Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

Stock Market Live Update:  शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत सुस्त रहने की संभावना है। GIFT निफ्टी फ्यूचर्स से मिले संकेतों के अनुसार, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी का दबाव बना हुआ है।

सुबह 7:07 बजे, GIFT निफ्टी फ्यूचर्स, निफ्टी फ्यूचर्स के मुकाबले 34.4 अंक ऊपर ट्रेड कर रहा था, जो घरेलू शेयर बाजार के लिए सुस्त से लेकर सकारात्मक शुरुआत का संकेत दे रहा है।

पिछले सेशन में, BSE सेंसेक्स 1.67% या 1,247.71 अंक गिरकर 73,580.54 पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी50 383.70 अंक या 1.64% गिरकर 23,063.10 पर बंद हुआ।

इस बीच ग्लोबल संकेत भी कमजोर से मिले-जुले रहे। शुरुआती कारोबार में एशियाई बाजार मिले-जुले रहे।निवेशक ट्रंप-शी की बैठक, अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव, तेल की ऊंची कीमतों और ग्लोबल बॉन्ड की बिकवाली पर करीबी नजर बनाए हुए हैं।

जापान का निक्केई 225 0.48% ऊपर था, जबकि व्यापक टॉपिक्स (Topix) में 0.58% की बढ़त हुई। हालांकि, ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 0.50% गिर गया। चीन और दक्षिण कोरिया के बाजार छुट्टी के कारण बंद रहे।

मिडिल ईस्ट में जारी अनिश्चितता, ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बीच एशियाई शेयर बाजार सप्ताह के आखिरी कारोबारी सत्र में दाखिल हुए। ट्रेजरी यील्ड में लगातार बढ़ोतरी के कारण निवेशक लंबे समय तक ऊंची ब्याज दरों के असर का भी आकलन कर रहे हैं।

ईरान के लिए ‘सीक्रेट हथियार’ बना रहा चीन! रिपोर्ट में हुए खुलासे से अमेरिका में हड़कंप

China Secret Support to Iran: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच चीन एक तरफ तो खुद को शांतिदूत के रूप में पेश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पर्दे के पीछे से ईरान की आर्थिक और सैन्य ताकत बढ़ाने में लगा हुआ है। एक खोजी रिपोर्ट ने इस पूरे मामले से पर्दा उठाया है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन, ईरान के लिए एक खास ‘सीक्रेट हथियार’ भी बना रहा है।

अमेरिकी अखबार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ (WSJ) की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से ईरान के रक्षा मंत्रालय को भेजे जाने वाले ‘डुअल-यूज’ पार्ट्स यानी दोहरे इस्तेमाल वाले घटकों की डिलीवरी में इस साल रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है। ईरानी सीमा शुल्क डेटा, अमेरिकी अधिकारियों और इस गुप्त व्यापार से जुड़े लोगों के हवाले से आई इस रिपोर्ट से कई अहम सवाल खड़े हो रहे हैं। चीन और अमेरिका के शीर्ष नेताओं की मुलाकात के बीच इस खुलासे ने वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।

चीन से क्या-क्या मिल रहा है ईरान को?

‘डुअल-यूज’ पार्ट्स वे सामान होते हैं जिनका उपयोग आम नागरिक उपकरणों के साथ-साथ खतरनाक हथियारों में भी किया जा सकता है। WSJ रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से ईरान भेजे गए सामान में ये प्रमुख चीजें शामिल हैं:

इलेक्ट्रॉनिक्स और जीपीएस ट्रैकिंग उपकरण: जो मिसाइलों की सटीक निशाना लगाने की क्षमता बढ़ाते हैं।

इलेक्ट्रिक मोटर और एयरक्राफ्ट इंजन पार्ट्स: जिनका सीधा इस्तेमाल सैन्य ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम में होता है।

रासायनिक सामग्री: जिसका इस्तेमाल बैलिस्टिक मिसाइल के फ्यूल बनाने में किया जा सकता है।

उपग्रह तस्वीरें: अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि 17 जुलाई के उस हमले से पहले और बाद में ईरान ने चीनी सैटेलाइट इमेजरी का इस्तेमाल किया, जिसमें तीन अमेरिकी सैनिक मारे गए थे।

कार्गो फ्लाइट्स में अचानक उछाल: ‘महान एयर’ का संदिग्ध रोल

फ्लाइट ट्रैकिंग साइट ‘FlightRadar24’ के डेटा के मुताबिक, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित ईरानी एयरलाइन महान एयर ने मार्च के महीने में चीन के बीजिंग, शंघाई और गुआंगझू से तेहरान के लिए हर हफ्ते सिर्फ 4 उड़ानें भरी थीं।

लेकिन अप्रैल के अंत तक यह संख्या बढ़कर 27 उड़ानें प्रति सप्ताह हो गई। सितंबर 2026 के पहले हफ्ते में महान एयर की फ्लाइट्स की संख्या 39 तक पहुंच गई। इन अधिकांश उड़ानों का इस्तेमाल यात्रियों को ले जाने के बजाय गुप्त सैन्य और तकनीकी कार्गो (हथियारों के पुर्जों) की डिलीवरी के लिए किया जा रहा था।

अमेरिकी पाबंदियों को दरकिनार कर खेल कर रहा तेल का ‘मास्टरमाइंड’

