
केंद्र सरकार ने पेट्रोल डीजल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बड़ा बदलाव किया है। पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले पर विंडफॉल कर बढ़ा दिया है। वहीं, डीजल के निर्यात पर लगने वाले कर में कटौती की गई है। एटीएफ के निर्यात पर लगने वाला शुल्क 10.5 रुपये प्रति लीटर पर बरकरार रखा गया है। नई दरें शुक्रवार, 16 अक्तूबर से प्रभावी हो गई हैं।
वित्त मंत्रालय ने एक अधिसूचना के माध्यम से इन दरों में बदलाव की जानकारी दी है। डीजल निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को रोड और इंफ्रास्ट्रक्चर सेस के साथ घटाया गया है। यह अब 16 रुपये प्रति लीटर से कम होकर 8.5 रुपये प्रति लीटर हो गया है। दूसरी ओर, पेट्रोल निर्यात पर शुल्क 0.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 2.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है।
यह टैक्स केवल निर्यात पर लागू है। देश के भीतर बिकने वाले पेट्रोल-डीजल के टैक्स में कोई बदलाव नहीं किया गया है, इसलिए आम जनता की जेब पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।
क्यों लगाया जाता है विंडफॉल टैक्स?
एनर्जी कंपनियों के सामान्य से अधिक मुनाफे पर विंडफॉल टैक्स लगाया जाता है। पश्चिमी एशिया में चल रहे युद्ध के चलते घरेलू मार्केट में तेल की उपलब्धता बनाए रखने के लिए अप्रैल 2026 सरकार ने डीजल पर 55.5 रुपए और एटीएफ पर 42 रुपए प्रति लीटर विंडफाल टैक्स लगाया था।
यह टैक्स इसलिए लगाया गया था ताकि डीजल और एटीएफ का निर्यात करने वाली कंपनियां घरेलू और विदेशी बाजारों में कीमतों में फर्क से अनुचित फायदा न उठा सके। पेट्रोल डीजल की उपलब्धता और सप्लाय की स्थिति को देखते हुए इसमें बदलाव किया जाता है।






