नेपाल बाढ़ में बैंक का लॉकर बहा, ₹57 लाख लूटे:सेफ तोड़कर कैश निकालने के आरोप में 29 हिरासत में

नेपाल में भीषण बाढ़ के दौरान भोटेकोशी इलाके से एक बैंक का लॉकर बहकर कई किलोमीटर दूर पहुंच गया। बाद में धादिंग में मिले इस लॉकर को तोड़कर उसमें रखी नकदी निकालने के आरोप में पुलिस ने 29 लोगों को हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक लॉकर बाढ़ में बहने के बाद बेलखुखोला के पास मिला था। पुलिस को सूचना मिली थी कि स्थानीय लोगों ने लॉकर तोड़कर उसके अंदर रखा कैश निकाल लिया है। इसके बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की। शुरुआती तलाशी में पुलिस ने हिरासत में लिए गए लोगों के पास से 92.68 लाख नेपाली रुपए यानी करीब 57 लाख रुपए बरामद किए। कैश निकालने के आरोपी 19 से 49 साल के बीच पुलिस के मुताबिक, हिरासत में लिए गए ज्यादातर लोग गलछी-4 के मस्तार के रहने वाले हैं। कुछ गलछी-6 के आदमघाट और सिद्धलेक-7 के आदमतार के रहने वाले हैं। वहीं कुछ लोग मूल रूप से चितवन और परसा के हैं और फिलहाल धादिंग में रह रहे हैं। सभी की उम्र 19 से 49 साल के बीच है। पुलिस अब बरामद रकम के स्रोत की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि मामले में और लोग शामिल हैं या नहीं। महिला के शव से बालियां चुराने वाले 2 गिरफ्तार इसी दौरान नेपाल में बाढ़ से जुड़ी एक और चोरी का मामला सामने आया। नारायणी नदी में बाढ़ के पानी के साथ बहकर आए एक महिला के शव से सोने की बालियां निकालने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर कार्रवाई की। वीडियो में दो लोग बाढ़ में बहकर आए महिला के शव से कथित तौर पर सोने की बालियां निकालते दिखाई दे रहे हैं। नेपाल की बाढ़ में में 626 मौतें, 2426 लापता नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ में 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 2,426 लोग लापता हैं। शुक्रवार रात तक 1,924 लोगों के लापता होने की जानकारी थी। वहीं, 517 विदेशी नागरिक अब भी लापता हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों में खोज और बचाव अभियान जारी है। ये खबर भी पढ़ें: नेपाल में तबाही लाने वाले ग्लेशियर टूटने का VIDEO:800 मीटर लंबा हिस्सा टूटकर गिरा था; अब तक 633 मौतें, 2500 लापता नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद अचानक बाढ़ आई थी। अब घटना के तीन दिन बाद ग्लेशियर टूटने का वीडियो सामने आया है। टूर गाइड के एक ग्रुप ने तिब्बत में एक ऊंची जगह से इसे कैमरे में रिकॉर्ड किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

अनाया बांगर जल्द खेलना चाहती है ऑस्ट्रेलिया के लिए, दक्षिण अफ्रीका की यह ऑलराउंडर हुई नाराज

अनाया बांगर ने हाल ही में यह घोषणा कि वह जल्द ही ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट टीम के लिए खेलना चाहती हैं। हाल ही में उनको बिग बैश के लिए हरी झंडी मिल गई है। इस पर दक्षिण अफ्रीका की ऑलराउंडर खिलाड़ी मारीजैन कैप ने कड़ी आपत्ती जताई। उन्होंने कहा कि  अनाया बांगर को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। इस पर अनाया बांगर ने कहा है कि ना ही उनका शरीर टेस्टोस्टेरोन बनाएगा ना ही उनके शरीर में खोई हुई मांसपेशिया आएंगी तो इससे किसी को भी क्यों तकलीफ होनी चाहिए।

गौरतलब है कि ‘ट्रांसजेंडर’ खिलाड़ी अनाया बांगड़ सामुदायिक स्तर पर खेलने की अनुमति मिलने के बाद ऑस्ट्रेलिया में अपनी क्रिकेट यात्रा फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं और भले ही उन्हें अभी तक कोई टीम नहीं मिली है लेकिन उन्हें विश्वास है कि इससे उनके लिए अगले साल महिला बिग बैश लीग में खेलने के द्वार खुल जाएंगे।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगड़ की ‘बेटी’ अनाया ने इस साल मार्च में लिंग परिवर्तन की सर्जरी कराने से पहले मुंबई के लिए आयु वर्ग के पुरुषों का क्रिकेट  खेला था। अनाया ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘आज का दिन मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कई वर्षों तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहने के बाद मैं आखिरकार उस खेल में वापसी के रास्ते के बारे में बात कर सकती हूं जो मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।’’

इस 25 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा, ‘‘मैं मार्च 2027 से ऑस्ट्रेलिया में महिला क्रिकेट में वापसी करने की तैयारी कर रही हूं, जिसका उद्देश्य एलीट क्रिकेट खेलना है। मैं यह दावा नहीं कर रही हूं कि मुझे किसी टीम में जगह मिल गई है। मैं बस इतना कह रही हूं कि मुझे टीम में जगह बनाने का मौका मिला है और मैं इसके लिए कड़ी मेहनत करूंगी।’’

अनाया ने इससे पहले बीसीसीआई से महिला क्रिकेट प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति देने की अपील की थी, लेकिन भारतीय बोर्ड से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। ICC ने 2023 में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को महिला प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित कर दिया था।

अनाया ने कहा कि हाल ही में हुई उनकी जांच से पता चलता है कि अगले साल मार्च में होने वाले एक और परीक्षण में भी उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर समान बना रह सकता है, जिससे उनके लिए महिला क्रिकेट में शामिल होने का मार्ग प्रशस्त होगा।उन्होंने कहा, ‘‘अगर वह परीक्षण मेरे अनुकूल रहा तो मैं शीर्ष स्तर की क्रिकेट में खेलने की पात्रता हासिल कर लूंगी।’’

