Kriti Sanon: क्या वे इसे ईद के एड पर पहनेंगी? रक्षाबंधन के विज्ञापन में ब्रालेट टॉप पहने दिखीं कृति सेनन पर भड़के लोग

Kriti Sanon Rakshabandhan ad: कृति सेनन को रक्षाबंधन के ज्वेलरी विज्ञापन में एक फ्यूजन आउटफिट (जिसमें ब्रैलेट-स्टाइल ब्लाउज, केप और ड्रेप्ड स्कर्ट शामिल थी) पहनने के बाद ऑनलाइन काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। जहां कुछ यूज़र्स ने इस लुक को त्योहार के कैंपेन के लिए गलत बताया, वहीं दूसरों ने एक्ट्रेस का बचाव करते हुए कहा कि महिलाओं को उनके पहनावे के आधार पर जज नहीं किया जाना चाहिए।

विज्ञापन में कृति को एक कुत्ते को राखी बांधते हुए भी दिखाया गया है, जो उन पर भौंकता है। त्योहार में पालतू जानवर को शामिल करने का यह आइडिया कुछ लोगों को पसंद नहीं आया, जबकि अन्य लोगों ने उनके आउटफिट पर ध्यान दिया और सवाल उठाया कि क्या यह रक्षाबंधन के लिए सही था।

कृति सेनन को क्यों ट्रोल किया जा रहा है?

ऐड के ऑनलाइन शेयर होने के बाद कृति की ड्रेस चर्चा का मुख्य विषय बन गई। कुछ यूजर्स को लगा कि रक्षाबंधन से जुड़े कैंपेन के लिए उनका ब्रैलेट-स्टाइल ब्लाउज कुछ ज्यादा ही रिवीलिंग था, जबकि दूसरों का कहना था कि यह आलोचना असल में महिला के कपड़ों पर रोक-टोक करने जैसा है।

एक और व्यक्ति ने ‘आदिपुरुष’ की एक्ट्रेस के खिलाफ शिकायत की मांग की। उन्होंने कहा, “भाई-बहन के त्योहार राखी को गलत तरीके से दिखाने और हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए @kritisanon के खिलाफ BNS की धारा 299 के तहत FIR दर्ज की जानी चाहिए—इसमें विजुअल या इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों से धार्मिक मान्यताओं का अपमान करने वाले जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्यों के लिए 3 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान है।”

एक और यूजर ने कहा, “लड़के ने पूरे पारंपरिक कपड़े क्यों पहने हैं?? उसे भी जिम वेस्ट पहननी चाहिए थी। लोग मौके के हिसाब से कपड़े पहनते हैं, यह तो आम समझ की बात है। यह रक्षाबंधन है किसी की प्राइवेट पार्टी नहीं।” कुछ आलोचनाओं में धर्म का मुद्दा भी उठाया गया। यूजर्स ने सवाल किया कि क्या ईद या क्रिसमस जैसे त्योहारों पर भी ऐसे कपड़ों को स्वीकार किया जाता।

कृति सेनन के फैन्स उनके समर्थन में आए

हर कोई इस आलोचना से सहमत नहीं था। कई यूजर्स कृति के बचाव में भी उतरे और कहा कि उनकी ड्रेस पारंपरिक त्योहारों के कपड़ों का एक आधुनिक रूप थी, न कि कुछ अनुचित। एक यूजर ने लिखा, “हर कोई कृति सेनन को इस GIVA ऐड के लिए ट्रोल कर रहा है और कह रहा है कि उन्होंने ‘बिकिनी’ पहनी है। क्या सच में? नहीं। उन्होंने कुछ भी गलत या अश्लील नहीं पहना है। हो सकता है कि उनका पहनावा ‘शालीनता’ की आपकी परिभाषा में फिट न बैठता हो। मैं भी अपने भाई के सामने ऐसे कपड़े पहन सकती हूं। जो लोग फिल्मों में उनके बिकिनी सीन पर तालियां बजाते थे, वही अब उनके कपड़ों पर सवाल उठा रहे हैं। औरतों को हर हाल में जज किया जाता है। ट्रोलर्स, अपनी जिंदगी पर ध्यान दो।”

एक और यूजर ने कहा, “मजेदार बात है कि जब औरतों के कपड़ों की बात आती है, तो लोग अचानक शालीनता के ठेकेदार बन जाते हैं। अगर आपको उनका पहनावा पसंद नहीं है, तो आगे बढ़ जाइए। किसी और की पसंद पर सवाल उठाने की जरूरत नहीं है।”

तीसरे यूजर ने लिखा, “कृति सेनन के राखी ऐड पर क्लीवेज दिखाने और कुत्ते को राखी बांधने को लेकर हंगामा मच गया। आलोचकों ने त्योहार के दौरान उनके ‘अश्लील’ कपड़ों पर सवाल उठाए और पालतू कुत्ते को राखी बांधने पर आपत्ति जताई, इसे गलत बताया!! ये तो ‘मोरल पुलिस’ वाली बात हो गई!”

