अमेरिका-ईरान में तेज हुई जंग: CENTCOM ने तबाह किए 5 ईरानी तेल टैंकर, जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमला

अमेरिका-ईरान में तेज हुई जंग: CENTCOM ने तबाह किए 5 ईरानी तेल टैंकर, जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमला

US Iran conflict

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध थमने का नाम ही रहा है। अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों पर मिसाइल हमलों के बाद अमेरिकी नौसेना ने ईरान के पांच तेल टैंकरों पर हमला किया है। अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में 4 और खार्ग द्वीप के पास 1 तेल टैंकर को निशाना बनाया। अमेरिका ने ईरान की 36 संस्थाओं पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं। इस बीच ईरान ने भी एक अमेरिकी ड्रोन कब्जे में लेने का दावा किया है। ALSO READ: ईरान-अमेरिका युद्ध का नया दौर, फिर बढ़ीं तेल की कीमतें

 

CENTCOM ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, सेंटकॉम बलों ने 8 सितंबर को 5 ईरानी कच्चे तेल के वाहकों को नष्ट कर दिया, जब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पिछले 2 दिनों में दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को निशाना बनाया था। अमेरिकी युद्धपोत ने ईरानी हमलों के प्रयासों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया और क्षेत्रीय जल में गश्त करना जारी रखा। किसी भी अमेरिकी कर्मी को नुकसान नहीं पहुंचा है।

ईरान का जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमला

ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने 18 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। इस बीच ईरान ने भी एक अमेरिकी ड्रोन कब्जे में लेने का दावा किया है।

 

कुवैत और बहरीन में तेल टैंकरों को धमकी

अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के पास मौजूद कुछ तेल टैंकरों को चेतावनी दी है। ईरान के IRGC ने कहा है कि इन जहाजों के चालक दल तुरंत जहाज खाली कर दें। ALSO READ: Top News 9 September: ईरान के 5 तेल टैंकरों पर अमेरिकी हमला, नेपाल में 5.0 का भूकंप; राघव चड्ढा बने दिल्ली के वोटर

 

महंगा हुआ क्रूड 

मिडिल ईस्ट में जंग तेज होने से कच्चे तेल की कीमतें आसमान पर पहुंच गई है। ब्रेंट क्रूड 99.36 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 94.37 डॉलर प्रति बैरल हो गया। इंडियन बास्केट में कच्चे तेल के दाम बढ़कर 106.3 डॉलर प्रति बैरल हो गए।

सऊदी अरब पर भयंकर हमला! तेल डिपो से लेकर एयरपोर्ट तक… हूती विद्रोहियों के अटैक से तबाही

Houthi Strikes in Saudi Arabia: मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी इलाके पर सिलसिलेवार बड़ा हमला किया है। इस हमले में सऊदी अरब की तेल दिग्गज कंपनी अरामको के ठिकानों, अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और मिलिट्री एयरबेस को निशाना बनाया गया है।

सऊदी अधिकारियों के मुताबिक, इन हमलों के कारण कई जगहों पर भीषण आग लग गई और 73 लोग घायल हो गए हैं। हूती विद्रोहियों ने धमकी दी है कि वे आने वाले दिनों में सऊदी अरब के अंदर और भी बड़े ऑपरेशन को अंजाम देंगे।

7 प्वाइंट्स में समझिए सऊदी अरब में क्या हुआ, हूती विद्रोहियों ने हमला क्यों किया और इसका दुनिया पर क्या असर पड़ेगा।

1. क्या हुआ सऊदी अरब में?

हूती विद्रोहियों ने मंगलवार तड़के सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्से में एक साथ कई ऊर्जा, सैन्य और नागरिक ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल से हमले किए। हमले के बाद कई तेल प्रतिष्ठानों में आग लग गई, जिससे वहां कामकाज अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ। सऊदी जॉइंट फोर्सेज कमान ने पुष्टि की है कि इन हमलों में 73 नागरिक घायल हुए हैं।

2. कौन-कौन से बड़े ठिकाने बने निशाना?

