Adroit Industries IPO: 23 सितंबर को खुलेगा ₹151 करोड़ का एक और इश्यू, ग्रे मार्केट में अभी से 26% उछला शेयर

मेनबोर्ड सेगमेंट में एड्रोइट इंडस्ट्रीज अपना ₹150.71 करोड़ का पब्लिक इश्यू ला रही है। इसमें ₹132.62 करोड़ के 98.97 लाख नए शेयर जारी होंगे। साथ ही ₹18.09 करोड़ के 13.50 लाख शेयरों का ऑफर फॉर सेल (OFS) रहेगा। OFS में प्रमोटर मुकेश सांगला (HUF) की ओर से शेयर बिक्री के लिए रखे जाएंगे। IPO की ओपनिंग 23 सितंबर को होगी। प्राइस बैंड ₹126-₹134 प्रति शेयर और लॉट साइज 111 शेयर है। एंकर इनवेस्टर 22 सितंबर को बोली लगा सकेंगे। 25 सितंबर को इश्यू बंद होने के बाद अलॉटमेंट 28 सितंबर को फाइनल हो सकता है। कंपनी के शेयरों की लिस्टिंग NSE और BSE पर 30 सितंबर को हो सकती है।

इस IPO के लिए चॉइस कैपिटल एडवाइजर्स प्राइवेट लिमिटेड बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार बिगशेयर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड है। पब्लिक इश्यू में 50 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 35 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए और 15 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है।

क्या करती है Adroit Industries

एड्रोइट इंडस्ट्रीज (इंडिया) लिमिटेड ड्राइवलाइन सिस्टम्स में इस्तेमाल होने वाले प्रोपेलर शाफ्ट और टॉर्क-ट्रांसमिशन पार्ट्स बनाती और सप्लाई करती है। कंपनी 5,000 से ज्यादा SKUs का पोर्टफोलियो ऑफर करती है, जिसमें प्रिसिशन-मशीन्ड टॉर्क-ट्रांसमिशन कंपोनेंट्स, कंप्लीट प्रोपेलर शाफ्ट असेंबलीज और फोर्ज्ड कंपोनेंट्स शामिल हैं। इसकी वर्टिकली इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं में फोर्जिंग, प्रिसिशन मशीनिंग, हीट ट्रीटमेंट, असेंबली, बैलेंसिंग और टेस्टिंग शामिल हैं, जिससे प्रोडक्शन प्रोसेस पर पूरा कंट्रोल बना रहता है।

कंपनी अपने प्रोडक्ट्स को डिस्ट्रीब्यूटर्स, टियर-1 ड्राइवलाइन कंपोनेंट सप्लायर्स और सीधे ओरिजिनल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स को कस्टमर्स की खास टेक्निकल जरूरतों के आधार पर सप्लाई करती है। इसके प्रोडक्ट्स मुख्य रूप से कमर्शियल गाड़ियों के साथ-साथ SUVs, डिफेंस और इमरजेंसी सर्विसेज, हैवी इक्विपमेंट, ऑफ-हाइवे मशीनरी और इंडस्ट्रियल कामों के लिए इस्तेमाल होते हैं। कंपनी की एक्सपोर्ट में अच्छी मौजूदगी है और यह नॉर्थ अमेरिका, यूरोप, लैटिन अमेरिका, मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और एशिया-पैसिफिक में कस्टमर्स को प्रोडक्ट्स सप्लाई करती है।

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कंपनी की वित्तीय सेहत

एड्रोइट इंडस्ट्रीज का रेवेन्यू वित्त वर्ष 2025-26 में 5 प्रतिशत बढ़कर 143 करोड़ रुपये हो गया। शुद्ध मुनाफा 44 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 26.16 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इस बीच कंपनी पर 52.40 करोड़ रुपये की उधारी थी। वित्त वर्ष 2025 के दौरान रेवेन्यू 136.61 करोड़ और शुद्ध मुनाफा 18.14 करोड़ रहा। IPO में नए शेयर जारी कर होने वाली कमाई का इस्तेमाल देवास फैसिलिटी के लिए मशीनरी व इक्विपमेंट खरीदने के लिए, मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटीज के बीच सामान की आवाजाही के लिए ट्रांसपोर्टेशन व्हीकल खरीदने के लिए, सब्सिडियरीज में डेट या इक्विटी के तौर पर निवेश के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

ग्रे मार्केट में एड्रोइट इंडस्ट्रीज का शेयर अभी से 26.12 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

असीम मुनीर की अमेरिका के साथ सीक्रेट डील! पाक सेना खरीदेगी घातक ड्रोन, जानिए इस डील में क्या-क्या छिपा है

Pakistan News: अमेरिकी ड्रोन निर्माता कंपनी POWERUS और पाकिस्तान आर्मी के बीच हुए एक नए रक्षा समझौते ने पाकिस्तानी फील्ड मार्शल असीम मुनीर की सैन्य खरीद रणनीति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। खासतौर पर इस बात पर चर्चा शुरु हो गई है कि भविष्य में इन बिना पायलट वाले सिस्टम (Unmanned Systems) का इस्तेमाल पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा पर किस तरह किया जा सकता है। बुधवार 16 सितंबर को POWERUS के सह-संस्थापक रॉबर्ट ब्रेट वेलिकोविच के नेतृत्व में कंपनी के प्रतिनिधिमंडल ने रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) में पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ और चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज फील्ड मार्शल असीम मुनीर से मुलाकात की।

पाकिस्तानी सेना के मुताबिक, बैठक में उभरती रक्षा तकनीक, सैन्य खरीद, उत्पादन और लंबी अवधि में क्षमता निर्माण जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। हालांकि, इसी बीच न्यूज एजेंसी Reuters की एक रिपोर्ट ने इस मुलाकात को और महत्वपूर्ण बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, POWERUS ने पाकिस्तान आर्मी के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) किया है। इसमें अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) से जुड़ा एक शुरुआती ऑर्डर भी शामिल है। हालांकि, इस ऑर्डर की कीमत और सिस्टम की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

क्या है POWERUS की सीक्रेट डील?

Reuters के मुताबिक, POWERUS के सह-संस्थापक ब्रेट वेलिकोविच ने पाकिस्तान आर्मी असीम मुनीर के साथ MoU और शुरुआती ऑर्डर की पुष्टि की है। हालांकि, उन्होंने ऑर्डर की कीमत या इसमें शामिल ड्रोन सिस्टम के बारे में जानकारी देने से इनकार किया। इसकी वजह सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलता और गोपनीयता बताई गई।

दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान सेना की ओर से GHQ बैठक के बाद जारी आधिकारिक बयान में इस MoU या शुरुआती ऑर्डर का उल्लेख नहीं किया गया। सेना ने केवल इतना कहा कि दोनों पक्षों ने रक्षा खरीद, उत्पादन और क्षमता निर्माण पर चर्चा की। असीम मुनीर ने बैठक में टेक्नोलॉजी इनोवेशन और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एडवांस टेक्नोलॉजी के महत्व पर जोर दिया।

क्या ईरान सीमा पर हो सकता है इस्तेमाल?

इस डील के बाद पाकिस्तान की ईरान से लगी सीमा को लेकर भी अटकलें सामने आई हैं। पाकिस्तान और ईरान के बीच करीब 909 किलोमीटर लंबी सीमा है। इसका बड़ा हिस्सा पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत से गुजरता है। यह इलाका सीमा पार आतंकवाद, तस्करी नेटवर्क और सुरक्षा चुनौतियों के कारण रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। ऐसे में हाइटेक ड्रोन या काउंटर-ड्रोन सिस्टम पाकिस्तान को निगरानी और सीमा पर स्थिति की जानकारी जुटाने में मदद कर सकते हैं।

CNN-News18 के अनुसार, खुफिया सूत्रों ने संभावना जताई है कि POWERUS की टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भविष्य में ईरान सीमा के आसपास गतिविधियों की निगरानी के लिए किया जा सकता है। हालांकि, यह अभी यह सिर्फ दावा किया जा रहा है। पाकिस्तान सेना या POWERUS ने सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा है कि इस समझौते के तहत मिलने वाली तकनीक को ईरान सीमा या बलूचिस्तान में तैनात किया जाएगा। GHQ की आधिकारिक बैठक के विवरण में भी ईरान, बलूचिस्तान या पश्चिमी सीमा की निगरानी का कोई उल्लेख नहीं है। इसलिए POWERUS समझौते को सीधे ईरान की निगरानी की रणनीति से जोड़ना फिलहाल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध तथ्यों से आगे की बात होगी।

POWERUS की $22.3 मिलियन वाली मिडिल ईस्ट डील क्या है?