रक्षा बंधन 2026, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। यह हिंदू त्योहार भाई-बहन के रिश्ते का जश्न मनाता है। इस मौके पर बहनें पारंपरिक रूप से अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी सलामती की दुआ करती हैं, जबकि भाई अक्सर बदले में तोहफे देते हैं।

कृति सेनन की फिल्में

कृति सेनन को हाल ही में होमी अदजानिया की फिल्म ‘कॉकटेल 2’ में देखा गया था, जो 19 जून 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी। इस फ़िल्म में उनके साथ शाहिद कपूर और रश्मिका मंदाना भी हैं और यह 14 अगस्त से नेटफ़्लिक्स पर स्ट्रीम होने लगी है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : कच्चे तेल में नरमी से भारतीय बाजारों के सेंटिमेंट सुधरे हैं। गिफ्ट निफ्टी में करीब 70 प्वाइंट की बढ़त दिख रही है। FIIs की कैश और वायदा मिलाकर करीब 680 करोड़ की नेट खरीदारी देखने को मिली है। नेट शॉर्ट कॉन्ट्रैक्ट भी थोड़े कम हुए हैं। यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

21 अगस्त को उतार-चढ़ाव भरे सेशन में मार्केट पिछले सेशन की जबरदस्त रिकवरी को आगे नहीं बढ़ा पाए और सपाट बंद हुए। मेटल,PSU बैंक और रियल्टी शेयरों में बढ़त का असर ऑटो,IT,मीडिया और फार्मा शेयरों में बिकवाली से खत्म हो गया। मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बावजूद,मार्केट बढ़त के साथ खुला लेकिन उस बढ़त को बनाए नहीं रख पाया और पूरे सेशन के दौरान एक सीमित दायरे में ही घूमता रहा। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और दुनिया भर में बनी अनिश्चितताओं के बीच इन्वेस्टर्स सतर्क नजर आए। कारोबार के अंत में,सेंसेक्स 3.11 अंक बढ़कर 77,540.83 पर और निफ्टी 20.15 अंक या 0.08 प्रतिशत बढ़कर 24,252 पर बंद हुआ।

ईरान के खिलाफ आर्थिक D-Day का एलान, ईरान की तेल निर्यात थामने की चेतावनी

वेस्ट एशिया में अब आर-पार की लड़ाई दिख रही है। अमरिका ने ईरान के खिलाफ सबसे बड़ी इकोनॉमिक स्ट्राइक शुरू कर दी है। US के वित्त मंत्री ने कहा है कि ईरान के खिलाफ वॉर अब आखिरी चरण में है। ईरान का भी पलटवार हुआ है। उसने कहा कि ये प्रतिबंध एक्ट ऑफ वॉर की कटेगरी में आते हैं। अमेरिका का साथ देने वाले देशो को भी निशाना बनाते हुए एक्सपोर्ट ठप करेंगे।

कच्चे तेल में मामूली नरमी, $91 के नीचे, सोना 4600 डॉलर के पार

वेस्ट एशिया तनाव बढ़ने के बावजूद कच्चे तेल में नरमी है। यह 91 डॉलर के नीचे है। इधर सोना-चांदी चमके हैं। सोना 4600 डॉलर के पार चला गया है। 10 साल की US बॉन्ड यील्ड भी 4.7 के अहम लेवल के ऊपर है। हलांकि डॉलर इंडेक्स 99 डॉलर के नीचे है।

अमेरिकी बाजारों में रही बढ़त, निक्केई और कॉस्पी में दबाव

शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में जोरदार तेजी दिखी। डाओ जोंस में 500 प्वाइंट से ज्यादा का उछाल आया। नैस्डैक और S&P में भी हल्की बढ़त रही। वहीं एशिया में मिला-जुला कारोबार देखने को मिल रहा है। कॉस्पी में करीब 1.25 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार हो रहा है। निक्केई फ्लैट कारोबार कर रहा है।

एशियाई करेंसी

अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ज़्यादातर एशियाई करेंसी में बढ़त देख रही है। इसमें इंडोनेशियाई रुपिया सबसे आगे है, जिसमें 0.305% की बढ़त हुई है। इसके बाद दक्षिण कोरियाई वॉन (0.216%),ताइवान डॉलर (0.154%),थाई बाहत (0.141%),चीनी रेनमिनबी (0.051%),जापानी येन (0.044%) और मलेशियन रिंगित (0.017%)का नंबर है। सिंगापुर डॉलर में कोई बदलाव नहीं हुआ है। जबकि फिलीपींस पेसो में डॉलर के मुकाबले 0.092% की गिरावट आई है।

लेंसकार्ट और मीशो में बड़ी ब्लॉक डील संभव

लेंसकार्ट में आज 2800 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील हो सकती है। 4% डिस्कउंट पर 635 रुपये फ्लोर प्राइस तय की गई है। इसके साथ मीशो में भी करीब 957 करोड़ रुपये की ब्लॉक डील हो सकती है। इसके लिए 4 फीसदी तक के डिस्काउंट पर 197 रुपये के करीब फ्लोर प्राइस तय है। दोनों में बड़े निवेशक हिस्सेदारी बेच रहे हैं।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, मजबूत हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

