नेपाल बाढ़ में 24 गुजराती लापता, पीड़ितों की पहचान के लिए गांधीनगर NFSU की टीम रवाना

नेपाल बाढ़ में 24 गुजराती लापता, पीड़ितों की पहचान के लिए गांधीनगर NFSU की टीम रवाना

nepal flood

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा में करीब 24 गुजराती पर्यटकों के लापता होने की खबर है। इस आपदा का शिकार हुए लोगों की पहचान करने के लिए गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) से 10 सदस्यों की एक विशेष टीम नेपाल के लिए रवाना हो गई है। डॉ. भार्गव पटेल के नेतृत्व में यह टीम नेपाल पहुंचकर पीड़ितों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करेगी। गौरतलब है कि NFSU के इन विशेषज्ञों को अमेरिकी रक्षा विभाग (US Department of Defense) के साथ भी फॉरेंसिक मामलों में काम करने का अनुभव है।

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बाढ़ के कारण 24 गुजराती संपर्क से बाहर, अमरेली के पर्यटक से हुआ संपर्क 

 

नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति में कई गुजराती फंस गए हैं, जिनमें से 24 लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है और उनके परिजनों से संपर्क टूट गया है। प्रशासन द्वारा उनकी तलाश के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि इस बीच अमरेली के एक पर्यटक से संपर्क हो पाया है। स्थानीय प्रशासन को जानकारी दी गई है कि अमरेली के पर्यटक सुरक्षित हैं और उनकी अपने परिवार से बातचीत हो चुकी है।

 

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान आनंद का दंपत्ति लापता 

 

नेपाल में आए इस प्रलय में गुजरात के आनंद जिले के विमल पटेल और उनकी पत्नी जैमीना पटेल भी लापता हो गए हैं। यह दंपत्ति बीते 16 अगस्त को 'नमस्ते नेपाल टूर एंड ट्रेवल्स' के माध्यम से नेपाल घूमने गया था। इसके बाद वे नेपाल से कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले थे और चीन का वीजा प्राप्त करने की प्रक्रिया में थे। परिजनों के साथ उनका आखिरी बार टेलीफोन पर संपर्क पिछले रविवार को हुआ था, लेकिन उसके बाद से उनका कोई संपर्क नहीं हो सका है।

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खोज और राहत कार्य के प्रयास तेज 

 

लापता सभी गुजराती पर्यटकों का पता लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में रहकर राहत कार्य कर रहे हैं। गांधीनगर से गई विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों और उनके परिजनों की मदद के लिए कार्य शुरू करेगी। सभी लापता लोगों से सुरक्षित संपर्क हो सके, इसके लिए उनके परिजन उम्मीद लगाए बैठे हैं।

Tata Sierra vs Harrier: Diesel AT performance compared

Tata Sierra vs Harrier: Diesel AT performance compared
Tata Sierra vs Harrier: Diesel AT performance compared

The Tata Sierra is one of the newer midsize SUVs to offer a diesel engine, a powertrain that is becoming increasingly rare in the segment. Positioned below the Harrier in Tata’s SUV lineup, the Sierra gets a 1.5-litre diesel engine, while a 2.0-litre diesel powers the larger Harrier. Both SUVs are available with a 6-speed automatic gearbox, but with different engines under the hood, how do they compare in terms of performance? Let’s find out.

Tata Sierra vs Harrier diesel AT: Specifications and price

The Sierra’s smaller engine offers less performance, but it is also more affordable

Tata Sierra vs Harrier diesel AT: Specifications and price

 

Tata Sierra 1.5D AT

Tata Harrier 2.0D AT

Engine

4-cyl, turbo-diesel

4-cyl, turbo-diesel

Displacement (cc)

1,497

1,956

Power (hp)

118

170

Torque (Nm)

280

350

Kerb weight (kg)

NA

1,823

Power-to-weight (hp per tonne)

93.25

Torque-to-weight (Nm per tonne)

191.99

Price range (Rs, lakh)

15.99-21.29

18.85-25.40  

The Tata Harrier gets a larger 2.0-litre diesel engine, making 52hp and 70Nm more than the Sierra’s 1.5-litre diesel. Tata is yet to reveal the Sierra diesel’s kerb weight, but it will be lower than the Harrier diesel’s weight because of its smaller size. For reference, the Sierra’s turbo-petrol AT weighs 1,552kg.

The Sierra diesel also has a clear price advantage. Its starting price is Rs 2.86 lakh lower than the Harrier’s, while the top-spec Sierra diesel undercuts the Harrier by a substantial Rs 4.11 lakh.

Tata Sierra vs Harrier diesel AT: 0-100kph acceleration test

The Harrier is 0.77s faster than the Sierra to reach 100kph from a standstill

Tata Sierra vs Harrier diesel AT: Acceleration from rest (in seconds)

 

Tata Sierra 1.5D AT

Tata Harrier 2.0D AT

20kph

1.44

1.33

40kph

3.53

2.94

60kph

5.93

5.16

80kph

9.31

8.30

100kph

13.37

12.60

The Harrier diesel-AT gets off the line 0.11 seconds quicker than the Sierra diesel-AT and continues to pull ahead as speeds rise. By 60kph, the Harrier’s lead grows to 0.77 seconds, a gap it maintains through to 100kph.

Tata Sierra vs Harrier diesel AT: Rolling acceleration tests

While the Harrier clocks a faster 20-80kph run, the Sierra is quicker to do 40-100kph

Tata Sierra vs Harrier diesel AT: Rolling acceleration (in seconds)

 

Tata Sierra 1.5D AT

Tata Harrier 2.0D AT

20-80kph

7.97

7.20

40-100kph

9.42

9.52

In the rolling acceleration tests, the Harrier diesel-AT is again quicker in the 20-80kph test, taking 0.77 seconds less than the Sierra diesel-AT.