पाकिस्तान के साथ समझौते से पहले POWERUS ने करीब 22.3 मिलियन डॉलर के एक अन्य डिफेंस डील की घोषणा की थी। इसके तहत कंपनी को मध्य पूर्व में महत्वपूर्ण तेल और गैस इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नेटवर्क आधारित काउंटर-यूएएस (Counter-UAS) क्षमता उपलब्ध करानी है।

यह सिस्टम ड्रोन खतरों को डिटेक्ट, ट्रैक और क्लासिफाई करने के साथ-साथ कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम के जरिए शुरुआती चेतावनी देने के लिए बनाया गया है। कंपनी ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में इसमें इंटरसेप्टर तकनीक को जोड़ा जा सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस 22.3 मिलियन डॉलर के मध्य-पूर्वी अनुबंध की तकनीक पाकिस्तान को दी जाएगी या नहीं।

अमेरिका-पाकिस्तान डिफेंस डील और चीन फैक्टर

POWERUS के साथ यह डील अमेरिका और पाकिस्तान के बीच रक्षा तकनीकी सहयोग के लिए एक नया रास्ता खोल सकता है। Reuters के अनुसार, कंपनी अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संयुक्त ड्रोन तकनीक विकसित करने और पाकिस्तान में संभावित निर्माण की संभावनाएं भी तलाश रही है।

POWERUS के संस्थापक और CEO एंड्रयू फॉक्स ने पाकिस्तान के निजी रक्षा क्षेत्र को उभरता हुआ बताया है, हालांकि उनके मुताबिक यह क्षेत्र अभी पूरी तरह परिपक्व नहीं हुआ है। वेलिकोविच ने कहा कि कंपनी का लक्ष्य ऐसा संयुक्त तकनीकी संबंध विकसित करना है जिसमें अमेरिकी और पाकिस्तानी क्षमताओं को साथ लाया जा सके।

यह घटनाक्रम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान की सैन्य आपूर्ति में चीन की बड़ी भूमिका है। अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ बढ़ता सहयोग पाकिस्तान को तकनीक के एक अतिरिक्त स्रोत तक पहुंच दे सकता है। साथ ही, संवेदनशील रक्षा तकनीक की खरीद में पारदर्शिता, संचालन संबंधी नियंत्रण और उससे जुड़ी शर्तों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।

ट्रंप परिवार से जुड़ा नया कनेक्शन?

POWERUS के कॉरपोरेट ढांचे में भी जल्द बदलाव होने की उम्मीद है। कंपनी का Aureus Greenway Holdings के साथ विलय प्रस्तावित है। यह एक सार्वजनिक रूप से कारोबार करने वाली कंपनी है, जिसे एक ऐसे निवेश फंड का समर्थन प्राप्त है। इसका संबंध डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप से जुड़ा बताया गया है। Reuters के अनुसार, दोनों कंपनियों को उम्मीद है कि यह विलय अक्टूबर की शुरुआत में पूरा हो जाएगा।

अब तक क्या पता है और क्या छिपा है?

POWERUS और पाकिस्तान आर्मी के बीच हुए समझौते से फिलहाल तीन बातें सामने आती हैं। पहली, दोनों पक्षों ने एक MoU पर हस्ताक्षर किए हैं। दूसरी, पाकिस्तान आर्मी ने अनमॅन्ड एरियल सिस्टिम्स से जुड़ा एक शुरुआती लेकिन अघोषित मूल्य वाला ऑर्डर दिया है। और तीसरी, दोनों पक्ष रक्षा खरीद, उत्पादन और क्षमता निर्माण में व्यापक सहयोग की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

समझौते का उद्देश्य क्या है?

ईरान सीमा और बलूचिस्तान में संभावित इस्तेमाल की चर्चा इसलिए सामने आई है क्योंकि POWERUS काउंटर-ड्रोन तकनीक विकसित करती है। पाकिस्तान की पश्चिमी सीमा सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र है। लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि POWERUS समझौते का उद्देश्य ईरान सीमा की निगरानी है।

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फिलहाल असीम मुनीर के नेतृत्व वाली पाकिस्तान आर्मी और POWERUS के बीच सहयोग का वास्तविक दायरा सार्वजनिक रूप से सीमित जानकारी तक ही सामने आया है। शुरुआती ड्रोन ऑर्डर की कीमत, सिस्टम की प्रकृति और संभावित ऑपरेशनल इस्तेमाल को लेकर जानकारी अभी गोपनीय रखी गई है।

Market Outlook : मिलेजुले रुख के साथ बंद हुए सेंसेक्स-निफ्टी, जानिए 18 सितंबर को कैसी रह सकती है बाजार की चाल

Market Outlook : गुरुवार को क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) के बाद भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स मिले-जुले रुख के साथ बंद हुए। सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ लाल निशान में बंद हुआ। जबकि निफ्टी ने अपनी बढ़त बनाए रखी। दोपहर 3:30 बजे CAS के बाद बाजार बंद होने पर सेंसेक्स 21.86 अंक या 0.03 प्रतिशत गिरकर 74,314.59 पर था, जबकि निफ्टी 53 अंक या 0.23 प्रतिशत बढ़कर 23,270.60 पर पहुंच गया।

रियल्टी और फार्मा सेक्टर में 1.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त देखी गई। जबकि मीडिया में 1.35 प्रतिशत और ऑटो व मेटल सेक्टर में लगभग 1-1 प्रतिशत की तेजी आई। बैंकिंग इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए। छोटे-मझोले शेयरों (ब्रॉडर मार्केट) का प्रदर्शन बेहतर रहा। इसके चलते मिडकैप 0.92 प्रतिशत और स्मॉलकैप 0.71 प्रतिशत ऊपर बंद हुए। मार्केट ब्रेथ पॉजिटिव रहा। आज 1,487 शेयरों में गिरावट के मुकाबले 2,480 शेयरों में बढ़त दर्ज की गई। जबकि इंडिया VIX में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट आई।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा कि उम्मीद के मुताबिक यूएस फेड द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने और बॉन्ड यील्ड में कमी से ग्लोबल इक्विटी मार्केट को कुछ समय के लिए सहारा मिला और महंगाई के धीरे-धीरे कम होने की उम्मीदें भी मजबूत हुईं। इसके बावजूद,घरेलू बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहा। लेकिन हालिया गिरावट के बाद ‘वैल्यू बाइंग’के चलते बाजार बढ़त के साथ बंद हुआ। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और US टैरिफ के जोखिम के कारण ब्याज दरें और बढ़ाने के दौर की आशंका बनी हुई है, जिससे निवेशकों का रुख सतर्क रहने की संभावना है।

उन्होंने आगे कहा कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों का प्रदर्शन बेहतर बना रहा क्योंकि निवेशकों ने उन कंपनियों पर फोकस कर रहे हैं जिनकी कमाई की संभावना मजबूत है,जिनके पास अच्छे ऑर्डर हैं और जिनकी बैलेंस शीट मजबूत है। इनमें खासकर कैपिटल गुड्स,इंडस्ट्रियल,डिफेंस,पावर और हेल्थकेयर सेक्टर की कंपनियां शामिल रहीं।

HST वेल्थ के फाउंडर और CEO हरिसेलवन राधाकृष्णन ने कहा कि निफ्टी 23,300 के रेजिस्टेंस लेवल के करीब पहुंच रहा है। अगर यह मजबूती से इस लेवल के ऊपर बना रहता है तो रिकवरी 23,500 तक जा सकती है,जबकि इसके लिए सपोर्ट लेवल 23,200 और 23,000 पर बना हुआ है। जब तक निफ्टी 23,300 के लेवल को साफ तौर पर पार नहीं कर लेता,तब तक बाजार के कंसोलिडेशन मोड में रहने की संभावना है।