अमेरिकी पाबंदियों से पंगु हो चुकी ईरानी अर्थव्यवस्था को चीन संजीवनी दे रहा है। अमेरिकी सांसदों के अनुसार, चीन ईरान के क्रूड ऑयल एक्सपोर्ट का 80% से ज्यादा हिस्सा खुद खरीद रहा है। अमेरिकी वित्तीय पाबंदियों को चकमा देने के लिए चीनी बैंकों और छद्म कंपनियों के नेटवर्क का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे तेहरान तक पैसा आसानी से पहुंच रहा है।

16 सितंबर को बीजिंग में हुई बैठक में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने साफ शब्दों में कहा था कि चीन और ईरान ‘व्यापक रणनीतिक भागीदार’ हैं और चीन ईरान के ‘वैध अधिकारों और हितों’ की रक्षा के लिए सहयोग मजबूत करने को तैयार है।

ट्रंप-जिनपिंग की मीटिंग के बीच अमेरिकी सियासत में भूचाल

वाशिंगटन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के आगमन पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद एयरपोर्ट जाकर उनका स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, एआई सुरक्षा और ताइवान जैसे मुद्दों पर चर्चा होनी है, लेकिन अमेरिकी संसद में ईरान का मुद्दा सबसे ऊपर आ गया है।

सीनेटर एलिसा स्लॉटकिन समेत कई डेमोक्रेट नेताओं ने व्हाइट हाउस को पत्र लिखकर मांग की है कि राष्ट्रपति ट्रंप, शी जिनपिंग के सामने चीन की इस ‘सैन्य मदद’ का मुद्दा सख्ती से उठाएं। सीनेटरों ने आरोप लगाया कि चीनी कंपनियां अमेरिकी सैनिकों की हत्या और ईरान के मिसाइल प्रोग्राम को जिंदा रखने में मदद कर रही हैं।

हालांकि, ट्रंप प्रशासन चीन से सीधे टकराने में थोड़ा हिचकिचा रहा है। ट्रंप पहले कह चुके हैं कि शी जिनपिंग ने उन्हें आश्वासन दिया है कि वे ईरान को सीधे हथियार नहीं देंगे और वे शी पर भरोसा करते हैं।

चीन की सफाई: ‘हमारी छवि खराब करने की कोशिश’

इन गंभीर आरोपों पर चीन के विदेश मंत्रालय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजिंग ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह ‘चीन को बदनाम करने की साजिश’ है। चीन का तर्क है कि वह दोहरे उपयोग वाले सामानों के निर्यात पर सख्त नियम लागू करता है और अमेरिका द्वारा लगाए जाने वाले एकतरफा प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हैं।

तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र में फिर छेड़ा कश्मीर का राग, जानिए भाषण में क्या कहा

तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच का इस्तेमाल करते हुए कश्मीर का मुद्दा उठाया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें उच्च स्तरीय सत्र में दुनिया भर के नेताओं को संबोधित करते हुए एर्दोगन ने दक्षिण एशिया में शांति का जिक्र करते हुए कश्मीर मामले को संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों के तहत सुलझाने की बात कही। हालांकि एर्दोगन का कश्मीर राग कोई नई बात नहीं है।

किसी वैश्विक मंच से तुर्की के राष्ट्राध्यक्ष द्वारा कश्मीर राग अलापे जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। वह इससे पहले भी कई मौकों पर यूएन में इस विषय पर बयानबाजी कर चुके हैं।

पहले जानिए संयुक्त राष्ट्र महासभा में एर्दोगन ने क्या कहा?

संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में मंगलवार को अपने संबोधन के दौरान एर्दोगन ने दक्षिण एशियाई क्षेत्र के मुद्दों पर बात की। एर्दोगन ने कहा कि दक्षिण एशिया में यह महत्वपूर्ण है कि कश्मीर मुद्दे सहित सभी विवादों का समाधान संयुक्त राष्ट्र चार्टर के ढांचे और संबंधित प्रस्तावों के दायरे में रहते हुए बातचीत के माध्यम से किया जाए।

UNGA में एर्दोगन पहले भी कर चुके हैं कश्मीर का जिक्र

संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच से कश्मीर का जिक्र करना राष्ट्रपति एर्दोगन के भाषणों का नियमित हिस्सा रहा है, हालांकि इसमें समय-समय पर बदलाव भी देखे गए हैं। इससे पहले पिछले साल सितंबर में भी यूएनजीए के अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कश्मीर मुद्दे के समाधान का आह्वान किया था। साल 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए अपने भाषण के दौरान एर्दोगन ने जम्मू-कश्मीर का कोई उल्लेख नहीं किया था और इस मुद्दे को छोड़ दिया था। इससे पहले वर्ष 2020 में आम बहस के दौरान दिए गए अपने पहले से रिकॉर्ड किए गए वीडियो संदेश में भी एर्दोगन ने जम्मू-कश्मीर का संदर्भ दिया था।

भारत का सख्त रुख- दूसरों की संप्रभुता का सम्मान करना सीखे तुर्की

वर्ष 2020 में जब एर्दोगन ने संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया था, तब भारत ने इस पर बेहद कड़ी और सख्त आपत्ति दर्ज कराई थी। भारत ने तुर्की के बयानों को पूरी तरह से अस्वीकार्य करार दिया था। भारत ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि तुर्की को दूसरे देशों की संप्रभुता का सम्मान करना सीखना चाहिए और अपनी खुद की नीतियों पर अधिक गहराई से विचार करना चाहिए। भारत हमेशा से यह रुख दोहराता रहा है कि जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और यह पूरी तरह से भारत का आंतरिक मामला है।

भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर को ट्रंप ने दिया बंपर सपोर्ट! ईरान के समुद्री रास्ते को बाईपास करने की बनाई रणनीति

भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप कॉरिडोर को ट्रंप ने दिया बंपर सपोर्ट! ईरान के समुद्री रास्ते को बाईपास करने की बनाई रणनीति

India-Middle East-Europe Corridor: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) को अपना मजबूत समर्थन देने का ऐलान किया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के इतर जीसीसी (GCC) और अरब देशों के नेताओं के साथ आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि पश्चिमी एशिया में जारी युद्ध और व्यापारिक जहाजों पर हो रहे हमलों के बीच मिडिल ईस्ट के ऊर्जा ढांचे को ईरान के नियंत्रण वाले रास्तों और चेकपॉइंट्स से दूर ले जाने की सख्त जरूरत है। इसी रणनीति के तहत उनके प्रशासन ने भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर को बढ़ावा देने का फैसला किया है ताकि तेल और ऊर्जा संसाधनों को पाइपलाइनों या अन्य सुरक्षित माध्यमों से बाहर निकाला जा सके।

व्यापारिक जहाजों पर हमलों के बीच ऊर्जा ढांचे को शिफ्ट करने की जरूरत

एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने बैठक में कहा कि पड़ोसी देशों में व्यापारिक जहाजों पर ईरान द्वारा किए गए आतंकवादी हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मध्य पूर्व के ऊर्जा इन्फ्रास्ट्रक्चर को ईरानी नियंत्रण वाले रास्तों से दूर स्थानांतरित किया जाना चाहिए। ट्रंप ने कहा कि ईरान के आतंकवादी हमलों ने हमें यह दिखाया है कि मध्य पूर्व के ऊर्जा ढांचे को ईरानी चेकपॉइंट्स से दूर ले जाना कितना जरूरी है। यही वजह है कि मेरा प्रशासन भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर और तेल बाहर निकालने के अन्य जरियों, चाहे वह पाइपलाइन हों या कुछ और, का पुरजोर समर्थन करता है।

क्षेत्र को सुरक्षित और समृद्ध बनाने पर जोर

जीसीसी और अरब नेताओं की मौजूदगी में अमेरिकी राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि यह क्षेत्र दशकों पुरानी चुनौतियों से उबरने के बेहद करीब है। उन्होंने बैठक में मौजूद नेताओं को अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी और साझेदार बताया। ट्रंप ने कहा कि एक साथ मिलकर हम उन चुनौतियों पर विजय पाने की दहलीज पर हैं, जिन्होंने दशकों से इस क्षेत्र को परेशान कर रखा है। मध्य पूर्व को अधिक सुरक्षित और समृद्ध बनाने के हमारे प्रयासों को जारी रखने के लिए अमेरिका के कुछ सबसे महान और करीबी दोस्तों, सहयोगियों और साझेदारों के साथ यहां मौजूद होना मेरे लिए सम्मान की बात है।

क्या है भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC)?

साल 2023 में अनावरित किए गए भारत-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) का उद्देश्य भारत, खाड़ी क्षेत्र और यूरोप के बीच व्यापारिक संपर्क को गति देना है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना में मुख्य रूप से दो गलियारे शामिल हैं। पहला ईस्टर्न कॉरिडोर जो भारत को खाड़ी क्षेत्र से जोड़ता है। दूसरा नॉर्दर्न कॉरिडोर जो खाड़ी क्षेत्र को यूरोप से जोड़ता है। इस पूरे आर्थिक गलियारे में एक व्यापक रेलवे और शिप-रेल ट्रांजिट नेटवर्क शामिल होगा, जिसके साथ-साथ सड़क परिवहन के मार्ग भी विकसित किए जाएंगे।

ट्रंप की ईरान को चेतावनी: वित्तीय रूप से अलग-थलग किया, बर्बाद होने का समय दूर नहीं

संयुक्त राष्ट्र महासभा में दिए गए अपने बयानों को दोहराते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को सख्त लहजे में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने ईरान को वित्तीय रूप से अलग-थलग कर दिया है और उम्मीद है कि वे जल्द ही सही कदम उठाएंगे। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा कि ‘एक समय ऐसा आएगा जब बहुत देर हो चुकी होगी, और हमारे पास उन्हें एक राष्ट्र के रूप में जीवित रहने देने का मौका नहीं होगा। मैं ऐसा देखना चाहूंगा और मैं आपको बता सकता हूं कि इस टेबल के आसपास बैठे लोग भी यही देखना चाहेंगे।’

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UNGA में डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, यूक्रेन युद्ध पर जल्द कुछ करूंगा, ईरान पर कड़ा रुख