However, the Sierra clocks a 0.10-second quicker 40-100kph time. In the real world, we noticed that the Sierra’s 1.5-litre engine builds power linearly and lacks the midrange punch associated with diesel engines. On the other hand, the Harrier offers a punchy mid-range and the powertrain feels more responsive to throttle inputs. 

Autocar India’s testing standards

Before we conduct our performance tests, we check and maintain tyre pressures based on the manufacturer’s recommendation and ensure the car has a full tank of fuel. The car is then tested in a controlled environment with two people on board, and the data is collected via highly accurate GPS-based timing equipment.

Reborn Toyota Celica to offer hybrid AWD powertrain

Reborn Toyota Celica to offer hybrid AWD powertrain
toyota ft-se design sketch

Over two decades after the Toyota Celica nameplate was discontinued with the seventh-generation model, the Japanese carmaker is set to bring the moniker back with a new hybrid all-wheel drive sports coupe, per a new report from Autocar UK. Internally referred to as the Celica Sport, the eighth-gen model will serve as an entry point to Toyota’s performance-focused GR line-up, and is expected to directly rival the Honda Prelude.

The Celica’s return was officially confirmed by Toyota in late 2024 as part of an effort to revive the “three brothers,” which is chairman Akio Toyoda’s affectionate nickname for the Supra, Celica, and MR2. The Supra nameplate came back as part of a joint collaboration with BMW in 2019 for the fifth-gen model (codename: A90), with the Celica likely to be next. A new mid-engined MR2 is tipped to be in development too.

Eighth-gen Toyota Celica: Everything we know

Toyota Corolla Concept. Image used for representation only.

Like prior generations of the Celica, the eighth-gen model is anticipated to use the underpinnings of a mainstream Toyota car, possibly the next-gen Corolla. The front-engined coupe is likely to be powered by Toyota’s all-new 2.0-litre 4-cylinder turbo-petrol engine that debuted last year, which is codenamed the G20E. This motor has a shorter piston stroke than Toyota’s current engines, making it lighter and more compact, and is expected to output around 400hp and 500Nm in road-going applications.

The G20E engine will be paired with a hybrid system in the new Celica – it remains unclear whether the setup will be strong hybrid or plug-in hybrid. A Toyota spokesperson confirmed to Autocar UK that the eighth-gen Celica will be fitted with AWD as well.

Toyota GR GT. Image used for representation only.

As for the form factor, expect the eighth-gen Celica to be a two-door coupe, much like its predecessors. Styling may draw inspiration from the top-of-the-line Toyota GR GT supercar, which looks quite rakish and menacing. Interestingly, there will be a WRC version of the new Celica for the 2027 season. A prototype of the same was spotted testing a few months ago, sporting an all-new, relatively compact two-door body.

Since the 2027 WRC regulations mandate a 1.6-litre engine, however, the rally Celica is expected to use an evolved version of the GR Yaris’s 3-cylinder turbo-petrol motor. Speaking to Autocar UK, Gazoo Racing marketing manager Mikio Hayashi said, “The displacement size of 1.6 litres, for example, cannot meet emission regulations. So we have to consider the possibility of a 2.0-litre” for the road-going Celica, lending further credence to the utilisation of the G20E.

Step Up SIP: क्या आप इस 10% वाले सीक्रेट फॉर्मूले के बारे में जानते हैं? सिर्फ ₹5000 की SIP से बन गया ₹1 करोड़ का फंड

Step-Up SIP Wealth Creation: शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच हर नौकरीपेशा व्यक्ति का सपना होता है कि वह अपने और अपने परिवार के भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार करे। लेकिन अक्सर लोग यह सोचकर कदम पीछे खींच लेते हैं कि शुरुआत में उनके पास बड़ा पैसा निवेश करने के लिए नहीं है।

अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो अमित की कहानी आपकी इस सोच को पूरी तरह बदल देगी। अमित ने कोई बहुत बड़ा निवेश नहीं किया, बल्कि सिर्फ ‘स्टेप-अप SIP’ की एक छोटी सी तरकीब अपनाकर ₹1 करोड़ का बड़ा फंड तैयार कर लिया। आइए आपको बताते हैं कम पैसों के इनवेस्टमेंट से भी इस फॉर्मूले से मोटा फंड तैयार किया जा सकता है।

₹5,000 की SIP से शुरू की इन्वेस्टमेट जर्नी की शुरूआत

बात लगभग 20 साल पुरानी है। अमित ने जब अपने करियर की शुरुआत की, तो उसकी सैलरी बहुत कम थी। बचत के नाम पर उसके पास ज्यादा पैसे नहीं बचते थे। हालांकि, उसके बावजूद उसने म्यूचुअल फंड में हर महीने ₹5000 की एक छोटी मंथली SIP से शुरुआत करने का फैसला किया। उसी के साथ काम करने वाले विकास ने भी ₹5,000 महीने की ही SIP शुरू की। लेकिन दोनों के निवेश करने के अंदाज में एक बड़ा अंतर था जिसका असर उसके वेल्थ क्रिएशन पर भी देखने को मिला।

विकास ने तय किया कि वह अगले 20 सालों तक बिना किसी फेरबदल के हर महीने ₹5,000 जमा करता रहेगा। अमित ने एक स्मार्ट फॉर्मूला अपनाया। वो जानता था कि हर साल उसकी सैलरी में कम से कम 10% से 12% का इंक्रीमेंट होगा। इसलिए उसने फैसला किया कि वह हर साल अपनी SIP में भी 10% की बढ़ोतरी करेगा।

साल-दर-साल कैसे बढ़ा अमित का निवेश?

