Stocks to Buy: इन 6 हॉस्पिटल शेयरों पर बुलिश हुआ जेफरीज, मिल सकता है 46% तक का रिटर्न, क्या आप करेंगे निवेश

Stocks to Buy:  रेगुलेटरी रिस्क की आशंका से गुरुवार को हॉस्पिटल शेयरों पर भारी बिकवाली का दबाव देखने को मिला। Apollo Hospitals, Global Health और Fortis Healthcare के शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। वहीं दूसरी और मिडिल ईस्ट में फिर से बढ़े तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की ऊंची कीमतें, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, विदेशी फंड की लगातार निकासी और रुपये की कमज़ोरी ने बाजार में लगातार आठवें हफ्ते गिरावट देखने को मिली। बाजार में गिरावट के बीच ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने 6 हॉस्पिटल शेयरों पर बुलिश नजर अपनाया है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि आगे इन शेयरों में 27% से 46% का उछाल देखने को मिल सकता है।

आइए डालते है उन सभी स्टॉक पर है एक नजर, जिन्हें जेफरीज ने अपने रडार पर रखा है।

Apollo Hospitals

जेफरीज ने अपोलो हॉस्पिटल्स के लिए Buy रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹10,350 तय किया है। जेफरीज का मानना है कि आगे स्टॉक 27% की बढ़त दिखा सकता है। जेफरीज ने स्टॉक के लिए FY26E-29E EBITDA CAGR 20% रहने का अनुमान है।

Dr Agarwal’s Healthcare

वहीं जेफरीज ने डॉ. अग्रवाल हेल्थकेयर के लिए ‘Buy’ रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹600 तय किया है। जेफरीज का मानना है कि आगे स्टॉक 25% की बढ़त दिखा सकता है। ब्रोकरेज फर्म ने इसके साथ ही, इसके FY26E-29E EBITDA CAGR 23% रहने का अनुमान है।

Fortis Healthcare

खरीदारी की रेटिंग के साथ जेफरीज ने इस शेयर में बुलिश राय दी है और इसके लिए टारगेट प्राइस 1125 रुपये तय किया है। जेफरीज को उम्मीद है कि शेयर आगे 46 फीसदी का उछाल दिखा सकता है। जेफरीज ने इसके लिए इसका FY26E-29E EBITDA CAGR 17% रहने का अनुमान है।

Max Healthcare

जेफरीज ने मैक्स हेल्थकेयर के लिए ‘Buy’ रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹1,260 तय किया है। जेफरीज का मानना है कि आगे स्टॉक 36% की बढ़त दिखा सकता है। ब्रोकरेज फर्म ने इसके साथ ही, इसके FY26E-29E EBITDA CAGR 18% रहने का अनुमान है।

Manipal Health Enterprises

जेफरीज ने मणिपाल हेल्थ एंटरप्राइजेज के लिए ‘Buy’ रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹870 तय किया है। जेफरीज का मानना है कि आगे स्टॉक 23% की बढ़त दिखा सकता है। ब्रोकरेज फर्म ने इसके साथ ही, इसके FY26E-29E EBITDA CAGR 18% रहने का अनुमान है।

Medanta

जेफरीज ने मेदांता के लिए ‘Buy’ रेटिंग दी है और इसका टारगेट प्राइस ₹1,660 तय किया है। जेफरीज का मानना है कि आगे स्टॉक 22% की बढ़त दिखा सकता है। ब्रोकरेज फर्म ने इसके साथ ही, इसके EBITDA CAGR के 22% रहने का अनुमान है।

इस हफ्ते बाजार में लगातार 8वें हफ्ते गिरावट रही जारी, रुपया 50 पैसे टूटा, अब इंडेक्स पर क्या हो रणनीति

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

Nike Layoff: चीन में 26% गिरी सेल्स तो अब छंटनी की योजना, लेकिन भारत में खोलेगी कैंपस

Nike Layoff: स्पोर्ट्सवियर कंपनी नाइक ने पूरे साल के रेवेन्यू में एकाएक उम्मीद से तेज गिरावट का अनुमान लगाया। इसके बाद कंपनी ने अधिक नौकरियों में कटौती और अपने वैश्विक कारोबारी डिवीजनों में बदलाव की योजना का ऐलान कर दिया। इस प्रकार सीईओ एलियट हिल (Elliott Hill) की अगुवाई में कंपनी अपने कारोबारी ढांचे में बदलाव को और तेज कर रही है। गुरुवार को जारी कमजोर अनुमानों से यह संकेत मिला कि नाइक की दिक्कतें कम से कम अगले कई तिमाहियों तक बनी रह सकती हैं, खासतौर से चीन में जहां कॉन्स्टैंट करेंसी के आधार पर पहली तिमाही में सेल्स 26% गिर गई।

