मुंबई-गुरुग्राम की चमक छोड़ भोपाल लौटे कारोबारी, आखिर ऐसा क्या मिला कि वापस जाने का मन नहीं?

गुरुग्राम और मुंबई जैसे महानगरों में करीब 17 साल बिताने के बाद कारोबारी और संस्थापक करण कुकरेजा ने अपने शहर भोपाल लौटने का फैसला किया। उनका कहना है कि इस बदलाव ने उनकी जिंदगी का नजरिया ही बदल दिया। जहां बड़े शहरों में करियर की रफ्तार के साथ ट्रैफिक, लंबा सफर और भागदौड़ रोजमर्रा का हिस्सा बन जाते हैं, वहीं भोपाल में उन्हें काम के साथ सुकून भी मिल रहा है।

कुकरेजा के मुताबिक, छोटे शहर में लौटने का सबसे बड़ा फायदा समय और जीवनशैली में महसूस होता है। कम दूरी, कम यात्रा और अपने शहर का परिचित माहौल उनकी जिंदगी को ज्यादा आरामदायक बना रहा है। खास बात यह है कि उनका मानना है कि अब छोटे शहरों में भी काम और कारोबार के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। ऐसे में क्या करियर के लिए हमेशा महानगर में रहना जरूरी है? कुकरेजा की कहानी इस सोच पर विचार करने को मजबूर करती है।

15-20 मिनट में सफर, समय की बड़ी बचत

कुकरेजा ने भोपाल की जिंदगी का जिक्र करते हुए बताया कि शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचने में अक्सर सिर्फ 15 से 20 मिनट लग जाते हैं। महानगरों में जहां लोग घंटों ट्रैफिक में फंसे रहते हैं, वहीं भोपाल में कम दूरी और अपेक्षाकृत कम यातायात उनकी दिनचर्या को काफी आरामदायक बनाता है। उन्होंने अपने काम की एक झलक भी साझा की, जिसमें बालकनी, बारिश और लैपटॉप के साथ उनका कार्यस्थल नजर आया। उनके मुताबिक, छोटे शहर में काम करने का मतलब यह नहीं है कि आपको अच्छी पेशेवर जिंदगी से समझौता करना पड़ेगा।

अब छोटे शहरों में भी बन रहे नए मौके

कुकरेजा का मानना है कि आज के समय में छोटे शहर सिर्फ रहने की जगह नहीं रह गए हैं। दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में भी कारोबार और काम के नए अवसर तेजी से सामने आ रहे हैं।

उन्होंने महानगरों में पहले से स्थापित लोगों से अपने गृह नगरों के बारे में दोबारा सोचने की अपील की। उनके अनुसार, छोटे शहरों में काम करने का तरीका भले ही अलग हो, लेकिन यहां भी बहुत कुछ नया शुरू किया जा सकता है।

‘करियर और सुकून में से एक चुनना जरूरी नहीं’

कुकरेजा की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि उन्होंने महानगर छोड़ने के बाद करियर को खत्म होते नहीं देखा। इसके उलट, उन्हें लगता है कि छोटे शहर में रहते हुए भी नए काम और कारोबार खड़े किए जा सकते हैं। उनका संदेश है कि अगर किसी ने महानगर में अपनी जिंदगी व्यवस्थित कर ली है, तो एक बार यह जरूर सोचना चाहिए कि क्या वही काम अपने शहर से भी किया जा सकता है। उनके मुताबिक, अपने शहर लौटने पर समय, जिंदगी की रफ्तार और काम के बीच बेहतर संतुलन मिल सकता है।

भोपाल की जिंदगी ने लोगों को भी सोचने पर मजबूर किया

कुकरेजा के अनुभव पर इंटरनेट यूजर्स की भी प्रतिक्रिया आई। कई लोगों ने माना कि दूसरे और तीसरे स्तर के शहर बेहतर जीवनशैली दे सकते हैं। एक यूजर ने कहा कि छोटे शहरों में जीवन की गुणवत्ता वास्तव में बेहतर हो सकती है। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि हर सफल करियर के लिए महानगर में रहना जरूरी नहीं है। कुकरेजा की कहानी इसी बदलती सोच की ओर इशारा करती है, जहां लोग अब बड़ी नौकरी और बड़े शहर के बजाय अपने समय, सुकून और बेहतर जिंदगी को भी उतनी ही अहमियत देने लगे हैं।

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Divya Mittal: कौन हैं दिव्या मित्तल जिन्होंने 13 साल करके छोड़ दी IAS की नौकरी और दिया इस्तीफा?

उत्तर प्रदेश की 2013 बैच की आईएएस दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (आईएएस) के पद पर उन्होंने 13 सालों तक काम किया। वहीं सोशल मीडिया पर एक लंबे-चौड़े पोस्ट के जरिए उन्होंने इस बात की जानकारी दी है। अपने पोस्ट में दिव्या मित्तल ने लिखा, “आज मैंने 13 साल की इस यादगार यात्रा को अपनी इच्छा से खत्म करते हुए IAS से इस्तीफा दे दिया है।” वहीं इस पोस्ट के बाद से सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई कि कौन है दिव्या मित्तल। दिव्या ने आईएएस ऑफिसर बनने के लिए लंदन से वापस भारत आई थी। आइए जानते हैं कौन हैं कौन है दिव्या मित्तल

कौन है दिव्या मित्तल

दिव्या मित्तल ने अपनी शुरुआती पढ़ाई दिल्ली से की है। वहीं 12वीं के बाद IIT दिल्ली में 2001 से 2005 के बीच बीटेक की डिग्री पूरी की। इसके बाद उन्होंने CAT परीक्षा पास की और IIM बेंगलुरु में MBA में प्रवेश लिया। 2005-07 के दौरान पढ़ाई पूरी होने के बाद दिव्या ने लंदन में नौकरी मिल गई। लेकिन लंदन में कुछ समय काम करने के बाद भारत लौटने का फैसला किया। इसके बाद उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पहले प्रयास में UPSC पास कर IPS सेवा हासिल की और इसके अगले प्रयास में ऑल इंडिया रैंक 68 हासिल करते हुए IAS के लिए चयनित हुईं।

