जियो IPO पर एनालिस्ट्स बुलिश, लिस्टिंग पर 15-20% तक बढ़त की उम्मीद

जियो IPO पर एनालिस्ट्स बुलिश, लिस्टिंग पर 15-20% तक बढ़त की उम्मीद

jio ipo

  • एमके रिसर्च ने दी ‘सब्सक्राइब’ रेटिंग, ग्रोथ के मुकाबले वैल्यूएशन को माना वाजिब
  • 5G पर भारी निवेश का दौर खत्म होने से कैश फ्लो मजबूत होने की उम्मीद
  • जियो की अलग लिस्टिंग से RIL शेयरहोल्डर्स के लिए वैल्यू अनलॉकिंग की उम्मीद

जियो प्लेटफॉर्म्स का प्राइस बैंड सामने आने के बाद आई कई एनालिस्ट रिपोर्ट्स ने कंपनी के IPO को हरी झंडी दी है। मार्केट एक्सपर्ट्स को लिस्टिंग पर करीब 15 से 20% तक शुरुआती बढ़त की संभावना नजर आ रही है। हालांकि यह अनुमान है और वास्तविक लिस्टिंग बाजार की परिस्थितियों और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगी। ALSO READ: जियो IPO से पहले ईशा अंबानी ने बताया- कैसे आया JIo का आइडिया, कैसे खड़ा हुआ विशाल साम्राज्य?

 

16 अक्टूबर को जारी अपनी IPO नोट में एमके रिसर्च ने जियो IPO को ‘सब्सक्राइब’ रेटिंग दी है। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि कंपनी की मार्केट लीडरशिप, प्राइसिंग पावर, मजबूत एक्जीक्यूशन और आगे के ग्रोथ अवसरों को देखते हुए मौजूदा प्राइस बैंड वाजिब है।

 

इसी बीच, स्वास्तिका इन्वेस्टमार्ट ने भी जियो IPO को ‘सब्सक्राइब’ रेटिंग दी है। उसकी रिपोर्ट के मुताबिक FY26 की कमाई के आधार पर ऊपरी प्राइस बैंड पर जियो का P/E करीब 33.3 गुना है, जबकि भारती एयरटेल का 40.7 गुना। यानी इस पैमाने पर स्वास्तिका जियो को एयरटेल के मुकाबले करीब 18% कम वैल्यूएशन पर देखता है। ALSO READ: JIO IPO : जानिए क्या है प्राइस बेंड, लॉट साइज और GMP, कब होगी शेयर बाजार में लिस्टिंग?

 

वहीं, एक अलग वैल्यूएशन आधार पर कुछ मार्केट एक्सपर्ट्स ने जियो की कीमत उसकी कमाई के करीब 33.5 गुना और भारती एयरटेल की करीब 38.9 गुना आंकी है। इस हिसाब से जियो करीब 14% सस्ती दिखती है। हालांकि एनालिस्ट्स का मानना है कि कंपनी की आगे की कुछ ग्रोथ का असर मौजूदा कीमत में पहले से शामिल है।

 

एनालिस्ट्स के मुताबिक जियो के लिए एक बड़ी राहत यह है कि 5G नेटवर्क पर भारी निवेश का दौर अब काफी हद तक पूरा हो चुका है। एमके रिसर्च का कहना है कि FY24 से FY26 के बीच कंपनी का पूंजीगत खर्च, रेवेन्यू के 48.8% से घटकर 23.3% रह गया। FY26 में कंपनी का फ्री कैश फ्लो करीब ₹32,500 करोड़ रहा। रिपोर्ट का मानना है कि आगे बड़े निवेश की जरूरत घटने से जियो के पास ज्यादा नकदी बच सकती है।

 

लंबी अवधि में मार्केट एक्सपर्ट्स की नजर सिर्फ मोबाइल कारोबार पर नहीं है। होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज, क्लाउड, AI और अपनी टेक्नोलॉजी को विदेशी बाजारों में ले जाना अगले ग्रोथ ड्राइवर माने जा रहे हैं। एमके ने भी होम ब्रॉडबैंड को अगला बड़ा ग्रोथ ड्राइवर और कंपनी की इन-हाउस टेक्नोलॉजी स्टैक को इंटरनेशनल अवसर बताया है।

 

जियो की अलग लिस्टिंग का असर रिलायंस इंडस्ट्रीज पर भी दिखा है। 15 अक्टूबर को जियो का प्राइस बैंड सामने आने के बाद RIL का शेयर करीब 3.4% चढ़ा। बाजार की नजर इस बात पर भी है कि जियो की स्वतंत्र लिस्टिंग से RIL शेयरहोल्डर्स के लिए वैल्यू अनलॉकिंग की संभावना और मजबूत हो सकती है।

78 वर्ष की हुईं हेमा मालिनी

बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री हेमा मालिनी आज 78 वर्ष की हो गईं।16 अक्टूबर 1948 को तमिलनाडु के आमानकुंडी में जन्मीं हेमा मालिनी की मां जया चक्रवर्ती फिल्म निर्माता थीं। हेमा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा चेन्नई से पूरी की। वर्ष 1961 में हेमा मालिनी को एक लघु नाटक पांडव वनवासम में बतौर नर्तकी काम करने का अवसर मिला।वर्ष 1968 में हेमा मालिनी को सर्वप्रथम राजकपूर के साथ सपनों का सौदागर में काम करने का मौका मिला। फिल्म के प्रचार के दौरान हेमा मालिनी को ड्रीम गर्ल के रूप में प्रचारित किया गया। बदकिस्मती से फिल्म टिकट खिडकी पर असफल साबित हुई लेकिन अभिनेत्री के रूप में हेमा मालिनी को दर्शकों ने पसंद किया गया।