इस वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही जून-अगस्त 2026 में नाइक की बिक्री लगभग 4% घटकर $1121 करोड़ रह गई। हालांकि वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स लागत कम होने से कंपनी का ग्रॉस मार्जिन 60 बेसिस पॉइंट बढ़कर 42.8% हो गया। नतीजे आने पर इसके शेयर एक्सटेंडेड ट्रेडिंग में 8.5% गिर गए। एक अहम बात ये भी है कि ब्लू-चिप कंपनियों के इंडेक्स में लगभग 18 साल तक रहने के बाद एसएंडपी डाऊ जोन्स ने तिमाही रीबैलेंसिंग के दौरान नाइक को सितंबर में एसएंडपी 100 से निकाल दिया।

क्या है Nike की दिक्कतें

एलियट हिल के कार्यकाल के पहले दो वर्षों में नाइक ग्रोथ को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रही है। इसके लिए वह रनिंग जैसे प्रमुख खेलों पर अधिक ध्यान दे रही है और थोक में सामान बेचने वालों के साथ अपने संबंधों को दोबारा मजबूत कर रही है। हालांकि एनालिस्ट्स का कहना है कि नाइक की दिक्कतों का एक बड़ा कारण पर्याप्त संख्या में नए और आकर्षक प्रोडक्ट नहीं लॉन्च कर पाना है। इसके चलते कंपनी को प्रमोशन और डिस्काउंट का सहारा अधिक लेना पड़ा है। कंपनी के सीईओ ने पोस्ट-अर्निंग्स कॉल में कहा कि नाइक परफॉरमेंस बिजनेस अभी इतना बड़ा नहीं है कि नाइक स्पोर्ट्सवियर, जॉर्डन ब्रांड और ग्रेटर चाइना में दिख रहे दबाव की भरपाई कर सके। उन्होंने कहा कि इन्हें मजबूत होने में समय लगेगा।

अब क्या है नाइक का प्लान

नाइक ने अपने ऑपरेटिंग मॉडल में बदलाव का ऐलान किया है। इसके तहत नौकरियों में कटौती की जाएगी। साथ ही अब चार की बजाय बिजनेस को तीन एरिया- अमेरिका, एशिया पैसेफिक और ग्रेटर चाइना, और EMEA (यूरोप, मिडिल ईस्ट एंड अफ्रीका) में बांटा जाएगा। नाइक की योजना भारत में एक नया कैंपस खोलने की भी है।

छंटनी की बात करें तो अभी कंपनी ने यह नहीं तय किया है, कि कितनी नौकरियां कम की जाएंगी। इसके बारे में एंप्लॉयीज को अगले साल 2027 में जानकारी दी जाएगी। इससे पहले भी इस साल की शुरुआत में कंपनी छंटनी का ऐलान कर चुकी है, जिससे कंपनी को वित्त वर्ष 2031 तक करीब $250 करोड़ के बचत की उम्मीद है। इसमें से अधिकतर बचत वित्त वर्ष 2029 और 2030 में हासिल होने की उम्मीद है।

Oracle Layoffs: IT कंपनी ने बढ़ाया छंटनी का बजट, अब और 70 करोड़ डॉलर करेगी खर्च

अमेरिका से 9000 सैनिक, तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर मिडिल ईस्ट रवाना:ईरान पर हमले की तैयारी, ट्रम्प ने चुनाव के बाद हमले की बात कही थी

अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ा रहा है। करीब 9 हजार अतिरिक्त सैनिकों के साथ अमेरिका अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर थियोडोर रूजवेल्ट भी क्षेत्र में भेज रहा है। अक्टूबर के आखिर तक मिडिल ईस्ट में तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात हो सकते हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान पर नए हमलों की चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर हमले की बात की थी। इसके पहले उन्होंने ईरान के सीजफायर प्लान को भी ठुकरा दिया था। क्षेत्र में दो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ही बचे थे अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अक्टूबर के अंत तक मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 3 एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात हो सकते हैं। फिलहाल USS जॉर्ज डब्ल्यू बुश और USS जॉर्ज वॉशिंगटन पहले से वहां मौजूद हैं। अगस्त में USS अब्राहम लिंकन की वापसी के बाद क्षेत्र में दो अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर बचे थे, अब थियोडोर रूजवेल्ट के पहुंचने पर इनकी संख्या फिर तीन हो सकती है। इसके अलावा USS बॉक्सर समेत कई अन्य युद्धपोत भी क्षेत्र में तैनात हैं। नई तैनाती के बाद पश्चिम एशिया में अमेरिकी नौसेना और मरीन कर्मियों की संख्या 20 हजार से ज्यादा हो सकती है। ट्रम्प ने ईरान का सीजफायर प्रस्ताव ठुकरा दिया था टाइम मैगजीन को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने बताया कि उन्होंने ईरान के हालिया सीजफायर प्रस्ताव को ठुकरा दिया। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की पेशकश भी की थी, लेकिन ट्रम्प के मुताबिक यह प्रस्ताव अमेरिका के लिए काफी नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि 3 नवंबर के चुनाव के बाद ईरान पर बमबारी बढ़ाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रम्प ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। ईरान ने जंग खत्म करने को 7 दिन का प्रस्ताव रखा था ईरान ने जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा था। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की बात शामिल थी। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, ईरान समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए तैयार है। इसके बदले वह विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों और पैसों पर लगी रोक हटाने और अपना तेल बेचने की अनुमति चाहता है। उन्होंने कहा कि ये मांगें जून में अस्थायी सीजफायर के लिए हुए समझौता ज्ञापन (MoU) जैसी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से जवाबी हमलों के बाद वह समझौता टूट गया था। ——————— ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- फ्लाईदुबई को-पायलट का ईरान कनेक्शन हो सकता है: ऐसा हुआ तो कड़ी कार्रवाई होगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि इजराइल जा रहे फ्लाईदुबई विमान के को-पायलट का ईरान से संबंध हो सकता है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