अमित ने अपनी जेब पर बिना कोई एक्स्ट्रा दबाव डाले इस प्रक्रिया को बेहद आसान रखा:

  • पहला साल: हर महीने ₹5,000 जमा किए (साल में कुल ₹60,000 निवेश)।
  • दूसरा साल (10% बढ़ोतरी): इंक्रीमेंट होते ही SIP ₹500 बढ़ा दी। अब हर महीने ₹5,500 जाने लगे।
  • तीसरा साल (10% बढ़ोतरी): अब हर महीने ₹6,050 की SIP होने लगी।
  • चौथा साल: हर महीने ₹6,655 जमा होने लगे… और इसी तरह हर साल 10% का स्टेप-अप अपने आप लागू होता गया।

एक जैसी शुरुआत, लेकिन 20 साल बाद नतीजों में जमीन-आसमान का अंतर!

जब 20 साल पूरे हुए और औसतन 12% का वार्षिक रिटर्न मिला, तो दोनों के खातों का रिपोर्ट कार्ड कुछ इस तरह था:

मापदंड विकास (साधारण SIP) अमित (स्टेप-अप SIP)
शुरुआती मंथली SIP₹5,000₹5,000
सालाना बढ़ोतरी0% (फिक्स्ड)10% प्रति वर्ष
20 साल में कुल निवेश₹12 लाख₹34.36 लाख
20 साल बाद मिला कुल फंड₹49.95 लाख (करीब ₹50 लाख)₹98.71 लाख (करीब ₹1 करोड़)

बड़ा टेकअवे: साधारण SIP से विकास केवल ₹50 लाख बना पाया, जबकि अमित ने सिर्फ हर साल थोड़ा-थोड़ा निवेश बढ़ाकर लगभग ₹1 करोड़ का फंड बना लिया।

कंपाउंडिंग का जादू: अमित कैसे बना विजेता?

अमित की सफलता के पीछे 3 मुख्य कारण रहे:

1- जेब पर बोझ नहीं पड़ा: उसने एक साथ ₹15,000-₹20,000 की बड़ी SIP शुरू नहीं की। सैलरी बढ़ने के साथ-साथ निवेश बढ़ा, जिससे उसकी दिनचर्या और खर्चों पर कोई असर नहीं पड़ा।

2- कंपाउंडिंग की ताकत: जो एक्स्ट्रा पैसा अमित ने दूसरे, तीसरे और चौथे साल से बढ़ाया, उस बढ़ी हुई रकम पर भी उसे अगले 15-18 सालों तक ब्याज पर ब्याज मिलता रहा।

3- अनुशासन: ऑटो-डेबिट और टॉप-अप ऑप्शन की मदद से उसका निवेश हर साल अपने आप बढ़ता गया।

आप अपने लिए इसे कैसे शुरू कर सकते हैं?

अगर आप भी अमित की तरह कम समय या छोटी शुरुआत से बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो जब भी किसी म्यूचुअल फंड ऐप (Groww, Zerodha, PayTM Money आदि) से नई SIP शुरू करें, वहां ‘Step-Up SIP’ या ‘Top-Up’ का विकल्प जरूर चुनें।

वहां अपनी सुविधा के अनुसार 10% सालाना या ₹500/₹1,000 सालाना की बढ़ोतरी सेट कर दें। आज लिया गया यह छोटा सा फैसला आपके भविष्य को आर्थिक रूप से पूरी तरह चिंतामुक्त बना सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gyirong की तस्वीरों को लेकर उठे सवाल; 676 मौतें, 3 हजार लापता, नेपाल-तिब्बत बाढ़ की तबाही के वीडियो हटाने का चीन पर आरोप

Gyirong की तस्वीरों को लेकर उठे सवाल; 676 मौतें, 3 हजार लापता, नेपाल-तिब्बत बाढ़ की तबाही के वीडियो हटाने का चीन पर आरोप

नेपाल और तिब्बत में आई भीषण बाढ़ की भयावहता को दिखाने वाले वीडियो और फुटेज को चीन द्वारा सेंसर किए जाने की खबरों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दावा है कि स्थानीय लोगों और पत्रकारों ने आपदा की तबाही को रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर शेयर  किया, लेकिन कुछ वीडियो बाद में चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटा दिए गए। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इस विनाशकारी बाढ़ में अब तक 676 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 3,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं।

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Gyirong में तबाही का वीडियो हटाने का दावा

 

तिब्बत के स्थानीय निवासियों ने बाढ़ के कई वीडियो बनाकर ऑनलाइन शेयर किए थे। इनमें Gyirong County में एक सीमा चौकी के पास भारी मलबे और मिट्टी का सैलाब आने का भयावह दृश्य भी शामिल था। रिपोर्टों के मुताबिक, यह फुटेज चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किया गया, लेकिन बाद में कुछ वीडियो हटा दिए गए। चीन के सरकारी मीडिया ने भी कथित तौर पर पूरे वीडियो के बजाय उसकी केवल एक तस्वीर का इस्तेमाल अपनी रिपोर्ट में किया।

 

चीन के सरकारी मीडिया कवरेज में मुख्य रूप से बचाव अभियान और राहत कार्यों पर जोर दिया गया है, जबकि बाढ़ से हुई वास्तविक तबाही की व्यापक तस्वीर को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

 

चीन का दावा- बड़े पैमाने पर चल रहा राहत अभियान

 

चीनी अधिकारियों का कहना है कि प्रभावित इलाकों में सेना के जवानों, आपातकालीन कर्मचारियों, ड्रोन और हेलीकॉप्टरों को तैनात किया गया है। चीन के सरकारी अखबार पीपुल्स डेली के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अधिकारियों को Gyirong में प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद करने के निर्देश दिए हैं।

 

तिब्बत में विदेशी पत्रकारों पर सख्ती का आरोप

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बाढ़ की वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र रूप से जांच को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, विदेशी पत्रकारों को तिब्बत की यात्रा करने और स्थानीय लोगों से फोन पर संपर्क करने में कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा है। तिब्बत लंबे समय से चीन के सबसे अधिक नियंत्रित और राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि क्षेत्र से जुड़ी खबरों को लेकर सुरक्षा के नजरिए से कड़ी निगरानी रखी जाती है।