हेमा मालिनी को पहली सफलता वर्ष 1970 में प्रदर्शित फिल्म जॉनी मेरा नाम से हासिल हुयी। इसमें उनके साथ अभिनेता देवानंद मुख्य भूमिका में थे। फिल्म में हेमा और देवानंद की जोड़ी को दर्शकों ने सिर आंखों पर लिया और फिल्म सुपरहिट रही।इसके बाद रमेश सिप्पी की वर्ष 1971 में प्रदर्शित फिल्म अंदाज में भी हेमा मालिनी ने अपने अभिनय से दर्शको को मंत्रमुग्ध कर दिया।वर्ष 1972 में हेमा मालिनी को रमेश सिप्पी की ही फिल्म सीता और गीता में काम करने का अवसर मिला जो उनके सिने कैरियर के लिये मील का पत्थर साबित हुयी। इस फिल्म की सफलता के बाद वह शोहरत की बुंलदियों पर जा पहुंचीं। उन्हें इस फिल्म में दमदार अभिनय के लिये सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।

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हेमा मालिनी ने जब फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा ही था तब एक तमिल निर्देशक श्रीधर ने उन्हें अपनी फिल्म में काम देने से यह कहते हुए इन्कार कर दिया कि उनमें स्टार अपील नहीं है। बाद में सत्तर के दशक में इसी निर्माता.निर्देशक ने उनकी लोकप्रियता को भुनाने के लिए उन्हें लेकर 1973 में ..गहरी चाल.. फिल्म का निर्माण किया।सिल्वर स्क्रीन पर हेमा मालिनी की जोडी धर्मेन्द्र के साथ खूब जमी। यह फिल्मी जोंडी सबसे पहले फिल्म शराफत से चर्चा में आई। वर्ष 1975 में प्रदर्शित फिल्म शोले में धर्मेन्द्र ने वीरू और हेमामालिनी ने बसंती की भूमिका में दर्शकों का भरपूर मनोंरजन किया।हेमा और धमेन्द्र की यह जोड़ी इतनी अधिक पसंद की गई कि धर्मेन्द्र की रील लाइफ की ड्रीम गर्ल, हेमामालिनी उनके रीयल लाइफ की ड्रीम गर्ल बन गईं। बाद में इस जोड़ी ने ड्रीम गर्ल,चरस, आसपास, प्रतिज्ञा,राजा जानी,रजिया सुल्तान,अली बाबा चालीस चोर,बगावत ,आतंक,द बर्निंग ट्रेन ,दोस्त आदि फिल्मों में एक साथ काम किया।

सत्तर के दशक में हेमा मालिनी पर आरोप लगने लगे कि वह केवल ग्लैमर वाले किरदार ही निभा सकती हैं लेकिन उन्होंने खुशबू,किनारा, और मीरा जैसी फिल्मों में संजीदा किरदार निभाकर अपने आलोचकों का मुंह हमेशा के लिये बंद कर दिया ।इस दौरान हेमा मालिनी के सौंदर्य और अभिनयका जलवा छाया हुआ था।इसी को देखते हुये निर्माता प्रमोद चक्रवर्ती ने उन्हें लेकर फिल्म ड्रीम गर्ल का निर्माण तक कर दिया ।

वर्ष 1990 में हेमा मालिनी ने छोटे पर्दे की ओर भी रूख किया और धारावाहिक नुपूर का निर्देशन भी किया ।इसके बाद वर्ष 1992 में फिल्म अभिनेता शाहरूख खान को लेकर उन्होंने फिल्म दिल आशना है का निर्माण और निर्देशन किया ।वर्ष 1995 में उन्होंने छोटे पर्दे के लिये मोहिनी का निर्माण और निर्देशन किया। फिल्मों में कई भूमिकाएं निभाने के बाद हेमा मालिनी ने समाज सेवा के लिए राजनीति में प्रवेश किया। वर्ष 2000 में हेमा मालिनी पद्मश्री सम्मान से भी सम्मानित की गयीं।हेमा मालिनी ने अपने पांच दशक के सिने करयिर में लगभग 150 फिल्मों में काम किया। हेमा मालिनी मथुरा संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव जीतकर संसद पहुंची है।

Pic Credit : UNI

सरकारी कर्मचारियों के लिए 30 दिन के एड-हॉक बोनस का ऐलान, जानिए कौन है एलिजिबल और खाते में आएंगे कितने रुपये

केंद्र सरकार ने अपने एलिजिबल एंप्लॉयीज के लिए 30 दिन के एड-हॉक बोनस के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह अकाउंटिंग ईयर 2025-26 के लिए होगा। यह जानकारी 15 अक्टूबर को डिपार्टमेंट ऑफ एक्सपेंडिचर की तरफ से जारी ऑफिस मेमोरंडम पर आधारित है।

इस बोनस के दायरे में ग्रुप सी और नॉन-गजेटेड ग्रुप बी के एंप्लॉयीज आएंगे जो किसी प्रोडक्टिविटी-लिंक्ड बोनस स्कीम के तहत नहीं आते हैं। सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्सेज और आर्म्ड फोर्सेज के एलिजिबिल एंप्लॉयीज भी इस बोनस के हकदार होंगे। इनके अलावा केंद्र शासित प्रदेशों के ऐसे एंप्लॉयीज भी इस बोनस के हकदार होंगे जो केंद्र सरकार के पे स्ट्रक्चर को फॉलो करते हैं।