रूसी ड्रोन हमले से कीव के पास एक गोदाम में जोरदार ब्लास्ट, 27 की मौत, दर्जनों घायल

Russia-Ukraine War: यूक्रेन की राजधानी कीव के पास एक गोदाम में रूसी ड्रोन हमलों के कारण हुए धमाके में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई और दर्जनों लोग घायल हो गए। CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस धमाके से आसपास के इलाके में काफी नुकसान हुआ है। वहीं, यूक्रेन के अधिकारियों ने बताया कि इस घटना के बाद रिहायशी इलाकों के पास गोला-बारूद रखने को लेकर भी काफी सवाल उठ रहे हैं।

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि धमाके से जुड़ी परिस्थितियों की जांच की जाएगी। वहीं, रूस ने कहा कि उसकी सेना ने हथियारों के एक ऐसे गोदाम को निशाना बनाया था, जहां ड्रोन बनाने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण रखे गए थे।

27 लोगों की मौत, बढ़ सकता है आंकड़ा

कीव क्षेत्र के सैन्य प्रशासन के प्रमुख, तिमुर तकाचेंको ने बताया कि इस घटना में कम से कम 27 लोगों की मौत हुई है। तकाचेंको ने कहा, “दुर्भाग्य से, अभी तक 27 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। और यह संख्या अंतिम नहीं हो सकती है।” उन्होंने मारे गए लोगों के परिवारों और प्रियजनों के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की।

रिपोर्ट के मुताबिक, धमाके के बाद दर्जनों लोग घायल भी हुए। बता दें कि यह घटना तब हुई जब रूसी ड्रोन ने कीव के पास एक गोदाम पर हमला किया, जिससे हुए धमाके से उस जगह के आसपास भारी नुकसान हुआ।

जेलेंस्की ने दिए जांच के आदेश

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि रूसी ड्रोन ने गोदाम पर हमला किया, जिससे धमाका हुआ। हालांकि, उन्होंने गोदाम की जगह के बारे में कोई खास जानकारी नहीं दी, लेकिन कहा कि इस घटना की जांच की जाएगी।

उन्होंने रिहायशी इलाकों के पास गोला-बारूद रखने पर भी सवाल उठाए। रिपोर्ट के मुताबिक, जेलेंस्की ने कहा, “गोला-बारूद को घरों या दूसरे रिहायशी इलाकों के पास नहीं रखा जा सकता।”

उम्मीद है कि जांच में धमाके से जुड़ी परिस्थितियों और उस जगह पर सामान रखने के तरीके की पड़ताल की जाएगी।

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लोगों को बोल्ड महिलाएं पसंद नहीं, हां, मैंने शराब पी थी, कोई रिग्रेट नहीं, नोएडा में गार्ड्स को गालियां देने वाली महिला का बयान

लोगों को बोल्ड महिलाएं पसंद नहीं, हां, मैंने शराब पी थी, कोई रिग्रेट नहीं, नोएडा में गार्ड्स को गालियां देने वाली महिला का बयान

Noida woman

नोएडा में गार्ड्स को गालियां देने वाली महिला सामने आई है। उसने स्‍वीकार किया है कि हां उसने शराब पर रखी थी, लेकिन इस बात का कोई पछतावा नहीं है। बता दें कि हाल ही में एक वीडियो सामने आया था, जिसमें एक महिला सोसायटी के सिक्योरिटी गार्ड्स को गालियां दे रही थी।

वीडियो ग्रेटर नोएडा वेस्ट की आम्रपाली सेंचुरियन पार्क टेरेस होम्स सोसाइटी का था, जिसमें महिला ना केवल गालियां दे रही थी, बल्कि जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए धमकी भी दे रही थी। यह वीडियो सोशल मीडिया में जमकर वायरल हो रहा है और लोगों में इसे लेकर बहस चल रही है।

कौन हैं महिला और उसने क्‍या कहा : बता दें कि महिला का नाम येशा कुमार है और वह आम्रपाली सेंचुरियन पार्क टेरेस होम्स सोसाइटी में ही रहती हैं। इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, 45 वर्षीय येशा ने कहा कि वो घटना उनके लिए एक बुरे सपने के जैसी है और वह उसे याद नहीं करना चाहती। शुक्रवार को सोसाइटी के सिक्योरिटी सुपरवाइजर ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई। येशा ने बताया, 'मैं सोसायटी में अकेली रहती हूं और यही वजह है कि कुछ लोग मुझे जानबूझकर निशाना बनाते हैं। वो घटना 25 अगस्त की है, जब रात में करीब 2:30 बजे उन्होंने कुछ सामान ऑनलाइन ऑर्डर किया। सिक्योरिटी गार्ड डिलीवरी बॉय को ऊपर नहीं आने दे रहे थे। मैंने उस समय शराब पी रखी थी और इसीलिए मैं नीचे नहीं जाना चाहती थी, लेकिन उन लोगों ने कहा कि मुझे ऑर्डर लेने के लिए नीचे ही आना होगा।'

लोग मुझे टारगेट करते हैं, क्‍योंकि मैं अकेली रहती हूं : सोसाइटी के लोगों पर आरोप लगाते हुए येशा ने कहा, 'मैं मानती हूं कि मैंने शराब पी रखी थी और बहुत ज्यादा गुस्से में थी, लेकिन मुझे किसी बात का अफसोस नहीं है। मैं माफी नहीं मांगूंगी, क्योंकि मैंने कुछ गलत नहीं किया। सोसाइटी के कुछ लोग और मैनेजमेट मुझे निशाना बनाते हैं, क्योंकि मैं अकेली रहती हूं। बिना नोटिस के मेरी बिजली काट दी गई। ये लोग नौकरानी को मेरे घर नहीं आने देते। मैं एक पढ़े-लिखे परिवार से आती हूं और आप किसी से भी मेरे बैकग्राउंड के बारे में पूछ सकते हैं।'