UNGA में डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा ऐलान, यूक्रेन युद्ध पर जल्द कुछ करूंगा,  ईरान पर कड़ा रुख

donald trump

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के मंच से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपनी ट्रेडमार्क आक्रामक शैली में दुनिया को अपना कड़ा रुख दिखा दिया है। ट्रंप ने कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा। चुनाव के बाद ईरान से डील करेंगे। हमने यह युद्ध लगभग खत्म कर दिया है। ईरान का पूरी तरह से आर्थिक बहिष्कार करें।

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ट्रंप ने कहा कि मैंने 8 युद्ध खत्म करवाए। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में उन देशों को चेतावनी दी जो रूस और ईरान से तेल या ऊर्जा खरीद रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि रूस- यूक्रेन के युद्ध पर कुछ करने वाला हूं। हालांकि ट्रंप ने अपने भाषण में बड़े-बड़े दावे किए लेकिन चुनाव से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति की लोकप्रियता में बड़ी गिरावट आई है।  

यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और तेज़ी से हो रहे AI डेवलपमेंट के खतरों जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा करने के लिए न्यूयॉर्क में UN जनरल असेंबली में दुनिया भर के लगभग 130 नेता इकट्ठा हो रहे हैं। असेंबली में अपने भाषण में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें लगता है कि नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनावों के ठीक बाद अमेरिका ईरान के साथ कोई डील करेगा।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस इवेंट में शामिल नहीं हो रहे हैं और इसके बजाय गुरुवार को वॉशिंगटन में ट्रंप के साथ आमने-सामने बातचीत करेंगे, जिससे दुनिया के बड़े मामलों से UN के किनारे हो जाने का डर और बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए अपनी विदेश नीति और अमेरिका की सैन्य ताकत का उल्लेख किया। ट्रंप ने शांति के क्षेत्र में अपने रिकॉर्ड का जिक्र करते हुए कहा कि कई नेताओं ने शांति की बात की, लेकिन उन्होंने शांति कायम करने के लिए कदम उठाए।

 

ईरान का सीधे तौर पर जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि जब कुछ नेता खतरों को नजरअंदाज कर रहे थे, तब उन्होंने उनका सामना किया। उन्होंने कहा कि जहां दूसरे नेता साहस और ताकत की बात करते रहे, वहीं अमेरिका ने दोनों का प्रदर्शन किया। ट्रंप ने दावा किया कि उनके दृष्टिकोण ने अमेरिका को दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बनाया है।

 

ट्रंप ने अमेरिका के ‘गोल्डन एज’ का किया दावा

 

ट्रंप ने पिछली सरकार से विरासत में मिले दौर को अमेरिका का “डार्क एज” बताते हुए कहा कि उनकी सरकार ने देश को “गोल्डन एज” की ओर बढ़ाया है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका की संपत्ति, ताकत, ऊर्जा और गति से पूरी दुनिया को भी फायदा हो रहा है।

 

हालांकि, ईरान से जुड़े संघर्ष के मामले में व्हाइट हाउस के कई घोषित लक्ष्य अभी तक पूरी तरह हासिल नहीं हुए हैं। इस संघर्ष का आर्थिक असर भी पड़ा है, खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बंद होने के बाद वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ा है।

 

ईरान को लेकर ट्रंप ने रखे दो विकल्प

 

ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर ट्रंप ने कहा कि उनके सामने एक बड़ा फैसला है। उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि क्या ऐसा समझौता हो सकता है, जिससे ईरान दोबारा निर्माण कर सके और पहले से कहीं अधिक मजबूत देश बन सके।

 

ट्रंप ने इसके साथ ही इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान को सैन्य कार्रवाई के जरिए पूरी तरह खत्म करने की संभावना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से ईरान के पास भविष्य में लोगों और देशों को नुकसान पहुंचाने का अवसर नहीं रहेगा।

 

हालांकि, ट्रंप ने कहा कि उन्हें विश्वास है कि अमेरिका के मध्यावधि चुनावों के बाद ईरान के साथ जल्द समझौता हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि ईरान यह देखना चाहता है कि अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में उनका प्रदर्शन कैसा रहता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह इस चुनाव में उम्मीदवार नहीं होंगे और पहले ही चुनाव लड़कर भारी जीत हासिल कर चुके हैं।

 

पुतिन से बोले ट्रंप- यूक्रेन युद्ध खत्म करें

 

संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पहुंचने पर ट्रंप ने अमेरिका की प्रगति का जिक्र किया। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए संदेश पूछे जाने पर ट्रंप ने संक्षेप में कहा कि उन्हें “युद्ध खत्म करना चाहिए”।

 

ट्रंप के निशाने पर फिर संयुक्त राष्ट्र

राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रंप संयुक्त राष्ट्र और महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की कार्यप्रणाली की आलोचना करते रहे हैं। पिछले वर्ष संयुक्त राष्ट्र में उनके संबोधन के दौरान भी कई शिकायतें सामने आई थीं। इनमें संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय की एस्केलेटर के कुछ समय के लिए बंद होने और टेलीप्रॉम्प्टर में आई तकनीकी समस्या को लेकर की गई टिप्पणियां शामिल थीं।

 

संयुक्त राष्ट्र की आलोचना के बावजूद, अमेरिका ने पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र के बजट में करीब 72.5 करोड़ डॉलर का भुगतान किया। इससे संगठन को कुछ वित्तीय दबाव से राहत मिली और उसके मतदान अधिकारों पर संभावित असर का जोखिम टला।