बोनस के कैलकुलेशन के लिए 7,000 रुपये के मथली एमॉलुमेंट्स की सीमा तय की गई है। अगर किसी एंप्लॉयी का एवरेज मंथली एमॉलुमेंट्स इस सीमा से ज्यादा है तो बोनस के कैलकुलेशन के लिए 7000 रुपये का इस्तेमाल बेस के रूप में होगा। पहले से तय फॉर्मूला के आधार पर 30 दिन का बोनस करीब 6,908 रुपये बनेगा।

अगर किसी एंप्लॉयी का एवरेज मंथली एमॉलुमेंट्स लिमिट से नीचे है या एंप्लॉयी साल के सिर्फ कुछ हिस्से के लिए बोनस का हकदार है तो बोनस का एक्चुअल अमाउंट कम हो सकता है। यह ध्यान में रखना जरूरी है कि बोनस के दायरे में आने के लिए एंप्लॉयी का 31 मार्च, 2026 को नौकरी में होना जरूरी है और 2025-26 में उसकी कंटिन्यूअस सर्विस कम से कम 6 महीने पूरी होनी चाहिए।

ऐसे एंप्लॉयीज जिन्होंने छह महीने और पूरे साल के बीच नौकरी की है, उन्हें प्रो-राटा बेसिस (काम की अवधि के अनुपात में) बोनस मिलेगा। एलिबिजिल सर्विस पीरियड का कैलकुलेशन महीनों में होगा। मेमोरंडम में कैजु्अल लेबरर्स के लिए अलग एलिजिबिलिटी शर्तों के बारे में बताया गया है।

कैजुअल लेबरर्स के मामले में अगर व्यक्ति ऐसे ऑफिस में काम करता है, जिसमें हफ्ते में छह दिन काम का नियम है तो उसे पहले के तीन सालों में से प्रत्येक में काम के कम से कम 240 दिन पूरा होना जरूरी है। जिन ऑफिसेज में हफ्ते में काम के 5 दिन लागू हैं उनमें पहले के तीन सालों में से प्रत्येक में काम के 206 दिन पूरे होने चाहिए।

बोनस के कैलकुलेशन के लिए एक फॉर्मूला का इस्तेमाल होगा। फॉर्मूला के तहत एवरेज मंथली एमॉलुमेंट्स में 30 से गुणा करने के बाद उसमें 30.4 से भाग दिया जाएगा। इसे एक उदाहरण की मदद से समझ सकते हैं। अगर किसी एंप्लॉयी का एवरेज मंथली एमॉलुमेंट्स 7000 रुपये है तो इसमें 30 से गुना करना होगा। फिर जो नंबर आएगा, उसे 30.4 से डिवाइड करना होगा।

₹7,000 × 30 ÷ 30.4 = ₹6,907.89, राउंड फीगर में ₹6,908.

ऐसे एंप्लॉयीज जिन्होंने एलिजिबिल सर्विस से 12 महीने से कम पूरी की है, उन्हें उसी अनुपात में बोनस मिलेगा। बोनस का पैसा संबंधित मंत्रालयों के सैंक्शंड बजट प्रोविजन से खर्च होगा।

भारत के सबसे बड़े IPO पर बोले उदय कोटक, कहा- जियो ने बदल दी देश की डिजिटल तस्वीर

भारत के सबसे बड़े IPO पर बोले उदय कोटक, कहा- जियो ने बदल दी देश की डिजिटल तस्वीर

Uday Kotak in JIO IPO launch

JIO IPO : कोटक इनवेस्टमेंट बैंकिंग के चेयरमैन उदय कोटक ने रिलायंस जियो (Jio) के ऐतिहासिक आईपीओ लॉन्च के अवसर पर धीरूभाई अंबानी के दिनों से लेकर आज तक के सफर को याद किया। उन्होंने कहा कि लगभग दो दशकों के बाद आरआईएल समूह की ओर से आया 30,188 करोड़ रुपये का यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ है। उदय कोटक ने जियो की सफलता, 53 करोड़ ग्राहकों के विशाल आधार और भारत में डिजिटल क्रांति लाने में इसकी ऐतिहासिक भूमिका की खुलकर सराहना की। ALSO READ: जियो IPO से पहले ईशा अंबानी ने बताया- कैसे आया JIo का आइडिया, कैसे खड़ा हुआ विशाल साम्राज्य?

 

 

धीरूभाई अंबानी को इस तरह किया याद

उन्होंने कहा कि 1977 में एक शाम, मैंने देखा कि पूरी चौपाटी और मरीन ड्राइव रोशन हो रहे थे। मुझे बताया गया कि यह धीरूभाई अंबानी द्वारा शुरू की गई ‘रिलायंस टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज’ नाम की कंपनी का आईपीओ, मार्केटिंग और पोजीशनिंग है। वह मेरे लिए एक जादुई पल था। इसने वित्तीय सेवाओं में भविष्य के बारे में मेरी सोच को बहुत प्रभावित किया। इसलिए, जनता के पास जाने, निवेशकों के पास जाने और सभी निवेशकों के लिए वैल्यू पैदा करने के महत्व को सिखाने के लिए मैं धीरूभाई का आभारी हूँ।

 