लोगों को बोल्ड महिलाएं पसंद नहीं : येशा का एक बयान वायरल हो रहा है, जिसमें वो उनका कहना है कि 'मैंने सोसाइटी में कभी किसी को परेशान नहीं किया। मैं जो करती हूं, अपने घर के अंदर करती हूं और किसी को उसमें दखल देने या रोक-टोक करने का हक नहीं है। वो मुझे पागल कहते हैं, लेकिन मैं पागल नहीं हूं। मैंने ये घर खरीदा है और इसी घर में रहूंगी। किसी भी महिला को अकेले रहने और मनमर्जी जिंदगी जीने का हक है, लेकिन लोग बोल्ड महिलाओं को पसंद नहीं करते। मैं लेडी श्रीराम कॉलेज से पढ़ी हूं और एक मॉडल के तौर पर भी काम कर चुकी हूं। फिलहाल इवेंट्स के काम में जुड़ी हूं और मेरा अपना कपड़ों का ब्रांड भी है।'

क्‍या था पूरा मामला : पुलिस को दी गई शिकायत में सिक्योरिटी एजेंसी ने बताया कि गार्ड्स ने डिलीवरी बॉय को सोसाइटी के गेट नंबर 2 पर रोका था और उसे अंदर आने के लिए महिला से परमिशन मांगी थी। जब परमिशन नहीं मिली, तो डिलीवरी बॉय ने महिला को फोन किया और कहा कि वह गेट पर इंतजार कर रहा है। इसके बाद महिला नीचे आई और गार्ड्स को गालियां देना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने गार्ड्स के साथ हाथापाई भी की। सोसाइटी के सिक्योरिटी सुपरवाइजर अमित शर्मा ने बताया कि घटना के वक्त मैं मौके पर मौजूद था। महिला गालियां दिए जा रही थी और कुछ भी सुनने को तैयार नहीं थी। जब मैंने पुलिस को फोन करने की कोशिश की, तो उन्होंने मुझे थप्पड़ मारा, तब मैंने उन्हें पीछे हटाया और कहा कि हाथापाई ना करें। उस कोशिश में मेरा फोन भी नीचे गिर गया और उसकी स्क्रीन टूट गई। हम चाहते हैं कि पुलिस मामले में जांच करे और सख्त कार्रवाई करे। साथ ही मोबाइल को हुए नुकसान के लिए उनसे हर्जाना भी लिया जाए।' बता दें कि नोएडा का ये मामला पिछले कुछ घंटों से लगातार वायरल हो रहा है। इस घटना के बाद सोशल मीडिया में सिंगल रहने वाली महिलाओं को लेकर बहस भी चल रही है।

पंजाब के 3 लोग नेपाल की बाढ़ में लापता:इनमें जीजा-साले भी शामिल; परिवार से आखिरी बार वीडियो कॉल पर बात हुई थी

नेपाल में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद अचानक आई बाढ़ में तरनतारन जिले के तीन लोग लापता हो गए हैं। इनमें गांव रत्तोके के रहने वाले शमशेर सिंह संधू और उनके दो रिश्तेदार शामिल हैं। शमशेर सिंह संधू नेपाल में एंड्रिट्ज कंपनी के त्रिशूल अपर पावर हाउस प्रोजेक्ट में क्रेन ऑपरेटर के तौर पर काम करते थे। उनके साथ ही उनका साला भुपिंदर सिंह और एक अन्य साले का बेटा रशपाल सिंह नेपाल में रह रहे थे। परिवार के अनुसार, नेपाल में आई बाढ़ के दौरान तीनों का संपर्क अचानक से टूट गया। परिवार के सदस्य गुरजंट सिंह के मुताबिक, शमशेर सिंह से 25 अगस्त को वॉट्सएप पर वीडियो कॉल के जरिए आखिरी बार बातचीत हुई थी। इसके बाद उनसे किसी भी तरह का संपर्क नहीं हो पाया। लगातार फोन और संपर्क की कोशिश के बावजूद कोई जानकारी नहीं मिलने से परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। पंचायत ने डीसी से लगाई मदद की गुहार मामले को लेकर गांव की पंचायत भी सक्रिय हो गई है। गांव की सरपंच शोभा कुमारी ने पंचायत की ओर से तरनतारन के डिप्टी कमिश्नर को पत्र लिखकर मदद की मांग की है। पंचायत ने प्रशासन से अपील की है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भारतीय विदेश मंत्रालय और काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क किया जाए। पंचायत की मांग है कि नेपाल में चल रहे बचाव और राहत कार्यों के जरिए लापता लोगों की स्थिति का पता लगाया जाए और अगर वे किसी सुरक्षित स्थान पर हैं, तो उनके परिवार तक जल्द से जल्द जानकारी पहुंचाई जाए। मैप में देखिए कहां टूटा ग्लेशियर नेपाल में आई बाढ़ के बारे में जानिए… नेपाल और तिब्बत में इस आपदा से अब तक 633 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,500 लोग लापता हैं। इनमें 320 भारतीय भी शामिल हैं। वहीं, करीब 400 भारतीय अभी तिब्बत में फंसे हुए हैं। अब घटना के तीन दिन बाद ग्लेशियर टूटने का वीडियो सामने आया है। टूर गाइड के एक ग्रुप ने तिब्बत में एक ऊंची जगह से इसे कैमरे में रिकॉर्ड किया। वीडियो में नेपाल की सीमा के पास बर्फ से ढके पहाड़ और ग्लेशियर दिखाई दे रहे हैं। अचानक ग्लेशियर की बर्फ और चट्टानों का करीब 800 मीटर लंबा हिस्सा टूटकर नीचे घाटी में गिरता नजर आता है। हिमस्खलन के बाद धूल और मलबा पूरे इलाके में फैल जाता है। वीडियो में नीचे की ओर बहता पानी और मलबा भी दिखाई दे रहा है। ग्रुप जब नीचे उतरा तो रास्ते बंद मिले। इसके बाद उन्हें पता चला कि ग्लेशियर टूटने और भूस्खलन के बाद इलाके में आई बाढ़ से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ है। ग्लेशियर टूटने के तुरंत बाद का वीडियो 3 पॉइंट में जानिए नेपाल के हालात ************ ये खबर भी पढ़ें: पगड़ी पहने पंजाबी युवकों को होटल में नहीं मिली एंट्री: ऑस्ट्रिया में करवाया था बुक, बोले- पैसे भी रिफंड नहीं किए; प्रबंधन ने बताया ड्रेस कोड पंजाब के सिख युवकों को ऑस्ट्रिया के साल्जबर्ग शहर में स्थित कूल मामा होटल ने एंट्री नहीं दी। मोहाली में ट्रेडिंग फर्म चलाने वाले सिख युवक जसप्रीत ने दावा किया कि होटल मैनेजमेंट ने कहा कि पगड़ी वाले यहां नहीं रह सकते। उन्होंने 27 अगस्त को होटल की ऑनलाइन बुकिंग कराई थी।(पढ़ें पूरी खबर)

