भारत-अमेरिका रिश्तों पर सर्जियो गोर का बड़ा बयान, बोले- PM मोदी से मिलना चाहते हैं ट्रंप

भारत-अमेरिका रिश्तों पर सर्जियो गोर का बड़ा बयान, बोले- PM मोदी से मिलना चाहते हैं ट्रंप

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अमेरिका में भारत के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच लगातार मजबूत हो रहे व्यापार, रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी को देखकर कई दूसरे देश ईर्ष्या कर सकते हैं। गोर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बेहतर व्यक्तिगत संबंधों का भी जिक्र किया। ALSO READ: अमेरिकी नौसैनिकों के लिए पटाया की मशहूर 'सोई 6' गली क्यों है बैन? जानें बड़ी वजह

 

एक इंटरव्यू में सर्जियो गोर ने कहा कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप से पूछा जाए कि जी20 शिखर सम्मेलन में आने वाले करीब 35 नेताओं में से वह किन नेताओं से मुलाकात करना चाहेंगे, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनकी प्राथमिकता वाली सूची में सबसे ऊपर होंगे। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त मानते हैं।

 

दिसंबर में फ्लोरिडा में होगा जी20 सम्मेलन

दिसंबर में अमेरिका के फ्लोरिडा में जी20 शिखर सम्मेलन प्रस्तावित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इसमें शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। सर्जियो गोर ने यह भी संकेत दिया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल भारत का दौरा कर सकते हैं।

 

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले कुछ महीनों में भारत और अमेरिका के संबंधों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। ALSO READ: यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की से मिले विदेश मंत्री जयशंकर, जानिए किन मुद्दों पर हुई चर्चा

 

व्यापार समझौते को लेकर गोर को उम्मीद

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर जारी बातचीत को लेकर सर्जियो गोर ने सकारात्मक उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ महीनों में दोनों देश इस समझौते को अंतिम रूप देने में सफल हो सकते हैं।

 

गोर के बयान को भारत-अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। व्यापार के साथ-साथ रक्षा और तकनीक के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग दोनों देशों के रिश्तों को नई दिशा दे रहा है।

Bank Strike: हफ्ते में 5 दिन वर्किंग पर नहीं बनी बात, 11 सितंबर को बैंक हड़ताल तय! आगे भी कई दिन कामकाज रहेगा प्रभावित

Bank 5-day Work Week: अगर आपको बैंक से जुड़ा कोई भी जरूरी काम करना है, तो उसे पहले ही निपटा लें। क्योंकि सितंबर और अक्टूबर में बैंक कर्मचारियों की हड़ताल होने वाली है। बैंक कर्मचारियों की हड़ताल के कारण कई दिनों तक बैंक का काम प्रभावित हो सकता है। बता दें हफ्ते में 5 दिन वर्किंग की मांग को लेकर बैंक कर्मचारी यूनियनों और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन के बीच बातचीत बेनतीजा रही। 4 सितंबर को हुई बैठक में इस मुद्दे पर कोई सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने साफ किया कि वह 11 सितंबर 2026 को होने वाली प्रस्तावित देशव्यापी बैंक हड़ताल को फिलहाल टाल नहीं सकता। ऐसे में बैंकिंग सेवाओं पर इसका असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

पोस्ट कर दी जानकारी

UFBU ने X पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि “UFBU और IBA के बीच 4 सितंबर को हुई बैठक किसी सकारात्मक नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। संगठन के मुताबिक, पांच दिन की बैंकिंग व्यवस्था, भेदभावपूर्ण PLI और अन्य लंबित मुद्दों पर अब तक समाधान नहीं हो पाया है। ऐसे में 11 सितंबर को होने वाली देशव्यापी बैंक हड़ताल के आह्वान को टालने का फिलहाल कोई कारण नहीं है।”

बैंक हड़ताल की तारीखें

  • 11 सितंबर, 2026: एक दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल
  • 28-30 सितंबर, 2026: तीन दिन की देशव्यापी बैंक हड़ताल
  • 26 अक्टूबर, 2026 से: अनिश्चितकालीन देशव्यापी हड़ताल