शुरू हुई मोबाइल PLI 2.0 स्कीम, सरकार ने जारी किया नोटिफिकेशन

डिक्सन और अंबर जैसी कंपनियों पर आज फोकस रखें। सरकार ने मोबाइल PLI 2.0 स्कीम का नोटिफिकेशन जारी किया है। सरकार 62500 करोड़ रुपये के इंसेंटिव देगी। यह स्कीम एक अप्रैल 2026 से ही लागू होगी और वित्त वर्ष 2031 तक चलेगी। इसके तहत सरकार 5% तक के इंसेंटिव देगीएफआईआई और

डीआईआई फंड फ्लो

21 अगस्त को घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने लगातार नौवें सेशन में भी खरीदारी जारी रखी और ₹2,124 करोड़ के शेयर खरीदे, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार दूसरे सेशन में भी नेट सेलर बने रहे और ₹543 करोड़ के शेयर बेचे।

Stocks to Buy: ये 5 स्टॉक्स 61% रिटर्न दे सकते हैं, ब्रोकरेज ने खरीदने की सलाह दी

Stocks to Buy: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच कई बड़ी ब्रोकरेज कंपनियां चुनिंदा शेयरों पर बुलिश बनी हुई हैं। Jefferies और Macquarie समेत कई फर्मों ने इन स्टॉक्स पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। इनमें सबसे ज्यादा अपसाइड Patanjali Foods में दिख रहा है, जहां करीब 61% तक रिटर्न की उम्मीद जताई गई है।

Divi’s Laboratories

ब्रोकरेज Macquarie ने फार्मा कंपनी Divi’s Laboratories पर 10,200 रुपये का टारगेट दिया है। इसमें मौजूदा स्तर से करीब 19% तेजी आ सकती है। ब्रोकरेज का मानना है कि कैपेक्स से कमाई बढ़ने और ऑपरेटिंग लीवरेज में सुधार से ग्रोथ तेज हो सकती है।

Larsen & Toubro

ब्रोकरेज Jefferies ने इंजीनियरिंग कंपनी Larsen & Toubro पर Buy रेटिंग के साथ 5,000 रुपये का टारगेट दिया है। यह करीब 23% का संभावित उछाल दिखाता है। मजबूत ऑर्डर बुक और भारत के कैपेक्स साइकल से कंपनी को फायदा मिलने की उम्मीद है।

TVS Motor Company

ब्रोकरेज Jefferies ने ऑटो कंपनी TVS Motor Company पर Buy रेटिंग बरकरार रखी है। इसके लिए 5,425 रुपये का टारगेट दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 24% रिटर्न दे सकता है। ब्रोकरेज को वॉल्यूम ग्रोथ और कमाई में मजबूत बढ़त की उम्मीद है।

Emmvee Photovoltaic Power

ब्रोकरेज Jefferies ने सोलर कंपनी Emmvee Photovoltaic Power पर Buy रेटिंग कायम रखी है। 440 रुपये का टारगेट मौजूदा स्तर से करीब 31% ऊपर है। मजबूत ऑर्डर बुक, TOPCon टेक्नोलॉजी और विस्तार योजनाओं को इसकी बड़ी ताकत माना गया है।

Patanjali Foods

ब्रोकरेज Jefferies ने FMCG कंपनी Patanjali Foods पर Buy कॉल देते हुए 560 रुपये का टारगेट दिया है। यह मौजूदा स्तर से करीब 61% की तेजी का संकेत है। ब्रोकरेज का मानना है कि आने वाले वर्षों में कंपनी की कमाई और पूंजी पर रिटर्न में मजबूत सुधार देखने को मिल सकता है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

UPI Payment पर 6 साल बाद फिर लगेगा MDR! क्यों हो रही वापसी, किनमें बंटेगा इसका पैसा

UPI Payment Charges: लगभग छह साल बाद यूपीआई से लेन-देन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वापस आ सकता है। दुकानदार को ₹2,000 या उससे अधिक के यूपीआई पेमेंट पर 0.3% का चार्ज लग सकता है। इसके लागू होने का कानूनी रास्ता तब साफ हुआ, जब सरकार ने अगस्त में पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट में बदलाव किया और जीरो-एमडीआर प्रोटेक्शन को हटा दिया। 21 अगस्त की फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक अब यूपीआई से पेमेंट पर जीरो की बजाय 0.3% के शुल्क का नियम अगले दो हफ्ते के भीतर लागू किया जा सकता है। हालांकि केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ कर दिया है कि ग्राहकों और छोटे कारोबारियों पर इसका भार नहीं डाला जाएगा। सरकार की कोशिश इस पेमेंट सिस्टम से जुड़ी एंटिटीज को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए रखने पर होने वाले खर्च के कुछ हिस्से की भरपाई है। ₹2,000 या इससे अधिक के लेन-देन पर MDR लागू होने से इलेक्ट्रॉनिक्स, सिक्योरिटीज, कपड़े और अधिक दाम वाली खरीदारी प्रभावित हो सकती है।

किसे मिलेगा UPI Payment में MDR का पैसा

एमडीआर का पैसा किसी एक को नहीं मिलेगा बल्कि बैंक, फिनटेक कंपनियां और इस लेन-देन में शामिल अन्य एंटिटीज में बंटेगा। साल 2019 तक एमडीआर वाली व्यवस्था लागू थी लेकिन फिर डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए इसे जीरो कर दिया गया। इसे हटाए जाने से पहले ₹100 से अधिक मूल्य वाले ऑफलाइन क्यूआर कोड के जरिए किए गए P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) पेमेंट पर 0.3% शुल्क लगता था, जिसे इश्यूअर (Issuer) और एक्वायरर (Acquirer) बैंकों के बीच बराबर बांटा जाता था। एमडीआर की अधिकतम सीमा भी ₹100 थी, जिसे साल 2020 में पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