ग्लोब कैपिटल मार्केट में AVP-रिसर्च,विपिन कुमार ने कहा कि निफ्टी इंडेक्स में रिकवरी की रैली जारी रही और यह मामूली बढ़त के साथ फ्लैट-टू-पॉज़िटिव बंद हुआ। हालांकि,उन्होंने कहा कि पोज़िशनल चार्ट का स्ट्रक्चर अभी भी नेगेटिव बना हुआ है,जिसमें 23,450–23,600 के दायरे में कई रेजिस्टेंस लेवल हैं।

उन्होंने आगे कहा कि जब तक इंडेक्स इस रेजिस्टेंस ज़ोन के नीचे ट्रेड करता है तब तक उछाल पर बिकवाली की ट्रेडिंग स्ट्रैटेजी अपनाने की सलाह होगी। नीचे की तरफ निफ्टी के लिए 23,100–23,000 का दायरा तत्काल सपोर्ट जोन का काम करेगा।

टेक्निकल व्यू

एनालिस्ट्स का कहना है कि मार्केट में तेजी लौटने के लिए निफ्टी को 23,300 के स्तर को मजबूती से पार करना होगा। बजाज ब्रोकिंग में रिसर्च के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पवित्रो मुखर्जी ने कहा कि निफ्टी ने अभी तक ‘हायर हाई-हायर लो’ का स्ट्रक्चर नहीं बनाया है,जिससे बाज़ार का मूड अभी भी सतर्क बना हुआ है। मंगलवार के हाई के पास स्थित 23,600 का लेवल एक अहम रेजिस्टेंस बना हुआ है। अगर निफ्टी 23,600 के ऊपर टिकता है,तो इससे मौजूदा गिरावट के थमने का संकेत मिलेगा। उन्होंने आगे कहा कि नीचे की तरफ 23,116 (मंगलवार और बुधवार का लो) का जोन अभी भी तत्काल सपोर्ट का काम कर रहा है। अगर यह स्तर टूटता है तो आने वाले सेशन में गिरावट का दौर 23,000 और 22,800 के स्तर तक बढ़ सकता है।

एक्सिस डायरेक्ट के रिसर्च हेड राजेश पलविया ने कहा कि टेक्निकल नज़रिए से देखें तो 23,350 के नीचे निफ्टी का रुख सावधानी के साथ मंदी (बेयरिश) वाला बना हुआ है। इसके लिए तत्काल सपोर्ट 23,100 पर है। अगर यह इस लेवल के नीचे टूटता है तो इंडेक्स 22,800 की ओर जा सकता है। ऊपर की तरफ, 23,350 और 23,500 अहम रेजिस्टेंस लेवल बने हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में और कमी या फेड का रुख कम सख्त होने से रिकवरी को सपोर्ट मिल सकता है और निकट भविष्य के सेंटीमेंट में सुधार हो सकता है।

HDFC सिक्योरिटीज में प्राइम रिसर्च के हेड देवर्स वकील ने कहा कि अगर निफ्टी 23,100 के पास स्थित हाल के स्विंग लो से ऊपर बना रहता है तो यह 23,500 के रेजिस्टेंस ज़ोन की ओर वापसी कर सकता है। हालांकि,23,100 के नीचे जाने पर निफ्टी 22,700 के पोजीशनल सपोर्ट तक गिर सकता है।

 

NSE IPO : लिस्टिंग के बाद NSE के निफ्टी में शामिल होने पर SEBI से अभी कोई चर्चा नहीं-एनएसई

 

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चीन के इस डर से वाशिंगटन में हड़कंप, खुफिया रिपोर्ट से खतरे में ₹2 लाख करोड़ की US-सऊदी की मेगा डील

US Intelligence Alarm On F-35 Jet Deal: सुपरपॉवर अमेरिका और सऊदी अरब के बीच करीब ₹2 लाख करोड़ की बेहद सीक्रेट और हाइटेक F-35 स्टील्थ फाइटर जेट डील पर अचानक संकट के बादल मंडराने लगे हैं। इसके पीछे की वजह है चीन का खौफ।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका अपने सबसे अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी के F-35 फाइटर जेट्स सऊदी अरब को बेचता है, तो चीन सऊदी से अमेरिका की इस सबसे बड़ी सैन्य तकनीक की चोरी कर सकता है।

‘न्यू यॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी की एक असेसमेंट रिपोर्ट ने अमेरिकी गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। आइए बताते हैं कि इस मेगा-डील का पूरा इनसाइड गेम क्या है।

चीन का ‘स्पाय थ्रेट’: क्यों कांप रहा है अमेरिका?

F-35 दुनिया का सबसे ताकतवर और एडवांस 5th जनरेशन फाइटर जेट है, जिसे लॉकहीड मार्टिन, नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन और बीएई सिस्टम्स मिलकर बनाते हैं। यह अमेरिकी सेना की रीढ़ है। पेंटागन की खुफिया रिपोर्ट में जताई गई ये है सबसे बड़ी चिंताएं:

सऊदी बेस पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी: सऊदी अरब और चीन के बीच सुरक्षा और सैन्य संबंध काफी मजबूत हैं। चीनी सैन्य कर्मियों की सऊदी के कई एयरबेस तक पहुंच है।

सऊदी में चीनी टेलीकॉम टेक्नोलॉजी: सऊदी अरब का ज्यादातर टेलीकॉम ढांचा चीनी कंपनियों (जैसे- हुआवेई) की तकनीक पर चल रहा है। अमेरिका को डर है कि चीन इस 5G और टेलीकॉम नेटवर्क का इस्तेमाल करके F-35 के सीक्रेट डेटा और रडार सिग्नेचर हैक कर सकता है।

मिसाइल पार्टनरशिप: चीन पहले भी सऊदी अरब को बैलिस्टिक मिसाइल तकनीक विकसित करने में मदद कर चुका है। वाशिंगटन को डर है कि इस बार निशाना F-35 की टॉप-सीक्रेट टेक्नोलॉजी है।

इजरायल का ‘मिलिट्री एडवांटेज’ और अमेरिका का धर्मसंकट

इस F-35 डील में सिर्फ चीन ही नहीं, बल्कि इजरायल का एंगल भी सबसे बड़ा रोड़ा बना हुआ है। पूरे मिडिल ईस्ट में फिलहाल सिर्फ इजरायल ही F-35 अपनी कस्टमाइज्ड F-35I वरिएंट चलाता है।साल 2008 में बने अमेरिकी कानून के मुताबिक, वाशिंगटन के लिए इजरायल की ‘क्वालिटेटिव मिलिट्री एज’ यानी क्षेत्र में उसकी सैन्य श्रेष्ठता बनाए रखना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

अगर अमेरिका यह डील पास भी करता है, तो सऊदी अरब को मिलने वाले F-35 जेट्स की मारक क्षमता और फीचर्स इजरायल के जेट्स के मुकाबले काफी कम रखे जाएंगे, ताकि इजरायल का दबदबा बना रहे।

सऊदी की ‘दोहरी चाल’ से उलझा अमेरिका

सऊदी अरब एक तरफ अमेरिका के साथ अपने ऐतिहासिक रक्षा संबंध बनाए रखना चाहता है, तो दूसरी तरफ बीजिंग के साथ व्यापारिक और सैन्य नजदीकी बढ़ा रहा है।अब वाशिंगटन के सामने सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न यह खड़ा हो गया है कि क्या वह $24 बिलियन की कमाई के चक्कर में अपने सबसे सीक्रेट फाइटर जेट की टेक्नोलॉजी चीन की झोली में जाने का जोखिम उठाए?

Petrol Diesel Price Hike: क्या ₹10-₹15 महंगा होगा पेट्रोल? 7 पॉइंट्स में समझिए ट्रंप के नए 100% टैरिफ प्लान का पूरा गणित

US Sanctions India Petrol Price: अमेरिकी संसद ने रूस पर कड़े प्रतिबंधों वाले बिल को पास कर दिया है। यह राष्ट्रपति ट्रंप को रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। अब सबसे बड़ा सवाल आम आदमी के मन में यह है कि क्या इस फैसले के बाद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम आसमान छूने लगेंगे?

