अगले 5 साल में क्रिटिकल मिनरल्स बिजनेस 5 गुना बढ़ाएगा वर्ल्ड बैंक ग्रुप, जानिए क्या है भारत और दुनिया के लिए प्लान

वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि वह अगले पांच सालों में क्रिटिकल मिनरल्स के कारोबार को पांच गुना बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने शुक्रवार को बताया कि स्थानीय उद्योगों को विकसित करने के लिए संभावित साझेदारियों के वास्ते 20 देशों की पहचान की गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के भीतर ही अधिक नौकरियां और इकोनॉमिक वैल्यू बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

बैंकॉक में वर्ल्ड बैंक की वार्षिक बैठकों के एक सेशन को संबोधित करते हुए, अजय बंगा ने कहा, “हम अगले पांच सालों में क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में अपने कारोबार को पांच गुना करने की योजना पर काम कर हैं। इस सप्ताह, हमने अन्य MDB (मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंक) साझेदारों के साथ मिलकर अपने पहले ‘कंट्री कॉम्पैक्ट्स'(देश-स्तरीय समझौते) शुरू किए हैं। इसका मकसद लोकल स्तर पर उद्योगों की स्थापना करना और खनिज कारोबार से मिलने वाले मूल्य और नौकरियों को संबंधित देश के भीतर ही बनाए रखना है।” उन्होंने आगे बताया कि इस काम के लिए उन्होंने 20 देशों की पहचान की है, जिनके साथ वे साझेदारी करेंगे।

आर्थिक गलियारों के विकास पर दिया जा रहा जोर

उन्होंने आगे कहा कि वर्ल्ड बैंक ग्रुप आर्थिक गलियारों (economic corridors)पर अपना फोकस और बढ़ा रहा है, जो बुनियादी ढांचे के विकास को निवेश के अवसरों के साथ जोड़ते हैं। इस संस्था ने पिछले साल 52 नई आर्थिक गलियारा परियोजनाएं शुरू कीं, जबकि इससे एक साल पहले इनकी संख्या सिर्फ 23 थी।

अजय बंगा ने एक ऐसे कॉरिडोर का उदाहरण दिया, जिसे शुरू में मुख्य रूप से खनिजों के परिवहन के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में किसान अपनी फसलों को बाजारों तक पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल करने लगे, जिससे इस रास्ते के किनारे बसे कस्बों और शहरों के विकास में मदद मिली।

विकास के लिए निजी पूंजी जुटाने पर फोकस बढ़ा

इन प्रयासों के साथ-साथ, वर्ल्ड बैंक ग्रुप विकास कार्यों के लिए निजी पूंजी जुटाने के अपने प्रयासों का विस्तार कर रहा है। बंगा ने बताया कि पिछले साल इस संस्था ने 112 अरब अमेरिकी डॉलर की निजी पूंजी जुटाई, जो वित्त वर्ष 2022 के लगभग 35 अरब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक है।

उन्होंने कहा,”पिछले साल 112 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए गए,जो कि तीन गुना बढ़त है।” उन्होंने आगे बताया कि संस्था की अपनी फंडिंग को मिलाकर कुल फंडिंग 230 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि निम्न-मध्यम आय वाले देशों में निजी पूंजी जुटाने की मात्रा लगभग तीन गुना हो गई, जबकि उच्च-मध्यम आय वाले देशों में यह चार गुना हो गई। वहीं, पूरे अफ्रीका में इसमें दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई। हालांकि,कम आय वाली,कमजोर और संघर्ष-ग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं में निजी पूंजी जुटाने की स्थिति स्थिर रही है,जहां व्यावसायिक निवेश आकर्षित करना अब भी मुश्किल बना हुआ है।

