कैंसर के इलाज और वैक्सीन रिसर्च के लिए आईआईटी कानपुर और भारत बायोटेक ने उठाया बड़ा कदम, मिलकर करेंगे ये काम

कैंसर, वैक्सीन और ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज के लिए देश में ही नई तकनीक तैयार करने की तैयारी चल रही है। IIT कानपुर और भारत बायोटेक इस दिशा में साथ काम करेंगे। दोनों इंस्टिट्यूट के साइंटिस्ट बीमारी की पहचान, जांच और इलाज से जुड़ी तकनीक पर रिसर्च करेंगे।

दोनों संस्थानों के बीच जल्द समझौता हो सकता है। इसका मकसद देश में ही नई मेडिकल तकनीक तैयार करना है। आगे इन तकनीकों का इस्तेमाल मरीजों के इलाज में किया जा सकेगा।

कैंसर और वैक्सीन पर रहेगा खास ध्यान

IIT कानपुर और भारत बायोटेक के बीच हुई मीटिंग में कई मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें कैंसर, वैक्सीन और ऑटोइम्यून बीमारियों पर खास ध्यान दिया गया। साइंटिस्ट इन बीमारियों को समझने पर काम करेंगे। इसके साथ नए इलाज और तकनीक भी तैयार की जाएगी।

बायोमेडिकल और हेल्थ टेक्नोलॉजी पर IIT कानपुर में पहले से काम हो रहा है। भारत बायोटेक के साथ जुड़ने से इस काम को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

IIT कानपुर पहुंचे भारत बायोटेक के ऑफिसर

IIT कानपुर की इंडस्ट्री कनेक्ट सीरीज के तहत यह मीटिंग हुई। इसमें भारत बायोटेक के प्रेजिडेंट (R&D) डॉ. के. मुरुगप्पन शामिल हुए। IIT कानपुर के शिक्षक और साइंटिस्ट भी मीटिंग में मौजूद रहे। मीटिंग में वैक्सीन, कैंसर और ऑटोइम्यून बीमारियों पर चर्चा हुई।

मीटिंग के बाद डॉ. मुरुगप्पन ने IIT कानपुर की रिसर्च सुविधाएं देखीं। इस दौरान डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट प्रो. जयधरन राव और जैविक विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग के प्रमुख प्रो. अश्वनी कुमार ठाकुर समेत कई साइंटिस्ट मौजूद रहे।

गंगवाल स्कूल में भी हो रही मेडिकल रिसर्च

IIT कानपुर के गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में कई फील्ड पर रिसर्च चल रही है। इनमें हेल्थकेयर में एआई, टेलीमेडिसिन और रोबोटिक्स शामिल हैं। यहां बीमारी की शुरुआती जांच और मेटाबॉलिक बीमारियों पर भी काम हो रहा है। इसके अलावा इन्फेक्शन, न्यूरोसाइंस, न्यूरोटेक्नोलॉजी और मेंटल हेल्थ पर रिसर्च की जा रही है।

IIT कानपुर और भारत बायोटेक के साथ काम करने से नई वैक्सीन और जांच की बेहतर तकनीक बन सकती है। इससे गंभीर बीमारियों के इलाज में मदद मिलेगी। साथ ही देश में मेडिकल रिसर्च को बढ़ावा मिलेगा और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम होगी।

कानपुर से अखंड प्रताप सिंह की रिपोर्ट

डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड की टेंशन बरकरार, क्या भारतीय बाजारों पर दिखेगा इसका असर

Gift Nifty Indicator: मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़त के साथ खुलने की उम्मीद है। GIFT निफ्टी से सकारात्मक शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। एशियाई बाजारों में बढ़त, नैस्डैक की रिकॉर्ड क्लोजिंग और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से बाजार का मूड बेहतर हुआ है। हालांकि, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और जारी जियोपॉलिटिकल जोखिमों के कारण रिकवरी धीमी रह सकती है, खासकर तब जब निफ्टी ने सोमवार को लगातार चार सत्रों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा है।

सुबह करीब 8 बजे GIFT निफ्टी 54 अंक या 0.25 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,630 पर ट्रेड कर रहा था। सोमवार को उतार-चढ़ाव भरे सत्र में भारतीय शेयरों में रिकवरी दिखी और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के कारण लगातार चार सत्रों की गिरावट का सिलसिला थम गया। सेंसेक्स 472.77 अंक या 0.66 प्रतिशत बढ़कर 72,382.47 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 133.80 अंक या 0.60 प्रतिशत बढ़कर 22,555.75 पर बंद हुआ।

ग्लोबल माहौल काफी हद तक सकारात्मक है। रात भर वॉल स्ट्रीट में तेजी के बाद एशिया में टेक्नोलॉजी शेयरों में बढ़त देखी जा रही है। पिछले सत्र में लगभग 2 प्रतिशत की गिरावट के बाद ब्रेंट क्रूड $100 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है, क्योंकि मध्य पूर्व से अधिक निर्यात और G7 द्वारा आपातकालीन स्टॉक जारी करने की योजना से सप्लाई की चिंताएं कम हुई हैं।

हालांकि, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली अभी भी एक चुनौती बनी हुई है। FII ने 5 अक्टूबर को 4,699 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने इस बिकवाली को संभाला और 5,181 करोड़ रुपये से अधिक के शेयर खरीदे।

नैस्डैक के रिकॉर्ड के बाद एशियाई बाजारों में तेजी

मंगलवार को एशियाई शेयरों में बढ़त देखी गई, जो अमेरिका में टेक्नोलॉजी शेयरों की रैली और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से प्रेरित थी। जापान को छोड़कर एशिया-पैसिफिक शेयरों के MSCI के सबसे व्यापक इंडेक्स में 0.2 प्रतिशत की बढ़त हुई, जबकि जापान का निक्केई 0.7 प्रतिशत बढ़ा। यूरोपीय इक्विटी फ्यूचर्स में 0.5 प्रतिशत की तेजी आई।

अमेरिकी स्टॉक फ्यूचर्स में भी हल्की बढ़त देखी गई, जिसमें नैस्डैक फ्यूचर्स 0.2 प्रतिशत और S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 प्रतिशत ऊपर रहे। हालांकि, लंबे समय वाले US ट्रेजरी यील्ड कई दशकों के उच्चतम स्तर के करीब बने रहे, जिससे ग्लोबल फाइनेंशियल हालात कड़े रहे और इक्विटी वैल्यूएशन के लिए लगातार जोखिम बना रहा।

Nvidia और Microsoft में तेजी से Nasdaq रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा

सोमवार को वॉल स्ट्रीट बढ़त के साथ बंद हुआ। इसमें टेक्नोलॉजी शेयरों की अहम भूमिका रही, क्योंकि Nvidia और Microsoft ने Nasdaq को रिकॉर्ड क्लोजिंग हाई पर पहुंचा दिया। Nasdaq कंपोजिट 1.05 प्रतिशत बढ़कर 27,477.31 पर पहुंच गया, जबकि S&P 500 0.66 प्रतिशत बढ़कर 7,773.95 पर बंद हुआ। Dow Jones इंडस्ट्रियल एवरेज 0.18 प्रतिशत बढ़कर 51,267.90 पर पहुंच गया।

कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से निवेशकों को कुछ राहत मिली, जबकि अब ध्यान आने वाले तिमाही नतीजों के सीज़न की ओर बढ़ रहा है।

इंडेक्स पर क्या हो रणनीति

Enrich Money के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और ग्लोबल रिस्क सेंटीमेंट में सुधार से निकट अवधि में सहारा मिल रहा है, लेकिन लगातार जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता और एनर्जी व शिपिंग रूट में फिर से रुकावट का जोखिम निवेशकों को सतर्क रखेगा।

पोनमुडी निफ्टी के लिए 22,600 को तत्काल रेजिस्टेंस मानते हैं। अगर यह स्तर लगातार टूटता है (ब्रेकआउट होता है), तो रिकवरी 22,800-23,000 तक बढ़ सकती है। नीचे की ओर, 22,400 तत्काल सपोर्ट है, और उसके बाद 22,200 का अहम स्तर है।

LKP सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल एनालिस्ट रूपक डे ने कहा कि अच्छी शुरुआत के बाद निफ्टी नीचे आ गया क्योंकि इंडेक्स को 22,600 के आसपास रेजिस्टेंस का सामना करना पड़ा। डे ने कहा, “कुल मिलाकर, यह ऊपर बंद होने से पहले 200-पॉइंट की रेंज में रहा। RSI अभी भी ओवरसोल्ड ज़ोन में है और बेयरिश क्रॉसओवर बना हुआ है। सेंटीमेंट कमज़ोर बना हुआ है और सपोर्ट 22,400 पर है। अगर यह इस लेवल से नीचे गिरता है, तो बेयरिश ट्रेंड फिर से शुरू हो सकता है। दूसरी ओर, अगर यह 22,600 से ऊपर बना रहता है, तो कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है।”

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत 

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Stocks to Watch: 6 अक्टूबर को फोकस में रहेंगे ये 10 स्टॉक्स, वेदांता से लेकर ट्रेंट तक शामिल

Stocks to Watch: मंगलवार 6 अक्टूबर के कारोबार में कई शेयरों पर खास नजर रहेगी। इन कंपनियों से जुड़ी ताजा खबरें और बिजनेस अपडेट सामने आए हैं। इनमें बैंकिंग, मेटल, रिटेल और हेल्थकेयर सेक्टर के स्टॉक्स शामिल हैं। वेदांता से लेकर Trent तक कुल 10 शेयर फोकस में रहेंगे।

Axis Bank

बैंकिंग सेक्टर की Axis Bank ने दूसरी तिमाही में मजबूत ग्रोथ दर्ज की है। बैंक का ग्रॉस एडवांस तिमाही आधार पर 8.8% और साला आधार पर 22.7% बढ़कर ₹13.84 लाख करोड़ हो गया। कुल डिपॉजिट 5.8% तिमाही आधार पर और 20.7% सालाना आधार पर बढ़कर ₹14.52 लाख करोड़ रहा।

Vedanta

माइनिंग और मेटल कंपनी Vedanta के बोर्ड की बैठक 8 अक्टूबर को होगी। इसमें वित्त वर्ष 2026-27 के पहले अंतरिम डिविडेंड पर विचार किया जाएगा। कंपनी ने डिविडेंड के लिए 14 अक्टूबर को रिकॉर्ड डेट तय की है।

Godrej Consumer Products

कंज्यूमर गुड्स सेक्टर की Godrej Consumer Products को Q2FY27 में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद है। कंपनी ने कंसॉलिडेटेड रेवेन्यू में हाई-टीन्स ग्रोथ, वॉल्यूम में हाई-सिंगल डिजिट और EBITDA में डबल डिजिट ग्रोथ का अनुमान दिया है। कंपनी ने कहा कि कमजोर मानसून और महंगाई का खपत पर असर पड़ा।

Kotak Mahindra Bank

प्राइवेट सेक्टर के Kotak Mahindra Bank के नेट एडवांस दूसरी तिमाही के अंत में 24.7% YoY बढ़कर ₹5.77 लाख करोड़ हो गए। CASA डिपॉजिट 11.3% बढ़कर ₹2.49 लाख करोड़ रहा। कुल डिपॉजिट 23.2% बढ़कर ₹6.51 लाख करोड़ हो गया।

IndusInd Bank

इंडसइंड बैंक ने सितंबर तिमाही का मिलाजुला बिजनेस अपडेट जारी किया है। बैंक के नेट एडवांसेज 11.2% बढ़कर ₹3.62 लाख करोड़ हो गए। डिपॉजिट 10.1% बढ़कर ₹4.29 लाख करोड़ रहा, जबकि CASA रेशियो 29.4% से घटकर 28% हो गया।

IDFC FIRST Bank

IDFC फर्स्ट बैंक ने सितंबर तिमाही में लोन और एडवांस 20.4% बढ़कर ₹3,13,864 करोड़ होने की जानकारी दी है। कुल डिपॉजिट 17% बढ़कर ₹3,23,697 करोड़ रहा। CASA रेशियो 51.3% रहा, जो एक साल पहले 50.1% था।

Trent

टाटा ग्रुप की रिटेल कंपनी Trent का सितंबर तिमाही में स्टैंडअलोन रेवेन्यू 23% YoY बढ़कर ₹5,788 करोड़ हो गया। तिमाही के दौरान कंपनी ने 10 Westside और 17 Zudio स्टोर खोले। 30 सितंबर 2026 तक कुल स्टोर की संख्या 1,342 हो गई।

Juniper Hotels

हॉस्पिटैलिटी कंपनी Juniper Hotels ने Imagicaaworld Entertainment के साथ बाध्यकारी MoU किया है। इसके तहत कंपनी महाराष्ट्र के खोपोली में Novotel Imagicaa होटल का ऑपरेशन हासिल करेगी। 287 कमरों वाला यह होटल करीब 11 एकड़ में फैला है और सौदे की कीमत ₹248 करोड़ है।

Narayana Hrudayalaya

हेल्थकेयर कंपनी Narayana Hrudayalaya ने Mission of Mercy Hospital & Research Centre और The Assemblies of God of North India के साथ समझौता किया है। कंपनी कोलकाता के पार्क स्ट्रीट स्थित अस्पताल का लंबे समय के लिए ऑपरेशन और मैनेजमेंट संभालेगी। अस्पताल में 100 बेड हैं और यह करीब 63,240 वर्ग फुट में फैला है।

GAIL

सरकारी गैस कंपनी GAIL ने राजीव कुमार को नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी हो गई है।

