बिहार में बाढ़ और एमपी-राजस्थान समेत 19 राज्यों में भारी बारिश, जानें देशभर के मौसम का हाल

बिहार में बाढ़ और एमपी-राजस्थान समेत 19 राज्यों में भारी बारिश, जानें देशभर के मौसम का हाल

weather update 5 september

Weather Update : बिहार, उत्तर प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश और दिल्ली समेत कई राज्यों में भारी बारिश का दौर जारी है। असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, उत्तराखंड, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में भी भारी वर्षा दर्ज की गई। लगातार हो रही बारिश की वजह से नदियां उफान पर है और सड़कें पानी से लबालब है। ALSO READ: नेपाल में चौलानी नदी में भूस्खलन से बना मलबे का बांध, तबाही और फ्लैश फ्लड की आशंका से अलर्ट पर निचले इलाके

 

बिहार के 18 जिलों में बाढ़ का कहर

पटना समेत बिहार के 18 जिलों में बाढ़ का असर लगातार बढ़ रहा है। गंगा समेत 9 नदियां खतरे के निशान से ऊपर हैं। बाढ़ से 6.65 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव के लिए 27 एसडीआरएफ और 9 एनडीआरएफ की टीमें तैनात की गई हैं। ALSO READ: बिहार में बाढ़ से हाहाकार; गंगा समेत 9 नदियां खतरे के निशान से ऊपर, 18 जिलों के 6.65 लाख लोग प्रभावित

 

मध्यप्रदेश के 19 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

मध्यप्रदेश में पूर्वी हिस्से में लगातार बारिश के बाद सक्रिय हुआ मौसमी तंत्र अब ग्वालियर-चंबल की ओर बढ़ गया है। मौसम विभाग ने शनिवार को 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। श्योपुर और शिवपुरी में अति भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट है, जबकि ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, सागर, गुना, अशोकनगर, विदिशा, राजगढ़, शाजापुर, आगर-मालवा और मंदसौर में भारी बारिश हो सकती है। इंदौर, रतलाम, देवास, धार समेत कई जिलों औसत से कम बारिश हुई है।

राजस्थान में मानसून ने पकड़ी रफ्तार

राजस्थान में मानसून ने शुक्रवार को रफ्तार पकड़ी और जयपुर समेत कई जिलों को तेज बारिश हुई। मौसम विभाग ने शनिवार को भी जयपुर, सवाई माधोपुर सहित कई जिलों में तेज बारिश का अलर्ट जारी किया है। इसके चलते कई स्कूलों में बच्चों की छुट्टियां भी कर दी गई। ALSO READ: 9 दिन तक अंधेरी सुरंग में फंसे रहे संजय साह, 'हरे कृष्णा' के जाप ने बचाई जान, जन्माष्टमी पर मिला नया जीवन
 

प्रायद्वीपीय भारत कम बारिश

उत्तर-पश्चिम मध्य प्रदेश और उससे सटे दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर बने निम्न दाब क्षेत्र के असर से आज पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी मध्य प्रदेश में कुछ जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। अगले 6-7 दिनों तक प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियां कम रहने की संभावना है।

पेशाब से पिघल रहा है एवरेस्ट का ग्लेशियर, आ सकती है भयंकर तबाही

पेशाब से पिघल रहा है एवरेस्ट का ग्लेशियर, आ सकती है भयंकर तबाही

everest urine glacier impact

everest urine glacier impact: संसार की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट (Mount Everest) को छूने का सपना हर साल हज़ारों पर्वतारोहियों को नेपाल खींच लाता है। लेकिन इस साहसिक सपने का एक स्याह और खौफनाक पहलू सामने आया है। एक अंतरराष्ट्रीय शोध के अनुसार, एवरेस्ट बेस कैंप पर एकत्रित होने वाले पर्वतारोहियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ईंधन की गर्मी और सीधे ग्लेशियर पर किया जाने वाला पेशाब हर साल 2500 टन से अधिक बर्फ और हिम को पिघला रहा है।

 

वैज्ञानिक पत्रिका ‘रीजनल एनवायरनमेंटल चेंज’ (Regional Environmental Change) में प्रकाशित इस अध्ययन ने खुंबू ग्लेशियर (Khumbu Glacier) पर मानव गतिविधियों के विनाशकारी प्रभावों का खुलासा किया है।

everest urine glacier impact

 

इस ईंधन के जलने से उत्पन्न ऊर्जा और इंसानी पेशाब से निकलने वाली गर्मी को मिलाकर कुल 8,49,174 मेगाजूल थर्मल एनर्जी पैदा हुई। यह ऊर्जा 2,492 टन (लगभग 2,500 टन) बर्फ पिघलाने के लिए काफी है।

 

तबाही का अंदाजा : पिघली हुई यह बर्फ एक ओलंपिक आकार के स्विमिंग पूल, 83 बड़े टैंकर ट्रकों या लगभग 16,700 मानक बाथटबों को पानी से भरने के लिए पर्याप्त है।

everest urine glacier impact

 