 

ट्रंप के इस वर्ष के संबोधन में संयुक्त राष्ट्र की आलोचना के साथ-साथ उनकी सरकार की विदेश नीति की उपलब्धियों को सामने रखने पर भी जोर रहा। इसमें ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान और मध्य पूर्व में कूटनीतिक पहलों का विशेष उल्लेख शामिल है।

तो प्रदूषण के पैसे देने पड़ते हैं 

ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने दुनिया के जहाजों पर कार्बन टैक्स लगाने की योजना को रोकने के लिए दखल दिया। यह योजना संयुक्त राष्ट्र की संस्था इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ला रही थी। इसके तहत दुनियाभर की शिपिंग कंपनियों को अपने जहाजों से होने वाले प्रदूषण के लिए टैक्स देना पड़ता। ट्रम्प ने कहा कि यह बहुत महंगा टैक्स होता, इसलिए अमेरिका को इसे रोकने के लिए आगे आना पड़ा। अगर यह योजना लागू हो जाती तो यह पहली बार होता जब पूरे शिपिंग उद्योग को अपने प्रदूषण के लिए पैसे देने पड़ते।

पनामा कार्गो शिप ने चीनी बोट को टक्कर मारी, VIDEO:नाव में पानी भरा, आग लगी; मछलियों के बॉक्स समुद्र में गिरे

सिंगापुर के पास पनामा के झंडे वाले कार्गो शिप ने मछली पकड़ने वाली चीनी नाव को टक्कर मार दी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर अब वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि ‘फर्स्ट मार्गॉक्स’ नाम का मालवाहक जहाज पीछे से मछली पकड़ने वाली ‘लुकिंग युआनयु 108’ नाम की नाव की तरफ तेजी से आता है और उसके एक हिस्से से टकरा जाता है। टक्कर के बाद छोटी नाव घूम गई और उसका डेक पानी से भर गया। नाव पर मौजूद क्रू के सदस्य रेलिंग पकड़कर खुद को संभालते नजर आए। हादसा 17 सितंबर शाम करीब 5 बजे हुआ। दोनों जहाज सुबह सिंगापुर के पास एक ही पोर्ट से रवाना हुए थे और सिंगापुर स्ट्रेट के पश्चिम की ओर जाने वाले एक ही चैनल में चल रहे थे। हादसे से जुड़ी तस्वीरें देखें… कार्गो शिप ओवरटेक करना चाहता था पनामा कार्गो शिप दरअसल मछली पकड़ने वाली नाव को ओवरटेक कर रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, उसकी रफ्तार करीब 3 नॉट ज्यादा थी। टक्कर के बाद भी मालवाहक जहाज करीब 2 घंटे तक 10 नॉट की रफ्तार से पश्चिम की ओर चलता रहा। इसके बाद वह रुका। हादसे में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। मछली पकड़ने वाली नाव का AIS सिग्नल टक्कर के बाद भी मिलता रहा। इससे पता चलता है कि नाव हादसे के बाद भी चलती रही और बाद में पास के एक बर्थ तक पहुंच गई। तीसरे जहाज की वजह से टक्कर हो सकती है मैरीटाइम एनालिस्ट साल मर्कोग्लियानो ने सोशल मीडिया पर कहा कि संभव है कि पनामा कार्गो शिप के रास्ते में एक तीसरा बल्क कैरियर आ गया हो। इससे छोटी मछली पकड़ने वाली नाव दो बड़े जहाजों के बीच फंस गई हो। उन्होंने यह भी कहा कि किसी जहाज की टक्कर के वीडियो में सिर्फ एक तरफ का दृश्य मिलता है, इसलिए केवल वीडियो देखकर पूरी स्थिति समझना मुश्किल होता है। पनामा मैरीटाइम अथॉरिटी ने हादसे की जांच शुरू कर दी है। सिंगापुर की मैरीटाइम एंड पोर्ट अथॉरिटी की ओर से अभी सार्वजनिक बयान नहीं आया है। मलक्का स्ट्रेट दुनिया के व्यस्त समुद्री रास्तों में शामिल हादसा सिंगापुर स्ट्रेट में हुआ, यह मलक्का स्ट्रेट के करीब है। सिंगापुर और मलक्का स्ट्रेट दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल हैं। ये एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट के बीच समुद्री कारोबार के लिए बेहद अहम रास्ते हैं। दुनिया के करीब 40% वैश्विक व्यापार का सामान इन समुद्री रास्तों से होकर गुजरता है। इसके अलावा, समुद्र के रास्ते होने वाले दुनिया के करीब एक-तिहाई तेल परिवहन के लिए भी ये रूट अहम हैं। रोजाना बड़ी संख्या में कंटेनर शिप, तेल टैंकर और दूसरे मालवाहक जहाज यहां से गुजरते हैं। —————— यह खबर भी पढ़ें… AI की गलती से अमेरिका-चीन में जंग हो जाती: चैटबॉट ने चीनी जहाज में परमाणु उपकरण होने की फेक खबर दी, हमले को तैयार थी अमेरिकी सेना अमेरिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट की गलती से चीन से जंग के करीब पहुंच गया था। ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना को एक खुफिया रिपोर्ट मिली। इसमें दावा किया गया था कि मिडिल ईस्ट में मौजूद चीन का एक जहाज परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े उपकरण लेकर जा रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