Trent Q2 Update: टाटा की कंपनी का रेवेन्यू 23% बढ़कर ₹5788 करोड़ पहुंचा, Zudio के स्टोर 1000 के पार

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

‘जिसे सब समझते थे कचरा, उसी से कमा लिए करोड़ों’! इस कपल को पहाड़ों की सैर से आया था बिजनेस आइडिया

Plastic Waste Startup: दिल्ली में प्लास्टिक कचरा एक बड़ी समस्या है, लेकिन पति-पत्नी की एक जोड़ी ने इसी कचरे को अपने बिजनेस के लिए रॉ मटीरियल में बदल दिया। सोनल शुक्ला और वैभव वर्मा ने 2020 में Econscious की शुरुआत की। प्लास्टिक कचरे को सिर्फ कूड़ा समझने के बजाय, उन्होंने इसे काम की चीज़ोंचीजों में बदलने का एक मॉडल तैयार किया।

आज उनकी कंपनी प्लास्टिक कचरे से पार्क बेंच, डस्टबिन, प्लांटर और आम लोगों के इस्तेमाल की दूसरी चीजें बनाती है। इस कंपनी की शुरुआत महामारी के दौरान प्लास्टिक कचरे की बढ़ती समस्या को देखते हुए की गई थी।

ट्रेक के दौरान आया आइडिया

पहाड़ी इलाकों में यात्रा करते समय, सोनल और वैभव ने देखा कि हर तरफ प्लास्टिक का कचरा फैला हुआ था। इस बात ने उन्हें यह सोचने पर मजबूर किया कि कचरे को लैंडफिल में फेंकने के बजाय किसी काम की चीज़ में कैसे बदला जा सकता है। अपनी टेक्निकल जानकारी का इस्तेमाल करते हुए, उन्होंने प्लास्टिक कचरे को रीसायकल करके नए प्रोडक्ट बनाने पर काम करना शुरू किया। बता दें कि सोनल शुक्ला और वैभव वर्मा, दोनों ने NIT कुरुक्षेत्र से M.Tech किया है।

घर और कंपनियों से आता है कच्चा माल

Econscious का मॉडल सिर्फ प्लास्टिक से सामान बनाने तक ही सीमित नहीं है। कंपनी प्लास्टिक कचरे को उसके स्रोत से इकट्ठा करने का काम भी करती है और दिल्ली-NCR इलाके में घर-घर जाकर प्लास्टिक कचरा उठाने की सर्विस देती है। इसके अलावा, यह कई कंपनियों और संगठनों के साथ मिलकर काम करती है।

इकट्ठा किए गए प्लास्टिक को प्रोसेस करके अलग-अलग डिजाइन वाले प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। जहां आम तौर पर बिजनेस को नया कच्चा माल खरीदना पड़ता है, वहीं यहां प्लास्टिक जिसे आमतौर पर कचरा माना जाता है, प्रोडक्ट बनाने का आधार बनता है। यही बात इस मॉडल को सर्कुलर इकॉनमी से जोड़ती है।

प्लास्टिक से बन रही बेंच और डस्टबिन

कंपनी के प्रोडक्ट्स में बेंच, डस्टबिन, प्लांटर्स और दूसरी ऐसी चीजें शामिल हैं जिन्हें पार्क और सार्वजनिक जगहों पर इस्तेमाल के लिए बनाया गया है। Econscious ने P&G, जिलेट, नेस्ले, ITC, बिसलेरी और HCL फाउंडेशन जैसे संगठनों के साथ कई प्रोजेक्ट्स पर काम किया है। कंपनी के मुताबिक, बिसलेरी की बोतलों के ढक्कनों का इस्तेमाल करके रीसाइकल किए गए प्लास्टिक की बेंच बनाई गई हैं। साथ ही, HCL फाउंडेशन के लिए नोएडा में कई जगहों पर बेंच बनाकर लगाई भी गई हैं।

लाखों किलो प्लास्टिक को बनाया उपयोगी

इस बिजनेस का सबसे अहम पहलू इससे होने वाली कमाई है। सोनल शुक्ला ने बताया कि Econscious ने अब तक लगभग 3,50,000 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे को रीसायकल किया है। साथ ही, कंपनी ने अपनी शुरुआत से अब तक ₹1 करोड़ से ज्यादा की कमाई की है।

सोनल के अनुसार, कंपनी की कमाई सिर्फ रीसायकल किए गए प्रोडक्ट्स को बेचने से ही नहीं होती, प्लास्टिक कचरा मैनेजमेंट, उसे इकट्ठा करना और अलग-अलग ऑर्गनाइजेशन के लिए कस्टमाइज़्ड प्रोजेक्ट्स भी इस बिजनेस का हिस्सा हैं।

कमाई का मॉडल सिर्फ एक प्रोडक्ट बेचने तक सीमित नहीं है। यह प्रोसेस कचरा इकट्ठा करने से शुरू होता है, फिर प्रोसेसिंग होती है, और आखिर में रीसायकल किए गए मटीरियल का इस्तेमाल करके ग्राहकों की ज़रूरतों के हिसाब से प्रोडक्ट्स बनाए जाते हैं। इस पूरे प्रोसेस के दौरान अलग-अलग स्टेज पर वैल्यू क्रिएट होती है।

रिपोर्ट- शुभांगी तिवारी 

पिछली बार से 21 मेडल कम लाने के बावजूद भारत की चौथी रैंक बरकरार

Asian Games

जापान के आइची-नागोया में खेले गए एशियाई खेलों में भारत ने धीमी शुरुआत करने के बावजूद अक्टूबर की शुरुआत में तेज रफ्तार से पदक जीतना शुरु किए जिसमें गोल्ड मेडल की अच्छी खासी संख्या रही। शुक्रवार को ही भारत ने विभिन्न खेलों में 6 गोल्ड मेडल जीते जिसमें महिला हॉकी टीम का फाइनल में चीन के खिलाफ आया गोल्ड सबसे खास रहा जो 44 साल बाद आया। यही कारण रहा कि भारत का आंकड़ा 80 पार जा पाया।अगर अंतिम दो दिनों में भारत ने 11 स्वर्ण पदकों की शानदार झड़ी नहीं लगाई होती तो शीर्ष पांच में जगह बनाना भी मुश्किल होता।

भारत 85 पदकों (21 स्वर्ण, 27 रजत, 37 कांस्य) के साथ पदक तालिका में चौथे स्थान पर रहा जो चीन के हांग्झोउ में हुए पिछले चरण से 21 कम है।चीन लगातार 12वें चरण में तालिका में शीर्ष पर रहा उसने 169 स्वर्ण, 89 रजत और 83 कांस्य सहित कुल 341 पदक जीते जो विदेश में आयोजित एशियाई खेलों में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। मेजबान जापान 269 पदकों (83 स्वर्ण, 95 रजत और 91 कांस्य) के साथ दूसरे स्थान पर रहा। उसके बाद दक्षिण कोरिया के 39 स्वर्ण, 43 रजत और 68 कांस्य पदक थे।