देश के लिए कुछ करना था

सोशल मीडिया पर किए इमोशनल पोस्ट में दिव्या ने कहा, “आज मैंने 13 साल की इस यादगार यात्रा को अपनी इच्छा से खत्म करते हुए IAS से इस्तीफा दे दिया है। एक साधारण परिवार में पली-बढ़ी और एक अच्छे व सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात मेहनत करके IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ाई की और इसके बाद लंदन में नौकरी भी मिल गई। लेकिन सब कुछ हासिल करने के बाद भी मन में कुछ कमी महसूस होती थी। अपने देश से दूर रहना हमेशा खलता था।”

‘मेरी पढ़ाई, मेरा आत्मविश्वास और दुनिया में कहीं भी अपने दम पर आगे बढ़ने की ताकत, सब इसी देश की देन थी। मुझे लगा कि इस मिट्टी का कर्ज चुकाना चाहिए। मैं चाहती थी कि जिस भारत का सपना मैंने देखा है, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। इसी सोच के साथ मैं वापस भारत आई और IAS अधिकारी बनने का मौका मिला।”

हर जगह से काफी कुछ सीखने को मिला

पोस्ट में आगे कहा, “इस दौरान मुझे बहुत कुछ करने और सीखने का मौका मिला। देवरिया ने मुझे सिखाया कि सही बात के साथ खड़ा होना कोई विकल्प नहीं, बल्कि हमारी जिम्मेदारी है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई सच नहीं होता, यह सिर्फ हमारी सोच हो सकती है। मां विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर यह समझ आया कि असली ताकत किसी पद से नहीं, बल्कि उनकी कृपा और लोगों के भरोसे से मिलती है। मेरी सबसे बड़ी सीख यह रही कि अपने लिए देखे गए सपने तो पूरे हो चुके थे, अब बारी अपने लोगों के सपनों को पूरा करने की थी। इस जीवन में सबसे ज्यादा खुशी तब मिली, जब किसी परिवार को पहली बार जमीन का अधिकार मिला, किसी दिव्यांग व्यक्ति को सम्मान के साथ जीने का मौका मिला या किसी किसान के खेत तक पानी पहुंचा। लोगों के संघर्ष में उनके साथ चलते हुए मैंने जाना कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान होता है और उसकी गरिमा का सम्मान करना ही असली न्याय है।”

मूर्ख थी जो सोचती थी

पोस्ट में आगे कहा, “मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूं। सच यह है कि सबसे ज्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज और भी बढ़ता गया। लोगों ने मेरी खुशी में मुझसे भी ज्यादा खुश हुए। जब मैं खुद थकी या परेशान होती थी, तब भी उन्होंने मुझ पर पूरा भरोसा बनाए रखा। इसी भरोसे ने मुझे आगे बढ़ते रहने की ताकत दी। मुझे इतना प्यार, सम्मान और अपनापन मिला कि मेरी जिंदगी पूरी तरह भर गई। इस सफर में मेरे साथ काम करने वाले साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बड़ा योगदान रहा, जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया और मिलकर काम किया।”

 

नम आंखों से दे रही इस्तीफा

दिव्या ने पोस्ट के आखिर में कहा, “आज दिल में आभार है और आंखें नम हैं। बस एक तस्वीर बार-बार आंखों के सामने आ रही है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वह बुजुर्ग मां, जिसने अपने गांव में पहली बार पानी पहुंचते देखा था। उन्होंने कुछ नहीं कहा, बस कांपते हाथों से मेरे सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। आज मेरा पद जरूर छूट गया है, लेकिन उनका वह प्यार भरा स्पर्श मैं जिंदगी भर नहीं भूल पाऊंगी। और इस देश की मिट्टी ने जो सपना मुझे दिया है, वह भी हमेशा मेरे साथ रहेगा।”

Nepal Flood : फिर बढ़ा भोटेकोशी नदी का जलस्तर, मंडराया बाढ़ का खतरा, नेपाल बाढ़ की बड़ी बातें

Nepal Flood : फिर बढ़ा भोटेकोशी नदी का जलस्तर, मंडराया बाढ़ का खतरा, नेपाल बाढ़ की बड़ी बातें

नेपाल में विनाशकारी फ्लैश फ्लड के कुछ दिनों बाद एक बार फिर भोटेकोशी नदी का जलस्तर बढ़ने से प्रशासन की चिंता बढ़ गई है। रविवार को नदी का पानी बढ़ने के बाद नेपाली अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित जिलों में तैनात खोज और बचाव दलों को सतर्क रहने की सलाह दी है। हिमालयी सीमा क्षेत्र से दक्षिण की ओर बहने वाली भोटेकोशी नदी बुधवार को आई भीषण अचानक बाढ़ के दौरान भारी मात्रा में पानी लेकर मध्य नेपाल की ओर पहुंची थी। इस बाढ़ ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई थी।

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नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) ने बयान जारी कर कहा कि बाढ़ प्रभावित भोटेकोशी नदी का जलस्तर कुछ बढ़ा है और सभी संबंधित लोगों को एहतियाती कदम उठाने चाहिए।

 

नेपाल बाढ़ की बड़ी बातें

 

734 लोगों की मौत: नेपाल में फ्लैश फ्लड से मरने वालों की संख्या बढ़कर 734 हो गई है। वहीं करीब 2,500 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं।

 

टनल में 100 से ज्यादा लोग फंसे: हाइड्रोपावर परियोजनाओं में काम करने वाले 100 से अधिक कर्मचारी अब भी सुरंगों में फंसे हुए हैं। बचाव अभियान में मदद के लिए भारत और चीन ने विशेषज्ञ रेस्क्यू टीमें भेजी हैं।

 

अरबों डॉलर का आएगा खर्च : नेपाल सरकार को आपदा के बाद पुनर्निर्माण और राहत कार्यों पर अरबों डॉलर खर्च होने का अनुमान है। इसके लिए नेपाल अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आर्थिक मदद मांग रहा है।

 

भारत में ग्लेशियरों की निगरानी बढ़ी : आपदा को ग्लेशियर के ढहने से जोड़कर देखे जाने के बाद उत्तराखंड में हिमालयी ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी बढ़ा दी गई है।

 

दुनिया से मिल रही मदद : अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, संयुक्त राष्ट्र, यूरोपीय संघ और IFRC ने नेपाल के लिए लाखों डॉलर की मानवीय सहायता का ऐलान किया है। चीन ने भी नेपाल को मदद की पेशकश की है।