अगर भारत रूसी सस्ता क्रूड ऑयल खरीदना बंद करता है या अमेरिका बैन लगाता है, तो पेट्रोल की कीमतें अचानक किसी एक झटके में नहीं बढ़ेंगी। इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत विकल्प के तौर पर कहां से तेल खरीदता है, ग्लोबल क्रूड के दाम क्या रहते हैं और सरकार-तेल कंपनियां टैक्स में कितनी राहत देती हैं। इन 7 पॉइंट्स में समझिए आपकी जेब पर कितना बोझ पड़ेगा।

1. भारत आखिर कितना रूसी तेल खरीदता है?

साल 2022 के बाद से रूस भारत के लिए सस्ते कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत बन गया। वित्तीय वर्ष 2026 में भारत ने $40.8 अरब डॉलर का रूसी तेल आयात किया, जो कुल कच्चे तेल आयात का 30.3% था। जुलाई 2026 तक भारत के कुल तेल आयात में अकेले रूस की हिस्सेदारी 51% पहुंच गई थी। भारत अपनी जरूरत का 88% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है। अगर रूसी सप्लाई रुकती है, तो भारत को बहुत बड़े पैमाने पर नया सप्लायर ढूंढना होगा।

2. क्या रूसी तेल बंद होते ही तुरंत महंगा हो जाएगा पेट्रोल?

जरूरी नहीं कि तुरंत ऐसा हो, और न ही यह गणित सीधा काम करता है।अगर भारतीय रिफाइनरियां (IOC, BPCL, HPCL) रूस से तेल खरीदना बंद करती हैं, तो वे मिडिल ईस्ट, अफ्रीका और अमेरिका से क्रूड खरीद सकती हैं। पहले रूस $10 प्रति बैरल से ज्यादा का डिस्काउंट दे रहा था। हालांकि, मिड-2026 में रूस के ‘उराल्स’ क्रूड पर डिस्काउंट घटकर सिर्फ $1 से $2 प्रति बैरल रह गया है। यानी डिस्काउंट पहले से ही काफी कम हो चुका है, इसलिए रूसी तेल बंद होने का झटका उतना भयानक नहीं होगा जितना साल-दो साल पहले होता।

3. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें है सबसे बड़ा खतरा

असली चुनौती भारत के रिफाइनरों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए होगी। अगर अमेरिकी बैन के कारण रूसी क्रूड इंटरनेशनल मार्केट से बाहर हो जाता है, तो ग्लोबल मार्केट में तेल की किल्लत हो जाएगी। मिडिल ईस्ट में भू-राजनीतिक तनावों और सप्लाई में आ रही रुकावटों के कारण ब्रेंट क्रूड का भाव $105 प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुका है। जब दुनिया में तेल की सप्लाई घटेगी, तो कच्चे तेल के दाम सभी के लिए बढ़ जाएंगे।

4. भारत दूसरा तेल ढूंढ तो लेगा, लेकिन ‘कीमत’ चुकानी होगी

भारत के पास सऊदी अरब, यूएई, इराक और अफ्रीकी देशों से तेल खरीदने का पुराना अनुभव है। लेकिन सप्लायर बदलना सिर्फ एक नया टैंकर भेजने जितना आसान नहीं होता। हर रिफाइनरी का स्ट्रक्चर खास तरह के कच्चे तेल के लिए डिजाइन होता है।साथ ही अचानक जब भारत और अन्य देश नए विकल्पों की ओर भागेंगे, तो बाजार में प्रीमियम और माल भाड़ा काफी बढ़ जाएगा, जिससे क्रूड एक्विजिशन कॉस्ट महंगी हो जाएगी जिसका सीधा असर अंततः ग्राहकों पर ही पड़ेगा।

5. भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं?

पेट्रोल पंप पर मिलने वाले पेट्रोल की कीमत सिर्फ कच्चे तेल के दाम पर निर्भर नहीं करती, बल्कि इसमें कई लेयर शामिल होती हैं।

पेट्रोल पंप की अंतिम कीमत = कच्चे तेल की लागत + रिफाइनिंग खर्च + भाड़ा + डीलर कमीशन + केंद्र की एक्साइज ड्यूटी + राज्यों का वैट (VAT)

पेट्रोल-डीजल जीएसटी से बाहर हैं। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल बेकाबू होता है, केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी घटाकर और तेल कंपनियां अपने मार्जिन को एडजस्ट करके आम जनता को सीधी महंगाई से बचाती हैं। जैसा मार्च 2026 में क्रूड $122 पहुंचने पर ₹10/लीटर एक्साइज घटाकर किया गया था।

6. तो आखिर कितने रुपये बढ़ सकते हैं पेट्रोल के दाम?

इसका कोई एक तय आंकड़ा जैसे ₹10 या ₹20 नहीं दिया जा सकता। यह इन 3 संभावित स्थितियों पर निर्भर करेगा:

सिचुएशन 1 (सामान्य हालात): भारत रूस के बजाय दूसरे देशों से तेल खरीदता है और ग्लोबल सप्लाई सामान्य रहती है। इसका असर ये होगा कि तेल कंपनियों की लागत थोड़ी बढ़ेगी, लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम पर इसका असर ना के बराबर या बहुत मामूली होगा।

सिचुएशन 2 (रूस की सप्लाई पूरी ठप): अंतरराष्ट्रीय बाजार में रूसी तेल रुकने से ब्रेंट क्रूड तेजी से महंगा होता है। इससे रिफाइनरियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ेगा और घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल ₹2 से ₹5 तक महंगे हो सकते हैं।

सिचुएशन 3 (रूस बैन + मिडिल ईस्ट संकट): अगर रूस के तेल पर रोक के साथ-साथ खाड़ी देशों में युद्ध/तनाव से सप्लाई ठप हो जाए। यह सबसे चिंताजनक स्थिति होगी। सरकार के लिए पुरानी दरों पर पेट्रोल बेचना मुश्किल हो जाएगा और कीमतों में बड़ा इजाफा देखना पड़ सकता है।

7. अमेरिकी टैरिफ का सीधा असर पेट्रोल पर नहीं, एक्सपोर्ट पर होगा

यह बिल पास होने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप को शक्ति देता है, यह अपने आप भारत पर 100% ड्यूटी लागू नहीं करता। वैसे अगर अमेरिका 100% टैरिफ लगाता है, तो इसका असर भारत के पेट्रोल पंप पर नहीं, बल्कि अमेरिका जाने वाले भारतीय एक्सपोर्ट्स (कपड़ा, आईटी, जेम्स, दवाइयां) पर पड़ेगा। इससे भारतीय रुपया कमजोर होगा और घूम-फिरकर भारत के आयात बिल पर दबाव बनाएगा।

भारत के सामने दोहरी चुनौती

भारत के सामने इस समय दो बड़े जोखिम ऑयल शॉक और ट्रेड शॉक खड़े हैं। सस्ता रूसी तेल छोड़ें, महंगा विकल्प चुनें और पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा झेलें। या फिर रूस से तेल खरीदना जारी रखें, अमेरिका के 100% टैरिफ का सामना करें और अपने एक्सपोर्ट सेक्टर को नुकसान पहुंचाएं।

फिलहाल, ग्राहकों को तुरंत पैनिक होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार और तेल विपणन कंपनियां (OMCs) वैश्विक उथल-पुथल के बीच कीमतों को स्थिर रखने का पूरा प्रयास करेंगी।

GIFT Nifty falls: US फेड के ब्याज दरों में बढ़त का Sensex-Nifty पर पड़ेगा असर,जानें ग्लोबल मार्केट और गिफ्ट निफ्टी क्या दे रहे संकेत

GIFT Nifty falls:  गुरुवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स Sensex और Nifty के हल्की गिरावट के साथ खुलने की संभावना है। GIFT Nifty कमजोर शुरुआत का संकेत दे रहा है, क्योंकि US Federal Reserve ने तीन साल से ज़्यादा समय में पहली बार ब्याज दरें बढ़ाई हैं और संकेत दिया है कि आगे और सख्ती की जा सकती है। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और एशिया के कुछ हिस्सों में बढ़त से कुछ सहारा मिल सकता है, लेकिन US यील्ड में बढ़ोतरी और Fed द्वारा और रेट बढ़ाने की उम्मीदों के कारण निवेशक सतर्क रह सकते हैं।