मीटिंग में क्या हुआ

UFBU के अनुसार, हड़ताल के नोटिस में उठाई गई मांगों पर चर्चा करने के लिए IBA ने बैंक यूनियनों के प्रतिनिधियों को बैठक के लिए बुलाया था। IBA ने यूनियनों से हड़ताल का फैसला टालने और बातचीत के जरिए समस्याओं का समाधान निकालने की अपील की। हालांकि, UFBU का कहना है कि इन मुद्दों पर काफी समय से चर्चा चल रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है। इसी वजह से यूनियनों को हड़ताल टालने का कोई मजबूत आधार नजर नहीं आ रहा है।

क्या है मांग

बैकों में 5 दिन वर्किंग लागू करने का प्रस्ताव बैंक कर्मचारियों के कामकाजी दिनों में बदलाव से जुड़ा है। बैकों में 5 दिन वर्किंग लागू होने पर दूसरे और चौथे शनिवार को छोड़कर बाकी सभी शनिवार को बैंक बंद रहेंगे। इसके बदले बैंक कर्मचारी सोमवार से शुक्रवार तक रोज करीब 40 मिनट ज्यादा काम करेंगे, ताकि ग्राहकों को बैंकिंग सेवाएं मिलने के समय में ज्यादा कमी न हो। यह प्रस्ताव IBA और बैंक यूनियनों के बीच 8 मार्च 2024 को हुए समझौते और जॉइंट नोट का हिस्सा है। यूनियनों का कहना है कि इस प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी के लिए भेजे काफी समय हो गया है, लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है। इसलिए UFBU सरकार से इसे जल्द मंजूरी देकर लागू करने की मांग कर रहा है।

PLI को लेकरय उठाए सवाल

बैंक यूनियनों ने वरिष्ठ अधिकारियों के लिए बनाई गई नई PLI (परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव) व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। UFBU का कहना है कि पहले IBA के साथ तय हुआ था कि PLI बैंक के पूरे प्रदर्शन के आधार पर मिलेगा और स्केल VII तक सभी कर्मचारियों व अधिकारियों के लिए इंसेंटिव के दिन बराबर होंगे। लेकिन नई व्यवस्था में अधिकारियों के अलग-अलग स्तर के लिए अलग नियम बनाए गए हैं। इसके तहत स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों को अधिकतम 365 दिनों तक का PLI मिल सकता है, जबकि स्केल III तक के अधिकारियों के लिए यह सीमा सिर्फ 15 दिन है। यूनियनों का मानना है कि यह अंतर सही नहीं है और इस योजना को लागू करने से पहले उनसे बातचीत होनी चाहिए।

लोगों को हो सकती है परेशानी

अगर बैंक यूनियनों और IBA के बीच कोई समझौता नहीं होता है, तो 11 सितंबर को प्रस्तावित बैंक हड़ताल हो सकती है। इससे बैंक की शाखाओं में कामकाज प्रभावित हो सकता है और ग्राहकों को कुछ जरूरी कामों के लिए परेशानी हो सकती है। लेकिन, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और ATM जैसी सेवाएं चलती रह सकती हैं। इन सेवाओं पर असर अलग-अलग बैंकों में अलग हो सकता है।

UN ने बदला दुनिया का नक्शा, अमेरिका ने विरोध किया:नए मैप में अफ्रीका बड़ा, यूरोप-US छोटे; 164 देशों ने पक्ष में वोट दिया

