जीएसआरटीसी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, CM भूपेंद्र पटेल ने महंगाई भत्ते में किया 2% का इजाफा

जीएसआरटीसी कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, CM भूपेंद्र पटेल ने महंगाई भत्ते में किया 2% का इजाफा

Bhupendra Patel

GSRTC Employees DA Hike: गुजरात राज्य सड़क परिवहन निगम (GSRTC) के कर्मचारियों के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा निगम के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में 2 प्रतिशत की वृद्धि को मंजूरी दी गई है। इस नई बढ़ोतरी के बाद अब कर्मचारियों को 58 प्रतिशत के बजाय 60 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता दिया जाएगा।

एरियर के भुगतान से कर्मचारियों को मिलेगा वित्तीय लाभ

राज्य सरकार के इस फैसले से गुजरात एसटी निगम के हजारों कर्मचारियों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी। इससे पहले जून 2026 में महंगाई भत्ता 3 प्रतिशत बढ़ाकर 58 प्रतिशत किया गया था, और अब इसमें 2 प्रतिशत की और बढ़ोतरी की गई है। नियमित महंगाई भत्ते के अलावा कर्मचारियों को बकाए एरियर (Arrears) का भुगतान भी किया जाएगा, जिससे उन्हें अतिरिक्त वित्तीय लाभ मिलेगा।

नियम और पात्रता से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

गौरतलब है कि महंगाई भत्ते की गणना हमेशा कर्मचारी के मूल वेतन (Basic Pay) पर ही की जाती है, इसमें मकान किराया भत्ता या अन्य भत्ते शामिल नहीं होते हैं। एसटी निगम में शुरुआत में फिक्स वेतन पर जुड़ने वाले कर्मचारियों को इस महंगाई भत्ते का लाभ नहीं मिलता है। यह विशेष लाभ केवल नियमित पे-स्केल (Regular Pay-scale) प्राप्त करने वाले कर्मचारियों के लिए ही मान्य है।

 

भारत में विरोध प्रदर्शनों का इतिहास: भाषा आंदोलन से ‘राम मंदिर, किसान और युवा प्रदर्शनों’ तक, जानें कैसे बदला देश का सियासी नक्शा

भारत में विरोध प्रदर्शनों का इतिहास: भाषा आंदोलन से 'राम मंदिर, किसान और युवा प्रदर्शनों' तक, जानें कैसे बदला देश का सियासी नक्शा

History of protests in India

History of protests in India: हाल के दिनों में चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर दिल्ली के मध्य भागों (जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस) में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे युवा प्रदर्शनकारियों, छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने जब सड़कों का रुख किया, तो देश को एक बार फिर भारत के समृद्ध और संघर्षशील लोकतांत्रिक आंदोलनों के इतिहास की याद आ गई।

प्रशासन और सत्ता द्वारा अक्सर ऐसे आंदोलनों को “कानून-व्यवस्था का संकट” या “राष्ट्रविरोधी” करार देने की कोशिशें की जाती रही हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि औपनिवेशिक काल से लेकर आज तक जन-आंदोलन भारतीय लोकतंत्र का ‘लाइफब्लड’ (प्राणतत्व) रहे हैं।

आइए एक नज़र डालते हैं भारत के उन ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शनों पर, जिन्होंने न केवल नीतियां बदलीं, बल्कि सत्ता के समीकरण भी पलट दिए:

दक्षिण भारत का ‘हिंदी विरोधी आंदोलन’ (1965): भाषा और अस्मिता की लड़ाई

संविधान के तहत 26 जनवरी 1965 से केंद्र सरकार के कामकाज में हिंदी को प्राथमिक आधिकारिक भाषा बनाने की योजना थी। तमिलनाडु के लोगों को आशंका थी कि इससे उनके रोजगार और प्रशासनिक अवसरों पर बुरा असर पड़ेगा।

  • नेतृत्व और असर : द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के शीर्ष नेताओं—सी.एन. अन्नादुरई और एम. करुणानिधि—के नेतृत्व में तमिलनाडु में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए।
  • क्या बदला? तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने आश्वासन दिया कि जब तक गैर-हिंदी भाषी राज्य चाहेंगे, तब तक अंग्रेजी का इस्तेमाल जारी रहेगा। इसका राजनीतिक नतीजा यह हुआ कि 1967 के चुनाव में DMK ने कांग्रेस को तमिलनाडु की सत्ता से उखाड़ फेंका और राज्य की राजनीति हमेशा के लिए बदल गई।

History of protests in India


जेपी आंदोलन (1970 का दशक): ‘संपूर्ण क्रांति’ और पहली गैर-कांग्रेसी सरकार

1973-74 में गुजरात और बिहार से शुरू हुआ छात्र आंदोलन जब वयोवृद्ध गांधीवादी नेता जयप्रकाश नारायण (JP) के हाथों में आया, तो यह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ एक राष्ट्रीय जनाक्रोश बन गया।

  • ऐतिहासिक प्रभाव : जेपी के ‘संपूर्ण क्रांति’ के आह्वान के जवाब में 25 जून 1975 को देश में आपातकाल (Emergency) लागू कर दिया गया।
  • क्या बदला? 1977 में आपातकाल हटने के बाद पूरा विपक्ष एकजुट हुआ और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की ऐतिहासिक हार हुई। भारत के इतिहास में पहली बार केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार (जनता पार्टी) बनी।

मंडल आयोग का विरोध और उदारीकरण के खिलाफ आंदोलन (1990 का दशक)

1990 में प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (V.P. Singh) ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण लागू करने की घोषणा की।