विकास के लिए साझा सिस्टम विकसित करने पर जोर

अजय बंगा ने कहा कि यह संस्था गारंटी, इक्विटी और स्थानीय मुद्रा में फाइनेंसिंग के ज़रिए करेंसी रिस्क और फाइनेंस तक सीमित पहुंच जैसी बाधाओं को दूर कर रही है। यह अन्य बहुपक्षीय विकास बैंकों के साथ मिलकर ऐसे साझा सिस्टम विकसित करने पर भी काम कर रही है, जिससे निवेश को दूसरे निवेशकों तक पहुंचाया जा सके और नई विकास परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाई जा सके। इसका मेन मकसद उन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना है जो उत्पादकता में सुधार करते हैं और रोजगार पैदा करते हैं। इनमें बुनियादी ढांचा और ऊर्जा, कृषि-व्यवसाय, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन और वैल्यू एडेड मैन्यूफैक्चरिंग (value-added manufacturing) जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

नौकरी कोई आंकड़ा नहीं, नौकरी सम्मान है

अजय बंगा ने ग्लोबल लेवल पर लगभग 80 करोड़ नौकरियों की अनुमानित कमी की ओर भी इशारा किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर युवाओं के लिए अवसर पैदा नहीं किए गए,तो पूरी दुनिया में इसके खराब परिणाम देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने युवाओं को अपना भविष्य बनाने में सक्षम बनाने के लिए रोज़गार के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा “नौकरी कोई आंकड़ा नहीं है। नौकरी सम्मान है।”

वर्ल्ड बैंक ग्रुप का विकास मॉडल कई चीजों का मेल

उन्होंने आगे कहा कि वर्ल्ड बैंक ग्रुप का विकास मॉडल कई चीजों का मेल है। पब्लिक फाइनेंलिंग (वहां,जहां बाजार नहीं पहुंच पाते), निजी पूंजी (वहां, जहां बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा की जा सकती हैं), शुरुआती जोखिमों में मदद के लिए परोपकारी निवेश और फाइनेंशिग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीक शामिल हैं। अजय बंगा ने कहा,”नौकरियों की कमी केवल एक अनुमान है। जरूरी नहीं कि हमारा भविष्य भी ऐसा ही हो।” उन्होंने विकास से जुड़ी पहलों को और बड़े पैमाने पर तथा तेजी से लागू करने का आह्वान किया।

 

 

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चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

char dham yatra sansmaran in hindi

यात्राएँ केवल पर्यटन नहीं, बल्कि स्वयं को जानने, जन-आस्था को अनुभव करने और प्रकृति के निकट पहुँचने का अवसर होती हैं। धार्मिक यात्रा मनुष्य को सांसारिक भागदौड़ से दूर कर आत्मचिंतन और ईश्वर के सान्निध्य में जाने का मार्ग दिखाती है। इसी भावना के साथ 26 सितंबर को मध्य प्रदेश के देवास से उत्तराखंड की चारधाम यात्रा प्रारंभ हुई। 15 दिनों के इस सफर ने मुझे आध्यात्मिक संतोष तो दिया, लेकिन धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की कठिनाइयों ने कई गंभीर प्रश्न भी खड़े किए।

 

माँ गंगा की आरती से हिमालय की दिव्यता तक

हरिद्वार में माँ गंगा की भव्य आरती, मंत्रोच्चार और दीपों से जगमगाती जलधारा ने मन को भावविभोर कर दिया। ऋषिकेश के आध्यात्मिक वातावरण से होते हुए यात्रा माँ यमुनोत्री पहुँची। लगभग छह से सात किलोमीटर के दुर्गम पहाड़ी मार्ग पर पैदल चढ़ाई, थकान और हल्की बारिश के बीच माँ यमुना के दर्शन हुए। इसके बाद उत्तरकाशी में श्री काशी विश्वनाथ महादेव और गंगोत्री में माँ गंगा के दर्शन किए। हिमालय की विशालता ने अनुभव कराया कि प्रकृति के सामने मनुष्य का अहंकार कितना छोटा है।

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केदारनाथ: आस्था अटूट, लेकिन व्यवस्था पर सवाल

यात्रा का सबसे कठिन पड़ाव बाबा केदारनाथ धाम रहा। लगभग 20 से 22 किलोमीटर के दुर्गम मार्ग पर चढ़ाई, घोड़े-खच्चरों की आवाजाही और यात्रियों की भीड़ के बीच आगे बढ़ना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। लगभग 12 घंटे की मशक्कत के बाद रात करीब दो बजे धाम पहुँचना संभव हुआ, जबकि दर्शन का सौभाग्य अगले दिन शाम लगभग छह बजे मिला। बाबा केदारनाथ के सम्मुख पहुँचते ही मन श्रद्धा से भर गया और सारी थकान मानो क्षणभर में मिट गई।

 

लेकिन घंटों की प्रतीक्षा ने सवाल भी खड़ा किया कि क्या श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?