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को दुनिया के नक्शे को लेकर एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया। इसमें पुराने मर्केटर वर्ल्ड मैप की जगह ऐसे नक्शे के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया है, जिसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनके असली क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाई देता है। नए नक्शे में अफ्रीका पहले से काफी बड़ा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे नजर आएंगे। एशिया के कुछ हिस्सों का आकार भी तुलनात्मक रूप से छोटा दिखेगा। यह प्रस्ताव टोगो ने पेश किया था और इसे अफ्रीकी संघ (African Union) का समर्थन मिला। संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने वोट दिया, जबकि 6 देश वोटिंग से दूर रहे। अमेरिका अकेला देश था जिसने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया। अमेरिका ने प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? अमेरिका ने इस पहल की कड़ी आलोचना की। अमेरिकी प्रतिनिधि यारिना फेरेन्सेविच ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को दुनिया की असली समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि 16वीं सदी के नक्शे को बदलने जैसी बहस पर। उन्होंने इसे एक वैचारिक एजेंडा बताया और कहा कि ऐसी बहसों की वजह से संयुक्त राष्ट्र अपनी विश्वसनीयता खो रहा है। वहीं, अफ्रीकी संघ ने इस फैसले का स्वागत किया। उसने इसे दुनिया का नक्शा ज्यादा सटीक और बराबरी वाला बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। मौजूदा नक्शे में आखिर दिक्कत क्या थी? दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नक्शों में से एक मर्केटर नक्शा है। इसे यूरोपियन मैप मेकर जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था। इस नक्शे की एक बड़ी खासियत है कि यह समुद्र में रास्ता तय करने और जहाजों के नेविगेशन के लिए काफी उपयोगी है। लेकिन पूरी गोल धरती को सपाट नक्शे पर दिखाने की वजह से इसमें देशों और महाद्वीपों का आकार असल से अलग नजर आने लगता है। जैसे-जैसे कोई इलाका भूमध्य रेखा से दूर जाता है, वह नक्शे पर जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही वजह है कि उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के कई इलाके असल से काफी बड़े नजर आते हैं। ग्रीनलैंड इसका सबसे मशहूर उदाहरण है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका के लगभग बराबर दिखाई देता है। लेकिन असल में दोनों के आकार में बहुत बड़ा अंतर है। ग्रीनलैंड का क्षेत्रफल करीब 22 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह लगभग डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के बराबर है। वहीं अफ्रीका का क्षेत्रफल करीब 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर है। यानी अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है। फिर भी मर्केटर नक्शे को देखकर दोनों का आकार लगभग एक जैसा लग सकता है। यही वह फर्क है जिसे अब कम करने की कोशिश हो रही है। अफ्रीकी देश नक्शा बदलने की मांग क्यों कर रहे थे? अफ्रीकी देशों का कहना है कि बात सिर्फ नक्शे पर किसी देश या महाद्वीप के छोटा-बड़ा दिखने की नहीं है। दुनिया का नक्शा यह भी तय करता है कि हम अलग-अलग हिस्सों को किस नजर से देखते हैं। UN के सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया था कि मर्केटर नक्शे में अफ्रीका का वास्तविक आकार काफी छोटा नजर आता है। लंबे समय तक ऐसी तस्वीर देखने से लोगों के मन में अफ्रीका के आकार और वैश्विक महत्व को लेकर गलत धारणा बन सकती है। प्रस्ताव में लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि नक्शे में इन क्षेत्रों का छोटा नजर आना उनकी विकास जरूरतों, बुनियादी ढांचे और आर्थिक क्षमता को भी कम करके आंकने की धारणा बना सकता है। अफ्रीकी देश टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने कहा कि नक्शे सिर्फ भूगोल समझने का साधन नहीं हैं, बल्कि वे शिक्षा और लोगों की सोच को भी प्रभावित करते हैं। न्यूजीलैंड भी पुराने नक्शे से परेशान था अफ्रीका अकेला ऐसा इलाका नहीं है जिसे पुराने नक्शे से शिकायत रही है। न्यूजीलैंड भी लंबे समय से दुनिया के नक्शे पर अपनी जगह को लेकर मजाक करता रहा है। 2018 में न्यूजीलैंड के एक पर्यटन विज्ञापन में तत्कालीन प्रधानमंत्री जैसिंडा आर्डर्न भी नजर आई थीं। इसमें मजाकिया अंदाज में दिखाया गया था कि दुनिया के कई नक्शों में न्यूजीलैंड जैसे गायब ही हो जाता है। दरअसल, मर्केटर नक्शे में न्यूजीलैंड नीचे दाईं ओर एकदम किनारे पर दिखाई देता है। कई बार नक्शे में वह पूरी तरह छूट भी जाता है। इक्वल अर्थ नक्शे के कुछ रूपों में ओशिनिया को केंद्र के करीब लाया जाता है। इससे ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों की स्थिति भी ज्यादा प्रमुख नजर आती है। क्या UN का फैसला सभी पर लागू होगा? नहीं। संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। यानी यह देशों, स्कूलों, किताबों के प्रकाशकों या टेक कंपनियों को मर्केटर नक्शा हटाने के लिए मजबूर नहीं करता। लेकिन इससे नक्शे बनाने और पढ़ाने में ऐसे तरीकों को बढ़ावा मिल सकता है, जिनमें देशों और महाद्वीपों का वास्तविक क्षेत्रफल ज्यादा सही दिखाई दे। मर्केटर नक्शे को पूरी तरह खत्म करने की भी बात नहीं कही गई है। समुद्री और हवाई नेविगेशन में इसका इस्तेमाल जारी रह सकता है, क्योंकि इसमें दिशाओं को सही रखने की खासियत है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… 80 साल बाद पहली बार महिला बन सकती UN चीफ:रेस में अभी 8 दावेदार, इनमें 5 महिलाएं; गुयाना की बिर्केट सबसे आगे UN के 80 साल के इतिहास में पहली बार कोई महिला महासचिव बन सकती है। फिलहाल इस रेस में कुल 8 दावेदार हैं। इनमें 5 महिलाएं हैं। पूरी खबर पढ़ें…