  • मंडल बनाम कमंडल : इसके विरोध में जहां देश भर में सवर्ण छात्रों ने तीखे विरोध प्रदर्शन किए, वहीं सामाजिक न्याय के समर्थक इसके पक्ष में खड़े हुए। 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर रखते हुए आरक्षण को वैध ठहराया, जिसने भारतीय राजनीति में ‘जातिगत समीकरणों’ को केंद्र में ला दिया।
  • आर्थिक सुधारों के खिलाफ हड़ताल (1991) : तत्कालीन पीएम पी.वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा लाए गए उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) का ट्रेड यूनियनों और वामपंथियों ने कड़ा विरोध किया। हालांकि, यह आंदोलन नीतिगत सुधारों को रोक नहीं सका और भारत आधुनिक अर्थव्यवस्था की राह पर बढ़ गया।

राम मंदिर आंदोलन (1990 ) आडवाणी की राम रथयात्रा

लालकृष्ण आडवाणी की राम रथयात्रा 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ से शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जनसमर्थन जुटाना था। यह यात्रा 10 हजार किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या पहुंचने वाली थी, लेकिन 23 अक्टूबर 1990 को बिहार के समस्तीपुर में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के आदेश पर आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया।

  • इस यात्रा से क्या बदला? : इस यात्रा के बाद राम मंदिर आंदोलन ने और तेजी पकड़ी साथ ही आडवाणी की इस यात्रा का भाजपा को चुनावी फायदा मिला। भाजपा के सत्ता में पहुंचने की बड़ी वजह आडवाणी की इस रथयात्रा को भी माना जाता है। हालांकि राम मंदिर आंदोलन का इतिहास काफी पुराना है। 1853 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद परिसर के आसपास पहली बार धार्मिक हिंसा दर्ज की गई थी, जिसके बाद ब्रिटिश प्रशासन ने परिसर के बाहर हिंदुओं को पूजा के लिए चबूतरा (राम चबूतरा) बनाने की अनुमति दी थी।

History of protests in India


अन्ना हजारे का ‘भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन’ (2011): इंडिया अगेंस्ट करप्शन

UPA सरकार के कार्यकाल में बड़े भ्रष्टाचार विवादों के बीच सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की।

  • जन-आक्रोश और नतीजा : इस आंदोलन से अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी और प्रशांत भूषण जैसे चेहरे उभरे। दिसंबर 2013 में संसद ने जन लोकपाल कानून पारित किया। बाद में केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी (AAP) का गठन किया और दिल्ली की सत्ता हासिल की।

‘निर्भया’ आंदोलन (2012): महिलाओं की सुरक्षा और सख्त कानूनी सुधार

16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुए भीषण सामूहिक दुष्कर्म और हत्या कांड के बाद पूरा देश उबल पड़ा। इंडिया गेट से लेकर देश के हर कोने में युवाओं और महिलाओं ने स्वप्रेरित होकर विरोध जताया।

  • क्या बदला? जनता के भारी दबाव में सरकार ने जस्टिस वर्मा समिति का गठन किया। संसद ने क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट 2013 पारित किया, जिसके तहत यौन अपराधों की कानूनी परिभाषाओं को विस्तृत किया गया और कड़ी सजा का प्रावधान किया गया।

CAA, NRC और NPR विरोधी आंदोलन (2019-20)

दिसंबर 2019 में पारित नागरिकता संशोधन कानून (CAA) ने पड़ोसी देशों से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों के लिए नागरिकता का रास्ता आसान किया, जिससे इसके संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर देशव्यापी बहस शुरू हुई। NRC और NPR को लेकर भी आंदोलन हुआ।

  • प्रतीक और असर : दिल्ली के शाहीन बाग में हुआ आंदोलन नागरिकता संशोधन कानून (CAA), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) का विरोध करने के लिए आयोजित किया गया था।इस दौरान ‘शाहीन बाग’ महिलाओं के नेतृत्व वाले धरने का प्रमुख प्रतीक बना। हालांकि, आंदोलन कानून को निरस्त नहीं करा सका, लेकिन इसके क्रियान्वयन में देरी हुई और सरकार ने मार्च 2024 में इसके नियम अधिसूचित किए।

History of protests in India


किसान आंदोलन (2020-21) : कृषि सुधारों के खिलाफ ऐतिहासिक घेराबंदी

केंद्र सरकार ने 2020 में कृषि बाजारों को उदार बनाने के उद्देश्य से तीन कृषि कानून पारित किए। किसानों को आशंका थी कि इससे सरकारी मंडियों (APMC) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था कमजोर हो जाएगी।

  • ऐतिहासिक वापसी : संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं (सिंघू, टिकरी, गाजीपुर) पर महीनों तक कड़े मौसम के बावजूद डटे रहे।
  • क्या बदला? लगभग एक वर्ष तक चले इस आंदोलन के बाद नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में जन-दबाव द्वारा सरकार से बड़ी नीतिगत रियायत हासिल करने का सबसे प्रमुख उदाहरण बना।

‘कॉकरोच’ और युवा आंदोलन (2026): परीक्षा धांधली से प्रशासनिक जवाबदेही तक

हालिया दौर में छात्रों और युवाओं का असंतोष एक नए स्वरूप में सामने आया है। बेरोजगारी पर प्रशासनिक बयानों और राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (NEET/मेडिकल परीक्षाओं) में हुई कथित अनियमितताओं के विरोध में युवाओं ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का दबाव समूह बनाया।

  • क्या बदला? जुलाई 2026 में व्यापक छात्र प्रदर्शनों के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना पद छोड़ना पड़ा। वर्तमान में यही युवा और विपक्षी दल चुनाव आयोग की पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