 

देश के कोने-कोने से लोग धन, समय और शारीरिक सामर्थ्य खर्च करके अपने आराध्य तक पहुँचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएँ और अस्वस्थ लोग भी होते हैं। कठिन यात्रा के बाद घंटों कतार में खड़े रहना और अंततः कुछ सेकंड के दर्शन पाना उनकी पीड़ा को बढ़ाता है। इस समस्या के बीच VIP संस्कृति भी चिंता का विषय है। विशेष व्यक्तियों को प्राथमिकता देने से यदि आम श्रद्धालुओं को अतिरिक्त प्रतीक्षा करनी पड़े, तो यह व्यवस्था उनकी आस्था और सम्मान दोनों को ठेस पहुँचाती है।

 

ईश्वर के दरबार में हर भक्त बराबर है; किसी की विशेष सुविधा आम श्रद्धालु की परेशानी का कारण नहीं बननी चाहिए। हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती अवश्य हैं, लेकिन बेहतर योजना और जवाबदेही की आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ना उपलब्धि हो सकती है, पर उनकी परेशानियाँ बढ़ना व्यवस्था की सफलता नहीं है।

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त्रियुगीनारायण से बद्रीनाथ तक

केदारनाथ के बाद त्रियुगीनारायण मंदिर में दर्शन का अवसर मिला। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर की अखंड धूनी तथा भगवान विष्णु की उपस्थिति इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता बढ़ाती है। इसके बाद बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्रीविशाल के दर्शन के साथ यात्रा पूर्ण हुई। इन पवित्र स्थलों ने श्रद्धा, समर्पण और भारतीय संस्कृति की गहराई का अनुभव कराया।

 

आस्था या सोशल मीडिया का प्रदर्शन?

यात्रा के दौरान धार्मिक स्थलों पर तस्वीरें लेने और रील बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति भी दिखाई दी। अनुभव साझा करना गलत नहीं है, लेकिन जब कैमरा श्रद्धा पर हावी हो जाए, तो तीर्थयात्रा का वास्तविक उद्देश्य पीछे छूटने लगता है। प्रश्न यह है कि हम ईश्वर के दर्शन करने जाते हैं या दुनिया को यह दिखाने कि हम दर्शन करने गए थे? भक्ति का वास्तविक आनंद लाइक और कमेंट में नहीं, बल्कि उस क्षण में है जब मन बिना किसी दिखावे के अपने आराध्य के सामने झुकता है।

 

सरकार और प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश

चारधाम यात्रा में उमड़ती भीड़ सरकार और प्रशासन के लिए अवसर से अधिक जिम्मेदारी है। दर्शन व्यवस्था, यातायात, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा और आपातकालीन सहायता को मजबूत करना अनिवार्य है। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा VIP व्यवस्था के कारण आम श्रद्धालुओं का आवागमन और दर्शन बाधित नहीं होने चाहिए।

 

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान कोई सरकारी एहसान नहीं, बल्कि प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है। सरकार को घोषणाओं से आगे बढ़कर धरातल पर सुधार दिखाना होगा। समय रहते व्यवस्थाएँ नहीं सुधारी गईं, तो बढ़ती भीड़ भविष्य में गंभीर कठिनाइयाँ पैदा कर सकती है। विकास के साथ हिमालय के नाजुक पर्यावरण की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।

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आस्था का सम्मान, व्यवस्था की जवाबदेही

10 अक्टूबर को लौटते समय मन में चारधाम के दर्शन का संतोष था, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता भी स्पष्ट थी। सरकार को जवाबदेही निभानी होगी, प्रशासन को संवेदनशील बनना होगा और यात्रियों को अनुशासन तथा पर्यावरण संरक्षण का पालन करना होगा।