हूतियों ने रणनीतिक रूप से बेहद अहम ठिकानों को चुना:

  • अभा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Abha International Airport)
  • किंग खालिद एयरबेस (King Khalid Air Base)
  • अरामको के तेल ठिकाने (Abha & Jazan Aramco Facilities)

सैन्य और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को एक साथ निशाना बनाकर हूतियों ने सऊदी अरब की सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों पर चोट करने की कोशिश की है।

3. अरामको के तेल ठिकानों में लगी आग

सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी ‘अरामको’ के ठिकानों पर हमले के बाद कई जगह आग की लपटें दिखाई दीं। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि आग पर काबू पाने, नुकसान का आकलन करने और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए कामकाज को दोबारा बहाल करने के लिए इमरजेंसी टीमें तैनात कर दी गई हैं।

4. जाजान रिफाइनरी पहले से थी ठप

जाजान स्थित अरामको की रिफाइनरी की क्षमता रोजाना 4,00,000 बैरल तेल प्रोसेस करने की है। लेकिन यह रिफाइनरी जुलाई में हुए पिछले हूती हमले के बाद से ही बंद पड़ी है। हूतियों ने पिछले महीने भी इस कॉम्प्लेक्स पर दो बार हमले का दावा किया था, जिसमें रिफाइनरी में आग लग गई थी।

5. हमले में कितने लोग घायल हुए?

सऊदी अधिकारियों के अनुसार, अब तक 73 नागरिकों के घायल होने की खबर है। सऊदी नीत सैन्य गठबंधन ने इन हमलों को गैर-जिम्मेदाराना करार देते हुए कहा कि वे इसका मुंहतोड़ जवाब देंगे।

6. क्यों हमला कर रहे हैं हूती विद्रोही?

हूती विद्रोहियों का दावा है कि यह हमला उन्होंने सऊदी अरब की ओर से यमन में की गई एयरस्ट्राइक के जवाब में किया है।

जेल पर एयरस्ट्राइक का आरोप: हूतियों ने आरोप लगाया था कि सऊदी अरब ने उत्तरी यमन के अल-जौफ प्रांत में एक जेल पर बमबारी की, जिसमें कई लोग मारे गए।

सैन्य प्रवक्ता की चेतावनी: हूती सैन्य प्रवक्ता यह्या सरी (Yahya Saree) ने कहा कि सऊदी अरब का हमला तनाव बढ़ाने वाला था और अब वे सऊदी अरब के अंदर “बड़ा ऑपरेशन” चलाकर इसका जवाब देंगे।

7. बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य क्यों है इतना अहम?

यह पूरा तनाव यमन में फिर से शुरू हुई जंग के बीच बढ़ रहा है, जहां हूती विद्रोही रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाब अल-मंडेब स्ट्रैट (जलडमरूमध्य) पर अपना दबदबा बढ़ाना चाहते हैं।

यह समुद्री रास्ता अदन की खाड़ी को लाल सागर से जोड़ता है और दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण व्यापारिक रास्तों में से एक है।

अमेरिका-ईरान तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से शिपिंग पहले से ही प्रभावित है, ऐसे में बाब अल-मंडेब का रास्ता सऊदी अरब और वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद संवेदनशील हो गया है।

Nifty Trend : निफ्टी पिछले एक महीने में करीब 1000 अंक नीचे गिरा, जानिए आगे कैसी रह सकती है इसकी चाल

Nifty Trend : सीएनबीसी-आवाज के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल का कहना है कि बाजार इस समय मंड़ियों की पकड़ में है। निफ्टी पिछले एक महीने में करीब 1000 अंक नीचे गिरा है। यह 24,775 से धीरे-धीरे गिरकर 23,775 पर आया है। दिक्कत यह कि एक दिन की गिरावट कभी भी 0.57% से ज्यादा नहीं रही है। इस दौरान सिर्फ 6 दिन निफ्टी पॉजिटिव रहा। निफ्टी में अब ट्रेंडलाइन और ट्राइएंगल ब्रेकडाउन कन्फर्म हुआ है। कच्चा तेल अभी भी बाजार का सबसे बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। बॉन्ड यील्ड और डॉलर इंडेक्स भी नीचे आने को तैयार नहीं हैं। एक बड़ा फैक्टर है निफ्टी IT का वापस गिरना। पिछले 1 महीने में Nifty IT 6% से ज्यादा गिर चुका है। बैंक निफ्टी फ्लैट रहा है लेकिन बार-बार 200 DMA के नीचे आ रहा है। ग्लोबल बाजार भी 11 तारीख तक शायद वेट एंड वॉच मोड में रहें।