भारत का इतिहास गवाह है कि सत्ता किसी भी दल की रही हो, जब-जब नीतियों में आम जनता की उपेक्षा हुई है या लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं, तब-तब सड़कों पर उठे असंतोष के सुरों ने देश की राजनीति को नई दिशा दी है। ये प्रदर्शन साबित करते हैं कि भारतीय लोकतंत्र केवल हर पांच साल में वोट देने तक सीमित नहीं है, बल्कि जन-विरोध इसका एक जीवित और सशक्त स्तंभ है।

भारत में विरोध प्रदर्शनों का इतिहास: भाषा आंदोलन से ‘राम मंदिर, किसान और युवा प्रदर्शनों’ तक, जानें कैसे बदला देश का सियासी नक्शा

भारत में विरोध प्रदर्शनों का इतिहास: भाषा आंदोलन से 'राम मंदिर, किसान और युवा प्रदर्शनों' तक, जानें कैसे बदला देश का सियासी नक्शा

History of protests in India

History of protests in India: हाल के दिनों में चुनावी पारदर्शिता और निष्पक्षता की मांग को लेकर दिल्ली के मध्य भागों (जंतर-मंतर और कनॉट प्लेस) में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे युवा प्रदर्शनकारियों, छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने जब सड़कों का रुख किया, तो देश को एक बार फिर भारत के समृद्ध और संघर्षशील लोकतांत्रिक आंदोलनों के इतिहास की याद आ गई।

प्रशासन और सत्ता द्वारा अक्सर ऐसे आंदोलनों को “कानून-व्यवस्था का संकट” या “राष्ट्रविरोधी” करार देने की कोशिशें की जाती रही हैं। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि औपनिवेशिक काल से लेकर आज तक जन-आंदोलन भारतीय लोकतंत्र का ‘लाइफब्लड’ (प्राणतत्व) रहे हैं।

आइए एक नज़र डालते हैं भारत के उन ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शनों पर, जिन्होंने न केवल नीतियां बदलीं, बल्कि सत्ता के समीकरण भी पलट दिए:

दक्षिण भारत का ‘हिंदी विरोधी आंदोलन’ (1965): भाषा और अस्मिता की लड़ाई

संविधान के तहत 26 जनवरी 1965 से केंद्र सरकार के कामकाज में हिंदी को प्राथमिक आधिकारिक भाषा बनाने की योजना थी। तमिलनाडु के लोगों को आशंका थी कि इससे उनके रोजगार और प्रशासनिक अवसरों पर बुरा असर पड़ेगा।

  • नेतृत्व और असर : द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के शीर्ष नेताओं—सी.एन. अन्नादुरई और एम. करुणानिधि—के नेतृत्व में तमिलनाडु में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए।
  • क्या बदला? तत्कालीन प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने आश्वासन दिया कि जब तक गैर-हिंदी भाषी राज्य चाहेंगे, तब तक अंग्रेजी का इस्तेमाल जारी रहेगा। इसका राजनीतिक नतीजा यह हुआ कि 1967 के चुनाव में DMK ने कांग्रेस को तमिलनाडु की सत्ता से उखाड़ फेंका और राज्य की राजनीति हमेशा के लिए बदल गई।

History of protests in India


जेपी आंदोलन (1970 का दशक): ‘संपूर्ण क्रांति’ और पहली गैर-कांग्रेसी सरकार

1973-74 में गुजरात और बिहार से शुरू हुआ छात्र आंदोलन जब वयोवृद्ध गांधीवादी नेता जयप्रकाश नारायण (JP) के हाथों में आया, तो यह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के खिलाफ एक राष्ट्रीय जनाक्रोश बन गया।

  • ऐतिहासिक प्रभाव : जेपी के ‘संपूर्ण क्रांति’ के आह्वान के जवाब में 25 जून 1975 को देश में आपातकाल (Emergency) लागू कर दिया गया।
  • क्या बदला? 1977 में आपातकाल हटने के बाद पूरा विपक्ष एकजुट हुआ और लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की ऐतिहासिक हार हुई। भारत के इतिहास में पहली बार केंद्र में गैर-कांग्रेसी सरकार (जनता पार्टी) बनी।

मंडल आयोग का विरोध और उदारीकरण के खिलाफ आंदोलन (1990 का दशक)

1990 में प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह (V.P. Singh) ने अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के लिए सरकारी नौकरियों में 27% आरक्षण लागू करने की घोषणा की।

  • मंडल बनाम कमंडल : इसके विरोध में जहां देश भर में सवर्ण छात्रों ने तीखे विरोध प्रदर्शन किए, वहीं सामाजिक न्याय के समर्थक इसके पक्ष में खड़े हुए। 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने ‘क्रीमी लेयर’ को बाहर रखते हुए आरक्षण को वैध ठहराया, जिसने भारतीय राजनीति में ‘जातिगत समीकरणों’ को केंद्र में ला दिया।
  • आर्थिक सुधारों के खिलाफ हड़ताल (1991) : तत्कालीन पीएम पी.वी. नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री डॉ. मनमोहन सिंह द्वारा लाए गए उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण (LPG) का ट्रेड यूनियनों और वामपंथियों ने कड़ा विरोध किया। हालांकि, यह आंदोलन नीतिगत सुधारों को रोक नहीं सका और भारत आधुनिक अर्थव्यवस्था की राह पर बढ़ गया।

राम मंदिर आंदोलन (1990 ) आडवाणी की राम रथयात्रा

लालकृष्ण आडवाणी की राम रथयात्रा 25 सितंबर 1990 को गुजरात के सोमनाथ से शुरू हुई थी। इसका उद्देश्य अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए जनसमर्थन जुटाना था। यह यात्रा 10 हजार किलोमीटर की दूरी तय करते हुए 30 अक्टूबर 1990 को अयोध्या पहुंचने वाली थी, लेकिन 23 अक्टूबर 1990 को बिहार के समस्तीपुर में तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के आदेश पर आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया।