दोगुने तापमान से उबल रहा है बेस कैंप

1991 से 2023 तक के लैंडसैट (Landsat) सैटेलाइट डेटा का विश्लेषण करने पर वैज्ञानिकों ने पाया कि पूरे खुंबू ग्लेशियर की तुलना में बेस कैंप वाले स्थान का तापमान बहुत तेजी से बढ़ रहा है।

  • तापमान वृद्धि दर : बेस कैंप की सतह का तापमान 0.28°C प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है। यह दर आसपास के अन्य ग्लेशियर क्षेत्रों की तुलना में लगभग दोगुनी है।
  • लक्जरी का बोझ : वसंत के समय यह कैंप किसी हाई-टेक गांव की तरह दिखता है— जहां एस्प्रेसो कैफे, बड़ी स्क्रीन वाले टीवी, हाई-स्पीड इंटरनेट, हॉट शावर और गर्म फर्श जैसी सुविधाएं मौजूद होती हैं। इन सुविधाओं से निकलने वाली गर्मी पर्यावरण पर सीधा प्रहार कर रही है।

वास्तविक पैमाना इससे भी कहीं अधिक खौफनाक!

नेपाल के भूमि प्रबंधन विभाग के वरिष्ठ सर्वेक्षक किम लाल गौतम सहित शोध दल ने स्पष्ट किया कि मानव प्रभाव का वास्तविक पैमाना इस आंकड़े से कहीं ज्यादा हो सकता है।

 

इस अध्ययन में हेलीकॉप्टर उड़ानों से उत्पन्न गर्मी, हजारों पर्वतारोहियों और पोर्टरों के शरीर की गर्मी और सामान ढोने वाले याक (Yaks) से निकलने वाली ऊर्जा शामिल नहीं है।

क्या है समाधान? (वैज्ञानिकों की चेतावनी)

यद्यपि वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन (Global Warming) एवरेस्ट के ग्लेशियरों के पिघलने का मुख्य कारण है, लेकिन हर साल एक ही नाजुक बिंदु (Micro-environment) पर हजारों लोगों को केंद्रित करना अब टिकाऊ (Sustainable) नहीं रह गया है।

 

शोधकर्ताओं और पर्यावरणविदों ने नेपाल सरकार को सुझाव दिया है कि:

  • बेस कैंप का स्थानांतरण : दीर्घकालिक रूप से बेस कैंप को खुंबू ग्लेशियर से हटाकर पास के किसी सुरक्षित और स्थिर गैर-ग्लेशियल क्षेत्र में शिफ्ट किया जाए।
  • सख्त अपशिष्ट प्रबंधन : ग्लेशियर पर किसी भी तरह के तरल अपशिष्ट या पेशाब के सीधे विसर्जन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए और इसे भी नीचे लाने की तकनीकी व्यवस्था की जाए।

मोहनलाल स्टारर ‘L367’ का हुआ बड़ा ऐलान, नेशनल अवॉर्ड विनिंग डायरेक्टर विष्णु मोहन की फिल्म का नाम होगा ‘ऑपरेशन गंगा’

Operation Ganga: भारत की इंटरनेशनल बॉर्डर पर किए गए सबसे साहसी और दिलचस्प ऑपरेशन्स में से एक पर ‘ऑपरेशन गंगा – ए नेशन्स प्रॉमिस’ बनी है। मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल इस फिल्म में लीड रोल में नजर आने वाले हैं, जबकि उनके साथ अर्जुन रामपाल, भाग्यश्री बोर्से, पार्थिबन और आदिल हुसैन भी स्क्रीन शेयर करते दिखेंगे। फिल्म का डायरेक्शन नेशनल अवॉर्ड विनर फिल्ममेकर विष्णु मोहन द्वारा किया जा रहा है।

मलयालम सुपरस्टार मोहनलाल स्टारर अप कमिंग फिल्म L367 के नाम से आखिरकार पर्दा उठ गया है। बता दें कि फिल्म का आधिकारिक नाम मेकर्स ने ‘ऑपरेशन गंगा’ रखा है। नेशनल अवॉर्ड जीत चुके डायरेक्टर विष्णु मोहन ने फिल्म के डायरेक्शन की कमान अपने हाथों में ली है। यह फिल्म अपने अनोखी टाइटल के साथ एक दिलचस्प कहानी कहने के लिए तैयार है जिसे कभी नहीं सुनाया गया है। फिल्म की कहानी बेहद खास है जिसे हर भारतीय को जरूर जानना चाहिए।