यूक्रेन- घरों के बीच छिपे हथियार डिपो पर रूसी हमला:गोला-बारूद, बारूदी सुरंगें और ड्रोन फटे, 37 की मौत, 130 घरों को नुकसान

रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव के पास शनिवार को एक हथियार डिपो पर ड्रोन हमला किया। हमले के बाद डिपो में रखे गोले, बारूदी सुरंगें और ड्रोन फटने लगे। धमाकों से आसपास के घरों और दूसरी इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटना में कम से कम 37 लोगों की मौत हुई है, जबकि 130 घरों को नुकसान पहुंचा है। शुक्रवार देर रात हुए इस हमले के बाद शनिवार को भी घटनास्थल पर राहत और बचाव का काम जारी रहा। धमाकों में 42 लोग घायल हुए हैं, जिनमें चार बच्चे भी शामिल हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने कहा कि हथियारों का यह भंडार रिहायशी इलाके के इतने करीब नहीं होना चाहिए था। हादसे से जुड़ी 3 फोटोज कीव के पास मिला गांव में था हथियार डिपो रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी सेना ने कीव के पश्चिम में स्थित मिला गांव में एक हथियार डिपो को निशाना बनाया था। रूस के मुताबिक, यहां FP-1 और FP-2 लंबी दूरी तक उड़ान भरने वाले ड्रोन के पुर्जे और उन्हें लॉन्च करने वाले बूस्टर रखे गए थे। धमाकों से गांव के करीब 130 घर तबाह हो गए। 45 साल के स्थानीय निवासी ल्यूबोव पावलेंको का घर हथियार डिपो से करीब 200 मीटर दूर है। उन्होंने अपने घर का नुकसान दिखाते हुए बताया कि पूरी बाहरी दीवारों पर दरारें पड़ गई हैं और खिड़कियों के आसपास भी दरारें हैं। जेलेंस्की बोले- हथियार डिपो यहां नहीं होना चाहिए था जेलेंस्की ने मिला गांव में हथियार रखने के फैसले को गलत बताया। उन्होंने कहा कि लोगों के घरों के इतने करीब विस्फोटक सामग्री नहीं रखी जानी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि जांच शुरू कर दी गई है। हम पता कर रहे हैं कि रिहायशी इमारतों के पास हथियार और विस्फोटक रखने की अनुमति देना कानूनी था या नहीं। जांच में उन अधिकारियों की भूमिका भी देखी जाएगी, जिन्होंने हथियारों की तैनाती और रख-रखाव से जुड़े फैसले लिए थे। PM बोले- 5 साल बाद भी वही गलतियां दोहराई जा रही पिछले महीने जुलाई में विश्नेवे में भी एक ऐसी घटना हुई थी। उस धमाके में नौ लोगों की मौत हुई थी और दर्जनों लोग घायल हुए थे। इस घटना में 280 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा था। उस घटना की जांच में सामने आया था कि एक सरकारी कंपनी ने रिहायशी इमारतों के पास विस्फोटक सामग्री रखने से जुड़े नियमों का पालन नहीं किया था। यूक्रेन के प्रधानमंत्री सेरही कोरेत्स्की ने कहा कि विश्नेवे की घटना से मिली सीख पर अमल नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि जंग के 5 साल हो जाने के बाद भी वही गलतियां बार-बार दोहराना आपराधिक लापरवाही है। उन्होंने कहा कि इसके लिए जिम्मेदार हर व्यक्ति को, बिना किसी अपवाद के, कड़ी सजा मिलनी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। यूक्रेन के पास पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी रूस पिछले कई दिनों से कीव और आसपास के इलाकों पर लगातार ड्रोन हमले कर रहा है। इसके चलते कीव में एयर रेड सायरन लगातार बज रहे हैं और यूक्रेनी सेना पर एयर डिफेंस का दबाव बढ़ गया है। कई रूसी ड्रोन जेट इंजन से चलते हैं और करीब 400 मील प्रति घंटे यानी 640 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ सकते हैं। यूक्रेन के पास पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की भी भारी कमी है। ये बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सक्षम उसकी प्रमुख एयर डिफेंस सिस्टम में शामिल हैं। यूक्रेन में यह आशंका भी है कि लगातार ड्रोन हमलों का मकसद उसकी एयर डिफेंस यूनिट्स को कमजोर करना हो सकता है, ताकि रूस आगे बड़ा बैलिस्टिक मिसाइल हमला कर सके। रूस-यूक्रेन में बढ़े हवाई हमले रूस और यूक्रेन दोनों ने पिछले कुछ महीनों में एक-दूसरे के खिलाफ हवाई हमले तेज किए हैं। यूक्रेन अब रूस के आर्थिक ठिकानों को भी निशाना बना रहा है। यूक्रेन पिछले कई हफ्तों से रूस की बड़ी ऑनलाइन रिटेल कंपनी वाइल्डबेरीज से जुड़े ठिकानों पर हमले कर रहा है। यूक्रेन का दावा है कि कंपनी सेना को सामान और उसके कुछ हिस्से उपलब्ध कराती है, जबकि रूस इससे इनकार करता है। रूस में स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में बेलगोरोद और रोस्तोव क्षेत्रों में यूक्रेनी हमलों में दो लोगों की मौत और 25 लोग घायल हुए। वहीं, रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी क्षेत्र जापोरिज्जिया के मॉस्को नियुक्त गवर्नर के मुताबिक, एक शॉपिंग सेंटर पर यूक्रेनी हमले में चार लोग घायल हुए। —————————– यह खबर भी पढ़ें… जेलेंस्की ने अमेरिका और यूरोपीय देशों से पैट्रियट मिसाइलें मांगी:बोले- यूक्रेन भेजो, गोदामों में न रखो; रूस के हमले में 9 की मौत रूस के ताजा मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने अमेरिका और यूरोपीय देशों से तुरंत पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम के इंटरसेप्टर मिसाइल भेजने की अपील की है। पूरी खबर पढ़ें…

Upcoming IPO: विजय केडिया का है तगड़ा निवेश! एंकर राउंड में मधुसूदन केला ने भी लगाया बड़ा दांव, 31 अगस्त से खुलेगा ये आईपीओ