  • इस यात्रा से क्या बदला? : इस यात्रा के बाद राम मंदिर आंदोलन ने और तेजी पकड़ी साथ ही आडवाणी की इस यात्रा का भाजपा को चुनावी फायदा मिला। भाजपा के सत्ता में पहुंचने की बड़ी वजह आडवाणी की इस रथयात्रा को भी माना जाता है। हालांकि राम मंदिर आंदोलन का इतिहास काफी पुराना है। 1853 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद परिसर के आसपास पहली बार धार्मिक हिंसा दर्ज की गई थी, जिसके बाद ब्रिटिश प्रशासन ने परिसर के बाहर हिंदुओं को पूजा के लिए चबूतरा (राम चबूतरा) बनाने की अनुमति दी थी।

History of protests in India


अन्ना हजारे का ‘भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन’ (2011): इंडिया अगेंस्ट करप्शन

UPA सरकार के कार्यकाल में बड़े भ्रष्टाचार विवादों के बीच सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की।

  • जन-आक्रोश और नतीजा : इस आंदोलन से अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी और प्रशांत भूषण जैसे चेहरे उभरे। दिसंबर 2013 में संसद ने जन लोकपाल कानून पारित किया। बाद में केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी (AAP) का गठन किया और दिल्ली की सत्ता हासिल की।

‘निर्भया’ आंदोलन (2012): महिलाओं की सुरक्षा और सख्त कानूनी सुधार

16 दिसंबर 2012 को दिल्ली में हुए भीषण सामूहिक दुष्कर्म और हत्या कांड के बाद पूरा देश उबल पड़ा। इंडिया गेट से लेकर देश के हर कोने में युवाओं और महिलाओं ने स्वप्रेरित होकर विरोध जताया।

  • क्या बदला? जनता के भारी दबाव में सरकार ने जस्टिस वर्मा समिति का गठन किया। संसद ने क्रिमिनल लॉ (अमेंडमेंट) एक्ट 2013 पारित किया, जिसके तहत यौन अपराधों की कानूनी परिभाषाओं को विस्तृत किया गया और कड़ी सजा का प्रावधान किया गया।

CAA, NRC और NPR विरोधी आंदोलन (2019-20)

दिसंबर 2019 में पारित नागरिकता संशोधन कानून (CAA) ने पड़ोसी देशों से आए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों के लिए नागरिकता का रास्ता आसान किया, जिससे इसके संवैधानिक और धर्मनिरपेक्ष स्वरूप पर देशव्यापी बहस शुरू हुई। NRC और NPR को लेकर भी आंदोलन हुआ।

  • प्रतीक और असर : दिल्ली के शाहीन बाग में हुआ आंदोलन नागरिकता संशोधन कानून (CAA), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) का विरोध करने के लिए आयोजित किया गया था।इस दौरान ‘शाहीन बाग’ महिलाओं के नेतृत्व वाले धरने का प्रमुख प्रतीक बना। हालांकि, आंदोलन कानून को निरस्त नहीं करा सका, लेकिन इसके क्रियान्वयन में देरी हुई और सरकार ने मार्च 2024 में इसके नियम अधिसूचित किए।

History of protests in India


किसान आंदोलन (2020-21) : कृषि सुधारों के खिलाफ ऐतिहासिक घेराबंदी

केंद्र सरकार ने 2020 में कृषि बाजारों को उदार बनाने के उद्देश्य से तीन कृषि कानून पारित किए। किसानों को आशंका थी कि इससे सरकारी मंडियों (APMC) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था कमजोर हो जाएगी।

  • ऐतिहासिक वापसी : संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में हजारों किसान दिल्ली की सीमाओं (सिंघू, टिकरी, गाजीपुर) पर महीनों तक कड़े मौसम के बावजूद डटे रहे।
  • क्या बदला? लगभग एक वर्ष तक चले इस आंदोलन के बाद नवंबर 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की। यह स्वतंत्र भारत के इतिहास में जन-दबाव द्वारा सरकार से बड़ी नीतिगत रियायत हासिल करने का सबसे प्रमुख उदाहरण बना।

‘कॉकरोच’ और युवा आंदोलन (2026): परीक्षा धांधली से प्रशासनिक जवाबदेही तक

हालिया दौर में छात्रों और युवाओं का असंतोष एक नए स्वरूप में सामने आया है। बेरोजगारी पर प्रशासनिक बयानों और राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (NEET/मेडिकल परीक्षाओं) में हुई कथित अनियमितताओं के विरोध में युवाओं ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) नाम का दबाव समूह बनाया।

  • क्या बदला? जुलाई 2026 में व्यापक छात्र प्रदर्शनों के चलते केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को अपना पद छोड़ना पड़ा। वर्तमान में यही युवा और विपक्षी दल चुनाव आयोग की पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे को लेकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं।

भारत का इतिहास गवाह है कि सत्ता किसी भी दल की रही हो, जब-जब नीतियों में आम जनता की उपेक्षा हुई है या लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल उठे हैं, तब-तब सड़कों पर उठे असंतोष के सुरों ने देश की राजनीति को नई दिशा दी है। ये प्रदर्शन साबित करते हैं कि भारतीय लोकतंत्र केवल हर पांच साल में वोट देने तक सीमित नहीं है, बल्कि जन-विरोध इसका एक जीवित और सशक्त स्तंभ है।

Stock Market Today : बाजार पर आज इन खबरों का दिखेगा असर, कोई ट्रेड लेने से पहले इन पर डाल लें एक नजर