फिल्म का टाइटल भारत के एक बड़े रेस्क्यू मिशन पर रखा गया है। रेस्क्यू मिशन उन भारतीयों को देश वापस लाने को लेकर था जो रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यूक्रेन में फंस गए थे। इन फंसे हुए लोगों में सबसे ज्यादा छात्र और कुछ वहां रहने वाले लोग थे और उन्हीं की वापसी के लिए इस अभियान को चलाया गया था। यह फिल्म एक ऐसी शानदार कहानी है, जो दर्शकों को भारत द्वारा किए गए एक अहम मिशन से रूबरू कराएगी। यह विदेशी धरती पर किया गया एक सफल मिशन है, जिसे ऐतिहासिक जीत के साथ पूरा किया गया।

इसके अलावा इस प्रोजेक्ट को सबसे खास बनाती है फिल्म मेकिंग से जुड़ी एक बहुत टैलेंटेड टीम। फिल्म की टेक्निकल क्रू की बात करे तो इसमें ‘पुष्पा 1’ और ‘पुष्पा 2’ के लिए जाने जानें वाले सिनेमैटोग्राफर मिरोस्लाव कुबा ब्रोजेक शामिल हैं। वहीं, ‘गोट’, ‘मेयाझगन’, ‘अमरन’ और ‘कथनार’ जैसी फिल्मों पर काम कर चुके राजीवन प्रोडक्शन डिजाइनर के रूप में प्रोजेक्ट में जुड़े हैं। जबकि एक्शन को अलग लेवल पर लाकर जाने के लिए एक्शन डायरेक्टर सी यंग ओह जुड़े हैं, जिन्होंने सुपर हिट फिल्म्स ‘धुरंधर’ और ‘किल’ के एक्शन को डायरेक्ट किया है।

फिल्म ‘ऑपरेशन गंगा’ को गोकुलम गोपालन द्वारा श्री गोकुलम मूवीज के बैनर तले प्रोड्यूस किया जा रहा है। फिल्म में मोहनलाल लीड रोल में हैं, जबकि अन्य कलाकारों की बात करें तो अर्जुन रामपाल, भाग्यश्री बोर्से, आदिल हुसैन और पार्थिबन भी अहम भूमिका निभाते नजर आने वाले हैं। सुपरहिट पैन-इंडियन फिल्म ‘धुरंधर’ में जबरदस्त म्यूजिक का तड़का लगाने वाले म्यूजिक कंपोजर शाश्वत सचदेव अब ‘ऑपरेशन गंगा’ का म्यूजिक कंपोज कर रहे हैं।

फिल्म की क्रू में एडिटर शमीर मोहम्मद, साउंड डिजाइनर बिश्वदीप चटर्जी शामिल हैं, जो ‘धुरंधर’, ‘उरी’, ‘3 इडियट्स’ और ‘पद्मावत’ के लिए जाने जाते हैं। वीएफएक्स सुपरवाइजर के. वी. संजीत ‘कांतारा’ के लिए जाने जाते हैं। मिलिट्री एडवाइजर स्क्वाड्रन लीडर वरलिन पंवार ने ‘सेफेद सागर’, ‘बॉर्डर 2’ और ‘फाइटर’ पर काम किया है। इसके अलावा लोका कॉस्ट्यूम डायरेक्टर मेल्वी जे, मेकअप आर्टिस्ट रोनेक्स जेवियर और प्रोडक्शन कंट्रोलर रिन्नी दिवाकर भी टीम का हिस्सा हैं।

फिल्म को गोकुलम गोपालन ने प्रोड्यूस किया है, जबकि बैजू गोपालन और वी. सी. प्रवीण इसके को-प्रोड्यूसर हैं, जबकि कृष्णमूर्ति ने एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर की कमान संभाली है।

Wealth Creation Tips: सिर्फ हाई सैलरी के भरोसे बैठे हैं तो धोखा खा जाएंगे, एक्सपर्ट ने बताए वेल्थ क्रिएशन के 5 तरीके

Wealth Creation Tips: वेल्थ क्रिएशन के लिए क्या ज्यादा सैलरी जरूरी है? आपकी इस बारे में क्या राय है? ज्यादातर लोग यह सोचते हैं कि इनवेस्टमेंट से मोटा पैसा बनाने के लिए ज्यादा सैलरी जरूरी है। वे सैलरी बढ़ने के इंतजार में इनवेस्टमेंट शुरू नहीं कर पाते, जबकि कम इनकम वाले लोग रेगुलर इनवेस्टमेंट से बड़ा फंड तैयार कर लेते हैं। आशीष कांचरला एंड एसोसिएट्स के फाउंडर और सीए ने बताया कि वेल्थ क्रिएशन के लिए मोटी सैलरी से ज्यादा जरूरी कुछ खास आदतें हैं।

