पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के उज्बेकिस्तान दौरे पर है। आज पीएम ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर जाएंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। इसके बाद किर्गिस्तान के बिश्केक रवाना होंगे। मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा, 4 तस्वीरें किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। =========== ये खबर भी पढ़ें उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी को महिलाओं ने राखी बांधी, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में रवाना हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। दोनों नेता एक ही कार में एयरपोर्ट से होटल पहुंचे। पीएम मोदी ने यहां भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी उज्बेकिस्तान में दो दिन रहेंगे। वे राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। पढ़ें पूरी खबर
पीएम नरेंद्र मोदी दो दिन के उज्बेकिस्तान दौरे पर है। आज पीएम ताशकंद में शास्त्री मेमोरियल और महात्मा गांधी सेंटर जाएंगे। प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका चौथा उज्बेकिस्तान दौरा होगा। ताशकंद में मोदी और राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव के बीच बैठक होगी। इसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, ऊर्जा, शिक्षा और आपसी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की जाएगी। बैठक में भारत के विकसित भारत 2047 और उज्बेकिस्तान-2030 विजन के तहत सहयोग बढ़ाने के नए रास्तों पर भी बात होगी। इसके बाद किर्गिस्तान के बिश्केक रवाना होंगे। मोदी का उज्बेकिस्तान दौरा, 4 तस्वीरें किर्गिस्तान दौरा: मोदी SCO समिट में शामिल होंगे, जिनपिंग-पुतिन से मुलाकात उज्बेकिस्तान दौरे के बाद प्रधानमंत्री मोदी 31 अगस्त से 1 सितंबर तक किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में रहेंगे। यहां वे SCO की 26वीं समिट में हिस्सा लेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है। समिट में सुरक्षा, आतंकवाद, व्यापार, कनेक्टिविटी और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। समिट के दौरान मोदी की चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अन्य देशों के नेताओं से मुलाकात हो सकती है। मोदी बिश्केक में होने वाले 6वें वर्ल्ड नोमैड गेम्स के उद्घाटन समारोह में भी शामिल होंगे। भारत के लिए क्यों अहम है यह दौरा; 4 पॉइंट 1. खनिजों का भंडार: भारत लंबे समय से मध्य एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। मध्य एशिया तेल, गैस, यूरेनियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों का बड़ा भंडार है। 2. ऊर्जा जरूरत: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस क्षेत्र के देशों के साथ सहयोग बढ़ाना चाहता है। 3. नए बिजनेस रूट: भारत मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार भी बढ़ाना चाहता है। इसके लिए वह नए व्यापार और परिवहन मार्ग विकसित करने पर काम कर रहा है। 4. आतंकवाद के खिलाफ मुहिम: अफगानिस्तान की स्थिति और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर भी भारत इन देशों के साथ सहयोग बढ़ा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी के पिछले 3 उज्बेकिस्तान दौरे 2015: प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी पहली बार उज्बेकिस्तान पहुंचे थे। इस दौरे में दोनों देशों ने व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया था। 2016: मोदी ताशकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। इसी सम्मेलन के दौरान भारत को संगठन की पूर्ण सदस्यता देने की प्रक्रिया आगे बढ़ी थी। भारत 2017 में SCO का पूर्ण सदस्य बना। 2022: मोदी समरकंद में SCO समिट में शामिल हुए थे। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उन्होंने रूसी राष्ट्रपति पुतिन से कहा था, ‘आज का युग युद्ध का नहीं है।’ उनका यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बना था। अब SCO के बारे में जानिए, 2001 में हुई थी इसकी स्थापना शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक क्षेत्रीय अंतरराष्ट्रीय संगठन है जिसकी स्थापना 2001 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गीजस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने मिलकर की थी। बाद में भारत और पाकिस्तान 2017 में इससे जुड़े। 2023 में ईरान भी इसका सदस्य बना। SCO का उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक सहयोग को बढ़ाना है। संगठन आतंकवाद, उग्रवाद, ड्रग तस्करी और साइबर अपराध जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति बनाता है। =========== ये खबर भी पढ़ें उज्बेकिस्तान में पीएम मोदी को महिलाओं ने राखी बांधी, राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ एक ही कार में रवाना हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार शाम उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचे। एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव ने उनका स्वागत किया। दोनों नेता एक ही कार में एयरपोर्ट से होटल पहुंचे। पीएम मोदी ने यहां भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात की। इस दौरान महिलाओं ने उनकी कलाई पर राखी बांधी। चार साल बाद सेंट्रल एशिया के दौरे पर पहुंचे पीएम मोदी उज्बेकिस्तान में दो दिन रहेंगे। वे राष्ट्रपति मिर्जियोयेव के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। पढ़ें पूरी खबर

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 29 अगस्त की रात रीवा पहुंचे। उन्होंने सर्किट हाउस से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सतना और रीवा में बारिश के दौरान जल भराव एवं बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने सतना कलेक्टर को निर्देश दिए कि सभी बाढ़ प्रभावित लोगों और चित्रकूट में रुके हुए श्रद्धालु-रहवासियों के भोजन वस्त्र और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि सर्वे कराकर आरबीसी 6/4 के तहत राहत राशि भी प्रदान की जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बारिश से कोई जनहानि एवं पशु हानि ना हो। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन जिलों में बारिश का कम असर है वहां से बचाव के उपकरण बाढ़ प्रभावित जिलों में उपयोग में लाए जाएं। एनडीआरएफ की टीम मुस्तैदी से बचाव कार्य संपादित करें। सतना कलेक्टर ने बताया कि छह गांव में रेस्क्यू किया गया है। आज रात बारिश नहीं हुई तो स्थिति ठीक हो जाएगी। सात लोगों को रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
नुकसान का हो रहा आंकलन
उन्होंने बताया कि नया गांव डैम डैमेज हुआ है। इससे हुए नुकसान का आंकलन किया जा रहा है । मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि चित्रकूट में आने वाले श्रद्धालु एवं रहवासियों को सुरक्षित रहने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्हें भोजन पैकेट दिए जाएं। सदगुरू आश्रम में जो श्रद्धालु रुके हुए हैं उनका नंबर लेकर उनके परिजनों से संपर्क कर श्रद्धालुओं की बातचीत कराई जाए। जैतवारा गांव में सबसे ज्यादा लोग रुके हुए हैं, उनके समुचित भोजन पानी एवं वस्त्र की व्यवस्था की गई है। मुख्यमंत्री ने रीवा सतना एवं सतना चित्रकूट मार्ग के संबंध में जानकारी ली। कलेक्टर ने बताया कि रीवा में फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। बाढ़ प्रभावितों के प्रकरण बनाए गए हैं, जो पशु हानि हुई है उसकी सहायता राशि दी जाएगी।