सुबह 8 बजे GIFT Nifty 23,222 के आसपास ट्रेड कर रहा था, जो पिछली क्लोजिंग से 45 अंक या 0.2 प्रतिशत नीचे था। पिछले सेशन में भारतीय इक्विटी में रिकवरी हुई थी, जिससे दो दिन की गिरावट का सिलसिला थम गया था। Sensex 332.63 अंक या 0.45 प्रतिशत बढ़कर 74,336.45 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 99 अंक या 0.43 प्रतिशत बढ़कर 23,217.60 पर पहुंचा। IT एकमात्र ऐसा सेक्टर था जो गिरावट के साथ बंद हुआ।

गुरुवार को फोकस Fed के फैसले के असर, US ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर रहेगा। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दूसरे सेशन में नरमी आई है, लेकिन यह अभी भी $104 प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है।

US Fed ने दरें बढ़ाई, और सख्ती के संकेत दिए

Federal Reserve ने बुधवार को तीन साल से ज़्यादा समय में पहली बार अपनी मुख्य ब्याज दर बढ़ाई। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बीच लगातार बनी हुई महंगाई को काबू में करने के लिए यह कदम उठाया गया। Fed ने कहा कि यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया और संकेत दिया कि महंगाई को तेजी से कम करने के लिए निकट भविष्य में और सख्ती की जा सकती है।

इस फैसले के बाद बाजारों ने एक और रेट बढ़ोतरी की उम्मीदें बढ़ा दी हैं, और दिसंबर तक एक और बढ़ोतरी की संभावना को अब पूरी तरह से मान लिया गया है। शॉर्ट-टर्म US ट्रेजरी यील्ड में उछाल आया क्योंकि निवेशकों ने और सख्ती की संभावना के हिसाब से खुद को ढाला, हालांकि Fed के कदम से लंबे समय वाले बॉन्ड में हालिया बिकवाली को शांत करने में मदद मिली।

भारतीय इक्विटी के लिए, US में ऊंची दरों और यील्ड की संभावना विदेशी पोर्टफोलियो फ्लो के लिए एक संभावित चुनौती बनी हुई है। एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी, तेल की कीमतों और करेंसी पर दबाव के साथ-साथ अलग-अलग इलाकों से मिले-जुले संकेतों की वजह से निवेशकों का मूड सतर्क रहने की संभावना है।

वॉल स्ट्रीट में गिरावट, US फ्यूचर्स में वापसी

फेड की घोषणा के बाद उतार-चढ़ाव भरे सेशन के बाद US इक्विटीज़ ज़्यादातर गिरावट के साथ बंद हुईं। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 631.33 अंक या 1.21 प्रतिशत गिरकर 51,461.78 पर आ गया, जबकि S&P 500 में 0.44 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 7,552.14 पर बंद हुआ। नैस्डैक कम्पोजिट में लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ, यह 0.01 प्रतिशत गिरकर 25,978.43 पर रहा।

सप्लाई की चिंता कम होने से ब्रेंट $105 से नीचे आया

गुरुवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट जारी रही, जिससे हाल के हफ़्तों में एनर्जी की कीमतों में भारी उछाल के बाद भारतीय बाज़ारों को कुछ राहत मिली। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.2 प्रतिशत गिरकर $104.59 प्रति बैरल पर आ गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1.1 प्रतिशत गिरकर $101.29 पर आ गया। बुधवार को दोनों बेंचमार्क में लगभग $3 की गिरावट आई थी।

यह गिरावट उन रिपोर्टों के बाद आई जिनमें कहा गया था कि सऊदी अरब ओमान के ज़रिए अतिरिक्त क्रूड कार्गो की पेशकश कर रहा है, जिससे मिडिल ईस्ट में सप्लाई में रुकावट की कुछ चिंताएं कम हुईं।

निफ्टी का टेक्निकल आउटलुक

पोनमुडी निफ्टी के लिए 23,300-23,400 को तुरंत रेजिस्टेंस ज़ोन मानते हैं। अगर यह 23,400 के ऊपर लगातार बना रहता है, तो 23,500-23,600 की ओर रिकवरी में मदद मिल सकती है, हालांकि वह इलाका एक मज़बूत बाधा बना हुआ है और वहां फिर से बिकवाली हो सकती है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा कमजोर शुरुआत के संकेत, फेड ने बढ़ाई ब्याज दरें एशिया बाजार में ते

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ईरान युद्ध से तेल महंगा, दुनियाभर में गुस्सा बढ़ा:बांग्लादेश की फैक्ट्रियों में काम रुका, फिलीपींस में मछुआरों ने नावें रोक दीं