पहले निवेश करें फिर खर्च

उन्होंने कहा कि वेल्थ क्रिएशन के आपके रास्ते में सबसे बड़ी बाधा रुपये-पैसे को लेकर आपकी पुरानी सोच है। हममें से ज्यादातर लोग पहले खर्च करने के बारे में सोचते हैं। पैसे बचने पर वे सेविंग्स के बारे में सोचते हैं। यह आदत वेल्थ क्रिएशन से आपको रोक देती है। अगर आप वेल्थ क्रिएट करना चाहते हैं तो पहले आपको सेविंग्स करनी होगी फिर बाकी पैसे से महीने का खर्च चलाना होगा। मान लीजिए आपकी सैलरी मंथली 1 लाख रुपये है तो आपको कम से कम हर महीने 20,000-30,000 रुपये सेविंग्स और निवेश के लिए इस्तेमाल करना होगा।

निवेश को बनाएं आदत

दूसरा, इनवेस्टमेंट किसी त्योहार की तरह नहीं है, जो साल में तीन बार या चार बार आता है। इसका नियमित होना जरूरी है। आपको हर महीने अनुशासित रूप से निवेश जारी रखना होगा। कई लोग निवेश शुरू तो करते हैं, लेकिन कुछ ही महीनों बाद उनके निवेश की गाड़ी पटरी से उतर जाती है। सबसे पहले आपको इनवेस्टमेंट अमाउंट सोच-समझकर तय करना होगा। अगर आप ज्यादा अमाउंट तय करेंगे तो फिर आपको उसे जारी रखने में दिक्कत आ सकती है।

 खर्च को नहीं बढ़ने दें

ज्यादातर लोगों का खर्च सैलरी बढ़ने के साथ ही बढ़ जाता है। यह वेल्थ क्रिएशन के लिए ठीक नहीं है। आपको अपने खर्च को सैलरी के हिसाब से बढ़ने से रोकना होगा। अगर आज आपकी सैलरी 1 लाख है, जो पांच साल बाद बढ़कर 2.5 लाख हो जाएगी तो इसका मतलब यह नहीं आपका खर्च भी 2.5 गुना हो जाना चाहिए। आपको बढ़ी हुई इनकम का इस्तेमाल इनवेस्टमेंट बढ़ाने के लिए करना चाहिए। इससे कम से ज्यादा वेल्थ आसानी से क्रिएट कर सकेंगे।

इंश्योरेंस सिर्फ प्रोटेक्शन के लिए

कई लोग इंश्योरेंस का मतलब ठीक तरह से नहीं समझते। एक्सपर्ट्स का कहना है कि बीमा का इस्तेमाल सिर्फ प्रोटेक्शन के लिए होना चाहिए, न कि इनवेस्टमेंट के लिए। अगर आप नौकरी करते हैं और आपकी फैमिली है, जिसमें बीवी और बच्चें हैं तो परिवार की फाइनेंशियल सिक्योरिटी आपकी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए। यहां इंश्योरेंस आपकी मदद करता है। टर्म पॉलिसी खरीदकर आप अपने परिवार को पर्याप्त फाइनेंशियल कवर दे सकते हैं। किसी अनहोनी की स्थिति में इंश्योरेंस से आपके परिवार को इतना पैसा मिल जाएगा कि उन्हें आर्थिक रूप से लाचार नहीं होना पड़ेगा। टर्म पॉलिसी का प्रीमियम एन्डॉमेंट पॉलिसी के प्रीमियम के मुकाबले काफी कम होता है।

यह भी पढ़ें: Gold Price Outlook: बदलेगी सोने की चाल! तो क्या 1.60 लाख रुपये पर पहुंच जाएगा सोना?

निवेश में डायवर्सिफिकेशन

सिर्फ निवेश करना पर्याप्त नहीं है। आप कहां अपने पैसे का निवेश कर रहे हैं, यह काफी मायने रखता है। पहला, आपके निवेश से मिलने वाला रिटर्न इनफ्लेशन रेट से काफी ज्यादा होना चाहिए। अगर ऐसा नहीं है तो आपके पैसे की वैल्यू लंबी अवधि में बढ़ने की जगह घटेगी। दूसरा, निवेश में डायवर्सिफिकेशन बहुत जरूरी है। आप कुछ पैसा अगर शेयर या म्यूचुअल फंड की स्कीम में लगा रहे हैं तो कुछ फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स में भी लगाना चाहिए। इसके अलावा आपके पोर्टफोलियो में कम से कम 10-15 फीसदी हिस्सेदारी बुलियन यानी गोल्ड और सिल्वर की होनी चाहिए। पीपीएफ, वीपीएफ, बैंक एफडी और बॉन्ड फंड्स फिक्स्ड इनकम के अच्छे ऑप्शंस हैं।

3 reasons to buy Lexus ES 350h and 2 not to

3 reasons to buy Lexus ES 350h and 2 not to
3 reasons to buy Lexus ES 350h and 2 not to

The eighth-generation Lexus ES is based on a new platform, gets an all-new design and is available in both strong-hybrid (350h) and EV (500e) guises. Since the core Lexus ES fanbase is all about the hybrid, we are focusing on the ES 350h here. We look at three reasons why the hybrid sedan deserves a spot in your garage, and two reasons why you may want to skip it.