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल खरीदने से पहले जान लें आज की कीमत, दिल्ली-NCR समेत प्रमुख शहरों के ताजा रेट यहां देखें

Petrol Diesel Price Today: हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 05 सितंबर 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

Senior Citizen FD: 8.5% ब्याज देने वाले बैंक कौन से हैं? रिटायरमेंट के बाद 20 लाख फिक्स करने पर समझिए इंट्रेस्ट इनकम का पूरा कैलकुलेशन

Senior Citizen FD Calculator: अपनी गाढ़ी कमाई को बिना किसी जोखिम के सुरक्षित रखने और रिटायरमेंट के बाद रेग्युलर इनकम के लिए वरिष्ठ नागरिकों के बीच फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) हमेशा से सबसे भरोसेमंद विकल्प रहा है। इस समय सीनियर सिटीजंस के लिए बैंकों में एफडी पर काफी आकर्षक ब्याज दरें मिल रही हैं। खासकर स्मॉल फाइनेंस बैंक वरिष्ठ नागरिकों को एफडी पर 8.50 फीसदी प्रति वर्ष तक का अधिकतम ब्याज ऑफर कर रहे हैं।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दर में जरा सा भी अंतर कुल रिटर्न पर बड़ा असर डालता है। खासकर तब जब आप अपनी रिटायरमेंट की एक बड़ी राशि निवेश कर रहे हों। सही बैंक और सही मैच्योरिटी का चुनाव कर आप बिना बड़ा जोखिम उठाए अपनी इंट्रेस्ट इनकम को मैक्सिमाइज कर सकते हैं। आइए जानते हैं कौन सा बैंक सीनियर सिटिजंस को FD पर कितना इंट्रेस्ट ऑफर कर रहा है।

स्मॉल फाइनेंस बैंक वरिष्ठ नागरिकों को सबसे ज्यादा ब्याज दरें ऑफर कर रहे हैं:

इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50 प्रतिशत तक ब्याज।

ईएसएएफ स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50 प्रतिशत तक ब्याज।

सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.50 प्रतिशत तक ब्याज।

जना स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.30 प्रतिशत तक ब्याज।

उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.30 प्रतिशत तक ब्याज।

शिवालिक स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.25 प्रतिशत तक ब्याज।

उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक: 8.25 प्रतिशत तक ब्याज।

जानिए प्राइवेट सेक्टर बैंक में क्या हैं दरें?

निजी क्षेत्र के बैंक वरिष्ठ नागरिकों को नीचे दी गईं ब्याज दरें ऑफर कर रहे हैं:

डीसीबी बैंक: 8.00 प्रतिशत तक ब्याज।

बंधन बैंक: 7.95 प्रतिशत तक ब्याज।

एसबीएम बैंक इंडिया: 7.80 प्रतिशत तक ब्याज।

इंडसइंड बैंक: 7.75 प्रतिशत तक ब्याज।

एक्सिस बैंक: 7.25 प्रतिशत तक ब्याज।

एचडीएफसी बैंक: 7.10 प्रतिशत तक ब्याज।

आईसीआईसीआई बैंक: 7.10 प्रतिशत तक ब्याज।

आईडीबीआई बैंक: 7.00 प्रतिशत तक ब्याज।

पब्लिक सेक्टर बैंक: सरकारी बैंकों में कितना ब्याज?