मुक्केबाजों और तीरंदाजों के बेहतरीन प्रदर्शन का परिणाम है कि भारत पदकों की संख्या में 80 का आंकड़ा पार कर पाया। शनिवार को भारतीय पुरुष टीम मलेशिया के खिलाफ गोल्ड मेडल मैच में 5-1 से जीत दर्ज की। इसके अलावा पहलवानी में अमन सहरावत ने स्वर्ण, अंतिम पंघाल ने रजत और दीपक पुनिया ने कांस्य पदक जीतकर भारत का अभियान समाप्त किया।

भारत की महिला क्रिकेट टीम और पुरुष क्रिकेट टीम ने गोल्ड मेडल जीता है। वहीं भारत की कबड्डी की महिला और पुरुष टीम ने ईरान को हराकर गोल्ड जीता है। मीराबाई चानू ने पहली बार एशियाड में गोल्ड जीता। चोटिल होकर बाहर हो चुके नीरज चोपड़ा की गैर मौजूदगी में भी भारत के रोहित यादव और यशवीर सिंह ने रजत और कांस्य पदक जीता।

इसके अलावा कई एतिहासिक गोल्ड मेडल भारत को इन खेलों में मिले। कई खिलाड़ियों ने गोल्ड जीतकर लॉस एंजलिस ओलंपिक्स के लिए अपनी जगह बनाई। खासकर तीरंदाजी में भारत ने चौंकाने वाला प्रदर्शन किया रिकर्व तीरंदाजी महिला और पुरुष टीम ने गोल्ड जीतकर स्वत ओलंपिक क्वालिफाय किया। कुमद ने भी व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड जीता। इसके अलावा नीरू हांडा सबसे सफल एथलीट रहीं जिनको समापन समारोह में ध्वजवाहक बनने का गौरव प्राप्त हुआ।

TraP Shooting

उन्होंने आइची-नागोया में तीन मेडल – दो गोल्ड और एक सिल्वर – जीते। नीरू ने महिलाओं के ट्रैप इवेंट में गोल्ड मेडल जीता और एशियन गेम्स 2026 में व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। उन्होंने महिलाओं के ट्रैप टीम इवेंट में सिल्वर मेडल भी जीता और इसके बाद मिक्स्ड ट्रैप टीम इवेंट में एक और गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

ग्रीको रोमन वर्ग में नितेश सिवाच और सुनील कुमार ने भी शानदार प्रदर्शन किया जिससे कुश्ती का कुल प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा।

भारत को शुरुआत में बैडमिंटन, शूटिंग, टेबल टेनिस और कनोइंग में निराशा हाथ लगी अन्यथा हांगजाउ में आए 107 पदकों से आगे या बराबरी पर भारतीय दल रहता। बैडमिंटन की स्टार जोड़ी सात्विकसाइराज रंकी रेड्डी और चिराग शेट्टी एकल प्रतियोगिता के क्वार्टर फाइनल में ही हार गए। यही हाल पीवी सिंधू का रहा। बैडमिंटन की पुरुष टीम ने टीम इवेंट में ब्रॉंज मेडल जीतकर इज्जत बचाई। टेबल टेनिस की टीम  ईरान जैसी टीम के सामने हार गई। वहीं

एक और स्टार खिलाड़ी जिन्होंने निराश किया वह थी मनु भाकर जो 10 मीटर और 25 मीटर की निशानेबाजी स्पर्धा में एक भी पदक नहीं ला सकी।सबसे बड़ा उलटफेर वॉलीबॉल टीम के साथ हुआ जुलाई से बड़ी बड़ी टीमों को हराने वाली टीम पाकिस्तान से हारकर खेलों से बाहर हो जाएगी किसी ने सोचा ना था।टेनिस में भारत को बड़ा झटका लगा और भारतीय खिलाड़ी 40 साल में पहली बार बिना किसी पदक के लौटे।

SBI Schemes: जीरो रिस्क के साथ FD से बेहतर रिटर्न! गिरते मार्केट के बीच SBI की ये स्कीम्स कराएंगी बढ़िया मुनाफा

SBI Mutual Fund Schemes: शेयर बाजार में जब गिरावट या मंदी का दौर चल रहा होता है, तब नए और पुराने दोनों तरह के निवेशकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि ऐसे समय में क्या करें? इस मौके का फायदा उठाकर आने वाले 1 से 2 सालों में अपना पैसा सुरक्षित तरीके से कैसे बढ़ाया जाए। अक्सर निवेशक गिरावट देखकर पैनिक में आ जाते हैं या फिर जल्दबाजी में बड़े रिटर्न के लालच में स्मॉलकैप जैसे जोखिम भरे फंड्स में एकमुश्त पैसा लगा बैठते हैं।

हालांकि, बाजार के दिग्गज और पोर्टफोलियो मैनेजर्स इस रणनीति से सख्त बचने की सलाह देते हैं। विशेषज्ञों का साफ मानना है कि जब मार्केट में करेक्शन चल रहा हो, तो 3 साल से कम (1-2 साल) की कम अवधि के लिए स्मॉलकैप फंड्स में बड़ा दांव लगाना खतरनाक हो सकता है।

‘दुनिया से मजबूत है भारत की इकोनॉमी!’ वैश्विक अनिश्चितता के बीच पूर्व ECB चीफ ट्रिसेट का बड़ा दावा

पोर्टफोलियो रणनीतिकार बताते हैं कि, ‘बाजार की अनिश्चितता के दौर में कम अवधि जैसे 1-2 साल के लिए केवल ज्यादा रिटर्न तलाशने से कहीं ज्यादा जरूरी ‘कैपिटल प्रोटेक्शन’ होता है। ऐसे समय में डायवर्सिफाइड एसेट एलोकेशन या हाइब्रिड फंड्स के जरिए चरणबद्ध तरीके से निवेश करना ही वेल्थ प्रोटेक्शन और ग्रोथ का सबसे समझदारी भरा फॉर्मूला है।’

1 से 2 साल के नजरिए के लिए SBI Mutual Fund की 3 सबसे मुफीद स्कीम्स

अगर आपका नजरिया केवल अगले 12 से 24 महीनों का है और आप बाजार की रिकवरी का फायदा भी उठाना चाहते हैं, तो SBI की ये स्कीम्स सबसे बढ़िया साबित हो सकती हैं:

1. SBI Multi Asset Allocation Fund (जोखिम: कम से मध्यम)

यह फंड आपकी पूंजी को सिर्फ शेयर बाजार के भरोसे नहीं छोड़ता। यह पैसे को मुख्य रूप से इक्विटी, डेट (बॉन्ड/एफडी) और गोल्ड/सिल्वर में बांटकर निवेश करता है।