Reasons to buy the Lexus ES 350h

Fuel-efficient powertrain

A hybrid powertrain’s advantage is its range and the ability to ability to skip fuel pumps. While saving on fuel would not be a priority for luxury sedan buyers, it is still a good bonus and can significantly reduce the fuel bill. On a full tank of petrol, you can expect a range of around 800 kilometres. In the city, you can easily run on electric power from home to work without using any fuel. A result of its silent running is the excellent refinement, adding a layer of luxury to the experience.

Lexus ES 350h review – Hybrid luxury sedan back to take charge

Speaking of technical specifications, the ES 350h’s hybrid powertrain comprises a 2.5-litre, 4-cylinder petrol engine and a permanent magnet synchronous electric motor. Together, this hybrid setup develops 247hp, and gearbox duties are handled by an e-CVT.

Impressive ride comfort

Lexus ES 350h review – Hybrid luxury sedan back to take charge

Lexus has equipped the ES 350h with a soft suspension setup, which, combined with the 19-inch wheels with a tall tyre sidewall, leads to a comfortable ride at low speeds. Even over speed bumps and potholes, the 350h is impressive. It feels composed and confident even at highway speeds, with none of the floating usually associated with low-slung sedans.

Less expensive than rivals

At Rs 66.10 lakh, ex-showroom, for the range-starting Exquisite trim, the ES 350h is extremely well priced. For someone looking for a spacious, refined and reliable luxury sedan for the long run, it makes a strong case. 

Mercedes E-Class (left), BMW 5 Series LWB (right).

The top-spec Luxury trim costs Rs 71.80 lakh, ex-showroom, and gets a decent set of features, while still being considerably less expensive than similarly sized rivals like the Mercedes-Benz E-Class and BMW 5 Series LWB. For those who are not chasing badge value and value longevity over flash, the ES 350h is worth a strong consideration.

Like any other car, the Lexus ES 350h has a few limitations. Let us look at a few reasons why you might want to skip it.

Reasons not to buy the Lexus ES 350h

Misses out on some features compared to rivals

The passenger display in the Mercedes E-Class, part of its Superscreen setup, adds to the wow factor; the ES, meanwhile, gets a touchscreen and a digital driver’s display. The ES gets a single-pane sunroof, but a panoramic or even a split-pane sunroof would have helped open up the cabin during the daytime. In comparison, the E-Class gets a panoramic sunroof, while the 5 Series LWB gets a fixed panoramic glass roof. Strangely, even sunblinds are absent from the 350h; the Mercedes sedan offers powered blinds.

Lexus ES 350h review – Hybrid luxury sedan back to take charge

What’s interesting is that the ES’ older version (the seventh-generation facelift) did pamper chauffeur-driven passengers with sunblinds and even media controls. Now, however, AC vents with two Type-C ports are all that is available.

Rear seat comfort not as good as rivals

Lexus ES 350h review – Hybrid luxury sedan back to take charge

While legroom at the rear is plentiful, the raised floor, however, means the rear passengers sit in a knees-up position, and there is no recline function for the backrest. This does not work in favour of the ES, as both the Mercedes E-Class and BMW 5 Series are known for their impressive rear-seat experience, which is important for those who prefer to be chauffeur-driven.

नेपाल में चौलानी नदी में भूस्खलन से बना मलबे का बांध, तबाही और फ्लैश फ्लड की आशंका से अलर्ट पर निचले इलाके

नेपाल में चौलानी नदी में भूस्खलन से बना मलबे का बांध, तबाही और फ्लैश फ्लड की आशंका से अलर्ट पर निचले इलाके

Nepal darchula landslide: नेपाल में जारी मूसलाधार बारिश के बीच एक नए और भयंकर प्राकृतिक संकट ने दस्तक दे दी है। सुदूर पश्चिम प्रांत के दार्चुला जिले में एक विशालकाय पहाड़ टूटने से चौलानी नदी का बहाव बाधित हो गया है। नदी में गिरी विशाल मलबे की चट्टानों ने पानी का रास्ता बेहद संकरा कर दिया है। अगर पहाड़ी का एक और हिस्सा टूटकर गिरता है तो कृत्रिम झील का पानी तबाही बनकर निचले इलाकों में बह निकलेगा। प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से अलर्ट जारी करते हुए सुरक्षाबलों को मुस्तैद कर दिया है।

पहाड़ खिसकने से नदी में जमा हुआ भारी मलबा

नेपाल के दार्चुला जिले में स्थित 'अपी हिमाल ग्रामीण नगरपालिका' के भट्टर इलाके में कुदरत का खौफनाक मंजर देखने को मिला। यहां अचानक पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा भरभराकर गिर गया, जो सीधे चौलानी नदी के ठीक बीच में जा समाया। मलबे का ढेर लगने के कारण नदी का सामान्य प्रवाह बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालांकि नदी पूरी तरह से नहीं थमी है, लेकिन इसका बहाव बेहद संकरा हो जाने से पानी का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ALSO READ: Tibet Earthquake : भीषण बाढ़ की तबाही के बाद नेपाल पर एक और मुसीबत, हिमालयी क्षेत्र में क्यों मंडरा रहा है खतरा