भारत-यूएई के बीच समुद्र में तेल पाइपलाइन की तैयारी:होर्मुज संकट के बीच विकल्प तलाश रहा भारत, अरब सागर के नीचे गुजरात-महाराष्ट्र तक बिछेगी लाइन

होर्मुज संकट के बीच भारत ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत भारत और यूएई के बीच समुद्र के नीचे तेल और गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यूएई के विदेश व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जेउदी से मुलाकात के बाद इसकी पुष्टि की। सरकार ने ओमान-यूएई से भारत तक समुद्र के नीचे पाइपलाइन परियोजना को प्राथमिकता में रखा है। MEIDP (मिडिल ईस्ट टू इंडिया डीप-वॉटर पाइपलाइन) के तहत पाइपलाइन ओमान और यूएई के तट से शुरू होकर अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए गुजरात और महाराष्ट्र के तट तक पहुंच सकती है। पहले सिर्फ गैस पाइपलाइन की थी योजना जून में सरकार ने इस परियोजना को निजी प्रोजेक्ट बताया था। शुरुआत में इसमें सिर्फ गैस पाइपलाइन की योजना थी, लेकिन अब समुद्र के रास्ते कच्चा तेल लाने की संभावना पर भी तकनीकी अध्ययन शुरू हो गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देश पर सरकारी कंपनियां परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। इसमें गहरे समुद्र में पाइपलाइन बिछाने की तकनीक, लागत और सुरक्षा समेत दूसरे पहलुओं की जांच की जाएगी। क्यों पड़ी इस पाइपलाइन की जरूरत? भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल आयात करता है। होर्मुज में तनाव के बीच भारत ऊर्जा सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्ते तैयार करना चाहता है। देश में आने वाली आधी से ज्यादा LPG और LNG भी कतर और यूएई से इसी समुद्री रास्ते से जहाजों के जरिए आती है। सबसे बड़ी चुनौती समुद्र की गहराई इस परियोजना में सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती समुद्र में करीब 3,450 मीटर की गहराई तक पाइपलाइन बिछाना है। इतनी गहराई में पानी का दबाव काफी ज्यादा होता है। पाइपलाइन को सुरक्षित रखना, समुद्र तल की चट्टानों और खाइयों के बीच रास्ता बनाना और भविष्य में इसकी मरम्मत करना भी बड़ी तकनीकी चुनौतियां होंगी। सीधे सप्लाई से खर्च और जहाजों पर निर्भरता कम होगी सीधे ओमान, यूएई, कतर और सऊदी अरब के गैस और तेल भंडार से आपूर्ति मिलने पर समुद्री जहाजों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे तेल और गैस के परिवहन और बीमा पर होने वाला खर्च घट सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक तेल और गैस की कीमत बढ़ने पर भारत पर पड़ने वाला दबाव भी कम हो सकता है। 3 किमी पाइपलाइन का परीक्षण परियोजना विकसित करने वाली संस्था साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज ने करीब ₹25 करोड़ की लागत से लगभग 3 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाकर परीक्षण किया है। सभी शर्तें पूरी होने के बाद पूरी परियोजना के निर्माण में करीब 5 से 7 साल लगने का अनुमान है। ———————————- यह खबर भी पढ़ें…. ट्रम्प ने ईरान का जंग खत्म करने का प्रस्ताव ठुकराया:बोले- वे मुश्किल में, तभी होर्मुज खोलना चाहते; ईरान बोला- बातचीत से ही निकलेगा हल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान का युद्ध खत्म करने और होर्मुज खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान मुश्किल में है, इसलिए वह तुरंत होर्मुज खोलना चाहता है। पूरी खबर पढ़ें…