कार की सीट पर लगा लेदर आखिर किस जानवर की खाल से बनता है? नाम जानकर यकीन नहीं होगा

कार खरीदते समय ज्यादातर लोग इंजन, माइलेज, कीमत और फीचर्स को सबसे पहले देखते हैं। वहीं कार का इंटीरियर भी गाड़ी के अनुभव को काफी बदल देता है। सीटों से लेकर स्टीयरिंग, डैशबोर्ड और गियर एरिया तक इस्तेमाल होने वाला मटेरियल कार को प्रीमियम लुक देता है। खासतौर पर लेदर सीटों को आराम और लग्जरी से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि कार के अंदर नजर आने वाला यह चमड़ा आखिर तैयार कैसे होता है और इसका स्रोत क्या है? कई लोगों को लगता है कि हर कार में एक जैसा लेदर इस्तेमाल होता है, जबकि ऐसा नहीं है।

कार की कीमत, कंपनी और मॉडल के आधार पर इंटीरियर में अलग-अलग तरह के प्राकृतिक या सिंथेटिक मटेरियल लगाए जा सकते हैं। कुछ लेदर जानवरों की खाल से तैयार किए जाते हैं, तो कुछ आधुनिक विकल्प बिना प्राकृतिक चमड़े के बनाए जाते हैं। ऐसे में कार की चमड़े वाली सीटों के पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है।

गाय-बैल की खाल से तैयार होता है कारों का लेदर

कारों में इस्तेमाल होने वाला प्राकृतिक लेदर आमतौर पर गाय और बैल की खाल से बनाया जाता है। यह खाल अक्सर मीट इंडस्ट्री से मिलने वाला बाय-प्रोडक्ट होती है। मांस अलग करने के बाद खाल को टैनिंग की प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिससे वह मजबूत और टिकाऊ लेदर में बदल जाती है। इसके बाद जरूरत के मुताबिक इसे काटकर सीट, डैशबोर्ड, स्टीयरिंग और गियर एरिया में इस्तेमाल किया जाता है।

कार वाला लेदर आम चमड़े से क्यों अलग होता है?

ऑटोमोबाइल में इस्तेमाल होने वाले लेदर को खास तरीके से तैयार किया जाता है। इसे लगातार इस्तेमाल, सफाई, धूप और गर्मी को झेलने लायक बनाया जाता है। इसमें ऐसी ट्रीटमेंट प्रक्रिया अपनाई जाती है, जिससे दाग कम लगें और लंबे समय तक धूप व अल्ट्रावायलेट किरणों के कारण इसकी चमक और गुणवत्ता खराब न हो।

गाय की खाल ही क्यों पसंद की जाती है?

कई कार निर्माता कैटल हाइड को उसकी मजबूती और मोटाई के कारण पसंद करते हैं। ठंडे और उत्तरी इलाकों में पाले गए मवेशियों की खाल कुछ मामलों में ज्यादा मोटी हो सकती है। दिलचस्प बात यह है कि खाल की बाहरी सतह पर छोटे-मोटे निशान होने के बावजूद उसका अंदरूनी हिस्सा अच्छी क्वालिटी के लेदर के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

सिर्फ गाय-बैल ही नहीं, इन जानवरों की खाल भी होती है इस्तेमाल

कार इंटीरियर में लेदर के लिए सिर्फ कैटल हाइड पर निर्भरता नहीं होती। कुछ मामलों में भेड़ और बकरी की खाल भी इस्तेमाल की जाती है। भेड़ का लेदर नरम और लचीला माना जाता है, इसलिए इसे कुछ प्रीमियम हिस्सों में जगह मिल सकती है। वहीं, भैंस का लेदर अपेक्षाकृत किफायती विकल्प हो सकता है और कम कीमत वाली कारों में इस्तेमाल किया जा सकता है।

अब तेजी से बढ़ रहा सिंथेटिक लेदर का चलन

आजकल कारों में जानवरों से मिलने वाले लेदर के विकल्प के तौर पर सिंथेटिक लेदर का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है। PU और PVC जैसे पदार्थों से बनाए गए इन मटेरियल को असली चमड़े जैसा लुक और टेक्सचर दिया जा सकता है। कम कीमत और आसान रखरखाव के कारण यह विकल्प कई कारों में लोकप्रिय हो रहा है।