Vijay Kedia Backed Asuthosh Fibre IPO: शेयर बाजार के दिग्गज निवेशक विजय केडिया के निवेश वाली कंपनी आशुतोष फाइबर का आईपीओ दांव लगाने के लिए खुलने जा रहा है। पब्लिक सब्सक्रिप्शन खुलने से ठीक पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों के जरिए ₹16.04 करोड़ जुटा लिए हैं।

एंकर बुक में मधुसूदन केला के मेंटरशिप वाले सिंगुलैरिटी AMC समेत कई बड़े फंड्स ने हिस्सा लिया है। आइए आपको बताते हैं इस आईपीओ की प्राइस बैंड, महत्वपूर्ण तारीखें और कैसी है कंपनी की सेहत।

एंकर बुक: इन 5 बड़े निवेशकों ने लगाए पैसे

28 अगस्त को कंपनी ने एंकर निवेशकों को अपर प्राइस बैंड पर 17.43 लाख शेयर आवंटित किए:

  1. Nine Alps Corporate Advisors: ₹6 करोड़ के निवेश से 6.52 लाख शेयर खरीदे।
  2. Singularity Equity Fund II: ₹3.45 करोड़ के निवेश से 3.75 लाख शेयर खरीदे।
  3. Nav Capital Emerging Star Fund: ₹3.45 करोड़ के निवेश से 3.75 लाख शेयर खरीदे।
  4. Aarth AIF Growth Fund: ₹2.11 करोड़ के निवेश से 2.3 लाख शेयर खरीदे।
  5. Vira Bharat Opportunities Fund: ₹1 करोड़ के निवेश से 1.09 लाख शेयर खरीदे।

Asuthosh Fibre IPO की सभी जरूरी डिटेल्स

गुजरात बेस्ड टेक्निकल टेक्सटाइल प्रोडक्ट्स बनाने वाली यह कंपनी फ्रेश इश्यू के जरिए बाजार से कुल ₹56.34 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इसमें कोई भी ऑफर फॉर सेल (OFS) कंपोनेंट नहीं है।

  • IPO खुलने की तारीख: 31 अगस्त
  • IPO बंद होने की तारीख: 2 सितंबर
  • प्राइस बैंड: ₹87 से ₹92 प्रति शेयर
  • अलॉटमेंट: 3 सितंबर
  • लिस्टिंग: 7 सितंबर

आईपीओ के पैसों का क्या करेगी कंपनी?

आशुतोष फाइबर जुटाए गए फंड का इस्तेमाल अपनी क्षमता बढ़ाने और कर्ज कम करने में करेगी। ₹25.5 करोड़ नए उपकरण और मशीनरी की खरीद के लिए। ₹20 करोड़ कंपनी का पुराना कर्ज चुकाने के लिए और बाकी रकम सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए करेगी।

विजय केडिया की कितनी है हिस्सेदारी?

ऑफर से पहले कंपनी के प्रमोटर्स के पास 59.79% हिस्सेदारी है। बाकी हिस्सेदारी पब्लिक शेयरधारकों के पास है, जिसमें शेयर बाजार के जाने-माने निवेशक विजय केडिया की 6.57% हिस्सेदारी शामिल है। इस आईपीओ के मर्चेंट बैंकर के रूप में Mefcom Capital Markets को नियुक्त किया गया है।

अब जानिए कैसी है कंपनी की वित्तीय सेहत

टेक्सटाइल यार्न और फैब्रिक मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र से जुड़ी इस कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष में शानदार प्रदर्शन किया है। मार्च 2026 को समाप्त वित्त वर्ष में कंपनी का मुनाफा 88.5% बढ़कर ₹16.04 करोड़ हो गया, जो इससे पिछले साल (FY25) में ₹8.5 करोड़ था। कंपनी का कुल रेवेन्यू 2.9% की मामूली बढ़त के साथ ₹117.37 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹114 करोड़ था।

क्या है ग्रे मार्केट का हाल?

आईपीओ वॉच के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 29 अगस्त 2026 को आशुतोष फाइबर आईपीओ का ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) ₹37 प्रति शेयर दर्ज किया गया है। यह इसके अपर प्राइस बैंड ₹92 के मुकाबले 40.22% के तगड़े प्रीमियम का संकेत दे रहा है।

इससे पहले 28 अगस्त को भी जीएमपी ₹37 ही था, जबकि 27 अगस्त को यह ₹15 (16.30%) और 26 अगस्त को ₹13 (14.13%) पर बना हुआ था। लगातार बढ़ते और मजबूत जीएमपी ट्रेंड से स्पष्ट है कि प्राइमरी मार्केट में इस आईपीओ को लेकर निवेशकों के बीच जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रही है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

दो साल का अनुभव लेकर 600 जगह भेजा आवेदन, फिर भी नहीं मिली नौकरी, Reddit पर छिड़ी बहस

भारत के तकनीकी क्षेत्र में नौकरी पाना इन दिनों कई युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी बीच रेडिट पर एक नौकरी तलाश रहे शख्स की पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा है। करीब दो साल के अनुभव वाले इस व्यक्ति ने दावा किया कि वह सैकड़ों नौकरियों के लिए आवेदन कर चुका है, लेकिन उसे बहुत कम जगहों से जवाब मिला। शख्स ने बताया कि करीब 500-600 आवेदन भेजने के बावजूद उसकी स्थिति में खास सुधार नहीं हुआ। इसके उलट, सोशल मीडिया और रेडिट पर उसे लगातार ऐसी कहानियां दिखाई दे रही थीं, जिनमें लोगों को नौकरी से निकाले जाने के कुछ ही महीनों बाद बड़ी तकनीकी कंपनियों से नए प्रस्ताव मिल रहे थे।

किसी को अमेजन के बाद गूगल, तो किसी को मेटा के बाद कई ऑफर

रेडिट उपयोगकर्ता ने कुछ ऐसी पोस्ट का जिक्र किया, जिन्हें देखकर वह खुद को दूसरों से बिल्कुल अलग स्थिति में महसूस करने लगा। एक व्यक्ति ने दावा किया कि अमेजन से नौकरी जाने के करीब पांच महीने बाद उसे गूगल में नौकरी मिल गई। एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि नौकरी जाने के सिर्फ तीन महीने के भीतर उसे 25 प्रतिशत अधिक वेतन वाली नई नौकरी मिल गई। इतना ही नहीं, नौकरी की तलाश के दौरान वह विदेश यात्रा पर भी गया।

