Gold Silver Weekly Report: सोने और चांदी में हफ्ते के आखिर में तेज गिरावट, सोना 3% फिसला

Gold Silver Weekly Report: सोने के लिए यह हफ्ता अच्छा नहीं रहा। चांदी में भी इस हफ्ते गिरावट आई। इसकी वजह अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच है। 28 अगस्त को फेड चेयरमैन ने साफ कर दिया कि फिलहाल उनका फोकस इनफ्लेशन को कंट्रोल करने पर होगा। इसका असर बुलियन की कीमतों पर पड़ा।

24 अगस्त को सोना 4700 डॉलर के करीब पहुंच गया था

सोना इस हफ्ते मंगलवार यानी 24 अगस्त को तीन महीने के सबसे ऊंचे लेवल 4,696 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी 28 अगस्त को स्पॉट गोल्ड 3.18 फीसदी गिरकर 4,454 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी भी 27 अगस्त को करीब 69 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी। 28 अगस्त को यह 4.48 फीसदी गिरकर 66 डॉलर पर आ गई।

फेड चेयरमैन की स्पीच से सोने और चांदी में तेज गिरावट 

शुक्रवार की गिरावट से पहले इस हफ्ते सोने और चांदी में अच्छी तेजी आई थी। इसकी वजह अमेरिका में बॉन्ड यील्ड को बढ़ने से रोकने के लिए सरकार की तरफ से उपाय का ऐलान डिबेसमेंट ट्रेड था। लेकिन, फेड चेयरमैन की स्पीच से सोने और चांदी की कीमतों में तेजी पर ब्रेक लग गया। अमेरिका में जुलाई में पर्सनल कंजमप्शन एक्सपेंडिचर इनफ्लेशन 3.7 फीसदी पर रहा।

दिल्ली सर्राफा बाजार में भी फिसला सोना 

दिल्ली सर्राफा बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में 28 अगस्त को गिरावट आई। सोना 3,300 रुपये गिरकर 1,62,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। यह दिल्ली में सोने की कीमतों में गिरावट का लगातार तीसरा दिन था। इस हफ्ते दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमतेंत 4,700 रुपये प्रति 10 ग्राम गिरी हैं। 25 अगस्त को दिल्ली में सोना 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था।

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सोने की कीमतों पर मुनाफा वसूली का भी असर 

कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस हफ्ते कीमतों में तेजी के बाद सोने में मुनाफावसूली देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर में मजबूती का असर भी सोने पर पड़ा। डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना सस्ता हो जाता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है। घरेलू बाजार में बुलियन की कीमतों पर सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी कम होने की चर्चा का भी असर पड़ा।

Ashoka Buildcon को RVNL से मिला ₹602 करोड़ का प्रोजेक्ट, अब 31 अगस्त को रहेगी शेयरों पर नजर

Ashoka Buildcon Shares: दिग्गज सिविल कंस्ट्रक्शन कंपनी अशोक बिल्डकॉन को रेलव विकास निगम लिमिटेड (RVNL) से ₹602.16 करोड़ (जीएसटी मिलाकर) का एक कॉन्ट्रैक्ट मिला है। कंपनी ने इसकी जानकारी आज 29 अगस्त को एक्सचेंज फाइलिंग में दी है। ऐसे में अशोका बिल्डकॉन के शेयरों पर इसका असर सोमवार 31 अगस्त को मार्केट खुलने पर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले शुक्रवार 28 अगस्त को बीएसई पर यह 0.22% की गिरावट के साथ ₹112.70 पर बंद हुआ है। एक साल में शेयरों के चाल की बात करें तो पिछले साल 4 नवंबर 2025 को यह एक साल के निचले स्तर ₹214.35 पर था जिससे 4 महीने में यह 52.88% टूटकर 30 मार्च 2026 को ₹101.00 पर आ गया था।

कैसा ऑर्डर मिला है Ashoka Buildcon को RVNL से?