लग्जरी कारों में मिलता है खास किस्म का लेदर

महंगी और लग्जरी कारों में लेदर की क्वालिटी पर खास ध्यान दिया जाता है। Full-grain और Nubuck जैसे लेदर कुछ प्रीमियम इंटीरियर में इस्तेमाल किए जाते हैं।

इनकी प्राकृतिक बनावट, टेक्सचर और फिनिश के कारण इनकी कीमत सामान्य लेदर से काफी ज्यादा हो सकती है। सीट, स्टीयरिंग और डैशबोर्ड जैसे बार-बार छुए जाने वाले हिस्सों में प्रीमियम लेदर का इस्तेमाल देखने को मिलता है।

Bovine Nappa भी है लग्जरी इंटीरियर का हिस्सा

Bovine Nappa leather भी कैटल हाइड से तैयार होने वाला उच्च गुणवत्ता का लेदर है। इसकी सॉफ्ट फिनिश और प्रीमियम एहसास के कारण इसे लग्जरी कारों के इंटीरियर में इस्तेमाल किया जाता है।

हर कार में लेदर एक जैसा नहीं होता

इसलिए अगली बार कार की चमड़े वाली सीट देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर कार में एक ही तरह का लेदर इस्तेमाल किया गया है। कार के मॉडल, निर्माता और कीमत के हिसाब से इंटीरियर में अलग-अलग जानवरों की खाल से बना लेदर या फिर सिंथेटिक मटेरियल इस्तेमाल किया जा सकता है।

11 साल की बेटी का फोन चेक करते ही मां के उड़े होश, चैट और वीडियो देखकर बढ़ी चिंता

50-50 किलो राहत सामग्री दे रही यूपी सरकार, 1500 परिवारों को वितरित की राहत सामग्री

50-50 किलो राहत सामग्री दे रही यूपी सरकार, 1500 परिवारों को वितरित की राहत सामग्री

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सरकार बाढ़ पीड़ितों को करीब 50-50 किलो राहत सामग्री के पैकेट उपलब्ध करा रही है, जबकि सपा सरकार में 500 ग्राम राहत सामग्री भी नहीं पहुंच पाती थी। गरीबों के हक की राहत सपा से जुड़े लोग हड़प लेते थे। आज हर आपदा में आवास समेत तत्काल राहत उपलब्ध कराई जाती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में डबल इंजन की सरकार गरीब, नौजवान, माता-बहनों और अन्नदाता किसानों के हक में संवेदनशीलता व ईमानदारी से काम कर रही है। अतिवृष्टि के कारण पिछले कुछ दिनों में करीब 26 जनपद बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। सरकार लगातार व तेजी से राहत व बचाव कार्य में जुटी है। बाढ़ से 1.71 लाख से अधिक लोग और 251 गांव प्रभावित हुए हैं। एक हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित शरणालयों में पहुंचाया गया है।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को बलिया में तीन विधानसभा क्षेत्रों में बाढ़ प्रभावित गांवों का हवाई निरीक्षण करने के उपरांत 1500 बाढ़ पीड़ित परिवारो को राहत सामग्री और चिकित्सकीय किट वितरित कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने आयोजन स्थल पर मौजूद बाढ़ पीड़ितों से बातचीत की, उनका दुख साझा किया और सबको आश्वस्त किया कि किसी तरह की चिंता करने की जरूरत नहीं, सरकार हर पीड़ित व्यक्ति के साथ खड़ी है।

जेपीएनआईसी को लूट-खसोट का अड्डा बनाने की कोशिश

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिस कांग्रेस ने लोकतंत्र का गला घोंटने का काम किया था, सपा उसी की पिछलग्गू बन गई। जिन लोगों ने जयप्रकाश नारायण के सपनों को तार-तार किया,  सपा उन्हीं के साथ खड़ी है। इन्होंने जयप्रकाश जी के नाम को किस तरह लूट-खसोट का माध्यम बनाया था, लखनऊ में बना जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय केंद्र (जेपीएआईसी) उसका उदाहरण है। इस केंद्र की लागत मात्र 200 करोड़ थी। लेकिन, लुटेरी सपा सरकार ने उस पर 864 करोड़ रुपए खर्च किए, और तब भी यह अधूरा रहा। उनकी मंशा जनता-जनार्दन के पैसे से बने इस केंद्र को लूट-खसोट व अय्याशी का अड्डा बनाना थी। ऐसी कोशिश भी की गई।

जेपीएनआईसी सेंटर के लिए बनाई परिवार की कमेटी

सीएम ने कहा कि जेपीएआईसी के संचालन से जुड़ी कमेटी में अखिलेश यादव, धर्मेंद्र यादव, डिंपल यादव और राजेंद्र चौधरी समेत कई लोगों को शामिल किया गया था। इस तरह केंद्र को व्यक्तिगत संपत्ति के तौर पर इस्तेमाल करने की कोशिश हुई। अखिलेश को इसके लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए। यूपी में संसाधनों व प्रतिभा की कमी कभी नहीं थी। प्रदेश का युवा प्रतिभाशाली और ऊर्जावान था, किसान मेहनती था तथा व्यापारी और उद्यमी बनने की क्षमता रखता था। इसके बावजूद पिछली सरकारों की नीतियों और भ्रष्टाचार के कारण प्रदेश पिछड़ गया।

सीएम ने किया बाढ़ग्रस्त गांवों का हवाई निरीक्षण

मुख्यमंत्री ने कहा कि वह स्वयं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई निरीक्षण करते हुए आए हैं। बांसडीह, बलिया और बैरिया विधानसभा क्षेत्रों में कटान और जलप्लावन से प्रभावित गांवों का निरीक्षण करने के बाद वह लोगों के बीच पहुंचे हैं। राहत कार्यों को लेकर वह लगातार जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के संपर्क में रहे तथा कई बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भी स्थिति की समीक्षा की। उद्देश्य यही रहा कि बाढ़ से प्रभावित किसी भी व्यक्ति को परेशानी न हो।