 

आस्था अटूट है, लेकिन श्रद्धालुओं की सहनशीलता को व्यवस्था की कमजोरियों का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। ईश्वर के दरबार में समानता तभी सार्थक होगी, जब प्रत्येक भक्त को समान सम्मान और यथासंभव सुविधाजनक दर्शन मिलें। क्योंकि चारधाम की यात्रा पैरों से जितनी पूरी होती है, उससे कहीं अधिक हृदय और आत्मा से पूरी होती है।

 

हर हर महादेव! जय बद्रीविशाल! जय माँ गंगे! जय माँ यमुना!

… तो हम पाकिस्तान का साथ देंगे, राजस्थान भाजपा अध्यक्ष राठौड़ के बयान से बवाल

... तो हम पाकिस्तान का साथ देंगे, राजस्थान भाजपा अध्यक्ष राठौड़ के बयान से बवाल

Rajasthan BJP Madan Rathore: राजस्थान भाजपा (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के एक विवादास्पद बयान को लेकर सियासत गरमा गई है। अमेरिका और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान का समर्थन करने से जुड़े कथित बयान पर कांग्रेस ने भाजपा को घेरते हुए ‘देशद्रोह’ का आरोप लगाया है। वहीं, विवाद बढ़ने के बाद मदन राठौड़ ने सफाई जारी करते हुए कहा है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर और गलत संदर्भ में पेश किया गया है।

कांग्रेस का भाजपा पर बड़ा हमला

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो क्लिप के आधार पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने मदन राठौड़ के कथित बयान को मुद्दा बनाते हुए भाजपा के राष्ट्रवाद पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की ओर से निशाना साधते हुए कहा गया कि भाजपा का ‘पाकिस्तान प्रेम’ एक बार फिर सबके सामने आ गया है।

कांग्रेस ने कहा कि राजस्थान BJP के अध्यक्ष मदन राठौड़ का कहना है कि अगर अमेरिका और पाकिस्तान में युद्ध होता है, तो हम पाकिस्तान के साथ हैं। भाजपा उसी पाकिस्तान का साथ देने की बात कर रही है, जिसने भारत के निर्दोष नागरिकों और सैनिकों की हत्या करवाई है। भाजपा वालों की रग-रग में देशद्रोह भरा है।

मदन राठौड़ की सफाई

विवाद बढ़ने और विपक्षी दलों के हमलावर होने के बाद राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उनके भाषण के एक छोटे से अंश को संदर्भ से काटकर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि मैंने जो भी बात कही थी, वह क्रिकेट मैच के संदर्भ में कही थी। मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है, जो बिल्कुल भी उचित नहीं है। यह मुझे बदनाम करने की राजनीतिक साजिश है।

उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते कभी सामान्य नहीं हो सकते क्योंकि वह आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश है। उन्होंने अपील की कि उनके पूरे भाषण को देखा जाए, जिसे गलत तरीके से काटकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की गई है।

क्या कहते हैं एक्स यूजर्स?

राठौड़ के इस बयान पर एक्स यूजर्स ने भी ‍तीखी टिप्पणियां की हैं। कड़वा सच नामक हैंडल से लिखा- क्रिकेट मैच के बाद हाथ नहीं मिलाएंगे पर पाकिस्तान के साथ हैं। संदीप नामक एक यूजर ने लिखा- तभी तो जब चाहें पुलवामा और पहलगाम करवा देते हैं। एक अन्य यूजर हिरोशिमा ने लिखा- दूसरों को देशभक्ति का सर्टिफिकेट बांटने वाली मशीन आज खुद शॉर्ट-सर्किट हो गई है। कल तक जो देश का सबसे बड़ा दुश्मन था, आज वो ‘प्यारा पड़ोसी’ बन गया। मदन जी का यह ‘पड़ोसी धर्म’ देखकर तो सीमा पार बैठे लोग भी सोच रहे होंगे कि हमारा सबसे बड़ा शुभचिंतक तो राजस्थान में बैठा है!

