
अरुणाचल प्रदेश से सटी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तल्खी एक बार फिर बढ़ गई है। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने बेहद चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि पिछले कुछ दिनों में सीमा के कई अलग-अलग प्वॉइंट्स पर दोनों देशों की सेनाओं के बीच सीधा टकराव हुआ है। यह तनावपूर्ण स्थिति केवल एक जगह तक सीमित नहीं है, बल्कि कई रणनीतिक ठिकानों पर अब भी जारी है। ALSO READ: इंटरनेट पर हाहाकार! PHP की इस खतरनाक गलती से खतरे में वेबसाइट्स, सरकारें क्यों कर रही हैं ऑफलाइन?
ITBP कर्मियों के लिए आयोजित ‘हिमवीर सम्मान समारोह’ में कपूर ने कहा कि अरुणाचल सीमा पर चल रहे टकरावों में ITBP के कमांडो एक्टिव रहे हैं। उन्होंने कहा कि ITBP को एक ‘माउंटेन गुरिल्ला फोर्स’ के रूप में बनाया गया था और 2004 में हमें चीन के साथ लगती सीमा की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हमें अपने मूल काम को छोड़ने की जरूरत नहीं है। हम सेना से अलग, ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में लड़ने के लिए एक विशेष बल तैयार कर रहे हैं।
जहां एक तरफ़ चीन के सामने घुटने टेकने वाले प्रधानमंत्री की ओर से लगातार रियायतें देने का सिलसिला जारी है, इसी बीच ITBP के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी PLA के साथ भारतीय सीमा के भीतर हालिया टकरावों में ITBP के प्रदर्शन की सराहना की है, जो बिल्कुल सही भी है। लेकिन प्रधानमंत्री और उनका पूरा तंत्र इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठा है। ताकसिंग में टकराव के बाद पिछले महीने अरुणाचल प्रदेश के वाचा और दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई। स्थानीय लोगों ने बताया है कि लद्दाख की तरह एक बार फिर गश्त के कुछ बिंदु हमारे हाथ से निकल गए हैं। चीन अरुणाचल प्रदेश के हमारे शहरों के नाम बदलता जा रहा है और 60,000 मेगावाट का एक बाँध बना रहा है, जो हमारी पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा के लिए बड़ा ख़तरा है। चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 2025-26 में रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जो पिछले साल 99 अरब डॉलर था। इससे कई उद्योगों में हमारे MSME बुरी तरह तबाह हुए हैं। ‘मेक इन इंडिया’ अब ‘इम्पोर्ट फ्रॉम चाइना’ बन गया है। इतना बड़ा व्यापार घाटा हमारी आर्थिक सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती है। भारत आज भी 19 जून 2020 को चीन को दी गई प्रधानमंत्री की उस कुख्यात क्लीन चिट की कीमत चुका रहा है। हमारे 20 बहादुर जवानों की शहादत के बाद प्रधानमंत्री ने कहा था: “ना कोई वहाँ हमारी सीमा में घुस आया है और न ही कोई घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्ज़े में है।” पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने खुलासा किया था है कि लद्दाख में चीनी घुसपैठ के दौरान उन्हें केवल यही निर्देश मिला था: “जो उचित समझो वो करो।” 4 जुलाई 2025 को उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से बताया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सैन्य अभियान में चीन की भूमिका कितनी व्यापक और गहराई तक फैली हुई थी। लेकिन 25 अगस्त 2026 को पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने सार्वजनिक रूप से लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के खुलासों का खंडन किया और उसके कुछ ही समय बाद RSS/BJP के इकोसिस्टम के एक प्रमुख थिंक टैंक की कमान संभाल ली। देश सवाल पूछ रहा है: सीमा पर जारी तनाव के बावजूद चीन के प्रति यह नरमी और आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती निर्भरता आखिर किस तरह का राष्ट्रवाद है? देश को 56 इंच की छाती के खोखले दावे नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा पर स्पष्ट जवाब चाहिए।
— Jairam Ramesh (@Jairam_Ramesh) October 23, 2026
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, जहां एक तरफ़ चीन के सामने घुटने टेकने वाले प्रधानमंत्री की ओर से लगातार रियायतें देने का सिलसिला जारी है, इसी बीच ITBP के महानिदेशक ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी PLA के साथ भारतीय सीमा के भीतर हालिया टकरावों में ITBP के प्रदर्शन की सराहना की है, जो बिल्कुल सही भी है। लेकिन प्रधानमंत्री और उनका पूरा तंत्र इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे बैठा है।
उन्होंने कहा कि ताकसिंग में टकराव के बाद पिछले महीने अरुणाचल प्रदेश के वाचा और दमाई में कोर कमांडर स्तर की बातचीत हुई। स्थानीय लोगों ने बताया है कि लद्दाख की तरह एक बार फिर गश्त के कुछ बिंदु हमारे हाथ से निकल गए हैं। चीन अरुणाचल प्रदेश के हमारे शहरों के नाम बदलता जा रहा है और 60,000 मेगावाट का एक बाँध बना रहा है, जो हमारी पारिस्थितिकी और जल सुरक्षा के लिए बड़ा ख़तरा है। ALSO READ: ‘विदेश घूम रहे हैं राहुल गांधी, कांग्रेस के लिए बन चुके हैं पहेली- सुधांशु त्रिवेदी का करारा हमला
कांग्रेस नेता ने कहा कि चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 2025-26 में रिकॉर्ड 112 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जो पिछले साल 99 अरब डॉलर था। इससे कई उद्योगों में हमारे MSME बुरी तरह तबाह हुए हैं। ‘मेक इन इंडिया’ अब ‘इम्पोर्ट फ्रॉम चाइना’ बन गया है। इतना बड़ा व्यापार घाटा हमारी आर्थिक सुरक्षा के लिए भी एक गंभीर चुनौती है।
जयराम रमेश ने कहा, भारत आज भी 19 जून 2020 को चीन को दी गई प्रधानमंत्री की उस कुख्यात क्लीन चिट की कीमत चुका रहा है। हमारे 20 बहादुर जवानों की शहादत के बाद प्रधानमंत्री ने कहा था: “ना कोई वहाँ हमारी सीमा में घुस आया है और न ही कोई घुसा हुआ है, न ही हमारी कोई पोस्ट किसी दूसरे के कब्ज़े में है।” पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे ने खुलासा किया था है कि लद्दाख में चीनी घुसपैठ के दौरान उन्हें केवल यही निर्देश मिला था: “जो उचित समझो वो करो।”
उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि 4 जुलाई 2025 को उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने सार्वजनिक रूप से बताया था कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सैन्य अभियान में चीन की भूमिका कितनी व्यापक और गहराई तक फैली हुई थी। लेकिन 25 अगस्त 2026 को पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने सार्वजनिक रूप से लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह के खुलासों का खंडन किया और उसके कुछ ही समय बाद RSS/BJP के इकोसिस्टम के एक प्रमुख थिंक टैंक की कमान संभाल ली।
रमेश ने सवाल किया कि सीमा पर जारी तनाव के बावजूद चीन के प्रति यह नरमी और आर्थिक मोर्चे पर बढ़ती निर्भरता आखिर किस तरह का राष्ट्रवाद है? देश को 56 इंच की छाती के खोखले दावे नहीं, राष्ट्रीय सुरक्षा पर स्पष्ट जवाब चाहिए।