ईरान युद्ध का असर अब पश्चिम एशिया से बाहर भी दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। इसका असर हर देश में अलग तरह से दिख रहा है। कहीं पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें हैं, कहीं खाना पकाने की गैस नहीं मिल रही। फिलीपींस में मछुआरे महंगे डीजल के कारण समुद्र में नहीं जा पा रहे हैं। बांग्लादेश में गैस और बिजली की कमी से कपड़ा फैक्ट्रियों का काम प्रभावित हुआ है। श्रीलंका में सरकार इस उलझन में है कि ईंधन की कीमत बढ़ाए या सब्सिडी देकर लोगों को राहत दे। वहीं, सीरिया और ग्वाटेमाला में महंगे ईंधन के खिलाफ लोग सड़कों पर उतर आए। पुर्तगाल में ड्राइवरों ने धीमी रफ्तार से गाड़ियां चलाकर और लगातार हॉर्न बजाकर विरोध किया। यानी तेल का संकट अब सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं है। इसका असर परिवहन, खेती, मछली पालन, बिजली और उद्योग तक पहुंच रहा है। इंडोनेशिया: पेट्रोल के लिए कतार, गैस की भी कमी इंडोनेशिया के सुलावेसी प्रांत में खाना पकाने वाली गैस की कमी और बिजली कटौती की शिकायतें सामने आई हैं। कुछ जगहों पर पेट्रोल की राशनिंग भी शुरू की गई है। पेट्रोल पंपों के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं। कई लोग खाली टैंक वाली बाइक को धक्का देकर पंप तक ले जाते नजर आ रहे हैं। ईंधन की राशनिंग के खिलाफ टैक्सी ड्राइवरों ने प्रदर्शन किया। जावा के योग्याकार्ता में छात्रों ने भी बढ़ती ईंधन कीमतों के खिलाफ विरोध किया। इंडोनेशिया के लिए मुश्किल यह है कि सरकार पहले से ही ईंधन पर सब्सिडी देती है। कच्चे तेल की कीमत अनुमान से ज्यादा बढ़ने पर इस सब्सिडी का खर्च भी बढ़ रहा है। फिलीपींस: डीजल इतना महंगा कि मछुआरों ने नावें रोक दीं मनीला बे के मछुआरे कई हफ्तों की बारिश के बाद समुद्र में लौटने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन महंगे डीजल ने उनकी मुश्किल बढ़ा दी। बड़ी संख्या में मछुआरे नाव लेकर समुद्र में नहीं गए, क्योंकि उनके पास ईंधन खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं। मछुआरा संगठन के नेता फर्नांडो हिकाप ने कहा कि कई लोग दोबारा मछली पकड़ने के लिए तैयार थे, लेकिन नाव में डालने के लिए ईंधन खरीदना उनके लिए मुश्किल हो गया है। इसका असर सिर्फ मछुआरों की कमाई पर नहीं है। अगर नावें समुद्र में नहीं जाएंगी तो मछली की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है। बांग्लादेश: गैस की कमी से कपड़ा उद्योग प्रभावित बांग्लादेश की मुश्किल सीधे उद्योग तक पहुंच गई है। देश अपनी जरूरत का 90% से ज्यादा पेट्रोलियम आयात करता है और बड़ी मात्रा में तेल मिडिल ईस्ट से आता है। ईंधन और गैस की कमी के कारण बिजली उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसका असर देश के कपड़ा उद्योग पर भी पड़ा है। कुछ फैक्ट्रियों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। गाजीपुर के एक कपड़ा कारखाने के अधिकारी ने बताया कि दिन में चार-पांच बार बिजली कट रही है। इसके कारण फैक्ट्रियों में कई घंटे काम रुक जाता है। बांग्लादेश के लिए यह इसलिए अहम है क्योंकि कपड़ा उद्योग देश के बड़े रोजगार और निर्यात क्षेत्रों में शामिल है। बिजली और गैस की कमी लंबे समय तक बनी रही तो उत्पादन पर इसका असर पड़ सकता है। श्रीलंका: सरकार के सामने दो रास्ते, दोनों में नुकसान श्रीलंका में हर महीने ईंधन की कीमत तय की जाती है। लेकिन पेट्रोल पंपों को सप्लाई करने वाली कंपनियों ने ईंधन देना सीमित करना शुरू कर दिया है। कंपनियों का कहना है कि मौजूदा कीमत पर उन्हें नुकसान हो रहा है। अब सरकार के सामने दो रास्ते हैं। वह ईंधन की कीमत बढ़ाए या कंपनियों को नुकसान से बचाने के लिए ज्यादा सब्सिडी दे। कीमत बढ़ाने का मतलब लोगों के लिए पेट्रोल और डीजल महंगा होना है। इसका असर परिवहन और दूसरी चीजों की कीमत पर पड़ सकता है। वहीं, सब्सिडी बढ़ाने का मतलब सरकारी खर्च बढ़ना है। श्रीलंका पहले से भारी कर्ज के दौर से गुजर रहा है। इसलिए सरकार के लिए लंबे समय तक अतिरिक्त सब्सिडी का बोझ उठाना आसान नहीं है। इटली: फ्यूल बोनस देने की तैयारी, 11 हजार मिलेंगे इटली में 18 सितंबर से डीजल और महंगा हो सकता है। मेलोनी सरकार ने 17.08 सेंट यानी करीब 19 रुपए प्रति लीटर की टैक्स राहत खत्म कर रही है। इटली में डीजल की कीमत पहले ही 3 साल से ज्यादा समय के सबसे ऊंचे स्तर पर है। टैक्स राहत हटने के बाद कीमत 2.4 यूरो प्रति लीटर से ऊपर जाने का अनुमान है। ऐसे में 50 लीटर की टंकी भरवाने पर करीब 10 यूरो ज्यादा (1110 रुपए) देने होंगे। इटली सरकार अब सभी लोगों को टैक्स में राहत देने के बजाय जरूरतमंद लोगों को सीधे मदद देने पर विचार कर रही है। इसके तहत 100 यूरो यानी करीब ₹11,100 का फ्यूल बोनस देने का प्रस्ताव है। यह पैसा कर्मचारियों को उनकी सैलरी के साथ दिया जा सकता है। इसमें नौकरीपेशा लोगों के अलावा खुद का काम करने वाले लोगों को भी शामिल करने की बात है। सीरिया: कीमत में 40% तक इजाफा, प्रदर्शन शुरू सीरिया में सरकार ने पेट्रोल, डीजल और दूसरे पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में 40% तक बढ़ोतरी का ऐलान किया। इसके कुछ ही घंटे बाद कई शहरों में प्रदर्शन शुरू हो गए। लोगों ने सड़कें रोकीं और टायर जलाए। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि कीमतों में की गई बढ़ोतरी वापस ली जाए। सरकार का कहना है कि युद्ध के कारण ईंधन महंगा हुआ है और कीमत बढ़ाना मजबूरी है। पुर्तगाल: सड़क पर धीमी गाड़ियां और लगातार हॉर्न पुर्तगाल में ड्राइवरों ने महंगे ईंधन के खिलाफ विरोध का अलग तरीका अपनाया। सोशल मीडिया के जरिए ड्राइवरों ने ‘बुजिनाओ’ नाम से प्रदर्शन शुरू किया। इसमें लोग कारों की रफ्तार बहुत धीमी रखते हैं और लगातार हॉर्न बजाते हैं। पुर्तगाल में डीजल की कीमत 9 डॉलर प्रति गैलन से ज्यादा हो गई है। ऐसे में ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट कारोबार पर इसका सीधा असर पड़ा है। ————————- यह खबर भी पढ़ें… इजराइल को ₹26 हजार करोड़ के हथियार देंगे ट्रम्प:900 किलो के 40 हजार बम शामिल; बाइडेन ने ज्यादा मौतों के डर से सप्लाई रोकी थी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन इजराइल को 2.8 अरब डॉलर यानी करीब ₹26 हजार करोड़ के हथियार देने की तैयारी कर रहा है। इस पैकेज में करीब 40 हजार भारी बम शामिल हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Stocks to Watch: लंबे वीकेंड बाद Nifty की एक्सपायरी; HDFC Bank, Indiabulls, Raymond समेत ये 29 शेयर फोकस में

Stocks to Watch: अधिकतर एशियाई बाजारों से कमजोर रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में ग्रीन शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। इस तरह लगातार पांच हफ्ते की गिरावट और लंबे वीकेंड के बाद इस हफ्ते की शुरुआत ग्रीन हो सकती है। इस हफ्ते सोमवार 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के मौके पर स्टॉक मार्केट में कारोबार बंद था जिसके चलते मार्केट आज तीन दिनों की छुट्टियों के बाद खुल रहा है। चूंकि आज निफ्टी की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है।

एक कारोबारी दिन पहले 11 सितंबर को सेंसेक्स (Sensex) 120.83 प्वाइंट्स यानी 0.16% की गिरावट के साथ 74,781.76 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 79.70 प्वाइंट्स यानी 0.34% की फिसलन के साथ 23,398.10 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Horizon Industrial Parks Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर होरिजोन इंडस्ट्रियल पार्क्स घाटा कंसालिडेटेड लेवल पर ₹64.3 करोड़ से घटकर ₹10.3 करोड़ रह गया तो रेवेन्यू 23.1% बढ़कर ₹200.5 करोड़ पर पहुंच गया।

Lalithaa Jewellery Mart Q1 (Consolidated YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर ललिता ज्वैलरी मार्ट का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 21.6% गिरकर ₹208.2 करोड़ पर आ गया लेकिन रेवेन्यू 26% बढ़कर ₹6,031.2 करोड़ पर पहुंच गया।

Nova Iron & Steel Q1 (YoY)

जून 2026 तिमाही में सालाना आधार पर नोवा आयरन एंड स्टील का कंसालिडेटेड प्रॉफिट 61.1% गिरकर ₹86 लाख और रेवेन्यू 40.3% फिसलकर ₹67.5 करोड़ पर आ गया।

HDFC Bank

एचडीएफसी बैंक के बोर्ड ने अगले एमडी और सीईओ के लिए आरबीआई के पास दो नाम सैलरी स्ट्रक्चर के साथ प्राथमिकता के क्रम में भेजे हैं। इसके अलावा बोर्ड ने एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स के तौर पर वी श्रीनिवास रंगन और जिम्मी टाटा को तीन साल के लिए फिर जिम्मेदारी दी है तो बोर्ड ने पूर्णकालिक निदेशक का एक और पद बनाने को मंजूरी दी है, जिससे एमडी और सीईओ के अलावा पूर्णकालिक निदेशकों की संख्या बढ़कर चार हो गई है।

Solar Industries India

सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया की सब्सिडियरी सोलर SA इन्वेस्टमेंट्स प्रोप्राइटरी ने ओमनिया होल्डिंग्स के सभी बकाया शेयर $135.5 करोड़ (₹12,951 करोड़) में खरीदने के लिए ओमनिया होल्डिंग्स के साथ डेफिनिटिव एग्रीमेंट किया है।

KEC International

केईसी इंटरनेशनल को भारत, मिडिल ईस्ट और अमेरिका में T&D (ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन) प्रोजेक्ट के लिए ₹1,303 करोड़ के नए ऑर्डर मिले हैं। इन ऑर्डरों के साथ इस साल अब तक कंपनी को ₹7,600 करोड़ से अधिक के ऑर्डर्स मिल चुके हैं।