‘रामायणम्’ का इंटरनेशनल ट्रेलर रिलीज

फिल्म ‘रामायणम्’ के इंटरनेशनल ट्रेलर के रिलीज के साथ फिल्म का वैश्विक प्रचार अभियान शुरू हो गया है। निर्माताओं ने रणबीर कपूर के भगवान राम और रॉकिंग स्टार यश के रावण के किरदार वाले सोलो पोस्टर भी जारी किये हैं।

नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म का इंटरनेशनल ट्रेलर हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम में जारी किया गया है। ट्रेलर में महाकाव्य के प्रमुख किरदारों और एक्शन से भरपूर दृश्यों की झलक दिखाई गई है।

जारी पोस्टर में यश रावण के रूप में हाथ में भाला लिये युद्ध के बाद के दृश्य में नजर आ रहे हैं। वहीं, रणबीर कपूर भगवान राम के रूप में धनुष-बाण लिये दिखाई दे रहे हैं। उनके पीछे जंगल के बीच से आती सूर्य की रोशनी पोस्टर को विशेष रूप देती है।

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फिल्म के इंटरनेशनल ट्रेलर को बेंगलुरु में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में लॉन्च किया गया। इस मौके पर रणबीर कपूर, साई पल्लवी, यश, रवि दुबे, संगीतकार ए. आर. रहमान और निर्देशक नितेश तिवारी समेत फिल्म की टीम के कई सदस्य मौजूद थे।

फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम, साई पल्लवी सीता, यश रावण, सनी देओल हनुमान और रवि दुबे लक्ष्मण की भूमिका में नजर आएंगे।

नमित मल्होत्रा के प्राइम फोकस स्टूडियोज ने डीएनईजी और यश की मॉन्स्टर माइंड क्रिएशन्स के साथ मिलकर फिल्म का निर्माण किया है। फिल्म दो भागों में रिलीज होगी। इसका पहला भाग पांच नवंबर 2026 और दूसरा भाग दिवाली 2027 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित होगा।

Pic Credit : UNI

Royal Enfield Classic 650 Hypershift launched at Rs 4.26 lakh

Royal Enfield Classic 650 Hypershift launched at Rs 4.26 lakh
Classic 650 Hypershift front right quarter.

Royal Enfield has launched a special edition for the Classic 650, called Hypershift, to commemorate the Chennai-UK based manufacturer’s 125th anniversary. While there is a price, Rs 4.26 lakh, the company has clarified that it’s limited to 125 units in each of its key units, including India. Hence, interested customers will need to register to buy one; registrations will be open from today (October 16) at 2pm, till October 28, when sales begin.

All prices mentioned are ex-showroom.

  1. Mechanically identical to the production-spec Classic 650
  2. Costs Rs 58,000 more than the base Classic 650; Rs 43,500 more than the top

Royal Enfield Classic 650 125th anniversary edition: What’s special?

Strictly cosmetic, with exclusive Hypershift detailing

The Classic 650 Hypershift is mechanically identical to the production-spec Classic 650. There are no changes to the underlying design either. What sets it apart, primarily, is the bespoke Hypershift finish that transforms between shades of red, green and gold as light moves across the motorcycle. Complementing the finish are the additional 125-year crest on the teardrop tank, special badging on the sidepanels and of course, hand-painted pinstripes.

Classic 650 Hypershift's exclusive details.

The Classic 650 was first launched in 2025, sharing the 648cc, air-cooled parallel twin with the Interceptor 650 and the likes, making 47hp and 52.3Nm. It has a chassis that’s derived from the Super Meteor 650, currently the most expensive Royal Enfield 650 at Rs 4.39 lakh. While the Super Meteor has a USD fork, the Classic swaps that for RSU (right side up) telescopic fork and reduces the twin-shock’s travel from 101mm to 90mm.

 

Classic 650 Hypershift

Classic 650 Black Chrome

Classic 650 Vallam Red/Bruntingthorpe Blue

Price (ex-showroom)

Rs 4.26 lakh

Rs 3.82 lakh

Rs 3.68 lakh

The Classic 650 Hypershift has been priced at Rs 4.26 lakh, which is a Rs 58,000 premium over the base Vallam Red colour (Rs 3.68 lakh) and a Rs 43,500 premium over the top Black Chrome colour (Rs 3.82 lakh). For customers who are able to place an order for one of the 125 units on October 28, deliveries will begin in November.