अचानक आ सकती है विनाशकारी बाढ़

सशस्त्र पुलिस बल के अनुसार, फिलहाल नदी में जलस्तर सामान्य बना हुआ है, लेकिन असली खतरा पहाड़ी के भू-भाग के अस्थिर होने से है। यदि दोबारा भूस्खलन हुआ और नदी का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया, तो ऊपर की तरफ भारी मात्रा में पानी जमा होकर झील का रूप ले लेगा। यह पानी जब मलबे के प्राकृतिक बांध को तोड़ेगा, तो बिना किसी चेतावनी के निचले इलाकों में 'फ्लैश फ्लड' का तांडव देखने को मिल सकता है। ALSO READ: नेपाल बाढ़ की तबाही का खौफनाक मंजर: एक घर के मलबे से मिले 23 शव, 4000 से ज्यादा लोग अब भी लापता

निचले इलाकों में अलर्ट, नदी किनारे न जाने की हिदायत

दार्चुला जिला प्रशासन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए चौलानी नदी के निचले इलाकों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर रहने या किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। लोगों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे नदी के किनारों के पास न जाएं। आपदा प्रबंधन टीमों और स्थानीय सुरक्षा बलों को संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अनहोनी पर तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

प्रशासन ने जारी किए इमरजेंसी नंबर

मुख्यमंत्री खगराज भट्ट ने स्थिति का संज्ञान लेते हुए स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया है। प्रशासन ने आम नागरिकों की सहायता के लिए आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में नेपाल-तिब्बत सीमा पर आई अचानक बाढ़ में 1300 से अधिक लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि हजारों लोग अब भी लापता हैं। वह स्थान दार्चुला से लगभग 500 किलोमीटर की हवाई दूरी पर है, लेकिन उस त्रासदी की भयावहता को देखते हुए इस बार प्रशासन कोई भी लापरवाही नहीं बरत रहा है।

अकेले कचरे से भरी नदी साफ करने वाले ‘बिट्टू तबाही’ की बदली किस्मत, डच CEO ने दिया नौकरी का ऑफर

मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के ब्यावरा के 20 वर्षीय सुरेंद्र सिंह चौधरी, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘Bittu Tabahi’ के नाम से पहचान मिली है, इन दिनों अपनी मेहनत के कारण सुर्खियों में हैं। सुरेंद्र ने कचरे से भरी अजनार नदी की सफाई का बीड़ा खुद उठाया और कई महीनों तक लगातार वहां से प्लास्टिक, गंदगी और जमा मलबा हटाते रहे। उनके इस काम के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसके बाद उनकी कोशिशों की चर्चा दूर तक पहुंची। अब उनकी इसी पहल ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है।

नीदरलैंड की पर्यावरण संस्था The Ocean Cleanup के संस्थापक और CEO बॉयन स्लैट ने सोशल मीडिया पर सुरेंद्र के काम को देखते हुए उन्हें अपने साथ काम करने का सीधा ऑफर दिया है। इस खबर के सामने आने के बाद सुरेंद्र की कहानी को लेकर सोशल मीडिया पर लोग उत्साहित हैं। एक छोटे से शहर का यह युवा अब नदी सफाई के अपने जुनून के कारण वैश्विक मंच तक पहुंचने की ओर बढ़ रहा है।

सोशल मीडिया पोस्ट पर CEO ने कहा- हमारे साथ काम करो

अजनार नदी की सफाई के दौरान सुरेंद्र के काम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। एक यूजर ने X पर उनकी तस्वीरों के साथ पोस्ट शेयर की, जिसमें नदी की सफाई से पहले और बाद की तस्वीरें दिखाई गई थीं।

पोस्ट पर बॉयन स्लैट की नजर पड़ी। उन्होंने बिना ज्यादा कुछ कहे सीधे लिखा, “Come work for us.”

डच के CEO का यह छोटा-सा जवाब सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बन गया।

लोगों ने कहा- जिंदगी का सबसे बड़ा मौका

बॉयैन स्लैट के ऑफर के बाद यूजर्स ने सुरेंद्र को बधाई देना शुरू कर दिया। कई लोगों ने इसे उनके लिए शानदार अवसर बताया। एक यूजर ने लिखा कि उम्मीद है यह ऑफर गंभीर है और सुरेंद्र को यह मौका जरूर हासिल करना चाहिए।

दूसरे यूजर ने इसे ‘ऑफर ऑफ ए लाइफटाइम’ तक बता दिया।

कौन हैं Bittu Tabahi?