पाकिस्तानी मंत्री बोले- पेट्रोल 1000 रुपए तक पहुंच सकता है:कमी हुई तो कीमतें बढ़ेंगी; अब तक 50% महंगा हुआ, 389 रुपए लीटर कीमत

पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 1000 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो सकता है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने रविवार को कहा कि अगर देश में पेट्रोल की कमी हुई तो कीमत और बढ़ सकती है। मंत्री के मुताबिक, पाकिस्तान में पेट्रोल अब तक करीब 50% महंगा हो चुका है। फिलहाल पेट्रोल 389.14 रुपए प्रति लीटर और डीजल 424.04 रुपए प्रति लीटर है। मिडिल ईस्ट में लड़ाई बढ़ने से दुनिया में कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की सप्लाई को लेकर भी चिंता बढ़ी है। इसका असर पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत पर पड़ रहा है। बाइक और छोटे वाहनों को सब्सिडी दे रही सरकार बढ़ती कीमतों के बीच पाकिस्तान सरकार ने बाइक, रिक्शा, चिंगची और 800 सीसी तक की कारों के लिए पेट्रोल पर सब्सिडी योजना शुरू की है। इसमें पेट्रोल पर 100 रुपए प्रति लीटर तक की सब्सिडी दी जा रही है। हर पात्र व्यक्ति को महीने में 4 टोकन मिलेंगे। हर टोकन पर 500 रुपए की सब्सिडी मिलेगी। योजना में अब 1 जनवरी 2006 से रजिस्टर्ड मोटरसाइकिलें भी शामिल हैं। सरकार के मुताबिक, योजना में 17.5 लाख से ज्यादा लोगों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। करीब 15 लाख टोकन जारी हो चुके हैं और 6.80 लाख से ज्यादा टोकन इस्तेमाल किए जा चुके हैं। अक्टूबर तक पाकिस्तान में मिल सकता है घरेलू तेल पाकिस्तान सरकार देश में नए तेल भंडार खोजने पर काम कर रही है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक के मुताबिक, तेल के कुओं पर काम शुरू हो चुका है और अक्टूबर तक कच्चा तेल मिलने की उम्मीद है। सरकार ने तेल और गैस की खोज के लिए नए ब्लॉक भी कंपनियों को दिए हैं। इसका मकसद देश में घरेलू उत्पादन बढ़ाना और विदेशों से तेल खरीदने पर खर्च कम करना है। अगर नए कुओं से व्यावसायिक स्तर पर तेल निकलता है, तो पाकिस्तान को अपनी जरूरत का कुछ हिस्सा देश में ही मिल सकेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने पर देश पर पड़ने वाला दबाव भी कम हो सकता है। खबर अपडेट हो रही है…

Fuel Prices: तेल की कीमतों में बंपर उछाल! बांग्लादेश में पेट्रोल-डीजल और केरोसिन सब महंगे, सरकार ने इतना बढ़ा दिया दाम

Fuel Prices: बिजली और गैस की किल्लत से पहले से जूझ रहे बांग्लादेश के लोगों और कारोबारियों की मुसीबतें और बढ़ गई हैं। बांग्लादेश सरकार ने तेल की कीमतों में 17.4 प्रतिशत तक की भारी बढ़ोतरी कर दी है। दुनिया भर में कच्चे तेल के बढ़ते दामों और मिडिल ईस्ट के तनाव की वजह से शिपिंग का खर्च बढ़ने से सरकार को काफी नुकसान हो रहा था। इसी घाटे को कम करने के लिए सरकार ने यह कदम उठाया है।

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक सोमवार से लागू हुई इन नई दरों से बांग्लादेश की आयात पर टिकी अर्थव्यवस्था में सामान की ढुलाई और उत्पादन का खर्च बढ़ जाएगा। इससे देश में महंगाई और बढ़ेगी। यह झटका ऐसे समय में लगा है जब देश के गारमेंट एक्सपोर्ट सेक्टर समेत प्रमुख उद्योग-धंधे पहले से ही बड़ी एनर्जी क्राइसिस का सामना कर रहे हैं।

जानिए क्या हैं पेट्रोल, डीजल और केरोसिन के नए दाम

बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्रालय के मुताबिक नई दरों के लागू होने के बाद डीजल की कीमत में सबसे ज्यादा 17.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अब डीजल 115 टका प्रति लीटर से बढ़कर 135 टका प्रति लीटर हो गया है। इसी तरह पेट्रोल की कीमत 140 टका से बढ़कर 160 टका प्रति लीटर पहुंच गई है। ऑक्टेन गैसोलिन के दाम 145 टका से बढ़कर 165 टका प्रति लीटर हो गए हैं, जबकि केरोसिन का दाम 135 टका से बढ़ाकर 155 टका प्रति लीटर कर दिया गया है।

इससे पहले सरकार ने इसी साल अप्रैल और जून के महीनों में भी तेल की दरें बढ़ाई थीं ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़े दामों की भरपाई की जा सके। बांग्लादेश टका की कीमत का हिसाब लगाने के लिए आप ये भी जान लीजिए कि अभी एक रुपये करीब 1.28 बांग्लादेशी टका के बराबर है।

सरकार ने क्यों बढ़ाए तेल के दाम?

ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि मार्च 2026 के बाद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ईंधन की कीमतें दोगुनी से भी ज्यादा हो चुकी हैं। इसके अलावा इलाके में चल रही उथल-पुथल की वजह से फ्रेट चार्ज भी काफी बढ़ गया है। मंत्रालय के मुताबिक सरकारी कंपनी बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन को मार्च से अगस्त के बीच 228.76 अरब टका (लगभग 1.9 अरब डॉलर) का भारी घाटा हुआ है। सरकार का मानना है कि कीमतों में इस ताजा बढ़ोतरी से सालाना घाटे में करीब 100 अरब टका की कमी आएगी। इसके साथ ही देश का विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा और पड़ोसी देशों में तेल की तस्करी पर भी रोक लगेगी, जहां कीमतें बांग्लादेश से ज्यादा हैं।

गैस और बिजली की सप्लाई पर असर

मंत्रालय ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) पर दी जाने वाली भारी सब्सिडी का भी जिक्र किया। सरकार ने कहा कि क्षेत्र में जारी ऊर्जा संकट और महंगे आयात के बावजूद उसने देश में बिजली और गैस की सप्लाई चालू रखने के लिए लगातार सब्सिडी दी है।

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Nifty Outlook: 21 सितंबर को निफ्टी की चाल कैसी रहेगी, कौन से लेवल अहम रहेंगे? एक्सपर्ट्स से जानिए

Nifty Outlook: शेयर बाजार ने पिछले हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन रिकवरी की। हालांकि, कारोबार में उतार-चढ़ाव काफी रहा। इसके बावजूद निफ्टी 75 अंक चढ़कर बंद हुआ। हफ्ते की शुरुआत बाजार ने अच्छी तेजी के साथ की थी। लेकिन ऊपर जाते ही बिकवाली शुरू हो गई। इससे निफ्टी फिर नीचे आ गया।

इसके बाद निचले स्तरों पर खरीदारी लौटी। इससे निफ्टी 23,000 के अहम स्तर के ऊपर बना रहा। हालांकि, पूरे हफ्ते की तस्वीर अभी भी कमजोर रही। निफ्टी लगातार छठे हफ्ते गिरावट में बंद हुआ। इस हफ्ते इंडेक्स 0.22% नीचे रहा।

HDFC Bank और UltraTech में तेजी

निफ्टी के शेयरों में HDFC Bank और UltraTech Cement सबसे ज्यादा चढ़े। दूसरी ओर TCS और TMPV सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयर रहे।

सेक्टरों की बात करें तो Cement और Metal शेयरों में खरीदारी दिखी। IT शेयरों पर दबाव बना रहा। बड़े शेयरों के मुकाबले मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। Nifty Midcap 100 में 1.24% और Nifty Smallcap 100 में 1.74% की तेजी रही।

कच्चे तेल से बाजार को मिली राहत

पिछले तीन कारोबारी सत्रों में बाजार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से राहत मिली है। ब्रेंट क्रूड अपने ऊपरी स्तरों से नीचे आया है। सऊदी अरब की पाइपलाइनों की मरम्मत का काम आगे बढ़ा है। इसके अलावा तेल निर्यात के दूसरे रास्ते भी मिले हैं। इससे सप्लाई लंबे समय तक बाधित रहने की चिंता कुछ कम हुई है।

अमेरिकी फेड के ब्याज दर के फैसले के बाद अब बाजार का ध्यान दूसरी चीजों पर है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नरमी आई है। कच्चा तेल भी ऊपरी स्तरों से नीचे आया है। घरेलू बाजार में लिक्विडिटी भी मजबूत है। ऐसे में बाजार को थोड़ी राहत मिल सकती है। हालांकि, अभी इसे पूरी तरह तेजी का संकेत नहीं माना जा सकता।

अभी भी कई बड़े जोखिम

बाजार के सामने चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। ब्रेंट क्रूड अभी भी 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है। रुपया भी करीब 96 रुपये प्रति डॉलर के आसपास है। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव भी बड़ा जोखिम है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री पर भी बाजार की नजर रहेगी।

अगले हफ्ते घरेलू स्तर पर सितंबर का फ्लैश PMI डेटा आएगा। अगस्त के इंफ्रास्ट्रक्चर आउटपुट के आंकड़े भी आएंगे। इसके अलावा विदेशी मुद्रा भंडार और बैंक क्रेडिट ग्रोथ के आंकड़े भी बाजार को दिशा दे सकते हैं। अमेरिका से इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन और कंज्यूमर सेंटीमेंट के आंकड़े आएंगे। चीन के लोन प्राइम रेट पर भी बाजार की नजर रहेगी।

ईरान युद्ध से बढ़ी चिंता

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव बाजार के लिए बड़ी चिंता बना हुआ है। अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने नागरिकों को मिडिल ईस्ट की यात्रा पर फिर से विचार करने को कहा है।

अमेरिका ने चेतावनी दी है कि ईरान युद्ध तेजी से बढ़ सकता है। वहीं, ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अपना सख्त रुख कायम रखा है। यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने भी सऊदी अरब की राजधानी रियाद में मिसाइल और ड्रोन हमले का दावा किया है।