Classic 650 Hypershift rear left quarter.

भाजपा नेता से लूट के खुलासे में लगे तेज-तर्रार 40 अफसर, यूपी पुलिस की 8 टीमें लगीं

कानपुर में भाजपा नेता से लूट के खुलासे में तेज-तर्रार 40 अफसर लगे हैं। इस मामले की जांच में यूपी पुलिस की 8 टीमें लगी हैं। पुलिस आयुक्त टीम के हर मूवमेंट की पल पल की खबर ले रहे हैं। हजारों लोगों से पूछताछ की गई है।

ट्रंप ने ईरान पर परमाणु हमला करने से किया इनकार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। जब उनसे उन खबरों के बारे में पूछा गया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वाशिंगटन मध्यावधि चुनावों के बाद भारी पारंपरिक बम ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ का इस्तेमाल कर सकता है।

श्री ट्रंप से जब पूछा गया कि क्या इस विकल्प में कोई टैक्टिकल परमाणु हथियार शामिल है, तो उन्होंने जोर देकर कहा मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स परमाणु बम नहीं है।

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उन्होंने कहा कि “यह बिल्कुल भी परमाणु बम नहीं है। यह बस एक बहुत ही बड़ा बम है। यह एक छोटे परमाणु बम की तरह है।

इसके बाद राष्ट्रपति ट्रप ने किसी वास्तविक परमाणु हमले की ज़रूरत को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा ‘मदर ऑफ़ ऑल बॉम्ब्स’ एक बहुत बड़ा बम है लेकिन यह परमाणु बम नहीं है। मैं परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करूंगा। हमें ऐसा करने की ज़रूरत भी नहीं है।

Pic Credit : UNI

UAE शाही परिवार की बहू को रिहैब कैंप भेजा गया:कोकीन के नशे में बेहोश मिली थी; 3 साल का बच्चे को अकेला छोड़ दिया था