भारत-यूएई के बीच समुद्र में तेल पाइपलाइन की तैयारी:होर्मुज संकट के बीच विकल्प तलाश रहा भारत, अरब सागर के नीचे गुजरात-महाराष्ट्र तक बिछेगी लाइन

होर्मुज संकट के बीच भारत ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए नई रणनीति पर काम कर रहा है। इसके तहत भारत और यूएई के बीच समुद्र के नीचे तेल और गैस पाइपलाइन बिछाने की तैयारी है। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने यूएई के विदेश व्यापार मंत्री थानी बिन अहमद अल जेउदी से मुलाकात के बाद इसकी पुष्टि की। सरकार ने ओमान-यूएई से भारत तक समुद्र के नीचे पाइपलाइन परियोजना को प्राथमिकता में रखा है। MEIDP (मिडिल ईस्ट टू इंडिया डीप-वॉटर पाइपलाइन) के तहत पाइपलाइन ओमान और यूएई के तट से शुरू होकर अरब सागर के नीचे से गुजरते हुए गुजरात और महाराष्ट्र के तट तक पहुंच सकती है। पहले सिर्फ गैस पाइपलाइन की थी योजना जून में सरकार ने इस परियोजना को निजी प्रोजेक्ट बताया था। शुरुआत में इसमें सिर्फ गैस पाइपलाइन की योजना थी, लेकिन अब समुद्र के रास्ते कच्चा तेल लाने की संभावना पर भी तकनीकी अध्ययन शुरू हो गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देश पर सरकारी कंपनियां परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रही हैं। इसमें गहरे समुद्र में पाइपलाइन बिछाने की तकनीक, लागत और सुरक्षा समेत दूसरे पहलुओं की जांच की जाएगी। क्यों पड़ी इस पाइपलाइन की जरूरत? भारत अपनी जरूरत का करीब 88% कच्चा तेल आयात करता है। होर्मुज में तनाव के बीच भारत ऊर्जा सप्लाई के लिए वैकल्पिक रास्ते तैयार करना चाहता है। देश में आने वाली आधी से ज्यादा LPG और LNG भी कतर और यूएई से इसी समुद्री रास्ते से जहाजों के जरिए आती है। सबसे बड़ी चुनौती समुद्र की गहराई इस परियोजना में सबसे बड़ी इंजीनियरिंग चुनौती समुद्र में करीब 3,450 मीटर की गहराई तक पाइपलाइन बिछाना है। इतनी गहराई में पानी का दबाव काफी ज्यादा होता है। पाइपलाइन को सुरक्षित रखना, समुद्र तल की चट्टानों और खाइयों के बीच रास्ता बनाना और भविष्य में इसकी मरम्मत करना भी बड़ी तकनीकी चुनौतियां होंगी। सीधे सप्लाई से खर्च और जहाजों पर निर्भरता कम होगी सीधे ओमान, यूएई, कतर और सऊदी अरब के गैस और तेल भंडार से आपूर्ति मिलने पर समुद्री जहाजों पर निर्भरता कम हो सकती है। इससे तेल और गैस के परिवहन और बीमा पर होने वाला खर्च घट सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में अचानक तेल और गैस की कीमत बढ़ने पर भारत पर पड़ने वाला दबाव भी कम हो सकता है। 3 किमी पाइपलाइन का परीक्षण परियोजना विकसित करने वाली संस्था साउथ एशिया गैस एंटरप्राइज ने करीब ₹25 करोड़ की लागत से लगभग 3 किलोमीटर पाइपलाइन बिछाकर परीक्षण किया है। सभी शर्तें पूरी होने के बाद पूरी परियोजना के निर्माण में करीब 5 से 7 साल लगने का अनुमान है। ———————————- यह खबर भी पढ़ें…. ट्रम्प ने ईरान का जंग खत्म करने का प्रस्ताव ठुकराया:बोले- वे मुश्किल में, तभी होर्मुज खोलना चाहते; ईरान बोला- बातचीत से ही निकलेगा हल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान का युद्ध खत्म करने और होर्मुज खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है। ट्रम्प ने कहा कि ईरान मुश्किल में है, इसलिए वह तुरंत होर्मुज खोलना चाहता है। पूरी खबर पढ़ें…

मिड-एयर हाइजैक के बाद सऊदी में हुई लैंडिंग, डर के बीच गूंजा ‘Od Avinu Chai’, जानें इसका मतलब

FlyDubai Flight Emergency Landing: दुबई से इजराइल के तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ 1073 में हवा में अचानक कुछ ऐसा हुआ, जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में हड़कंप मच गया। कॉकपिट में पायलटों के बीच विवाद के बाद हाइजैक का डिस्ट्रेस सिग्नल ट्रिगर हो गया, जिसके चलते प्लेन को तुरंत सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंडिंग करानी पड़ी।