Market news : भारतीय बाजार के लिए अच्छे संकेत दिख रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी में 80 प्वाइंट से ज्यादा की तेजी है। FIIs की कैश में बिकवाली हुई है, लेकिन वायदा में बड़ी कवरिंग नजर आई है। अमेरिकी बाजार में भी कल जोरदार रिकवरी दिखी। डाओ में 550 प्वाइंट से ज्यादा का उछाल दिखा। नैस्डैक और S&P में भी बढ़त रही। एशियाई बाजारों में भी रौनक दिख रही है। क्रूड 105 डॉलर प्रति बैरल के करीब दिख रहा है। US बॉन्ड यील्ड में भी नरमी आई है।

यहां हम आपके लिए तमाम समाचार प्लेटफॉर्मों पर चल रही आज की ऐसी अहम खबरों की एक सूची जारी कर रहें हैं जो भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों को प्रभावित कर सकते हैं।

मार्केट ओवरव्यू

गुरुवार को भारतीय इक्विटी बेंचमार्क में तेजी आई। जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO की घोषणा के बाद ऑटो, IT, प्राइवेट बैंकों और रिलायंस इंडस्ट्रीज में जोरदार खरीदारी के चलते निफ्टी और सेंसेक्स, दोनों में 1.5 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। कारोबार के अंत में, सेंसेक्स 1,533.72 अंक यानी 2.11 प्रतिशत की तेजी के साथ 74,315.61 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 374.65 अंक यानी 1.66 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,997.35 पर बंद हुआ।

SEBI ने CAS में किए बड़े बदलाव, एक्सपायरी पर VWAP से होगा सेटलमेंट

मार्केट रेगुलेटर सेबी ने क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में बड़े बदलाव किए है। एक्सपायरी के दिन CAS के बजाए पुराने VWAP सिस्टम से सेटलमेंट होगा। CAS की टाइमिंग बदली गई है। अब CAS 3.30 बजे से 10 मिनट का होगा। यह फैसला 7 दिसंबर से लागू होगा।

टेक महिंद्रा के नतीजे अनुमान के मुताबिक, Q2 में 0.9% रही विप्रो की IT सर्विसेज रेवेन्यू ग्रोथ

टेक महिंद्रा के दूसरी तिमाही के नतीजे अनुमान के मुताबिक रहे है। इसके मुनाफे में 7 परसेंट तो रेवेन्यू में 3 परसेंट की बढ़ोतरी हुई है। विप्रो के Q2 रिजल्ट भी उम्मीद के करीब रहे हैं। इसकी CC रेवेन्यू ग्रोथ फ्लैट रही है। IT सर्विसेज रेवेन्यू ग्रोथ 0.9% रही है। हालांकि Q3 में इसके माइनस 1.5% से 0.5% की रेंज में रहने का अनुमान किया गया है। वहीं, परसिस्टेंट सिस्टम का मुनाफा 27 परसेंट गिरा है। लेकिन CC रेवेन्यू ग्रोथ 7.8% रही है।

एंजेव वन का Q2 मुनाफा 44.7% बढ़ा, रेवेन्यू फ्लैट

दूसरी तिमाही में एंजेव वन के मुनाफे में तिमाही आधार पर 45 परसेंट का उछाल आया है। लेकिन रेवेन्यू ग्रोथ फ्लैट रही है। मार्जिन में 1060 Bps का तगड़ा उछाल देखने को मिला है। वहीं L&T FINANCE का Q2 मुनाफा 33 परसेंट बढ़ा है। इसे मजबूत रिटले ग्रोथ और NII में उछाल से बूस्ट मिला है।

JIO के IPO पर बोले आकाश अंबानी

JIO के IPO पर आकाश अंबानी ने कहा कि देश को डिजिटल सर्विस से कनेक्ट करना Jio का मिशन है। भारत में विकसित टेक्नोलॉजी का दूसरे देशों में इस्तेमाल होगा। IPO पर ईशा अंबानी ने कहा कि लॉन्ग टर्म प्लानिंग, स्केल और एग्जीक्यूशन पर फोकस है। यह आईपीओ 21 अक्टूबर से खुलेगा। इसकी प्राइस बैंड 1065 से 1119 रुपए प्रति शेयर है।

चीनी 21 सेंट के पार

सप्लाई की चिंता से इंटरनेशनल मार्केट में चीनी की कीमतों में जोरदार उछाल आया है। इसका भाव 21 सेंट प्रति पाउंड के साथ करीब 2 सालों की ऊंचाई पर पहुंच गया है। ब्राजील में क्रशिंग में देरी और भारत में कमजोर मॉनसून से उत्पादन गिरने की आशंका से इसके भाव में तेजी आई है।

एशियन करेंसी

शुक्रवार, 16 अक्टूबर को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अधिकांश एशियाई मुद्राओं में कमजोरी आई है, जिसमें दक्षिण कोरियाई वॉन और फिलीपीन पेसो सबसे ज्यादा गिरे हैं। इंडोनेशियाई रुपिया में 0.20 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि दक्षिण कोरियाई वॉन 0.36 प्रतिशत और फिलीपीन पेसो 0.23 प्रतिशत कमजोर हुए हैं। जापानी येन में 0.08 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है, वहीं थाई बाह्ट और सिंगापुर डॉलर में 0.05-0.05 प्रतिशत की कमी आई है। मलेशियाई रिंगित और चीनी रेनमिनबी में भी मामूली गिरावट देखी गई है। ये 0.02 प्रतिशत और 0.018 प्रतिशत नीचे आए हैं। इसके विपरीत, ताइवान डॉलर में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.05 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई है। यह 9 लिस्टेड एशियाई मुद्राओं में एकमात्र ऐसी मुद्रा है जिसमें तेजी आई है।

विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बिकवाली का सिलसिला जारी रखा और 15 अक्टूबर को लगभग 5,285 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को कुछ सहारा दिया और इस दौरान 3,319 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

 

Market cues : 22850 के ऊपर टिकने पर ही निफ्टी के लिए खुलेगा 23000 की ओर बढ़ने का रास्ता

बेटे की याद में हर दिन 300 लोगों का भरते हैं 70 साल के बापू | Free Food | 70 YO Dada | Gondal

बेटे की याद में हर दिन 300 लोगों का भरते हैं 70 साल के बापू | Free Food | 70 YO Dada | Gondal

गुजरात के गोंडल में मुफ़्त टिफिन सेवा चलाने वाले 70 साल के चंदू बापू ने 20 साल पहले अपने बेटे को खोने के बाद एक संकल्प लिया था: “मैं किसी को भूखे पेट नहीं सोने दूँगा!”

आज बापू उन लोगों का पेट भरते हैं, जो देख नहीं सकते, बोल नहीं सकते, दिव्यांग हैं, शारीरिक रूप से असमर्थ हैं या बेसहारा हैं। उन्होंने सिर्फ़ 10 लोगों से इस सेवा की शुरुआत की थी, लेकिन आज 300 लोग बापू की गाड़ी का इंतज़ार करते हैं! जैसे ही बापू की गाड़ी पहुँचती है, उनके चेहरों पर मुस्कान आ जाती है।

बापू को आपके साथ की ज़रूरत है। यह कोई संस्था नहीं, बल्कि एक पिता का अपने बेटे के प्रति प्यार है और निःस्वार्थ सेवा है।

आपकी छोटी-सी मदद किसी की भूख मिटा सकती है।
संपर्क करें- 80000 83700

और इस वीडियो को ज़रूर शेयर करें, ताकि आपके एक शेयर से किसी को खाना मिल सके। :heart:
@free_tifin_seva

[Chandu Bapu free food service Gondal Gujarat, 70-year-old man feeding 300 needy people daily, Free tiffin service for disabled people in Gujarat]

#thebetterindia #goodnews #positivestories #indianews #thebetterindiahindi #hindi

Follow us for more:

Facebook: https://www.facebook.com/thebetterindia.hindi
Instagram: https://www.instagram.com/thebetterindia.hindi/
Twitter: https://twitter.com/TbiHindi
LinkedIn: https://www.linkedin.com/company/the-better-india-hindi/

Website: https://hindi.thebetterindia.com/

ये कार उड़ती भी है और हवा में पलटी भी मारती है! Elon Musk की Tesla ने दिखाया नया Roadster

Tesla : Tesla ने नई Roadster से पर्दा उठा दिया है। कंपनी का दावा है कि यह कार हवा में भी उछल सकती कंपनी का दावा है कि यह सुपरकार सिर्फ सड़क पर दौड़ेगी ही नहीं, बल्कि हवा में भी उछल सकती है। Yahoo Finance की रिपोर्ट के मुताबिक, कार में लगे एयर थ्रस्टर्स की मदद से यह कुछ देर के लिए हवा में उठ सकती है।टेक्सास के वाको में SpaceX फैसिलिटी में हुए डेमो में Tesla Roadster को रैंप से छलांग लगाते, हवा में 360 डिग्री घूमते और फिर सुरक्षित जमीन पर उतरते दिखाया गया। इस दौरान CEO एलन मस्क ने कहा, “खैर, यह काम कर गया।”

रैंप से छलांग लगाकर हवा में पहुंची Tesla Roadster

टेक्सास के वाको में SpaceX की फैसिलिटी में Tesla ने नई Roadster का डेमो किया। इसमें कार को रैंप से उछलते और हवा में घूमते हुए दिखाया गया। वैक्यूम फैन सिस्टम की मदद से कार रैंप पर टिकी रही, जबकि एयर थ्रस्टर्स ने हवा में उसका संतुलन बनाए रखने में मदद की। इसके बाद कार सुरक्षित जमीन पर उतर गई।कार्यक्रम में Roadster को कई Tesla गाड़ियों, यहां तक कि एक सेमी ट्रक के ऊपर से गुजरते हुए भी दिखाया गया। कंपनी ने इस डेमो के जरिए कार के खास फीचर्स और नई तकनीक को दिखाने की कोशिश की।

तीन वेरिएंट में आएगी कार

Tesla ने नई Roadster को तीन वेरिएंट में पेश किया है। हर मॉडल में सीटों की संख्या और परफॉर्मेंस के हिसाब से अलग-अलग फीचर्स मिलेंगे।

पहला वेरिएंट : यह सड़क पर चलाने के लिए तैयार दो सीटों वाला मॉडल है। इसमें मल्टी-मोड सक्शन सिस्टम दिया गया है, जो सड़क पर प्रदर्शन को बेहतर बनाता है।

दूसरा वेरिएंट : यह भी दो सीटों वाला मॉडल है। इसमें सक्शन सिस्टम के साथ पीछे की ओर कोल्ड-गैस थ्रस्टर्स दिए गए हैं। कंपनी के मुताबिक, यह 0 से 60 मील प्रति घंटे की रफ्तार 0.9 सेकंड से कम में पकड़ सकता है।

तीसरा वेरिएंट : यह एक सीट वाला मॉडल है। इसमें कार के चारों ओर कोल्ड-गैस थ्रस्टर्स लगे हैं, जो आगे और ऊपर की ओर गति देने के साथ हवा में घूमने में मदद करते हैं। इसी वेरिएंट को सीमित दूरी तक उड़ान भरने में सक्षम बताया गया है।

https://x.com/elonmusk/status/2110913107094606330

 