Indiabulls

इंडियाबुल्स ने फिनटेक क्लाउड के साथ एक डेफिनिटिव एग्रीमेंट किया है। इसके तहत कंपनी एनसीएलटी स्कीम के जरिए ₹1,050 करोड़ में फिनटेक क्लाउड में 70% हिस्सेदारी खरीदेगी।

Cochin Shipyard

कोचीन शिपयार्ड ने नई दिल्ली में ब्रिक्स समिट 2026 के दौरान ड्रायडॉक्स वर्ल्ड दुबई – FZCO (DDW) के साथ एक जॉइंट वेंचर एग्रीमेंट किया है।

Strides Pharma Science

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने 2 सितंबर से 11 सितंबर, 2026 के दौरान चेन्नई के अलाथुर में स्ट्राइड्स फार्मा साइंस की फॉर्मूलेशन फैसिलिटी में रूटीन cGMP (करंट गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस) इंस्पेक्शन किया और इसके बाद तीन ऑब्ज़र्वेशन के साथ फॉर्म 483 जारी किया।

Dr Reddy’s Laboratories

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने मेक्सिको में डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज के एपीआई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट के रिकॉर्ड्स का एसेसमेंट पूरा कर लिया है और दो ऑब्जर्वेशन के साथ फॉर्म FDA 2953 जारी किया है। यह एसेसमेंट 17 जुलाई से 8 सितंबर, 2026 के बीच हुआ था।

Aurobindo Pharma

अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने 7 सितंबर से 11 सितंबर, 2026 के बीच आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम में अरबिंदों फार्मा की सब्सिडियरी एपिटोरिया फार्मा की API मैन्युफैक्चरिंग यूनिट (यूनिट-IV) का निरीक्षण किया, जिसमें कोई खामी नहीं मिली।

Sun Pharmaceutical Industries

सन फार्मा की तीन सब्सिडियरीज ने अमेरिका में जेनेरेकि दवाओं की प्राइसिंग से जुड़े एक कानूनी मामले में सेटलमेंट किया है। हालांकि सौदा कितने में हुआ, यह बात सामने नहीं आई है और कंपनी ने कोई गलती भी नहीं मानी है।

Jubilant Pharmova

जुबिलैंट फार्मोका की अमेरिकी यूनिट जुबिलैंट Jubilant HollisterStier LLC की वॉशिंगटन में स्थित सीएमओ फैसिलिटी की अमेरिकी दवा नियामक एफडीए ने 8-17 जून के बीच जांच की, जिसमें फैसिलिटी को VAI (वालंटरी एक्शन इंडिकेटेड) कैटेगरी में रखा गया यानी कि कुछ रेगुलेटरी कंसर्न मिले हैं। Jubilant HollisterStier LLC की बात करें तो यह जुबिलैंट फार्मा होल्डिंग इंक की सब्सिडियरी है जोकि जुबिलैंट फार्मोवा के पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी जुबिलैंट फार्मा की सब्सिडियरी है।

Greenply Industries

ग्रीनप्लाई इंडस्ट्रीज ने अपनी जॉइंट वेंचर ग्रीनप्लाई सैमेट के प्रस्तावित कैपिटल रीस्ट्रक्चरिंग का ऐलान किया है। इसकी शुरुआती शर्तों के तहत ज्वाइंच वेंचर पार्टनर सैमेट दो से तीन वर्षों में इसमें ₹3.0-4.0 करोड़ की अतिरिक्त पूंजी का निवेश करेगी।

Raymond

रेमंड की एयरोस्पेस सब्सिडियरी को एयरोस्पेस का एक बड़ा और नया काम मिला है। इसमें रेमंड की सब्सिडियरी को जहाज में इस्तेमाल होने वाले 300 से अधिक अलग-अलग तरह के पार्ट्स बनाने हैं और हर साल 37 हजार से अधिक पार्ट्स की जरूरत होगी। इससे कंपनी को सालाना करीब ₹33 करोड़ का रेवेन्यू मिल सकता है।

TVS Motor Company

टीवीएस मोटर कंपनी ने श्रीलंका में अपनी टीवीएस अपाचे मोटरसाइकिल रेंज को और बढ़ाया और इसमें फ्लैगशिप TVS अपाचे RR 310, TVS अपाचे RTR 310, TVS अपाचे RTR 200 4V TFT और TVS अपाचे RTR 160 4V TFT को शामिल किया।

Coforge

कोफोर्ज में डीके सिंह ने नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर और NRC (नॉमिनेशन एंड रेमुनरेशन कमिटी) के चेयरपर्सन के पद से तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है। बोर्ड ने एनआरसी और एसआरसी (स्टेकहोल्डर्स रिलेशनशिप कमिटी) का फिर से गठन किया है और नॉन-एग्जीक्यूटिव इंडिपेंडेंट डायरेक्टर बेथ बाउचर को एनआरसी का चेयरपर्सन नियुक्त किया है।

Piramal Finance

मूडीज रेटिंग्स ने पिरामल फाइनेंस की लॉन्ग-टर्म कॉर्पोरेट फैमिली रेटिंग (CFR) और सीनियर सिक्योर्ड डेट रेटिंग को Ba3 से बढ़ाकर Ba2 कर दिया है।

Info Edge (India)

हिमांशु अग्रवाल 17 सितंबर से इन्फो एज (इंडिया) में सीएफओ और एडिशनल डायरेक्टर के तौर पर शामिल होंगे।

HDFC Life Insurance Company

एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस कंपनी को मुंबई में ब्याज और पेनल्टी समेत कुल ₹3,365.15 करोड़ के जीएसटी का डिमांड नोटिस मिला है। कंपनी का कहना है कि इसका कंपनी के बिजनेस पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा और वह जीएसटी अपीलेट ट्रिब्यूनल में इसे चुनौती देगी।

WeWork India Management

वीवर्क इंडिया मैनेजमेंट ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल, बेंगलुरु से फॉर्म RSC-1 के तहत शेयर कैपिटल में प्रस्तावित कटौती की मंजूरी मांगी है। प्रस्ताव के तहत कंपनी की योजना अपने सिक्योरिटीज प्रीमियम अकाउंट में मौजूद ₹2,158.9 करोड़ के बैलेंस में से ₹2,050.16 करोड़ का इस्तेमाल करके मार्च 2026 तक के ₹2,050.16 करोड़ के घाटे को पूरी तरह खत्म करने का है।

BlackBuck

दिग्गज निवेशक सुनील सिंघानिया की कंपनी एबेकस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स ने एक्सेल इंडिया IV (मॉरीशस) से प्रति शेयर ₹576.05 के भाव पर ₹155.5 करोड़ में ब्लैकबक के 27 लाख शेयर (1.48% हिस्सेदारी) खरीदे। जून 2026 तक एक्सेल इंडिया IV की ब्लैकबक में 7.17% हिस्सेदारी (1.3 करोड़ इक्विटी शेयर) थी।

Jamna Auto Industries

जमना ऑटो इंडस्ट्रीज के प्रमोटर रणदीप सिंह जौहर और प्रदीप सिंह जौहर ने 99.95 लाख-99.95 लाख शेयर (2.5% हिस्सेदारी) ₹255.87 करोड़ में प्रति शेयर ₹128 के भाव पर बेच दिए। इनमें से 360 वन म्यूचुअल फंड और 360 वन एसेट मैनेजमेंट ने ₹127.93 करोड़ में जमना ऑटो के 99.95 लाख शेयर (2.5% हिस्सेदारी) तो डीएसपी म्यूचुअल फंड ने ₹100 करोड़ में 78.12 लाख शेयर (1.95% हिस्सेदारी) और अबूधाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी ने ₹27.93 करोड़ में 21.82 लाख शेयर (0.54% हिस्सेदारी) खरीदे हैं।