अशोक बिल्डकॉन को रेल विकास निगम लिमिटेड से उत्तराखंड में बन रही ऋषिकेश-कर्णप्रयाग नई रेल लाइन की चार सुरंगों के लिए ₹602.16 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह ऑर्डर प्रोजेक्ट के E-4 पैकेज के तहत आने वाली सुरंगों T-13, T-14, T-15 और T-16 से जुड़ा है। इसके तहत कंपनी को सुरंगों के लिए जरूरी इलेक्ट्रिकल और मैकेनिकल सिस्टम की सप्लाई, इंस्टॉलेशन, टेस्टिंग और कमीशनिंग का काम करना है। इनमें सब-स्टेशन, हाई-टेंशन और लो-टेंशन केबल, डीजल जनरेटर सेट, लाइटिंग, यूपीएस सिस्टम, वेंटिलेशन और फायर-फाइटिंग सिस्टम शामिल हैं।

कंपनी को 30 महीने के भीतर यह कॉन्ट्रैक्ट पूरा करना है। इसके अलावा कंपनी को रेल विकास निगम के पास ₹25.51 करोड़ की परफॉरमेंस बैंक गारंटी भी जमा करनी होगी। इसमें डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड दो साल है यानी काम पूरा होने के बाद दो साल तक तय शर्तों के अनुसार किसी कमी या खराबी की जिम्मेदारी कंपनी की रहेगी।

ऑर्डर बुक में सबसे बड़ा हिस्सा सड़कों का

इस महीने की शुरुआत में अशोक बिल्डकॉन ने आरईसी पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी से महाराष्ट्र में एक ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट के लिए LoI (लेटर ऑफ इंटेंट) मिलने की बात कही थी। इस प्रोजेक्ट में सालाना लगभग ₹126.5 करोड़ का ट्रांसमिशन चार्जेज है। इस प्रोजेक्ट के तहत महाराष्ट्र के भंडारा जिले में सकोली सबस्टेशन बनाया जाएगा। इस कंपनी को 24 महीने के भीतर काम पूरा करना है और इसके बाद 35 वर्षों तक O&M (ऑपरेशंस एंड मेंटेनेंस) का काम संभालना है।

इससे पहले जून 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी का ऑर्डर बुक ₹15,251 करोड़ था। इसमें तिमाही के बाद मिले ₹451 करोड़ के ऑर्डर शामिल नहीं हैं। ऑर्डर बुक में सबसे बड़ा हिस्सा सड़कों का था, जिसमें रोड ईपीसी ₹6,783 करोड़ और रोड एचएएम ₹1,519 करोड़ है और कुल मिलाकर ये ऑर्डर बुक का करीब 54.5% हिस्सा हैं। रेलवे के ₹1,346 करोड़ के ऑर्डर्स को मिलाकर सड़क और रेलवे कंपनी का ऑर्डर बुक का करीब 63% हिस्सा हैं। ऑर्डर बुक में ₹5,066 करोड़ यानी 33.2% हिस्सा पावर ट्रांसमिशन एंड डिस्ट्रीब्यूशन तो ₹536 करोड़ यानी 3.5% हिस्सा बिल्डिंग ईपीसी की है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ओरछा में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक मेंं युवा वोटर्स को पार्टी से जोड़ने और मिशन 2028 की बनेगी रणनीति

ओरछा में भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक मेंं युवा वोटर्स को पार्टी से जोड़ने और मिशन 2028 की बनेगी रणनीति

भोपाल। भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक 30 और 31 अगस्त को ओरछा में होगी। बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव,प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में चुन गए प्रदेश भाजपा के नेता सहित पार्टी के जिला अध्य़क्ष सहित 300 से अधिक नेता शामिल होंगे।

भगवान रामराजा की नगरी ओरछा दो दिवसीय बैठक में मिशन 2028 और 2029 को लेकर पार्टी की आगामी रणनीति पर मंथन होगा। बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम को संगठन स्तर तक पहुंचाने के साथ-साथ सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने पर भी चर्चा होगी। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की टीम की इस पहली बैठक में प्रदेश में अगले साल होने वाले नगरीय निकाय चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव को लेकर महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रस्ताव पास हो सकता है।

युवाओं को पार्टी से जोड़ने का तैयार होगा रोडमैप-इसके  साथ युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए रोडमैप का खाका भी कार्यसमिति की बैठक में तैयार होगा। भाजपा का फोकस युवा मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने पर भी रहेगा। मिशन 2028-29 को ध्यान में रखते हुए युवा वोटर्स तक पहुंच बढ़ाने और उन्हें संगठन से जोड़ने की रणनीति पर चर्चा होगी।