सचाई झुठलाने की सरकारी कोशिश

क्या दिल्ली में 10 अक्टूबर को मेट्रो की सेवा नहीं बंद थी? क्या मेडिकल में दाखिले के लिए होने वाली नीट की परीक्षा के पेपर लीक नहीं हुए थे? क्या नेशनल टेस्टिंग एजेंसी जिन परीक्षाओं का आयोजन कराती है उनमें से पिछले नौ साल में किसी परीक्षा के पेपर लीक नहीं हुए हैं? राजधानी दिल्ली में या दूसरे भी किसी शहर में किसी भी नागरिक से ये सवाल पूछेंगे तो उसका जवाब यही होगा कि मेट्रो बंद थी और पेपर लीक हुए हैं। दिल्ली और एनसीआर में रहने वाला हर व्यक्ति निजी अनुभव से जानता है कि मेट्रो की सेवा बंद थी। जहां तक इंटरनेट सेवा की बात है तो उस पर तो एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट गुरुवार, 15 अक्टूबर को ही छपी है, जिसके मुताबिक पूरी दुनिया में इंटरनेट बंद होने के मामले में भारत दूसरे स्थान पर है। पहले स्थान पर सैनिक तानाशाही वाला देश म्यांमार है। सो, मेट्रो बंद थी और इंटरनेट भी बंद थे।

परंतु दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर कहा है कि मेट्रो सेवा बंद नहीं थी। उसने कहा है कि सिर्फ 45 मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद किया गया था। यानी मेट्रो की सेवा सीमित की गई थी। सोचें, कितना आसान है सरकार के लिए यह कह देना! 45 मेट्रो स्टेशनों पर लोग अंदर नहीं जा सकते थे और न बाहर निकल सकते थे। फिर यह सेवा सीमित करना कैसे हुआ? जिन लोगों को इन 45 मेट्रो स्टेशनों पर ट्रेन पकड़नी थी या इन स्टेशनों पर उतरना था उनके लिए तो मेट्रो बंद ही हुई न! सो, लाखों लोगों के लिए मेट्रो की सेवा बंद थी। सरकार एक तकनीकी टर्म का इस्तेमाल करके अदालत को बता रही है कि उसने अदालत की अवमानना नहीं की है। वास्तव में 10 और 11 अक्टूबर को कई इलाकों में मेट्रो बंद थी और ऐसा नहीं था कि मेट्रो ने स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट बंद की तो यात्रियों के लिए कोई और बंदोबस्त किया। एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक पहुंचाने के लिए कोई फीडर बस सेवा नहीं चलाई गई थी। इसलिए यह कहना सरासर गलत है कि मेट्रो सेवा बंद नहीं थी। यह हलफनामा देकर झूठ बोलना है।

ऐसे ही एक रिपोर्ट आई है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी एनटीए ने शिक्षा मामलों की संसदीय समिति के सामने कहा है कि 2017 में एनटीए के गठन के बाद से आज तक कोई पेपर लीक नहीं हुआ है। यह झूठ नहीं, बल्कि सफेद झूठ है। कांग्रेस सांसद मुकुल वासनिक की अध्यक्षता वाली कमेटी के सामने एनटीए ने कहा कि कुछ अनियमितता का शिकायत हुई है लेकिन पेपर लीक नहीं हुआ है। सवाल है कि तीन मई 2026 को हुई नीट की परीक्षा को क्यों रद्द किया गया? सात मई को पेपर लीक होने की खबर आई और 12 मई को एनटीए ने परीक्षा रद्द दी, जिसका आयोजन 21 जून को किया गया। एनटीए और शिक्षा मंत्रालय दोनों की ओर से कई बार कहा गया कि पेपर लीक होने के कारण परीक्षा रद्द हुई है। इस बार तो किसी और धांधली या अनियमितता की खबर भी नहीं थी। इसी तरह 2024 के नीट की परीक्षा पेपर लीक और धांधली दोनों कारणों से प्रभावित हुई थी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कई जगह परीक्षा रद्द की गई। उसके बाद पेपर लीक रोकने का एक कानून बना। जिस रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने कानून बनाया उसमें अनियमितता को ‘पेपर लीक केस’ के तौर पर दर्ज किया गया। सोचें, नीट परीक्षा को लेकर 356 केस दर्ज हैं, जेईई मेन्स के 31, यूजीसी नेट के 26 और सीयूईटी यूजी के 14 केस दर्ज हैं। पर एनटीए कह रहा है कि सब कुछ ठीक है!

ये मोदी की पुलिस है!

जी हां, ये मोदी और अमित शाह की पुलिस है, जो प्रदर्शनकारियों पर लाठी चलाती है और उसके बाद खुद को विक्टिम बताती है, रोते-कलपते वीडियो बनाती है, अपने परिजनों से अपील करवाती है और अगर उसके ऊपर महिलाओं से बदसलूकी का आरोप लगे तो आरोप लगाने वालों पर एससी, एसटी एक्ट में केस कर देती है। इससे पहले कभी और कहीं की पुलिस ने ऐसा काम नहीं किया होगा। दिल्ली के एक एसीपी स्तर के वरिष्ठ अधिकारी विवेक भगत ने तीन पत्रकारों के ऊपर एससी, एसटी एक्ट में केस दर्ज करा दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि जंतर मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पत्रकारों ने उनके लिए जातिसूचक शब्द कहे और उनको अपमानित किया है। गौरतलब है कि डीसीपी विवेक भगत तीन अक्टूबर को हुए प्रदर्शन के दौरान एक दूसरे विवाद में फंसे थे। एक महिला पत्रकार ने उनके ऊपर आरोप लगाया था कि भगत ने उनके ऊपर यौन हमला किया। महिला पत्रकार ने आरोप लगाया कि भगत ने उनके सीने पर हाथ मारा। इस विवाद के बाद विवेक भगत ने डीसीपी का अतिरिक्त चार्ज लेने से मना कर दिया था।