1-2 साल के लिए क्यों बेस्ट? इतिहास गवाह है कि जब शेयर बाजार में गिरावट या सुस्ती होती है, तब सोना और डेट एसेट्स पोर्टफोलियो को मजबूती देते हैं। 1-2 साल की अवधि में यह फंड बाजार की गिरावट के झटकों से पूरी सुरक्षा देते हुए आपको 10% से 12% तक का स्थिर और संतुलित रिटर्न देने की क्षमता रखता है।

2. SBI Equity Hybrid Fund (जोखिम: मध्यम)

यह एक कंजर्वेटिव हाइब्रिड मॉडल पर काम करता है, जहां कुल फंड का लगभग 65% से 80% हिस्सा इक्विटी में और बाकी 20% से 35% हिस्सा डेट प्रतिभूतियों (G-Secs, बॉन्ड्स) में लगाया जाता है।

बाजार के निचले स्तर पर होने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसका इक्विटी पोर्शन सस्ते वैल्युएशन पर मजबूत शेयर खरीद लेता है। जब अगले 1-2 साल में मार्केट रिकवर करेगा, तो इक्विटी हिस्सा तेजी से रिटर्न बढ़ाएगा और डेट हिस्सा गिरावट के समय पोर्टफोलियो को संभाल कर रखेगा।

3. SBI Arbitrage Opportunities Fund (जोखिम: बेहद कम / एफडी जैसा सुरक्षित)

यह फंड शेयर बाजार की तेजी या मंदी पर बिल्कुल निर्भर नहीं रहता। यह कैश मार्केट और डेरिवेटिव्स मार्केट के बीच कीमतों के अंतर का फायदा उठाकर जोखिम-रहित रिटर्न निकालता है।

अगर आपका मुख्य लक्ष्य जीरो-रिस्क है और आप बैंक एफडी (FD) से बेहतर और टैक्स-इफिशिएंट रिटर्न चाहते हैं, तो यह फंड सबसे सुरक्षित जरिया है। 1 से 2 साल की अवधि में इसमें पैसा डूबने का खतरा न के बराबर होता है।

अगर आप थोड़ा रिस्क ले सकते हैं तो ‘STP’ रूट से बनाएं रणनीति

अगर आप बाजार की गिरावट का फायदा उठाकर 1-2 साल में आने वाली तेजी का लाभ उठाना चाहते हैं, तो एकमुश्त पैसा लगाने के बजाय STP का तरीका अपनाएं। सबसे पहले अपना पूरा पैसा SBI Arbitrage Fund या SBI Liquid Fund में एकमुश्त जमा करें। वहां से हर महीने एक निश्चित राशि (STP के जरिए) SBI Flexicap Fund या SBI Bluechip Fund में ट्रांसफर होने दें। इससे अगले 12 से 18 महीनों में आपको बाजार की हर गिरावट में ‘कॉस्ट एवरेजिंग’ का बड़ा फायदा मिलेगा।

इन स्कीम्स में 1-2 साल के लिए पैसा लगाने से बचें!

SBI Small Cap Fund: स्मॉलकैप कंपनियों में गिरावट के समय बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव होता है। इनमें रिकवरी आने में 3 से 5 साल तक का समय लग सकता है।

SBI Contra Fund & SBI Focused Equity Fund: ये फंड्स खास रणनीतियों पर काम करते हैं और इन्हें अपना प्रदर्शन दिखाने के लिए कम से कम 5 से 7 साल का लंबा समय चाहिए होता है।

कुल मिलाकर 1 से 2 साल के शॉर्ट-टू-मीडियम टर्म के लिए SBI Multi Asset Allocation Fund या STP के जरिए SBI Flexicap Fund सबसे स्मार्ट और सुरक्षित विकल्प साबित होंगे।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

GST नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी! टैक्स मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार खत्म करने पर विचार, जेल की सजा भी घट सकती है

GST Council: आगामी GST काउंसिल की मीटिंग में GST के तहत होने वाले अपराधों को डीक्रिमिनलाइज करने पर चर्चा होगी। इसमें एक बड़ा मुद्दा गिरफ्तारी का भी है। सूत्रों के मुताबिक, काउंसिल इस बात पर विचार करेगी कि टैक्स अधिकारियों के पास गिरफ्तारी का मौजूदा अधिकार रखा जाए या नहीं।

अभी GST कानून के तहत कमिश्नर को गिरफ्तारी की मंजूरी देने का अधिकार है। यह अधिकार CGST Act की सेक्शन 69 में दिया गया है। इसके तहत कुछ गंभीर मामलों में कार्रवाई हो सकती है।

इनमें फर्जी इनवॉइस बनाना, गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC लेना, फर्जी रिफंड लेना और जानबूझकर टैक्स चोरी करना शामिल है। ऐसे अपराधों का जिक्र सेक्शन 132 में है।

GST में गिरफ्तारी का प्रावधान हट सकता है

सूत्रों के मुताबिक, अब GST कानून में गिरफ्तारी के अलग प्रावधान को ही हटाने पर विचार हो रहा है। अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो GST जांच के दौरान अधिकारी सेक्शन 69 के तहत किसी टैक्सपेयर को गिरफ्तार नहीं कर सकेंगे।

यह सुझाव GST काउसिंलग की लॉ कमेटी ने दिया है। कमेटी ने GST से जुड़े अपराधों को डीक्रिमिनलाइज करने को लेकर कई सुझाव दिए हैं।

GST काउंसिल की लॉ कमेटी में केंद्र और राज्यों के अधिकारी शामिल हैं। यह कमेटी GST कानूनों के प्रावधानों की समीक्षा करती है। इसके बाद यह GST काउंसिल को कानूनी बदलाव और जरूरी स्पष्टीकरण की सिफारिश करती है।

धोखाधड़ी पर कार्रवाई खत्म नहीं होगी

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि गिरफ्तारी का प्रावधान हटाने का मतलब यह नहीं है कि जानबूझकर की गई धोखाधड़ी पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।

Khaitan & Co के पार्टनर ओंकार शर्मा ने कहा कि अगर मामले के तथ्य इसकी जरूरत दिखाते हैं, तो BNS समेत सामान्य आपराधिक कानूनों के तहत क्रिमिनल प्रॉसिक्यूशन किया जा सकता है।

शर्मा के मुताबिक, इस प्रस्ताव का मकसद टैक्स प्रशासन और टैक्स वसूली को किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से अलग करना है।

5 करोड़ से बढ़कर 10 करोड़ हो सकती है सीमा

लॉ कमेटी ने मुकदमा शुरू करने की मौद्रिक सीमा बढ़ाने की भी सिफारिश की है। अभी GST कानून में 5 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा की टैक्स चोरी या गलत तरीके से लिए गए ITC पर मुकदमा चलाया जा सकता है।