पार्टी नेताओं का मानना है कि युवा मतदाताओं तक प्रभावी ढंग से पहुंचने के लिए सोशल मीडिया सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में पार्टी के युवा कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका देने के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने की रणनीति तैयार की जाएगी।
 
दरअसल भाजपा देश में बदले सियासी हालात में आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए सोशल मीडिया को और प्रभावी बनाने की तैयारी कर रही है। भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से सरकार की उपलब्धियों और पार्टी की विचारधारा को लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया जाएगा। पार्टी की रणनीति में खासतौर पर रील्स और शॉर्ट वीडियो के जरिए नेरेटिव सेट करने पर जोर रहेगा। इसके लिए कार्यकर्ताओं को सोशल मीडिया के नए और प्रभावी तरीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा सकता है।
 
संगठन विस्तार और मिशन-2028 की रणनीति पर मंथन- कार्यसमिति की बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक और मजबूत करने, आगामी चुनावों की तैयारियों तथा सरकार की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने जैसे मुद्दों पर भी चर्चा होगी। नेताओं को जमीनी स्तर पर संगठन को मजबूत करने और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के निर्देश दिए जा सकते हैं। बैठक में पार्टी के आगामी कार्यक्रमों और संगठनात्मक गतिविधियों की रूपरेखा भी तय की जाएगी। इसके साथ ही सरकार और संगठन के बीच बेहतर समन्वय को लेकर भी चर्चा होने की संभावना है।

Lamborghini Temerario Tricolore image gallery

Lamborghini Temerario Tricolore image gallery
Lamborghini Temerario Tricolore front quarter right

Lamborghini unveiled the Temerario Tricolore at the 2026 Monterey Car Week. With this, the ‘Tricolore’ name returns to Lamborghini after a period of 15 years, with the previous one having been the Gallardo LP 550-2 Tricolore in 2011. This unique example of the Temerario features bespoke exterior and interior design highlights, though it remains mechanically identical to a standard-spec Lamborghini Temerario. The twin-turbo V8 engine is paired with two rear-mounted and one front-mounted electric motors, while transmission duties are handled by an 8-speed dual-clutch automatic gearbox.

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दक्षिण अफ्रीका नहीं जीत पाती नामिबिया से, कल भी हुई उलटफेर का शिकार

दक्षिण अफ्रीका की टीम जो 2 बार टी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल और एक बार फाइनल में जगह बना चुकी है वह अपने पड़ोसी देश की टीम और असोसिएट देश नामिबिया की टीम से एक भी टी-20 मैच नहीं जीत पाई। गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे और नामिबिया त्रिकोणीय टी-20 श्रृंखला खेल रहे हैं और कल के शरुआती मुकाबले में मेजबान नामिबिया ने दक्षिण अफ्रीका को 18 रनों से हरा दिया।

यह  नामिबिया की दक्षिण अफ्रीका पर लगातार दूसरी जीत है। इससे पहले एक टी-20 मुकाबले में नामिबिया दक्षिण अफ्रीका को पहले भी हरा चुकी है। नामिबिया क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए इस मैच में दक्षिण अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। उनको पहला विकेट 10वें ओवर में मिला और नामिबिया ने तब तक 84 रन जड़ दिए। प्रेनेल सुब्रायन ने सर्वाधिक 3 विकेट चटकाए।

सलामी बल्लेबाजों के अलावा नामिबिया के लिए कोई खास रन नहीं आए लेकिन लौरेन स्टीनकैंप और जैन फ्राएलिंक (41 और 60 रन ) ने नामिबिया को 9 विकेटों के नुकसान पर 163 रनों तक पहुंचा दिया। इसके जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत खराब रही टीम ने शीर्ष 3 बल्लेबाज 7 ओवर में 39 रन बनाकर ही गंवा दिए।

डेवाल्ड ब्रेविस ने 75 रन बनाकर टीम की जीत को जिंदा रखा लेकिन जैसे ही वह आउट हुए दक्षिण अफ्रीका ताश के पत्तों की तरह ढह गई और निर्धारित 20 ओवरों में सिर्फ 145 रन ही बना पाई। मैन ऑफ द मैच नामिबिया के जेे जे स्मट को मिला जिन्होंने 31 रन देकर 3 विकेट लिए।