क्रूड की तेजी बरकरार

ब्रेंट $97 के पार निकल गया है। इसमें पिछले हफ्ते से 9% की तेजी आई है। सप्लाई की चिंता से क्रूड में तेजी जारी है। US-ईरान में तनाव बढ़ने से सप्लाई की चिंता बढ़ी है।

ईरान-ओमान के बीच हॉर्मुज मैनेजमेंट डील अंतिम दौर में है। सऊदी अरामको की Jazan फैसिलिटी पर हमले की खबरें हैं। चीन की क्रूड खरीद में रिकवरी से भी कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है।

क्रूड पर Goldman Sachs

Goldman Sachs का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट में हमले बढ़े तो कीमतों में और तेजी आएगी। हमले बढ़े तो ब्रेंट $120 तक भी जा सकता है। क्रूड पर बाजार का भरोसा बढ़ा है। हेज फंड्स मई के बाद ब्रेंट पर सबसे ज्यादा बुलिश हैं। WTI में नेट लॉन्ग पोजिशन जून के बाद सबसे ऊंचे हैं। हॉर्मुज सप्लाई रिस्क से क्रूड में तेजी की उम्मीद बढ़ी है।

अमेरिका में पेट्रोल-डीजल महंगा

US में गैसोलीन और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड हाई पर हैं।मिडिल ईस्ट सप्लाई रिस्क से फ्यूल मार्केट पर दबाव है।

चीन की गोल्ड खरीदारी जारी

PBoC ने अगस्त में 6.5 लाख औंस सोना खरीदा है। अगस्त में हुई खरीद अक्टूबर 2023 के बाद सबसे ज्यादा रही है। PBoC लगातार 22वें महीने सोना खरीद रहा है।

शेयर बाजार क्यों चिंता में?

शेयर बाजार पर Societe Generale का कहना है कि 10-साल की US यील्ड में तेजी बाजार के लिए ठीक नहीं है। US यील्ड 5.5% पर पहुंची तो बाजार पर दबाव बढ़ेगा। 5.5% यील्ड पर अर्निंग्स ग्रोथ भी वैल्यूएशन को सपोर्ट नहीं है। बढ़ती बॉरोइंग कॉस्ट से इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ेगा। फेड या ECB का दरें बढ़ाना बाजार के लिए काफी नहीं है। रेट हाइक महंगाई की चिंता दूर करने के लिए काफी नहीं है।

इक्विटी बाजार पर JPMorgan की राय है कि 10-साल की यील्ड 5% पर बाजार में तेज प्रतिक्रिया संभव है। 5% यील्ड से निवेशकों की इक्विटी को लेकर चिंता बढ़ेगी। 5% का स्तर अहम साइकोलॉजिकल थ्रेशोल्ड माना जा रहा है।

बाजार: कहां तक गिर सकता है निफ्टी?

अनुज सिंघल ने कहा कि निफ्टी में इस साल 2 बड़े बॉटम बने थे। युद्ध के तुरंत बाद 22,331 और मई में 23,123 (क्लोजिंग लेवल) देखने को मिले। क्लोजिंग के हिसाब से हम 24,774 तक चले थे। मई के स्तर से जो रैली हुई उसका हम 60% गिर चुके हैं और अगर 23,750 के नीचे बंद हुए तो 61.8% रिट्रेसमेंट होगी। ऐसे में वापस 23,100-23,200 जाने का रिस्क होगा। युद्ध के बाद वाले लो की रैली का भी हम 41% रिट्रेस हो चुके हैं और उसका 50% retracement लेवल आएगा करीब 23,550 पर। यानी कि कुल मिला कर 23,200-23,500 का रास्ता अब शायद खुल चुका है।

बाजार: आज कहां हो नजर?