विमान के सुरक्षित जमीन पर उतरते ही यात्रियों ने राहत की सांस ली। इस दौरान पूरा केबिन ‘Od Avinu Chai’ गा रहा था जिसका मतलब यानी हमारा पिता अभी जीवित है जो एक हिब्रू प्रार्थना गीत है।

कॉकपिट में पायलटों की भिड़ंत और गलत सिग्नल का खौफ

इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उड़ते विमान के कॉकपिट में ही पायलटों के बीच आपस में तीखी बहस और हाथापाई हो गई थी। इसी घटनाक्रम के दौरान विमान से पहले सामान्य इमरजेंसी कोड 7700 भेजा गया, लेकिन इसके तुरंत बाद डिस्ट्रेस सिग्नल 7500 में बदल गया। यह कोड विमान के गैर-कानूनी कब्जे या ‘हाईजैकिंग’ को दर्शाता है।

हाइजैक कोड मिलते ही इजराइली वायुसेना एक्शन में आ गई और फाइटर जेट्स को हवा में तैनात कर दिया गया। हालांकि, बाद में सिग्नल को फिर से 7700 में स्विच किया गया और हाइजैकिंग की आशंका को खारिज कर दिया गया।

सऊदी अरब में लैंडिंग के बाद गूंजा ‘Od Avinu Chai’

तमाम आशंकाओं के बीच विमान को उत्तर-पश्चिमी सऊदी अरब के तबूक एयरपोर्ट की तरफ डाइवर्ट किया गया, जहां प्लेन सुरक्षित लैंड हो गया। फ्लाईदुबई के प्रवक्ता ने बयान जारी कर पुष्टि की कि विमान में सवार सभी यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।

लैंडिंग के तुरंत बाद सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ। इस वीडियो में खौफ के साये से बाहर निकले यात्री खुशी से तालियां बजाते और मशहूर हिब्रू प्रार्थना गीत ‘Od Avinu Chai’ गाकर ईश्वर का शुक्रिया अदा करते नजर आ रहे हैं।

नेतन्याहू ने की आपातकालीन समीक्षा

इस घटना की गंभीरता को देखते हुए इज़राइली प्रधानमंत्री कार्यालय और रक्षा मंत्रालय तुरंत सक्रिय हो गए। इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्थिति की समीक्षा के लिए आपातकालीन बैठक की और पूरे घटनाक्रम पर सीधे नजर रखी।

पीएमओ ने बयान जारी कर कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और सभी इज़राइली यात्रियों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इजराइल की परिवहन मंत्री मिरियम रेगेव ने सुरक्षा स्थिति का आकलन किया, जबकि फ्लाईदुबई एयरलाइन ने मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

ईरान में एक डॉलर की कीमत 25 लाख रियाल के बराबर पहुंची! युद्ध के असर के बाद ये हाल आया सामने

पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध का सबसे गंभीर और विनाशकारी असर ईरान की इकॉनमी पर देखने को मिल रहा है। मंगलवार को ईरानी मुद्रा रियाल में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। तेहरान के मुद्रा बाजार में एक अमेरिकी डॉलर की कीमत 25 लाख (2.5 मिलियन) रियाल के आंकड़े को पार कर गई। यह अब तक के इतिहास में ईरानी रियाल का सबसे निचला स्तर है। यह साफ इशारा कर रहा है कि युद्ध ने ईरान के आर्थिक संतुलन को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया है। पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक ईरानी मुद्रा में यह बड़ी गिरावट सिर्फ 27 दिनों के भीतर आई है। इससे पहले 2 सितंबर को रियाल ने 22 लाख (2.2 मिलियन) प्रति डॉलर का निचला स्तर छुआ था। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से ही ईरानी मुद्रा लगातार नए निचले रिकॉर्ड बना रही है।

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने के लिए मध्यस्थता वार्ता में तेजी

एक तरफ जहां ईरान की इकॉनमी चरमरा रही है, वहीं दूसरी तरफ कूटनीतिक मोर्चे पर हलचल तेज हो गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को फिर से खोलने के उद्देश्य से संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत अब और अधिक गंभीर मोड़ में पहुंच गई है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के बाद और पाकिस्तानी व कतर के मध्यस्थों से मुलाकात के बाद ईरानी मीडिया को बताया कि मौजूदा समय में पूरा ध्यान सिर्फ युद्ध के मुख्य केंद्र यानी स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर फोकस्ड है। कतर के मध्यस्थ जल्द ही अमेरिकी पक्ष से इस मुद्दे पर दोबारा चर्चा करेंगे। अमेरिका का अंतिम रुख सामने आने के बाद तेहरान में इस पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। अमेरिकी ने भी इस बात की पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच लड़ाई रोकने और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुजे को खोलने के लिए एक समझौते पर काम किया जा रहा है।