सबसे ज्यादा हैरानी एक अन्य दावे से हुई, जिसमें एक व्यक्ति ने बताया कि मेटा से नौकरी जाने के बाद उसने गूगल, एप्पल और ओपनएआई में साक्षात्कार दिए और तीनों जगह से उसे नौकरी के प्रस्ताव मिले। आखिर में उसने गूगल को चुना।

दूसरी तरफ 500-600 आवेदन के बाद भी इंतजार

इन कहानियों की तुलना करते हुए मूल पोस्ट लिखने वाले शख्स ने सवाल किया कि क्या वह किसी अलग ही दुनिया में रह रहा है। उसके मुताबिक, जहां कुछ लोग बड़ी तकनीकी कंपनियों के प्रस्ताव आसानी से हासिल कर रहे हैं, वहीं उसे सैकड़ों आवेदन भेजने के बाद भी मुश्किल से कोई प्रतिक्रिया मिल रही है। उसने बताया कि अब तक उसका सबसे अच्छा नतीजा एक अस्थायी छह महीने की नौकरी के लिए बातचीत तक पहुंचना रहा है।

क्या बड़ी कंपनियों का अनुभव ही सबसे बड़ा फर्क है?

पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए एक उपयोगकर्ता ने सवाल उठाया कि क्या नौकरी तलाश रहे व्यक्ति का दो साल का अनुभव भी मेटा या अमेजन जैसी कंपनियों में रहा है। उसका तर्क था कि बड़ी तकनीकी कंपनियों में पहले से काम कर चुके लोगों के लिए नई नौकरी पाना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है, क्योंकि ऐसी कंपनियों में चयन अपने आप में कठिन माना जाता है। एक अन्य व्यक्ति ने इसी चर्चा के बीच नौकरी के लिए मदद और संदर्भ की मांग भी कर दी।

कुछ लोगों ने सोशल मीडिया की सफलता की कहानियों पर उठाए सवाल

हर किसी ने इन सफलता की कहानियों को सच नहीं माना। कुछ रेडिट उपयोगकर्ताओं ने कहा कि इंटरनेट पर दिखाई जाने वाली ऐसी पोस्ट पूरी तस्वीर नहीं दिखातीं। एक टिप्पणी में इन्हें प्रभावशाली लोगों द्वारा लोगों को झूठी उम्मीद देने वाला प्रचार तक बताया गया। यानी ऑनलाइन कुछ लोगों की तेज सफलता देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर तकनीकी पेशेवर के लिए नौकरी का बाजार एक जैसा है।

एक जवाब ने कहा- समस्या औसत होने की भी हो सकती है

चर्चा में एक टिप्पणी ने सबसे सीधा जवाब दिया। उपयोगकर्ता ने तर्क दिया कि अत्यधिक कुशल लोग अक्सर कई कंपनियों के लिए आकर्षक उम्मीदवार होते हैं। ऐसे लोग कम समय में जटिल समस्याओं को हल करने की क्षमता रखते हैं, इसलिए उन्हें नौकरी के ज्यादा अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, उस टिप्पणी में यह भी कहा गया कि औसत होना कोई बुरी बात नहीं है। कौशल को लगातार मेहनत और सीखने के जरिए बेहतर बनाया जा सकता है। यही वजह है कि इस पूरी चर्चा ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है क्या तकनीकी क्षेत्र में नौकरी पाने के लिए सिर्फ अनुभव काफी है, या सही कौशल और क्षमता भी उतनी ही जरूरी है?

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2026 Lamborghini Urus SE review: Thunder and lightning

2026 Lamborghini Urus SE review: Thunder and lightning
2026 Lamborghini Urus SE review

When introduced originally, the Lamborghini Urus rewrote the playbook of what an SUV could be. Sharp to look at, ferociously fast and with a mighty V8 soundtrack, the Urus has become the benchmark of performance SUVs. Now though, thanks to ever tightening regulations, the Urus has had to pivot to hybridisation. But has that diluted the experience? We got behind the wheel of the Lamborghini Urus SE to answer that question.

Lamborghini Urus SE Exterior Design and Engineering – 9/10

Urus SE has a more rounded-off design than its predecessor, but it’s no less menacing.

In comparison to the older Urus and the mad Urus Performante, the Urus SE does appear a bit softer and more rounded off. But that’s not to say it lacks presence by any means. It’s still full of sharp angles and surfaces, the Arancio Borealis optional paint on our test car looked stunning as did the diamond-cut, multi-spoke 23-inch alloy wheels. Up front, there’s a new bonnet, redesigned bumper and a larger front grille, while the slimmer headlights are now matrix LED units and a different DRL signature.

Rear end features quad-exhaust setup, sporty raked roofline, and a hexagon-patterned grille connecting the tail-lights.

The differences are immediately apparent at the rear too, with a new tailgate, rear bumper and a connecting tail-light grille. As always, Lamborghini’s Ad Personam personalisation programme offers an enormous scope for customisation, so buyers can tailor the Urus SE as per their needs. It remains a substantial machine, measuring 5.12m long and 2.02m wide, with a 3m wheelbase. Kerb weight is a hefty 2,505kg, which makes the fact that it can sprint from 0-100kph in just 3.4sec all the more impressive. 

Lamborghini Urus SE Interior Space and Comfort – 8/10

Dashboard layout is premium and feature-loaded, and gets a lot of Lamborghini theatrics.

Inside, the Urus SE retains the familiar Lamborghini approach of combining the ambience of a supercar with the practicality expected of an SUV. However, the changes here are less apparent than those on the outside. The centre console is ever so slightly redesigned with a new array of toggle switches under the touchscreen. The touchscreen itself is larger than the earlier Urus, with updated graphics and a slicker user interface.

Lamborghini’s signature flip-up engine start/stop button is inspired by those of fighter jets.

There’s plenty of visual theatre, too, and it looks just as extroverted as the outside. Standout elements include the hexagonal AC vents, the Lamborghini badging on the dashboard, the aircraft-style levers for the drive modes and of course, the fighter-jet inspired flap-up engine start/stop button. Lamborghini has also introduced new colour and trim combinations with the SE, with our test car featuring the same predominantly orange theme as on the outside.