अब इसे फिर लाया जा रहा है। इसका पैसा पेमेंट चेन में चार प्लेयर्स के बीच बंटेगा। एक हिस्सा ग्राहक के बैंक को, दूसरा हिस्सा पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और ट्रांजैक्शन हैंडल करने वाले इसके बैंक को, तीसरा हिस्सा दुकानदार की तरफ से यानी एक्वायरिंग बैंकों और उसके पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को तो चौथा हिस्सा यूपीआई नेटवर्क चलाने और लेन-देन का निपटारा करने वाली NPCI को मिलेगा। एमडीआर में सबसे अधिक हिस्सा इंटरचेंज शुल्क के रूप में इश्यूइंग बैंक यानी ग्राहकों के बैंक को तो सबसे कम हिस्सा एनपीसीआई को मिलेगा।

क्यों हुई वापसी

भर्तृहरि महताब के नेतृत्व में फाइनेंस से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने 12 अगस्त को अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया कि यूपीआई को बढ़ावा देने और जीरो-MDR के कारण इंडस्ट्री के रेवेन्यू लॉस की भरपाई के लिए सरकार ने सिर्फ ₹2,000 करोड़ एलॉट किए हैं जोकि डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री की अनुमानित सालाना लागत ₹20,700 करोड़ से बहुत ही कम है। कमेटी ने आगाह किया है कि इसके चलते साइबर सिक्योरिटी, फर्जीवाड़े की रोकथाम और पेमेंट नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर में जरूरी निवेश प्रभावित हो सकता है। चूंकि अब एआई का इस्तेमाल बढ़ा है तो साइबर खतरे भी बढ़े हैं, जिससे चिंता और गंभीर हो गई है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा भी कह चुके हैं कि यूपीआई हमेशा फ्री नहीं रह सकता है और कोई न कोई इसका खर्च चुका रहा है।

हालांकि सिर्फ एमडीआर ही इन खर्चों की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने संसदीय समिति को बताया कि फंडिंग के बोझ को कम करने के लिए दो विकल्पों पर विचार किया जा रहा है- अधिक वैल्यू वाले यूपीआई पेमेंट पर एमडीआर को दोबारा लागू करना या आने वाले वषों में सरकारी सहायता को धीरे-धीरे कम करना। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में देश में करीब ₹314 लाख करोड़ के 24,000 करोड़ से अधिक UPI लेनदेन हुए। इसमें से 71% P2P (पर्सन-टू-पर्सन) और बाकी P2M (पर्सन-टू-मर्चेंट) थे। पी2एम में सिर्फ 4% की वैल्यू ही ₹2,000 या उससे अधिक थी यानी कि अधिकतर यूपीआई पेमेंट एमडीआर के दायरे से बाहर रहेगा तो छोटे कारोबारियों को बाहर रखने से इसका दायरा और सीमित हो जाता है।

F&O में कई साल बाद घाटा हुआ कम लेकिन, SEBI की रिपोर्ट में रिटेलर्स को परेशान करने वाली बातें आई सामने

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NTPC Green की सब्सिडरी को बड़ी सफलता, बिजली सप्लाई की बड़ी डील पर भागेगा शेयर! 24 अगस्त को रहेगी नजर

NTPC Green Energy Share Price: एनटीपीसी के एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी की पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडरी एनटीपीसी रिन्यूएबल एनर्जी को बड़ी सफलता मिली है। कंपनी ने 22 अगस्त को इसके बारे में एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी। इसे सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) की 6000 MWh की एश्योर्ड पीक वार टेंडर में 500 मेगावाट की कॉन्ट्रैक्टेड कैपेसिटी मिली है। इसके लिए प्रति किलोवाट घंटा का टैरिफ ₹6 तय किया गया है। ऐसे में जब सोमवार 24 अगस्त को मार्केट खुलेगा तो शेयरों पर इसका असर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 21 अगस्त को बीएसई पर यह 0.57% की गिरावट के साथ ₹91.33 पर बंद हुआ था।

इसके शेयर 27 नवंबर 2024 को मार्केट में लिस्ट हुए थे और आईपीओ निवेशकों को यह ₹108 के भाव पर जारी हुआ था। एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी के शेयर 4 दिसंबर 2024 को ₹155.30 के रिकॉर्ड हाई लेवल और 2 फरवरी 2026 को ₹84.08 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर थे।