लिस्टेड मार्केट कैप के आधार पर भारत का सबसे बड़ा समूह 

उदय कोटक ने कहा, जियो की लिस्टिंग के बाद, RIL समूह पिछले कुछ दशकों में चेयरमैन मुकेश अंबानी के परिवर्तनकारी नेतृत्व में, लिस्टेड मार्केट कैप के आधार पर भारत का सबसे बड़ा समूह (कोंग्लोमरेट) बन जाएगा। लगभग दो दशकों के बाद आरआईएल समूह की ओर से यह ऐतिहासिक आईपीओ आया है। प्राइस बैंड के ऊपरी छोर पर 30,188 करोड़ रुपये का यह भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा। यह अगली पीढ़ी के नेतृत्व (आकाश अंबानी और ईशा अंबानी) के विकास का भी प्रमाण है, जो डिजिटल सर्विसेज और रिटेल में नए जमाने के बिजनेस बना रहे हैं… और यह सब निश्चित रूप से एक नेता और पिता की पैनी निगरानी में हो रहा है। ALSO READ: जियो IPO से पहले आकाश अंबानी ने खोला ग्रोथ प्लान, मोबिलिटी और होम ब्रॉडबैंड पर बड़ा दांव

 

53 करोड़ ग्राहक और असाधारण एक्जीक्यूशन

उन्होंने कहा कि जियो प्लेटफॉर्म को उसके 53 करोड़ ग्राहक और असाधारण एक्जीक्यूशन अलग बनाती है। 2016 के आसपास कई अन्य खिलाड़ी कह रहे थे, ‘रिलायंस ग्रुप क्या करने जा रहा है?’ लेकिन जब वे आए, तो वे धमाकेदार अंदाज में आए, और उन्होंने इस बात की अवधारणा को बदल दिया कि आने वाले वर्षों में भारत में मोबाइल कनेक्टिविटी और डिजिटल तकनीक कैसी होगी। इसने उस आम व्यक्ति के जीवन को बदल दिया जिसे इस सेवा के लिए बहुत कम कीमत चुकानी पड़ी और हमारे देश में कनेक्टिविटी का लोकतंत्रीकरण हुआ।

 

कोटक के अनुसार, जियो वैश्विक स्तर पर एकमात्र ऐसा खिलाड़ी है जिसके पास अपना खुद का मालिकाना हक वाला एंड-टू-एंड डिजिटल कनेक्टिविटी स्टैक है। डेटा को सुलभ बनाने में ‘डिजिटल इंडिया’ का प्रभाव अद्भुत है। 1 करोड़ से भी कम 4G ग्राहकों वाले डेटा की कमी वाले देश से लेकर, 100 करोड़ 4G और 5G ग्राहकों वाले डेटा से परिपूर्ण राष्ट्र बनने तक… यह सब पिछले 10 वर्षों में हुआ है। इन सभी बातों ने मोबिलिटी और होम ब्रॉडबैंड दोनों ही क्षेत्रों में भारत के बाजार में निर्विवाद नेतृत्व को स्थापित किया है।

 

उन्होंने कहा कि 1,46,885 करोड़ रुपये का रेवेन्यू, 76,000 करोड़ रुपये से अधिक का एबिटा, और पैमाने पर लगभग 18% की वृद्धि अपने आप में काफी प्रभावशाली है। जियो का आईपीओ लॉन्च ऐसा ही एक पल है जो निवेशकों को डिजिटल विकास के अगले चरण में भाग लेने और उससे लाभ उठाने का एक अवसर प्रदान करता है।

ऑपरेशन के बाद महिला के पेट में भूले तौलिया, 4 महीने बाद ऐसे खुला सारा राज

कानपुर में डॉक्टरों की लापरवाही सामने आई है। ऑपरेशन के बाद महिला के पेट में तौलिया भूल गए। 4 महीने बाद सारा राज खुला। महिला का दोबारा ऑपरेशन करके तौलिया निकाला गया। महिला के पति ने मामले में शिकायत दर्ज करवाई है।

24-कोच वंदे भारत स्लीपर का डिजाइन फाइनल होने की डेट आई सामने, जानिए कब पटरी पर दौड़ेगा स्लीपर वर्जन

Vande Bharat Sleeper Train: वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए आने वाले समय में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। अब 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन तैयार करने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है। भारत की वंदे भारत ट्रेन को तैयार करने वाले सुधांशु मणि ने भी इस पहल का स्वागत किया है। चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने चार साल से ज्यादा की देरी के बाद इस ट्रेन का डिजाइन 10 नवंबर तक फाइनल करने का लक्ष्य रखा है।

चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ने चार साल से भी पहले 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन के लिए तकनीकी जानकारी जारी की थी। अब ICF ने बताया है कि ट्रेन का डिजाइन 10 नवंबर तक फाइनल कर लिया जाएगा। इसका पहला प्रोटोटाइप मई या जून 2027 तक तैयार होने की उम्मीद है।

फिलहाल, 16 कोच वाली दो वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें असम के कामाख्या और पश्चिम बंगाल के हावड़ा के बीच चल रही हैं। इन ट्रेनों को यात्रियों से काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में मिलेंगी यात्रियों की सुविधा वाली कई खूबियां

बता दें कि यह एक आधुनिक ट्रेन है, जिसमें यात्रियों की सुविधा के लिए कई खूबियां हैं। इनमें सेमी-हाई स्पीड, बेहतर कुशनिंग वाली आरामदायक बर्थ, आसानी से आने-जाने के लिए ऑटोमैटिक दरवाजे और वेस्टिब्यूल, बेहतरीन सस्पेंशन और कम शोर के साथ आरामदायक सफर, और साफ-सफाई बनाए रखने के लिए डिसइंफेक्टेंट तकनीक शामिल हैं।

मणि ने कहा, “ICF का नवंबर 2026 तक 24-कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का डिजाइन फाइनल करने और 2027 के मध्य तक इसका प्रोटोटाइप तैयार करने का प्लान एक स्वागत योग्य और महत्वपूर्ण कदम है। देर से ही सही, लेकिन यह समय-सीमा बहुत अहम है।”