देश के प्रमुख सरकारी बैंकों में वरिष्ठ नागरिकों को मिलने वाली ब्याज दरों की जानकारी यहां नीचे दी गई है-

बैंक ऑफ इंडिया: 7.45 प्रतिशत तक ब्याज।

पंजाब एंड सिंध बैंक: 7.35 प्रतिशत तक ब्याज।

बैंक ऑफ बड़ौदा: 7.25 प्रतिशत तक ब्याज।

सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया: 7.25 प्रतिशत तक ब्याज।

बैंक ऑफ महाराष्ट्र: 7.15 प्रतिशत तक ब्याज।

इंडियन बैंक: 7.15 प्रतिशत तक ब्याज।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया: 7.05 प्रतिशत तक ब्याज।

यूनियन बैंक ऑफ इंडिया: 7.05 प्रतिशत तक ब्याज।

विदेशी बैंक दे रहे इतना ब्याज

स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक: 7.10 प्रतिशत तक ब्याज।

ड्यूश बैंक: 7.00 प्रतिशत तक ब्याज।

एचएसबीसी बैंक: 6.00 प्रतिशत तक ब्याज।

8.5% ब्याज पर 20 लाख की FD से कितनी होगी कमाई?

अगर कोई वरिष्ठ नागरिक अपने रिटायरमेंट फंड से 20 लाख रुपये की राशि 8.50% इंट्रेस्ट रेट पर FD में फिक्स करता है तो उसकी इंट्रेस्ट इनकम एक साल में 1 लाख 70 हजार रुपये होगी। यानी इसे मंथली देखें तो ये करीब 14 हजार रुपये के आसपास होगी। इसी कैलकुलेशन से 3 साल की कुल ब्याज आय 5 लाख 10 हजार और 5 साल की कुल ब्याज आए 8 लाख 50 हजार बैठती है। (नोट: अगर बैंक में ब्याज का रीइन्वेस्टमेंट या तिमाही आधार पर कम्पाउंडिंग होती है तो इंट्रेस्ट से कुल इनकम इससे भी अधिक हो सकती है।)

एक्सपर्ट्स की सलाह: कैसे बनाएं सही रणनीति?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सीनियर सिटिजंस को अपना पूरा डिपॉजिट एक ही बैंक में रखने के बजाय कई बैंकों में बांटकर रखना चाहिए ताकि 5 लाख रुपये तक के बैंक डिपॉजिट इंश्योरेंस कवर के दायरे में सुरक्षित रहा जा सके। इसके साथ ही, ज्यादा रिटर्न के लिए स्मॉल फाइनेंस बैंकों का इस्तेमाल समझदारी से करना चाहिए और एफडी की अवधि का चुनाव अपनी लिक्विडिटी जरूरतों को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Mahalakshmi Rajyog: मंगल के साथ चंद्रमा की युति बना रही है महालक्ष्मी राजयोग, 4 राशियों के जातकों को करियर मिलेगी उछाल और होगी पैसों की बारिश

Mahalakshmi Rajyog: ज्योतिष शास्त्र में महालक्ष्मी राजयोग को अत्यंत शुभ और धन-समृद्धि देने वाला योग माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, जब मंगल और चंद्रमा किसी एक राशि में एक साथ आकर युति बनाते हैं, तब महालक्ष्मी राजयोग का निर्माण होता है। चंद्रमा को मन, सुख, तरलता और माता का कारक माना जाता है। मंगल को ऊर्जा, साहस, पराक्रम, संपत्ति और कार्यक्षमता का प्रतीक माना जाता है। जब ये दोनों ग्रह मिलते हैं, तो व्यक्ति के जीवन में अचानक धन लाभ, करियर में प्रगति, व्यापार में नए अवसर और अटके हुए कार्यों को गति देने वाले योग बनते हैं।

सितंबर में यह कब बन रहा है?

सितंबर में यह महालक्ष्मी राजयोग 5 सितंबर को बन रहा है। इस दिन सुबह चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ से निकलकर मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। मिथुन राशि में पहले से ही मंगल देव विराजमान हैं। दोनों के एक साथ मिथुन राशि में आने से महालक्ष्मी राजयोग की शुरुआत होगी। इस योग के प्रभाव से विशेष रूप से मिथुन, वृषभ, सिंह और कन्या राशि के जातकों को करियर और आर्थिक क्षेत्र में अच्छा लाभ मिलने की संभावना बताई जा रही है।

वृष राशि : वृष राशि वालों के लिए यह योग आर्थिक रूप से लाभकारी साबित हो सकता है। अचानक धन प्राप्ति के अवसर बन सकते हैं। नौकरी में प्रमोशन या वेतन वृद्धि की संभावना बन सकती है। कारोबार से जुड़े लोगों को कोई लाभदायक सौदा मिल सकता है। लंबे समय से अटके हुए आर्थिक काम भी आगे बढ़ सकते हैं।