Rear space is surprisingly plentiful given the Urus SE’s sporty proclivities.

Despite all the drama, this remains a practical SUV. The long wheelbase means there’s plenty of legroom at the rear and it’s wide enough for three too, though taller passengers may find headroom a bit tight thanks to the tapering roofline. The front seats are large, well padded and the optional Lamborghini crest on the headrests just adds to the ambience. The glovebox is decent sized, there’s cupholders and the boot offers 454 litres of capacity.

Lamborghini Urus SE Features and Safety – 8/10

Info-packed driver’s display interface can get confusing at times.

As standard, the Urus SE gets plenty of features like the three screen setup – for the infotainment, AC system and driver’s display – wireless Android Auto and Apple CarPlay, LED matrix headlamps, four-zone auto climate control, leather upholstery, 360-degree camera, connected car tech and so much more. 

The SE also gets a comprehensive technology upgrade, with the new user interface being one of the more significant updates. It features a carousel-style layout on the touchscreen to access the numerous sub-menus it packs in, while the driver’s display shows all sorts of data pertaining to the hybrid system, navigation, media and other car-related info. Navigating all the sub-menus can get confusing, however.

New Lamborghini Telemetry function comes with over 300 pre-loaded racetracks to record lap times on.

There’s also ‘Lamborghini Telemetry’ that can display lap times and sector information for more than 300 preloaded circuits, as well as record new tracks. Connected services extend to navigation, real-time traffic, remote locking, vehicle-status information, remote charging, remote cooling of the cabin and various safety and security alerts.

Also part of the package is ADAS tech like autonomous emergency braking, lane keep assist, adaptive cruise control and more. But there’s a lot that’s optional too, like a large panoramic sunroof, a Bang and Olufsen 3D audio system and a whole lot more, apart from the usual trim, material and stitching options. On the whole, the Urus SE is well-equipped but some of the optional extras really could have been standard fitment given the asking price. 

Lamborghini Urus SE Performance and Refinement – 9/10

Twin-turbo V8 and electric motor develop a combined 800hp and 950Nm.

As for the numbers, they are, predictably, staggering. The Urus SE combines the familiar 4.0-litre twin-turbo V8 with a 25.9kWh lithium-ion battery and a permanent-magnet synchronous electric motor for an eye-watering combined output of 800hp and 950Nm. The result is 0-100kph in 3.4sec and 0-200kph in 11.2sec, with a claimed top speed of 312kph. Those figures put the Urus SE firmly in supercar territory, despite its size and weight.

And it does feel like one from behind the wheel too, especially in a straight line. Acceleration is relentless and it feels borderline scary on narrow, two-lane roads. The Urus SE always feels like it has power in reserve, especially when you’ve got the powertrain fully dialled up. There’s Strada mode for everyday driving, Sport for when you want to have a bit more fun and of course, Corsa for when you want a proper scare. Couple that with the hybrid system in its full performance mode, and the SE can really feel overwhelming. But if you don’t drive with a heavy foot, it’s surprisingly cordial and sedate. The SE really has a Jekyll and Hyde character about it.

Unrelenting acceleration can get scary on public roads.

What makes the SE more interesting than simply being a faster Urus is the way the electric motor has been integrated. Of course, it’s to help with emissions and meet regulations, but it’s also to boost performance. In EV mode, it can reach up to 135kph and go as far as 66km. But with a flick of a switch, it can turn from silent to violent. 

The V8 also hasn’t become anonymous with the hybridisation. It still makes its presence felt, especially through the optional Akrapovic exhaust our car came fitted with, but it does feel a bit subdued. It’s also piped through the speakers, which doesn’t feel entirely ethical but it does help its case.

Optional Akrapovic exhaust system helps enhance the V8’s aural character.

Lamborghini has also paid considerable attention to keeping performance consistent, with additional cooling for the powertrain and brakes. Not that we ever managed to push it so hard to test out that claim. And apart from the aforementioned drive modes, there’s even some off-road modes baked in, but how many buyers actually take their prized possession off the grippy stuff remains to be seen. 

Lamborghini Urus SE Mileage and Efficiency – 7/10

This is where the Urus SE’s plug-in hybrid system makes a big difference. Lamborghini quotes a WLTP combined energy consumption of 4.67km/kWh plus 17.54kpl. With a discharged battery, however, combined claimed fuel efficiency falls to 7.75kpl.

Thanks to the 25.9kWh battery, the Urus SE claims a 66km all-electric range.

The headline figure therefore needs some context. The SE’s efficiency advantage is greatest when the battery is regularly topped up. With a claimed 66km of EV range, many shorter daily journeys can theoretically be completed without the V8 needing to fire up at all.

For longer journeys, the hybrid system allows the electric motor and V8 to share the workload. But once the battery is depleted, this remains a 2.5-tonne SUV with a twin-turbo V8, so expectations of conventional-SUV fuel economy would be unrealistic.

Lamborghini Urus SE Ride Comfort and Handling – 8/10

Ride isn’t all that absorbent due to the low-profile Pirelli P Zero tyres.

The Urus SE uses a multilink suspension setup front and rear with semi-active dampers, all of which make this large SUV feel engaging around corners without sacrificing comfort. There is a sense of pliancy at low speeds with the ride firming up as speeds rise. Of course, riding on 23-inch wheels means you can feel potholes and road imperfections, but still it isn’t uncomfortable by any means.

Rear-wheel steering, semi-active dampers, e-diff, and torque vectoring help make the Urus SE a keen handler.

It also gets rear-wheel steering, which helps make it more manageable at lower speeds while contributing to agility at higher speeds. The SE feels eager to change direction and the e-diff and clever torque vectoring system do their best to keep things tidy around bends. You also get a good sensation from the steering which has good heft to it and the Pirelli P Zero tyres it comes with are grippy too. Lamborghini has also worked on the aerodynamics, with a new rear aero lip and diffuser increasing rear downforce by 35 percent over the Urus S. Overall though, the SE feels agile enough but there’s no escaping its heavy kerb weight.

Giant carbon-ceramic brakes peek out from behind the 23-inch alloys.