Granules India

प्रमोटर कृष्णा प्रसाद चिगुरुपति ने ग्रैन्यूल्स इंडिया में 5.36% हिस्सेदारी वाले 1.33 करोड़ इक्विटी शेयर ₹1160 करोड़ में प्रति शेयर ₹872.50 के भाव और 39.04 लाख शेयर (1.57% हिस्सेदारी) भी ₹892.84 के भाव पर ₹348.64 करोड़ में बेच दिए। कुल मिलाकर प्रमोटर ने ₹1,508.64 करोड़ के शेयर बेचे, जिससे कंपनी में उनकी हिस्सेदारी 6.94% कम हो गई। वहीं दूसरी तरफ कैपिटल ग्रुप, कोटक महिंद्रा लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, 360 वन पाइप फंड, एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, आदित्य बिड़ला सन लाइफ म्यूचुअल फंड, जगदीश नरेश मास्टर, मायरा वरुण रहेजा, सुंदरम म्यूचुअल फंड, बीएनपी पारिबास फाइनेंशियल मार्केट्स, बॉयंट अपॉर्चुनिटीज स्ट्रैटेजी-III, क्लैरस कैपिटल 1, एडलवाइज म्यूचुअल फंड, एमर्जिंग मार्केट्स इक्विटी फंड, फ्लोरिडा रिटायरमेंट सिस्टम, गोल्डमैन सैक्स बैंक यूरोप और ऑप्टिमिक्स होलसेल ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट्स शेयर ट्रस्ट ने ग्रैन्यूल्स इंडिया में 5.36% हिस्सेदारी खरीदी।

Sri Lotus Developers and Realty

मॉर्गन स्टेनली एशिया सिंगापुर ने मोहम्मद इरफान मोहम्मद लतीफ शेख से प्रति शेयर ₹201.75 के भाव पर ₹30.26 करोड़ श्री लोटस डेवलपर्स एंड रियल्टी के 15 लाख शेयर (0.3% हिस्सेदारी) हासिल की।

NRB Bearings

प्रमोटर एंटिटी त्रिलोचन सिंह साहनी ट्रस्ट 1 ने एनआरबी बेयरिंग्स में 0.51% हिस्सेदारी वाले 5 लाख शेयर ₹25.25 करोड़ में प्रति शेयर ₹505 के भाव पर बेचे। इनमें से 2.27 लाख शेयर ₹11.49 करोड़ में डीटी फंड ने खरीदे तो जीपी इमर्जिंग मार्केट्स स्ट्रैटेजीज एलपी ने ₹5.64 करोड़ में 1.11 लाख शेयर और यूनिवर्सिटी ऑफ नोट्रे डेम डू लैक ने ₹8.1 करोड़ में 1.6 लाख शेयर खरीदे।

Electrotherm India

रेडिएंट ग्लोबल फंड-क्लास B पार्टिसिपेटिंग शेयर्स ने 8 स्क्वायर कैपिटल से प्रति शेयर ₹951.83 के भाव पर इलेक्ट्रोथर्म (इंडिया) के अतिरिक्त 2.15 लाख (1.69% हिस्सेदारी) ₹20.53 करोड़ में खरीदे हैं। इससे पहले जून 2026 तक रेडिएंट ग्लोबल फंड-क्लास B पार्टिसिपेटिंग शेयर्स की इलेक्ट्रोथर्म में 1.41% तो 8 स्क्वायर कैपिटल की 2.32% हिस्सेदारी थी।

Pranav Constructions, Apana Logistics

प्रणव कंस्ट्रक्शंस के शेयर आज बीएसई और एनएसई पर लिस्ट होंगे तो अपना लॉजिस्टिक्स के शेयरों की बीएसई एसएमई पर एंट्री होगी।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

आज इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट: सनशाइन पिक्चर्स

एक्स-डिविडेंड: कर्नाटक बैंक, मनकसिया एल्युमीनियम कंपनी, आरती फार्मालैब्स, एजी ग्रीनपैक, अक्षरकेम इंडिया, एरो ग्रीनटेक, बेलराइज इंडस्ट्रीज, ब्लू डार्ट एक्सप्रेस, कैरीसिल, दिलीप बिल्डकॉन, फिलाटेक्स इंडिया, फ्रंटियर स्प्रिंग्स, हेक्सागोन न्यूट्रिशन, द हाई-टेक गियर्स, एचपी एडहेसिव्स, इंडिया टूरिज्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, आईटीएल इंडस्ट्रीज, IL&FS इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स, द इंडियन वुड प्रोडक्ट्स कंपनी, जे कुमार इंफ्राप्रोजेक्ट्स, कांची कर्पूरम, केएनआर कंस्ट्रक्शन्स, एनडीएल वेंचर्स, निखिल एडहेसिव्स, पोंडी ऑक्साइड्स एंड केमिकल्स, समक्रग पिस्टन्स एंड रिंग्स, सिमंड्स मार्शल, सोलेक्स एनर्जी, सुपरहाउस, सुपर टैनरी, सुरक्षा डायग्नोस्टिक, सिस्टेमैटिक्स कॉरपोरेट सर्विसेज, तिलकनगर इंडस्ट्रीज, टाइम टेक्नोप्लास्ट, टीपीएल प्लास्टेक, वेबसोल एनर्जी सिस्टम

एक्स-राइट्स: सेंचुरी एक्स्ट्रूजन्स

F&O बैन: आज बंधन बैंक, आईनॉक्स विंड, कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, मणप्पुरम फाइनेंस, SAIL

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Market Outlook: इस हफ्ते बाजार में तेजी या गिरावट; फेड के फैसले, पश्चिम एशिया के हालात, कच्चे तेल समेत इन फैक्टर्स से होगा तय

15 सितंबर से शुरू हो रहे नए कारोबारी सप्ताह में शेयर बाजार की दिशा अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के ब्याज दर पर फैसले, भारत की महंगाई के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमत और पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों से तय होगी। सोमवार, 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के अवसर पर शेयर बाजार बंद रहेंगे। बीते सप्ताह सेंसेक्स 1,733.67 अंक या 2.26 प्रतिशत टूटा। निफ्टी में 499.6 अंक या 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, रेलिगेयर ब्रोकिंग के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट (रिसर्च) अजीत मिश्रा का कहना है कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका-ईरान संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम और ब्रेंट कच्चे तेल की चाल बाजार की दिशा तय करने में प्रमुख कारक बने रहेंगे। साथ ही इस सप्ताह मौद्रिक नीति पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले और ब्याज दरों के भविष्य के रुख पर उसकी टिप्पणी पर भी नजर रहेगी।

फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की मीटिंग 15-16 सितंबर को होने वाली है। घरेलू मोर्चे पर मार्केट पार्टिसिपेंट्स की नजर अगस्त की थोक महंगाई और खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर रहेगी। इसके अलावा बेरोजगारी और व्यापार के आंकड़े भी चर्चा में रहेंगे।

बरकरार हैं महंगाई से जुड़े जोखिम

रिसर्च एनालिस्ट फर्म HST Wealth के फाउंडर और CEO हरिसेल्वन राधाकृष्णन का कहना है कि अमेरिका में हेडलाइन खुदरा महंगाई में मासिक आधार पर 0.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। सालाना आधार पर यह 3.4 प्रतिशत पर बनी रही, जबकि कोर महंगाई पिछले महीने के मुकाबले 0.3 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन साल-दर-साल आधार पर घटकर 2.4 प्रतिशत हो गई। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों में यह मासिक बढ़ोतरी महंगाई से जुड़े जोखिमों को चर्चा में बनाए रखे हुए है। यह ग्लोबल बॉन्ड यील्ड और डॉलर पर दबाव बढ़ा सकती है, खासकर अगर फेडरल रिजर्व ने ज्यादा सख्त रुख अपनाया तो।

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भारत के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ा बाहरी जोखिम

राधाकृष्णन ने आगे कहा कि भारत के लिए कच्चा तेल सबसे बड़ा बाहरी जोखिम बना हुआ है। यदि पश्चिम एशिया से कच्चे तेल की आपूर्ति में व्यवधान बढ़ता है और कीमतों में तेजी आती है, तो महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, देश का आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और कंपनियों का मार्जिन घट सकता है।

पिछले हफ्ते बाजार पर काफी दबाव रहा। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया और महंगाई, वैश्विक ब्याज दरों और आर्थिक विकास को लेकर चिंता बढ़ गई। निफ्टी-50 ने लगातार 5वें हफ्ते लाल निशान में क्लोजिंग की।

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