राहत किट में आटा-चावल से लेकर टॉर्च और छतरी तक

सीएम ने कहा कि बाढ़ पीड़ित परिवारों को राहत किट उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, दो किलो अरहर की दाल, दो किलो चना, दो किलो भुना चना, एक किलो चीनी, 10 पैकेट बिस्कुट, माचिस, मोमबत्ती, दो नहाने के साबुन और एक तिरपाल शामिल है। इसके अलावा हल्दी, मिर्च, सब्जी मसाला, एक किलो रिफाइंड तेल, एक किलो नमक, सैनिटरी पैड, कपड़े धोने के दो साबुन, तौलिया, सूती कपड़ा, डिस्पोजल बैग, डेटॉल और 10 किलो आलू भी दिया जा रहा है। राहत किट में ढाई किलो लाई, एक बाल्टी, एक मग, एक टॉर्च और एक छतरी भी उपलब्ध कराई जा रही है। बाढ़ प्रभावितों के लिए मेडिसिन किट में ओआरएस पाउडर और आवश्यक दवाएं दी जा रही हैं। साथ ही पर्याप्त मात्रा में क्लोरीन की गोलियां भी उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि दूषित पानी से होने वाली समस्याओं से बचाव हो सके।

सांप-बिच्छू के काटने से लेकर रेबीज तक की दवाओं का इंतजाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ के दौरान सांप, बिच्छू और अन्य विषैले कीड़ों के काटने की घटनाएं बढ़ जाती हैं। कुत्ते के काटने और जंगली जानवरों के हमले की शिकायतें भी सामने आती हैं। इसे देखते हुए सभी सीएचसी और जिला अस्पतालों में एंटी-स्नेक और एंटी-रेबीज वैक्सीन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है। सरकार का प्रयास केवल लोगों को सुरक्षित बचाना ही नहीं, बल्कि उनके पशुधन को भी नुकसान से बचाना है। पशुओं के टीकाकरण, दवाओं और उनके लिए जरूरी खाद्य सामग्री की व्यवस्था की जा रही है।

गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए अलग व्यवस्था

सीएम ने बताया कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं का चिह्नीकरण किया जा रहा है। बच्चों व गर्भवती महिलाओं के लिए अलग से राहत सामग्री उपलब्ध कराने तथा उनकी विशेष देखभाल की व्यवस्था की जा रही है। यह कार्य इसलिए तेजी से हो पा रहा है, क्योंकि जनता ने अच्छे विधायक चुने हैं। राहत किट वितरण के दौरान हर व्यक्ति को करीब 50 किलो तक सामग्री दी गई है। यह सामग्री वाहनों के माध्यम से उनके घर तक पहुंचाई जाएगी।

दुर्घटनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए कई राहत व्यवस्थाएं

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने आपदा और दुर्घटनाओं से प्रभावित परिवारों के लिए कई राहत व्यवस्थाएं लागू की हैं। सर्पदंश से मृत्यु पर तत्काल चार लाख रुपए की सहायता दी जाती है। 2017 से पहले यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। जंगली जानवरों के हमले में मृत्यु होने पर भी सरकार सहायता देती है। पागल कुत्ते के काटने से होने वाली दुर्भाग्यपूर्ण मौत पर भी राहत का प्रावधान है। ऐसे मामलों में परिवार को 24 घंटे के अंदर सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

बाढ़ या आकाशीय बिजली से किसान की मौत पर 5 लाख रुपए 

सीएम ने कहा कि किसान, बटाईदार किसान या उनके परिवार के किसी सदस्य की बाढ़ अथवा आकाशीय बिजली से मृत्यु होने पर मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना के तहत पांच लाख रुपए की सहायता दी जाती है। बाढ़ के कारण मकान या झोपड़ी नष्ट होने पर सरकार तत्काल परिवार को नया मकान बनाने के लिए जमीन का पट्टा उपलब्ध कराती है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास भी स्वीकृत किया जाता है। 

घाघरा नदी की ड्रेजिंग पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने बलिया में बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान का भरोसा दिलाते हुए कहा कि जल शक्ति मंत्री को इस संबंध में व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए गए हैं। मैंने स्वयं बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया है और कई स्थानों पर घाघरा नदी को ड्रेजिंग के माध्यम से चैनलाइज करने की आवश्यकता दिखाई देती है। ड्रेजिंग से निकलने वाली सिल्ट को तटबंध के सामने उपयोग किया जाए। जरूरत वाले स्थानों पर बोल्डर से ठोकर बनाए जाएं, जिससे नदी के कटान को रोका जा सके और बाढ़ का खतरा कम हो।

पहले 36-40 जिलों में आती थी बाढ़

सीएम ने कहा कि पहले बारिश के दौरान 36-40 जिलों में बाढ़ की स्थिति बनती थी, जबकि इस बार 26 जनपद प्रभावित हुए हैं। इस बार भी जन-धन की क्षति न्यूनतम रही है और जनहानि लगभग न के बराबर हुई है। सरकार का प्रयास है कि राहत और बचाव के साथ-साथ बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए। बलिया के लोगों की प्रतिभा और ऊर्जा को आगे बढ़ने का अवसर मिलना चाहिए। इसके लिए बाढ़ की समस्या का स्थायी समाधान और विकास कार्यों को गति देना जरूरी है।