किस नीलामी में मिली सफलता

एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक टेंडर के लिए ई-रिवर्स ऑक्शन शुक्रवार 21 अगस्त को हुआ। यह टेंडर इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) से जुड़े रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स से जुड़ा है। इसमें सेबी ने हाई डिमांड वाले टाइम में 4 घंटे के लिए 1500 मेगावाट के हिसाब से से 6 हजार मेगावाट बिजली की व्यवस्था करने का टेंडर निकाला यानी कि ऐसी कंपनियां चुनने के लिए टेंडर निकाला गया जो बिजली की हाई डिमांड वाले समय में चार घंटे तक हर घंटे के हिसाब से 1500 मेगावाट बिजली की सप्लाई कर सकें। इसमें से 500 मेगावाट की सप्लाई के लिए बोली एनटीपीसी ग्रीन की सब्सिडरी ने जीत ली है और इसके तहत यह सेकी को प्रति यूनिट ₹6 के हिसाब से बिजली सप्लाई करेगी।

कैसी है NTPC Green Energy की सेहत

एनटीपीसी ग्रीन एनर्जी के लिए इस वित्त वर्ष 2027 की शुरुआत धमाकेदार रही। जून 2026 तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा शानदार रेवेन्यू के दम पर 38.3% बढ़कर ₹304.84 करोड़ पर पहुंच गया। इस दौरान ऑपरेशंस से कंपनी का रेवेन्यू 62.7% बढ़कर ₹1,106.86 करोड़ पर पहुंच गया। ऑपरेटिंग लेवल पर भी कंपनी के लिए जून तिमाही अच्छी रही। जून तिमाही में सालाना आधार पर कंरनी का ईबीआईटीडीए 63.8% बढ़कर ₹988.7 करोड़ और EBITDA मार्जिन 88.7% से 89.3% पर पहुंचा।

इसके अलावा बोर्ड ने रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स के डेवलपमेंट के लिए एक पूरी तरह से अपनी सब्सिडियरी या स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) बनाने को मंजूरी दी है। सभी मंजूरी मिलने के बाद कंपनी का मानना है कि यह एसपीवी कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर के ग्राहकों के लिए कैप्टिव या ग्रुप कैप्टिव स्ट्रक्चरिंग के तहत बाद में हिस्सेदारी कम करने में मदद करेगा। बोर्ड ने एनटीपीसी ग्रीन और न्यू एंड रिन्यूएबल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन ऑफ आंध्र प्रदेश लिमिटेड की आधी-आधी हिस्सेदारी वाले ज्वाइंट वेंचर एपी एनजीईएल हैरिट अमृति लिमिटेड (AP NGEL Harit Amrit Ltd) में ₹28.78 लाख तक निवेश करने की मंजूरी भी दी। इस निवेश के बाद ज्वाइंट वेंचर में एनटीपीसी ग्रीन की हिस्सेदारी बढ़कर 51% हो जाएगी।

F&O में कई साल बाद घाटा हुआ कम लेकिन, SEBI की रिपोर्ट में रिटेलर्स को परेशान करने वाली बातें आई सामने

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

F&O में कई साल बाद घाटा हुआ कम लेकिन, SEBI की रिपोर्ट में रिटेलर्स को परेशान करने वाली बातें आई सामने

F&O, Rupees Printing Machine or Destroyer: इक्विटी डेरिवेटिव्स मार्केट में वित्त वर्ष 2026 के दौरान कई वर्षों बाद पहली बार बड़ी गिरावट देखने को मिली। हालांकि बाजार नियामक सेबी (SEBI) की ताजा ट्रेडर स्कोरकार्ड रिपोर्ट के मुताबिक मूल समस्या अभी भी बनी हुई है कि अधिकतर रिटेल ट्रेडर्स F&O (Futures & Options) को एक व्यवस्थित ट्रेडिंग प्रक्रिया की बजाय किस्मत आजमाने जैसा मानते हैं। एफएंडओ में कुल नुकसान और ट्रेडर्स की संख्या दोनों कम तो हुई, लेकिन 10 में से करीब 9 रिटेल ट्रेडर्स अब भी घाटे में रहे। सेबी के आंकड़ों से सामने आया है कि वित्त वर्ष 2026 में जो सुधार दिखा भी है, वह स्ट्रैटेजी यानी रणनीति के चलते नहीं बल्कि ट्रेडर्स की संख्या घटने से आया।

क्या हैं आंकड़े

वित्त वर्ष 2026 में F&O में एक्टिव इंडिविजुअल ट्रेडर्स की संख्या 18% घटकर 87.5 लाख और कुल नेट नुकसान 18% घटकर ₹91,685 करोड़ रहा तो नुकसान में रहने वाले ट्रेडर्स का अनुपात भी 90.9% से घटकर 87.7% रह गया। हालांकि नुकसान में रहने वाले ट्रेडर का औसत नुकसान बढ़कर लगभग ₹1.17 लाख हो गया। इस प्रकार वित्त वर्ष 2026 में कम लोगों ने ट्रेडिंग की, लेकिन जो ट्रेडिंग में बने रहे, उन्होंने अभी काफी बड़ा रिस्क लिया और भारी नुकसान उठाया।

Options Buying अब भी रिटेलर्स की पहली पसंद

सेबी के बिहैवरियल एनालिसिस के मुताबिक करीब 99.3% इंडिविजुअल ट्रेडर्स ने कम से कम एक बार ऑप्शंस में ट्रेड किया, तो 93% ट्रेडर्स ने सिर्फ ऑप्शंस में ट्रेडिंग की और फ्यूचर्स में उनकी हिस्सेदारी बहुत सीमित रही। इसके अलावा सेबी के के स्ट्रैटेजी-वाइज स्टडी में सामने आया कि ऑप्शंस बायर्स को 90% नुकसान हुआ और रिटेलर्स को सबसे बड़ा झटका इसी ने दिया। इससे फटाफट पैसा बनाने की कोशिश, एक्सपायरी के दिन ट्रेडिंग, बिना ठोस रणनीति के डायरेक्शन बेट्स और जरूरत से ज्यादा बड़ी पोजिशंस लेना।