मिथुन राशि : मिथुन राशि में ही मंगल और चंद्रमा की युति बनने से इस राशि के जातकों को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। करियर में आगे बढ़ने के नए अवसर मिल सकते हैं। नौकरी में आपकी मेहनत और कार्यक्षमता की सराहना हो सकती है। कारोबार में नई डील मिलने के साथ आय के स्रोत बढ़ सकते हैं।

सिंह राशि : सिंह राशि के जातकों के लिए मंगल-चंद्रमा का यह संयोग करियर में सकारात्मक बदलाव लेकर आ सकता है। कार्यक्षेत्र में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। कारोबारियों को नए संपर्कों से फायदा मिल सकता है। निवेश या धन से जुड़े फैसलों में लाभ के अवसर बन सकते हैं।

कन्या राशि : कन्या राशि वालों को महालक्ष्मी राजयोग के प्रभाव से करियर और आर्थिक मामलों में अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। नौकरी में नई भूमिका या बेहतर अवसर प्राप्त हो सकते हैं। व्यापार में विस्तार की योजना आगे बढ़ सकती है। आय में वृद्धि के अवसर भी मिल सकते हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

Janmashtami 2026 Rashifal: आज श्रीकृष्ण जन्मोत्सव पर बन रहे हैं कई शुभ संयोग, ग्रह-नक्षत्रों की शुभ स्थिति से 5 राशियों को मिलगी सफलता और सौभाग्य

मेलोनी बनीं सबसे लंबे वक्त तक इटली की पीएम रहने वालीं नेता, मोदी ने बधाई दी

मेलोनी बनीं सबसे लंबे वक्त तक इटली की पीएम रहने वालीं नेता, मोदी ने बधाई दी

modi congratulates meloni

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने पर बधाई दी है। शुक्रवार, 4 सितंबर तक लगातार सत्ता में बने रहकर मेलोनी की सरकार 1946 में इतालवी गणराज्य की स्थापना के बाद से सबसे लंबे समय तक चलने वाली सरकार बन गई है।

 

49 वर्षीय मेलोनी ने पूर्व प्रधानमंत्री सिल्वियो बर्लुस्कोनी की दूसरी सरकार के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। बर्लुस्कोनी की सरकार 2001 से 2005 तक 1,412 दिनों तक सत्ता में रही थी।

 

धुर-दक्षिणपंथी 'ब्रदर्स ऑफ इटली' पार्टी की नेता मेलोनी ने अब प्रधानमंत्री के रूप में 1,413 दिन पूरे कर लिए हैं। उन्होंने 22 अक्टूबर 2022 को इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली थी। इटली में पिछले आठ दशकों में राजनीतिक अस्थिरता रही है। इस दौरान देश में 68 सरकारें बनीं, जिनका औसत कार्यकाल लगभग 13 महीने का ही रहा।

 

मेलोनी के तीन दक्षिणपंथी और रूढ़िवादी दलों के गठबंधन को सत्ता में लगभग चार साल हो चुके हैं। उन्होंने इस स्थिरता को अपनी सरकार की बड़ी सफलता बताया है।

 

सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर उन्होंने लिखा, “स्थिरता कोई दिखावे का रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह वह स्थिति है जो देश को योजना बनाने और फैसले लेने की अनुमति देती है।” रिकॉर्ड का जश्न मनाने के लिए शुक्रवार शाम बाड़ी शहर में रैली रखी गई। वहीं आलोचकों ने सरकार पर राजनीतिक ठहराव का आरोप लगाया है।

Top News 5 September: भारत-अमेरिका दोस्ती पर सर्जियो गोर का बड़ा बयान, मोदी की चेतावनी, चंपत राय पर सस्पेंस खत्म

Top News 5 September: भारत-अमेरिका दोस्ती पर सर्जियो गोर का बड़ा बयान, मोदी की चेतावनी, चंपत राय पर सस्पेंस खत्म

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Top News 5 September: अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने दावा कि भारत और अमेरिका की दोस्ती से दूसरे देशों को जलन होती है। यूरोप को महंगा पड़ा पीएम मोदी की बात नहीं मानना। स्वतंत्र भारद्वाज पर पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय के दरवाजे बंद। 5 सितंबर की बड़ी खबरें :

 