बलिया में बाबा भृगु के नाम पर मेडिकल कॉलेज

मुख्यमंत्री ने कहा कि बलिया में बाबा भृगु के नाम पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार ने धनराशि स्वीकृत कर दी है। बलिया में बाबा भृगु धाम कॉरिडोर का निर्माण भी कराया जा रहा है। यह मंगल पांडे, चित्तू पांडे व जयप्रकाश नारायण की भूमि है। ऐतिहासिक और लोकतांत्रिक विरासत को देखते हुए यहां विकास के साथ विरासत संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बलिया के सिताब दियारा को जेपी की पावन भूमि बताते हुए उन्होंने कहा कि मुझे वहां जाने के कई अवसर मिले हैं और जल्द ही वहां फिर कार्यक्रम बनाने की तैयारी है।

बुजुर्ग महिलाओं को अब निशुल्क बस यात्रा सुविधा

मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर परिवहन निगम की बसों में माता-बहनों को तीन दिन तक निशुल्क यात्रा की सुविधा दी गई। दो दिन में ही लाखों महिलाओं ने सहयात्रियों के साथ इस सेवा का लाभ उठाया। आज भी निशुल्क बस यात्रा की सुविधा जारी है। अगले दिन से 60 वर्ष से अधिक उम्र की हर महिला को निगम की बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा मिलेगी। वे प्रदेश में कहीं भी यात्रा कर सकेंगी। जब जनता अच्छी सरकार चुनती है तो उसका लाभ राहत, सुरक्षा, जनकल्याण और विकास के रूप में दिखाई देता है।

 

बेटियों और व्यापारियों की सुरक्षा से समझौता नहीं

मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि जिन लोगों के शासन में अराजकता फैली, युवाओं के सामने पहचान का संकट खड़ा हुआ और बेटियों तथा व्यापारियों की सुरक्षा प्रभावित हुई, वे किस मुंह से नौजवानों की बात करते हैं। डबल इंजन सरकार में कानून-व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। किसी ने बेटी या व्यापारी की सुरक्षा में सेंध लगाने का प्रयास किया तो उसके लिए जेल या जहन्नुम ही जगह होगी। सपा शासन में हर जिले में माफिया समानांतर सत्ता चलाते थे। हमारी सरकार ने माफिया को मिट्टी में मिला दिया। अब प्रदेश में वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया नहीं, बल्कि वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज का दौर है।

 

इस अवसर पर मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, दयाशंकर मिश्र दयालु, दयाशंकर सिंह, राज्य मंत्री दानिश आजाद, राज्यसभा सदस्य नीरज शेखर, विधायक केतकी सिंह, विधायक हंसुराम, विधान परिषद सदस्य रवि शंकर (पप्पू सिंह) भाजपा जिला अध्यक्ष संजय मिश्र, राज्य महिला आयोग की सदस्य सुनीता श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।

Nepal Flood: ‘बम धमाके जैसी थी आवाज’ नेपाल से भारत लौटी महिला ने बताया कैसा था तबाही का भयानक मंजर

नेपाल में आई विशानकारी बाढ़ से काफी नुकसान हुआ है। सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है वहीं हजारों लोग अभी भी लापता हैं। आपदा के बाद राहत और बचाव का काम जारी है, लेकिन कई इलाकों में हालात अब भी खराब हैं। वहीं भारत के कई श्रद्धालु धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल जाते हैं। हाल ही में तमिलनाडु के 21 श्रद्धालु कुछ दिन पहले धार्मिक यात्रा के लिए नेपाल गए थे। उन्हें नहीं पता था कि उनकी यात्रा अचानक मुसीबत में बदल जाएगी। वहीं शुक्रवार को सभी श्रद्धालु सुरतक्षित भारत लौट आए हैं। वहीं भारत आने के बाद उन्होंने नेपाल में हुए तबाही का भयानक मंजर के बारे में बताया।

भारत लौटे 21 श्रद्धालु

शुक्रवार को तमिलनाडु के 21 श्रद्धालु सुरक्षित भारत लौट आए। चेन्नई एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय उनके चेहरे पर कई तरह की इमोशनल नजर आईं। नेपाल में बिताए मुश्किल समय को याद कर वे भावुक और डरे हुए थे, लेकिन घर वापस पहुंचने की खुशी भी उनके चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी। लंबी और कठिन यात्रा के बाद अपने देश लौटना उनके लिए किसी बड़ी राहत से कम नहीं था। बता दें, 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद पहाड़ों से पानी, बर्फ, पत्थर और मलबा तेजी से नीचे आया, जिससे नेपाल-तिब्बत सीमा के पास कई इलाकों में भारी तबाही मच गई। इस हादसे में कई गांव प्रभावित हुए और बड़ी संख्या में लोगों की जान चली गई।

ऐसा लगा जैसे कोई बम धमाका हुआ हो

इस हादसे में बचीं विजयभुवनेश्वरी ने उस डरावने पल को याद करते हुए बताया कि अचानक आई बाढ़ ने उनकी तीन बसों के काफिले को अपनी चपेट में ले लिया। उन्होंने NDTV को बताया, “बाढ़ आने के दौरान इतनी तेज आवाज हुई, जैसे कोई बम धमाका हुआ हो। आगे और पीछे की बसें फंस गईं, इसलिए हम अपनी जान बचाने के लिए ऊपर की ओर चढ़ गए। इसके बाद हम उस पहाड़ी पर पहुंचे, जहां आर्म्ड रिजर्व पुलिस कैंप था। वहां पुलिस ने हमारी मदद की और हमें सुरक्षित जगह पर रखा।” शुक्रवार को चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचे 21 तीर्थयात्रियों का स्वागत तमिलनाडु के मंत्री नारायणसामी आनंद और मंत्री डी सरथकुमार ने किया।