रिटेलर्स के लिए बढ़ी लड़ाई

सेबी की रिपोर्ट के मुताबिक रिटेल ट्रेडर्स का मुकाबला अब सिर्फ दूसरे इंडिविजुअल्स से नहीं है। मार्केट पर अब बड़े इंस्टीट्यूशंस, प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग फर्म्स और एल्गोरिदम से चलने वाले उन ट्रेडर्स का दबदबा बढ़ रहा है जो एडवांस्ड एग्जीक्यूशन सिस्टम का इस्तेमाल करते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि ये टेक्नोलॉजी, रिस्क मॉडल्स, ऑटोमोटेड एग्जीक्यूशन और डिसिपलिन्ड पोजिशन साइजिंग का इस्तेमाल करते हैं। वित्त वर्ष 2026 प्रोप्रॉयटरी ट्रेडर्स ने लगभग ₹44,000 करोड़ और FPIs ने करीब ₹14,000 करोड़ की कमाई की। इन दोनों की कमाई का करीब 99% हिस्सा एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग एंटिटीज से आया। एक तरह कई रिटेलर्स भावनाओं, सोशल मीडिया टिप्स और एक्सपायरी के दिन ट्रे़डिंग पर पर निर्भर हैं तो प्रोफेशनल ट्रेडर्स पहले से तय रणनीतियों, टेक्नोलॉजी और रिस्क मैनेजमेंट के के आधार पर ट्रेड कर रहे।

और भी खास बातें आई सामने

सेबी की रिपोर्ट में एक बात का खंडन हुआ कि अधिक अनुभव का मतलब घाटा कम होना है। जिन ट्रेडर्स ने लगातार चार या उससे अधिक वर्षों तक ट्रेडिंग की, उनमें भी नुकसान की दर बहुत अधिक रही यानी कि बार-बार एक ही गलती करने से ट्रेडिंग स्किल अपने आप नहीं बढ़ती। इसी तरह जिन ट्रेडर्स को लगातार दो साल नुकसान हुआ, उनमें से लगभग 90% ने ट्रेडिंग जारी रखी और फिर से नुकसान उठाया।

सेबी की रिपोर्ट में एक और परेशान करने वाली बात सामने आई कि अधिक ट्रेडिंग से नुकसान भी बड़ा हुआ। सबसे अधिक एक्टिव 42% ट्रेडर्स की कुल घाटे में 87% और टर्नओवर में 94% हिस्सेदारी रही। यह समस्या खासतौर से युवाओं और कम आय वाले ट्रेडर्स में अधिक दिखाई दी।

सेबी की रिपोर्ट में कम कैपिटल और अधिक रिस्क की बात सामने आई। लगभग 35% डेरिवेटिव्स ट्रेडर्स के पास कोई इक्विटी पोर्टफोलियो नहीं था, तो 78% के पास ₹1 लाख से कम की इक्विटी होल्डिंग थी। पोर्टफोलियो का साइज बढ़ने के साथ नुकसान की संभावना लगातार कम होती गई। बहुत कम या बिना इक्विटी होल्डिंग वाले ट्रेडर्स के लिए नुकसान की संभावना 93% रही तो ₹10 करोड़ से अधिक के पोर्टफोलियो वाले ट्रेडर्स के लिए यह लगभग 58% रही। इससे संकेत मिलता है कि बड़ी पूंजी वाले ट्रेडर्स आमतौर पर एक लिमिट में एक्सपोजर लेते हैं, जबकि कई छोटे ट्रेडर्स अपनी पूंजी के मुकाबले बहुत अधिक लेवरेज इस्तेमाल करते हैं।

Bonds में निवेश पर रिटर्न की गांरटी! ऐसे ऐड पर लगेगी रोक, SEBI ने लाया प्रस्ताव

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

 

LPG Rate 23 August 2026: 23 अगस्त को कितने बढ़े LPG सिलेंडर के दाम? दिल्ली से बिहार तक जानें अपने शहर का रेट

LPG Rate 23 August 2026: रसोई गैस यानी LPG सिलेंडर की कीमतें आम परिवारों के घरेलू बजट का एक अहम हिस्सा होती हैं। गैस के दाम बढ़ने या घटने का सीधा असर महीने के कुल खर्च पर दिखाई देता है। 23 अगस्त 2026 को घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया गया है। यानी आज उपभोक्ताओं को सिलेंडर खरीदने के लिए पहले से अधिक पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे। कीमतें स्थिर रहने से परिवारों को फिलहाल राहत मिली है और उनके मासिक बजट पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है। हालांकि, LPG की कीमत सभी शहरों में एक समान नहीं होती।

स्थानीय टैक्स, परिवहन खर्च और अन्य शुल्कों के कारण अलग-अलग क्षेत्रों में सिलेंडर के दामों में अंतर देखने को मिल सकता है। इसलिए उपभोक्ताओं के लिए जरूरी है कि वे सिलेंडर बुक करने या खरीदने से पहले अपने शहर में लागू LPG की ताजा कीमत जरूर जांच लें। इससे उन्हें सही कीमत की जानकारी मिलेगी और अनावश्यक खर्च से भी बचा जा सकेगा।

आपके शहर में LPG सिलेंडर का क्या भाव है?