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से उनके निवास पर सौजन्य भेंट की। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री शाह को मध्यप्रदेश में संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति और वर्तमान स्थिति से अवगत कराया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में सहकारिता क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों, नए प्रयासों और उपलब्धियों की भी जानकारी दी।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में संचालित विभिन्न विकास योजनाओं और राज्य के विकास से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की ताजा स्थिति पर भी केंद्रीय मंत्री श्री शाह से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से मध्यप्रदेश की विकास यात्रा को और गति देने के लिए सहयोग की अपेक्षा के साथ मार्गदर्शन प्राप्त किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय नेतृत्व के मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश विकास एवं जनकल्याण के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार का संकल्प प्रदेश के विकास की गाथा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाना और प्रत्येक नागरिक के जीवन में समृद्धि एवं खुशहाली लाना है।

सीएम ने रीवा में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ की आपात बैठक
चित्रकूट में अतिवृष्टि से हुए नुकसान का लेंगे जायजा
अतिवृष्टि से मंदाकिनी नदी में बाढ़, रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी
भोपाल। जन-कल्याण के लिए प्रतिबद्ध मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29 अगस्त की शाम के सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए। वे जनता की परेशानी जानने और उनके समाधान के लिए नई दिल्ली से सीधे रीवा पहुंचे। उन्होंने रीवा में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अतिवृष्टि और बाढ़ के हालातों पर आपात बैठक की। वे सतना जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचेंगे और चित्रकूट में अतिवृष्टि से हुए नुकसान का जायजा लेंगे।
दरअसल, चित्रकूट में विगत दिनों से हो रही लगातार अतिवृष्टि से मंदाकिनी नदी में बाढ़ आ गई है। प्रशासन और रेस्क्यू की एसडीआरएफ टीम बचाव और राहत के काम में जुटी हुई है। मंदाकिनी नदी की बाढ़ से रामघाट से हनुमान धारा पहुंच मार्ग का पुराना पुल भी क्षतिग्रस्त हुआ है। चित्रकूट में सेना के हेलीकॉप्टर भी बचाव कार्य कर रहे हैं। चित्रकूट में 6 आश्रय स्थलों पर जलभराव क्षेत्रों के प्रभावित लोगों के रुकने, भोजन और चिकित्सा की व्यवस्था को गई है।
कंट्रोल रूम की व्यवस्था
बता दें, फिलहाल मन्दाकिनी नदी का जल स्तर अधिकतम फ्लड लेबल 136 मीटर के करीब पहुंच रहा है। दूसरी ओर, जबलपुर से आई एसडीईआरएफ टीम भी लोगों की मदद कर रही है। इस बीच बाढ़ एवं जल भराव की स्थिति में सूचना और सहायता के लिए कंट्रोल रूम टेलीफोन नंबर-07672-223211 की व्यवस्था की गई है।

सोनिया गांधी की किताब ‘बिलॉन्गिंग’ 'Belonging: A Journey of Love' को लेकर ठीक वही हुआ, जैसा पहले से अनुमान था। सोनिया गांधी की इस किताब पर भारत में बखेड़ा शुरू हो गया है। इस किताब पर आग में घी का डालने का काम तब हुआ, जब इसके प्रकाशन समूह पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इसे भारत में प्रकाशित करने से इनकार कर दिया। इस घोषणा के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर प्रकाशक पर दबाव बनाने का आरोप लगाया है। विपक्ष भी कांग्रेस के साथ है। वहीं, प्रकाशन हाउस के अपने तर्क हैं। इस पूरे विवाद पर हालांकि बीजेपी ने भी अपनी सफाई दी है।
बता दें कि सोनिया गांधी की आत्मकथा ‘बिलॉन्गिंग’ नवंबर में रिलीज होगी। कहा जा रहा है कि इसमें सोनिया गांधी के अपने निजी और राजनीतिक अनुभव दर्ज हैं। लेकिन कुछ हिस्से ऐसे हैं, जिनके बारे में पता चलते ही इसे लेकर जमकर विवाद शुरू हो गया है। बता दें कि किताब 10 नवंबर को दुनियाभर में रिलीज होगी, जबकि प्रकाशन ने इसे भारत में प्रकाशित करने से इनकार कर दिया है। जानते हैं किताब के किन हिस्सों पर क्या विवाद है। क्या कहना है प्रकाशक का और कैसे यह एक राजनीतिक विवाद बन गया है।