हालांकि, यह मध्यस्थता प्रयास ऐसे समय में जारी हैं जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था जिसमें ईरान ने अमेरिकी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाने, ईरानी संपत्ति को बहाल करने और तेल बिक्री पर प्रतिबंध हटाने की शर्त पर 7 दिनों में स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को खोलने की बात कही थी।

रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अमेरिकी जनता को दिया सीधा संदेश

ईरान की इकॉनमी पर बढ़ते दबाव के बीच ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के मुख्य प्रवक्ता जनरल हुसैन मोहेबी ने मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सीधे अमेरिकी नागरिकों से अपील की। उन्होंने एक पत्र पढ़कर सुनाया और अमेरिकी जनता से आह्वान किया कि वे अपनी सरकार पर दबाव बनाएं ताकि अमेरिका मिडिल ईस्ट में जारी इस युद्ध को समाप्त करे। जनरल मोहेबी ने कहा कि इस युद्ध को खत्म करने का एकमात्र रास्ता यह है कि वाशिंगटन अपनी हार स्वीकार करे और ये इलाका छोड़कर चला जाए। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह ईरान के परमाणु कार्यक्रम का बहाना बनाकर देश की संपत्ति को लूटने और उसे फिर से एक उपनिवेश बनाने की कोशिश कर रहा है।

अमेरिका में मिड टर्म इलेक्शन और आर्थिक संकट

ईरान का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब अमेरिका में 3 नवंबर को महत्वपूर्ण मिडटर्म इलेक्शन होने जा रहे हैं। युद्ध की वजह से अमेरिका में भी ईंधन और गैसोलीन की कीमतें काफी बढ़ गई हैं। इसका सीधा असर वहां की राजनीति और लोगों पर पड़ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके वरिष्ठ सलाहकारों का मानना है कि ईरान की इकॉनमी अब इस लंबे संघर्ष को झेलने में सक्षम नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि नई पाबंदियों और अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से ईरान का तेल व्यापार रुक गया है जिससे तेहरान एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है। अमेरिका का दावा है कि तेल की कमाई रोकने से ईरान को उन संसाधनों के इस्तेमाल से रोका जा रहा है, जिनका प्रयोग वह सैन्य गतिविधियों के लिए करता है।

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Silver Price Today: दूसरे दिन चांदी और भी हुई सस्ती, खरीदारी से पहले जानें आज 10 प्रमुख शहरों के ताजा रेट

Silver Price Today: हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन भी चांदी की कीमतों में भारी दबाव देखने को मिला है। ऐसे में अगर आप चांदी खरीदने की सोच रहे है तो यह आपके लिए अच्छा मौका है। खबर लिखे जाने तक MCX पर चांदी का वायदा भाव 2597 रुपये गिरकर 2,24,855 रुपये प्रति किलो हो गया। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,27,442 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। बुलियंस के मुताबिक चांदी की कीमत 2,26,240 रुपये किलो हो गई। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 61.13 रुपये प्रति औंस हो गई। जबकि गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी 2,40,000 रुपये प्रति किलो पर है।

इंटरनेशनल मार्केट में कीमतें कितनी गिरीं?

इंटरनेशनल मार्केट यानी कॉमेक्स पर सोने और चांदी दोनों की कीमतों में भारी गिरावट आई है। कॉमेक्स पर मौजूद डेटा के मुताबिक, खबर लिखे जाने तक सोने में 0.05% की गिरावट आई है और कीमत $4166.40 प्रति औंस पर पहुंच गई है। जबकि चांदी की कीमत में 1.13% की गिरावट आई है और ऐसे समय में कीमत $61.020 प्रति औंस पर ट्रेड करती दिखी।

दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों में आज चांदी का रेट

देश के प्रमुख शहरों में गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी की कीमतें करीब 2,40,000-2,45,000 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं। कुछ शहरों में स्थानीय बाजार और टैक्स के कारण मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,40,000
मुंबई₹2,40,000
कोलकाता₹2,40,000
चेन्नई₹2,44,800
लखनऊ₹2,40,000
पटना₹2,40,000
जयपुर₹2,40,000
अहमदाबाद₹2,40,000
पुणे₹2,40,000
बेंगलुरु₹2,40,000
हैदराबाद₹2,40,000
भोपाल₹2,40,000
चंडीगढ़₹2,40,000
नोएडा₹2,40,000
गुरुग्राम₹2,40,000

चांदी में गिरावट की क्या है वजहें

तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ट्रेजरी यील्ड ने महंगाई की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे मेटल के लिए मुश्किलें और बढ़ गई हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ दिनों में सोने-चांदी में तेज गिरावट देखी गई।