सुरेंद्र सिंह चौधरी ब्यावरा, राजगढ़, मध्य प्रदेश से आते हैं। उनके सोशल मीडिया वीडियो में उन्हें अजनार नदी से प्लास्टिक, कचरा, गंदगी और जमा हुआ मलबा खुद निकालते देखा जा सकता है।बताया जाता है कि उन्होंने इस सफाई अभियान की शुरुआत जनवरी में की थी। लगातार मेहनत के बाद नदी के एक हिस्से का पूरा रूप बदल गया और वहां जमा कचरा काफी हद तक साफ हो गया।

सफाई अभियान में अपनी जेब से लगाए पैसे

एक डिजिटल कंटेंट क्रिएटर के मुताबिक, सुरेंद्र अब तक इस सफाई अभियान पर करीब ₹30,000 खर्च कर चुके हैं। यानी सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने से पहले उन्होंने इस काम में अपना समय, मेहनत और पैसा लगाया।

आनंद महिंद्रा भी कर चुके हैं तारीफ

सुरेंद्र के काम की चर्चा इससे पहले उद्योगपति आनंद महिंद्रा तक भी पहुंच चुकी है। उन्होंने मार्च में सोशल मीडिया पर सुरेंद्र की तारीफ करते हुए कहा था कि अगर सोशल मीडिया पर मिलने वाले ‘लाइक्स’ किसी अच्छे काम की वजह बनते हैं, तो इसमें कोई बुराई नहीं है।

उन्होंने सुरेंद्र को अपनी #MondayMotivation पोस्ट का हिस्सा भी बनाया था।

कौन हैं बॉयन स्लैट?

बॉयैन स्लैट नीदरलैंड के इनोवेटर और उद्यमी हैं और The Ocean Cleanup के संस्थापक हैं। उनकी संस्था समुद्रों और नदियों में जमा प्लास्टिक को हटाने के लिए तकनीकी समाधान विकसित करती है।

संस्था का लक्ष्य 2040 तक समुद्र में मौजूद तैरते प्लास्टिक का 90 फीसदी हिस्सा हटाना है। ऐसे में नदी की सफाई में जुटे एक युवा भारतीय को खुद CEO की ओर से मिला ऑफर उसके काम की अंतरराष्ट्रीय पहचान के तौर पर देखा जा रहा है।

भारत से नॉर्वे पहुंचे भारतीय को Driving Licence के लिए करनी पड़ी इतनी मेहनत, खर्च जानकर उड़ जाएंगे होश

SBI को सात करोड़ का चूना लगाने वाला युवक गिरफ्तार, फर्जी डॉक्यूमेंट्स से हड़पी रकम

कानपुर में SBI से सात करोड़ का लोन लेकर फर्जीवाड़ा करने के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि जालसाजों ने पार्टनर की करीब साढ़े चार करोड़ रुपये की जमीन बैंक में गिरवी रखकर लोन लिया और फर्जी इनवॉइस के जरिए रकम अपनी और रिश्तेदारों की कंपनियों में ट्रांसफर कर दी। 

Asian Games 2026: एशियन गेम्स में भारतीय क्रिकेटरों को मिलेंगे अलग होटल? IOA ने BCCI के सामने रखी ये शर्त

जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स 2026 से पहले भारतीय क्रिकेट टीमों के ठहरने और सुविधाओं को लेकर मामला चर्चा में है। आयोजकों ने दोनों टीमों के लिए होटल तय कर दिए हैं, लेकिन BCCI अभी इन व्यवस्थाओं को लेकर अंतिम फैसला नहीं किया है। वहीं इसी बीच भारतीय ओलिंपिक संघ (IOA) ने साफ किया कि भारतीय क्रिकेट टीम के लिए अलग से होटल की व्यवस्था नहीं किया जाएगा।

अगर BCCI अपने खिलाड़ियों के लिए अलग जगह चाहता है, तो खिलाड़ियों की पूरी व्यवस्था बोर्ड को खुद संभालनी होगी। इसमें होटल का खर्च, खाने-पीने, आने-जाने और मैच स्थल तक खिलाड़ियों को पहुंचाने जैसी जिम्मेदारियां शामिल होंगी। ये व्यवस्था जापान के आइची-नागोया में होने वाले एशियन गेम्स के दौरान लागू हो सकती है।

BCCI को लेनी होगा जिम्मेदारी

रिपोर्ट के अनुसार, IOA ने साफ किया कि वह एशियन गेम्स के दौरान क्रिकेट टीम के लिए अलग होटल की व्यवस्था नहीं करेगा। अगर BCCI को आयोजन समिति की ओर से दिया गया होटल सुविधाजनक नहीं लगता है, तो वह खिलाड़ियों के लिए अपनी पसंद की जगह बुक कर सकता है। लेकिन, होटल चुनने से लेकर खिलाड़ियों के खाने और आने-जाने जैसी सभी व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी BCCI को ही संभालनी होगी।