UAE के शाही परिवार की बहू महराह अल नाहयान को लंदन में बच्चे की देखभाल में लापरवाही के मामले में सजा सुनाई गई है। इसके तहत उन्हें दो साल तक रिहैब प्रोग्राम में शामिल होना होगा। साथ ही उन्हें 7.7 लाख का जुर्माना भी भरना पड़ेगा। 4 महीने पहले वह लंदन की सड़क पर बेहोश मिली थीं। उनके पास 3 साल का बच्चा बिना जूते पहने स्कूटर से खेल रहा था। बच्चा व्यस्त सड़क पर चल रही गाड़ियों के करीब था। कोर्ट में महराह ने माना कि उन्होंने उस वक्त कोकीन ली थी। शादी के जरिए UAE के शाही परिवार से जुड़ी हैं महराह 32 साल की महराह अल नाहयान शादी के जरिए अबू धाबी के शासक परिवार अल नाहयान से जुड़ी हैं। यह परिवार दुनिया के सबसे अमीर और प्रभावशाली शाही परिवारों में गिना जाता है। न्यूयॉर्क पोस्ट के मुताबिक, परिवार की कुल संपत्ति करीब 300 अरब डॉलर है। अबू धाबी UAE के सात अमीरात में सबसे बड़ा है। यह देश का राजनीतिक केंद्र भी है। UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान इसी परिवार से हैं और अबू धाबी के शासक भी हैं। कोर्ट की सुनवाई के दौरान बताया गया कि महराह को हर महीने करीब 10 लाख रुपए मिलते हैं। महराह सड़क पर 30 मिनट तक बेहोश पड़ी थी यह घटना 13 जून को पश्चिमी लंदन में हुई थी। कोर्ट में बताया गया कि महराह लोहे की रेलिंग के सहारे बेहोश पड़ी थीं। पास में एक आदमी भी बेहोश था। वहीं, 3 साल का बच्चा खेल रहा था। वहां से गुजर रहे लोगों ने बच्चे को अकेला देखा तो उसकी मदद के लिए आगे आए। उन्होंने पुलिस के पहुंचने तक बच्चे को अपने पास रखा। एक शख्स ने घटना का वीडियो भी बनाया था। कोर्ट के मुताबिक, महराह करीब 30 मिनट तक बेहोश रहीं। जब उन्हें होश आया, तो उन्होंने लोगों से पूछा कि वे इतनी चिंता क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा, यह कोई कत्लखाना नहीं है, आपको इतनी परवाह क्यों है? आप इतने परेशान क्यों हैं? पुलिस ने महराह के बैग की तलाशी ली। उसमें नशे के इस्तेमाल से जुड़ा सामान मिला, लेकिन कोई गैरकानूनी नशीला पदार्थ नहीं मिला। वकील का दावा- घटना वाले दिन उन्होंने कोकीन नहीं ली थी कोर्ट में बताया गया कि महराह ने बेहोश मिलने से पहले के कुछ दिनों में कोकीन ली थी। हालांकि, उनके वकील स्टीफन वुलो KC ने कहा कि उन्होंने घटना वाले दिन नशा नहीं किया था। वह पिछले दिनों नशा करने के कारण बहुत थक गई थीं। वकील ने बताया कि महराह को अपनी गलती का पछतावा है और वह नशे की लत छोड़ना चाहती हैं। वह तीन महीने का इलाज करा रही हैं, जो अक्टूबर के आखिर तक पूरा होना था। इलाज के बाद महराह गिल्डफोर्ड इलाके में घर किराए पर लेने की योजना बना रही हैं। वहां वह दिन में इलाज कराएंगी और नशे की लत छोड़ने में मदद करने वाले समूह नारकोटिक्स एनोनिमस की बैठकों में शामिल होंगी। घटना के बाद से महराह सरे के वोकिंग इलाके में प्रायरी क्लिनिक में नशे की लत का इलाज करा रही हैं। उनके वकील ने कहा कि महराह जानती हैं कि उस दिन उनसे बहुत बड़ी गलती हुई थी। जज बोले- बच्चे की जान भी जा सकती थी साउथवार्क क्राउन कोर्ट में मंगलवार को महराह ने बच्चे की देखभाल में लापरवाही करने का जुर्म कबूल किया। जज जेरेमी जॉनसन ने कहा कि जब महराह बेहोश थी तब बच्चे की जान को खतरा था। जज ने कहा कि बच्चा सड़क पर भटक सकता था, खो सकता था या कोई अनजान व्यक्ति उसे नुकसान पहुंचा सकते थे। वह डर भी सकता था। जज के मुताबिक, नशे के असर में बच्चे को सड़क पर नंगे पैर अकेला छोड़ना उसकी सुरक्षा के प्रति लापरवाही थी ———————

UAE शाही परिवार की बहू को रिहैब कैंप भेजा गया:कोकीन के नशे में बेहोश मिली थी, 3 साल के बच्चे को अकेला छोड़ दिया था