जनता दर्शन में CM योगी ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं

जनता दर्शन में CM योगी ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं

CM Yogi Janta Darshan

CM Yogi Janta Darshan: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान शनिवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन में विभिन्न जिलों से आए लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि बिना भेदभाव, हर व्यक्ति की समस्या का समाधान कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। सीएम योगी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि जनता की शिकायतों का निस्तारण संवेदनशीलता और शीघ्रता से किया जाए। उन्होंने हर पात्र व्यक्ति को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने, जरूरतमंदों के समुचित इलाज की व्यवस्था करने और जमीन कब्जाने वाले भू माफिया व दबंगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

 

महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करीब 200 लोगों से मिले। कुर्सियों पर बैठे लोगों तक वह खुद गए। उनकी समस्याओं व शिकायतों को ध्यान से सुना। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित और संतुष्टिपरक निस्तारण का निर्देश देने के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि हर पीड़ित की समस्या का पारदर्शी समाधान सुनिश्चित कराया जाएगा। 

 

जनता दर्शन में हर बार की तरह कुछ लोग गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। इन लोगों से मुख्यमंत्री ने कहा कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का एस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए, सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी। सीएम ने राजस्व और कानून व्यवस्था से जुड़े मामलों में शीघ्रता से निस्तारण के निर्देश दिए। जनता दर्शन में कुछ लोग पारिवारिक विवादों के मामले भी लेकर आए थे। इस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पारिवारिक विवादों में सर्वप्रथम सबंधित पक्षों के बीच संवाद कराने की पहल की जाए। 

मुख्यमंत्री ने की गोसेवा, गोवंश को खिलाया गुड़

गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। मुख्यमंत्री ने गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से पूड़ी-गुड़ खिलाया।

 

नेपाल की ग्लेशियर बाढ़ ने बजाई कश्मीर के लिए खतरे की घंटी, बढ़ती ग्लेशियल झीलें बन सकती हैं तबाही की वजह

नेपाल की ग्लेशियर बाढ़ ने बजाई कश्मीर के लिए खतरे की घंटी, बढ़ती ग्लेशियल झीलें बन सकती हैं तबाही की वजह

glacier

नेपाल-तिब्बत सीमा पर ग्लेशियर टूटने से आई विनाशकारी बाढ़ ने हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों और उनसे बनी झीलों के खतरे की घंटी फिर बजा दी है। 26 अगस्त की घटना में बर्फ, चट्टान और मलबे के साथ अचानक आई बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई। इसका सीधा सबक कश्मीर हिमालय के लिए भी महत्वपूर्ण है, जहां बढ़ते तापमान और ग्लेशियरों के पीछे हटने से ग्लेशियल झीलों की संख्या और आकार दोनों बढ़ रहे हैं। ALSO READ: नेपाल की बाढ़ में फंसे 320 भारतीयों से संपर्क नहीं, खरगे ने PM मोदी और अमित शाह से की बड़ी मांग

 

कश्मीर पर जनवरी 2026 में प्रकाशित एक विस्तृत अध्ययन के अनुसार 1992 से 2024 के बीच क्षेत्र में 155 ग्लेशियल झीलों का वैज्ञानिक आकलन किया गया। खास चिंता की बात यह है कि बर्फ से सीधे जुड़ी प्रोग्लेशियल झीलों के क्षेत्रफल में 32 वर्षों में 26 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई है।

 

इससे पहले ऊपरी झेलम बेसिन के एक अध्ययन में 393 ग्लेशियल झीलें चिन्हित की गई थीं, जिनमें 102 प्रोग्लेशियल, 13 सुप्राग्लेशियल और 278 अन्य ग्लेशियल झीलें शामिल थीं। इनमें 21 झीलों को संभावित रूप से खतरनाक पाया गया—सात उच्च, नौ मध्यम और पांच निम्न खतरे की श्रेणी में। इन संभावित खतरनाक झीलों का क्षेत्रफल 1980 के 5.92 वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2020 में 8.46 वर्ग किलोमीटर, यानी करीब 30 प्रतिशत बढ़ गया।

 