ऊंची ब्याज दरों से सोने का आकर्षण कम हो जाता है क्योंकि निवेशक यील्ड देने वाली संपत्तियों में निवेश करना पसंद करते हैं। बता दें कि सोने से कोई ब्याज नहीं मिलता है, इसलिए जब ट्रेजरी यील्ड बढ़ती है, तो निवेशक सोने से दूर हो जाते हैं, जिससे इसकी कीमत पर असर पड़ता है। फेड ने इस महीने की शुरुआत में बेंचमार्क दरों में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की थी और संकेत दिया था कि आने वाले महीनों में कम से कम एक और बढ़ोतरी की संभावना है।

पिछले दिन क्या रही चांदी की कीमत

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मजबूत डॉलर के बीच वैश्विक बाजारों में भारी बिकवाली के कारण कीमतों में गिरावट आई। दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोमवार को चांदी की कीमत 5,000 रुपये टूटकर 2.32 लाख रुपये प्रति किलोग्राम (सभी टैक्स समेत) रह गई, जबकि शुक्रवार को यह 2.37 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई थी। विदेशी बाजारों में, हाजिर चांदी की कीमत 2.96 डॉलर या 4.6 प्रतिशत टूटकर 61.34 डॉलर प्रति औंस रह गई।

भारतीय निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?

भारतीय निवेशकों के लिए, सोने की ग्लोबल कीमतें पूरी तस्वीर का सिर्फ़ एक हिस्सा हैं। घरेलू कीमतें रुपये-डॉलर एक्सचेंज रेट, इंपोर्ट से जुड़ी लागत और स्थानीय मांग से भी प्रभावित होती हैं।

इसलिए, सोने की ग्लोबल कीमतों में बड़ी गिरावट का मतलब यह ज़रूरी नहीं है कि भारत में भी सोने की कीमतों में उसी प्रतिशत से गिरावट आएगी।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

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Gift Nifty Indicator: मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के सपाट या सतर्क रुख के साथ खुलने की संभावना है। पिछले सेशन में हुई भारी बिकवाली के बाद GIFT निफ्टी में बहुत कम हलचल दिख रही है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी, FII की लगातार बिकवाली, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं और कमजोर ग्लोबल इक्विटी मार्केट का सेंटीमेंट पर असर पड़ रहा है।

सुबह 7:45 बजे GIFT निफ्टी 5 अंक या 0.02 फीसदी गिरकर 22,819 पर ट्रेड कर रहा था। सोमवार को भारतीय इक्विटी मार्केट में भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,124.02 अंक या 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 पर आ गया, जबकि निफ्टी 360.25 अंक या 1.56 प्रतिशत गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ।

भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए बाहरी माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड की कीमत $106 प्रति बैरल से ऊपर चली गई क्योंकि US-ईरान शांति प्रयासों में जल्द किसी समाधान की उम्मीद कम हो गई है। वहीं, एशियाई इक्विटी मार्केट में गिरावट आई और US स्टॉक-इंडेक्स फ्यूचर्स भी नीचे ट्रेड कर रहे थे। वॉल स्ट्रीट भी रात भर भारी गिरावट के साथ बंद हुआ क्योंकि तेल की ऊंची कीमतों और ट्रेजरी यील्ड ने महंगाई और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर की चाल को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली एक बड़ी बाधा बनी रही। FII लगातार तीसरे सेशन में नेट सेलर रहे और 28 सितंबर को 5,300 करोड़ रुपये से अधिक की इक्विटी बेची। DII ने इस आउटफ्लो को संतुलित करते हुए लगभग 5,189 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी।

तेल और बॉन्ड यील्ड के दबाव से एशियाई बाजारों में गिरावट

मंगलवार को एशियाई इक्विटी मार्केट में गिरावट देखी गई क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों ने ट्रेजरी यील्ड को कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स 0.5 प्रतिशत गिर गया, जिसमें जापानी और दक्षिण कोरियाई शेयरों में गिरावट देखी गई। हांगकांग का हैंग सेंग 0.4 प्रतिशत गिर गया, जबकि शंघाई कंपोजिट में बहुत कम बदलाव हुआ। ऑस्ट्रेलियाई इक्विटी मार्केट भी मोटे तौर पर सपाट रहा। US इक्विटी फ्यूचर्स में सुस्ती रही; Nasdaq 100 फ्यूचर्स 0.3 प्रतिशत और S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 प्रतिशत नीचे रहे।

ब्रेंट क्रूड $106 के पार पहुंचा

मंगलवार को लगातार दूसरे सेशन में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। मिडिल ईस्ट में सप्लाई में रुकावट की चिंताएं, उस क्षेत्र से क्रूड एक्सपोर्ट में सुधार के संकेतों पर भारी पड़ीं। ब्रेंट क्रूड 1.6 प्रतिशत बढ़कर $106.93 प्रति बैरल हो गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1.3 प्रतिशत बढ़कर $93.80 पर पहुंच गया।