दूसरी जिंदगी मिल गई

उन्होंने बताया कि उस मुश्किल समय में उनके दिमाग में हर वक्त सिर्फ अपनी बेटी की चिंता चल रही थी। किरुबाथिरी के लिए यह हादसा किसी दूसरी जिंदगी मिलने जैसा था। उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह एक नया जन्म है। मैं किसी से शिकायत नहीं कर सकती। क्लाइमेट चेंज एक सच्चाई है और गरीब लोगों को अक्सर दूसरों की गलतियों का सबसे ज्यादा खामियाजा भुगतना पड़ता है।” वहीं, वल्लीनायकी ने बाढ़ के इस भयावह मंजर को ज्वालामुखी फटने जैसा बताया। उन्होंने बताया, “यह हमारे लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। ऐसा लग रहा था जैसे कंक्रीट का कोई ज्वालामुखी फट गया हो और सब कुछ अपनी चपेट में ले रहा हो।”

अब तक 620 से ज्यादा लोगों की हुई मौत

तिब्बत सीमा के पास बाढ़ से प्रभावित गांवों में राहत और बचाव कार्य में मदद के लिए शनिवार को भारत की 11 सदस्यीय टीम नेपाल पहुंची। यह टीम स्थानीय अधिकारियों के साथ मिलकर प्रभावित लोगों तक सहायता पहुंचाने और बचाव अभियान में सहयोग करेगी। नेपाल और तिब्बत में बाढ़ के बाद हालात अभी भी बेहद गंभीर बने हुए हैं। इस आपदा में नेपाल में 626 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सीमा के दोनों तरफ 2,500 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं।

कभी भी टूट सकती है झील: नेपाल में फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, चीन ने दी चेतावनी

Nepal Flood Alert: नेपाल में एक बार फिर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। यह खतरा उस भीषण फ्लैश फ्लड के सिर्फ चार दिन बाद सामने आया है, जिसमें देश के कई इलाकों में भारी तबाही हुई थी। इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने चेतावनी दी है कि ऊपर की ओर बनी एक अस्थायी झील किसी भी समय टूट सकती है।

चीन के अधिकारियों ने नेपाल के विदेश मंत्रालय को इस बारे में जानकारी दी है। अधिकारियों ने बताया कि झील में कुछ बदलाव देखे गए हैं, जिसमें पानी का रंग लगातार गहरा होना शामिल है। बीजिंग ने यह भी कहा है कि उसके मॉडल के मुताबिक, अगर झील को रोकने वाले प्राकृतिक बांध का कुछ हिस्सा टूटता है, तो नदी में अधिकतम करीब 500 घन मीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से पानी आ सकता है। इससे नेपाल के कई इलाकों में एक बार फिर बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।

नई चेतावनी किस वजह से जारी की गई?

चीनी अधिकारियों ने झील के बदलते रूप को संभावित चेतावनी का संकेत बताया है।

नेपाल को भेजे गए संदेश में कहा गया, “परसों बननी शुरू हुई झील का रंग लगातार गहरा होता जा रहा है। इसका मतलब है कि यह फट सकती है।”

चीन ने कहा कि झील में अभी पानी की मात्रा बहुत ज्यादा नहीं है। उसने यह भी कहा कि अगर रुकावट टूटती है, तो नदी के निचले बहाव में थोड़ी बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन बहुत ज्यादा बढ़ोतरी की संभावना कम है।

फिलहाल, निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

कितना पानी जमा हुआ है?

ग्लेशियर के ढहने से मलबे की एक प्राकृतिक रुकावट बन गई, जिससे ल्हेन्डे नदी सिस्टम के ऊपरी हिस्से में एक अस्थायी झील बन गई है। कहा जा रहा है कि इसी घटना के कारण इस हफ्ते की शुरुआत में नेपाल और तिब्बत में अचानक बाढ़ आई थी।

यह झील चीन की तरफ चोचेन नदी और नेपाल की तरफ पुरेपु नदी के संगम के पास स्थित है।

चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, झील का जलस्तर धीरे-धीरे बढ़ रहा है। शुक्रवार तक लगभग 25 लाख (2.5 मिलियन) क्यूबिक मीटर पानी जमा हो गया था।

चीनी अधिकारियों ने पहले अनुमान लगाया था कि अगले तीन दिनों में झील में और 30 लाख (3 मिलियन) क्यूबिक मीटर पानी जमा हो सकता है।

अगर प्राकृतिक रुकावट टूट जाए तो क्या होगा?

चीन ने इस बात का अंदाजा लगाने के लिए बाढ़ की मॉडलिंग की है कि अगर अस्थायी रुकावट का कोई हिस्सा टूटता है, तो कितना पानी नीचे की ओर बह सकता है। चीनी संदेश में कहा गया, “अगर बांध का कोई हिस्सा टूटता है, तो पानी का अधिकतम बहाव 500 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड हो सकता है। यह नदी के किनारों के भीतर ही रहेगा।”

अधिकारी ड्रोन और सैटेलाइट का इस्तेमाल करके भी इलाके पर नजर रख रहे हैं।

झील से पानी पहले ही बहने लगा है

शुक्रवार को झील का पानी ल्हेंडे खोला और त्रिशूली नदियों में बहने लगा। चीन के सरकारी ब्रॉडकास्टर CCTV के अनुसार, दोपहर तक इस बहाव से होने वाले तुरंत खतरे को काबू में माना जा रहा था।

हालांकि, इस आकलन के बावजूद, झील के टूटने की आशंका को लेकर चिंता बनी हुई है, क्योंकि नेपाल अभी भी बुधवार को आई अचानक बाढ़ के असर से उबरने की कोशिश कर रहा है।

बाढ़ की तबाही से अब भी जूझ रहा नेपाल

नेपाल में बचाव और राहत कार्य जारी हैं और अधिकारी नदी के ऊपरी हिस्से में भी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। नेपाल में कम से कम 579 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि तिब्बत में कम से कम सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

ताजा चेतावनी के बाद निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता और बढ़ गई है। अधिकारी अब अस्थायी झील में पानी के स्तर के साथ-साथ उसे रोकने वाले प्राकृतिक बांध की मजबूती पर भी लगातार नजर रख रहे हैं।

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