शहर के हिसाब से LPG की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। स्थानीय टैक्स और अन्य लागतों की वजह से एक ही सिलेंडर के लिए अलग-अलग शहरों में ग्राहकों को अलग कीमत चुकानी पड़ सकती है।

शहरघरेलू LPG (14.2 किलो)कमर्शियल LPG (19 किलो)
कोलकाता₹968.00₹2,872.50
मुंबई₹941.50₹2,691.50
चेन्नई₹957.50₹2,906.00
गुड़गांव₹950.50₹2,755.00
नोएडा₹939.50₹2,738.00
बैंगलोर₹944.50₹2,821.00
भुवनेश्वर₹968.00₹2,908.00
चंडीगढ़₹951.50₹2,760.00
हैदराबाद₹994.00₹2,985.00
जयपुर₹945.50₹2,765.50
लखनऊ₹979.50₹2,860.50
पटना₹1,031.50₹3,018.00
तिरुवनंतपुरम₹951.00

कमर्शियल LPG सिलेंडर महंगा क्यों?

घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतें अलग होती हैं। 19 किलोग्राम का सिलेंडर मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल किया जाता है। इसी वजह से इसकी कीमत घरेलू LPG सिलेंडर के मुकाबले अधिक रहती है और इसका खर्च कारोबार की संचालन लागत में शामिल होता है।

घर बैठे ऐसे चेक करें LPG का ताजा रेट

अगर आप Indane Gas का इस्तेमाल करते हैं, तो Indian Oil की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपने राज्य और जिले का चयन करके LPG सिलेंडर की मौजूदा कीमत देख सकते हैं। Bharat Gas ग्राहक ebharatgas.com पर उपलब्ध ‘Quick Book & Pay’ विकल्प के जरिए सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। वहीं, HP Gas उपभोक्ता HP Pay ऐप से LPG सिलेंडर का ताजा रेट चेक कर सकते हैं। इसके अलावा, UMANG ऐप के जरिए LPG रिफिल बुक करने के साथ उसकी मौजूदा कीमत भी देखी जा सकती है।

LPG की कीमतों पर रहेगी नजर

फिलहाल घरेलू LPG के दाम स्थिर रहने से परिवारों के बजट पर अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ा है। हालांकि, आने वाले दिनों में तेल कंपनियों की ओर से कीमतों में किसी भी संभावित बदलाव पर उपभोक्ताओं की नजर बनी रहेगी।

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India-EU FTA is a big opportunity to bring niche models: VW CEO Thomas Schafer

India-EU FTA is a big opportunity to bring niche models: VW CEO Thomas Schafer
VW CEO Thomas Schafer

Volkswagen is preparing for a much bigger push in India, with the company reviewing its broader product, powertrain and investment plans. While a locally produced compact SUV has already been confirmed for launch next year and is expected to drive volumes, the brand is also looking at the India-EU free trade agreement (FTA) as an opportunity to bring select niche models from its global portfolio here.

“FTA has been announced in Europe. It is a huge opportunity to bring a certain sort of niche models to widen the portfolio for the consumer to offer some exciting models every now and then, which is great,” Member of the Board of Management of Volkswagen AG and CEO of Volkswagen Brand Thomas Schafer told us. He did not reveal which models could be on the cards, but said the company is taking a long-term view and will study market conditions over the next few months before making a decision.

VW’s renewed focus for India

Schafer’s India visit comes as Volkswagen reviews its global business strategy amid geopolitical tensions, changing trade policies and a growing move towards regional manufacturing. “So, globally, we see almost like a decoupling. You have a geopolitical situation and the old business model where everything’s focused on Europe, and then you export to other markets is long gone. At the same time, you have a very different dynamic in China than in the US, which is putting import duties on Europe under certain attacks. So, in that game, you have to change your business model; you have to adapt it. And that’s what we’re busy doing,” he added.

This shift could benefit India. Along with the growing domestic market, Volkswagen sees India as an important hub for engineering, IT and R&D. “We will focus a lot on India going forward. Not only because the market is exciting and growing and creating more opportunity for the future, but also the sort of knowledge base that you have here in India,” he said.

Volkswagen also sees exports as an important way to build scale out of India. The company already exports vehicles made in the country to more than 40 markets, with Mexico being one of the major markets that imports vehicles from India. “So, exports are an important part of our business, and we will always strengthen that going forward,” he said. For the upcoming compact SUV, export potential could also help boost volumes and strengthen the business case.

More powertrains can be offered at the right time

Volkswagen’s current portfolio comprises cars powered by turbo-petrol engines, even as CNG and diesel remain in demand and EVs are gaining momentum. “So, what is clear is, in the long run, there will be strong electrification, especially also in India…You see it accelerating, probably driven by the conflict in the Middle East and the oil situation,” he said.