 

नेपाल के पूर्व सांसद राजेंद्र बजगाईं ने भी चीन की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि अगर बाढ़ से जुड़े वीडियो हटाए जाते हैं, तो इससे लोगों के लिए यह सवाल उठाना मुश्किल हो सकता है कि वास्तव में वहां क्या हुआ था।

CM योगी की दो टूक- कानून से खिलवाड़ करने वालों की धज्जियां उड़ा देंगे, माफिया के बाद इंसेफेलाइटिस का भी किया समाधान

CM योगी की दो टूक- कानून से खिलवाड़ करने वालों की धज्जियां उड़ा देंगे, माफिया के बाद इंसेफेलाइटिस का भी किया समाधान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर अपराधियों को कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार का स्पष्ट संकल्प है कि किसी ने कानून से खिलवाड़ करने की तनिक भी कोशिश की तो उसकी धज्जियां उड़ाने में देर नहीं लगेगी। प्रदेश में लोगों की सुरक्षा पर जो भी संकट पैदा करेगा, उसके लिए जेल और जहन्नुम के रास्ते खुले हुए हैं। प्रदेश माफियामुक्त हो चुका है और कोई फिर सिर उठाएगा तो वह मिट्टी में मिला दिया जाएगा। उन्होंने युवाओं और महिलाओं के कल्याण के लिए चलाई जा रही योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि यह सब तब संभव होता है जब खजाने में पैसा और अच्छी सरकार होती है। 

 

सीएम योगी, शनिवार को वार्ड नंबर 80, राप्ती नगर के अंतर्गत बशारतपुर में नवनिर्मित कल्याण मंडपम सहित गोरखपुर विकास प्राधिकरण और नगर निगम की 130.73 करोड़ रुपये की लागत वाली 170 विकास परियोजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास करने के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब प्रदेश में उपद्रव, अराजकता या गुंडागर्दी नहीं है, बल्कि सर्वत्र सुरक्षा का माहौल है। 

 

मुख्यमंत्री ने वर्ष 2017 से सुरक्षा के माहौल में हो रहे प्रदेश के विकास का विस्तार से उल्लेख करते हुए कहा जिन्हें विकास, रोजगार और उत्सवपूर्ण माहौल पसंद नहीं है, वे अब समाज को जाति, क्षेत्र व भाषा के नाम पर बांटने का काम करेंगे। जनता को ऐसे लोगों से सतर्क और सावधान रहना होगा। उन्होंने बिना किसी का नाम लिए, समाज को बांटने वाले लोगों को डकैतों का गिरोह करार दिया। सीएम ने कहा, ‘डकैतों के इस गिरोह को जब भी मौका मिला तो उन्होंने प्रदेश और देश को लूटने का काम किया। उत्सव से पहले उपद्रव करना, दंगे करना, कर्फ्यू लगवाना ही इनकी पहचान थी।’ उन्होंने कहा कि भाजपा की डबल इंजन सरकार किसी भी गरीब, दलित, वंचित का उत्पीड़न या शोषण नहीं होने देगी। किसी ने शोषण या उत्पीड़न किया तो उससे सख्ती से निपटने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि अगर किसी ने कानून की धज्जियां उड़ाने की तनिक भी कोशिश की तो उसकी धज्जियां उड़ाने में देर नहीं लगेगी। प्रदेश में सुरक्षा पर संकट पैदा करने वालों के लिए जेल और जहन्नुम के रास्ते खुले हुए हैं।

 

माफिया के साथ मच्छरजनित बीमारी का भी किया समाधान

मुख्यमंत्री ने कहा कि बीते करीब दस वर्ष में उन्होंने माफिया का सफाया करने के साथ ही मच्छरजनित बीमारी इंसेफेलाइटिस का भी समाधान कर दिया गया। सीएम योगी ने याद दिलाया कि 2017 के पूर्व इंसेफेलाइटिस की त्रासदी के कारण गोरखपुर सहित पूरे पूर्वी उत्तर प्रदेश में दहशत का माहौल रहता था। इंसेफेलाइटिस की बीमारी 1977 से चली आ रही थी। पर इस दौरान दूसरे दलों की सरकारों ने समाधान पर ध्यान नहीं दिया। इंसेफेलाइटिस को लेकर उन सरकारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने सांसद के रूप में इंसेफेलाइटिस के समाधान के लिए सदन से सड़क तक लड़ाई लड़ी और जब मुख्यमंत्री बने तो समाधान करके दिखा भी दिया। उन्होंने कहा कि अब मासूम बच्चे इंसेफेलाइटिस की चपेट में आकर दम नहीं तोड़ते। 

 

अच्छी सरकार में होते हैं अच्छे कार्य

सीएम योगी ने जब अच्छी सरकार होती है तभी अच्छे कार्य आगे बढ़ते हैं। अच्छी सरकार ही युवाओं, बेटियों और महिलाओं के बारे में अच्छा सोचती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। अगले एक साल में एक लाख और युवाओं को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र वितरित किया जाएगा। युवाओं के रोजगार के लिए हर जिले में सरदार वल्लभ भाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड स्किलिंग जोन बनाया जा रहा है। यहां स्किल से जॉब की गारंटी दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने बेटियों और महिलाओं के लिए सरकार की नई पहल का जिक्र करते हुए बताया कि अगले दो माह में स्नातक अंतिम वर्ष की 50 हजार छात्राओं को स्कूटी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि 2017 के पहले यूपी में न तो बेटियों की अच्छी पढ़ाई की व्यवस्था थी और न ही गरीब बेटियों की शादी की। जब उन्होंने सामूहिक विवाह योजना शुरू की तो समाजवादी पार्टी ने विरोध किया।