उन्होंने कहा, “इस समय-सीमा का पालन करने से ICF को अपनी मुख्य डिजाइन और निर्माण क्षमताओं का पूरा उपयोग करने, अधिकतम क्षमता वाली ट्रेनों के जरिए सीमित ट्रैक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करने और लोगों को रात के सफर का वह प्रीमियम अनुभव देने में मदद मिलेगी, जिसकी वे उम्मीद करते हैं।”

2018 में ही महसूस होने लगी थी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की जरूरत: मणि

मणि ने कहा कि 2018 में शुरुआत से ही यह स्पष्ट था कि आगे चलकर वंदे भारत प्लेटफॉर्म के लिए एक स्लीपर वेरिएंट की जरूरत पड़ेगी।

उन्होंने कहा, “दिन के समय चलने वाली चेयर-कार सेवाओं का बाजार एक स्तर पर आकर रुकने ही वाला था, जिससे रात भर चलने वाली ट्रेनें एक जरूरी जरूरत बन गईं। आज की स्थिति से यह बात साबित भी होती है। वंदे भारत की दिन की सेवाओं में से 30 प्रतिशत तक में यात्रियों की संख्या काफी कम रहती है।” उन्होंने कोच बनाने के क्षेत्र में ICF की ऐतिहासिक विरासत की भी तारीफ की।

देरी का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि शुरुआत में ICF ने 2019 के आखिर तक एक स्लीपर प्रोटोटाइप तैयार करने की योजना बनाई थी, लेकिन वंदे भारत प्रोजेक्ट में लगभग चार साल के ठहराव के कारण यह समय-सीमा पटरी से उतर गई।

वंदे भारत ट्रेन के कोच घटाकर 8 करने पड़े, देरी पर मणि ने उठाए सवाल

मणि ने तर्क दिया कि देरी के कारण एक ऐसा समझौता करना पड़ा जो आदर्श नहीं था: कुछ रूटों पर 16 कोच वाली सामान्य चेयर-कार ट्रेनों को घटाकर 8 कोच वाली ट्रेन सेट कर दिए गए। ऐसा शायद इसलिए किया गया ताकि सरकार द्वारा बताए गए उम्मीद भरे आंकड़ों को पूरा किया जा सके।

उन्होंने कहा, “चूंकि भारतीय रेलवे के रूटों पर बहुत अधिक भीड़ रहती है और ये काफी महंगे संसाधन हैं, इसलिए लंबी ट्रेनों के जरिए लाइन की क्षमता का अधिकतम उपयोग करना एक अहम प्राथमिकता होनी चाहिए।”

उन्होंने बताया कि विकास की गति बढ़ाने के लिए, भारतीय रेलवे ने निजी क्षेत्र का रुख किया। इसके तहत ‘किनेट रेलवे सॉल्यूशंस’ (रेल विकास निगम लिमिटेड और रूस की TMH का एक संयुक्त उद्यम) को 120 स्लीपर ट्रेनों का ठेका दिया गया, और ‘टाटागढ़’ तथा ‘भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड’ (BHEL) के एक समूह को 80 और रेक (ट्रेन सेट) बनाने का ठेका मिला। लेकिन, अनुबंध और डिजाइन से जुड़ी मंजूरियों में देरी के कारण इन निजी परियोजनाओं में विलंब हुआ। ऐसे में, काम को जल्द शुरू करने के लिए रेलवे ने 10 स्लीपर ट्रेन सेट का एक शुरुआती ऑर्डर दिया। दिलचस्प बात यह है कि यह ऑर्डर ICF को नहीं, बल्कि ‘भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड’ (BEML) को दिया गया।

मणि ने कहा, “देश अब ‘ओवरनाइट’ (रात भर चलने वाली) वंदे भारत सेवाओं के एक नए युग की शुरुआत देख रहा है। BEML द्वारा बनाई गई एक ट्रेन ने कमर्शियल स्लीपर सेवा की सफल शुरुआत की है, जो हावड़ा और कामाख्या के बीच एक महत्वपूर्ण लंबी दूरी के रूट पर चल रही है।”

उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में, ICF की योजना – जिसके तहत नवंबर 2026 तक डिजाइन को अंतिम रूप दिया जाना है और 2027 के मध्य तक 24 कोच वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का प्रोटोटाइप तैयार किया जाना है – एक स्वागत योग्य और अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

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अगले 5 साल में क्रिटिकल मिनरल्स बिजनेस 5 गुना बढ़ाएगा वर्ल्ड बैंक ग्रुप, जानिए क्या है भारत और दुनिया के लिए प्लान

वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि वह अगले पांच सालों में क्रिटिकल मिनरल्स के कारोबार को पांच गुना बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है। वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा ने शुक्रवार को बताया कि स्थानीय उद्योगों को विकसित करने के लिए संभावित साझेदारियों के वास्ते 20 देशों की पहचान की गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के भीतर ही अधिक नौकरियां और इकोनॉमिक वैल्यू बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।

बैंकॉक में वर्ल्ड बैंक की वार्षिक बैठकों के एक सेशन को संबोधित करते हुए, अजय बंगा ने कहा, “हम अगले पांच सालों में क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में अपने कारोबार को पांच गुना करने की योजना पर काम कर हैं। इस सप्ताह, हमने अन्य MDB (मल्टीलेटरल डेवलपमेंट बैंक) साझेदारों के साथ मिलकर अपने पहले ‘कंट्री कॉम्पैक्ट्स'(देश-स्तरीय समझौते) शुरू किए हैं। इसका मकसद लोकल स्तर पर उद्योगों की स्थापना करना और खनिज कारोबार से मिलने वाले मूल्य और नौकरियों को संबंधित देश के भीतर ही बनाए रखना है।” उन्होंने आगे बताया कि इस काम के लिए उन्होंने 20 देशों की पहचान की है, जिनके साथ वे साझेदारी करेंगे।