CEO रघुराम अय्यर ने क्या कहा

TOI से बात करते हुए IOA के CEO रघुराम अय्यर ने कहा, “BCCI के CEO हेमांग अमीन ने हमसे संपर्क किया और हमारी अच्छी बातचीत हुई। वे सुविधाओं का आकलन करने के लिए जापान में एक एडवांस टीम भेजने पर विचार कर रहे हैं। IOA को इससे कोई दिक्कत नहीं है। अपने आकलन के आधार पर, वे तय कर सकते हैं कि वे आयोजक की सुविधाओं का इस्तेमाल करना चाहते हैं या अपना इंतजाम खुद करना चाहते हैं।”

एक कमरे में होंगे दो खिलाड़ी

फिलहाल एशियन गेम्स के आयोजकों ने भारतीय पुरुष और महिला क्रिकेट टीमों के लिए होटल तय कर दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पुरुष टीम को तीन स्टार APA होटल नागोया एकिमाए और महिला टीम को चार स्टार मेइतेत्सु ग्रैंड होटल में ठहराया जाएगा। दोनों होटलों में जरूरी सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन भारतीय क्रिकेटरों को आमतौर पर मिलने वाली पांच स्टार सुविधा के मुकाबले ये एक स्तर नीचे हैं। इसके अलावा खिलाड़ियों के लिए दो लोगों के एक कमरे में रहने की व्यवस्था की गई है, जिस पर भी सवाल उठ रहे हैं।

BCCI एक टीम भेजेगी नेपाल

हरमनप्रीत कौर की कप्तानी वाली भारतीय महिला टीम के लिए एशियन गेम्स से पहले यात्रा और ठहरने से जुड़ी कुछ चुनौतियां सामने आ सकती हैं। टीम 13 सितंबर को दुबई में एशिया कप खत्म करने के बाद 14 सितंबर को जापान के नागोया के लिए रवाना होगी, जहां उसका अभियान 17 सितंबर से शुरू होना है। इससे पहले BCCI एक टीम को जापान भेजेगा, जो होटल, क्रिकेट मैदान और खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध दूसरी सुविधाओं की जांच करेगी। इसके बाद ही खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा।

RBI ने 5 कंपनियों पर लगाया ₹27 लाख तक का जुर्माना; लिस्ट में ट्रांसयूनियन सिबिल, हिंदुजा लेलैंड फाइनेंस भी शामिल

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नियमों के उल्लंघन को लेकर 5 कंपनियों पर जुर्माना लगाया है। लिस्ट में ट्रांसयूनियन सिबिल, CRIF हाई मार्क क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज, इक्विफैक्स क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज, सम्मान फिनसर्व और हिंदुजा लेलैंड फाइनेंस शामिल हैं। जुर्माने का अमाउंट 26.82 लाख रुपये तक है। RBI ने अलग-अलग बयानों में इस बारे में जानकारी दी है। शेयर की गई डिटेल के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने ट्रांसयूनियन सिबिल पर 26,82,800 रुपये का जुर्माना लगाया है।

इसी तरह CRIF हाई मार्क क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज पर 6,89,600 रुपये, इक्विफैक्स क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज पर 1,19,400 रुपये, सम्मान फिनसर्व पर 4.20 लाख रुपये और हिंदुजा लेलैंड फाइनेंस पर 6.20 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।

भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि ट्रांसयूनियन सिबिल, CRIF हाई मार्क क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज और इक्विफैक्स क्रेडिट इन्फॉर्मेशन सर्विसेज निर्धारित अवधि के अंदर कुछ पात्र शिकायतकर्ताओं के बैंक खातों में मुआवजे की राशि जमा करने में विफल रहीं। इसके चलते उन पर यह मौद्रिक जुर्माना लगाया गया है।

बाकी 2 कंपनियों पर क्यों लगा जुर्माना

भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, सम्मान फिनसर्व ने अपने कर्जदार की ऋण संबंधी जानकारी सेंट्रल रिपॉजिटरी ऑफ इनफॉर्मेशन ऑन लार्ज क्रेडिट्स (CRILC) को नहीं दी थी। इसलिए उस पर जुर्माने का एक्शन हुआ। वहीं हिंदुजा लीलैंड फाइनेंस ने माइक्रोफाइनेंस लोन्स की प्राइसिंग को लेकर बोर्ड से मंजूर नीति लागू नहीं की।

Bank Strike: हफ्ते में 5 दिन वर्किंग पर नहीं बनी बात, 11 सितंबर को बैंक हड़ताल तय! आगे भी कई दिन कामकाज रहेगा प्रभावित

केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा है कि जुर्माने की यह कार्रवाई रेगुलेटरी नियमों के पालन में कमियों पर बेस्ड है। इसका मकसद कंपनी और उसके ग्राहकों के बीच हुए किसी भी लेन-देन या समझौते की वैधता पर कोई राय देना नहीं है। साथ ही, यह मौद्रिक जुर्माना लगाने का मतलब यह नहीं है कि RBI कंपनी के खिलाफ कोई और कार्रवाई नहीं कर सकता।