सीएम ने बताया कि अब तक पांच लाख बेटियों की शादी मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत हो चुकी है। सरकार इसमें हर बेटी की शादी के लिए एक लाख रुपये का अनुदान दे रही है। मुख्यमंत्री ने 60 वर्ष से ऊपर की महिलाओं को रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा योजना की भी चर्चा की। कहा कि अब कोई भी माता निश्चिंत होकर जब चाहे अयोध्या, काशी, प्रयाग, विंध्याचल, देवीपाटन दर्शन करने जा सकती है। इसके साथ ही उन्होंने रक्षाबंधन के अवसर पर 60 लाख से अधिक महिलाओं के निशुल्क बस यात्रा करने की जानकारी देते हुए कहा कि यह सब तब संभव होता है जब खजाने में पैसा और अच्छी सरकार होती है।

 

सीएम ने गोरखपुर के विकास की खूब की चर्चा

लोकार्पण और शिलान्यास समारोह में मुख्यमंत्री ने 2017 के बाद हुए गोरखपुर के विकास की खूब चर्चा की। उन्होंने कहा कि पहले यहां न बिजली आती थी और न ही अच्छी सड़कें थी। मरीजों के लिए इलाज और नौजवानों के लिए नौकरी का अभाव था। जबकि अब भरपूर बिजली आ रही है। सिक्सलेन फ्लाईओवर सहित फोरलेन सड़कों का जाल बिछ चुका है। स्मार्ट सड़कों के साथ ऑटो मोड में ट्रैफिक, स्वच्छता आदि की निगरानी हो रही है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिटी सेवा मिल रही है, गोरखपुर में एम्स भी खुल चुका है। खाद कारखाना फिर से चल रहा है। चार विश्वविद्यालय संचालित हो रहे हैं। बाढ़ की समस्या का समाधान हुआ है। 2017 के पहले बदहाल रहा रामगढ़ताल अब फिल्मों की शूटिंग का केंद्र बन रहा है। गोरखपुर पर्यटन के एक नए हब के रूप में पहचान बना रहा है। सीएम योगी ने गोड़धोइया नाला परियोजना का भी उल्लेख किया। कहा कि इस नाला परियोजना से अब शहर के उत्तर में जलजमाव से मुक्ति मिल गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब नौजवान को नौकरी भी मिल रही है तथा बेटी और व्यापारी की सुरक्षा पर भी संकट नहीं है।

 

कल्याण मंडपम सकारात्मक परिवर्तन और जनसुविधा का प्रतीक 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने बशरतपुर कल्याण मंडपम को सकारात्मक परिवर्तन और जन सुविधा का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि यह कल्याण मंडपम जहां बना है, वह जमीन काफी गहरी थी। अच्छी सोच से हुए कार्य के कारण अब यह शानदार उत्सव और सार्वजनिक आयोजन का माध्यम बनेगी। उन्होंने कहा कि इस कल्याण मंडपम के लिए उन्होंने ढाई करोड़ रुपये विधायक निधि से दिए हैं, बाकी पैसा जीडीए ने लगाया है। उन्होंने कहा कि कल्याण मंडपम, कम खर्च में होटल का शानदार विकल्प है। उन्होंने कहा कि तीन कल्याण मंडपम अभी निर्माणाधीन हैं और कुछ नए भी स्वीकृत होने वाले हैं। 

 

सुरक्षा के साथ सुविधा भी देती है डबल इंजन सरकार : रविकिशन

कल्याण मंडपम और अन्य विकास कार्यों के लोकार्पण-शिलान्यास समारोह में सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि डबल इंजन की भाजपा सरकार सुरक्षा, विकास व रोजगार के साथ सुविधा भी देती है। पीएम मोदी और सीएम योगी की सोच बिना भेदभाव, समाज के हर पात्र व्यक्ति को शासन की योजना से लाभान्वित करने की है। रविकिशन ने कहा कि यूपी में तीसरी बार सीएम योगी के नेतृत्व में सरकार बननी तय है। 

 

सीएम योगी की दूरदर्शिता का परिणाम है कल्याण मंडपम : डॉ. मंगलेश

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री का स्वागत करते हुए महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने कहा कि नागरिकों को एक बेहतरीन सौगात के रूप में कल्याण मंडपम, सीएम योगी की दूरदर्शिता का परिणाम है। उनके मार्गदर्शन में महानगर में कल्याण मंडपम की श्रृंखला खड़ी हो रही है। महापौर ने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में गोरखपुर विकास की नई ऊंचाइयों पर पहुंच रहा है।
 

इस अवसर पर प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, मत्स्य विभाग के मंत्री डॉ. संजय निषाद, जिला पंचायत की प्रशासक साधना सिंह, एमएलसी एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, श्रीराम चौहान, विधायक फतेह बहादुर सिंह, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, नगर निगम की उपसभापति पूनम सिंह, जीडीए बोर्ड के सदस्य राधेश्याम श्रीवास्तव, पवन त्रिपाठी, दुर्गेश बजाज, भाजपा के महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में जीडीए बोर्ड के अध्यक्ष एवं मंडलायुक्त इंद्र विक्रम सिंह ने मुख्यमंत्री को स्मृति चिन्ह भेंटकर उनका अभिनंदन किया। 

 

सीएम ने फीता काटकर किया कल्याण मंडपम का लोकार्पण

मंचीय कार्यक्रम से पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच फीता काटकर कल्याण मंडपम का औपचारिक उद्घाटन किया। इसके बाद उन्होंने मंडपम का भ्रमण और निरीक्षण कर यहां के इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं की जानकारी ली। जीडीए के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने उन्हें मंडपम की विशेषताओं की विस्तार से जानकारी दी। निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री ने कल्याण मंडपम के परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया। 

 

आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित है कल्याण मंडपम

बशारतपुर कल्याण मंडपम का निर्माण 2593 वर्गमीटर भूमि पर 3.10 करोड़ रुपये की लागत से कराया गया है। आधुनिक सुविधाओं और आकर्षक वास्तुकला से सुसज्जित कल्याण मंडपम दो तल में निर्मित है। यहां 300 से 500 लोगों की क्षमता के आयोजन हो सकेंगे। भूतल पर हाल, किचन, स्टोर, ऑफिस, चेंज रूम और महिलाओं एवं पुरुषों के लिए अलग-अलग टॉयलेट बनाए गए हैं। प्रथम तल पर एक हाल, अटैच्ड टॉयलेट और ड्रेसिंग रूम सहित छह कमरों का निर्माण कराया गया है। परिसर में मुख्य भवन के सामने एक आकर्षक फव्वारा भी बनवाया गया है। कल्याण मंडपम आने वाले वाहनों के लिए परिसर के अंदर ही इंटरलॉकिंग टाइल्स लगाकर अलग से पर्याप्त पार्किंग का प्रावधान किया गया है। परिसर में लॉन भी विकसित किया गया है और फूल वाले पौधे लगाकर सजाया गया है। कल्याण मंडपम बनाने का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों को विवाह, तिलक, मुंडन और अन्य सामाजिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए किफायती दरों पर आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

 

सीएम के हाथों इन विकास कार्यों का हुआ लोकार्पण

 

-बशारतपुर कल्याण मंडपम (जीडीए), लागत 3 करोड़ 10 लाख रुपये।

-जीडीए की तरफ से विभिन्न क्षेत्रों में पार्क निर्माण, सड़क व नाली निर्माण और लाइटिंग के 14 कार्य, लागत 7 करोड़ 74 लाख 33 हजार रुपये।

-नगर निगम की तरफ से विभिन्न वार्डों में पाइपलाइन विस्तार, नलकूप स्थापना और इंडिया मार्क-टू हैंडपंपों की रीबोरिंग के 29 कार्य, लागत 39 करोड़ 90 लाख रुपये। 

-नगर निगम की तरफ से बाढ़ और जलभराव से राहत के लिए बाढ़ पंपिंग स्टेशनों की क्षमता वृद्धि एवं सुदृढ़ीकरण का कार्य, लागत 30 करोड़ 9 लाख रुपये।

 

इन विकास कार्यों का हुआ शिलान्यास

-जीडीए की तरफ से विभिन्न क्षेत्रों में कराए जाने वाले पार्क सुंदरीकरण, सीसीटीवी कैमरा स्थापना सहित कुल 15 कार्य, लागत 2 करोड़ 74 लाख 68 हजार रुपये। 

-नगर निगम की तरफ से 11.92 करोड़ रुपये से 41 सड़कों और नालियों का निर्माण, लागत 11 करोड़ 92 लाख रुपये।

-नगर निगम की तरफ से 47 पार्कों का सुंदरीकरण, लागत 7 करोड़ 60 लाख रुपये।

-नगर निगम की तरफ से नेताजी सुभाष चंद्र बोस नगर में कर्मचारियों के लिए आवासीय भवन, लागत 5 करोड़ 7 लाख रुपये।

-नगर निगम की तरफ से पथ प्रकाश के 7 कार्य, लागत 5 करोड़ 57 लाख रुपये।

-नगर निगम की तरफ से पेयजल व जलभराव की समस्या को दूर करने के 13 कार्य, लागत 16 करोड़ 99 लाख रुपये।

Kanpur News:ताला ठीक करने आए थे दो युवक, अलमारी की चाबी लेकर बुजुर्ग को उलझाया और पांच लाख का माल ले उड़े

Kanpur Crime News:कानपुर के कल्याणपुर की सत्यम विहार कॉलोनी में ताला ठीक करने के बहाने घर में घुसे दो शातिर युवकों ने 72 वर्षीय रिटायर्ड बैंककर्मी को बातों में उलझाकर अलमारी से सोने-चांदी के जेवर और 35 हजार रुपये नकद पार कर दिए। वारदात के समय बुजुर्ग घर में अकेले थे। उनकी पत्नी रक्षाबंधन मनाने मायके गई थीं। शनिवार शाम पत्नी के लौटने पर अलमारी खोली गई तो चोरी का पता चला। परिवार के मुताबिक, करीब पांच लाख रुपये का सामान चोरी हुआ है। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।

बाजार का मौजूदा मिजाज किसी भी एक दिशा में साफ नहीं, शॉर्ट टर्म ट्रेडर्स के लिए लेवल बेस्ड ट्रेडिंग रहेगी सबसे अच्छी -अमोल अठावले

Market Trend: भारतीय इक्विटी मार्केट ने 28 अगस्त को खत्म हुए हफ्ते की क्लोजिंग सतर्कता भरे रुख के साथ की। ग्लोबल इंटरेस्ट रेट,जियोपॉलिटिकल रिस्क और क्लोजिंग ऑक्शन सेशन से जुड़ी वोलैटिलिटी के चलते निवेशकों के सेंटिमेंट पर दबाव दिखा,जिससे बाजार में गिरावट का दौर जारी रहा। हालांकि,शुक्रवार को ग्लोबल टेक्नोलॉजी शेयरों से मिले पॉजिटिव संकेतों के बीच IT शेयरों में जबरदस्त खरीदारी आई। इससे बाजार में अच्छी रिकवरी देखने को मिली,फिर भी बेंचमार्क इंडेक्स लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट के साथ बंद हुए।

निफ्टी पर एक्सपर्ट की राय

कोटक सिक्योरिटीज के VP टेक्निकल रिसर्च,अमोल अठावले का कहना है कि पिछले हफ्ते बेंचमार्क इंडेक्स में उतार-चढ़ाव के बाद एक सीमित दायरे में कारोबार होता दिखा। निफ्टी 0.31 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ,जबकि सेंसेक्स में 310 अंकों की गिरावट आई। सेक्टरों की बात करें तो फार्मा और हेल्थकेयर इंडेक्स में 1.5 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़त हुई,जबकि FMCG इंडेक्स में सबसे ज्यादा 1.95 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