हूती विद्रोहियों के मुताबिक, उन्होंने रियाद में कुछ अहम ठिकानों को निशाना बनाया। इससे कुछ घंटे पहले शहर के मुख्य एयरपोर्ट के पास आग और धुएं का गुबार देखा गया था। हालांकि, स्थानीय अधिकारियों ने इसकी वजह की पुष्टि नहीं की है।

23,500 के ऊपर जाना आसान नहीं

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, निफ्टी में आगे तेजी आती है तो 23,500 से 23,600 का स्तर बड़ी चुनौती होगा। वहीं, गिरावट आने पर 23,100 से 23,000 के बीच सपोर्ट मिल सकता है।

SBI Securities के सुदीप शाह भी 23,150 के आसपास के स्तर को अहम मानते हैं। उनके मुताबिक, निफ्टी अगर लगातार 23,150 के नीचे जाता है तो बिकवाली बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में इंडेक्स 23,000 तक जा सकता है। ऊपर की तरफ 23,500 से 23,520 का स्तर बड़ी रुकावट है। अगर निफ्टी 23,520 के ऊपर टिक गया तो शॉर्ट कवरिंग हो सकती है। इससे इंडेक्स 23,650 तक जा सकता है।

23,550 तक जा सकता है निफ्टी

LKP Securities के रुपक डे का कहना है कि कच्चा तेल अगर 96 डॉलर प्रति बैरल के नीचे रहता है तो बाजार में तेजी टिक सकती है। उनके मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,000 से 23,100 का स्तर अहम सपोर्ट है। मौजूदा रिकवरी जारी रहती है तो इंडेक्स 23,550 तक जा सकता है।

Angel One के हितेश राठी के मुताबिक, 23,100 से 23,000 का जोन अहम सपोर्ट है। वहीं, 23,250 से 23,200 के आसपास भी सहारा मिल सकता है। ऊपर की तरफ 23,450 से 23,500 का स्तर रेजिस्टेंस है। इसके बाद 23,600 अहम रहेगा। खास बात यह है कि 23,600 पहले सपोर्ट था। अब यह रेजिस्टेंस की तरह काम कर सकता है।

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AI की गलती से अमेरिका-चीन में जंग हो जाती:चैटबॉट ने चीनी जहाज में परमाणु उपकरण होने की फेक खबर दी, हमले को तैयार थी अमेरिकी सेना

अमेरिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) चैटबॉट की गलती से चीन से जंग के करीब पहुंच गया था। ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी सेना को एक खुफिया रिपोर्ट मिली। इसमें दावा किया गया था कि मिडिल ईस्ट में मौजूद चीन का एक जहाज परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़े उपकरण लेकर जा रहा है। रिपोर्ट को सही मानकर अमेरिकी सेना ने चीनी जहाज को रोकने और उस पर कब्जे की तैयारी शुरू कर दी। हथियारबंद सैनिक जहाज पर चढ़ने के लिए तैयार थे, जबकि अमेरिकी सैन्य विमान भी हवा में भेजे जा चुके थे। कार्रवाई से ठीक पहले AI की गलती पकड़ी गई CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू करने से ठीक पहले खुफिया रिपोर्ट की दोबारा जांच की। इसी दौरान पता चला कि रिपोर्ट तैयार करने में AI चैटबॉट की मदद ली गई थी और चैटबॉट ने जहाज में मौजूद सामान की गलत पहचान की थी। दरअसल, अमेरिकी सेना के स्पेशल ऑपरेशंस कमांड के एक अधिकारी ने चीनी जहाज के सामान की जानकारी AI चैटबॉट में डाली थी। चैटबॉट ने अलग-अलग जगहों से मिली जानकारी को मिलाकर गलत निष्कर्ष निकाला। उसने बताया कि जहाज में परमाणु हथियार बनाने से जुड़े उपकरण रखे हैं। AI से मिली जानकारी से खुफिया रिपोर्ट बनाई AI ने जो जानकारी दी थी, उसे एक खुफिया रिपोर्ट में लिख दिया गया। यह रिपोर्ट अमेरिकी सेना के अधिकारियों तक पहुंची। अधिकारियों ने इसी रिपोर्ट के आधार पर चीनी जहाज के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी। मामले से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने रिपोर्ट को पूरी तरह गलत बताया और कहा कि इस गलती से युद्ध लगभग शुरू हो गया था। यह अभी पता नहीं चला है कि अमेरिकी अधिकारी ने किस AI का इस्तेमाल किया था। CNN के मुताबिक, यह कोई आम चैटबॉट या अमेरिकी सरकार का अपना AI टूल हो सकता है। यह भी साफ नहीं हुआ कि चीनी जहाज में असल में कौन-सा सामान था। अमेरिकी सेना में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब अमेरिकी सेना में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। सेना AI की मदद से खुफिया जानकारी समझने, टारगेट चुनने और हथियारों व सैनिकों की तैनाती जैसे काम कर रही है। अमेरिका का मानना है कि AI युद्ध के दौरान फैसले जल्दी लेने में मदद कर सकता है। साथ ही उसे डर है कि अगर चीन सैन्य AI में आगे निकल गया तो अमेरिका को नुकसान हो सकता है। इसी वजह से रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जनवरी में AI के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाने की योजना शुरू की थी। इसके तहत करीब 30 लाख सैन्य और असैन्य कर्मचारियों को AI टूल उपलब्ध कराने की तैयारी है। खबर अपडेट हो रही है…