अब इस सीमा को बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है। यानी अगर किसी मामले में टैक्स चोरी या गलत तरीके से लिए गए ITC की रकम 10 करोड़ रुपये से कम है, तो ऐसे मामलों में मुकदमा शुरू करने के नियम बदले जा सकते हैं।

कुछ अपराधों में जेल की सजा भी घट सकती है

कमेटी ने कुछ GST अपराधों में जेल की सजा कम करने की भी सिफारिश की है। अभी CGST Act की Section 132 के तहत सजा का प्रावधान अपराध की रकम के हिसाब से अलग-अलग है।

5 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा के GST अपराध में अधिकतम 5 साल की जेल हो सकती है। वहीं, 2 करोड़ से 5 करोड़ रुपये के अपराध में अधिकतम 3 साल की जेल का प्रावधान है। इसी तरह 1 करोड़ से 2 करोड़ रुपये के अपराध में अधिकतम 1 साल की जेल हो सकती है।

लॉ कमेटी ने इन मामलों में जेल की अवधि कम करने की सिफारिश की है। अब GST काउंसिल की बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा होगी।

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Commodity Market : जानिए आगे हफ्ते कैसी रह सकती है कमोडिटीज की चाल, सोने को कहां मिलेगा सपोर्ट और कहां होगा रेजिस्टेंस

Commodity Market : 2 अक्टूबर को खत्म हुए हफ्ते में बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। यूएस बॉन्ड की भारी बिकवाली से बाजार पर दबाव बना रहा। हालांकि अमेरिका से लगातार आने वाले कमजोर डेटा के कारण फ़ेडरल रिजर्व के ब्याज दरों से जुड़े अनुमानों में काफी बदलाव हुआ है। अप्रैल 2025 के बाद पहली बार डॉलर 102 के स्तर से ऊपर चला गया। इसमें सबसे ज्यादा तेजी गुरुवार को आई। ग्लोबल बॉन्ड की बड़े पैमाने पर बिकवाली के कारण US में 10 ईयर ट्रेजरी बॉन्ड का यील्ड 5.34 प्रतिशत (2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर) तक पहुंच गई और डॉलर भी 102.2 के हाई पर पहुंच गया।

करेंसी की चाल में कोई बड़ा बदलाव नहीं

दो अलग-अलग आंकड़ों ने मार्केट सेंटीमेंट पर असर डाला,लेकिन करेंसी की चाल में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया। बुधवार को आए कोर PCE के आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। वहीं, शुक्रवार को आए सितंबर के पेरोल आंकड़े सिर्फ़ 29,000 पर रहे, जो लगभग 84,000 से 90,000 के अनुमान से काफी कम थे। साथ ही बेरोज़गारी दर बढ़कर 4.2 प्रतिशत हो गई। जुलाई-अगस्त के आंकड़ों में कुल मिलाकर 60,000 नौकरियों की कमी आई।

अमेरिका में वेतन बढ़ोतरी की रफ्तार पड़ी धीमी

वेतन में बढ़ोतरी की रफ्तार भी धीमी पड़ती दिखा। सितंबर में प्रति घंटा औसत कमाई में सिर्फ़ 0.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई और सालाना बढ़ोतरी धीमी होकर लगभग 3 प्रतिशत रह गई,जो 2021 के बाद से सबसे कम है। इस जॉब्स रिपोर्ट के बाद ब्याज दरों में बदलाव के अनुमान बदल गए। यूएस फेड की अक्टूबर की बैठक में दरों में बढ़ोतरी की संभावना,जो एक हफ्ते पहले 60 प्रतिशत से ज़्यादा थी,घटकर 20 प्रतिशत से भी कम हो गई है।

इन आंकड़ों के बाद शुक्रवार को अमेरिकी शेयर बाजार में तेजी आई, हालांकि पिछले पांच हफ्तों में ज्यादातर समय डाओ जोन्स और S&P 500 में गिरावट देखने को मिली। जबकि नैस्डक में बढ़त जारी रही।

हफ्ते के आखिर में स्पॉट गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में 3 प्रतिशत और 6 प्रतिशत से ज़्यादा की गिरावट आई। डॉलर और यील्ड में बढ़ोतरी का असर ब्याज दरों के अनुमानों पर पड़ा। फेड अधिकारी ज़्यादातर सतर्क रुख अपनाते दिखे। न्यूयॉर्क फेड के प्रेसिडेंट विलियम्स ने कहा कि इस साल के आखिर में एक और बढ़ोतरी की जरूरत पड़ सकती है,हालांकि उन्हें इसकी कोई जल्दबाजी नहीं दिखी। जबकि उनके कई सहयोगियों ने महंगाई के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने के जोखिम की ओर इशारा किया।

डॉलर और बॉन्ड यील्ड में बढ़त होने पर सोने पर बनेगा दबाव

बीते हफ्ते सोने की कीमतों में दो बार तेजी आई। कमजोर जॉब्स और महंगाई के आंकड़ों की वजह से यह कुछ समय के लिए $4,200 प्रति औंस के स्तर को पार कर गया,लेकिन यह अपनी बढ़त बनाए नहीं रख सका और $4,150 से नीचे बंद हुआ। चांदी का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा। हफ्ते में दोनों बार यह $62 प्रति औंस के करीब पहुंची, लेकिन हर बार वापस $60 से नीचे आ गई। इनकी आगे की चाल काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि डॉलर और यील्ड काबू में रहते हैं या नहीं। अगर इनमें से किसी में भी दोबारा तेजी आती है,इन मेटल्स पर और दबाव पड़ने की संभावना है।

सोने के लिए सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल

गोल्ड फ्यूचर्स में कमजोरी का रुख बना हुआ है और ये 20-डे EMA और सुपरट्रेंड (7,3) दोनों के नीचे ट्रेड कर रहा है। जबकि RSI (14) 50 से नीचे है,जो सुस्त मोमेंटम का संकेत है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट ₹1,45,950 प्रति 10 ग्राम पर है। अगर गोल्ड इस लेवल से नीचे बना रहता है,तो यह ₹1,44,500 के आसपास स्थित अगले सपोर्ट लेवल तक गिर सकता है।

ऊपर की तरफ इसके लिए ₹1,51,100 पर रेजिस्टेंस दिख रहा हैऔर उसके बाद ₹1,53,000 पर अगला बड़ा रेजिस्टेंस है। शॉर्ट-टर्म आउटलुक में सुधार के लिए सोने के लिए लगातार ₹1,53,000 के ऊपर बने रहना जरूरी होगा। कुल मिलाकर इसका टेक्निकल ट्रेंड साइडवेज से लेकर बेयरिश बना हुआ है।