टेक्निकल नजरिए से देखें तो डेली चार्ट पर निफ्टी ने एक बेयरिश कैंडल बनाया है और ऊपर की तरफ इसे लगातार 20-डे SMA (सिंपल मूविंग एवरेज) या 24,350/77,900 जोन के पास रेसिस्टेंस का सामना करना पड़ रहा है,जो काफी हद तक नेगेटिव संकेत है।

अमोल अठावले का मानना ​​है कि शॉर्ट-टर्म के लिए मार्केट का मिजाज कमज़ोर है,लेकिन नई बिकवाली तभी हो सकती है जब 24,100/77,100 का लेवल टूटे। अगर ऐसा होता है तो मार्केट 24,000-23,800/76,800-76,200 तक गिर सकता है। दूसरी ओर 50-डे SMA या 24,200/77,500 ट्रेडर्स के लिए तत्काल रेजिस्टेंस ज़ोन का काम करेगा। अगर इंडेक्स इस लेवल के ऊपर ट्रेड करने में कामयाब रहता है तो यह 24,350/77,900 पर स्थित 20डे SMA को फिर से टेस्ट कर सकता है। इसके बाद भी और तेजी आ सकती है,जिससे इंडेक्स 24,500/78,400 तक जा सकता है।

बैंक निफ्टी पर एक्सपर्ट की राय

अमोल अठावले की राय है कि बैंक निफ्टी के लिए 50 और 20 डे के SMA या 57,700 का स्तर ट्रेडर्स के लिए तुरंत ध्यान देने वाले लेवल होंगे। जब तक बैंक निफ्टी इन स्तरों से नीचे रहता है,तब तक सेंटीमेंट कमजोर बने रहने की संभावना है। इसके नीचे जाने पर इंडेक्स के 56,800-56,500 के स्तर तक गिरने की संभावना बढ़ जाएगी। इसके उलट,57,700 के ऊपर जाने पर बैंक निफ्टी 58,000-58,500 की ओर उछाल आ सकता है। बाजार का मौजूदा मिजाज किसी एक दिशा में साफ नहीं है। इसलिए,शॉर्ट-टर्म ट्रेडर्स के लिए लेवल बेस्ड ट्रेडिंग सबसे अच्छी रणनीति होगी।

 

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30 की उम्र में सालाना 1-2 लाख की कमाई, टेक कर्मचारी की परेशानी सुनकर लोगों ने बताए आमदनी बढ़ाने के तरीके

कोलकाता के एक तकनीकी कर्मचारी की कम सैलरी और रोजमर्रा की परेशानियों से जुड़ी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। करीब 30 साल के इस कर्मचारी की सालाना कमाई सिर्फ 1 से 2 लाख रुपये है। माता-पिता के साथ रहने के कारण उन्हें किराए का खर्च नहीं उठाना पड़ता, फिर भी उनका कहना है कि जिंदगी में मनमुताबिक खुशियां और सुविधाएं जुटाना मुश्किल हो रहा है। तकनीकी क्षेत्र में काम करने के बावजूद इतनी कम आय ने उन्हें अपने भविष्य और जीवनशैली को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है।

उन्होंने रेडिट पर अन्य लोगों से पूछा कि आखिर इतनी कम कमाई में लोग अपने खर्च और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। उनकी यह बात कई नौकरीपेशा लोगों को अपनी शुरुआती नौकरी और सीमित वेतन के दिनों की याद दिला रही है।

हफ्ते में साढ़े पांच दिन नौकरी

रेडिट पोस्ट के मुताबिक, वह सोमवार से शुक्रवार तक करीब 8.5 घंटे रोज काम करते हैं और शनिवार को भी आधे दिन की ड्यूटी होती है। इतनी मेहनत के बावजूद कम वेतन मिलने से उन्हें अपने भविष्य और जीवनशैली को लेकर चिंता है।

इसी परेशानी ने उन्हें रेडिट पर सवाल पूछने के लिए मजबूर किया कि आखिर इतने कम वेतन में लोग खर्च, करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।

किसी ने 2.4 लाख से शुरू किया, आज 40 लाख कमा रहा

पोस्ट पर कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। एक उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत 2.4 लाख रुपये सालाना वेतन से की थी। करीब नौ साल बाद उसकी आय बढ़कर 40 लाख रुपये सालाना हो गई। उसने सलाह दी कि मौजूदा कमाई से परेशान होने के बजाय लगातार नई चीजें सीखते रहना चाहिए और समय-समय पर बेहतर अवसर के लिए नौकरी बदलनी चाहिए।

10 हजार रुपये महीने से शुरुआत

एक अन्य उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत महज 10 हजार रुपये महीने की कमाई से की थी। यानी सालाना आय करीब 1.2 लाख रुपये थी। बाद में उसे पता चला कि बाजार में उसी तरह के काम के लिए दूसरे लोग ज्यादा पैसा कमा रहे हैं। इसके बाद उसने अपने कौशल पर काम किया और कंपनियां बदलता गया। उसके मुताबिक, अब उसकी सालाना आय 15 लाख रुपये से ज्यादा है।

‘1-2 लाख में गुजारा करना बहुत मुश्किल’

एक यूजर ने मौजूदा महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि आज के समय में सालाना 1-2 लाख रुपये में जीवन चलाना बेहद मुश्किल है। उसके मुताबिक, कम से कम 3-4 लाख रुपये सालाना तक पहुंचना जरूरी है, क्योंकि 20-30 हजार रुपये महीना भी अब कई लोगों के लिए सिर्फ जरूरतें पूरी करने जितना ही रह गया है।

