काफी ठंडा रहेगा। नए हफ्ते में केवल एक नया पब्लिक इश्यू खुलने जा रहा है। वह भी SME। हालांकि नए सप्ताह में पहले से खुले 12 IPO में भी पैसे लगाने का मौका रहेगा। इनमें से 2 मेनबोर्ड सेगमेंट के हैं। जहां तक स्टॉक मार्केट में नई लिस्ट होने वाली कंपनियों की बात है तो नए शुरू हो रहे हफ्ते में बाढ़ आने वाली है। बाजार में 29 कंपनियों के शेयर अपनी शुरुआत कर सकते हैं। इनमें से 8 कंपनियां मेनबोर्ड सेगमेंट की हैं। आइए जानते हैं डिटेल…

नया खुल रहा IPO

R.K.Fashion Accessories IPO: ₹34.99 करोड़ का इश्यू 5 अक्टूबर को खुलेगा और 7 अक्टूबर को बंद होगा। बोली लगाने के लिए प्राइस बैंड ₹77-₹82 प्रति शेयर है। लॉट साइज 1,600 शेयर है। इश्यू बंद होने के बाद कंपनी के शेयर NSE SME पर 12 अक्टूबर को लिस्ट हो सकते हैं।

पहले से खुले IPO

Shree TNB Polymers IPO: कंपनी ₹31.80 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। इश्यू 28 सितंबर को खुला था और 5 अक्टूबर को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹50-₹53 प्रति शेयर और लॉट साइज 2,000 शेयर है। कंपनी की लिस्टिंग BSE SME पर 8 अक्टूबर को होने की उम्मीद है।

EverestIMS Technologies IPO: ₹48.46 करोड़ का इश्यू 29 सितंबर को खुला था और 5 अक्टूबर को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹80-₹85 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,600 शेयर है। कंपनी BSE SME पर 8 अक्टूबर को लिस्ट होगी।

Vishal Nirmiti IPO: ₹178 करोड़ का यह पब्लिक इश्यू 30 सितंबर को खुला था और 5 अक्टूबर को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹208-₹220 प्रति शेयर और लॉट साइज 68 शेयर है। कंपनी के NSE और BSE पर 8 अक्टूबर को लिस्ट होने की उम्मीद है।

Nityas Gems & Jewellery IPO: ₹108.35 करोड़ का इश्यू 30 सितंबर को खुला और 5 अक्टूबर को बंद होगा। बोली ₹70-₹75 प्रति शेयर के भाव पर और 200 शेयरों के लॉट में लगा सकते हैं। कंपनी NSE और BSE पर 8 अक्टूबर को लिस्ट हो सकती है।

Eventions IPO: यह ₹38.12 करोड़ का है। इसकी भी ओपनिंग 30 सितंबर को हुई और क्लोजिंग 5 अक्टूबर को होगी। प्राइस बैंड ₹112-₹118 प्रति शेयर और लॉट साइज 1,200 शेयर है। कंपनी के शेयर NSE SME पर 8 अक्टूबर को शुरुआत करने वाले हैं।

Dove Soft IPO: यह 30 सितंबर को खुला था और 5 अक्टूबर को बंद होगा। बोली ₹104-₹111 प्रति शेयर के भाव पर और 1,200 शेयरों के लॉट में लगा सकते हैं। कंपनी का इरादा ₹73.26 करोड़ जुटाने का है। शेयरों की लिस्टिंग BSE SME पर 8 अक्टूबर को हो सकती है।

SJP Ultrasonics IPO: यह ₹23.45 करोड़ का है। इसकी भी ओपनिंग 30 सितंबर को हुई थी और क्लोजिंग 5 अक्टूबर को होगी। फाइनल इश्यू प्राइस ₹67 प्रति शेयर और लॉट साइज 2000 शेयर है। कंपनी BSE SME पर 8 अक्टूबर को लिस्ट होने वाली है।

Jio IPO: इसी महीने आ सकता है जियो का आईपीओ, विदेशी निवेशकों से मिला मजबूत रिस्पॉन्स

