मोदी सरकार से क्यों नाराज हैं वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पति प्रभाकर? जानिए क्यों हैं एक बार फिर चर्चा में

मोदी सरकार से क्यों नाराज हैं वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के पति प्रभाकर? जानिए क्यों हैं एक बार फिर चर्चा में

Parakala Prabhakar: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति और देश के जाने-माने राजनीतिक अर्थशास्त्री डॉ. परकला प्रभाकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार की आर्थिक और सामाजिक नीतियों के मुखर आलोचक रहे प्रभाकर अब सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे हैं। वे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके, अभिनेता-सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश राज और अन्य सामाजिक नेताओं के साथ मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के विरोध में होने वाले देशव्यापी प्रदर्शन मंच साझा करेंगे। सोशल मीडिया पर ‘हर गली में जंतर-मंतर!’ का आह्वान करते हुए उनके इस कदम ने देश के राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

कौन हैं डॉ. परकला प्रभाकर?

डॉ. परकला प्रभाकर भारत के प्रमुख राजनीतिक अर्थशास्त्री, स्तंभकार और सामाजिक-राजनीतिक विश्लेषक हैं। उन्होंने प्रतिष्ठित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से एमफिल और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से डॉक्टरेट (Ph.D.) की डिग्री प्राप्त की है। आंध्र प्रदेश के एक प्रमुख राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले प्रभाकर के पिता परकला शेषावतारम आंध्र प्रदेश सरकार में लंबे समय तक वरिष्ठ मंत्री रहे, जबकि उनकी मां परकला कालिकाम्बा भी विधायक रह चुकी हैं। ALSO READ: अभिजीत दीपके का बड़ा बयान, CJP के प्रोटेस्‍ट पर लगेगा ब्रेक, जानिए क्‍यों लिया यह फैसला?

 

डॉ. प्रभाकर की शादी निर्मला सीतारमण से 1986 में हुई थी, जब दोनों JNU में अध्ययनरत थे। जहां निर्मला सीतारमण भारतीय जनता पार्टी (BJP) की वरिष्ठ नेता और केंद्र में वित्त मंत्री हैं, वहीं प्रभाकर स्वतंत्र वैचारिक और राजनीतिक दृष्टिकोण रखते हैं।   प्रभाकर का राजनीतिक करियर विविध रहा है। अपने करियर की शुरुआत में वे कांग्रेस की छात्र शाखा (NSUI) और बाद में आंध्र प्रदेश में कांग्रेस पार्टी से जुड़े रहे। 2000 के दशक में उन्होंने कुछ समय के लिए भाजपा के प्रवक्ता के रूप में काम किया। बाद में वे दक्षिण भारतीय अभिनेता चिरंजीवी द्वारा गठित ‘प्रजा राज्यम पार्टी’ में शामिल हुए।

 

वर्ष 2014 से 2018 के दौरान जब आंध्र प्रदेश में चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व वाली टीडीपी (TDP) सरकार थी, तब डॉ. प्रभाकर को कैबिनेट मंत्री के दर्जे के साथ आंध्र प्रदेश सरकार का संचार सलाहकार (Communications Advisor) नियुक्त किया गया था। बाद में 2018 में विपक्षी दलों द्वारा हितों के टकराव का आरोप लगाए जाने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। ALSO READ: CJP नेता अभिजीत दिपके को सशर्त जमानत, बॉन्ड की शर्त के बाद अब आंदोलन का क्या होगा?

मोदी सरकार की नीतियों के रहे हैं तीखे आलोचक

निर्मला सीतारमण के केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण पद पर होने के बावजूद, डॉ. परकला प्रभाकर निरंतर केंद्र सरकार की आर्थिक, सामाजिक और चुनावी नीतियों की आलोचना करते रहे हैं। उन्होंने नोटबंदी, जीएसटी और बढ़ती बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर केंद्र सरकार को बार-बार घेरा है। उनकी किताब ‘द क्रुक्ड टिम्बर ऑफ न्यू इंडिया’ (The Crooked Timber of New India) में उन्होंने मोदी सरकार के आर्थिक मॉडल और शासन प्रणाली पर विस्तार से विश्लेषणात्मक प्रहार किया है।

 

हालिया समय में उन्होंने चुनावी बॉन्ड (Electoral Bonds) व्यवस्था और चुनाव आयोग के कामकाज के तरीकों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। 23 अक्टूबर को आयोजित हो रहे विरोध प्रदर्शन में डॉ. परकला प्रभाकर की भागीदारी को लेकर सियासी गरमाहट बढ़ गई है। यह प्रदर्शन ‘पीपल अगेंस्ट SIR’ गठबंधन द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जो चुनाव आयोग द्वारा चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ है।

 

इस मंच पर वे CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके, प्रकाश राज, प्रशांत भूषण, किसान नेता राकेश टिकैत, तुषार गांधी और आइसा (AISA) अध्यक्ष नेहा बोरा के साथ नजर आएंगे। सोशल मीडिया मंच एक्स (X) पर अपनी भागीदारी की पुष्टि करते हुए प्रभाकर ने लिखा- हर गली में जंतर-मंतर! लोकतंत्र की बहाली के लिए जन-मार्च। आइए, इस चुनौती का सामना करें। उनकी यह भागीदारी एक बार फिर यह साबित करती है कि पारिवारिक संबंधों से परे, वैचारिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक मुद्दों पर अपनी बात बेबाकी से रखना ही डॉ. परकला प्रभाकर की मुख्य पहचान रही है।