UAE के शाही परिवार से जुड़ी 32 साल की महराह अल नाहयान को लंदन में बच्चे की देखभाल में लापरवाही के मामले में सजा सुनाई गई है। उन्हें दो साल तक रिहैब कार्यक्रम में शामिल होना होगा। साथ ही करीब 7.7 लाख रुपये का जुर्माना भी भरना पड़ेगा। यह मामला 13 जून का है। उस दिन महराह पश्चिमी लंदन की एक सड़क पर बेहोश मिली थीं। उनके पास उनका 3 साल का बच्चा बिना जूते पहने स्कूटर से खेल रहा था। बच्चा व्यस्त सड़क पर चल रही गाड़ियों के करीब था। कोर्ट में महराह ने माना कि उन्होंने कोकीन का इस्तेमाल किया था। सड़क किनारे 30 मिनट तक बेहोश पड़ी रहीं कोर्ट में बताया गया कि 13 जून को महराह लोहे की रेलिंग के सहारे बेहोश पड़ी थीं। उनके पास ही एक अन्य व्यक्ति भी बेहोश था। वहीं, उनका 3 साल का बच्चा अकेले खेल रहा था। वहां से गुजर रहे लोगों ने बच्चे को अकेला देखा तो उसकी मदद के लिए आगे आए। उन्होंने पुलिस के पहुंचने तक बच्चे को अपने पास रखा। इस दौरान एक व्यक्ति ने घटना का वीडियो भी बनाया था। कोर्ट के मुताबिक, महराह करीब 30 मिनट तक बेहोश रहीं। होश आने पर उन्होंने लोगों से पूछा कि वे इतनी चिंता क्यों कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह कोई कत्लखाना नहीं है। आपको इतनी परवाह क्यों है? आप इतने परेशान क्यों हैं?” पुलिस ने महराह के बैग की तलाशी ली। उसमें नशे के इस्तेमाल से जुड़ा सामान मिला, लेकिन कोई गैरकानूनी नशीला पदार्थ नहीं मिला। वकील ने कहा- घटना वाले दिन नशा नहीं किया था कोर्ट में बताया गया कि महराह ने बेहोश मिलने से पहले के कुछ दिनों में कोकीन ली थी। हालांकि, उनके वकील स्टीफन वुलो ने कहा कि उन्होंने घटना वाले दिन नशा नहीं किया था। वकील के मुताबिक, पिछले दिनों नशा करने के कारण वह बहुत थक गई थीं। वकील ने कोर्ट को बताया कि महराह को अपनी गलती का पछतावा है और वह नशे की लत छोड़ना चाहती हैं। वह तीन महीने का इलाज करा रही थीं, जो अक्टूबर के आखिर तक पूरा होना था। घटना के बाद से महराह सरे के वोकिंग इलाके में प्रायरी क्लिनिक में नशे की लत का इलाज करा रही हैं। इलाज के बाद उनकी गिल्डफोर्ड इलाके में घर किराए पर लेने की योजना है। वहां वह दिन में इलाज कराएंगी और नशे की लत छोड़ने में मदद करने वाले समूह नारकोटिक्स एनोनिमस की बैठकों में शामिल होंगी। जज बोले- बच्चे की जान भी जा सकती थी मंगलवार को लंदन के साउथवार्क क्राउन कोर्ट में महराह ने बच्चे की देखभाल में लापरवाही करने का जुर्म कबूल किया। जज जेरेमी जॉनसन ने कहा कि जब महराह बेहोश थीं, तब बच्चे की जान को खतरा था। जज के मुताबिक, बच्चा सड़क पर भटक सकता था, खो सकता था या कोई अनजान व्यक्ति उसे नुकसान पहुंचा सकता था। इस घटना से बच्चा डर भी सकता था। जज ने कहा कि नशे के असर में बच्चे को सड़क पर नंगे पैर अकेला छोड़ना उसकी सुरक्षा के प्रति लापरवाही थी। UAE के शाही परिवार से जुड़ी हैं महराह 32 साल की महराह अल नाहयान शादी के जरिए अबू धाबी के शासक परिवार अल नाहयान से जुड़ी हैं। हालांकि, सार्वजनिक रिपोर्टों में उनके पति का नाम और शाही परिवार में उनका सटीक रिश्ता स्पष्ट नहीं किया गया है। अबू धाबी का शासक परिवार दुनिया के सबसे अमीर और प्रभावशाली शाही परिवारों में गिना जाता है। परिवार की कुल संपत्ति करीब 300 अरब डॉलर है। अबू धाबी UAE के सात अमीरात में सबसे बड़ा है और देश का राजनीतिक केंद्र भी है। UAE के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान इसी परिवार से हैं और अबू धाबी के शासक भी हैं। ——————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका के स्कूल में गोलीबारी, 4 की मौत: इनमें 3 बच्चे, स्थानीय नागरिक ने हमलावर को मार गिराया; इस साल स्कूलों में फायरिंग का 26वां मामला अमेरिका के ओरेगन राज्य के बेंड शहर में गुरुवार को एक स्कूल में गोलीबारी हुई। इसमें 3 बच्चों समेत 4 लोगों की मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें…