Kashmiri Pandits: दशकों बाद कश्मीर में लौटी उम्मीद! शोपियां में कश्मीरी पंडितों ने रखी राम मंदिर की नींव, लोगों की यादों से जुड़ा है पूरा इतिहास

Kashmiri Pandits News: कश्मीर घाटी से विस्थापन के दशकों बाद कश्मीरी पंडित समुदाय ने शनिवार (29 अगस्त) को शोपियां के एक मोहल्ला में राम मंदिर के पुनर्निर्माण की दिशा में बड़ा कदम उठाया। यहां समुदाय के सैकड़ों लोग एकत्र हुए और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान के बाद भगवान राम मंदिर की आधारशिला रखी। यह कार्यक्रम कश्मीरी पंडितों के लिए धार्मिक आस्था के साथ-साथ अपनी पुरानी जड़ों और विरासत से जुड़ने का बेहद भावुक क्षण रहा।

दशकों तक विस्थापन झेलने के बाद, कश्मीरी पंडितों ने पारंपरिक पूजा और हवन के साथ जम्मू-कश्मीर के शोपियां के टाक मोहल्ले में ऐतिहासिक राम मंदिर के पुनर्निर्माण की नींव रखी। 1989 में आगजनी से क्षतिग्रस्त और बाद में अतिक्रमण का शिकार हुई इस जगह को स्थानीय प्रशासन की कोशिशों से समुदाय को वापस सौंपा गया। जबकि पुरातत्व और विरासत विभाग ने पुनर्निर्माण के लिए फंड मंजूर किया।

समुदाय और स्थानीय निवासियों ने इस पहल को सिर्फ एक मंदिर के निर्माण के तौर पर नहीं। बल्कि कश्मीरी पंडितों की कश्मीर घाटी में वापसी, उनकी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के पुनरुद्धार और कश्मीर की साझा सांस्कृतिक पहचान की बहाली की उम्मीद के प्रतीक के तौर पर देखा।

1989 में जला दिया गया था राम मंदिर

इस मंदिर का इतिहास कश्मीर के बेहद संवेदनशील दौर से जुड़ा हुआ है। साल 1989 में घाटी में उग्रवाद के दौर के बीच शोपियां में मौजूद राम मंदिर को जला दिया गया था। इसके बाद मंदिर की जमीन पर कथित तौर पर अतिक्रमण भी किया गया। समय बीतने के साथ कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर घाटी से विस्थापन हुआ। इसके बाद यह धार्मिक स्थल भी समुदाय की स्मृतियों का हिस्सा बनकर रह गया। लेकिन अब करीब साढ़े तीन दशक बाद अब उसी जमीन पर मंदिर के पुनर्निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई है।

सैकड़ों लोग हुए धार्मिक कार्यक्रम में शामिल

राम मंदिर की आधारशिला रखने के कार्यक्रम में कश्मीरी पंडित समुदाय के सैकड़ों सदस्य शामिल हुए। इस दौरान पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान किया गया। राम मंदिर के पुनर्निर्माण की औपचारिक शुरुआत की गई। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था। बल्कि उन पुरानी यादों से दोबारा जुड़ने का अवसर था, जो विस्थापन के कारण उनसे दूर हो गई थीं।

प्रशासन की पहल से पुनर्निर्माण का रास्ता साफ

राम मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए प्रशासन की ओर से भी महत्वपूर्ण पहल की गई है। इंडिया टुडे के मुताबिक, पुरातत्व एवं विरासत विभाग ने अपनी विरासत संरक्षण पहल के तहत इस परियोजना के लिए धनराशि स्वीकृत की है। इस कदम से शोपियां के इस पुराने धार्मिक स्थल को दोबारा विकसित करने और क्षेत्र की ऐतिहासिक एवं धार्मिक विरासत को संरक्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

‘यह सिर्फ मंदिर का निर्माण नहीं, हमारी जड़ों से जुड़ने का प्रयास’

कार्यक्रम में शामिल कुछ कश्मीरी पंडितों ने कहा कि यह मंदिर उनके लिए केवल ईंट-पत्थर से बनने वाली कोई इमारत नहीं है। यह शोपियां के साथ उनके पैतृक संबंध, उनकी धार्मिक आस्था और कश्मीर की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान में समुदाय की मौजूदगी की याद है। उनका कहना था कि मंदिर का दोबारा निर्माण उस विरासत को पुनर्जीवित करने की कोशिश है। इससे कश्मीरी पंडित विस्थापन के कारण लंबे समय से दूर रहे हैं।

स्थानीय लोगों ने भी किया स्वागत

मंदिर के पुनर्निर्माण की पहल का स्थानीय निवासियों ने भी स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि कश्मीरी पंडित कश्मीर के इतिहास, संस्कृति और साझा विरासत का अभिन्न हिस्सा हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, समुदाय से जुड़े पुराने धार्मिक स्थलों का पुनरुद्धार घाटी की साझी और समावेशी सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।

एक स्थानीय निवासी ने न्यूज एजेंसी IANS से कहा, “दशकों पहले यहां एक मंदिर हुआ करता था। लेकिन धीरे-धीरे वह जर्जर हो गया। फिर उसका अस्तित्व खत्म हो गया। लेकिन अब हालात बेहतर हुए हैं। सरकार ने इसे फिर से बनाने की पहल की है। स्थानीय लोगों और प्रशासन ने इसके लिए बहुत मेहनत की है। आज यहां मंदिर का पुनर्निर्माण हो रहा है। हम इस प्रयास की सराहना करते हैं।”

अन्य लोगों ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि करीब 35 साल से अधिक समय बाद शोपियां में राम मंदिर की आधारशिला रखा जाना कश्मीरी पंडितों के लिए सिर्फ एक निर्माण कार्य की शुरुआत नहीं। बल्कि विस्थापन, पीड़ा और पुरानी यादों के बीच अपनी जड़ों की ओर लौटने की उम्मीद का प्रतीक बन गया है।

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Hot Stocks : अगले हफ्ते सुदीप शाह के पसंदीदा इन शेयरों पर रहे नजर, चमका सकते हैं आपका पोर्टफोलियो

Hot stocks : कल 31 अगस्त से शुरू होने वाले नए हफ्ते के लिए एक्शन वाले शेयरों पर बात करते हुए SBI सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह ने कहा कि अगले हफ्ते LTM और Elgi Equipments के शेयरों धीरे-धीरे खरीदारी करने (एक्युमुलेशन) की सलाह होगी। LTM में 34-डे EMA के पास पांच-दिन की कंसोलिडेशन रेंज से मज़बूत वॉल्यूम के साथ जबरदस्त ब्रेकआउट देखने को मिला है, जबकि Elgi Equipments ने 61.8 प्रतिशत के फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल से वापसी की है और अपने पिछले चार-दिन के हाई से ऊपर जबरदस्त ब्रेकआउट दिखाया है। इन शेयरों में और आगे बढ़ने का दम नजर आ रहा है।

एथर एनर्जी (Ather Energy)

एथर एनर्जी (Ather Energy) के शेयरों पर अपनी राय देते हुए सुदीप शाह ने कहा कि मज़बूत वॉल्यूम सपोर्ट के साथ इस शेयर ने अपने पिछले हाई लेवल को पार किया है,जबकि RSI ऊपर की ओर बढ़ा है,जो बुलिश मोमेंटम में सुधार का संकेत है। जब तक यह स्टॉक ₹1,520–1,500 के जोन के ऊपर बना रहता है,तब तक इसमें बुलिश ट्रेंड के बने रहने की संभावना है।

BSE 

क्या BSE लिमिटेड में नया निवेश करने का यह सही समय है,जिसने पिछले दो हफ्तो में ₹3,220 के सपोर्ट लेवल को बनाए रखा है? इसके जवाब में सुदीप शाह ने कहा कि BSE का शेयर पिछले 10 सेशन से ₹3,412–3,223 की रेंज में बना हुआ है और अपने 200-डे EMA के ऊपर टिका हुआ है। अगर यह ₹3,412 के लेवल को पार करके ऊपर जाता है,तो इसमें नई तेजी आ सकती है।

कोफोर्ज (Coforge)

क्या हॉरिजॉन्टल ट्रेंडलाइन ब्रेकआउट कोफोर्ज (Coforge) में खरीदारी के लिए मजबूत संकेत दे रहा है? इस पर सुदीप शाह ने कहा कि Coforge ने मजबूत वॉल्यूम सपोर्ट के साथ अपनी पांच दिन की कंसोलिडेशन रेंज को तोड़ा है। जबकि MACD लाइन सिग्नल लाइन के ऊपर चली गई,जो तेजी के मोमेंटम (bullish momentum) के मजबूत होने का संकेत है। जब तक स्टॉक ₹1,920–1,900 के जोन के ऊपर बना रहता है,तब तक इस तेजी के जारी रहने की संभावना है।

अगले हफ्ते के लिए सुदीप शाह की दो टॉप पिक्स

एलटी माइंडट्री (LTM)

सुदीप शाह का कहना है कि इस स्टॉक में 34 डे EMA के पास पांच दिन की कंसोलिडेशन रेंज से जबरदस्त ब्रेकआउट देखा गया है,जिसे अच्छे वॉल्यूम का सपोर्ट मिला है। इससे पता चलता है कि इसमें फिर से खरीदारी में दिलचस्पी बढ़ रही है। यह अभी भी अपने 200-डे EMA के ऊपर ट्रेड कर रहा है,जबकि 60 से ऊपर RSI और पॉजिटिव MACD इसके तेजी वाले मोमेंटम को और मज़बूत करते हैं। शॉर्ट टर्म में ₹4,680-₹4,640 की रेंज में इसे खरीदने की सलाह होगी। इसके लिए ₹4,530 के स्टॉप-लॉस के साथ ₹4,980 का अपसाइड टारगेट सेट करें।

एल्गी इक्विपमेंट्स ( Elgi Equipments)

सुदीप शाह में कहा कि यह स्टॉक 61.8 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल से वापस ऊपर आया है और पिछले चार दिनों के हाई से ऊपर एक मज़बूत ब्रेकआउट दिखाया है,जिसे पिछले छह सेशन में सबसे ज़्यादा वॉल्यूम का सपोर्ट मिला है। यह स्टॉक अपने 20 डे और 50 डे EMA से ऊपर ट्रेड कर रहा है। साथ ही RSI में सुधार और MACD में बढ़त के कारण इसका टेक्निकल सेटअप पॉज़िटिव बना हुआ है। इसमें ₹628-622 की रेंज में खरीदारी (एक्युमुलेशन) की सलाह होगी। इसके लिए ₹603 का स्टॉप-लॉस और ₹660 का शॉर्ट-टर्म टारगेट रखा जा सकता है।

 

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Asian Games में मेडल जीते बिना घर नहीं जाएंगी मीराबाई चानू, खा ली कसम

भारत की मीराबाई चानू का मानना है कि जापान के आइची, नागोया में होने वाले एशियाई खेल 2026 उनके इंटरनेशनल वेटलिफ्टिंग करियर की “सबसे मुश्किल प्रतियोगिताओं” में से एक होंगे।

मीराबाई चानू एशियाई खेलों में पांच सदस्यों वाली भारतीय वेटलिफ्टिंग टीम की अगुवाई करेंगी। तीन बार ओलंपिक में हिस्सा ले चुकीं मीराबाई टीम की चार महिला खिलाड़ियों में से एक होंगी। एशियाई खेलों में वेटलिफ्टिंग प्रतियोगिता 22 से 28 सितंबर तक आइची के टोकाई सिटिज़न जिम्नेजियम में होगी।

कॉमनवेल्थ गेम्स में अपना तीसरा गोल्ड मेडल जीतने के बाद, टोक्यो 2020 की सिल्वर मेडलिस्ट मीराबाई को लगता है कि एशियाई खेलों में मुकाबला “ओलंपिक स्तर” का होगा। मीराबाई ने कहा, “मेरी वेट कैटेगरी (49 किग्रा) में सबसे मजबूत लिफ्टर एशिया से ही आते हैं और आपको जापान में ओलंपिक जैसी झलक देखने को मिलेगी।”

इससे पहले चोटों की वजह से मीराबाई चानू एशियाई खेलों में मेडल नहीं जीत पाई थीं। हांगझोऊ में हुए पिछले खेलों में, हिप और जांघ की चोट के कारण स्नैच राउंड में ही उनका अभियान खराब हो गया था और वह 49 किग्रा कैटेगरी में चौथे स्थान पर रही थीं। जकार्ता में हुए 2018 के खेलों में, पीठ की गंभीर चोट के कारण मीराबाई चानू बाहर हो गई थीं।

आगामी एशियाई खेलों से पहले चोट से दूर रहना मीराबाई की सबसे बड़ी प्राथमिकता है।उत्तर प्रदेश के मोदीनगर में एक सेंटर पर उनकी ट्रेनिंग की देखरेख करने वाले दो लोग कोच विजय शर्मा और अमेरिकी स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच डॉ. एरन हॉर्शिग हैं। डॉ. हॉर्शिग के साथ उनका जुड़ाव नवंबर 2020 में शुरू हुआ था और आज भी जारी है।

मीराबाई ने कहा, “हम हर गुरुवार उनसे वीडियो कॉल पर बात करते हैं और ट्रेनिंग, रिकवरी और आगे के कदमों के बारे में चर्चा करते हैं।” “हर चीज़ की बारीकी से समीक्षा की जाती है और चूंकि डॉ. हॉर्शिंग खुद एक वेटलिफ्टर थे, इसलिए उन्हें शरीर की हर मांसपेशी के बारे में जानकारी है। इस लगातार समीक्षा ने मुझे फिट रखा है।”

एशियाई खेलों की तैयारी ज़ोर-शोर से चल रही है। ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद मीराबाई और उनकी टीम ने एक भी दिन बर्बाद नहीं किया। कॉमनवेल्थ गेम्स के आयोजकों ने वेटलिफ्टिंग हॉल हटा दिया था, लेकिन मीराबाई, विजय शर्मा और फिजियो रोहित छाबड़िया ने ग्लासगो में एक जिम ढूंढा और ट्रेनिंग सेशन के लिए पैसे दिए।

मीराबाई ने कहा, “मैं सीधे मोदीनगर में ट्रेनिंग के लिए लौट आई। असल में, मैं घर नहीं गई और मैंने खुद को एक चुनौती दी है कि ‘जब तक मैं एशियाई खेलों में मेडल नहीं जीत लेती, तब तक घर नहीं जाऊंगी’।”

कॉमनवेल्थ गेम्स में लगातार तीन गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद, यह भारतीय वेटलिफ्टर ग्लासगो में मुकाबले के स्तर को बहुत ज़्यादा अहमियत नहीं दे रही हैं। मीराबाई ने कहा, “सच कहूं तो, कॉमनवेल्थ गेम्स में मुकाबला मेरे लिए मुश्किल नहीं था। मुझे ग्लासगो में बहुत ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। असली परीक्षा एशियाई खेलों में होगी।”

ग्लासगो में, मीराबाई ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में कुल 190 किग्रा (स्नैच – 85 किग्रा; क्लीन एंड जर्क – 105 किग्रा) वजन उठाकर गोल्ड मेडल जीता और स्नैच, क्लीन एंड जर्क और कुल वज़न में नए कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाए।

नाइजीरिया की रूथ असुकुओ न्योंग ने कुल 168 किग्रा (75 किग्रा 93 किग्रा) वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीता, जबकि मलेशिया की आइरीन जेन हेनरी ने 167 किग्रा (77 किग्रा 90 किग्रा) वजन उठाकर ब्रॉन्ज़ मेडल जीता।

मीराबाई का अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन 205 किग्रा (89 किग्रा 116 किग्रा) है, जो उन्होंने 2021 एशियाई चैंपियनशिप और हाल ही में फरवरी 2026 में राष्ट्रीय चैंपियनशिप में किया था। “मैं देखना चाहती हूं कि मैं जापान में कितना आगे जा सकती हूं। एशियाई खेल मेरे लिए सबसे मुश्किल रहे हैं।”

मीराबाई का कहना है कि उन्हें चीन, उत्तर कोरिया, जापान और थाईलैंड के वेटलिफ्टरों से सबसे कड़े मुकाबले की उम्मीद है। पेरिस 2024 में, थाईलैंड की सुरोदचाना खाम्बाओ ने मीराबाई को सिर्फ़ एक किलो के अंतर से चौथे स्थान पर धकेल दिया। थाई एथलीट ने कुल 200 किलो वज़न उठाया था।

मीराबाई ने कहा, “हम फ़िटनेस को लेकर सावधान रहे हैं और अब तक मुझे अपने शरीर में अच्छा महसूस हुआ है।” उन्होंने आगे कहा कि एशियाई खेल ही उनका एकमात्र लक्ष्य है। “मैं देखूँगी कि एशियाई खेलों में कैसा प्रदर्शन रहता है। लॉस एंजेलिस में वेट क्लास 53 किलो होगी और मुझे अपना वज़न बढ़ाना होगा। “यह कोई समस्या नहीं होनी चाहिए, लेकिन सब कुछ एशियाई खेलों के प्रदर्शन पर निर्भर करेगा और उसके बाद हम दिसंबर में होने वाले ओलंपिक क्वालीफ़ायर के लिए योजना बना सकते हैं। मुझे लगता है कि जो भी जापान में मुक़ाबला करेंगे, वे लॉस एंजेलिस 2028 को लक्ष्य बनाएँगे, लेकिन अभी मेरे लिए मिशन एशियाई खेल ही है।”

रक्षाबंधन पर महिलाओं को बड़ा तोहफा! 80 लाख ने की फ्री बस यात्रा, रात 12 बजे तक जारी रहेगी सुविधा

रक्षाबंधन पर महिलाओं को बड़ा तोहफा! 80 लाख ने की फ्री बस यात्रा, रात 12 बजे तक जारी रहेगी सुविधा

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रक्षाबंधन के पावन पर्व पर योगी सरकार की ओर से महिलाओं और उनके सहयात्रियों को दी गई निशुल्क बस यात्रा की सौगात का लाभ प्रदेशभर में बड़ी संख्या में यात्रियों को मिला। 28 अगस्त को ही 49.96 लाख से अधिक महिलाओं और उनके सहयात्रियों को बिना किराया दिए यात्रा का अवसर मिला। 29 अगस्त की शाम 5 बजे तक करीब 80 लाख महिलाएं व सहयात्री इस सुविधा का लाभ उठा चुके थे। आंकड़ों के बढ़ने का क्रम जारी है, निशुल्क यात्रा सुविधा शनिवार रात 12 बजे तक जारी रहेगी।

 

परिवहन निगम के मुताबिक 27 अगस्त को 9.26 लाख से ज्यादा महिलाओं व सहयात्रियों ने योजना का लाभ उठाया। इनमें 6.03 लाख से अधिक महिलाएं और 3.22 लाख से ज्यादा सहयात्री शामिल रहे। पहले ही दिन प्रदेशभर में लोगों ने इसका भरपूर लाभ लिया और योगी सरकार की सराहना की। इसके बाद 28 अगस्त यानी रक्षाबंधन को निशुल्क यात्रा का लाभ लेने वालों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई। इस दिन 49.96 लाख से ज्यादा निशुल्क टिकट जारी किए गए। इनमें 32.47 लाख से अधिक महिलाएं और 17.48 लाख से ज्यादा सहयात्री शामिल रहे। यानी रक्षाबंधन के दिन ही करीब 50 लाख महिलाओं व सहयात्रियों को बिना किराया दिए यात्रा की सुविधा मिली।

 

दो दिन में 59.23 लाख से ज्यादा यात्रियों को राहत

27 और 28 अगस्त के उपलब्ध आंकड़ों को मिलाकर दो दिन में 59.23 लाख से अधिक टिकट जारी किए जा चुके हैं। इनमें 38.51 लाख से अधिक महिलाएं और 20.71 से अधिक सहयात्री शामिल हैं। योगी सरकार की निशुल्क बस यात्रा योजना ने बड़ी संख्या में परिवारों को त्योहार पर आर्थिक राहत देने के साथ बहनों को भाईयों के पास पहुंचने का रास्ता आसान किया।

 

बुजुर्ग महिलाओं को भी मिली विशेष सुविधा

शुक्रवार से ही ‘लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति योजना’ के तहत बुजुर्ग महिलाओं को भी निशुल्क बस यात्रा की सुविधा मिलनी शुरू हो गई है। योजना के तहत परिवहन निगम की बसों में 60 वर्ष या उससे अधिक उम्र की महिलाओं को भी शून्य शुल्क वाले टिकट जारी किए गए, जिससे बुजुर्ग महिलाओं को भी त्योहार पर आवागमन में आर्थिक राहत मिली। 28 अगस्त को यात्रा करने वाली 32.47 लाख महिलाओं में वे भी शामिल हैं। परिवहन निगम इस योजना का तेजी से प्रचार-प्रसार भी कर रहा है, ताकि सभी पात्र महिलाएं इसका लाभ पा सकें।

 

सुरक्षित यात्रा के लिए परिवहन निगम की खास तैयारी

यूपीएसआरटीसी प्रधान प्रबंधक (संचालन) अनिल कुमार ने कहा कि रक्षाबंधन पर यात्रियों की संभावित भीड़ को देखते हुए उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने पहले से व्यापक तैयारियां की थीं। अधिक से अधिक बसों का संचालन, प्रमुख बस स्टेशनों पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती और यात्रियों की सुविधा पर विशेष निगरानी रखी गई। अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा भीड़ को व्यवस्थित करने, बसों के संचालन और यात्रियों को समय पर जानकारी उपलब्ध कराने में सक्रिय भूमिका निभाई जा रही है।

 

आंकड़े अभी और बढ़ने की उम्मीद

तीन दिवसीय इस निशुल्क यात्रा के समग्र आंकड़े शनिवार रात 12 बजे तक काटे गए शून्य शुल्क टिकटों के इनपुट्स अपडेट होने के बाद सामने आएंगे। यह प्रक्रिया लगातार जारी है। ऐसे में लाभार्थियों की संख्या आगे और बढ़ने की पूरी संभावना है।

3 reasons to buy the Hyundai Aura, 2 reasons not to

3 reasons to buy the Hyundai Aura, 2 reasons not to
hyundai aura

The Aura is Hyundai’s contender for the compact sedan segment, rivalling the likes of the Maruti Suzuki Dzire, Honda Amaze, and Tata Tigor. If you’re planning to bring home a Hyundai Aura, we’ve listed its most prominent strengths and weaknesses below.

Pros

Well-built interior

Step inside the Aura and you’ll be impressed with its bright colour scheme and excellent fit-and-finish. The central dashboard trim and centre console surround are decked out in a copper colour, which lends the front end of the cabin a unique look, and the leather-wrapped steering wheel and gear knob in higher trims do well to add a premium touch.

Smooth and refined engine

Under the bonnet, the Aura packs a sole 1.2-litre 4-cylinder naturally aspirated engine that can be had in either 83hp petrol or 69hp CNG guise. Gearbox options comprise a 5-speed manual and 5-speed AMT for the petrol, while the CNG gets only the former transmission.

As mentioned in our review of the Aura, the petrol-MT powertrain feels quite smooth and refined. It responds well to part-throttle inputs and effortlessly keeps up with traffic. That said, the Aura is best-suited to easygoing urban commuting, as performance is neither brisk nor exciting.

Easy to drive

In addition to its refined engine, the Aura has a very smooth and light steering feel, an absorbent ride, and a slick-shifting manual gearbox with a light clutch. Not to mention, the Aura’s relatively compact footprint makes it easy to manoeuvre in city traffic and on tight roads.

Cons

Falls short on cabin space

Though the Aura’s rear seat offers ample legroom, the narrow width of the car makes the bench best-suited for two adults only. The front seats aren’t the most comfortable either, as the cushioning is a tad too firm, the head restraints are not adjustable, and taller occupants with broader frames may find them too narrow.

Lacks some creature comforts

The Aura comes packed with much of the safety and convenience kit you need, but misses out on a lot of the nice-to-haves offered by rivals like the Dzire and Amaze. Specifically, the Aura doesn’t get a sunroof, a 360-degree camera, ADAS, built-in wireless Android Auto and Apple CarPlay, paddle shifters (for AMT), and connected car tech.

लेवरेज्ड ETF के लिए कोर्स करना जरूरी, दक्षिण कोरिया ने इस कारण बनाया नियम

दक्षिण कोरिया का $4.3 ट्रिलियन का स्टॉक मार्केट बहुत ही अधिक वोलेटाइल हो चुका है। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स (Samsung Electronics) और एसके हीनिक्स (SK Hynix) से जुड़े सिंगल-स्टॉक लेवरेज्ड ईटीएफ में निवेश तेजी से घटा है। अगस्त में इनसे करीब $100 करोड़ की निकासी हो चुकी है। ऐसे कठिन समय में मॉक ट्रेडिंग कोर्स निवेशकों के डर को दूर करने का प्रभावी तरीका बनता जा रहा है। बता दें कि दक्षिण कोरिया ने लेवरेज्ड ईटीएफ में रिस्क वाली ट्रेडिंग को कम करने के लिए नियम काफी सख्त कर दिए हैं। सबसे अहम बात ये है कि लेवरेज्ड ईटीएफ खरीदने के लिए यह कोर्स अनिवार्य है। न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक यह अनिवार्य नियम 19 अगस्त से लागू है।

क्या है मॉक ट्रेडिंग कोर्स में

अब निवेशकों को लेवरेज्ड ईटीएफ खरीदने से पहले पांच दिन का मॉक ट्रेडिंग कोर्स करना जरूरी होगा और हर दिन कम से कम 1 घंटे वर्चुअल मनी से ट्रेडिंग करनी होगी। इस कोर्स में विंडोज पीसी पर एक प्रोग्राम डाउनलोड करना जरूरी है, जिससे कई रिटेल इंवेस्टर्स इसे काफी झंझट वाला मान रहे हैं। यह ऐप सिर्फ पीसी पर ही डाउनलोड होगा और कोरियन एक्सचेंज का कहना है कि फिलहाल मोबाइल-बेस्ड प्लेटफॉर्म शुरू करने की कोई योजना नहीं है। सरकार का उद्देश्य खुदरा निवेशकों को हाई-रिस्क लेवरेज्ड प्रोडक्ट्स से दूर रखना है, और फिलहाल इन नियमों का असर साफ दिखाई दे रहा है।

क्या है Leveraged ETF की स्थिति

दक्षिण कोरियाई बाजार में लेवरेज्ड ईटीएफ का कुल AUM (एसेट अंडर मैनेजमेंट) जून के पीक $1140 करोड़ से घटकर 27 अगस्त तक करीब $500 करोड़ तक आ गया। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और हीनिक्स जैसे टेक स्टॉक्स में गिरावट ने मार्केट में कोहराम मचा दिया। अब सवाल उठता है कि इनमें इतनी तेज गिरावट क्यों आई तो इसका जवाब ये है कि सरकार के सख्त नियमों के साथ-साथ एआई सेक्टर में अधिक खर्च और उससे कमाई की संभावनाओं को लेकर चिंता ने भी टेक स्टॉक्स पर भी दबाव बनाया।

लेवरेज्ड ईटीएफ की स्थिति तो अब ऐसी है कि उनकी ट्रेडिंग वैल्यू जून के रिकॉर्ड हाई लेवल से सिर्फ 4% रह गई है तो इनमें पहली बार किसी महीने में निवेश से अधिक निकासी के आसार दिखने लगे हैं। इन ईटीएफ में ट्रेडिंग कम होने से वोलैटिलिटी कम हुई है। कोस्पी वोलैटिलिटी गॉज जून के 97 से गिरकर चार महीने के निचले स्तर लगभग 50 पर आ गया। दक्षिण कोरिया का इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स इस साल अभी भी 61% ऊपर है, लेकिन अपने दो महीने पुराने रिकॉर्ड हाई से 25% नीचे है।

Tax-Saving Mutual Fund: टैक्स बचाने वाला इकलौता म्यूचुअल फंड प्लान, तो सबसे कम लॉक-इन वाला ऑप्शन भी

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नेपाल बाढ़ में मौत को मात देने की 3 कहानियां:टी-ब्रेक ने भारतीयों को बचाया, शिक्षक की समझदारी से बची 1600 बच्चों की जान

नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ ने करीब 750 लोगों की जान ले ली, जबकि 2,500 लोग अब भी लापता हैं। बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई और कई परिवार बिछड़ गए। इस दर्दनाक मंजर के बीच कुछ लोगों के बचने की कहानियां भी सामने आई हैं। किसी की जान चाय के लिए रुके रहने से बची, तो किसी ने सैकड़ों बच्चों को सुरक्षित निकाला। पढ़िए, नेपाल बाढ़ में मौत को मात देने वाली ऐसी ही 3 कहानियां… ‘चाय के लिए नहीं रुकते तो जान जा सकती थी’ तीर्थयात्री गडा एलावेनी ने ANI को बताया कि उनका ग्रुप तीन बसों में काठमांडू से सफर कर रहा था। रास्ते में सभी लोग चाय पीने के लिए कुछ देर के लिए रुक गए। यह रुकना बाद में उनकी जिंदगी का सबसे अहम फैसला साबित हुआ। एलावेनी को बाद में पता चला कि उनसे करीब आधे घंटे पहले निकली दो बसें बाढ़ में बह गईं और उनका पता नहीं चला है। उन्होंने कहा, हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारे साथ ऐसा होगा। हम दर्शन नहीं कर पाए, लेकिन भगवान हमें सुरक्षित घर ले आए। एलावेनी ने बताया कि उन्होंने काठमांडू से करीब 80 किलोमीटर का सफर तय किया था और तीनों बसों में सवार सभी लोग सुरक्षित हैं। आंखों के सामने पूरा स्कूल बह गया, लेकिन बच्चे बचा लिए गए त्रिभुवन सेकेंडरी को-एजुकेशनल स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र दवाड़ी एक कक्षा में पढ़ा रहे थे। तभी उनका साथी दौड़ता हुआ आया। उसने बताया कि नदी के ऊपरी क्षेत्र में रहने वाले किसी व्यक्ति ने फोन करके बाढ़ आने की जानकारी दी है। दवाड़ी ने भास्कर को बताया, ‘मैंने तत्काल स्कूल की घंटी लगातार बजाने का निर्देश दिया, ताकि खतरे का अलार्म दिया जा सके। स्कूल में 1,600 स्टूडेंट पढ़ते हैं। बाढ़ वाले दिन कितने थे, पता नहीं। सभी बच्चों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया। हालांकि, मेरी आंखों के सामने स्कूल बाढ़ में बह गया।’ दवाड़ी ने कहा, ‘गनीमत रही कि बच्चे बच गए। बाद में मुझे हेलिकॉप्टर से बचाया गया। स्कूल में बाढ़ प्रभावित इलाकों के बच्चे पढ़ते थे। कई बच्चों ने पूरे परिवार खो दिए हैं।’ 6 साल की बच्ची 3 दिन मलबे में दबी रही, रेस्क्यू टीम ने बचाया रसुवा के तिमुरे इलाके में रेस्क्यू टीम ने 6 साल की बच्ची को बाढ़ के तीन दिन बाद मलबे के नीचे से जिंदा निकाला। टीम जब लापता लोगों की तलाश कर रही थी, तब उन्हें मलबे के नीचे से बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। इसके बाद जवानों ने मिट्टी और मलबा हटाकर बच्ची को बाहर निकाला। इसके बाद बच्ची को तिमुरे की पुलिस चौकी ले जाया गया। जहां से उसे इलाज के लिए काठमांडू भेजने की तैयारी की गई। खराब मौसम और अंधेरा होने के चलते उसे एयरलिफ्ट नहीं किया जा सका। अगले दिन हेलिकॉप्टर से उसे काठमांडू पहुंचाया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। ————————– यह भी पढ़ें….. नेपाल बाढ़, लोगों को 7:30 बजे खतरे का पता चला: अलर्ट डेढ़ घंटे बाद आया; आरोप- चीन ने नहीं चेताया, वरना सैकड़ों जानें बच जातीं नेपाल में 26 अगस्त की सुबह आई बाढ़ के बाद अलर्ट जारी करने की टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…

डेट पर जाने से पहले नहाना छोड़ रहे लड़के! ‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ ट्रेंड ने मचाई हलचल

सोशल मीडिया पर इन दिनों डेटिंग से जुड़ा एक अजीब ट्रेंड चर्चा में है। इसे ‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ कहा जा रहा है। इस ट्रेंड को फॉलो करने वाले कुछ युवा डेट पर जाने से पहले न नहाने और डियोड्रेंट न लगाने की सलाह दे रहे हैं। उनका मानना है कि शरीर की प्राकृतिक गंध उन्हें संभावित साथी के सामने ज्यादा आकर्षक बना सकती है।

यह ट्रेंड खास तौर पर किशोरों और युवा पुरुषों के बीच चर्चा में आया है और अब टिकटॉक से लेकर एक्स तक इसकी खूब बातें हो रही हैं।

Looksmaxxing से जुड़ा है यह अजीब ट्रेंड

‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ को इंटरनेट पर चल रहे बड़े ‘लुक्समैक्सिंग’ चलन का ही एक हिस्सा माना जा रहा है। लुक्समैक्सिंग में लोग अपनी शक्ल-सूरत और व्यक्तित्व को बेहतर दिखाने के लिए अलग-अलग तरीके अपनाते हैं।

लेकिन फेरोमोन-मैक्सिंग में मामला थोड़ा अलग है। यहां आकर्षण बढ़ाने के लिए साफ-सफाई और साज-सज्जा पर ध्यान देने के बजाय प्राकृतिक शरीर की गंध को प्राथमिकता देने की बात की जा रही है।

क्या सच में शरीर की गंध बना सकती है आकर्षक?

इस ट्रेंड के पीछे यह धारणा है कि इंसान शरीर से ऐसे रासायनिक संकेत छोड़ सकता है, जिन्हें संभावित साथी महसूस कर आकर्षित हो सकता है। इन्हें फेरोमोन कहा जाता है। जानवरों और कीड़ों में फेरोमोन की भूमिका अच्छी तरह दर्ज की गई है, लेकिन इंसानों में फेरोमोन सीधे तौर पर आकर्षण पैदा करते हैं या नहीं, इस पर वैज्ञानिक सहमति नहीं है।

यानी सोशल मीडिया पर जिस दावे को काफी आत्मविश्वास से पेश किया जा रहा है, उसके पीछे अभी ठोस वैज्ञानिक प्रमाण मौजूद नहीं हैं।

पसीने वाली टी-शर्ट ने भी खींचा था वैज्ञानिकों का ध्यान

गंध और आकर्षण के संबंध को समझने के लिए 1995 में एक चर्चित प्रयोग किया गया था, जिसे आम तौर पर ‘स्वेटी टी-शर्ट अध्ययन’ के नाम से जाना जाता है। इस प्रयोग में पुरुषों को लगातार दो रात एक ही टी-शर्ट पहनने को कहा गया। बाद में महिलाओं से इन टी-शर्ट की गंध को रेट करने के लिए कहा गया। अध्ययन में शरीर की गंध और कुछ आनुवंशिक विशेषताओं के बीच संभावित संबंध सामने आया। हालांकि, बाद के शोधों में इस बात की स्पष्ट पुष्टि नहीं हो सकी कि इंसान लगातार ऐसे साथी को ही ज्यादा पसंद करते हैं, जिसकी आनुवंशिक विशेषताएं उनसे अलग हों।

सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा- डेट पर जाने से पहले नहा लो!

ट्रेंड वायरल होने के बाद इंटरनेट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। ज्यादातर यूजर्स इस तरीके से बिल्कुल सहमत नजर नहीं आए। कई लोगों ने मजाक उड़ाते हुए कहा कि डेट पर आकर्षक दिखने का सबसे आसान तरीका नहाना, डियोड्रेंट लगाना, दांत साफ करना और जरूरत हो तो हल्का परफ्यूम लगाना है।

कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि अगर कोई व्यक्ति सामने वाले को अपनी ओर आकर्षित करना चाहता है, तो जानबूझकर ऐसी गंध पैदा करना कितना सही है, जिससे दूसरा व्यक्ति असहज हो जाए।

ट्रेंड को लेकर वैज्ञानिक सबूत अब भी कमजोर

‘फेरोमोन-मैक्सिंग’ का विचार भले ही सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा हो, लेकिन फिलहाल ऐसा मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जो यह साबित करे कि न नहाने या डियोड्रेंट छोड़ने से कोई व्यक्ति डेट पर ज्यादा आकर्षक बन जाता है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही इस सलाह और वैज्ञानिक तथ्यों के बीच यही सबसे बड़ा अंतर है। प्राकृतिक शरीर की गंध इंसानी पसंद और प्रतिक्रिया को प्रभावित कर सकती है, लेकिन इसे जानबूझकर बढ़ाकर रोमांटिक आकर्षण हासिल करने का दावा अभी साबित नहीं हुआ है।

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बंगाल सरकार लौटाएगी मेसी के कोलकाता इवेंट का पैसा, CM का बड़ा ऐलान, 33 हजार लोगों को मिलेगा रिफंड

नेशनल स्पोर्ट्स डे के मौके पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने फुटबॉलर लियोनेल मेसी के कार्यक्रम को लेकर बड़ा ऐलान किया। पिछले साल 13 दिसंबर को मेसी के युवा भारती स्टेडियम पहुंचने के दौरान कार्यक्रम में भारी भीड़ आने की वजह से हालात बिगड़ गए। अर्जेंटीना के मशहूर फुटबॉलर की एक झलक देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने 4,000 और 6,000 रुपये तक के टिकट खरीदे थे। मैदान में पैदा हुई कुछ परेशानियों के कारण कई दर्शकों को उन्हें देखने का मौका नहीं मिल सका। इसे बाद से टिकट के पैसे वापस करने की बात कही गई है। अभी तक इस मामले में उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। वहीं सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि, टिकट खरीदने वाले करीब 33,000 दर्शकों को उनकी रकम वापस की जाएगी।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेसी के कार्यक्रम की टिकट खरीदने वाले करीब 33,000 दर्शकों को उनकी रकम वापस की जाएगी। अर्जेंटीना के मशहूर फुटबॉलर की एक झलक देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने 4,000 और 6,000 रुपये तक के टिकट खरीदे थे। इसके लिए राज्य के खेल बजट से पैसे दिए जाएंगे।

रिफंड किया जाएगा

नेशनल स्पोर्ट्स डे पर बोलते हुए अधिकारी ने कहा, “मेसी के बहुत बड़े फैन हैं। उन्होंने Rs 4,000 और Rs 6,000 के टिकट खरीदे थे। मेरी इच्छा है कि इन 33,000 स्पोर्ट्स के शौकीनों का दिया हुआ पैसा वापस किया जाए। मैंने पहले ही अंदरूनी तौर पर प्रोसेस शुरू कर दिया है। मुझे उम्मीद है कि मैं इसे पूरा कर पाऊंगा।” उन्होंने आगे कहा,” 29 अगस्त को आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व हॉकी खिलाड़ी गुरबक्स सिंह, खेल मंत्री इंद्रनील खान, AIFF अध्यक्ष कल्याण चौबे समेत कई मशहूर हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया और उन्हें नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए।

पश्चिम बंगाल की भागीदारी हुई कम

अधिकारी ने कहा कि, “ये हैरान करने वाली बात है कि जिन खिलाड़ियों को आज नियुक्ति पत्र मिले हैं, उनमें से कई के पेपर 11 साल से मुख्यमंत्री के ऑफ़िस में धूल फांक रहे थे।” उन्होंने आगे कहा कि, “पिछले कुछ वर्षों में ओलंपिक, एशियन गेम्स और राष्ट्रीय टीमों में पश्चिम बंगाल के खिलाड़ियों की भागीदारी बेहद कम रही है, जबकि ओडिशा और झारखंड जैसे राज्य लगातार अपने खिलाड़ियों को बड़े मंच पर भेज रहे हैं।

मेसी के कार्यक्रम में हुई थी तोड़फोड़

13 दिसंबर, 2025 को कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में मेसी के G.O.A.T. इंडिया टूर इवेंट में अफरा-तफरी और तोड़फोड़ हो गई। हजारों फैंस, जिन्होंने 10,000 रुपये या उससे ज्यादा दिए थे, गुस्सा हो गए जब अधिकारियों और सेलिब्रिटीज ने पिच के किनारे भीड़ लगा दी, जिससे फुटबॉल सुपरस्टार को देखने में रुकावट आई और लगभग 20 मिनट बाद उन्हें अचानक जाना पड़ा।

Experts View : अगले हफ्ते निफ्टी के 24000 के नीचे जाने की संभावना कम, बैंक निफ्टी में एक मजबूत चाल दिखने की उम्मीद

अगले हफ्ते निफ़्टी के 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे टूटने की संभावना कम है। जब तक इंडेक्स 23,950 के अहम सपोर्ट जोन के नीचे नहीं जाता है, इसमें बड़ी गिरावट का डर नहीं है। ये बातें SBI सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह ने मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में कही हैं। उनके मुताबिक बहुत आक्रामक बिकवाली न होने से पता चलता है कि मंदड़ियों का अभी पूरी तरह से दबदबा नहीं बना है। निफ्टी अपने अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है,लेकिन इनमें से ज्यादातर एवरेज अब फ्लैट हो गए हैं,जो बड़ी गिरावट के बजाय कंसोलिडेशन (बाजार के एक दायरे में रहने) का संकेत दे रहे हैं।

उनका मानना ​​है कि हालिया तेजी के बाद बीच-बीच में प्रॉफ़िट बुकिंग की संभावना के बावजूद,निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स से निकट भविष्य में बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन जारी रखने की उम्मीद है।

अगले हफ्ते निफ्टी के 24,000 के स्तर से नीचे जाने की संभावना कम

बाजार की चाल पर बात करते हुए उन्होंने आगे कहा कि अगले हफ्ते निफ्टी के 24,000 के स्तर से नीचे जाने की संभावना कम है। जब तक इंडेक्स 23,950 के अहम सपोर्ट जोन के नीचे नहीं जाता है,इसमें बड़ी गिरावट का डर नहीं है। पिछले सात ट्रेडिंग सेशन में निफ़्टी 24,379 और 24,077 के दायरे में ही घूमता रहा है,जिससे साफ पता चलता है कि इसमें किसी खास दिशा में बढ़ने का मोमेंटम नहीं है। इंडेक्स अपने 200-दिन के EMA के ऊपर टिक नहीं पाया और हफ्ते के आखिर में 24,200 के आस-पास बंद हुआ,जो लगातार तीसरी वीकली गिरावट है। हालांकि,जबरदस्त बिकवाली न होने से संकेत मिलता है कि मंदड़ियों का अभी पूरी तरह से दबदबा नहीं बना है।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो निफ़्टी अपने अहम मूविंग एवरेज से नीचे ट्रेड कर रहा है,लेकिन इनके ज्यादातर एवरेज अब सपाट हो गए हैं,जो किसी बड़ी गिरावट के बजाय कंसोलिडेशन का संकेत दे रहे हैं। मोमेंटम इंडिकेटर भी इस बात का सपोर्ट कर रहे हैं। डेली RSI पिछले 13 सेशन से एक ही दायरे में बना हुआ है,जबकि स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर भी एक रेंज में ही ऊपर-नीचे हो रहा है,जो बाजार में अनिश्चितता की भावना को दिखाता है।

अब निफ्टी के लिए 24,000-23,950 का जोन काफी अहम हो गया है,जो पिछले स्विंग लो और ऊपर की ओर जाने वाली ट्रेंडलाइन सपोर्ट से मेल खाता है। अगर निफ्टी लगातार 23,950 के नीचे बना रहता है,तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है और इंडेक्स जल्द ही 23,700 की ओर जा सकता है।

ऊपर की तरफ निफ्टी के लिए 24,250-24,300 का जोन तत्काल रेजिस्टेंस बना हुआ है। इस रेंज के किसी भी तरफ ब्रेकआउट होने से बाजार की अगली चाल तय हो सकती है।

अगले हफ्ते बैंक निफ्टी में एक मजबूत चाल दिखने की उम्मीद

बैंक निफ्टी पर बात करते हुए सुदीप शाह ने कहा कि ऐसा लगता है कि अगले हफ्ते बैंक निफ़्टी में एक मजबूत चाल देखने को मिल सकती है,हालांकि ब्रेकआउट किस दिशा में होगा,यह अभी तय नहीं है। पिछले कुछ सेशन से इंडेक्स लगभग 1,075 अंकों के दायरे में ही घूम रहा है,जिससे पता चलता है कि मार्केट में कोई फैसला नहीं हो पा रहा है और न ही तेजड़िए और न ही मंदड़ियों का साफ दबदबा दिख रहा है।

बैंक निफ्टी के लिए एक अहम घटना डेली चार्ट पर बोलिंगर बैंड स्क्वीज़ का बनना है,जो उतार-चढ़ाव में भारी कमी का संकेत है। ऐसे सेटअप के बाद अक्सर कीमतों में बड़ी हलचल देखने को मिलती है,जिससे संकेत मिलता है कि बैंक निफ्टी में जल्द ही एक बड़ा ब्रेकआउट हो सकता है।

मोमेंटम इंडिकेटर न्यूट्रल बने हुए हैं,जिसमें RSI और स्टोकेस्टिक ऑसिलेटर दोनों ही साइडवेज (एक ही दायरे में)चल रहे हैं। ADX गिरकर 7.17 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया है,जो बहुत कमजोर ट्रेंड का संकेत है। पिछले आंकड़ों की बात करें तो ADX की ऐसी कम रीडिंग के बाद अक्सर कीमतों में किसी एक दिशा में तेज चाल देखने को मिलती है।

टेक्निकल तौर पर बैंक निफ्टी के लिए 58,000-58,200 का स्तर अहम रेजिस्टेंस जोन बना हुआ है,जबकि 57,200-57,000 एक अहम सपोर्ट एरिया है। इन दोनों में से किसी भी जोन के पार निर्णायक ब्रेकआउट से बैंक निफ्टी के अगले बड़े ट्रेंड का पता चलने की संभावना है।

जारी रहेगी छोटे-मझोले शेयरों का आउटपरफॉर्मेंस

सुदीप शाह का मानना है कि आगे मिड और स्मॉलकैप स्टॉक बेंचमार्क इंडेक्सों से बेहतर प्रदर्शन करते दिख सकते हैं। उनका कहना है कि हाल की तेजी के बाद बीच-बीच में होने वाली प्रॉफ़िट बुकिंग की संभावना के बावजूद,निकट भविष्य में ब्रॉडर मार्केट के बेंचमार्क इंडेक्स से बेहतर प्रदर्शन जारी रखने की उम्मीद है। निफ़्टी मिडकैप 100 और निफ़्टी स्मॉलकैप 100 दोनों ने नए रिकॉर्ड स्तर छुए हैं,जो मज़बूत मार्केट भागीदारी और बेहतर सेंटीमेंट को दिखाते हैं।

तकनीकी तौर पर ये दोनों इंडेक्स मजबूत अपट्रेंड में बने हुए हैं और अपने अहम मूविंग एवरेज से ऊपर ट्रेड कर रहे हैं। साथ ही मोमेंटम इंडिकेटर भी बुलिश जोन में हैं। निफ्टी मिडकैप 100 के लिए, 63,700-63,500 का जोन एक अहम सपोर्ट एरिया है। अगर यह इसके ऊपर बना रहता है,तो यह इंडेक्स 65,000-65,800 के स्तर तक जा सकता है।

निफ्टी स्मॉलकैप 100 के लिए 19,980-19,950 एक अहम सपोर्ट जोन बना हुआ है। 20,150 के स्तर को मजबूती से पार करने पर नई खरीदारी का मोमेंटम बन सकता है और इंडेक्स 20,400-20,600 के स्तर तक पहुंच सकता है। कुल मिलाकर,इनका ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है।

 

बाजार का मौजूदा मिजाज किसी भी एक दिशा में साफ नहीं, शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए लेवल बेस्ड ट्रेडिंग रहेगी सबसे अच्छी -अमोल अठावले

 

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