At the same time, he clarified that be it flex-fuel, CNG, diesel or EV, the brand has the technology already on sale in certain parts of the world. “We have flex-fuel, super strong in South America for years; we have CNG, diesel and EVs, it’s all there…When it’s the right time to localise it, we will localise it,” Schafer said.

The challenge, he said, is deciding when and how to use each powertrain technology. “The dynamics in India and the market shift have been quite significant even in the last couple of months. So, to be honest, we haven’t concluded our planning on that, but the good thing is that we have it and we can deploy it if and when it is the right situation,” he stated. Volkswagen is also evaluating its next-generation models and newer platforms, but these plans are still under consideration.

Cost remains a major hurdle for VW in India

Cost has been one of Volkswagen’s biggest challenges in India. Schafer said the company has spent the past few years working on two key areas: ensuring that its products retain the core characteristics of the Volkswagen brand while simultaneously reducing the cost base. “We worked over the last four years very focused on the cars that we bring to the market now are through and through Volkswagen in terms of quality, brand fit. And, yes, our cost base is traditionally high because we are very much focused on Europe and especially Germany,” he added.

India, he said, will play an important role in Volkswagen’s efforts to reduce costs, especially through more cost-effective development and manufacturing. “Part of the programs that’s been in the media over the last, especially two years, has been reducing our cost base, developing more in more cost-efficient places like in India very much, but also shifting production from high-cost locations into lower-cost locations,” he said.

Volkswagen is now working on its next set of products, investment plans and powertrain options for India. With India becoming an increasingly important part of its global strategy, there is plenty to look forward to from the brand in the coming years.

LPG Rate 22 August 2026: आपके शहर में कितने का मिल रहा गैस सिलेंडर? यहां देखें घरेलू और कमर्शियल रेट

LPG Rate 22 August 2026:  रसोई गैस की कीमतों में होने वाला बदलाव सीधे आम परिवारों के बजट पर असर डालता है। महीने की शुरुआत में सिलेंडर का खर्च पहले से तय करना पड़ता है, इसलिए LPG के दाम स्थिर रहना लोगों के लिए राहत की खबर होती है। 22 अगस्त 2026 को घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी आज उपभोक्ताओं को गैस के लिए अतिरिक्त रकम नहीं चुकानी पड़ेगी। हालांकि, अलग-अलग शहरों में LPG के दाम अलग हो सकते हैं।

स्थानीय टैक्स और अन्य खर्चों की वजह से कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। ऐसे में अपने शहर का ताजा रेट जानना जरूरी है। फिलहाल घरेलू गैस की कीमतें स्थिर रहने से परिवारों के मासिक बजट पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ा है। आने वाले दिनों में LPG की कीमतों में किसी बदलाव पर उपभोक्ताओं की नजर बनी रहेगी।

आपके शहर में LPG सिलेंडर का क्या भाव है?

शहर के हिसाब से LPG की कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। स्थानीय टैक्स और अन्य लागतों की वजह से एक ही सिलेंडर के लिए अलग-अलग शहरों में ग्राहकों को अलग कीमत चुकानी पड़ सकती है।

शहरघरेलू LPG (14.2 किलो)कमर्शियल LPG (19 किलो)
कोलकाता₹968.00₹2,872.50
मुंबई₹941.50₹2,691.50
चेन्नई₹957.50₹2,906.00
गुड़गांव₹950.50₹2,755.00
नोएडा₹939.50₹2,738.00
बैंगलोर₹944.50₹2,821.00
भुवनेश्वर₹968.00₹2,908.00
चंडीगढ़₹951.50₹2,760.00
हैदराबाद₹994.00₹2,985.00
जयपुर₹945.50₹2,765.50
लखनऊ₹979.50₹2,860.50
पटना₹1,031.50₹3,018.00
तिरुवनंतपुरम₹951.00

कमर्शियल सिलेंडर की कीमत ज्यादा क्यों?

घरेलू और कमर्शियल LPG सिलेंडर के दाम अलग होते हैं। 19 किलो वाला सिलेंडर मुख्य रूप से व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए होता है और इसकी कीमत घरेलू सिलेंडर की तुलना में अधिक रहती है। होटल, रेस्टोरेंट और अन्य कारोबारों के लिए इसका खर्च सीधे संचालन लागत का हिस्सा बनता है।

घर बैठे ऐसे जानें LPG सिलेंडर का ताजा रेट

अगर आप Indane Gas का इस्तेमाल करते हैं, तो अपने क्षेत्र में LPG सिलेंडर की मौजूदा कीमत ऑनलाइन देख सकते हैं। इसके लिए Indian Oil की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना राज्य और जिला चुनना होगा।

वहीं, Bharat Gas के ग्राहक ebharatgas.com पर मौजूद ‘Quick Book & Pay’ विकल्प के जरिए सिलेंडर की लेटेस्ट कीमत चेक कर सकते हैं।

इसके अलावा, HP Gas के उपभोक्ता HP Pay ऐप पर LPG सिलेंडर का ताजा रेट देख सकते हैं। सरकार के UMANG ऐप की मदद से भी ग्राहक LPG रिफिल बुक करने के साथ-साथ उसकी मौजूदा कीमत की जानकारी हासिल कर सकते हैं।

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