आर्थिक गलियारों के विकास पर दिया जा रहा जोर

उन्होंने आगे कहा कि वर्ल्ड बैंक ग्रुप आर्थिक गलियारों (economic corridors)पर अपना फोकस और बढ़ा रहा है, जो बुनियादी ढांचे के विकास को निवेश के अवसरों के साथ जोड़ते हैं। इस संस्था ने पिछले साल 52 नई आर्थिक गलियारा परियोजनाएं शुरू कीं, जबकि इससे एक साल पहले इनकी संख्या सिर्फ 23 थी।

अजय बंगा ने एक ऐसे कॉरिडोर का उदाहरण दिया, जिसे शुरू में मुख्य रूप से खनिजों के परिवहन के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में किसान अपनी फसलों को बाजारों तक पहुंचाने के लिए इसका इस्तेमाल करने लगे, जिससे इस रास्ते के किनारे बसे कस्बों और शहरों के विकास में मदद मिली।

विकास के लिए निजी पूंजी जुटाने पर फोकस बढ़ा

इन प्रयासों के साथ-साथ, वर्ल्ड बैंक ग्रुप विकास कार्यों के लिए निजी पूंजी जुटाने के अपने प्रयासों का विस्तार कर रहा है। बंगा ने बताया कि पिछले साल इस संस्था ने 112 अरब अमेरिकी डॉलर की निजी पूंजी जुटाई, जो वित्त वर्ष 2022 के लगभग 35 अरब अमेरिकी डॉलर के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक है।

उन्होंने कहा,”पिछले साल 112 अरब अमेरिकी डॉलर जुटाए गए,जो कि तीन गुना बढ़त है।” उन्होंने आगे बताया कि संस्था की अपनी फंडिंग को मिलाकर कुल फंडिंग 230 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि निम्न-मध्यम आय वाले देशों में निजी पूंजी जुटाने की मात्रा लगभग तीन गुना हो गई, जबकि उच्च-मध्यम आय वाले देशों में यह चार गुना हो गई। वहीं, पूरे अफ्रीका में इसमें दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई। हालांकि,कम आय वाली,कमजोर और संघर्ष-ग्रस्त अर्थव्यवस्थाओं में निजी पूंजी जुटाने की स्थिति स्थिर रही है,जहां व्यावसायिक निवेश आकर्षित करना अब भी मुश्किल बना हुआ है।

विकास के लिए साझा सिस्टम विकसित करने पर जोर

अजय बंगा ने कहा कि यह संस्था गारंटी, इक्विटी और स्थानीय मुद्रा में फाइनेंसिंग के ज़रिए करेंसी रिस्क और फाइनेंस तक सीमित पहुंच जैसी बाधाओं को दूर कर रही है। यह अन्य बहुपक्षीय विकास बैंकों के साथ मिलकर ऐसे साझा सिस्टम विकसित करने पर भी काम कर रही है, जिससे निवेश को दूसरे निवेशकों तक पहुंचाया जा सके और नई विकास परियोजनाओं के लिए पूंजी जुटाई जा सके। इसका मेन मकसद उन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाना है जो उत्पादकता में सुधार करते हैं और रोजगार पैदा करते हैं। इनमें बुनियादी ढांचा और ऊर्जा, कृषि-व्यवसाय, स्वास्थ्य सेवा, पर्यटन और वैल्यू एडेड मैन्यूफैक्चरिंग (value-added manufacturing) जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

नौकरी कोई आंकड़ा नहीं, नौकरी सम्मान है

अजय बंगा ने ग्लोबल लेवल पर लगभग 80 करोड़ नौकरियों की अनुमानित कमी की ओर भी इशारा किया। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर युवाओं के लिए अवसर पैदा नहीं किए गए,तो पूरी दुनिया में इसके खराब परिणाम देखने को मिल सकते हैं। उन्होंने युवाओं को अपना भविष्य बनाने में सक्षम बनाने के लिए रोज़गार के महत्व पर ज़ोर देते हुए कहा “नौकरी कोई आंकड़ा नहीं है। नौकरी सम्मान है।”

वर्ल्ड बैंक ग्रुप का विकास मॉडल कई चीजों का मेल

उन्होंने आगे कहा कि वर्ल्ड बैंक ग्रुप का विकास मॉडल कई चीजों का मेल है। पब्लिक फाइनेंलिंग (वहां,जहां बाजार नहीं पहुंच पाते), निजी पूंजी (वहां, जहां बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा की जा सकती हैं), शुरुआती जोखिमों में मदद के लिए परोपकारी निवेश और फाइनेंशिग को अधिक प्रभावी बनाने के लिए तकनीक शामिल हैं। अजय बंगा ने कहा,”नौकरियों की कमी केवल एक अनुमान है। जरूरी नहीं कि हमारा भविष्य भी ऐसा ही हो।” उन्होंने विकास से जुड़ी पहलों को और बड़े पैमाने पर तथा तेजी से लागू करने का आह्वान किया।

 

 

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चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