अनुज सिंघल की राय है कि आज फिर से निफ्टी IT पर दबाव दिख सकता है। एक बार फिर से कोस्पी ऊपर है और बॉन्ड यील्ड्स भी। आज GE Vernova T&D हीरो हो सकता है। CNBC-आवाज ने आपको पिछले हफ्ते ही आज के लिए तैयार किया था। सिर्फ आवाज़ ने कहा था कि पावर ग्रिड का ऑर्डर GVT&D को मिलेगा। इसके अलावा बाकी पावर इक्विपमेंट शेयर भी चल सकते हैं। लग रहा है कि AI ट्रेड वापस अब दौड़ रही है। डिफेंस शेयर भी रडार पर हैं लेकिन ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली संभव है। आज कुछ मेटल शेयर चल सकते हैं। कॉपर रिकॉर्ड हाई पर है और जिंक 4 साल की ऊंचाई पर है। सोने और चांदी में भी चमक लौटी है। आज हिंद कॉपर और हिंद जिंक जैसे शेयरों पर नजर रखें। आज फार्मा शेयरों पर भी नजर रखें। बाजार में Risk Off है, ऐसे में थोड़ा फार्मा चल सकता है। निफ्टी का PCR गिरकर 0.69 पर आ चुका है। एक उम्मीद रहेगी कि एक्सपायरी की वजह से आज दूसरे हाफ में बड़ी कवरिंग आए। लेकिन ये सिर्फ उम्मीद है, स्क्रीन अभी तक रैली के लिए तैयार नहीं है।

निफ्टी पर रणनीति

अनुज सिंघल का कहना है कि निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 23,700-23,750 पर और बड़ा सपोर्ट 23,550-23,600 पर है। इसके लिए पहला रजिस्टेंस 23,800-23,850 पर और बड़ा रजिस्टेंस 23,900-23,950 पर है। बाजार में ट्रेड वहां करें जहां रिकवरी फेल हो,वहां बेचें। लेकिन आज एक्सपायरी है,एक शॉर्ट कवरिंग भी संभव है।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

इसके लिए 56,800-57,000 एक मेक ऑर ब्रेक लेवल है। इसे बचाया तो एक बार वापस 57,300-57,500 जा सकते हैं। लेकिन 56,800 टूटा तो 56,500 तक गिरने का खतरा होगा।

 

 Market Trend : मार्केट में रिकवरी की कोशिश हो रही नाकाम, कमजोर बाजार में भी इन शेयरों में दिख रहा दम

 

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CM डॉ. यादव की लूलू ग्रुप चेयरमैन युसूफ अली से अहम मुलाकात, MP के गेहूं-प्याज और सब्जियों की दुबई में सीधी खरीद पर बनी सहमति

CM डॉ. यादव की लूलू ग्रुप चेयरमैन युसूफ अली से अहम मुलाकात, MP के गेहूं-प्याज और सब्जियों की दुबई में सीधी खरीद पर बनी सहमति

cm mohan yadav

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को दुबई के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में आयोजित प्रतिष्ठित 'एआईएम कांग्रेस-2026' में शिरकत की। इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुख्यमंत्री ने मध्य प्रदेश में निवेश के अपार अवसरों, सुदृढ़ औद्योगिक नीति और अनुकूल व्यावसायिक माहौल को वैश्विक निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत किया। दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव और लूलू ग्रुप के चेयरमैन श्री युसूफ अली के बीच एक महत्वपूर्ण वन-टू-वन बैठक संपन्न हुई।

अबू धाबी मुख्यालय वाले इस बहुराष्ट्रीय समूह के साथ बैठक में मध्य प्रदेश में मॉर्डन रिटेल, सुपरमार्केट डवपलपमेंट, एग्री प्रिक्योरमेंट एंड एक्सपोर्ट, फूड प्रोसेसिंग इंफ्रा, कोल्ड चेन, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग के क्षेत्र में विस्तार की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया गया। श्री युसूफ अली ने मध्यप्रदेश में लोकेशन सर्वे के लिए आने का भरोसा दिलाया। 

 

मध्य प्रदेश के कृषि उत्पादों की प्रत्यक्ष खरीद पर केंद्रित रही चर्चा

बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु प्रदेश के किसानों और कृषि क्षेत्र को वैश्विक बाजार से जोड़ना रहा। मुख्यमंत्री ने लूलू ग्रुप के विशाल वैश्विक रिटेल नेटवर्क के माध्यम से मध्य प्रदेश से गेहूं, प्याज, सब्जियों और अन्य कृषि उपजों की प्रत्यक्ष खरीद को बढ़ावा देने पर विशेष बल दिया, जिससे प्रदेश के किसानों को उनकी उपज का बेहतर व अंतरराष्ट्रीय मूल्य प्राप्त हो सके।

 

लूलू ग्रुप का वैश्विक प्रभाव और भारत में उपस्थिति

वर्ष 2000 में स्थापित लूलू ग्रुप वर्तमान में एशिया, मिडिल ईस्ट और यूनाइटेड किंगडम में 250 से अधिक हाइपरमार्केट और सुपरमार्केट संचालित करता है, जिसमें 65,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। भारत में केरल, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गुजरात और तमिलनाडु में समूह की व्यापक मौजूदगी है। वित्तीय वर्ष 2025 में 7.93 बिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 69,100 करोड़ रुपये) का टर्नओवर दर्ज करने वाला यह समूह अब मध्य प्रदेश के साथ अपनी आपूर्ति श्रृंखला को सशक्त करने की दिशा में अग्रसर है।

Jio IPO: अगले हफ्ते शुरू हो सकती है निवेशकों से बातचीत, नवंबर में IPO लाने की तैयारी

Jio IPO: रिलायंस इंडस्ट्रीज की Jio Platforms IPO लाने की तैयारी में तेजी ला रही है। कंपनी अगले हफ्ते से निवेशकों से औपचारिक बातचीत शुरू कर सकती है। अगर प्लान के मुताबिक सब हुआ तो नवंबर में IPO आ सकता है। यह भारत के सबसे बड़े IPO में से एक हो सकता है।

ब्लूमबर्ग ने सूत्रों के हवाले से बताया कि Jio Platforms अमेरिका, सिंगापुर, हांगकांग, लंदन और मिडिल ईस्ट में निवेशकों के साथ बैठकें करेगी। ये बैठकें अगले हफ्ते से शुरू हो सकती हैं।

नवंबर में IPO लाने का लक्ष्य

ब्लूमबर्ग के मुताबिक, Jio Platforms की अपने बैंकर्स के साथ IPO को लेकर बातचीत चल रही है। इसमें नवंबर में IPO लाने का लक्ष्य रखा गया है।

हालांकि, अभी कुछ भी फाइनल नहीं है। IPO का आकार, कंपनी की वैल्यूएशन और टाइमिंग आगे बदल सकती है। Jio Platforms की ओर से इस मामले पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।

27 करोड़ नए शेयर जारी होंगे

Jio Platforms ने 19 जून को IPO के लिए ड्राफ्ट डॉक्यूमेंट दाखिल किए थे। 28 अगस्त को SEBI से मंजूरी भी मिल गई।

IPO में 27 करोड़ तक नए शेयर जारी किए जाएंगे। ब्लूमबर्ग न्यूज की कैलकुलेशन के मुताबिक, इससे कंपनी की इक्विटी में करीब 2.9% हिस्सेदारी डायल्यूट होगी। कंपनी IPO से मिलने वाली रकम का एक हिस्सा कर्ज चुकाने में इस्तेमाल करेगी।

4 अरब डॉलर तक जुटा सकती है कंपनी

मामले से जुड़े लोगों ने पहले ब्लूमबर्ग को बताया था कि Jio Platforms IPO से 4 अरब डॉलर तक जुटा सकती है।

अगर ऐसा होता है तो यह भारत के सबसे बड़े IPO में शामिल होगा। Jio Platforms, Reliance Industries के डिजिटल और टेलीकॉम कारोबार का हिस्सा है। इसके पास भारत की सबसे बड़ी वायरलेस कंपनी भी है।

NSE का IPO भी कतार में

भारत का IPO बाजार इस समय काफी सक्रिय है। कई बड़े इश्यू आने की तैयारी में हैं। NSE को भी इस महीने SEBI से IPO की मंजूरी मिल चुकी है। NSE का IPO सितंबर में आने की उम्मीद है। इससे करीब 3 अरब डॉलर जुटाए जाने की संभावना है।

ऐसे में NSE के बाद Jio Platforms का IPO भी बाजार के लिए बड़ा इवेंट हो सकता है।

Pernod Ricard IPO: रॉयल ​​स्टैग, एब्सोल्यूट वोदका की ओनर ला रही इंडिया यूनिट का इश्यू, 4 इनवेस्टमेंट बैंकों को चुना सलाहकार

Disclaimer: मनीकंट्रोल, नेटवर्क18 ग्रुप का हिस्सा है। नेटवर्क18 का नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसकी एकमात्र लाभार्थी रिलायंस इंडस्ट्रीज है।