You’re also backed by massive carbon-ceramic brakes, measuring 440mm at the front and 410mm at the rear, and they do take some time getting used to. They may not have the initial bite like with conventional steel brakes, but the stopping power is immense and they stay consistent despite repeated hard braking, which is essential in something as big and powerful as the Urus SE.

Lamborghini Urus SE Value for Money – 7/10

The Urus SE is arguably the most convincing expression yet of Lamborghini’s super-SUV. More importantly, it hasn’t sacrificed the characteristics that make a Lamborghini feel special in the pursuit of meeting ever tightening restrictions. There’s still a V8, it’s still outlandish inside and out, and it still delivers a driving experience that goes well beyond what you’d expect from something this large. All of that while adding the benefit of the plug-in hybrid system for performance and efficiency, as well as properly usable EV range. 

The Urus SE is the all-in-one Lamborghini.

At Rs 4.47 crore (ex-showroom, before options), of course, the Urus SE is expensive. But that’s almost beside the point. The Urus SE isn’t for those who expect rational value; it is for those who want a vehicle that can combine supercar pace, SUV practicality, luxury, all-electric driving and aspirational brand value all in one package. As a technological statement and a performance SUV then, the Urus SE makes a compelling case for Lamborghini’s hybrid future.

Women’s Asia Cup 2026: एशिया कप में कैसा है भारत का शेड्यूल, इस दिन पाकिस्तान से भिड़ेगी टीम इंडिया

IND vs PAK: विमेंस एशिया कप 2026 का 10वां सीजन दुबई में खेला जा रहा है। विमेंस एशिया कप 2026 के ग्रुप स्टेज में भारतीय टीम अपने पहले मैच के लिए पूरी तरह तैयार है। भारत का सामना आज थाईलैंड से दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में होगा। वहीं दोनों टीमों के बीच ये मुकाबला रात 8 बजे शुरू होगा। हरमनप्रीत कौर की अगुआई में भारतीय टीम जीत के इरादे से मैदान पर उतरेगी। वहीं फैंस को भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाले मुकाबले का इंतजार है। भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में डाला गया है। आइए जानते हैं किस दिन होगा भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबला

कब होगा भारत का मुकाबला

विमेंस एशिया कप टूर्नामेंट के सभी मुकाबले दुबई इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में आयोजित किए जाएंगे। इस बार कुल आठ टीमें खिताब के लिए मैदान में हैं, जिन्हें दो ग्रुप में बांटा गया है। ग्रुप स्टेज के बाद दोनों ग्रुप की शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी। इस बार भारत और पाकिस्तान को एक ही ग्रुप में रखा गया है, ऐसे में 5 सितंबर को होने वाला दोनों टीमों का मुकाबला टूर्नामेंट के सबसे चर्चित मैचों में शामिल रहेगा। वहीं मेजबान यूएई की कोशिश अपने घरेलू मैदान और परिस्थितियों का फायदा उठाकर बेहतर प्रदर्शन करने की होगी। टीम श्रीलंका और बांग्लादेश जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ कड़ी चुनौती पेश करना चाहेगी।

भारत के मुकाबले

  • भारत बनाम थाईलैंड- 30 अगस्त, दुबई
  • हांगकांग, चीन बनाम भारत- सितंबर 3, दुबई
  • भारत बनाम पाकिस्तान- 5 सितंबर, दुबई
  • पहला सेमी-फाइनल- 10 सितंबर, दुबई
  • दूसरा सेमी-फाइनल- 11 सितंबर, दुबई
  • फाइनल- 13 सितंबर, दुबई

एशिया कप में रहा है भारत का दबदबा

श्रीलंका इस बार विमेंस एशिया कप में अपने खिताब का बचाव करने उतरी है। टीम ने 2024 में पहली बार यह ट्रॉफी अपने नाम की थी। हालांकि, टूर्नामेंट के रिकॉर्ड को देखें तो भारत का दबदबा सबसे ज्यादा रहा है। भारतीय टीम ने अब तक खेले गए नौ एशिया कप में से सात बार खिताब जीता है, जबकि बाकी दो मौकों पर उसे उपविजेता बनकर संतोष करना पड़ा। बांग्लादेश भी विमेंस एशिया कप का खिताब जीत चुकी है और उसने 2018 में ट्रॉफी अपने नाम की थी। थाईलैंड, इंडोनेशिया और हांगकांग, चीन ने ACC विमेंस प्रीमियर कप 2026 में शानदार खेल दिखाकर विमेंस एशिया कप में जगह बनाई है।

Chitrakoot Flood : चित्रकूट में बाढ़ का कहर, 30 फीट ऊपर बह रही मंदाकिनी, रामघाट का 300 मीटर पुल बहा, MP समेत 26 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

Chitrakoot Flood : चित्रकूट में बाढ़ का कहर, 30 फीट ऊपर बह रही मंदाकिनी, रामघाट का 300 मीटर पुल बहा, MP समेत 26 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

chitrakut flood

मध्यप्रदेश के सतना जिले और धार्मिक नगरी चित्रकूट में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने हालात बेहद गंभीर कर दिए हैं। भारी बारिश के कारण कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। चित्रकूट में मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़कर करीब 30 फीट तक पहुंच गया है। नदी के रौद्र रूप के कारण रामघाट और आसपास के इलाकों में पानी भर गया है।

 

बताया जा रहा है कि गोरगी बांध टूटने के बाद कई इलाकों में पानी घुस गया। बाढ़ की तेज धार में चित्रकूट के रामघाट का करीब 300 मीटर लंबा पुल बह गया। घाट किनारे बनी कई दुकानें भी पानी में समा गईं। अचानक बिगड़े हालात के बाद प्रशासन और राहत-बचाव दल सक्रिय हो गए हैं। NDRF और SDRF की टीमें मौके पर मौजूद हैं और प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव अभियान चलाया जा रहा है।

 

चित्रकूट में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन की ओर से लोगों को सतर्क रहने और नदी-नालों के आसपास नहीं जाने की सलाह दी जा रही है। लगातार बारिश के कारण आने वाले घंटों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण होने की आशंका है।

 

देश के कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट

 

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने रविवार को देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान जारी किया है। ओडिशा में अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। वहीं अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और गंगीय पश्चिम बंगाल में भी भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

 

बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और पूर्वोत्तर के कई राज्यों में भी तेज बारिश का अनुमान है। कई इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज हवाएं चलने की संभावना है।

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दिल्ली-NCR में गर्मी का अलर्ट

 

बारिश के बीच दिल्ली-NCR में फिलहाल गर्मी से राहत के आसार कम हैं। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए भीषण गर्मी/हीटवेव की स्थिति को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है।

 

उत्तर भारत में कैसा रहेगा मौसम?