वहीं, एक अन्य यूजर ने बेहद साधारण तरीके से खर्च संभालने की बात कही और कम कीमत वाले खाने-पीने के विकल्पों का उदाहरण दिया।

कुछ लोगों के लिए कम वेतन भी ‘सीखने’ का मौका

चर्चा में एक कर्मचारी ने बताया कि उसने तीन साल पहले 1.5 लाख रुपये सालाना से शुरुआत की थी। इससे पहले वह उसी कंपनी में सिर्फ 3 हजार रुपये महीने की इंटर्नशिप कर रहा था। उसका कहना था कि कम वेतन पर नौकरी तब तक जारी रखी जा सकती है, जब तक वहां अच्छा काम सीखने और नए कौशल विकसित करने का मौका मिल रहा हो। उसने खुद दो परियोजनाओं पर शुरू से अंत तक काम किया और इस अनुभव को अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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रेडिट की चर्चा का सीधा संदेश

इस पूरी चर्चा में एक बात बार-बार सामने आई कम शुरुआती वेतन का मतलब यह नहीं कि करियर वहीं रुक जाएगा। कई लोगों ने अपने अनुभव के जरिए बताया कि कौशल बढ़ाने, बेहतर अवसर तलाशने और सही समय पर नौकरी बदलने से आय में बड़ा बदलाव आ सकता है।

हालांकि, कोलकाता के इस कर्मचारी की परेशानी यह भी दिखाती है कि कम वेतन, बढ़ते खर्च और लंबे कामकाजी घंटों के बीच संतुलन बनाना आज कई युवा कर्मचारियों के लिए आसान नहीं है।

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Bank Holidays: सितंबर में 15 दिन बंद रहेंगे SBI-HDFC समेत सभी बैंक! ब्रांच जाने से पहले यहां देख लें पूरी लिस्ट

Bank Holidays September 2026: सितंबर के महीने में अगर आपको बैंक से जुड़ा कोई जरूरी काम निपटाना है, तो यह खबर आपके बेहद काम की है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी छुट्टियों की सूची के अनुसार, सितंबर में अलग-अलग राज्यों और शहरों में त्योहारों, जयंती और क्षेत्रीय आयोजनों के कारण कई दिनों तक बैंक बंद रहेंगे।

इसके अलावा, हर महीने की तरह रविवार और दूसरे व चौथे शनिवार को भी देशभर के बैंकों में छुट्टी रहेगी। चूंकि राज्यों के हिसाब से बैंक हॉलीडे अलग-अलग होते हैं, इसलिए अपने राज्य की लिस्ट देखकर ही बैंक जाने की योजना बनाएं।

सितंबर में किस-किस दिन बंद रहेंगे बैंक?

भारतीय रिजर्व बैंक के हॉलीडे कैलेंडर के अनुसार सितंबर में छुट्टियों की तारीखें:

4 सितंबर: जन्माष्टमी (वैष्णव)/कृष्ण जयंती के अवसर पर गुजरात, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, तेलंगाना, केरल, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश और आंध्र प्रदेश समेत कई राज्यों में बैंक बंद रहेंगे।

11 सितंबर: जयपुर नगर निगम क्षेत्र में चुनाव के कारण राजस्थान के संबंधित क्षेत्रों में बैंक हॉलीडे रहेगा।

12 सितंबर: श्रीमंत शंकरदेव की तिरुभाव तिथि के उपलक्ष्य में असम में बैंक बंद रहेंगे।

14 सितंबर: गणेश चतुर्थी/विनायक चतुर्थी/गणेश पूजा के उपलक्ष्य में महाराष्ट्र, ओडिशा, कर्नाटक, तमिलनाडु, गुजरात, तेलंगाना, गोवा और आंध्र प्रदेश में बैंक बंद रहेंगे।

15 सितंबर: संवत्सरी (चतुर्थी पक्ष)/नुआखाई/गणेश चतुर्थी (दूसरा दिन) के अवसर पर गुजरात, ओडिशा और गोवा में बैंकों की छुट्टी रहेगी।

21 सितंबर: श्रीमंत शंकरदेव के जन्मोत्सव और श्री नारायण गुरु समाधि के कारण असम और केरल में बैंक बंद रहेंगे।

22 सितंबर: करमा पूजा के अवसर पर झारखंड में बैंक बंद रहेंगे।

23 सितंबर: महाराजा हरि सिंह जी की जयंती के उपलक्ष्य में जम्मू-कश्मीर में बैंक हॉलीडे रहेगा।

25 सितंबर: इंद्रजात्रा त्योहार के अवसर पर सिक्किम में बैंक बंद रहेंगे।

इसके अलावा रविवार की रेगुलर छुट्टी और दूसरे व चौथे शनिवार के ऑफ को जोड़ते हुए सितंबर के महीने में कुल 15 दिन बैंकों में कामकाज नहीं होगा। हालांकि ये छुट्टियां अलग-अलग सर्किलों में है जरूरी नहीं कि एक ही दिन सभी जगह बैंक बंद रहे।

क्या छुट्टियों के दौरान चालू रहेंगी डिजिटल बैंकिंग सेवाएं?

बैंक शाखाएं बंद रहने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि आपकी बैंकिंग सेवाएं रुक जाएंगी। छुट्टियों के दौरान भी आप बिना किसी रुकावट के डिजिटल सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। आप पैसों की निकासी या डिपॉजिट के लिए एटीएम का इस्तेमाल कर सकते हैं। Google Pay, PhonePe, Paytm या BHIM UPI के जरिए डिजिटल पेमेंट और फंड ट्रांसफर चालू रहेंगे। खाते से जुड़ी सामान्य सेवाएं, एनईएफटी (NEFT)/आईएमपीएस (IMPS) ट्रांसफर और बिल पेमेंट घर बैठे किए जा सकेंगे।