भारत में छापने से प्रकाशक का इनकार क्यों : सोनिया गांधी की बिलॉन्गिंग पर पूरा विवाद तब सामने आया जब पेंगुइन की अमेरिकी शाखा अल्फ्रेड ए नॉफ ने घोषणा की कि सोनिया गांधी ने यह किताब 10 नवंबर को दुनियाभर में रिलीज होगी। हालांकि, पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि वह भारत में इसे छापने के लिए उत्सुक था, लेकिन किताबों में दिए गए तथ्यों की जांच करना प्रकाशक का अधिकार और जिम्मेदारी है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि पब्लिशर किताब के कुछ हिस्सों में बदलाव या संपादन करना चाहता था, इस बदलाव या संपादन से सोनिया गांधी ने साफ मना कर दिया। इसके बाद पेंगुइन इंडिया ने इसे भारत में छापने से मना कर दिया। जबकि भारत के अलावा यह किताब दूसरे देशों में 10 नवंबर को रिलीज होगी।
किताब के किन हिस्सों पर कंट्रोवर्सी : एनडीटीवी की एक रिपोर्ट बताती है कि पब्लिशर और सोनिया गांधी के बीच मुख्य रूप से तीन विषयों को लेकर सहमित नहीं बन पाई। सोनिया गांधी की किताब में भारतीय क्षेत्र में चीन की कथित घुसपैठ और सीमा के मौजूदा हालात का प्रमुखता से जिक्र किया गया है। किताब में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली, नेतृत्व और केंद्र सरकार की कई अहम नीतियों पर सोनिया गांधी के सवाल शामिल हैं। वहीं किताब में राष्ट्रीय मामलों और भारत के सामाजिक ताने-बाने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के असर को लेकर सोनिया गांधी के निजी विचार लिखे गए हैं। जब पब्लिशर ने इन हिस्सों में बदलाव का सुझाव दिया, तो सोनिया गांधी ने यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह उनके अपने अनुभव और नजरिए हैं, जिनमें कोई समझौता नहीं हो सकता।
तथ्यों की जांच करना चाहता है प्रकाशन : बता दें कि अल्फ्रेड ए. नॉफ पेंगुइन रैंडम हाउस की एक प्रकाशन इकाई है। उसने कहा था कि संबंधित चर्चाओं के दौरान वह इस संस्मरण को प्रकाशित करने की इच्छुक थी। हालांकि, प्रकाशक ने कहा कि लेखकों की सामग्री की तथ्य-जांच करना उसका अधिकार और जिम्मेदारी है। यह बयान उन खबरों के बीच आया, जिनमें कहा गया था कि सोनिया गांधी द्वारा संपादकीय बदलावों को स्वीकार नहीं किए जाने के बाद प्रमुख प्रकाशक ने किताब प्रकाशित करने का फैसला वापस ले लिया।
कांग्रेस का भाजपा-RSS पर आरोप : कांग्रेस के लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई ने पेंगुइन इंडिया के बयान की आलोचना की और इसे कमजोर बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा, ''यह कितना कमजोर बयान है। पेंगुइन इंडिया 'एग्जाम वॉरियर्स' और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर कई किताबें प्रकाशित करने में पूरी तरह खुश है। इसमें कोई संदेह नहीं कि भाजपा सरकार में ऐसे लोग हैं, जो अब इस बात से डर गए हैं कि भारत के लोग इस किताब को पढ़ेंगे।''
गहलोत ने कहा, क्या मजबूरी है : कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया से पूछा कि जब उसकी अंतरराष्ट्रीय प्रकाशन इकाई इस संस्मरण को दुनिया भर में प्रकाशित कर रही है तो भारत में इसे प्रकाशित करने से उसे क्या रोक रहा है। उन्होंने एक्स पर लिखा, 'पेंगुइन की अंतरराष्ट्रीय इकाई सोनिया गांधी की आगामी किताब को उसके मूल रूप में पूरी दुनिया में प्रकाशित करने के लिए तैयार है, लेकिन पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया इसे भारत में प्रकाशित करने से पहले बदलाव चाहता है। आखिर ऐसी क्या वजह है या ऐसा कौन सा दबाव है कि जो किताब पूरी दुनिया में प्रकाशित हो रही है, उसे भारत में प्रकाशित नहीं किया जा सकता?''