यमन में हूती विद्रोहियों के हमले में 129 की मौत:बाब अल-मंदब पर कब्जे की कोशिश, निपटने को सरकार ने फोर्स भेजी

यमन में हूती विद्रोहियों और सरकारी फोर्स के बीच भीषण लड़ाई में 129 लोगों की मौत हुई है। यह हाल के वर्षों में यमन में हुई सबसे घातक झड़पों में से एक है। हूती विद्रोही लाल सागर के प्रवेश द्वार माने जाने वाले बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के करीब अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। लड़ाई गुरुवार को शुरू हुई। हूतियों ने तटीय इलाकों के पास जमीनी हमला करने के साथ रॉकेट और ड्रोन का भी इस्तेमाल किया। इस दौरान उन्होंने लाल सागर के किनारे कई रणनीतिक ऊंचाइयों पर कब्जा कर लिया। इन इलाकों से मोखा बंदरगाह और समुद्री रास्ते पर नजर रखना आसान है। एएफपी के मुताबिक यमनी सेना के एक अधिकारी ने बताया कि उसके 66 जवान मारे गए हैं। वहीं हूती विद्रोहियों से जुड़े सूत्रों ने कम से कम 62 विद्रोहियों के मारे जाने का दावा किया है। एक नागरिक की भी मौत हुई है। इस तरह अलग-अलग पक्षों से सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, लड़ाई में मरने वालों की संख्या 120 से ज्यादा हो गई है। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। बाब अल-मंदेब इतना अहम क्यों? बाब अल-मंदेब लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ने वाला बेहद अहम समुद्री रास्ता है। इसके उत्तर में लाल सागर स्वेज नहर के जरिए भूमध्य सागर से जुड़ता है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा की आवाजाही होती है। इसलिए यहां लंबे समय तक संघर्ष या समुद्री रास्ते में किसी तरह की रुकावट का असर सिर्फ यमन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी पड़ सकता है। मौजूदा हमले में हूतियों का फोकस मोखा बंदरगाह और उसके आसपास के इलाकों पर भी है। रणनीतिक ऊंचाइयों पर कब्जे से उन्हें तटीय इलाके में सरकारी बलों पर दबाव बनाने और मोखा तथा बाब अल-मंदेब की तरफ जाने वाले रास्तों पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। सैन्य सूत्रों के मुताबिक, हूतियों ने लाल सागर के पास और ताइज शहर के आसपास कई ऊंचाई वाले ठिकानों पर कब्जा किया है। सरकार ने हूती विद्रोहियों से लड़ने सेना भेजी हूती विद्रोहियों की बढ़त को देखते हुए यमनी सरकार ने भी ताइज में अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं। एक यमनी अधिकारी के मुताबिक, सरकार ने सऊदी अरब के कहने पर अदन से ताइज के लिए सैनिक भेजे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर हूती मोखा बंदरगाह या बाब अल-मंदेब के आसपास के रणनीतिक इलाकों पर अपनी पकड़ मजबूत कर लेते हैं, तो इससे यमनी सरकार और सऊदी अरब के साथ किसी भी बातचीत में उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है। हूती विद्रोही कौन हैं? हूती विद्रोही यमन के उत्तरी हिस्से में रहने वाले जायदी शिया समुदाय का एक सशस्त्र संगठन है। इसकी शुरुआत 1990 के दशक में एक धार्मिक-सामाजिक आंदोलन के रूप में हुई थी। हूती सरकार पर भेदभाव करने का आरोप लगाते थे। 2011 में ट्यूनीशिया से शुरू हुई अरब क्रांति की लहर यमन भी पहुंची। उस समय राष्ट्रपति अली अब्दुल्ला सालेह करीब 33 साल से सत्ता में थे। युवाओं के प्रदर्शन की वजह से उनकी गद्दी छीन गई। फरवरी 2012 में अब्दरब्बू मंसूर हादी राष्ट्रपति बने। लेकिन उनकी सरकार कमजोर थी। हूती विद्रोहियों ने इसका फायदा उठाया और सितंबर 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। हालात इतने बिगड़ गए कि 2015 में राष्ट्रपति हादी को देश छोड़कर सऊदी अरब में शरण लेनी पड़ी। हादी के पद छोड़ने के बाद से यमन पर किसी एक सरकार का कंट्रोल नहीं है। अभी यमन कई हिस्सों में बंटा हुआ है। हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन मिलता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार को सऊदी अरब और उसके सहयोगी देशों का समर्थन मिलता है।
————————— यह खबर भी पढ़ें… मिडिल ईस्ट में शुरू हो सकती है एक नई जंग:सऊदी अरब का यमन की राजधानी सना पर हमला, हूती ने शुरू की समुद्री नाकेबंदी
28 फरवरी को जब अमेरिका और ईरान के बीच जंग शुरू हुई थी, तभी माना जा रहा था कि इसमें ईरान के सहयोगी हूती विद्रोही भी कूद सकते हैं। करीब पांच महीने बाद वही आशंका सच साबित होती दिख रही है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Commodity Market: कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा उछाल! ब्रेंट $95 के पार, जानिए सोने-चांदी का हाल