भारत और अमेरिका की दोस्ती से दूसरों को जलन

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि भारत-अमेरिका के बीच बढ़ता व्यापार, रक्षा सहयोग और तकनीकी साझेदारी दूसरे देशों के लिए ‘ईर्ष्या’ का कारण बन रही है। उन्होंने मोदी-ट्रंप के रिश्तों की तारीफ करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी उन नेताओं में शीर्ष पर हैं, जिनसे ट्रंप मिलना चाहते हैं।

 

मोदी ने दी थी यूरोप को चेतावनी

व्‍यापार को लेकर बहुत ज्‍यादा निर्भरता अब यूरोप को भारी पड़ रही है। बेल्जियम के पीएम बार्ट डी वेवर ने माना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बारे में बहुत पहले ही चेतावनी दी थी। लेकिन, यूरोप ने उसे नजरअंदाज किया। वह अब इस पर ध्‍यान दे रहा है।

 

स्वतंत्र भारद्वाज पर लगा पॉक्सो एक्ट

जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान निशु आजाद के पिता संजय आजाद पर हुए जानलेवा हमले के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। आरोपी स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में ले लिया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पॉक्सो एक्ट और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं भी जोड़ दी हैं। ALSO READ: निशु आजाद मामला : स्वतंत्र भारद्वाज को बुलंद शहर से हिरासत में लिया, CJP ने दिया था 72 घंटे का अल्टीमेटम, क्या है पूरा मामला

 

राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय की वापसी के दरवाजे बंद?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि जी महाराज ने पूर्व महासचिव चंपत राय की ट्रस्ट में वापसी या किसी नए पद पर नियुक्ति की अटकलों पर विराम लगा दिया है। ​पत्रकारों द्वारा यह पूछे जाने पर कि क्या चंपत राय को ट्रस्ट में कोई नया पद दिया जाएगा, स्वामी गोविंद देव गिरि ने स्पष्ट करते हुए कहा कि ऐसी अभी कोई बात नहीं है। यदि हमें ऐसा करना होता तो हम अभी ही कर लेते। ALSO READ: Champat Rai : राम मंदिर ट्रस्ट में चंपत राय की वापसी के दरवाजे बंद? नए महासचिव गोविंद देव गिरि का बड़ा खुलासा

 

Asia Cup में आज INDvsPAK मैच

महिला एशिया कप के सेमीफाइनल में जगह पक्की कर चुकी भारतीय टीम की नजरें अब शनिवार को चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान के खिलाफ जीत के साथ लीग चरण का शानदार अंत करने पर हैं। दुबई अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में होने वाले मुकाबले में भारत का पलड़ा काफी मजबूत दिख रहा है।

दक्षिण अमेरिकी देश बोलिविया के सैन्य अड्डे में विस्फोट:15 लोगों की मौत, 58 से ज्यादा घायल

बोलिविया के एक सैन्य अड्डे में विस्फोट के बाद 10 से 15 लोगों की मौत होने की खबर है। वहीं, 58 से ज्यादा लोग घायल हैं। खबर लगातार अपडेट हो रही है…

दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया के सैन्य अड्डे में जोरदार धमाका:10 से ज्यादा लोगों की मौत, 58 घायल; पटाखे रखने वाली जगह में हुआ विस्फोट

दक्षिण अमेरिकी देश बोलीविया के पश्चिमी शहर वियाचा में शुक्रवार को एक सैन्य अड्डे पर जोरदार विस्फोट हुआ। हादसे में 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, जबकि कम से कम 58 लोग घायल हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, मरने वालों की संख्या 10 से 15 के बीच हो सकती है। बोलीविया के रक्षा मंत्री अर्नेस्टो जस्टिनियानो ने बताया कि घायलों में ज्यादातर 52 आम नागरिक हैं, जबकि बाकी सैन्यकर्मी हैं। रक्षा मंत्री के मुताबिक, विस्फोट स्थानीय समय के अनुसार दोपहर करीब 2:30 बजे उस जगह हुआ, जहां पटाखे रखे गए थे। हादसे के बाद बचाव दल घायलों का इलाज करने के साथ उनके परिवारों की मदद में जुट गए। अधिकारियों ने विस्फोट की वजह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है। वियाचा की आबादी करीब 1 लाख है। यह शहर बोलीविया की प्रशासनिक राजधानी ला पाज से करीब 30 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित है। विस्फोट से जुड़ी तस्वीरें… खबर लगातार अपडेट हो रही है…