एक अन्य दीर्घकालिक अध्ययन में कश्मीर हिमालय की ग्लेशियल झीलों की संख्या 1990 के 253 से बढ़कर 2018 में 324 हो गई, जबकि उनका कुल क्षेत्रफल 18.84 से बढ़कर 22.13 वर्ग किलोमीटर हो गया। अध्ययन के अनुसार 0.1 वर्ग किलोमीटर से बड़ी झीलें अचानक फटने पर नीचे के इलाकों में विनाशकारी बाढ़ पैदा करने की क्षमता रखती हैं। खतरा केवल झील के फटने तक सीमित नहीं है। ग्लेशियर का टूटना, हिमस्खलन, चट्टानों का झील में गिरना अथवा भूकंपीय हलचल झील की प्राकृतिक बांध जैसी संरचना को तोड़ सकती है। इसके बाद पानी, बर्फ और मलबे की तेज धारा घाटियों में कई किलोमीटर तक तबाही मचा सकती है।

 

नेपाल की घटना ने इस जोखिम को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक गर्म होते हिमालय में ग्लेशियरों का पीछे हटना, पर्माफ्रॉस्ट का कमजोर होना और अस्थिर पर्वतीय ढलान आपस में मिलकर ऐसी घटनाओं की संभावना बढ़ा रहे हैं। ALSO READ: नेपाल-तिब्बत सीमा पर मंडराया बड़ा खतरा, 72 घंटे में टूट सकती है बैरियर लेक, फिर आ सकती है प्रलयंकारी बाढ़

 

कश्मीर के लिए चुनौती अब केवल ग्लेशियरों की निगरानी नहीं, बल्कि संभावित खतरनाक झीलों की 24 घंटे निगरानी, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और निचली घाटियों में त्वरित निकासी योजना तैयार करना है। नेपाल की त्रासदी ने स्पष्ट कर दिया है कि हिमालय में छोटी-सी झील भी अचानक बड़े जलप्रलय में बदल सकती है।

11 साल की बेटी का फोन चेक करते ही मां के उड़े होश, चैट और वीडियो देखकर बढ़ी चिंता

11 साल की बेटी के फोन पर आए कुछ अजीब नोटिफिकेशन ने एक मां की चिंता बढ़ा दी। पहले उसने इन संदेशों को सामान्य समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन लगातार नोटिफिकेशन आने के बाद उसने फोन देखने का फैसला किया। इसके बाद जो बातें सामने आईं, उन्होंने मां को परेशान कर दिया और उसे अपनी बेटी के हालिया व्यवहार के बारे में दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया। मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों का मानना था कि कम उम्र के बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर माता-पिता की नजर रहनी चाहिए, जबकि दूसरे लोगों ने बच्चे की निजता और भावनात्मक स्थिति को ज्यादा अहम बताया।

खासकर यह सवाल चर्चा में रहा कि ऐसी परिस्थिति में माता-पिता को सजा देने के बजाय बच्चे से किस तरह बातचीत करनी चाहिए। इस घटना ने बच्चों के फोन इस्तेमाल, सोशल मीडिया और पैरेंटिंग को लेकर एक जरूरी बहस छेड़ दी है।

रात में फोन लेने वाली मां ने पहली बार चेक किया

27 साल की मां ने बताया कि वह हर रात अपनी बेटी का फोन अपने पास रखती है। सप्ताह के दिनों में रात 9 बजे और वीकेंड पर करीब 10:30 बजे फोन ले लिया जाता है। हालांकि, उसने पहले कभी बेटी का फोन खंगाला नहीं था, क्योंकि उसे ऐसा करने की जरूरत महसूस नहीं हुई।

लेकिन इस बार फोन पर लगातार TikTok के नोटिफिकेशन देखकर उसका ध्यान गया। खास बात यह थी कि बेटी को TikTok इस्तेमाल करने की अनुमति भी नहीं थी।

नोटिफिकेशन में खाने को लेकर हो रही थी बात

मां ने पहले सोचा कि शायद कोई जरूरी संदेश आया होगा, इसलिए उसने नोटिफिकेशन का प्रीव्यू पढ़ा। वहां किसी व्यक्ति द्वारा उसकी बेटी से पूछा जा रहा था कि उसने क्या खाया और कितना खाया। यह देखकर मां को चिंता हुई। इसके बाद उसने बेटी का TikTok अकाउंट और दूसरी बातचीत भी देखी। उसे खाने से जुड़े कई पोस्ट, बहुत दुबली लड़कियों वाले वीडियो और कम खाना खाने को लेकर बातचीत मिली।