अब उस घटना के 11 दिन के बाद विवेक भगत ने तीन महिला पत्रकारों के ऊपर एससी, एसटी कानून के तहत मुकदमा दर्ज करा दिया है। यानी जिन महिला पत्रकारों ने अपने ऊपर यौन हमले का आरोप लगाया उनके ऊपर दिल्ली पुलिस के एसीपी ने एससी, एसटी एक्ट में केस कर दिया है। इस तरह के मामले पहले भारत के दूरदराज के गांवों से आते थे। जहां महिलाओं के यौन उत्पीड़न या एससी, एसटी एक्ट के तहत लोगों को फंसाने या इन कानूनों के दुरुपयोग के मुकदमे होते थे। अब दिल्ली में पुलिस के बड़े अधिकारी पत्रकारों के खिलाफ एससी, एसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज करा रहे हैं!

मामला इतना भर नहीं है। जंतर मंतर के प्रोटेस्ट के बाद दिल्ली पुलिस की महिला अधिकारियों का वीडियो बनवाया गया और एक बेहद मार्किक गीत लगा कर उसे जारी किया गया, जिसमें दिल्ली पुलिस को पीड़ित दिखाया जा रहा है। 20 जुलाई के प्रोटेस्ट के बाद भी पुलिस वालों के परिजनों से प्रेस कॉन्फ्रेंस करा कर पुलिस को पीड़ित दिखाया गया था। हालांकि इसकी एक व्याख्या यह भी है कि पुलिस की बर्बरता को जस्टिफाई करने के लिए यह सब हो रहा है।

दिल्ली में ट्रेड फेयर अब 13 से ही शुरू होगा

दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले का आयोजन 1980 से हो रहा है। दिल्ली के प्रगति मैदान में हर साल 14 नवंबर को मेला शुरू होता है और 27 नवंबर तक चलता है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के लोगों के लिए यह सालाना आयोजन एक बड़े आकर्षण वाला आयोजन होता है। युवा बड़ी संख्या में इसमें जाते हैं। पिछले कुछ समय से यह एक बड़े व्यापारिक आयोजन में बदल गया है। देश भर के व्यापारी अपने उत्पादों के प्रचार के लिए इस मेले में पहुंचते हैं। राज्यों के पैवेलियन अलग होते हैं, जहां राज्यों की संस्कृति, धर्म, कला, व्यापार आदि की जानकारी दी जाती है।

इस साल भी मेले का आय़ोजन होगा लेकिन इस साल यह मेला 13 नवंबर से ही शुरू होगा। आयोजन शुरू होने के 46 साल के बाद और केंद्र में नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के 12 साल बाद तारीख बदली गई है। ध्यान रहे 14 नवंबर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू का जन्मदिन है। हालांकि इस बात का बहुत प्रचार नहीं किया जाता है कि नेहरू के जन्मदिन के मौके पर व्यापार मेला शुरू होता है। फिर भी इसकी तारीख बदल दी गई। नेहरू मेमोरियल एंड म्यूजियम सहित कई चीजों के नाम पहले बदले जा चुके हैं। केंद्र सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन की तीन योजनाओं से इंदिरा गांधी का नाम हटाया है।

गोवा फॉरवर्ड पार्टी का मोहभंग हो गया!

गोवा में गठबंधन की नई तस्वीर बन रही है। पिछले दिनों आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने गोवा की राजनीति में हलचल मचा दी थी। उन्होंने गोवा फॉरवर्ड पार्टी के साथ अलायंस बना कर इसका ऐलान कर दिया था। एक बड़े कार्यक्रम में गोवा फॉरवर्ड पार्टी के नेता विजय सरदेसाई केसाथ केजरीवाल ने मीडिया से बात की और ‘गोवा फर्स्ट’ अलांयस का ऐलान किया। गौरतलब है कि पहले गोवा फॉरवर्ड पार्टी यानी जीएफपी कांग्रेस के साथ थी। इस गठबंधन को कांग्रेस के लिए झटका माना गया। लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि विजय सरदेसाई का मोहभंग हो रहा है या उनको गोवा की राजनीति की वास्तविकता का अंदाजा हो रहा है।

विजय सरदेसाई ने अब ‘गोवा फर्स्ट’ की बजाय ग्रैंड अलायंस की बात शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि वे चाहते हैं कि इस गठबंधन में कांग्रेस को भी रखा जाए। हालांकि कांग्रेस किसी हाल में आम आदमी पार्टी के साथ तालमेल नहीं करेगी। इसका कारण पंजाब का चुनाव है। अगर कांग्रेस और आप ने तालमेल किया तो पंजाब में कांग्रेस की उम्मीदें पंक्चर होंगी। हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि अरविंद केजरीवाल चाहेंगे कि ग्रैंड अलायंस बन जाए। उनको इसका गोवा में तो लाभ होगा ही पंजाब में ज्यादा फायदा हो जाएगा। 2021 में कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल में लेफ्ट से तालमेल किया था, जिसका बड़ा नुकसान उसको केरल में उठाना पड़ा था। वैसे ही अगर इस बार कांग्रेस ने गोवा में आप से तालमेल किया तो पंजाब में नुकसान होगा। तभी कांग्रेस नेता विजय सरदेसाई के प्रस्ताव पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यह संभव है कि वे केजरीवाल से तालमेल तोड़ें तब कांग्रेस से उनका गठबंधन हो सकता है।