Commodity Market Updates: आज शुक्रवार, 4 सितंबर को वैश्विक कमोडिटी बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिल रहा है। मध्य पूर्व में गहराते सैन्य तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच एक बार फिर से भड़की तबाही की चिंगारी के चलते कच्चे तेल की सप्लाई बाधित होने की आशंका गहरा गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में बड़ा उछाल आया है। दूसरी ओर, अमेरिकी एंप्लॉयमेंट डेटा से ठीक पहले सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती व स्थिरता बनी हुई है।

कच्चे तेल में आई यह तेजी मध्य जुलाई के बाद की सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त की ओर इशारा कर रही है। आइए आपको बताते हैं कमोडिटी बाजार का पूरा अपडेट।

कच्चे तेल की कीमतों में उबाल: ब्रेंट $95 और WTI $91 के पार

मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई रुकने के डर से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट और डब्ल्यूटीआई क्रूड दोनों की कीमतों में शुक्रवार को बढ़त दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 15 सेंट (0.2%) चढ़कर $95.67 प्रति बैरल पर पहुंच गया। वीकली आधार पर इसमें 7.1% की भारी बढ़त देखी जा रही है। वही अमेरिकी WTI क्रूड 26 सेंट (0.3%) की बढ़त के साथ $91.56 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। हफ्ते भर में WTI में 9.8% का उछाल दर्ज किया गया है। यह 20 जुलाई के बाद कच्चे तेल में दर्ज की गई अब तक की सबसे बड़ी साप्ताहिक तेजी है।

सोने-चांदी का हाल: US Fed के नरम रुख से मिला सहारा

कच्चे तेल की आग के बीच सोने की कीमतों में स्थिरता बनी हुई है और यह भी मामूली साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने की राह पर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट गोल्ड $4,477.10 प्रति औंस के मजबूत स्तर पर टिका हुआ है। दिसंबर का अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स 0.4% गिरकर $4,522.60 प्रति औंस पर रहा। सिल्वर (चांदी) 0.1% बढ़कर $66.90 प्रति औंस पर पहुंच गई, जबकि प्लैटिनम और पैलेडियम में मामूली सुस्ती रही।

निवेशक अब आज शाम जारी होने वाले अमेरिकी नॉन-फार्म पेरोल डेटा का इंतजार कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर अगला कदम उठाने का संकेत मिलेगा।

गुरुवार को गोल्ड में क्यों आई थी 2% की तेजी?

अमेरिकी फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने कहा था कि अगर महंगाई दर स्थिर रहती है तो वे ब्याज दरें न बढ़ाने का समर्थन करेंगे। उनके इस बयान के बाद ट्रेडर्स ने सितंबर में रेट हाइक की उम्मीदें कम कर दीं, जिससे गुरुवार को सोने में 2% का बड़ा उछाल आया था।

डॉलर इंडेक्स में हल्की नरमी

दुनिया की प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.05% घटकर 99.54 पर आ गया। डॉलर कमजोर होने से विदेशी खरीदारों के लिए डॉलर में कोटेड कमोडिटी (सोना-तेल) खरीदना तुलनात्मक रूप से सस्ता हो जाता है, जिससे कीमतों को सहारा मिलता है।

यूरो (Euro): $1.1589 पर स्थिर।

जापानी येन (Yen): डॉलर के मुकाबले 0.07% मजबूत होकर 158.59 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा है।

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