US-ईरान विवाद में जल्द ही किसी डिप्लोमैटिक समाधान की उम्मीद कम हो गई है। एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि बातचीत को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के ज़रिए सप्लाई में संभावित रुकावट की चिंताएं बनी हुई हैं।

इंडेक्स पर क्या हो रणनीति

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल रिसर्च VP सचिन गुप्ता ने कहा, “तुरंत सपोर्ट 72,300–72,500 पर है, जबकि 72,900–73,000 मुख्य रेजिस्टेंस ज़ोन के तौर पर काम कर सकता है। ब्रॉडर ट्रेडिंग रेंज 72,300–73,000 है, और कुल मिलाकर रुख साइडवेज से लेकर मंदी (बेयरिश) वाला है। शॉर्ट-टर्म स्ट्रक्चर में कुछ स्थिरता लाने के लिए 73,000 के ऊपर लगातार रिकवरी की ज़रूरत होगी। कुल मिलाकर, इंडेक्स साइडवेज से लेकर मंदी वाला बना हुआ है, और जब तक मज़बूत रिबाउंड नहीं दिखता, ट्रेडर्स को सावधान रहना चाहिए। 72,900–73,000 के ऊपर लगातार बढ़त कुछ राहत दे सकती है, जबकि 72,300 के नीचे जाने पर गिरावट का दौर और बढ़ सकता है।”

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा, “भारतीय इक्विटी मार्केट पर दबाव बने रहने की उम्मीद है क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और U.S.-ईरान संघर्ष को लेकर लगातार अनिश्चितता मार्केट के सेंटीमेंट पर असर डाल रही है। U.S. प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि U.S. इस संघर्ष में ‘बहुत जल्द’ जीत हासिल करेगा, जबकि अधिकारी संघर्ष को खत्म करने के लिए मध्यस्थों से बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, बातचीत को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के ज़रिए संभावित सप्लाई में रुकावट की चिंताएं बनी हुई हैं।”

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Silver Price Today: चांदी ₹6000 हुई सस्ती, खरीदारी से पहले जानें 10 प्रमुख शहरों के भाव

Silver Price Today: US-Iran बातचीत के रुकने और तेल की कीमतें बढ़ने से फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाने की उम्मीदें मजबूत हुई हैं, जिससे चांदी की कीमतों में गिरावट आई है। ट्रेडर्स US में रोज़गार और महंगाई के आने वाले आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं और साथ ही मिडिल ईस्ट में संभावित सैन्य तनाव पर भी नजर रखे हुए हैं।

फेड अधिकारियों के सख़्त बयानों से US डॉलर मजबूत हुआ है, जबकि बिना रिटर्न (ब्याज) वाली चांदी की मांग कम हुई है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी का वायदा भाव शुरुआती कारोबार में 2.53% घटकर यानी 6000 रुपये गिरावट के साथ 2,28,758 रुपये प्रति किलो हो गया। जबकि पिछले कारोबारी सत्र में चांदी 2,34,696 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई थी। बुलियस के मुताबिक चांदी की कीमत बढ़कर 2,28,780 रुपये किलो हो गई। जबकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में 62.37 रुपये प्रति औंस हो गई।

दिल्ली के सर्राफा बाजार में चांदी की कीमत 2.37 लाख रुपये प्रति किलो (सभी टैक्स सहित) है।पिछले सप्ताह में चांदी की कीमतों में 10000 रुपये यानी 4 फीसदी की गिरावट आई थी। जबकि गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी 5000 रुपये लुढ़क कर 2,40,000 रुपये प्रति किलो पर है।

दिल्ली-मुंबई समेत प्रमुख शहरों में आज चांदी का रेट

देश के प्रमुख शहरों में गुडरिटर्न्स के मुताबिक चांदी की कीमतें करीब 2,40,000-2,45,000 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास बनी हुई हैं। कुछ शहरों में स्थानीय बाजार और टैक्स के कारण मामूली अंतर देखने को मिल सकता है।

शहर1 किलो चांदी का भाव
दिल्ली₹2,40,000
मुंबई₹2,40,000
कोलकाता₹2,40,000
चेन्नई₹2,45,000
लखनऊ₹2,40,000
पटना₹2,40,000
जयपुर₹2,40,000
अहमदाबाद₹2,40,000
पुणे₹2,40,000
बेंगलुरु₹2,40,000
हैदराबाद₹2,40,000
भोपाल₹2,40,000
चंडीगढ़₹2,40,000
नोएडा₹2,40,000
गुरुग्राम₹2,40,000

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।