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने आगे कहा, ''इतने कद की व्यक्ति, देश की वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्रीमती सोनिया गांधी जी की किताब को दबाव में दबाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की हत्या के समान है।'
विपक्ष आया कांग्रेस के सपोर्ट में : सोनिया गांधी की आत्मकथा को लेकर हुए विवाद पर सीपीआई सांसद पी. संदोष कुमार ने कहा, 'लेखिका को अपने मन की बात लिखने का पूरा अधिकार है, और यह एक तरह की आत्मकथा ही है। इसमें से कुछ अंश हटाने का कोई मतलब नहीं है। इसके पीछे क्या तर्क है? इसलिए हम इसका विरोध करते हैं। कई प्रकाशक हैं, और मुझे उम्मीद है कि उनमें से कुछ इसे जल्द ही प्रकाशित करेंगे।'
नकवी बोले- यह संस्मरण है या उसका सियासीकरण : पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने सोनिया गांधी की किताब पर जारी विवाद पर कहा कि यह लेखक और प्रकाशक के बीच का मामला है। वे तय करेंगे कि यह संस्मरण है या उसका सियासीकरण है। समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए नकवी ने कहा, “यह सोनिया गांधी का संस्मरण है या कल्पना है, ये तो लेखक और प्रकाशक के बीच की बात है। प्रकाशक और लेखक ही तय करेंगे कि यह संस्मरण है या उसका सियासीकरण है। मुझे लगता कि इसमें किसी को राजनीति करने की जरूरत है। आप अगर संस्मरण के नाम पर कल्पनाएं लिख कर रहे हैं और उनमें भी कई तरह के फ्रिक्शन हों या फर्जी और मनगढ़ंत किस्से-कहानियां हों तो निश्चित रूप से उसमें प्रकाशक के साथ भी जिम्मेदारी होती है।”
आरोपों पर क्या बोली भाजपा : किताब के प्रकाशन पर दबाव को लेकर लग रहे आरोपों पर अब भाजपा ने जवाब दिया है। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस नेता संस्मरण को लेकर 'डर की झूठी कहानी गढ़ने और एक गलत धारणा बनाने' की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सीआर केसवन ने कहा कि कांग्रेस के ये प्रयास सिर्फ विडंबना से ही नहीं, बल्कि स्पष्ट रूप से पाखंड से भी भरे हैं।

आखिर क्या है किताब में : ये किताब सोनिया गांधी की आत्मकथा है। इसमें सोनिया गांधी के इटली में बिताए बचपन से लेकर भारत में उनके जीवन तक को दर्ज किया गया है। राजीव गांधी से विवाह, देश की प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी की बहू बनना, इन सबका उल्लेख इस आत्मकथा में किया गया है। सोनिया ने कहा कि राजनीति से धीरे-धीरे दूरी बनाने के बाद जब उन्होंने अपने जीवन को पीछे मुड़कर देखा, तो उन्हें एहसास हुआ कि ''उनके जीवन के हर पड़ाव को जोड़ने वाली कड़ी प्रेम और निष्ठा रही है।'' उन्होंने अपनी इस यात्रा को ''इटली के छोटे शहर में अपने बचपन की सरलता से लेकर भारत में बिताए वर्षों की जटिलता'' तक की यात्रा बताया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने न्यू यॉर्क में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ के विचार, धर्म, और भारतीय परंपरा पर अपनी बात रखी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि आरएसएस का मकसद सिर्फ और सिर्फ निस्वार्थ सेवा है। अपने संबोधन के दौरान मोहन भागवत ने एक वाकया साझा किया।
उन्होंने कहा, “मुझसे किसी ने पूछा कि आरएसएस जॉइन करने पर मुझे क्या मिलेगा? यह एक बहुत जायज सवाल है। लेकिन मेरा जवाब साफ है कि अगर आप कुछ पाने की नीयत से संघ से जुड़ना चाहते हैं, तो मत आइए। अगर आप समाज और देश की सेवा करने के इरादे से आना चाहते हैं, तो आपके लिए यहां जगह है।”
कुत्ते की आंख का उदाहरण : भागवत ने कहा कि वे कोई धार्मिक विद्वान नहीं हैं, लेकिन एक ऐसे समाज का हिस्सा हैं जो मानता है कि रास्ते भले ही अलग हों, लेकिन मानवता एक है। उन्होंने एक वैज्ञानिक और दार्शनिक उदाहरण देते हुए समझाया, “कुत्ते की आंखें सिर्फ दो रंग (काला और सफेद) देख पाती हैं। अगर हम उसे रंगों की दुनिया समझाएं, तो वह नहीं समझेगा। वह अपने अनुभव के आधार पर सही है। ठीक वैसे ही, एक इंसान के रूप में हम सात रंग देखते हैं”