चारधाम यात्रा: अटूट आस्था, VIP संस्कृति और व्यवस्थाओं की अग्निपरीक्षा

char dham yatra sansmaran in hindi

यात्राएँ केवल पर्यटन नहीं, बल्कि स्वयं को जानने, जन-आस्था को अनुभव करने और प्रकृति के निकट पहुँचने का अवसर होती हैं। धार्मिक यात्रा मनुष्य को सांसारिक भागदौड़ से दूर कर आत्मचिंतन और ईश्वर के सान्निध्य में जाने का मार्ग दिखाती है। इसी भावना के साथ 26 सितंबर को मध्य प्रदेश के देवास से उत्तराखंड की चारधाम यात्रा प्रारंभ हुई। 15 दिनों के इस सफर ने मुझे आध्यात्मिक संतोष तो दिया, लेकिन धार्मिक स्थलों की व्यवस्थाओं और श्रद्धालुओं की कठिनाइयों ने कई गंभीर प्रश्न भी खड़े किए।

 

माँ गंगा की आरती से हिमालय की दिव्यता तक

हरिद्वार में माँ गंगा की भव्य आरती, मंत्रोच्चार और दीपों से जगमगाती जलधारा ने मन को भावविभोर कर दिया। ऋषिकेश के आध्यात्मिक वातावरण से होते हुए यात्रा माँ यमुनोत्री पहुँची। लगभग छह से सात किलोमीटर के दुर्गम पहाड़ी मार्ग पर पैदल चढ़ाई, थकान और हल्की बारिश के बीच माँ यमुना के दर्शन हुए। इसके बाद उत्तरकाशी में श्री काशी विश्वनाथ महादेव और गंगोत्री में माँ गंगा के दर्शन किए। हिमालय की विशालता ने अनुभव कराया कि प्रकृति के सामने मनुष्य का अहंकार कितना छोटा है।

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केदारनाथ: आस्था अटूट, लेकिन व्यवस्था पर सवाल

यात्रा का सबसे कठिन पड़ाव बाबा केदारनाथ धाम रहा। लगभग 20 से 22 किलोमीटर के दुर्गम मार्ग पर चढ़ाई, घोड़े-खच्चरों की आवाजाही और यात्रियों की भीड़ के बीच आगे बढ़ना किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं था। लगभग 12 घंटे की मशक्कत के बाद रात करीब दो बजे धाम पहुँचना संभव हुआ, जबकि दर्शन का सौभाग्य अगले दिन शाम लगभग छह बजे मिला। बाबा केदारनाथ के सम्मुख पहुँचते ही मन श्रद्धा से भर गया और सारी थकान मानो क्षणभर में मिट गई।

 

लेकिन घंटों की प्रतीक्षा ने सवाल भी खड़ा किया कि क्या श्रद्धालुओं को सुगम दर्शन उपलब्ध कराना सरकार और प्रशासन की प्राथमिकता नहीं होनी चाहिए?

 

देश के कोने-कोने से लोग धन, समय और शारीरिक सामर्थ्य खर्च करके अपने आराध्य तक पहुँचते हैं। इनमें बुजुर्ग, महिलाएँ और अस्वस्थ लोग भी होते हैं। कठिन यात्रा के बाद घंटों कतार में खड़े रहना और अंततः कुछ सेकंड के दर्शन पाना उनकी पीड़ा को बढ़ाता है। इस समस्या के बीच VIP संस्कृति भी चिंता का विषय है। विशेष व्यक्तियों को प्राथमिकता देने से यदि आम श्रद्धालुओं को अतिरिक्त प्रतीक्षा करनी पड़े, तो यह व्यवस्था उनकी आस्था और सम्मान दोनों को ठेस पहुँचाती है।

 

ईश्वर के दरबार में हर भक्त बराबर है; किसी की विशेष सुविधा आम श्रद्धालु की परेशानी का कारण नहीं बननी चाहिए। हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियाँ सरकार और प्रशासन के सामने चुनौती अवश्य हैं, लेकिन बेहतर योजना और जवाबदेही की आवश्यकता को नकारा नहीं जा सकता। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ना उपलब्धि हो सकती है, पर उनकी परेशानियाँ बढ़ना व्यवस्था की सफलता नहीं है।

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त्रियुगीनारायण से बद्रीनाथ तक

केदारनाथ के बाद त्रियुगीनारायण मंदिर में दर्शन का अवसर मिला। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी स्थल पर भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर की अखंड धूनी तथा भगवान विष्णु की उपस्थिति इस स्थान की आध्यात्मिक महत्ता बढ़ाती है। इसके बाद बद्रीनाथ धाम में भगवान बद्रीविशाल के दर्शन के साथ यात्रा पूर्ण हुई। इन पवित्र स्थलों ने श्रद्धा, समर्पण और भारतीय संस्कृति की गहराई का अनुभव कराया।

 

आस्था या सोशल मीडिया का प्रदर्शन?

यात्रा के दौरान धार्मिक स्थलों पर तस्वीरें लेने और रील बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति भी दिखाई दी। अनुभव साझा करना गलत नहीं है, लेकिन जब कैमरा श्रद्धा पर हावी हो जाए, तो तीर्थयात्रा का वास्तविक उद्देश्य पीछे छूटने लगता है। प्रश्न यह है कि हम ईश्वर के दर्शन करने जाते हैं या दुनिया को यह दिखाने कि हम दर्शन करने गए थे? भक्ति का वास्तविक आनंद लाइक और कमेंट में नहीं, बल्कि उस क्षण में है जब मन बिना किसी दिखावे के अपने आराध्य के सामने झुकता है।

 