बेटी के बदलते व्यवहार से भी जुड़ गईं कड़ियां

फोन देखने के बाद मां ने पिछले कुछ हफ्तों में बेटी में आए बदलावों को नए नजरिए से देखा। उसके मुताबिक, बेटी पहले की तुलना में कम खाना खा रही थी और उसका वजन भी घट रहा था। शुरुआत में मां ने इसे उम्र बढ़ने और शरीर में होने वाले बदलावों का हिस्सा समझा था। उसने बताया कि वह खुद भी करीब इसी उम्र में लंबी और दुबली हुई थी, इसलिए उसे बेटी में आए बदलाव असामान्य नहीं लगे।

मां के सामने अब सबसे बड़ा सवाल- सजा या मदद?

मां ने माना कि बेटी का फोन देखना उसकी निजता में दखल था। लेकिन फोन में मिली चीजों ने उसे इस कदर परेशान कर दिया कि वह समझ नहीं पा रही थी कि बेटी से इस मुद्दे पर कैसे बात करे। उसने ऑनलाइन लोगों से यह भी पूछा कि बिना अनुमति ऐप इस्तेमाल करने पर बेटी को सजा देना सही होगा या नहीं। यही सवाल पोस्ट का सबसे विवादित हिस्सा बन गया।

लोगों ने कहा- सजा नहीं, पहले बच्चे को समझिए

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने मां के सजा पर ध्यान देने की आलोचना की। कुछ यूजर्स ने कहा कि अगर बच्ची खाने और शरीर को लेकर परेशान करने वाली चीजों से प्रभावित हो रही है, तो सबसे पहले उसकी स्थिति समझना जरूरी है।

एक यूजर ने कहा कि बच्ची को मदद और भावनात्मक सहारे की जरूरत हो सकती है, जबकि मां का ध्यान ऐप इस्तेमाल करने की सजा पर ज्यादा है।

कुछ लोगों ने मां की भी बात मानी

हालांकि, हर किसी ने मां को गलत नहीं ठहराया। कुछ यूजर्स ने कहा कि 11 साल की उम्र में बच्चे को बिना निगरानी इंटरनेट इस्तेमाल करने देना भी जोखिम भरा हो सकता है। एक व्यक्ति ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि बचपन में बिना निगरानी इंटरनेट इस्तेमाल करने का उस पर बुरा असर पड़ा था। उसके मुताबिक, कम उम्र के बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर माता-पिता की नजर रहनी चाहिए।

असली बहस फोन की नहीं, बच्चे की सुरक्षा की है

इस पूरी घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- बच्चों को फोन देते समय माता-पिता उनकी निजता और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाएं? एक तरफ बच्चों की निजी बातचीत में दखल देने का सवाल है, तो दूसरी तरफ इंटरनेट पर मौजूद ऐसा कंटेंट भी है जो कम उम्र में उनके खाने, शरीर और खुद को देखने के तरीके को प्रभावित कर सकता है। सोशल मीडिया पर हुई बहस में ज्यादातर लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे हालात में बच्चे से खुलकर बात करना और उसकी परेशानी को समझना, केवल सजा देने से कहीं ज्यादा जरूरी है।

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मां मान चुकी थी कि बेटा नहीं रहा फिर नेपाल बाढ़ के बीच हुआ चमत्कार! 8 साल के मासूम ने पेड़ पर चढ़ यूं बचा ली थी अपनी जान

नेपाल में आई भयानक बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदलकर रख दी है। इस तबाही में कई परिवार अपनों से बिछड़ गए हैं। वहीं इस त्रासदी में कई बच्चे भी प्रभावित हुए है। वहीं इस बाढ़ के बीच 8 साल के जोयाल की कहानी काफी वायरल हो रही है। नेपाल में आई भयानक बाढ़ से बचने के लिए 8 साल के जोयाल जंगल की ओर भाग गया और कुछ समय तक पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई। इस दौरान उसकी मां बेहद परेशान थी। बाद में वह आखिरकार अपनी मां से मिल गया। लंबे इंतजार के बाद बच्चे के सुरक्षित मिलने से परिवार ने राहत की सांस ली है। आइए जानते हैं पूरी कहानी