उन्होंने श्लोक का जिक्र करते हुए कहा, 'रुचिनां वैचित्र्यात् रुजु कुटिल नानापथ जुषां, नृणामेको गम्यस्त्वमसि पयसामर्णव इव' जिस तरह आसमान से गिरने वाली हर बूंद अंत में समुद्र में ही मिलती है, उसी तरह सभी धार्मिक मार्ग एक ही ईश्वर और सत्य की ओर ले जाते हैं।
मोहन भागवत ने भारतीय परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि जब दुनिया में लोगों को कहीं पनाह नहीं मिली, तब भारत ने उन्हें गले लगाया। यही भारत का इतिहास रहा है। लेकिन समय के साथ विदेशी आक्रमणों और शिक्षा के अभाव के कारण समाज में कुछ विकृतियां आईं।
उन्होंने साफ किया कि खुद को 'हिंदू' कहने वाले व्यक्ति को यह मानना होगा कि सभी रास्ते एक ही सत्य की ओर जाते हैं और हर इंसान की गरिमा समान है। भागवत ने 'विद्याविनयसंपन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि…' का संदर्भ देते हुए कहा कि एक सच्चा ज्ञानी सभी जीवों को समान दृष्टि से देखता है। आरएसएस का मकसद इसी प्राचीन ज्ञान और मानवता के भाव को फिर से समाज में जगाना है।
7 new Amrit Bharat Trains: रेलवे बोर्ड ने देश भर में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सात नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को मंजूरी दी है। इन ट्रेनों का मकसद खास तौर पर कम और कम-मध्यम आय वाले ग्रुप के यात्रियों को यात्रा का सस्ता विकल्प देना है। इन सेवाओं को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यात्रा आरामदायक हो और किराया प्रीमियम ट्रेन सेवाओं के मुकाबले कम और आम लोगों की पहुंच में हो।
बता दें कि ये प्रस्तावित ट्रेनें उत्तर, मध्य, पश्चिम और दक्षिण भारत के शहरों को आपस में जोड़ेंगी और कई रूट लंबी दूरी तय करेंगे। यहाँ प्रस्तावित सेवाओं और उनके तय स्टॉप की जानकारी दी गई है:
धनबाद-कोयंबटूर अमृत भारत एक्सप्रेस
यह ट्रेन धनबाद से कोयंबटूर के बीच चलेगी और रास्ते में कई प्रमुख शहरों और स्टेशनों पर रुकेगी। इसके प्रस्तावित स्टॉपेज हैं:
धनबाद जंक्शन, NSC बोस जंक्शन गोमो, पारसनाथ, हजारीबाग रोड, कोडरमा, गया, अनुग्रह नारायण रोड, डेहरी ऑन सोन, सासाराम, भभुआ रोड, पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन, मिर्जापुर, प्रयागराज छिवकी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पिपरिया, इटारसी, बैतूल, नागपुर, चंद्रपुर, बल्लारशाह, सिरपुर कागजनगर, मंचेरियल, पेड्डापल्ली, वारंगल, महबूबाबाद, खम्मम, विजयवाड़ा, ओंगोल, नेल्लोर, गुडूर, रेणिगुंटा, तिरुत्तनी, काटपाड़ी, जोलारपेट्टई, सेलम, इरोड और तिरुप्पुर।
प्रयागराज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस
रेलवे बोर्ड ने प्रयागराज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 20436/20435) को भी मंजूरी दे दी है।
प्रस्तावित साप्ताहिक सेवा प्रयागराज, सतना, जबलपुर, इटारसी, भुसावल और कल्याण में रुकेगी।
प्रयागराज-उधना अमृत भारत एक्सप्रेस
प्रयागराज-उधना अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 20437/20438) को भी साप्ताहिक सेवा के रूप में मंजूरी दी गई है।
यह ट्रेन प्रयागराज, फतेहपुर, गोविंदपुरी, इटावा, टूंडला, ईदगाह आगरा, बयाना, हिंडौन सिटी, गंगापुर सिटी, सवाई माधोपुर, कोटा, रामगंज मंडी, भवानी मंडी, रतलाम, वडोदरा और उधना पर रुकेगी।
सुबेदारगंज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस
रेल मंत्रालय ने सुबेदारगंज-लोकमान्य तिलक टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 14121/14122) को मंजूरी दे दी है।
यह ट्रेन सप्ताह में एक बार चलेगी। इसके प्रस्तावित स्टॉपेज सुबेदारगंज, फतेहपुर, गोविंदपुरी, भरुआ सुमेरपुर, रागौल, बांदा, चित्रकूटधाम कर्वी, सतना, मैहर, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, पिपरिया, इटारसी, खंडवा, भुसावल, नासिक रोड, कल्याण और ठाणे होंगे।