कच्चे तेल पर रहेगी नजर

ईंधन की कीमतों को लेकर वॉशिंगटन के बढ़ते दबाव के जवाब में G7 देशों ने अगले चार महीनों में 10 करोड़ (100 मिलियन) बैरल तक डीजल और कच्चे तेल के भंडार को कम करने की एक मिली-जुली योजना बनाई है। इस योजना के तहत डीजल भंडार का अधिकांश हिस्सा शुरुआती तीन हफ्तों में ही कम किया जाएगा। इस योजना के दबाव के चलते कच्चे तेल की कीमतें हफ्ते के आखिर में गिरकर बंद हुईं।

इसी जॉइंट स्टेटमेंट में ईरान के अपने पड़ोसियों पर हालिया हमलों की निंदा की गई और रूस पर पहले से लगे प्रतिबंधों को फिर से दोहराया गया। फिर भी,कच्चे तेल के भाव में सिर्फ 2 प्रतिशत की ही कमी आई। इसकी वजह यह है कि खाड़ी क्षेत्र में अभी भी जोखिम बना हुआ है। ऐसी खबरें भी हैं कि अमेरिका का तीसरा कैरियर स्ट्राइक ग्रुप इस क्षेत्र में भेजा जा रहा है,जिसके नवंबर के आखिर तक पहुंचने की उम्मीद है।

उधर डोनाल्ड ट्रम्प ने उस पूर्व रिपोर्ट का खंडन किया है जिसमें कहा गया था कि वाशिंगटन ने ठोस परमाणु रियायतों के बदले ईरान को प्रतिबंधों में राहत की पेशकश की है। हालांकि कतर ने दोनों पक्षों के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी रखने की बात कही है। हालांकि इससे अभी कोई बड़ी सफलता नहीं हासिल हुई है।

सप्लाई के नजरिए से देखें तो पिछले महीने ड्रोन हमले से हुए नुकसान के बाद सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन फिर से चालू हो गई है। यह पाइपलाइन अभी अपनी पूरी क्षमता के लगभग आधे यानी रोज़ाना 35 लाख बैरल की रफ़्तार से चल रही है। साथ ही,सितंबर में मिडिल ईस्ट से कच्चे तेल की कुल शिपमेंट बढ़कर रोज़ाना 1.63 करोड़ बैरल हो गई है,जो फरवरी के आखिर में शुरू हुए टकराव के बाद से सबसे तेज रफ़्तार है।

बेस मेटल्स की कीमतों में भी भारी गिरावट

बीते हफ्ते बेस मेटल्स की कीमतों में भी भारी गिरावट आई। कॉपर 2 प्रतिशत से ज़्यादा गिरकर $14,260 प्रति टन के आसपास बंद हुआ। जबकि जिंक और एल्युमीनियम में लगभग 5 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली। डॉलर के 17 महीने के हाई पर पहुंचने का असर डॉलर में ट्रेड होने वाली कमोडिटीज़ पर पड़ा,जिससे चीन के आंकड़ों में आए अच्छे सुधार का असर भी बेअसर हो गया।

चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI में जून के बाद पहली बार बढ़ोतरी

चीन के मैन्युफैक्चरिंग PMI में जून के बाद पहली बार बढ़ोतरी दिखी है। वहीं, सर्विस और कंस्ट्रक्शन सेक्टर को कवर करने वाला नॉन-मैन्युफैक्चरिंग इंडेक्स बढ़कर 50.2 पर पहुंच गया है। इन दोनों आंकड़ों में नए स्टिमुलस पैकेज के बाद बढ़त आई है,जिसे 2024 के बाद का सबसे बड़ा पैकेज बताया जा रहा है और जिसका मकसद चीन में 4.5 से 5 प्रतिशत के ग्रोथ टारगेट को हासिल करना है।

हफ़्ते की शुरुआत में सप्लाई से जुड़ी चिंताओं के कारण कॉपर की कीमत $14,400 से ऊपर बनी हुई थी,लेकिन बाद में दूसरी कमोडिटीज की तरह इसमें भी गिरावट आई। नेशनल डे की छुट्टियों के कारण चीन में कमजोर कारोबारी गतिविधि के कारण मेटल्स की स्थिति को लेकर अनिश्चितता और बढ़ गई है।

FOMC की मीटिंग के मिनट्स और Fed अधिकारियों के भाषणों पर रहेगी नजर

आने वाले हफ्ते में डेटा कम ही आएगा। मुख्य रूप से बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के सर्विस PMI और US के शुरुआती कंज्यूमर सेंटीमेंट और महंगाई के अनुमान ही आएंगे। इस हफ्ते के डेटा पर सेंट्रल बैंक की प्रतिक्रिया के बारे में और अंदाजा लगाने के लिए FOMC की मीटिंग के मिनट्स और Fed अधिकारियों के भाषणों पर बाजार का फोकस रहेगा।

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कॉपर को लेकर एक खास जोखिम

अगले हफ्ते कॉपर को लेकर एक खास जोखिम बना रहेगा। चिली में BHP की एस्कोन्डिडा और एंटोफ़ागास्टा की सेंटिनेला खदानों के कर्मचारियों ने नए कॉन्ट्रैक्ट ऑफ़र ठुकरा दिए हैं और वे सरकार की अनिवार्य मध्यस्थता प्रक्रिया में शामिल हो गए हैं। अगर बातचीत विफल रहती है तो सेंटिनेला में 13 अक्टूबर के आसपास कानूनी हड़ताल हो सकती है,जिससे तांबे की फिजिकल सप्लाई पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। पनामा की कोब्रे पनामा खदान को फिर से शुरू करने के प्रस्ताव से भी ज़्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।

OPEC से प्रोडक्शन कोटा में किसी बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं

उम्मीद है कि OPEC प्रोडक्शन कोटा में कोई बदलाव नहीं करेगा। वहीं, मार्केट G7 के डीजल रिलीज़ और अगर कीमतें ज्यादा बनी रहती हैं, तो रिज़र्व से और डीजल निकालने के किसी भी संकेत पर नजर रखेगा। सऊदी अरब और हूथी के बीच तनाव बढ़ने का जोखिम कच्चे तेल की कीमतों के लिए सबसे अहम फैक्टर बना हुआ है। इससे सऊदी अरब के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर को सीधा खतरा है।

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What to expect from Mercedes-Maybach S-Class ahead of launch tomorrow

What to expect from Mercedes-Maybach S-Class ahead of launch tomorrow
Mercedes Maybach S-Class

Mercedes-Benz will launch the updated Maybach S-Class in India on October 5. The facelift brings styling and technology updates, along with more personalization options and changes to the powertrain range. With the launch just around the corner, here’s everything you need to know about the new Maybach S-Class.

What exterior changes does the new Maybach S-Class get over the S-Class?