सुरक्षित निकाला गया बाहर

बाढ़ से प्रभावित नेपाल के रसुवा जिले से जोयाल घाले को हेलिकॉप्टर की मदद से सुरक्षित बाहर निकाला गया। जोयाल के पैर में चोट लगी थी और चेहरे पर भी कई कट और चोट के निशान थे। उसकी 28 वर्षीय मां मैटी माया तमांग पूरे दिन राहत शिविरों और लोगों को जुटाने वाली जगहों पर अपने दोनों बेटों को तलाशती रहीं। काफी समय तक बच्चों का कोई पता नहीं चलने पर उन्हें डर सताने लगा था कि शायद दोनों की बाढ़ में जान चली गई है।

कैसे पता चला बेटा जिंदा है

मैटी माया तमांग ने रॉयटर्स को बताया, “मुझे लगने लगा था कि मेरे दोनों बच्चे अब इस दुनिया में नहीं हैं। मैं सिर्फ रो रही थी और खुद को संभाल नहीं पा रही थी।” बाद में उन्हें पता चला कि उनका बेटा जोयाल जिंदा है। रॉयटर्स की पत्रकार सहाना बजराचार्य ने उनसे संपर्क किया और बताया कि वह पास के नुवाकोट के एक अस्पताल में जोयाल से मिली थीं। जब तमांग को पता चला कि जोयाल जिंदा है और उसे इलाज के लिए काठमांडू ले जाया गया है, तो उन्हें इस बात पर यकीन ही नहीं हुआ। उन्होंने कहा, “जब आपने बताया कि आपको पता है कि जोयाल कहां है, तो मुझे विश्वास नहीं हुआ। मैंने तो पहले ही उम्मीद छोड़ दी थी कि मैं उसे कभी ढूंढ पाऊंगी।” तमांग ने कहा, “जब मुझे अपने बड़े बेटे के बारे में पता चला, तो लगा जैसे मेरी जिंदगी वापस मिल गई हो।” तमांग को उनका छोटा बेटा भी सुरक्षित मिल चुका था।

हर तरफ फैले थे कीचड़

बुधवार सुबह जोयाल और उसका भाई स्कूल की गाड़ी से स्कूल गए थे, जबकि उनकी मां घर पर बुनाई का काम कर रही थीं। तभी उन्हें भूकंप जैसी तेज आवाज सुनाई दी। तमांग तुरंत स्कूल की ओर भागीं, लेकिन वहां पहुंचकर वह हैरान रह गईं। उन्होंने बताया, “समझ ही नहीं आ रहा था कि स्कूल कहां है और बाजार कहां था। हर तरफ सिर्फ पानी, पत्थर और कीचड़ नजर आ रहा था।” बाढ़ में स्कूल की पूरी इमारत तबाह हो गई थी। लेकिन, जोयाल किसी तरह अपनी जान बचाने में कामयाब रहा। बाद में उसने बचावकर्मियों को बताया कि जब बाढ़ आई, तब वह पढ़ाई कर रहा था और अचानक चारों तरफ “बहुत ज्यादा अंधेरा” छा गया।

करीब 17 हजार बच्चे हुए प्रभावित

बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ता देख जोयाल अपने एक दोस्त के साथ स्कूल से निकलकर पास के जंगल में चला गया। दोनों बच्चों ने पानी से बचने के लिए पेड़ों पर चढ़कर शरण ली। जब आठ साल के जोयाल से पूछा गया कि क्या उस समय उसे डर लगा था, तो उसने सिर्फ सिर हिलाकर “नहीं” कहा। जोयाल और उसका भाई भी उन हजारों बच्चों में शामिल हैं जो नेपाल में आई बाढ़ के कारण मुश्किल में फंस गए। यूनिसेफ के मुताबिक, रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों में करीब 17 हजार बच्चे बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। संस्था नेपाल सरकार के साथ मिलकर ऐसे बच्चों की जानकारी जुटा रही है जो अपने परिवार से अलग हो गए हैं। इन बच्चों की पहचान कर उन्हें रजिस्टर किया जा रहा है और उनके परिवारों से मिलाने की कोशिश की जा रही है।

बता दें, लांगटांग लिरुंग पहाड़ के पास ग्लेशियर का एक हिस्सा अचानक टूट गया, जिससे बाढ़ आ गई। इसके बाद बर्फ और पत्थर तेजी से नीचे आने लगे और घाटी में पानी, कीचड़ और मलबा भर गया