सरकार और प्रशासन के लिए स्पष्ट संदेश

चारधाम यात्रा में उमड़ती भीड़ सरकार और प्रशासन के लिए अवसर से अधिक जिम्मेदारी है। दर्शन व्यवस्था, यातायात, पार्किंग, पेयजल, स्वच्छता, चिकित्सा और आपातकालीन सहायता को मजबूत करना अनिवार्य है। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधाएँ सुनिश्चित की जानी चाहिए तथा VIP व्यवस्था के कारण आम श्रद्धालुओं का आवागमन और दर्शन बाधित नहीं होने चाहिए।

 

श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सम्मान कोई सरकारी एहसान नहीं, बल्कि प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है। सरकार को घोषणाओं से आगे बढ़कर धरातल पर सुधार दिखाना होगा। समय रहते व्यवस्थाएँ नहीं सुधारी गईं, तो बढ़ती भीड़ भविष्य में गंभीर कठिनाइयाँ पैदा कर सकती है। विकास के साथ हिमालय के नाजुक पर्यावरण की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है।

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आस्था का सम्मान, व्यवस्था की जवाबदेही

10 अक्टूबर को लौटते समय मन में चारधाम के दर्शन का संतोष था, लेकिन व्यवस्थाओं में सुधार की आवश्यकता भी स्पष्ट थी। सरकार को जवाबदेही निभानी होगी, प्रशासन को संवेदनशील बनना होगा और यात्रियों को अनुशासन तथा पर्यावरण संरक्षण का पालन करना होगा।

 

आस्था अटूट है, लेकिन श्रद्धालुओं की सहनशीलता को व्यवस्था की कमजोरियों का विकल्प नहीं बनाया जा सकता। ईश्वर के दरबार में समानता तभी सार्थक होगी, जब प्रत्येक भक्त को समान सम्मान और यथासंभव सुविधाजनक दर्शन मिलें। क्योंकि चारधाम की यात्रा पैरों से जितनी पूरी होती है, उससे कहीं अधिक हृदय और आत्मा से पूरी होती है।

 

हर हर महादेव! जय बद्रीविशाल! जय माँ गंगे! जय माँ यमुना!

… तो हम पाकिस्तान का साथ देंगे, राजस्थान भाजपा अध्यक्ष राठौड़ के बयान से बवाल

... तो हम पाकिस्तान का साथ देंगे, राजस्थान भाजपा अध्यक्ष राठौड़ के बयान से बवाल

Rajasthan BJP Madan Rathore: राजस्थान भाजपा (BJP) के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के एक विवादास्पद बयान को लेकर सियासत गरमा गई है। अमेरिका और पाकिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति में पाकिस्तान का समर्थन करने से जुड़े कथित बयान पर कांग्रेस ने भाजपा को घेरते हुए ‘देशद्रोह’ का आरोप लगाया है। वहीं, विवाद बढ़ने के बाद मदन राठौड़ ने सफाई जारी करते हुए कहा है कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर और गलत संदर्भ में पेश किया गया है।

कांग्रेस का भाजपा पर बड़ा हमला

दरअसल, सोशल मीडिया पर वायरल हुई वीडियो क्लिप के आधार पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस ने मदन राठौड़ के कथित बयान को मुद्दा बनाते हुए भाजपा के राष्ट्रवाद पर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस की ओर से निशाना साधते हुए कहा गया कि भाजपा का ‘पाकिस्तान प्रेम’ एक बार फिर सबके सामने आ गया है।

कांग्रेस ने कहा कि राजस्थान BJP के अध्यक्ष मदन राठौड़ का कहना है कि अगर अमेरिका और पाकिस्तान में युद्ध होता है, तो हम पाकिस्तान के साथ हैं। भाजपा उसी पाकिस्तान का साथ देने की बात कर रही है, जिसने भारत के निर्दोष नागरिकों और सैनिकों की हत्या करवाई है। भाजपा वालों की रग-रग में देशद्रोह भरा है।

मदन राठौड़ की सफाई

विवाद बढ़ने और विपक्षी दलों के हमलावर होने के बाद राजस्थान भाजपा अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि उनके भाषण के एक छोटे से अंश को संदर्भ से काटकर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि मैंने जो भी बात कही थी, वह क्रिकेट मैच के संदर्भ में कही थी। मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है, जो बिल्कुल भी उचित नहीं है। यह मुझे बदनाम करने की राजनीतिक साजिश है।

उन्होंने आगे कहा कि पाकिस्तान के साथ भारत के रिश्ते कभी सामान्य नहीं हो सकते क्योंकि वह आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश है। उन्होंने अपील की कि उनके पूरे भाषण को देखा जाए, जिसे गलत तरीके से काटकर विवाद खड़ा करने की कोशिश की गई है।

क्या कहते हैं एक्स यूजर्स?

राठौड़ के इस बयान पर एक्स यूजर्स ने भी ‍तीखी टिप्पणियां की हैं। कड़वा सच नामक हैंडल से लिखा- क्रिकेट मैच के बाद हाथ नहीं मिलाएंगे पर पाकिस्तान के साथ हैं। संदीप नामक एक यूजर ने लिखा- तभी तो जब चाहें पुलवामा और पहलगाम करवा देते हैं। एक अन्य यूजर हिरोशिमा ने लिखा- दूसरों को देशभक्ति का सर्टिफिकेट बांटने वाली मशीन आज खुद शॉर्ट-सर्किट हो गई है। कल तक जो देश का सबसे बड़ा दुश्मन था, आज वो ‘प्यारा पड़ोसी’ बन गया। मदन जी का यह ‘पड़ोसी धर्म’ देखकर तो सीमा पार बैठे लोग भी सोच रहे होंगे कि हमारा सबसे बड़ा शुभचिंतक तो राजस्थान में बैठा है!