गोरखपुर-दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस
रेलवे बोर्ड ने गोरखपुर-दिल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 15095/15096) को भी सप्ताह में एक बार चलाने की मंजूरी दी है।
इसके प्रमुख स्टॉपेज गोरखपुर, खलीलाबाद, बस्ती, गोंडा, बुढ़वल, सीतापुर, बरेली, मुरादाबाद, गाजियाबाद और दिल्ली होंगे।
गोरखपुर-बांद्रा अमृत भारत एक्सप्रेस
एक और साप्ताहिक ट्रेन गोरखपुर-बांद्रा टर्मिनस अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 15085/15086) होगी।
यह ट्रेन गोरखपुर, खलीलाबाद, बस्ती, गोंडा, बादशाहनगर, ऐशबाग, कानपुर सेंट्रल, टूंडला, आगरा फोर्ट, बयाना, गंगापुर सिटी, कोटा, भवानी मंडी, शामगढ़, रतलाम, वडोदरा, सूरत, वलसाड, वापी, पालघर, बोरीवली और बांद्रा टर्मिनस पर रुकेगी।
चारलापल्ली-गोरखपुर अमृत भारत एक्सप्रेस
सातवीं मंजूर की गई ट्रेन चारलापल्ली-गोरखपुर अमृत भारत एक्सप्रेस (ट्रेन नंबर 22075/22076) है।
इसके प्रस्तावित स्टॉपेज चारलापल्ली, काजीपेट, पेड्डापल्ली, मंचेरियल, बल्लारशाह, चंद्रपुर, नागपुर, बैतूल, इटारसी, भोपाल, बीना, वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी, उरई, पोखरायन, कानपुर सेंट्रल, ऐशबाग, लखनऊ सिटी, गोमतीनगर, बाराबंकी, गोंडा और गोरखपुर होंगे।
इन 7 नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों से कई राज्यों के बड़े शहरों और कस्बों के बीच रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। साथ ही, यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए किफायती किराए में एक और विकल्प मिलेगा।
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कुदरत के कहर और पहाड़ों से बही गगनचुंबी तबाही ने पशुपतिनाथ की पवित्र भूमि नेपाल को पल भर में मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है। चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार, पसरा हुआ सन्नाटा और अपनों को ढूंढती बेबस निगाहें हैं। इस भयानक मंजर ने किसी मां की गोद सूनी कर दी, तो किसी मासूम के सिर से पिता का साया छीन लिया। जहां कल तक जिंदगी मुस्कुराती थी, आज वहां सिर्फ मलबे में दबी उम्मीदें और कभी न भरने वाले जख्म बाकी रह गए हैं।
किसी का घर उजड़ गया तो किसी का पूरा परिवार। किसी का मासूम बच्चा जल प्रलय में बह गया तो कोई बुजुर्ग मलबे में दबकर अनंत में कहीं खो गया। अब सिर्फ इंतजार बचा है, अपनों के लौटने का इंतजार। जिंदा नहीं तो कम से कम शव ही मिल जाए। शवों को खोजने की होड़ सी मची है। इस त्रासदी के बाद एक ही सवाल बचा है। अब कैसे फिर से वो घर बसेंगे, कैसे परिवार फिर से पूरा होगा। कैसे फिर से जिंदगी आबाद होगी।
लौटने की प्रतीक्षा, जिंदा न होने का भय : नेपाल में आई भीषण तबाही में 600 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 2,400 से ज्यादा लोग लापता हैं। सुरक्षा बलों के 11,000 से अधिक जवान राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। इस आपदा के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए मुंबई के 61 श्रद्धालुओं का दल भी सीमावर्ती इलाके से लापता है। उनके परिवारों को उनके लौटने का इंतजार और जिंदा नहीं होने का भय सता रहा है।
अस्पतालों के बाहर चिपकी अपनों की तस्वीरें देख देखकर लोग बेहाल हैं। कोई मलबे तो कोई कीचड़ में अपनों के शवों को खोज रहा है। मांएं बेबस हैं, पिता मायूस। बुजुर्ग कुछ समझ नहीं पा रहे हैं और बच्चे निढाल हो चुके हैं। तबाही का ऐसा खौफनाक मंजर देखकर हर किसी की रूह कांप गई है।
600 मौतें, 2,400 लापता : शनिवार तक इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की तादाद 600 को पार कर चुकी है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। अब तक 163 विदेशी नागरिकों समेत करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। नेपाली सेना के 5,000 से अधिक जवानों सहित 11,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव कार्य में दिन-रात जुटे हैं। ऊपरी त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे 350 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि कीचड़ में दबे अन्य लोगों की तलाश जारी है।