Sollfege Smart Electronics IPO: यह 30 सितंबर को खुला था और 5 अक्टूबर को बंद होगा। कंपनी ₹21.78 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। फाइनल इश्यू प्राइस ₹55 प्रति शेयर और लॉट साइज 2000 शेयर है। कंपनी के BSE SME पर 8 अक्टूबर को लिस्ट होने की उम्मीद है।

Omara Ventures India IPO: ₹41.99 करोड़ का पब्लिक इश्यू 30 सितंबर को खुला। निवेश ₹296-₹311 प्रति शेयर के प्राइस बैंड में और 400 शेयरों के लॉट में कर सकते हैं। 5 अक्टूबर को इश्यू बंद होने के बाद कंपनी BSE SME पर 8 अक्टूबर को लिस्ट हो सकती है।

Paramount Syntex IPO: ₹81.79 करोड़ का इश्यू 30 सितंबर को खुला था और 6 अक्टूबर को बंद होगा। प्राइस बैंड ₹119-₹127 प्रति शेयर है। लॉट साइज 1,000 शेयर है। कंपनी की लिस्टिंग BSE SME पर 9 अक्टूबर को हो सकती है।

Acme India Industries IPO: यह भी 30 सितंबर को खुला। कंपनी ₹121.69 करोड़ जुटाना चाहती है। बोली 6 अक्टूबर तक ₹186-₹196 प्रति शेयर के भाव पर और 600 शेयरों के लॉट में लगा सकते हैं। कंपनी के शेयर BSE SME पर 9 अक्टूबर को शुरुआत कर सकते हैं।

TNA Solutions IPO: यह ₹37.86 करोड़ का है। ओपनिंग 30 सितंबर को हुई और क्लोजिंग 6 अक्टूबर को होने वाली है। प्राइस बैंड ₹66-₹70 प्रति शेयर और लॉट साइज 2,000 शेयर है। कंपनी के शेयर BSE SME पर 9 अक्टूबर को लिस्ट हो सकते हैं।

इन कंपनियों की होगी लिस्टिंग

नए सप्ताह में 5 अक्टूबर को NSE और BSE पर स्नैपडील की पेरेंट कंपनी Acevector, Runwal Enterprises, Orient Cables और German Green Steel & Power की लिस्टिंग होने की उम्मीद है। इसी दिन NSE SME पर Bench Mark Infotech Services, Himalayan Solar के शेयर लिस्ट होंगे। वहीं BSE SME पर Dudani Retail, Sai Urja Indo की लिस्टिंग हो सकती है। 6 अक्टूबर को NSE और BSE पर SRIT India, Shah Investor’s Home के शेयर अपनी शुरुआत कर सकते हैं। इसी दिन BSE SME पर Acme Universal Safezone 9, Shivchem Agro, Pind Hospitality के शेयर लिस्ट हो सकते हैं।

इसके बाद 7 अक्टूबर को NSE SME पर Green Asia Impex, Papadmalji Agro Foods की लिस्टिंग होने वाली है। इसी दिन BSE SME पर Vans Electroengineerings, Black Opal Consultants की लिस्टिंग होने की उम्मीद है। 8 अक्टूबर को NSE और BSE पर Vishal Nirmiti, Nityas Gems & Jewellery के शेयर शुरुआत कर सकते हैं।

इसी दिन BSE SME पर Shree TNB Polymers, EverestIMS Technologies, Dove Soft, SJP Ultrasonics, Sollfege Smart Electronics, Omara Ventures India लिस्ट हो सकती हैं। साथ ही NSE SME पर Eventions के शेयर लिस्ट हो सकते हैं। 9 अक्टूबर को BSE SME पर Paramount Syntex, Acme India Industries और TNA Solutions ​की लिस्टिंग होगी।

अप्रैल-सितंबर में मेनबोर्ड सेगमेंट में आए 78 IPO, जुटाए गए रिकॉर्ड ₹94205 करोड़

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Zerodha पर ट्रेडिंग शुरू की, 45 मिनट में कमाए ₹12 हजार; फिर ऐसी लगी लत कि माता-पिता की बचत गंवाकर ₹38 लाख के कर्ज में डूबा टेक्नीशियन

शेयर बाजार में जल्दी पैसा कमाने का सपना कई लोगों को ट्रेडिंग की ओर खींचता है। शुरुआत में अगर कुछ मुनाफा मिल जाए, तो बाजार से कमाई का भरोसा और बढ़ जाता है। लेकिन कई बार यही उत्साह धीरे-धीरे ऐसी आदत में बदल जाता है, जिससे बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। सोशल मीडिया यूजर Hemdharpan ने अपने 35 वर्षीय दोस्त की ऐसी ही कहानी साझा की है।

2 लाख की सैलरी और 14 लाख की बचत

Hemdharpan के मुताबिक, उनका दोस्त एक IT प्रोफेशनल था और करीब 2 लाख रुपये महीने कमाता था। उसके पास 14 लाख रुपये की बचत थी। शादीशुदा होने के साथ उसका एक बच्चा भी था। यानी नौकरी, कमाई और सेविंग के मामले में उसकी जिंदगी काफी स्थिर थी।

करीब दो साल पहले एक सहकर्मी ने उसे शेयर बाजार में ट्रेडिंग के बारे में बताया। यहीं से उसकी जिंदगी का एक नया दौर शुरू हुआ।

45 मिनट में 12 हजार का मुनाफा

कहानी के मुताबिक, सहकर्मी ने लंच के दौरान अपना Zerodha अकाउंट दिखाया। उसने Nifty options की इंट्राडे ट्रेडिंग से करीब 45 मिनट में 12 हजार रुपये कमाए थे। यह देखकर टेकie को भी लगा कि बाजार में कम समय देकर अच्छी कमाई की जा सकती है।

शुरुआत में उसे सफलता भी मिली। उसने करीब दो घंटे में 18 हजार रुपये कमाए। इस कमाई ने उसका उत्साह और बढ़ा दिया।

फिर शुरू हुआ नुकसान का सिलसिला

दूसरे महीने बाजार ने उसे बड़ा झटका दिया। उसने कुछ ही मिनटों में करीब 50 हजार रुपये गंवा दिए। पोस्ट के मुताबिक, उसने समय पर stop-loss नहीं लगाया और नुकसान को स्वीकार करने के बजाय उसे वापस पाने की कोशिश शुरू कर दी।

उसने परिवार की बचत से 1 लाख रुपये बाजार में लगा दिए। इसके बाद वह नुकसान की भरपाई के लिए लगातार ट्रेड करने लगा। बताया गया कि वह एक दिन में 30-40 ट्रेड तक करने लगा था।

बचत खत्म हुई तो लिया कर्ज

2024 में शुरू हुई ट्रेडिंग का असर 2025 के मध्य तक दिखने लगा। उसकी करीब 14 लाख रुपये की बचत खत्म हो गई, लेकिन ट्रेडिंग नहीं रुकी। पोस्ट के अनुसार, वह परिवार से ट्रेडिंग छिपाने लगा और काम के बीच भी बाजार पर नजर रखता था।

बचत खत्म होने के बाद उसने तीन बैंकों से पर्सनल लोन लिया। कथित तौर पर उसने इन पैसों के लिए घर की मरम्मत का कारण बताया। बाद में इंस्टेंट लोन ऐप्स से भी पैसे लिए।

38 लाख का नुकसान सामने आया

2025 के आखिर में जब रिकवरी एजेंट घर पहुंचने लगे, तब परिवार को पूरी स्थिति का पता चला। पोस्ट के मुताबिक, 14 लाख रुपये की बचत खत्म होने के अलावा उस पर करीब 24 लाख रुपये का कर्ज भी था। यानी कुल नुकसान करीब 38 लाख रुपये बताया गया।

इसका असर परिवार पर भी पड़ा। बच्चे की स्कूल फीस बाउंस होने की बात सामने आई और उसकी पत्नी बच्चे को लेकर मायके चली गई।

अब कर्ज से निकलने की कोशिश

Hemdharpan के अनुसार, अब वह अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में जुटा है। उसने कार बेच दी है और लोन को संभालने के लिए restructuring plan अपनाया है। यह कहानी सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक व्यक्ति के अनुभव पर आधारित है। इससे यह जरूर सामने आता है कि ट्रेडिंग में लगातार नुकसान की भरपाई करने की कोशिश आर्थिक जोखिम को तेजी से बढ़ा सकती है।

Video: पेरिस से मुंबई आते ही लगा बड़ा झटका! 23 साल के निको ने बताईं वो 3 बातें जो कोई नहीं बताता

September 2026 EV sales: Kia overtakes Maruti Suzuki for fifth spot

September 2026 EV sales: Kia overtakes Maruti Suzuki for fifth spot
September 2026 EV sales

Retail sales of electric passenger vehicles reached a new monthly high of 35,995 units in September 2026, up 94 percent from the same month last year and marking the fourth consecutive month with sales above 30,000 units. Tata Motors retained the top spot with 14,769 units and a 41 percent market share, while Kia moved ahead of Maruti Suzuki to take fifth place. H1 FY2027 EV sales now stand at 1,90,946 units, up 88 percent year on year, putting the industry within 29,971 units of the full-year FY2026 tally.

September 2026 EV sales

RankOEMSep 2026Sep 2025YoY changeMarket share
1Tata Motors14,7697,353101%41.03%
2Mahindra & Mahindra7,7793,97296%21.61%
3JSW MG Motor India5,2424,8009%14.56%
4Vinfast India2,963649,283%8.23%
5Kia India1,263598111%3.50%
6Maruti Suzuki India1,103––3.06%
7BYD India83673214%2.32%
8Hyundai Motor India79240496%2.20%
9BMW India50236936%1.39%
10Tesla29169322%0.80%
11Toyota Kirloskar Motor218––0.60%
12Mercedes-Benz India125137-9%0.34%
13Stellantis India554717%0.15%
14Volvo India452488%0.12%
15Porsche India11838%0.03%
16JLR India10–0.00%
17Audi India00–0.00%
18Lotus00–0.00%
19Rolls-Royce01-100%0.00%
Total 35,99518,52094%100%

Tata Motors

14,769 units, up 101 percent YoY

Tata Motors sold 14,769 electric passenger vehicles in September, up 101 percent from 7,353 units in the same month last year. This was the company’s highest monthly EV sales yet, surpassing the previous record of 14,388 units in July. September was also its fourth consecutive month with sales above 12,000 units.

Tata’s EV market share stood at 41.03 percent, up from 39.70 percent in September 2025. The Nexon EV remains its biggest volume driver, while the updated Tiago EV and Punch EV have also contributed to sales. During the month, Tata also extended its Battery-as-a-Service (BaaS) offering to the Nexon EV, Curvv EV, Sierra EV and Harrier EV.

Mahindra

7,779 units, up 96 percent YoY

Mahindra sold 7,779 EVs in September, up 96 percent from 3,972 units a year ago. The company retained second place in the electric PV market, although its sales remained below the monthly record of 8,131 units set in July. Mahindra’s EV market share increased to 21.61 percent from 21.44 percent in September 2025. The BE 6 and XEV 9e continue to make up its main EV offering, while the XEV 9S adds a three-row model to the line-up. Mahindra also recently extended its Battery-as-a-Service (BaaS) ownership programme to the XEV 9S and the XEV 9e.

JSW MG Motor

5,242 units, up 9 percent YoY

JSW MG Motor recorded 5,242 EV sales in September, up 9 percent from 4,800 units a year earlier and 6 percent from August. The company retained third place, although its market share fell to 14.56 percent from 25.91 percent in September 2025.

June remains MG’s best month so far, with 6,220 units. The Windsor EV continues to be its highest-selling model, while the recently launched Hector Tomahawk EV adds another model to its electric line-up. MG also has introduced a battery-as-a-service (BaaS) scheme for the Cyberster and M9 EVs.

Vinfast

2,963 units, up 49,283 percent YoY

Vinfast retained fourth place with 2,963 EVs sold in September, its highest monthly sales since entering India’s electric passenger vehicle market. Sales were up 32 percent from August, giving the company an 8.23 percent market share.

Vinfast currently has three models in its passenger vehicle portfolio: the VF6 and VF7 SUVs, and the VF MPV 7. Its cumulative H1 FY2027 sales stand at 10,826 units.

Kia

1,263 units, up 111 percent YoY

Kia moved ahead of Maruti Suzuki to take fifth place in September after recording 1,263 EV sales, up 111 percent from 598 units in September 2025. Sales also increased 48 percent from August’s 851 units. Kia’s EV market share increased to 3.50 percent, compared with 3.22 percent a year earlier. The increase follows the launch of the Syros EV in August. Kia also sells the Carens Clavis EV in India, while the EV6 and EV9 are sold as fully imported models.

Maruti Suzuki

1,103 units

Maruti Suzuki slipped to sixth place, with 1,103 e Vitara units sold in September. Sales declined 25 percent from August’s 1,472 units, although September marked the company’s sixth consecutive month with four-digit EV sales. The e Vitara has so far seen limited domestic availability as a larger share of production was allocated for exports. Maruti is expected to increase domestic production with the start of operations at its new manufacturing line at the Hansalpur plant in Gujarat.

BYD

836 units, up 14 percent YoY

BYD sold 836 EVs in September, up 14 percent from 732 units in the same month last year. Its market share stood at 2.32 percent, down from 3.95 percent a year earlier. June remains BYD India’s highest-selling month so far, with 938 units. Its current line-up includes the Atto 3, eMax 7, Seal and Sealion 7, while the company has confirmed plans to launch the Seal U later this year.

Hyundai

792 units, up 96 percent YoY

Hyundai sold 792 EVs in September, up 96 percent from 404 units a year ago. This was its second-highest monthly sales tally in FY2027, after 840 units in August. The company sold a total of 3,650 EVs in H1 FY2027, down 8 percent from the 3,951 units sold in H1 FY2026. Hyundai currently has the Creta Electric and Ioniq 5 in its EV line-up.

Toyota

218 units

Toyota recorded 218 units of the Urban Cruiser Ebella in September, its highest monthly sales of the electric SUV since launch. Sales were up 30 percent from the 168 units sold in August. The Ebella is Toyota’s version of the Maruti e Vitara and is positioned against models including the Mahindra BE 6, Vinfast VF6, MG ZS EV, Hyundai Creta Electric and Tata Nexon EV.

Luxury EV sales hit new high

Luxury electric passenger vehicle sales also reached a new monthly high of 975 units in September, up 60 percent from 608 units a year earlier. This surpassed the previous record of 853 units set in June. Luxury EVs accounted for 2.70 percent of total electric passenger vehicle sales in September.

BMW

502 units, up 36 percent YoY

BMW remained the largest luxury EV seller in September with 502 units, up 36 percent from 369 units a year earlier. Its market share stood at 51.48 percent, down from 60.69 percent in September 2025. BMW recently expanded its electric line-up with the i5 Long Wheelbase, which was launched in India in September at Rs 79.6 lakh. It is the company’s first locally produced electric sedan in India. BMW has also recently updated the i7 range, with 50 xDrive M Sport trim and the top-spec M70 xDrive.

Tesla

291 units, up 322 percent YoY

Tesla recorded 291 units in September, its highest monthly sales in India, up 322 percent from 69 units a year earlier. The increase moved Tesla ahead of Mercedes-Benz and into second place in the luxury EV segment for the first time. Its segment share rose to 29.84 percent from 11.34 percent in September 2025.

Mercedes-Benz

125 units, down 9 percent YoY

Mercedes-Benz sold 125 EVs in September, down 9 percent from 137 units in the same month last year. Its share of the luxury EV segment fell to 12.82 percent, from 22.53 percent a year earlier. The company’s highest monthly EV sales this year came in June, when it recorded 245 units.

Volvo 

45 units, up 88 percent YoY

Volvo recorded 45 EV sales in September, up 88 percent from 24 units a year earlier. Its market share increased to 4.61 percent, from 3.94 percent in September 2025.

Porsche

11 units, up 38 percent YoY

Porsche sold 11 EVs in September, up 38 percent from eight units in September 2025. It accounted for 1.12 percent of luxury EV sales during the month.

Stock Markets Holiday: 2 अक्तूबर यानी शुक्रवार को बीएसई और एनएसई में नहीं होगा कारोबार

Stock Markets Holiday: शेयर बाजारों में शुक्रवार यानी 2 अक्तूबर को कारोबार नहीं होगा। बीएसई और एनएसई दोनों बंद रहेंगे। इसकी वजह यह है कि 2 अक्तूबर को गांधी जयंती है। इस मौके पर राष्ट्रीय अवकाश होता है। इसका मतलब है कि सभी सरकारी ऑफिसेज, प्राइवेट ऑफिसेज, आरबीआई, बैंक आदि में छुट्टी होती है।

तीन दिन बाद बीएसई और एनएसई 5 अक्तूबर को खुलेंगे

प्राइवेट बैंक, सरकारी बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, कोऑपरेटिव बैंक और विदेशी बैंकों की भी सभी शाखाएं बंद रहेंगी। चूंकि, शेयर बाजारों में हर हफ्ते सिर्फ पांच दिन कारोबार होता है, जिससे इस बार गुरुवार यानी 1 अक्तूबर इस हफ्ते का अंतिम कारोबारी दिन था। अब शेयर बाजार यानी BSE और NSE 5 अक्तूबर को खुलेंगे।

कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स में भी 2 अक्तूबर को रहेगी छुट्टी

कमोडिटी एक्सचेंज MCX भी गांधी जयंती के मौके पर बंद रहेगा। कमोडिटी एक्सचेंज में सुबह और शाम दोनों ही सत्रों में कारोबार नहीं होगा। इसका मतलब है कि एमसीएक्स में भी कारोबार की शुरुआत 5 अक्तूबर यानी सोमवार को होगी। उस दिन दोनों ही सत्रों में एक्सचेंज में सामान्य कामकाज होगा।

20 अक्तूबर को भी दशहरा के मौके पर बंद रहेंगे शेयर बाजार 

शेयर बाजार इस महीने दशहरा के मौके पर भी बंद रहेंगे। इसका मतलब है कि 20 अक्तूबर यानी मंगलवार को भी बीएसई और एनएसई में कारोबार नहीं होगा। 2 अक्तूबर को बैंकों और दूसरे वित्तीय संस्थानों में छुट्टी होने से चेक की क्लियरिंग भी नहीं होगी। हालांकि, नेट बैंकिंग सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। बैंकों के एटीएम भी छुट्टी के दिन खुले रहेंगे।

हफ्ते के अंतिम कारोबारी दिन भी शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट 

शेयर बाजारों में 1 अक्तूबर को भी गिरावट देखने को मिली। Sensex 0.8 फीसदी यानी 570 अंक गिरकर 71,909 पर बंद हुआ। Nifty 0.9 फीसदी यानी 198 अंक गिरकर 22,421 पर क्लोज हुआ। आईटी छोड़कर निफ्टी के सभी सेक्टर सूचकांकों में गिरावट आई। ऑटो इंडेक्स 3 फीसदी गिरा। इसमें बजाज ऑटो में 6 फीसदी गिरावट का बड़ा हाथ रहा। M&M का शेयर भी 2.4 फीसदी गिरकर बंद हुआ।