 

उत्तराखंड में रविवार को भारी बारिश की संभावना है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पहाड़ी इलाकों में गरज-चमक और बिजली गिरने की घटनाएं हो सकती हैं। हिमाचल प्रदेश में भी आने वाले दिनों में बारिश जारी रहने का अनुमान है। 31 अगस्त से 4 सितंबर के बीच राज्य के कुछ हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है।

 

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में बारिश जारी

 

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 4 सितंबर तक व्यापक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। पूर्वी मध्य प्रदेश में रविवार को गरज-चमक और बिजली गिरने की गतिविधियां भी देखने को मिल सकती हैं। ऐसे में चित्रकूट और सतना समेत पूर्वी मध्य प्रदेश के प्रभावित इलाकों में प्रशासन की चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

 

झारखंड, ओडिशा, बंगाल और सिक्किम में भी अलर्ट

 

झारखंड और ओडिशा के कुछ हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक बारिश जारी रहने की संभावना है। गंगीय पश्चिम बंगाल, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में भी व्यापक बारिश का अलर्ट है। ओडिशा में आने वाले दिनों में एक बार फिर तेज मानसूनी बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

 

पूर्वोत्तर में भारी बारिश का अनुमान

 

अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे पूर्वोत्तर राज्यों में आने वाले दिनों में भारी बारिश होने की संभावना है।

 

महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में भी बारिश

 

कोंकण और गोवा में 4 सितंबर तक व्यापक बारिश जारी रहने का अनुमान है। गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र के कुछ हिस्सों में रविवार को छिटपुट बारिश हो सकती है।

 

तटीय कर्नाटक, केरल, माहे और लक्षद्वीप में भी व्यापक बारिश का पूर्वानुमान है। आंध्र प्रदेश, कराईकल, तेलंगाना, कर्नाटक, तमिलनाडु और पुडुचेरी के कुछ हिस्सों में बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली और तेज हवाएं चल सकती हैं।

Tax-Saving Mutual Fund: टैक्स बचाने वाला इकलौता म्यूचुअल फंड प्लान, तो सबसे कम लॉक-इन वाला ऑप्शन भी

Tax-Saving Mutual Fund: इक्विटी मार्केट में निवेश से अच्छा रिटर्न हासिल किया जा सकता है और जो निवेशक कंजर्वेटिव हैं, वे म्यूचु्अल फंड्स के जरिए अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी मार्केट का एक्सपोजर रखते हैं। हालांकि इसमें एक खामी ये है कि इसमें जो पैसे लगाते हैं, उस पर कोई टैक्स डिडक्शन नहीं मिलता है, सिवाय एक विकल्प में। यहां उसी एक म्यूचुअल फंड ऑप्शन यानी ELSS (इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) के बारे में बताया जा रहा है, जिसमें निवेश से अच्छा रिटर्न हासिल कर सकते हैं और ऐसा भी नहीं है कि टैक्स बेनेफिट्स मिल रहा है, तो रिटर्न म्यूचुअल फंड्स के बाकी विकल्पों की तुलना में फीका रहेगा, बल्कि महंगाई को बीट करते हुए तगड़ा रिटर्न भी हासिल किया जा सकता है। इसके अलावा एक और खास बात ये है कि इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत पुरानी टैक्स रिजीम में जितने भी तरीके हैं टैक्स बचाने के, उसमें सबसे कम लॉक-इन भी इसी का है।

ELSS में निवेश के क्या हैं टैक्स बेनेफिट्स

ईएलएसएस म्यूचुअल फंड्स में निवेश पर पुरानी टैक्स रिजीम में इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 80सी के तहत एक वित्त वर्ष में ₹1.50 लाख तक के निवेश पर डिडक्शन क्लेम कर सकते हैं।

एक साल से अधिक होल्डिंग को रिडीम करने पर यानी लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) में से ₹1 लाख से अधिक जितना मुनाफा है, उस पर 10% की दर से तो एक साल से कम वाली होल्डिंग को रिडीम करने पर यानी शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) पर 20% की दर से टैक्स देना होगा।

ईएलएसएस की यूनिट्स के रिडेम्प्शन पर कोई TDS (टैक्स डिडक्टेड ऐट सोर्स) नहीं है।

टैक्स बेनेफिट्स के अलावा और क्या है खासियतें

ईएलएसएस इकलौता ऐसा म्यूचुअल फंड प्लान हैं, जिसमें टैक्स बेनेफिट्स मिलता है।

एक और खास बात ये है कि सेक्शन 80सी के तहत जिन-जिन विकल्पों में जितने भी निवेश प्लान हैं, उनमें सबसे कम लॉक-इन पीरियड इसी का है जैसे कि पीपीएफ में 15 साल का लॉक-इन है तो टैक्स-सेविंग्स एफडी का लॉक-इन पांच साल है लेकिन ईएलएसएस के मामले में तीन ही साल है।

ईएलएसएस में लॉक-इन पीरियड खत्म होने के बाद यूनिट्स बेचने पर कोई एग्जिट लोड नहीं लगेगा।

इसमें चाहें तो एकमुश्त निवेश कर सकते हैं या एसआईपी (SIP) यानी एक नियमित समय अंतराल पर थोड़ा-थोड़ा करके भी लंबे समय में अच्छा फंड तैयार कर सकते हैं।

कैसा है रिटर्न के मामले में

ईएलएसएस में रिटर्न भी तगड़ा मिलता है। सिर्फ तीन साल के ही आंकड़ों को लेकर बात करें तो मोतीलाल ओसवाल ईएलएसएस टैक्स फंड डायरेक्ट ग्रोथ में सालाना 23.84%, आईटीआई ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 19.45%, व्हाइटओक कैपिटल ईएलएसएस टैक्स फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.63%, एचएसबीसी ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.34% और जेएम ईएलएसएस टैक्स सेवर फंड डायरेक्ट ग्रोथ में 18.27% की रफ्तार से बढ़ा है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।