हाथ में रह गईं सिर्फ अपनों के नामों की सूचियां : नेपाल के जो भी प्रभावित इलाके हैं, वहां सिर्फ लोग अपनों के नामों की सूचियां और उनकी तस्वीरें हाथों में लिए नजर आ रहे हैं। अस्पतालों के बाहर हजारों लोगों की कतारें हैं। इस बीच त्रिशूली में सेना का रिलीफ कैंप प्रभावितों का सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है, जहां बुजुर्गों, बच्चों और घायलों का इलाज चल रहा है। इस बीच मौसम विभाग की बारिश की आशंका ने एक बार फिर से लोगों में दहशत जगा दी है।
आखिर कब लौटेंगे 61 श्रद्धालु : नेपाल और तिब्बत सीमा पर आई इस तबाही के बाद मुंबई के 61 श्रद्धालुओं का एक दल भी लापता है, उनके परिजनों की सांसें अटकी हुई हैं। प्रसिद्ध ट्रैकर डॉ. मिलिंद चितले के नेतृत्व में यह दल कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 23 अगस्त को रवाना हुआ था। 25 अगस्त की शाम को टिमुरे पहुंचने के बाद से इनका परिवारों से संपर्क टूट चुका है। कुछ सदस्यों की आखिरी डिजिटल लोकेशन 26 अगस्त की सुबह बॉर्डर चेकपोस्ट के पास की मिली थी, जिसके बाद से कोई खबर नहीं है।
Nepal flood: नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने शनिवार को भारत का धन्यवाद किया। उन्होंने 26 अगस्त को हिमालयी देश में आई भयानक अचानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और समर्थन के लिए आभार जताया। इस बाढ़ में 626 लोगों की मौत हुई है। नेपाल ने संकट के इस मुश्किल समय में मदद करने के लिए भारत के प्रयासों की भी तारीफ की। इस दौरान राष्ट्रपति पौडेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को “बेहद उदार” बताया।
पौडेल ने मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया
X पर एक पोस्ट में, पौडेल ने आपदा के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की चिंता और भारत सरकार की मदद के लिए उनका आभार जताया।
उन्होंने लिखा, “नेपाल सरकार और यहां के लोगों की ओर से मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उनकी चिंता और संवेदना के लिए दिल से धन्यवाद करता हूं। साथ ही, नेपाल में आई इस आपदा के बाद भारत सरकार की ओर से दिए गए उदार समर्थन और सहयोग के लिए भी आभार व्यक्त करता हूं।””
नेपाल के राष्ट्रपति ने आपदा में मारे गए भारतीय नागरिकों के प्रति भी शोक व्यक्त किया।
पौडेल ने एक अन्य पोस्ट में लिखा, “हम 26 अगस्त, 2026 की आपदा में भारतीयों की दुखद मौत पर भारत सरकार और वहां के लोगों के प्रति अपनी गहरी संवेदना और सहानुभूति भी व्यक्त करते हैं।”
नेपाल का कहना है कि भारत पुनर्निर्माण में मदद के लिए तैयार है
नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने बताया कि भारत ने बाढ़ से हुई तबाही के बाद पुनर्निर्माण के लिए उदार मदद देने की बात कही है।
नेपाल ने इस भयानक बाढ़ के बाद भारत की मदद और उसके तुरंत दिए गए समर्थन की भी तारीफ की है। बाढ़ के कारण कई इलाकों में घरों और जरूरी बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। अब नेपाल के सामने इन इलाकों को दोबारा बसाने और बुनियादी सुविधाओं को ठीक करने की बड़ी चुनौती है।
इस आपदा से भारतीय नागरिक भी प्रभावित हुए हैं और पौडेल ने उनकी मौत पर शोक व्यक्त किया है।
बर्फ और चट्टानों के खिसकने से आई बाढ़
यह आपदा नेपाल-तिब्बत सीमा के पास ग्लेशियर के ढहने से बर्फ और चट्टानों के खिसकने (एवलांच) के कारण आई। इसके बाद पानी, कीचड़ और मलबे का तेज बहाव बुधवार को मध्य नेपाल से होते हुए नीचे की ओर बढ़ा, जिससे कस्बों और गांवों में भारी तबाही हुई।
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