The Maybach S-Class gets the larger illuminated grille seen on the updated S-Class, but with Maybach-specific vertical slats and an illuminated ‘Maybach’ wordmark above them. It also gets an illuminated Mercedes star on the bonnet, LED headlights with three-pointed-star DRLs and rose gold embellishments featuring the Maybach logo instead of the techie blue accents on the standard S-Class. There are also tiny Maybach logos in the lower air-dam mesh, an illuminated Maybach logo on the D-pillar and the same three-pointed-star LED signature for the tail-lamps as the standard S-Class.

The Maybach is 180mm longer than the long-wheelbase S-Class. It is also available with new 20- and 21-inch forged alloy wheels, which feature a counterweighted Mercedes logo that stays upright as the wheels turn. The carmaker says every Maybach S-Class gets some options from its Manufaktur personalization range, which now includes more exterior colours and two-tone paint combinations.

What are the key interior and feature highlights of the Maybach S-Class?

The cabin of the Maybach S-Class, like the standard S-Class gets a Superscreen-style layout comprising a 12.3-inch digital instrument cluster, a 14.4-inch central touchscreen and a 12.3-inch passenger display. The car also uses a new E&E architecture with four ‘supercomputers’ that run the entire car, from the screens to the safety features to the driving dynamics.

As on the outside, Mercedes has expanded the choice of extended leather upholstery and added new upholstery colours. For the first time on a Maybach, buyers can also specify leather-free vegan upholstery with its own unique design. 

What changes have been made to the rear-seat experience of the Maybach S-Class?

The rear seats now recline up to 43 degrees, compared with 38 degrees in the standard S-Class. They are also heated, ventilated and equipped with massage functions. The previous tablet controller has been replaced by two individual smartphone-style remotes for operating the car’s functions. There is also a Maybach drive mode that makes the suspension even softer.

What engine options are available internationally on the Maybach S-Class, and which one will India get?

Internationally, the Maybach S-Class is offered with petrol and plug-in hybrid powertrains. The S 580 gets a 4.0-litre V8 with a flat-plane crank, producing 537hp and 750Nm. Some markets also get the S 580e plug-in hybrid, which combines a 3.0-litre inline-six with a 163hp electric motor and a 22kWh battery. Total output is 585hp and 750Nm, with an electric-only range of up to 98km. The top-spec S 680 gets either a V12 or a more powerful V8 depending on the market. 

In India, we are likely to get the 612hp, 850Nm version of the S 580’s 4.0-litre V8.

What is the Maybach S-Class Night Series?

The Night Series is a darker-themed version of the Maybach S-Class. It gets darker exterior and interior colours, while chrome elements are replaced with dark chrome. It also gets a different set of aero-efficient black wheels adorned with dozens of Maybach logos.

How much will the new Maybach S-Class cost in India

The outgoing Maybach S 580 is currently priced at Rs 2.87 crore, ex-showroom, before options. Like the outgoing model, the updated Maybach S-Class is also expected to be locally assembled in India. The updated model is expected to cost more, with the price likely to be north of Rs 3 crore.

Maatrubhumi Release: सलमान खान की वॉर ड्रामा को मिली सरकार की मंजूरी? ये बड़े बदलाव किए गए

Maatrubhumi Release: सलमान खान की वॉर ड्रामा फिल्म ‘मातृभूमि’ का सफर काफ़ी उतार-चढ़ाव भरा रहा है। फिल्म का नाम बदला गया, टीजर पर लोगों की प्रतिक्रियाएं, रिलीज कई बार टली और हाल ही में तो यह भी पक्का नहीं था कि यह फिल्म कभी रिलीज होगी या नहीं। लेकिन एक नई रिपोर्ट के मुताबिक़ अब ये सब पुरानी बातें हो चुकी हैं। ‘मातृभूमि’ अगले महीने ही सिनेमाघरों में आ सकती है।

‘मातृभूमि’ को सरकार से NOC मिली

खबर थी कि ‘मातृभूमि’ – जो शुरू में गलवान में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच टकराव पर आधारित थी – या तो रोक दी गई थी या उसमें देरी हो रही थी। वजह…. केंद्र सरकार को यह पक्का नहीं था कि इसमें चीन को कैसे दिखाया जाएगा। अब बॉलीवुड हंगामा ने एक सूत्र के हवाले से कहा है कि I&B मंत्रालय फिल्म के नए वर्जन से ‘संतुष्ट’ है और उसने पिछले हफ्ते ही इसे NOC दे दी है।

बताया जाता है कि रक्षा मंत्रालय की ओर से फिल्म के शुरुआती चीन-विरोधी रुख पर आपत्ति जताए जाने के बाद ‘मातृभूमि’ की कई बार दोबारा शूटिंग (रीशूट) की गई। रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है- “‘मातृभूमि’ का नया वर्जन ओरिजिनल वर्जन की तुलना में काफी बदला हुआ है। इसके अलावा अब इसमें भारत और चीन के रिश्तों को भी सकारात्मक नजरिए से दिखाया गया है।”

‘मातृभूमि’ की रिलीज डेट?

हालांकि ‘मातृभूमि’ के मेकर्स ने अभी तक इस बारे में कोई पुष्टि नहीं की है। लेकिन बॉलीवुड हंगामा की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सलमान खान ने रिलीज के लिए एक तारीख सोच रखी है। रिपोर्ट में सूत्र के हवाले से कहा गया है, “सलमान खान अब 13 नवंबर पर नजरें गड़ाए हुए हैं। उनका मानना ​​है कि दिवाली के बाद का समय – जब लोग जश्न के मूड में होंगे – फिल्म की रिलीज के लिए सही रहेगा।

हालांकि सेंसर की प्रक्रिया अभी बाकी है। मेकर्स जल्द ही फिल्म को सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पास जमा करेंगे। अगर CBFC फिल्म को मंजूरी दे देता है और यह प्रक्रिया इसी महीने पूरी हो जाती है, तो सलमान और उनकी टीम शायद 13 नवंबर को ‘मातृभूमि’ को सिनेमाघरों में ले आएगी। इस बारे में अगले 10 दिनों में साफ तस्वीर सामने आ जाएगी।” अगर ऐसा होता है, तो ‘मातृभूमि’ फिल्म नितेश तिवारी की बड़े बजट वाली फिल्म ‘रामायण पार्ट वन’ के रिलीज़ होने के एक हफ्ते बाद सिनेमाघरों में आ सकती है।

‘मातृभूमि’ के बारे में

सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले सलमा खान द्वारा प्रोड्यूस की गई फिल्म ‘मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस’ का निर्देशन अपूर्व लाखिया ने किया है और इसमें चित्रांगदा सिंह भी अहम भूमिका में हैं। इस साल की शुरुआत में नाम बदलने से पहले इस फिल्म का टाइटल ‘बैटल ऑफ गलवान’ था। असल में यह फिल्म भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच 2020 में हुई गलवान घाटी की झड़प पर आधारित थी, लेकिन खबरों के मुताबिक दोबारा शूटिंग के बाद फिल्म से चीन से जुड़े सभी संदर्भ हटा दिए गए।